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नयी दिल्ली। सीबीआई घूसकांड मामले में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि यह जांच सरकार के अदंर नहीं आती और सरकार इसकी जांच नहीं करेगी। हम नहीं जानते कौन सही है और कौन गलत। हालांकि, इसकी जांच के सीबीआई और सीवीसी का अधिकार क्षेत्र है। 

 

नयी दिल्ली। विपक्षी पार्टियों ने सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को पद से हटाए जाने के लिए भाजपा सरकार की निंदा की है। वर्मा और सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच टकराव चल रहा है और केंद्र ने दोनों ही अधिकारियों को छुट्टी पर भेज दिया है। इस बीच झालावाड़ में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि CBI चीफ आलोक वर्मा राफेल सौदे के पेपर इकट्ठा कर रहे थे, इसलिए उनकी छुट्टी की गई है। राहुल गांधी ने कहा कि कल रात को चौकीदार ने CBI निदेशक को हटा दिया। 

 
इसके अलावा कांग्रेस ने वर्मा को छुट्टी पर भेजे जाने को एजेंसी की स्वतंत्रता खत्म करने की अंतिम कवायद बताया है जबकि माकपा ने सरकार के इस फैसले को गैरकानूनी करार दिया। वहीं आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार से सीबीआई निदेशक को छुट्टी पर भेजे जाने के पीछे की वजह की बताने को कहा है। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने हैरत जाहिर करते हुए सवाल किया कि क्या वर्मा को, राफेल घोटाले में भ्रष्टाचार की जांच करने की उत्सुकता की वजह से ‘हटाया’ गया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस संबंध में जवाब भी मांगा। 
 
( ईश्वर दुबे)  भिलाई। भिलाईनगर विधानसभा क्षेत्र से युवा नेता एवं महापौर देवेंद्र यादव की टिकट फाइनल होने से यह बात तो साफ है कि कांग्रेस इस बार सत्ता की बागडोर अपने हाथ मे लेने के लिए केवल योग्यता और जीत का माद्दा रखने वाले प्रत्याशियों को ही टिकट दे रही है। भिलाईनगर से देवेंद्र यादव की दावेदारी का विरोध करने वाले कांग्रेसियों की राहुल गांधी के आगे नहीं चली और टिकट लगभग फाइनल हो चुका है। भिलाईनगर की सीट में परंपरागत रूप से प्रेमप्रकाश और बदरूद्दीन कुरैशी ही चुनाव मैदान में आमने सामने होते थे इस बार चुनावी खेल युवा नेता और दिग्गज मंत्री के बीच खेला जाएगा। देवेंद्र यादव के पास युवा जोश और मंत्री प्रेमप्रकाश के पास विकास की गाथा है। देवेंद्र यादव महापौर रहते हुए जनता के बीच अब नया चेहरा भी नहीं रहे, जनमानस तक उनकी पहुँच बन चुकी है। सर्वसुलभ उपलब्धता, व्यवहार कुशलता के परिचय के बल पर वे मंत्री प्रेमप्रकाश को कड़ी टक्कर देंगे इस बात में कोई दोमत नहीं है। बहरहाल भिलाईनगर के चुनाव में भाजपा और कांग्रेस प्रत्याशी की बीच कड़ा मुकाबला होने के आसार हैं युवा नेता देवेंद्र यादव हर प्रकार से मजबूत प्रत्याशी हैं युवाओं की फौज उनके साथ है। भिलाईनगर का चुनावी महासंग्राम इस बार रोचक और 19- 20 से जीत के अंतर वाला परिणाम सामने आएगा।

नयी दिल्ली। मोदी सरकार में सीबीआई का “राजनीतिक प्रतिशोध के हथियार” के तौर पर इस्तेमाल किये जाने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को यह भी कहा कि प्रमुख जांच एजेंसी का पतन हो रहा है और वह “खुद से ही जंग लड़ रही है।’’ सरकार पर हमला बोलने के लिए ट्विटर पर उन्होंने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला दिया जिसमें केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) में दूसरे नंबर की हैसियत रखने वाले अधिकारी राकेश अस्थाना को रिश्वत मामले में आरोपी बताया गया है। 

ट्वीट किया, “प्रधानमंत्री का चहेता व्यक्ति, गोधरा एसआईटी का चर्चित चेहरा, सीबीआई में दूसरे नंबर की हैसियत पाने वाला गुजरात कैडर का अधिकारी, अब रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया।”उन्होंने कहा, “इन प्रधानमंत्री के शासन में सीबीआई राजनीतिक प्रतिशोध लेने का हथियार बन गई है। एक संस्थान जो पतन की ओर बढ़ रहा है वह खुद से ही जंग लड़ रहा है।” कांग्रेस अध्यक्ष और उनकी पार्टी अस्थाना को सीबीआई का विशेष निदेशक नियुक्त किए जाने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लगातार हमलावर रही है। 
 

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नयी दिल्ली। भाजपा महासचिव सरोज पाण्डेय ने मंगलवार को दावा किया कि अजीत जोगी और बसपा के बीच गठबंधन होने से छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को नुकसान होगा। उन्होंने जोर दिया कि उनकी पार्टी राज्य में चौथी बार सत्ता में आयेगी। राज्यसभा सदस्य और छत्तीसगढ़ से पार्टी की वरिष्ठ नेता पाण्डेय ने यह भी कहा कि विपक्षी कांग्रेस की प्रदेश में स्थिति ठीक नहीं है और उसके प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल के फर्जी सेक्स सीडी मामले में कथित तौर पर शामिल होने के कारण वह बचाव की मुद्रा में है।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह घटना राज्य की महिलाओं का अपमान है। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने इस मामले में पिछले महीने आरोप पत्र दायर किया था और बघेल एवं कुछ अन्य को विवादास्पद सीडी से जुड़े मामले में आरोपी बनाया था। इस मामले में कांग्रेस नेता को तीन दिन की न्यायिक हिरासत के बाद जमानत पर रिहा कर दिया गया था। पाण्डेय ने कहा, ‘छत्तीसगढ़ में हम (भाजपा) काफी मजबूत स्थिति में है। हम राज्य में लगातार चौथी बार सरकार बनायेंगे।’

उन्होंने कहा कि भाजपा राज्य की 90 सदस्यीय विधानसभा में 65 प्लस सीट हासिल करने के पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के लक्ष्य को प्राप्त करेगी। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में दो चरणों में 12 नवंबर एवं 20 नवंबर को विधानसभा चुनाव होने हैं। यह पूछे जाने पर कि जोगी की पार्टी और बसपा के बीच गठबंधन का चुनाव में क्या प्रभाव पड़ेगा, भाजपा महासचिव ने कहा कि चुनावी राजनीति में किसी पार्टी के असर को नजरंदाज नहीं किया जा सकता है और अजीत जोगी निश्चित तौर पर उस पार्टी के वोट को काटेंगे जिससे वह पहले जुड़े थे।

चुनाव आयोग ने पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों की तारीखें घोषित कर दीं, लेकिन एक हद तक मिजोरम और राजस्थान को छोड़ दें तो कहीं भी यह साफ नहीं है कि लड़ाई का स्वरूप क्या होगा? फिर भी ये चुनाव केन्द्र में सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के लिए काफी महत्वपूर्ण होने वाले हैं, इन्हीं चुनावों के परिणाम से आगामी आम चुनाव की तस्वीर भी काफी-कुछ स्पष्ट होने वाली है। क्योंकि ये चुनाव अगले आम चुनाव का माहौल बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे। इन चुनावों को एक तरह से अगले आम चुनावों का सेमीफाइनल माना जा रहा है।

 
मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम इन पांच विधानसभा चुनावों में तीन प्रमुख प्रांत हैं, जिनमें मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा ने लगातार पिछले चुनाव जीते हैं। मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान 14 वर्षों से मुख्यमंत्री हैं और छत्तीसगढ़ में डॉ. रमन सिंह लगातार 2003 से मुख्यमंत्री हैं। इन पांच राज्यों में से सिर्फ मिजोरम में कांग्रेस की सरकार है। आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद बने तेलंगाना में दूसरी बार विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। मिजोरम में मुख्य लड़ाई कांग्रेस और मिजो नेशनल फ्रंट की अगुआई वाले मिजोरम डेमोक्रैटिक अलायंस के बीच है जबकि राजस्थान में सीधी लड़ाई बीजेपी और कांग्रेस के बीच होनी है। राजस्थान में श्रीमती वसुंधरा राजे सिंधिया मुख्यमंत्री हैं, लेकिन वहां उन्हें कड़े संघर्ष का सामना करना पड़ रहा है।
 
छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के चुनावों को सबसे ज्यादा दिलचस्पी से देखा जाएगा, दोनों ही प्रांतों में भाजपा को कांटे की टक्कर झेलनी पड़ सकती है। छत्तीसगढ़ में यह पहला मौका है जब बीजेपी और कांग्रेस के अलावा कोई तीसरा पक्ष भी मैदान में है। अजित जोगी की पार्टी जनता कांग्रेस ने बीएसपी से गठबंधन किया है। यह पार्टी पहली बार ही विधानसभा चुनाव का सामना कर रही है, इसलिए इसके वास्तविक प्रभाव के बारे में अभी से कुछ कहना मुश्किल है। बीएसपी की ताकत यहां सीमित ही है, लेकिन उसकी बातचीत पहले कांग्रेस से चल रही थी। इन दोनों पार्टियों का साथ आना कांग्रेस के लिए झटका तो है, पर यह गठबंधन चुनाव नतीजों को किस हद तक प्रभावित करेगा, इस बारे में फिलहाल अटकलें ही लगाई जा सकती हैं। इन पांचों ही राज्यों में कांग्रेस की स्थिति मजबूत हो सकती है, लेकिन सशक्त केन्द्रीय नेतृत्व के अभाव में मतदाता कौन-सी करवट लेगा, कहा नहीं जा सकता। कांग्रेस भाजपा शासित राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सत्ता विरोधी रुझान का फायदा उठाने की पुरजोर कोशिश में है। अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही कांग्रेस अगर इन तीनों बड़े राज्यों में कामयाब होती है तो वह भाजपा की अजेय छवि पर गहरा प्रहार होगा। इन तीनों राज्यों में भाजपा को कांग्रेस से गंभीर चुनौती मिलने के आसार दिख रहे हैं। यही वजह है कि इन चुनावों को 2019 के चुनावी महासमर का सेमीफाईनल माना रहा है।
 
इन पांचों ही राज्यों में अपने अलग-अलग चुनावी मुद्दे हैं लेकिन इन मुद्दों में अब केन्द्रीय मुद्दे भी जगह बना रहे हैं। लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनावों में लोगों की राय अलग-अलग रहती आई है। ऐसा जनता पार्टी की सरकार के समय, इन्दिरा गांधी के शासनकाल में और राजीव गांधी शासनकाल में देखने को मिल चुका है। लेकिन इस बार एक तरफ बिजली, पानी, सड़क, महंगाई, बेरोजगारी जैसे बुनियादी मुद्दों के साथ-साथ रुपए की गिरती कीमत, पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम, अर्थव्यवस्था की धीमी गति, साम्प्रदायिक-धार्मिकता के मुद्दे भी अहम हो चुके हैं। राज्यस्तरीय घोटालों के मुद्दे भी अहम बन रहे हैं। राजनीतिक दलों की चादर इतनी मैली है कि लोगों ने उसका रंग ही काला मान लिया है। अगर कहीं कोई एक प्रतिशत ईमानदारी दिखती है तो आश्चर्य होता है कि यह कौन है? पर हल्दी की एक गांठ लेकर थोक व्यापार नहीं किया जा सकता है। भ्रष्टाचार, राजनीतिक अपराधीकरण क्यों नहीं सशक्त चुनावी मुद्दे बनते ? 
 
इस बार के विधानसभा चुनावों में देखने को मिल रहा है कि राजनीतिक दल धार्मिक प्रतीकों का सहारा भी पहले की तुलना में कहीं अधिक लेने लगे हैं। शायद भाजपा को शिकस्त देने के लिये हिन्दुत्व का मुद्दा भी प्रमुखता से उछल रहा है। यही कारण है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को कभी शिवभक्त, कभी नर्मदा भक्त के रूप में पेश किया जा रहा है। राहुल गांधी राज्यस्तरीय मुद्दों को अपने भाषणों में बहुत कम छूते हैं बल्कि उनका सारा जोर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर प्रहार करने का रहता है। एक तरह से ये चुनाव नरेन्द्र मोदी को पछड़ाने की ही सारी जद्दोजहद दिखाई दे रहे हैं। यह विडम्बना ही है कि हर दल एक बड़ी रेखा को मिटाने की बात तो करता है, लेकिन एक बड़ी रेखा खींचने का प्रयास कोई नहीं कर रहा है।
 
भाजपा अपनी अजेय छवि को बरकरार रखने के लिए पूरा प्रचार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ही केंद्रित रखने की योजना बना रहा है। सत्ता विरोधी लहर से निबटने के लिए इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों को किनारे ही रखा जा सकता है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह इसी रणनीति पर काम कर रहे हैं। दूसरी ओर कांग्रेस अपनी और अपने अध्यक्ष राहुल गांधी की स्थिति को सुदृढ़ बनाने के लिये हरसंभव प्रयास करती हुई दिख रही है। कांग्रेस के लिये यह अग्निपरीक्षा का दौर है कि वह इन चुनावों में कैसा प्रदर्शन करती है। अगर कांग्रेस बेहतर प्रदर्शन करती है तो अगले लोकसभा चुनावों में महागठबंधन की दिशा तय होगी और तभी नरेन्द्र मोदी रूपी किले को ध्वस्त करने की बात सोची जा सकती है। नरेन्द्र मोदी एक करिश्मा है और वह आज भी बरकरार है, जब तक प्रधानमंत्री की छवि को प्रभावित नहीं किया जाता तब तक भाजपा को हराने की बात सोचना ही नासमझी होगी। अनेक विरोधी आंधियों के बावजूद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की व्यक्तिगत छवि पर कोई आंच नहीं आई है बल्कि देशवासी उन पर पूरा भरोसा कर रहे हैं। कांग्रेस के जीतने की स्थिति में राहुल गांधी की स्वीकार्यता बढ़ेगी और क्षेत्रीय दलों का दबाव कम होगा। लेकिन यह दिवास्वप्न जैसा प्रतीत हो रहा है।
 
विपक्ष के गठबंधन में कांग्रेस की भागीदारी कितनी होगी, इसका अनुमान भी पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में हो जाएगा। अगर कांग्रेस कमजोर साबित हुई तो उसे क्षेत्रीय दलों के आगे अपनी शर्तें मनवाने में दिक्कतों को सामना करना पड़ेगा। कांग्रेस को आज जैसा केन्द्रीय नेतृत्व चाहिए, वह उसे नहीं मिल पा रहा है, शायद यही कारण है कि जनता चाहकर भी उसे स्वीकार नहीं कर पा रही है। ‘वंश परंपरा की सत्ता’ से लड़कर मुक्त हुई जनता इतनी जल्दी उसे कैसे भूल सकती है? कुछ मायनों में यह अच्छा है कि राजनीति में वंश की परंपरा का महत्व घटता जा रहा है, अस्वीकार किया जा रहा है। इससे कुछ लोगों को दिक्कत होगी जो परिवार की भूमिका को भुनाना चाहते हैं। लेकिन लोकतंत्र की सेहत के लिए अच्छा ही होगा। जनता अब जान गई है कि राजा अब किसी के पेट से नहीं, ‘मतपेटी’ से निकलता है।
 
नरेन्द्र मोदी अपने या भाजपा के पक्ष में जिस तरह के तथ्य प्रस्तुत करते हैं, उनका जवाब न कांग्रेस के पास है और न अन्य दलों के पास। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मोदी ने कहा, वे नामदार हैं, हम कामदार हैं। उनका मकसद एक परिवार का कल्याण है, हमारा लक्ष्य राष्ट्र निर्माण है। बीजेपी विरोधी दलों की कमजोरी पर नहीं बल्कि सवा सौ करोड़ लोगों की ताकत पर चलती है। यह विश्वास, यह दृढ़ता एवं यह दिशा भाजपा के सामने खड़े किये जा रहे धुंधलकों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। भले ही भारतीय राजनीति का इतिहास रहा है कि आम चुनावों में कोई एक पार्टी जीतकर सत्तारूढ़ हो जाती है लेकिन उसके बाद हुए विधानसभा चुनावों में विपक्ष की सरकारें बनती रही हैं। इस बार ऊंट किस करवट बैठेगा, भविष्य के गर्भ में हैं।
 
-ललित गर्ग

रायपुर। छत्तीसगढ़ में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने मुख्यमंत्री रमन सिंह के खिलाफ पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी करुणा शुक्ला को उम्मीदवार बनाया है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष शैलेष नितिन त्रिवेदी ने रविवार को यहां बताया कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने प्रथम चरण के लिए छह उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है।

सूची के अनुसार राजनांदगांव से करुणा शुक्ला, खैरागढ़ से गिरवर जंघेल, डोंगरगढ़ से भुवनेश्वर सिंह बघेल, डोंगरगांव से दलेश्वर साहू, खुज्जी से चन्नी साहू और मोहला मानपुर से इंदरा शाह मंडावी को उम्मीदवार बनाया गया है। प्रथम चरण में बस्तर क्षेत्र के जिलों और राजनांदगांव जिले के 18 विधानसभा सीटों के लिए 12 नवंबर को मतदान होगा। प्रथम चरण में मुख्यमंत्री रमन सिंह राजनांदगांव विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में हैं। जिसके विरूद्ध कांग्रेस ने करुणा शुक्ला को अपना उम्मीदवार बनाया है।
 
कौन हैं करुणा शुक्ला
करुणा शुक्ला जांजगीर लोकसभा क्षेत्र से भाजपा से सांसद रह चुकी हैं। वर्ष 2013 में विधानसभा चुनाव के बाद शुक्ला ने भाजपा से इस्तीफा दे कर कांग्रेस का दामन थाम लिया था। उन्होंने भाजपा पर उपेक्षा का आरोप लगाया था। मुख्यमंत्री के खिलाफ शुक्ला को उम्मीदवार बनाए जाने को लेकर त्रिवेदी ने कहा कि वह (शुक्ला) कांग्रेस से जुड़ने के बाद राजनांदगांव क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। वह पार्टी की मजबूत उम्मीदवार हैं तथा वह सिर्फ मुख्यमंत्री को चुनौती नहीं देंगीं बल्कि उनके खिलाफ जीत भी हासिल करेंगी।
 

राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने आज राजनांदगांव विधानसभा सीट के लिए नामांकन दाखिल किया। इस दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी वहां मौजूद थे। सिंह ने आज राजनांदगांव जिला मुख्यालय में अपना नामांकन दाखिल किया। कलेक्ट्रेट परिसर में नामांकन दाखिल करने के दौरान उनके साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री रमन सिंह की पत्नी वीणा सिंह, उनके पुत्र तथा सांसद अभिषेक सिंह और छत्तीसगढ़ में भाजपा के प्रभारी अनिल जैन समेत अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे। 

 
मुख्यमंत्री सिंह ने नामांकन दाखिल करने के दौरान योगी आदित्यनाथ के चरण स्पर्श कर उनसे आशीर्वाद लिया। मुख्यमंत्री सिंह राजनांदगांव विधानसभा सीट से पिछले दो बार से विधायक हैं। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री रमन सिंह के खिलाफ अटल बिहारी बाजपेयी की भतीजी करुणा शुक्ला को उम्मीदवार घोषित किया है। अपना नामांकन दाखिल करने से पहले मुख्यमंत्री रमन सिंह ने संवाददाताओं से बातचीत के दौरान कहा कि उन्हें राज्य में बूथ स्तरीय कार्यकर्ताओं की ताकत पर पूरा भरोसा है। भाजपा ने यह चुनाव अटल जी को समर्पित किया है तथा एक एक कार्यकर्ता ने संकल्प लिया है कि भारी बहुमत के साथ चौथी बार भाजपा की सरकार बनाएंगे। उन्होंने करूणा शुक्ला को कांग्रेस उम्मीदवार बनाए जाने को लेकर कहा कि कांग्रेस को कोई स्थानीय उम्मीदवार नहीं मिला।
छत्तीसगढ़ में हो रहे विधानसभा चुनाव में पहले चरण के मतदान के लिए आज शाम तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे। राज्य में दो चरणों में निर्वाचन कार्य संपन्न होगा। प्रथम चरण में 12 नवंबर को 18 विधानसभा क्षेत्रों में तथा दूसरे चरण में 20 नवंबर को शेष 72 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान होगा। प्रथम चरण में 12 नवंबर को बस्तर क्षेत्र के जिले बस्तर, कांकेर, कोंडागांव, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा में तथा राजनांदगांव जिले की 18 सीटों के लिए मतदान होगा।

 

 
छत्तीसगढ़ में पिछले 15 वर्षों से कांग्रेस सत्ता से बाहर है तथा इस बार के चुनाव में वह सत्ता वापसी की कोशिश में है। वहीं भाजपा इस चुनाव में 65 से अधिक सीटों में जीत हासिल कर चौथी बार सरकार बनाना चाहती है। राज्य में वर्ष 2013 में हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को 90 सीटों में से 49 सीटों पर तथा कांग्रेस को 39 सीटों पर जीत मिली थी। वहीं एक एक सीटों पर बसपा और निर्दलीय विधायक जीते थे।

गढ़ाकोटा। गुजरात के पाटीदार नेता हार्दिक पटेल किसान और पिछड़ा वर्ग आंदोलन के तहत गढ़ाकोटा पहुंचे। हार्दिक पटैल ने कहा हम किसी को हराने नहीं आए हम खुद को जिताने आए हैं। युवाओं, किसानों, महिलाओं के मुद्दे पर आए हैं। आज देश में बेरोजगार कौन है? क्या अदाणी का बेटा बेरोजगार है? क्या शिवराज सिंह चौहान का बेटा बेरोजगार है? क्या गोपाल भार्गव का बेटा बेरोजगार है? नहीं, सिर्फ किसान का ही बेटा बेरोजगार है। किसान का ही बेटा मजदूर बन रहा है।
हार्दिक पटेल ने कहा हम चाहते हैं घर- घर में जनजागरण हो, चेतना हो, ताकि जनविरोधी लोगों से लड़ सकें। गुलामी की जंजीरों में जकड़े रहोगे तब तक अपने विचार और अधिकारों तक नहीं पहुंच पाओगे। हार्दिक ने एक बार फिर मंत्री गोपाल भार्गव को ठन- ठन गोपाल कहा।
हम सत्ता विरोधी: काॅलेज की छात्राओं के साथ हुई घटना पर हार्दिक ने कहा कि पिछड़े समाज की दो छात्राओं के साथ छेड़खानी फिर मारपीट हुई, जिससे उनकी पढ़ाई छूट गई। पिछड़ों की यही लड़ाई लेकर निकले हैं। आजाद हिंदुस्तान में जो लोग जीना चाहते हैं उन्हें मजबूत बनाएं, जागरूक किया जाए। भावांतर में किसानों से लूट हुई है। हार्दिक ने कहा हम कांग्रेस के साथ नहीं हैं, हम तो सत्ता के खिलाफ हैं। अब मप्र में दो ही पार्टियां हैं तो हम क्या करें।
भार्गव और हार्दिक समर्थक आमने- सामने: केंकरा से पथरिया जाते समय हार्दिक का काफिला बस स्टैंड पर रुका। जहां हार्दिक, जीवन , कमलेश साहू ने शहीदों की मूर्तियों पर माल्यार्पण किया। हार्दिक के समर्थक रोड शो नगर में अंदर कराना चाहते थे, लेकिन प्रशासन ने रोक दिया। जिस पर हार्दिक समर्थकों ने नारेबाजी की। इस दौरान वहां मंत्री गोपाल भार्गव के समर्थक भी आ गए जिन्होंने भी नारे लगाए। एक दूसरे के खिलाफ करीब 15 मिनिट नारेबाजी हुई। जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। बाद में हार्दिक का काफिला नगर भ्रमण के बजाए पथरिया की ओर चला गया।
मैं भाजपा विरोधी हूं
पथरिया में हार्दिक ने कहा कि मैं बीजेपी का विरोधी हूं और उसके खिलाफ ही लड़ता हूं। क्योंकि भाजपा में किस तरह लोगों को डराया धमकाया जाता है, गलत नीतियों से गरीब मजदूर वर्ग का शोषण किया जाता है, जिसका सीधा साधा उदाहरण भी आप लोगों के सामने है। प्रदेश के मंत्री की पत्नी शिक्षा माफिया है, जिसका नाम हर कोई अच्छे से जानता है। क्या किसी गरीब का बच्चा उनके स्कूल में पढ़ सकता है। मैं किसी को गलत नहीं ठहराता और न ही में किसी को दोषी मानता हूं, हम सब इसके जिम्मेदार हैं। यह बात सोमवार को हाईस्कूल परिसर में किसान आमसभा में गुजरात के पाटीदार समाज के नेता हार्दिक पटेल ने कहा किसानों काे संबाेधित करते हुए कही।

दुर्ग। विधानसभा निर्वाचन 2018 के अंतर्गत जिले के विधानसभा क्षेत्रों के लिए नियुक्त सेक्टर अधिकारियों को आज बी.आई.टी. काॅलेज में प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में सेक्टर अधिकारियों को निर्वाचन से संबंधित उनके कर्तव्यों और दायित्वों की विस्तार से जानकारी दी गई। अधिकारियों को निर्वाचन प्रक्रिया प्रारंभ होने से लेकर निर्वाचन प्रक्रिया पूरी होने तक उनके द्वारा किए जाने वाले दायित्वों से अवगत कराया गया। सेक्टर अधिकारी का उत्तरदायित्व निर्वाचन प्रक्रिया पूर्ण कराने के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है। सेक्टर अधिकारियों को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की शक्तियां दी गई है। प्रत्येक 10-12 मतदान केन्द्रों के लिए एक सेक्टर अधिकारी की नियुक्ति की गई है। उन्हें बताया गया है कि अपने निर्वाचन क्षेत्र से संबंधित मतदान केन्द्रों के नक्शे का पूर्ण रूप से अवलोकन एवं क्षेत्रों का भ्रमण सुनिश्चित कर लें।
सेक्टर अधिकारियों को उनके सेक्टर क्षेत्र के अंतर्गत सभी मतदान केन्द्रों में पहुंच कर सभी आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी दी गई है। सेक्टर अधिकारी का दायित्व है कि वे अपने सेक्टर क्षेत्र में मतदान केन्द्रों का व्यापक प्रचार-प्रसार करें। सभी मतदान केन्द्रों के दायरे में निर्वाचन आयोग के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करें।
अधिकारियों का दायित्व है कि वे मतदाताओं को ई.व्ही.एम. से मतदान करने की प्रक्रिया का प्रदर्शन करायें। सेक्टर अधिकारियों की यह भी जिम्मेदारी है कि वे मतदान केन्द्र के स्वरूप और उसकी संवेदनता का भी अनिवार्य रूप से विवरण रखें। मतदान की पूर्व संध्या मतदान केन्द्रों में मतदान दलों के माध्यम से मतदान सामग्री पहुंचाना सुनिश्चित करेंगे। यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि सुरक्षा बल संबंधित मतदान केन्द्र में पहुंचे है या नहीं। मतदान कर्मियों के बीच ई.व्ही.एम. का संचालन अथवा मतदान प्रक्रिया के विषय में अंतिम समय तक किसी भी प्रकार की संदेह को दूर करेगा। पूरी तरह से संतुष्ट हो जाने पर नियंत्रण कक्ष को रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।
मतदान दिवस पर मतदान शुरू होने से पहले माॅक पोल की स्थिति सुनिश्चित करेगा। यदि कोई समस्या हो तो सुधारात्मक कार्यवाही करेगा। मतदान केन्द्रों का बार-बार भ्रमण करेगा और बिना विलंब के मतदान शुरू होने की सूचना देगा। जहां कहीं भी ई.व्ही.एम. बदलने की स्थिति उत्पन्न हो, उसे बदलने की व्यवस्था करेगा। मतदान एजेंटों की उपस्थिति-अनुपस्थिति का पता लगाना और सूचना देना होगा। मतदान दल को आवश्यक सहायता करेगा। उनकी महती जिम्मेदारी होगी कि वे मतदान केन्द्रों का दौरा करने के दौरान मतदान संबंधी सभी पहलूओं की जांच करेगा। माॅक पोल प्रमाणन सुनिश्चित करने के साथ ही इसकी सूचना आर.ओ. को देगा। मतदान प्रणाली की जांच करना, समय-समय पर मतदान प्रतिशत की सूचना देना, मतदान वाले दिन प्राप्त शिकायत का निदान करना, मतदान उपरान्त ई.व्ही.एम. को सिलिंग करने, मतदान सामग्री प्राप्ति स्थल पर पहुंचाने, मतदान कर्मियों को मानदेय के वितरण का कार्य सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी होगी। सेक्टर अधिकारी यह भी जांच करेगा कि पीठासीन अधिकारी उपयुक्त ढंग से डायरी की प्रतिपूर्ति किया है कि नहीं, ई.व्ही.एम. मशीन ठीक से सील की गई है या नहीं।

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