ईश्वर दुबे
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जेनेवा । पेरिस जलवायु समझौते के तहत यदि बिना शर्त वाली सभी मौजूदा प्रतिबद्धताओं को पूरा कर लिया जाता है तो भी इस सदी के अंत तक वैश्विक तापमान में 3.2 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होने का अनुमान है। संयुक्त राष्ट्र की एक नयी रिपोर्ट में यह चेतावनी दी गई। इसमें यह भी कहा गया है कि इस तरह की स्थिति से जलवायु पर ज्यादा विनाशकारी असर देखने को मिलेगा। संयुक्त राष्ट्र जलवायु कार्यक्रम के वार्षिक उत्सर्जन अंतराल रिपोर्ट के मुताबिक सभी देशों को अपने प्रतिबद्ध योगदान (एनडीसी) महत्वाकांक्षाओं को तीन गुना बढ़ाना चाहिए ताकि दो डिग्री सेल्सियस से नीचे के लक्ष्य को हासिल किया जा सके। साथ ही, 1.5 डिग्री सेल्सियस लक्ष्य को हासिल करने के लिए पांच गुना से अधिक योगदान (एनडीसी) करना चाहिए।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई कि पेरिस समझौते के अंतर्गत अगर सभी बिना शर्त वाली प्रतिबद्धताओं को पूरा कर लिया जाता है तो इस सदी के अंत तक तापमान में 3.2 डिग्री बढ़ोतरी होने का अनुमान है। अगर सशर्त एनडीसी को भी प्रभावी तरीके से लागू किया जाए तो तापमान में करीब 0.2 डिग्री सेल्सियस की कमी की संभावना है। वैश्विक स्तर पर ग्रीन हाउस गैस में 7.6 फीसदी की कमी की जानी चाहिए, ताकि पेरिस समझौते के मुताबिक वैश्विक तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस तापमान वृद्धि रखने के लक्ष्य को पूरा किया जा सके। रिपोर्ट में कहा गया है कि जब तक वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 2020 और 2030 के बीच प्रति वर्ष 7.6 फीसदी की कमी नहीं होती है तब तक पेरिस समझौते के तहत डेढ़ डिग्री सेल्सियस तापमान के लक्ष्य को पूरा नहीं किया जा सकेगा।
तेल अवीव । दो चुनाव में असफलता हासिल करने और अब करप्शन के आरोप झेल रहे इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के समर्थन में उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने तख्ता पलट रोको लिखी रैली निकाली। हालांकि, नेतन्याहू के समर्थन में आयोजित इस रैली में ज्यादा संख्या में लोग नहीं जुटे। नेतन्याहू की लिकुड पार्टी के इस प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं के अलावा आम लोगों का साथ नहीं मिला। प्रदर्शन में कुछ वरिष्ठ सांसद और कैबिनेट मंत्री ही मौजूद रहे। बीते गुरुवार को नेतन्याहू पर भ्रष्टाचार के मामले में आरोप तय किए गए थे। अटॉर्नी जनरल ने उनके खिलाफ आरोप तय किए हैं। माना जा रहा है कि इस घटना के बाद देश की सत्ता पर नेतन्याहू की पकड़ कमजोर हो जाएगी। इजरायली मीडिया का कहना है कि प्रदर्शन में महज 2 से 3 हजार लोग ही मौजूद थे। हालांकि लिकुड पार्टी ने इस आंदोलन में 15,000 लोगों के शरीक होने का दावा किया है। आंदोलन में शामिल होने आए 70 वर्षीय रॉन नहमानी ने कहा इस कवायद के पीछे निर्वाचित प्रधानमंत्री को पद से हटाने की कोशिश है।
रैली को संबोधित करते हुए लिकुड पार्टी के सांसद मिकि जोहर ने कहा देश की न्यायिक व्यवस्था वामपंथी साजिश का शिकार हो रही है। दूसरी तरफ इस पर तंज कसते हुए विपक्षी ब्लू एंड वाइट पार्टी के नेता बेन्नी गांट्स ने ट्वीट किया, किसी भी स्वस्थ लोकतंत्र में प्रधानमंत्री न्यायिक व्यवस्था के खिलाफ प्रदर्शन नहीं करता।
वाशिंगटन । अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के वैज्ञानिक एलियन खोजने की तैयारी कर रहे हैं। एलियन की खोज 2025 में शुरू की जाएगी इसके लिए नासा के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा रोवर बनाया है जो बृहस्पति ग्रह के चंद्रमा यूरोपा के समुद्र में गोते लगाएगा। इस रोवर का नाम है ब्रूई। नासा ने इस रोवर का हाल ही में अंटार्कटिका के ठंडे समुद्र में परीक्षण किया गया। इस रोवर ने समुद्र में जमे हुए बर्फ के नीचे काफी देर तक गोता लगाया। दो पहियों और दो कैमरे वाला यह ब्रूई रोवर एक बार चार्ज करने पर महीनों तक चल सकता है। इसकी टेस्टिंग अंटार्कटिका स्थित ऑस्ट्रेलिया के केसी रिसर्च स्टेशन की सतह पर की जा रही है। ब्रूई रोवर बर्फीले समुद्र और सतह पर चलने के लायक बनाया गया है क्योंकि माना जाता है कि बृहस्पति ग्रह के चंद्रमा यूरोपा पर बर्फीली सतह के साथ-साथ बर्फीला समुद्र भी है।
वाशिंगटन. अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने कहा कि हाल में लीक हुए दस्तावेजों से पता चला है कि चीन सरकार ने अशांत शिनजियांग प्रांत में मुस्लिमों और अन्य अल्पसंख्यकों को ‘क्रूरता से हिरासत शिविरों में बंद कर रखा है और वह उनका सुनियोजित तरीके से दमन कर रही है. पोम्पिओ ने कहा कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी हिरासत शिविरों में मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन कर रही है.
विदेश मंत्रालय में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए पोम्पिओ ने कहा कि दुनियाभर के देश अब यह जान रहे हैं कि चीन में क्या हो रहा है. ये देश शिनजियांग में लोगों के लिए मानवाधिकारों के हालात में सुधार करने के वास्ते अमेरिका के साथ मिलकर काम कर रहे हैं.
पोम्पिओ ने चीन सरकार से उन सभी लोगों को फौरन रिहा करने का आह्वान किया जिन्हें मनमाने ढंग से हिरासत में लिया गया और साथ ही उससे अपनी कठोर नीतियों को भी खत्म करने को कहा है जिससे शिनजियांग में उसके अपने ही नागरिक भयभीत हैं.
उन्होंने कहा कि चीन की सरकार ने ईसाइयों, तिब्बतियों और अन्य अल्पसंख्यक समूहों का भी दमन किया. पोम्पिओ ने कहा, हमने हाल फिलहाल में जारी हुए शिनजियांग पेपर्स देखे हैं. इनमें चीन सरकार की शिनजियांग में उइगरों और अन्य मुस्लिम अल्पसंख्यक समूहों के सदस्यों को क्रूर ढंग से हिरासत में लेने और उनके सुनियोजित दमन के बारे में जानकारी दी गई है. उन्होंने कहा कि ये रिपोर्टें इस बात का सबूत है कि चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन कर रही है.
कोलंबो. श्रीलंका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे ने कहा कि श्रीलंका, भारत के साथ मिलकर काम करेगा और वह ऐसा कुछ भी नहीं करेगा, जिससे भारत के हितों को नुकसान पहुंचे. गोतबया राजपक्षे ने इस सप्ताह के अंत में 29 नवंबर को अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर नई दिल्ली आ रहे हैं. चीन के समर्थक माने जाने वाले राजपक्षे ने कहा कि वे चाहते हैं कि श्रीलंका एक तटस्थ देश बने और सभी देशों के साथ मिलकर काम करे. राजपक्षे ने कहा कि हम भारत के साथ मित्रवत देश के रूप में काम करेंगे और ऐसा कुछ भी नहीं करेंगे, जिससे भारत के हितों को नुकसान पहुंचे.
उन्होंने कहा कि हम एक तटस्थ देश बनना चाहते हैं. हम महाशक्तियों के शक्ति संघर्षों के बीच नहीं आना चाहते हैं. हम बहुत छोटे देश हैं और हम इस संतुलनकारी कृत्यों में शामिल होने के बाद जिंदा नहीं रह सकते हैं. राजपक्षे ने कहा कि वह भारत और चीन, दोनों के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं. हम सभी देशों के साथ काम करना चाहते हैं और हम ऐसा कुछ भी नहीं करना चाहते हैं, जो उस मामले के लिए किसी अन्य देश को नुकसान पहुंचाए. हम भारतीय चिंताओं के महत्व को समझते हैं, इसलिए हम किसी भी गतिविधि में संलग्न नहीं हो सकते हैं, जिससे भारत की सुरक्षा को खतरा हो.
राजपक्षे ने कहा कि हिंद महासागर एक महत्वपूर्ण स्थान है और वर्तमान भू-राजनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. श्रीलंका ऐसी जगह पर स्थित है, जिसका रणनीतिक महत्व बहुत अधिक है और पूर्व से पश्चिम तक सभी समुद्री लेन देश के करीब से गुजर रही हैं. उन्होंने कहा कि इन समुद्री गलियारों को मुक्त होना चाहिए और किसी भी देश को इन्हें नियंत्रित नहीं करना चाहिए.
चीन के साथ भागीदारी विशुद्ध व्यावसायिक
उन्होंने कहा कि बड़े भाई महिंदा राजपक्षे के राष्ट्रपति रहने के दौरान साल 2005 से 2015 के बीच में चीन के साथ श्रीलंका की भागीदारी विशुद्ध रूप से व्यावसायिक थी. उन्होंने कहा कि मैंने भारत, सिंगापुर, जापान और ऑस्ट्रेलिया को यहां आने और निवेश करने के लिए आमंत्रित किया है. केवल चीन को देश में निवेश करने की इजाजत नहीं दे सकते हैं.
उन्होंने श्रीलंका में निवेश के अनुकूल माहौल बनाने की बात कही. राजपक्षे ने यह भी कहा कि हंबनटोटा बंदरगाह को चीन को 99 साल की लीज पर देना, राष्ट्र्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना के नेतृत्व वाली पिछली सरकार की गलती थी. उन्होंने कहा कि इस सौदे पर फिर से बात करनी होगी.
निवेश के लिए एक छोटा सा ऋण देना अलग बात है, लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण एक आर्थिक बंदरगाह देना स्वीकार्य नहीं है. इसे हमें नियंत्रित करना चाहिए.
अमेरिकी रक्षा मंत्री मार्क एस्पर ने सोमवार (25 नवंबर) को कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध अपराध के आरोपी एक नौसैनिक सील कर्मचारी को 'सील' का दर्जा गंवाए बिना सेवानिवृत्त करने का निर्देश दिया था। रक्षा मंत्रालय में एस्पर ने संवाददाताओं से कहा कि ट्रंप के मौखिक आदेश के कारण ही एस्पर ने रविवार (24नवंबर) को घोषणा की थी कि एडवर्ड गैलाघेर 'सील' का अपना दर्जा कायम रखते हुए सेवानिवृत्त होंगे।
पिछले सप्ताह ट्रंप ने ट्वीट किया था कि वह चाहते हैं कि गैलाघेर सील के कर्मचारी के तौर पर सेवानिवृत्त हों, लेकिन सोमवार (25 नवंबर) को एस्पर की टिप्पणी से खुलासा हुआ कि ट्रंप ने रक्षा मंत्री को इस संबंध में सीधा आदेश दिया था। गैलाघेर को इस्लामिक स्टेट के आतंकवादी बंदी की छुरा घोंपकर हत्या करने के मामले में बरी कर दिया गया था, लेकिन 2017 में इराक में लाश को साथ रखने का दोषी पाया गया था।
अपनी टिप्पणी में एस्पर ने नौसैन्य सचिव रिचार्ड स्पेंशर पर आरोप लगाया कि उन्होंने नौसेना अनुशासनिक प्रक्रिया में हेराफेरी के लिए व्हाइट हाउस को गुप्त प्रस्ताव दिया था ताकि गैलाघर का दर्जा खत्म ना हो। एस्पर ने रविवार (24 नवंबर) को स्पेंशर को हटाते हुए कहा कि उन्होंने भरोसा खो दिया है।
चीन सरकार ने 10 लाख से अधिक उइगुरों, कजाक और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों को हिरासत में ले रखा है जिसे वह स्वैच्छिक कार्य प्रशिक्षण कहता है।
हालांकि, हाल में सामने आया एक गोपनीय दस्तावेज कहता है कि चीन द्वारा देश के सुदूर पश्चिम शिनजियांग क्षेत्र में चलाए जा रहे ये ऐसे गोपनीय केंद्र हैं, जहां लोगों को विचारधारा परिवर्तन और व्यावहारिक पुनर्शिक्षा के लिए विवश किया जाता है।
अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों के एक समूह तक पहुंचा लीक हुआ दस्तावेज अल्पसंख्यकों, ज्यादातर मुस्लिमों को हवालात में रखने, उनके विचारों और यहां तक कि उनकी भाषा को बदलने की चीन की सुनियोजित रणनीति के बारे में बताता है।
दस्तावेज कहता है कि लोग भाग न सकें, इसके लिए निगरानी टॉवर लगे हैं, दोहरे ताले वाले दरवाजे हैं और हर समय सीसीटीवी से निगरानी की जाती है।
पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट की तरफ बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने जनरल बाजवा के कार्यकाल विस्तार की अधिसूचना को कल तक के लिए निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख समेत सभी पक्षों को नोटिस जारी किया है।
गौरतलब है कि जनरल बाजवा पाकिस्तान सेना प्रमुख के पद से 29 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। अब इस मामले की सुनवाई बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी गई है। सुनवाई के दौरान पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि स्पष्ट रूप से सेना प्रमुख के कार्यकाल विस्तार के लिए दिया गया सारांश और मंजूरी सही नहीं है।
इसी वर्ष 19 अगस्त को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने जनरल बाजवा के कार्यकाल को अगले तीन वर्षों के लिए बढ़ा दिया था। प्रधानमंत्री कार्यलय द्वारा जारी किए गए अधिसूचना में कहा गया था कि 'जनरल कमर जावेद बाजवा को वर्तमान कार्यकाल पूरा होने की तारीख से तीन साल के एक और कार्यकाल के लिए सेनाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।'
सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने कहा कि केवल पाकिस्तान के राष्ट्रपति के पास ही यह शक्ति है कि वह सेना प्रमुख के कार्यकाल को बढ़ा सके। वहीं, अटॉर्नी जनरल अनवर मंसूर खान ने अदालत को बताया कि राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ही सेना प्रमुख का कार्यकाल बढ़ाया गया था। साथ ही इसके लिए कैबिनेट ने सारांश को मंजूरी दी थीं।
जिसके जवाब में पाकिस्तानी न्यायाधीश ने कहा कि कार्यकाल विस्तार को 25 कैबिनेट सदस्यों में से केवल 11 ने ही मंजूरी दी थीं। उन्होंने आगे कहा कि मंत्रिमंडल के 14 सदस्यों ने अनुपलब्धता के कारण कोई राय नहीं दी।
बता दें कि इसी साल 19 अगस्त को इमरान ने बाजवा के सेनाध्यक्ष के रूप में कार्यकाल के विस्तार को मंजूरी दी थी। अगस्त में प्रधानमंत्री इमरान खान के कार्यालय द्वारा जारी एक अधिसूचना में कहा गया कि जनरल कमर जावेद बाजवा को मौजूदा कार्यकाल पूरा होने की तारीख से तीन साल के लिए एक और कार्यकाल के लिए सेनाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इस अधिसूचना में कहा गया था कि यह फैसला क्षेत्रीय सुरक्षा माहौल को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
हांगकांग में जिला परिषद चुनाव में रविवार (24 नवंबर) को रिकॉर्ड मतदान हुआ। वोटिंग के लिए भारी संख्या में लोग घरों से बाहर निकलकर केंद्र तक पहुंचे। मतदान खत्म होने तक (8.30 बजे) रिकॉर्ड 66.5 फीसदी वोटिंग हुई। इससे बीजिंग समर्थित सरकार पर लोकतंत्र समर्थक आंदोलन का दबाव बढ़ेगा। चुनाव में हुए भारी मतदान चीन के लिए शुभ संकेत नहीं हैं।
पिछले कई महीनों से हांगकांग अशांत है। निर्वाचन मामलों के आयोग ने कहा कि मतदान के लिए 41 लाख लोग पंजीकृत हैं। जब से हांगकांग को चीन को सौंपा गया तब से अब तक जिला परिषद चुनाव के इतिहास में इस बार सबसे ज्यादा मतदान हुआ है। 2015 में हुए चुनाव में 47 फीसदी वोटिंग हुई थी। विरोध प्रदर्शन के बावजूद चुनाव के दौरान कहीं से कोई अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।
विपक्ष अच्छा प्रदर्शन करता है तो: जिला परिषद चुनाव में अगर विपक्ष अच्छा प्रदर्शन करता है तो इससे पता चलेगा कि जनता अब भी लोकतंत्र समर्थक आंदोलन के साथ है। यह संदेश चीन के खिलाफा। इसका सीधा असर आंदोलन पर पड़ेगा और आने वाले समय में विरोध प्रदर्शन बढ़ेगा।
चीन की उम्मीद: हांगकांग में सत्तारूढ़ खेमे और चीन सरकार को उम्मीद है कि दैनिक जनजीवन में अशांति और बाधा के चलते मतदाता इस आंदोलन के खिलाफ वोट देंगे।
बदलाव के लिए घरों से बाहर निकले
19 वर्षीय माइकल नग ने कहा कि हमने बदलाव के लिए मतदान किया है। उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि इससे समाज में बदलाव आएगा। हालांकि किसी न किसी तरह से मैं आदोलंन के पक्ष में हूं। नग पढ़ाई कर रहे हैं और उन्होंने पहली बार मतदान किया है। लोकतंत्र समर्थक उम्मीदवार जिमी शाम ने कहा कि हांगकांग में जो कुछ हुआ उस पर हम अपना फैसला देने के लिए मतदान कर रहे हैं।
41 लाख मतदाता पंजीकृत हैं, इस बार सबसे ज्यादा वोटिंग
452 सीटों पर भागय आजमा रहे उम्मीदवार
1090 उम्मीदवार पहली बार चुनाव लड़ रहे
जिला परिषद के काम
1. सामुदायिक स्तर पर कार्यों का निष्पादन।
2. बसों का रूट निर्धारित करना।
3. कूड़ा-कचरे का बेहतर प्रबंधन करना।
पुलिसकर्मियों की तैनाती
हांगकांग में 18 जिला परिषदों में 452 सीटों के लिए मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी-लंबी कतारें देखने को मिलीं। हांगकांग के मुख्य सचिव मैथ्यू चेउंग ने कहा कि यह मतदान वास्तविक लोकतांत्रिक प्रक्रिया है और मतदान केंद्रों पर भारी संख्या में पुलिसकर्मियों की मौजूदगी से यह सुनिश्चित होगा कि चुनाव शांतिपूर्ण हो।
स्विस बैंकों में खाता रखने वाले भारतीयों की जांच के घेरे में एक शाही घराना भी आ चुका है। भारतीय जांच अधिकारी महाराष्ट्र में सांगली के पूर्व रियासतदारों के परिवार के दो लोगों की जानकारी स्विट्जरलैंड के कर विभाग से मंगायी हैं। इस जांच में आधिकारिक सहयोग के लिए भारतीय अधिकारियों ने स्विट्जरलैंड सरकार से अनुरोध कर रखा है।
इस पर स्विट्जरलैंड के अधिकारी सार्वजनिक नोटिस जारी कर सांगली के पूर्व शाही घराने के विजयसिंह माधवराव पटवर्धन और उनकी पत्नी रोहिणी विजयसिंह पटवर्धन से इस मामले को देखने के लिए अपना प्रतिनिधि नियुक्त करने को कहा है।
स्विट्जरलैंड के अधिकारियों ने दोनों से यह भी कहा है कि यदि उन्हें अपने खातों से संबंधित सूचना भारत को दिए जाने को लेकर कोई आपत्ति है, तो वे उसे बाकाया दर्ज करायें। पटवर्धन दंपति की पुत्री भाग्यश्री फिल्मों में काम करती हैं।
स्विट्जरलैंड सरकार ऐसे मामलों में विदेशी सरकारों को सूचनाएं देने से पहले खाते दारों को अपना पक्ष रखने का मौका देने के लिए राजपत्र में सार्वजनिक नोटिस जारी करती हैं। स्विट्जरलैंड के हालिया संघीय राजपत्र में प्रकाशित दो अलग अधिसूचनाओं में पटवर्धन दंपत्ति को 10 दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने वाले व्यक्ति को नामित करने को कहा है।
हालांकि इन अधिसूचनाओं में दंपत्ति के नाम तथा उनकी जन्मतिथियां छोड़ कोई अन्य जानकारी नहीं दी गयी है। इस मामले में पक्ष जानने के लिये पटवर्धन परिवार से बार-बार संपर्क किये जाने के बाद भी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। एक कंपनी जिसमें दोनों पति-पत्नी निदेशक हैं, के आधिकारिक ईमेल पर भेजे गये सवालों का भी अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।
वॉशिंगटन । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों संकट से गुजर रहे है उनपर विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से महाभियोग के आरोप पर सुनवाई चल रही है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को एक सनसनीखेज खुलासा कर सबको चौंका दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती ओबामा प्रशासन ने वर्ष 2016 में राष्ट्रपति चुनाव प्रचार के दौरान उनके अभियान की जासूसी कराई थी। उन्होंने कहा कि आधुनिक काल के वायरटैपिंग (फोन टैपिंग) के जो भी संस्करण हो, लेकिन ओबामा प्रशासन में ट्रंप के खिलाफ साजिश उच्च स्तर पर हुई। ट्रंप ने एक साक्षात्कार में कहा, ‘आप सरकार के शीर्ष स्तर पर कार्य कर रहे थे। वे मेरे अभियान की जासूसी कर रहे थे। यह मेरी राय है। यह मैंने बहुत पहले ही कहा था।’ अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि इन दिनों महाभियोग प्रक्रिया के दौरान डेमोक्रेट बेवकूफ की तरह दिख रहे हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या तत्कालीन राष्ट्रपति ओबामा व्यक्तिगत रूप से शामिल थे तो ट्रंप ने कहा, ‘व्यक्तिगत रूप से मानना है कि यह शीर्ष स्तर तक जाता है। मैं ऐसा कहना नहीं चाहता क्योंकि यह अनादर होगा।' उन्होंने आगे कहा, 'वे सोचते थे कि मेरी जीत होगी और उन्होंने कहा कि कैसे हम उसे रोक सकते हैं? उन्होंने फर्जी डोजियर लिखा और कोशिश की कि चुनाव से पहले इसे जनता के बीच ले जाया जाए। यह दिखाता है कि वे कितने अयोग्य थे, उन्होंने करोड़ों डॉलर खर्च किए। हिलेरी क्लिंटन और डेमोक्रेट्स ने इसकी कीमत चुकाई।
गुरुवार को आम चुनाव के लिए अपना घोषणापत्र जारी किया. इस घोषणा पत्र में देश के औपनिवेशिक अतीत का लेखा-जोखा प्रस्तुत करने की शपथ लेने के साथ 100 साल पहले हुए अमृतसर में जलियांवाला बाग हत्याकांड के लिए भारत से माफी मांगना शामिल है. बता दें, ब्रिटेन की पूर्व प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने जलियांवाला बाग हत्याकांड के 100 साल पूरे होने पर अफसोस जताया था, लेकिन माफी नहीं मांगी थी.
लेबर पार्टी के नेता जेरमी कोर्बिन ने 'इट्स टाइम फॉर रियल चेंज' नाम से 107 पन्नों का घोषणा पत्र जारी किया. इसमें ने जलियांवाला बाग हत्याकांड को आगे बढ़ने और माफी मांगने का वादा किया है. घोषणा पत्र में यह भी कहा गया है कि लेबर पार्टी ब्रिटेन के अतीत में हुए अन्याय की जांच के लिए एक जज के नेतृत्व वाली समिति बनाएगी. इसके अलावा 'ऑपरेशन ब्लूस्टार' में देश की भूमिका की समीक्षा भी की जाएगी.
जेरमी कोर्बिन ने कहा कि हम जलियांवाला बाग नरसंहार के लिए एक औपचारिक माफीनामा जारी करेंगे और ऑपरेशन ब्लूस्टार में ब्रिटेन की भूमिका की सार्वजनिक समीक्षा करेंगे. 2014 में ब्रिटेन के सरकारी दस्तावेजों में यह दावा किया गया था कि स्वर्ण मंदिर में हस्तक्षेप से पहले सेना को ब्रिटिश सैन्य सलाह दी गई थी. कई सालों से कुछ ब्रिटिश संगठन इस सैन्य सलाह की जांच कराने की मांग कर रहे हैं.
लेबर पार्टी के घोषणा पत्र में लिखा है, 'कंजर्वेटिव कश्मीर, यमन और म्यांमार सहित दुनिया के सबसे अधिक दबाव वाले मानवीय संकटों को हल करने में रचनात्मक भूमिका निभाने में विफल रहे हैं और ईरान के साथ तनाव बढ़ गया है.'
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को बड़ा झटका लगा है. देश के न्याय मंत्रालय ने रिश्वत, भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी करने और विश्वास तोड़ने के आरोप को सही पाया है. अब नेतन्याहू को अदालत में मुकदमे का सामना करना पड़ेगा और अगर वह दोषी ठहराए जाते हैं तो उन्हें चुनाव लड़ने से रोक दिया जाएगा. इसके साथ ही नेतन्याहू को 10 साल की जेल भी हो सकती है.
इजरायल के अटॉर्नी जनरल अविचाई मंडेलब्लिट इसराइल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू पर तीन अलग-अलग मामलों में रिश्वत लेने, धोखाधड़ी करने और भरोसा तोड़ने का आरोप लगाया था. इस मामले की जांच चल रही थी. अटॉर्नी जनरल ने गुरुवार को अभियोग जारी करते हुए नेतन्याहू पर धोखाधड़ी, विश्वासघात और घूस के आरोप तय किए.
हालांकि, पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने आरोपों को खारिज कर दिया है. उनका कहना है कि मेरे खिलाफ की जा रही जांच राजनीति से प्रेरित है. इसके साथ ही नेतन्याहू ने आरोप तय करने के समय पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि इजरायल की राजनीति के लिए यह कठिन समय चल रहा है.
बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि पुलिस और जांचकर्ता कानून से ऊपर नहीं हैं. अब समय आ गया है कि जांचकर्ताओं को जांच का सामना करना पड़े.
इस्लामाबाद ,पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से गुरुवार को फोन पर बात की. दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की. ट्रंप से बातचीत में इमरान खान ने एक बार फिर कश्मीर का रोना रोया.
पाकिस्तानी पीएम इमरान खान ने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रपति ट्रंप को कश्मीर मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान के लिए अपने प्रयासों को जारी रखना चाहिए. इस दौरान उन्होंने कश्मीर पर उनकी मध्यस्थता की पेशकश की सराहना की.
इमरान खान ने राष्ट्रपति ट्रंप को जम्मू-कश्मीर की मौजूदा स्थिति से अवगत कराया. प्रधानमंत्री इमरान ने जोर देकर कहा कि डोनाल्ड ट्रंप को जम्मू-कश्मीर विवाद के शांतिपूर्ण समाधान के लिए अपनी कोशिशों को जारी रखना चाहिए.
वॉशिंगटन और न्यूयॉर्क में हुई बातचीत को याद करते हुए दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग को गहरा करने पर सहमति जताई. बता दें कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अमेरिका में जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से व्हाइट हाउस में मुलाकात की थी तो कश्मीर का मुद्दा उठाया था. इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता की पेशकश की थी.
इमरान खान के साथ बातचीत के दौरान कश्मीर मुद्दा उठने पर राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनसे मुलाकात के दौरान कश्मीर विवाद को सुलझाने के लिए मदद करने को कहा था. ऐसे में अगर इसे सुलझाने में मैं कोई मदद कर सकता हूं तो मैं मध्यस्थ बनकर मदद करना चाहूंगा.