ईश्वर दुबे
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उप मुख्यमंत्री ने भोरमदेव शक्कर कारखाना में 28 हजार शेयरधारी गन्ना किसानों को रियायती दर पर शक्कर वितरण का किया शुभारंभ
शक्कर कारखाना कवर्धा को सर्वोच्च शुगर रिकवरी के लिए वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 हेतु राष्ट्रीय स्तर का मिला एफिशिएंसी अवार्ड
उप मुख्यमंत्री ने किसानों की सुविधा के लिए शक्कर कारखाना परिसर में डोम निर्माण की घोषणा की
रायपुर, सितंबर 2026/ देश में लगातार दो वर्षों तक सर्वाधिक रिकवरी का गौरव हासिल करने वाले भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना ने किसानों को एक और बड़ी सौगात दी है। उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने आज 28 हजार शेयरधारी गन्ना किसानों को 30 रुपए प्रति किलो की रियायती दर पर 50 किलो शक्कर वितरण का शुभारंभ किया। यह लगातार तीसरा वर्ष है, जब किसानों को रियायती दर पर शक्कर उपलब्ध कराई जा रही है। कार्यक्रम में आदिम जाति विकास, कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी मंत्री श्री रामविचार नेताम वर्चुअल माध्यम से जुड़े रहे। भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना कवर्धा को नेशनल को ऑपरेटिव शुगर फेडरेशन,नई दिल्ली के द्वारा सर्वोच्च शुगर रिकवरी के लिए वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 में एफिशिएंसी अवार्ड प्राप्त होने पर क्षेत्र वासियों, शेयर धारक किसानों एवं कर्मचारियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने किसानों की सुविधा के लिए भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना परिसर में डोम निर्माण की घोषणा की।
उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि यह कारखाना किसानों का अपना कारखाना है और इसकी मजबूती किसानों की सहभागिता से ही संभव है। उन्होंने कहा कि भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना में लगातार तीसरे वर्ष किसानों को रियायती दर पर शक्कर वितरण की शुरुआत की गई है। इस वर्ष 4 हजार 686 नए किसानों को शेयरधारी बनाया गया है। इस प्रकार अब लगभग 28 हजार शेयरधारी किसानों को 30 रुपए प्रति किलो की दर से 50 किलो शक्कर उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि किसानों को यह लाभ सहकारिता की भावना और कारखाने से उनके जुड़ाव का महत्वपूर्ण परिणाम है। उप मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष कारखाने में 2 लाख 55 हजार मीट्रिक टन गन्ने की पेराई की गई थी। इस वर्ष इसे बढ़ाकर 4 लाख मीट्रिक टन करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, 10 हजार किसानों से गन्ना अनुबंध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अधिक से अधिक संख्या में कारखाने से अनुबंध करें और गन्ना उपलब्ध कराएं, ताकि कारखाना निरंतर सुचारु रूप से संचालित हो सके। उन्होंने कहा कि किसानों के सहयोग से ही कारखाना आगे बढ़ेगा और इसका लाभ भी किसानों तक पहुंचेगा। इस अवसर पर पूर्व संसदीय सचिव डॉ. सियाराम साहू, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री कैलाश चंद्रवंशी, जिला पंचायत सदस्य श्री राम कुमार भट्ट, नगर पंचायत अध्यक्ष बोड़ला श्री विजय पाटिल, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्री विदेशीराम धुर्वे, श्री संतोष पटेल, श्री मनीराम साहू, श्री भुनेश्वर चंद्राकर, श्री रामकिंकर वर्मा, श्री खिलेश्वर साहू सहित जनप्रतिनिधि और किसान उपस्थित रहे।
देश में सर्वाधिक रिकवरी का लगातार दो वर्षों का गौरव
उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने बताया कि भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना ने वर्ष 2024–25 और 2025–26 में पूरे देश में सर्वाधिक रिकवरी प्राप्त करने वाले कारखाने के रूप में गौरव हासिल किया है। इसके लिए कारखाने को प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया है। उन्होंने कहा कि बेहतर रिकवरी केवल कारखाने की उपलब्धि नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत का परिणाम है। किसानों द्वारा उत्पादित गुणवत्तापूर्ण गन्ने और उनके परिश्रम से ही कारखाना उच्च स्तर पर पहुंचा है। उन्होंने कहा कि किसानों की मेहनत, कारखाना प्रबंधन की कार्यक्षमता और सहकारिता की भावना मिलकर भोरमदेव शक्कर कारखाना को नई पहचान दे रही है।उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सहकारी समिति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें होने वाला लाभ सभी सदस्यों के बीच साझा होता है। यही कारण है कि सहकारिता किसानों के लिए उपयोगी और लाभकारी व्यवस्था है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे कारखाने से जुड़कर शेयरधारी बनें और गन्ना अनुबंध के माध्यम से इसकी गतिविधियों को और मजबूत करें। उन्होंने किसानों को समर्थन मूल्य बोनस बढ़ाने का भी आश्वासन दिया।
एनडीपीएस एक्ट सम्बंधित राजनांदगांव रेंज स्तरीय कार्यशाला में उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा हुए शामिल
प्रकरणों की विवेचना में गुणवत्ता एवं प्रभावशील बनाने कवर्धा में कार्यशाला का हुआ आयोजन
उप मुख्यमंत्री ने एनडीपीएस एक्ट के प्रकरणों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को किया सम्मानित
रायपुर, सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ में नशीली दवाओं, पदार्थों के निर्माण, बिक्री, परिवहन, आयात-निर्यात, भंडारण एवं सेवन को नियंत्रित और प्रतिबंधित करने के उद्देश्य से नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) एक्ट लागू है। एनडीपीएस एक्ट के प्रकरणों की विवेचना में गुणवत्ता एवं प्रभावशीलता बढ़ाने तथा आरोपियों को प्रभावी ढंग से दोषसिद्ध कराने के उद्देश्य से आज कबीरधाम जिले के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय कवर्धा में राजनांदगांव रेंज स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का शुभारंभ उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक श्री विजय शर्मा ने भारत माता एवं छत्तीसगढ़ महतारी के तैलचित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर पुलिस महानिरीक्षक राजनांदगांव रेंज श्री अजय यादव, पुलिस अधीक्षक श्री जितेंद्र कुमार यादव सहित राजनांदगांव रेंज के पुलिस अधिकारी एवं विवेचना अधिकारी उपस्थित रहे।
उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री श्री विजय शर्मा ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि नशीले पदार्थों के निर्माण, बिक्री, परिवहन, आयात-निर्यात और भंडारण से जुड़े पूरे नेटवर्क को पूरी ताकत से तोड़ना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि एनडीपीएस के मामलों में केवल गिरफ्तारी तक कार्रवाई सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि विवेचना को इस स्तर तक प्रभावी बनाया जाए कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को न्यायालय से दोषसिद्धि दिलाई जा सके। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से कहा कि गवाहों की अनुपस्थिति जैसी परिस्थितियों में भी उपलब्ध वैज्ञानिक एवं तकनीकी साक्ष्यों का बेहतर उपयोग करते हुए प्रकरण को मजबूत बनाया जाए।
कार्यशाला में पुलिस महानिरीक्षक राजनांदगांव रेंज श्री अजय यादव ने विवेचना अधिकारियों को एनडीपीएस एक्ट के प्रकरणों में प्रभावी विवेचना, साक्ष्य संकलन एवं दोषसिद्धि के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने ऐसे प्रकरणों में गवाहों की अनुपस्थिति अथवा अन्य चुनौतियों के बावजूद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मजबूत प्रकरण तैयार करने की प्रक्रिया पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने छत्तीसगढ़ में हाल ही में सामने आए एनडीपीएस के प्रकरणों का उदाहरण देते हुए कहा कि नशीले पदार्थों की तस्करी के दौरान गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ एवं उनके लोकेशन तथा संपर्कों की तस्दीक कर यह पता लगाया जाए कि नशीला पदार्थ कहां से लाया गया और कहां तक पहुंचाया जाना था। उन्होंने कहा कि कार्रवाई को केवल सामने मौजूद आरोपी तक सीमित न रखते हुए पूरे तस्करी नेटवर्क की कड़ियों तक पहुंचना और तस्करी की चैन को समाप्त करना पुलिस की प्राथमिकता होनी चाहिए। कार्यशाला में एनडीपीएस एक्ट से संबंधित प्रकरणों की विवेचना में आने वाली व्यवहारिक चुनौतियों, साक्ष्य संकलन, तकनीकी साक्ष्य के उपयोग, दस्तावेजी प्रक्रिया तथा न्यायालय में दोषसिद्धि के लिए आवश्यक बिंदुओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम के अंत में पुलिस अधीक्षक श्री जितेंद्र कुमार यादव ने आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारी एवं विवेचना अधिकारी कार्यशाला में प्राप्त मार्गदर्शन को अपने कार्यक्षेत्र में प्रभावी रूप से लागू करते हुए नशे के अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेंगे।
घोलेंग में टेक्सटाइल प्रशिक्षण से रोजगार और स्वरोजगार की राह हो रही मजबूत
* श्री सुनील त्रिपाठी सहायक संचालक
* श्रीमती नूतन सिदार सहायक संचालक
रायपुर, सितंबर 2026/ कभी घर-आंगन और गांव की परंपराओं तक सीमित रहने वाला हुनर अब रोजगार और आत्मनिर्भरता की नई राह बना रहा है। जशपुर जिले के ग्राम घोलेंग में पारंपरिक हस्तकरघा कला को आधुनिक तकनीक, कौशल प्रशिक्षण और बाजार की जरूरतों से जोड़कर महिलाओं और युवाओं के लिए आजीविका के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं। यह पहल न केवल स्थानीय हुनर को नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने की संभावनाओं को भी आकार दे रही है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और युवाओं को रोजगारपरक कौशल से जोड़ने के प्रयासों को निरंतर गति दी जा रही है। इसी दिशा में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने महिलाओं और युवाओं को आधुनिक तकनीक एवं कौशल प्रशिक्षण से जोड़ने पर विशेष जोर दिया है। घोलेंग का आजीविका परिसर इसी सोच को जमीन पर साकार करने का उदाहरण बन रहा है।
प्रशिक्षण के साथ उत्पादन, हुनर को आय से जोड़ने की पहल
ग्राम घोलेंग स्थित आजीविका परिसर में स्थानीय महिलाओं और युवाओं को टेक्सटाइल एवं हैंडलूम से जुड़े कार्यों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आदित्य बिरला ग्रुप, जिला प्रशासन, बिहान एवं टेक्सटाइल स्किल सेक्टर काउंसिल के संयुक्त प्रयास से संचालित यह पहल प्रशिक्षण को केवल कौशल सीखने तक सीमित नहीं रखती, बल्कि इसके साथ उत्पादन गतिविधियों को भी विकसित करने पर जोर दे रही है।
घोलेंग में आजीविका से परंपरागत रूप से जुड़े लगभग 35 से 40 परिवारों एवं स्व सहायता समूहों की महिलाओं को हैंडलूम और टेक्सटाइल से संबंधित कार्यों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। महिलाएं आधुनिक तकनीक और मशीनों के माध्यम से कपड़ा तैयार करने के साथ शॉल, साड़ी और अन्य उपयोगी उत्पाद बनाने का हुनर सीख रही हैं।
इस व्यवस्था का उद्देश्य स्पष्ट है—हाथों में हुनर आए और उस हुनर को आय का साधन भी मिले। प्रशिक्षण के साथ उत्पादन का अवसर मिलने से महिलाएं सीखे हुए कौशल को वास्तविक कार्य में उपयोग कर रही हैं और भविष्य में इसे अपनी नियमित आजीविका से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
परंपरा और तकनीक का संगम
जशपुर की पहचान उसकी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और स्थानीय हुनर से है। घोलेंग में इसी पारंपरिक कौशल को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को उत्पादन की आधुनिक प्रक्रियाओं के साथ डिजाइन, गुणवत्ता और बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार करने की जानकारी दी जा रही है।
इससे पारंपरिक हस्तकरघा कला को केवल सांस्कृतिक विरासत के रूप में संरक्षित करने के बजाय उसे आधुनिक आर्थिक गतिविधि से जोड़ने का रास्ता तैयार हो रहा है। बेहतर डिजाइन और गुणवत्ता वाले उत्पादों को बाजार से जोड़ने की तैयारी के साथ स्थानीय हस्तकरघा उत्पादों को व्यापक पहचान दिलाने की संभावनाएं भी मजबूत हो रही हैं।
महिला स्व सहायता समूह बनेंगे आर्थिक बदलाव के वाहक
इस पहल की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी महिला स्व सहायता समूह हैं। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद महिलाएं अपने समूहों के माध्यम से उत्पादन गतिविधियों में भागीदारी कर सकेंगी। इससे समूह आधारित आजीविका को बढ़ावा मिलने के साथ महिलाओं की आय के नए स्रोत विकसित होने की संभावना है।
महिलाओं के आर्थिक रूप से सशक्त होने का प्रभाव केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं रहता। उनकी आय बढ़ने से परिवार की जरूरतों की पूर्ति, बच्चों की शिक्षा और घरेलू आर्थिक निर्णयों में उनकी भागीदारी मजबूत होती है। इस तरह घोलेंग में विकसित हो रही यह पहल महिला सशक्तिकरण से ग्रामीण आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।
युवाओं के लिए अपने क्षेत्र में रोजगार की नई संभावना
टेक्सटाइल क्षेत्र में स्थानीय युवाओं को भी प्रशिक्षण से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य उन्हें रोजगारपरक कौशल प्रदान कर अपने ही क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ना है।
विशाखापट्टनम में आयोजित 41वें IATO Annual Convention में प्रदेश की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पर्यटन संभावनाओं का हुआ प्रभावी प्रदर्शन
‘Best Emerging Tourist Destination’ सम्मान से बढ़ा गौरव
रायपुर, सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक खूबसूरती, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और जनजातीय परंपराओं ने एक बार फिर राष्ट्रीय पर्यटन मंच पर अपनी अलग पहचान दर्ज कराई है। विशाखापट्टनम में आयोजित 41वें इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर्स (IATO) के वार्षिक सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के पर्यटन विकास की संभावनाओं और भविष्य की दिशा पर विस्तार से चर्चा हुई। देशभर से जुटे पर्यटन विभागों, यात्रा संचालकों और पर्यटन उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों के बीच छत्तीसगढ़ की विविधतापूर्ण पर्यटन क्षमता को सामने रखने का अवसर मिला। सम्मेलन के दौरान प्रदेश की पर्यटन संभावनाओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किए जाने के साथ छत्तीसगढ़ को ‘Best Emerging Tourist Destination’ के प्रतिष्ठित सम्मान से भी नवाजा गया।
विशाखापट्टनम स्थित नोवोटेल वरुण बीच में 10 से 13 सितंबर तक आयोजित चार दिवसीय सम्मेलन की मुख्य विषय-वस्तु ‘भारत—विश्व के पर्यटन अवसरों का अगला बड़ा केंद्र’ रही। सम्मेलन में देश में पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने, नए पर्यटन स्थलों को विकसित करने तथा पर्यटन कारोबार को बढ़ावा देने से जुड़े विभिन्न विषयों पर मंथन किया गया। इस राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ ने अपनी पर्यटन विविधता और संभावनाओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करते हुए देश के पर्यटन मानचित्र पर अपनी बढ़ती उपस्थिति को रेखांकित किया।
पर्यटन विकास के विजन को मिला राष्ट्रीय मंच
सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में छत्तीसगढ़ के पर्यटन विकास की दिशा, प्रदेश की विशेषताओं और यहां मौजूद पर्यटन अवसरों को प्रमुखता से रखा गया। प्राकृतिक सौंदर्य से लेकर इतिहास, धर्म, संस्कृति और जनजातीय जीवन तक छत्तीसगढ़ की विविध पहचान को पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया गया। प्रदेश की पर्यटन संपदा को प्रभावशाली वीडियो प्रेजेंटेशन के माध्यम से देशभर से आए ट्रैवल एजेंट्स और टूर ऑपरेटर्स के सामने प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुति में छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक सौंदर्य, आदिवासी संस्कृति, वन्यजीव, जलप्रपात, पुरातात्विक धरोहर और साहसिक पर्यटन स्थलों की आकर्षक झलक दिखाई गई।
प्रस्तुति के दौरान देशभर से आए ट्रैवल एजेंट्स और टूर ऑपरेटर्स को छत्तीसगढ़ को अपनी नई यात्रा इटिनरी में शामिल करने तथा इसे एक उभरते हुए पर्यटन गंतव्य के रूप में बढ़ावा देने के लिए आमंत्रित किया गया। साथ ही पर्यटन बोर्ड द्वारा प्रदेश में पर्यटन विकास के लिए की जा रही पहलों और नई पर्यटन संभावनाओं की जानकारी भी साझा की गई। प्रदेश के पर्यटन को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों तक पहुंचाने, नए पर्यटन स्थलों को विकसित करने तथा स्थानीय समुदायों को पर्यटन से जोड़कर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श हुआ।
केंद्रीय मंत्री सहित देशभर के पर्यटन प्रतिनिधि हुए शामिल
सम्मेलन में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री *श्री किंजरापु राम मोहन नायडू, आंध्र प्रदेश के पर्यटन, संस्कृति एवं छायांकन मंत्री श्री कंदुला दुर्गेश, आंध्र प्रदेश सरकार के विशेष मुख्य सचिव श्री शमशेर सिंह रावत सहित पर्यटन और यात्रा उद्योग से जुड़े अनेक प्रमुख प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही।
छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा ने भी सम्मेलन में सहभागिता की। पर्यटन क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विषयों पर हुए संवाद में उन्होंने प्रदेश की पर्यटन संभावनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर सामने रखा। सम्मेलन के दौरान श्री नीलू शर्मा को सम्मानित भी किया गया।
झरनों, जंगलों और जनजातीय संस्कृति से समृद्ध है छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ की पर्यटन पहचान केवल प्राकृतिक सौंदर्य तक सीमित नहीं है। प्रदेश में प्रकृति के साथ इतिहास, अध्यात्म, संस्कृति और जनजातीय जीवन का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। बस्तर के मनमोहक जलप्रपात और घने वन, सिरपुर की प्राचीन ऐतिहासिक विरासत, दंतेवाड़ा की धार्मिक आस्था और प्रदेश की समृद्ध जनजातीय संस्कृति एवं लोक परंपराएं छत्तीसगढ़ को देश के अन्य पर्यटन राज्यों से अलग पहचान देती हैं।
*मुख्यमंत्री ने बीजापुर के एकलव्य आवासीय विद्यालय में छात्राओं से दुर्व्यवहार की शिकायत पर लिया संज्ञान : बीजापुर कलेक्टर को दिए कार्रवाई करने के निर्देश*
*दुर्व्यवहार अथवा उत्पीड़न की शिकायत मिलते ही हो तत्काल कार्रवाई, दोषी किसी भी सूरत में बख्शे न जाएं - मुख्यमंत्री श्री साय*
*बालिका छात्रावासों एवं आवासीय विद्यालयों का सभी कलेक्टर नियमित निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्थाओं की करें समीक्षा*
*छात्राओं के लिए ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करें, जिसमें वे बिना किसी भय और संकोच के अपनी बात रख सकें*
*शिकायतों को दबाने, छिपाने अथवा कार्रवाई में विलंब की स्थिति में संबंधित जिम्मेदारों की भी तय होगी जवाबदेही*
रायपुर 13 सितंबर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रदेश के आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों में अध्ययनरत बालिकाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट कहा है कि बच्चों की सुरक्षा और गरिमा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। दुर्व्यवहार, उत्पीड़न अथवा असुरक्षित वातावरण से संबंधित किसी भी शिकायत को पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ लेते हुए तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आवासीय विद्यालय और छात्रावास बच्चों के लिए केवल अध्ययन के स्थान नहीं, बल्कि उनके घर की तरह हैं। माता-पिता अपने बच्चों को विश्वास के साथ इन संस्थानों में भेजते हैं। इस विश्वास की रक्षा करना शासन-प्रशासन और संस्थान से जुड़े प्रत्येक अधिकारी-कर्मचारी की जिम्मेदारी है। बच्चों को सुरक्षित, भयमुक्त और गरिमापूर्ण वातावरण उपलब्ध कराना हर परिस्थिति में सुनिश्चित किया जाए।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने बीजापुर जिले के एकलव्य आवासीय विद्यालय में छात्राओं के साथ कथित दुर्व्यवहार संबंधी समाचार पर संज्ञान लेते हुए जिला कलेक्टर श्री विश्वदीप और पुलिस अधीक्षक को मामले की गंभीरता से जांच कर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। जांच में जो भी तथ्य सामने आएं, उनके आधार पर बिना किसी विलंब के विधिसम्मत कार्रवाई की जाए। यदि किसी स्तर पर शिकायत की अनदेखी, उसे दबाने का प्रयास अथवा कर्तव्य में लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित जिम्मेदारों की जवाबदेही भी तय की जाए।
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस प्रकरण के संदर्भ में सभी जिलों को व्यापक सतर्कता बरतने के निर्देश देते हुए कहा कि जिले में संचालित बालिका छात्रावासों, आश्रमों और आवासीय विद्यालयों का नियमित निरीक्षण किया जाए। कलेक्टर यह सुनिश्चित करें कि इन संस्थानों में सुरक्षा संबंधी निर्धारित व्यवस्थाओं और प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन हो रहा है। छात्रावासों में अधीक्षकों एवं अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति, परिसर की सुरक्षा व्यवस्था तथा बच्चों की शिकायतों के निराकरण की व्यवस्था की भी समीक्षा की जाए।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि बच्चों से जुड़ी शिकायतों के मामले में केवल शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई करने तक व्यवस्था सीमित नहीं रहनी चाहिए। नियमित निरीक्षण, सतत संवाद और प्रभावी निगरानी के माध्यम से ऐसी परिस्थितियों को पहले ही पहचानने और रोकने की व्यवस्था विकसित की जाए। विद्यालय एवं छात्रावास प्रबंधन को भी यह स्पष्ट रूप से बताया जाए कि बच्चों की सुरक्षा के प्रति किसी भी प्रकार की उदासीनता गंभीरता से ली जाएगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित किया है कि बालिकाओं के साथ दुर्व्यवहार, उत्पीड़न अथवा उन्हें डराने-धमकाने जैसी किसी भी शिकायत की सूचना मिलने पर संबंधित विभाग और पुलिस प्रशासन आपसी समन्वय के साथ तत्काल कार्रवाई करें। आवश्यक होने पर पीड़ित छात्राओं को काउंसलिंग एवं अन्य जरूरी सहायता भी उपलब्ध कराई जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी बेटियां निर्भय होकर पढ़ें, आगे बढ़ें और अपने सपनों को पूरा करें, इसके लिए सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। प्रदेश के प्रत्येक आवासीय विद्यालय और छात्रावास में बच्चों की सुरक्षा, सम्मान और गरिमा सर्वोपरि है। इस दिशा में लापरवाही बरतने वाले किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में 500 से अधिक विद्यार्थियों से उप मुख्यमंत्री ने किया सीधा संवाद
साइबर ठगी होते ही 1930 पर तत्काल संपर्क करें, जागरूकता को गांव-गांव तक पहुंचाएं - श्री विजय शर्मा
एक करोड़ रुपए से अधिक की ‘डिजिटल अरेस्ट’ ठगी के पीड़ित ने साझा किया अनुभव
गोल्डन ऑवर में पुलिस से संपर्क से वापस मिली 60 लाख रुपए की राशि
रायपुर, सितंबर 2026/ छत्तीसगढ़ को साइबर अपराधों से मुक्त और सुरक्षित डिजिटल राज्य बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा चलाए जा रहे ‘साइबर जागृति अभियान’ को आज पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर में आयोजित कार्यक्रम के माध्यम से नई गति मिली। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री श्री विजय शर्मा ने साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार किए गए 9 मॉड्यूल वाले वीडियो पाठ्यक्रम ‘साइबर संकल्प’ का शुभारंभ किया।
‘साइबर संकल्प’ के माध्यम से सरल भाषा में डिजिटल सुरक्षा की जानकारी*
उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि आज डिजिटल तकनीक हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। बैंकिंग, खरीदारी, शिक्षा, व्यापार और सरकारी सेवाओं सहित अनेक कार्य ऑनलाइन हो रहे हैं। डिजिटल सुविधाओं ने जीवन को आसान बनाया है, लेकिन इसके साथ साइबर अपराधों की नई चुनौतियां भी सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि इन्हीं चुनौतियों से निपटने के लिए ‘साइबर संकल्प’ एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके अंतर्गत 9 वीडियो मॉड्यूल तैयार किए गए हैं और प्रत्येक मॉड्यूल लगभग 5 से 6 मिनट का है। इन वीडियो के माध्यम से नागरिकों को साइबर ठगी के नए तरीकों, डिजिटल सुरक्षा और साइबर अपराधों से बचाव के व्यावहारिक उपायों की जानकारी सरल भाषा में दी जाएगी।
डिजिटल क्रांति के साथ डिजिटल सुरक्षा भी जरूरी - श्री विजय शर्मा
विद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि भारत डिजिटल लेनदेन के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है। देश में बड़े पैमाने पर डिजिटल लेनदेन हो रहा है और डिजिटल अर्थव्यवस्था तेजी से विस्तार कर रही है। उन्होंने कहा कि डिजिटल सुविधा जितनी तेजी से बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है। साइबर अपराधी लगातार नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में तकनीक का उपयोग करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को सतर्क और जागरूक रहना होगा। श्री शर्मा ने विद्यार्थियों से कहा कि वे स्वयं साइबर अपराधों से बचने के उपाय सीखें और अपने परिवार, मित्रों तथा समाज के अन्य लोगों को भी जागरूक करें। उन्होंने विशेष रूप से साइबर जागरूकता को गांव-गांव तक पहुंचाने का आह्वान किया।
साइबर ठगी होते ही 1930 पर करें तत्काल कॉल
उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तत्काल कार्रवाई को सबसे महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन ठगी होती है तो घबराने या देर करने के बजाय तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध में शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। समय पर सूचना मिलने से पुलिस को ठगी की राशि को रोकने और पीड़ित तक वापस पहुंचाने की कार्रवाई करने में मदद मिलती है।
‘गोल्डन ऑवर’ का महत्व सामने आया, पीड़ित ने साझा की आपबीती*
कार्यक्रम में साइबर अपराध से पीड़ित व्यक्तियों ने अपने अनुभव साझा कर विद्यार्थियों को साइबर ठगी के वास्तविक स्वरूप से अवगत कराया। एक करोड़ रुपये से अधिक की साइबर धोखाधड़ी के शिकार डॉ. सेन ने बताया कि किस प्रकार उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर साइबर अपराधियों ने अपने जाल में फंसाया। उन्होंने समय रहते पुलिस से संपर्क किया। गोल्डन ऑवर में पुलिस को सूचना मिलने के कारण 60 लाख रुपये की ठगी की राशि वापस प्राप्त हो सकी। उनकी आपबीती ने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि साइबर ठगी के बाद प्रत्येक मिनट महत्वपूर्ण होता है और तत्काल पुलिस अथवा 1930 पर सूचना देना अत्यंत आवश्यक है।
देश की ऊर्जा जरूरत और राज्य के विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय हितों को प्राथमिकता
रायपुर, सितंबर 2026/छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम ने बताया है कि फिलहाल तारा कोल ब्लॉक की केवल प्रतिस्पर्धात्मक नीलामी हुई है। खनन शुरू करने से पहले माइनिंग प्लान, खनन पट्टा, पर्यावरण स्वीकृति, वन स्वीकृति और अन्य सभी जरूरी वैधानिक अनुमतियां हासिल करनी होंगी। इन प्रक्रियाओं और अनुमोदनों के पूरा होने के बाद ही वास्तविक खनन गतिविधियां शुरू करने की अनुमति मिल सकेगी।
तारा कोल ब्लॉक की प्रतिस्पर्धात्मक नीलामी में कुल 9 बोलियां मिली थीं। नीलामी प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह ब्लॉक CG Syn&Gas and Chemicals Limited को प्राप्त हुआ है।
खनन से पहले वन स्वीकृति के विभिन्न चरण पूरे करने होंगे। पर्यावरणीय प्रभावों का निर्धारित मानकों के अनुसार परीक्षण भी किया जाएगा। जरूरी वैधानिक अनुमतियां मिलने से पहले वृक्षों की कटाई या वास्तविक खनन गतिविधि शुरू नहीं की जा सकती। यानि कोल ब्लॉक की नीलामी, वन एवं पर्यावरण स्वीकृति और वास्तविक खनन की अनुमति अलग-अलग चरण हैं।
हसदेव-अरण्य में कोल ब्लॉकों के आवंटन और खनन से जुड़ी प्रक्रिया पहले से चली आ रही है। तारा कोल ब्लॉक वर्ष 2011 में छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम को आवंटित किया गया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के परिणामस्वरूप अन्य कोल ब्लॉकों के साथ इसका पूर्व आवंटन निरस्त हो गया।
इसी अवधि में हसदेव-अरण्य क्षेत्र के अन्य कोल ब्लॉक विभिन्न सरकारी विद्युत उत्पादन संस्थाओं की जरूरतों से जुड़े थे। इनमें परसा ईस्ट केते बासन (पीईकेबी), राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की विद्युत उत्पादन जरूरतों के लिए आवंटित प्रमुख ब्लॉकों में शामिल रहा है।
हसदेव-अरण्य क्षेत्र के कोल ब्लॉकों से संबंधित वन और पर्यावरण स्वीकृतियों की प्रक्रिया भी केंद्र की पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में आगे बढ़ी थी। वर्ष 2011 में वन सलाहकार समिति की प्रतिकूल अनुशंसा के बावजूद केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के स्तर पर तारा और पीईकेबी के संबंध में वन स्वीकृति देने का निर्णय लिया गया था। पीईकेबी को जुलाई 2011 में स्टेज-1 और मार्च 2012 में स्टेज-2 फारेस्ट क्लियरेंस मिली थी। इसी अवधि में परियोजना की पर्यावरणीय स्वीकृति की प्रक्रिया भी आगे बढ़ी।
पूर्व की व्यवस्था में कोल ब्लॉक सरकारी कंपनियों या निर्धारित उपयोगकर्ता संस्थाओं को आवंटित किए जाते थे। वर्तमान व्यवस्था में वाणिज्यिक कोयला खनन के लिए पारदर्शी प्रतिस्पर्धात्मक नीलामी की प्रक्रिया अपनाई जाती है। तारा कोल ब्लॉक की मौजूदा प्रक्रिया इसी व्यवस्था के तहत हुई है। नीलामी में सफल होने से कंपनी को स्वतः खनन, वन या पर्यावरण स्वीकृति नहीं मिलती।
देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों और विद्युत आपूर्ति की निरंतरता के लिए घरेलू कोयला संसाधनों की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। हसदेव क्षेत्र में पूर्ववर्ती राज्य सरकार के कार्यकाल में भी कोयला उत्पादन और बिजली आपूर्ति की जरूरत को ध्यान में रखते हुए विभिन्न स्तरों पर निर्णय लिए गए और केंद्र सरकार से पत्राचार हुआ। वर्ष 2019 और 2021 में कोल ब्लॉकों के आवंटन को लेकर केंद्र सरकार से पत्राचार किया गया था। वर्ष 2022 में छत्तीसगढ़ विधानसभा ने हसदेव क्षेत्र के कोल ब्लॉकों के संबंध में एक अशासकीय संकल्प भी पारित किया।
हसदेव-अरण्य में कोयला संसाधनों के उपयोग का मामला केवल तारा ब्लॉक तक सीमित नहीं है। मोरगा कोल ब्लॉक के आवंटन का विषय भी अभी जीवित है। पूर्ववर्ती राज्य सरकार ने इसे छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के पक्ष में आवंटित करने के लिए केंद्रीय कोयला मंत्रालय से अनुरोध किया था।
राज्य सरकार के पत्र में कहा गया था कि मोरगा से लगे मदनपुर कोल ब्लॉक के मदनपुर साउथ ब्लॉक को केंद्रीय कोयला मंत्रालय पहले ही आंध्र प्रदेश मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन को आवंटित कर चुका है। इसी आधार पर मोरगा कोल ब्लॉक को छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम को आवंटित करने का अनुरोध किया गया था। पत्र में यह भी कहा गया था कि आवंटन के बाद जरूरी पर्यावरणीय अनुमतियों के लिए राज्य सरकार केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से अनुरोध करेगी।
सरकार ने पात्रता का दायरा बढ़ाया, विगत 9 वर्षो से निवासरत परिवारों को भी अब मिलेगा लाभ
राज्य शासन ने निकायों को नई कट-ऑफ तिथि के अनुसार 15 दिनों में नए हितग्राहियों को एएचपी आवासों का लाभ दिलाना सुनिश्चित करने कहा
गरीब परिवारों को सुरक्षित, सम्मानजनक और स्थाई आवास उपलब्ध कराने हम प्रतिबद्ध – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
एएचपी परियोजनाओं में हितग्राही चयन और योजनाबद्ध बसाहट को मिलेगी नई गति – उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव
रायपुर. सितम्बर 2026. शहरी गरीबों के आशियाने के सपने को पूरा करने छत्तीसगढ़ सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। नगरीय निकायों में रहने वाले परिवारों के हित में संवेदनशील फैसला लेते हुए राज्य शासन ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 के लिए निवास की वैधता की कट-ऑफ तिथि को 31 अगस्त 2015 से बढ़ाकर अब 31 अगस्त 2024 कर दिया है। सरकार के इस निर्णय से विगत 9 वर्षों से शहरों में रह रहे लोगों को भी योजना का लाभ मिल सकेगा। छत्तीसगढ़ सरकार का यह निर्णय हजारों शहरी परिवारों के लिए पक्के घर का नया अवसर लेकर आया है। “आवास से सम्मान, सम्मान से सशक्तीकरण” के संकल्प को साकार करने की दिशा में राज्य शासन का यह महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव के मार्गदर्शन में शासन ने शहरी गरीबों एवं जरूरतमंद परिवारों के आवास के सपने को साकार करने के लिए संवेदनशील और दूरदर्शी निर्णय लिया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत हितग्राहियों के निवास की वैधता के निर्धारण के लिए नई कट-ऑफ-तिथि 31 अगस्त 2024 निर्धारित करते हुए इसका आदेश मंत्रालय से जारी कर दिया है।
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने बताया कि शासन द्वारा इस आशय का आदेश प्रसारित कर दिया गया है। पूर्व में निर्धारित 31 अगस्त 2015 की तिथि में संशोधन से राज्य के नगरीय क्षेत्रों में निवासरत अधिक पात्र परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 का लाभ ले सकेंगे। यह निर्णय शहरी क्षेत्रों की बदलती आवश्यकताओं, बढ़ती आबादी तथा गरीब एवं निम्न आय वर्ग के परिवारों की वास्तविक आवासीय जरूरतों को ध्यान में रखकर लिया गया है।
हर पात्र परिवार तक पक्के आवास की पहुंच
राज्य शासन का यह निर्णय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के “सबके लिए आवास” के संकल्प तथा मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की गरीब कल्याण की प्राथमिकता को मजबूत करता है। इससे शहरी क्षेत्रों में निवासरत अधिक जरूरतमंद परिवारों का पारदर्शी सर्वेक्षण, दस्तावेज सत्यापन एवं पात्रता परीक्षण कर उन्हें योजना के दायरे में शामिल करने का मार्ग प्रशस्त होगा। इस निर्णय से किराये के आवासों, अस्थायी बस्तियों या अपर्याप्त आवासीय परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहे पात्र परिवारों को सुरक्षित, पक्के और सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने के प्रयासों को नई गति मिलेगी। पक्का आवास केवल छत नहीं, बल्कि परिवारों के लिए सुरक्षा, स्थायित्व, गरिमा और बच्चों के बेहतर भविष्य का आधार है।
एएचपी परियोजनाओं में बसाहट को मिलेगी गति
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 के अंतर्गत निर्मित अफोर्डेबल हाउसिंग इन पार्टनरशिप (एएचपी) परियोजनाओं में पात्र हितग्राहियों का चयन एवं आबंटन अब और अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। विस्तारित कट-ऑफ तिथि से हितग्राही आधार व्यापक होगा, जिससे अधिक परिवार योजनाबद्ध आवासीय परिसरों में सम्मानपूर्वक बस सकेंगे। एएचपी परिसरों में सुव्यवस्थित बसाहट को प्रोत्साहन के साथ ही पानी, बिजली, सड़क, स्वच्छता, सामुदायिक भवन एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं का प्रभावी उपयोग भी सुनिश्चित होगा। शहरी गरीब परिवारों को बेहतर आवासीय वातावरण से जोड़ने के साथ-साथ यह पहल स्वस्थ, सुरक्षित और समावेशी शहरों के निर्माण में भी सहायक होगी।
2.53 लाख से अधिक राजस्व प्रकरणों का हुआ निराकरण, 2,52,967 मामलों का समाधान कर जिले ने दर्ज की उल्लेखनीय उपलब्धि
रायपुर, सितंबर 2026। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले ने राजस्व प्रकरणों के निराकरण में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। जिला प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार जिले के राजस्व न्यायालयों में राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए कुल 2 लाख 53 हजार 365 प्रकरण रखे गए थे, जिनमें से 2 लाख 52 हजार 967 प्रकरणों का निराकरण किया गया। बड़ी संख्या में लंबित मामलों के समाधान से आम नागरिकों को राहत मिली है।
राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से विभिन्न प्रकृति के राजस्व प्रकरणों का पक्षकारों की सहमति, आपसी सुलह और सरल प्रक्रिया के जरिए निराकरण किया गया। इस पहल से लंबे समय से लंबित मामलों को गति मिली और पक्षकारों को अनावश्यक न्यायिक प्रक्रिया से राहत प्राप्त हुई।
बंटवारे और नामांतरण के मामलों में भी प्रभावी निराकरण
राष्ट्रीय लोक अदालत में खातेदारों के मध्य आपसी बंटवारे से संबंधित 23 प्रकरण रखे गए थे, जिनमें से 22 का निराकरण किया गया। इसी प्रकार वारिसों के मध्य बंटवारे के 19 में से 18 तथा कब्जे के आधार पर बंटवारे के 7 में से 6 प्रकरणों का समाधान किया गया।
धारा 145 की कार्यवाही से संबंधित सभी 10 प्रकरणों का निराकरण किया गया। वहीं रेंट कंट्रोल एक्ट का 1 प्रकरण भी पूरी तरह निराकृत हुआ। विक्रय पत्र, दानपत्र एवं वसीयतनामा के आधार पर नामांतरण से संबंधित 73 में से 72 प्रकरणों का निराकरण किया गया।
अन्य प्रकृति के 2,139 और अन्य विभागों के 2.50 लाख से अधिक प्रकरण निराकृत
आंकड़ों के अनुसार अन्य प्रकृति के कुल 2,152 प्रकरणों में से 2,139 प्रकरणों का निराकरण किया गया। इसके अलावा अन्य विभागों से संबंधित 2 लाख 51 हजार 80 प्रकरण राष्ट्रीय लोक अदालत में रखे गए थे, जिनमें से 2 लाख 50 हजार 699 प्रकरणों का निराकरण किया गया।
त्वरित और सरल न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
राष्ट्रीय लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य पक्षकारों को आपसी सहमति एवं सुलह के माध्यम से त्वरित, सरल और सुलभ न्याय उपलब्ध कराना है। जीपीएम जिले में बड़ी संख्या में राजस्व प्रकरणों के निराकरण से न केवल नागरिकों को लंबित मामलों से राहत मिली, बल्कि राजस्व न्यायालयों में लंबित प्रकरणों के बोझ को कम करने में भी महत्वपूर्ण मदद मिली है।
जिले में राष्ट्रीय लोक अदालत की यह उपलब्धि न्यायिक प्रक्रिया को अधिक सुगम, प्रभावी और जनहितकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। लोक अदालत के माध्यम से हुए निराकरण से पक्षकारों के बीच आपसी सहमति को बढ़ावा मिलने के साथ ही समय और संसाधनों की बचत भी हुई है।
अवैध खनन एवं परिवहन पर बड़ी कार्रवाई, रेत-मिट्टी और गिट्टी से लदे 4 ट्रैक्टर व 1 हाईवा जप्त
रायपुर, सितंबर 2026। जीपीएम जिले में अवैध खनन एवं खनिजों के अवैध परिवहन के खिलाफ खनिज विभाग द्वारा लगातार सख्ती से कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में सीएम हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए खनिज विभाग के अमले ने अवैध परिवहन में संलिप्त 4 ट्रैक्टर एवं 1 हाईवा वाहन जप्त किया है। विभाग की इस कार्रवाई से अवैध रूप से खनिजों के उत्खनन एवं परिवहन में लगे लोगों में हड़कंप मचा है।
खनिज विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, सिवनी क्षेत्र में रेत के अवैध परिवहन में संलिप्त 2 ट्रैक्टरों को जप्त किया गया। इसी तरह मजगवां से 1 ट्रैक्टर, पड़वनिया से मिट्टी (ईंट) के अवैध परिवहन में संलिप्त 1 ट्रैक्टर तथा पकरिया से गिट्टी के अवैध परिवहन में संलिप्त 1 हाईवा वाहन को जप्त किया गया है।
जप्त किए गए वाहनों को नियमानुसार सुरक्षित स्थानों पर रखा गया है। इनमें 2 ट्रैक्टरों को सिवनी चौकी, जबकि 2 ट्रैक्टर एवं 1 हाईवा वाहन को अमरपुर पुलिस लाइन में सुरक्षित रखा गया है। खनिज विभाग द्वारा जप्त वाहनों के मालिकों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों पर त्वरित जांच
जिले में नागरिकों द्वारा सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से दर्ज कराई जा रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों द्वारा मौके पर जांच एवं कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में खनिज विभाग ने प्राप्त शिकायतों की जांच कर अवैध खनिज परिवहन के मामलों में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की।
कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. ने अधिकारियों को सीएम हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों की गुणवत्तापूर्ण जांच, समयबद्ध कार्रवाई और संतोषजनक निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर के निर्देशों के अनुरूप खनिज विभाग द्वारा शिकायतों को प्राथमिकता से लेते हुए मौके पर कार्रवाई की जा रही है।
अवैध खनन पर आगे भी जारी रहेगी कार्रवाई
खनिज विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध खनन, खनिजों के अवैध उत्खनन, भंडारण एवं परिवहन के विरुद्ध अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। विभाग द्वारा ऐसे मामलों की निगरानी के साथ-साथ प्राप्त शिकायतों की जांच कर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन की इस कार्रवाई का उद्देश्य जिले में खनिज संसाधनों के अवैध दोहन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना तथा शासन के राजस्व को होने वाली क्षति को रोकना है।
कुंवरपुर में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने किया पौधरोपण, पर्यावरण संरक्षण के संकल्प में जनभागीदारी का किया आह्वान
रायपुर, सितम्बर 2026/पर्यावरण संरक्षण और हरियाली संवर्धन के संदेश के साथ आज कुंवरपुर, लखनपुर में आयोजित वृक्षारोपण कार्यक्रम में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने सहभागिता की। उन्होंने कार्यक्रम में पौधरोपण कर आमजन को पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे आने और अधिक से अधिक पौधे लगाने का संदेश दिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पेड़-पौधे केवल प्रकृति की सुंदरता बढ़ाने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि स्वस्थ और सुरक्षित जीवन के लिए हमारी सबसे बड़ी आवश्यकता हैं।
मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि आज लगाया गया एक पौधा आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी ओर से एक अनमोल उपहार है। पर्यावरण का संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है। हमें पौधे लगाने के साथ-साथ उनके संरक्षण और संवर्धन का भी संकल्प लेना होगा। जब जनभागीदारी के साथ हर व्यक्ति अपने आसपास हरियाली बढ़ाने की जिम्मेदारी निभाएगा, तभी हम एक स्वच्छ, सुंदर और संतुलित पर्यावरण का निर्माण कर सकेंगे।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संतुलन बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। बढ़ता तापमान, अनियमित वर्षा और बदलता पर्यावरणीय स्वरूप हमें प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को और गंभीरता से समझने का संदेश दे रहा है। ऐसे में अधिक से अधिक पौधरोपण कर उनका संरक्षण करना समय की आवश्यकता है।
पौधरोपण के साथ संरक्षण का भी लें संकल्प
मंत्री श्री अग्रवाल ने कार्यक्रम में उपस्थित नागरिकों से आग्रह किया कि वे केवल पौधे लगाने तक सीमित न रहें, बल्कि लगाए गए प्रत्येक पौधे की नियमित देखभाल भी सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि एक पौधे को वृक्ष बनने में कई वर्ष लगते हैं, इसलिए उसकी सुरक्षा और देखभाल करना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना पौधरोपण करना।
उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल पौधों की संख्या बढ़ाना नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसे वृक्ष तैयार करना होना चाहिए जो आने वाले वर्षों में समाज को स्वच्छ हवा, छाया और बेहतर पर्यावरण प्रदान करें। हर परिवार यदि कम से कम एक पौधा लगाने और उसकी जिम्मेदारी लेने का संकल्प करे, तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
हरियाली बढ़ाने में सामूहिक प्रयास जरूरी
कुंवरपुर में आयोजित कार्यक्रम ने स्थानीय नागरिकों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के साथ सामूहिक भागीदारी का संदेश भी दिया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने पौधरोपण में सहभागिता करते हुए हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प को मजबूत किया।
मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि प्रकृति हमें जीवन देती है और अब प्रकृति के प्रति अपना दायित्व निभाने का समय हमारा है। हम सभी मिलकर अपने गांव, शहर और जिले को अधिक हरा-भरा बनाने का प्रयास करें। आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा, शुद्ध वातावरण और बेहतर जीवन देना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे अपने घर, खेत, विद्यालय, सार्वजनिक स्थलों और उपलब्ध अन्य स्थानों पर पौधरोपण करें तथा लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी से चलाया गया पर्यावरण संरक्षण का अभियान निश्चित रूप से दूरगामी परिणाम देगा।
कार्यक्रम के दौरान नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सावित्री साहू, जिला पंचायत सदस्य श्री विजय अग्रवाल, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती शशिकला सिंह, जनपद उपाध्यक्ष श्री कामेश्वर राजवाड़े, पार्षद श्री दिनेश साहू, श्री सुभाष अग्रवाल, श्री राजेंद्र जायसवाल, श्री सुरेश साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने पर्यावरण संरक्षण, हरियाली संवर्धन और पौधों के संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। कुंवरपुर में आयोजित यह कार्यक्रम पौधा लगाएं, पर्यावरण बचाएं और आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित भविष्य बनाएं के संदेश के साथ संपन्न हुआ।
छत्तीसगढ़ में खेती ने पकड़ी नई रफ्तार, खेत से बाजार तक बदल रही तस्वीर
रायपुर सितंबर 2026/ छत्तीसगढ़ की पहचान लंबे समय से धान के कटोरे के रूप में रही है, लेकिन मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय सरकार की पहल से राज्य की कृषि अब पारंपरिक पहचान से आगे बढ़ रही है। खेत में बेहतर उत्पादन से लेकर आधुनिक तकनीक, सिंचाई, फसल विविधीकरण, प्रसंस्करण और बाजार तक पहुंच बनाने की कोशिशों ने खेती को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के व्यापक बदलाव का माध्यम बना दिया है। इसका असर फसल उत्पादन के साथ-साथ बागवानी, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों में भी दिखाई दे रहा है।
छत्तीसगढ़ में पारंपरिक धान की खेती के अलावा अदरक, गेंदा फूल, बागवानी, और मछली पालन जैसी आधुनिक और नगदी फसलों की खेती से किसानों की तस्वीर तेजी से बदल रही है। किसान अब केवल धान तक सीमित न रहकर अदरक, गेंदा और अन्य फूलों की खेती से प्रति एकड़ लाखों रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं। युवा किसान मछली पालन, मुर्गी पालन और बागवानी को एक साथ जोड़कर खेतों को आय का मुख्य केंद्र बना रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में ड्रोन तकनीक, ऑटोमैटिक रीपर और आधुनिक कृषि उपकरणों के उपयोग से श्रम लागत कम हो रही है और पैदावार बढ़ रही है।
श्री विष्णु देव साय की सरकार के ढाई वर्षों से ज्यादा के शासन में राज्य में खेती का रकबा बढ़ने के साथ उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, खरीफ फसलों के उत्पादन में करीब 17 प्रतिशत और रबी फसलों में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह बदलाव केवल अधिक भूमि पर खेती होने का परिणाम नहीं है, बल्कि बेहतर बीज, उर्वरक, सिंचाई और कृषि यंत्रीकरण तक किसानों की बढ़ती पहुंच भी इसकी महत्वपूर्ण वजह है।
कृषि नीति का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष किसान की आय और फसल चयन से जुड़ा है।किसानों को उत्पादन के साथ आर्थिक सुरक्षा देने की दिशा में भी पिछले ढाई वर्षों में उल्लेखनीय काम हुआ है। कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत खरीफ फसल के धान पर न्यूनतम समर्थन मूल्य से जुड़ी आदान सहायता के रूप में 24,73,762 किसानों को 13,289 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। गन्ना प्रोत्साहन योजना के तहत 1 करोड़ 3 लाख 34 हजार क्विंटल से ज्यादा गन्ने की खरीदी कर 32 हजार 955 किसानों को 64.95 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। फसल बीमा के दायरे में भी खरीफ सीजन में 15.92 लाख से अधिक तथा रबी सीजन में 2.99 लाख किसानों को शामिल किया गया।
किसानों को उत्पादन के साथ आर्थिक सुरक्षा देने के लिए विष्णु देव साय सरकार की कृषक उन्नति योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। खरीफ 2023 से 2025 तक लगभग 25.52 लाख किसानों के बैंक खातों में सीधे 35,892.90 करोड़ रुपये की सहायता राशि ट्रांसफर की गई है।
धान छत्तीसगढ़ की मुख्य फसल है, इसीलिए छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है। मगर अब राज्य सरकार फसलों के विविधीकरण पर जोर दे रही है ताकि किसान अन्य फसलों का भी उत्पादन कर सकें। फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार प्रोत्साहन राशि के रूप में किसानों को 15 हजार रुपये प्रति एकड़ दे रही है। इस योजना के तहत किसानों को अरहर, मूंग, उड़द और चना जैसी दलहन फसलेंतथा सोयाबीन, मूंगफली, सूरजमुखी और तील जैसी तिलहन फसलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन राशि दे रही है। इसके अलावा मक्का, कपास और कोदो, कुटकी, रागी व बाजरा जैसे मोटे अनाजों की खेती करने पर भी इस राशि का लाभ मिलेगा।किसानों की आय को मजबूत करने के साथ जोखिम कम करने के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत प्रदेश के 24.63 लाख किसानों को 23वीं किस्त के रूप में 493 करोड़ रुपये सहित अब तक 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे ट्रांसफर की जा चुकी है।
खेती में नई तकनीकों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। छत्तीसगढ़ के किसान इन तकनीकों को अपनाने में पीछे नहीं हैं। गांवों में खुले 'फार्म मशीनरी बैंक' से छोटे किसानों को किराये पर महंगी मशीनें मिल रही हैं, जिससे उनकी मेहनत और लागत घट रही है। 'प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना' के तहत ड्रिप व स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों का विस्तार हुआ है, जिससे पानी की भारी बचत हो रही है। इसके साथ ही, पिछले वर्ष 57 हजार से अधिक किसानों का प्राकृतिक खेती अपनाना कृषि के टिकाऊ भविष्य को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा - आज मेरा घर आप सभी बहनों का मायका, आपका अपने भाई के घर आना मेरे लिए सौभाग्य की बात
भगवान शिव-माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर मुख्यमंत्री ने की प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना
‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान और राष्ट्रीय पोषण माह का शुभारंभ, सुपोषण रथ को दिखाई हरी झंडी
नन्हे बच्चों को खीर खिलाकर अन्नप्राशन संस्कार में शामिल हुए मुख्यमंत्री, माताओं-बहनों को दिलाई सुपोषण की शपथ
मुख्यमंत्री ने कहा - महतारी वंदन की 31 किस्तों में माताओं-बहनों के खातों में पहुंचे 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक
महिला सशक्तिकरण की नई तस्वीर गढ़ रही छत्तीसगढ़ की मातृशक्ति, 13.50 लाख से अधिक महिलाएं बनीं लखपति दीदी
फुगड़ी, रस्साकशी, कुर्सी दौड़, मेहंदी और झूलों के बीच मुख्यमंत्री निवास में साकार हुआ छत्तीसगढ़ के गांव का जीवंत स्वरूप
रायपुर सितंबर 2026/ नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास आज तीजा-पोरा तिहार के अवसर पर छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति, पारिवारिक आत्मीयता और मातृशक्ति के उल्लास का साक्षी बना। प्रदेश के विभिन्न अंचलों से बड़ी संख्या में पहुंचीं माताओं, बहनों और बेटियों के स्वागत में मुख्यमंत्री निवास को छत्तीसगढ़ी गांव और मायके की तरह सजाया गया था। पारंपरिक बैलगाड़ी, नंदिया-बइला, लोक शिल्प और ग्रामीण परिवेश की सजावट के बीच फुगड़ी, रस्साकशी, कुर्सी दौड़, मेहंदी और झूलों ने पूरे परिसर को उत्सव के रंग में रंग दिया। लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों के बीच माताओं-बहनों ने पूरे उत्साह के साथ तीजा-पोरा की खुशियां साझा कीं।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने माताओं-बहनों का आत्मीय स्वागत करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में तीजा पर बेटियों और बहनों के मायके आने की सुंदर परंपरा है। आज प्रदेशभर से आप सभी बहनें मेरे घर आई हैं, इसलिए मुख्यमंत्री निवास आज आप सभी का मायका है। अपने भाई के घर आपका आना मेरे लिए सौभाग्य और आनंद की बात है। मुख्यमंत्री के इस आत्मीय संबोधन के साथ पूरा परिसर तालियों से गूंज उठा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि तीजा-पोरा हमारी माटी, परिवार, रिश्तों, खेती-किसानी, पशुधन और लोकजीवन से जुड़ा जीवंत उत्सव है। हरेली से शुरू होने वाली छत्तीसगढ़ के तीज-त्योहारों की सुंदर श्रृंखला हमारे सामाजिक और पारिवारिक जीवन को आत्मीयता के सूत्र में बांधती है। हमारी लोक परंपराएं पीढ़ियों को अपनी जड़ों और संस्कारों से जोड़ने का काम करती हैं।
शिव-पार्वती की पूजा कर मांगी प्रदेश की सुख-समृद्धि
कार्यक्रम के आरंभ में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा-अर्चना की और प्रदेश की माताओं-बहनों सहित सभी नागरिकों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तीजा का पर्व माता पार्वती की तपस्या, समर्पण और अटूट आस्था से जुड़ा हुआ है। माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया था। हमारी माताएं और बहनें आज भी इस महान परंपरा को श्रद्धा के साथ आगे बढ़ा रही हैं। उन्होंने भगवान शिव और माता पार्वती से प्रदेश की माताओं-बहनों के सुख, समृद्धि और अखंड सौभाग्य के साथ छत्तीसगढ़ के निरंतर विकास और खुशहाली की प्रार्थना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पोरा का पर्व हमारी कृषि संस्कृति और पशुधन के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता का प्रतीक है। छत्तीसगढ़ की संस्कृति में खेती-किसानी केवल आजीविका का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन पद्धति का अभिन्न हिस्सा है। तीजा और पोरा का यह संगम हमारी लोकसंस्कृति की उसी आत्मीयता और व्यापकता को अभिव्यक्त करता है।
सुपोषित छत्तीसगढ़ के लिए ‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान
तीजा-पोरा के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेशव्यापी ‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान का शुभारंभ किया और अभियान के लोगो का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुनगा पोषक तत्वों और आवश्यक मिनरल्स से भरपूर है। इसकी पत्तियां और फलियां पोषण की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी हैं। विशेषकर महिलाओं और बच्चों के आहार में इसका उपयोग बेहतर पोषण में सहायक हो सकता है।
जनभागीदारी से सूरजपुर जिले के शासकीय विद्यालयों में आयोजित हुए विभिन्न कार्यक्रम
न्योता भोजन के साथ बच्चों ने लिया उत्साहपूर्वक हिस्सा
रायपुर, सितंबर 2026/ बैगलेस डे (Bagless Day) पर विद्यालयों में बच्चों को बस्ते के बोझ से मुक्त रखकर स्वच्छता, रचनात्मक और व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से आनंदमय शिक्षा दी जाती है। बैगलेस डे के अंतर्गत बच्चों को पारंपरिक पढ़ाई के अतिरिक्त खेल, चित्र, चर्चा, स्वतंत्रता जागरूकता एवं मौलिक विचारधारा की स्थापना में शामिल किया जाएगा। इससे बच्चों में नेतृत्व क्षमता, निर्देशन, सहयोग एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित होगी।
कलेक्टर सूरजपुर श्रीमती रेना जमील और जिला पंचायत सीईओ के मार्गदर्शन तथा जिला शिक्षा अधिकारी के नेतृत्व में शनिवार को जिले के सभी शासकीय विद्यालयों में बैगलेस डे के अवसर पर विभिन्न रचनात्मक और व्यावहारिक गतिविधियों का आयोजन किया गया। जनप्रतिनिधियों, पालकों और स्थानीय समुदाय की सक्रिय सहभागिता में विद्यार्थियों ने स्वच्छता अभियान, खेलकूद और कलात्मक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का पाठ
बैगलेस डे के तहत विद्यालय परिसरों में विशेष सफाई अभियान चलाया गया। बच्चों ने गाजर घास उन्मूलन, परिसर व शौचालयों की साफ-सफाई, पाउच-पन्नी का सुरक्षित निस्तारण और पेयजल स्रोतों की स्वच्छता का कार्य किया। इन गतिविधियों के जरिए विद्यार्थियों को स्वच्छता, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया, जिससे वे स्वच्छ और सुंदर विद्यालय के महत्व को समझ सकें।
रचनात्मकता और कल्पनाशीलता को मिला नया आयाम
विद्यार्थियों के बौद्धिक और सृजनात्मक विकास के लिए कई दिलचस्प गतिविधियां आयोजित की गईं। कल्पनात्मक निबंध पेड़ बोल सकते तो क्या कहते विषय पर बच्चों ने अपनी कल्पनाशीलता के आधार पर सुंदर निबंध लिखे। पेपर क्राफ्ट और कला के माध्यम से कागज को मोड़ने और काटने की तकनीक से बच्चों ने नाव, हवाई जहाज, तितली और मेंढक जैसी आकर्षक आकृतियां बनाईं। बेस्ट आउट ऑफ़ वेस्ट के द्वारा विद्यार्थियों ने कागज से ग्रीटिंग कार्ड और कबाड़ से जुगाड़ यानी अनुपयोगी सामग्री से उपयोगी कलात्मक वस्तुएं तैयार कीं।
सामुदायिक सहभागिता से हुआ न्योता भोजन
इस विशेष दिन पर विद्यालयों में समुदाय आधारित न्योता भोजन का भी आयोजन किया गया। माध्यमिक शाला कन्या रामानुजनगर में स्थानीय व्यवसायी श्री श्रवण कुमार गुप्ता ने अपने जन्मदिन के अवसर पर संकुल समन्वयक श्री जयप्रकाश बरेठा के साथ मिलकर बच्चों को न्योता भोजन कराया। इस दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी-कर्मचारी भी उपस्थित रहे। वहीं, भैयाथान विकासखंड के प्राथमिक शाला शिवप्रसाद नगर में समुदाय के सहयोग से बच्चों को कॉपियां वितरित की गईं और विद्यालय परिसर में स्वच्छता अभियान चलाया गया।
बैगलेस डे के तहत विद्यालयों में आयोजित सभी गतिविधियों की मॉनिटरिंग एडी शिक्षा, एडीपीओ समग्र, सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारी, बीआरसीसी, संकुल प्राचार्य और संकुल समन्वयकों द्वारा की गई। अधिकारियों ने स्कूलों का दौरा कर गतिविधियों का अवलोकन किया और बच्चों व शिक्षकों का मार्गदर्शन किया।