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जम्मू-कश्मीर के लिए भाजपा ने नयी रणनीति बनाई है और इसके तहत राज्य सरकार के पूर्व मंत्री सज्जाद लोन को राज्य विधानसभा के आगामी चुनावों में मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में पेश किया जायेगा। सज्जाद लोन पूर्व अलगाववादी हैं और अलगाववादी नेता अब्दुल गनी लोन के बेटे हैं। लोन की 2002 में हत्या कर दी गयी थी। सज्जाद लोन की पार्टी पीपल्स कांफ्रेंस ने पिछले विधानसभा चुनावों में भाग लिया था और उसके दो विधायक जीते थे।

माना जा रहा है कि चुनाव आयोग अगले माह जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनावों की घोषणा कर सकता है और राज्य में मार्च या अप्रैल में चुनाव कराये जा सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो यह लगभग लोकसभा चुनावों के साथ ही होगा। लोकसभा चुनाव भी अगले वर्ष अप्रैल-मई के बीच ही कराये जाने हैं।
 
सज्जाद लोन ने कैसे मारी बाजी ?
 
सज्जाद लोन के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अच्छे संबंध हैं और इसी की बदौलत वह पहले मुफ्ती मोहम्मद सईद और उसके बाद महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व वाली सरकार में कैबिनेट मंत्री पद हासिल करने में सफल रहे थे। विधानसभा चुनावों में जब किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला था और सरकार बनाने के लिए पीडीपी तथा भाजपा साथ आये थे तो पीपुल्स कांफ्रेंस भी गठबंधन के साथ जुड़ी थी। उस समय मुफ्ती ने सज्जाद लोन को मंत्री पद देने से इसलिए इंकार कर दिया था क्योंकि गठबंधन सरकार में मंत्री पद पीडीपी और भाजपा के बीच ही बंटने थे। लेकिन भाजपा ने अपने कोटे का एक मंत्री पद लोन के लिए छोड़ दिया था। पार्टी का प्रयास था कि अलगाववादी मुख्यधारा से जुड़ें ताकि कश्मीर में शांति कायम हो सके।
 
अभी जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक स्थिति क्या है ?
 
इस समय जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू है और विधानसभा का अंक गणित देखें तो कोई भी दल या गठबंधन सरकार बनाने को राजी नहीं है। हालांकि भाजपा ने जब महबूबा मुफ्ती सरकार से समर्थन वापस लिया तो यह कहा गया था कि पीडीपी के बागी विधायकों का समर्थन लेकर वह सरकार का गठन कर सकती है लेकिन पार्टी ने ऐसी किसी संभावना से इंकार कर दिया था। राज्य के राज्यपाल सत्यपाल मलिक भी चाहते हैं कि राज्य में जल्द चुनाव कराये जाएं ताकि जनता को एक लोकप्रिय सरकार मिल सके। हाल ही में जम्मू-कश्मीर में स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव कराये गये जिनमें नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी को छोड़ बाकी दलों ने भाग लिया और जम्मू-कश्मीर के लगभग सभी क्षेत्रों में भाजपा का अभूतपूर्व प्रदर्शन रहा। अब भाजपा राज्य में अपनी सरकार चाहती है और सज्जाद लोन को इसका नेतृत्व देना चाहती है। राज्य में 19 दिसंबर को राज्यपाल शासन खत्म हो रहा है और उसके बाद राष्ट्रपति शासन लगाना होगा क्योंकि जम्मू-कश्मीर का संविधान राज्यपाल शासन के नवीनीकरण की इजाजत नहीं देता
 
सज्जाद लोन देंगे उमर और महबूबा को कड़ी टक्कर
 
सज्जाद लोन यदि भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी बनते हैं तो नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी हो सकती है क्योंकि इन दोनों को राज्य की जनता मुख्यमंत्री के रूप में देख चुकी है जबकि लोन भी युवा चेहरा हैं और मंत्री पद पर वह अपनी छाप छोड़ने में सफल रहे हैं। सज्जाद लोन की साफ छवि और उनके पिता के प्रभाव का उन्हें चुनावों में फायदा हो सकता है। भाजपा इस बात को जानती है कि भले जम्मू और लद्दाख क्षेत्र में उसके पास कई प्रभावी नेता हों लेकिन घाटी में एक उसके पास कोई जाना पहचाना और बड़ा चेहरा नहीं है इसलिए वह लोन पर दांव लगाना चाहती है।
 
चल रहे हैं प्रयास
 
सूत्रों के मुताबिक, इस बारे में भाजपा महासचिव राम माधव की सज्जाद लोन से कई दौर की बात भी हो चुकी है। राम माधव का इन दिनों कश्मीर का दौरा बढ़ गया है। वह हाल ही में एक दावत के दौरान सज्जाद लोन से तब मिले जब श्रीनगर के मेयर पद पर पीपुल्स कांफ्रेंस का उम्मीदवार चुना गया।
 
तमिलनाडु में भी खुद को मजबूत कर रही है भाजपा
 
इसके अलावा भाजपा ने तमिलनाडु में भी खुद को मजबूत करने के प्रयास शुरू कर दिये हैं और आजकल सुपरस्टार रजनीकांत जिस तरह भाजपा से करीबी के संकेत दे रहे हैं उससे लगता है कि रजनीकांत की पार्टी आगामी लोकसभा चुनावों में भाजपा का साथ दे सकती है। इस बात के भी संकेत हैं कि रजनीकांत भाजपा के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ सकते हैं।
 
हाल ही में रजनीकांत ने भाजपा के खिलाफ विपक्षी दलों के गठबंधन को लेकर बड़ा बयान दिया है। भाजपा के खिलाफ विपक्षी दलों के गठबंधन पर प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त करते हुए उन्‍होंने कहा कि अगर किसी एक के खिलाफ 10 एकजुट हो जाएं तो समझा जा सकता है कि कौन ताकतवर है ? रजनीकांत ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, 'अगर विपक्षी पार्टियां भाजपा को खतनाक पार्टी के रूप में देखती हैं तो यह उनके लिए ऐसी है। यह लोगों पर निर्भर करता है कि वे क्‍या फैसला लेते हैं।' उन्‍होंने साथ ही कहा, 'किसी एक व्‍यक्ति के विरुद्ध 10 लोग लामबंद हो जाएं तो कौन ताकतवर हुआ, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।' उनके इस बयान को सीधे तौर पर भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है।
 
नयी दिल्ली। भाजपा ने मंगलवार को आरोप लगाया कि दसॉल्ट एविएशन के सीईओ एरिक ट्रैपियर के राफेल सौदे पर किये गये दावों ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के झूठ को उजागर कर दिया है जिनका व्यवहार भारत की सुरक्षा जरूरतों के प्रति गैर-जिम्मेदाराना होता जा रहा है। केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि ट्रैपियर के साक्षात्कार ने कंपनी की ऑफसेट प्रतिबद्धताओं के बारे में फैल रहे झूठ को उजागर कर दिया है। उन्होंने कहा कि सीईओ ने साफ कर दिया है कि अनिल अंबानी की रिलायंस और 30 अन्य कंपनियों के साथ इस तरह की प्रतिबद्धता केवल दसॉल्ट की होगी और भारत सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं है। गांधी राफेल सौदे में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते आ रहे हैं और उन्होंने दावा किया है कि अंबानी को लाभ पहुंचाने के लिए हेराफेरी की गयी। सरकार और रिलायंस इन आरोपों को खारिज कर चुके हैं। प्रसाद ने कहा, ‘‘साक्षात्कार ने कांग्रेस और उसके अध्यक्ष के सारे झूठ का पर्दाफाश कर दिया है।’’
 
उन्होंने कहा कि राफेल लड़ाकू विमान को भारतीय वायुसेना की सुरक्षा जरूरतों में सहयोग के लिए शामिल किया गया है। उन्होंने गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में उनका व्यवहार देश की सुरक्षा जरूरतों के हिसाब से गैर-जिम्मेदाराना और लापरवाही वाला होता जा रहा है। हैरानी की बात नहीं है कि राहुल गांधी और पाकिस्तान में उनके दोस्तों की भाषा एक जैसी है।’’ भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने जबलपुर में संवाददाताओं से कहा कि राहुल गांधी का झूठ एक और बार पकड़ा गया है। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘झूठ, कपट और षड्यंत्र की राहुल गांधी की राजनीति एक बार फिर सामने आ गयी है। वह इस हद तक बेशर्म हो गये हैं जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती।’’ ट्रैपियर ने एक मीडिया इंटरव्यू में सौदे का बचाव करते हुए दावा किया था कि 58 हजार करोड़ रुपये के सौदे में कोई गड़बड़ी नहीं की गयी और यह साफ-सुथरा करार है। उन्होंने दावा किया कि उनकी कंपनी ने ऑफसेट साझेदार के रूप में रिलायंस को चुना।कांग्रेस ने ट्रैपियर के दावों को खारिज करते हुए उन्हें ‘सोचा-समझा झूठ’ करार दिया।
नयी दिल्ली। प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की जयंती की पूर्व संध्या पर कांग्रेस की शीर्ष नेता सोनिया गांधी ने मंगलवार को नरेंद्र मोदी सरकार पर परोक्ष हमला बोला और आरोप लगाया कि मौजूदा समय में सरकार में बैठे लोगों द्वारा नेहरू की लोकतांत्रिक मूल्यों के सम्मान वाली विरासत को कमतर करने का प्रयास किया जा रहा है। आधुनिक भारत के निर्माण में देश के प्रथम प्रधानमंत्री के योगदान को याद करते हुए सोनिया ने यह भी कहा कि नेहरू ने जिन लोकतांत्रिक मूल्यों को आगे बढ़ाया, आज उनको चुनौती दी जा रही है। वह कांग्रेस सांसद शशि थरूर की पुस्तक "नेहरू: द इन्वेंशन ऑफ इंडिया' पुनर्विमोचन के अवसर पर बोल रही थीं। सोनिया ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री के तौर पर पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लोकतंत्र को मजबूत किया और भारत की राजनीतिक व्यवस्था को समृद्ध बनाने का भी काम किया। आज हम इन्हीं मूल्यों पर गर्व करते हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘नेहरूवाद के मुख्य स्तंभों के तौर पर शशि थरूर (कांग्रेस सांसद) ने कुछ मूल्यों का उल्लेख किया है। वो मूल्य हैं- लोकतांत्रिक संस्थाओं का निर्माण, भारतीय धर्मनिरपेक्षता, समाजवादी आर्थिक व्यवस्था, गुटनिरपेक्षता की विदेश नीति। ये मूल्य भारतीयता के दृष्टिकोण का अभिन्न हिस्सा हैं और आज इन्हीं मूल्यों को चुनौती दी जा रही है।’’ कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने नेहरू के आर्थिक मॉडल और गुटनिरपेक्षता केंद्रित विदेश नीति को भी याद किया और कहा कि उन्होंने जिन लोकतांत्रिक मूल्यों को आगे बढ़ाया था आज उससे जुड़ी विरासत को कमतर करने का प्रयास हो रहा है।
 
उन्होंने कहा, ‘‘हमें अपने लोकतंत्र की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्धता के साथ उन लोगों से लड़ना होगा जो (नेहरू की विरासत को) कमतर करने की कोशिश कर रहे हैं।’’ सोनिया ने कहा कि नेहरू ने देश की सभी लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति सम्मान और उनको मजबूत बनाने की संस्कृति पैदा की जिससे लोकतंत्र मजबूत हुआ।थरूर ने कहा कि नेहरू ने हमेशा इस विचार को आगे रखा कि देश किसी व्यक्ति से महत्वपूर्ण है और संस्थाओं का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज अगर देश में लोकतंत्र कायम है तो उसमें देश के पहले प्रधानमंत्री का सबसे अहम योगदान है। नेहरू की आलोचना करने वालों को आड़े हाथ लेते हुए थरूर ने कहा कि नेहरू ने देश को आईआईटी, आईआईएम, इसरो, डीआरडीओ और कई अहम संस्थान दिए और देश के विकास की मजबूत बुनियाद डाली। लोगों को आजादी के समय के भारत की स्थिति के बारे में जानना चाहिए, उसके बाद उन्हें पता चलेगा कि नेहरू ने भारत को किस तरह से विकास के पथ पर आगे बढ़ाया।

 

पश्चिम बंगाल में अपनी मजबूती के लिए तेजी से प्रयासरत भाजपा चाहती है कि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह 2019 का लोकसभा चुनाव कोलकाता से लड़ें। राज्य भाजपा इकाई के अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा है कि यदि अगले लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ओडिशा के पुरी से लड़ना चाह रहे हैं तो अमित शाह को कोलकाता से लड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि शाह कोलकाता से चुनाव लड़ते हैं तो पार्टी की चुनावी संभावनाओं को बहुत ज्यादा बल मिलेगा। उन्होंने कहा कि याद कीजिये जब नरेंद्र मोदी वाराणसी से चुनाव लड़े तो भाजपा को उत्तर प्रदेश में कितना बड़ा फायदा हुआ था।

हालांकि घोष की इस टिप्पणी पर भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने तो कोई बयान नहीं दिया है लेकिन राज्य में सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि चुनाव सभी के लिए मौका होते हैं और अमित शाह चाहें तो राज्य की 42 में से किसी भी सीट पर अपना भाग्य आजमा सकते हैं। घोष ने कहा है कि राज्य के पार्टी कार्यकर्ता चाहते हैं कि अमित शाह पश्चिम बंगाल से चुनाव लड़ें और कार्यकर्ताओं ने अपने मन की भावना केंद्रीय आलाकमान तक पहुँचाने के लिए कहा था जोकि मैं कर रहा हूँ।
 
घोष ने बताया कि अमित शाह ने राज्य भाजपा इकाई के लिए आगामी चुनावों में 50 प्रतिशत मत हासिल करने और कम से कम 22 लोकसभा सीटें जीतने का बड़ा लक्ष्य रखा है। फिलहाल पार्टी के राज्य से दो सांसद हैं और दोनों ही केंद्र में राज्यमंत्री हैं। भाजपा की राज्य इकाई ने पार्टी की मजबूती के लिए कई श्रृंखलाबद्ध कार्यक्रमों की घोषणा की है इसके तहत अगले माह दिसंबर के पहले सप्ताह में राज्य में तीन रथयात्राएं निकाली जाएंगी जोकि बंगाल के हर क्षेत्र में पहुँचेंगी। इन यात्राओं का समापन अगले वर्ष मध्य जनवरी में होगा। घोष ने बताया कि इन रथयात्राओं के जरिये केंद्र सरकार की उपलब्धियों और राज्य की ममता बनर्जी सरकार की नाकामियों को दर्शाया जायेगा।

जस्टिस एसके सेठ ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की शपथ ले ली है। भोपाल के राजभवन में एसके सेठ ने शपथ ग्रहण की। बता दें कि केंद्र सरकार ने 9 नवंबर को नियुक्ति की अधिसूचना जारी कर दी थी। एक नवंबर 2018 को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस के पद की शपथ ली थी।

 

जस्टिस हेमंत की जगह एसके सेठ को चीफ जस्टिस नियुक्त किया गया। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने वरिष्ठता के आधार पर उन्हें हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाए जाने की सिफारिश की थी। इसके बाद 9 नवंबर को कानून मंत्रालय ने नियुक्ति की अधिसूचना जारी कर दी। जस्टिस एसके सेठ का जन्म 10 जून 1957 को हुआ। 

बीए-एलएलबी करने के पश्चात् उन्होंने वर्ष 1981 में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में वकालत का व्यवसाय शुरू किया। 21 मार्च 2003 को उन्हें मप्र हाईकोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया। 19 जनवरी 2004 को जस्टिस सेठ को स्थाई न्यायाधीश नियुक्त किया गया। वर्तमान में वे एक्टिंग चीफ जस्टिस के पद पर कार्यरत थे।

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018 में 20 नवंबर को होने वाले दूसरे चरण के मतदान के लिए प्रचार अभियान चरम पर पहुंच गया है। सभी राजनीतिक दल ने मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी है। छत्तीसगढ़ में प्रचार अभियान के लिए बुधवार का दिन काफी महत्वपूर्ण हो गया है। भाजपा के स्टार प्रचारक और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बुधवार को एक ही क्षेत्र में आमने-सामने होंगे और अपनी अपनी पार्टी के लिए प्रचार करेंगे। 

 राहुल गांधी बिलासपुर के तखतपुर में एक जनसभा को संबोधित करेंगे। योगी आदित्यनाथ भी इसी विधानसभा सीट में चुनाव प्रचार के लिए पहुंच रहे हैं। 

कांग्रेस नेताओं ने बताया राहुल गांधी की सभा तखतपुर के खपरी रेस्ट हाउस के सामने दोपहर करीब डेढ़ बजे होगी। राहुल गांधी तखतपुर के कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. रश्मी सिंह के लिए प्रचार करने पहुंच रहे हैं। 

वहीं योगी आदित्यनाथ दोपहर करीब ढाई बजे पहुंचेंगे। वे भाजपा उम्मीदवार हर्षिता पांडेय के लिए वोट मांगेंगे। दो दिग्गज नेताओं के एक ही सीट पर चुनाव प्रचार के कार्यक्रम की वजह से आज की चुनावी सभाओं पर सबकी नजरें होंगी। 

बता दें कि राहुल गांधी छत्तीसगढ़ में पार्टी के लिए छुआंधार प्रचार कर रहे हैं और भाजपा पर हमला बोल रहे हैं। वहीं योगी आदित्यनाथ अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर कांग्रेस की नीयत पर सवाल खड़ा कर रहे हैं। ऐसे में एक ही विधानसभा क्षेत्र में महज एक घंटे के अंतर में होने वाले दोनों नेताओं की चुनावी सभा पर सबकी निगाहें टिकी हैं। 

छत्तीसगढ़ विधासभा चुनाव 2018 के लिए धुआंधार प्रचार कर रहे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को एक बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। राहुल ने चुनावी सभा को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और उनका परिवार  भ्रष्टाचार में शामिल है लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बारे में चुप्पी साध रखी है। 

 राहुल ने मंगलवार शाम खरसिया विधानसभा क्षेत्र में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहा कि "मुख्यमंत्री के बेटे का नाम पनामा पेपर्स में है, मुख्यमंत्री की पत्नी का नाम नान घोटाले की डायरी में है, और वह स्वयं नान घोटाले में शामिल हैं। 5000 करोड़ रूपए का यहां चिटफंड घोटाला हुआ लेकिन सरकार कोई कार्रवाई नहीं करती है। किसी को सजा नहीं मिलती है और इन सभी भ्रष्टाचार को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुप हैं।" 


राहुल ने कहा कि "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साढ़े चार साल पहले भ्रष्टाचार को लेकर आवाज उठाई थी लेकिन अब वह भ्रष्टाचार की बात नहीं करते हैं। उन्होंने राफेल का सौदा हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की जगह अनिल अंबानी को देकर तीस हजार करोड़ रूपया अंबानी की जेब मे डाल दिया। वहीं विजय माल्या, नीरव मोदी, ललित मोदी जब भागे तब उनको रोका नहीं।" 

राहुल गांधी ने अपने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर झीरम घाटी में शहीद हुए नंदकुमार पटेल समेत कांग्रेसी नेताओं के अपमान करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि "छत्तीसगढ़ में प्रथम चरण के चुनाव में बस्तर क्षेत्र में कांग्रेस की जीत हो रही है। चुनाव के बाद हमारी सरकार बनते ही हम किसानों का कर्ज 10 दिनों में माफ कर देंगे, किसानों को बोनस देंगे और सभी जिलों मे फूड प्रोसेसिंग प्लांट लगाएंगे जिससे युवाओं को रोजगार मिल सके।" गांधी ने कहा कि सरकार बनते ही आउटसोर्सिंग खत्म करते हुए युवाओं को नि:शुल्क इंजीनियरिंग, मेडिकल और वकालत की उच्च शिक्षा देंगे। 

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि राजस्थान में कांग्रेस की गहलोत सरकार की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी गरीब लोगों को सरकारी अस्पताल से मुफ्त में दवाएं मिलेंगी।

राहुल गांधी ने कहा कि यूपीए सरकार का भूमि अधिग्रहण बिल यहां लागू करेंगे, जिससे बाजार मूल्य से चार गुना दाम किसानों को उनकी भूमि का मिलेगा।

बगैर किसान से पूछे उनकी जमीन नहीं छीनी जाएगी और पांच साल में उद्योग नहीं लगने पर किसान को जमीन वापस मिलेगी।

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में नक्सलियों ने बारूदी सुरंग में विस्फोट कर एक ट्रक को नुकसान पहुंचाया है। इस घटना में पांच सुरक्षा कर्मियों समेत छह लोग घायल हुए हैं।

 

राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बीजापुर जिला मुख्यालय से लगभग सात किलोमीटर दूर भोपालपटनम की तरफ बीजापुर घाटी में आज नक्सलियों ने बारूदी सुरंग में विस्फोट कर दिया। इस घटना में सीमा सुरक्षा बल के 414 बटालियन के चार जवान, एक डीआरजी का जवान और एक नागरिक घायल हो गए हैं।

अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र में इस महीने की 12 तारीख को पहले चरण का मतदान होने के बाद सुरक्षा बलों को वहां से बाहर निकाला जा रहा है। आज जब बल के जवान एक वाहन में सवार होकर जा रहे थे तब नक्सलियों ने बीजापुर घाटी में बारूदी सुरंग में विस्फोट कर दिया। इस घटना में चार बीएसएफ जवान, एक डीआरजी का जवान और एक नागरिक ट्रक चालक घायल हो गया।

उन्होंने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद क्षेत्र के लिए अतिरिक्त बल रवाना किया गया तथा घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया।

अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र में नक्सलियों के खिलाफ अभियान जारी है।

सुप्रीम कोर्ट ने राफेल विमान सौदे की सुनवाई चीफ जस्टिस की अध्यक्षता में शुरू कर दी है। बता दें कि केंद्र सरकार ने वायु सेना के लिए 36 राफेल लडाकू विमान सौदे की कीमत का ब्योरा सील बंद लिफाफे में उच्चतम न्यायालय को सौंपा है। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस के कौल एवं न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की पीठ इस मामले में अहम सुनवाई कर रहे हैं।

 

-प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि राफेल की कीमत का खुलासा करते समय सरकार ने संसद में कोई गोपनीयता का मुद्दा नहीं उठाया। यह सिर्फ कहने के लिए एक फर्जी तर्क है कि वे मूल्य निर्धारण का खुलासा नहीं कर सकते। नए सौदे में राफले जेट्स को पहले सौदे की तुलना में 40% अधिक कीमत पर खरीदा गया है। 

-पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी की तरफ से वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण सुप्रीम कोर्ट में दलील रख रहे हैं। अरुण शौरी भी राफले सौदा मामले में याचिकाकर्ताओं में से एक हैं। प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सौदे में फ्रांस सरकार की तरफ से कोई सॉवरेन गारंटी नहीं दी गई थी।

-आप नेता संजय सिंह के वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 36 राफले विमान सौदे का मूल्य दो बार संसद में सामने आया था। इसलिए सरकार का ये कहना कि मूल्यों को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता ये स्वीकार करने योग्य नहीं है। 

-याचिकाकर्ता के वकील एमएल शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, अदालत में सरकार द्वारा दायर की गई रिपोर्ट से पता चलता है कि मई 2015 के बाद निर्णय लेने के दौरान गंभीर धोखाधड़ी की गई है। याचिकाकर्ता के वकील ने सर्वोच्च न्यायालय से आग्रह किया है कि इस मामले की सुनवाई पांच न्यायाधीशों की बेंच से कराने की मांग की है। 


अहिवारा विधानसभा भाजपा प्रत्याशी राजमहंत सावलाराम डाहरे जी ने अपनी चुनावी यात्रा के आठवे दिन की शुरुवात ग्राम बिरेभाट के गुरु घासीदास जी के मंदिर  में पूजा अर्चना  करके प्रारंभ किये साथ ही सतनामी समाज का भी पूरा सहयोग डाहरे को मिला। क्षेत्र की जनता का प्यार और आशीर्वाद सावलाराम जी को अपार मिल रहा है यात्रा ग्राम अहेरी  होते हुए  बगडुमर पहुँचा जहाँ पूरे ग्राम वासी जयकारा के साथ में डाहरे जी का भव्य स्वागत कर उन्हें विजय का आशीर्वाद दिया।    फिर जनसंपर्क यात्रा अपने भव्य जन सैलाब लिए  गिरहोला पहुंचा जहाँ माताओं के द्वारा शानदार डाहरे के लिये एक स्वर में विजय आवाज़ बुलंद कर डाहरे जी का भव्य स्वागत किया एवम विशेष रूप से सतनामी समाज के माताओं ने डाहरे जी को विजय तिलक लगाया। सभी गाँव मे मंचीय सभा को डाहरे जी सम्बोधित करते हुए जनता का आशीर्वाद लिया।

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