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वाशिंगटन। अमेरिका के डेमोक्रेटिक सांसदों ने आठ और गवाहों की सूची जारी की है जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की महाभियोग जांच के तहत, खुली सुनवायी में गवाही देंगे। सांसदों ने जांच के दौरान बंद कमरे में हुई सुनवायी में इन सभी आठों के बयान दर्ज किए। प्रतिनिधि सभा में वर्चस्व रखने वाले डेमोक्रेट्स ने सितंबर में जांच शुरू की थी।
ट्रम्प पर आरोप है कि उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी डेमोक्रेट और 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में संभावित रूप से उन्हें चुनौती देने वाले जो बिडेन के बारे में गलत सूचनाएं देने के लिए यूक्रेन पर दबाव डालने के वास्ते अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया।
मामले में अंतिम मतदान अमेरिकी सीनेट करेगी जिसमें रिपब्लिकन का बहुमत है। अत: ट्रंप को हआए जाने की संभावना कम ही है। बुधवार की दोपहर को रूस, यूक्रेन और यूरेशिया मामलों के लिए उप सहायक रक्षा मंत्री लॉरा कूपर तथा राजनीतिक मामलों के लिए अवर विदेश मंत्री डेविड हेल जांच समिति के समक्ष पेश होंगे।
महाभियोग मामले में जन सुनवायी बुधवार को सुबह शुरू होगी। यूक्रेन में अमेरिका के शीर्ष राजनयिक विलियम टेलर और यूरोपीय तथा यूरेशिया मामलों के उप सहायक विदेश मंत्री जॉर्ज केंट की गवाही के साथ जन सुनवायी आरंभ होगी। यूक्रेन में अमेरिका के पूर्व राजदूत मैरी योवानोविच के शुक्रवार को पेश होने की संभावना है।

13-14 नवंबर को ब्राजील (Brazil) की राजधानी ब्रासीलिया में होगा. वर्ष 2019 में ब्राजील औपचारिक रूप से ब्रिक्स देशों का अध्यक्ष देश बना. इस शिखर सम्मेलन से पहले ब्राजील के वार्गास कोष के ब्राजील-चीन (China) अनुसंधान केंद्र के प्रधान एवेनद्रो कार्वालहो ने कहा कि इस बार ब्रिक्स देशों के शिखर सम्मेलन का आयोजन बहुपक्षीयवाद के महत्व की पुष्टि है. अर्थव्यवस्था, नवाचार और विज्ञान व तकनीक इस बार के मुख्य मुद्दे बनेंगे.

उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों की शुरुआत से अब तक दूसरा दशक हो चुका है. आगामी दस वर्ष चुनौतियों से भरपूर होंगे. अगर पांच देश एक साथ मिलकर चुनौतियों का सामना करेंगे तो ब्रिक्स देश जरूर मुश्किलों को दूर करके आशा भरे तीसरे दशक का स्वागत कर सकेंगे. गौरतलब है कि, बीते दस वर्षो में ब्रिक्स व्यवस्था स्थिरता के साथ आगे बढ़ी है, जिसने विकासशील देशों के बीच एकता, सहयोग व समान विकास को मजबूत करने में बड़ी भूमिका अदा की है.

पेरिस, बर्लिन,लंदन और ब्रसेल्स ने कहा कि ईरान का यह कदम 2015 के संयुक्त व्यापक कार्य योजना (जेसीपीओए) के ‘विरुद्ध’ है। इसके तहत ईरान अपने कुछ परमाणु कार्यक्रमों पर रोक लगाने के लिए सहमत हुआ था।

पेरिस। फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने कहा है कि वे ईरान के एक महत्वपूर्ण परमाणु संयंत्र में परमाणु कार्यक्रम को फिर से शुरू करने के ईरान के निर्णय से ‘बेहद चिंतित’ हैं। तीनों देशों और यूरोपीय संघ की ओर से सोमवार को जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया,‘‘ फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन के विदेश मंत्री और यूरोपीय संघ के उच्च प्रतिनिधि उस हालिया घोषणाओं से बेहद चिंतित हैं कि ईरान ‘फोर्डोव संयंत्र’ में यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम फिर से शुरू कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने 11 नवंबर की अपनी एक रिपोर्ट में भी इस बात की पुष्टि की है।’’
पेरिस, बर्लिन,लंदन और ब्रसेल्स ने कहा कि ईरान का यह कदम 2015 के संयुक्त व्यापक कार्य योजना (जेसीपीओए) के ‘विरुद्ध’ है। इसके तहत ईरान अपने कुछ परमाणु कार्यक्रमों पर रोक लगाने के लिए सहमत हुआ था। वहीं ईरान का कहना है कि अमेरिका के इस समझौते से एकाएक बाहर आ जाने के बाद वह जेसीपीओए के प्रति खुद को बाध्य नहीं मानता।
संयुक्त बयान में कहा गया कि तेहरान का यह हालिया निर्णय जेसीपीओए की प्रतिबद्धताओं का पालन नहीं करने जैसा खेदजनक कृत्य दिखाता है। गौरतलब है कि आईएईए ने ईरान पर अपनी एक हालिया रिपोर्ट में सोमवार को कहा था कि उसने ईरान के एक प्रतिष्ठान में यूरेनियम के कण देखे हैं।

रियाद। सऊदी अरब की राजधानी रियाद में लाइव शो के दौरान एक यमनी नागरिक ने तीन कलाकारों पर चाकू से हमला कर दिया। हमलावर को गिरफ्तार कर लिया गया है। सऊदी की आधिकारिक समाचार एजेंसी ने सोमवार को पुलिस प्रवक्ता के हवाले से कहा, ‘‘ सुरक्षा बलों ने उससे निपट लिया... लाइव शो के दौरान थिएटर ग्रुप के दो पुरुषों और एक महिला पर हमला हुआ था।’’
घटना रियाद के ‘किंग अब्दुल्ला पार्क’ में हुई, जब एक थिएटर समूह वहां प्रस्तुति दे रहा था। पुलिस ने बताया कि 33 वर्षीय यमनी नागरिक को गिरफ्तार कर लिया गया है। हमले में इस्तेमाल किए गए चाकू को भी बरामद कर लिया गया है।
बयान में कहा गया कि पीड़ितों की हालत अब स्थिर है लेकिन उनकी नागरिकता या हमले के पीछे के मकसद के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई।

इस अंतरराष्ट्रीय महत्व के वित्तीय शहर में पिछले पांच महीनों से विशाल प्रदर्शन और रैलियां जारी हैं, लेकिन बीजिंग ने इस आंदोलन की ज्यादातर मांगों को मानने से इनकार कर दिया है।

हांगकांग। हांगकांग में शहर प्रशासन द्वारा नियुक्त किए गए अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के एक पैनल ने पाया है कि वहां महीनों से चल रहे लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनों से निपटने में पुलिस बल की भूमिका की जांच के लिए हांगकांग पुलिस की निगरानी करने वाली संस्था के पास पर्याप्त साधन नहीं हैं।

इस अंतरराष्ट्रीय महत्व के वित्तीय शहर में पिछले पांच महीनों से विशाल प्रदर्शन और रैलियां जारी हैं, लेकिन बीजिंग ने इस आंदोलन की ज्यादातर मांगों को मानने से इनकार कर दिया है। आंदोलनकारियों की मांगों में पूरी तरह से स्वतंत्र चुनाव कराने के साथ ही पुलिस की भूमिका की स्वतंत्र जांच भी शामिल है। लोकतंत्र समर्थक आंदोलन के दौरान पुलिस की लगातार आंदोलनकारियों के साथ तीखी झड़प होती रही।

शहर की नेता कैरी लैम ने बार-बार स्वतंत्र जांच की मांग को खारिज किया और कहा कि वर्तमान निगरानी संस्था - स्वतंत्र पुलिस शिकायत आयोग (आईपीसीसी) इस काम में सक्षम है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आईपीसीसी के पास पर्याप्त जांच अधिकार नहीं हैं, और इसमें सत्ता समर्थक लोग भरे हुए हैं और जब पुलिस को जवाबदेह ठहराने की बात आती है तो वह अप्रभावी हो जाती है।
 

करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन को लेकर पाकिस्तान फिर अपने वादे से मुकर गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, नौ नवंबर को भी पाकिस्तान श्रद्धालुओं से 20 डॉलर (लगभग 1425 रुपये) का शुल्क वसूल करेगा। इससे पहले पाकिस्तान ने कहा था कि वह नौ नवंबर को श्रद्धालुओं से शुल्क नहीं लेगा।
इससे पहले गुरुवार को पाकिस्तानी सेना ने अपने ही प्रधानमंत्री इमरान खान के फैसले को पलट दिया था। पाक सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर के अनुसार अब सिख तीर्थयात्रियों को करतारपुर कॉरिडोर का प्रयोग करने के लिए भारतीय पासपोर्ट की आवश्यकता होगी। इससे कुछ ही दिन पहले प्रधानमंत्री इमरान खान ने घोषणा की थी कि भारतीय श्रद्धालुओं को पवित्र गुरुद्वारा दरबार साहिब आने के लिए महज एक वैध पहचान-पत्र की जरूरत होगी।

करतारपुर कॉरिडोर भारत के पंजाब स्थित डेरा बाबा नानक को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के नारोवाल जिले में स्थित करतारपुर के दरबार साहिब से जोड़ेगा। यह गुरुद्वारा अंतरराष्ट्रीय सीमा से महज चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
 
उद्घाटन समारोह में शामिल नहीं होंगे श्री श्री रविशंकर
करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन समारोह में आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर शामिल नहीं होंगे। उन्होंने पूर्व में की गई प्रतिबद्धताओं का हवाला देते हुए कार्यक्रम में शामिल होने से इनकार कर दिया है। पाकिस्तान ने उन्हें करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन समारोह में शामिल होने के लिए न्योता भेजा था।

बता दें कि कल यानी शनिवार को करतारपुर कॉरिडोर का उद्घाटन समारोह आयोजित होना है। जिसमें शामिल होने के लिए कई भारतीय गणमान्य नागरिकों को पाकिस्तान ने न्योता भेजा है।
कल होगा उद्धाटन
करतारपुर कॉरिडोर का उद्घाटन नौ नवंबर को होने वाला है। इसे लेकर दोनों देशों के बीच समझौता हो चुका है और कई सांसद, विधायक व मंत्री करतारपुर जाने वाले पहले जत्थे का हिस्सा बनने जा रहे हैं।

पहले जत्थे में पंजाब के विधायक, सांसद, केंद्रीय मंत्रियों में हरसिमरत कौर व हरदीप सिंह पुरी शामिल होंगे। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इस पहले जत्थे की अगुवाई करेंगे। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत की तरफ से और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान पाकिस्तान की तरफ से कॉरिडोर का उद्घाटन करेंगे।

पिछले साल भारत और पाकिस्तान सरकार ने करतारपुर कॉरिडोर की नींव रखी थी। इसे लेकर दोनों देशों के बीच कुछ विवाद भी हुआ और दोनों ने अपनी-अपनी शर्तें सामने रखीं। अंत में दोनों देश एक समझौते पर पहुंच गए, जिसे करतारपुर समझौता के नाम से जाना गया है।

वॉशिंगटन । अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को अंगुली दिखाने वाली महिला वर्जिनिया लोकल ऑफिस चुनाव में जीत गई हैं। जूली ब्रिस्कमन एक साइकिलिस्ट हैं और 2017 में तब अचानक से सुर्खियों में आ गई थीं, जब उन्होंने ट्रंप के गुजरते काफिले को अंगुली दिखाई थी। एएफपी ने फोटो ली थी और देखते-देखते वह पूरी दुनिया में वायरल हो गई। करीब दो साल बाद वर्जिनिया के कंट्री बोर्ड सुपरवाइजर चुनाव में उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार को हराया। जूली 2017 में यूनाइटेड स्टेट्स गवर्नमेंट में मार्केटिंग ऐनालिस्ट के पद पर काम कर रही थीं, लेकिन इस घटना के बाद उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया था। जूली ने डेमोक्रेट पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा और जिस पार्टी (रिपब्लिकन)से ट्रंप हैं, उस पार्टी के उम्मीदवार को हराया। जूली ने कहा कि कैम्पेन के दौरान उन्होंने केवल शिक्षा, महिलाओं के अधिकार, ट्रांसपोर्टेशन और पर्यावरण के मुद्दे पर लोगों से बात की और कभी भी उन्होंने 2017 की घटना का जिक्र नहीं किया। नतीजा सब के सामने है।
 

पाकिस्तान (Pakistan) अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है. इंटेलिजेंस एजेंसियों को यह जानकारी मिली है कि पाकिस्तान खालिस्तान (Khalistan) समर्थतक तत्वों को भारत में आतंकी गतिविधियों (Terrorist activities) को अंजाम देने के लिए दवाब बना रहा है. 

पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) खालिस्तानी आतंकी संगठनों पर दवाब बना रही है. आईएसआई ने विदेश लिंक के जरिए भारत में अपने कॉन्टैक्ट्स से संपर्क साधा है.

खुफिया जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान सिख धर्म पर एक सेमीनार आयोजित कर रहा है जिसे आईएसआई द्वारा समर्थित संगठन ही आयोजित कर रहे हैं. इस तरह आईएसआई समर्थित फोरम द्वारा भारत में कई लोगों को आमंत्रित किया गया है. भारत सरकार ने ऐसे समूहों के निमंत्रण और गतिविधियों पर नजर रखने के निर्दश दिए हैं. 

इससे पहले 6 नंबर को  भारत ने पाकिस्तान द्वारा जारी किए गए करतारपुर कॉरिडोर (Kartarpur Corridor) के आधिकारिक प्रचार वीडियो में जरनैल सिंह भिंडरावाले सहित तीन सिख अलगाववादी नेताओं की मौजूदगी पर चिंता व्यक्त की थी और मुद्दे को पाकिस्तान के समक्ष उठाया था.

वीडियो में सिख फॉर जस्टिस समूह के पोस्टर हैं जिनमें खालिस्तान की मांग करने वाले नेता भिंडरावाले और उसके सैन्य सलाहकार शबेग सिंह की तस्वीरें हैं जो 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान मारे गए थे। सिख फॉर जस्टिस एक प्रतिबंधित संगठन है, जो सिख रेफरेंडम 2020 के लिए जोर दे रहा है।


यह वीडियो नौ नवंबर को करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन से पहले सोमवार (4 नवंबर) को जारी किया गया था। बता दें करतापुर कॉरिडोर का उद्घाटन 9 नवंबर को होने जा रहा है. यह कॉरिडोर पंजाब में डेरा बाबा नानक मंदिर को पाकिस्तान के करतारपुर गुरुद्वारे से जोड़ेगा, जहां गुरु नानक देव ने अपने अंतिम दिन बिताए थे।

लॉस एंजलिस । आने वाले 11 नवंबर दुर्लभ खगोलीय घटना का साक्षी होने वाला है। दरअसल, आसमान में एक दुर्लभ खगोलीय नजारा दिखाई देने जा रहा है। दुनिया को जीवन देने वाले सूर्य को किसी की नजर न लगे, इस वजह से हर सौ साल में 13 बार बुध ग्रह सूर्य के सामने से निकलते हुए उसके चेहरे का तिल बन जाता है। यह दुर्लभ घटना इस साल 11 नवंबर को होने जा रही है, जिसे देखने के लिए दुनियाभर के खगोलविद तैयारियां कर रहे हैं। अगली बार यह घटना साल 2032 में ही देखने को मिलेगी। बुध का गोचर इसलिए होता है क्योंकि यह हमारे सौर मंडल के दो ग्रहों में से इकलौता है, जो धरती की तुलना में सूर्य के ज्यादा करीब चक्कर लगाता है। ऐसा करने वाला दूसरा ग्रह शुक्र है, जिसे भारतीय ज्योतिष में भोग-विलास, पत्नी, भौतिक सुखों का कारक माना जाता है। बुध की कई कक्षाओं में धरती से देखने पर बुध या तो सूर्य के ऊपर से या नीचे से गुजरते हुए दिखता है। कभी-कभी धरती और बुध की कक्षाएं इस तरह से सामने आ जाती हैं कि बुध धरती और सूर्य के बीच से होता हुआ गुजरता है। जब ऐसा होता है, तो धरती से देखने पर बुध ग्रह तिल की तरह एक छोटे बिंदु के जैसा दिखता है। इसका व्यास सूर्य के व्यास की तुलना में 0.5 फीसद होता है।
नासा ने कहा कि धरती पर हमारे नजरिए से हम सिर्फ बुध और शुक्र को सूर्य के सामने से गुजरते हुए देख सकते हैं लिहाजा यह दुर्लभ घटना है, जिसे कोई भी देखने से चूकना नहीं चाहेगा। सही सुरक्षा उपकरणों के साथ धरती के किसी भी हिस्से पर मौजूद लोग सूर्य के आगे से एक छोटे से बिंदु को धीरे-धीरे गुजरते हुए देख सकेंगे। नासा ने इसके साथ ही यह चेतावनी भी दी है कि सूर्य को नग्न आंखों से देखने पर यह टेलिस्कोप में बिना सुरक्षा व्यवस्था किए देखने पर गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। हो सकता है कि इसकी वजह से किसी की आंखों की रोशनी हमेशा के लिए चली जाए। लिहाजा, सोलर फिल्टर का इस्तेमाल करना न भूलें। यह घटना सोमवार को 11.35 मिनट जीएमटी पर शुरू होगी और करीब 5.5 घंटे तक चलेगी। लिहाजा, इसे देखने के लिए आपके पास पर्याप्त समय होगा। हालांकि, धरती के कुछ हिस्सों जैसे अमेरिका के पश्चिमी तटों पर मौजूद लोग इसे तब तक नहीं देख सकेंगे, जब तक कि सूर्य आकाश में दिखने नहीं लगेगा। शुक्र के गोचर से उलट बुध को ऐसी स्थिति में देखने के लिए आपको सन फिल्टर वाले टेलिस्कोप की जरूरत होगी क्योंकि यह बहुत छोटा ग्रह है। बताते चलें कि शुक्र सहित अन्य ग्रह पर्याप्त बड़े हैं कि उन्हें नग्न आंखों से देखा जा सके।

चीन पर निशाना साधते हुए ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि 21वीं सदी की अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में साम्राज्यवादी शक्तियों के लिए कोई जगह नहीं है जहां बड़े देश छोटे देशों का लाभ उठा सकें।

अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए)  रॉबर्ट ओ ब्रायन ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते चीनी प्रभाव पर सवालों का जवाब देते कहा कि सभी देशों को एक दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करते हुए बराबरी का और अंतरराष्ट्रीय कानूनों एवं परंपराओं के अनुसार व्यवहार करना चाहिए।
उन्होंने बैंकाक में संवाददाता सम्मेलन में कहा, साम्राज्यवादी शक्तियों के लिए कोई जगह नहीं है। वे अतीत के दिन रहे हैं। उन्होंने कहा, वे तब के दिन थे जब बड़े देश बस अपने आकार के चलते छोटे देशों का लाभ उठा सकते थे। बस इसलिए कि कोई देश बड़ा है और कोई देश छोटा है, हम नहीं समझते हैं कि 21वीं सदी की अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में उसके लिए कोई जगह नहीं है। उनका बयान बैंकाक में पूर्व एशिया शिखर सम्मेलन के मौके पर आया है जहां हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के तेजी से बढ़ते सैन्य एवं आर्थिक विस्तारवाद का मुद्दा प्रमुखता से उठा।  चीन लगभग पूरे दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा करता है जबकि ताइवान, फिलीपिन, ब्रुनेई, मलयेशिया और वियतनाम भी उसके कुछ कुछ हिस्से पर दावा करते हैं।

जब ओ ब्रायन से पूछा गया कि वह इस बात से कितना चिंतित है कि चीन नई साम्राज्यवादी शक्ति बनने जा रहा है, तो उन्होंने कहा, दरअसल, मैं साम्राज्यवाद का जिक्र कर रहा था। मैं नहीं समझता कि मैंने उस संदर्भ में खासकर चीन का नाम लिया लेकिन यदि कोई चीन के आचरण या उसके कृत्यों को लेकर उसकी उस रूप में व्याख्या करे तो वे वैसे निष्कर्ष हो सकते हैं जो दूसरे निकालें। उन्होंने इस क्षेत्र में अमेरिका के दखल संबंधी चीन के आरोपों का भी खंडन किया। उन्होंने कहा, हम यहां लंबे समय हैं। मैं समझता हूं कि हमने इस क्षेत्र में अपनी भूमिका के वास्ते सत्तर साल पहले अपना खून पसीना बहाया और पैसा लगाया, हम उससे पहले भी यहां रहे और तब से यहां हैं।

ओ ब्रायन ने कहा कि अमेरिका इस क्षेत्र में दखल नहीं दे रहा है और वह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अहम किरदार है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने इस क्षेत्र में किसी भी अन्य देश से अधिक किया है और वह एशिया, दक्षिणपूर्व और खासकर एशिया में सहयोग के लिए कटिबद्ध है। ब्रायन ने कहा कि पूरे हिंद प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका ने 1000 अरब डॉलर का निवेश किया है।

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