ईश्वर दुबे
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दुग्ध उत्पादन में प्रदेश को बनायेंगे देश का अव्वल राज्य
प्रदेश में प्राकृतिक खेती के साथ-साथ पशुपालन को विशेष बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने ग्वालियर में उन्नत कृषि कार्यशाला में किसानों से किया संवाद
अत्याधुनिक हाईटेक नर्सरी एवं फ्लोरीकल्चर गार्डन का किया भूमिपूजन
बफर क्षेत्रों में शुरू हुआ नया पर्यटन सर्किट
रायपुर,/ वन्यजीवों की सुरक्षा और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए बारनावापारा वन्यजीव अभयारण्य 1 जुलाई से 31 अक्टूबर 2026 तक पर्यटकों के लिए बंद रहेगा। हर वर्ष मानसून के दौरान वन्यजीवों के प्रजनन काल को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया जाता है।
हालांकि, इस दौरान पर्यटकों को प्रकृति और संस्कृति से जोड़ने के लिए बलौदाबाजार वनमंडल ने "बारनावापारा–सिरपुर पर्यटन सर्किट : द सेक्रेड गारलैंड" की शुरुआत की है। इस पहल के माध्यम से राजधानी रायपुर के आसपास स्थित प्राकृतिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों को एक पर्यटन परिपथ के रूप में विकसित किया जा रहा है।
इस पर्यटन सर्किट में सिरपुर, धसकुंड जलप्रपात, तुरतुरिया ईको कल्चरल सेंटर, गिरौदपुरी धाम, सिद्धखोल जलप्रपात, सोनाखान, शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक, देवपुर नेचर कैंप, अचानकपुर का देव हिल्स ईको एथनिक स्टे, कोडार जलाशय सहित कई प्रमुख पर्यटन स्थल शामिल हैं। यहां पर्यटक हरियाली, झरनों, पहाड़ियों, वन क्षेत्र, धार्मिक स्थलों, पुरातात्विक धरोहरों और जनजातीय संस्कृति का अनूठा अनुभव प्राप्त कर सकेंगे।
मानसून के मौसम में पूरा क्षेत्र हरियाली से भर जाता है, जिससे इसकी प्राकृतिक सुंदरता और भी बढ़ जाती है। देवपुर नेचर कैंप, देव हिल्स ईको एथनिक स्टे, सिद्धखोल जलप्रपात, तुरतुरिया धाम, धामनी ईको विलेज, धसकुंड फॉल और सिरपुर इस मौसम के प्रमुख आकर्षण होंगे।
इस पर्यटन सर्किट को देशभर में पहचान दिलाने के लिए टूर ऑपरेटरों, ट्रैवल एजेंसियों, ट्रैवल इन्फ्लुएंसर्स, कंटेंट क्रिएटर्स और नेचर फोटोग्राफर्स को भी जोड़ा जा रहा है। इसका उद्देश्य जिम्मेदार और सतत पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना है।
वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर ने बताया कि वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार यह पहल प्रकृति, संस्कृति, विरासत और स्थानीय समुदायों को एक मंच पर लाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि अभयारण्य बंद रहने के दौरान भी पर्यटक बारनावापारा–सिरपुर बफर क्षेत्रों के प्राकृतिक, सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों का आनंद ले सकेंगे। साथ ही स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाकर सतत पर्यटन और रोजगार सृजन को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा।
रायपुर, / बारिश का मौसम शुरू होते ही विद्युत करंट से होने वाली दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। बिजली के खंभों, एचटी लाइनों, टूटे तारों तथा विद्युत उपकरणों के संपर्क में आने से हर वर्ष कई हादसे होते हैं, जिनमें कई बार लोगों की जान तक चली जाती है। इन दुर्घटनाओं से बचाव के लिए छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड ने आम नागरिकों के लिए सुरक्षा संबंधी एडवाइजरी जारी करते हुए विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।
कंपनी ने कहा है कि थोड़ी-सी लापरवाही भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। इसलिए विद्युत लाइनों, ट्रांसफार्मरों एवं अन्य विद्युत उपकरणों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें तथा किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न करें। यदि आंधी-तूफान या बारिश के दौरान बिजली के खंभे, तार अथवा अन्य उपकरण क्षतिग्रस्त दिखाई दें, तो इसकी सूचना तत्काल कंपनी के टोल-फ्री नंबर 1912, मोर बिजली ऐप अथवा निकटतम वितरण केंद्र या जोन कार्यालय में दें।
बारिश के दौरान बिजली के खंभों, तारों और ट्रांसफार्मरों से दूर रहें। जहां विद्युत तार या उपकरण मौजूद हों, वहां पानी में करंट फैलने की संभावना रहती है। ऐसे स्थानों पर पानी में चलने या तैरने से बचें। विद्युत उपकरणों का उपयोग करते समय हाथ-पैर सूखे रखें तथा रबर या प्लास्टिक के जूते-चप्पलों का उपयोग करें। विभाग ने बताया कि बारिश से पहले सभी फीडरों, ट्रांसफार्मरों एवं विद्युत लाइनों का निरीक्षण और आवश्यक रखरखाव किया जा चुका है। इसके बावजूद नागरिकों की सतर्कता अत्यंत आवश्यक है।
दुर्घटनाओं से बचने के लिए इन सावधानियों का रखें-
घरों, खेतों एवं अन्य स्थानों पर केवल गुणवत्तापूर्ण विद्युत उपकरणों का उपयोग करें। खेत या बाड़ी की बाड़ तथा कंटीले तारों में बिजली प्रवाहित न करें। यह अवैध होने के साथ-साथ जानलेवा भी हो सकता है तथा संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
विद्युत लाइनों, ट्रांसफार्मरों या अन्य उपकरणों में खराबी आने पर स्वयं सुधार करने का प्रयास न करें। बिजली की लाइनों के नीचे अथवा उनके समीप स्थायी या अस्थायी निर्माण न करें तथा सुरक्षित दूरी बनाए रखें। यदि कोई विद्युत तार टूटकर जमीन, नदी, नाले या तालाब में गिरा हुआ मिले, तो उससे पर्याप्त दूरी बनाए रखें और तत्काल संबंधित लाइनमैन, कनिष्ठ अभियंता अथवा टोल-फ्री नंबर 1912 पर सूचना देकर विद्युत प्रवाह बंद कराएं।
बिजली की लाइनों से हुकिंग कर अनाधिकृत रूप से बिजली का उपयोग न करें। कपड़े सुखाने के लिए बिजली के खंभों या स्टे वायर का उपयोग न करें तथा कपड़े सुखाने वाले तार को विद्युत लाइनों से पर्याप्त दूरी पर रखें। अस्थायी विद्युत कनेक्शन के लिए कटे-फटे तारों का उपयोग न करें तथा बच्चों को विद्युत उपकरणों एवं लाइनों के आसपास खेलने से रोकें।
यदि कोई व्यक्ति करंट की चपेट में आ जाए तो यह करें-
सबसे पहले मुख्य स्विच बंद कर विद्युत प्रवाह तत्काल रोकें। यदि स्विच बंद करना संभव न हो, तो सूखी लकड़ी, सूखी रस्सी या सूखे कपड़े की सहायता से पीड़ित को बिजली के स्रोत से अलग करें। सीधे हाथ लगाने का प्रयास न करें। पीड़ित को सूखी जगह पर लिटाकर प्राथमिक उपचार दें, आवश्यकता होने पर कृत्रिम श्वास दें तथा तत्काल निकटतम अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था करें।
छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड, बिलासपुर क्षेत्र के कार्यपालक निदेशक श्री ए.के. अंबस्थ ने कहा कि भीषण गर्मी, आंधी-तूफान और बारिश के दौरान विद्युत व्यवस्था बनाए रखना बिजली कर्मियों के लिए चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। ऐसे मौसम में फॉल्ट ढूंढ़ने और उसे सुधारने के लिए कर्मचारियों को प्रतिकूल परिस्थितियों में लगातार कार्य करना पड़ता है। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की कि बिजली आपूर्ति बाधित होने पर घबराने के बजाय 5 से 10 मिनट प्रतीक्षा करें और आवश्यकता होने पर टोल-फ्री नंबर 1912 पर शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही, लाइन कर्मचारियों को सुधार कार्य में सहयोग दें तथा विद्युत लाइनों एवं उपकरणों से किसी प्रकार की छेड़छाड़ न करें।
उन्होंने कहा कि विद्युत व्यवस्था के सुरक्षित एवं सुचारु संचालन में उपभोक्ताओं का सहयोग भी उतना ही महत्वपूर्ण है। थोड़ी-सी सावधानी अपनाकर न केवल दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है, बल्कि लोगों के जीवन और संपत्ति की भी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है जान है तो जहान है।
समय पर खाद-बीज ने बढ़ाया अन्नदाताओं का विश्वास
मानसून की मेहरबानी और शासन की तैयारी से खेती को मिली नई रफ्तार, खेतों में लौटी रौनक
रायपुुर,/ जून और जुलाई के शुरुआती दिनों में मानसून की बेरुखी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी थी। आसमान में बादलों की आवाजाही तो थी, लेकिन पर्याप्त वर्षा नहीं होने से खेत सूने पड़े थे। खरीफ फसलों की बुआई, धान की रोपाई और बेहतर उत्पादन को लेकर किसान चिंतित थे। हर दिन आसमान की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देखते अन्नदाता अच्छी बारिश की प्रतीक्षा कर रहे थे। आखिरकार पिछले कुछ दिनों से हुई झमाझम बारिश ने किसानों की चिंता को खुशी में बदल दिया। तपती धूप से तपी धरती पर जैसे ही वर्षा की बूंदें बरसीं, केवल मिट्टी ही नहीं महकी, बल्कि किसानों के मन में भी नई उम्मीद और आत्मविश्वास के अंकुर फूट पड़े।
मानसून की यह दस्तक केवल मौसम का परिवर्तन नहीं, बल्कि किसानों के जीवन में नई ऊर्जा, नई आशा और नई शुरुआत का संदेश लेकर आई है। दूर-दूर तक फैले खेतों में अब पानी लबालब दिखाई दे रहा है। गांवों में फिर से चहल-पहल लौट आई है। खेतों में ट्रैक्टरों की गूंज, कृषि यंत्रों की आवाज, धान की रोपाई में जुटे किसान परिवार और प्रकृति का नव श्रृंगार ग्रामीण जीवन की सजीव तस्वीर प्रस्तुत कर रहे हैं। कहीं खेतों की जुताई अंतिम चरण में है तो कहीं किसान पूरे उत्साह के साथ धान की रोपाई में जुट गए हैं। वर्षा की हर बूंद मानो किसानों की मेहनत को नई शक्ति प्रदान कर रही है। यही वह समय है, जब धरती और अन्नदाता का अटूट रिश्ता सबसे अधिक सजीव दिखाई देता है। किसान पूरे विश्वास के साथ खेतों में उतरता है, क्योंकि उसे पता है कि आज की मेहनत ही आने वाले कल की समृद्धि की नींव बनेगी।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य शासन ने खरीफ सीजन की तैयारियां समय रहते पूरी कर किसानों की खेती को मजबूत आधार प्रदान किया है। कृषि विभाग द्वारा मानसून से पहले ही गुणवत्तायुक्त बीज एवं उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कर दी गई थी। इसका लाभ अब किसानों को सीधे तौर पर मिल रहा है। जैसे ही वर्षा ने रफ्तार पकड़ी, किसान बिना किसी विलंब के खेती के कार्यों में जुट गए। समय पर कृषि आदानों की उपलब्धता के कारण बुआई और रोपाई का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।
कोरबा जिले में सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को अनुदानित दरों पर खाद एवं बीज सहजता से उपलब्ध कराए जा रहे हैं। किसानों को न तो बाजार में भटकना पड़ रहा है और न ही आवश्यक उर्वरकों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। समय पर उपलब्ध कृषि आदानों और अनुकूल वर्षा ने किसानों के उत्साह को नई उड़ान दी है।
इसका उदाहरण करतला स्थित आदिवासी सेवा सहकारी समिति में देखने को मिला। ग्राम कछार निवासी कृषक श्री घनश्याम राठिया, जो लगभग साढ़े छह एकड़ भूमि पर खेती करते हैं, ने समिति से 12 बोरी यूरिया, 6 बोरी डीएपी तथा 4 बोरी सुपर फास्फेट प्राप्त किया। उन्होंने बताया कि उन्हें न लाइन में लगना पड़ा और न ही किसी प्रकार का इंतजार करना पड़ा। समिति में सभी व्यवस्थाएं सुचारु हैं, जिससे किसानों को समय पर खाद-बीज उपलब्ध हो रहा है। शासन द्वारा रियायती दर पर गुणवत्तायुक्त उर्वरक मिलने से खेती की लागत कम हुई है और छोटे एवं मध्यम किसानों को बड़ी राहत मिली है।
श्री राठिया ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि समय पर खाद-बीज मिलने और अच्छी बारिश होने से इस वर्ष खेती की शुरुआत बेहद अच्छी हुई है। अब पूरे परिवार के साथ धान की रोपाई का कार्य तेजी से चल रहा है और उन्हें इस वर्ष अच्छी पैदावार की पूरी उम्मीद है। छत्तीसगढ़ की धरती पर बरसती यह वर्षा केवल खेतों को ही नहीं सींच रही, बल्कि किसानों के सपनों, उनकी मेहनत और समृद्ध भविष्य की आशाओं को भी नई ऊर्जा प्रदान कर रही है। प्रकृति की अनुकंपा और शासन की दूरदर्शी व्यवस्था का यह प्रभावी समन्वय खेती-किसानी को नई गति दे रहा है। समय पर उपलब्ध खाद-बीज, अनुकूल मौसम और किसानों के उत्साह ने यह विश्वास मजबूत किया है कि इस खरीफ सीजन में अन्नदाता आत्मविश्वास के साथ समृद्धि की ओर आगे बढ़ रहे हैं।
मानसूनी वर्षा की वर्तमान स्थिति के दृष्टिगत किसानों को कृषि वैज्ञानिकों की सलाह
रायपुर, 06 जुलाई 2026/ छत्तीसगढ़ में बस्तर क्षेत्र के मार्ग से सामान्यतः 14 जून के आसपास मानसून वर्षा का आगमन होता है, किन्तु इस वर्ष अल नीनो के प्रभाव के कारण बस्तर में लगभग 10 दिन विलंब से मानसून आया है। वर्तमान में प्रदेश के समस्त कृषि जलवायु क्षेत्रों जैसे बस्तर का पठार, छत्तीसगढ़ का मैदान एवं छत्तीसगढ के उत्तरी पहाड़ी क्षेत्र में मानसून पहुंच गया है। सामान्यतः जून के माह में छत्तीसगढ़ में लगभग 21 से.मी. वर्षा होती है, किन्तु इस वर्ष जून के माह में 40 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। आगामी 8 जुलाई तक पूरे राज्य में व्यापक वर्षा होने का आसार हैं। वर्तमान में बिलासपुर एवं सरगुजा संभाग को छोड़कर पूरे प्रदेश में लगभग सामान्य वर्षा दर्ज की गई है। विगत पांच दिनों में उपरोक्त दोनों संभागों को छोड़कर शेष क्षेत्रों में व्यापक वर्षा हुई है। इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि मानसून के देरी से आने के पश्चात् भी विगत 1 जुलाई से 6 जुलाई तक छत्तीसगढ का मैदानी भाग एवं बस्तर का पठार में अधिक वर्षा होने के कारण मानसून का अब तक का कोटा लगभग पूरा हो चुका है। अतः इस प्रकार लगातार हो रही वर्षा को देखते हुए किसान बन्धुओं को सलाह दी जाती है कि खेतों में पर्याप्त पानी की उपलब्धता होने पर मचाई कर नर्सरी उपलब्ध होने पर रोपाई करें अथवा नर्सरी की अनुपलब्धता पर लेही विधि से अंकुरित बीजों को मचाई किये हुए खेतों में ड्रम सीडर एवं छिटकवा विधि से बुवाई करें। साथ ही नर्सरी एवं बीजों को कवकनाशी (कार्बेन्डाजिम) एवं जैव उर्वरकों से उपचारित कर रोपाई एवं बुवाई करें।
इस वर्ष अषाढ़ माह 1 जुलाई से प्रारंभ हुआ है। अषाढ़ माह से प्रारंभ होकर सावन मास की हरियाली अमावस्या अर्थात हरेली तिहार तक हम खरीफ फसल की बुआई एवं रोपाई कर सकते हैं। इस बार हरेली 12 अगस्त को मनाई जाएगी। जो किसान भाई धान की सीधी बुआई करते हैं उन्हें परामर्श है कि जमीन में बतर की स्थिति में 15 जुलाई तक धान की बुआई कर लेवें। रोपाई एवं बियासी पद्धति से धान की खेती करने वाले किसान भाई 30 जुलाई तक रोपाई एवं बियासी का कार्य कर लेवें। किसी असामान्य परिस्थिति के कारण विलंब होने से यदि आप हरेली तक भी बुआई रोपाई का कार्य करते हैं तो फसल के उत्पादन में ज्यादा नुकसान नहीं होगा
चूंकि इस बार मानसून विलंब से आया है इसलिए किसान भाईयों को सलाह दी जाती है कि इस वर्ष धान की शीघ्र एवं मध्यम अवधि में पकने वाली प्रजातियाँ जो कि 125-130 दिन तक पक जाती है जैसे- इन्द्रावती धान, बस्तर धान-1, छत्तीसगढ़ बारानी धान, इंदिरा एरोबिक धान, एम.टी.यू. 1010, एम.टी.यू. 1153, एम.टी.यू. 1156, एम.टी.यू. 1001, विक्रम टी.सी.आर., छत्तीसगढ़ धान 1919, छत्तीसगढ़ तेजस्वी धान, महामाया आदि का उपयोग करें। एक एकड़ में सीधी बुआई एवं बियासी के लिए 30 कि.ग्रा., रोपा पद्धति में 20 कि.ग्राम तथा हाइब्रिड प्रजाति के लिए 6 कि.ग्रा. बीज का उपयोग करें। जिन खेतों में अधिक जल भराव हो गया है तथा वर्षा रुक नहीं रही हो तो लेही पद्धति से धान की बोआई करें। इस विधि में धान के अंकुरित बीजों की खेत में बुआई की जाती है
बुआई के पूर्व बीज को कार्बेन्डाजिम या किसी अन्य कवकनाशी दवा से उपचारित कर लें। 1 किलो बीज के लिए ढाई ग्राम दवा का प्रयोग करें। भूमि में नाइट्रोजन फास्फोरस एवं पोटेशियम की पूर्ति के लिए जैव उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए। धान में एजोस्पाइरिलम, पी.एस.बी., के.एस.बी. का उपयोग करना चाहिए। इन तीनों तरल जैव उर्वरकों की 2-2 मि.ली. मात्रा अर्थात 6 मि.ली. तरल पदार्थ 4 मि.ली. पानी में मिला लें। इस प्रकार तैयार 10 मि.ली. के घोल से 1 कि.ग्रा. धान बीज को उपचारित कर दें। यह उपचार पौधों को लगभग 12 कि.ग्रा. नाइट्रोजन 8 कि.ग्रा. फास्फोरस एवं 5 कि.ग्रा. पोटेशियम प्रति एकड़ प्रदान करेगा।
जिला पर्यटन विकास समिति की बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय, स्थानीय रोजगार, पर्यटन सुविधाओं और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण पर रहेगा विशेष फोकस
रायपुर। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले को पर्यटन की दृष्टि से नई पहचान दिलाने की दिशा में जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण पहल करते हुए पर्यटन विकास की व्यापक कार्ययोजना पर काम शुरू कर दिया है। कलेक्टर श्री कुलदीप शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित जिला पर्यटन विकास समिति की बैठक में जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों के सुनियोजित विकास, पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाओं के विस्तार तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
बैठक में कलेक्टर श्री शर्मा ने कहा कि जिले में प्राकृतिक, धार्मिक और पारिस्थितिक पर्यटन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। इन संभावनाओं का समुचित उपयोग करते हुए पर्यटन स्थलों का चरणबद्ध विकास किया जाएगा, जिससे जिले की पहचान मजबूत होने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि चिन्हित पर्यटन स्थलों के विकास कार्यों में तेजी लाते हुए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार कर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।
बैठक में शहर के निकट स्थित छुइहा जलाशय के सौंदर्यीकरण और समग्र विकास को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी गई। कलेक्टर ने इसे जिले के प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए विस्तृत योजना तैयार करने के निर्देश दिए। जलाशय क्षेत्र में पर्यटकों के लिए आकर्षक वातावरण, आवश्यक आधारभूत सुविधाएं तथा मनोरंजन के अवसर विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही जलाशय की भूमि पर हुए अतिक्रमण को गंभीरता से लेते हुए जल संसाधन विभाग को तत्काल कार्रवाई करने तथा संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में खोरसी नाला पर नवीन कृषि उपज मंडी के समीप चेक डेम निर्माण और व्यापक वृक्षारोपण, सोनबरसा जंगल सफारी में पर्यटक सुविधाओं का विस्तार, गिरौदपुरी धाम के विकास तथा गिधौरी के समीप महानदी तट के सौंदर्यीकरण जैसे महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इन परियोजनाओं के माध्यम से जिले में प्रकृति, धार्मिक और इको-टूरिज्म को नई पहचान देने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।
पर्यटन गतिविधियों में स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से हीरा स्व-सहायता समूह द्वारा छुइहा जलाशय में बोटिंग संचालन के प्रस्ताव पर भी विचार किया गया। समिति ने सुरक्षा मानकों और आवश्यक सुविधाओं का परीक्षण कराने के बाद इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। इससे महिला स्व-सहायता समूहों को स्वरोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे और स्थानीय आजीविका को भी मजबूती मिलेगी।
बलौदाबाजार जिले में पर्यटन स्थलों के व्यवस्थित विकास से जिले में पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इसके साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए गाइड, आतिथ्य सेवाओं, परिवहन, हस्तशिल्प, स्थानीय व्यंजन, नौकायन और अन्य पर्यटन आधारित गतिविधियों में रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध होंगे। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी और स्थानीय उत्पादों को भी व्यापक बाजार प्राप्त होगा।
जिला पर्यटन विकास समिति की यह पहल बलौदाबाजार-भाटापारा को पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक आस्था और स्थानीय संस्कृति को एकीकृत करते हुए विकसित की जा रही यह कार्ययोजना आने वाले समय में जिले को पर्यटन के उभरते हुए केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
बैठक में नगर पालिका अध्यक्ष श्री अशोक जैन, जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुश्री दिव्या अग्रवाल, समिति के सदस्य तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
32 हजार 865 किसानों तक पहुंची सम्मान निधि की सहायता
शेष पात्र किसानों को जोड़ने के लिए अभियान तेज, हर पात्र किसान तक योजना का लाभ पहुंचाने का संकल्प
रायपुर,जुलाई 2026। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में किसान कल्याण को नई मजबूती मिल रही है। जिले ने योजना के क्रियान्वयन में 80 प्रतिशत प्रगति हासिल कर यह साबित किया है कि किसानों तक केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ समयबद्ध और पारदर्शी ढंग से पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन लगातार सक्रिय है। हजारों किसानों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से आर्थिक सहायता मिलने से खेती-किसानी के लिए आवश्यक कृषि निवेश आसान हुआ है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिली है।
30 जून 2026 की स्थिति के अनुसार जिले के कुल 40 हजार 850 किसानों में से 33 हजार 59 किसानों का प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में पंजीयन किया जा चुका है। इनमें से 32 हजार 865 किसान योजना के अंतर्गत नियमित रूप से लाभ प्राप्त कर रहे हैं। योजना के माध्यम से पात्र किसानों को प्रतिवर्ष 6 हजार रुपये की वित्तीय सहायता तीन समान किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जाती है। यह राशि किसानों को बीज, उर्वरक, कीटनाशक सहित अन्य कृषि आवश्यकताओं की पूर्ति में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान कर रही है।
जिला प्रशासन शेष पात्र किसानों को भी योजना से जोड़ने के लिए लगातार अभियान चला रहा है। इसके तहत ई-केवाईसी, आधार सत्यापन, बैंक खाते के प्रमाणीकरण तथा नए पंजीयन की प्रक्रिया निरंतर जारी है, ताकि कोई भी पात्र किसान योजना के लाभ से वंचित न रहे। प्रशासन का उद्देश्य जिले के प्रत्येक पात्र किसान तक योजना का लाभ सुनिश्चित करना है।
शेष 20 प्रतिशत प्रकरणों में शासकीय सेवक, आयकरदाता, मृत किसान अथवा अन्य अपात्र श्रेणी के मामले तथा लंबित पंजीयन शामिल हैं। ऐसे मामलों का नियमानुसार निराकरण किया जा रहा है, वहीं पात्र किसानों के दस्तावेजों का शीघ्र सत्यापन कर उन्हें योजना में शामिल करने के प्रयास भी जारी हैं।
जिला प्रशासन ने सभी पात्र किसानों से अपील की है कि जिन्होंने अभी तक प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में पंजीयन नहीं कराया है अथवा ई-केवाईसी, आधार और बैंक खाते से संबंधित आवश्यक औपचारिकताएं पूरी नहीं की हैं, वे शीघ्र ही कृषि विभाग, जनपद पंचायत या लोक सेवा केंद्र के माध्यम से प्रक्रिया पूरी करें। इससे वे योजना का लाभ समय पर प्राप्त कर सकेंगे और खेती-किसानी को आर्थिक संबल मिलेगा।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का प्रभावी क्रियान्वयन जिले में किसान हितैषी शासन व्यवस्था का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है। इससे न केवल किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिल रही है, बल्कि कृषि उत्पादन बढ़ाने, खेती की लागत कम करने और ग्रामीण विकास को गति देने में भी महत्वपूर्ण योगदान मिल रहा है।
सहकारिता मंत्री श्री कश्यप ने छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा का किया अनावरण
रायपुर, 06 जुलाई 2026/
भारत सरकार द्वारा गठित 'सहकारिता मंत्रालय' की स्थापना के सफल 5 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित "सहकारी सप्ताह" का भव्य समापन जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक रायपुर के प्रांगण में हुआ। इस विशेष अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ के सहकारिता एवं वन मंत्री श्री केदार कश्यप उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथियों द्वारा बैंक के संस्थापक पं. वामन बलीराम लाखे के तैलचित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन कर समारोह की शुरुआत की गई। इसके साथ ही बैंक परिसर में 'छत्तीसगढ़ महतारी' की प्रतिमा का गरिमामय अनावरण भी किया गया।
केंद्रीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के उद्बोधन का सीधा प्रसारण
समारोह के दौरान देश के गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के भाषण का यूट्यूब चैनल के माध्यम से सीधा प्रसारण किया गया। अपने संबोधन में श्री शाह ने सहकारिता के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलावों का जिक्र किया, जिनमें
50,000 पैक्स (PACS) को ई-पैक्स में बदलना,त्रिभुवन सहकारिता विश्वविद्यालय की स्थापना,दुनिया की सबसे बड़ी अन्न गोदाम श्रृंखला का निर्माण,सहकारी समितियों को कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) बनाना और देश भर में भारत टैक्सी सेवा की शुरुआत आदि कार्य शामिल हैं।
रायपुर जिला सहकारी बैंक को 216 करोड़ रूपए का ऐतिहासिक लाभ
बैंक की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) श्रीमती अपेक्षा व्यास ने प्रगति प्रतिवेदन पढ़ते हुए बैंक की शानदार उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष (31 मार्च 2026) की स्थिति में बैंक को 216 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक सकल लाभ हुआ है।
केंद्र सरकार की 'सहकार से समृद्धि' योजना के तहत बैंक द्वारा किए जा रहे प्रमुख कार्य हैं जिसमें
माइक्रो एटीएम: बैंक से जुड़ी 682 सहकारी समितियों और 98 डेयरी समितियों में माइक्रो एटीएम का संचालन।
कॉमन सर्विस सेंटर: समितियों के माध्यम से नागरिकों को 32 जरूरी सेवाएं दी जा रही हैं।
जन औषधि केंद्र: 12 प्राथमिक सहकारी समितियों द्वारा सस्ते इलाज के लिए जन औषधि केंद्रों का संचालन।
उज्ज्वला योजना: दुर्गम क्षेत्रों की 10 सहकारी समितियों के माध्यम से एलपीजी गैस का वितरण।
इसके साथ ही पैक्स का कंप्यूटरीकरण और 132 नवीन सहकारी समितियों का गठन किया गया है।
क्वांटिटी नहीं, क्वॉलिटी खेती पर दें जोर: मंत्री श्री केदार कश्यप
सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप ने अपने संबोधन में सफल कार्यक्रम के लिए सभी को बधाई दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पैक्स, डेयरी और मत्स्य पालन जैसी लगभग 1300 सहकारी समितियों का गठन किया गया है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करें और जैविक व प्राकृतिक खेती को अपनाएं। उन्होंने कहा कि किसानों को "क्वांटिटी (मात्रा) के स्थान पर क्वॉलिटी (गुणवत्ता)" वाली खेती पर ध्यान देना चाहिए।
अन्नदाता को कर्ज मुक्त बनाने का संकल्प
विशिष्ट अतिथि और सहकार भारती के प्रदेश महामंत्री श्री कनीराम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना से 2021 में सहकारिता मंत्रालय बना, जिसने इस क्षेत्र को नई मजबूती दी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमें इस दिशा में काम करना होगा ताकि हमारे अन्नदाता (किसानों) को कभी कर्ज लेने की आवश्यकता ही न पड़े। छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक के अध्यक्ष श्री केदार नाथ गुप्ता ने भी सहकारिता के क्षेत्र में पारदर्शिता और कृषि नवाचार पर अपने विचार रखे।
वरिष्ठ जनप्रितिनिधियों की रही गरिमामय उपस्थिति
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जिला सहकारी बैंक रायपुर के अध्यक्ष श्री निरंजन सिन्हा ने सहकारिता मंत्री का आभार व्यक्त किया, वहीं उपाध्यक्ष श्री अभिनेष कश्यप ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
इस भव्य समारोह में जिला सहकारी बैंक दुर्ग के अध्यक्ष श्री प्रीतपाल बेलचंदन, राजनांदगांव के अध्यक्ष श्री सचिन बघेल, सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष श्री प्रवीण दुबे, जिला पंचायत रायपुर के अध्यक्ष श्री नवीन अग्रवाल, उपाध्यक्ष श्री संदीप यदु सहित सहकारिता विभाग की संयुक्त आयुक्त श्रीमती किरण गुप्ता, अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक श्री के.एन. कांडे और बड़ी संख्या में सहकारी संस्थाओं के अधिकारी व जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का कुशल संचालन श्रीमती अनुराधा शुक्ला द्वारा और आभार प्रदर्शन बैंक के वरिष्ठ अधिकारी श्री एस.पी. चंद्राकर द्वारा किया गया।
स्व-सहायता समूहों की मेहनत और स्थानीय कृषि परंपरा को बताया आत्मनिर्भरता का सशक्त मॉडल
रायपुर, 6 जुलाई 2026। गौरेला पेन्ड्रा मरवाही जिले की पारंपरिक कृषि विरासत और ग्रामीण महिलाओं की मेहनत का प्रतीक विष्णुभोग चावल अब गौरेला-पेंड्रा-मरवाही की विशिष्ट पहचान के रूप में अपनी अलग पहचान बना रहा है। जिले के प्रवास पर पहुंचे कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब का स्वागत कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने जिले के प्रसिद्ध विष्णुभोग चावल का पैकेट भेंट कर किया। यह सम्मान केवल एक स्थानीय उत्पाद का नहीं, बल्कि जिले की समृद्ध कृषि परंपरा, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था का भी प्रतीक बना।
इस अवसर पर कलेक्टर डॉ. देवांगन ने मंत्री श्री खुशवंत साहेब को बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत स्व-सहायता समूहों की महिलाएं विष्णुभोग चावल का उत्पादन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन कर रही हैं। अपनी प्राकृतिक सुगंध, उत्कृष्ट गुणवत्ता और पारंपरिक स्वाद के कारण यह चावल प्रदेश ही नहीं, बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इससे ग्रामीण महिलाओं को नियमित आय का स्रोत मिलने के साथ-साथ स्थानीय किसानों को भी बेहतर बाजार उपलब्ध हो रहा है।
मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब ने विष्णुभोग चावल की सराहना करते हुए कहा कि गौरेला-पेंड्रा-मरवाही का विष्णुभोग चावल जिले की समृद्ध कृषि संस्कृति और महिला स्व-सहायता समूहों की लगन का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन देना केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि क्षेत्रीय पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने का प्रभावी माध्यम भी है। ऐसे उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने और उनकी ब्रांडिंग को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए, ताकि किसानों और महिला समूहों की आय में निरंतर वृद्धि हो तथा जिले की विशिष्ट पहचान और अधिक मजबूत हो सके।
कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने इस अवसर पर हरिभूमि एवं आईएनएच के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी को भी विष्णुभोग चावल का पैकेट भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने जिले की इस विशिष्ट कृषि उपज, महिला स्व-सहायता समूहों की आजीविका गतिविधियों तथा स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत जानकारी साझा की।
जिले में विष्णुभोग चावल को बढ़ावा देने की पहल स्थानीय किसानों, महिला स्व-सहायता समूहों और प्रशासन के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने, महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने तथा गौरेला-पेंड्रा-मरवाही की पारंपरिक कृषि विरासत को नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।
20 जुलाई 2026 तक भरे जाएंगे आवेदन, निर्धारित अवधि तक वैध पासपोर्ट अनिवार्य -मिर्ज़ा एजाज़ बेग
रायपुर, जुलाई 2026/हज 2027 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। हज यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी ने मुखर्जी बड़ा, बैरन बाजार स्थित अपने कार्यालय में निःशुल्क ई-हज सुविधा केंद्र प्रारंभ किया है।
छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी के चेयरमैन मिर्ज़ा एजाज़ बेग ने आज बताया कि इस केंद्र के माध्यम से हज 2027 के इच्छुक आवेदकों के ऑनलाइन आवेदन निःशुल्क भरे जा रहे हैं।
छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी के चेयरमैन श्री बेग ने बताया कि अनेक आवेदकों को ऑनलाइन आवेदन भरने में कठिनाई होती है। ऐसे में समय सीमा के भीतर आवेदन सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से यह विशेष सुविधा उपलब्ध कराई गई है। हज कमेटी ऑफ इंडिया द्वारा हज 2027 के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि 20 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है। उन्होंने बताया कि आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास 31 दिसंबर 2027 तक वैध पासपोर्ट होना अनिवार्य है।
श्री बेग ने हज यात्रा के इच्छुक सभी आवेदकों से निर्धारित अंतिम तिथि से पूर्व अपना ऑनलाइन आवेदन पूर्ण करने की अपील की है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी कार्यालय में इसके लिए एक विशेष काउंटर स्थापित किया गया है, जहां आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित होकर आवेदक अपना ऑनलाइन आवेदन भरवा सकते हैं। अधिक जानकारी अथवा ऑनलाइन आवेदन संबंधी सहायता के लिए कार्यालय, छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी, मुखर्जी बड़ा, बैरन बाजार, रायपुर अथवा दूरभाष क्रमांक 0771-4266646 पर संपर्क किया जा सकता है।