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अमेरिका ने भारत पर रूस से एस-400 ट्रायम्फ मिसाइल खरीदने को लेकर कुछ राहत दे ही है। इसके बाद अमेरिकी प्रशासन से अपने रिश्तों को नियंत्रित करने के लिए भारत ने अमेरिका के साथ एक मेगा सुरक्षा सौदा करने के लिए औपचारिक कदम आगे बढ़ा दिए हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक गुरुवार को एनडीए सरकार ने अमेरिकी सरकार को एक पत्र लिखा है जिसमें 13,400 करोड़ रुपये कीमत के 24 एमएच-60 रोमियो हेलीकॉप्टर का सौदा करने की बात कही गई है। ये हेलीकॉप्टर कई भूमिकाओं में काम कर सकते हैं। साथ ही ये तारपीडो और मिसाइल सिस्टम से भी लैस हैं। ऐसा माना जा रहा है कि ये सौदा भारतीय नौसेना को और मजबूत कर सकता है। 

 

2020-2024 तक यह हेलिकॉप्टर भारत को मिल सकते हैं जो भारतीय नौसेना को मजबूत बनाने का कार्य करेंगे। यह फैसला ऐसे समय पर लिया गया है जब चीन के परमाणु और डीजल-इलेक्ट्रिक सबमरीन प्रशांत महासागर के क्षेत्र में नियमित अंतराल पर नजर आते रहते हैं। एमएच-60 चॉपर की यह डील सरकार से सरकार के बीच होगी। इनका निर्माण सिरलोस्की-लॉकहीड मार्टिन कंपनी अमेरिका के सैन्य बिक्री कार्यक्रम के अंतर्गत करती है। माना जा रहा है कि इस साल के अंत तक इस सौदे पर हस्ताक्षर हो जाएंगे। 2007 से भारत ने अमेरिका से होने वाले सैन्य रक्षा सौदे को 17 बिलियन डॉलर तक बढ़ा दिया है।

ग्लोबल टेंडर प्रक्रिया के बजाए फ्लेक्सिबल मैनुफैक्चरिंग सिस्टम (एफएमएस) को आसान और साफ-सुथरा माना जाता है। टेंडर प्रक्रिया में काफी समय लगता है और कई बार यह सौदा भ्रष्टाचार के आरोप लगने की वजह से पटरी से उतर जाता है। भारत ने अपने ज्यादातर हथियार सिस्टम अमेरिका से खरीदे हैं। जिसमें एफएमएस कार्यक्रम के तहत सी-17 ग्लोबमास्टर-3 स्ट्रैटिजिक एयरलिफ्टर्स, सी-130 जे सुपर हरक्युलिस विमान और एम-777 अल्ट्रालाइट होवित्जर शामिल हैं। हेलिकॉप्टर अधिग्रहण करने का यह कार्य लगभग एक दशक से लंबित था। 

हेलिकॉप्टर को खरीदने के लिए भारत सरकार ने अमेरिकी प्रशासन को 13,500 करोड़ रुपये का 'लेटर ऑफ रिक्वेस्ट' भेज दिया है। यदि पिछले एक दशक का आकलन किया जाए तो बीते 3-4 सालों में अमेरिका भारत को रूस से ज्यादा सैन्य उपकरणों की आपूर्ति कर रहा है। भारत इन लड़ाकू हेलिकॉप्टर की डील को जल्द से जल्द करना चाहता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश रचने वाले कुछ माओवादियों के खिलाफ पुणे पुलिस ने बृहस्पतिवार को चार्जशीट दाखिल कर दी। आरोपपत्र के मुताबिक माओवादियों ने मोदी की हत्या के अलावा देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए हथियारों की खरीद की भी साजिश रच रहे थे।

 पुलिस ने चार्जशीट में यह भी दावा किया कि पुणे में पिछले साल दिसंबर में यलगार परिषद सम्मेलन का आयोजन और दलितों के ध्रुवीकरण व उन्हें भड़काने की कोशिश इसी रणनीति का हिस्सा थे। चार्जशीट में कहा गया है कि माओवाद समर्थित सम्मेलन ने 1 जनवरी को भीमा कोरेगांव में हिंसा को बढ़ावा दिया था। 5000 पन्ने से ज्यादा की चार्जशीट में सुरेंद्र गाडलिंग, महेश राउत, शोमा सेन, रोना विल्सन और सुधीर धावले सहित 10 लोगों के नाम हैं। पांच लोगों को 6 जून को गिरफ्तार किया गया था। 


माना जाता है कि इन पांच नामों के अलावा अन्य माओवादी नेता दीपक उफ मिलिंद तेलतुंबाडे, किशन दा उफ प्रशांत बोस, प्रकाश उर्फ रितुपर्णा गोस्वामी, दीपू और मंगलू भूमिगत हैं। चार्जशीट में कहा गया है कि रोना विल्सन और भगोड़ा किशन दा ने प्रधानमंत्री की हत्या की साजिश रची थी।

भोपाल: मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बीजेपी और कांग्रेस लगातार एक दूसरे पर निशाना साध रहे हैं. इसके चलते पूरे मध्य प्रदेश में राजनितिक सरगर्मिया तेज चल रहे है. हालांकि इस प्रचार के दौर में एक बीजेपी के प्रचार के लिए अनोखी तस्वीर इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. हालांकि इस वायरल तस्वीर के चलते बीजेपी की खूब किरकिरी भी हो रही है कि जिस गाय को माता का दर्जा दिया जाता है उसका प्रचार में ऐसा बेहूदा इस्तेमाल किया गया.

सोशल मीडिया पर तस्वीर वायरल, मध्य प्रदेश में एक आदमी ने गाय पर पेंट कर दिया बीजेपी का झंडा

मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार एक उत्साही बीजेपी समर्थक ने बीजेपी का प्रचार करने के लिए एक अनूठा तरीका ऐसे अपनाया कि एक एक गाय पर ही भाजपा का झंडा पेंट कर दिया. इसके बाद जैसे ही यह तस्वीर एक यूजर ने सोशल मीडिया पर डाली तो यह फोटो आग की तरह वायरल हो गई है. बस इसके बाद लोगो ने इस तस्वीर को लेकर बीजेपी को ट्रोल करना शुरू कर दिया और जमकर बीजेपी की आलोचना कर रहे हैं. ऐसे ही एक यूजर ने इस तस्वीर पर टिप्पणी लिखी कि इन लोगों ने चुनाव जीतने के लिए गौमाता पर भी पेंट कर उन पर अत्याचार किया है. वही कुछ लोगों ने इस गाय माता की बेइज्जती करार दिया. इसके साथ ही एक अन्य यूजर ने बीजेपी पर कड़ी टिप्पणी करते हुए लिखा कि गाय को माता माना जाता है, लेकिन भाजपा वोटों के लिए मां को भी परेशान कर रही है, यह ईशनिंदा के समान है. तो कुछ ने कहा कि लो भाई बीजेपी ने अब गाय को भी राजनीति का शिकार बना डाला.

बुधवार-सूर्यषष्ठी महोत्सव-
 हिंदुस्थान के बिहार प्रांत का सर्वाधिक प्रचलित एवं पावन पर्व है सूर्यषष्ठी। प्रमुख रूप से यह पर्व भगवान सूर्य के व्रत का है। इस व्रत में सर्वतोभावेन भगवान सूर्य की पूजा की जाती है। पुराणों तथा धर्मशास्त्रों में विभिन्न रूपों में ईश्वर की उपासना के लिए पृथक दिन एवं तिथियों का निर्धारण किया गया है। अब तो बिहार के अतिरिक्त अन्य क्षेत्रों में भी इसका व्यापक प्रसार हो रहा है। इस व्रत को सभी लोग अत्यंत भक्ति-भाव, श्रद्धा एवं उल्लास से मनाते हैं। सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रत रखनेवाले लोगों के पैर छूने तथा उनके गीले वस्त्र धोनेवालों में प्रतिस्पर्धा की भावना देखी जाती है। इस व्रत का प्रसाद मांग कर खाने का विधान है। सूर्यषष्ठी व्रत के प्रसाद में ऋतु-फल के अतिरिक्त आटे और गुड़ से शुद्ध घी में बने ठेकुआ का होना अनिवार्य है। ठेकुआ पर लकड़ी के सांचे से सूर्य भगवान के रथ का चक्र अंकित करना आवश्यक माना जाता है। षष्ठी के दिन समीप के किसी पवित्र नदी या जलाशय के तट पर मध्यान्ह से ही भीड़ एकत्र होने लगती है। सभी महिलाएं नवीन वस्त्र एवं आभूषण आदि से सुसज्जित होकर फल मिष्ठान तथा पकवानों से भरे हुए नए बांस से निर्मित दौरी अर्थात डलिया लेकर षष्ठीमाता तथा भगवान सूर्य के लोकगीत गाती हुर्इं अपने-अपने घरों से निकलती हैं। डलिया ढोने का भी महत्व है। यह कार्य पति, पुत्र या घर का कोई पुरुष सदस्य करता है। घर से घाट तक लोकगीतों का क्रम चलता ही रहता है और यह तब तक चलता है जब तक भगवान भास्कर पूजा स्वीकार कर अस्ताचल को न चले जाएं। पुन: ब्रह्ममुहूर्त में ही नूतन अर्घ्य सामग्री के साथ सभी व्रती जल में खड़े होकर हाथ जोड़े हुए भगवान भास्कर की उदय होने की प्रतीक्षा करते हैं। जैसे ही क्षितिज पर अरुणिमा दिखाई देती है वैसे ही मंत्रों के साथ भगवान सविता को अर्घ्य समर्पित किए जाते हैं। यह व्रत विसर्जन, ब्राह्मण-दक्षिणा एवं पारणा के पश्चात पूर्ण होता है।
  सूर्यषष्ठी व्रत के अवसर पर सायंकालीन प्रथम अर्घ्य से पूर्व मिट्टी की प्रतिमा बनाकर षष्ठीदेवी का आह्वान एवं पूजन करते हैं। पुन: प्रात: अर्घ्य के पूर्व षष्ठीदेवी का पूजन कर विसर्जन कर देते हैं। मान्यता है कि पंचमी को सायंकाल से ही घर में भगवती षष्ठी का आगमन हो जाता है। इस प्रकार भगवान सूर्य के इस पावन व्रत में शक्ति और ब्रह्म दोनों की उपासना का फल एक साथ प्राप्त होता है। इसीलिए लोक में यह सूर्यषष्ठी के नाम से विख्यात है।
 शुक्रवार-अक्षय नवमी-
 कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि अक्षय नवमी कहलाती है। इस दिन स्नान, पूजन, तर्पण एवं अन्य के दान से अक्षय फल प्राप्त होता है। इसमें पूर्वव्यापिनी तिथि ली जाती है यदि वह दो दिन हो या न हो तो अष्टमी विधा नवमी ग्रहण करनी चाहिए। दशमीविधा नवमी त्याज्य है। आज के दिन प्रात: काल स्नान आदि के अनंतर दाहिने हाथ में जल, अक्षत, पुष्प आदि लेकर व्रत का संकल्प करें। इसके बाद षोडशोपचार संकल्प कर आंवले के वृक्ष के नीचे पूर्वाभिमुख बैठकर आह्वान आदि षोडशोपचार पूजन करके आंवले के वृक्ष की जड़ में दूध की धारा गिराते हुए पितरों को तर्पण करें। इसके बाद आंवले के वृक्ष के नीचे वृक्ष के तने में सूत्रवेस्टन करें। इसके बाद कर्पूर या घृतपूर्ण दीप से आंवले के वृक्ष की आरती करें। इसके अनंतर आंवले के वृक्ष के नीचे ब्राह्मण भोजन भी कराना चाहिए तथा अंत में स्वयं भी आंवले के वृक्ष के सन्निकट बैठकर भोजन करना चाहिए। एक पका हुआ कुष्मांड लेकर उसके अंदर रत्न, स्वर्ण, रजत या रुपया आदि रखकर संकल्प करें। विद्वान तथा सदाचारी ब्राह्मण को तिलक करके दक्षिणा सहित कुष्मांड दे दें। पितरों के शीत निवारण के लिए यथाशक्ति कंबल आदि ऊनी वस्त्र भी पात्र ब्राह्मण को देना चाहिए। यह अक्षयनवमी धात्रीनवमी तथा कुष्मांडनवमी भी कहलाती है। घर में आंवले का वृक्ष न हो तो किसी बगीचे आदि में आंवले के वृक्ष के समीप जाकर पूजा दानादि भी करने की भी परंपरा है अथवा गमले में आंवले का पौधा रोपित कर घर में यह कार्य संपन्न कर लेना चाहिए। शास्त्रसम्मत है कि ऐसा करने से श्रीहरि की कृपा वर्षपर्यंत बनी रहती है।

बॉलीवुड अभिनेत्री अमीषा पटेल ने अपने अभिनय और खूबसूरती के दम पर वर्षों तक लोगों के दिलों पर राज किया है। अब अमीषा ४२ साल की हो चुकी है पर उन्होंने आज भी अपने आप को बेहद फिट रखा हुआ है जिससे उनकी खूबसूरती और भी ज्यादा निखर कर सामने आती है। भले ही अमीषा ने बॉलीवुड से दूरियां बना ली हैं, फिर भी अमिषा के सोशल मीडिया पर लाखों चाहने वाले हैं, जो इन्हें बहुत पसंद करते हैं। अमीषा भी अपने फैंस के लिए अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर करती रहती है और वह अपनी हॉट फोटोज के साथ सुर्खियों में बनी रहती हैं। अब अमीषा फिल्म ‘भैया जी सुपरहिट’ से वापसी करने जा रही है इस फिल्म में अमीषा के साथ सनी दयोल लीड रोल में होंगे और उनकी यह मूवी इसी महीने नवंबर में रिलीज होगी। ९ जून, १९७६ को मुंबई में जन्मीं अमीषा ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत निर्देशक राकेश रोशन की फिल्म ‘कहो ना प्यार हैं’ से की थी, इस फिल्म में उनके साथ अभिनेता ऋतिक रोशन थे। दोनों की बॉलीवुड की पहली फिल्म थी, जिसे लोगों ने काफी पसंद किया था। वह फिल्म सुपरहिट रही। अमीषा एक के बाद एक कई सुपरहिट फिल्में दी जैसे कि ‘गदर एक प्रेम कथा, वादा, हमराज, मंगल पांडे-द राइजिंग’ आदि प्रमुख फिल्में रही हैं।

नाटिंघम। पहले दो टेस्ट में हार झेलने के बाद भारतीय टीम कल से यहां इंग्लैंड के खिलाफ शुरू होने वाले ‘करो या मरो’ के तीसरे टेस्ट में फतह हासिल कर वापसी करने के लिये बेताब होगी जिसके लिये वह टीम में कुछ बदलाव भी करना चाहेगी। भारतीय टीम के लिये ट्रेंट ब्रिज में होने वाला यह टेस्ट उनके लिये सीरीज बचाने का अंतिम मौका होगा। टीम को पहले दो टेस्ट मैचों में एजेस्टन में 31 रन तथा लार्ड्स में पारी व 159 रन से हार का मुंह देखना पड़ा था।
 
प्रतिस्पर्धी क्रिकेट के साढ़े पांच दिन में 0-2 से पिछड़ने के बाद कप्तान विराट कोहली और कोच रवि शास्त्री सही टीम संयोजन बनाना चाहेंगे। इस तरह भारतीय टीम कप्तान कोहली की अगुवाई में 38 मैचों में इतनी ही बार के संयोजन में खेलेगी। सबसे बड़ा बदलाव बीस वर्षीय रिषभ पंत के टेस्ट पदार्पण का होगा जो खराब फार्म में चल रहे दिनेश कार्तिक की जगह लेंगे जिन्होंने शायद लंबे प्रारूप में अपना अंतिम अंतरराष्ट्रीय मैच खेल लिया है।
 
चार पारियों में शून्य, 20, एक और शून्य के स्कोर के अलावा विकेटकीपिंग में भी खराब प्रदर्शन के बाद कार्तिक पंत को कैचिंग अभ्यास कराते दिखे। पंत ने नेट में काफी समय बल्लेबाजी करने में बिताया। पंत ने इंग्लैंड लायंस के खिलाफ दो प्रथम श्रेणी मैचों में तीन अर्धशतक बनाये हैं जिसके बाद उन्होंने टीम में जगह बनायी।
 
रूड़की में जन्में इस युवा को जेम्स एंडरसन, स्टुअर्ट ब्राड, क्रिस वोक्स और सैम करेन जैसे गेंदबाजों का सामना करना होगा जो उनके लिये परेशानियां खड़ी करने के लिये तैयार होंगे जैसा कि वे उनके सीनियरों के लिये कर चुके हैं। पंत के पदार्पण को लेकर जहां इतनी दिलचस्पी बनी हुई है, वहीं प्रशंसक यह भी उम्मीद कर रहे होंगे कि कप्तान कोहली बल्लेबाजी करने के लिये फिट होंगे। पिछले मैच में स्विंग के मुफीद हालात में मिली हार के बाद भारतीय शिविर में मुख्य खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर आकलन जारी रहा।
 
अच्छी खबर यह है कि जसप्रीत बुमरा फिट हो गये हैं तथा रविचंद्रन अश्विन और हार्दिक पंड्या लार्ड्स में बल्लेबाजी करते हुए लगी अपनी हाथ की चोट से पूरी तरह उबर गये हैं तथा कप्तान कोहली भी अपनी पीठ की समस्या से लगभग उबर गये हैं। कोहली की स्थिति में काफी सुधार हुआ है और उन्होंने कहा भी है कि वह जो रूट के साथ टास करने मैदान पर आयेंगे। भारत ने लार्ड्स में दो स्पिनरों को उतारने की गलती स्वीकार की थी लेकिन कोहली और कोच शास्त्री अब उचित टीम संयोजन उतारना चाहेंगे।
 
अंतिम एकादश में कुछ बदलाव जरूरी है क्योंकि कुछ अहम खिलाड़ियों में आत्मविश्वास में कमी दिख रही है। उदाहरण के तौर पर मुरली विजय ने दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड के खिलाफ विदेश में 10 टेस्ट पारियों में केवल 128 रन जुटाये हैं। 12–8 के औसत की अनदेखी नहीं की जा सकती लेकिन उनके कद के बल्लेबाज को देखते हुए टीम प्रबंधन एक और मौका दे सकती है क्योंकि भारत को इस मैच में जीत की जरूरत है। वहीं शिखर धवन ने इस साल दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड के खिलाफ दो टेस्ट में 17–75 औसत रन जुटाये हैं और इंग्लैंड के खिलाफ उनका ओवरआल औसत 20–12 (चार टेस्ट में) है।
 
इन दो मौकों पर उन्होंने क्रमश: 68–93 और 57–29 के स्ट्राइक रेट से रन जुटाये जो फिर से उनके पक्ष में जा सकता है। इससे पूरी उम्मीद है कि भारत तीसरे टेस्ट में तीसरी सलामी जोड़ी -धवन और लोकेश राहुल- को चुन सकता है और मध्यक्रम में कोई बदलाव नहीं किया जायेगा। कोहली फिटनेस हासिल कर रहे हैं और करूण नायर भी अभ्यास सत्र के दौरान सक्रिय नहीं दिखे। बर्मिंघम और लंदन तथा नाटिघंम की तरह टीम प्रबंधन के दिमाग में अतिरिक्त विशेषज्ञ बल्लेबाज को उतारने की बात नहीं है।
 
अगर ऐसा होता है तो उमेश यादव फिर से बाहर रहेंगे क्योंकि टीम प्रबंधन मैदान पर सर्वश्रेष्ठ संयोजन उतारना चाहेगा। ट्रेंट ब्रिज की पिच 2014 (जब दोनों टीमों के बीच पिछली बार यहां भिड़ंत हुई थी) से काफी अलग दिख रही है। भारत ने सपाट पिच पर दो पारियों में 457 और नौ विकेट पर 391 रन पर पारी घोषित की थी जिसमें इंग्लैंड ने एक बार बल्लेबाजी करते हुए 496 रन बनाये थे तथा यह मैच ड्रा रहा था।
 
मौसम की भविष्यवाणी के अनुसार तीसरे टेस्ट के पहले चार दिन में बादल छाये रहेंगे और भारतीय टीम इस बात को ध्यान में रखेगी तो वे निश्चित रूप से एक ही स्पिनर को उतारेंगे। वहीं इंग्लैंड के सामने भी चयन की दुविधा है। बेन स्टोक्स भी पिछले हफ्ते अदालती कार्रवाई के कारण बाहर रहने के बाद लौट गये हैं और उन्होंने गुरूवार को कड़ा बल्लेबाजी और गेंदबाजी अभ्यास किया। टीमें इस प्रकार हैं।
 
भारत : विराट कोहली (कप्तान), शिखर धवन, मुरली विजय, लोकेश राहुल, चेतेश्वर पुजारा, अजिंक्य रहाणे, दिनेश कार्तिक (विकेटकीपर), रिषभ पंत, करूण नायर, हार्दिक पंड्या, आर अश्विन, रविंद्र जडेजा, कुलदीप यादव, इशांत शर्मा, उमेश यादव, शार्दुल ठाकुर, मोहम्मद शमी, जसप्रीत बुमरा। इंग्लैंड: जो रूट (कप्तान), एलिस्टेयर कुक, कीटन जेनिंग्स, जानी बेयरस्टो, जोस बटलर, ओलिवर पोप, मोईन अली, आदिल राशिद, जेमी पोर्टर, सैम कुरेन, जेम्स एंडरसन, स्टुअर्ट ब्राड, क्रिस वोक्स, बेन स्टोक्स। मैच भारतीय समयानुसार दोपहर साढ़े तीन बजे शुरू होगा। 
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए घोषित नामांकन की अंतिम तिथियों में जिस प्रकार वरिष्ठ नेताओं ने अपने दल बदले हैं उससे उनकी पार्टी निष्ठा पर सीधे-सीधे प्रश्नचिह्न लगते हैं। विधायक पद की प्रत्याशी में सैंतीस वर्ष तक एक ही दल में रहते हुए विधायक-सांसद मंत्री रहे एक वृद्ध नेता अपनी पुरानी पार्टी छोड़कर विधायक टिकट के लिए अपनी धुरविरोधी रही दूसरी नई पार्टी में चले गए। जिसे कल तक गलत प्रचारित करते थे आज उसी का दामन थाम बैठे हैं। इसी प्रकार एक अन्य नेता अपनी पुरानी पार्टी से बगावत कर अपने पुत्र को एक अन्य पार्टी से टिकट दिला कर उसके समर्थन में चुनाव प्रचार करने का डंका पीट रहे हैं। यह केवल इन दो वरिष्ठ नेताओं के दल बदलने, बगावत करने की बात नहीं है। वास्तव में यह हमारे लोकतंत्र को चलाने वाली उस सत्ता लोलुप मानसिकता की बड़ी साक्षी है जो स्वार्थ सिद्धि के लिए, सत्ता सुख भोगने के लिए किसी भी सीमा तक गिरने को तैयार है। ‘प्यार और युद्ध में सब जायज है’ का नारा उछालती हुई नेतृत्व की यह मूल्यविहीन छवि अपने सिवाय किसी का भला नहीं कर सकती। जो अपने दल का नहीं हुआ वह देश और समाज का क्या होगा ? ऐसा नैतिक मूल्यविहीन नेतृत्व जनता पर क्या प्रभाव डालेगा ? यह विचारणीय है।
 
आम चुनावों में टिकट के लिए अपनी पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में जाना कोई नई बात नहीं है। हमारे लोकतंत्र में यह खेल वर्षों से चला आ रहा है और ऐसे चुनावी दांव-पेंच का नुकसान देश लगातार भुगत रहा है। 1980 में जनता पार्टी की सरकार का गिरना और देश पर मध्यावधि चुनाव का व्यय भार थोपा जाना इसी कूट-राजनीति का दुष्परिणाम था। विधायकों-सांसदों की खरीद-फरोख्त का यह सिलसिला बहुमत का आंकड़ा जुटाने के लिए मंत्री आदि महत्वपूर्ण पदों का प्रलोभन, काले धन का उपयोग, बाहुबल और हिंसा का प्रयोग, वोट पाने के लिए साड़ियाँ, शराब, नकद राशि आदि का अवैध वितरण हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के ऐसे बदनुमा दाग हैं जो चुनाव के उपरांत चयनित सरकार में जनहित के कार्यों की राह में रोड़े अटकाते हैं और व्यवस्था में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते हैं।
 लोकतंत्र में प्रत्येक राजनीतिक दल लोकहित के लिए अपने कुछ सिद्धांत तय करता है। अपनी नीतियां घोषित करता है और इन्हीं सिद्धांतों-नीतियों से प्रेरित और प्रभावित होकर समाज का नेतृत्व करने के लिए लोग राजनीतिक दलों के सदस्य बनते हैं। उसके माध्यम से सत्ता तक पहुंचने का रास्ता बनाते हैं। इसमें कुछ भी अनुचित नहीं है। लोगों की मान्यताएं और विचार भिन्न होते हैं। यही भिन्नता दलगत विविधता का आधार बनती है। दल विशेष के लोग अपने दल की नीतियों के प्रति निष्ठावान रहते हैं और उसी की जीत हार के साथ सत्ता में पक्ष-विपक्ष की भूमिका निभाते हैं। इस प्रकार दलगत निष्ठा लोकतंत्र की प्रक्रिया में आवश्यक तत्व है किन्तु सत्ता सुख भोगने की इच्छा से निष्ठा का क्रय-विक्रय लोकतंत्र के लिए शुभ नहीं कहा जा सकता।
 मानव जीवन परिवर्तनशील है। मनुष्य अपने अनुभवों, परिस्थितियों आदि में परिवर्तन के कारण अपनी विचारधारा में परिवर्तन करने और अपना दल बदलने के लिए भी स्वतंत्र है। वह किसी विशेष विचारधारा अथवा विशिष्ट दल का बंधुआ नहीं कहा जा सकता किन्तु उसका यह परिवर्तन तभी स्वीकार योग्य हो सकता है जब वह कार्य, सिद्धांत, नीति अथवा लोक मंगलकारी विचार के आलोक में औचित्यपूर्ण हो। केवल अपने संबंधित दल द्वारा टिकट न दिए जाने पर अपने निजी लाभ-लोभ के लिए दल-परिवर्तन कदापि उचित नहीं कहा जा सकता। यह दुर्भाग्यपूर्ण कृत्य महान लोकतांत्रिक परंपराओं की अवमानना है, उपेक्षा है, उसका मजाक है। विचारणीय है कि टिकट कटने की स्थिति में पार्टी छोड़कर जाने की धमकी देना, पार्टी को कमजोर बनाने का प्रयत्न करना ब्लैकमेलिंग की श्रेणी के अपराध हैं। तथापि चुनावी टिकट वितरण के समय हमारे रहनुमा, हमारे समाज के कर्णधार एवं तथाकथित जिम्मेदार समझे जाने वाले लोग इस प्रकार के कार्य करते हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।
 
लोकतांत्रिक-व्यवस्था में नेतृत्व जनता की सेवा का कार्य है। यह निस्वार्थ भाव से समाज की आवश्यकताओं के अनुरूप उसे दिशा देने का कार्य है और यह कार्य विपक्ष में रहकर भी भलीभांति किया जा सकता है। सदन में सत्तापक्ष और मजबूत विपक्ष- दोनों का होना आवश्यक है किंतु हमारे देश में सब के सब सत्ता हथियाने की होड़ में ही लगे रहते हैं। सबको सत्ता-पक्ष वाली कुर्सी ही चाहिए। विपक्ष में बैठने को कोई तैयार नहीं दिखता। आखिर क्यों ? इस पर विचार होना चाहिए।
 
यह कड़वा सच है कि हमारे देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था की आड़ लेकर सामन्ती मानसिकता ने गहरी जड़ें जमाई हैं। गरीब जनता के धन पर वैभव-विलास की जिंदगी जीना, विदेश यात्राएं करना, बिना काम किए ही वेतन भत्ते पा जाना, पेंशन लेना और अपने परिवार तथा अपनी पसंद के लोगों को लाभान्वित करना हमारे लोकतंत्र के बहुत से तथाकथित सेवकों का स्वभाव रहा है और इन्हीं दुरभिलाषाओं की पूर्ति के लिए सत्ता तक पहुंचना उनकी मजबूरी है। इसी के लिए वे तरह-तरह के हथकंडे अपनाते हैं, दल बदलते हैं। मजे की बात तो यह भी है कि विरोधी पार्टी से आने वालों को नई पार्टी भी हाथों-हाथ लेती है। अपने कार्यकर्ताओं को छोड़कर नये आने वालों को टिकट दे देती है। इन दोषों के कारण आज हमारा लोकतंत्र दलगत राजनीति की ऐसी दलदल बन चुका है जिसमें नैतिक मूल्य, इमानदारी, सेवा भावना और लोकहित हाशिए पर दिखाई देते हैं जबकि भ्रष्टाचार, परस्पर कीचड़ उछालना, अपनों को लाभान्वित करने का अन्याय पूर्ण पक्षपात और समाज को असंख्य खाँचों में बांटकर वोट हथियाने का कुचक्र केंद्र में है। दल के प्रति समर्पित भाव से कार्य करने वाले कार्यकर्ता उपेक्षित हैं और अकस्मात टिकट के लिए पार्टी में आने वाले पैराशूटर नव आगंतुक पार्टी का टिकट पा रहे हैं। जब राजनीतिक दलों और हमारे नेताओं में अनुशासन नहीं है तो जनसाधारण से किस अनुशासन की उम्मीद की जा सकती है। अनेक बार सत्ता का स्वाद चख लेने वाले, कब्र में पैर लटकाए नेता भी जब सत्ता में पद पाने की प्रत्याशा में सारी मर्यादाएं तोड़ रहे हैं तब जनता से किसी नैतिकता की अपेक्षा करना दिवास्वप्न ही है।
 लोकतंत्र की शुचिता और गुणात्मकता बनाए रखने के लिए अब यह आवश्यक हो गया है कि राजनीतिक दलों में टिकट वितरण के लिए भी कुछ नियम, नीतिनिर्देशक-सिद्धांत वैधानिक स्तर पर निर्धारित किए जाएं और कड़ाई से उनका पालन सुनिश्चित हो। अन्यथा सत्ता के लिए निष्ठा बेचने का यह खेल लोकतंत्र के लिए हानिकारक सिद्ध होगा।
 
-सुयश मिश्रा
दुबई। श्रीलंका के पूर्व आलराउंडर दिलहारा लोकुहेतिगे को मंगलवार को आईसीसी ने निलंबित कर दिया। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने पिछले साल यूएई में टी10 लीग में मैच फिक्सिंग का उन्हें आरोपी बनाया है। आईसीसी ने कहा कि उन्होंने एमिरेट्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) की तरफ से लोकुहेतिगे के खिलाफ आरोप तय किए हैं क्योंकि इस पूर्व क्रिकेटर को ईसीबी की आचार संहिता के लिए भ्रष्टाचार रोधी अधिकारी नियुक्त किया था। श्रीलंका की ओर से नौ एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय और दो टी20 खेलने वाले लोकुहेतिगे पर ईसीबी की भ्रष्टाचार रोधी संहिता के तहत तीन आरोप तय किए गए हैं।
 
लोकुहेतिगे ने इस टी10 प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लिया था और उनके पास इन आरोपों का जवाब देने के लिए 14 दिन का समय है। श्रीलंका क्रिकेट अतीत में भ्रष्टचार के कई मामलों का सामना करना पड़ा है। आईसीसी ने श्रीलंका के पूर्व तेज गेंदबाज नुवान जोयसा पर भी मैच फिक्सिंग का आरोप लगाया था और 31 अक्तूबर को उन्हें अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया था। सनथ जयसूर्या पर भी आईसीसी की भ्रष्टाचार रोधी संहिता के तहत दो आरोप लगे हैं जिससे श्रीलंका के इस पूर्व कप्तान ने इनकार किया है।
केन्द्रीय मंत्री अनंत कुमार का अचानक अनन्त की यात्रा पर प्रस्थान करना न केवल भाजपा बल्कि भारतीय राजनीति के लिए दुखद एवं गहरा आघात है। उनका असमय देह से विदेह हो जाना सभी के लिए संसार की क्षणभंगुरता, नश्वरता, अनित्यता, अशाश्वता का बोधपाठ है। वे कुछ समय से कैंसर से पीड़ित थे। 12 नवम्बर 2018 को रात 2 बजे अचानक उनकी स्थिति बिगड़ी और उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनका निधन एक युग की समाप्ति है। भाजपा के लिये एक बड़ा आघात है, अपूरणीय क्षति है। आज भाजपा जिस मुकाम पर है, उसे इस मुकाम पर पहुंचाने में जिन लोगों का योगदान है, उनमें अनंत कुमार अग्रणी हैं।
 
अनंत कुमार भारतीय राजनीति के जुझारू एवं जीवट वाले नेता, सामाजिक कार्यकर्ता, व्यापारी और एक सफल उद्योगपति थे। वे 11वीं, 12वीं, 13वीं और 14वीं लोकसभा चुनाव में लगातार चार बार लोकसभा चुनावों के लिए चुने गए। वे कर्नाटक में राम-जन्मभूमि के लिए अपनी आवाज उठाने और उसके हक में लड़ने वाले विशिष्ट नेताओं में से एक थे। वे भाजपा संगठन के लिए एक धरोहर थे। वर्ष 1998 में, अनंत कुमार को अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में नागरिक उड्यन मंत्री के रूप में शामिल किया गया था। उस मंत्रिमंडल में सबसे कम उम्र के मंत्री बने अनंत कुमार ने कुशलतापूर्वक पर्यटन, खेल, युवा मामलों और संस्कृति, शहरी विकास एवं गरीबी उन्मूलन जैसे कई मंत्रालयों को संभाला। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कई नए अभिनव दृष्टिकोण, राजनैतिक सोच और कई योजनाओं की शुरुआत की तथा विभिन्न विकास परियोजनाओं के माध्यम से लाखों लोगों के जीवन में सुधार किया और उनमें जीवन में आशा का संचार किया। वर्तमान में वे नरेन्द्र मोदी सरकार में एक सशक्त एवं कद्दावर मंत्री थे। भाजपा में वे मूल्यों की राजनीति करने वाले नेता, कुशल प्रशासक और योजनाकार थे।
 
अनंत कुमार का निधन एक युवा सोच की राजनीति का अंत है। वे सिद्धांतों एवं आदर्शों पर जीने वाले व्यक्तियों की श्रृंखला के प्रतीक थे। उनके निधन को राजनैतिक जीवन में शुद्धता की, मूल्यों की, राजनीति की, आदर्श के सामने राजसत्ता को छोटा गिनने की या सिद्धांतों पर अडिग रहकर न झुकने, न समझौता करने की समाप्ति समझा जा सकता है। हो सकता है ऐसे कई व्यक्ति अभी भी विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे हों। पर ऐसे व्यक्ति जब भी रोशनी में आते हैं तो जगजाहिर है- शोर उठता है। अनंत कुमार ने तीन दशक तक सक्रिय राजनीति की, अनेक पदों पर रहे, पर वे सदा दूसरों से भिन्न रहे। घाल-मेल से दूर। भ्रष्ट राजनीति में बेदाग। विचारों में निडर। टूटते मूल्यों में अडिग। घेरे तोड़कर निकलती भीड़ में मर्यादित। उनके जीवन से जुड़ी विधायक धारणा और यथार्थपरक सोच ऐसे शक्तिशाली हथियार थे जिसका वार कभी खाली नहीं गया।
 
22 जुलाई, 1959 को बेंगलुरु में एच.एन. नारायण शास्त्री और गिरिजा शास्त्री के घर जन्मे अनंत कुमार ने कर्नाटक विश्वविद्यालय से जुड़े केएस आर्ट्स कॉलेज, हुबली से कला संकाय (बीए) में स्नातक की उपाधि प्राप्त की और बाद में कर्नाटक विश्वविद्यालय से संबद्ध लॉ कॉलेज जेएसएस से स्नातक कानून (एलएलबी) की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने 15 फरवरी 1989 में श्रीमती तेजस्विनी से शादी की और इनकी दो बेटियाँ हैं। उन्होंने भाजपा को कर्नाटक और खासतौर पर बेंगलुरु और आस-पास के क्षेत्रों में मजबूत करने के लिए कठोर परिश्रम किया। वह अपने क्षेत्र की जनता के लिए हमेशा सुलभ रहते थे। वे युवावस्था में ही सार्वजनिक जीवन में आये और काफी लगन और सेवा भाव से समाज की सेवा की। भारतीय राजनीति की वास्तविकता है कि इसमें आने वाले लोग घुमावदार रास्ते से लोगों के जीवन में आते हैं वरना आसान रास्ता है- दिल तक पहुंचने का। हां, पर उस रास्ते पर नंगे पांव चलना पड़ता है। अनंत कुमार इसी तरह नंगे पांव चलने वाले एवं लोगों के दिलों पर राज करने वाले राजनेता थे, उनके दिलो-दिमाग में कर्नाटक एवं वहां की जनता हर समय बसी रहती थी। काश ! सत्ता के मद, करप्शन के कद, व अहंकार के जद्द में जकड़े-अकड़े रहने वाले राजनेता उनसे एवं उनके निधन से बोधपाठ लें। निराशा, अकर्मण्यता, असफलता और उदासीनता के अंधकार को उन्होंने अपने आत्मविश्वास और जीवन के आशा भरे दीपों से पराजित किया।
 
अनंत कुमार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से प्रभावित होने के कारण, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्य बने। वर्ष 1975-77 के दौरान, ये भारत में आपातकाल नियमों के विरुद्ध जे.पी. आंदोलन में भाग लेने के कारण लगभग 40 दिनों तक जेल में रहे थे। उन्हें एबीवीपी के राज्य सचिव के रूप में निर्वाचित किया गया और बाद में 1985 में उन्हें राष्ट्रीय सचिव बनाया गया। बाद में वे भाजपा में शामिल हो गए और उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा के राज्य अध्यक्ष के रूप में नामित किया गया। उसके बाद 1996 में वे पार्टी के राष्ट्रीय सचिव बनाये गये। जनवरी 1998 के आम चुनाव से पहले वे एक स्वतंत्र वेबसाइट की मेजबानी करने वाले पहले भारतीय राजनेता बने, वे 2003 में बीजेपी की कर्नाटक राज्य इकाई के अध्यक्ष बने और राज्य इकाई का नेतृत्व किया जो कि विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बन गयी और 2004 में कर्नाटक में सबसे ज्यादा लोकसभा सीटें जीतीं। 2004 में उन्हें एमपी, बिहार, छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों में पार्टी को मजबूती देने में योगदान देने के लिये भाजपा का राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किए गया।
 
अनंत कुमार भाजपा के एक रत्न थे। संस्कृत साहित्य में एक प्रश्न आता है- रत्नों का ज्ञान और उनकी परख किसे होती है ? उत्तर दिया गया- इसका पता शास्त्र से नहीं होगा। शास्त्र में तो लक्षण बताए गए कि ऐसा हो तो समझा जाए कि हीरा है, पन्ना है या मोती, माणिक है। लेकिन वह सच्चा और खरा हीरा है या खोटा, यह शास्त्र नहीं बताएगा। यह तो बताएगी हमारी दृष्टि और हमारा अभ्यास। इस माने में अनंत कुमार का सम्पूर्ण जीवन अभ्यास की प्रयोगशाला थी। उनके मन में यह बात घर कर गयी थी कि अभ्यास, प्रयोग एवं संवेदना के बिना किसी भी काम में सफलता नहीं मिलेगी। उन्होंने अभ्यास किया, दृष्टि साफ होती गयी और विवेक जाग गया। उन्होंने हमेशा अच्छे मकसद के लिए काम किया, तारीफ पाने के लिए नहीं। खुद को जाहिर करने के लिए जीवन जीया, दूसरों को खुश करने के लिए नहीं। उनके जीवन की कोशिश रही कि लोग उनके होने को महसूस ना करें। बल्कि उन्होंने काम इस तरह किया कि लोग तब याद करें, जब वे उनके बीच में ना हों। इस तरह उन्होंने अपने जीवन को एक नया आयाम दिया और जनता के दिलों पर छाये रहे।
 
अनंत कुमार एक ऐसा आदर्श राजनीतिक व्यक्तित्व हैं जिन्हें सेवा और सुधारवाद का अक्षय कोश कहा जा सकता है। उनका आम व्यक्ति से सीधा संपर्क रहा। यही कारण है कि आपके जीवन की दिशाएं विविध एवं बहुआयामी रही हैं। आपके जीवन की धारा एक दिशा में प्रवाहित नहीं हुई, बल्कि जीवन की विविध दिशाओं का स्पर्श किया। यही कारण है कि कोई भी महत्त्वपूर्ण क्षेत्र आपके जीवन से अछूता रहा हो, संभव नहीं लगता। आपके जीवन की खिड़कियाँ राष्ट्र एवं समाज को नई दृष्टि देने के लिए सदैव खुली रहीं। इन्हीं खुली खिड़कियों से आती ताजी हवा के झोंकों का अहसास भारत की जनता सुदीर्घ काल तक करती रहेगी। 
इस शताब्दी के भारत के ‘राजनीति के महान् सपूतों’ की सूची में कुछ नाम हैं जो अंगुलियों पर गिने जा सकते हैं। अनंत कुमार का नाम प्रथम पंक्ति में होगा। अनंत कुमार को अलविदा नहीं कहा जा सकता, उन्हें खुदा हाफिज़ भी नहीं कहा जा सकता, उन्हें श्रद्धांजलि भी नहीं दी जा सकती। ऐसे व्यक्ति मरते नहीं। वे हमें अनेक मोड़ों पर राजनीति में नैतिकता का संदेश देते रहेंगे कि घाल-मेल से अलग रहकर भी जीवन जिया जा सकता है। निडरता से, शुद्धता से, स्वाभिमान से।
 
-ललित गर्ग
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का बहुत सम्मान करते हैं और जल्द ही उनसे बातचीत करेंगे। ट्रम्प और मोदी 30 नवम्बर और एक दिसंबर को अर्जेंटीना में जी-20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे, जहां इन दोनों के बीच बैठक होने की संभावना है। व्हाइट हाउस ने हालांकि इस संबंध में अब तक कोई घोषणा नहीं की है। ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में दिवाली के जश्न के दौरान अमेरिका में भारत के राजदूत नवतेज सिंह सरना से कहा, ‘‘मैं जल्द उनसे बातचीत करूंगा। शुक्रिया।’’ सरना ने ट्रम्प की बातों का जवाब देते हुए कहा, ‘‘वह भी आपसे मिलना चाहते हैं।' व्हाइट हाउस के दिवाली के जश्न में विशेष रूप से आमंत्रित सरना से ट्रम्प ने कहा कि उन्हें भारत से लगाव है।
 
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘हमें आपका देश पसंद है। जैसा कि आप जानते हैं प्रधानमंत्री मोदी के लिये मेरे मन में बेहद सम्मान है। कृपया मेरी तरफ से उन्हें हार्दिक शुभकामनाएं दीजिये।’’ ट्रम्प और मोदी के बीच काफी अच्छी दोस्ती भी है। ट्रम्प ने राष्ट्रपति चुनाव के लिये प्रचार के दौरान देश में (भारत में) आर्थिक और नौकरशाही में सुधारों के लिए मोदी की प्रशंसा भी की थी। अमेरिकी राष्ट्रपति ने पिछले साल जून में व्हाइट हाउस में मोदी की मेजबानी भी की थी।

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