ईश्वर दुबे
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नई दिल्ली । देश के अग्रणी यात्री वाहन निर्माताओं ने अगले कुछ साल में 2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा के निवेश का खाका तैयार किया है। वाहन दिग्गजों जैसे टाटा मोटर्स, महिंद्रा ऐंड महिंद्रा, मारुति सुजूकी इंडिया, ह्युंडै मोटर इंडिया, जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर इंडिया, निसान मोटर कॉरपोरेशन और रेनो एसए ने उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी, वाहनों के विकास पर बड़े निवेश के अलावा और स्वच्छ व पर्यावरण अनुकूल तकनीक को लेकर प्रतिबद्धता जताई है। पिछले हफ्ते इलेक्ट्रिक वाहन में भारत की अग्रणी टाटा मोटर्स ने कहा था कि वह वित्त वर्ष 2030 तक अपनी ईवी इकाई में 16 से 18,000 करोड़ रुपए के पूंजीगत खर्च की योजना बना रही है। कंपनी का इरादा मार्च 2026 तक छह और मॉडल उतारने का है। पिछले तीन साल में टाटा मोटर्स के लिए बिक्री दमदार रहीपिछले तीन साल में टाटा मोटर्स के लिए बिक्री दमदार रही है और यह वित्त वर्ष 2021-22 के 3.72 लाख के मुकाबले वित्त वर्ष 2022-23 में 5.41 लाख और वित्त वर्ष 2023-24 में 5.73 लाख वाहन पर पहुंच गई। भारतीय यात्री वाहन बाजार वित्त वर्ष 30 तक 60 लाख वाहन पर पहुंचने की संभावना है, जो वित्त वर्ष 24 में 43 लाख रहा है। कोरियाई वाहन दिग्गज ह्युंडै मोटर ने अगले 10 साल में 32,000 करोड़ रुपए के निवेश का खाका खींचा है। देसी बाजार में 14.6 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाली कोरियाई कंपनी का स्थान भारत में मारुति के बाद दूसरा है, जिसके पास 41.7 फीसदी हिस्सेदारी है। सियाम के आंकड़ों से यह जानकारी मिली। मारुति ने साल 2023 में ऐलान किया था कि वह पहली ईवी एसयूवी 2023-24 में उतारेगी। हालांकि अब इसे उतारने की तारीख 2024-25 हो गई है। कुल मिलाकर मारुति का इरादा 2029-30 तक भारत में छह ईवी उतारने का है।
नई दिल्ली । दवा कंपनी ल्यूपिन लिमिटेड ने अब्देलअजीज तौमी को अपनी नवगठित अनुषंगी कंपनी ल्यूपिन मैन्युफैक्चरिंग सॉल्यूशंस (एलएमएस) का मुख्य कार्यपालक अधिकारी नियुक्त करने की सोमवार को घोषणा की। ल्यूपिन ने शेयर बाजार को दी सूचना में बताया कि तौमी एक अनुभवी पेशेवर हैं। उनके पास यूरोप, उत्तरी अमेरिका और एशिया में बायोटेक, औषधि और सीडीएमओ क्षेत्रों में दो दशकों से अधिक का अनुभव है। ल्यूपिन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि वह एपीआई, सीडीएमओ क्षेत्र में प्रचुर ज्ञान और अनुभव लेकर आएंगे तथा एलएमएस को हमारे वैश्विक ग्राहकों के लिए एक विश्वसनीय तथा पसंदीदा भागीदार के रूप में स्थापित करने में मदद करेंगे।
मुम्बई । घरेलू शेयर बाजार गुरुवार को बढ़त के साथ बंद हुआ। बाजार में ये उछाल दुनिया भर से मिले अच्छे संकेतों के साथ ही खरीददारी हावी रहने से आया है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के इस साल ब्याज दरों को कम करने की संभावनाओं से भी बाजार में उत्साह का माहौल है। इसके साथ ही खुदरा मुद्रास्फीति दर में कमी आने से भी बाजार को बल मिला है। खुदरा मुद्रास्फीति मई में घटकर 4.7 फीसदी रह गई, जो 12 महीने में इसका सबसे कम आंकड़ा है। इसी कारण दिन भर के कारोबार के बाद तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 0.27 फीसदी करीब 204.33 अंक बढ़कर 76,810.90 पर बंद हुआ। वहीं इसी प्रकार पचास शेयरों वाला नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ़्टी भी 0.33 फीसदी तकरीबन 75.95 अंक उछलकर 23,398.90 के स्तर पर बंद हुआ।
आज कारोबार के दौरान सेंसेक्स की कंपनियों में महिंद्रा एंड महिंद्रा का शेयर सबसे ज्यादा 2.73 फीसदी बढ़कर बंद हुआ। इसके साथ ही टाइटन, एलएंडटी, इंडसइंड बैंक, टेक महिंद्रा, टीसीएस, अल्ट्राटेक सीमेंट, विप्रो और बजाज फाइनेंस के शेयर भी तेजी के साथ बंद हुए।
वहीं दूसरी ओर हिंदुस्तान यूनिलीवर का शेयर नीचे आया। इसमें 1.64 फीसदी की गिरावट रही। इसके अलावा आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक, पावर ग्रिड, भारती एयरटेल, आईटीसी, एनटीपीसी और टाटा मोटर्स के शेयर भी टूटे।
बाजार जानकारों के अनुसार आर्थिक मोर्चे पर मुद्रास्फीति में कमी के आंकड़ों से आने वाले समय में ब्याज दर में कटौती की उम्मीद है। इसके अलावा कैपिटल गुड्स, कंज्यूमर ड्यूरेबल और इंडस्ट्रियल शेयरों में भारी खरीदारी से भी बाजार को बल मिला है।
वहीं दूसरी ओर एशिया के अन्य बाजारों में दक्षिण कोरिया के कॉस्पी और हांगकांग के हैंगसेंग में तेजी रही जबकि जापान के निक्की और चीन के शंघाई कम्पोजिट में गिरावट रही। यूरोपीय बाजार दोपहर के सेशन के दौरान गिरावट में कारोबार कर रहे थे जबकि अमेरिकी के ज्यादातर बाजार बुधवार को बढ़त पर बंद हुए।
इससे पहले आज सुबह धेरेलू शेयर बाजार ने महंगाई के आंकड़ों में गिरावट के कारण नए रिकॉर्ड स्तर पर शुरुआत की। खुलते ही बेंचमार्क बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी ने नए शिखर छुए, बीएसई सेंसेक्स 77,102 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी50 23,481 के स्तर पर पहुंच गया। हालांकि शुरुआती कारोबार में बेंचमार्क इंडेक्स ने अपनी बढ़त को कुछ हद तक गंवा दी थी। सेंसेक्स 373 अंकों की बढ़त के साथ 76,979 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी50 0.50 प्रतिशत बढ़कर 23,439 के स्तर पर पहुंच गया।
नई दिल्ली । केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने भ्रामक विज्ञापन देने के लिए एडटेक कंपनी एडु टैप लर्निंग सॉल्यूशंस पर तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। कंपनी ने विज्ञापन में दावा किया था कि उसके 144 छात्रों का चयन 2023 में आरबीआई ग्रेड बी परीक्षा के लिए हुआ है। सीसीपीए ने जारी आदेश में एडु टैप को सभी इलेक्ट्रॉनिक तथा प्रिंट मीडिया से विवादित विज्ञापन को तुरंत हटाने या वापस लेने का निर्देश दिया। कंपनी को अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। उपभोक्ता निगरानी संस्था ने पाया कि एडु टैप के यूट्यूब तथा टेलीग्राम चैनल पर विज्ञापनों में प्रतिष्ठित आरबीआई परीक्षा के लिए चुने गए 144 उम्मीदवारों के नाम और तस्वीरें दिखाई गईं। हालांकि, इन उम्मीदवारों ने मंच से कौन से खास कार्से किए थे यह अहम जानकारी इनमें नहीं दी गई। सीसीपीए के जांच के निष्कर्षों के अनुसार, 144 उम्मीदवारों में से 57 ने केवल एडु टैप द्वारा निःशुल्क प्रदान किए जाने वाले ‘इंटरव्यू गाइडेंस कोर्स’ में हिस्सा लिया था। यह पाठ्यक्रम उम्मीदवार द्वारा आरबीआई ग्रेड बी परीक्षा के प्रारंभिक और मुख्य चरणों को उत्तीर्ण करने के बाद शुरू होता है। सीपीए के आदेश में कहा गया कि एडू टैप ने सफल छात्रों द्वारा चुने गए कोर्स के प्रकार तथा अवधि के बारे में जानबूझकर महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई ताकि लोगों को गुमराह किया जा सके।
नई दिल्ली । नंदन डेनिम के शेयर ने पिछले 5 दिन में निवेशकों को 18 फीसदी का रिटर्न दिया है जबकि पिछले 1 महीने में 23 फीसदी का रिटर्न दिया है। पिछले 6 महीने में नंदन डेनिम के शेयर 22 फ़ीसदी से अधिक का रिटर्न दे चुके हैं। पिछले 1 साल में नंदन डेनिम के शेयरों ने 19.50 रुपए के लेवल से 140 फीसदी का बंपर रिटर्न दिया है। नंदन डेनिम के शेयर 14 जून 2019 को 13.78 रुपए के निचले स्तर पर थे जहां से निवेशकों को 236 फीसदी का बंपर रिटर्न मिल चुका है। नंदन डेनिम लिमिटेड ने कुछ दिन पहले ही पिछले वित वर्ष की मार्च तिमाही के नतीजे जारी किए थे जिसमें उसका मुनाफा 8000 फीसदी बढ़ गया था। नन्दन डेनिम के बोर्ड आफ डायरेक्टर्स ने स्टॉक स्प्लिट की घोषणा की है जिसके बाद इसके शेयर लगातार नई ऊंचाई छू रहे हैं। सोमवार 17 जून को नंदन डेनिम लिमिटेड के बोर्ड आफ डायरेक्टर्स की बैठक होने वाली है जिसमें शेयरों के सबडिवीजन या स्प्लिट पर चर्चा की जाएगी।
नई दिल्ली । विश्लेषकों का कहना है कि रिजर्व बैंक मानसून में करोड़ों लोगों पर राहत की बारिश कर सकता है और 16 महीने से जारी सूखे से राहत मिल सकती है। विश्लेषकों का कहना है कि इस बार यह कयास हवा में नहीं लगाया जा रहा, बल्कि कई बड़ी और ठोस वजहें हैं। रिजर्व बैंक की अगली बैठक अगस्त में होने वाली है और यह कई मायनों में बेहद खास होगी। दरअसल, रिजर्व बैंक ने पिछली 8 बैठकों में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। हर बैठक 2 महीने के अंतराल पर होती है। इस लिहाज से बीते से 16 महीने से रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं हुआ। रेपो रेट 6.5 फीसदी पर बरकरार है। रेपो रेट वह दर होती है, जिसके आधार पर बैंक अपने लोन की ब्याज दरें तय करते हैं। इसमें कटौती होने पर सभी तरह के खुदरा लोन भी सस्ते हो जाते हैं और ईएमआई घट जाती है। रिजर्व बैंक के हाथों को सबसे ज्यादा महंगाई ने थाम रखा है। महंगाई काबू में आते ही आरबीआई के हाथ भी खुल जाते हैं। खासकर खाने-पीने की चीजों की महंगाई दर अभी 5 फीसदी से नीचे चल रही है और आने वाले समय में यह 4 फीसदी के आसपास रहने का अनुमान है। बुनियादी चीजों की महंगाई दर भी 11 महीने में 2 फीसदी नीचे आ चुकी है। आरबीआई ने 2024-25 के लिए खुदरा महंगाई की वृद्धि दर 4.5 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है। सिर्फ महंगाई नहीं, देश की मजबूत विकास दर भी ब्याज दरों में कटौती का आधार तैयार कर रही है। वित्तवर्ष 2023-24 में भारत की विकास दर 8.2 फीसदी रही है। इसके अलावा जीएसटी कलेक्शन हो या विनिर्माण क्षेत्र की ग्रोथ हर जगह तेज वृद्धि दिख रही है। भारत का सर्विस सेक्टर भी मजबूत बना हुआ है। भारतीय मौसम विभाग ने इस बार खरीफ की फसल की पैदावार बढ़ने का अनुमान लगाया है. मौसम विभाग को भरोसा है कि इस बार मानसून अच्छा रहेगा और पैदावार अच्छी होने से ग्रामीण क्षेत्र की खपत भी बढ़ जाएगी. यही कारण है कि आरबीआई ने चालू वित्तवर्ष का विकास दर अनुमान भी 7 फीसदी से बढ़ाकर 7.2 फीसदी कर दिया है।
मुंबई । भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को कहा कि उसने थोक सावधि जमा की सीमा दो करोड़ रुपये से बढ़ाकर तीन करोड़ रुपये कर दी है। थोक सावधि जमा पर खुदरा सावधि जमा की तुलना में थोड़ा अधिक ब्याज मिलता है, क्योंकि बैंक अपनी नकदी प्रबंधन प्रक्रिया के तहत अलग-अलग दरें देता है। अब अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों और लघु वित्त बैंकों (एसएफबी) के पास दो करोड़ रुपये तक की एकल रुपया सावधि जमा, खुदरा सावधि जमा का हिस्सा होगी। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने द्विमासिक नीति की घोषणा करते हुए शुक्रवार को कहा कि थोक जमा सीमा की समीक्षा के संबंध में अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों और एसएफबी के लिए तीन करोड़ रुपये और उससे अधिक की एकल रुपया सावधि जमा के रूप में थोक जमा की परिभाषा को संशोधित करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा स्थानीय क्षेत्र बैंकों के लिए थोक जमा सीमा को एक करोड़ रुपये और उससे अधिक की एकल रुपया सावधि जमा के रूप में परिभाषित करने का भी प्रस्ताव है, जैसा कि आरआरबी (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक) के मामले में लागू है। कारोबार को सुगम बनाने के लिए आरबीआई ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) 1999 के तहत वस्तुओं व सेवाओं के निर्यात और आयात के लिए दिशानिर्देशों को युक्तिसंगत बनाने का प्रस्ताव भी किया है। दास ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार की बदलती स्थिति को देखते हुए तथा विदेशी मुद्रा विनियमन के प्रगतिशील उदारीकरण के अनुरूप वस्तुओं व सेवाओं के निर्यात और आयात पर मौजूदा फेमा दिशानिर्देशों को युक्तिसंगत बनाने का प्रस्ताव है। उन्होंने कहा कि इससे कारोबार की सरलता को बढ़ावा मिलेगा। अधिकृत डीलर बैंकों को परिचालन में अधिक जुझारू क्षमता मिलेगी। हितधारकों की प्रतिक्रिया के लिए जल्द ही मसौदा दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे।
मुंबई । भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चालू वित्त वर्ष 2024-25 के लिए मुद्रास्फीति के अनुमान 4.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। यह पिछले वित्त वर्ष 2023-24 के 5.4 प्रतिशत के अनुमान से कम है। हालांकि, इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने कहा कि खाने की कीमतों के परिदृश्य पर नजर रखने की जरूरत है। आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा पेश करते हुए कहा कि इस वर्ष मानसून की स्थिति को सामान्य मानते हुए चालू वित्त वर्ष के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति के 4.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। पहली तिमाही में मुद्रास्फीति के 4.9 प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 3.8 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 4.6 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 4.5 प्रतिशत रहने की संभावना है। मुद्रास्फीति को लेकर जोखिम समान रूप से संतुलित हैं। केंद्र सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधरित मुद्रास्फीति को चार प्रतिशत के स्तर पर रखने का लक्ष्य दिया है। दास ने कहा कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति मार्च-अप्रैल में नरम पड़ी है, लेकिन खाद्य मुद्रास्फीति पर लगातार दबाव की वजह से इसका लाभ नहीं मिल पाया है। दालों तथा सब्जियों की मुद्रास्फीति दो अंक में बनी हुई है। दालों तथा सब्जियों की रबी की आवक पर सावधानी से नजर रखने की जरूरत है।
नई दिल्ली। बाइक और कारों के टायर बनाने वाली चेन्नई की एमआरएफ कंपनी का शेयर भारत का सबसे महंगा स्टॉक है। अभी कंपनी के एक शेयर की कीमत करीब एक लाख 25 हजार रुपए है। लेकिन यह टायर बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी नहीं है। देश की सबसे बडी टायर कंपनी का खिताब बालकृष्ण इंडस्ट्रीज के नाम है। यह ऑफ-हाइवे टायर बनाती है। यानी यह एग्रीकल्चर टायर (ट्रैक्टर्स), इंडस्ट्रियल टायर (क्रेन, ग्रेडर) और ओटीआर टायर बनाती है। दुनिया की टॉप 13 कंपनियों में भारत की सबसे ज्यादा चार कंपनियां शामिल हैं। इनमें बालकृष्ण इंडस्ट्रीज, मद्रास रबर फैक्ट्री, अपोलो टायर्स और सिएट हैं। इस सूची में चीन की कोई भी कंपनी शामिल नहीं है। अमेरिका और जापान की दो-दो कंपनियों को इस सूची में जगह मिली है।
दुनिया में टायर बनाने वाली कंपनियों की सूची में टॉप पर जापान की कंपनी ब्रिजस्टोन है। फ्रांस की कंपनी मिशेलिन इस सूची में दूसरे नंबर पर है। तीसरे नंबर पर जर्मन कंपनी कोंटिनेंटल है। भारत की कंपनी बालकृष्ण इंडस्ट्रीज चौथे और एमआरएफ 5वें नंबर पर है। इटली की कंपनी पिरेली 6वें नंबर पर है। अमेरिकी कंपनी गुडईयर 7वें, दक्षिण कोरिया की हैनकुक टायर 8वें, भारत की अपोलो टायर 9वें, जापान की टोयो टायर 10वें, फिनलैंड की नोकियन टायर्स 11वें, भारत की सिएट 12वें और टाइटन इंटरनेशनल 13वें नंबर पर हैं।
ऑटोमोटिव टायर मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन के चेयरमैन अंशुमन सिंघानिया ने हाल में कहा था कि भारत की टायर इंडस्ट्री साल 2030 तक पांच 5 अरब डॉलर से ज्यादा एक्सपोर्ट का लक्ष्य तय किया है। पिछले चार साल में देश से टायर के एक्सपोर्ट में काफी तेजी आई है। भारत से 170 से ज्यादा देशों को टायर का एक्सपोर्ट किया जाता है। यूरोप, अमेरिका, ब्राजील, यूएई और यूके जैसे ग्लोबल मार्केट्स ने भारतीय टायरों का लोहा माना है। कॉमर्स मिनिस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक फाइनेंशियल ईयर 2023 में भारत से 23,125 करोड़ के टायर एक्सपोर्ट किए गए थे। भारत के टायर एक्सपोर्ट में अमेरिका की 25 फीसदी हिस्सेदारी है।
नई दिल्ली। टेलीकॉम डिपार्टमेंट ने स्पेक्ट्रम नीलामी की समय सीमा 19 दिन बढ़ा दी है यह नीलामी अब 25 जून होगी। विभाग की वेबसाइट पर यह जानकारी मिली है। नीलामी के लिए आवेदन आमंत्रित करने वाले नोटिस में किए गए संशोधन के मुताबिक कि लाइव नीलामी की शुरुआत की नई तारीख 6 जून से बदलकर 25 जून कर दी गई है। सरकार मोबाइल फोन सेवाओं के लिए करीब 96,317 करोड़ रुपए के आधार मूल्य पर 8 स्पेक्ट्रम बैंड की नीलामी करेगी। नीलामी में 800 मेगाहर्ट्ज, 900 मेगाहर्ट्ज, 1800 मेगाहर्ट्ज, 2100 मेगाहर्ट्ज, 2300 मेगाहर्ट्ज, 2500 मेगाहर्ट्ज, 3300 मेगाहर्ट्ज और 26 गीगाहर्ट्ज बैंड में उपलब्ध सभी स्पेक्ट्रम उपलब्ध हैं। रिलायंस जियो ने स्पेक्ट्रम नीलामी के लिए 3000 करोड़ रुपए की सबसे ज्यादा बयाना राशि जमा की है। इससे कंपनी मैक्सिमम रेडियो फ्रीक्वेंसी के लिए बोली लगा सकेगी। बोलीदाता के लिए पूर्व-पात्रता विवरण के मुताबिक भारती एयरटेल ने 1050 करोड़ रुपए और वोडाफोन आइडिया ने 300 करोड़ रुपए की बयाना राशि जमा कर दी है।
कंपनियों को जमा की गई बयाना राशि के आधार पर पॉइंट मिलते हैं। इसके आधार पर वे अपनी इच्छा अनुसार सर्किल की संख्या और स्पेक्ट्रम की मात्रा के लिए बोली लगा सकते हैं। हाई पॉइंट्स का मतलब बोली लगाने की उच्च क्षमता है। स्पेक्ट्रम 20 साल की अवधि के लिए दिया जाएगा और सफल बोलीदाताओं को 20 समान सालाना किस्तों में भुगतान करने की सुविधा होगी। टेलीकॉम डिपार्टमेंट ने आगामी नीलामी के माध्यम से प्राप्त स्पेक्ट्रम को न्यूनतम 10 साल की अवधि के बाद वापस करने का विकल्प है। अब 25 जून को देश में एक्टिव टेलीकॉम सर्विसेज प्रोवाइडर कंपनियां भारती एयरटेल, रिलायंस जियो इंफोकॉम, वोडाफोन-आइडिया जैसी कंपनियों को अगले 20 सालों के लिए 8 तरह के स्पेक्ट्रम बैंड के लिए बोली लगाने का मौका मिलेगा।
भारतीय रिजर्व बैंक ने विदेश में गिरवी रखे सोने को वापस मंगवा लिया है। आरबीआई ने ब्रिटेन से 100 टन गोल्ड वापस मंगवाया है। वर्ष 1991 में भारत ने बढ़त वित्तीय संकट को टालने के लिए ब्रिटेन में सोना भेजा था।
प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और भारत के प्रधान मंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल ने आज एक्स पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने अपने एक्स पोस्ट में लिखा कि भारत अब अपना अधिकांश सोना अपनी तिजोरियों में रखेगा।
विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि
आरबीआई ने बताया कि भारत के पास विशाल विदेशी मुद्रा भंडार है। आरबीआई द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार पिछले कारोबारी साल तक विदेशी मुद्रा भंडार में 822.10 टन सोना था। वहीं, फाइनेंशियल ईयर 2022-23 में विदेशी मुद्रा भंडार में 794.63 टन से ज्यादा का सोना था।
आपको बता दें कि साल 1991 में मौजूद सरकार ने वित्तीय संकट को निपटाने के लिए गोल्ड को गिरवी रखा था। इस साल आरबीआई ने बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ जापान के पास 46.91 टन सोना गिरवी रखा था ताकि वह 400 मिलियन डॉलर इकट्ठा कर पाए।
बैंकिंग विभाग की संपत्ति के रूप में रखे गए सोने का मूल्य 31 मार्च, 2023 तक 2,30,733.95 करोड़ रुपये से 19.06 प्रतिशत बढ़कर 31 मार्च, 2024 तक 2,74,714.27 करोड़ रुपये हो गया।
हर साल सोने की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। दुनिया में सोने की मांग में बढ़ोतरी हो रही है। सोने की कीमतों में इजाफा की वजह पश्चिम एशिया में लंबे समय तक चले भू-राजनीतिक संघर्ष भी है। वहीं, आरबीआई सहित कई केंद्रीय बैंकों द्वारा गोल्ड खरीदारी और भौतिक सोने की मांग में वृद्धि की वजह से भी गोल्ड की कीमतों में तेजी आई है।
वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंक सोने का भंडार बढ़ा रहे हैं, जिसे अक्सर मुद्रा की अस्थिरता और भू-राजनीतिक जोखिमों के खिलाफ बचाव के रूप में देखा जाता है।
चलन में मौजूद कुल मुद्रा में 500 रुपये मूल्य के नोटों की हिस्सेदारी मार्च, 2024 तक बढ़कर 86.5 फीसदी पहुंच गई। एक साल पहले की समान अवधि में यह 77.1 फीसदी थी। इस दौरान 2,000 रुपये के नोटों की हिस्सेदारी 10.8 फीसदी से घटकर सिर्फ 0.2 फीसदी रह गई।आरबीआई ने बृहस्पतिवार को जारी रिपोर्ट में कहा, पिछले साल मई में 2,000 रुपये के नोटों को वापस लेने की घोषणा के कारण 500 के नोटों का चलन बढ़ा है। वहीं, 2,000 रुपये के नोटों के चलन में गिरावट आई है। रिपोर्ट में साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, 31 मार्च, 2024 तक मात्रा के हिसाब से 500 रुपये के सबसे ज्यादा 5.16 लाख नोट चलन मौजूद थे। इस अवधि तक 10 रुपये के नोट 2.49 लाख संख्या के साथ दूसरे स्थान पर रहे।बैंक नोटों के मूल्य में 3.9 फीसदी बढ़ोतरी 2023-24 में चलन में मौजूद नोटों के मूल्य और मात्रा में क्रमशः 3.9 फीसदी व 7.8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। पिछले वित्त वर्ष में वृद्धि क्रमशः 7.8 फीसदी वa 4.4 फीसदी थी।मूल्य के लिहाज से चलन में मौजूद बैंक नोटों की संख्या में वृद्धि हाल के वर्षों में सबसे कम है।2,000 के 26,000 से अधिक नकली नोट पकड़े गए। एक साल पहले 9,806 नकली नोट चिह्नित किए गए थे।
भारतीय रिजर्व बैंक ने आज एनुअल रिपोर्ट (RBI Annual Report 2023-24) जारी की है। इस रिपोर्ट में आरबीआई ने अपनी बैलेंस शीट के साथ बैंक में जमा Unclaimed Deposit के बारे में भी जानकारी दी।
आरबीआई ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि 31 मार्च 2024 के अंत तक बैंकों के पास 78,213 करोड़ रुपये Unclaimed Deposit के तौर पर जमा है। लावारिस जमा राशि में साल दर साल के आधार पर 28 फीसदी की तेजी आई है। वित्त वर्ष 2023 के अंत में जमाकर्ता शिक्षा (Depositor Education) और जागरूकता कोष (Awareness Fund) की राशि 62,225 करोड़ रुपये थी।
आरबीआई ने 10 या अधिक वर्षों से अकाउंट में पड़ी राशि को आरबीआई ने जमाकर्ता शिक्षा और जागरूकता (डीईए) फंड में स्थानांतरित किया है। इस साल की शुरुआत में केंद्रीय बैंक ने देश के सभी बैंक को लावारिस जमा राशि के लिए दिशा-निर्देश दिये थे।
आरबीआई ने बैंकों निर्देश दिया था कि वह समय-समय पर इस तरह के अकाउंट की समीक्षा करें। इसके अलावा इन अकाउंट में हो रहे फ्रॉड से रोकने और शिकायतों के शीघ्र समाधान के लिए भी अहम कदम उठाए। इसके अलावा आरबीआई ने अकाउंट को दोबारा एक्टिव करने और क्लेम को निपटान के लिए भी अपनाई जाने वाले प्रोसेस की भी जानकारी दी है।
दरअसल, आरबीआई चाहता है कि बैंक में लावारिस जमा राशि कम हो। यह राशि उनके सही मालिकों/दावेदारों को वापस मिलनी चाहिए। आरबीआई द्वारा दिए गए निर्देश देश के सभी वाणिज्यिक बैंकों (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों सहित) और सभी सहकारी बैंकों पर 1 अप्रैल, 2024 से लागू हैं ।
Unclaimed Deposit के क्लेम के लिए आरबीआई ने UDGAM पोर्टल भी लॉन्च किया था। इस पोर्टल पर जाकर आसानी से लावारिस जमा राशि के लिए क्लेम किया जा सकता है।
कैसी है RBI Balance Sheet?
केंद्रीय बैंक की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2024 तक रिजर्व बैंक की बैलेंस शीट का आकार 11.08 प्रतिशत बढ़कर 70.47 लाख करोड़ रुपये हो गया। केंद्रीय बैंक ने सरकार को अब तक का सबसे अधिक लाभांश भुगतान हुआ। 31 मार्च 2023 तक 63.45 लाख करोड़ रुपये से अधिक 7,02,946.97 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई।
शेयर बाजार में लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण की वोटिंग से पहले बाजार ने गोता लगा दिया। गुरुवार को सेंसेक्स 617.30 (0.82%) अंकों की गिरावट के साथ 73,885.60 पर बंद हुआ। दूसरी ओर, निफ्टी 216.05 (0.95%) अंक फिसलकर 22,488.65 पर बंद हुआ। वायदा कारोबार की एक्सपायरी के दिन टेक महिंद्रा और टाइटन के शेयरों में तीन-तीन प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
गुरुवार के कारोबारी सत्र के दौरान सेंसेक्स 800 अंक (1%) फिसलते हुए दिन के सबसे निचले स्तर 73,668.73 पर पहुंच गया। वहीं निफ्टी 250 अंकों (1%) की गिरावट के साथ दिनभर के सबसे निचले स्तर 22,459.15 पर पहुंच गया।
गुरुवार को लगातार पांचवें दिन घरेलू बेंचमार्क इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। वहीं, घरेलू मुद्रा रुपया डॉलर के मुकाबले अपने तीन दिन की गिरावट के सिलसिले को थामते हुए बढ़त के साथ 83.3175 रुपये पर बंद हुआ। पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 83.4375 के स्तर बंद हुआ था।