छत्तीसगढ़

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4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत

मुख्यमंत्री ने शशिकांत से दूरभाष पर बातचीत कर उनके स्वास्थ्य की ली जानकारी

रायपुर, 10 सितंबर 2026/ छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की संवेदनशील पहल से धमतरी जिले के ग्राम देवपुर निवासी 29 वर्षीय शशिकांत भरत को बेहतर इलाज की नई उम्मीद मिली है। सोशल मीडिया के माध्यम से शशिकांत की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी मिलने पर मुख्यमंत्री ने तुरंत संज्ञान लिया और उनसे दूरभाष पर बात कर कुशलक्षेम जाना।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए शशिकांत को 9 सितंबर की शाम अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), रायपुर में भर्ती कराया, जहाँ विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज जारी है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने उनके उपचार के लिए 4 लाख रुपये की सहायता राशि भी स्वीकृत की है।

2016 में हुए हादसे के बाद से प्रभावित है स्वास्थ्य

वर्ष 2016 में एक सड़क दुर्घटना के दौरान शशिकांत को गंभीर चोटें आई थीं, जिसके कारण वे करीब 50 दिनों तक कोमा में रहे। दुर्घटना में सर्वाइकल की समस्या उत्पन्न होने से उनके हाथ-पांव की कार्यक्षमता प्रभावित हो गई थी। लंबे समय तक विभिन्न अस्पतालों में इलाज कराने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हो पाया था।

शशिकांत ने जताया आभार

मुख्यमंत्री से बातचीत और तुरंत मिली चिकित्सकीय सहायता के बाद शशिकांत ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा स्वयं फोन कर हाल-चाल पूछना और एम्स में इलाज के साथ 4 लाख रुपये की सहायता देना उनके और उनके परिवार के लिए बहुत बड़ा संबल है।

तीन स्थानीय अवकाश किए घोषित

रायपुर, 10 सितंबर 2026/ सामान्य प्रशासन विभाग, मंत्रालय, नवा रायपुर अटल नगर द्वारा जारी आदेश के तहत रायपुर जिले में तीन स्थानीय अवकाश घोषित किए हैं। यह अवकाश रायपुर जिले, शहर (राजधानी) स्थित शासकीय कार्यालयों एवं संस्थाओं में लागू होंगे।

जारी आदेश के अनुसार नुआखाई पर्व के लिए 15 सितंबर 2026 (मंगलवार), महाअष्टमी के लिए 19 अक्टूबर 2026 (सोमवार) तथा गोवर्धन पूजा (दीपावली के दूसरे दिन) के लिए 9 नवंबर 2026 (सोमवार) को स्थानीय अवकाश रहेगा। जारी आदेश के अनुसार ये अवकाश रायपुर जिले के अंतर्गत संबंधित शासकीय कार्यालयों एवं संस्थाओं पर लागू होंगे।

उप मुख्यमंत्री ने नगर निगमों और जिला मुख्यालय वाले नगर पालिकाओं के कार्यों की समीक्षा की

संपत्ति कर के भुगतान के लिए निकायों में ऑनलाइन व्यवस्था बनाने के दिए निर्देश, सभी कार्यों और योजनाओं की नियमित समीक्षा के लिए प्रभावी कार्यपद्धति अपनाने कहा

जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और उपयोग किए गए पानी के पुनः उपयोग की व्यापक कार्ययोजना बनाने के निर्देश, अगले 50 वर्षों की जरूरत को देखते हुए बनाएं दीर्घकालिक योजना

रायपुर.  सितम्बर 2026. उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव ने आज राज्य के सभी नगर निगमों तथा जिला मुख्यालय वाले नगर पालिकाओं के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने नवा रायपुर स्थित विश्राम भवन में आयोजित बैठक में निगम आयुक्तों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को शहरों के विकास, स्वच्छता, राजस्व वसूली, योजनाओं के क्रियान्वयन और निर्माण कार्यों में तेजी लाने के साथ ही जवाबदेही से काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नगरीय निकाय केवल बजट खर्च करने वाली संस्था नहीं, बल्कि शहर के भविष्य की योजनाएं बनाने, जनसुविधाएं उपलब्ध कराने तथा नागरिकों की कल्याणकारी संस्था है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा और संचालक श्री नीलेशकुमार क्षीरसागर भी समीक्षा बैठक में शामिल हुए।

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने बैठक में कहा कि शहरों के विकास के काम तथा राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ लोगों तक समय पर पहुंचे, इसके लिए अधिकारी सक्रियता से काम करें। प्रधानमंत्री आवास योजना और पीएम स्वनिधि योजनाओं का लाभ ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंदों तक पहुंचाएं। उन्होंने निकायों की आय बढ़ाने के लिए संपत्तियों के सर्वे कर नई संपत्तियों की पहचान करने और संपत्ति कर जमा करने के लिए ज्यादा से ज्यादा निकायों में आनलाइन भुगतान की सुविधा विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने निकायों के अभियंताओं से कहा कि वे निर्माण कार्यों में तेजी और गुणवत्ता सुनिश्चित करें तथा निर्माणाधीन कार्यों की कड़ाई से निरीक्षण करें। उन्होंने सप्ताह के अलग-अलग दिनों में राजस्व वसूली, निर्माण कार्यों, साफ-सफाई और योजनाओं के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा के लिए कार्य-पद्धति विकसित करने के निर्देश दिए।

उप मुख्यमंत्री ने अवैध कब्जों और अतिक्रमणों का पता चलते ही तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अवैध निर्माण पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से भविष्य में सड़क, पानी, बिजली और अन्य सुविधाओं का अतिरिक्त भार निकाय पर पड़ता है। उन्होंने निगम आयुक्तों और सीएमओ को प्रतिदिन प्रातः भ्रमण कर साफ-सफाई की व्यवस्था और निर्माण कार्यों के निरीक्षण के निर्देश दिए। इससे कार्यों की मैदानी हकीकत पता चलने के साथ ही शहर की समस्याओं और लोगों के फीडबैक की भी जानकारी मिलेगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में निवेश और पर्यटन की संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में शहरों की अधोसंरचना भी भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित होनी चाहिए।

श्री साव ने नगरीय निकायों में अगले 50 वर्षों की जल की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए चिंतन शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और उपयोग किए गए पानी के पुनः उपयोग की व्यापक योजना बनाने पर जोर देते हुए शहरों के सभी घरों में पेयजल आपूर्ति की पुख्ता व्यवस्था तैयार करने को कहा। भविष्य के जल संकट से बचने के लिए अभी से दीर्घकालिक रणनीति बनाकर काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि निकायों के अधिकारी ही शहर की छवि और विकास की दिशा तय करने वाले प्रमुख जिम्मेदार अधिकारी हैं, इसलिए पूरी क्षमता, संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ काम करें।

शहरों की व्यवस्था ऐसी हो कि नागरिकों को निकाय की मौजूदगी का अहसास हो : श्री सोनमणि बोरा

नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने समीक्षा बैठक में अधिकारियों से कहा कि नगरीय निकायों का दायित्व केवल निर्माण कार्यो और योजनाओं को पूरा करना नहीं है, बल्कि शहर की व्यवस्थाओं का निर्बाध और सुचारू संचालन भी है। तेजी से हो रहे शहरीकरण और बढ़ती जनआकांक्षाओं के अनुरूप निकायों को भविष्य की जरूरतों का रोडमैप तैयार कर उस पर प्रभावी ढंग से अमल करना होगा। शहरवासियों को निकाय की मौजूदगी का अहसास होना चाहिए। उन्हें विभिन्न आयोजनों व कार्यक्रमों में सहभागी बनाया जाना चाहिए।

‘रंग परब नाट्य श्रृंखला’ का भव्य शुभारंभ — तीन दिनों तक रोजाना होंगी दो नाट्य प्रस्तुतियां, सामाजिक सरोकारों से लेकर पौराणिक कथाओं तक दिखेगा रंगमंच का विविध संसार

रायपुर,  सितंबर 2026। संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय ‘रंग परब नाट्य श्रृंखला’ का शुभारंभ बुधवार को मुक्ताकाशी मंच, महंत घासीदास संग्रहालय परिसर, सिविल लाइंस, घड़ी चौक रायपुर में हुआ। 9 से 11 सितंबर तक आयोजित इस नाट्य श्रृंखला में प्रतिदिन दो नाटकों की रंगमंचीय प्रस्तुतियां दी जा रही हैं। आयोजन में सामाजिक सरोकार, सांस्कृतिक चेतना, मानवीय संवेदनाओं और पौराणिक कथाओं को रंगमंच के माध्यम से दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कन्नौजे ने कहा कि नाटक केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज का जीवंत दर्पण है। रंगमंच हमारी संवेदनाओं, संघर्षों और सामाजिक सरोकारों को प्रभावशाली ढंग से सामने लाता है। कलाकार अपने अभिनय और संवादों के माध्यम से दर्शकों को सोचने, समझने और सामाजिक बदलाव के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने कहा कि नाटक हमारी संस्कृति, परंपराओं और मानवीय मूल्यों को भी समृद्ध करने का सशक्त माध्यम है।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के कवि मीर अली मीर, वरिष्ठ पत्रकार एवं छायाकार श्री दीपेंद्र दीवान, साहित्यकार श्री विजय मिश्रा, फिल्म बोर्ड की सदस्य श्रीमती प्रसन्ना अवस्थी तथा समाजसेवी श्री उदयभान चौहान विशेष रूप से उपस्थित रहे।

‘मया के मुंदरी’ ने दहेज प्रथा के खिलाफ बुलंद की आवाज

नाट्य श्रृंखला की पहली प्रस्तुति ‘मया के मुंदरी’ रही, जिसका मंचन रिखी क्षत्रिय एवं समूह द्वारा किया गया। नाटक ने शुरुआत से ही दर्शकों का ध्यान एक गंभीर सामाजिक समस्या की ओर आकर्षित किया। दहेज प्रथा पर केंद्रित इस प्रस्तुति में दिखाया गया कि किस तरह धन-संपत्ति का लालच विवाह जैसे पवित्र रिश्ते को रिश्ते से सौदेबाजी में बदल देता है।

नाटक में दहेज के लालची पिता के चरित्र के माध्यम से यह दिखाया गया कि बेटे का विवाह उसके लिए संस्कार, प्रेम और पारिवारिक संबंधों का अवसर न रहकर धन-संपत्ति और गाड़ी हासिल करने का माध्यम बन जाता है। दहेज के लालच की यह मानसिकता केवल सामाजिक और नैतिक मूल्यों को कमजोर नहीं करती, बल्कि परिवार और रिश्तों की बुनियाद को भी प्रभावित करती है।

कहानी का सबसे प्रभावशाली पक्ष यह रहा कि स्वाभिमानी बेटा और उसकी मां दहेज के खिलाफ मजबूती से खड़े होते हैं। वे गरीब लड़की और उसके पिता का समर्थन करते हैं तथा विवाह को आर्थिक लेन-देन से अलग मानवीय संबंध के रूप में स्थापित करने का प्रयास करते हैं।

नाटक में अंततः युवक दहेज रूपी कुरीति का विरोध करते हुए गरीब लड़की से विवाह स्वीकार करता है। ग्रामीण रीति-रिवाजों और परंपराओं के बीच विवाह संपन्न होता है। इस प्रस्तुति ने दर्शकों को यह संदेश दिया कि विवाह किसी सौदे का नाम नहीं, बल्कि विश्वास, सम्मान और समानता पर आधारित जीवन-संबंध है।

‘हरित सागर’ ने पौराणिक कथा को दिया रंगमंचीय स्वरूप

नाट्य श्रृंखला की दूसरी प्रस्तुति 7वीं शताब्दी की संस्कृत उत्तरकथा ‘हरित सागर’ पर आधारित रही। इस नाटक के लेखक एवं निर्देशक श्री किशोर वैभव हैं। पौराणिक कथा पर आधारित इस प्रस्तुति ने दर्शकों को एक अलग ही रंगमंचीय संसार से परिचित कराया।

नाटक की कथा भगवान शिव द्वारा माता पार्वती को एकांत में सुनाई गई कथा से जुड़ी है। कथा को जलंधर द्वारा सुन लिए जाने के बाद घटनाक्रम आगे बढ़ता है। इसके पश्चात माता पार्वती द्वारा दिए गए श्राप और उस श्राप से मुक्ति की कथा को नाट्य रूप में प्रस्तुत किया गया।

कलाकारों ने संवाद, अभिनय और रंगमंचीय प्रस्तुति के माध्यम से पौराणिक प्रसंगों को जीवंत बनाने का प्रयास किया। कथा की प्रस्तुति ने दर्शकों को पौराणिक आख्यानों की रोचकता और रंगमंच की सृजनात्मक शक्ति से रूबरू कराया।

रंगमंच के जरिए सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक संवाद का प्रयास

‘रंग परब नाट्य श्रृंखला’ का विशेष आकर्षण यह है कि इसमें मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक चिंतन और सांस्कृतिक चेतना को भी केंद्र में रखा गया है। एक ओर ‘मया के मुंदरी’ जैसी प्रस्तुति दहेज जैसी सामाजिक कुरीति के विरुद्ध आवाज बुलंद करती है, वहीं ‘हरित सागर’ जैसी प्रस्तुति पौराणिक कथा और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा को रंगमंच के माध्यम से दर्शकों तक पहुंचाती है।

तीन दिनों तक चलने वाली इस नाट्य श्रृंखला में विभिन्न विषयों और कथानकों पर आधारित नाटकों की प्रस्तुतियां होंगी। संस्कृति विभाग का यह आयोजन रंगमंच के कलाकारों को मंच प्रदान करने के साथ ही दर्शकों को चिंतन, संवेदना, संस्कृति और मनोरंजन का समन्वित अनुभव देने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की 25 वर्षों की जनसेवा के प्रति आभार और विकसित भारत-2047 के संकल्प को जनभागीदारी से मिलेगा नया विस्तार

‘आशीर्वाद का दीया’, ‘25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत’, ‘नमो सेवा गाथा’ और ‘कहानी बदलाव की’ जैसी अभिनव गतिविधियों से जुड़ेगा हर वर्ग

रायपुर,  सितंबर 2026। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की 25 वर्षों की जनसेवा एवं समर्पण के प्रति आभार व्यक्त करने तथा विकसित भारत-2047 के सामूहिक संकल्प को जनभागीदारी का स्वरूप देने के उद्देश्य से जीपीएम जिले में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ आयोजित किया जाएगा। एक माह तक चलने वाले इस अभियान के माध्यम से केंद्र एवं राज्य शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी पात्र नागरिकों तक पहुंचाने, उन्हें योजनाओं का लाभ दिलाने और विकास की प्रक्रिया में प्रत्येक परिवार की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष जोर रहेगा।

कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. ने अभियान की तैयारियों की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को विभागों के बीच बेहतर समन्वय, स्पष्ट एवं समयबद्ध कार्ययोजना तथा प्रभावी मैदानी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मुकेश रावटे को ‘सेवा संकल्प अभियान’ का जिला नोडल अधिकारी बनाया गया है।

‘आशीर्वाद का दीया’ से होगा अभियान का शुभारंभ

अभियान का शुभारंभ 17 सितंबर को ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम से होगा। इस दिन शाम को जिले के प्रत्येक परिवार को दीप प्रज्वलित कर अभियान से जोड़ा जाएगा। प्रत्येक दीप प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की 25 वर्षों की जनसेवा के प्रति नागरिकों के आभार और विकसित भारत-2047 के संकल्प का प्रतीक होगा।

मैदानी अमला घर-घर पहुंचकर नागरिकों को इस पहल की जानकारी देगा तथा उन्हें दीप प्रज्वलन के माध्यम से अभियान में सहभागी बनने के लिए प्रेरित करेगा। इस गतिविधि का उद्देश्य विकास के संकल्प को केवल सरकारी कार्यक्रम तक सीमित न रखकर इसे जन-जन और घर-घर का संकल्प बनाना है।

बच्चों की कल्पनाओं में दिखेगा विकसित भारत

‘25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत’ पहल के अंतर्गत 17 सितंबर से 7 अक्टूबर तक जिले के शासकीय एवं निजी विद्यालयों में चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों को विकसित भारत की अपनी कल्पना और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के सेवा कार्यों को रचनात्मक अभिव्यक्ति देने का अवसर मिलेगा।

उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया जाएगा। साथ ही बच्चों द्वारा तैयार की गई श्रेष्ठ कलाकृतियों एवं उनकी कल्पनाओं को प्रदर्शनी के माध्यम से आमजन के सामने रखा जाएगा।

नुक्कड़ नाटकों के जरिए आमजन तक पहुंचेगी ‘नमो सेवा गाथा’

अभियान के दौरान ‘नमो सेवा गाथा’ के अंतर्गत 17 सितंबर से विभिन्न स्थानों पर नुक्कड़ नाट्य प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं, उनके उद्देश्यों और योजनाओं से लोगों के जीवन में आए सकारात्मक बदलावों की कहानियों को रोचक एवं प्रभावी तरीके से आमजन तक पहुंचाया जाएगा।

नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से नागरिकों को पात्रता के अनुसार योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया जाएगा, ताकि सरकारी योजनाओं की जानकारी अंतिम छोर तक पहुंच सके।

‘आंगन का उत्सव’ में पोषण और महिला-बाल कल्याण पर जोर

25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक आंगनवाड़ी केंद्रों में ‘आंगन का उत्सव’ आयोजित किया जाएगा। इस दौरान पोषण, मातृ सहायता, टीकाकरण तथा महिला एवं बाल कल्याण से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की जानकारी हितग्राहियों को दी जाएगी।

कार्यक्रमों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए उनका सम्मान भी किया जाएगा। इस पहल के माध्यम से महिलाओं, बच्चों और परिवारों को स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी जागरूकता से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

‘कहानी बदलाव की’ में सामने आएंगी सफलता की वास्तविक कहानियां

अभियान के दौरान ‘कहानी बदलाव की’ पहल के तहत शासकीय योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों की वास्तविक सफलता की कहानियों का संकलन किया जाएगा। इन कहानियों के माध्यम से यह बताया जाएगा कि सरकारी योजनाओं का प्रभाव किस तरह आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है।

सामाजिक, राजनीतिक संगठनों ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव

रायपुर,  सितम्बर 2026/ छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) को व्यावहारिक, समावेशी और जनोपयोगी बनाने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा गठित यूसीसी समिति ने जनपरामर्श की शुरुआत कर दी है। इसी कड़ी में राजनांदगांव के जिला पंचायत सभाकक्ष में बैठक में यूसीसी समिति के सदस्यों सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी श्री एम.के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मोहन पवार एवं सेवानिवृत्त प्राचार्या डॉ. ज्योति रानी सिंह के समक्ष विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक संगठनों के पदाधिकारियों ने विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन संबंध जैसे विषयों पर खुलकर अपने सुझाव प्रस्तुत किए।

बैठक की मुख्य बातें

पारंपरिक-सामाजिक मान्यताओं से लेकर आधुनिक वैधानिक सुधारों तक के कई अहम पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श हुआ। UCC के पक्ष और विपक्ष दोनों में महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए। बैठक में राजनांदगांव, कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिलों के सर्व आदिवासी समाज, बौद्ध, जैन, मुस्लिम, ईसाई, साहू, कलार, लोधी, यादव, क्रिश्चयन समाज, पटेल, गड़रिया समाज और सेन समाज, अध्यक्ष गोड़ समाज, सामाजिक कार्यकर्ता, उराव समाज, मां बम्लेश्वरी ट्रस्ट समिति के पदाधिकारियों सहित विभिन्न सामाजिक व राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए और अपने सुझाव समिति के समक्ष रखे।

विभिन्न सामाजिक संगठनों दिए गए सुझाव में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code - UCC) के तहत सभी नागरिकों के लिए धर्म, जाति या लिंग के भेदभाव के बिना विवाह, तलाक, बच्चा गोद लेने और संपत्ति के उत्तराधिकार जैसे मामलों में एक जैसा कानून होना चाहिए।

ड्राफ्ट निर्माण की प्रक्रिया

समिति के सदस्यों ने बताया कि प्राप्त सभी सुझावों के आधार पर ही अंतिम ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा। समिति के सदस्यों ने बताया कि आम जनता से ऑनलाइन सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। विधिक सलाहकार द्वारा पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से UCC की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही आम नागरिक समिति की आधिकारिक वेबसाईट https://ucc.cgstate.gov.in/: एवं ई-मेल This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it. के माध्यम से भी अपने सुझाव दर्ज करा सकते हैं।

बैठक के दौरान संभागायुक्त श्री सत्यनारायण राठौर, कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव, जिला पंचायत सीईओ श्री दुर्गा प्रसाद अधिकारी तथा अपर कलेक्टर श्री सी.एल. मारकंडेय सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तैयारियों की समीक्षा की
17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक प्रदेशभर में होंगे विविध आयोजन

रायपुर,सितंबर 2026/ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सेवाकाल के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक प्रदेशभर में आयोजित होने वाले सेवा संकल्प अभियान को व्यापक जनभागीदारी के साथ प्रभावी बनाने की दिशा में तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने आज नया रायपुर स्थित अपने आवास कार्यालय पर अभियान के तहत पर्यटन एवं संस्कृति विभाग द्वारा की जाने वाली गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में सचिव डॉ. एस. भारतीदासन पर्यटन एवं संस्कृति छत्तीसगढ़ शासन, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के प्रबंध संचालक श्री सौमिल रंजन चौबे, संस्कृति विभाग के संचालक डॉ. संजय कन्नौजे सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

मंत्री श्री अग्रवाल ने अभियान की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा कि ‘सेवा संकल्प अभियान’ केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि जनसेवा, जनभागीदारी और विकास के प्रति नागरिकों के विश्वास को मजबूत करने का व्यापक अवसर है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि अभियान से जुड़ी गतिविधियों को अधिक प्रभावी, रचनात्मक और जनोन्मुखी बनाया जाए, ताकि योजनाओं एवं विकास कार्यों का संदेश प्रदेश के अधिक से अधिक लोगों तक सहज और प्रभावशाली ढंग से पहुंच सके।

नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से दिखेगी योजनाओं से आए बदलाव की कहानी

संस्कृति विभाग द्वारा अभियान के दौरान प्रदेश के महाविद्यालयों, विद्यालयों और सार्वजनिक स्थलों, सामुदायिक केन्द, पंचायत सहित विभिन्न प्रमुख स्थानों पर नुक्कड़ नाटकों का आयोजन किया जाएगा। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से केंद्र एवं राज्य शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं तथा इन योजनाओं से आम नागरिकों के जीवन में आए सकारात्मक बदलावों को भावपूर्ण एवं रोचक तरीके से प्रस्तुत किया जाएगा।

नुक्कड़ नाटकों में स्थानीय भाषा, लोककला, संगीत और प्रभावी संवादों का उपयोग करते हुए योजनाओं के वास्तविक लाभार्थियों की जीवन-परिवर्तन की कहानियों को आमजन तक पहुंचाने पर जोर रहेगा। इसका उद्देश्य सरकारी योजनाओं की जानकारी को केवल औपचारिक प्रचार तक सीमित न रखते हुए उसे जनसंवाद और जनजागरूकता का माध्यम बनाना है। महाविद्यालयों एवं विद्यालयों में होने वाली प्रस्तुतियों के माध्यम से विद्यार्थियों और युवाओं को भी अभियान से जोड़ा जाएगा। वहीं सार्वजनिक स्थलों पर प्रस्तुतियां आयोजित कर आम नागरिकों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।

पर्यटन विभाग के माध्यम से दुनिया देखेगी बदलता छत्तीसगढ़

अभियान के दौरान पर्यटन विभाग द्वारा देश और प्रदेश के इन्फ्लूएंसरों के माध्यम से छत्तीसगढ़ में हुए विकास कार्यों, पर्यटन सुविधाओं के विस्तार तथा प्रदेश की बदलती तस्वीर को लोगों तक पहुंचाने की पहल की जाएगी। इन्फ्लूएंसरों के माध्यम से प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों, विकसित अधोसंरचना, पर्यटन सुविधाओं और विकास कार्यों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया जाएगा। इसका उद्देश्य छत्तीसगढ़ के विकास की कहानी को व्यापक वर्ग तक पहुंचाने के साथ प्रदेश की पर्यटन संभावनाओं को भी राष्ट्रीय स्तर पर सामने लाना है। डिजिटल माध्यमों की व्यापक पहुंच को देखते हुए इस पहल के जरिए युवाओं और सोशल मीडिया से जुड़े नागरिकों को अभियान से जोड़ने पर विशेष जोर रहेगा।

सेवा और विकास की गाथा बनेगी जनभागीदारी का माध्यम

‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत प्रदेशभर में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। अभियान का उद्देश्य प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की 25 वर्षों की जनसेवा, नेतृत्व एवं समर्पण के प्रति आभार व्यक्त करने के साथ विकसित भारत-2047 के सामूहिक संकल्प को जनभागीदारी का स्वरूप देना है।

अभियान के तहत ‘आशीर्वाद का दीया’, ‘25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत’, ‘नमो सेवा गाथा’, ‘आंगन का उत्सव’, ‘कहानी बदलाव की’, ‘सेवा ज्योति यात्रा’, ‘सेवा मेरा योगदान’ और ‘सेवा सेतु अभियान, ‘सरकार आपके द्वार’ सहित अनेक गतिविधियां होंगी।

बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड तीसरी लाइन और कटनी-पेंड्रा रोड चौथी लाइन से मजबूत होगा प्रदेश का रेल नेटवर्क

रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ने से यात्री सुविधाओं के साथ उद्योग-व्यापार और माल परिवहन को मिलेगी नई गति

अचानकमार, रतनपुर, मल्हार सहित प्रमुख पर्यटन एवं आस्था केंद्रों की कनेक्टिविटी होगी बेहतर

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव के प्रति जताया आभार

रायपुर सितंबर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 10 हजार 783 करोड़ रुपए की लागत वाली तीन महत्वपूर्ण मल्टीट्रैकिंग रेल परियोजनाओं को मंजूरी दिए जाने का स्वागत किया है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इनमें बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड तीसरी लाइन और कटनी-पेंड्रा रोड चौथी लाइन छत्तीसगढ़ के विकास की दृष्टि से विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। इन परियोजनाओं से प्रदेश के रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी, यात्री सुविधाओं का विस्तार होगा तथा उद्योग और व्यापार के लिए माल परिवहन अधिक सुगम एवं प्रभावी होगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में आधुनिक और मजबूत रेल इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण की दिशा में अभूतपूर्व गति से कार्य हो रहा है। छत्तीसगढ़ को भी इसका निरंतर लाभ मिल रहा है। नई मल्टीट्रैकिंग परियोजनाएं विकसित भारत-विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को गति देने के साथ प्रदेश में आर्थिक गतिविधियों, औद्योगिक विकास और रोजगार की नई संभावनाओं को विस्तार देंगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव के प्रति छत्तीसगढ़ की जनता की ओर से हार्दिक आभार व्यक्त किया है।

रेल नेटवर्क की क्षमता और कनेक्टिविटी में होगा विस्तार

केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत तीन परियोजनाओं में खड़गपुर-झारसुगुड़ा (बागदेही) चौथी लाइन, कटनी-पेंड्रा रोड चौथी लाइन तथा बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड तीसरी लाइन शामिल हैं। इनकी कुल अनुमानित लागत 10 हजार 783 करोड़ रुपए है और इन्हें वर्ष 2029-30 तक पूर्ण करने की योजना है।

इन तीनों परियोजनाओं से पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों में रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी तथा भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 656 किलोमीटर की वृद्धि होगी। इनसे लगभग 4 हजार 790 गांवों और करीब 56 लाख की आबादी को बेहतर रेल कनेक्टिविटी का लाभ मिलेगा।

बिलासपुर-पेंड्रा रेल कॉरिडोर को मिलेगी मजबूती

बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड तीसरी लाइन और कटनी-पेंड्रा रोड चौथी लाइन की स्वीकृति छत्तीसगढ़ के लिए विशेष महत्व रखती है। इन परियोजनाओं से इस महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर की क्षमता में वृद्धि होगी। अतिरिक्त लाइन क्षमता से ट्रेनों का परिचालन अधिक सुगम होगा, रेल यातायात का दबाव कम करने में मदद मिलेगी तथा यात्री और मालगाड़ियों की आवाजाही अधिक प्रभावी एवं विश्वसनीय हो सकेगी। इस रेल कॉरिडोर की क्षमता में वृद्धि से छत्तीसगढ़ की देश के अन्य हिस्सों से कनेक्टिविटी को भी मजबूती मिलेगी। इसका लाभ आम यात्रियों के साथ प्रदेश की औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों को भी मिलेगा।

उद्योग और व्यापार को मिलेगी नई गति

स्वीकृत रेल परियोजनाएं कोयला, सीमेंट, लोहा और इस्पात सहित महत्वपूर्ण वस्तुओं के परिवहन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं। मल्टीट्रैकिंग से रेल नेटवर्क की माल ढुलाई क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। तीनों परियोजनाओं से कुल मिलाकर प्रतिवर्ष लगभग 27 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता विकसित होने का अनुमान है।

छत्तीसगढ़ खनिज और औद्योगिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है। ऐसे में बेहतर रेल और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण आधार बनेगा। माल परिवहन अधिक सुगम होने से उद्योगों को बेहतर लॉजिस्टिक्स सुविधा मिलेगी और प्रदेश में निवेश, व्यापार तथा रोजगार के नए अवसरों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

भूजल संसाधन आकलन के इतिहास में छत्तीसगढ़ ने दर्ज किया सबसे बड़ा एक-चक्रीय सुधार

2020 में 9 और 2025 में 5 विकासखंड थे क्रिटिकल, वर्ष 2026 में संख्या हुई शून्य

पहली बार भूजल दोहन में भी आई गिरावट, वार्षिक भूजल रिचार्ज अब तक के सर्वोच्च 14.65 BCM पर

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘जन शक्ति से जल शक्ति’ के आह्वान को छत्तीसगढ़ ने जनभागीदारी से जमीन पर उतारा : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री ने किसानों और मैदानी अमले को दिया उपलब्धि का श्रेय

रायपुर  सितंबर 2026/ जल संरक्षण और भूजल प्रबंधन के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश में अब एक भी विकासखंड भूजल दोहन की ‘क्रिटिकल’ श्रेणी में नहीं है। भूजल संसाधन आकलन-2026 में यह महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। वर्ष 2020 में प्रदेश के 9 विकासखंड क्रिटिकल श्रेणी में थे और वर्ष 2025 तक भी 5 विकासखंड इस श्रेणी में बने हुए थे। वर्ष 2026 के आकलन में ये सभी पांच विकासखंड क्रिटिकल श्रेणी से बाहर आ गए हैं।

इतना ही नहीं, इस आकलन चक्र में प्रदेश के 12 विकासखंडों की भूजल श्रेणी में सुधार दर्ज किया गया है, जबकि एक भी विकासखंड की स्थिति नहीं बिगड़ी है। विकासखंडवार भूजल आकलन प्रारंभ होने के बाद यह छत्तीसगढ़ का अब तक का सबसे बड़ा एक-चक्रीय सुधार है। प्रदेश में सुरक्षित विकासखंडों की संख्या बढ़कर अब 127 हो गई है।

केंद्रीय भूमि जल बोर्ड और राज्य भूजल सर्वेक्षण मंडल द्वारा संयुक्त रूप से तैयार भूजल संसाधन आकलन-2026 को राज्य स्तरीय भूजल आकलन एवं प्रबंधन समिति द्वारा अनुमोदित किया गया है।

मुख्यमंत्री ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के ‘जन शक्ति से जल शक्ति’ के आह्वान और उनके द्वारा प्रारंभ किए गए ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान ने प्रदेश में जल संरक्षण के प्रयासों को नई दिशा और व्यापकता प्रदान की है। शासन के विभिन्न विभागों, जिला प्रशासन, किसानों और आम नागरिकों की भागीदारी से जल संरक्षण का प्रयास आज एक व्यापक जन आंदोलन का स्वरूप ले चुका है।

जनभागीदारी ने असंभव लगने वाले लक्ष्य को संभव बनाया : मुख्यमंत्री श्री साय

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि का श्रेय प्रदेश के किसानों, नागरिकों और मैदानी अमले को देते हुए कहा कि यह परिणाम केवल शासन की नीतियों का नहीं, बल्कि जनभागीदारी और सामूहिक संकल्प का परिणाम है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह उपलब्धि महानदी भवन में नहीं, बल्कि खेतों और गांवों में हासिल हुई है। इसका सबसे बड़ा श्रेय बेमेतरा और राजनांदगांव सहित प्रदेश के उन किसानों को जाता है, जिन्होंने आने वाली पीढ़ियों की जल सुरक्षा के लिए अपने खेती के तौर-तरीकों में बदलाव स्वीकार किया। हमारे मैदानी अमले ने भी मौसम-दर-मौसम किसानों के साथ मिलकर निरंतर काम किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के ‘जन शक्ति से जल शक्ति’ के आह्वान पर छत्तीसगढ़ ने यह सिद्ध किया है कि जनभागीदारी से भूजल संरक्षण के क्षेत्र में बड़ा और स्थायी बदलाव लाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा शुरू किए गए जल संचय जन भागीदारी अभियान ने पूरे शासन तंत्र को एक साझा लक्ष्य के साथ कार्य करने का मजबूत आधार दिया। जल संरक्षण के लिए सरकार के प्रयासों के साथ जब किसानों और नागरिकों की भागीदारी जुड़ी, तब उसके परिणाम भूजल स्तर में हुए इस ऐतिहासिक सुधार के रूप में सामने आए हैं।

भूजल रिचार्ज 14.65 BCM के ऐतिहासिक उच्च स्तर पर

भूजल संसाधन आकलन-2026 के अनुसार प्रदेश में वार्षिक भूजल रिचार्ज बढ़कर 14.65 बिलियन घन मीटर (BCM) हो गया है, जो अब तक का सर्वोच्च स्तर है। वर्ष 2017 में प्रदेश का वार्षिक भूजल रिचार्ज 11.57 BCM था।

जल संरक्षण संरचनाओं के व्यापक निर्माण और पुनर्जीवन का सीधा प्रभाव भूजल रिचार्ज पर दिखाई दे रहा है। वर्ष 2020 की तुलना में तालाबों एवं पोखरों से होने वाले भूजल रिचार्ज में 266.9 प्रतिशत तथा अन्य जल संरक्षण संरचनाओं से होने वाले रिचार्ज में 202.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

कुलाधिपति एवं राज्यपाल श्री रमेन डेका मुख्य अतिथि के रूप में हुए शामिल

नारी शक्ति और युवा नवाचार से बनेगा नया छत्तीसगढ़- राज्यपाल श्री रमेन डेका

रायपुर,  सितम्बर 2026/ छत्तीसगढ़ (सीएसवीटीयू) भिलाई द्वारा भिलाई इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (बीआईटी), दुर्ग परिसर में महिला सशक्तिकरण, स्वरोजगार, उद्यमिता एवं स्टार्टअप संस्कृति को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से ‘महिला सशक्तिकरण, उद्यमिता एवं स्टार्टअप अभिनंदन कार्यक्रम’ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में कुलाधिपति एवं प्रदेश़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका ने 72 महिला स्व-सहायता-समूहों को मिलेट हेल्थ कार्ट और 24 स्टार्टअप्स को इग्निशन ग्रांट वितरण किया। समारोह में सांसद श्री विजय बघेल, दुर्ग ग्रामीण विधायक श्री ललित चंद्राकर, वैशाली नगर विधायक श्री रिकेश सेन, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्री प्रेमप्रकाश पाण्डेय, दुर्ग महापौर श्रीमती अल्का बाघमार और सहकार भारती के श्री कलीराम शर्मा भी सम्मिलित हुए।

उच्च शिक्षा और तकनीकी ज्ञान की सार्थकता तभी जब रोजगार व उद्यमिता के नए अवसर पैदा करे

मुख्य अतिथि राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि यह आयोजन महिला सशक्तिकरण, पोषण सुरक्षा और स्वरोजगार के माध्यम से नए छत्तीसगढ़ के निर्माण का संकल्प है। उन्होंने कहा कि आज यहां दो महत्वपूर्ण यात्राओं का शुभारंभ हो रहा है, एक हमारी ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाकर नवाचारकर्ताओं के माध्यम से सपनों को उद्यम में बदलने प्रात्साहित करेगी। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा और तकनीकी ज्ञान की सार्थकता तभी है, जब वह समाज की वास्तविक आवश्यकताओं से जुड़कर रोजगार व उद्यमिता के नए अवसर पैदा करे। राज्यपाल ने कहा कि मिलेट से महिला उद्यमिता को नई दिशा मिल रही है।

महिला स्वावलंबी बनती है तब परिवार मजबूत होता है

छत्तीसगढ की कृषि परंपरा में मिलेट अर्थात मोटे अनाज का विशेष महत्व रहा है। आज वहीं पारंपरिक ’श्री अन्न’ (मिलेट) पोषण के साथ-साथ अब आय का नया जरिया बन रहा है। मिलेट पोषण की दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ किसानों, ग्रामीण परिवारों और महिला उद्यमियों के लिए आय के अवसर भी उपलब्ध करा रहा है। महिला स्व-सहायता समूह की बहनों को निःशुल्क मिलेट हेल्थ कार्ट प्रदान किए जाने के साथ ही उन्हें एक सक्षम व्यावसायिक इकाई के रूप में विकसित करने के लिए उत्पाद निर्माण, एफएसएसएआई मानकों, गुणवत्ता नियंत्रण, व्यवसाय प्रबंधन और विपणन का संपूर्ण प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। राज्यपाल ने महिला स्व-सहायता-समूहों को आत्मनिर्भरता से जोड़ने की इस पहल पर बल देते हुए बताया कि जब एक महिला स्वावलंबी बनती है तो उसका परिवार मजबूत होता है और पूरे समुदाय में आत्मविश्वास पैदा होता है।

महिला स्व-सहायता समूह ने गांवों में आर्थिक गतिविधियों को नई गति दी

राज्यपाल श्री डेका ने युवा नवाचार पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 24 नवाचार-आधारित स्टार्टअप्स को कुल 50 लाख की इग्निशन ग्रांट प्रदान की जा रही है। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि नवाचार के मार्ग में असफलताएं स्वाभाविक हैं, लेकिन उनसे सीखकर निरंतर आगे बढ़ना ही एक सफल उद्यमी की पहचान है। छत्तीसगढ़ की महिलाएं परंपरागत रूप से श्रम, कौशल और उद्यमशीलता की मिसाल बन रही हैं, महिला स्व- सहायता समूहों ने गांवों में आर्थिक गतिविधियों को नई गति दी है। अब आवश्यकता इस बात की है कि उनके पारंपरिक कौशल को आधुनिक प्रशिक्षण, तकनीक, ब्रांडिंग और बाजार से जोड़ा जाए।

महिला स्वावलंबन और तकनीकी नवाचार का एक मजबूत केंद्र-सीएसव्हीटीयू

राज्यपाल श्री डेका ने तकनीकी विश्वविद्यालय के ज्ञान और संसाधनों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने विश्वास जताया कि सीएसव्हीटीयू-फोर्टे (फाउंडेशन फॉर रूरल टेक्नोलॉजी एंड एंटरप्रेन्योरशिप) आने वाले समय में ग्रामीण उद्यमिता, महिला स्वावलंबन और तकनीकी नवाचार का एक मजबूत केंद्र बनेगा। उन्होंने सभी महिला एसएचजी की बहनों और युवाओं को उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी।

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