ईश्वर दुबे
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Bhilai
‘नागरिक विज्ञान’ से जैव विविधता संरक्षण में भागीदारी करेंगे युवा
वन मंत्री श्री केदार कश्यप के दिशा-निर्देश में युवाओं को जैव विविधता संरक्षण से जोड़ने की पहल
जलवायु परिवर्तन, बर्ड वाचिंग और स्थानीय जैव विविधता के दस्तावेजीकरण का मिला प्रशिक्षण
रायपुर, 01 अक्टूबर 2026/ सेवा संकल्प अभियान के तहत जशपुर वनमंडल में युवाओं, स्थानीय समुदायों और वन अमले को जलवायु परिवर्तन एवं जैव विविधता संरक्षण से जोड़ने के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में युवाओं को ‘नागरिक विज्ञान’ से जोड़ते हुए स्थानीय जैव विविधता के वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण और संरक्षण का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यक्रम में वन मुख्यालय रायपुर के विषय विशेषज्ञ डॉ. अनिल श्रीवास्तव और कृषि महाविद्यालय, अम्बिकापुर के रिसर्च एसोसिएट श्री यमलेश निषाद ने जलवायु परिवर्तन के कारणों और पर्यावरण एवं जैव विविधता पर उसके प्रभावों की जानकारी दी। उन्होंने बदलती जलवायु परिस्थितियों में वन पारिस्थितिकी तंत्र के प्रभावी प्रबंधन और जैव विविधता संरक्षण के विभिन्न पहलुओं से प्रतिभागियों को अवगत कराया।
‘युवान’ पहल से जैव विविधता के दस्तावेजीकरण का प्रशिक्षण
फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्यूरिटी, रायपुर की ‘युवान’ पहल के माध्यम से युवाओं को स्थानीय जैव विविधता के वैज्ञानिक अवलोकन और दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया समझाई गई। ‘मेरा युवा भारत’, जशपुर के स्वयंसेवकों ने भी इसमें भागीदारी की। प्रशिक्षण के दौरान पक्षियों, तितलियों और सरीसृपों के पारिस्थितिक महत्व तथा उनके संरक्षण के संबंध में जानकारी दी गई। प्रकृति भ्रमण और बर्ड वाचिंग के माध्यम से प्रतिभागियों को स्थानीय वनस्पतियों एवं जीव-जंतुओं की पहचान, क्षेत्रीय अवलोकन और उनके अभिलेखीकरण का व्यावहारिक अनुभव भी मिला। कार्यक्रम में जशपुर के वनमंडलाधिकारी श्री शशि कुमार सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, विषय विशेषज्ञ और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
80 हजार रुपए के डिंब समूह पर 70 हजार रुपए की सब्सिडी, 10 रेशम पालकों को मिला सीधा लाभ
रायपुर, 1 अक्टूबर 2026/ बीजापुर जिले के मिन्कापल्ली क्षेत्र में तसर रेशम उत्पादन ग्रामीण परिवारों के लिए स्वरोजगार और अतिरिक्त आय का जरिया बन रहा है। तसर रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए क्षेत्र के 10 रेशम पालकों को कुल 5 हजार स्वस्थ डिंब समूह वितरित किए गए हैं। शासन की सब्सिडी से हितग्राहियों को कम लागत में गुणवत्तापूर्ण कोसा उत्पादन का अवसर मिला है।
तसर रेशम उत्पादन के लिए ये स्वस्थ डिंब समूह बीएसएमटीसी वरम्, आंध्र प्रदेश से प्राप्त किए गए हैं। इनका कुल मूल्य लगभग 80 हजार रुपए है, जिसमें शासन द्वारा 70 हजार रुपए की सब्सिडी प्रदान की गई है। हितग्राहियों को इसके लिए केवल 10 हजार रुपए का अंशदान ही देना पड़ा। इस सहायता से रेशम पालकों पर आर्थिक भार कम होने के साथ गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के लिए आवश्यक डिंब समूह की उपलब्धता भी सुनिश्चित हुई है।
गुणवत्तापूर्ण कोसा उत्पादन से बढ़ेगी आमदनी
स्वस्थ डिंब समूह मिलने से तसर रेशम पालकों को बेहतर गुणवत्ता का कोसा उत्पादन करने में मदद मिलेगी, जिससे उनकी आमदनी बढ़ने की उम्मीद है। योजना से लाभान्वित श्री कामेश्वर ने बताया कि शासन की सब्सिडी से रेशम पालन के लिए आवश्यक सामग्री प्राप्त करना आसान हुआ है। इससे बेहतर उत्पादन के साथ परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का अवसर मिलेगा। मिन्कापल्ली क्षेत्र में तसर रेशम उत्पादन को मिल रहा प्रोत्साहन ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार और अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध कराकर उनकी आजीविका को मजबूती दे रहा है।
वन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में संकट के समय तेन्दूपत्ता संग्राहकों को मिला बड़ा आर्थिक संबल
रायपुर, 01 अक्टूबर 2026/ प्रदेश के तेन्दूपत्ता संग्राहक परिवारों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में राजमोहिनी देवी तेन्दूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत 169 परिवारों को 2 करोड़ 42 लाख 40 हजार रुपए की सहायता प्रदान की गई है। वन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा सहायता राशि सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में डिजिटल माध्यम से अंतरित की गई।
रायगढ़ जिले के चिमटापानी समिति के मिथिलेश सिदार और दंतेवाड़ा जिले के नकुलनार समिति के गल्ले वीटी के बैंक खातों में राशि अंतरित कर डिजिटल भुगतान की शुरुआत की गई।योजना के तहत दुर्घटना मृत्यु के 4 प्रकरणों में 4-4 लाख रुपए तथा सामान्य मृत्यु या स्थायी विकलांगता के 103 प्रकरणों में 2-2 लाख रुपए की सहायता स्वीकृत की गई। इसी तरह 50 से 59 वर्ष आयु वर्ग में दुर्घटना मृत्यु या स्थायी विकलांगता के 4 प्रकरणों में 75-75 हजार रुपए और सामान्य मृत्यु के 58 प्रकरणों में 30-30 हजार रुपए की सहायता प्रदान की गई।
राजमोहिनी देवी तेन्दूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना में 18 से 50a वर्ष आयु वर्ग में परिवार के मुखिया की सामान्य मृत्यु या स्थायी विकलांगता पर 2 लाख रुपए, दुर्घटना मृत्यु पर 4 लाख रुपए तथा आंशिक विकलांगता पर एक लाख रुपए की सहायता का प्रावधान है।
इसी प्रकार 50 से 59 वर्ष आयु वर्ग में सामान्य मृत्यु पर 30 हजार रुपए, दुर्घटना मृत्यु या स्थायी विकलांगता पर 75 हजार रुपए तथा आंशिक विकलांगता पर 37 हजार 500 रुपए की सहायता दी जाती है। योजना के माध्यम से तेन्दूपत्ता संग्रहण से जुड़े परिवारों को मृत्यु अथवा विकलांगता जैसी परिस्थितियों में सीधे आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जा रही है।
राज्य लघु वनोपज संघ के मुख्य कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में संघ के अध्यक्ष श्री रूपसाय सलाम, उपाध्यक्ष श्री यज्ञदत्त शर्मा और प्रबंध संचालक श्रीमती संजीता गुप्ता की उपस्थिति में राशि जारी की गई।
‘प्रोजेक्ट सियान आशीष सेवा’ और ‘प्रोजेक्ट सियान श्रम सम्मान’ का हुआ शुभारम्भ
सियान सेवा महाकुंभ में 80 वर्ष से अधिक आयु के 1810 वरिष्ठजनों को देशभर में यात्रा के लिए निशुल्क बस पास
समाज कल्याण की योजनाओं से प्रदेश के 15.90 लाख वरिष्ठजन लाभान्वित; मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना से 2.55 लाख ने की आध्यात्मिक यात्रा
रायपुर, 1 अक्टूबर 2026/ अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत समाज कल्याण विभाग द्वारा रायपुर के बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम, बूढ़ापारा में सियान सेवा महाकुंभ आयोजित किया गया। समाज कल्याण तथा महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने वरिष्ठजनों को अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस की शुभकामनाएं दीं और उनसे संवाद किया। कार्यक्रम में 4 हजार से अधिक वरिष्ठजन लाभान्वित हुए।
महाकुंभ में नई सियान आशीष सेवा योजना के अंतर्गत 80 वर्ष से अधिक आयु के 1810 वरिष्ठ नागरिकों को सम्पूर्ण भारत में निशुल्क यात्रा के लिए बस पास प्रदान किए गए। इसके साथ ही आवश्यकता के अनुसार 2 हजार छड़ियां, एक हजार श्रवण यंत्र और 20 ट्राइसाइकिल वितरित की गईं। बस पास से वरिष्ठजनों को यात्रा में सुविधा मिलेगी, जबकि सहायक उपकरण उनकी रोजमर्रा की गतिविधियों को सुगम बनाएंगे।
मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने अपने संबोधन में कहा कि वरिष्ठजन हमारी सांस्कृतिक विरासत और जीवन अनुभव के संवाहक हैं। उन्होंने अपने परिश्रम से परिवार और समाज को मजबूत आधार दिया है। उनका सम्मान करने के साथ उनके अनुभव को समाज के विकास में भी स्थान देना चाहिए। उन्होंने कहा, “वरिष्ठजन केवल कल की विरासत नहीं हैं, बल्कि आज के विकास के सहभागी हैं।” विकसित भारत के संकल्प और नवा अंजोर-अंजोर 2047 की सोच में वरिष्ठजनों की सक्रिय भागीदारी महत्वपूर्ण है।
श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का वृद्धजन कल्याण का संकल्प पेंशन तक सीमित नहीं है। वरिष्ठजनों की स्वास्थ्य सुरक्षा, देखभाल, आवागमन, सामाजिक सहभागिता और गरिमापूर्ण जीवन पर भी ध्यान दिया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना के लिए 400 करोड़ रुपये और मुख्यमंत्री पेंशन योजना के लिए 450 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है। विभाग की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से वर्तमान में प्रदेश के 15,90,080 वरिष्ठजन लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि हर पात्र हितग्राही तक सहायता समय पर, पारदर्शिता के साथ और सम्मानपूर्वक पहुंचे।
मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना का उल्लेख करते हुए मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि इसके माध्यम से अब तक 2 लाख 55 हजार 845 वरिष्ठजनों को आध्यात्मिक यात्रा का लाभ मिला है। तीर्थयात्रा कई वरिष्ठजनों की जीवनभर की इच्छा होती है और यह योजना उन्हें उस इच्छा को पूरा करने का अवसर देती है। उन्होंने कहा कि सियान आशीष सेवा योजना के बस पास भी वरिष्ठजनों की यात्रा को सुगम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने सियान हेल्पलाइन 155326 की जानकारी देते हुए कहा कि आवश्यकता के समय वरिष्ठजनों को सहायता और भरोसा मिलना चाहिए। उन्होंने वृद्धाश्रमों, अटल वयो अभ्युदय योजना, प्रशामक देखरेख गृह और सियान गुड़ी जैसी व्यवस्थाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि विभाग का प्रयास वरिष्ठजनों को सुरक्षित, आत्मीय और सम्मानपूर्ण वातावरण उपलब्ध कराना है। उनका ध्यान ऐसे समाज के निर्माण पर है, जहां वरिष्ठजन स्वस्थ और सक्रिय रहें तथा परिवार और समुदाय से जुड़े रहें।
उन्होंने कहा कि योजनाओं की सफलता केवल आंकड़ों से नहीं, बल्कि वरिष्ठजनों के जीवन में आई सुविधा और उनके चेहरे की मुस्कान से आंकी जानी चाहिए। उन्होंने सभी से सुरक्षा, सहभागिता और गरिमा के तीन संकल्प लेने का आह्वान किया। श्रीमती राजवाड़े ने कहा, “आपका अनुभव हमारी शक्ति है, आपकी गरिमा हमारी जिम्मेदारी है और आपकी सहभागिता विकसित छत्तीसगढ़ की पहचान है।”
भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण और छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग के बीच महत्वपूर्ण एमओयू
संरक्षित स्मारकों और पुरातात्विक स्थलों पर पेयजल, विश्राम स्थल, कैफेटेरिया, पार्किंग, साइट म्यूजियम सहित विकसित होंगी आधुनिक सुविधाएं
ऐतिहासिक स्वरूप और मौलिकता को सुरक्षित रखते हुए विरासत पर्यटन को मिलेगा नया आयाम
रायपुर, 01 अक्टूबर 2026/ छत्तीसगढ़ की समृद्ध पुरातात्विक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ प्रदेश में विरासत पर्यटन को नई दिशा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है। भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (एएसआई), भारत सरकार और संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के मध्य बुधवार को महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) सम्पन्न हुआ। इस समझौते के माध्यम से प्रदेश के संरक्षणाधीन स्मारकों और पुरातात्विक स्थलों पर पर्यटकों के लिए आवश्यक सुविधाओं एवं अधोसंरचना का सुनियोजित विकास किया जाएगा।
समझौते के तहत छत्तीसगढ़ शासन द्वारा भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण के अधिकारियों के परामर्श से संरक्षणाधीन स्मारकों एवं पुरातात्विक स्थलों के लिए पर्यटक सुविधाओं के समुचित विकास की योजनाएं तैयार की जाएंगी। इन योजनाओं के माध्यम से पुरातात्विक स्थलों पर आने वाले पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ पर्यटन अनुभव को अधिक सुविधाजनक बनाने पर जोर दिया जाएगा।
पर्यटकों के लिए विकसित की जाने वाली सुविधाओं में शौचालय, स्वच्छ पेयजल, विश्राम स्थल, कैफेटेरिया, पार्किंग और क्लॉक रूम जैसी बुनियादी सुविधाओं के साथ सूचना केंद्र, साइट म्यूजियम और साइनेज भी शामिल होंगे। विशेष रूप से समावेशी पर्यटन को ध्यान में रखते हुए ब्रेल साइनेज और टैक्टाइल पाथवे विकसित करने का भी प्रावधान किया गया है। इसके अलावा लैंडस्केपिंग सहित पर्यटकों की आवश्यकता के अनुरूप अन्य अधोसंरचनाओं का भी विकास किया जा सकेगा।
पुरातात्विक धरोहरों की मौलिकता रहेगी सर्वोपरि
विकास कार्यों के दौरान ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व के स्मारकों की मौलिकता और उनके मूल स्वरूप को सुरक्षित रखने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। प्रस्तावित विकास कार्यों की डिजाइन, निर्माण सामग्री एवं संरचना इस प्रकार निर्धारित की जाएगी कि संबंधित स्मारक को किसी भी प्रकार की क्षति न पहुंचे। सभी कार्य पुरातत्त्वीय अधिनियमों और नियमों के अनुरूप किए जाएंगे। परियोजनाओं का क्रियान्वयन भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण की स्वीकृति प्राप्त होने के बाद ही किया जाएगा।
केंद्र, राज्य, सीएसआर और पीपीपी से जुटाए जा सकेंगे संसाधन
पुरातात्विक स्थलों पर प्रस्तावित पर्यटक सुविधाओं एवं अधोसंरचना विकास के लिए संसाधन जुटाने की भी व्यापक व्यवस्था की गई है। परियोजनाओं के लिए केंद्रीय वित्तीय सहायता के साथ राज्य शासन की एजेंसियों, कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) तथा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के माध्यम से संसाधन जुटाए जा सकेंगे। विकसित सुविधाओं के रखरखाव और प्रबंधन की जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ शासन अथवा शासन द्वारा अधिकृत एजेंसी की होगी।
योजना एवं क्रियान्वयन समिति करेगी निगरानी
विकास योजनाओं को प्रभावी ढंग से धरातल पर उतारने और उनके क्रियान्वयन की सतत निगरानी के लिए “योजना एवं क्रियान्वयन समिति” का गठन किया जाएगा। यह समिति परियोजनाओं की योजना तैयार करने से लेकर विकास एवं प्रबंधन तक विभिन्न चरणों की निगरानी करेगी। इससे संरक्षण और पर्यटन सुविधाओं के विकास के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकेगा।
विरासत पर्यटन को मिलेगी नई दिशा
यह समझौता ज्ञापन प्रदेश की पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण के साथ पर्यटक सुविधाओं के विस्तार और विरासत पर्यटन के समन्वित विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इससे पुरातात्विक महत्व के स्थलों पर पर्यटकों के लिए आवश्यक सुविधाओं के विकास का मार्ग प्रशस्त होगा और प्रदेश की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को पर्यटन के माध्यम से व्यापक पहचान दिलाने में सहायता मिलेगी।
एमओयू के अवसर पर भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण, भारत सरकार के महानिदेशक के प्रतिनिधि के रूप में मध्य क्षेत्र के निदेशक डॉ. टी. अरुण राज तथा रायपुर मंडल के अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ. एम. कलिमुथु उपस्थित रहे। संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन की ओर से संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर संचालक पुरातत्त्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय डॉ. संजय कन्नौजे सहित विभागीय अधिकारी भी उपस्थित रहे।
पीएमईजीपी से शुरू किया पैक्ड पेयजल प्लांट, खुद बनीं आत्मनिर्भर और 10 लोगों को दिया रोजगार
(एल.डी. मानिकपुरी सहायक जनसंपर्क अधिकारी)
कोरिया / सेवा संकल्प अभियान केवल सेवा कार्यों तक सीमित नहीं, बल्कि जनभागीदारी से आत्मनिर्भर और सशक्त समाज के निर्माण का संकल्प भी है। इसी भावना को ग्राम डुमरिया की श्रीमती मुन्नी बाई राजवाड़े अपने उद्यम के माध्यम से साकार कर रही हैं। कभी खेतों में मजदूरी और छोटे-मोटे काम करके परिवार चलाने वाली मुन्नी बाई आज सरकारी योजनाओं के सहयोग से सफल महिला उद्यमी बन चुकी हैं। बिहान योजना से स्वयं सहायता समूह का संबल मिला, प्रशिक्षण से आत्मविश्वास बढ़ा और प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) ने उनके सपने को कारोबार में बदलने का आर्थिक आधार दिया। आज वे स्वयं आत्मनिर्भर हैं और करीब 10 लोगों को रोजगार भी दे रही हैं।
’समूह से जुड़कर मिली उद्यम की राह’’
मुन्नी बाई बिहान योजना के अंतर्गत महालक्ष्मी महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आजीविका गतिविधियों का प्रशिक्षण मिला। रायपुर में प्रशिक्षण के दौरान उन्हें पीएमईजीपी की जानकारी मिली। योजना से प्रभावित होकर उन्होंने जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र पहुंचकर विस्तृत जानकारी ली और अपना व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया।
परिवार की सीमित आर्थिक स्थिति के बावजूद उन्होंने गांव में जमीन लेकर पैक्ड पेयजल प्लांट स्थापित करने का फैसला किया। कई महीनों की प्रक्रिया के बाद पीएमईजीपी के तहत करीब 25 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। ऋण एवं उपलब्ध सहायता से शेड, बाउंड्री और बोरवेल सहित आवश्यक व्यवस्था तैयार की गई। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने ‘एम हेल्प वॉटर’ पैक्ड पेयजल प्लांट शुरू किया।
एक उद्यम से 10 लोगों को रोजगार
मुन्नी बाई का व्यवसाय अब केवल उनके परिवार की आजीविका तक सीमित नहीं है। प्लांट में उनके पति, बेटा-बेटी, स्वयं सहायता समूह की महिलाएं तथा अन्य कर्मचारी कार्य कर रहे हैं।करीब 10 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है और कर्मचारियों को 6 से 9 हजार रुपये तक प्रतिमाह वेतन दिया जा रहा है। पानी की गुणवत्ता जांच से लेकर बोतल भरने और पैकेजिंग तक के कार्य के लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया है। इससे ग्रामीण महिलाओं को गांव में ही रोजगार और नए कौशल का अवसर मिला है।
गांव से कई जिलों तक पहुंचा कारोबार
मुन्नी बाई के अनुसार पिछले एक वर्ष में करीब एक से डेढ़ लाख पानी की बोतलों की पैकिंग की जा चुकी है। बैकुण्ठपुर के साथ मनेंद्रगढ़, चिरमिरी, अंबिकापुर, प्रतापपुर, विश्रामपुर, सूरजपुर, भैयाथान और कुदरगढ़ सहित आसपास के क्षेत्रों में ‘एम हेल्प वॉटर’ की आपूर्ति की जा रही है।
महालक्ष्मी महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद मिली वित्तीय सहायता, बैंक लिंकेज, प्रशिक्षण और उद्योग विभाग के अभिसरण से पीएमईजीपी का सहयोग उनके उद्यम की सफलता में महत्वपूर्ण साबित हुआ।
मुन्नी बाई प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि पीएमईजीपी जैसी योजनाओं ने उन्हें अपना व्यवसाय शुरू करने का अवसर दिया। सरकारी सहयोग और मार्गदर्शन से आज वे अपने पैरों पर खड़ी हैं और दूसरों को भी रोजगार दे पा रही हैं।
मुन्नी बाई की कहानी बताती है कि सरकारी योजनाओं का लाभ जब जनभागीदारी, संकल्प और मेहनत से जुड़ता है, तो उसका प्रभाव एक परिवार से आगे बढ़कर पूरे समाज तक पहुंचता है। एक महिला आत्मनिर्भर बनती है, रोजगार के अवसर पैदा करती है और गांव की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहभागी बनती है।
सेवा संकल्प अभियान की भावना भी यही है
सेवा के साथ जनभागीदारी, आत्मनिर्भरता विकसित समाज के निर्माण में हर व्यक्ति की भागीदारी। मुन्नी बाई इसी संकल्प की एक प्रेरक तस्वीर हैं।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय देवेंद्र नगर चौक से लाल चौक तक नशामुक्ति पदयात्रा में हुए शामिल
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर नशामुक्त समाज के निर्माण का दिया संदेश
स्वयं नशे से दूर रहें, दूसरों को भी नशामुक्त जीवन के लिए करें प्रेरित - मुख्यमंत्री श्री साय
सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत 25 सितंबर से 2 अक्टूबर तक आयोजित किया जा रहा नशामुक्ति पदयात्रा सप्ताह
युवा शक्ति को नशे से बचाकर शिक्षा, कौशल और रोजगार से जोड़ना हमारी प्राथमिकता : मुख्यमंत्री श्री साय
27 वर्षों से नशामुक्ति, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के लिए निकाली जा रही पदयात्रा की मुख्यमंत्री ने की सराहना
रायपुर सितम्बर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर में देवेंद्र नगर चौक से लाल चौक तक आयोजित नशामुक्ति पदयात्रा में शामिल हुए। बड़ी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राओं, युवाओं, महिलाओं, जनप्रतिनिधियों और नागरिकों के साथ मुख्यमंत्री श्री साय ने पदयात्रा कर नशामुक्त और स्वस्थ समाज के निर्माण का संदेश दिया। पदयात्रा के समापन पर मुख्यमंत्री श्री साय ने लाल चौक स्थित लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नशामुक्त और स्वस्थ छत्तीसगढ़ ही विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव बनेगा। नशा केवल किसी एक व्यक्ति को प्रभावित नहीं करता, बल्कि उसका दुष्प्रभाव पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है। विशेष रूप से युवाओं को नशे से बचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने प्रदेशवासियों से स्वयं नशे से दूर रहने और अपने आसपास के लोगों को भी नशामुक्त जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करने की अपील की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि युवा किसी भी प्रदेश की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं। युवा स्वस्थ होंगे, शिक्षित और कुशल होंगे तथा अपनी ऊर्जा सकारात्मक कार्यों में लगाएंगे तो प्रदेश तेजी से आगे बढ़ेगा। राज्य सरकार युवाओं के लिए शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार, स्वरोजगार, खेल और उद्यमिता के अवसरों का विस्तार कर रही है। हमारा प्रयास है कि छत्तीसगढ़ का प्रत्येक युवा अपनी प्रतिभा और क्षमता का उपयोग अपने परिवार, समाज और प्रदेश की प्रगति में करे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती 25 सितम्बर से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्टूबर तक नशामुक्ति पदयात्रा सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। महात्मा गांधी ने संयम, स्वच्छता और स्वस्थ जीवन का संदेश दिया था। ऐसे में नशामुक्ति का यह अभियान उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का भी सशक्त माध्यम है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अपने सार्वजनिक जीवन में सेवा को सर्वोपरि रखा है। 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में प्रारंभ हुई उनकी शासन की यात्रा के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर देशभर में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत विभिन्न जनसेवा गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। अभियान के माध्यम से स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य, सामाजिक जागरूकता और जनसेवा के विभिन्न कार्यों में व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।
उन्होंने कहा कि इसी अभियान के अंतर्गत प्रधानमंत्री श्री मोदी के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना के साथ प्रदेशभर में ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। साथ ही युवाओं को सेवा और राष्ट्र निर्माण के भाव से जोड़ने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रम किए जा रहे हैं। गुजरात के वडनगर से निकले बाइक राइडर्स का रायपुर पहुंचने पर स्वागत किया गया। इस यात्रा में बस्तर के युवा भी उत्साहपूर्वक सहभागी बने।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर लंबे समय तक नक्सलवाद की समस्या से प्रभावित रहा, जिसके कारण वहां विकास की गति बाधित हुई। आज क्षेत्र में शांति और विकास के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, संचार तथा रोजगार के अवसरों के विस्तार पर तेजी से कार्य हो रहा है। उन्होंने कहा कि युवाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री की मौजूदगी में रोजगार, डिजिटल गवर्नेंस और कौशल विकास की दिशा में तीन महत्वपूर्ण पहल
नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण के नवनियुक्त उप अभियंताओं को मुख्यमंत्री ने सौंपे नियुक्ति पत्र
चिप्स और कॉमन सर्विस सेंटर के बीच हुआ एमओयू, नागरिकों तक डिजिटल सेवाओं की पहुंच होगी और आसान
कॉमन सर्विस सेंटर और सेवा सेतु केंद्रों में होगी एकरूपता, एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगी अधिक सेवाएं
सेवा सेतु के माध्यम से 38 विभागों की 907 सेवाएं ऑनलाइन, 16 हजार से अधिक केंद्रों से मिल रही सुविधा
नवा रायपुर में स्थापित होगा नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, 10 एकड़ भूमि आवंटन का पत्र सौंपा
लगभग 250 करोड़ रुपए की लागत से बनेगा संस्थान, प्रतिवर्ष करीब 4 हजार युवाओं को मिलेगा आधुनिक कौशल प्रशिक्षण
रायपुर, सितम्बर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में आज मंत्रालय महानदी भवन में रोजगार, डिजिटल गवर्नेंस और कौशल विकास के क्षेत्र में तीन महत्वपूर्ण पहलों को आगे बढ़ाया गया। मुख्यमंत्री श्री साय ने नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण में चयनित युवा उप अभियंताओं को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। नागरिकों तक शासकीय डिजिटल सेवाओं की पहुंच को अधिक व्यापक और सुविधाजनक बनाने के लिए छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसायटी (चिप्स) और कॉमन सर्विस सेंटर के बीच एमओयू किया गया। साथ ही नवा रायपुर में प्रस्तावित नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की स्थापना के लिए 10 एकड़ भूमि आवंटन का पत्र सौंपा गया।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा कि युवाओं को रोजगार के अवसर, नागरिकों को सरल और पारदर्शी शासकीय सेवाएं तथा नई पीढ़ी को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप आधुनिक कौशल उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। सरकार रोजगार सृजन, कौशल विकास, डिजिटल गवर्नेंस और आधुनिक अधोसंरचना को एक-दूसरे से जोड़कर विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव तैयार कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन की योजनाओं और सेवाओं का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होता है, जब उनका लाभ नागरिकों तक आसानी और समयबद्धता के साथ पहुंचे। तकनीक के माध्यम से शासन और नागरिकों के बीच की दूरी कम की जा रही है। वहीं युवाओं को सरकारी सेवाओं के साथ उद्योग, निजी क्षेत्र, उद्यमिता और कौशल आधारित रोजगार के लिए भी तैयार किया जा रहा है।
नवा रायपुर के निर्माण में युवा अभियंताओं की होगी महत्वपूर्ण भूमिका
मुख्यमंत्री श्री साय ने नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण में उप अभियंता के पद पर चयनित युवा अभियंताओं को नियुक्ति पत्र प्रदान कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने नवनियुक्त अभियंताओं के अभिभावकों को भी बधाई दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नवा रायपुर भविष्य के छत्तीसगढ़ की आकांक्षाओं का शहर है। यहां आधुनिक अधोसंरचना, गुणवत्तापूर्ण नागरिक सुविधाओं और योजनाबद्ध विकास को निरंतर विस्तार दिया जा रहा है। नवनियुक्त अभियंताओं को इस आधुनिक शहर के निर्माण और विकास में योगदान देने का महत्वपूर्ण अवसर मिला है।
उन्होंने युवा अभियंताओं से कहा कि वे अपने ज्ञान और तकनीकी दक्षता का उपयोग जनहित में करते हुए पूरी निष्ठा, ईमानदारी और कर्तव्यपरायणता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें। निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, समयबद्धता और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। विभिन्न विभागों में नियमित भर्तियां की जा रही हैं और भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी तथा समयबद्ध बनाया गया है। सभी युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाएं केवल सरकारी नौकरियों तक सीमित नहीं हो सकतीं, इसलिए राज्य सरकार उद्योग, निजी क्षेत्र, उद्यमिता, स्टार्टअप और कौशल विकास के माध्यम से भी व्यापक अवसर तैयार कर रही है।
उन्होंने कहा कि नई औद्योगिक नीति 2024-30 में रोजगार सृजन को विशेष प्राथमिकता दी गई है। इसके अंतर्गत अब तक 8 लाख 23 हजार करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्तावों के एमओयू हुए हैं और अनेक परियोजनाओं पर धरातल पर काम भी प्रारंभ हो चुका है। आने वाले वर्षों में लगभग पौने दो लाख युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने का लक्ष्य है। स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने वाले उद्योगों के लिए औद्योगिक नीति में विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है।
पीएमईजीपी से शुरू किया बेकरी उद्योग, खुद बने आत्मनिर्भर और 10 लोगों को दिया रोजगार
दूसरे की बेकरी में काम करने से अपने कारोबार तक का सफर, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का जताया आभार
(एल. डी.मानिकपुरी, सहायक जनसंपर्क अधिकारी)
रायपुर, सितंबर 2026/कोरिया में अब कई परिवारों की सुबह सिर्फ ‘गुड मॉर्निंग’ संदेश से नहीं, बल्कि ‘गुड मॉर्निंग बेकरी’ के ताजा ब्रेड, टोस्ट, बिस्किट और केक से भी होती है। ग्राम ओड़गी के दिलीप और सावित्री गुप्ता की जोड़ी ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) का लाभ उठाकर अपने सपने को कारोबार में बदला है।कभी आर्थिक कठिनाइयों से जूझने वाला यह परिवार आज आत्मनिर्भर है और अपने साथ करीब 10 लोगों को रोजगार दे रहा है।
मोदी की योजना ने दिखाई राह, सपने को मिला आकार
स्नातक तक पढ़ी सावित्री गुप्ता और दसवीं तक पढ़े उनके पति दिलीप के लिए अपना व्यवसाय शुरू करना आसान नहीं था। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाले दिलीप करीब पांच वर्षों तक दूसरी बेकरी में काम करते रहे। इस दौरान उन्होंने बेकरी उत्पादन, गुणवत्ता, बाजार और ग्राहकों की जरूरतों को करीब से समझा। यही अनुभव आगे चलकर उनके अपने कारोबार की ताकत बना।
वर्ष 2023-24 में बैकुंठपुर विधायक श्री भैयालाल राजवाड़े के माध्यम से दिलीप को पीएमईजीपी योजना की जानकारी मिली। योजना को समझने के बाद दिलीप और सावित्री ने तय किया कि अब दूसरों के लिए काम करने के बजाय अपना रोजगार खड़ा किया जाए।
पीएमईजीपी ने दिया पूंजी का संबल
सावित्री ने पीएमईजीपी के माध्यम से करीब 10 लाख रुपये का ऋण लेकर अपनी जमीन पर बेकरी उद्योग स्थापित किया। परिवार ने भी करीब 2 से 3 लाख रुपये की राशि लगाई। करीब 10 से 12 हजार वर्गफीट क्षेत्र में ‘गुड मॉर्निंग बेकरी’ की शुरुआत हुई। यहां केक, बिस्किट, मीठा गोला, ब्रेड, टोस्ट सहित विभिन्न बेकरी उत्पाद तैयार किए जाते हैं। कच्चा माल अनूपपुर, मनेंद्रगढ़ और बैकुण्ठपुर सहित आसपास के क्षेत्रों से मंगाया जाता है।
दिलीप का अनुभव, सावित्री का संकल्प बना सफलता की ताकत
इस कारोबार की खासियत सिर्फ सरकारी ऋण से शुरू होना नहीं, बल्कि दिलीप के वर्षों के अनुभव और सावित्री के आत्मविश्वास की साझेदारी भी है। दिलीप ने जहां बेकरी के काम का व्यावहारिक अनुभव कारोबार में लगाया, वहीं सावित्री ने परिवार और व्यवसाय की जिम्मेदारियों को संभालते हुए उद्यम को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दोनों की मेहनत का परिणाम है कि गांव में शुरू हुआ कारोबार अब बैकुण्ठपुर के साथ कुदरगढ़, खर्रा और सूरजपुर तक अपने उत्पाद पहुंचा रहा है।
एक परिवार की आत्मनिर्भरता से 10 परिवारों की आजीविका तक
पीएमईजीपी से शुरू हुआ यह उद्योग अब केवल दिलीप और सावित्री के परिवार की आय का साधन नहीं है। बेकरी में करीब 10 लोगों को रोजगार मिल रहा है। यानी सरकारी योजना से मिले एक अवसर ने एक परिवार को आत्मनिर्भर बनाने के साथ दूसरे जरूरतमंद परिवारों के लिए भी रोजगार का रास्ता खोला है।
सावित्री कहती हैं कि पीएमईजीपी ने उनकी तकदीर और तस्वीर दोनों बदल दी। कभी अपने व्यवसाय की कल्पना करना कठिन था, लेकिन योजना से मिले आर्थिक सहयोग ने उस सपने को हकीकत में बदल दिया। आज वे स्वयं आत्मनिर्भर होने के साथ दूसरों को रोजगार देने की स्थिति में हैं।
मोदी जी की योजना ने हमें अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर दिया
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सावित्री कहती हैं कि पीएमईजीपी जैसी योजनाएं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए आगे बढ़ने का अवसर देती हैं। सही मार्गदर्शन, सरकारी सहयोग और मेहनत से स्वरोजगार को सफल व्यवसाय में बदला जा सकता है।
दिलीप कहते हैं कि योजना का लाभ मिलने के साथ समय का सही उपयोग, अपने काम का अनुभव और निरंतर मेहनत उनकी सफलता के प्रमुख आधार रहे हैं। दूसरे की बेकरी में काम करते हुए जो सीखा, उसे अपने व्यवसाय में लगाया और आज उसी अनुभव ने उन्हें अपनी पहचान बनाने में मदद की है।
जोड़ी ने मेहनत की कई परिवारों की सुबह ‘गुड मॉर्निंग’ से
दिलीप और सावित्री की यह जोड़ी सेवा संकल्प की उस भावना को भी मजबूत करती है, जिसमें सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर व्यक्ति स्वयं आत्मनिर्भर बने और आगे बढ़कर दूसरों के लिए भी रोजगार व आजीविका का माध्यम तैयार करे। एक योजना ने अवसर दिया, एक जोड़ी ने मेहनत की और आज उस मेहनत से कई परिवारों की सुबह ‘गुड मॉर्निंग’ हो रही है।
धमतरी का बेंद्रानवागांव बना ‘हर घर जल’ प्रमाणीकृत ग्राम
रायपुर,30 सितंबर 2026/जब पानी घर के आंगन और चौखट तक पहुँचता है, तो केवल एक जीवनदायिनी सुविधा ही नहीं बदलती, बल्कि गाँव की दिनचर्या, स्वच्छता और पूरे ग्रामीण जनजीवन की तस्वीर बदल जाती है। सेवा संकल्प अभियान के तहत शासन की कल्याणकारी योजनाओं को जन-भागीदारी के ज़रिए धरातल पर उतारने की एक अनुकरणीय मिसाल धमतरी विकासखंड के ग्राम बेंद्रानवागांव से सामने आई है। दूर-दराज से पानी ढोने की मजबूरी को पीछे छोड़ते हुए बेंद्रानवागांव अब आधिकारिक रूप से ‘हर घर जल’ प्रमाणीकृत ग्राम घोषित हो चुका है। इसके साथ ही यह धमतरी विकासखंड का 137वां प्रमाणीकृत गाँव बन गया है। यह उपलब्धि महज़ एक औपचारिक प्रमाण-पत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि गाँव के प्रत्येक परिवार तक नल के माध्यम से शुद्ध पेयजल की पहुँच और इस व्यवस्था को निरंतर बनाए रखने के सामूहिक संकल्प की प्रतीक है।
इस सफलता की नीव प्रशासनिक दक्षता और जन-भागीदारी के बेहतरीन तालमेल से रखी गई। योजना का कार्य पूर्ण होने के बाद ग्राम पंचायत के सरपंच ने 24 सितंबर 2026 को लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को इसकी आधिकारिक सूचना दी। इसके उपरांत 30 सितंबर को गाँव में एक विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया गया, जिसमें पंचायत के प्रतिनिधियों, सचिव, गणमान्य नागरिकों और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सहायक अभियंता ने ग्राम सभा में उपस्थित होकर योजना के उद्देश्यों, जलापूर्ति व्यवस्था, संचालन और इसके रखरखाव की बारीकियों को ग्रामीणों के साथ साझा किया। ग्रामीणों ने इस नई व्यवस्था पर पूर्ण संतोष व्यक्त किया, जिसके बाद सरपंच द्वारा विभाग को प्रमाणीकरण प्रमाण-पत्र सौंपा गया और विभाग की ओर से योजना का हस्तांतरण पत्र ग्राम पंचायत को जारी कर दिया गया।
बेंद्रानवागांव की इस विकास यात्रा की सबसे खास बात सुविधा से आगे बढ़कर स्वावलंबन की ओर बढ़ना है। अब इस जलापूर्ति व्यवस्था के संचालन और संधारण की पूरी कमान गाँव स्वयं संभालेगा। इसके लिए ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति (पानी समिति) को जिम्मेदारी सौंपी गई है। योजना को दीर्घकालिक और आत्मनिर्भर बनाए रखने के उद्देश्य से पंचायत ने प्रति परिवार 70 रुपये प्रतिमाह जल कर निर्धारित किया है। इस राशि से बिजली बिल के भुगतान के साथ-साथ गाँव में ही कार्यरत पंप ऑपरेटर, इलेक्ट्रिशियन और प्लम्बर की सेवाओं का भुगतान किया जाएगा।
शासन की पहल पर हर घर तक पहुँचा नल का जल अब बेंद्रानवागांव में सामुदायिक सहभागिता का जीवंत उदाहरण बन चुका है। बेंद्रानवागांव का यह सफर स्पष्ट करता है कि जब प्रशासनिक प्रतिबद्धता, पंचायत का मजबूत नेतृत्व और ग्रामीणों की सहभागिता एक साथ जुड़ती है, तो विकास केवल आंकड़ों में दिखाई नहीं देता—वह हर घर की चौखट पर महसूस होता है।