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वाराणसी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा भगवान हनुमान को ‘दलित’ बताये जाने को लेकर उठे विवाद के बीच,  वरिष्ठ समाजवादी नेता शिवपाल सिंह यादव की अगुवाई वाली प्रगतिशील समाजवादी पार्टी-लोहिया (प्रसपा) ने वाराणसी जिला प्रशासन से इन आराध्य का ‘जाति प्रमाणपत्र‘ जारी करने के लिये आवेदन किया है । प्रसपा ने भगवान हनुमान को दलित बताये जाने को लेकर उत्पन्न विवाद के मैदान में उतरने के लिये यह अनोखा तरीका अपनाया है।
 
पार्टी की युवा शाखा के जिलाध्यक्ष हरीश मिश्र ने बताया ‘‘हमने वाराणसी जिला कलेक्टर कार्यालय से भगवान हनुमान का जाति प्रमाणपत्र जारी करवाने के लिये आवेदन किया है । चूंकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भगवान हनुमान को जाति की राजनीति में घसीटा है, इसलिये हम उनका जाति प्रमाणपत्र चाहते हैं।’’उन्होंने कहा कि अगर जिला प्रशासन उन्हें एक हफ्ते के अंदर यह प्रमाणपत्र नहीं देता है तो वह धरना करेंगे।
 
जाति प्रमाणपत्र के लिये प्रस्तुत आवेदन में भगवान हनुमान की तस्वीर चिपकायी गयी है। उनके पिता के नाम की जगह महाराज केसरी और माता के स्थान पर अंजना देवी लिखा है। पते के स्थान पर प्रसिद्ध संकटमोचन मंदिर का नाम लिखा है, वहीं जाति के स्थान पर दलित शब्द का जिक्र है। इसके अलावा उम्र के कालम में ‘अनंत‘ लिखा गया है।

 

काबुल। अफगानिस्तान के हेरात प्रांत में तालिबान के एक हमले में 14 अफगान सैनिक मारे गए और उसने 21 सैनिकों को बंधक बना लिया। हेरात प्रांतीय परिषद के सदस्य नजीबुल्ला मोहेबी ने कहा कि हमलावरों ने गुरुवार की देर रात निनदांद में सेना की दो बाहरी चौकियों को घेर लिया।

उन्होंने कहा कि छह घंटे तक चली लड़ाई शुक्रवार सुबह खत्म हुई। वहां पहुंची सेना की कुमुक ने विद्रोहियों को खदेड़ दिया, लेकिन तब तक वे 21 सैनिकों को बंधक बना चुके थे।

हालांकि रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता गफूर अहमद जावीद ने मृतक और घायलों की संख्या दस बताई है। किसी भी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन अधिकारियों ने इसके लिए तालिबान को जिम्मेदार ठहराया है।

वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारतीय-अमेरिकी निक्की हैली को हटाकर विदेश विभाग की प्रवक्ता हीथर नोर्ट को संयुक्त राष्ट्र का अगला राजदूत नियुक्त कर सकते हैं। मीडिया में आई खबरों में यह कहा गया है।                                      

अक्टूबर में हैली ने घोषणा की थी कि वह वर्ष के अंत तक पद छोड़ देंगी। वह इस पद पर करीब दो वर्ष तक रहीं।

हैली ऐसी पहली भारतीय-अमेरिकी हैं जिन्हें किसी राष्ट्रपति प्रशासन के तहत कैबिनेट के पद पर नियुक्त किया गया। नोर्ट की नियुक्ति के संबंध में ट्रंप शुक्रवार को घोषणा कर सकते हैं। नोर्ट फॉक्स न्यूज की एंकर रह चुकी हैं जहां उन्होंने वर्ष 1998 से 2005 तक काम किया।

मुंबई। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने सड़कों की गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं करने पर बल देते हुए कहा कि सड़क खराब निकलने पर वह ‘‘ ठेकदारों पर बुलडोजर चलवा देंगे।’’ गडकरी ने यहां बृहस्पतिवार को एक पुस्तक किताब विमोचन समारोह में बात कही। गडकरी की यह टिप्पणी सड़क गुणवत्ता पर टिप्पणी उच्चतम न्यायालय की चिंताओं के बाद आई है। न्यायालय ने कहा था कि सड़क दुर्घटनाओं में देश में 14,000 से ज्यादा मौतें सड़कों पर गड्ढे के कारण होती हैं। यह आतंकी हमलों में मारे गये लोगों की संख्या से अधिक है। सड़क पर गड्ढों के कारण इस कदर लोगों की मौत "स्वीकार्य" नहीं है।
 
 
यह पुस्तक भारत की प्रगति के बारे में है इसका शीर्षक है 'इंडिया इंस्पायर्स: रीडिफाइनिंग द पॉलिटिक्स ऑफ डिलीवरेंस' इसके लेखक एक राजनीतिक कार्यकर्ता तुहिन ए. सिन्हा हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा, "मैंने कई बड़े ठेकेदारों से कहा कि यदि उनके द्वारा बनायी गयी सड़कों की गुणवत्ता खराब निकली तो मैं उन्हें बुलडोजर के नीचे डलवा दूंगा।"
 
 
गडकरी ने कहा कि मेरे मंत्रालय ने पिछले साढे चार साल में 10,000 अरब रुपये के सड़क निर्माण के ठेके दिये हैं। पारदर्शिता पर चिंताओं को दूर करते हुये मंत्री ने कहा कि इन दिनों किसी भी ठेकदार को ठेकों के लिये दिल्ली आने के लिये मजबूर नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब हमारी सरकार आई तो सड़क निर्माण की दर 2 किलोमीटर प्रति दिन थी लेकिन अब यब बढ़कर 28 किलोमीटर प्रति दिन हो गयी है। इसे मार्च 2019 तक बढ़ाकर 40 किलोमीटर प्रति दिन करने का लक्ष्य है। गडकरी ने कहा कि देशभर में 12 नये एक्सप्रेसवे पर काम चल रहा है।
 
न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर की अध्यक्षता वाली पीठ ने बृहस्पतिवार को नाराजगी जताते हुये कहा था कि देशभर में गड्ढ़ों के कारण बड़े पैमाने पर मौत होती है। संभवत: यह आंकड़ा सीमा पर और आतंकी हमले में मरने वालों से भी ज्यादा है। गडकरी ने कहा कि प्रदूषित गंगा नदी का 70-80 प्रतिशत काम मार्च अंत तक पूरा हो जायेगा। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के तहत राज्यों के साथ मिलकर इस पर करीब 26,000 करोड़ रुपये खर्ज किये गये हैं। गडकरी ने कहा, "मेरा मानना है कि मार्च 2020 तक गंगा नदी पूरी तरह से स्वच्छ हो जायेगी।"
कश्मीर में पाकिस्तान द्वारा छेड़ी गई तथाकथित आजादी की जंग का खमियाजा आज उन्हीं मुस्लिम परिवारों को भुगतना पड़ा है जिन्होंने कभी आतंकवादियों तथा पाकिस्तान के बहकावे में आकर सड़कों पर निकल आजादी समर्थक प्रदर्शनों में भाग लिया था। हालांकि आजादी का सपना तो पूरा नहीं हुआ परंतु परिवारों के कई परिजनों को जीवन से आजादी अवश्य मिल गई। और यह आजादी किसी और ने नहीं बल्कि आतंकवादियों ने ही दी है मौत के रूप में।
 
धरती के स्वर्ग कश्मीर में फैले इस्लामी आतंकवाद का एक दर्दनाक पहलू यह है कि पाकिस्तान ने कश्मीर में जो अप्रत्यक्ष युद्ध छेड़ा हुआ है उसके अधिकतर शिकार होने वाले मुस्लिम ही हैं और यह भी सच है कि इस्लाम के नाम पर ही आज पाक प्रशिक्षित आतंकवादी मुस्लिम युवतियों को अपनी वासना का शिकार बना रहे हैं। हालांकि हिन्दू भी इस आतंकवाद का शिकार हुए हैं परंतु समय रहते उनके द्वारा पलायन कर लिए जाने के परिणामस्वरूप उतनी संख्या में वे इसके शिकार नहीं हुए जितने कि मुस्लिम हुए हैं और हो रहे हैं।
 
30 सालों के आतंकवाद के दौर के दौरान कश्मीर में अनुमानतः 18000 नागरिक आतंकवादियों के हाथों मारे गए हैं और मजेदार बात यह है कि इन 18 हजार में से 16 हजार से अधिक मुस्लिम ही हैं। असल में आतंकवाद की आग के फैलते ही घाटी के कश्मीरी पंडितों तथा अन्य हिन्दुओं ने पलायन कर देश के अन्य भागों में शरण ले ली थी परंतु मुस्लिम ऐसा कर पाने में सफल नहीं हुए थे। नतीजतन आज भी वे आतंकवादियों की गोलियों का शिकार हो रहे हैं।

 
कश्मीर में आज कोई ऐसा परिवार नहीं है जिसके एक या दो सदस्य आतंकवादियों या सुरक्षाबलों की गोलियों से न मारे गए हों बल्कि मौतों के अतिरिक्त इन परिवारों के लिए दुखदायी बात यह है कि उनके परिवार के कई सदस्य अभी भी लापता हैं, जो सुरक्षा बलों द्वारा हिरासत में लिए तो गए थे परंतु आज भी उनके प्रति कोई जानकारी नहीं है।
 
इससे और अधिक चौंकाने वाला तथ्य क्या हो सकता है कि कश्मीर में आतंकवाद के दौर के दौरान जो महिलाएं तथा युवतियां आतंकवादियों के सामूहिक बलात्कार की शिकार हुई हैं वे सभी मुस्लिम ही थीं जिनकी अस्मत इस्लाम के लिए जंग लड़ने वालों ने लूट ली। कश्मीर में करीब पांच सौ मुस्लिम युवतियों तथा महिलाओं को अपनी जानें तथा अस्मत से इसलिए भी हाथ धोना पड़ा क्योंकि उन्होंने आतंकवादियों के लिए कार्य करना स्वीकार नहीं किया।
 
इस्लामी आतंकवाद से कश्मीर के मुस्लिम कितने त्रस्त हैं इसके कई उदाहरण हैं। आज इसी आतंकवाद के कारण सैंकड़ों परिवार बेघर हैं, कईयों के परिजन अभी लापता हैं, हजारों अर्द्ध विधवाएं हैं जो अपने आप को न सुहागन कहलवा पाती हैं और न ही विधवा, हजारों बच्चे अनाथ हो चुके हैं जिनके मां-बाप को या तो आतंकवादियों ने मार दिया या फिर वे सुरक्षा बलों के साथ होने वाली मुठभेड़ों में मारे गए। कभी मुखबिर का ठप्पा लगा कर इन मुस्लिमों की हत्याएं की गईं तो कभी कोई अन्य आरोप लगा। लेकिन इतना अवश्य है कि आतंकवादी अपने संघर्ष के दौरान कश्मीरी जनता की हत्याएं करने का कोई न कोई बहाना अवश्य ही ढूंढते रहे हैं। हालांकि मृतकों में हिन्दू भी शामिल हैं परंतु उनकी संख्या नगण्य इसलिए है क्योंकि 1990 में जब आतंकवाद अपने चरमोत्कर्ष पर पहुंचा था तब तक हिन्दू परिवार कश्मीर से पलायन कर चुके थे।
 
 
आतंकवादियों की कार्रवाइयों से सबसे अधिक त्रस्त मुस्लिम ही हुए हैं। इसका प्रमाण घाटी में होने वाली हत्याओं से तो मिलता ही है, अपहरणों तथा युवतियों के साथ होने वाले बलात्कार की घटनाओं से भी मिलता है। गौरतलब है कि आतंकवादियों ने करीब 5000 लोगों को अपनी अपहरण नीति का शिकार अभी तक बनाया है और इसमें 99 प्रतिशत मुस्लिम ही थे इससे कोई भी इंकार नहीं करता। इस्लामी आतंकवाद का कश्मीर के मुस्लिमों को और क्या क्या खमियाजा भुगतना पड़ा इसे कोई भी अपनी आंखों से देख सकता है। घाटी में तबाह हो चुकी अर्थव्यवस्था, अनपढ़ और गंवार होती आने वाली पीढ़ियां, आतंकवाद की भेंट चढ़ चुकी खूबसूरत इमारतें तथा अन्य वस्तुएं इस्लामी आतंकवाद के कुप्रभाव की मुंह बोलती तस्वीरें हैं जिसे देख कोई भी मुस्लिम अब पुनः ऐसी आजादी का सपना देखने को तैयार नहीं है। और यह भी एक तथ्य है कि आतंकवाद के दौर के दौरान मारे जाने वाले 24 हजार से अधिक आतंकवादी भी मुस्लिम ही थे जो पाकिस्तान के बहकावे में आकर आतंकवाद के पथ पर चल निकले थे उस आजादी को हासिल करने के लिए जो मात्र एक छलावा थी और वे इस प्रक्रिया में मौत की नींद सो गए।
 
-सुरेश डुग्गर

नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने भारतीय रिजर्व बैंक के कैपिटल रिजर्व के संबंध में वित्त मंत्री अरुण जेटली के खिलाफ आरोप लगाने वाली एक जनहित याचिका को शुक्रवार को खारिज कर दिया। शीर्ष अदालत ने वकील एम एल शर्मा पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया जिन्होंने जनहित याचिका (पी आई एल) दायर की थी। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति एस के कौल की पीठ ने कहा, ‘हमें इस पी आई एल पर विचार करने की जरा भी वजह नजर नहीं आती।’

शर्मा ने वित्त मंत्री जेटली पर आरबीआई के कैपिटल रिजर्व में लूटपाट का आरोप लगाया था। पीठ ने शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री को भी निर्देश दिया कि शर्मा को तब तक अन्य कोई पीआईएल दाखिल करने की इजाजत नहीं दी जाए, जब तक वह 50 हजार रुपये जमा नहीं कर देते।

कांग्रेस पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए मोदी ने कहा कि अतीत में बड़े-बड़े लोग सत्ता में आए, बड़े-बड़े सरनेम :उपनाम: वाले लोग सत्ता में आए और चले गए लेकिन हम पिछड़े रह गए। उन्होंने कहा कि यह सब पहले इसलिए नहीं हुआ क्योंकि गरीबी कम हो जाएगी, तो ‘गरीबी हटाओ’ का नारा कैसे दे पाएंगे। जब देश के गरीब, शोषित और वंचितों को सारी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हो जायेंगी। उन्हें शौचालय, बिजली, बैंक खाते, गैस कनेक्शन जैसी चीजों की चिंताओं से मुक्ति मिल जाएगी, तो फिर देश के गरीब खुद ही अपनी गरीबी को परास्त कर देंगे।

प्रधानमंत्री ने सवाल किया, सोचें आखिर क्यों, आजादी के बाद से 67 वर्षों तक केवल 70 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों तक ही बिजली पहुंच सकी, और अब बीते चार वर्षों में 95 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों तक बिजली कैसे पहुंच गई? सोचें आखिर कैसे 67 साल में सिर्फ 55 प्रतिशत घरों में गैस कनेक्शन था लेकिन पिछले चार सालों में यह दायरा बढ़कर 90 प्रतिशत परिवारों तक पहुंच गया है। 

उन्होंने कहा कि पहले 67 सालों में सिर्फ 50 प्रतिशत परिवारों के पास बैंक खाते थे, लेकिन अब देश का लगभग प्रत्येक परिवार बैंकिंग सेवा से जुड़ गया है। चार साल पहले तक केवल 55 प्रतिशत बस्तियों, टोले और गांवों तक ही सड़क पहुंची थी और अब 90 फीसदी से ज्यादा बस्तियों, गांव, टोलों तक सड़क संपर्क पहुंच गया है। मोदी ने कहा, ‘व्यवस्थाओं में अपूर्णता से संपूर्णता की तरफ बढ़ते हमारे देश ने पिछले चार-साढ़े चार वर्षों में जो प्रगति की है, वह अभूतपूर्व है।’

अहमदाबाद। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की तबीयत बिगड़ गई हैं। बता दें कि महाराष्ट्र के अहमदनगर में एक कार्यक्रम के दौरान मंच पर नितिन गडकरी बेहोश होकर गिर गए। जिसके तुरंत बाद ही उन्हें अस्पताल ले जाया गया। फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। डॉक्टर्स से मिली जानकारी के मुताबिक नितिन गडकरी की सुगर कम हो गई जिसकी वजह से वो बेहोश हुए। हालांकि, डॉक्टर्स की निगरानी में उन्हें खाने के लिए दिया गया। अब उनकी तबीयत स्थिर है।

जयपुर। राजस्थान में विधानसभा चुनाव के लिए शुक्रवार को हो रहे मतदान में अपराह्न तीन बजे तक 59.15 प्रतिशत लोगों ने वोट डाला। निर्वाचन विभाग के अनुसार राज्य की 200 में 199 सीटों के लिए मतदान सुबह आठ बजे शुरू हुआ और अपराह्न तीन बजे तक 59.15 प्रतिशत मतदाता वोट डाल चुके थे। जबकि, दोपहर एक बजे तक 41.57 प्रतिशत मतदाता वोट डाल चुके थे।

 

 

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि चाकचौबंद सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदान शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट, केंद्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत व अन्य प्रमुख नेता अब तक अपना वोट डाल चुके हैं।

 

राज्य में कुल मिलाकर 4,74,37,761 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इनमें 2,47,22,365 पुरुष व 2,27,15,396 महिला मतदाता हैं। इनमें से पहली बार मतदान कर रहे युवा मतदाताओं की संख्या 20,20,156 हैं। राज्य में स्वतंत्र, निष्पक्ष व शांतिपूर्ण चुनाव के लिए सुरक्षा चाक चौबंद है। राज्य की पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश व गुजरात से लगती सीमाओं पर कड़ी नाकेबंदी है। मतदान निष्पक्ष व शांतिपूर्ण ढंग से कराने का जिम्मा 1,44,941 जवानों पर होगा जिनमें केंद्रीय सुरक्षा बलों की 640 कंपनियां शामिल हैं। राज्य में कुल 387 नाके और चेक पोस्ट बनाए गए हैं।

 

रांची। दुमका स्थित राजभवन में झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ठहरे हुए थे। इसी बीच उन्होंने अपना मोबाइल फोन चेक किया तो उसमें नेटवर्क नहीं आ रहे थे। बता दें कि रघुवर दास बीएसएनएल का सिम कार्ड उपयोग करते हैं। इस घटना के तुरंत बाद मीडिया में खबर आती है कि झारखंड पुलिस ने आधी रात को बीएसएनएल के 2 बड़े अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया है। 

दरअसल, सोमवार के दिन रघुवर दास दुमका में स्थित राजभवन में रुके हुए थे। जहां पर उन्होंने मोबाइल में नेटवर्क नहीं आने पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत दर्ज होने के तुरंत बाद ही पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दोनों अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया और तीन घंटे तक थाने में बैठाकर रखा।

इस पूरे घटनाक्रम की अभी सीएमओ की तरफ से कोई औपचारिक पुष्टि नहीं की गई है। हालांकि, विपक्ष ने बीएसएनएल अधिकारियों को गिरफ्तार किए जाने पर कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों द्वारा अधिकारियों को ऐसे थाने में बुलाना मुख्यमंत्री रघुवर दास की फासिस्ट सोच को उजागर करता है।

वहीं, बीएसएनएल अधिकारियों को इस तरह से आधी रात को गिरफ्तार किए जाने के विरोध में इस सरकारी दूरसंचार कंपनी के अधिकारियों ने राजधानी दिल्ली में विरोध प्रदर्शन किया। साथ ही बता दें कि बीएसएनएल के यूनियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर पुलिस के खिलाफ कार्रवाई की मांग की और कहा कि अधिकारियों के साथ बीती रात को पुलिस वालों ने गाली गलौच की। ऐसा व्यवहार करना मानवाधिकारों का उल्लघंन है। 

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