ईश्वर दुबे
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बालेश्वर (ओडिशा) : भारत ने ओडिशा तट से रविवार को परमाणु आयुध ले जाने में सक्षम लंबी दूरी की मारक क्षमता वाली बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-4 का सफल परीक्षण किया. यह मिसाइल 4,000 किलोमीटर की दूरी तक का लक्ष्य भेदने में सक्षम है. यह परीक्षण सेना ने प्रायोगिक परीक्षण के रूप में किया.
रक्षा सूत्रों ने बताया कि सतह से सतह पर मार करने वाली इस सामरिक मिसाइल का परीक्षण डॉ अब्दुल कलाम द्वीप स्थित एकीकृत परीक्षण केंद्र (आईटीआर) के लॉन्च पैड संख्या-4 से सुबह करीब 8:35 बजे किया गया. परीक्षण को ‘‘पूर्ण सफल'' करार देते हुए उन्होंने कहा कि परीक्षण के दौरान मिशन के सभी उद्देश्य प्राप्त कर लिए गए. सभी रडार, ट्रैकिंग सिस्टम और रेंज स्टेशनों ने मिसाइल के उड़ान प्रदर्शन पर निगरानी रखी, जिसे एक मोबाइल लॉन्चर से दागा गया.
अग्नि-4 मिसाइल का यह सातवां परीक्षण था. इससे पहले भारतीय सेना की सामरिक बल कमान (एसएफसी) द्वारा इसी स्थान से दो जनवरी 2018 को इसका सफल परीक्षण किया गया था.
नयी दिल्ली : सरकार के सिनेमा टिकट के दामों में कटौती के फैसले से अब फिल्म देखा सस्ता होगा और फिल्म उद्योग को बढ़ावा मिलने में मदद मिलेगी. मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एमएआई) ने शनिवार को यह बात कही.
बॉलीवुड के गंभीर अभिनेता नसीरुद्दीन शाह इन दिनों खबरों में बने हुए हैं. वजह है हिंदू-मुस्लिम और मॉब लिंचिंग मामले पर पिछले दिनों दिया उनका बयान. धीरे-धीरे यह बयान तूल पकड़ता जा रहा है.
शुक्रवार को राजस्थान में नसीरुद्दीन का विरोध हुआ और कार्यक्रम रद्द हो गया. देश में कहीं नसीर के बयान पर विरोध के सुर उभर रहे हैं, तो वहीं उनके समर्थन में भी कुछ आवाजें उठ रही हैं. यह बात दीगर है कि नसीर के बयान की आलोचना करनेवालों की संख्या ज्यादा है. इन्हीं में एक नाम बॉलीवुड एक्टर अनुपम खेर का है, जो नसीरुद्दीन शाह के बयान पर भड़क गये हैं. उन्होंने तंज भरे अंदाज में यह सवाल भी किया कि आखिर और कितनी आजादी चाहिए?
अनुपम खेर ने कहा, देश में इतनी आजादी है कि सेना को गालियां दी जा सकती हैं, एयर चीफ की बुराई की जा सकती है और सैनिकों पर पथराव किया जा सकता है. आपको इस देश में और कितनी आजादी चाहिए? उन्हें (नसीरुद्दीन शाह) जो कहना था वह कह दिया, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि जो कहा वह सच है.
यहां यह जानना गौरतलब है कि बॉलीवुड के सीनियर एक्टर्स में से एक नसीरुद्दीन शाह ने हाल में एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि देश में जैसा माहौल चल रहा है उसे देखकर उन्हें डर लगता है कि कल को उनके बच्चों को किसी गली में घेर कर न पूछ लिया जाये कि तुम हिंदू हो या मुस्लिम.
हिंदू-मुस्लिम मामले पर बोलते हुए नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि यह एक जहर की तरह है, जो तेजी से फैल रहा है और इसे काबू में कर पाना मुश्किल दिख रहा है.
चेन्नई : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 लोकसभा चुनाव के लिए बनाए गए महागठबंधन पर रविवार को करारा प्रहार किया है. उन्होंने महागठबंधन पर हमला करते हुए इसे विभिन्न राजनीतिक पार्टियों का ‘‘निजी अस्तित्व'' बचाने के लिए किया गया ‘‘नापाक गठबंधन'' करार दिया. मोदी ने तमिलनाडु में चेन्नई मध्य, चेन्नई उत्तर, मदुरई, तिरुचिरापल्ली और तिरूवल्लुर निर्वाचन क्षेत्रों के भाजपा के बूथ कार्यकर्ताओं से वीडियो संबोधन के जरिए कहा कि लोग ‘‘धनाढ्य वंशों के एक बेतुके गठबंधन'' को देखेंगे.
प्रधानमंत्री ने कहा कि महागठबंधन के प्रमुख घटक तेलुगू देशम पार्टी का गठन कांग्रेस की ज्यादती के खिलाफ दिवंगत मुख्यमंत्री एनटी रामाराव ने किया था लेकिन अब पार्टी कांग्रेस से हाथ मिलाने का इच्छुक है। मोदी ने कहा कि महागठबंधन में कुछ पार्टियों ने समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया से प्रेरित होने का दावा किया है लेकिन वे (लोहिया ने) स्वयं कांग्रेस की विचाराधारा के खिलाफ थे.
उन्होंने कहा, ‘‘आज कई लोग महागठबंधन की बात कर रहे हैं. गठबंधन निजी अस्तित्व को बचाने के लिए है और विचारधारा-आधारित समर्थन नहीं है. गठबंधन सत्ता के लिए है, जनता के लिए नहीं. यह गठबंधन व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के लिए है, लोगों की आकांक्षाओं के लिए नहीं.''
रांची : पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में तीन राज्य में शानदार प्रदर्शन करने वाली कांग्रेस पार्टी का झंडा झारखंड में भी लहरा रहा है. राहुल के नेतृत्व में 2019 के आम चुनावों से पहले तीन राज्यों से शुरू हुआ ‘विजय रथ’ झारखंड में भी आगे बढ़ा. कोलेबिरा उपचुनाव में कांग्रेस के नमन विक्सल कोंगारी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार बसंत सोरेंग को 9658 मतों से हरा दिया. एनोस एक्का की पत्नी मेनोन एक्का, जिन्हें जीत का प्रबल दावेदार माना जा रहा था, चौथे स्थान पर खिसक गयीं. 20 राउंड की मतगणना में कभी भी वह रेस में नहीं रहीं. वहीं, कोंगारी ने पहले राउंड से अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा के बसंत सोरेंग पर बढ़त बनाये रखी, जो अंत तक कायम रही.
लोकसभा चुनाव 2019 में महागठबंधन की तैयारी कर रही कांग्रेस को उस वक्त तगड़ा झटका लगा था, जब झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) सुप्रीमो शिबू सोरेन ने एनोस की पत्नी मेनोन को समर्थन का एलान कर दिया. कांग्रेस से विचार-विमर्श के बगैर मेनोन को झामुमो का समर्थन और गुरुजी का आशीर्वाद दोनों मिल गया. कोलेबिरा उपचुनाव में जब कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी, तो यह अटकलें लगने लगीं कि झारखंड में भाजपा के खिलाफ महागठबंधन बनने से पहले ही बिगड़ गया. लेकिन, सच्चाई कुछ और ही थी.
तहखाने की रिपोर्ट बताती है कि झामुमो और शिबू सोरेन ने एनोस एक्का को सबक सिखाने के लिए उनकी पत्नी को समर्थन देने की चाल चली थी. दरअसल, वर्ष 2009 में गुरुजी के मंत्रिमंडल में रहते हुए एनोस एक्का ने उनकी पीठ में छुरा घोंपा था. अपने ही मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के खिलाफ तमाड़ में एनोस एक्का ने गोपाल दास पातर उर्फ राजा पीटर को उतार दिया था. शिबू सोरेन इस उपचुनाव में हार गये थे. उन्हें इस्तीफा तो देना ही पड़ा था, काफी किरकिरी भी झेलनी पड़ी थी.
इसका बदला झामुमो ने एनोस एक्का से ले लिया है. मेनोन को गुरुजी ने आशीर्वाद के साथ समर्थन तो दे दिया, लेकिन पार्टी का कोई बड़ा नेता वहां प्रचार करने नहीं गया. झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अंतिम क्षण में प्रचार की औपचारिकता पूरी करने भर के लिए कोलेबिरा गये. दूसरी तरफ, पार्टी के नेता पौलुस सुरीन दूसरी पार्टी के प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार करते रहे, लेकिन हेमंत या गुरुजी ने उन्हें कभी रोका नहीं.
वर्ष 2005 से कोलेबिरा विधानसभा का प्रतिनिधित्व करने वाले एनोस एक्का का जेल में होना उनकी पार्टी की हार की एक वजह रही. पारा शिक्षक की हत्या के मामले में एनोस एक्का के जेल जाने के बाद उनकी सीट पर उपचुनाव की घोषणा हुई थी. एनोस की पत्नी मेनोन एक्का पहली बार चुनाव लड़ रही थीं. रणनीति बनाने में वह भाजपा और कांग्रेस से कमजोर साबित हुईं और चुनाव हार गयीं.
लगातार तीन बार कोलेबिरा से चुनाव जीत चुके एनोस एक्का पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं. उनके साथ उनकी पत्नी मेनोन एक्का भी उन्हीं आरोपों में घिरी हुई हैं. कई जगहों पर उनकी संपत्ति को प्रवर्तन निदेशालय ने अटैच कर दिया है. लोगों में इसका भी गलत संदेश गया और झारखंड पार्टी को हार का सामना करना पड़ा.
झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के समर्थन के बावजूद मेनोन एक्का हार गयीं, तो इसकी सबसे बड़ी वजह कांग्रेस की ठोस रणनीति रही. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ अजय कुमार के नेतृत्व में पार्टी ने चुनाव जीतने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया. अपने प्रत्याशी को जिताने के लिए महागठबंधन के सहयोगी दलों के नेताओं की फौज कोलेबिरा में उतार दी.
दूसरी तरफ, भाजपा की सहयोगी पार्टी ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) ने भाजपा से दूरी बनाये रखी. इस तरह कोलेबिरा में भाजपा पूरी तरह अलग-थलग पड़ गयी और उसके प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा.
रायपुर-अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के छत्तीसगढ़ प्रभारी पीएल पुनिया के छत्तीसगढ़ प्रवास के कार्यक्रम में आंशिक परिवर्तन किया गया है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के छत्तीसगढ़ प्रभारी पीएल पुनिया और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के छत्तीसगढ़ के प्रभारी सचिव डॉ चंदन यादव अब 24 दिसंबर सोमवार को शाम 7 बजे दिल्ली से रायपुर पहुंचेंगे. पीएल पुनिया 26 दिसंबर बुधवार को दोपहर 2.50 बजे रायपुर से दिल्ली के लिये रवाना होंगे.
रायपुर। दिल्ली से मंत्रियों के नाम तय होने के बाद प्रदेश में मंत्रिमंडल गठन की तैयारी तेज हो गई है. 25 दिसंबर को प्रातः 11 बजे नया मंत्री मंडल शपथ लेगा. इसे लेकर राजभवन द्वारा तैयारियां शुरु कर दी गई है. इसी दिन राज्यपाल मध्यप्रदेश में भी मंत्रियों को शपथ दिलाएंगी.इससे पहले 17 दिसंबर को सीएम भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. उनके साथ ही भूपेश के छोटे कैबिनेट ने भी शपथ ली थी. जिसमें टीएस सिंहदेव और ताम्रध्वज साहू को मंत्रीपद की शपथ दिलाई गई थी.
आपको बता दें कि संभावित मंत्रियों की सूची लेकर सीएम भूपेश बघेल, मंत्री टीएस सिंहदेव और ताम्रध्वज साहू की कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से लंबी चर्चा हुई थी. इस चर्चा में वरिष्ठ और अनुभवी नामों पर सहमति बनी जिसके बाद कल देर रात सीएम भूपेश बघेल अपने साथियों के साथ दिल्ली से वापस रायपुर लौटे थे.
रायपुर. किसानों की ऋण माफी को लेकर भूपेश बघेल के मंत्रिमंडल के प्रस्ताव पारित करने के साथ ही प्रक्रिया शुरू हो गई है. शासन ने धान खरीदी के दौरान ऋण माफी योजना के पात्र किसानों से अल्पकालीन कृषि ऋण की लिकिंग के जरिए वसूली पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दिया है.
सहकारिता विभाग की सचिव रीता शांडिल्य की ओर से शनिवार को सहकारी संस्थाएं पंजीयक और छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक के प्रबंध संचालक को जारी किए गए पत्र में राज्य शासन की ओर से राज्य ग्रामीण बैंक और सहकारी बैंक व प्राथमिक कृषि साख समितियों की ओर से वितरित और 30 नवंबर 2018 तक बकाया अल्पकालीन कृषि ऋण माफ करने के निर्णय की जानकारी देते हुए अल्पकालीन ऋण वसूली नहीं करने निर्देशित किया है.