ईश्वर दुबे
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1316 सदस्यों की आधार सीडिंग और 1036 हितग्राहियों का ई-केवाईसी संपन्न
रायपुर, 29 सितंबर 2026/
राज्य शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप कलेक्टर के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत खाद्य विभाग द्वारा ग्राम पंचायत रेमावंड में एक दिवसीय विशेष शिविर का सफल आयोजन किया गया। इस शिविर में स्थानीय ग्रामीणों ने बड़े उत्साह के साथ भाग लिया और सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़ी सेवाओं का सीधा लाभ उठाया। शिविर के दौरान अधिकारियों द्वारा ग्रामीणों को खाद्य विभाग की विभिन्न जन-कल्याणकारी योजनाओं, सार्वजनिक वितरण प्रणाली तथा प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत पात्र परिवारों को मिलने वाले निःशुल्क खाद्यान्न वितरण की विस्तृत जानकारी दी गई। इसके साथ ही सेवा सेतु पोर्टल और सीजी स्मार्ट पीडीएस ऐप के माध्यम से मिलने वाली डिजिटल सुविधाओं के बारे में जागरूक करते हुए नए राशनकार्ड बनाने, परिवार के सदस्यों का नाम जोड़ने अथवा हटाने और राशनकार्ड स्थानांतरण की आधुनिक व पारदर्शी प्रक्रियाओं से भी ग्रामीणों को अवगत कराया गया।
ग्राम पंचायत रेमावंड में वर्तमान में कुल 266 राशनकार्ड जारी हैं, जिनमें 1,338 सदस्य पंजीकृत हैं। खाद्य विभाग द्वारा चलाए गए इस विशेष अभियान के तहत पंजीकृत सदस्यों में से 1,316 सदस्यों (98 प्रतिशत से अधिक) की आधार सीडिंग सफलतापूर्वक पूरी की जा चुकी है, जबकि 1,036 हितग्राहियों का ई-केवाईसी सत्यापन भी पूर्ण हो चुका है। शेष हितग्राहियों की आवश्यक प्रक्रिया को शीघ्र पूरा कराने के लिए विभागीय टीम द्वारा लगातार कार्य किया जा रहा है। खाद्यान्न वितरण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है, जहाँ सितंबर माह के लिए निर्धारित कुल खाद्यान्न कोटा में से 87 प्रतिशत खाद्यान्न का वितरण पूर्ण कर लिया गया है और शेष वितरण कार्य तेज़ी से जारी है। शिविर स्थल पर ही ऑन-द-स्पॉट ई-केवाईसी, मोबाइल नंबर लिंकिंग और आधार नंबर सीडिंग से संबंधित लंबित कार्यों का त्वरित निष्पादन किया गया। इस आयोजन ने न केवल ग्रामीणों को डिजिटल प्रक्रियाओं को आसानी से समझने का अवसर दिया, बल्कि उन्हें स्थानीय स्तर पर ही आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराकर राशनकार्ड एवं खाद्यान्न वितरण से जुड़ी सुविधाओं को बेहद सरल और सुलभ बना दिया।
परिजनों के साथ उप मुख्यमंत्री श्री साव से मिलीं संजू देवी, भारतीय महिला कबड्डी टीम के गोल्ड मेडल तक का सफर किया साझा
रायपुर. 29 सितम्बर 2026. एशियन गेम्स-2026 में महिला कबड्डी में भारत को स्वर्ण पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाली छत्तीसगढ़ की बेटी संजू देवी ने रायपुर लौटने के बाद उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव से मुलाकात की। श्री साव ने अपने नवा रायपुर स्थित शासकीय निवास कार्यालय में हुई मुलाकात के दौरान संजू देवी की उपलब्धि पर उनका अभिनंदन कर हौसला बढ़ाया। उन्होंने संजू की माता श्रीमती अमरीका बाई और पिता श्री रामजी का भी अभिनंदन किया।
उप मुख्यमंत्री श्री साव ने संजू देवी को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने भारत के साथ छत्तीसगढ़ के तीन करोड़ लोगों को भी गौरवान्वित किया है। उन्होंने संजू से एशियन गेम्स के अनुभव और उनकी टीम के स्वर्ण पदक तक के अजेय सफर की जानकारी ली। श्री साव ने उनसे प्रतियोगिता के दौरान मिले अनुभवों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा की।
श्री साव ने संजू का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि एशियन गेम्स जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिला उनका अनुभव केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित नहीं रहेगा। इस अनुभव का लाभ छत्तीसगढ़ के अन्य खिलाड़ियों को भी मिलेगा। श्री साव से संजू देवी की मुलाकात के दौरान खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव श्री यशवंत कुमार और संचालक श्रीमती आकांक्षा शिक्षा खलखो भी मौजूद थीं।
दोनों पुत्रों को संपत्ति दान करने में जयनारायण अग्रवाल को मिली 1.59 लाख रुपये की बड़ी राहत
पारिवारिक दानपत्र का पंजीयन शुल्क 0.8 प्रतिशत से घटकर हुआ मात्र 500 रुपये
कम खर्च में हुआ परिवार के भीतर संपत्ति का हस्तांतरण, ‘सेवा संकल्प अभियान’ में साझा किया अनुभव
रायपुर, 29 सितम्बर 2026/ परिवार के भीतर अपनी संपत्ति अगली पीढ़ी को सौंपना अब पहले की तुलना में काफी कम खर्चीला हो गया है। राज्य शासन द्वारा पारिवारिक दानपत्र के पंजीयन शुल्क में दी गई बड़ी रियायत का प्रत्यक्ष लाभ कोरबा जिले के कटघोरा निवासी श्री जयनारायण अग्रवाल को मिला। उन्होंने अपनी संपत्ति दोनों पुत्रों के नाम दान करने के लिए दान विलेख का पंजीयन कराया, जिसमें शुल्क रियायत के कारण उन्हें करीब 1 लाख 59 हजार रुपये की आर्थिक राहत मिली। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पंजीयन विभाग से संवाद में उन्होंने इस सुविधा से मिले अपने अनुभव साझा किए।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के विकसित छत्तीसगढ़ के विजन के अनुरूप वित्त एवं पंजीयन मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन सेवाओं को सरल, सुगम और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए विभिन्न सुधार किए गए हैं। इसी क्रम में परिवार के भीतर संपत्ति के हस्तांतरण पर पंजीयन शुल्क में बड़ी राहत दी गई है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से विभाग इन सुधारों का जमीनी प्रभाव जानने के लिए हितग्राहियों से सीधे संवाद कर उनके अनुभव और सुझाव भी संकलित कर रहे है।
दोनों पुत्रों को संपत्ति दान की, 1.59 लाख रुपये की हुई बचत
श्री जयनारायण अग्रवाल ने अपने दोनों पुत्रों के पक्ष में संपत्ति का दान विलेख पंजीकृत कराया। पारिवारिक दानपत्र पर पंजीयन शुल्क में दी गई रियायत के कारण संपत्ति हस्तांतरण पर होने वाला खर्च काफी कम हो गया और उन्हें लगभग 1 लाख 59 हजार रुपये की सीधी बचत हुई।
श्री अग्रवाल ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, “मैं छत्तीसगढ़ शासन एवं पंजीयन विभाग का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। इस सुविधा के कारण मुझे अपनी संपत्ति अपने दोनों पुत्रों को कम खर्च में हस्तांतरित करने में सहायता मिली।”
0.8 प्रतिशत की जगह अब केवल 500 रुपये पंजीयन शुल्क
राज्य शासन द्वारा पारिवारिक संपत्ति के हस्तांतरण को सुगम और किफायती बनाने के लिए महत्वपूर्ण शुल्क सुधार किया गया है। पारिवारिक दानपत्र, हकत्याग पत्र एवं बंटवारे के पंजीयन शुल्क को संपत्ति के मूल्य के 0.8 प्रतिशत से घटाकर मात्र 500 रुपये निर्धारित किया गया है। इससे परिवार के सदस्यों के बीच संपत्ति के हस्तांतरण में लगने वाला पंजीयन खर्च काफी कम हुआ है।
इस निर्णय का लाभ ऐसे परिवारों को विशेष रूप से मिल रहा है, जो परिवार के भीतर संपत्ति का दान, हकत्याग अथवा बंटवारा करना चाहते हैं। निर्धारित शुल्क से प्रक्रिया का आर्थिक भार कम होने के साथ संपत्ति संबंधी पारिवारिक व्यवस्थाओं को विधिवत पंजीकृत कराना भी आसान हुआ है।
शुल्क सुधार का सीधा लाभ हितग्राही तक
श्री जयनारायण अग्रवाल को हुई 1.59 लाख रुपये की बचत पंजीयन शुल्क में किए गए सुधार से नागरिकों को मिलने वाली प्रत्यक्ष आर्थिक राहत का उदाहरण है। बड़ी राशि शुल्क के रूप में खर्च होने के बजाय परिवार के पास बची और दोनों पुत्रों के नाम संपत्ति का दान भी विधिवत रूप से कम खर्च में पूरा हो सका।
‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत सामने आई जयनारायण अग्रवाल की यह कहानी बताती है कि पंजीयन व्यवस्था में शुल्क संबंधी सुधार किस तरह नागरिकों के लिए बड़ी आर्थिक राहत का माध्यम बन रहे हैं। सरल प्रक्रिया और कम शुल्क से परिवार के भीतर संपत्ति का हस्तांतरण अधिक सहज और किफायती हो रहा है।
बच्चों की पढ़ाई और सिलाई के सामान के खर्च की चिंता हुई कम, हर महीने मिलने वाली आर्थिक सहायता से बढ़ा आत्मविश्वास
रायपुर, 29 सितंबर 2026/ मोबाइल फोन पर महतारी वंदन योजना की राशि खाते में आने का संदेश मिलते ही ग्राम सारबहरा निवासी श्रीमती रेखा कैवर्त के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। परिवार की सीमित आय के बीच हर महीने मिलने वाली आर्थिक सहायता ने उन्हें घरेलू जरूरतों और बच्चों की पढ़ाई से जुड़े खर्चों को संभालने में सहूलियत दी है। अब बच्चों की ट्यूशन फीस हो या अपनी सिलाई की दुकान के लिए फाल-अस्तर खरीदने का खर्च, इन जरूरतों के लिए उन्हें पहले जैसी चिंता नहीं करनी पड़ती।
42 वर्षीय श्रीमती रेखा कैवर्त गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले परिवार से हैं। गौरेला विकासखंड के ग्राम सारबहरा में वे छोटे स्तर पर टेलरिंग का काम करती हैं। इसी आमदनी से वे अपने परिवार की जिम्मेदारियां संभालती हैं। उनके परिवार में तीन बेटियां और एक बेटा है और सभी बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। बच्चों की शिक्षा, घर का खर्च और सिलाई के काम के लिए आवश्यक सामग्री जुटाना उनके लिए लंबे समय से चुनौती रहा है।
रेखा बताती हैं कि पहले महीने के घरेलू खर्च और बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी जरूरतों को लेकर उन्हें अक्सर चिंता रहती थी। सिलाई के काम के लिए फाल-अस्तर जैसी सामग्री खरीदने के लिए भी पैसे की व्यवस्था करनी पड़ती थी। ऐसे में महतारी वंदन योजना के तहत मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता उनके लिए उपयोगी साबित हो रही है।
वह कहती हैं कि हर महीने खाते में एक हजार रुपये आने से मुझे घर के जरूरी खर्चों को संभालने में सहूलियत होती है। बच्चों की फीस और सिलाई के सामान के लिए पैसे की व्यवस्था हो जाती है। अब पहले जैसी चिंता नहीं रहती।
रेखा के लिए यह सहायता केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि अपने परिवार की जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा करने का भरोसा भी है। उनका कहना है कि महिलाओं के खाते में सीधे राशि पहुंचने से उन्हें अपनी छोटी-बड़ी जरूरतों के लिए परिवार पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ता। इससे उनमें आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए श्रीमती रेखा कैवर्त कहती हैं कि महतारी वंदन योजना से उनके जैसी महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता मिल रही है। उन्होंने योजना के लिए राज्य शासन का धन्यवाद देते हुए कहा कि इस राशि का उपयोग वे अपने बच्चों की पढ़ाई और परिवार की आवश्यकताओं में कर रही हैं।
परिवार की जिम्मेदारियों के बीच सिलाई का काम संभाल रहीं रेखा के लिए महतारी वंदन योजना की राशि घरेलू बजट को संतुलित करने में सहायक बनी है। बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के साथ-साथ वे अपनी टेलरिंग की छोटी-सी दुकान को भी आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही हैं। नियमित आर्थिक सहायता से उन्हें अपने काम और परिवार दोनों को बेहतर तरीके से संभालने का अवसर मिल रहा है।
रेखा की कहानी उन परिवारों की रोजमर्रा की जरूरतों को सामने लाती है, जहां सीमित आय में बच्चों की शिक्षा, घरेलू खर्च और आजीविका से जुड़े खर्च एक साथ पूरे करने होते हैं। उनके अनुभव के अनुसार, हर महीने मिलने वाली सहायता ने इन खर्चों के प्रबंधन को आसान बनाया है और परिवार की आर्थिक चिंता को कम किया है।
महतारी वंदन की राशि से सुमित्रा ने खोला ‘श्रृंगार सदन’, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाया कदम
हर महीने मिलने वाली राशि को बचाकर शुरू किया अपना व्यवसाय, अब परिवार की आर्थिक मजबूती में बनीं सहभागी
दुकान से प्रतिमाह 2 हजार रुपये से अधिक की आय, सुमित्रा की पहल से गांव की दूसरी महिलाओं को भी मिल रही प्रेरणा
रायपुर, 29 सितम्बर 2026/ महतारी वंदन योजना से हर महीने मिलने वाली राशि को बचत से जोड़कर जांजगीर-चांपा जिले की श्रीमती सुमित्रा कर्ष ने आत्मनिर्भरता की अपनी राह बनाई है। बम्हनीडीह विकासखंड के ग्राम कुम्हारीकला निवासी सुमित्रा ने योजना से मिली राशि को घरेलू खर्च में उपयोग करने के बजाय बचाना शुरू किया और संचित राशि से श्रृंगार सामग्री की छोटी सी दुकान ‘श्रृंगार सदन’ शुरू की। आज इस व्यवसाय से उन्हें लागत एवं अन्य खर्चों को घटाने के बाद प्रतिमाह 2 हजार रुपये से अधिक की आय हो रही है।
परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर नहीं होने के कारण श्रीमती सुमित्रा लंबे समय से चाहती थीं कि वे भी परिवार की जरूरतों को पूरा करने में अपने पति का हाथ बंटाएं और स्वयं की आय का साधन तैयार करें। महतारी वंदन योजना के तहत प्रतिमाह खाते में मिलने वाली आर्थिक सहायता ने उनकी इस इच्छा को आगे बढ़ाने का अवसर दिया।
बचत को बनाया व्यवसाय की पूंजी
श्रीमती सुमित्रा ने महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि को योजनाबद्ध तरीके से बचाना शुरू किया। कुछ समय बाद पर्याप्त राशि एकत्र होने पर उन्होंने उससे श्रृंगार सामग्री खरीदी और ‘श्रृंगार सदन’ की शुरुआत की। छोटे स्तर पर शुरू हुआ यह व्यवसाय धीरे-धीरे उनके लिए नियमित आय का साधन बन गया।
वर्तमान में दुकान से लागत एवं अन्य खर्चों को घटाने के बाद उन्हें प्रतिमाह लगभग 2 हजार रुपये से अधिक की आय हो रही है। इस आमदनी से वे परिवार और बच्चों की जरूरतों को पूरा करने में अपने पति का सहयोग कर रही हैं। अपनी आय होने से उनमें आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
सुमित्रा की पहल से दूसरी महिलाओं को भी मिल रही प्रेरणा
श्रीमती सुमित्रा बताती हैं कि उनके इस प्रयास की परिवार और गांव में सराहना हो रही है। उन्हें आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते देखकर गांव की अन्य महिलाएं भी अपने स्तर पर आय के साधन तैयार करने के लिए प्रेरित हो रही हैं।
सेवा संकल्प अभियान के दौरान सामने आई सुमित्रा की यह ‘सेवा की कहानी’ बताती है कि नियमित आर्थिक सहायता को बचत और स्वरोजगार से जोड़कर महिलाएं अपने लिए आय का नया जरिया तैयार कर सकती हैं। महतारी वंदन योजना से मिली राशि को सुमित्रा ने ‘श्रृंगार सदन’ की पूंजी में बदलकर न केवल आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाया है, बल्कि परिवार की आर्थिक मजबूती में भी सहभागी बनी हैं।
महतारी वंदन की राशि बनी स्वरोजगार का आधार, सरिता ने बचत कर खरीदी गाय और शुरू किया दुग्ध व्यवसाय
हर महीने मिलने वाली राशि को खर्च करने के बजाय जोड़ा, छोटी सी शुरुआत से बनाई नियमित आमदनी की राह
दुग्ध व्यवसाय से अब प्रतिमाह 6 से 7 हजार रुपये की आय, परिवार को दे रहीं आर्थिक संबल
रायपुर, 29 सितम्बर 2026/ महतारी वंदन योजना से हर महीने मिलने वाली आर्थिक सहायता को जांजगीर-चांपा जिले की श्रीमती सरिता राठौर ने स्वरोजगार का आधार बना लिया। नैला के वार्ड क्रमांक 12 की निवासी सरिता ने योजना से मिलने वाली राशि को खर्च करने के बजाय उसकी बचत की। राशि एकत्र होने पर उन्होंने एक दुधारू गाय खरीदी और दुग्ध व्यवसाय की छोटी सी शुरुआत की। आज यही पहल उनके लिए नियमित आय का जरिया बन गई है और वे प्रतिमाह लगभग 6 से 7 हजार रुपये अर्जित कर परिवार को आर्थिक संबल दे रही हैं।
महतारी वंदन योजना की नियमित हितग्राही श्रीमती सरिता राठौर ने योजना के तहत प्रतिमाह मिलने वाली राशि को योजनाबद्ध तरीके से बचाना शुरू किया। संचित राशि से दुधारू गाय खरीदने के बाद उन्होंने दूध की बिक्री शुरू की। इससे हुई आमदनी को भी उन्होंने व्यवसाय को आगे बढ़ाने में लगाया और धीरे-धीरे अन्य दुधारू गायें खरीदीं।
छोटी सी बचत ने खोली नियमित आमदनी की राह
मेहनत और लगन से शुरू किया गया दुग्ध व्यवसाय अब सरिता के लिए नियमित आय का साधन बन चुका है। वर्तमान में उन्हें दूध की बिक्री से लगभग 6 से 7 हजार रुपये प्रतिमाह की आमदनी हो रही है। इस राशि से वे परिवार की दैनिक जरूरतों को पूरा करने में सहयोग कर रही हैं और घर की आर्थिक मजबूती में अपनी भागीदारी निभा रही हैं।
“महतारी वंदन की राशि ने अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर दिया”
श्रीमती सरिता राठौर का कहना है कि महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि ने उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर दिया। उन्होंने सहायता राशि को बचाकर व्यवसाय शुरू करने में लगाया और आज इससे उन्हें नियमित आमदनी हो रही है।
सेवा संकल्प अभियान के दौरान सामने आई सरिता की यह ‘सेवा की कहानी’ बताती है कि नियमित आर्थिक सहायता को बचत और स्वरोजगार से जोड़कर महिलाएं आय का अपना साधन तैयार कर सकती हैं। महतारी वंदन योजना से मिली राशि को सरिता ने अपनी मेहनत और समझदारी से दुग्ध व्यवसाय में बदलकर परिवार की आर्थिक मजबूती की नई राह बनाई है।
कच्चे घर की चिंता हुई दूर, पीएम आवास से नर्मदा बाई के परिवार को मिली पक्की छत
महतारी वंदन और पेंशन बनी आर्थिक सहारा, शौचालय से मिला स्वच्छता और सम्मान
एक परिवार को कई योजनाओं का लाभ, सुरक्षित घर के साथ बेहतर हुई रोजमर्रा की जिंदगी
रायपुर, 29 सितम्बर 2026/ कभी कच्चे घर में मौसम की मार और सीमित संसाधनों के बीच जीवन गुजारने वाली जांजगीर-चांपा जिले के बम्हनीडीह विकासखंड की ग्राम पंचायत लखुर्री निवासी श्रीमती नर्मदा बाई के परिवार के जीवन में शासकीय योजनाओं ने नई उम्मीद जगाई है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण से परिवार को पक्का और सुरक्षित घर मिला है, वहीं महतारी वंदन योजना, पेंशन और शौचालय जैसी सुविधाओं ने उनकी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में सहारा दिया है।
श्रीमती नर्मदा बाई और उनके परिवार के लिए अपना पक्का घर लंबे समय से एक बड़ी जरूरत थी। कच्चे मकान में बारिश और बदलते मौसम के दौरान कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता था। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के माध्यम से पक्का आवास मिलने के बाद अब परिवार को इन परेशानियों से काफी हद तक राहत मिली है। उनके लिए यह पक्का मकान केवल चार दीवारें और छत नहीं, बल्कि सुरक्षा, सम्मान और बेहतर जीवन का आधार बन गया है।
महतारी वंदन और पेंशन से रोजमर्रा की जरूरतों में मिला सहारा
परिवार को महतारी वंदन योजना और पेंशन का लाभ भी मिल रहा है। नियमित रूप से मिलने वाली सहायता राशि घरेलू जरूरतों को पूरा करने में उपयोगी साबित हो रही है। सीमित आय वाले परिवार के लिए यह आर्थिक सहयोग रोजमर्रा के खर्चों में सहारा दे रहा है।
शौचालय की सुविधा ने परिवार के जीवन में स्वच्छता और गरिमा को भी मजबूत किया है। घर में शौचालय बनने से खुले में शौच की परेशानी दूर हुई है और परिवार को स्वच्छ एवं सुविधाजनक वातावरण मिला है।
पक्की छत, आर्थिक सहारा और स्वच्छता की सुविधा से बदली जिंदगी
श्रीमती नर्मदा बाई के परिवार की कहानी बताती है कि अलग-अलग जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ एक परिवार तक पहुंचने से जीवन में व्यापक बदलाव आ सकता है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण ने पक्की और सुरक्षित छत दी, महतारी वंदन योजना और पेंशन ने आर्थिक जरूरतों में सहयोग दिया, वहीं शौचालय की सुविधा ने स्वच्छता और सम्मान को मजबूती दी।
सेवा संकल्प अभियान के दौरान सामने आई नर्मदा बाई की यह ‘सेवा की कहानी’ कच्चे मकान की चिंता से निकलकर सुरक्षित और सुविधाजनक जीवन की ओर बढ़ते एक परिवार की कहानी है। आज पक्के घर में उनका परिवार अधिक सुरक्षित महसूस कर रहा है और योजनाओं से मिले सहयोग के साथ बेहतर भविष्य की उम्मीद भी मजबूत हुई है।
बीमारी की चिंता के बीच आयुष्मान कार्ड बना सहारा, भरतलाल को इलाज के खर्च से मिली बड़ी राहत
निजी अस्पताल में हुआ सफल उपचार, आयुष्मान भारत योजना से परिवार पर नहीं पड़ा आर्थिक बोझ
भरतलाल बोले- आयुष्मान कार्ड से इलाज में मिली बड़ी मदद, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का जताया आभार
रायपुर, 29 सितम्बर 2026/ बीमारी के साथ जब इलाज के खर्च की चिंता जुड़ जाती है, तो परिवार के लिए मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। जांजगीर-चांपा जिले के बलौदा विकासखंड अंतर्गत ग्राम कोलिहादेवरी निवासी श्री भरतलाल निर्मलकर के सामने भी गंभीर टाइफाइड, बुखार और घुटनों में दर्द के कारण ऐसी ही परिस्थिति आई। उपचार की जरूरत पड़ी तो आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का आयुष्मान कार्ड उनके और उनके परिवार के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आया।
स्वास्थ्य संबंधी परेशानी बढ़ने पर श्री निर्मलकर ने निजी अस्पताल में उपचार कराया। बीमारी गंभीर होने के कारण इलाज पर होने वाला खर्च परिवार के लिए आर्थिक चिंता का कारण बन सकता था, लेकिन आयुष्मान कार्ड के माध्यम से उपचार का खर्च योजना के अंतर्गत वहन होने से परिवार को आर्थिक बोझ की चिंता नहीं करनी पड़ी। निजी अस्पताल में समय पर उपचार मिलने के बाद श्री निर्मलकर स्वस्थ हुए और परिवार ने राहत महसूस की।
इलाज मिला, खर्च की चिंता हुई दूर
श्री भरतलाल निर्मलकर बताते हैं कि आयुष्मान कार्ड होने के कारण उन्हें इलाज के खर्च को लेकर परेशान नहीं होना पड़ा। योजना के माध्यम से उपचार की सुविधा मिलने से कठिन समय में परिवार को आर्थिक संबल मिला। आज स्वस्थ होने के बाद वे आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना को जरूरतमंद परिवारों के लिए उपचार और आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण सहारा मानते हैं।
“आयुष्मान कार्ड से इलाज में मिली बहुत बड़ी मदद”
अपने अनुभव साझा करते हुए श्री निर्मलकर ने कहा, “मेरा इलाज निजी अस्पताल में हुआ और मुझे किसी तरह की परेशानी नहीं हुई। आयुष्मान कार्ड के माध्यम से इलाज का खर्च वहन होने से मुझे बहुत बड़ी मदद मिली। मैं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को आयुष्मान योजना के लिए हृदय से धन्यवाद देता हूं।”
सेवा संकल्प अभियान के तहत जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों के जीवन में आए सकारात्मक बदलाव और उनके अनुभवों को जन-जन तक पहुंचाया जा रहा है। श्री भरतलाल निर्मलकर की ‘सेवा की कहानी’ बताती है कि कठिन स्वास्थ्य परिस्थितियों में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना पात्र परिवारों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने के साथ इलाज के खर्च से राहत दिलाने का भी माध्यम बन रही है।
महतारी वंदन से जशपुर की महिलाओं को आर्थिक संबल, 639 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का भुगतान
हर माह 2.22 लाख से अधिक महिलाओं को मिल रहा लाभ, बच्चों की पढ़ाई-पोषण से लेकर बचत और स्वरोजगार तक में उपयोग हो रही राशि
बेटियों के भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि में निवेश, छोटी बचत से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहीं महिलाएं
रायपुर, 29 सितम्बर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित महतारी वंदन योजना जशपुर जिले की महिलाओं के लिए आर्थिक संबल का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है। योजना शुरू होने के बाद मार्च 2024 से अगस्त 2026 तक जिले की महिलाओं के खातों में 639 करोड़ 54 लाख 55 हजार 550 रुपये की राशि अंतरित की जा चुकी है। जिले में औसतन 2 लाख 22 हजार से अधिक महिलाओं को हर माह योजना का लाभ मिल रहा है।
योजना के तहत पात्र महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। नियमित रूप से मिलने वाली इस राशि का उपयोग महिलाएं अपनी और परिवार की प्राथमिकताओं के अनुसार बच्चों की शिक्षा, पोषण, घरेलू आवश्यकताओं, बचत और स्वरोजगार में कर रही हैं। किसी मां के लिए यह राशि बच्चे की कॉपी-किताब और पढ़ाई का सहारा बनी है, तो किसी महिला ने इसे बेटी के भविष्य की बचत से जोड़ दिया है। कई महिलाएं इस राशि को अपनी आय के साथ जोड़कर छोटे व्यवसाय और आजीविका गतिविधियों को भी आगे बढ़ा रही हैं।
किसी के लिए बच्चों की पढ़ाई, तो किसी के लिए भविष्य की बचत
देवगुड़ा की हितग्राही परमिला प्रजापति बताती हैं कि महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि से उन्हें अपने बच्चे की पढ़ाई और पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिल रही है। नियमित आर्थिक सहायता से घर के खर्च को व्यवस्थित करने में भी सहूलियत हो रही है।
पुरनानगर की एनीमा खलखो योजना से मिलने वाली राशि का उपयोग बच्चे की पढ़ाई और पोषण के साथ घरेलू जरूरतों को पूरा करने में करती हैं। खास बात यह है कि वे हर महीने 500 रुपये की बचत भी कर रही हैं। इस तरह योजना से मिली राशि उनके लिए वर्तमान जरूरतों को पूरा करने के साथ भविष्य के लिए आर्थिक आधार तैयार करने का माध्यम बन रही है।
बेटियों के बेहतर भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि में जमा कर रहीं राशि
महतारी वंदन से मिली आर्थिक सहायता को महिलाएं दीर्घकालीन बचत से भी जोड़ रही हैं। तपकरा क्षेत्र के बाधरकोना की विनीता बघेल और जशपुर की पार्वती सिंह अपनी बेटियों के नाम सुकन्या समृद्धि योजना में राशि जमा कर रही हैं। छोटी-छोटी नियमित बचत के माध्यम से उनका प्रयास बेटियों की उच्च शिक्षा और भविष्य की आवश्यकताओं के लिए आर्थिक आधार तैयार करना है।
महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में महतारी शक्ति ऋण योजना भी सहायक बन रही है। इसके माध्यम से पात्र महिलाओं को 25 हजार रुपये तक का ऋण निर्धारित शर्तों के अनुसार उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे वे छोटे व्यवसाय और आयमूलक गतिविधियों को आगे बढ़ा सकें।
सिलाई और छोटे व्यवसाय से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
महतारी वंदन योजना का प्रभाव केवल घरेलू जरूरतों और बचत तक सीमित नहीं है। कई महिलाएं योजना से मिलने वाली राशि को अपनी आय के साथ जोड़कर स्वरोजगार को मजबूत कर रही हैं। जशपुर की ममता यादव सिलाई का कार्य करती हैं। वे बताती हैं कि सिलाई से होने वाली आय और महतारी वंदन की राशि से परिवार की जरूरतों को पूरा करने के साथ बच्चों के भविष्य के लिए भी बचत कर पा रही हैं।
इसी तरह श्रीमती सरिता यादव, श्रीमती अनीता सोनकर, श्रीमती बिरसमुनी सिंह, श्रीमती लक्ष्मी बाई और श्रीमती अनीशा बाई सहित जिले की अनेक महिलाएं सिलाई, छोटे व्यवसाय और अन्य आयमूलक गतिविधियों से जुड़कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
महिलाओं के हाथ में आर्थिक संबल, पूरे परिवार को मिल रही मजबूती
महतारी वंदन योजना से मिलने वाली नियमित राशि महिलाओं को अपनी आवश्यकताओं और परिवार की प्राथमिकताओं के अनुसार आर्थिक निर्णय लेने का अवसर दे रही है। बच्चों की शिक्षा और पोषण हो, घरेलू जरूरतें हों, बेटी के भविष्य के लिए बचत हो या फिर स्वरोजगार को आगे बढ़ाने की कोशिश—महिलाएं अपनी परिस्थितियों के अनुरूप इस सहायता का उपयोग कर रही हैं।
जशपुर की इन महिलाओं की कहानियां बताती हैं कि नियमित आर्थिक सहायता जब बचत, शिक्षा और आजीविका से जुड़ती है, तो उसका प्रभाव पूरे परिवार तक पहुंचता है। महतारी वंदन योजना महिलाओं के लिए प्रतिमाह मिलने वाली आर्थिक सहायता के साथ भविष्य की बेहतर योजना बनाने, बचत की आदत विकसित करने और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का माध्यम बन रही है।
केन्द्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से बदल रही जरूरतमंद परिवारों की जिंदगी
रायपुर, 29 सितंबर 2026/ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना जरूरतमंद परिवारों के लिए केवल आवास उपलब्ध कराने की योजना नहीं, बल्कि सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन की नई शुरुआत का माध्यम बन रही है। पक्के घर का सपना देखने वाले अनेक परिवारों के लिए यह योजना उम्मीद की किरण बनी है। गौरेला-पेंड्रा- मरवाही जिले के गौरेला के रवान पारा वार्ड क्रमांक 11 निवासी श्री शिवप्रसाद भट्ट का परिवार भी इसका उदाहरण है, जिनका वर्षों से अपने पक्के घर का सपना प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से पूरा हुआ है।
श्री शिवप्रसाद भट्ट मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। परिवार में उनकी पत्नी, एक बेटा और एक बेटी हैं। सीमित आमदनी के कारण अपने परिवार के लिए पक्का मकान बनाना उनके लिए लंबे समय तक मुश्किल था। परिवार कच्चे मकान में रहता था, जहां बारिश के मौसम में पानी और अन्य परेशानियों के कारण परिवार को काफी असुविधाओं का सामना करना पड़ता था।
प्रधानमंत्री आवास योजना की जानकारी मिलने के बाद श्री शिवप्रसाद ने अपने पक्के घर के सपने को साकार करने की दिशा में कदम बढ़ाया। उन्होंने योजना की जानकारी लेकर नगर पालिका गौरेला में आवास के लिए आवेदन किया। आवेदन स्वीकृत होने के बाद उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 2 लाख 30 हजार रुपये की सहायता राशि प्राप्त हुई और उनके परिवार के लिए पक्के मकान का निर्माण संभव हो सका।
पक्के घर की सौगात मिलने के बाद श्री शिवप्रसाद और उनका परिवार अब सुरक्षित और बेहतर वातावरण में जीवन व्यतीत कर रहा है। वे बताते हैं कि पहले कच्चे मकान में बारिश के दौरान काफी परेशानी होती थी, लेकिन अब पक्की छत मिलने से इन चिंताओं से मुक्ति मिली है। उनके लिए यह मकान सिर्फ ईंट और सीमेंट से बना घर नहीं, बल्कि परिवार की सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य का आधार है।
केन्द्र सरकार की योजनाओं से मिला बहुआयामी लाभ
प्रधानमंत्री आवास योजना के साथ-साथ श्री शिवप्रसाद के परिवार को केन्द्र और राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का भी लाभ मिल रहा है। उज्ज्वला योजना के माध्यम से उनकी पत्नी को गैस कनेक्शन प्राप्त हुआ है, जिससे परिवार को स्वच्छ ईंधन की सुविधा मिली। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत परिवार को शौचालय की सुविधा मिली। वहीं राज्य शासन की महतारी वंदन योजना के तहत उनकी पत्नी को प्रतिमाह 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता मिल रही है।
इस प्रकार विभिन्न योजनाओं का लाभ एक साथ मिलने से श्री शिवप्रसाद के परिवार के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। पक्का घर, स्वच्छ ईंधन, शौचालय और नियमित आर्थिक सहायता जैसी सुविधाओं ने परिवार को अधिक सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर दिया है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति जताया आभार
अपने सपनों का घर मिलने पर श्री शिवप्रसाद भट्ट ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना गरीब परिवारों के जीवन में बड़ा बदलाव लाने वाली योजना है। मजदूरी से परिवार का पालन-पोषण करने वाले उनके जैसे लोगों के लिए पक्का मकान बनाना आसान नहीं था, लेकिन शासन की सहायता से उनका यह सपना पूरा हुआ।
श्री शिवप्रसाद का कहना है कि आज उनका परिवार अपने पक्के घर में सुरक्षित और सुखद जीवन जी रहा है। शासन की योजनाओं से मिली सुविधाओं ने उनके परिवार की मुश्किलें कम की हैं और भविष्य को लेकर विश्वास बढ़ाया है।
श्री शिवप्रसाद भट्ट की कहानी इस बात का उदाहरण है कि केन्द्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं जब जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचती हैं, तो उनका प्रभाव सीधे उनके जीवन में दिखाई देता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में गरीब, वंचित और जरूरतमंद परिवारों को मूलभूत सुविधाओं से जोड़ने के प्रयासों से अनेक परिवार आत्मसम्मान के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
श्री शिवप्रसाद भट्ट के परिवार को मिला पक्का घर इस बात का प्रमाण है कि योजनाओं का लाभ मिलने से केवल घर की छत नहीं बदलती, बल्कि परिवार के जीवन में सुरक्षा, सम्मान और उम्मीद का नया अध्याय भी शुरू होता है।