ईश्वर दुबे
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पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) समेत विपक्षी दलों ने भी इस सरकार विरोधी प्रदर्शन को समर्थन दिया है।
इस्लामाबाद। पाकिस्तान सरकार पिछले पांच दिन से जारी प्रदर्शनों को खत्म कराने के लिये तेजतर्रार मौलवी तथा राजनीतिक नेता मौलाना फजलुर्रहमान के पास पहुंची है। मौलाना प्रधानमंत्री इमरान खान को सत्ता से हटाने की पूरजोर कोशिश में जुटे हैं। दक्षिणपंथी जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम फज्ल (जेयूआई-एफ) के नेता फजलुर्रहमान इस्लामाबाद में चल रहे ‘आजादी मार्च’ नामक इस प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे हैं। वह इमरान खान पर 2018 के चुनाव में धांधली का आरोप लगाते हुए उनसे इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) समेत विपक्षी दलों ने भी इस सरकार विरोधी प्रदर्शन को समर्थन दिया है। एक्सप्रेस ट्रिब्यून की खबर के अनुसार सरकार के वार्ताकारों की दो अलग-अलग टीमें सोमवार को इस्लामाबाद में जेयूआई-एफ के पास पहुंची।
खबर के अनुसार पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी शुजात हुसैन के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार रात फजलुर्रहमान से मुलाकात की। इससे कुछ ही घंटे पहले रक्षा मंत्री परवेज खत्ताक के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने जेयूआई-एफ नेता अकरम खान दुर्रानी के नेतृत्व वाली रहबर समिति के साथ मुलाकात कर उनकी मांगों पर चर्चा की। खबर में कहा गया है कि हालांकि दोनों पक्षों में से किसी ने भी बातचीत सार्थक रहने के संकेत नहीं दिये। खत्ताक और रहबर समिति मंगलवार दोपहर को वार्ता फिर से शुरू करेंगे।
मैकडोनाल्ड कॉर्प ने अपने सीईओ स्टीव ईस्टरब्रुक को एक कर्मचारी के साथ अनैतिक संबंध रखने ते कारण बर्खास्त कर दिया है। बोर्ड ने फैसला किया कि यह कंपनी की पालिसी के खिलाफ है और इस वजह से उनपर यह कार्रवाई की गई। 52 साल के ईस्टरब्रुक 2015 से कंपनी के सीईओ थे। बोर्ड ने कहा कि कर्मचारी के साथ रिलेशनशिप में होने की वजह से उन्होंने कुछ गलत फैसले लिए। उन्होंने बोर्ड के सदस्य पद से भी इस्तीफा दे दिया है। ईस्टरब्रुक ने कहा, 'मैंने गलती की।' उन्होंने रविवार को कर्मचारियों को ई-मेल भेजा कि उन्होंने कंपनी को हमेशा महत्व दिया लेकिन बोर्ड का फैसला सही है और अब उनके जाने का वक्त है। अमेरिका के कॉर्पेरेट जगत ऐसी कई घटनाएं सामने आईं जिनमें रिलेशनशिप की वजह से बड़े अधिकारी को इस्तीफा देना पड़ा।
ज्ञात हो कि सोशल मीडिया पर चले हैशटैग मीटू कैंपेन के दौरान बड़ी कंपनियों के अधिकारियों और कर्मचारियों की स्क्रूटनी की गई। जून 2018 में इंटेल कॉर्प के सीईओ ब्रायन को भी पद छोड़ना पड़ा था। वह भी अपनी एक कर्मचारी के साथ रिलेशनशिप में थे। ईस्टरब्रुक के बाद क्रिस केंपिजिंस्की को मैकडोनाल्ड यूएसए का सीईओ बनाया गया है। केंपजिंस्की ने अपने संदेश में ईस्टरब्रुक को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि ईस्टरबुक के कामों को आगे बढ़ाने के लिए वह काम करेंगे। मैकडी के चेयरमैन एनरिक हर्नांडेज जूनियर ने कहा कि केंपिजिंस्की कंपनी की रणनीतियों के लिए बहुत उपयोगी हैं। मैकडी का हेड ऑफिस शिकागो में है और हाल में ही इसके 40 साल पुरे हुए हैं। कंपनी ने ईस्टरब्रुक से संबंधित और कोई जानकारी साझा नहीं की है।
वाशिंगटन,ISIS आतंकी अबु बकर अल बगदादी के खात्मे के बाद अब सुरक्षा एजेंसियों की नजर उसके परिवार वालों पर है. इसी सिलसिले में बगदादी की बहन को उत्तरी सीरिया के शहर से गिरफ्तार किया गया है. तुर्की की सेना ने उत्तरी सीरिया के अजाज शहर से बगदादी की बहन रशमिया अवद को एक छापे के दौरान गिरफ्तार करने का दावा किया है. छापे के दौरान बगदादी की बहन एक कंटेनर में छुपी बैठी थी.
बगदादी की बहन रशमिया अवद गिरफ्तार
समाचार एजेंसी रायटर के मुताबिक तुर्की के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि छापे के दौरान बगदादी की बहन, उसका पति और उसकी बहू को गिरफ्तार किया है. तुर्की की एजेंसियां इनसे गहन पूछताछ कर रही हैं. इस अधिकारी ने कहा कि रशमिया अवद को अजाज के नजदीक एक छापेमारी की कार्रवाई के दौरान पकड़ा गया. इस अधिकारी ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान बगदादी की बहन ISIS के कामकाज और उसकी खुफिया जानकारियों का खुलासा करेगी.
पहले बगदादी अब उसकी बहन
इससे पहले 27 अक्टूबर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ISIS सरगना अबु बकर अल बगदादी को एक ऑपरेशन में मारने का दावा किया था. ट्रंप ने कहा था कि इडलिब में अमेरिकी डेल्टा फोर्स के एक ऑपरेशन में बगदादी मारा गया है. ऑपरेशन के वक्त बगदादी एक मकान में था. जब अमेरिकी सेना ने उस पर हमला किया तो वो अपने तीन बच्चों के साथ एक सुरंग में भागने लगा. अमेरिका सेना और अमेरिकन आर्मी के कुत्तों ने कुछ देर तक उसे दौड़ाया इसके बाद चारों ओर से घिरा देख बगदादी ने खुद को उड़ा लिया था.
बैंकॉक,प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को ऑस्ट्रेलिया और वियतनाम के अपने समकक्षों से अलग-अलग मुलाकात कर द्विपक्षीय व क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। मोदी, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन और वियतमान के प्रधानमंत्री एनग्वेन शुआन फुक और अन्य कई देशों के नेता आसियान सम्मेलन, पूर्वी एशिया सम्मेलन तथा क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) सम्मेलन में शिरकत के लिए बैंकॉक में हैं।
प्रधानमंत्री ने फुक से मुलाकात के दौरान भारत और वियतनाम के बीच द्विपक्षीय रणनीतिक सहयोग को बढ़ावा देने के कदमों पर चर्चा की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि मोदी ने अगले साल होने वाले आसियान सम्मेलन की अध्यक्षता वियतनाम को सौंपे जाने को लेकर फुक को शुभकामनाएं भी दीं।
कुमार ने ट्वीट किया, 'मित्रता का बंधन पुराना होने के साथ-साथ मजबूत भी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की वियतनाम के प्रधानमंत्री शुआन फुक से मुलाकात गर्मजोशी से भरी रही। उन्होंने अगले साल होने वाले आसियान सम्मेलन की अध्यक्षता वियतनाम को सौंपे जाने को लेकर फुक को शुभकामनाएं भी दीं। साथ ही हमारी व्यापक सामरिक भागीदारी को मजबूत बनाने के कदमों की समीक्षा भी की।'
एथेंस,उत्तरी ग्रीस में एक कोल्ड स्टोरेज ट्रक से सोमवार को 41 प्रवासी जीवित मिले। ट्रक चालक को गिरफ्तार करने वाली पुलिस ने यह जानकारी दी। उसने बताया कि प्रवासी अफगान मूल के लग रहे हैं। उनमें से अधिकतर की हालत अच्छी है। इनमें से सात लोगों का अस्पताल में प्राथमिक उपचार किया गया।
एक पुलिस सूत्र ने कहा, ' उनकी राष्ट्रीयता का पता लगाने में दो दिन लगेंगे।' पुलिस ने जान्थी एवं कोमोतिनी कस्बों के बीच एग्नाटिया मार्ग पर ट्रक को रोक लिया था। ट्रक चालक को गिरफ्तार कर लिया गया है जो जॉर्जिया का रहने वाला है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब पिछले महीने ब्रिटेन में एक कोल्ड स्टोरेज ट्रक में 39 लोग मृत मिले थे।
ऐसा माना जा रहा है कि वे सभी लोग वियतनाम के नागरिक थे। इसके अलावा फ्रांस-इटली सीमा के निकट भी एक लॉरी में शनिवार को 31 अन्य पाकिस्तानी प्रवासी छुपे मिले थे।
इस्लामाबाद। सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव की आगामी 550वीं जयंती पर पंजाब प्रांत के करतारपुर साहिब गुरुद्वारा में आयोजित होने वाले समारोह में हिस्सा लेने के लिए 178 सदस्यीय सिख प्रतिनिधिमंडल ब्रिटेन से पाकिस्तान पहुंच गया है। सोमवार को बताया कि रविवार को पहुंचने के तुरंत बाद, 178 सदस्यीय समूह गुरुद्वारा जन्म अस्थान ननकाना साहिब और शेखूपुरा जिले के गुरुद्वारा सच्चा सौदा के लिए रवाना हो गया।
पाकिस्तान गुरुद्वारा प्रबंधक समिति ने घोषणा की है कि बाबा गुरु नानक की जयंती समारोह पूरे नवंबर जारी रहेगा। भारत के साथ-साथ यूरोप और उत्तरी अमेरिका के सिख तीर्थयात्री इस संबंध में आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे। पंजाब इवैक्यूई ट्रस्ट बोर्ड के प्रवक्ता आमेर हाशमी ने कहा कि मुख्य कार्यक्रम 12 नवंबर को करतारपुर साहिब गुरुद्वारा में होगा। इस बीच, सोने की पालकी के साथ करीब 1,100 सिख तीर्थयात्रियों का पहला जत्था 31 अक्टूबर को वाघा बॉर्डर से होकर यहां पहुंचा।
मंगलवार को करतारपुर साहिब गुरुद्वारा में पालकी स्थापित की जाएगी। करतारपुर साहिब गुरुद्वारा, जिसे मूल रूप से गुरुद्वारा दरबार साहिब के नाम से जाना जाता है, सिखों का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है, जहां गुरु नानक देव ने अपने जीवन के अंतिम वर्ष बिताए। इस बीच, करतारपुर कॉरिडोर, जो भारतीय सिख तीर्थयात्रियों को धर्मस्थल की यात्रा करने के लिए पाकिस्तान जाने की सुविधा प्रदान करेगा, इसका उद्घाटन शनिवार को किया जाएगा।
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पाकिस्तानी दूतावास के बाहर प्रदर्शन भी आम बात है और यह कई बार इसलिये भी होता है क्योंकि लोग वीजा के लिये लंबे इंतजार के समय या फिर सुरक्षा जांच के लिये लंबी कतार में खड़े होने से नाखुश होते हैं।
काबुल। काबुल में पाकिस्तान दूतावास ने कहा कि वह अफगानिस्तान की राजधानी में अपने वाणिज्यिक कार्यालय को सुरक्षा कारणों से अनिश्चितकाल के लिये बंद कर रहा है। पाकिस्तान ने यह कदम ऐसे वक्त उठाया है जब हाल के दिनों में दोनों पड़ोसी देशों के बीच तनाव बढ़ा है। वीजा प्रभाग का बंद होना कई अफगानिस्तानियों के लिये बड़ा झटका है क्योंकि रोजाना सैकड़ों लोग इलाज, सामान लाने-ले जाने और विश्वविद्यालयों में शिक्षा के उद्देश्य से वीजा के लिये आवेदन करते हैं। दूतावास के प्रवक्ता द्वारा रविवार को व्हॉट्सऐप पर साझा किये गए एक संदेश के मुताबिक वाणिज्यिक अनुभाग सोमवार से “अगली सूचना तक” बंद रहेगा।
प्रवक्ता ने एएफपी को बताया कि वाणिज्यिक विभाग रोजाना लगभग 1500 वीजा आवेदनों को देखता है। इस्लामाबाद में पाकिस्तानी विदेश विभाग ने कहा कि अफगानिस्तान दूतावास के अधिकारी को समन कर उन्हें “काबुल में पाकिस्तानी दूतावास और उसके उप-मिशनों में काम कर रहे लोगों की सुरक्षा संबंधी गंभीर चिंताओं से अवगत कराया गया है।” मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि दूतावास कर्मियों को परेशान किया जा रहा है। बयान में कहा गया कि उन्हें सड़कों पर रोका जाता है और दूतावास की तरफ जाते समय दूतावास की गाड़ियों को मोटरसाइकिलों द्वारा टक्कर भी मारी जाती है।
पाकिस्तानी दूतावास के बाहर प्रदर्शन भी आम बात है और यह कई बार इसलिये भी होता है क्योंकि लोग वीजा के लिये लंबे इंतजार के समय या फिर सुरक्षा जांच के लिये लंबी कतार में खड़े होने से नाखुश होते हैं। इस्लामी गणराज्य अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच हाल में कुछ वजहों से रिश्तों में कड़वाहट देखने को मिली है और इनमें से एक यह भी है कि अफगान मानते हैं कि पाकिस्तान कथित रूप से तालिबान का समर्थन करता है। पाकिस्तान ने विद्रोही गुटों की मदद से इनकार किया है।
अफगानिस्तान की पूर्वी सीमा पर कुनार में हाल में हुई झड़पों के बाद भी तनाव में इजाफा हुआ है। दोनों पक्ष एक-दूसरे के सैनिकों पर सीमा-पार गोलीबारी का आरोप लगाते रहे हैं। हेरात, जलालाबाद और मजार-ए-शरीफ में पाकिस्तानी वाणिज्यिक सेवाएं खुली हैं और दूतावास के प्रवक्ता ने कहा कि अगर वीजा की तत्काल जरूरत हो तो आवेदक जलालाबाद जा सकते हैं।
बराक ओबामा के कार्यकाल में विदेश विभाग में जलवायु वार्ताकार रहे और फिलहाल गैर-लाभकारी वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट चलाने वाले एंड्रयू लाइट ने कहा कि अगर 2020 के चुनाव में ट्रंप के बजाय कोई और जीतता है तो जो भी अगला राष्ट्रपति बनेगा वह केवल 30 दिन के अंदर समझौते में वापस आ सकता है।
वाशिंगटन। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दो साल से अधिक समय से अमेरिका के ऐतिहासिक पेरिस जलवायु समझौते से हटने की बात करते रहे हैं, हालांकि वह सोमवार से अंतत: इस बारे में कोई कदम उठा सकते हैं। अमेरिका के समझौते से हटने की प्रक्रिया में एक साल लग सकता है और यह कम से कम 2020 के राष्ट्रपति चुनाव के बाद ही आधिकारिक रूप से संपन्न हो पाएगी। पेरिस समझौते में करीब 200 देशों ने तापमान बढ़ाने वाली गैसों से प्रदूषण को नियंत्रित करने या कम करने के अपने राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित किये हैं।
पेरिस जलवायु करार पर 2015 में गहन चर्चा हुई थी और यह 4 नवंबर, 2016 को प्रभाव में आया। समझौते की शर्त है कि कोई भी देश पहले तीन साल में कदम वापस नहीं खींच सकता। इसलिए अमेरिका पहली बार सोमवार को वापसी की प्रक्रिया सही मायने में शुरू कर सकता है और संयुक्त राष्ट्र को पत्र लिखने के साथ यह शुरू होगी।
बराक ओबामा के कार्यकाल में विदेश विभाग में जलवायु वार्ताकार रहे और फिलहाल गैर-लाभकारी वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट चलाने वाले एंड्रयू लाइट ने कहा कि अगर 2020 के चुनाव में ट्रंप के बजाय कोई और जीतता है तो जो भी अगला राष्ट्रपति बनेगा वह केवल 30 दिन के अंदर समझौते में वापस आ सकता है। लाइट और दूसरे विशेषज्ञों ने कहा कि दुनिया के दूसरे सबसे बड़े जलवायु प्रदूषणकर्ता अमेरिका द्वारा समझौते से पीछे हटने से वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन की लड़ाई प्रभावित होगी।
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के इस्तीफे के लिए दी गई समयसीमा रविवार रात समाप्त हो जाने के बाद देश के धर्मगुरु मौलाना फजलुर रहमान ने पूरे देश में बंद की धमकी दी। जेयूआई-एफ प्रमुख रहमान ने दो दिवसीय समयसीमा समाप्त होने के बाद एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि उद्देश्य पूरा होने तक प्रदर्शन जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि यह साफ है कि शासक (इमरान खान) को जाना होगा और लोगों को निष्पक्ष चुनाव के जरिए नया शासक चुनने का मौका देना होगा। यह स्पष्ट है कि इससे अलावा और कोई विकल्प नहीं है। रहमान ने कहा, ‘‘अभी इस्लामाबाद बंद है, फिर हम पूरा देश बंद करेंगे। हम रुकेंगे नहीं और अपना संघर्ष जारी रखेंगे।’’
उन्होंने कहा कि वह सोमवार को विपक्ष के अन्य नेताओं से मुलाकात की योजना बना रहे हैं ताकि आगे के कदम के बारे में सर्वसम्मति से फैसला किया जा सके। उन्होंने कहा, ‘‘यह आंदोलन और लोगों की भीड़ इमरान खान को सत्ता से बाहर करने तक बनी रहेगी।’’
रहमान ने खान पर इस्तीफे का दबाव बनाने के लिए पिछले सप्ताह इस्लामाबाद तक अपने समर्थकों के ‘आजादी मार्च’ का नेतृत्व किया था। उन्होंने खान को ‘‘अवैध’’ शासक बताया था। रहमान ने प्रधानमंत्री खान के पद छोड़ने के लिए रविवार तक की समयसीमा दी थी। रहमान का दावा है कि 2018 में हुए चुनाव में धांधली हुई थी और पाकिस्तान की शक्तिशाली सेना ने खान को समर्थन दिया था। सेना ने इन आरोपों से इनकार किया है।
प्रधानमंत्री ने कहा है कि उनकी इस्तीफा देने की कोई योजना नहीं है। इस बीच सरकार ने राजधानी में शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए है।
रहमान ने अपने संबोधन में कहा कि ‘‘पाकिस्तान के बोर्बाच्येव’’ को शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के धैर्य की परीक्षा लिये बिना इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान पर शासन करने का अधिकार केवल देश के लोगों को है, किसी ‘‘संस्थान’’ को नहीं।
इस्लामाबाद। पाकिस्तानी सेना ने शनिवार को आगाह किया कि देश में किसी को भी अस्थिरता या अराजकता उत्पन्न नहीं करने दी जाएगी। इससे एक दिन पहले ही धर्मगुरु एवं राजनीतिज्ञ मौलाना फजलुर रहमान ने प्रधानमंत्री इमरान खान के पद छोड़ने के लिए दो दिन की समयसीमा तय की थी। कट्टरपंथी धर्मगुरु रहमान ने वर्तमान सरकार को हटाने के लिए आयोजित प्रदर्शन रैली को यहां शुक्रवार को संबोधित किया था। प्रदर्शन रैली को ‘‘आजादी मार्च’’ नाम दिया गया है।
रहमान ने अपने संबोधन में कहा कि ‘‘पाकिस्तान के बोर्बाच्येव’’ को शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के धैर्य की परीक्षा लिये बिना इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान पर शासन करने का अधिकार केवल देश के लोगों को है, किसी ‘‘संस्थान’’ को नहीं। उन्होंने शुक्रवार को कहा था कि हम हमारे संस्थानों के साथ कोई टकराव नहीं चाहते। हम चाहते हैं कि वे तटस्थ रहें। हम संस्थानों को (भी) यह निर्णय करने के लिए दो दिन का समय देते हैं कि क्या वे इस सरकार को समर्थन जारी रखेंगे।
रहमान की टिप्पणी पर पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने कहा कि मौलाना फजलुर रहमान एक वरिष्ठ नेता हैं। उन्हें स्पष्ट करना चाहिए कि वे किस संस्थान के बारे में बात कर रहे हैं। पाकिस्तान का सशस्त्र बल एक तटस्थ संस्थान है जिसने हमेशा ही लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित सरकारों का समर्थन किया है। उन्होंने आगाह किया कि किसी को भी अस्थिरता उत्पन्न नहीं करने दी जाएगीक्योंकि देश अराजकता बर्दाश्त नहीं कर सकता।
गफूर ने कहा कि सेना तटस्थ है और वह संविधान के अनुरूप लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित सरकारों का ही समर्थन करती है। उन्होंने 2018 आम चुनाव के दौरान सेना की तैनाती का बचाव किया और कहा कि इससे चुनावों में संवैधानिक जिम्मेदारी पूरी हुई। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष को (परिणामों के बारे में) कोई आपत्ति है तो उसेसड़कों पर आरोप लगाने की बजाय प्रासंगिक मंचों पर जाना चाहिए।
गफूर ने कहा कि लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों को लोकतांत्रिक रूप से सुलझाया जाना चाहिए और उन्होंने प्रदर्शनकारियों और सरकार के बीच सम्पर्क की सराहना की। रहमान ने विपक्षी नेताओं के साथ बैठक के बाद गफूर की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया में मीडिया से कहा कि सैन्य प्रवक्ता को ऐसे बयान देने से परहेज करना चाहिए जो सेना की तटस्थता का उल्लंघन करे। उन्होंने कहा कि यह बयान किसी नेता की ओर से आना चाहिए था, सेना की ओर से नहीं। उन्होंने घोषणा की कि यदि प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा दो दिन की समयसीमा का पालन नहीं किया जाता है तो विपक्ष शनिवार को बैठक करेगा और आगे के कदम पर निर्णय किया जाएगा। रहमान की जमीयत उलेमा ए इस्लाम फजल के नेतृत्व वाला आजादी मार्च बृहस्पतिवार को अपने अंतिम गंतव्य स्थल पहुंचा। मार्च सिंध प्रांत से शुरू हुआ था और बुधवार को लाहौर से निकला था।
प्रधानमंत्री खान के नेतृत्व वाली पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ की सरकार को सत्ता से हटाने के लिए आयोजित इस मार्च में रहमान के साथ पाकिस्तान मुस्लिम लीग..नवाज (पीएमएल..एन), पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) और आवामी नेशनल पार्टी (एएनपी) के नेता भी हैं। वहीं प्रदर्शन से बेपरवाह प्रधानमंत्री खान ने शुक्रवार को गिलगिट..बाल्टिस्तान में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रदर्शनकारियों से कहा कि उनसे किसी तरह की राहत की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वे दिन लद गए जब लोग सत्ता में आने के लिए इस्लाम का इस्तेमाल करते थे। यह नया पाकिस्तान है। जब तक चाहें, बैठें। जब आपकी खाद्य सामग्री समाप्त हो जाएगी तो और भेज दी जाएगी। यद्यपि हम आपको राष्ट्रीय सुलह अध्यादेश (एनआरओ) नहीं देंगे।
एनआरओ अक्टूबर 2007 में भ्रष्टाचार, धनशोधन, हत्या और आतंकवाद के आरोपी नेताओं, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और नौकरशाहों को माफी प्रदान करने के लिए जारी किया गया था। उन्होंने कहा कि वे किससे आजादी चाहते हैं? मैं चाहता हूं कि मीडिया वहां जाए और लोगों से पूछे कि वे किससे आजादी चाहते हैं। खान ने कहा कि प्रदर्शन रैली ने पाकिस्तान के शत्रुओं को खुश किया है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ, उनके भाई शाहबाज, पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और पूर्व प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी की ओर परोक्ष इशारा करते हुए कहा, ‘‘मैं उन सभी को जेल में डालूंगा।’’
संयुक्त राष्ट्र। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) के अध्यक्ष न्यायाधीश अब्दुलकावी यूसुफ ने यहां संयुक्त राष्ट्र महासभा को बताया कि भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव के मामले में पाकिस्तान ने वियना संधि के तहत अपने दायित्वों का उल्लंघन किया। महासभा में बुधवार को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की रिपोर्ट पेश करते हुए यूसुफ ने 17 जुलाई के अपने फैसले में कहा कि संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख न्यायिक अंग ने ‘‘पाया कि पाकिस्तान ने वियना संधि के अनुच्छेद 36 के तहत अपने दायित्वों का उल्लंघन किया था और इस मामले में उचित उपाय किए जाने बाकी थे।’’
भारत के लिए एक बड़ी जीत के रूप में आईसीजे ने फैसला सुनाया था कि पाकिस्तान को जाधव को दी गई मौत की सजा की समीक्षा करनी चाहिए, जो भारतीय नौसेना के एक सेवानिवृत्त अधिकारी थे और जिन्हें पाकिस्तानी सैन्य अदालत ने ‘‘जासूसी और आतंकवाद’’ के आरोपों में मौत की सजा सुनाई थी। भारत की दलील थी कि उसके नागरिक को दूतावास तक पहुंच नहीं मुहैया कराई गई, जो 1963 की वियना संधि का उल्लंघन है। यूसुफ की अगुवाई वाली पीठ ने ‘‘कुलभूषण सुधीर जाधव की सजा की प्रभावी समीक्षा और पुनर्विचार का आदेश दिया था।’’ यूसुफ ने महासभा में अपनी रिपोर्ट पेश करते हुए जाधव मामले में अदालत के फैसले के कई पहलुओं पर विस्तार से बताया।
लाहौर,पाकिस्तान के बीमार चल रहे पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के स्वास्थ्य में बुधवार को सुधार के कुछ संकेत मिले। अब उनकी प्लेटलेट संख्या स्थिर है और रक्तचाप सामान्य दर्ज किया गया। मेडिकल बोर्ड ने यह जानकारी दी। शरीफ को सोमवार रात सर्विसेज अस्पताल में भर्ती किया गया था। वह रिश्वत रोधी इकाई की हिरासत में थे और उनकी प्लेटलेट्स संख्या घटकर 2,000 तक रह गई थी।
पाकिस्तान की एक अदालत ने मंगलवार को भ्रष्टाचार मामले में उनकी आठ सप्ताह की सजा निलंबित करते हुए जमानत पर उनके बाहर आने का रास्ता साफ कर दिया था क्योंकि उनकी रक्त प्लेटलेट संख्या गिरती जा रही थी।
सर्विसेज अस्पताल के मुख्य डॉक्टर महमूद अयाज ने संवाददाताओं से कहा, ‘नवाज शरीफ की स्थिति में आज सुधार हुआ। उनकी प्लेटलेट संख्या स्थिर है और यह 28,000 से बढ़कर 35,000 हो गई।’ सोशल मीडिया पर उनकी कुछ तस्वीरें भी वायरल हो रही हैं जिसमें एक डॉक्टर उनका इलाज करते हुए नजर आ रहा है।
इससे पहले देश के मौजूदा पीएम इमरान खान ने कहा था कि वह किसी की जिंदगी की गारंटी नहीं ले सकते। पिछले हफ्ते इस्लामाबाद हाई कोर्ट की एक बेंच ने सरकार से कहा था कि वह जेल में बंद नवाज शरीफ के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी ले। बता दें कि शरीफ के परिजनों ने भी कहा है कि अगर पूर्व प्रधानमंत्री को कुछ हुआ तो इसके लिए प्रधानमंत्री इमरान नियाजी जिम्मेदार होंगे।
कैलिफोर्निया, लॉन्ग बीच पर एक घर में हैलोवीन पार्टी चल रही थी जिसमें गोलीबारी हुईइससे पहले कनसास शहर में गोलीबारी हुई थी जिसमें चार की मौत हो गई
कैलिफोर्निया के लॉन्ग बीच पर एक घर में हुई गोलीबारी में तीन लोगों के मारे जाने की खबर है. इस घटना में 9 लोग जख्मी बताए जा रहे हैं. मंगलवार रात हुई इस घटना में हैलोवीन पार्टी में अचानक गोलीबारी की गई जिसके बाद पार्टी में मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई.
'द इंडिपेंडेंट' ने स्थानीय दमकल विभाग के हवाले से बताया कि अभी तक तीन लोगों की मौत की पुष्टि हई है, जबकि 9 जख्मी लोगों को स्थानीय अस्पताल में दाखिल कराया गया है. इस समाचार पत्र को घटनास्थल पर मौजूद कुछ चश्मदीदों ने बताया कि हैलोवीन पार्टी के दौरान तकरीबन 20 राउंड फायरिंग की आवाज सुनी गई. खास पोशाक पहने कुछ लोगों को घटनास्थल से बाहर भागते हुए देखा गया.
लॉन्ग बीच दमकल विभाग के मुताबिक उसे मंगलवार रात लगभग 10.45 बजे गोलीबारी की सूचना मिली. दमकल विभाग के प्रवक्ता जेक हेफ्लिन ने कहा कि रेस्क्यू के लिए पहुंची टीम को कई लोग अफरा-तफरी में दिखे. इस गोलीबारी के आरोपी अभी तक पकड़ से दूर हैं और पुलिस प्रशासन उनकी धरपकड़ में जुटा है.
अभी हाल में कन्सास में ऐसी ही गोलीबारी हुई थी. बार में हुई गोलीबारी में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि पांच लोग घायल हो गए. यह घटना अमेरिका के मिसूरी राज्य के कन्सास शहर में हुई. पुलिस के मुताबिक, कन्सास शहर के सेंट्रल स्ट्रीट्स के एक बार में एक संदिग्ध घुस कर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाने लगा. इसमें 9 लोगों को गोली लगी, जिनमें 4 की मौत हो गई और बाकी के पांच लोग घायल हो गए.
लंदन,ब्रिटेन में आगामी 12 दिसंबर को आम चुनाव होना तय माना जा रहा है। ब्रिटेन की संसद के निचले सदन 'हाउस ऑफ कॉमन्स' ने प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की 12 दिसंबर को चुनाव कराने की योजना का समर्थन किया। हाउस ऑफ कॉमन्स में दिसंबर में चुनाव कराने के पक्ष में 438 सांसदों ने वोट किया जबकि विरोध में केवल 20 मत पड़े।
साल 1923 के बाद पहली बार दिसंबर महीने में ब्रिटेन में आम चुनाव कराने तय किए गए। इसके एक दिन बाद यानी 13 दिसंबर को चुनावों के नतीजे भी आ जाएंगे। जॉनसन ने कहा कि जनता को ब्रेक्जिट और देश के भविष्य के लिए विकल्प देना चाहिए। अब इस बिल को हाउस ऑफ लॉर्ड्स में भेजा जाएगा।
पीएम जॉनसन को उम्मीद है कि आम चुनाव उन्हें ब्रेक्जिट के लिए एक नया जनादेश देगा और वर्तमान संसदीय गतिरोध को तोड़ेगा, जिसके कारण ब्रिटेन के ब्रेक्जिट से बाहर होने में 31 जनवरी तक की समयसीमा तय हो गई है। उन्होंने कहा कि यह देश के लिए 'ब्रेक्जिट प्राप्त करने को एक साथ आने का समय' है, उन्होंने वोट के कुछ मिनट बाद 1922 की बैकबेंच कंजर्वेटिव की समिति की बैठक छोड़ दी।
इससे पहले जॉनसन 31 अक्टूबर तक ब्रेक्जिट को लेकर अड़े हुए थे और उन्होंने कई बार कहा कि अब इसकी समयसीमा नहीं बढ़ाई जाएगी। हालांकि उन्हें सदन में बहुमत नहीं प्राप्त है और इस मामले में उनके कई सांसद विपक्ष के साथ आ गए।