ईश्वर दुबे
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Bhilai
मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने आज बेरला ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम भिंभौरी का दौरा कर स्व. कोदूराम वर्मा की प्रतिमा का अनावरण किया। श्री बघेल ने लोगों को नवरात्रि की बधाई दी। उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि स्व. कोदूराम वर्मा से वे बचपन से ही मिलते आ रहे है। सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्र में उनकी विशेष पकड़ रही है। वे सहज, सरल एवं मिलनसार व्यक्तित्व के धनी थे। स्व. वर्मा छत्तीसगढ़ अस्मिता के प्रबल प्रवर्तक भी रहे है। कर्मा नृत्य का संयोजन वे बखूबी करते थे। कबीर के भजन भी उन्हें प्रिय थे। स्व. वर्मा की संगीत-नृत्यकला में विशेष रूचि थी। वे पूर्व विधायक स्व. महेश तिवारी के करीबी संगवारी भी थे। किसानों के हित के लिए वे लगातार प्रयासरत रहे। उनके काम को आगे बढ़ाने का कार्य प्रदेश सरकार कर रही है। इस अवसर पर प्रदेश केे गृहजेल एवं पर्यटन मंत्री श्री ताम्रध्वज साहू, कृषि एवं जैव प्रौद्योगिकी, पशुपालन, जलसंसाधन मंत्री रवीन्द्र चौबे, राज्यसभा सांसद श्रीमती छाया वर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती कविता साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष रायपुर श्रीमती शारदा वर्मा, कलेक्टर श्रीमती शिखा राजपूत तिवारी, पुलिस अधीक्षक श्री प्रशांत ठाकुर, प्रेमलाल उर्फ बबला वर्मा, भारती वर्मा, बुलाकी वर्मा सहित अन्य गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने आज बेरला ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम भिंभौरी का दौरा कर स्व. कोदूराम वर्मा की प्रतिमा का अनावरण किया। श्री बघेल ने लोगों को नवरात्रि की बधाई दी। उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि स्व. कोदूराम वर्मा से वे बचपन से ही मिलते आ रहे है। सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्र में उनकी विशेष पकड़ रही है। वे सहज, सरल एवं मिलनसार व्यक्तित्व के धनी थे। स्व. वर्मा छत्तीसगढ़ अस्मिता के प्रबल प्रवर्तक भी रहे है। कर्मा नृत्य का संयोजन वे बखूबी करते थे। कबीर के भजन भी उन्हें प्रिय थे। स्व. वर्मा की संगीत-नृत्यकला में विशेष रूचि थी। वे पूर्व विधायक स्व. महेश तिवारी के करीबी संगवारी भी थे। किसानों के हित के लिए वे लगातार प्रयासरत रहे। उनके काम को आगे बढ़ाने का कार्य प्रदेश सरकार कर रही है। इस अवसर पर प्रदेश केे गृहजेल एवं पर्यटन मंत्री श्री ताम्रध्वज साहू, कृषि एवं जैव प्रौद्योगिकी, पशुपालन, जलसंसाधन मंत्री रवीन्द्र चौबे, राज्यसभा सांसद श्रीमती छाया वर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती कविता साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष रायपुर श्रीमती शारदा वर्मा, कलेक्टर श्रीमती शिखा राजपूत तिवारी, पुलिस अधीक्षक श्री प्रशांत ठाकुर, प्रेमलाल उर्फ बबला वर्मा, भारती वर्मा, बुलाकी वर्मा सहित अन्य गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ में परंपरागत रूप से मनाए जाने वाले त्यौहार ’गोवर्धन पूजा’ को गौठान दिवस के रूप में मनाये जाने की घोषणा की है। गोवर्धन पूजा के दिन प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में गौ-माता की पूजा कर गौवंश को खिचड़ी खिलाने की परंपरा है। प्रदेश सरकार गौ-वंश के संरक्षण के लिए गौठान योजना संचालित कर रही है। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने आज बेमेतरा जिले के बेरला विकासखंड के अंतर्गत ग्राम भिंभौरी में आयोजित श्रीमद्भागवत ज्ञानयज्ञ सत्संग कार्यक्रम आभार एवं अभिनंदन समारोह में उक्ताशय के विचार व्यक्त किए। समारोह में प्रदेश केे गृहजेल एवं पर्यटन मंत्री श्री ताम्रध्वज साहू, कृषि एवं जैव प्रौद्योगिकी, पशुपालन, जलसंसाधन मंत्री रवीन्द्र चौबे, राज्यसभा सांसद श्रीमती छाया वर्मा उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा कि प्रदेश सरकार गौ-वंश के संरक्षण के लिए कार्य कर रही है। प्रदेश में गौठान का निर्माण कर पशुओं का संरक्षण किया जा रहा है। उन्होंने लोगों से आव्हान करते हुए कहा कि गौठान के लिए चारे की व्यवस्था जनता के सहयोग से करना है। इस योजना में सरकार की सहभागिता के अलावा संचालन करने का काम गांव वालों को ही करना है। गोबर से कंपोस्ट एवं वर्मी खाद बना रहे है। हाल ही में अभनपुर ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम बनचरौदा में राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत का आगमन भी हो चुका है। उन्होंने गौठान योजना की तारीफ की है। श्री बघेल ने कहा कि गोबर में मिट्टी मिलाकर महिला समूह द्वारा एक लाख दियों का निर्माण किया गया है, दिवाली के पूर्व इसे बेचने के लिए आर्डर भी मिल चुका है। मुख्यमंत्री ने आम नागरिकों से प्लास्टिक का कम से कम उपयोग करने का आव्हान किया। इससे पालतु मवेशियों को नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि गौठान योजना के जरिये पशु नस्ल का सुधार होगा। इससे गांव समृद्ध बनेंगे। महिला स्व-सहायता समूह की स्थिति भी मजबूत होगी।
मुख्यमंत्री श्री बघेल ने इस अवसर पर शब्दभेदी बाण में निपुण स्व. कोदूराम वर्मा की प्रतिमा का अनावरण किया। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने भिंभौरी में संचालित जनता उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय का नामकरण पूर्व प्राचार्य एवं शिक्षाविद् स्व. रतनलाल टिकरिहा के नाम पर करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने ग्राम उपरा से हसदा सड़क एवं गुधेली-भंेगरी घाट में एनीकट निर्माण को आगामी बजट में शामिल करने का भरोसा दिलाया।
गृहमंत्री श्री साहू ने कहा कि वे वर्ष 2008 में बेमेतरा क्षेत्र के विधायक तत्पश्चात दुर्ग लोकसभा क्षेत्र के सांसद होने के नाते बेमेतरा जिले से जुड़े रहे है। स्व. कोदूराम वर्मा शब्दभेदी बाण चलाते थे। आज मुख्यमंत्री के कर-कमलों से प्रतिमा का अनावरण किया गया। मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रहे है।
कृषि मंत्री श्री चौबे ने कहा कि शब्दभेदी बाण में निपुण स्व. वर्मा छत्तीसगढ़िया की ताकत का अहसास कराते थे। मुख्यमंत्री ने कार्यभार संभालते ही किसानों से किया गया वायदा तत्काल पूरा किया। मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ के पारंपरिक तीज-त्यौहार हरेली, तीजा, माता कर्मा जयंती, आदिवासी दिवस पर अवकाश घोषित किया है। मुख्यमंत्री ने जब से कार्यभार संभाला है, किसानों का मान-सम्मान भी बढ़ा है। समर्थन मूल्य पर 25 सौ रूपए प्रति क्ंिवटल की दर से धान खरीदा गया।
स्वागत भाषण क्षेत्रीय विधायक श्री आशीष कुमार छाबड़ा ने दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने अपने आठ-नौ माह के कार्यकाल में जनता की बेहतरी के लिए अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिये है। मुख्यमंत्री श्री बघेल प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य कर रहे है।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती कविता साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष रायपुर श्रीमती शारदा वर्मा, कलेक्टर श्रीमती शिखा राजपूत तिवारी, पुलिस अधीक्षक श्री प्रशांत ठाकुर, सहित अनेक जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालुजन बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल आज शाम बस्तर दशहरा की प्रमुख रस्म ‘मावली परघाव‘ में शामिल हुए। उन्होंने यहां जिया डेरा में दंतेवाड़ा से पहुंची माता मावली का पूरे विधि-विधान से स्वागत किया और उनसे प्रदेश की सुख, समृद्धि और शांति के लिए प्रार्थना की।
उल्लेखनीय है कि दंतेवाड़ा से माता मावली की डोली जगदलपुर में रविवार को देर रात पहुंची थी, जिसे गीदम रोड स्थित जिया डेरा में ठहराया गया था। सोमवार को मावली परघाव विधान संपन्न कराया गया, जिसमें मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल शामिल हुए। इस महत्वपूर्ण विधान में शामिल होने के लिए करीब 600 ग्राम देवता जगदलपुर पहुंचे। दूरस्थ अंचलों के देवी-देवताओं को विशेष वाहनों से यहां लाया गया। बस्तर दशहरा में शामिल होने पहुंचे देव सबसे पहले मांईजी के मंदिर में पहुंचे, इसके बाद उन्हें देवगुड़ी में ठहराया गया। ये सभी शाम को मावली परघाव में शामिल हुए। माता मावली के दंतेश्वरी मंदिर प्रवेश के अवसर पर बड़ी संख्या मंे श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया।
मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ में परंपरागत रूप से मनाए जाने वाले त्यौहार ’गोवर्धन पूजा’ को गौठान दिवस के रूप में मनाये जाने की घोषणा की है। गोवर्धन पूजा के दिन प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में गौ-माता की पूजा कर गौवंश को खिचड़ी खिलाने की परंपरा है। प्रदेश सरकार गौ-वंश के संरक्षण के लिए गौठान योजना संचालित कर रही है। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने आज बेमेतरा जिले के बेरला विकासखंड के अंतर्गत ग्राम भिंभौरी में आयोजित श्रीमद्भागवत ज्ञानयज्ञ सत्संग कार्यक्रम आभार एवं अभिनंदन समारोह में उक्ताशय के विचार व्यक्त किए। समारोह में प्रदेश केे गृहजेल एवं पर्यटन मंत्री श्री ताम्रध्वज साहू, कृषि एवं जैव प्रौद्योगिकी, पशुपालन, जलसंसाधन मंत्री रवीन्द्र चौबे, राज्यसभा सांसद श्रीमती छाया वर्मा उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा कि प्रदेश सरकार गौ-वंश के संरक्षण के लिए कार्य कर रही है। प्रदेश में गौठान का निर्माण कर पशुओं का संरक्षण किया जा रहा है। उन्होंने लोगों से आव्हान करते हुए कहा कि गौठान के लिए चारे की व्यवस्था जनता के सहयोग से करना है। इस योजना में सरकार की सहभागिता के अलावा संचालन करने का काम गांव वालों को ही करना है। गोबर से कंपोस्ट एवं वर्मी खाद बना रहे है। हाल ही में अभनपुर ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम बनचरौदा में राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत का आगमन भी हो चुका है। उन्होंने गौठान योजना की तारीफ की है। श्री बघेल ने कहा कि गोबर में मिट्टी मिलाकर महिला समूह द्वारा एक लाख दियों का निर्माण किया गया है, दिवाली के पूर्व इसे बेचने के लिए आर्डर भी मिल चुका है। मुख्यमंत्री ने आम नागरिकों से प्लास्टिक का कम से कम उपयोग करने का आव्हान किया। इससे पालतु मवेशियों को नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि गौठान योजना के जरिये पशु नस्ल का सुधार होगा। इससे गांव समृद्ध बनेंगे। महिला स्व-सहायता समूह की स्थिति भी मजबूत होगी।
मुख्यमंत्री श्री बघेल ने इस अवसर पर शब्दभेदी बाण में निपुण स्व. कोदूराम वर्मा की प्रतिमा का अनावरण किया। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने भिंभौरी में संचालित जनता उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय का नामकरण पूर्व प्राचार्य एवं शिक्षाविद् स्व. रतनलाल टिकरिहा के नाम पर करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने ग्राम उपरा से हसदा सड़क एवं गुधेली-भंेगरी घाट में एनीकट निर्माण को आगामी बजट में शामिल करने का भरोसा दिलाया।
गृहमंत्री श्री साहू ने कहा कि वे वर्ष 2008 में बेमेतरा क्षेत्र के विधायक तत्पश्चात दुर्ग लोकसभा क्षेत्र के सांसद होने के नाते बेमेतरा जिले से जुड़े रहे है। स्व. कोदूराम वर्मा शब्दभेदी बाण चलाते थे। आज मुख्यमंत्री के कर-कमलों से प्रतिमा का अनावरण किया गया। मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रहे है।
कृषि मंत्री श्री चौबे ने कहा कि शब्दभेदी बाण में निपुण स्व. वर्मा छत्तीसगढ़िया की ताकत का अहसास कराते थे। मुख्यमंत्री ने कार्यभार संभालते ही किसानों से किया गया वायदा तत्काल पूरा किया। मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ के पारंपरिक तीज-त्यौहार हरेली, तीजा, माता कर्मा जयंती, आदिवासी दिवस पर अवकाश घोषित किया है। मुख्यमंत्री ने जब से कार्यभार संभाला है, किसानों का मान-सम्मान भी बढ़ा है। समर्थन मूल्य पर 25 सौ रूपए प्रति क्ंिवटल की दर से धान खरीदा गया।
स्वागत भाषण क्षेत्रीय विधायक श्री आशीष कुमार छाबड़ा ने दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने अपने आठ-नौ माह के कार्यकाल में जनता की बेहतरी के लिए अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिये है। मुख्यमंत्री श्री बघेल प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य कर रहे है।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती कविता साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष रायपुर श्रीमती शारदा वर्मा, कलेक्टर श्रीमती शिखा राजपूत तिवारी, पुलिस अधीक्षक श्री प्रशांत ठाकुर, सहित अनेक जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालुजन बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ में परंपरागत रूप से मनाए जाने वाले त्यौहार ’गोवर्धन पूजा’ को गौठान दिवस के रूप में मनाये जाने की घोषणा की है। गोवर्धन पूजा के दिन प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में गौ-माता की पूजा कर गौवंश को खिचड़ी खिलाने की परंपरा है। प्रदेश सरकार गौ-वंश के संरक्षण के लिए गौठान योजना संचालित कर रही है। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने आज बेमेतरा जिले के बेरला विकासखंड के अंतर्गत ग्राम भिंभौरी में आयोजित श्रीमद्भागवत ज्ञानयज्ञ सत्संग कार्यक्रम आभार एवं अभिनंदन समारोह में उक्ताशय के विचार व्यक्त किए। समारोह में प्रदेश केे गृहजेल एवं पर्यटन मंत्री श्री ताम्रध्वज साहू, कृषि एवं जैव प्रौद्योगिकी, पशुपालन, जलसंसाधन मंत्री रवीन्द्र चौबे, राज्यसभा सांसद श्रीमती छाया वर्मा उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा कि प्रदेश सरकार गौ-वंश के संरक्षण के लिए कार्य कर रही है। प्रदेश में गौठान का निर्माण कर पशुओं का संरक्षण किया जा रहा है। उन्होंने लोगों से आव्हान करते हुए कहा कि गौठान के लिए चारे की व्यवस्था जनता के सहयोग से करना है। इस योजना में सरकार की सहभागिता के अलावा संचालन करने का काम गांव वालों को ही करना है। गोबर से कंपोस्ट एवं वर्मी खाद बना रहे है। हाल ही में अभनपुर ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम बनचरौदा में राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत का आगमन भी हो चुका है। उन्होंने गौठान योजना की तारीफ की है। श्री बघेल ने कहा कि गोबर में मिट्टी मिलाकर महिला समूह द्वारा एक लाख दियों का निर्माण किया गया है, दिवाली के पूर्व इसे बेचने के लिए आर्डर भी मिल चुका है। मुख्यमंत्री ने आम नागरिकों से प्लास्टिक का कम से कम उपयोग करने का आव्हान किया। इससे पालतु मवेशियों को नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि गौठान योजना के जरिये पशु नस्ल का सुधार होगा। इससे गांव समृद्ध बनेंगे। महिला स्व-सहायता समूह की स्थिति भी मजबूत होगी।
मुख्यमंत्री श्री बघेल ने इस अवसर पर शब्दभेदी बाण में निपुण स्व. कोदूराम वर्मा की प्रतिमा का अनावरण किया। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने भिंभौरी में संचालित जनता उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय का नामकरण पूर्व प्राचार्य एवं शिक्षाविद् स्व. रतनलाल टिकरिहा के नाम पर करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने ग्राम उपरा से हसदा सड़क एवं गुधेली-भंेगरी घाट में एनीकट निर्माण को आगामी बजट में शामिल करने का भरोसा दिलाया।
गृहमंत्री श्री साहू ने कहा कि वे वर्ष 2008 में बेमेतरा क्षेत्र के विधायक तत्पश्चात दुर्ग लोकसभा क्षेत्र के सांसद होने के नाते बेमेतरा जिले से जुड़े रहे है। स्व. कोदूराम वर्मा शब्दभेदी बाण चलाते थे। आज मुख्यमंत्री के कर-कमलों से प्रतिमा का अनावरण किया गया। मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रहे है।
कृषि मंत्री श्री चौबे ने कहा कि शब्दभेदी बाण में निपुण स्व. वर्मा छत्तीसगढ़िया की ताकत का अहसास कराते थे। मुख्यमंत्री ने कार्यभार संभालते ही किसानों से किया गया वायदा तत्काल पूरा किया। मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ के पारंपरिक तीज-त्यौहार हरेली, तीजा, माता कर्मा जयंती, आदिवासी दिवस पर अवकाश घोषित किया है। मुख्यमंत्री ने जब से कार्यभार संभाला है, किसानों का मान-सम्मान भी बढ़ा है। समर्थन मूल्य पर 25 सौ रूपए प्रति क्ंिवटल की दर से धान खरीदा गया।
स्वागत भाषण क्षेत्रीय विधायक श्री आशीष कुमार छाबड़ा ने दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने अपने आठ-नौ माह के कार्यकाल में जनता की बेहतरी के लिए अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिये है। मुख्यमंत्री श्री बघेल प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य कर रहे है।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती कविता साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष रायपुर श्रीमती शारदा वर्मा, कलेक्टर श्रीमती शिखा राजपूत तिवारी, पुलिस अधीक्षक श्री प्रशांत ठाकुर, सहित अनेक जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालुजन बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ में परंपरागत रूप से मनाए जाने वाले त्यौहार ’गोवर्धन पूजा’ को गौठान दिवस के रूप में मनाये जाने की घोषणा की है। गोवर्धन पूजा के दिन प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में गौ-माता की पूजा कर गौवंश को खिचड़ी खिलाने की परंपरा है। प्रदेश सरकार गौ-वंश के संरक्षण के लिए गौठान योजना संचालित कर रही है। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने आज बेमेतरा जिले के बेरला विकासखंड के अंतर्गत ग्राम भिंभौरी में आयोजित श्रीमद्भागवत ज्ञानयज्ञ सत्संग कार्यक्रम आभार एवं अभिनंदन समारोह में उक्ताशय के विचार व्यक्त किए। समारोह में प्रदेश केे गृहजेल एवं पर्यटन मंत्री श्री ताम्रध्वज साहू, कृषि एवं जैव प्रौद्योगिकी, पशुपालन, जलसंसाधन मंत्री रवीन्द्र चौबे, राज्यसभा सांसद श्रीमती छाया वर्मा उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा कि प्रदेश सरकार गौ-वंश के संरक्षण के लिए कार्य कर रही है। प्रदेश में गौठान का निर्माण कर पशुओं का संरक्षण किया जा रहा है। उन्होंने लोगों से आव्हान करते हुए कहा कि गौठान के लिए चारे की व्यवस्था जनता के सहयोग से करना है। इस योजना में सरकार की सहभागिता के अलावा संचालन करने का काम गांव वालों को ही करना है। गोबर से कंपोस्ट एवं वर्मी खाद बना रहे है। हाल ही में अभनपुर ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम बनचरौदा में राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत का आगमन भी हो चुका है। उन्होंने गौठान योजना की तारीफ की है। श्री बघेल ने कहा कि गोबर में मिट्टी मिलाकर महिला समूह द्वारा एक लाख दियों का निर्माण किया गया है, दिवाली के पूर्व इसे बेचने के लिए आर्डर भी मिल चुका है। मुख्यमंत्री ने आम नागरिकों से प्लास्टिक का कम से कम उपयोग करने का आव्हान किया। इससे पालतु मवेशियों को नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि गौठान योजना के जरिये पशु नस्ल का सुधार होगा। इससे गांव समृद्ध बनेंगे। महिला स्व-सहायता समूह की स्थिति भी मजबूत होगी।
मुख्यमंत्री श्री बघेल ने इस अवसर पर शब्दभेदी बाण में निपुण स्व. कोदूराम वर्मा की प्रतिमा का अनावरण किया। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने भिंभौरी में संचालित जनता उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय का नामकरण पूर्व प्राचार्य एवं शिक्षाविद् स्व. रतनलाल टिकरिहा के नाम पर करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने ग्राम उपरा से हसदा सड़क एवं गुधेली-भंेगरी घाट में एनीकट निर्माण को आगामी बजट में शामिल करने का भरोसा दिलाया।
गृहमंत्री श्री साहू ने कहा कि वे वर्ष 2008 में बेमेतरा क्षेत्र के विधायक तत्पश्चात दुर्ग लोकसभा क्षेत्र के सांसद होने के नाते बेमेतरा जिले से जुड़े रहे है। स्व. कोदूराम वर्मा शब्दभेदी बाण चलाते थे। आज मुख्यमंत्री के कर-कमलों से प्रतिमा का अनावरण किया गया। मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रहे है।
कृषि मंत्री श्री चौबे ने कहा कि शब्दभेदी बाण में निपुण स्व. वर्मा छत्तीसगढ़िया की ताकत का अहसास कराते थे। मुख्यमंत्री ने कार्यभार संभालते ही किसानों से किया गया वायदा तत्काल पूरा किया। मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ के पारंपरिक तीज-त्यौहार हरेली, तीजा, माता कर्मा जयंती, आदिवासी दिवस पर अवकाश घोषित किया है। मुख्यमंत्री ने जब से कार्यभार संभाला है, किसानों का मान-सम्मान भी बढ़ा है। समर्थन मूल्य पर 25 सौ रूपए प्रति क्ंिवटल की दर से धान खरीदा गया।
स्वागत भाषण क्षेत्रीय विधायक श्री आशीष कुमार छाबड़ा ने दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने अपने आठ-नौ माह के कार्यकाल में जनता की बेहतरी के लिए अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिये है। मुख्यमंत्री श्री बघेल प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य कर रहे है।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती कविता साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष रायपुर श्रीमती शारदा वर्मा, कलेक्टर श्रीमती शिखा राजपूत तिवारी, पुलिस अधीक्षक श्री प्रशांत ठाकुर, सहित अनेक जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालुजन बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल आज शाम बस्तर दशहरा की प्रमुख रस्म ‘मावली परघाव‘ में शामिल हुए। उन्होंने यहां जिया डेरा में दंतेवाड़ा से पहुंची माता मावली का पूरे विधि-विधान से स्वागत किया और उनसे प्रदेश की सुख, समृद्धि और शांति के लिए प्रार्थना की।
उल्लेखनीय है कि दंतेवाड़ा से माता मावली की डोली जगदलपुर में रविवार को देर रात पहुंची थी, जिसे गीदम रोड स्थित जिया डेरा में ठहराया गया था। सोमवार को मावली परघाव विधान संपन्न कराया गया, जिसमें मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल शामिल हुए। इस महत्वपूर्ण विधान में शामिल होने के लिए करीब 600 ग्राम देवता जगदलपुर पहुंचे। दूरस्थ अंचलों के देवी-देवताओं को विशेष वाहनों से यहां लाया गया। बस्तर दशहरा में शामिल होने पहुंचे देव सबसे पहले मांईजी के मंदिर में पहुंचे, इसके बाद उन्हें देवगुड़ी में ठहराया गया। ये सभी शाम को मावली परघाव में शामिल हुए। माता मावली के दंतेश्वरी मंदिर प्रवेश के अवसर पर बड़ी संख्या मंे श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल आज शाम बस्तर दशहरा की प्रमुख रस्म ‘मावली परघाव‘ में शामिल हुए। उन्होंने यहां जिया डेरा में दंतेवाड़ा से पहुंची माता मावली का पूरे विधि-विधान से स्वागत किया और उनसे प्रदेश की सुख, समृद्धि और शांति के लिए प्रार्थना की।
उल्लेखनीय है कि दंतेवाड़ा से माता मावली की डोली जगदलपुर में रविवार को देर रात पहुंची थी, जिसे गीदम रोड स्थित जिया डेरा में ठहराया गया था। सोमवार को मावली परघाव विधान संपन्न कराया गया, जिसमें मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल शामिल हुए। इस महत्वपूर्ण विधान में शामिल होने के लिए करीब 600 ग्राम देवता जगदलपुर पहुंचे। दूरस्थ अंचलों के देवी-देवताओं को विशेष वाहनों से यहां लाया गया। बस्तर दशहरा में शामिल होने पहुंचे देव सबसे पहले मांईजी के मंदिर में पहुंचे, इसके बाद उन्हें देवगुड़ी में ठहराया गया। ये सभी शाम को मावली परघाव में शामिल हुए। माता मावली के दंतेश्वरी मंदिर प्रवेश के अवसर पर बड़ी संख्या मंे श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल आज शाम बस्तर दशहरा की प्रमुख रस्म ‘मावली परघाव‘ में शामिल हुए। उन्होंने यहां जिया डेरा में दंतेवाड़ा से पहुंची माता मावली का पूरे विधि-विधान से स्वागत किया और उनसे प्रदेश की सुख, समृद्धि और शांति के लिए प्रार्थना की।
उल्लेखनीय है कि दंतेवाड़ा से माता मावली की डोली जगदलपुर में रविवार को देर रात पहुंची थी, जिसे गीदम रोड स्थित जिया डेरा में ठहराया गया था। सोमवार को मावली परघाव विधान संपन्न कराया गया, जिसमें मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल शामिल हुए। इस महत्वपूर्ण विधान में शामिल होने के लिए करीब 600 ग्राम देवता जगदलपुर पहुंचे। दूरस्थ अंचलों के देवी-देवताओं को विशेष वाहनों से यहां लाया गया। बस्तर दशहरा में शामिल होने पहुंचे देव सबसे पहले मांईजी के मंदिर में पहुंचे, इसके बाद उन्हें देवगुड़ी में ठहराया गया। ये सभी शाम को मावली परघाव में शामिल हुए। माता मावली के दंतेश्वरी मंदिर प्रवेश के अवसर पर बड़ी संख्या मंे श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल आज शाम बस्तर दशहरा की प्रमुख रस्म ‘मावली परघाव‘ में शामिल हुए। उन्होंने यहां जिया डेरा में दंतेवाड़ा से पहुंची माता मावली का पूरे विधि-विधान से स्वागत किया और उनसे प्रदेश की सुख, समृद्धि और शांति के लिए प्रार्थना की।
उल्लेखनीय है कि दंतेवाड़ा से माता मावली की डोली जगदलपुर में रविवार को देर रात पहुंची थी, जिसे गीदम रोड स्थित जिया डेरा में ठहराया गया था। सोमवार को मावली परघाव विधान संपन्न कराया गया, जिसमें मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल शामिल हुए। इस महत्वपूर्ण विधान में शामिल होने के लिए करीब 600 ग्राम देवता जगदलपुर पहुंचे। दूरस्थ अंचलों के देवी-देवताओं को विशेष वाहनों से यहां लाया गया। बस्तर दशहरा में शामिल होने पहुंचे देव सबसे पहले मांईजी के मंदिर में पहुंचे, इसके बाद उन्हें देवगुड़ी में ठहराया गया। ये सभी शाम को मावली परघाव में शामिल हुए। माता मावली के दंतेश्वरी मंदिर प्रवेश के अवसर पर बड़ी संख्या मंे श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया।
जांजगीर से लगे ग्राम खोखरा के देवांगन चौक में विराजी मां दुर्गा
जांजगीर-चांपा। कहते है आस्था का दीप जलाए रखना बहुत कठिन होता है। क्यों इंसान की परिस्थितियाँ एक जैसी नहीं होती और जीवन शैली में परिवर्तन आने से आस्था का दीप डगमगाने लगता है। लेकिन जब दैवीय शक्ति साथ हो तो हर दीपक अपने आप निर्बाध रूप से जलता रहता है।
ऐसी ही शक्ति जिला मुख्यालय जांजगीर से जुड़े हुए एक गांव को भी मिली है जहां दुर्गा देवी की स्थापना 35 सालों से लगातार की जा रही है। कई समस्याएं आने के बाद भी यहां के लोग दुर्गा देवी की स्थापना से लेकर विसर्जन तक बराबर समय निकालते हैं। मिली जानकारी के अनुसार 1984 से खोखरा ग्राम के देवांगन चौक मे दुर्गा स्थापना की जा रही है। जिस समय इस चौक में दुर्गा स्थापना का कार्य शुरू किया गया उस वक्त एक दुर्गाेत्सव समिति आपसी सहयोग से बनाई गई जिसके अध्यक्ष शिव देवांगन को बनाया गया। चौक के वरिष्ट नागरिक बच्चाराम देवांगन जी बताते है कि पुराने समय में देवी की मूर्ति लाने के लिए एक रिक्सा होता था। समिति के सभी सदस्य पदयात्रा करते हुए कीर्तन के साथ देवी की प्रतिमा को चांपा से देवांगन चौक खोखरा तक लाया करते थे। बड़े उल्लास के साथ दुर्गा देवी की पूजा अर्चना के बाद उसका विसर्जन हसदेव नदी में किया जाता था। अब विसर्जन का कार्य गांव के ही तालाब में किया जाता है। शिव ने कई सालो तक इस प्रथा को जारी रखा फिर बलभद्र देवांगन, जगदीश देवांगन ने इस कार्य को आगे बढ़ाया। वर्तमान में इसे नवयुवक सेवा समिति द्वारा सम्भाला जा रहा है जिसके अध्यक्ष बसंत देवांगन है। उसके द्वारा बताया गया पुरानी पीढ़ी के परंपरा को बनाए रखना नवीन पीढ़ी का कार्य होता है इसलिए अब इस रीति को नवयुवक दुर्गोत्सव सेवा समिति आगे बढ़ा जा रही है। समिति के सचिव संजय देवांगन के अनुुसार यहां स्थापित की जानी वाली देवी की मूर्ति को विशेष आर्डर देके बनवाया जाता है जिससे देवी की दिव्य प्रतिमा लोगो के लिए प्रमुख आकर्षण का केन्द्र बनी रहती है। इसके अलावा यहां रात्री में जसगीत का भी आयोजन होता है जिससे ग्रामीण झूमने को मजबूर हो जाते है।
जांजगीर-चांपा। लिटिल लेजेंड्स किड्स स्कूल के नन्हे-मुन्ने बच्चो ने गरबा डे सेलिब्रेशन किया। नवरात्रि के अवसर पर धार्मिक गाने मे ग्रुप डांस कर हर्षोउल्लास से मॉ दुर्गा की अराधना की गई। साथ ही सभी को विजयदशमी की शुभकामनाएं देते हुए विजयदशमी के महत्व सत्य की जीत को समझाया गया।
इस अवसर पर कोऑर्डिनेटर रिया झाझडि़या ने नन्हे-मुन्हे बच्चो को धार्मिक गाने में गरबा डांस सिखाकर नवरात्रि पर होने वाले गरबा सेलिब्रेशन के महत्व को बताया। इस आयोजन मे तक्षशीला एकेडमी बिलासपुर के फैकल्टी इंजी. अभिनव द्विवेदी की विशेष उपस्थिति व शिक्षिकाओ मे पप्पी मैम, सुमन मैम, आरती मैम एवं नन्हे-मुन्हे बच्चो में शौर्य सुल्तानिया, राशिका अग्रवाल, योग्य पाण्डेय, खुशबू अग्रवाल, मायरा बंसल, अंशु अग्रवाल, आदया कश्यप, शिवम् गोस्वामी, सौमाक्षी राजपूत, वेदांश यादव, तान्या अग्रवाल, विक्रांत सिंह, अवनी सिंह शामिल हुए। आयोजन किड्स स्कूल के डॉयरेक्टर सुनील सिंघानिया के निर्देश मे सफलतापूर्लक हुआ।
मां के भय से जंगल की लकड़ी काटने हजार बार सोचते हैं लोग
जमीन से सौ फीट उपर पहाड़ पर विराजमान हैं मां अन्नधरी
नवरात्रि विशेष
जांजगीर-चांपा। देश दुनिया के जंगलों से लगातार वृक्ष कम होते जा रहे हैं। जहां जंगलों की जगह अब बसाहट होने लगी है और पर्यावरण की रीढ़ माने जाने वाले पेड़ पौधे कटते जा रहे हैं। वहीं पहरिया पाठ में एक ऐसा जंगल है, जहां की लकडियां काटने से पहले लोग हजार बार सोचते हैं, फिर भी उनकी हिम्मत साथ नहीं देती। यहां जंगल की पहरेदार हैं मां अन्नधरी देवी, जिसे इस क्षेत्र के लोग जंगल की देवी मानते हैं। यहां लकडियां काटना तो दूर, लोग जमीन पर गिरी हुई लकडियों को भी अपने घर नहीं ले जाते। इस डर से कि कहीं मां अन्नधरी उन पर नाराज न हो जाए।
जिला मुख्यालय जांजगीर से 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम पहरिया की मां अन्नधरी देवी की ख्याति दूर-दराज तक है। यहां प्रतिवर्ष क्वांर व चैत्र नवरात्रि में ज्योतिकलश प्रज्लवलित किए जाते हैं। जमीन से सौ फीट ऊपर पहाड़ पर मां अन्नधरी दाई का मंदिर स्थापित है, जहां पहुंचने के लिए लोगों को पहाड़ चढ़ना पड़ता है। ऐसा पहाड़, जिसके दोनों तरफ घनघोर जंगल है। करीब 50 एकड़ क्षेत्रफल में फैले पहरिया पाठ जंगल की हरियाली अब तक कायम है। ग्रामीण बताते हैं कि यहां मां अन्नधरी दाई साक्षात रूप से जंगल की रखवाली करती हैं। अगर किसी ने जंगल को नुकसान पहुंचाने, पेड़ पौधे काटने की जुर्रत की, तो उसका हश्र अच्छा नहीं होता। इसी वजह से आसपास के ग्रामीण जंगल से किसी भी हालत में लकडियां अपने घर नहीं ले जाते और न ही किसी को बेच सकते। ग्रामीण बताते हैं कि एक बार गांव के एक व्यक्ति ने जंगल से लकड़ी काटकर उसे घर में उपयोग कर लिया, जिससे उस परिवार पर विपत्तियों का पहाड़ टूट पड़ा। मां अन्नधरी दाई के कोप से उस परिवार के कई लोग गंभीर बीमारी से पीडि़त हो गए तथा आर्थिक रूप से परेशान रहने लगे। कुछ दिनों बाद बीमारी से उस ग्रामीण की भी मौत हो गई। बाद में परिजनों ने मां अन्नधरी दाई के मंदिर में जाकर क्षमा याचना की पूजा पाठ किया, तब जाकर परिवार को राहत मिली। इस तरह की कई घटनाएं होने के बाद ग्रामीणों को विश्वास हो गया कि मां अन्नधरी स्वयं जंगल की पहरेदारी करती हैं। मां के प्रभाव से ही पहरिया जंगल आज भी हरियाली से लबरेज है। यहां के जंगल में एक भी लकड़ी काटने के लिए कोई तैयार नहीं होता। इससे पर्यावरण का संरक्षण भी हो रहा है और मां अन्नधरी के प्रति लोगों की आस्था बनी हुई है।
खाली हाथ नहीं लौटते भक्त
मां अन्नधरी की महिमा अपरंपार है। सच्ची श्रद्धा और विश्वास से जो भक्त मां के दरबार में जाता है वह खाली हाथ नहीं लौटता। यही वजह है कि नवरात्रि के अलावा हर समय भक्तों का यहां तांता लगा रहता है। चैत्र व क्ंवार नवरात्रि में यहां मां अन्नधरी की विशेष आराधना होती है। यहां मनोकामना ज्योति कलश प्रज्जवलित कराने भक्तों की लाइन लगी रहती है। पूरे नौ दिनों तक माता की दरबार मांदर की थाप और जसगीत से गूंजायमान रहता है।
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