ईश्वर दुबे
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सरकार 1 फरवरी को अंतरिम बजट पेश करेगी। इस दौरान हो सकता है वित्त मंत्री अरुण जेटली अपना फोकस ग्रामीण अर्थव्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर, घर, रेलवे और सड़कों पर कर लें। इसके साथ ही सब्सिडी में बढ़ावा और टैक्स की दरों में और कमी की जा सकती है, जिससे आम लोगों को राहत मिल सके।
मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के अच्छे प्रदर्शन का श्रेय पार्टी के नेता अपने अध्यक्ष राहुल गांधी को दे रहे हैं। जिन्होंने चुनाव वाले पांचों प्रदेशों में कुछ हफ्तों के भीतर ही 82 सभाएं और सात रोड शो किए थे।
कांग्रेस के संगठन महासचिव अशोक गहलोत का कहना है कि इन चुनावों में खासकर राजस्थान में पार्टी के अच्छे प्रदर्शन का श्रेय राहुल गांधी के नेतृत्व को जाता है।
मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तेलंगाना और मिजोरम विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के चुनाव प्रचार अभियान से जुड़े पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के मुताबिक, राहुल गांधी ने 7 अक्तूबर को चुनाव आयोग द्वारा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करने के बाद सबसे अधिक 25 जनसभाएं मध्य प्रदेश में की। उन्होंने मध्य प्रदेश में 4 रोड शो भी किए।
कांग्रेस अध्यक्ष ने राजस्थान और छत्तीसगढ़ में 19-19 चुनावी सभाओं को संबोधित किया। इसके अलावा उन्होंने राजस्थान में 2 और छत्तीसगढ़ में एक रोड शो भी किया।
राजस्थान में कांग्रेस पांच साल बाद सत्ता में वापसी करती दिख रही है। दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ में कांग्रेस 15 वर्षों के बाद भारी बहुमत से सत्ता में वापसी कर रही है।
गांधी ने तेलंगाना में 17 जनसभाएं करके कांग्रेस की अगुवाई वाले गठबंधन के उम्मीदवारों के लिए वोट मांगे, हालांकि यहां पार्टी को निराशा हाथ लगी।
उन्होंने मिजोरम में 2 सभाएं की लेकिन यहां कांग्रेस अपनी सत्ता बचाने में नाकाम रही।
कांग्रेस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, "इस चुनाव का एक बड़ा संदेश यह है कि जनता राहुल गांधी को एक राष्ट्रीय नेता के तौर पर स्वीकार कर रही है। यह आने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस के लिए शुभ संकेत है।"
मध्य प्रदेश और मिजोरम में 28 नवंबर को मतदान हुआ तो राजस्थान एवं तेलंगाना में 7 दिसंबर को वोट डाले गए। छत्तीसगढ़ में 12 और 20 नवंबर को दो चरणों में मतदान हुआ था।
यी दिल्ली। पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के लिए जारी मतगणना के रुझानों पर आम आदमी पार्टी (आप) ने प्रतिक्रिया देते हुए दावा किया कि 2019 में भारत “भाजपा मुक्त” हो जाएगा। ताजा रुझानों के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) राजस्थान और कांग्रेस में अपनी मुख्य प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस से पीछे है जबकि मध्यप्रदेश में उसके और विपक्षी पार्टी के बीच कांटे की टक्कर है। अगले साल लोकसभा चुनाव होने हैं और इन विधानसभा चुनावों को आम चुनावों से पहले एक सेमीफाइनल मुकाबला बताया जा रहा है।
आईजोल। मिजोरम विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को आज तब बड़ा झटका लगा जब राज्य के मुख्यमंत्री ललथनहावला दोनों विधानसभा सीटों से अपना चुनाव हार गये। यहां रुझानों में एमएनएफ को बहुमत मिलता दिख रहा है। कांग्रेस ने राज्य में अपनी सत्ता बचाने के लिए प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी थी और पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी सहित सभी स्टार प्रचारकों को चुनाव प्रचार में उतार दिया था। कांग्रेस को यहां अंतिम समय तक अपनी सरकार बनने की उम्मीद थी इसलिए उसने केंद्र से कई नेता यहां भेज रखे थे कि यदि जोड़तोड़ की जरूरत पड़े तो वह समय रहते की जा सके।
मध्य प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी दमखम के साथ लड़ा। इन चुनावों में भाजपा ने दिग्ग्जों को चुनाव प्रचार के लिए उतारा। इन्हीं प्रचारकों में से एक थे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। योगी आदित्यनाथ ने इन राज्यों में कुल 70 सभाएं कीं थी। पर जिस तरीके के शुरुआती रुझान देखने को मिल रहे हैं उसके बाद कहीं से ऐसा नहीं लग रहा कि इन चुनावों में योगी आदित्यनाथ का जादू चला है।
भोपाल। कांग्रेस के स्टार प्रचारक और पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने कांग्रेस को मिल रही जीत पर पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी को बधाई दी और कहा कि मेहनत और सब्र का फल मीठा होता है। बुरे दिन जाने वाले हैं और राहुल गांधी आने वाले हैं। उन्होंने कहा कि अब लाल किले की तरफ राहुल गांधी आगे बढ़ रहे हैं। नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा कि लोगों के भीतर काफी आक्रोश था और उन्होंने बीजेपी के वादों को देखा और फिर सत्य को जिताया।
इसी के साथ सिद्धू ने 2019 में राहुल के लाल किले से झंडा फहराने का दावा करते हुए कहा कि राहुल के आने से सभी के भीतर विश्वास जागा है और कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व की वजह से सभी एकजुट हुए हैं। जिसका असर चुनाव परिणामों पर दिखाई दे रहा है।
मध्य प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों के बाद आज मतगनणा जारी है। लेकिन सबसे दिलचस्प आकड़े मध्य प्रदेश और राजस्थान से आ रहे हैं जहां किसी भी पार्टी को बहुमत मिलती नहीं दिख रही है। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस को सरकार गठन के लिए अन्य की जरूरत पड़ेगी। इसी बात को ध्यान में रखते हुए दोनों दल समर्थन जुटाने की कोशिश में जुट गई है। फिलहाल मध्य प्रदेश और राजस्थान में मायावती की पार्टी बसपा को कुछ सीटें मिलती दिख रही है। ऐसे में
जयपुर। राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे झालरापाटन विधानसभा सीट से जीत चुकी हैं। बता दें कि कांग्रेस के उम्मीदवार मानवेंद्र सिंह पहले वसुंधरा राजे को कड़ी टक्कर देते हुए दिखाई दे रहे थे, मगर राजे आधे के अंतर से जीत चुकी हैं।
हालांकि, राजस्थान की स्थिति देखी जाए तो रुझानों में कांग्रेस को बहुमत मिल चुका हैं। जबकि बीजेपी के पास अभी 80 से कम सीटें नजर आ रही हैं। इसी उठापटक के बीच वसुंधरा राजे ने पार्टी नेताओं के साथ बंद कमरे में बैठक की और चुनाव परिणाम जो सामने आए उसका विश्लेषण किया।
वहीं, कांग्रेस की राजस्थान इकाई के अध्यक्ष सचिन पायलट ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि हम राज्य में सरकार बनाएंगे, लेकिन उनकी वार्ता में अजीब सी कशमकस भी देखने को मिली। उन्होंने कहा कि बीजेपी बस खरीद-फरोख्त की राजनीति न करें। इसके अतिरिक्त वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने निर्दलियों से समर्थन लेने की बात कही।
भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकार बनाने की कवायद अब तेज हो गई है। एक तरफ 3 बार से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बैठकें कर रहे हैं। तो वहीं, दूसरी तरफ अब खबर आ रही है कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को बहुमत जुटाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बता दें कि पार्टी सूत्रों से पता चला है कि दिग्विजय सिंह को आलाकमान ने सरकार बनाने की जिम्मेदारी दी है।
इससे पहले बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने कहा था कि वह किसी भी हालत में बीजेपी को समर्थन नहीं देगी। इसी के साथ ही उन्होंने उन उम्मीदवारों को दिल्ली बुलाया है जो अपनी-अपनी सीटों से आगे चल रहे है ताकि खरीद-फरोख्त की राजनीति न हो पाए।
वहीं, खबर ये भी है कि मध्य प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी के जो नेता आगे चल रहे हैं उनमें से कुछ नेता कांग्रेस छोड़ कर बसपा में शामिल हुए थे। इसी बात को ध्यान में रखकर पार्टी ने यह जिम्मेदारी दिग्विजय सिंह को सौंपी है।