ईश्वर दुबे
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सेवा संकल्प अभियान : सेवा की कहानी
महिलाओं के लिए पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट से मिली आर्थिक राहत, बचत की राशि आई निजी जरूरतों के काम
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन सुधारों से महिलाओं को मिल रहा दोहरा लाभ
रायपुर, अक्टूबर 2026/ जमीन की रजिस्ट्री में 11 हजार 400 रुपये की बचत और नामांतरण के लिए तहसील कार्यालय के चक्कर लगाने की परेशानी से राहत मिलने पर जांजगीर-चांपा की श्रीमती ज्योति साहू बेहद खुश हैं। महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट से उन्हें सीधा आर्थिक लाभ मिला है। वहीं, ऑटोम्यूटेशन की सुविधा से रजिस्ट्री के बाद नामांतरण की प्रक्रिया भी आसान हो गई है। श्रीमती साहू के लिए यह बदलाव दोहरी राहत लेकर आया है। पंजीयन शुल्क में बची राशि उनकी निजी जरूरतों में काम आ रही है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पंजीयन विभाग से संवाद में उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए इन सुविधाओं के लिए राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त किया।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के विकसित छत्तीसगढ़ के विजन के अनुरूप वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में प्रदेश की पंजीयन व्यवस्था को सरल, सुगम, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए विभिन्न सुधार लागू किए गए हैं। महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर शुल्क में रियायत और रजिस्ट्री के बाद नामांतरण की प्रक्रिया को स्वचालित बनाने जैसी पहल से नागरिकों को आर्थिक राहत मिलने के साथ समय की भी बचत हो रही है।
पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत छूट से बचाए 11,400 रुपये
श्रीमती ज्योति साहू ने बताया कि महिलाओं के नाम संपत्ति की रजिस्ट्री कराने पर पंजीयन शुल्क में दी जा रही 50 प्रतिशत की रियायत का उन्हें प्रत्यक्ष लाभ मिला है। इस सुविधा से उनके 11 हजार 400 रुपये बचे हैं।
राज्य शासन द्वारा महिलाओं के पक्ष में अचल संपत्ति के अंतरण से संबंधित दस्तावेजों पर पंजीयन शुल्क की दर 4 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत की गई है। इससे महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर लगने वाला शुल्क आधा हो गया है।
श्रीमती साहू ने बताया कि पंजीयन शुल्क में बची राशि उनकी निजी जरूरतों को पूरा करने में काम आ रही है। उन्होंने इस आर्थिक राहत पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि शुल्क में कमी से महिलाओं के लिए अपने नाम संपत्ति की रजिस्ट्री कराना अधिक किफायती हुआ है।
पहले नामांतरण के लिए लगाने पड़ते थे तहसील के चक्कर, अब प्रक्रिया हुई आसान
श्रीमती ज्योति साहू को पंजीयन शुल्क में बचत के साथ ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था का लाभ भी मिला है। उन्होंने बताया कि पहले जमीन की रजिस्ट्री कराने के बाद नामांतरण के लिए अलग से तहसील कार्यालय जाना पड़ता था। इस प्रक्रिया में समय लगता था और बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते थे।
अब ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था से रजिस्ट्री के बाद नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः आगे बढ़ती है। इससे अलग से आवेदन करने और संबंधित कार्यालयों में जाने की आवश्यकता कम हो रही है। श्रीमती साहू ने इस बदलाव को संपत्ति संबंधी कार्यों में नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण सुविधा बताया।
महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर शुल्क में 50 प्रतिशत की रियायत से रजिस्ट्री का आर्थिक भार कम हो रहा है। यह व्यवस्था महिलाओं के नाम संपत्ति खरीदने और उसका विधिवत पंजीयन कराने को प्रोत्साहित कर रही है।
संपत्ति में महिलाओं की भागीदारी उनकी आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। पंजीयन शुल्क में कमी से महिलाओं और उनके परिवारों को प्रत्यक्ष आर्थिक राहत मिल रही है।
जांजगीर-चांपा की श्रीमती ज्योति साहू को मिली 11 हजार 400 रुपये की बचत इसका उदाहरण है। उनके लिए यह राशि केवल पंजीयन शुल्क में मिली छूट नहीं, बल्कि परिवार और स्वयं की जरूरतों को पूरा करने में उपयोगी आर्थिक सहायता साबित हुई है।
सेवा संकल्प अभियान
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में मध्यमवर्गीय परिवारों के अपने घर के सपने को साकार करने की दिशा में निरंतर प्रयास
वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में गुणवत्तापूर्ण आवास, बेहतर प्लानिंग और हितग्राहियों की संतुष्टि पर विशेष जोर
बोरियाकला हाउसिंग बोर्ड में 12 वर्षों से रह रहे विकास सिंह ठाकुर ने कहा— सिर्फ घर नहीं, अपने आशियाने में रहने का सुकून और गर्व भी मिला
रायपुर, अक्टूबर 2026/ अपना घर हर मध्यमवर्गीय परिवार के जीवन का सबसे बड़ा सपना होता है। वर्षों की मेहनत, बचत और उम्मीदों से जुड़ा यह सपना जब साकार होता है, तो परिवार को केवल एक छत नहीं, बल्कि सुरक्षा, स्थायित्व और सम्मान के साथ जीवन जीने का आत्मविश्वास भी मिलता है। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की आवासीय परियोजनाएं ऐसे ही परिवारों के सपनों को साकार करने का माध्यम बन रही हैं। राजधानी रायपुर के बोरियाकला स्थित हाउसिंग बोर्ड आवासीय परिसर में पिछले लगभग 12 वर्षों से रह रहे श्री विकास सिंह ठाकुर की कहानी भी इसी विश्वास, संतुष्टि और अपनेपन का उदाहरण है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा आम नागरिकों, विशेषकर मध्यमवर्गीय परिवारों को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा सुव्यवस्थित आवासीय परियोजनाओं, गुणवत्तापूर्ण निर्माण और हितग्राहियों की समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता देने पर जोर दिया जा रहा है।
12 वर्षों का अनुभव, हाउसिंग बोर्ड की प्लानिंग और निर्माण गुणवत्ता से संतुष्ट
बोरियाकला हाउसिंग बोर्ड में पिछले लगभग 12 वर्षों से निवास कर रहे श्री विकास सिंह ठाकुर बताते हैं कि यहां की सबसे बड़ी विशेषता सोच-समझकर की गई आवासीय प्लानिंग है। घरों का डिजाइन, बनावट और सुव्यवस्थित निर्माण उनके परिवार के लिए संतोषजनक रहा है।
श्री ठाकुर कहते हैं, “मैं पिछले लगभग 12 वर्षों से बोरियाकला हाउसिंग बोर्ड में रह रहा हूं। यहां की सबसे अच्छी बात इसकी सोच-समझकर की गई प्लानिंग है। घरों का डिजाइन और बनावट बहुत अच्छी है।”
उनका मानना है कि किसी भी आवासीय परियोजना की वास्तविक सफलता का आकलन केवल उसके निर्माण से नहीं, बल्कि वहां रहने वाले परिवारों के दीर्घकालीन अनुभव और संतुष्टि से भी होता है।
समस्या आने पर सुनवाई और समाधान से बढ़ा भरोसा
श्री विकास सिंह ठाकुर के अनुसार हाउसिंग बोर्ड की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक उसकी टीम का सहयोगात्मक व्यवहार है। आवासीय परिसर में रहने के दौरान जब भी कोई समस्या सामने आती है, मंडल की टीम उनकी बात सुनती है और जल्द से जल्द समाधान का प्रयास करती है।
वे बताते हैं, “घरों की अच्छी बनावट और प्लानिंग के साथ जो बात सबसे ज्यादा भरोसा देती है, वह है हाउसिंग बोर्ड की टीम का सहयोग। जब भी कोई परेशानी होती है, वे हमारी बात सुनते हैं और जल्द से जल्द उसका समाधान करते हैं।”
उनका यह अनुभव दर्शाता है कि आवास उपलब्ध कराने के साथ हितग्राहियों की समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता और समाधान की तत्परता भी किसी संस्था के प्रति विश्वास बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
मध्यमवर्गीय परिवार के लिए अपना घर केवल जरूरत नहीं, जीवनभर का सपना
अपने घर से जुड़ी भावनाओं को व्यक्त करते हुए श्री ठाकुर कहते हैं कि मध्यमवर्गीय परिवार के लिए घर खरीदना जीवन के सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक होता है। इसके पीछे वर्षों की मेहनत, आर्थिक बचत और पूरे परिवार की उम्मीदें जुड़ी होती हैं।
वे कहते हैं, “एक मध्यमवर्गीय परिवार के लिए अपना घर खरीदना सिर्फ एक जरूरत नहीं, बल्कि बरसों का सपना होता है। उस सपने के साथ पूरे परिवार की उम्मीदें जुड़ी होती हैं। हाउसिंग बोर्ड ने हमारे इसी सपने को साकार किया है।”
श्री ठाकुर के लिए बोरियाकला स्थित उनका घर केवल रहने का स्थान नहीं, बल्कि परिवार की खुशियों, यादों और सुरक्षित भविष्य का आधार बन चुका है। पिछले 12 वर्षों का उनका अनुभव इस बात को रेखांकित करता है कि सुव्यवस्थित आवासीय वातावरण परिवारों को स्थायित्व और सुकून प्रदान करता है।
89.53 लाख रुपये की लागत से सिकरिमा-विदुरपुर सड़क का मरम्मत एवं जीर्णोद्धार कार्य पूर्ण
2.5 किलोमीटर लंबी सड़क के डामरीकरण से ग्रामीणों को मिली राहत, शिक्षा, स्वास्थ्य और बाजार तक पहुंच होगी आसान
ओडिशा सीमा से लगे गांवों में आवागमन होगा सुगम, ग्रामीण विकास और आर्थिक गतिविधियों को मिलेगी गति
रायपुर, अक्टूबर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले के दूरस्थ एवं सीमावर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क को मजबूत करने और आवागमन की सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत सिकरिमा से विदुरपुर तक 2.5 किलोमीटर लंबी सड़क का मरम्मत एवं जीर्णोद्धार कार्य 89 लाख 53 हजार रुपये की लागत से पूर्ण कर लिया गया है। सड़क के डामरीकरण से क्षेत्र के ग्रामीणों को आवागमन में बड़ी राहत मिली है। विशेष रूप से बरसात के दिनों में होने वाली परेशानियां दूर होने के साथ अब ग्रामीणों को बेहतर सड़क सुविधा का लाभ मिलेगा।
सिकरिमा से विदुरपुर मार्ग की स्थिति खराब होने के कारण ग्रामीणों को लंबे समय से आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। विशेषकर बारिश के मौसम में सड़क की खराब स्थिति के कारण वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती थी। इसका असर विद्यार्थियों, किसानों, मजदूरों और स्वास्थ्य सेवाओं सहित अन्य आवश्यक कार्यों के लिए आने-जाने वाले ग्रामीणों पर पड़ता था। अब सड़क का मरम्मत एवं डामरीकरण कार्य पूर्ण होने से ग्रामीणों को सुगम और सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलेगी।
ओडिशा सीमा से लगे गांवों में सड़क संपर्क हुआ मजबूत
जशपुर जिले का सिकरिमा-विदुरपुर मार्ग ओडिशा राज्य की सीमा से लगे ग्रामीण क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। सड़क के जीर्णोद्धार से सीमावर्ती गांवों का मुख्य मार्गों से संपर्क बेहतर होगा। इससे ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंचने में सुविधा मिलेगी।
बेहतर सड़क संपर्क से किसानों को अपनी कृषि उपज बाजार तक पहुंचाने तथा ग्रामीणों को दैनिक जरूरतों के लिए आवागमन करने में भी सहूलियत होगी। इसके साथ ही क्षेत्र में सामाजिक एवं आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
बरसात में आवागमन की परेशानी से मिलेगी राहत
सिकरिमा से विदुरपुर तक सड़क का डामरीकरण कार्य पूर्ण होने से ग्रामीणों को विशेष रूप से बारिश के मौसम में होने वाली परेशानियों से राहत मिलेगी। पहले सड़क की खराब स्थिति के कारण दोपहिया और अन्य वाहनों के आवागमन में कठिनाई होती थी। अब सड़क की स्थिति बेहतर होने से विद्यार्थियों को विद्यालय आने-जाने, मरीजों को स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचने तथा ग्रामीणों को आवश्यक कार्यों के लिए आवागमन करने में सुविधा होगी।
लंबे समय से प्रतीक्षित सड़क का कार्य पूर्ण होने पर ग्रामीणों में खुशी
सिकरिमा से विदुरपुर तक सड़क का मरम्मत एवं जीर्णोद्धार कार्य पूर्ण होने से क्षेत्र के ग्रामीणों में प्रसन्नता है। लंबे समय से बेहतर सड़क सुविधा की प्रतीक्षा कर रहे ग्रामीणों को अब आवागमन में सहूलियत मिलेगी। सड़क के बेहतर होने से गांवों के बीच संपर्क मजबूत हुआ है और दैनिक जरूरतों के लिए आवाजाही आसान होगी।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले के दूरस्थ, ग्रामीण एवं सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क अधोसंरचना के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत सिकरिमा-विदुरपुर मार्ग का जीर्णोद्धार इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे ग्रामीणों के दैनिक जीवन में सुविधा बढ़ने के साथ सीमावर्ती क्षेत्र के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।
उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव की मौजूदगी में हुआ कंसेशन एग्रीमेंट, हरित शहर और पर्यावरण अनुकूल परिवहन को मिलेगा बढ़ावा
बिलासपुर और भिलाई में नवम्बर से 20-20 ई-बसों के संचालन की तैयारी
रायपुर. अक्टूबर 2026. नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई और कोरबा में 240 इलेक्ट्रिक बसों को सड़कों पर उतारने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन मंत्री श्री अरुण साव की मौजूदगी में आज चारों नगर निगमों और चयनित एजेंसी चार्टर्ड स्पीड लिमिटेड के बीच कंसेशन एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए गए। इन चारों शहरों ने ई-बस संचालन शुरू करने की दिशा में आज बड़ा कदम बढ़ाया है। विभाग आगामी नवम्बर में बिलासपुर और भिलाई में 20-20 ई-बसों का संचालन प्रारंभ करने की तैयारी में है।
नागरिकों को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था मिलेगी
उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने नवा रायपुर में अपने निवास कार्यालय में आयोजित कंसेशन एग्रीमेंट हस्ताक्षर कार्यक्रम में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में आधुनिक आधारभूत सुविधाओं के विकास और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा स्वच्छ, हरित और विकसित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। बढ़ते शहरीकरण के साथ यातायात, वायु प्रदूषण और ईंधन की खपत जैसी चुनौतियां बढ़ रही हैं। इलेक्ट्रिक बसों से ऊर्जा दक्षता बढ़ेगी, पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता और ध्वनि प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था नागरिकों की जरूरतों के अनुरूप होनी चाहिए। शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, दर्शनीय स्थलों और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों तक सुविधाजनक आवागमन उपलब्ध कराना जरूरी है। ई-बस सेवा से नागरिकों को बेहतर परिवहन विकल्प मिलेगा और शहरों को आधुनिक बनाने में मदद मिलेगी। इसके लिए योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और विभागों के बीच समन्वय आवश्यक है।
रायपुर में 100, दुर्ग-भिलाई और बिलासपुर में 50-50 तथा कोरबा में 40 बसें चलेंगी
योजना के प्रथम चरण में रायपुर में 100, दुर्ग-भिलाई में 50, बिलासपुर में 50 और कोरबा में 40 इलेक्ट्रिक बसें चलाने की योजना है। निर्धारित लक्ष्य के अनुसार नवम्बर-2026 तक भिलाई और बिलासपुर में प्रतीकात्मक रूप से 20-20 बसों का संचालन शुरू करने की योजना है।
मोबाइल स्कैनर से भुगतान और ऑनलाइन टिकट की सुविधा होगी
यात्रियों की सुरक्षा के लिए प्रत्येक ई-बस में छह कैमरे लगाने का प्रावधान है। मोबाइल एप से बसों के रूट की जानकारी भी मिल सकेगी। इलेक्ट्रिक बसों से कार्बन उत्सर्जन घटाने में मदद मिलेगी। वहीं, चार्जिंग स्टेशन, रखरखाव केंद्र और अन्य आधारभूत सुविधाओं के विकास से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
समयबद्ध क्रियान्वयन पर जोर
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने कार्यक्रम में योजना के उद्देश्यों और संचालन की तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शहरों में बढ़ती आबादी और परिवहन की जरूरतों को देखते हुए सार्वजनिक परिवहन का आधुनिकीकरण आवश्यक है। योजना की सफलता के लिए चार्जिंग व्यवस्था, डिपो, बस-स्टॉप और रखरखाव केंद्र सहित आवश्यक आधारभूत सुविधाओं का विकास, विभागीय समन्वय और निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूरा करना जरूरी है। उन्होंने नागरिकों की जरूरतों के अनुरूप परिवहन सुविधाएं विकसित करने तथा संचालन की तैयारियों को समय पर पूरा करने पर जोर दिया। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक श्री नीलेश महादेव क्षीरसागर, राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुमीत अग्रवाल और चार्टर्ड स्पीड लिमिटेड के प्रबंध निदेशक श्री पंकज गांधी भी कार्यक्रम में उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा - राष्ट्र प्रथम, जनसेवा, सुशासन, गरीब कल्याण और अंत्योदय को समर्पित 25 वर्षों की कर्मयात्रा ऐतिहासिक
प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को मिला विकास का नया संबल, केंद्र-राज्य के समन्वय से अधोसंरचना, गरीब कल्याण, जनजातीय विकास और नक्सल उन्मूलन में मिली ऐतिहासिक सफलता
‘विकसित छत्तीसगढ़’ के माध्यम से ‘विकसित भारत 2047’ के निर्माण में पूरी शक्ति से योगदान देगा प्रदेश - मुख्यमंत्री श्री साय
पूर्व अग्निवीरों के लिए गृह विभाग में आरक्षक के 36 रिक्त पदों पर भर्ती की अनुमति
‘आदिम जाति विकास विभाग’ अब ‘जनजातीय कार्य विभाग’ के नाम से जाना जाएगा
रायपुर अक्टूबर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज राजधानी रायपुर में स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सरकार के मुखिया के रूप में निरंतर 25 वर्ष पूर्ण होने पर अभिनंदन प्रस्ताव पारित किया गया। बैठक के बाद मुख्यमंत्री श्री साय ने मुख्यमंत्री निवास में आयोजित प्रेस वार्ता में मंत्रिपरिषद के निर्णयों की जानकारी दी और प्रधानमंत्री श्री मोदी के 25 वर्षों के नेतृत्व का छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा पर पड़े व्यापक प्रभाव को रेखांकित किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेशवासियों को शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस शुभ अवसर पर मंत्रिपरिषद ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 25 वर्षों की गौरवशाली सेवा यात्रा के अभिनंदन का शुभ प्रस्ताव पारित किया है। यह केवल एक उपलब्धि का अवसर नहीं, बल्कि राष्ट्र प्रथम, जनसेवा, सुशासन, गरीब कल्याण और अंत्योदय के सिद्धांतों को समर्पित एक असाधारण कर्मयात्रा का ऐतिहासिक पड़ाव है।
मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ जनता और मंत्रिपरिषद की ओर से प्रधानमंत्री श्री मोदी के कर्मयोग, जनसेवा और दूरदर्शी नेतृत्व का अभिनंदन करते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य एवं सुदीर्घ राष्ट्रसेवा की कामना की।
उन्होंने कहा कि मंत्रिपरिषद ने जैम से लेकर जीएसटी, अनुच्छेद 370 की समाप्ति और श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से लेकर नक्सलवाद से मुक्ति तक राष्ट्रहित में लिए गए ऐतिहासिक निर्णयों का अभिनंदन किया है। साथ ही सहकारी संघवाद के माध्यम से छत्तीसगढ़ को अधिक संसाधन और भागीदारी देने तथा आवास, नल-जल, स्वच्छता, राशन, स्वास्थ्य और स्वच्छ ईंधन जैसी सुविधाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में मिले सहयोग के लिए केंद्र सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया गया है।
गुजरात से शुरू हुए सुशासन के प्रयोगों ने देश और छत्तीसगढ़ को दिखाई नई राह
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शासन में टेक्नोलॉजी, जनसंवाद और परिणाम आधारित कार्यप्रणाली के अनेक अभिनव प्रयोग किए। आगे चलकर इन सफल प्रयोगों को राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनाया गया। वर्ष 2000 में अस्तित्व में आए छत्तीसगढ़ ने भी अपनी शुरुआती विकास यात्रा में ‘गुजरात मॉडल’ के सफल अनुभवों से सीखते हुए तेज गति से आगे बढ़ने का प्रयास किया। संवाद और ‘चिंतन शिविर’ जैसी कार्यसंस्कृति भी इसी सोच से प्रेरित रही है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री गतिशक्ति ने आज परियोजनाओं की प्लानिंग और मॉनिटरिंग को टेक्नोलॉजी से जोड़ दिया है। छत्तीसगढ़ के लगभग 20 हजार गांवों में से करीब 14 हजार गांव जियो-रेफरेंस्ड किए जा चुके हैं।
निवेश और उद्योगों के लिए छत्तीसगढ़ में बना अनुकूल वातावरण
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘वाइब्रेंट गुजरात’ ने देश के राज्यों को अपनी औद्योगिक एवं आर्थिक संभावनाएं दुनिया के सामने प्रस्तुत करने की नई दृष्टि दी। इसी प्रेरणा के साथ छत्तीसगढ़ ने भी निवेश आकर्षित करने के लिए व्यापक संरचनात्मक और नीतिगत सुधार किए हैं।
‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026’ के माध्यम से औद्योगिक अनुमतियों को सरल बनाया गया है और निर्धारित समय-सीमा में निर्णय नहीं होने पर डीम्ड अप्रूवल अर्थात स्वतः स्वीकृति का प्रावधान किया गया है। वन क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम से निवेशकों के लिए प्रक्रियाएं और आसान हुई हैं।
सेवा संकल्प अभियान-2026
सरगुजा की बेटी आंचल राजवाड़े को मिला योजना का लाभ, एलआईसी के माध्यम से एक लाख रुपये का बॉन्ड प्राप्त
18 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर निर्धारित राशि से उच्च शिक्षा और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में मिलेगी मदद
बेटी के भविष्य की चिंता हुई कम, आर्थिक सुरक्षा का भरोसा मिलने से मां मानती राजवाड़े के चेहरे पर आई खुशी
रायपुर, अक्टूबर 2026/ हर मां का सपना होता है कि उसकी बेटी अच्छी शिक्षा प्राप्त करे, अपने पैरों पर खड़ी हो और जीवन में सफलता की नई ऊंचाइयों तक पहुंचे। लेकिन आर्थिक रूप से सीमित संसाधनों वाले परिवारों के लिए बेटियों की उच्च शिक्षा और भविष्य की जरूरतों को लेकर चिंता बनी रहती है। छत्तीसगढ़ शासन की नोनी सुरक्षा योजना ऐसे परिवारों को बेटियों के सुरक्षित भविष्य के लिए आर्थिक संबल प्रदान कर रही है। सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत कृष्णापुर निवासी श्रीमती मानती राजवाड़े की बेटी आंचल राजवाड़े को भी इस योजना का लाभ मिला है। आंचल के नाम पर भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के माध्यम से एक लाख रुपये का बॉन्ड प्राप्त हुआ है, जिससे परिवार को बेटी के भविष्य के लिए आर्थिक सुरक्षा का भरोसा मिला है।
सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत आंचल की यह कहानी बताती है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं बेटियों की शिक्षा और उनके भविष्य को सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। नोनी सुरक्षा योजना से मिलने वाला लाभ परिवारों को बेटियों की उच्च शिक्षा और आगे की आवश्यकताओं के लिए आर्थिक सहारा उपलब्ध कराने की दिशा में उपयोगी साबित हो रहा है।
बेटी की अच्छी शिक्षा का सपना, नोनी सुरक्षा योजना से मिला भरोसा
मानती राजवाड़े बताती हैं कि वे अपनी बेटी आंचल को अच्छी शिक्षा दिलाना चाहती हैं, ताकि वह पढ़-लिखकर आत्मनिर्भर बन सके और अपने सपनों को पूरा कर सके। हर माता-पिता की तरह वे भी बेटी के बेहतर भविष्य के लिए प्रयासरत हैं।
बेटी की पढ़ाई और भविष्य की जरूरतों को लेकर उनके मन में चिंता रहती थी। ऐसे में नोनी सुरक्षा योजना का लाभ मिलने से उन्हें बड़ी राहत मिली है।
योजना के अंतर्गत आंचल के नाम पर एलआईसी के माध्यम से एक लाख रुपये का बॉन्ड प्राप्त हुआ है। इससे परिवार को विश्वास मिला है कि बेटी के बड़े होने पर उसकी शिक्षा और अन्य आवश्यकताओं के लिए आर्थिक सहयोग उपलब्ध होगा।
मानती का कहना है कि बेटी के भविष्य के लिए अभी से आर्थिक सहायता की व्यवस्था होना उनके परिवार के लिए महत्वपूर्ण है।
18 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर मिलेगी निर्धारित राशि, उच्च शिक्षा में होगी सहायक
नोनी सुरक्षा योजना के अंतर्गत आंचल राजवाड़े को भविष्य में आर्थिक सहायता का लाभ मिलेगा। योजना की निर्धारित शर्तों के अनुसार 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर मिलने वाली राशि का उपयोग उसकी आगे की शिक्षा और अन्य जरूरतों के लिए किया जा सकेगा।
मानती राजवाड़े बताती हैं कि वे चाहती हैं कि उनकी बेटी उच्च शिक्षा प्राप्त करे और अपने जीवन में आगे बढ़े। योजना से मिलने वाली राशि का उपयोग वे आंचल की पढ़ाई और भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने में करना चाहती हैं।
उनका कहना है कि बच्चों की शिक्षा पर होने वाला खर्च परिवारों के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। ऐसे में बेटी के नाम पर आर्थिक सहायता का प्रावधान होने से भविष्य की तैयारियों में मदद मिलेगी।
बेटी के सुरक्षित भविष्य से मां को मिला सुकून
मानती राजवाड़े के लिए नोनी सुरक्षा योजना से मिला लाभ केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि बेटी के उज्ज्वल भविष्य के प्रति एक भरोसा है।
वे बताती हैं कि आंचल के नाम पर एक लाख रुपये का बॉन्ड मिलने से उन्हें खुशी हुई है। अब उन्हें विश्वास है कि बेटी के बड़े होने पर उसकी पढ़ाई और अन्य जरूरतों के लिए यह राशि सहायक बनेगी।
उनका सपना है कि आंचल अच्छी शिक्षा प्राप्त कर अपने पैरों पर खड़ी हो और परिवार का नाम रोशन करे। नोनी सुरक्षा योजना ने उनके इस सपने को आर्थिक संबल प्रदान किया है।
बेटियों की शिक्षा और आर्थिक सुरक्षा को मिल रहा बढ़ावा
नोनी सुरक्षा योजना बेटियों के भविष्य के लिए आर्थिक सहायता का प्रावधान कर अभिभावकों को उनकी शिक्षा और आगे की जरूरतों के प्रति आश्वस्त करने में सहायक बन रही है।
सेवा संकल्प अभियान-2026
हर महीने मिलने वाले एक हजार रुपये से खरीद रहीं धागा और सिलाई सामग्री, घर बैठे स्वरोजगार को मिली मजबूती
पति की मजदूरी और अपनी सिलाई से संभाल रहीं परिवार की जिम्मेदारियां, तीन बच्चों के पालन-पोषण में मिल रही मदद
महतारी वंदन की राशि बनी आत्मनिर्भरता का आधार, छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भरता हो रही कम
रायपुर, अक्टूबर 2026/ सिलाई का हुनर तो पहले से था, लेकिन काम को लगातार जारी रखने के लिए धागा और अन्य जरूरी सामग्री खरीदने में आर्थिक परेशानियां आती थीं। अब महतारी वंदन योजना से हर महीने मिलने वाली एक हजार रुपये की सहायता राशि ने सरगुजा जिले की श्रीमती सरिता तिग्गा के इस हुनर को आजीविका का मजबूत सहारा बना दिया है। वे योजना से मिलने वाली राशि का उपयोग सिलाई सामग्री खरीदने में कर रही हैं और घर बैठे सिलाई का काम कर परिवार की आमदनी में योगदान दे रही हैं। पति की मजदूरी से होने वाली आय के साथ उनकी मेहनत से अर्जित अतिरिक्त आमदनी तीन बच्चों के पालन-पोषण और घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मददगार साबित हो रही है।
अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत मेंड्रा कला निवासी सरिता तिग्गा की यह कहानी बताती है कि नियमित रूप से मिलने वाली छोटी आर्थिक सहायता भी महिलाओं के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है। महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि को उन्होंने अपने हुनर और स्वरोजगार से जोड़कर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
पति करते हैं मजदूरी, सरिता ने सिलाई को बनाया अतिरिक्त आय का जरिया
सरिता तिग्गा बताती हैं कि उनके पति श्री सोमसाय तिग्गा मजदूरी करते हैं। परिवार में तीन बच्चे हैं, जिनकी परवरिश, पढ़ाई और घरेलू जरूरतों की जिम्मेदारी दोनों मिलकर निभाते हैं। सीमित आय के कारण परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में कई बार कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
ऐसी परिस्थितियों में सरिता ने अपने सिलाई के हुनर को परिवार की आजीविका से जोड़ने का निर्णय लिया। वे घर पर ही सिलाई का काम करती हैं, जिससे घरेलू जिम्मेदारियों के साथ अतिरिक्त आमदनी अर्जित करने का अवसर मिलता है।
उनका कहना है कि पति की मजदूरी से घर का खर्च चलता है, जबकि सिलाई से मिलने वाली आय परिवार की अन्य जरूरतों को पूरा करने में सहयोग करती है। इस तरह वे अपनी मेहनत से परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में बराबर की सहभागी बन रही हैं।
महतारी वंदन के एक हजार रुपये से खरीदती हैं धागा और सिलाई सामग्री
सरिता के लिए महतारी वंदन योजना से प्रतिमाह मिलने वाली एक हजार रुपये की सहायता राशि विशेष महत्व रखती है। वे इस राशि का उपयोग सिलाई के लिए धागा और अन्य आवश्यक सामग्री खरीदने में करती हैं।
सरिता बताती हैं कि सिलाई का काम नियमित रूप से जारी रखने के लिए समय-समय पर सामग्री की आवश्यकता होती है। पहले सीमित पारिवारिक आय के बीच इन जरूरतों के लिए पैसे की व्यवस्था करना मुश्किल होता था। अब योजना से मिलने वाली राशि के कारण सिलाई सामग्री खरीदने में सुविधा हो रही है।
इस सहायता से वे अपने काम को लगातार जारी रख पा रही हैं। सिलाई से प्राप्त आमदनी परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में सहायक बन रही है।
सरिता का अनुभव दर्शाता है कि महिलाओं को मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता का उपयोग छोटे स्वरोजगार को बनाए रखने और आगे बढ़ाने में भी किया जा सकता है।
घर की जिम्मेदारियों के साथ स्वरोजगार, तीन बच्चों की परवरिश में मिल रहा सहयोग
तीन बच्चों की देखभाल और घरेलू कामकाज के बीच सरिता घर पर ही सिलाई करती हैं। इससे उन्हें परिवार के साथ रहते हुए अपनी मेहनत से आय अर्जित करने का अवसर मिल रहा है।
उनका कहना है कि घर से सिलाई का काम करने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि वे बच्चों की देखभाल और घरेलू जिम्मेदारियां निभाने के साथ परिवार की आमदनी में भी योगदान दे पाती हैं।
पति की मजदूरी और स्वयं के सिलाई कार्य से प्राप्त आय के सहारे परिवार की जरूरतें पूरी करने में मदद मिल रही है। महतारी वंदन योजना की सहायता राशि उनके इस प्रयास को निरंतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
छोटी आर्थिक सहायता से बढ़ा आत्मविश्वास, हुनर बना आजीविका का सहारा
सेवा संकल्प अभियान-2026
ग्रामीण रोजगार योजना से मिला आजीविका का नया अवसर, वर्षा जल का संचय कर डबरी में डाला मछली बीज
मछलियों की बिक्री से होगी अतिरिक्त आमदनी, परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होने की जगी उम्मीद
जल संरक्षण के साथ स्वरोजगार की राह हुई आसान, विशेष पिछड़ी जनजाति के परिवार को मिला आजीविका का नया साधन
रायपुर, अक्टूबर 2026/ कभी जिस जमीन का कोई उपयोग नहीं हो रहा था, आज वही जमीन सरगुजा जिले के पहाड़ी कोरवा किसान फूना राम के लिए आजीविका की नई उम्मीद बन गई है। ग्रामीण रोजगार योजना के अंतर्गत खाली पड़ी जमीन पर आजीविका डबरी का निर्माण होने से अब वे मछली पालन से अतिरिक्त आमदनी प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। बारिश के पानी से डबरी भरने के बाद उन्होंने उसमें मछली बीज डाला है। मछलियां तैयार होने पर उनकी बिक्री से परिवार को अतिरिक्त आय प्राप्त होने की उम्मीद है।
अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत घंघरी निवासी फूना राम पहाड़ी कोरवा की यह कहानी जल संरक्षण और आजीविका संवर्धन का उदाहरण है। ग्रामीण रोजगार योजना के माध्यम से निर्मित डबरी ने उन्हें उपलब्ध जमीन का बेहतर उपयोग करने और मछली पालन जैसी आयमूलक गतिविधि से जुड़ने का अवसर दिया है।
खाली पड़ी जमीन पर बनी डबरी, वर्षा जल संरक्षण से मिला आजीविका का अवसर
फूना राम पहाड़ी कोरवा बताते हैं कि उनकी जमीन का एक हिस्सा लंबे समय से खाली पड़ा था। इस भूमि का उपयोग किसी आयमूलक गतिविधि के लिए नहीं हो पा रहा था। ग्रामीण रोजगार योजना के अंतर्गत आजीविका डबरी निर्माण की सुविधा मिलने से उन्होंने अपनी खाली जमीन पर डबरी बनवाई।
वर्षा ऋतु के दौरान डबरी में पर्याप्त पानी एकत्रित हुआ। पानी की उपलब्धता को देखते हुए फूना राम ने मछली पालन शुरू करने का निर्णय लिया और डबरी में मछली बीज छोड़ा।
इस पहल से एक ओर वर्षा जल का संचय संभव हुआ है, वहीं दूसरी ओर खाली पड़ी जमीन आजीविका गतिविधि का आधार बन गई है। अब फूना राम को उम्मीद है कि मछलियां तैयार होने के बाद उनकी बिक्री से परिवार को अतिरिक्त आमदनी होगी।
मछली पालन से बढ़ेंगे आय के साधन, परिवार की आर्थिक स्थिति होगी मजबूत
फूना राम बताते हैं कि डबरी निर्माण से पहले उनकी जमीन का यह हिस्सा खाली पड़ा रहता था। अब उसी स्थान पर पानी का संचय हो रहा है और मछली पालन की गतिविधि शुरू हो गई है।
उन्होंने डबरी में मछली बीज डाल दिया है। मछलियों के विकसित होने के बाद उन्हें बेचकर आय अर्जित करने की योजना है। इससे परिवार को आजीविका का एक अतिरिक्त साधन मिलेगा।
फूना राम के लिए यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे उन्हें अपनी उपलब्ध जमीन और वर्षा जल का उपयोग कर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिला है।
ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रकार की आजीविका डबरियां जल संरक्षण के साथ मछली पालन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने में सहायक साबित हो सकती हैं।
पहाड़ी कोरवा परिवार को मिला स्वरोजगार का नया अवसर
फूना राम पहाड़ी कोरवा विशेष पिछड़ी जनजाति समुदाय से आते हैं। ग्रामीण रोजगार योजना के अंतर्गत आजीविका डबरी निर्माण से उन्हें मछली पालन जैसी आयमूलक गतिविधि शुरू करने का अवसर मिला है।
पहले जिस जमीन से कोई आमदनी नहीं हो रही थी, अब उसी जमीन पर निर्मित डबरी भविष्य में अतिरिक्त आय का साधन बन सकती है।
फूना राम की पहल यह दर्शाती है कि ग्रामीण परिवारों को उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के अवसर मिलने पर वे कृषि के साथ अन्य आजीविका गतिविधियों से भी जुड़ सकते हैं।
“पहले जमीन खाली पड़ी थी, अब डबरी में मछली पालन शुरू किया है”
फूना राम पहाड़ी कोरवा बताते हैं कि उनकी जमीन का एक हिस्सा खाली पड़ा था। ग्रामीण रोजगार योजना से वहां आजीविका डबरी का निर्माण कराया गया। बारिश के दौरान डबरी में पानी भरने के बाद उन्होंने मछली बीज डाला है।
उनका कहना है कि मछलियां तैयार होने पर उनकी बिक्री से अतिरिक्त आमदनी प्राप्त होगी। इससे परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
फूना राम डबरी निर्माण से मिले इस अवसर को लेकर खुश हैं। उनके लिए खाली पड़ी जमीन का आजीविका के साधन में बदलना महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
सेवा संकल्प अभियान-2026
एक लाख रुपये के ऋण से शुरू किया डेयरी व्यवसाय, दो भैंसों से प्रतिदिन लगभग 20 लीटर दूध का उत्पादन
मां के संघर्ष और मेहनत से बेटियों के सपनों को मिली उड़ान, एक बेटी मेडिकल कॉलेज में तो दूसरी कर रही इंजीनियरिंग की पढ़ाई
छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना बनी सहारा, स्वरोजगार से परिवार की आर्थिक स्थिति हुई मजबूत
रायपुर, अक्टूबर 2026/ पति के निधन के बाद चार बेटियों की परवरिश, घर की जिम्मेदारी और उनके बेहतर भविष्य की चिंता। आर्थिक कठिनाइयों के बीच एक मां के सामने कई चुनौतियां थीं, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के आगे हार नहीं मानी। बेटियों को अच्छी शिक्षा दिलाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प के साथ उन्होंने स्वरोजगार की राह चुनी। यह प्रेरक कहानी सरगुजा जिले की श्रीमती इंदु लता गुप्ता की है, जिन्होंने छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना से मिले एक लाख रुपये के ऋण की सहायता से डेयरी व्यवसाय शुरू कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाया है। आज उनकी एक बेटी मेडिकल कॉलेज में पढ़ रही है, दूसरी इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त कर रही है और दो अन्य बेटियां भी अपनी स्कूली शिक्षा जारी रखे हुए हैं।
इंदु लता की सफलता केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता की कहानी नहीं, बल्कि एक मां के संघर्ष, साहस और बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के प्रति समर्पण की मिसाल है। सक्षम योजना से मिला आर्थिक सहयोग उनके लिए आजीविका का साधन बनने के साथ बेटियों की उच्च शिक्षा को आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण सहारा साबित हुआ है।
पति के निधन के बाद बढ़ीं जिम्मेदारियां, बेटियों की पढ़ाई जारी रखना था सबसे बड़ा संकल्प
इंदु लता गुप्ता बताती हैं कि पति के निधन के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। चार बेटियों की परवरिश और घर का खर्च चलाना आसान नहीं था। नियमित आय का कोई साधन नहीं होने के कारण परिवार की दैनिक जरूरतें पूरी करने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।
इन परिस्थितियों में उन्हें सबसे अधिक चिंता बेटियों की शिक्षा और उनके भविष्य की होती थी। वे चाहती थीं कि आर्थिक परेशानियों के कारण किसी भी बेटी की पढ़ाई अधूरी न रह जाए। इसके लिए उन्होंने स्वयं कुछ काम शुरू करने का निर्णय लिया, ताकि परिवार की आजीविका चलाने के साथ बेटियों की शिक्षा का खर्च भी उठा सकें।
इसी दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से उन्हें छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना के बारे में जानकारी मिली। योजना के अंतर्गत स्वरोजगार शुरू करने के लिए कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध होने की जानकारी ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने की नई राह दिखाई।
एक लाख रुपये के ऋण से खरीदीं दो भैंसें, डेयरी व्यवसाय से बदली आर्थिक स्थिति
इंदु लता गुप्ता ने सक्षम योजना के अंतर्गत एक लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया। इस राशि में अपनी बचत के पैसे मिलाकर उन्होंने दो भैंसें खरीदीं और डेयरी व्यवसाय की शुरुआत की।
शुरुआत में परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारना उनका मुख्य उद्देश्य था। उन्होंने पशुपालन को आजीविका का माध्यम बनाया और मेहनत के साथ डेयरी व्यवसाय को आगे बढ़ाया।
वर्तमान में उनकी दोनों भैंसों से प्रतिदिन लगभग 20 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। दूध उत्पादन से मिलने वाली आय परिवार के भरण-पोषण और बेटियों की पढ़ाई में सहायक बन रही है।
इंदु लता बताती हैं कि पहले घर की छोटी-छोटी जरूरतें पूरी करने के लिए भी आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। अब डेयरी व्यवसाय से आय का साधन उपलब्ध होने के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। इससे उन्हें बेटियों की शिक्षा और घरेलू आवश्यकताओं का खर्च उठाने में मदद मिल रही है।
मां की मेहनत लाई रंग, एक बेटी मेडिकल कॉलेज में तो दूसरी इंजीनियरिंग की कर रही पढ़ाई
इंदु लता गुप्ता के जीवन की सबसे बड़ी खुशी उनकी बेटियों की शिक्षा है। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने बेटियों की पढ़ाई को हमेशा प्राथमिकता दी।
डेयरी व्यवसाय से आर्थिक संबल मिलने के बाद उन्होंने बेटियों की शिक्षा को आगे बढ़ाया। आज उनकी एक बेटी मेडिकल कॉलेज में अध्ययनरत है और डॉक्टर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है। दूसरी बेटी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही है, जबकि दो अन्य बेटियां स्कूली शिक्षा प्राप्त कर रही हैं।
उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव की पहल और सीएससीएस के सहयोग से खिलाड़ियों को प्रेरित करने आयोजित हुआ कार्यक्रम
रायपुर. 11 अक्टूबर 2026. भारतीय महिला क्रिकेट टीम की अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खिलाड़ी हरलीन देओल ने खेल एवं युवा कल्याण विभाग की रायपुर आवासीय हॉकी अकादमी के खिलाड़ियों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने सभी खिलाड़ियों से आत्मीय संवाद किया और अपने खेल जीवन के अनुभव साझा किए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने वाली खिलाड़ी से मिलकर अकादमी के बच्चों में विशेष उत्साह देखने को मिला।
उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव और छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ की पहल पर हरलीन देओल हॉकी अकादमी आई थीं। राज्य के युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता प्राप्त करने वाली खिलाड़ी के अनुभवों से परिचित कराने तथा उन्हें अपने खेल जीवन में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए प्रेरित करने हरलीन अकादमी पहुंची थीं।
खिलाड़ियों को दिया सफलता का मंत्र
हरलीन देओल ने खिलाड़ियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अकादमी में उपलब्ध खेल सुविधाओं, प्रशिक्षण और प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन का पूरा लाभ उठाएं। उन्होंने बच्चों को बड़े लक्ष्य निर्धारित करने, अनुशासन के साथ नियमित अभ्यास करने और भारतीय टीम का हिस्सा बनकर देश के लिए खेलने का सपना देखने के लिए प्रोत्साहित किया।
उन्होंने बच्चों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा, "आप मेहनत कीजिए, अपने लक्ष्य के लिए पूरी लगन से प्रयास कीजिए। भगवान भी आपकी मदद करेंगे। अपने ऊपर विश्वास रखिए और देश के लिए खेलने का सपना जरूर देखिए।"
अपने खेल जीवन के अनुभव साझा करते हुए हरलीन देओल ने बताया कि सफलता प्राप्त करने के लिए प्रतिभा के साथ कड़ी मेहनत, धैर्य, अनुशासन और निरंतर अभ्यास आवश्यक है। उन्होंने खिलाड़ियों को अपनी कमियों को पहचानने, उनमें सुधार करने और हर दिन पहले से बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया।
मेंटर के रूप में हरलीन देओल के अनुभवों से मिली सीख
एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी से सीधे संवाद करने का अवसर युवा खिलाड़ियों के लिए विशेष महत्व रखता है। हरलीन देओल के अनुभवों से खिलाड़ियों को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने, दबाव की परिस्थितियों में आत्मविश्वास बनाए रखने, असफलताओं से सीखने और निरंतर अपने प्रदर्शन में सुधार करने की प्रेरणा मिली।
क्रिकेट और हॉकी अलग-अलग खेल हैं, लेकिन दोनों में सफलता के लिए अनुशासन, फिटनेस, मानसिक मजबूती, टीम भावना और दबाव में बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता महत्वपूर्ण है। हरलीन देओल के अनुभव ने हॉकी खिलाड़ियों को इन गुणों को अपने खेल में विकसित करने की प्रेरणा दी।
अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी से संवाद के माध्यम से खिलाड़ियों को यह समझने का अवसर मिला कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने के लिए केवल प्रतिभा ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि निरंतर मेहनत, सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और सही मार्गदर्शन भी आवश्यक हैं।
दूर-दराज के जनजातीय क्षेत्रों से आए खिलाड़ियों को भी मिला प्रोत्साहन
खेल एवं युवा कल्याण विभाग की आवासीय हॉकी अकादमी में प्रदेश के दूर-दराज के जनजातीय क्षेत्रों से आए प्रतिभाशाली बच्चे भी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। ये खिलाड़ी अपने घर-परिवार से दूर रहकर अपनी प्रतिभा को निखारने और भविष्य में देश के लिए खेलने का सपना साकार करने की दिशा में प्रयासरत हैं।
अकादमी में उपलब्ध प्रशिक्षण, खेल सुविधाओं और प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन से इन खिलाड़ियों को अपनी खेल क्षमता विकसित करने का अवसर मिल रहा है। ऐसे में हरलीन देओल जैसी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी से मुलाकात उनके लिए काफी प्रेरक है।
हरलीन देओल के अनुभवों ने इन बच्चों को यह संदेश दिया कि भौगोलिक दूरी या शुरुआती संसाधनों की सीमाएं उनके सपनों के रास्ते में बाधा नहीं बननी चाहिए। मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ वे भी बड़े लक्ष्य हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। ऐसे कार्यक्रम खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाने और उनमें देश के लिए खेलने की आकांक्षा को मजबूत करने में सहायक होते हैं।