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शाहरुख खान की फिल्म 'जीरो' के गाने 'इश्कबाजी' का फैंस को लंबे समय से इंतजार था जिसे आज रिलीज कर दिया गया है । गाने को बेहद अच्छा रिस्पॉन्स मिला है । 'इश्कबाजी' गाने में कई सालों बाद सलमान खान और शाहरुख खान साथ में नाचते दिखे । इसी वजह से दर्शकों का उत्साह बढ़ गया । 

 हर कोई इन दोनों स्टार्स को एक साथ झूमते देखना चाहता था, जो सपना आज पूरा हो गया। जैसे ही निर्माताओं ने 'इश्कबाजी' गाना रिलीज किया, वैसे ही इसे ट्विटर पर शाहरुख खान और सलमान खान के फैंस के रिएक्शन की बाढ़ आ गई है। हर कोई शाहरुख और सलमान की जुगलबंदी देखकर सांतवे आसमान पर है और कह रहे हैं, ‘मेरे करण-अर्जुन आ गए...’ ।


बता दें कि सलमान खान और शाहरुख खान को दर्शकों ने आखिरी बार एक साथ सिल्वर स्क्रीन पर 'करण अर्जुन' के दौरान डांस करते देखा था। इसके बाद इन दोनों का साथ में कोई बहुत बड़ा गाना नहीं आया। दोनों एक साथ नजर जरूर आए लेकिन इन्होंने कभी 'करण अर्जुन' जैसा डांस नहीं किया। 

'जीरो' के 'इश्कबाजी' गाने के लिए दोनों ने हाथ मिलाकर दिखा दिया है कि जो करिश्मा इन दोनों के साथ आने में होता है वो कोई दूसरे स्टार्स पैदा नहीं कर सकते हैं। बउआ सिंह बने शाहरुख खान ने भाईजान के 'जवानी फिर ना आए' वाले गाने का हुक स्टेप भी किया है।

मध्यप्रदेश में चुनाव के नतीजे सामने आने में बस कुछ ही दिनों का समय बाकी है। इन चुनावों को गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (जीजीपी) की एंट्री ने कई सीटों पर त्रिकोणीय बना दिया। महाकौशल में कौशल दिखाने वाली पार्टी ही अक्सर प्रदेश में सत्ता पर काबिज होती है। इस इलाके में जीजीपी का शुरुआत से ही असर देखा गया है। इस बार जीजीपी के तीनों धड़ों ने एक साथ चुनाव लड़ा। अब परिणाम के पहले ये समीकरण दूसरी पार्टियों की धड़कनें बढ़ा रहे हैं।

टूट से गिरा था जीजीपी का मत प्रतिशत 

इन चुनावों में जीजीपी ने एकजुट होकर समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन करके 76 सीटों पर उम्मीदवार उतारे। 2013 विधानसभा चुनाव में जब जीजीपी तीन टुकड़ों में टूट गई थी तब इसका मत प्रतिशत 1 फीसदी हो गया था।

 

2003 के चुनावों में जीजीपी ने 80 सीटों पर चुनाव लड़ा। इसने महाकौशल के छिंदवाड़ा, बालाघाट और सिवनी में तीन सीटें जीती। अन्य तीन सीटों पर इसके उम्मीदवार दूसरे नंबर पर रहे। राजनीति के पंडितों को अचंभित करते हुए 3.23 फीसदी वोट हासिल किये।

2008 के चुनावों में पार्टी दो टुकड़ों में बंट गई- गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (जीजीपी) और गोंडवाना मुक्ति सेना (जीएमएस) । जीजीपी ने 86 और जीजीएम ने 92 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए। इस टूट की वजह से जनजातीय पार्टी का जनाधार भी बंट गया और मत प्रतिशत 1.80% तक गिर गया। इन चुनावों में दोनों ही धड़ों का कोई भी उम्मीदवार जीत हासिल नहीं कर पाया।

2013 के विधानसभा चुनाव में पार्टी के एक धड़े ने अलग होकर भारतीय गोंडवाना पार्टी (बीजीपी) नाम की नई पार्टी बना ली और जीजीपी की मुश्किलें बढ़ गईं। चुनावों में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (जीजीपी) ने 64,  गोंडवाना मुक्ति सेना (जीएमएस) ने 6 और भारतीय गोंडवाना पार्टी (बीजीपी) ने 31 सीटों पर चुनाव लड़ा।  नतीजा यह हुआ कि पार्टी का वोट प्रतिशत एक फीसदी हो गया।

एकता की ताकत को समझते हुए इस बार तीनों धड़ों ने एक होकर समाजवादी पार्टी से गठबंधन किया है। समाजवादी पार्टी से गठबंधन करने के पीछे पार्टी का उद्देश्य जनजाति मतदाताओं के अतिरिक्त वोट हासिल करना माना जा रहा है। जीजीपी इस बार के चुनाव में अपनी खोई साख वापस पाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। 

सा तो कभी नही सुना। एक अधिकारी ईवीएम लेकर अपने घर चला गया। एक नहीं ,दो नही, तीन मशीनें। घर रख लीं। रात को पुलिस को खबर मिली तो निर्वाचन आयोग के अफसरों ने उसके घर से जब्त कीं । दूसरा पीठासीन अधिकारी खुल्लमखुल्ला भाजपा के पक्ष में मतदान करा रहा था। पुलिस ने उसे रंगे हाथों गिरफ्तार किया। इस तरह के न जाने कितने अधिकारी इस काम में लगे रहे होंगे? दो अन्य अधिकारी ड्यूटी से हटा दिए गए। दो पुलिस अफसर हटा दिए गए। 

मंदिर में कब से चढ़ने लगे पार्टी के चुनाव चिन्ह?

छत्तीसगढ़ में पहले चरण के मतदान में बहुत से मतदान केंद्रों पर ईवीएम मशीनों में खराबी के चलते दो घंटे से लेकर चार घंटे तक मतदान रुका रहा था। उन बूथों के मतदाता देर तक इंतजार करने के बाद घर वापस लौट गए। सैकड़ों मतदाता तो कई किलोमीटर पैदल चलकर वोट डालने आए थे। चुनाव आयोग की पर्याप्त ट्रेनिंग के बाद यह हाल हुआ। इसके बाद मंगलवार को दूसरे चरण के मतदान में भी दो सौ मतदान केंद्रों पर मशीनें खराब हो गईं। दो से तीन घंटे मतदान रुका रहा। लोग मतदान केंद्रों पर आकर लौट गए। भाजपा के एक नेता मतदान पर्ची के साथ पांच सौ रूपए का नोट नत्थी करके मतदाताओं तक पहुंचा रहे थे। पकड़े गए।

 

इसी पार्टी के एक नेता के घर से चुनाव आयोग के अफसरों ने शराब की पेटियां बरामद कीं। मामला दर्ज हो गया। एक सांसद मतदान केंद्र पर पार्टी के सिंबल वाला गमछा डाल कर दबंगई के साथ गए। शिकायत दर्ज हुई। रमन सिंह मंत्रिमंडल के एक वरिष्ठ मंत्री कुर्ते पर पार्टी का सिंबल लगाकर चले गए। मीडिया के सामने बेशर्मी से बोले ,मंदिर गया था। चाहने वालों ने फूल जेब में दे दिया। मंदिर में फूल की जगह पार्टी के सिंबल कब से चढ़ाए जाने लगे -इसका उनके पास कोई उत्तर नहीं था। इसकी भी शिकायत हुई।

नौकरशाहों का सामंती रवैया

सबसे बड़ी गैर जिम्मेदारी मुख्य चुनाव अधिकारी ने दिखाई।  संवेदनहीन रवैया दिखाते हुए उन्होंने एक चैनल पर कहा कि 19 हजार मशीनों में से 562  खराब हो गईं तो क्या बड़ी बात है। अगर एक मतदाता भी केंद्र पर जाकर मतदान से वंचित हो जाता है तो यह भारी भूल है। वहां तो डेढ़ दो लाख मतदाता मतदान केंद्रों से लौट गए। इसके बाद अधिकारी कहते हैं कि भले ही दो घंटे मतदान रुका रहा हो। खत्म तो पांच बजे ही करना होगा। ऐसे सामंती नौकरशाह अधिकारी  का रवैया समझ से परे है।

चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने रायपुर में और दिल्ली में पार्टी के प्रदेश प्रभारी पी एल पूनिया ने चुनाव आयोग से मिलकर शिकायतें दर्ज कराई। बघेल ने तो उन मतदान केंद्रों का प्रमाण सहित हवाला दिया ,जहाँ मशीनें खराब हुई थी। बघेल का कहना है कि कांग्रेस की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत थी और पिछले चुनावों का रिकॉर्ड भी इसकी पुष्टि करता है। सवाल यह उठता है कि पिछले चुनाव में दोनों बड़ी पार्टियों के बीच सिर्फ 0.7 फीसदी मतों का अंतर था। ऐसे में बड़े पैमाने पर मशीनों की खराबी से संदेह भरे सवाल उठने लाजिमी हैं। कोई षड्यंत्र न भी हो तो स्वस्थ्य लोकतंत्र का तकाजा यही है कि एक भी मतदाता को अपने अधिकार से वंचित न रहना पड़े। अफसोस छत्तीसगढ़ ने इस मामले में जिम्मेदारी भरा आचरण नहीं किया है। 

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश कुरियन जोसेफ के एक बयान को लेकर मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि ‘चौकीदार’ ने देश की सबसे बड़ी अदालत के एक न्यायमूर्ति को ‘कोर्ट-पुतली’ बना लिया था।

गांधी ने न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) जोसेफ के बयान से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए ट्वीट किया, ‘चौकीदार ने उच्चतम न्यायालय के एक न्यायमूर्ति को कोर्ट-पुतली बना लिया था।’ उन्होंने कहा, ‘चौकीदार का दुर्भाग्य है कि देश में ईमानदार जजों की कमी नहीं है जिनके लिए सत्य हमेशा सत्ता से बड़ा होता है। वे सत्ता के दंभ को सत्य पर हावी होने नहीं देते। देश को ऐसे जजों पर गर्व है।’

कांग्रेस अध्यक्ष के इस आरोप पर फिलहाल सरकार या भाजपा की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। गौरतलब है कि न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) जोसेफ ने हाल ही में एक मीडिया साक्षात्कार में कहा कि उन्हें एवं तीन अन्य वरिष्ठ न्यायाधीशों को इस साल जनवरी में संवाददाता सम्मेलन करना पड़ा क्योंकि उन्हें ऐसा लगा कि तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा को कोई बाहरी व्यक्ति नियंत्रित कर रहा था।

बुलंदशहर के स्याना तहसील के गांव महाव में सोमवार सुबह गोवंश अवशेष मिलने पर पुलिस, हिंदूवादी संगठनों और ग्रामीणों में जमकर टकराव हुआ। गुस्साए ग्रामीणों ने चिंगरावठी चौकी के पास सड़क पर जाम लगा दिया। स्याना थाने के कोतवाल इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह ने मौके पर पहुंचकर जाम खुलवाने की कोशिश की तो ग्रामीणों ने पथराव कर दिया। भीड़ ने चौकी के बाहर खड़े पुलिस के दर्जनों वाहनों में आग लगा दी। चौकी में घुसकर तोड़फोड़ की और सामान को आग लगा दी। हालात बेकाबू होते देख पुलिस ने हवाई फायरिंग की। इस पर ग्रामीणों ने सुबोध कुमार पर हमला बोल दिया। घटना में गोली लगने से कोतवाल सुबोध और एक युवक सुमित की मौत हो गई।
 
न्यायिक हिरासत में आरोपी
इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है जिन्हें जिला अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

सीएम योगी ने बुलाई बैठक
बुलंदशहर मामले पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने आज रात 9 बजे बैठक बुलाई है। खबर है कि इसमें गृह सचिव और एडीजी भी मौजूद रहेंगे। डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा नेे कहा है कि सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी और सरकार इस मामले में उचित कदम उठा रही है।

प्रकाश करात बोले पूर्व नियोजित था हादसा
सीपीआई(एम) के प्रमुख प्रकाश करात ने बुलंदशहर हिंसा को पूर्व-नियोजित हादसा बताया है। उन्होंने कहा कि जब चुनाव नजदीक होता है तो गाय को मुद्दा बनाकर पहले भी सांप्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिश की जाती रही है। सबको याद है कि कैसे लोकसभा चुनाव से पहले 2013 में मुजफ्फरनगर दंगे हुए थे।

राज्यपाल ने कहा होगी सख्त कार्रवाई
बुलंदशहर मामले में यूपी के राज्यपाल राम नायक ने घटना को निंदनीय बताया है। उन्होंने कहा, सीएम ने घटना की जांच का आदेश दे दिया है। मुझे उम्मीद है कि जैसा सीएम ने कहा है सच्चाई दो दिनों में सामने आ जाएगी। जिन्होंने ये अपराध किया है उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। कारण चाहे जो भी रहा हो ऐसी घटनाएं नहीं होनी चाहिए।

चिंगरावठी पहुंचा सुमित का शव, अंतिम संस्कार से परिजनों का इंकार
इंस्पेक्टर सुबोध के अलावा बुलंदशहर हिंसा में मारे गए सुमित का शव गांव चिंगरावठी में पहुंच गया था। सुमित के परिजनों ने लिखित में आश्वाशन मिलने के बाद ही अंतिम संस्कार की चेतावनी दी है। परिजनों ने 50 लाख का मुआवजा, सरकारी नौकरी, माता पिता को पेंशन, और मृतक को शहीद का दर्जा देने की मांग की।

इस मामले में एडीजी लॉ एंड ऑर्डर आनंद कुमार ने प्रेस कांफ्रेंस की। इसमें उन्होंने कई बातों के बारे में खुलासा किया। उन्होंने कहा-
-किसी संगठन का नाम अभी सामने नहीं आया है
-किसी निर्दोष को सजा न हो इसलिए एसआईटी का गठन किया गया है जिससे निष्पक्ष जांच हो सके
-सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की जांच हो रही है
-इंस्पेक्टर सुबोध को दिया गया शहीद का दर्जा, दी गई राजकीय सलामी
-सुमित प्रदर्शनकारियों में शामिल था, उसके शरीर से मिली है गोली, जिसकी जांच की जा रही है
-वीडियो में गंभीर/मृत इंस्पेक्टर अकेले थे, कहां थी पुलिस इसकी एसआईटी जांच होगी
-देवेंद्र, चमन, आशीष, सतीश गिरफ्तार
-सारी जांच एसआईटी के दायरे में है। जांच के बाद पता चलेगा कि कैसे घटना हुई थी
-एसआईटी की जांच में साबित होगा कि घटना के पीछे कौन है
-मामले पर पूरी जांच की जा रही है, पशु विभाग से सामग्री की भी जांच कराई जाएगी
-सुबोध सिंह को पहले पत्थर लगा बाद में उन्हें गोली मार दी गई।
-कुछ पुलिसकर्मियों ने इंस्पेक्टर को अस्पताल ले जाने का प्रयास किया मगर भीड़ ने उन पर भी हमला किया।
-बुलंदशहर में स्थिति सामान्य है। 15 से 20 हज़ार लोग अब भी इज्तेमा स्थल पर हैं। उन्हें वहां से निकाला जा रहा है।

बुलंदशहर में हुई आज फिर अफवाह फैलाने की कोशिश
मंगलवार को बुलंदशहर के गुलावठी में असामाजिक तत्वों द्वारा एक बार फिर गोकशी की अफवाह फैला कर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई। सूचना पर पुलिस ने तत्परता से मौके पर पहुंच कर अफवाह का खंडन किया। एस ओ ने बताया गोकशी नहीं हुई। पुलिस ने अफवाहों से सावधान रहने की अपील की है। इसके साथ ही आज स्याना कोतवाली का चार्ज सुबोध कुमार के निधन के बाद किरणपाल सिंह ने संभाल लिया है।

पहले ही दर्ज हुई है मामले में दो एफआईआर
इस मामले में पुलिस ने दो एफआईआर दर्ज की गई है। घटना में दो एफआईआर दर्ज की गई हैं। पहली गोकशी की और दूसरी हिंसा की। जिसमें 27 लोगों को नामजद किया गया है और 60 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। मेरठ जोन के एडीजी ने बताया कि इस मामले में 4 लोगों को गिरफ्तार और 4 को हिरासत में लिया गया है।

गिरफ्तार लोगों में मुख्य अभियुक्त बजंरग दल का जिला संयोजक योगेश राज भी शामिल है। एक एसआईटी का गठन भी किया गया है जो ये जांच करेगी कि हिंसा क्यों हुई और क्यों पुलिसकर्मियों ने मृत इंस्पेक्टर सुबोध कुमार को अकेला छोड़ दिया था। एफआईआर में कई हिंदू संगठन जैसे बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद के नेताओं के नाम आरोपियों में हैं।

इंस्पेक्टर सुबोध की बहन बोली इकलाख हत्याकांड है भाई की हत्या की वजह
शहीद इंस्पेक्टर सुबोध की बहन ने इकलाख हत्याकांड को भाई की हत्या की वजह बताया है। उन्होंने कहा मेरा भाई इकलाख केस की जांच कर रहा था और और इसी वजह से उसकी हत्या हुई, यह पुलिस द्वारा रचा गया षड्यंत्र है। उन्हें शहीद का दर्जा देना चाहिए और उनकी याद में एक स्मारक बनना चाहिए। हमें पैसे नहीं चाहिए। मुख्यमंत्री सिर्फ गाय गाय गाय कहते रहते हैं।

वहीं यूपी सरकार की तरफ से इस बारे में पहली बार बयान आया है। एबीपी न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि हिंसा में हिंदू संगठनों का नाम लेना जल्दबाजी होगी।

आजम ने दिया ये बयान
बुलंदशहर हिंसा मामले में समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान का भी बयान आया है। उन्होंने कहा कि अगर ये पशु वध है तब तो पुलिस को ये भी जांच करनी चाहिए वहां पशुओं के अवशेष कौन लेकर आया, क्योंकि जिस इलाके में हिंसा हुई वहां अल्पसंख्यक समुदाय के लोग नहीं रहते हैं।

आज सुबह पुलिस लाइन में इंस्पेक्टर सुबोध कुमार को श्रद्धांजलि दी गई। इंस्पेक्टर के बेटे अभिषेक ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि, मेरे पिता चाहते थे कि मैं एक अच्छा नागरिक बनूं जो समाज में धर्म के नाम पर हिंसा नहीं फैलाता। आज मेरे पिता ने हिंदू-मुस्लिम के नाम पर अपनी जान गंवा दी अब कल किसके पिता अपनी जान गंवाएंगे?

क्या हुआ था कल

 
एडीजी कानून-व्यवस्था आनंद कुमार ने सोमवार शाम बताया कि समस्या तब खड़ी हुई जबह सुबह कुछ ग्रामीणों को महाव गांव के बाहर बड़ी तादाद में गोवंश के अवशेष मिले। सूचना मिलने पर पहुंचे हिंदूवादी संगठनों और ग्रामीणों ने अवशेषों को ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर स्याना-बुलंदशहर हाईवे पर चिंगरावठी चौकी के पास जाम लगा दिया। 

प्रदर्शनकारी आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग करने लगे। बुलंदशहर के डीएम अनुज कुमार झा, एसडीएम अविनाश कुमार मौर्य और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर उन्हें बहुत समझाने की कोशिश की।

मृतक इंस्पेक्टर सुबोध कुमार एटा के रहने वाले थे। मेरठ के पल्लवपुरम में भी मृतक इंस्पेक्टर का घर है। इंस्पेक्टर सुबोध सिंह राठौर उम्र (47) गांव तरगवा, थाना जैतरा जिला एटा के रहने वाले थे। मेरठ के मोदीपुरम स्थित मकान को बेचकर कई माह पहले परिवार नोएडा सेक्टर 42 में शिफ्ट हुआ था। मृत इंस्पेक्टर के दो बेटे हैं।।

बवाल को देखते हुए बुलंदशहर में इज्तिमा से लौट रहे हजारों वाहनों को देखते हुए हापुड़ रोड पर फोर्स लगाई गई है। एसपी देहात राजेश कुमार फोर्स के साथ हापुड़ रोड पर तैनात हैं।

एडीजी (कानून व्यवस्था) ने यह कहा


आनंद कुमार के मुताबिक, जब पुलिस ने जाम खुलवाने की कोशिश की तो ग्रामीणों ने जमकर उपद्रव किया। घटना में चिंगरावठी का ग्रामीण सुमित गोली लगने से घायल हो गया, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद हायर सेंटर ले जाते समय रास्ते में उसने दम तोड़ दिया। 

बकौल एडीजी पुलिस ने स्थिति नियंत्रित करने के लिए हवा में फायरिंग की थी। इस पर ग्रामीणों ने तमंचों से गोलियां चलाईं, जिसमें सुबोध कुमार शहीद हो गए। घटना की सूचना पर एडीजी मेरठ जोन प्रशांत कुमार और आइजी रामकुमार भी मौके पर पहुंचे।

सीओ समेत आधा दर्जन पुलिसकर्मी घायल
एडीजी कानून-व्यवस्था ने बताया कि घटना में स्याना के सीओ सत्यप्रकाश शर्मा, खानपुर एसओ, चार सिपाही और एक होमगार्ड भी घायल हो गया। ये पुलिसकर्मी फोर्स आने का इंतजार कर रहे थे। भीड़ गन्ने के खेत में छिपकर पथराव कर रही थी।

बायीं आंख में गोली लगने से हुई सुबोध की मौत
घटना में गंभीर घायल कोतवाल सुबोध कुमार सिंह को औरंगाबाद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया था, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। देर शाम आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी मौत बायीं आंख में गोली लगने से हुई।

एटा के थे कोतवाल

 
कोतवाल सुबोध कुमार मूलरूप से एटा में जैथरा के ग्राम परगंवा के थे। दो साल पहले तक मेरठ में रहते थे। वहां का मकान बेचकर अब नोएडा में रहते थे। उनके दोनों बेटे नोएडा में पढ़ते हैं। पत्नी साथ ही रहती थीं।

इज्तमा के कारण किया जल्द जाम खुलवाने का प्रयास
बुलंदशहर में तब्लीगी इज्तमा चल रहा है। इसमें देश दुनिया के लाखों लोगों ने भाग लिया। पुलिस ने सांप्रदायिक माहौल खराब होने की आशंका के चलते जल्द जाम खुलवाने की कोशिश की। इस चक्कर में पुलिस ने ध्यान नहीं रखा कि लाठीचार्ज के दौरान फोर्स कम थी। ग्रामीण पुलिस पर हावी हो गए।

हिंदूवादी संगठन के लोग और ग्रामीण लगातार आरोपियों को पकड़ने की मांग कर रहे थे। आखिर में प्रशासन ने हालात संभालने के लिए इज्तमा से लौट रहे लोगों का रूट डायवर्ट करा दिया।

कब-कब क्या हुआ

- 9 बजे सुबह ग्रामीणों को महाव के जंगल में गोकशी की सूचना मिली।
- 9.30 बजे सुबह ग्रामीण और हिंदूवादी संगठन मौके पर पहुंचे।
- 10 बजे सुबह एसडीएम और स्याना कोतवाल मौके पर पहुंचे।
- 10.30 बजे सुबह कोतवाल और ग्रामीणों के बीच नोकझोंक हुई।
- 11 बजे सुबह ग्रामीण ट्रैक्टर-ट्राली में अवशेष लेकर चिंगरावठी चौकी रवाना।
- 11.30 बजे सुबह ग्रामीणों और पुलिस के बीच फायरिंग और पथराव शुरू।
- 12.30 बजे दोपहर डीएम-एसएसपी बुलंदशहर से घटनास्थल के लिए निकले।
- 2 बजे दोपहर स्याना कोतवाल की मौत की पुष्टि हुई।
- 3 बजे दोपहर घायल युवक सुमित की मौत की भी पुष्टि हुई।
- 3.30 बजे दोपहर आईजी, एडीजी और कमिशनर मौके पर पहुंचे।
- 4 बजे शाम अधिकारियों ने स्याना कोतवाली में डेरा डाला।
- 6.30 बजे शाम एडीजी-डीएम ने प्रेसवार्ता की।

 


दंगाइयों ने कोतवाल को घेरा - फोटो : अमर उजाला
‘गोकशी की सूचना के बाद कुछ लोगों ने चिंगरावठी चौकी के सामने जाम लगाया था। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने कार्रवाई का भरोसा दिया था, लेकिन असामाजिक तत्वों ने पथराव कर दिया। इसमें स्याना कोतवाल और एक युवक की मौत हो गई। आरोपियों को चिह्नित कर कार्रवाई की जा रही है।’
- अनुज कुमार झा, डीएम, बुलंदशहर

‘गोकशी की निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने के बावजूद कुछ असामाजिक तत्वों ने पथराव कर दिया। एक युवक और स्याना कोतवाल की मौत हो गई। स्थिति काबू में है। जल्द आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।’
- केबी सिंह, एसएसपी, बुलंदशहर

घटना बिष्ट सरकार की असफलता : कांग्रेस
‘सीएम बिष्ट पूरे देश और चुनावी राज्यों में प्रचार कर उपदेश देते घूम रहे हैं। वे पहले अपने घर यूपी की कानून-व्यवस्था ठीक करें। राज्य में कानून-व्यवस्था न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। कांग्रेस घटना में जान-माल की हानि पर संवेदना प्रकट करती है।’ - डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी, कांग्रेस प्रवक्ता

 

‘घटना की मजिस्ट्रेटी जांच की जाएगी। निष्पक्ष जांच के लिए बुलंदशहर के एसडीएम (प्रशासन) को मजिस्ट्रेट नामित किया गया है। मामले की जांच जल्द से जल्द पूरी कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।’
- अनुज कुमार झा, डीएम, बुलंदशहर

सीएम ने एडीजी इंटलीजेंस को मौके पर भेजा, दो दिन में मांगी जांच रिपोर्ट
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्याना की घटना की जांच के लिए एडीजी इंटलीजेंस एसबी शिराडकर को मौके पर भेजा। उनसे दो दिन में जांच रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। मामले की जांच के लिए एसआईटी भी गठित की गई है।

मुख्यमंत्री ने घटना में इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह समेत दो की मौत पर दुख जताते हुए जिले के प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को शांति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। इलाके में पांच कंपनी आरएएफ और छह कंपनी पीएसी के साथ-साथ पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।

सीएम ने की 50 लाख मुआवजे और नौकरी देने की घोषणा
मुख्यमंत्री ने बुलंदशहर की घटना के दिवंगत पुलिस इंस्पेक्टर की पत्नी को 40 लाख रुपये और माता-पिता को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का एलान किया है। साथ ही दिवंगत इंस्पेक्टर के आश्रित परिवार को असाधारण पेंशन और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की भी घोषणा
 की है। 

एडीजी मेरठ जोन प्रशांत कुमार और आईजी रेंज राम कुमार रात में बुलंदशहर में कैंप करेंगे। एडीजी ने बताया की स्याना को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। तीन कंपनी आरएफ और 5 कंपनी पीएससी समेत पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई है। 

भगवान हनुमान के विवाद में कूदते हुए बहराइच से भारतीय जनता पार्टी की सांसद ने मंगलवार को कहा कि हनुमान जी दलित और मनुवादियों के गुलाम थे।

 

बहराइच से भाजपा सांसद सावित्री बाई फूले ने फोन पर बातचीत में कहा, ‘हनुमान दलित थे और मनुवादियों के गुलाम थे। अगर लोग कहते हैं कि भगवान राम हैं और उनका बेड़ा पार कराने का काम हनुमान जी ने किया था। उनमें अगर शक्ति थी तो जिन लोगों ने उनका बेड़ा पार कराने का काम किया, उन्हें बंदर क्यों बना दिया? उनको तो इंसान बनाना चाहिए था लेकिन इंसान ना बनाकर उन्हें बंदर बना दिया गया। उनको पूंछ लगा दी गई, उनके मुंह पर कालिख पोत दी गयी। चूंकि वह दलित थे इसलिये उस समय भी उनका अपमान किया गया।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम तो यह देखते हैं कि अब देश तो ना भगवान के नाम पर चलेगा और ना ही मंदिर के नाम पर। अब देश चलेगा तो भारतीय संविधान के नाम पर। हमारे देश का संविधान धर्मनिरपेक्ष है। उसमें सभी धर्मो की सुरक्षा की गारंटी है। सबको बराबर सम्मान व अधिकार है।

किसी को ठेस पहुंचाने का अधिकार भी किसी को नहीं है। इसीलिये जो भी जिम्मेदार लोग बात करें भारत के संविधान के तहत करें।'

वाशिंगटन। अमेरिका के रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस को पूरा विश्वास है कि रूस से अरबों डॉलर कीमत की एस400 मिसाइल रक्षा प्रणाली की खरीद के फैसले के लिए सीएएटीएसए के तहत भारत पर लंबित प्रतिबंधों के मामले को सुलझाया जा सकता है।यह भी अमेरिका की आधिकारिक यात्रा पर आयीं रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण से सोमवार को पेंटागन के एक संवाददाता ने जब मिसाइल सौदे और अमेरिका से संभावित प्रतिबंधों पर सवाल किया तो, मैटिस ने कहा, ‘‘विश्वास रखें।

हम सब सुलझा लेंगे।’’ भारत को सीएएटीएसए के तहत लगने वाले दंडात्मक प्रतिबंधों से बचने के लिए राष्ट्रपति से विशेष छूट की जरूरत होगी। सीएएटीएसए अमेरिका का एक कानून है जिसके तहत अमेरिका के दुश्मन देशों से किसी भी प्रकार की बड़ी रक्षा खरीद करने वाले देशों पर अमेरिका दंडात्मक प्रतिबंध लगा सकता है। हालांकि इन प्रतिबंधों से छूट देने का अधिकार राष्ट्रपति के पास है।

नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को अपने पहले के आदेश में बदलाव करते हुये 1984 के सिख विरोधी दंगों के 186 मामलों की आगे जांच की निगरानी के लिये गठित विशेष जांच दल के सदस्यों की संख्या दो कर दी। न्यायालय ने पहले तीन सदस्यीय दल गठित किया था परंतु इसके एक सदस्य ने इसका हिस्सा बनने से इंकार कर दिया। न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की पीठ ने यह आदेश पारित किया। इससे पहले, केन्द्र ने पीठ को सूचित किया कि विशेष जांच दल के सदस्य सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी राजदीप सिंह ने निजी कारणों से इस दल का सदस्य होने से इंकार कर दिया है।

इस जांच दल के अन्य सदस्यों में दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एस एन ढींगरा और सेवारत आईपीएस अधिकारी अभिषेक दुलार हैं। शीर्ष अदालत ने इस साल 11 जनवरी को न्यायमूर्ति ढींगरा की अध्यक्षता में विशेष जांच दल गठित किया था जिसे उन 186 मामलों की आगे जांच की निगरानी करनी थी जिन्हें बंद करने के लिये पहले रिपोर्ट दाखिल की गयी थी। न्यायमूर्ति लोकूर की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सोमवार को यह मामला आने पर केन्द्र और याचिकाकर्ता के वकील ने कहा था कि सिंह के स्थान पर किसी अन्य को नियुक्त करने की आवश्यकता नहीं है और दो सदस्यों को अपना काम करते रहने के लिये कहा जाना चाहिए।
 
 
इस पर पीठ ने कहा था कि चूंकि तीन सदस्यीय विशेष जांच दल गठित करने का 11 जनवरी का आदेश तीन न्यायाधीशों की पीठ ने दिया था, इसलिए वे दो न्यायाधीशों की पीठ के रूप में इसमें सुधार नहीं कर सकती। इसके साथ ही पीठ ने इस मामले को मंगलवार के लिये सूचीबद्ध कर दिया था। इस मामले में मंगलवार को संक्षिप्त सुनवाई के दौरान केन्द्र की ओर से अतिरिक्त सालिसीटर जनरल पिंकी आनंद ने कहा, ‘‘दो सदस्यीय विशेष जांच दल रहने दिया जाये और उन्हें आगे बढ़ने देना चाहिए।’’
 
 
पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘पक्षकरों के वकील की इस बात के लिये सहमति है कि सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी राजदीप सिंह द्वारा निजी कारणों से समिति का सदस्य बनने से इंकार करने के तथ्य के मद्देनजर 11 जनवरी के आदेश में सुधार किया जा सकता है।’’ पीठ ने कहा, ‘‘पक्षकारों में सहमति है कि समिति में अब सेवानिवृत्त न्यायाधीश एस एन ढींगरा और सेवारत आईपीएस अधिकारी अभिषेक दुलार को रहना चाहिए। तदनुसार 11 जनवरी के आदेश में सुधार किया जाता है।’’ तत्कालीन प्रधान मंत्री इन्दिरा गांधी की 31 अक्टूबर, 1984 को उनके ही सुरक्षाकर्मियों द्वारा गोली मार कर हत्या किये जाने की घटना के बाद राजधानी में बड़े पैमाने पर सिख विरोधी दंगे हुये थे जिसमें अकेले दिल्ली में 2733 लोग मारे गये थे।

 

नयी दिल्ली। दिल्ली की एक अदालत ने अन्नाद्रमुक के पूर्व नेता टी टी वी दिनाकरण को दो पत्ती वाला चुनाव चिह्न हासिल करने के वास्ते चुनाव आयोग के अधिकारियों को कथित रिश्वत देने के मामले में मंगलवार को आपराधिक षड़यंत्र के आरोप तय किये। दिनाकरण विशेष न्यायाधीश अरुण भारद्धाज की अदालत में पेश हुए और खुद को बेकसूर बताया। अदालत ने उनके खिलाफ मामला चलाने को मंजूरी दी।

अदालत ने दिनाकरण के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी (आपराधिक साजिश रचने), 201 (साक्ष्यों को नष्ट करने) तथा भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत आरोप तय किए। अदालत ने गवाहों के बयान दर्ज कराने के साथ मामले की सुनवाई 17 दिसंबर से शुरू करने के आदेश दिए। इससे पहले अदालत ने 17 नवम्बर को उनके खिलाफ आरोप तय करने के आदेश दिए थे। अन्नाद्रमुक से निष्कासन के बाद दिनाकरण ने अम्मा मक्कल मुनेत्र कझगम नाम से पार्टी का गठन किया था। उन्हें अप्रैल 2017 में गिरफ्तार किया गया था और बाद में जमानत दे दी गई थी।
 
कथित बिचौलिए सुकेश चंद्रशेखर के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत आपराधिक साजिश रचने, साक्ष्यों को नष्ट करने एवं भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत सुनवाई शुरू की गई थी। दिनाकरण के सहयोगी टी पी मल्लिकार्जुन तथा बी कुमार नाम के एक व्यक्ति के खिलाफ भी इन आरोपों पर सुनवाई शुरू की गई। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने 2017 में एक आरोप पत्र दाखिल किया था जिसमें कहा गया था कि चंद्रशेखर ने दिनाकरण तथा अन्य के साथ शशिकला की अगुवाई वाले अन्नाद्रमुक के धड़े के लिए दो पत्ती वाला चुनाव चिह्न हासिल करने के लिहाज से चुनाव अधिकारियों को रिश्वत देने की साजिश रची थी।

बुलंदशहर (उप्र)। बुलंदशहर के स्याना गांव में सोमवार को गौहत्‍या की अफवाह के बाद फैली हिंसा और एक पुलिस अधिकारी के मारे जाने के मामले में अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। बुलंदशहर में स्थिति भी धीरे धीरे सामान्य हो रही है। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) आनंद कुमार ने मंगलवार को संवाददाताओं को बताया कि सोमवार को हुई हिंसा के मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है तथा कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। उन्होंने कहा कि हालात धीरे धीरे सामान्य हो रहे हैं और इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।

एडीजी ने बताया कि दंगा फैलाने और हत्या के मामले में दो दर्जन से अधिक लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इनमें से 27 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी तथा 50 से 60 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। उन्होंने बताया कि वीडियो फुटेज के आधार पर लोगों की पहचान की जा रही है। इस बीच, हिंसा के दौरान मारे गए इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की बहन सुनीता सिंह ने आरोप लगाया है कि उनके भाई की हत्या पुलिस के षडयंत्र से हुई है। सुनीता ने कहा ‘‘मेरा भाई पुलिस के षडयंत्र के कारण मारा गया क्योंकि वह दादरी के गौहत्या मामले की जांच कर रहा था।’’ उन्होंने अपने भाई को शहीद का दर्जा देने और उनका स्मारक बनाने की मांग करते हुए कहा ‘‘मुख्यमंत्री गाय गाय रटते रहते हैं, आखिर वह गौ रक्षा के लिये क्यों नहीं आते हैं?'
मारे गये इंस्पेक्टर के पुत्र अभिषेक ने कहा कि उसके पिता उसे एक अच्छा नागरिक बनाना चाहते थे जो समाज में धर्म के नाम पर हिंसा को बढ़ावा न दे। उसने कहा ‘‘मेरे पिता ने हिंदू मुस्लिम विवाद के चलते अपनी जान गंवा दी। अब किसके पिता की बारी है?’’ अभिषेक ने कहा कि आखिरी बार जब उसने अपने पिता से बात की थी तो उन्होंने उससे पूछा था कि क्या उसने खाना खा लिया, और पढ़ाई की या नहीं ?’’।इससे पहले एडीजी मेरठ जोन प्रशांत कुमार ने बताया कि हिंसा की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। इस जांच में पता लगाया जाएगा कि हिंसा क्यों हुई और क्‍यों पुलिस अधिकारी इंस्‍पेक्‍टर सुबोध कुमार को अकेला छोड़कर भाग गए।
 
आईजी मेरठ रेंज की अध्यक्षता में गठित एसआईटी गोकशी के आरोप और हिंसा दोनों की जांच करेगी। एसआईटी में तीन से चार सदस्य होंगे। बताया जाता है कि एक आरोपी योगेश राज बजरंग दल का जिला संयोजक है। इस बीच, बलिया जिले के बैरिया क्षेत्र के भाजपा विधायक सिंह ने मंगलवार को अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में बुलंदशहर हिंसा तथा पुलिस इंस्पेक्टर की हत्या के आरोप में हिंदूवादी संगठनों, खासकर बजरंग दल को क्लीन चिट देते हुए कहा कि ऐसी सम्भावना है कि पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध सिंह की मौत पुलिस की गोली से ही ही हुई है। उन्होंने दावा किया कि बजरंग दल के लोगों ने पथराव किया था, लेकिन गोली नहीं चलाई थी।

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