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News Creation - बिज़नेस
बिज़नस

बिज़नस (3673)

नई दिल्ली । विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई ) ने अगस्त में घरेलू शेयर बाजार में केवल 7,320 करोड़ रुपये का निवेश किया। शेयरों के उच्च मूल्यांकन और बैंक ऑफ जापान के ब्याज दर बढ़ाने के बाद येन कैरी ट्रेड यानी निम्न ब्याज दर वाले वाले देश से कर्ज लेकर दूसरे देश की परिसंपत्तियों में निवेश के समाप्त होने के बीच उन्होंने सतर्क रुख अपनाया है। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के मुताबिक यह निवेश जुलाई में 32,365 करोड़ रुपये और जून में 26,565 करोड़ रुपये से काफी कम है। बाजार के जानकारों ने कहा ‎कि सितंबर में एफपीआई की घरेलू बाजार में रुचि बने रहने की संभावना है। हालांकि पूंजी प्रवाह को घरेलू राजनीतिक स्थिरता, आर्थिक संकेतक, वैश्विक ब्याज दर की स्थिति, बाजार मूल्यांकन, क्षेत्रीय प्राथमिकताओं और बॉन्ड बाजार के आकर्षण से दिशा मिलने की उम्मीद है। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के मुताबिक एफपीआई ने अगस्त में भारतीय इक्विटी में 7,320 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया। पिछले दो महीनों की तुलना में एफपीआई की रु‎चि कम होने का मुख्य कारण भारतीय बाजार में उच्च मूल्यांकन है। वित्त वर्ष 2024-25 की अनुमानित कमाई से 20 गुना अधिक पर निफ्टी कारोबार कर रहा है। इसके साथ, भारत अब दुनिया का सबसे महंगा बाजार है। बाजार के जानकारों ने कहा ‎कि एफपीआई के पास बहुत सस्ते बाजारों में निवेश करने के अवसर हैं और इसीलिए, उनकी प्राथमिकता भारत के अलावा अन्य बाजार हैं। इसके अलावा, 24 अगस्त को येन कैरी ट्रेड के समाप्त होने से एफपीआई व्यवहार पर काफी असर पड़ा, जिससे घरेलू इक्विटी में भारी बिकवाली हुई। दिलचस्प बात यह है कि एफपीआई शेयर बाजार बाजार में बिकवाली कर रहे हैं, जहां मूल्यांकन अधिक माना जाता है। वे अपने निवेश को प्राथमिक बाजार में लगा रहे हैं, जहां अपेक्षाकृत मूल्यांकन कम है। इस बीच एफपीआई ने अगस्त में बॉन्ड बाजार में 17,960 करोड़ रुपये का निवेश किया। बाजार के विशेषज्ञों का मानना ​​है कि वैश्विक बॉन्ड सूचकांकों में शामिल किये जाने, आकर्षक ब्याज दर, स्थिर आर्थिक वृद्धि और अनुकूल दीर्घकालिक दृष्टिकोण एफपीआई को बॉन्ड में निवेश करने के लिए प्रेरित करने वाले प्रमुख कारक रहे हैं।

 

नई दिल्ली । ब्राजील में एलन मस्क के एक्स प्लेटफॉर्म ने काम करना बंद कर दिया है, अब ब्राजील यूजर्स एक्स सेवा का उपयोग नहीं कर पाएंगे। मोबाइल और वेब वर्जन दोनों पर सेवाएं बदं कर दी गई हैं। ब्राजील के सुप्रीम कोर्ट के आदेश एक्स प्लेटफॉर्म की सर्विस ब्राजील में एक्सपायर हो गईं। ब्राजील सुप्रीम कोर्ट और मस्क के बीच में लंबे समय से विवाद चल रहा था। ब्राजील के सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस एलेक्जेंडर डि मोरियस ने पूरे देश में एक्स को बैन करने का आदेश जारी किया। ब्राजील में एक्स पर आरोप लग चुके हैं कि वह ब्राजील में तख्तापलट की खबरें व लोकतंत्र को कमजोर करने वाले कंटेंट को बढ़ावा दे रहे हैं।  दरअसल ब्राजील के जस्टिस डि मोरियस ने बुधवार को मस्क इस एक्स कंपनी को ऑर्डर दिया कि वह 24 घंटे के अंदर एक कानूनी अधिकारी अपॉइंट करें, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। इसके बाद ब्राजील के सुप्रीम फेडरल कोर्ट ने शुक्रवार को पूरे देश में एक्स को बैन करने का आदेश जारी किया और 18 मिलियन रियाल (लगभग 40 करोड़ रुपये) का जुर्माना भी लगाया। ब्राजील कोर्ट ने नेशनल टेलीकम्युनिकेशन एजेंसी को 24 घंटे के अंदर ब्लॉक करने का आदेश दिया। साथ ही एप्पल और गूगल को ऑनलाइन प्ले स्टोर्स से इस एक्स ऐप को हटाने का 5 दिन के अंदर आदेश दिया। मस्क ने इस पूरे मामले को लेकर पोस्ट किया और एक्स पर पोस्ट करके कहा कि ब्राजील के वर्तमान प्रशासन के तहत निवेश करना पागलपन है। जब नई लीडरशिप आएगी, तब इसमें बदलाव आएगा। कोर्ट के आदेश में आगे कहा कि बैन के बाद अगर कोई कंपनी या संस्था एक्स को चलाने के लिए वीपीएन आदि का इस्तेमाल करके चलाती है, तो उस पर 50 हजार रियाल (करीब 11 लाख रुपये) का

 

कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 80 डॉलर प्रति डॉलर के पार पहुंचने के बीच घरेलू शेयर बाजार में सपाट शुरुआत हुई। शुरुआती कारोबार में जहां सेंसेक्स में 30 अंकों की बढ़त दर्ज की गई वहीं निफ्टी 25000 के स्तर पर टिके रहने पर सफल रहा।

 

सुबह 10 बजकर 23 मिनट पर सेंसेक्स 49.04 (0.06%) अंकों की बढ़त के साथ 81,744.14 पर जबकि निफ्टी 9.41 (0.04%) अंकों की बढ़त के साथ 25,020.00 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। 

 

व्यापक बाजार में खरीदारी दिख रही है। आईटी, फर्मा, कंज्यूमर और मीडिया सेक्टर के शेयर हरे निशान पर कारोबार कर रहे हैं। ब्लूचिप कंपनियों में एचसीएलटेक टॉप गेनर्स के रूप में कारोबार कर रहा है। इसमें 1.5% की बढ़त दर्ज की गई। टाटा समूह के शेयरों में रिटेलर ट्रेंट के शेयर जिसे निफ्टी में 30 सितंबर से जगह मिलने जा रही है निवेशकों की नजर बनी हुई है। कंपनी ने 470 करोड़ रुपये की ब्लॉक डील की है।

 

आयात शुल्क में पर्याप्त कटौती से सोने की कीमतें अधिक आकर्षक हो गई हैं। इससे आगामी त्योहारी सीजन में देश में सोने की मांग मजबूत रहने की उम्मीद है।

 

विश्व स्वर्ण परिषद के सीईओ सचिन जैन ने कहा, सोने पर आयात शुल्क को 15 फीसदी से घटाकर 6 फीसदी करने से खुदरा उपभोक्ताओं को राहत मिली है और खरीदारी को बढ़ावा मिला है। मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स के भारतीय परिचालन के प्रबंध निदेशक अशर ओ ने कहा, शुल्क कटौती से खुदरा उपभोक्ताओं के बीच धारणा बदल गई है, जो मूल्य वृद्धि के कारण खरीदारी टाल रहे थे। उन्होंने कहा, शुल्क कटौती के बिना सोने की कीमतें 80,000 रुपये से ऊपर नई रिकॉर्ड ऊंचाई को छू सकती थीं, लेकिन अब वे उच्चतम स्तर से नीचे कारोबार कर रही हैं।

 

अधिक आयात से बढ़ सकता है व्यापार घाटा

 

भारत में सोने की बढ़ती मांग वैश्विक कीमतों में तेजी को बढ़ावा दे सकती है, जो पिछले सप्ताह रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थी। हालांकि, सोना आयात की बढ़ती मांग भारत के व्यापार घाटे को बढ़ा सकती है और रुपये पर दबाव डाल सकती है। सोने की वैश्विक कीमतें पिछले सप्ताह रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गईं, लेकिन भारत में घरेलू कीमतें सोमवार को 71,800 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास थीं।

मार्केट रेगुलेटर सेबी ने कारोबारी अनिल अंबानी और 24 अन्य एंटिटीज को सिक्योरिटीज मार्केट से पांच साल के प्रतिबंधित कर दिया है। इनमें रिलायंस होम फाइनेंस के पूर्व प्रमुख अधिकारी भी शामिल हैं। सेबी ने अनिल अंबानी पर 25 करोड़ रुपये की पेनल्टी भी लगाई है। वह अगले पांच साल तक किसी भी लिस्टेड कंपनी में निदेशक या अन्य बड़ी भूमिका में नहीं जुड़ सकेंगे। सेबी ने ने रिलायंस होम फाइनेंस को 6 महीने के लिए सिक्योरिटीज मार्केट से प्रतिबंधित किया है और 6 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इन पर रिलायंस होम के फंड का डायवर्जन करने का आरोप था।

 

अनिल अंबानी पर क्यों लगा बैन?

 

सेबी ने पाया कि अनिल अंबानी ने रिलायंस होम फाइनेंस के सीनियर अधिकारियों की मदद से पैसों का गबन करने के लिए धोखाधड़ी की साजिश रची। कंपनी के बोर्ड ने सख्त निर्देश दे रखा था कि नियमों की अनदेखी करके कर्ज न दिया जाए। लेकिन, रिलायंस होम फाइनेंस के मैनेजमेंट ने सभी नियमों को ताक पर रखकर फंड का डायवर्जन किया। सेबी का कहना है कि इस साजिश के जरिए लिस्टेड कंपनियों से धन की हेराफेरी की गई है और अयोग्य उधारकर्ताओं को कर्ज के रूप में दिया गया है, जो अनिल अंबानी से जुड़ी कंपनियों के प्रमोटर थे।

 

सेबी ने अपने आदेश में मैनेजमेंट और प्रमोटर के लापरवाह रवैये का जिक्र किया। मार्केट रेगुलेटर ने कहा कि इन लोगों ने ऐसी कंपनियों को कर्ज दिया, जिनके पास न तो कोई असेट थी, न कैश फ्लो और रेवेन्यू। सेबी के मुताबिक, इससे जाहिर होता है कि कर्ज देने के पीछे कोई गलत मकसद था। स्थिति और भी संदिग्ध तब हो गई, जब हमने इस बात पर गौर किया कि इनमें से कई कर्जदार रिलायंस होम फाइनेंस के प्रमोटरों से करीबी तौर पर जुड़े हुए हैं।

 

निवेशकों को हुआ भारी नुकसान

 

रिलायंस होम फाइनेंस ने नियमों की अनदेखी करके कर्ज बांटे थे। इससे अधिकतर उधारकर्ता अपना लोन चुकाने में नाकाम रहे। इसका नतीजा यह हुआ कि रिलायंस होम फाइनेंस अपनी खुद की देनदारी पर डिफॉल्ट कर गई। फिर आरबीआई के नियमों के मुताबिक कंपनी को रिजॉल्यूशन प्रोसेस से गुजरना पड़ा और शेयरहोल्डर मुश्किल में फंस गए।

 

मार्च 2018 में रिलायंस होम फाइनेंस के शेयर मूल्य करीब 60 रुपये था। मार्च 2020 तक धोखाधड़ी का मामला खुलने के बाद कंपनी वित्तीय तौर बदहला हो गई, उसके रिसोर्स खत्म हो गए, तो शेयर की कीमत गिरकर केवल 0.75 रुपये रह गई। अब भी नौ लाख से अधिक लोगों ने रिलायंस होम फाइनेंस में निवेश कर रखा है और उन्हें भारी नुकसान का उठाना पड़ रहा है।

 

हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन घरेलू शेयर बाजार सपाट बंद हुआ। शुक्रवार के कारोबारी सत्र में शुरुआती उतार-चढ़ाव के बाद 30 शेयरों का बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स 33.02 (0.04%) अंकों की बढ़त के साथ 81,086.21 पर बंद हुआ। वहीं, दूसरी ओर 50 शेयरों वाले एनएसई निफ्टी में 11.66 (0.05%) अंकों की बढ़त के साथ 24,823.15 पर बंद हुआ। शुक्रवार के कारोबारी सत्र के दौरान बजाज ऑटो के शेयरों में 5% की बढ़त दर्ज की गई, वहीं सीआईआई 2% तक उछाला।

नई दिल्ली । देश के शेयर बाजार पर नजर रखने वाली संस्था भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) को बकाया वसूलने में बड़ी क‎ठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। 76,000 करोड़ से भी अ‎धिक की बकाया राशि ऐसी हैं, ‎जिन्हें वसूलना सेबी के ‎लिए चुनौती बन गया है। यह रकम पिछले साल की तुलना में चार फीसदी बढ़ गई है। ये पैसे दरअसल उन निवेशकों के हैं, जिन्होंने पीएसीएल और सहारा इंडिया जैसी कंपनियों में ‎निवेश ‎किया था लेकिन ये कंपनियां लोगों के पैसे लेकर रफू चक्कर हो गईं। अब सेबी को इन पैसों को ‎निवेशकों को वापस दिलाने में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस‎लिए सेबी को कहना पड़ा है कि इन्हें वापस पाना लगभग असंभव सा लग रहा है। एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट में कहा गया है कि सेबी को मार्च 2024 तक 76,293 करोड़ रुपये की ऐसी रकम मिली है, जिसे वसूलना बेहद मुश्किल हो रहा है। ये रकम पिछले साल के मुकाबले 4 फीसदी ज्यादा है। इस रकम का बड़ा हिस्सा उन मामलों से जुड़ा है, जिनकी सुनवाई अदालतों में चल रही है। रिपोर्ट में बताया गया है कि ऐसे कुल 807 मामले हैं, जिनमें से 36 मामले राज्य स्तरीय अदालतों, नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) और नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) में लंबित हैं। इन मामलों में अटकी हुई रा‎शि लगभग 12,199 करोड़ रुपये है। इसके अलावा 60 मामले अदालत द्वारा नियुक्त समितियों के पास हैं, जिनमें करीब 59,970 करोड़ रुपये अटके हुए हैं। साथ ही लगभग 140 मामले ऐसे हैं, जिनमें संबंधित लोगों का पता ही नहीं चल पा रहा है। इनमें से 131 व्यक्तिगत मामले हैं और 9 कंपनियों से जुड़े हैं। सेबी ने कहा कि अब तक कुल 6,781 रिकवरी सर्टिफिकेट जारी किए गए हैं, जिनमें से 3,871 अभी भी लंबित हैं। कुल मिलाकर सेबी को करीब एक लाख करोड़ रुपये वसूल करने हैं। इसमें जुर्माना न भरने वाली कंपनियों के साथ-साथ उन निवेशकों का पैसा भी शामिल है, जिन्हें पैसा वापस मिलना था। पीएसीएल और सहारा इंडिया के मामलों में सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इन दोनों कंपनियों के ‎विरुद्ध ‎निवेश योजना से जुड़े मामले हैं, जिनमें करीब 63,206 करोड़ रुपये अटके हुए हैं।

नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने नई दिल्ली में आयोजित भारत-मलयेशिया सीईओ फोरम की बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग को मजबूत करने महत्व पर जोर दिया। केंद्रीय मंत्री गोयल ने हाल ही में बैठक में ऐसे कई क्षेत्रों पर प्रकाश डाला, जहां दोनों देश अधिक गहराई से सहयोग कर सकते हैं, जिससे उनके व्यापार और व्यावसायिक संबंधों का विस्तार हो सकता है। फोरम ने दोनों देशों के व्यापारिक नेताओं को आपसी अवसरों का पता लगाने और विकास को बढ़ावा देने की रणनीतियों पर चर्चा करने के लिए कए मंच प्रदान किया। गोयल ने भारत और मलयेशिया में व्यवसायों के बीच अधिक तालमेल की संभावना पर प्रकाश डाला, विशेष रूप से शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, बुनियादी ढांचे, पर्यटन, डिजिटल अर्थव्यवस्था, ई-कॉमर्स और स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में, उन्होंने दोनों देशों के बीच साझेदारी को और मजबूत करने के लिए इन क्षेत्रों में दोनों देशों की ओर से संयुक्त प्रयास किए जाने के महत्व पर जोर दिया।

 

फार्मास्युटिकल कंपनी Aurobindo Pharma का शेयर शुक्रवार यानी 16 अगस्त को 6.39 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,422 रुपये प्रति शेयर के निचले स्तर पर पहुंच गया।

हालांकि, सुबह 10:47 बजे अरबिंदो फार्मा के शेयर दिन के निचले स्तर पर थे लेकिन बाद में 2.62 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,479.45 रुपये प्रति शेयर पर कारोबार करते रहे। इसकी तुलना में बीएसई सेंसेक्स 0.52 फीसदी बढ़कर 79,518.81 के स्तर पर कारोबार कर रहा था।

शेयर की कीमत में गिरावट कंपनी की उस घोषणा के बाद आई है जिसमें उसने बताया है कि उसकी एक शाखा यूजिया फार्मा स्पेशलिटीज यूनिट-III को USFDA से एक चेतावनी का पत्र मिला है।

Pharma ने शेयर बाजार को दी सूचना में कहा, ‘‘OAI के बाद इकाई को एक चेतावनी पत्र मिला है।’’ कंपनी ने इस चेतावनी को लेकर विस्तृत जानकारी साझा नहीं की और हालांकि कहा, ‘‘अमेरिकी बाजारों में मौजूदा आपूर्ति पर इससे कोई असर नहीं होगा।’’

Aurobindo Pharma ने कहा कि वह यूएसएफडीए के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है और निरंतर आधार पर अपने अनुपालन को बढ़ा रही है।

गौरतलब है कि यूएसएफडीए के अधिकारियों ने 22 जनवरी से दो फरवरी 2024 तक तेलंगाना में यूजिया फार्मा स्पेशलिटीज लिमिटेड की विनिर्माण सुविधा यूनिट-III का निरीक्षण किया था। इसके बाद, FDA ने इस सुविधा की निरीक्षण वर्गीकरण स्थिति को आधिकारिक कार्रवाई संकेतित OAI निर्धारित किया था।

 

बैंकिंग और आईटी शेयरों में मजबूती के कारण घरेलू शेयर बाजार शुक्रवार को अच्छी बढ़त के साथ बंद हुए। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन 30 शेयरों का प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स बीएसई सेंसेक्स 1,330.96 (1.68%) अंकों की बढ़त के साथ 80,436.84 पर बंद हुआ। दूसरी ओर, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 397.41 (1.65%) अंक उछलकर 24,541.15 के स्तर पर बंद हुआ।

भारतीय शेयर बाजार का प्रमुख बेंचमार्क सेंसेक्स हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन दो सप्ताह से अधिक के उच्चतम स्तर पर बंद हुआ। आईटी शेयरों और रिलायंस इंडस्ट्रीज में खरीदारी और वैश्विक शेयरों में तेज के बाद बाजार में मजबूती आई। सेंसेक्स दिन के कारोबार के दौरान 1,412.33 अंक या 1.78 प्रतिशत बढ़कर 80,518.21 के स्तर पर पहुंचा। शुक्रवार के कारोबारी सत्र के दौरान बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 7.17 लाख करोड़ रुपये बढ़कर 451.46 लाख करोड़ रुपये हो गया।

सेंसेक्स की कंपनियों में से टेक महिंद्रा, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा मोटर्स, अल्ट्राटेक सीमेंट, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, आईसीआईसीआई बैंक और टाटा स्टील सबसे ज्यादा लाभ में रहीं। एकमात्र सन फार्मा के शेयर लाल निशान पर बंद हुए। सभी क्षेत्रीय सूचकांक हरे निशान में बंद हुए।

बीएसई मिडकैप में 1.8 फीसदी की तेजी आई, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स में 1.7 फीसदी की तेजी आई। एशियाई बाजारों में सियोल, टोक्यो, शंघाई और हांगकांग में काफी तेजी रही। यूरोपीय बाजार ज्यादातर हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। इससे पहले गुरुवार को अमेरिकी बाजार तेज बढ़त के साथ बंद हुए।

जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, "जेपीवाई की स्थिरता वैश्विक बाजार में सुधार लाने में सहायक रही है। इसके अलावा, मजबूत अमेरिकी खुदरा बिक्री और साप्ताहिक बेरोजगारी दावों में गिरावट ने अमेरिकी मंदी की आशंकाओं को कम करने में मदद की है। इसके अलावा, अमेरिकी सीपीआई मुद्रास्फीति में कमी के कारण बाजार की धारणा में सुधार हुआ है। इसी पृष्ठभूमि में, भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी दिखी।"

विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने इससे पहले बुधवार को 2,595.27 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 2,236.21 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे।

वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 1.22 प्रतिशत गिरकर 80.05 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार बंद रहे। बुधवार को बीएसई बेंचमार्क 149.85 अंक या 0.19 प्रतिशत चढ़कर 79,105.88 पर बंद हुआ। एनएसई निफ्टी 4.75 अंक या 0.02 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 24,143.75 पर बंद हुआ था।

 

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