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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को बस्तर दशहरा पर्व में शामिल होने का मिला आमंत्रण

बस्तर सांसद श्री महेश कश्यप के नेतृत्व में बस्तर दशहरा समिति के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से की सौजन्य मुलाकात

पारंपरिक पागा पहनाकर मुख्यमंत्री का किया सम्मान, मुख्यमंत्री ने आयोजन की सफलता के लिए दी शुभकामनाएं

75 दिनों तक चलने वाला बस्तर दशहरा आस्था, परंपरा और जनजातीय संस्कृति का अनूठा संगम

रायपुर  अक्टूबर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज शाम राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में बस्तर सांसद श्री महेश कश्यप के नेतृत्व में बस्तर दशहरा समिति, जगदलपुर के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री श्री साय को विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व 2026 में शामिल होने के लिए सादर आमंत्रित किया। इस अवसर पर बस्तर की समृद्ध जनजातीय परंपरा के अनुरूप प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को पारंपरिक पागा पहनाकर उनका सम्मान किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने आत्मीय आमंत्रण के लिए प्रतिनिधिमंडल का आभार व्यक्त करते हुए बस्तर दशहरा के सफल आयोजन के लिए अपनी शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि बस्तर की सदियों पुरानी आस्था, समृद्ध जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और सामूहिक सहभागिता की अनुपम विरासत है। इस पर्व में बस्तर की सांस्कृतिक आत्मा और सामाजिक समरसता की सुंदर अभिव्यक्ति दिखाई देती है। हमारी सरकार बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और जनजातीय परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है।

प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बस्तर दशहरा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, इससे जुड़े धार्मिक अनुष्ठानों, परंपराओं तथा इस वर्ष के आयोजन की तैयारियों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी।

75 दिनों तक चलती है आस्था और परंपरा की अनूठी यात्रा

प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बताया कि विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा लगभग 75 दिनों तक चलने वाला विशिष्ट सांस्कृतिक और धार्मिक पर्व है। हरेली अमावस्या से इसकी पारंपरिक शुरुआत होती है और विभिन्न पूजा-विधानों एवं अनुष्ठानों के साथ यह पर्व आश्विन शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तक चलता है।

इस वर्ष 12 अगस्त को पाटजात्रा पूजा विधान के साथ बस्तर दशहरा पर्व का शुभारंभ हुआ। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 10 अक्टूबर को काछनगादी पूजा, 18 अक्टूबर को बेल पूजा तथा 23 अक्टूबर को मुरिया दरबार का आयोजन किया जाएगा। बस्तर दशहरा के विभिन्न अनुष्ठानों में अंचल के अलग-अलग समुदायों की परंपरागत और महत्वपूर्ण भागीदारी रहती है।

मां दंतेश्वरी की आराधना से जुड़ा है बस्तर दशहरा

बस्तर दशहरा अपनी विशिष्ट परंपराओं के कारण देश-दुनिया में अलग पहचान रखता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि बस्तर में दशहरा भगवान श्रीराम की रावण पर विजय के उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि बस्तर अंचल की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के प्रति आस्था और आराधना के महापर्व के रूप में मनाया जाता है।

बस्तर दशहरा की परंपरा को ऐतिहासिक मान्यताओं में चालुक्य नरेश पुरुषोत्तम देव से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि पुरुषोत्तम देव ने पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर की यात्रा की थी, जहां उन्हें ‘रथपति’ की उपाधि प्राप्त हुई। इसी ऐतिहासिक परंपरा के साथ बस्तर दशहरा में रथ का विशेष महत्व जुड़ा हुआ है।

बस्तर दशहरा में मांझी, चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन सहित विभिन्न समुदायों और समाज के अलग-अलग वर्गों की जिम्मेदारियां परंपरागत रूप से निर्धारित हैं। धार्मिक अनुष्ठानों से लेकर रथ निर्माण और आयोजन की विभिन्न व्यवस्थाओं तक स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी इसकी विशेषता है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही सामूहिक सहभागिता की यह परंपरा बस्तर दशहरा को सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समन्वय का अनूठा उदाहरण बनाती है।

देश-दुनिया को आकर्षित करती है बस्तर की जीवंत संस्कृति

विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा अपनी भव्य रथयात्रा, विशिष्ट पूजा-अनुष्ठानों, जनजातीय परंपराओं और लोक संस्कृति के कारण देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग इस ऐतिहासिक आयोजन और बस्तर की जीवंत संस्कृति को करीब से देखने के लिए पहुंचते हैं।

 

जेन नेक्स्ट संवाद में जेन-जी और जेन-अल्फा से रूबरू हुए मुख्यमंत्री

युवाओं से कहा - बड़े सपने देखें, लक्ष्य तय करें और मेहनत से उन्हें साकार करें

मुख्यमंत्री ने युवाओं से साझा किए अपने जीवन के संघर्ष और सफलता के अनुभव

विद्यार्थियों के सवालों के दिए सहज और रोचक जवाब, शिक्षा, रोजगार, जल संरक्षण और छत्तीसगढ़ के भविष्य पर खुलकर की चर्चा

रायपुर  अक्टूबर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे युवा देश है और यही युवा शक्ति विकसित एवं सशक्त भारत के निर्माण की सबसे बड़ी ताकत बनेगी। उन्होंने युवाओं से बड़े सपने देखने, अपनी रुचि के अनुरूप लक्ष्य तय करने और पूरी मेहनत एवं समर्पण के साथ उन्हें हासिल करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में सफलता के लिए समय का सदुपयोग, निरंतर परिश्रम और अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्प सबसे महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री श्री साय आज शाम राजधानी रायपुर के सड्डू में न्यूज 24 और लल्लूराम डॉट कॉम द्वारा आयोजित ‘जेन नेक्स्ट संवाद 'यंग माइंड्स, मीनिंगफुल कन्वर्सेशंस’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान मुख्यमंत्री जेन-जी और जेन-अल्फा के विद्यार्थियों से रूबरू हुए। विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री से उनके जीवन के संघर्ष, राजनीति, शिक्षा, राज्य के आर्थिक विकास, प्रतियोगी परीक्षाओं और जल संरक्षण सहित विभिन्न विषयों पर सवाल किए। मुख्यमंत्री श्री साय ने सहज और आत्मीय अंदाज में युवाओं के सवालों के जवाब दिए और अपने जीवन के अनुभव भी साझा किए।

प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में दुनिया में बढ़ा भारत का मान-सम्मान

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री के रूप में जनता की सेवा करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 25 वर्ष पूरे किए हैं। इस अवसर पर पूरे देश में सेवा संकल्प अभियान मनाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने स्वच्छ भारत मिशन का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने जब लाल किले की प्राचीर से स्वच्छता का आह्वान किया था, तब इसे लेकर सवाल भी उठाए गए थे। आज स्वच्छता जन-जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। घर-घर शौचालय के निर्माण से माताओं-बहनों के सम्मान और स्वास्थ्य की रक्षा हुई तथा गांवों को खुले में शौच से मुक्ति मिली। स्वच्छ भारत मिशन ने स्वच्छता के प्रति सोच और व्यवहार दोनों में बड़ा बदलाव लाया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में भारत निरंतर सशक्त और समृद्ध राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ रहा है। सर्जिकल स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को भारत के सामर्थ्य और दृढ़ इच्छाशक्ति से परिचित कराया है। उन्होंने कहा कि आर्थिक दृष्टि से भी भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का संकल्प लिया है और आज पूरी दुनिया में भारत का मान-सम्मान बढ़ा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने हालिया सिंगापुर प्रवास का उल्लेख करते हुए कहा कि चार दिनों के प्रवास के दौरान उनकी अनेक प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों से चर्चा हुई। वहां उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भी प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा का उल्लेख किया।

अपना बचपन याद कर मुख्यमंत्री ने बताया - कितना बदल गया है शिक्षा का परिदृश्य

युवाओं से संवाद के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने विद्यार्थी जीवन की स्मृतियां भी साझा कीं। उन्होंने कहा कि आप सभी से चर्चा करते हुए मुझे अपना बचपन याद आ रहा है। जब मैं बगिया गांव के प्राथमिक विद्यालय में पढ़ता था, तब हमारे स्कूल में पांचवीं बोर्ड की परीक्षा देने की व्यवस्था तक नहीं थी। परीक्षा देने के लिए कई किलोमीटर दूर दूसरे गांव जाना पड़ा और वहां पांच दिनों तक रुककर परीक्षा दी। उस समय स्कूल भवन भी कच्चे होते थे और बारिश के दिनों में छत से पानी टपकता था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। छत्तीसगढ़ में शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से विस्तार हुआ है और उच्च शिक्षा की विभिन्न संस्थाएं प्रदेश में उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि पहले राज्य में केवल एक मेडिकल कॉलेज था, जबकि आज 15 मेडिकल कॉलेज हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आज उन्हें शिक्षा के जो अवसर और सुविधाएं मिल रही हैं, उनका भरपूर सदुपयोग करें और अपने उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करें।

रायपुर अक्टूबर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सुकमा जिले के कोंटा क्षेत्र स्थित एलाड़मडगु कैंप के समीप आईईडी को निष्क्रिय करने के दौरान सीआरपीएफ के चार जवानों के घायल होने की घटना पर गहरा दुःख व्यक्त किया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि घायल जवानों का समुचित उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने ईश्वर से सभी घायल जवानों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की है।

राज्य स्तरीय रोजगार मेले का उत्साहपूर्ण समापन, दो दिनों में 13 हजार से अधिक युवाओं की सहभागिता

5 हजार से अधिक युवाओं का अंतिम चयन, मुख्यमंत्री ने लगभग 1,100 चयनित युवाओं को सौंपे ऑफर लेटर

95 से अधिक पंजीकृत नियोक्ता संस्थानों सहित विभिन्न कंपनियों ने की सहभागिता

पिछले ढाई वर्षों में 925 रोजगार मेलों के माध्यम से 25 हजार 845 से अधिक युवाओं को मिला रोजगार

ई-रोजगार पोर्टल को ‘स्किल मार्केट’ के रूप में किया जाएगा विकसित, युवाओं और उद्योगों को मिलेगा एकीकृत डिजिटल मंच

रायपुर  अक्टूबर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर कौशल प्रशिक्षण और उनकी योग्यता के अनुरूप रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। हमारा प्रयास है कि छत्तीसगढ़ के बेटे-बेटियों को शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर अपने ही प्रदेश में मिलें, वे अपने कौशल और प्रतिभा के बल पर आत्मनिर्भर बनें तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सक्रिय भागीदार बनें। मुख्यमंत्री श्री साय आज राजधानी रायपुर के सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय रोजगार मेला–2026 के समापन अवसर पर युवाओं को संबोधित कर रहे थे।

इस अवसर पर उन्होंने चयनित युवाओं को ऑफर लेटर प्रदान किए और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। मुख्यमंत्री के करकमलों से लगभग 1,100 चयनित युवाओं को ऑफर लेटर प्रदान किए गए।
7 एवं 8 अक्टूबर को आयोजित दो दिवसीय रोजगार मेले में प्रदेशभर से 13 हजार से अधिक युवाओं ने सहभागिता की। विभिन्न कंपनियों द्वारा आयोजित चयन प्रक्रियाओं के बाद 5 हजार से अधिक अभ्यर्थियों का अंतिम चयन हुआ। प्रदेश के सभी जिलों के साथ दूरस्थ एवं जनजातीय अंचलों से भी बड़ी संख्या में युवा मेले में पहुंचे और अपनी शैक्षणिक योग्यता एवं कौशल के अनुरूप रोजगार के लिए चयन प्रक्रिया में शामिल हुए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने चयनित युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि रोजगार का यह अवसर उनके जीवन में नई शुरुआत है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि युवा अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा के बल पर अपने परिवार के साथ प्रदेश और देश का नाम रोशन करेंगे।

युवाओं के सपनों को अवसरों से जोड़ रही सरकार

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। पिछले ढाई वर्षों में प्रदेशभर में 925 रोजगार मेलों का आयोजन किया गया है, जिनके माध्यम से 25 हजार 845 से अधिक युवाओं को रोजगार मिला है। राज्य स्तरीय रोजगार मेले की सफलता इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों को और गति देने वाली है।

उन्होंने कहा कि आज के समय में शिक्षा के साथ व्यावहारिक कौशल और उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण भी आवश्यक है। इसी सोच के साथ राज्य सरकार युवाओं को शिक्षा से कौशल और कौशल से रोजगार तक जोड़ने की दिशा में निरंतर काम कर रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा की सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। प्रदेश में आईआईटी, आईआईएम, ट्रिपल आईटी, एम्स और विधि विश्वविद्यालय जैसे राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थान संचालित हैं। प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए ‘प्रयास’ जैसी संस्थाओं के माध्यम से भी अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक कौशल और बेहतर भविष्य के लिए अधिक से अधिक अवसर छत्तीसगढ़ में ही उपलब्ध हों। इसके लिए शैक्षणिक और तकनीकी संस्थानों को उद्योगों की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।

95 से अधिक नियोक्ता संस्थानों ने युवाओं को दिए रोजगार के अवसर

राज्य स्तरीय रोजगार मेले में 95 से अधिक पंजीकृत नियोक्ता संस्थानों के साथ अन्य कंपनियों ने भी सहभागिता की। आयोजन स्थल पर लगभग 50 स्टॉल स्थापित किए गए, जहां विभिन्न औद्योगिक एवं सेवा क्षेत्रों की कंपनियों द्वारा अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन, साक्षात्कार और चयन किया गया।

 

छत्तीसगढ़ की बेटी किरण पिस्दा का भारतीय महिला फुटबॉल टीम में चयन

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने वीडियो कॉल कर दी बधाई, बोले– पूरे प्रदेश को आप पर गर्व

सरकारी अकादमी में तराशी प्रतिभा, अब अंतरराष्ट्रीय मैदान पर चमकेंगी

रायपुर.  अक्टूबर 2026. छत्तीसगढ़ की बेटी किरण पिस्दा अब भारतीय महिला फुटबॉल टीम की जर्सी में अंतरराष्ट्रीय मैदान पर अपना दमखम दिखाएंगी। खेल एवं युवा कल्याण विभाग की रायपुर आवासीय बालिका फुटबॉल अकादमी की इस प्रतिभावान खिलाड़ी का भारतीय सीनियर महिला फुटबॉल टीम में चयन हुआ है। किरण की इस कामयाबी ने एक बार फिर साबित किया है कि राज्य सरकार का प्रोत्साहन, बेहतर खेल सुविधाएं और व्यवस्थित प्रशिक्षण मिलने पर प्रदेश की बेटियां अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बना सकती हैं। किरण की उपलब्धि से उत्साहित उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव ने उनसे वीडियो कॉल पर बातचीत कर बधाई दी। उन्होंने कहा कि किरण ने अपनी मेहनत और प्रतिभा से पूरे छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित किया है।

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने किरण पिस्दा को बधाई देते हुए कहा कि भारतीय महिला फुटबॉल टीम में उनका चयन पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। यह उनकी प्रतिभा, कठिन परिश्रम और निरंतर प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने किरण के माता-पिता, प्रशिक्षकों और रायपुर आवासीय बालिका फुटबॉल अकादमी को भी इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। श्री साव ने विश्वास जताया कि किरण भारतीय टीम के लिए शानदार प्रदर्शन कर छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करेंगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश की प्रतिभाशाली बेटियों को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक खेल सुविधाएं और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

किरण की इस सफलता में खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा संचालित बालिका फुटबॉल अकादमी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। अकादमी में मिले नियमित प्रशिक्षण, अनुशासित वातावरण, तकनीकी मार्गदर्शन और प्रतिस्पर्धात्मक अवसरों ने किरण की प्रतिभा को निखारने में अहम योगदान दिया है। राज्य सरकार द्वारा खिलाड़ियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं और प्रोत्साहन का ही परिणाम है कि अकादमी की खिलाड़ी अब भारतीय सीनियर महिला फुटबॉल टीम तक पहुंच रही हैं। विभाग का उद्देश्य प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को व्यवस्थित प्रशिक्षण देकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धाओं के लिए तैयार करना है। किरण की सफलता इस दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

भारतीय सीनियर महिला टीम में किरण पिस्दा की यह शानदार वापसी भी है। इससे पहले वे वर्ष 2022 में नेपाल में आयोजित एसएएफएफ वीमेन्स चैंपियनशिप (SAFF Women's Championship) में भारतीय सीनियर महिला टीम का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। अब इस महीने होने वाले फीफा (FIFA) इंटरनेशनल मैच विंडो में उन्हें रूस के खिलाफ दो अंतरराष्ट्रीय मैत्री मुकाबलों के लिए भारतीय टीम में चुना गया है। पहला मुकाबला 8 अक्टूबर को शाम छह बजे कोलकाता के किशोर भारती क्रीड़ांगन में निर्धारित है। दूसरा मुकाबला 11 अक्टूबर को इसी मैदान पर खेला जाएगा। इन मुकाबलों में किरण को एक बार फिर सीनियर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा।

किरण को राष्ट्रीय टीम तक पहुंचाने में रायपुर आवासीय बालिका फुटबॉल अकादमी की कोच सरिता कुजूर के प्रशिक्षण और मार्गदर्शन की भी अहम भूमिका है। सरिता कुजूर खिलाड़ियों के तकनीकी कौशल के साथ उनकी मानसिक मजबूती, आत्मविश्वास, निर्णय लेने की क्षमता और मैच के दबाव में बेहतर प्रदर्शन करने पर विशेष ध्यान देती हैं। खिलाड़ियों के खेल का नियमित आकलन कर उनकी तकनीकी एवं मानसिक कमियों को दूर करना उनकी प्रशिक्षण पद्धति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। किरण की सफलता में इस निरंतर प्रशिक्षण और व्यक्तिगत मार्गदर्शन का बड़ा योगदान रहा है।

खेल एवं युवा कल्याण विभाग की संचालक श्रीमती आकांक्षा शिक्षा खलखो ने भी किरण पिस्दा के भारतीय महिला फुटबॉल टीम में चयन पर बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि किरण की उपलब्धि प्रदेश की खेल प्रतिभाओं के लिए गौरव का विषय है। यह उनकी कड़ी मेहनत, प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन और परिवार के सहयोग का परिणाम है। उन्होंने विश्वास जताया कि किरण की सफलता छत्तीसगढ़ की अन्य बालिका खिलाड़ियों को भी बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें हासिल करने के लिए प्रेरित करेगी।

50 सीटों के साथ इसी शैक्षणिक सत्र से प्रवेश शुरू करने की तैयारी, जिले के विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर मिलेगी व्यावसायिक शिक्षा

1.10 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित भवन में होगा प्रारंभिक संचालन, चराईडांड में 13.93 करोड़ रुपये से बनेगा स्थायी हाईटेक कैंपस

फिजियोथेरेपी शिक्षा के साथ उपचार सुविधाओं के विस्तार का भी खुलेगा रास्ता

रायपुर,  अक्टूबर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर जिला स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में नई उपलब्धियों की ओर अग्रसर है। जिले के कुनकुरी विकासखंड अंतर्गत ग्राम कंडोरा में फिजियोथेरेपी कॉलेज शुरू करने की तैयारी की जा रही है। करीब 1 करोड़ 10 लाख रुपये की लागत से निर्मित हाईस्कूल भवन में प्रारंभिक रूप से कॉलेज का संचालन किया जाएगा। कॉलेज में 50 सीटों पर इसी शैक्षणिक सत्र से प्रवेश प्रारंभ करने की तैयारी है। इस पहल से जिले के विद्यार्थियों को फिजियोथेरेपी जैसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त करने का अवसर स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होगा।

कंडोरा में निर्मित हाईस्कूल भवन में हाईस्कूल संचालन की अनुमति नहीं मिलने के बाद शासन द्वारा उपलब्ध अधोसंरचना का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करते हुए यहां फिजियोथेरेपी कॉलेज संचालित करने का निर्णय लिया गया है। इससे एक ओर पहले से निर्मित भवन का उपयोग सुनिश्चित होगा, वहीं दूसरी ओर जिले में स्वास्थ्य शिक्षा के नए अवसर विकसित होंगे। मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में यह पहल जशपुर को स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

50 सीटों पर प्रवेश की तैयारी, विद्यार्थियों को जिले में ही मिलेगा उच्च शिक्षा का अवसर

फिजियोथेरेपी कॉलेज की शुरुआत से जशपुर सहित आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को स्वास्थ्य क्षेत्र में करियर बनाने के नए अवसर मिलेंगे। प्रारंभिक रूप से 50 सीटों के साथ कॉलेज संचालन की तैयारी की जा रही है। इससे विद्यार्थियों को फिजियोथेरेपी की व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए अन्य शहरों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।

कॉलेज के संचालन से स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए आवश्यक प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने में भी सहायता मिलेगी। विद्यार्थियों को फिजियोथेरेपी से संबंधित सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा, जिससे भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

फिजियोथेरेपी उपचार सुविधाओं के विस्तार से मरीजों को भी मिलेगा लाभ

जिले में फिजियोथेरेपी कॉलेज की स्थापना का लाभ केवल विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का मार्ग भी प्रशस्त होगा। वर्तमान में जिले के अनेक मरीजों को फिजियोथेरेपी उपचार के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है। स्थानीय स्तर पर फिजियोथेरेपी शिक्षा और विशेषज्ञ सेवाओं का विस्तार होने से ऐसे मरीजों को बेहतर उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराने की संभावनाएं बढ़ेंगी।

कॉलेज के माध्यम से प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार होने के साथ फिजियोथेरेपी सेवाओं के विकास को भी प्रोत्साहन मिलेगा। इससे जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

चराईडांड में 13.93 करोड़ रुपये से बनेगा स्थायी हाईटेक कैंपस

फिजियोथेरेपी कॉलेज के लिए चराईडांड के पास करीब 13 करोड़ 93 लाख रुपये की लागत से स्थायी हाईटेक कैंपस विकसित करने की योजना है। स्थायी परिसर के निर्माण तक कंडोरा में पहले से तैयार भवन का उपयोग कॉलेज संचालन के लिए किया जाएगा।

स्थायी कैंपस विकसित होने से भविष्य में विद्यार्थियों को आधुनिक शैक्षणिक अधोसंरचना और बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने का मार्ग प्रशस्त होगा। इससे स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में जिले की क्षमता का विस्तार होगा।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कंडोरा में फिजियोथेरेपी कॉलेज की प्रस्तावित शुरुआत इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इससे जिले के युवाओं को उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा के नए अवसर मिलने के साथ भविष्य में स्थानीय स्तर पर फिजियोथेरेपी उपचार सुविधाओं के विस्तार को भी गति मिलेगी।

 

राजनांदगांव क्षेत्र में 65 हजार से अधिक उपभोक्ताओं को 19.46 करोड़ की राहत

रायपुर,  अक्टूबर 2026/ छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कम्पनी लिमिटेड के राजनांदगांव क्षेत्र के अंतर्गत चार जिलों में मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना-2026 उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। इस योजना के तहत पुराने बिजली बिलों के बकाये से जूझ रहे 65 हजार से अधिक उपभोक्ताओं को लाभ मिला है। योजना के अंतर्गत अब तक मूल बकाया राशि एवं अधिभार (सरचार्ज) में कुल 19 करोड़ 46 लाख रुपये की छूट प्रदान की जा चुकी है। उपभोक्ताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अब इस योजना की अवधि बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 कर दी गई है।

चार जिलों में व्यापक क्रियान्वयन

राजनांदगांव क्षेत्र के अंतर्गत राजनांदगांव, कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई तथा मोहला- मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिलों में इस योजना का बड़े पैमाने पर क्रियान्वयन किया जा रहा है। इसके माध्यम से बीपीएल, घरेलू एवं कृषि श्रेणी के पात्र उपभोक्ताओं को पुराने बकाये के निपटारे पर निर्धारित प्रावधानों के अनुसार छूट दी जा रही है। अब तक योजना के तहत 65,062 उपभोक्ता लाभान्वित हो चुके हैं।

लाभान्वित उपभोक्ताओं की कुल संख्या

उपभोक्ता अपने नजदीकी वितरण केंद्र या जोन कार्यालय में पहुंचकर बकाया राशि का निपटारा कर सकते हैं। बकाया बिजली बिलों का निपटारा कर उपभोक्ता न केवल स्वयं को आर्थिक बोझ से मुक्त कर सकते हैं, बल्कि भविष्य में निर्बाध बिजली सेवा भी सुनिश्चित कर सकते हैं। समय पर बिल का भुगतान और बकाया का निपटारा कर उपभोक्ता बिजली कंपनी के सुदृढ़ीकरण में अपना बहुमूल्य सहयोग प्रदान कर एक जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभा सकते हैं। योजना का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और अन्नदाताओं को संबल प्रदान करना है, ताकि वे बिना किसी पुराने बोझ के बिजली सेवाओं का लाभ उठा सकें। प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना से 31,392 निष्क्रिय उपभोक्ता तथा 33,669 पात्र सक्रिय उपभोक्ता शामिल हैं। लाभान्वित उपभोक्ताओं द्वारा अब तक लगभग 5 करोड़ 89 लाख रुपये की बकाया राशि बिजली कंपनी में जमा कराई जा चुकी है, जिससे कंपनी के राजस्व संग्रहण को भी गति मिली है।

विभिन्न संभागों में सक्रिय भागीदारी

राजनांदगांव क्षेत्र के सात विद्युत संभागों में उपभोक्ताओं ने इस योजना में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। कवर्धा संभाग के 24,415 उपभोक्ता, पंडरिया संभाग के 21,234 उपभोक्ता, राजनांदगांव संभाग के 6,023 उपभोक्ता, डोंगरगढ़ संभाग के 5,351 उपभोक्ता, खैरागढ़ संभाग के 3,670 उपभोक्ता, मोहला संभाग के 3,076 उपभोक्ता और डोंगरगांव संभाग के 1,293 उपभोक्ताआंे को लाभान्वित किया गया है।

66 वितरण केंद्रों और 3 जोनों में विशेष अभियान

राजनांदगांव क्षेत्र के मुख्य अभियंता श्री हर्ष कुमार मेश्राम ने बताया कि योजना का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए क्षेत्र के 66 वितरण केंद्रों और 03 जोनों में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। विभागीय अधिकारी व कर्मचारी ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में जाकर उपभोक्ताओं को पात्रता, छूट और बकाया निपटारे की प्रक्रिया के प्रति जागरूक कर रहे हैं।

31 दिसंबर 2026 तक उठाएं लाभ

मुख्य अभियंता श्री मेश्राम ने 31 मार्च 2023 से पूर्व के बकाया बिजली बिल वाले पात्र बीपीएल, घरेलू और कृषि श्रेणी के उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे विलंब न करें। उपभोक्ता 31 दिसंबर 2026 तक अपने निकटतम विद्युत वितरण केंद्र या जोन कार्यालय में संपर्क कर इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। पुराने बकाये का यह समाधान न केवल उपभोक्ताओं को आर्थिक बोझ से मुक्त करता है, बल्कि उनकी विद्युत सेवाओं को भी सुचारू रखता है।

 

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने जारी की महतारी वंदन योजना की 32वीं किस्त, 67.38 लाख से अधिक माताओं-बहनों के खातों में पहुंचे ₹632.40 करोड़

महतारी वंदन योजना के माध्यम से अब तक माताओं-बहनों को ₹20,708 करोड़ से अधिक की आर्थिक सहायता

मुख्यमंत्री श्री साय ने दुर्ग की 3.89 लाख से अधिक महिलाओं के खातों में अंतरित किए ₹37.19 करोड़

मातृशक्ति के हाथों में आर्थिक सामर्थ्य देकर परिवार और प्रदेश को सशक्त बना रही हमारी सरकार: मुख्यमंत्री श्री साय

दुर्ग जिले को ₹218.48 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात, सड़क, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और ऊर्जा क्षेत्र को मिलेगी नई गति

23 विकास कार्यों का भूमिपूजन, आईटीआई दुर्ग के उन्नयन कार्य का लोकार्पण

रायपुर अक्टूबर 2026/ छत्तीसगढ़ की लाखों माताओं-बहनों के आर्थिक स्वावलंबन, आत्मसम्मान और आत्मविश्वास को मजबूत कर रही महतारी वंदन योजना ने आज एक और महत्वपूर्ण पड़ाव पूरा किया। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने दुर्ग जिले में आयोजित कार्यक्रम में योजना की 32वीं किस्त जारी करते हुए प्रदेश की 67 लाख 38 हजार 217 पात्र महिलाओं के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से 632 करोड़ 40 लाख रुपये से अधिक की राशि अंतरित की। इसके साथ ही महतारी वंदन योजना के अंतर्गत माताओं-बहनों को अब तक दी गई आर्थिक सहायता की राशि 20708 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर कहा कि मातृशक्ति का सम्मान और उनका आर्थिक सशक्तीकरण हमारी सरकार के लिए केवल एक योजना या कार्यक्रम नहीं, बल्कि सुशासन की प्रमुख प्राथमिकता है। हमारा विश्वास है कि जब परिवार की महिला आर्थिक रूप से सशक्त होती है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार पर पड़ता है। बच्चों की शिक्षा और पोषण से लेकर परिवार के स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़े निर्णयों तक उसकी भागीदारी और मजबूत होती है। इसलिए महतारी वंदन योजना के माध्यम से सरकार माताओं-बहनों के हाथों में आर्थिक सामर्थ्य देकर उन्हें अपने निर्णय स्वयं लेने का आत्मविश्वास दे रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश में नारीशक्ति को विकास की धुरी बनाते हुए महिला सशक्तीकरण को नई दिशा दी है। उनके नेतृत्व में महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए अनेक ऐतिहासिक पहल हुई हैं। छत्तीसगढ़ सरकार भी इसी भावना के अनुरूप माताओं-बहनों के जीवन में स्थायी और सकारात्मक बदलाव लाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना इसी संकल्प का सशक्त उदाहरण है। प्रतिमाह मिलने वाली एक हजार रुपये की राशि लाखों महिलाओं के लिए अपनी व्यक्तिगत और पारिवारिक आवश्यकताओं को पूरा करने का भरोसेमंद आर्थिक आधार बनी है। कोई बहन इस राशि का उपयोग बच्चों की पढ़ाई में कर रही है, कोई पोषण और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों में, तो कोई अपनी छोटी-छोटी बचत और आजीविका से जुड़ी गतिविधियों को आगे बढ़ाने में इसका उपयोग कर रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महतारी वंदन की राशि केवल बैंक खातों में पहुंचने वाली आर्थिक सहायता नहीं है। यह माताओं-बहनों के आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और स्वावलंबन को नई शक्ति देने वाली राशि है। हमारी सरकार का प्रयास है कि प्रदेश की माताएं-बहनें न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हों, बल्कि परिवार और समाज के निर्णयों में उनकी भागीदारी भी निरंतर बढ़े।

हर महीने सीधे माताओं-बहनों के खाते में पहुंच रहा आर्थिक संबल

प्रदेश में 1 मार्च 2024 से प्रभावी महतारी वंदन योजना के अंतर्गत पात्र महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में प्रदान की जाती है। योजना की शुरुआत से सितंबर 2026 तक 31 किस्तों में महिलाओं को 20075 करोड़ 76 लाख रुपये की सहायता प्रदान की जा चुकी थी।

मुख्यमंत्री श्री साय द्वारा आज जारी 32वीं किस्त में प्रदेश की 67 लाख 38 हजार 217 पात्र महिलाओं के बैंक खातों में 632 करोड़ 40 लाख 4 हजार 250 रुपये की राशि अंतरित की गई। इस प्रकार योजना के अंतर्गत माताओं-बहनों को अब तक 20708 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता प्रदान की जा चुकी है।

प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में पहुंचने से उन्हें नियमित आर्थिक संबल मिल रहा है। यह व्यवस्था पारदर्शिता के साथ महिलाओं को अपने संसाधनों पर सीधा अधिकार भी प्रदान कर रही है।

विष्णु भैया के विजन के अनुरूप पंजीयन व्यवस्था में किए गए सुधारों से नागरिकों के समय और धन की हो रही बचत

महज 30 मिनट में हुई रजिस्ट्री, नम्रता और प्रिया को मिली 30 हजार रुपये की आर्थिक राहत

महिलाओं के लिए पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट और 0.6 प्रतिशत उपकर समाप्त होने से कम हुआ रजिस्ट्री का खर्च

समय और धन की हुई बचत —राजनांदगांव की दो महिलाओं ने साझा किए पंजीयन व्यवस्था में बदलाव के अनुभव

रायपुर,  अक्टूबर 2026/ कभी संपत्ति की रजिस्ट्री के लिए घंटों इंतजार और अधिक खर्च की चिंता रहती थी, लेकिन अब पंजीयन व्यवस्था में किए गए सुधारों से नागरिकों के समय और धन दोनों की बचत हो रही है। राजनांदगांव की श्रीमती नम्रता खंडेलवाल और श्रीमती प्रिया खंडेलवाल ने इस बदलाव को स्वयं महसूस किया। संपत्ति की रजिस्ट्री कराने पहुंचीं दोनों महिलाओं को पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की रियायत और 0.6 प्रतिशत उपकर समाप्त होने से कुल करीब 30 हजार रुपये की आर्थिक राहत मिली। वहीं, उप-पंजीयक कार्यालय में पंजीयन की पूरी प्रक्रिया महज 30 मिनट में पूरी हो गई। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पंजीयन विभाग से संवाद में दोनों महिलाओं ने इस सुखद अनुभव को साझा किया।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के विकसित छत्तीसगढ़ के विजन के अनुरूप वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन सेवाओं को सरल, सुगम, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए विभिन्न सुधार किए गए हैं। महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर शुल्क में रियायत, उपकर की समाप्ति और तकनीक आधारित सुविधाओं के विस्तार से नागरिकों को प्रत्यक्ष आर्थिक राहत मिलने के साथ रजिस्ट्री की प्रक्रिया भी आसान हुई है।

रजिस्ट्री में 30 हजार रुपये की बचत, दोनों महिलाओं के चेहरे पर आई खुशी

श्रीमती नम्रता खंडेलवाल और श्रीमती प्रिया खंडेलवाल ने बताया कि महिला क्रेता होने के कारण उन्हें पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की रियायत मिली। महिलाओं के पक्ष में संपत्ति अंतरण संबंधी दस्तावेजों पर पंजीयन शुल्क की दर 4 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत की गई है। इसके साथ ही राज्य शासन द्वारा 0.6 प्रतिशत उपकर समाप्त किए जाने का लाभ भी उन्हें मिला।

इन दोनों रियायतों के कारण संपत्ति पंजीयन पर होने वाला कुल खर्च कम हुआ और उन्हें करीब 30 हजार रुपये की बचत हुई। दोनों महिलाओं ने इस आर्थिक राहत को उपयोगी बताते हुए कहा कि शुल्क में कमी से अपने नाम संपत्ति की रजिस्ट्री कराना अधिक किफायती हुआ है।

प्रिया ने बताया—सिर्फ 30 मिनट में पूरा हो गया रजिस्ट्री का कार्य

श्रीमती प्रिया खंडेलवाल ने पंजीयन प्रक्रिया में आए बदलाव के अनुभव साझा करते हुए बताया कि उप-पंजीयक कार्यालय में उनकी रजिस्ट्री और उससे संबंधित प्रक्रिया लगभग 30 मिनट में पूरी हो गई। ऑनलाइन अपॉइंटमेंट, डिजिटल भुगतान और तकनीक आधारित अन्य सुविधाओं के कारण उन्हें पंजीयन कराने में आसानी हुई।

उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था में प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल और सुविधाजनक हुई है। कम समय में काम पूरा होने से अनावश्यक इंतजार और कार्यालयीन दौड़भाग से भी राहत मिली।

डिजिटल सुविधाओं से रजिस्ट्री हुई आसान, नामांतरण की प्रक्रिया भी हुई सरल

पंजीयन विभाग द्वारा तकनीक आधारित सुधारों के माध्यम से संपत्ति पंजीयन की प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाया जा रहा है। ऑनलाइन अपॉइंटमेंट से नागरिक अपनी सुविधा के अनुसार पंजीयन के लिए समय निर्धारित कर सकते हैं। वहीं, ऑनलाइन भुगतान की सुविधा से पंजीयन शुल्क का भुगतान डिजिटल माध्यम से किया जा सकता है। इसके साथ ही आधार आधारित पहचान सत्यापन और डिजिटल दस्तावेज जैसी व्यवस्थाओं से पंजीयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिल रही है।

ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था के तहत संपत्ति की रजिस्ट्री होने के बाद नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः आगे बढ़ती है। इससे नागरिकों को नामांतरण के लिए अलग से आवेदन और संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम हो रही है।

 

सेवा की कहानी: हिमालयन हाइट्स में साकार हुआ अपने घर का सपना, जितेंद्र मेहता को मिला सुविधाओं से भरपूर आशियाना

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में आम परिवारों के अपने घर के सपने को साकार करने की दिशा में पहल

वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में गुणवत्तापूर्ण और सुविधायुक्त आवास उपलब्ध कराने पर जोर

प्रीमियम लोकेशन, बेहतर कनेक्टिविटी और किफायती दरों से हितग्राही संतुष्ट, निजी बिल्डरों की परियोजनाओं के समकक्ष बताया हाउसिंग बोर्ड का आवास

रायपुर, 08 अक्टूबर 2026/ हर व्यक्ति का सपना होता है कि उसका अपना एक सुंदर और सुविधायुक्त घर हो, जहां वे अपने परिवार के साथ सुकून भरा जीवन बिता सकें। यदि यह घर शहर की अच्छी लोकेशन पर, आवश्यक सुविधाओं के करीब और किफायती दरों पर उपलब्ध हो जाए, तो यह खुशी दुगुनी हो जाती है। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की आवासीय परियोजनाएं ऐसे ही परिवारों के अपने घर के सपने को साकार करने का माध्यम बन रही हैं। राजधानी रायपुर के डूमरतराई स्थित हिमालयन हाइट्स आवासीय परियोजना के निवासी श्री जितेंद्र मेहता की कहानी भी इसी संतुष्टि और भरोसे को सामने लाती है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा नागरिकों को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा आवासीय परियोजनाओं में गुणवत्ता, बेहतर लोकेशन, आधुनिक सुविधाओं और नागरिकों की आवश्यकताओं को प्राथमिकता देने पर जोर दिया जा रहा है।

दो साल पहले लिया फैसला, आज घर में रहकर पूरी तरह संतुष्ट

हिमालयन हाइट्स के निवासी श्री जितेंद्र मेहता बताते हैं कि उन्होंने लगभग दो वर्ष पहले इस परियोजना में अपना घर बुक कराया था। उस समय उनका सपना था कि परिवार के लिए एक ऐसा घर मिले, जहां बेहतर वातावरण के साथ शहर की सभी जरूरी सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हों। आज अपने घर में रहकर वे अपने निर्णय से बेहद खुश और संतुष्ट हैं।

श्री मेहता कहते हैं, “मैंने करीब दो साल पहले डूमरतराई स्थित हिमालयन हाइट्स में अपना घर बुक कराया था और आज यहां रहकर अपने फैसले से बहुत संतुष्ट हूं। इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसकी प्रीमियम लोकेशन है।”

रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और मॉल तक आसान पहुंच बनी बड़ी सुविधा

श्री मेहता के अनुसार हिमालयन हाइट्स की सबसे बड़ी विशेषता इसकी लोकेशन और बेहतर कनेक्टिविटी है। यहां से रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, मुख्य सड़क और शॉपिंग मॉल तक पहुंच आसान है। इससे रोजमर्रा के कामकाज, आवागमन और परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में काफी सुविधा मिलती है।

उनका कहना है कि आवास खरीदते समय केवल मकान की कीमत ही महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि आसपास उपलब्ध सुविधाएं और शहर से उसकी कनेक्टिविटी भी मायने रखती है। हिमालयन हाइट्स इन अपेक्षाओं पर खरा उतरता है।

“निजी बिल्डरों की परियोजनाओं से किसी भी तरह कम नहीं है हिमालयन हाइट्स”

छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड की आवासीय परियोजना के प्रति अपना भरोसा व्यक्त करते हुए श्री मेहता कहते हैं, “मेरे अनुभव में यह परियोजना निजी बिल्डरों की परियोजनाओं से किसी भी तरह कम नहीं है। अच्छी लोकेशन पर किफायती दर में अपना घर मिलना हमारे लिए बहुत खुशी की बात है।”

उनका यह अनुभव दर्शाता है कि शासकीय आवासीय परियोजनाएं भी बेहतर लोकेशन, सुविधाओं और किफायती दरों के कारण नागरिकों के लिए आकर्षक विकल्प बन सकती हैं।

अपने घर का सपना पूरा होने पर जताया सरकार और हाउसिंग बोर्ड का आभार

श्री जितेंद्र मेहता ने अपने घर का सपना साकार होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, “छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने हमारे अपने घर के सपने को साकार किया है। इसके लिए मैं हाउसिंग बोर्ड और छत्तीसगढ़ सरकार का हृदय से धन्यवाद करता हूं।”

गुणवत्तापूर्ण आवास के साथ बेहतर जीवन की दिशा में प्रयास

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा नागरिकों को बेहतर आवासीय विकल्प उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आवासीय परियोजनाओं में गुणवत्ता, किफायती दरों और सुविधाजनक लोकेशन को महत्व देकर अधिक से अधिक परिवारों के अपने घर के सपने को पूरा करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

डूमरतराई के हिमालयन हाइट्स में रहने वाले श्री जितेंद्र मेहता की संतुष्टि इस बात का उदाहरण है कि अच्छी लोकेशन पर सुविधायुक्त आवास मिलने से परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है। उनके लिए हिमालयन हाइट्स केवल रहने का स्थान नहीं, बल्कि वर्षों से संजोए अपने घर के सपने की सुखद परिणति है।

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