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छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने सबको चौकाते हुए विधानसभा चुनावों में जीत की ओर बढ़ रही है। ऐसे में कांग्रेस के लिए बड़ा सवाल यही है कि आखिर राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। सूत्रों की मानें CM की रेस में प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष भूपेश बघेल का नाम सबसे आगे चल रहा है। यही सवाल पर प्रदेश प्रभारी पी एल पुनीया से पूछा गया तो उन्होंने इस बात से इनकार नहीं किया। 

उधर राज्य में कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाना शुरू कर दिया है। कार्यकर्ता इस जीत के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और भूपेश बघेल का धन्यवाद कर रहे हैं। भूपेश बघेल पर चुनाव से पहले कई आरोप भी लगे थे और उन्हें CD कांड में जेल भी जाना पड़ा था। 

एफसीआई गोदाम में 11 दिसंबर को होने वाले मतगणना कार्य के दौरान गणना के सुपरवाइजर की सामान्य केलकुलेटर अपने साथ ले जा सकेंगे, राजनीतिक दलों के अभिकर्ताओं को इसकी अनुमति नहीं होगी। वहीं गणना में लगे अधिकारियों व कर्मचारियों को अंग्रेजी के अंकों का इस्तेमाल करते हुए गणना करने की समझाइश दी गई है ताकि असुविधा न हो। दूसरे चरण के प्रशिक्षण में रविवार को जिला निर्वाचन अधिकारी भीम सिंह ने सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को गणना कार्य में जरा भी लापरवाही नहीं बरतने की सीख देते हुए गलती होने पर कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी।

कलेक्टोरेट सभाकक्ष राजनांदगांव में मतगणना कार्य के संबंध में लगे अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में रिटर्निंग एवं सहायक रिटर्निंग ऑफिसर, गणना पर्यवेक्षक, गणना सहायक, माइक्रो ऑब्जर्वर आदि अधिकारी-कर्मचारियों को पूरे मतगणना प्रक्रिया के संबंध में विस्तार पूर्वक जानकारी दी गई। विधानसभा क्षेत्र डोंगरगढ़ के सामान्य प्रेक्षक वी संपत, उप जिला निर्वाचन अधिकारी ओंकार यदु, एडीएम एके वाजपेयी, आयुक्त नगर निगम अश्वनी देवांगन सहित अधिकारी उपस्थित थे।

पान, गुटखा भीतर नहीं ले सकते : मतगणना स्थल में किसी भी अधिकारी-कर्मचारी को मोबाइल ले जाने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा पान, गुटका, धूम्रपान पूर्णत: वर्जित होगा।

कोई भी बख्शे नहीं जाएंगे

कलेक्टर ने निर्वाचन कार्य में लगे सभी अधिकारी-कर्मचारियों को मतगणना के दौरान अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी सजगता एवं सावधानी के साथ करने को कहा। उन्होंने कहा कि मतगणना कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही एवं गलती बिल्कुल भी क्षम्य नहीं होगा। उन्होंने अधिकारी-कर्मचारियों को मतगणना के संबंध में निर्वाचन आयोग से प्राप्त निर्देशों के संबंध में विस्तार पूर्वक जानकारियां दी।

बिलासपुर. हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ टेक्नीकल एजुकेशन (भर्ती एवं सेवा शर्तें) नियम 2002 के तहत तीन साल की संविदा पर नियुक्त होने के बाद से प्रदेश के विभिन्न इंजीनियरिंग और पॉलीटेक्निक कॉलेजों में सालों से कार्यरत 79 सहायक प्राध्यापकों को नियमित करने के आदेश दिए हैं। राज्य सरकार को हाईकोर्ट के आदेश की कॉपी प्रस्तुत करने के तीन माह के भीतर नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। 

सिंगल बेंच के आदेश को निरस्त करते हुए चीफ जस्टिस की बेंच ने सुनाया फैसला  राज्य सरकार ने नई नियुक्ति करने के लिए विज्ञापन जारी किया था, इसके खिलाफ याचिकाएं सिंगल बेंच ने खारिज कर दी थी। चीफ जस्टिस अजय कुमार त्रिपाठी और जस्टिस पीपी साहू की बेंच ने अपील मंजूर करते हुए सिंगल बेंच के आदेश को निरस्त कर दिया है। 
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    राज्य सरकार ने प्रदेश में संचालित इंजीनियरिंग और पॉलीटेक्नीक कॉलेजों में रिक्त पदों पर नियुक्ति करने के लिए 8 जुलाई 2002 को छत्तीसगढ़ टेक्नीकल एजुकेशन तीन वर्षीय संविदा सेवा (भर्ती एवं सेवा शर्तें) नियम 2002 जारी किया। इस नियम के तहत नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया गया।

     

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    पूरी प्रक्रिया और आरक्षण रोस्टर का पालन करते हुए इंजीनियरिंग कॉलेजों में सहायक प्राध्यापकों और पॉलीटेक्नीक कॉलेजों में व्याख्याता के पदों पर तीन वर्ष के लिए संविदा पर नियुक्तियां की गई, इसमें गोपी साव, बीएस कंवर, डॉ. रानी पुष्पा बघेल, संजीव कुमार सिंह सहित सैकड़ों अभ्यर्थियों का चयन किया गया। 

     

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    तीन वर्ष के लिए संविदा पर नियुक्त होने से बाद से वे लगातार कार्यरत हैं। राज्य सरकार ने इन पदों पर नियमित भर्ती करने के लिए 2015 में विज्ञापन जारी किया। हाईकोर्ट में इसके खिलाफ याचिकाएं प्रस्तुत की गईं। कुछ याचिकाओं में जहां 2015 में जारी विज्ञापन को निरस्त करने की मांग की गई थी, वहीं अन्य याचिकाकर्ताओं ने सालों से संविदा पर कार्यरत होने का हवाला देते हुए नियमित करने का निर्देश देने की मांग की थी। 

     

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    सुनवाई के बाद सिंगल बेंच ने जनवरी 2017 में याचिकाएं खारिज कर दी थीं, इसके खिलाफ 79 अपील प्रस्तुत की गई थी। अपीलों पर चीफ जस्टिस अजय कुमार त्रिपाठी और जस्टिस पीपी साहू की बेंच में सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने सिंगल बेंच के आदेश को निरस्त करते हुए अपील प्रस्तुत करने वाले 79 अभ्यर्थियों को नियमित करने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने आदेश की कॉपी प्रस्तुत करने के तीन माह के भीतर नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश भी दिए हैं।

     

  6. कोर्ट उनके साथ जिनकी आजीविका संकट में 

     

    हाईकोर्ट ने कहा है कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति अधिसूचना के तहत विज्ञापन जारी करने के बाद सभी नियम, प्रक्रिया और आरक्षण रोस्टर का पालन करते हुए की गई थी। याचिकाकर्ता किराए पर कार्य नहीं कर रहे थे। कोर्ट की जिम्मेदारी है कि उनके पक्ष में रहे जिनके जीवन और आजीविका पर संकट है। 

रायपुर . राज्य में पहली बार 1.07 लाख पोस्टल व सर्विस वोटों की गिनती की जाएगी। ऐसा इसलिए क्योंकि पहली बार इतनी संख्या में सरकारी कर्मचारियों ने डाक मतपत्रों व ईटीपीबीएस के जरिए मतदान किया है। 

 

यही वजह है कि 11 दिसंबर को  सुबह 7 बजे तक  मतगणना स्थल तक डाक मतपत्रों को   पहुंचाने के लिए सभी जिलों में डाकियों को स्पेशल पास भी दिए गए हैं।  प्रदेश के बाहर सरकारी ड्यूटी में तैनात राज्य के मतदाताओं को पहली बार ईटीपीबीएस के तहत ऑनलाइन भेजे गए थे। राज्य के बाहर से इसके जरिए वोट देने वाले कर्मचारियों की तादाद 14,720 है। ईटीबीएस ऑनलाइन जारी करते वक्त ऐसे कर्मचारियों को एक पिन नंबर भी जारी किया गया था।

 वहीं ऑनलाइन भेजे गए सर्विस वोटों के लिए एक बार कोड भी दिया गया है, जबकि चुनाव ड्यूटी करने वाले सरकारी कर्मचारियों में से 88,141 कर्मचारियों को डाक मतपत्र जारी किए थे। पिछले चुनाव में करीब 56 हजार कर्मचारियों को डाक मतपत्र जारी किए गए थे। इस बार 1.15 लाख आवेदन आए थे। इनमें से जानकारी अपूर्ण होने की वजह से करीब 8 हजार आवेदन निरस्त कर दिए गए थे। कर्मचारी के डाक के जरिए दिए गए  पोस्टल बैलेट की गोपनीयता पूरी तरह सुरक्षित की जाती है। आम लोगों की तरह सरकारी कर्मचारी का वोट भी गोपनीय रहता है। इसके लिए काउंटिंग के दिन जब पोस्टल वोट गिने जाते हैं तो सबसे पहले घोषणा पत्र यानी सरकारी कर्मचारी के सर्टिफिकेट को एक बार देखकर सुनिश्चित करने के बाद उसे अलग रख दिया जाता है और वोटों को मिक्स करके गिना जाता है।

रायपुर . सीडी कांड मामले में मतगणना के दूसरे ही दिन बुधवार को सीबीआई स्पेशल कोर्ट में सुनवाई है। इसमें सीडी कांड के आरोपी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल, कारोबारी विजय भाटिया, पत्रकार विनोद वर्मा और भाजपा से निष्कासित कैलाश मुरारका पेश होंगे।

 

 इस मामले में आरोपी विजय पांड्या की अब तक गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। कोर्ट ने उसके खिलाफ एक महीना पहले ही गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। सीबीआई उसकी तलाश कर रही है। आरोपी मामला फूटने के बाद से फरार है। 

सीबीआई ने उसकी तलाश में रायपुर से लेकर मुंबई तक छापेमारी की है, पर कहीं भी वह नहीं मिला है। पांड्या पूरे मामले में मुख्य भूमिका है। उसने ही सीडी टेंपर करने के लिए स्टूडियो संचालक मानस साहू से मुलाकात कराई थी। जब पोर्न वीडियो को टेंपर किया जा रहा था, तो वह भी स्टूडियो में बैठा हुआ था। वह मृत कारोबारी रिंकू खनूजा का दोस्त है।

 

सभी आरोपियों को हर सुनवाई में उपस्थित होने और देश नहीं छोड़ने की शर्त पर कोर्ट ने जमानत दी है। इसलिए उन्हें हर पेशी में उपस्थित होना जरूरी है। अगर पेशी में उपस्थित नहीं हो पाए तो उसका पर्याप्त आधार कोर्ट में बताना होगा। आरोपी पांड्या की गिरफ्तारी नहीं होने के कारण कोर्ट ने भी चार्जशीट पर बहस शुरू नहीं की है।

 

 आरोपी के पकड़े जाने पर ही सीबीआई के द्वारा पेश किए गए फाइनल चार्जशीट पर बहस होगी। सीबीआई और बचाव पक्ष के वकील आरोप पत्र पर बहस करेंगे। उसके बाद गवाही शुरू होगी। इस मामले में सौ लोगों को गवाह बनाया गया है। सभी को बारी-बारी कोर्ट बुलाया जाएगा। सीडी कांड में सीबीआई की जांच अभी भी जारी है। इसमें नया साक्ष्य मिलने पर सीबीआई पूरक चालान पेश कर सकती है। सबूत के आधार पर गवाहों को भी आरोपी बनाया जा सकता है।  हालांकि रायपुर से सीबीआई के सभी अधिकारी और कर्मचारी लौट गए हैं। जांच टीम का कोई भी सदस्य यहां नहीं है।

 

ढाई माह पहले पेश हुई थी फाइनल चार्जशीट : सीबीआई ने 24 सितंबर को सीडी कांड की फाइनल चार्जशीट पेश की थी। सीबीआई ने अपनी पड़ताल के आधार पर पांच आरोपी बनाए हैं, जिनके खिलाफ चार्जशीट पेश की गई है। छठवें आरोपी की मौत के कारण उसके खिलाफ चार्जशीट पेश नहीं की गई। इसमें कैलाश मुरारका को मुख्य आरोपी बनाया गया है, जिसने पोर्न वीडियो में मंत्री राजेश मूणत का चेहरा लगाने के लिए पैसा दिया।

 

सीडी बनाने वह खुद मुंबई गया था। मृत कारोबारी रिंकू और फरार आरोपी पांड्या ने मिलकर सीडी बनाया था। पत्रकार विनोद वर्मा ने टेंपर सीडी की दिल्ली में एक हजार कॉपी कराई। उसमें से पांच सौ सीडी विजय भाटिया को दी गई, जिसे लेकर वे रायपुर आ गए। इसी सीडी को वायरल करने का आरोप प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल पर है। सीडी कांड में सभी ने मिलकर साजिश रची थी। दिल्ली के होटल में उनकी बैठक भी हुई थी। सभी के फुटेज सीबीआई ने कोर्ट में जमा किए है।

लंदन. भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या (62) के प्रत्यर्पण मामले में लंदन की वेस्टमिंस्टर अदालत सोमवार को फैसला सुना सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत आने पर माल्या को डर है कि राजनीति की वजह से निष्पक्ष सुनवाई नहीं होगी। उस पर नए आरोप भी लग सकते हैं।

 

 माल्या पर भारतीयों बैंकों के 9,000 करोड़ रुपए बकाया हैं। वह मार्च 2016 में लंदन भाग गया था। भारत ने पिछले साल फरवरी में यूके से उसके प्रत्यर्पण की अपील की थी। भारत में फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों पर अप्रैल 2017 में स्कॉटलैंड यार्ड में माल्या की गिरफ्तारी हुई लेकिन, जमानत पर छूट गया। उसके प्रत्यर्पण का मामला 4 दिसंबर 2017 से लंदन की अदालत में चल रहा है।

माल्या के पास प्रत्यर्पण के फैसले को 14 दिन में चुनौती देने का अधिकार होगा

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    माल्या की 5 दलील 

     

    • माल्या का कहना है कि उसके खिलाफ मामला राजनीति से प्रेरित है। उसने एक रुपया भी उधार नहीं लिया। किंगफिशर एयरलाइंस ने लोन लिया था। कारोबार में घाटा होने की वजह से लोन की रकम खर्च हो गई। वह सिर्फ गारंटर था और यह फ्रॉड नहीं है।   
    • वह कर्ज का 100% मूलधन चुकाने को तैयार है। उसने साल 2016 में कर्नाटक हाईकोर्ट में भी यह ऑफर दिया था। उसका कहना है कि रकम चुराकर भागने की बात गलत है। उसे बैंक डिफॉल्ट का पोस्टर बॉय बना दिया गया है।
    • माल्या ने यह भी कहा था कि साल 2016 में उसने प्रधानमंत्री मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली को चिट्ठी लिखकर जांच कमेटी गठित करने की मांग की थी लेकिन, कोई जवाब नहीं मिला। 
    • माल्या ने यह भी कहा था कि भारतीय जेलों की हालत अच्छी नहीं है। इसके बाद यूके की अदालत ने भारत से जेल का वीडियो मांगा था। भारत ने मुंबई की आर्थर रोड जेल के बैरक नंबर 12 का वीडियो भेजा था, जहां माल्या को रखा जाएगा। वीडियो देखने के बाद यूके की कोर्ट ने संतुष्टि जताई थी। 
    • मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रत्यर्पण पर फैसले से पहले माल्या ने यह भी कहा है कि राजनीति की वजह से उसे भारत में न्याय मिलने के आसार कम हैं। उसके खिलाफ नए आरोप लग सकते हैं।

     

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    भारतीय जांच एजेंसियों की दलील

     

    माल्या ने जानबूझकर बैंकों का कर्ज नहीं चुकाया। वह प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत भगोड़ा घोषित है। उस पर मनी लॉन्ड्रिंग का भी आरोप है। वह ब्रिटेन के कानून के मुताबिक भी आरोपी है।

     

  3. अक्टूबर 2012 में किंगफिशर एयरलाइंस बंद हुई

     

    मार्च 2012 में माल्या की किंगफिशर एयरलाइंस ने यूरोप और एशिया के लिए फ्लाइट्स बंद कर दीं। घरेलू बाजार में जहां किंगफिशर हर दिन 340 फ्लाइट्स ऑपरेट करती थीं, उन्हें घटाकर 125 कर दिया गया। लेकिन यह फॉर्मूला 8 महीने भी नहीं चला। अक्टूबर 2012 में किंगफिशर की सारी फ्लाइट्स बंद हो गईं।

     

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    साल 2013-14 तक एयरलाइंस का घाटा बढ़कर 4,301 करोड़ रुपए हो चुका था। इसी साल माल्या दुनिया के टॉप-100 अमीरों की लिस्ट से बाहर हो गया। लोन के प्रिंसिपल अमाउंट पर ब्याज बढ़ता गया। मार्च 2016 तक माल्या 9,000 करोड़ रुपए का कर्जदार हो गया और विदेश भाग गया।

     

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    आर्थिक अपराध के 18 मामलों में 23 भगोड़ों का प्रत्यर्पण बाकी 

     

    भारत की 48 देशों के साथ भारत की प्रत्यर्पण संधि है। साल 2014 से अब तक आर्थिक अपराध के मामलों में सिर्फ 5 अपराधियों का प्रत्यपर्ण हो पाया है। 23 भगोड़ों को अभी तक नहीं लाया जा सका है। इनके लिए संबंधित देशों से प्रत्यर्पण की अपील की जा चुकी है।

     

    आर्थिक अपराधों से जुड़े प्रत्यर्पण के 3 बड़े मामले

    आरोपी मामला जिस देश से प्रत्यर्पण होना है
    विजय माल्या बैंक लोन ब्रिटेन
    नीरव मोदी पीएनबी घोटाला ब्रिटेन
    मेहुल चौकसी पीएनबी घोटाला एंटीगुआ
पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजों के दिन शुरू होने वाले संसद के शीतकालीन सत्र के हंगामेदार होने के आसार हैं। एग्जिट पोल से नतीजों की जो तस्वीर उभर कर सामने आई है उससे तो यह तय हो गया है कि सड़क से लेकर संसद तक हंगामा, शोर-शराबा और धूम-धड़ाका होना तय है। यदि भाजपा जीती तो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए चुनाव के दौरान उठाए गए मुद्दों पर भाजपा को घेरना मुश्किल हो जाएगा। लेकिन, यदि कांग्रेस कामयाब रही तो विपक्षी पार्टी ऐसे मुद्दे उठा सकती है जो राजनीतिक तापमान बढ़ा सकते हैं। सत्र के पहले ही दिन पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे आ जाएंगे और इसका असर संसद की कार्यवाही और सरकार-विपक्ष की रणनीति पर पड़ेगा। मोदी सरकार के आखिरी संसद सत्र में विपक्ष राफेल सौदा, सीबीआई बनाम सीबीआई, आरबीआई और सरकार में टकराव, किसान और महंगाई जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरना चाहता है।
 
इन सबके बीच भाजपा के धुर विरोधी दल महागठबंधन बनाने के प्रयास में जुटे हैं। संसद के शीतकालीन सत्र से पूर्व विपक्ष की एकजुटता को लेकर प्रयास तेज हो गए हैं। आगामी 10 दिसंबर को प्रस्तावित बैठक में विपक्ष के सभी बड़े नेताओं की मौजूदगी सुनिश्चित करने के प्रयास हो रहे हैं। बैठक के लिए कांग्रेस, सपा, बसपा, टीडीपी, एनसीपी, टीएमसी, पीडीपी, एनसी, राजद, जदएस, डीएमके, भाकपा, माकपा, आम आदमी पार्टी समेत अन्य कई विपक्षी दलों ने अपनी स्वीकृति दे दी है। दरअसल, इस सत्र में सरकार और भाजपा की रणनीति राम मंदिर निर्माण मुद्दे पर विपक्ष को घेरने की है। इसके तहत पार्टी सांसद राकेश सिन्हा समेत कुछ अन्य भाजपा सांसद राम मंदिर निर्माण के लिए कानून बनाने संबंधी निजी बिल राज्यसभा में पेश करेंगे। दूसरी ओर कांग्रेस सरकार पर पलटवार के लिए पहले दिन से ही किसानों की बदहाली को मुद्दा बनाना चाहती है। वाम दल भी इससे सहमत हैं। जबकि टीडीपी, राजद और टीएमसी कथित तौर पर केंद्र द्वारा सीबीआई के दुरुपयोग के मुद्दे पर हमलावर होना चाहते हैं। 
 
पांच राज्यों के चुनाव नतीजे आने से पहले होने जा रही यह बैठक लोकसभा चुनाव के लिए महागठबंधन की नींव रखने की कवायद भी है। हालांकि बसपा प्रमुख मायावती और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के इस बैठक में शामिल होने को लेकर अभी असमंजस बना हुआ है। पिछले दिनों दिल्ली में किसान आंदोलन के दौरान विपक्ष के कई नेताओं ने एक मंच पर आकर अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया था। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की पहल पर हो रही इस बैठक में विपक्ष के महागठबंधन बनाने की पहल तेज की जाएगी। हालांकि इस महागठबंधन का स्वरूप बहुत कुछ पांच राज्यों के चुनाव नतीजों से भी तय होगा।
 
पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों को लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है। अभी एनडीए अथवा यूपीए के खेमे में खड़े दल पाला भी बदल सकते हैं। यदि कांग्रेस के पक्ष में परिणाम आते हैं तो तय है कि राहुल गांधी इस महागठबंधन के निर्विरोध नेता हो जाएंगे। लेकिन उलट आने पर कांग्रेस को विपक्षी दलों के सामने झुकना पड़ सकता है। इसी तरह भाजपा के पक्ष में आने पर मोदी की रायसीना हिल्स लौटने की संभावना बढ़ जाएगी, लेकिन विपरीत आने पर भाजपा में उनकी कार्यशैली से नाराज नेता अपनी आवाज बुलंद करने लगेंगे। इसलिए सभी को 11 दिसंबर को नतीजे आने का इंतजार है। कभी एनडीए के संयोजक रह चुके चंद्रबाबू नायडू इस मुहिम में लगे हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री भी नायडू का साथ दे रही हैं। नायडू चाहते हैं कि विपक्षी दलों के प्रमुख नेता इस बैठक में मौजूद रहें।
 
मोदी सरकार के पिछले साढ़े चार साल में कांग्रेस भाजपा को घेरने में असफल ही दिख रही थी। ले-देकर कांग्रेस राफेल विमान डील पर मोदी सरकार को सड़क से लेकर संसद तक घेरती दिख रही थी। राहुल गांधी से लेकर तमाम कांग्रेस के नेता राफेल विमान डील में घोटाले की बात कहकर मोदी सरकार पर कीचड़ उछाल रहे हैं। राहुल गांधी तो सीधे प्रधानमंत्री मोदी को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। पांच राज्यों के चुनाव प्रचार के दौरान भी कांग्रेस के लगभग हर मंच व सभा में राफेल की गूंज सुनाई दी। यह माना जा रहा था कि कांग्रेस संसद के शीतकालीन सत्र में राफेल का मुद्दा पूरे जोश-खरोश के साथ उठाएगी। लेकिन इन सबके बीच राफेल विमान खरीद में भ्रष्टाचार के कांग्रेसी आरोपों की काट के लिये मोदी सरकार ने यूपीए सरकार के शासन काल में अगस्ता-वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर सौदे में बिचौलिए का धंधा करने वाले ब्रिटिश नागरिक क्रिश्चियन मिशेल को दबोचकर कांग्रेस का मुंह बंद कराने की तैयारी कर ली है। 3000 करोड़ के इस सौदे में लगभग 300 करोड़ रु. की रिश्वत बांटने वाले इस दलाल को दुबई से पकड़ कर अब दिल्ली ले आया गया है। जांच ब्यूरो के अधिकारी इससे अब सारी सच्चाई उगलवाएंगे। फौज के लिए खरीदे गए हेलिकॉप्टरों के सौदे में किस नेता और किस अफसर को कितने रुपये खिलाए गए हैं, ये तथ्य अब इस मिशेल से उगलवाए जाएंगे।
 
मिशेल के पकड़े जाने से पूर्व अगस्ता-वेस्टलैड कंपनी के जो अधिकारी पकड़े गए थे, उनकी डायरियों से कुछ नाम उजागर हुए हैं। उन नामों को सोनिया गांधी के परिवार से जोड़ा गया था। हमारी सेना के एक आला अधिकारी पर भी रिश्वतखोरी के आरोप हैं। मिशेल के जांच एजेंसियों के हत्थे चढ़ने से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथ में यह जबर्दस्त हथियार आ गया है जिससे वह गांधी परिवार व कांग्रेस पर दबाव बना सकते हैं। सोनिया गांधी परिवार के विरुद्ध पहले ही ‘नेशनल हेरल्ड’ के मामले में आयकर विभाग जांच कर रहा है। अब मोदी ने सोनिया परिवार की तरफ अपनी चुनाव-सभा में नाम लेकर भी इशारा किया है। हो सकता है कि मिशेल जो भी सच उगले, वह कांग्रेस के गले की फांस बन जाए। यदि वह बोफोर्स की तरह सोनिया परिवार को अदालत में अपराधी सिद्ध न कर पाए तो भी चुनाव के अगले छह सात माह में भाजपा के लिए वह रामबाण सिद्ध हो सकता है। प्रधानमंत्री मोदी इतने तीर चलाएंगे कि कांग्रेस का महागठबंधन चूर-चूर हो सकता है। कांग्रेस के साथ गठबंधन बनाने में हर पार्टी सकुचाएगी। मिशेल की गिरफ्तारी के बाद इस बात की ज्यादा संभावना है कि राफेल मुद्दे पर कांग्रेस की आवाज धीमी पड़ जाएगी और संसद में राफेल का ज्यादा शोर-शराबा सुनाई नहीं देगा। 
 
 
जानकारों की मानें तो अगर पांच राज्यों के चुनाव नतीजे भाजपा के पक्ष में नहीं आये तो मोदी सरकार पर राम मंदिर के लिये कानून बनाने का दबाव पार्टी के भीतर और बाहर दोनों ओर से पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट के रवैये के बाद से राम मंदिर पर कानून लाने की मांग ने तेजी पकड़ी है। बीते 25 नवंबर को अयोध्या में धर्मसभा के बाद से अयोध्या मुद्दा लगातार सुर्खियों में है। सूत्रों की मानें तो अंदर ही अंदर भाजपा राम मंदिर के लिये बिल लाने की तैयारियों पर भी काम कर रही है। भाजपा के कई सांसद व नेता दबी जुबान से यह कहते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी ने तय कर लिया है कि शीतकालीन सत्र में राम मंदिर निर्माण के लिए कानून पारित करा लिया जाये। मोदी सरकार ने 16 नवंबर को ही अपने सभी सांसदों को ‘व्हिप‘ जारी करते हुए संसद सत्र के दौरान दिल्ली से बाहर नहीं जाने के निर्देश दिये हैं। असल में राम मंदिर पर कानून लाकर मोदी सरकार जहां अपने वोट बैंक को एकजुट करने की चाल चलेगी वहीं संसद में जब राम मंदिर के कानून को लेकर चर्चा होगी, तब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की असलियत का भी पता चल जायेगा कि वह कितने बड़े जनेऊधारी और शिवभक्त हैं। 
 
 लोकसभा चुनावों से पहले संभवतः यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली इस सरकार का आखिरी पूर्णकालिक सत्र होगा। लिहाजा, इस सत्र में सत्तारुढ़ भाजपा और विपक्षी दल कांग्रेस का बहुत कुछ दांव पर लगा हुआ है। खासकर जब सत्र के पहले दिन ही विधानसभा चुनावों की मतगणना का असर संसद की कार्यवाही पर पड़ेगा। मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम विधानसभा चुनाव के नतीजे 11 दिसंबर को ही आएंगे। इस वक्त मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में भाजपा का शासन है जबकि तेलंगाना में टीआरएस और मिजोरम में कांग्रेस गठबंधन की सरकार है। एग्जिट पोल के नतीजे बदलाव व कांटे की टक्कर की तस्वीर पेश कर रहे हैं। मोदी सरकार के लिए शीतकालीन सत्र का शांतिपूर्ण ढंग से चलना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि उसके बाद यह सरकार सिर्फ संक्षिप्त बजट सत्र ही बुला पाएगी, जिसमें मई 2019 तक का बजट पारित करना होगा। सरकार इस दौरान लंबित कुछ जरूरी विधेयक भी पारित कराना चाहेगी, जबकि विपक्ष सरकार को घेरना चाहेगा। राम मंदिर, राफेल, अगस्ता-वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर जैसे तमाम मुद्दे दिसंबर में दिल्ली की सर्दी के बीच संसद का गर्माने का काम करेंगे।
 
-आशीष वशिष्ठ
(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)

मुंबई। अभिनेता-कॉमेडियन सुनील ग्रोवर ने कहा है कि सलमान खान ने उनसे कपिल शर्मा के दोबारा आ रहे शो में साथ काम करने को लेकर बात की थी। ऐसी चर्चा है कि कपिल शर्मा के नए कॉमेडी शो के निर्माता सलमान खान दोनों कलाकारों के साथ काम करने के लिये उनका मनमुटाव दूर करने का प्रयास कर रहे हैं। सलमान की फिल्म 'भारत' में काम कर रहे 41 वर्षीय सुनील ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि उनकी सलमान से बात हुई है।

सुनील ने पीटीआई- बताया, 'सलमान सर उस शो का निर्माण कर रहे हैं। मेरी डेट्स कपिल के शो से टकराएंगी क्योंकि मैं सलमान सर की फिल्म में काम कर रहा हूं।" उन्होंने कहा "उन्होंने (सलमान ने) मुझसे दोनों के साथ आने को लेकर संक्षिप्त बातचीत की।" यह पूछे जाने पर कि क्या वह कपिल के साथ दोबारा काम करने के लिये तैयार हैं, सुनील ने कहा, "यह वक्त बताएगा, भगवान बताएगा।

फिलहाल मैं अपने शो पर ध्यान दे रहा हूं और मुझे उम्मीद है कि मैं हर किसी के चेहरे पर मुस्कान लेकर आउंगा।’’ सुनील अली असगर और उपासना सिंह के साथ खुद का कॉमेडी शो 'कानपुर वाले खुरानाज" लेकर आ रहे हैं। अली असगर और उपासना पहले 'द कपिल शर्मा शो' और 'कॉमेडी नाइट्स विद कपिल' में भी काम कर चुके हैं। दोनों कलाकार पिछले साल सुनील से झगड़े के बाद कपिल शर्मा से अलग हो गए थे।

मुंबई। फिल्मकार अभिषेक कपूर ने उत्तराखंड सरकार से अपनी फिल्म ‘‘केदारनाथ’’ पर लगा प्रतिबंध हटाने का अनुरोध किया है। हिंदू संगठनों के विरोध के मद्देनजर जिला मजिस्ट्रेट ने उत्तराखंड के सात जिले में सुशांत सिंह राजपूत और सारा अली खान अभिनीत ‘‘केदारनाथ’’ पर प्रतिबंध लगा दिया था। कपूर ने सोशल मीडिया के जरिए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से राज्य में फिल्म के प्रदर्शन की अनुमति देने का अनुरोध किया है।

निर्देशक कपूर ने ट्वीट किया, ‘‘मैं उत्तराखंड सरकार से आग्रह करता हूं कि मेरी फिल्म केदारनाथ से प्रतिबंध खत्म करें। यह देश के लोगों के बीच शांति और सद्भाव लाने की हमारी एक कोशिश है। इस मौके से हमें वंचित न करें।’’ अदाकारा सारा अली खान ने पीटीआई को एक साक्षात्कार में कहा कि वह प्रतिबंध से निराश हैं क्योंकि फिल्म का विचार लोगों को बांटने का नहीं, एकजुट करने का है।

 

अदाकारा ने कहा, ‘‘फिल्म की शूटिंग उत्तराखंड में की गयी और वहां पर इसके लिए 40 दिन रहे भी। वहां के बारे में बेहतरीन यादें हैं।

यह बेहद निराशाजनक है कि उन्होंने हमें इतना कुछ दिया लेकिन हम उन्हें कुछ नहीं दे पा रहे। बस इस बात का अफसोस है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘फिल्म बांटने के बारे में नहीं, साथ आने के लिए कहती है। मुझे नहीं पता कि लोग क्यों आहत महसूस कर रहे हैं। मुझे नहीं लगता कि उन्होंने फिल्म देखी है।’’

नयी दिल्ली। यात्री वाहनों की घरेलू बिक्री नवंबर में 3.43 प्रतिशत घटकर 2,66,000 वाहन रह गई। नवंबर 2017 में यह 2,75,440 वाहन थी। वाहन विनिर्माताओं के संगठन सियाम के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार नवंबर में कारों की बिक्री मामूली तौर पर घटकर 1,79,783 वाहन रही जो पिछले साल नवंबर में 1,81,435 वाहन थी।
 
 
वहीं मोटरसाइकिल की बिक्री 9.36 प्रतिशत बढ़कर 10,49,659 वाहन रही जो नवंबर 2017 में 9,59,860 वाहन थी।

 

 
दोपहिया वाहनों की कुल बिक्री नवंबर में 7.15 प्रतिशत बढ़कर 16,45,791 वाहन रही जो पिछले साल इसी अवधि में 15,36,015 वाहन थी। वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री इस दौरान 5.71 प्रतिशत बढ़कर 72,812 वाहन रही। विभिन्न श्रेणियों में वाहन की बिक्री 5.03 प्रतिशत बढ़कर 20,38,015 वाहन रही जो नवंबर 2017 में 19,40,462 वाहन थी।

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