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नई दिल्ली . देशभर में दशहरे की खूब रौनक है।  इस साल 15 अक्टूबर को दशहरे का त्योहार मनाया जा रहा है. कोरोना महामारी के बीच मनाए जा रहे दशहरे के लिए तैयारियां लगभग पूरी हो गई हैं. दिल्ली, लखनऊ, कानपुर समेत कई शहरों में देशभर में विजयादशमी और दशहरे की धूम है। असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में दशहरा का पर्व मनाया जाता है। इस मौके पर देश के अलग अलग हिस्सों में रावण दहन करने की परंपरा है।

देश की राजधानी दिल्ली में रावण दहन का कार्यक्रम शाम छह बजे रखा गया है, जबकि लखनऊ में यह समय रात आठ बजे है. वहीं, कानपुर में नौ बजे का समय तय किया गया है। वहीं,  मुंबई में इस बार कोई बड़ा कार्यक्रम नहीं आयोजित किया जाएगा। कोरोना को देखते हुए यहां पर रावण दहन का कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाएगा। अहमदाबाद में भी सार्वजनिक स्थल पर रावण दहन करने की अनुमति नहीं है। 

अयोध्या में रावण दहन का टाइम
अयोध्या में रावण दहन का समय  शाम 5.30 बजे रखा गया है। लक्षमण किला दशहरा समिति की ओर से रावण दहन का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यहां के रामलीला मैदान में शाम साढ़े पांच बजे रावण दहन होगा। हालांकि, समिति ने कोरोना के मद्देजनर इस कार्यक्रम में ज्यादा भीड़ नहीं जुटाने की अपील की है। 

वाराणसी में दो जगहों पर पर पुतला दहन हुआ करता था, लेकिन कोविड-19 के चलते इस बार भी रावण दहन कार्यक्रम नहीं होगा। 

पटना में रावण दहन का समय
बिहार की राजधानी पटना में कालिदास रंगालय में रावण वध का समय शाम  4: 30 से 5:30 के बीच रखा गया है। रावण की ऊंचाई इस बार 15 फीट ही है। यह पहले 50 फीट से ऊंचा होता था, 

 रायपुर में रावण दहन यहां होगा
 डब्ल्यू आर एस कॉलोनी शाम 6 बजे रावण दहन का समय रखा गया है। इस बार रावण की ऊंचाई पहले से आधी कर दी गई है। 100 से 51 फीट हो गई है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल होंगे। 

दशहरा का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर लंका पर विजय हासिल की थी, इसलिए भी इस पर्व को विजयादशमी कहा जाता है। । मां भगवती की विजया स्वरूप होने पर भी इसे विजयादशमी कहा जाता है। हिन्दुओं का यह प्रमुख त्योहार असत्य पर सत्य की जीत और बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में भी मनाया जाता है।

दशहरा पर्व की धूम नवरात्रि पर्व के शुरू होने के साथ ही शुरू हो जाती है और इन नौ दिनों में विभिन्न जगहों पर रामलीलाओं का मंचन किया जाता है। दसवें दिन भव्य झांकियों और मेलों के आयोजन के पश्चात रावण के पुतले का दहन कर बुराई के खात्मे का संदेश दिया जाता है। रावण के पुतले के साथ मेघनाथ और कुम्भकरण के पुतले का ही दहन किया जाता है । 

नई दिल्ली . विजयादशमी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 96वें स्थापना दिवस पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि देश में अराजकता का माहौल बनाया जा रहा है, कुछ कट्टरपंथी लोग देश को बांटने का काम कर रहे हैं। इसलिए हिंदुओं को बल संपन्न और संगठित होने की जरूरत है और यही सभी समस्याओं का हल भी है। उन्होंने कहा कि देश में जनसंख्या असंतुलन बड़ी समस्या बन रहा है। सीमावर्ती राज्यों में घुसपैठ से आबादी बढ़ रही है। इसके अलावा उन्होंने नाम लिए बिना ड्रग्स और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर सरकार को भी नसीहत दे डाली।नागुपर में हुए इस कार्यक्रम में इजरायल के राजनयिक कोब्बी शोशानी भी पहुंचे


भयमुक्त होना होगा, दुर्बलता ही कायता को जन्म देती 
संघ प्रमुख ने कहा कि आज हिंदुओं के मंदिरों की जमीनों को हड़पा जा रहा है। इसलिए यह जरूरी है कि हिंदू मंदिरों का संचालन हिंदू भक्तों के ही हाथों में रहे तथा मंदिरों की सम्पत्ति का उपयोग हिंदू समाज की सेवा में ही हो। इसके लिए हमें सब प्रकार के भय से मुक्त होना होगा। दुर्बलता ही कायरता को जन्म देती है। बल, शील, ज्ञान तथा संगठित समाज को ही दुनिया सुनती है। सत्य तथा शान्ति भी शक्ति के ही आधार पर चलती है। 'ना भय देत काहू को, ना भय जानत आप...' ऐसे हिन्दू समाज को खड़ा करना पड़ेगा। जागरुक, संगठित, बलसंपन्न व सक्रिय समाज ही सब समस्याओं का समाधान है। 


घुसपैठ से बढ़ रहा जनसंख्या असंतुलन
संघ प्रमुख ने कहा कि घुसपैठियों के कारण जनसंख्या संतुलन बिगड़ रहा है। खास तौर पर सीमावर्ती राज्यों में आबादी असंतुलित हो गई है। इसलिए जनसंख्या नीति पर विचार होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1951 से 2011 के बीच जससंख्या वृद्धि दर में भारी अंतर के कारण देश की जनसंख्या में जहां भारत में उत्पन्न मत पंथों के अनुयायियों का अनुपात 88 प्रतिशत से घटकर 83.8 प्रतिशत रह गया है। वहीं मुस्लिम जनसंख्या का अनुपात 9.8 से बढ़कर 14.23 प्रतिशत हो गया है। इसलिए घुसपैठ पर पूरी तरह से रोक लगनी चाहिए। सरकार को जनसंख्या नीति बनानी चाहिए और सभी वर्ग के लोगों के लिए लागू होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एनआरसी से घुसपैठियों की पहचान होनी चाहिए। 

कश्मीर में बढ़ रही टारगेट किलिंग 
कश्मीर में धारा 370 हटने के बाद आम लोगों को फायदा हुआ है। वहां आतंकी अपने डर के कारण टिके हुए थे, लेकिन 370 हटने के बाद वह डर खत्म हो गया है। इसलिए आतंकियों ने मनोबल गिराने के लिए फिर से 90 के दशक की टारगेट किलिंग शुरू की है, लेकिन अब लोग डरने वाले नहीं हैं। प्रशासन को चुस्ती से इसका बंदोबस्त करना पड़ेगा। 

ड्रग्स से देश को मुक्त कराने का प्रयास हो 
संघ प्रमुख ने कहा कि नई पीढ़ी में नशीले पदार्थ खाने की आदत बढ़ रही है। उच्च से निम्न स्तर तक व्यसन है। इसलिए ड्रग्स से देश को मुक्त कराने का प्रयास होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के बाद ऑनलाइन शिक्षा बढ़ी है। बच्चों के हाथ में मोबाइल हैं। ऐसे में ओटीटी प्लेटफॉर्म पर नियंत्रण नहीं रह गया है। सरकार को ओ.टी.टी. के लिए सामग्री नियामक ढांचा तैयार करने के लिए प्रयास करने चाहिए।

कोरोना के खिलाफ गांवों में टोली तैयार 
भागवत ने कहा कि भारत ने कोरोना के प्रति सबसे अच्छे तरीके से प्रतिकार किया है। पहली लहर भारत में कोई खास असर नहीं दिखा पाई थी, लेकिन दूसरी ने कई लोगों को हमसे छीन लिया। अब तीसरी लहर की भी आशंका है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने गांव-गांव में युवाओं की टोली को प्रशिक्षित किया है, जिससे वे तीसरी लहर में देश की मदद कर पाएं।

राज्यों के बीच तालमेल होना जरूरी 
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि देश में अराजकता का माहौल बनाया जा रहा है। राज्य आपस में लड़ रहे हैं, पुलिस आपस में लड़ रही है। इसलिए राज्यों के बीच तालमेल होना जरूरी है। पर्व, त्योहार पर मेलजोल बढ़ना चाहिए। 

अब तक नहीं गई टीस 
मोहन भागवत ने कहा कि  आजादी के बाद विभाजन का दर्द मिला। विभाजन की टीस अब तक नहीं गई है। हमारी पीढ़ियों को इतिहास के बारे में जानना चाहिए, जिससे आने वाली पीढ़ी अपने आगे की पीढ़ी को बता पाएं कि देश के लिए बलिदानियों की आकाश गंगा चली आ रही है। 

नई दिल्ली । चुनाव आयोग (ईसी) ने गोवा, मणिपुर, पंजाब, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की सरकारों को निर्देश दिया है कि वे अपने गृह जिलों में तैनात अधिकारियों को हटाएँ। इन राज्यों में आगामी वर्ष चुनाव हैं।
चुनाव वाले राज्यों के मुख्य सचिवों और मुख्य चुनाव अधिकारियों को लिखे एक पत्र में आयोग ने पंजाब, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा की सरकारों को यह निर्देश दिया है। इन राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल मार्च, 2022 में अलग-अलग तारीखों पर समाप्त हो रहा है। उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल अगले साल 14 मई को समाप्त हो रहा है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि चुनाव निष्पक्ष हों, पोल पैनल के लिए लोकसभा या विधानसभा चुनावों से पहले इस तरह के निर्देश जारी करना सामान्य है।
पत्र में कहा गया है, "आयोग आगे चाहता है कि कोई भी अधिकारी/अधिकारी, जिसके खिलाफ किसी भी अदालत में आपराधिक मामला लंबित है, चुनाव से संबंधित ड्यूटी से जुड़ा/तैनात नहीं किया जाना चाहिए।"

नई दिल्ली । सरकार ने एक प्रायोगिक परियोजना के तौर पर 1000 मेगावाट बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएस) की स्थापना के लिए निर्धारित परियोजना में भाग लेने हेतु लोगों को आमंत्रित किया है। यह नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय और विद्युत मंत्रालय दोनों का संयुक्त प्रयास है, जो देश में ऊर्जा भंडारण प्रणाली की स्थापना के लिए एक रोड मैप प्रदान करने में इस विषय पर काम कर रहे हैं। वर्ष 2030 तक नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के 450 गीगावाट अक्षय ऊर्जा के लक्ष्य को प्राप्त करने के महत्वाकांक्षी उद्देश्य को पूरा करने में सहायता के तहत यह महत्वपूर्ण है कि इसे ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली, हाइड्रो पंप भंडारण संयंत्र आदि) की स्थापना के साथ विधिवत सहयोग मिले। सौर ऊर्जा निगम (एसईसीआई), नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के तहत एक सीपीएसयू ने 1000 मेगावाट बीईएसएस की खरीद के लिए निविदाएं आमंत्रित की हैं। इसे आरएफएस बोली दस्तावेज के साथ प्रकाशित किया जाएगा और उत्पादन, पारेषण व वितरण परिसंपत्तियों के एक हिस्से के रूप में रखकर और अन्य सभी सहायक सुविधाओं के साथ बीईएसएस की खरीद तथा उपयोग के लिए व्यापक दिशानिर्देश का मसौदा तैयार किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ के राजकीय गमछे का किया लोकार्पण 
शासकीय आयोजनों में यह गमछा अतिथियों को किया जाएगा भेंट

छत्तीसगढ़ के राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना, राजकीय पशु वन भैंसा, मांदर, बस्तर के प्रसिद्ध गौर मुकुट और लोक नृत्य करते लोक कलाकारों के चित्र अंकित किए गए हैं गोदना चित्रकारी से

गमछे की डिजाईन में धान के कटोरे छत्तीसगढ़ को प्रदर्शित करने धान की बाली-हल जोतते किसान के साथ सरगुजा की पारंपरिक भित्ति चित्र कला की छाप भी

रायपुर,. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज शाम यहां अपने निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ के राजकीय गमछे का लोकार्पण किया। छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा संघ द्वारा राज्य की पारंपरिक सांस्कृतिक धरोहर को प्रदर्शित करने वाले ये गमछे टसर सिल्क एवं कॉटन बुनकरों तथा गोदना हस्त शिल्पियों द्वारा तैयार कराए गए हैं। गमछे पर छत्तीसगढ़ के राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना, राजकीय पशु वन भैंसा, मांदर, बस्तर के प्रसिद्ध गौर मुकुट और लोक नृत्य करते लोक कलाकारों के चित्र गोदना चित्रकारी से अंकित किए गए हैं। गमछे की डिजाईन में धान के कटोरे के रूप में प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ राज्य को प्रदर्शित करने के लिए धान की बाली तथा हल जोतते किसान को प्रदर्शित किया गया है। सरगुजा की पारंपरिक भित्ति चित्र कला की छाप गमछे के बार्डर में अंकित की गई है। शासकीय आयोजनों में यह गमछा अतिथियों को भेंट किया जाएगा। गमछा तैयार करने के पारिश्रमिक के अलावा गमछे से होने वाली आय का 95 प्रतिशत हिस्सा बुनकरों तथा गोदना शिल्पकारों को दिया जाएगा।
इस अवसर पर संस्कृति मंत्री श्री अमरजीत भगत, पर्यटन मंत्री श्री ताम्रध्वज साहू, संसदीय सचिव श्री चन्द्रदेव राय, छत्तीसगढ़ राज्य गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष श्री कुलदीप जुनेजा, संस्कृति विभाग के सचिव श्री अन्बलगन पी., संस्कृति विभाग के संचालक श्री विवेक आचार्य उपस्थित थे।
टसर सिल्क गमछा
टसर सिल्क गमछे में बुनकर द्वारा ताने में फिलेचर सिल्क यार्न तथा बाने में डाभा टसर यार्न एवं घींचा यार्न का उपयोग किया गया है। गमछे की चौड़ाई 24 इंच तथा लंबाई 84 इंच है। इस टसर सिल्क गमछे की बुनाई सिवनी चांपा के बुनकरों द्वारा की गई है। गमछे की बुनाई के उपरांत उनमें सरगुजा की महिला गोदना शिल्पियों के द्वारा गोदना प्रिंट के माध्यम से डिजाइनों को उकेरा गया है। सिल्क गमछे में गोदना डिजाइन कार्य दो शिल्पियों द्वारा एक दिन में एक नग तैयार किया जाता है। एक सिल्क गमछे में गोदना कार्य हेतु प्रति नग 700 रूपए का पारिश्रमिक शिल्पियों को प्रदान किया जाता है। एक सिल्क गमछे का मूल्य 1,534 रूपये (जी.एस.टी. सहित) निर्धारित है। सिल्क गमछे की बुनाई मजदूरी 120 रूपए प्रति नग है।
कॉटन गमछा
कॉटन गमछे को भी राज्य के बालोद, दुर्ग, राजनांदगांव के बुनकरों द्वारा हाथकरघों पर बुनाई के माध्यम से तैयार किया गया है। गमछे में ताने में 2/40 काउंट का कॉटन यार्न तथा बाने में 20 माउंट का कॉटन यार्न उपयोग किया गया है। गमछे की बुनाई के उपरांत इसमें भी राज्य की परपंरा को प्रदर्शित करते हुये डिजाइनों को स्क्रिन प्रिंट से तैयार कराया गया है। स्क्रिन प्रिंट का कार्य छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा संघ से अनुबंधित प्रिंटिंग इकाई से कराया जा रहा है। इसकी भी चौड़ाई 24 इंच तथा लंबाई 84 इंच है। कॉटन गमछे का मूल्य 239 रूपए (जी.एस.टी. सहित) प्रति नग निर्धारित है। इन गमछों को राज्य के स्मृति चिन्ह के रूप में मान्यता दिये जाने से बुनाई के माध्यम से 300 बुनकरों को तथा 100 गोदना शिल्पियों को वर्ष भर का रोजगार प्राप्त होगा। कॉटन गमछे की बुनाई मजदूरी 60 रूपए प्रति नग है।

शिकायतों का जल्द परीक्षण कराने का दिया आश्वासन

मुख्यमंत्री ने हसदेव अरण्य क्षेत्र के लोगों से की मुलाकात

रायपुर. मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने आज शाम यहां राजधानी रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में हसदेव अरण्य क्षेत्र सरगुजा से पदयात्रा कर रायपुर आए लोगों से सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पहले भी आदिवासियों के साथ खड़ी है। आज भी खड़ी है और आगे भी आदिवासियों के साथ खड़ी रहेगी।
श्री बघेल ने कहा कि भारत सरकार द्वारा लेमरू एलीफेंट रिजर्व के लिए 452 वर्ग किलोमीटर का नोटिफिकेशन जारी किया गया है, लेकिन राज्य सरकार ने इसे बढ़ाकर 1995 वर्ग किलोमीटर करने की पहल की है। उन्होंने कहा कि 1995 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में उस क्षेत्र के सभी कोल ब्लॉक के एरिया आ गए हैं। लेमरू एलीफेंट रिजर्व का क्षेत्र 1995 वर्ग किलोमीटर से कम नहीं होगा। हसदेव अरण्य क्षेत्र के लोगों से मिली सभी शिकायतों का जल्द परीक्षण कराया जाएगा।
वन मंत्री श्री मोहम्मद अकबर ने हसदेव अरण्य क्षेत्र से आए लोगों को बताया कि हाथी प्रोजेक्ट के अंतर्गत सेमरसोत, बादलखोल, तमोर पिंगला, अभ्यारण बनाए गए हैं। इसके अलावा लेमरू हाथी रिजर्व भी बनाया जाना है। पिछली सरकार ने वर्ष लेमरू हाथी रिजर्व के लिए 2007 में 452 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र तय किया था। वर्ष 2007 से 2018 तक इस पर कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं किया। दिसम्बर 2018 में नई सरकार के गठन के बाद लेमरू एलीफेंट रिजर्व के लिए पुनः सर्वे कराया गया। एलीफेंट रिजर्व का क्षेत्र 452 वर्ग किलोमीटर से बढ़ाकर 1995 वर्ग किलोमीटर किया गया। इस पर मंत्रीमंडल की सैद्धांतिक सहमति भी बनी। उन्होंने कहा कि लेमरू एलीफेंट रिजर्व का क्षेत्रफल 1995 वर्ग किलोमीटर करने के संबंध में भारत सरकार को छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से अनुमति मिलने की प्रत्याशा में प्रस्ताव भेजा गया है। श्री अकबर ने कहा कि जहां तक परसा कोल ब्लॉक के संबंध में ग्रामसभा से नियम विरूद्ध प्रस्ताव और इस कार्य से जुड़े अधिकारियों पर कार्रवाई जांच का विषय है। जांच के बाद ही इस पर कार्रवाई करना संभव है। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, खाद्य मंत्री श्री अमरजीत भगत, छत्तीसगढ़ राज्य खनिज विकास निगम के अध्यक्ष श्री गिरीश देवांगन भी उपस्थित थे।

रायपुर. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज शाम यहां अपने निवास कार्यालय में भारतीय डाक विभाग, छत्तीसगढ़ परिमंडल द्वारा माई स्टेम्प योजना के तहत राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव और राज्योत्सव पर डाक टिकट और विशेष आवरण का विमोचन किया। यह डाक टिकट देश के सभी बड़े डाक घरों के काउंटरों में उपलब्ध होगी। यह डाक टिकट का संग्रहण करने वालों के लिए उपयोगी होगा।
इस अवसर पर संस्कृति मंत्री श्री अमरजीत भगत, पर्यटन मंत्री श्री ताम्रध्वज साहू, संसदीय सचिव श्री चन्द्रदेव राय, छत्तीसगढ़ राज्य गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष श्री कुलदीप जुनेजा, संस्कृति विभाग के सचिव श्री अन्बलगन पी., संस्कृति विभाग के संचालक श्री विवेक आचार्य, छत्तीसगढ़ के पोस्ट मास्टर जनरल श्री आर.के. जायभाय, सीनियर सुपरिंटेंडेंट पोस्ट श्री जी.एल. जांगड़े भी उपस्थित थे। श्री अन्बलगन ने बताया कि राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का आमंत्रण सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों, केन्द्र शासित प्रदेशों के उप राज्यपाल और जनजातीय कलाकारों को भेजा गया है। पोस्ट मास्टर जनरल श्री आर.के. जायभाय ने बताया कि आज जारी किया गया विशेष आवरण छत्तीसगढ़ राज्य के 21वें स्थापना दिवस एवं इस दौरान 28, 29 और 30 अक्टूबर 2021 को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित हो रहे द्वितीय राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के उपलक्ष्य में जारी किया जा रहा है। इस नृत्य महोत्सव में भारत के सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के जनजातीय कलाकारों द्वारा कला और संस्कृति की अपनी समृद्ध विरासत का प्रदर्शन किया जाएगा।

• मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 20 अक्टूबर को श्री धन्वंतरी दवा योजना का करेंगे शुभारंभ

• अब सस्ती दवाएं होंगी सभी की पहुंच में

• श्री धन्वंतरी जेनेरिक मेडिकल स्टोर से दवाइयों पर होने वाले खर्च का बोझ होगा कम

• योजना के अलगे चरण में दवा की घर पहुंच सुविधा भी

रायपुर. छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करते हुए राज्य में श्री धन्वंतरी दवा योजना शुरु की जा रही है। इस योजना के तहत 169 शहरों में 188 ऐसे मेडिकल स्टोर्स खोले जाएंगे, जिनमें मरीजों को अधिकतम खुदरा बिक्री मूल्य (एमआरपी) में 50 प्रतिशत से अधिक छूट दी जाएगी। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल 20 अक्टूबर को इस योजना का शुभारंभ करेंगे। योजना की शुरुआत 85 श्री धन्वंतरी जेनेरिक मेडिकल स्टोर्स के साथ की जाएगी। शेष दुकानें भी इस माह के अंत तक प्रारम्भ हो जाएंगी। आगामी चरण में इन दुकानों से घर पहुंच दवा डिलीवरी की भी व्यवस्था की जायेगी।
मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कहा है कि हमारी सरकार ने गरीबों और वंचित वर्गों तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने हेतु अनेक प्रभावी कदम उठाए हैं। इसी दिशा में एक और पहल करते हुए श्री धन्वंतरी जेनेरिक मेडिकल स्टोर्स शुरू करने जा रहे हैं। अब सस्ती दवाएं सभी की पहुंच में होंगी। इस योजना का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। इससे दवाइयों पर होने वाले खर्च का बोझ कम हो सकेगा। इस योजना के माध्यम से हम सब्बो स्वस्थ-जम्मो सुग्घर की परिकल्पना को साकार करने में सफल होंगे। नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया ने कहा है कि सेवा जतन सरोकार–छत्तीसगढ़ सरकार हमारी सरकार का आदर्श वाक्य है। योजना के माध्यम से शासन द्वारा इसे चरितार्थ किया जा रहा है।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधओं का विस्तार राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। इस दिशा में ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों में कई पहल की गई है। शहरी क्षेत्रों में मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना, सिटी डायग्नोस्टिक सेंटर, दाई दीदी क्लीनिक आदि के माध्यम से जमीनी स्तर तक सुविधाओं का विस्तार किया गया है। इसी क्रम में अब आम नागरिकों को उच्च गुणवत्ता की रियायती दवा उपलब्ध कराने के लिए श्री धन्वंतरी योजना प्रारम्भ की जा रही है। योजना अंतर्गत राज्य के सभी 169 नगरीय निकायों में शासन के सहयोग से श्री धन्वंतरी जेनेरिक मेडिकल स्टोर खोले जा रहे हैं। नगरीय निकायों द्वारा 188 दुकानों का चिन्हांकन किया गया है। इन दुकानों में 251 दवाइयों, 27 सर्जिकल आइटम साहित विभिन्न सामग्री उपलब्ध रहेगी। लघु वनोपज संघ द्वारा निर्मित गुणवत्तापूर्ण हर्बल उत्पाद भी इन दुकानों में उपलब्ध रहेंगे। इन दुकानों में देश की ख्यातिप्राप्त कंपनियों की जेनरिक दवाइयों की बिक्री की जाएगी। सर्दी, ख़ासी, बुखार, ब्लड प्रेशर जैसी आम बीमारियों के साथ-साथ गंभीर बीमारियों की दवाएं, एंटीबायोटिक, सर्जिकल आइटम भी उपलब्ध रहेंगे।
यह सभी सामग्री अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में 50 प्रतिशत से भी अधिक की छूट के साथ उपलब्ध होंगे। नागरीय निकायों द्वारा छूट की दर प्राप्त करने हेतु प्रतिस्पर्धात्मक निविदा का आमंत्रण किया गया था जिसमे सभी निकायों में 50 % से ज्यादा छूट की दर प्राप्त हुई। इसका प्रमुख कारण इस हेतु शासन द्वारा तैयार बिजनेस मॉडल रहा। श्री धन्वंतरी जेनेरिक मेडिकल स्टोर संचालकों को 2 रुपए प्रति वर्गफुट की आकर्षक दर से नगर पालिक निगम द्वारा किराये पर दुकानें उपलब्ध कराई जा रही हैं। साथ ही इन मेडिकल स्टोर्स से अन्य योजनाओं में भी दवाइयां खरीदने का आश्वासन भी दिया गया है । योजना के सफल संचालन की जिम्मेदारी जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित यूपीएसएस को प्रदान की गई है।

प्रशासनिक अमला पहुंचा घर, दी जायेगी हर संभव मद्द
कोण्डागांव : मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रतिभावान दिव्यांग राजेश्वरी को मिली नयी व्हील चेयर

कुछ लोग सब कुछ होकर भी दुनिया से हार जाते है और कई लोग कुछ ना होते हुए भी अपने जज्बों एवं प्रतिभा से इतिहास लिख जाते है। ऐसी ही एक कहानी मसोरा की 13 वर्षीय दिव्यांग बालिका राजेश्वरी पटेल की है। राजेश्वरी जन्म से ही अपने हाथ एवं पैरों को मोड़ने मे असक्षम थी। जिसके कारण वह बचपन से ही चलने-फिरने में असमर्थ रही परंतु इस असमर्थता को कभी अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। मसोरा के माध्यमिक शाला में कक्षा सातवीं में अध्ययनरत राजेश्वरी अपने हाथों से कार्य करने में असक्षम थी। ऐसे में उसने अपनी विशेष स्थिति को पार पाते हुए पैरों से कार्य करना प्रारंभ कर दिया। आज वह पैरो से कंचे खेलने, पेंटिंग बनाने एवं रंगोली बनाने जैसे कार्यों को भी संपादित कर लेती है।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर एसडीएम सहित प्रशासनिक अमला पहुंचा गांव
बालिका के संबंध में समाचार पत्रों द्वारा रंगोली प्रतियोगिता में प्रथम आने एवं पत्रिकाओं में राजेश्वरी के संघर्ष के संबंध में जानकारी मिलने पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्वयं संज्ञान लेते हुए कलेक्टर पुष्पेन्द्र कुमार मीणा को बालिका की हर संभव मद्द करने के साथ नयी व्हीलचेयर देने के निर्देश दिये। जिस पर एसडीएम गौतमचंद पाटिल, समाज कल्याण विभाग की उपसंचालक ललिता लकड़ा सहित प्रशासनिक अमला ग्राम पहुंचा। जहां एसडीएम एवं डीडी समाज कल्याण ने बालिका एवं उनके परिजनों से बात की एवं बालिका की सराहना की। बालिका को पूर्व में समाज कल्याण विभाग द्वारा व्हील चेयर प्रदान किया गया था। जो कि पुराना हो गया था। जिस पर विभाग द्वारा मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार नयी व्हील चेयर बालिका को प्रदान की गयी। इसके अतिरिक्त एसडीएम ने परिजनों को किसी भी प्रकार की सहायता की आवश्कता होने पर प्रशासन द्वारा हर संभव मद्द की बात कही। इस अवसर पर प्रशासन द्वारा प्राप्त सहयोग हेतु राजेश्वरी एवं उनके परिजनों ने प्रशासन का धन्यवाद किया।

इस संबंध में बालिका के पिता दीनूराम पटेल कहते है कि उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है। हाथों से कार्य न करपाने के बावजुद पैरो से वह अपने सभी कार्य कर लेती है। राजेश्वरी रंगोली, पेंटिंग के अलावा अच्छा गा भी लेती है। बालिका राजेश्वरी कहती है कि उन्हें उनके परिवारजनों का सदैव सहयोग मिला है। परिवारजनों के साथ स्कूली शिक्षकों एवं साथ के सहपाठी बच्चों द्वारा भी सहयोग एवं प्रोत्साहन मिलता है। नन्ही राजेश्वरी आगे चल कर इंजीनियर बनना चाहतीं हैं। यही उनके माता-पिता का भी सपना है।

बालिका के लिए समाज कल्याण विभाग बनायेगा नवीन सीपी व्हील चेयर
इस संबंध में उपसंचालक समाज कल्याण ललिता लकड़ा ने बताया कि प्रतिभावान बालिका को पूर्व में व्हील चेयर प्रदान करने के साथ विभाग की ओर से प्रतिमाह छात्रवृत्ति भी प्रदान की जा रही है। राजेश्वरी के लिए कलेक्टर के निर्देश पर विभाग द्वारा नवीन सीपी व्हील चेयर का भी निर्माण किया जा रहा है। जिसके लिए उन्हें रायपुर ले जा कर डॉक्टरों की टीम द्वारा स्वास्थ्य जांच करा कर नाप लेते हुए नवीन सीपी व्हील चेयर का निर्माण नाप के अनुसार किया जायेगा। इस नवीन व्हील चेयर में पढ़ने एवं अन्य गतिविधियों के संचालन हेतु अलग से टेबल लगाया जायेगा। जिसमें राजेश्वरी पैरों की सहायता से आसानी से दिन-प्रतिदिन के कार्य कर सकेंगी।

रायपुर :  शहरी विकास और प्रबंधन टास्क फोर्स समिति की बैठक

छत्तीसगढ़ के शहरी क्षेत्रों के व्यवस्थित विकास को लेकर यहां छत्तीसगढ़ राज्य योजना आयोग के कार्यालय में शहरी विकास और प्रबंधन टास्क फोर्स समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य के शहरों के सतत् और व्यवस्थित विकास और इन कार्यों में आने वाली चुनौतियों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। इस अवसर पर विशेषज्ञ पैनल और टास्क फोर्स के सदस्य उपस्थित थे। बैठक में राज्य के शहरों में व्यवस्थित और संतुलित विकास, शहरीकरण की गतिशीलता और रोजगार संभावनाओं में वृद्धि के संबंध में अहम सुझाव दिए गए।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ राज्य योजना आयोग के द्वारा मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल के गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ के नारे को साकार करने के उद्देश्य से और वैश्विक महामारी कोविड-19 की वजह से उत्पन्न चुनौतियों के मद्देनजर राज्य का सतत् विकास और रणनीतिक दिशा प्रदान करने के लिए मई में 14 टास्क फोर्स का गठन किया गया है। छत्तीसगढ़ राज्य योजना आयोग के सदस्य डॉ. के. सुब्रमण्यम की अध्यक्षता में शहरी विकास और प्रबंधन टास्क फोर्स समिति गठित की गई है।
टास्क फोर्स की बैठक में प्रो. अमिताभ कुंडू,  महबूब रहमान और  वर्गीस कुंजप्पी ने शहरीकरण की गतिशीलता और शहरी रोजगार की संरचना पर चर्चा की और इससे जुड़े कुछ मुद्दों पर प्रकाश डाला। बैठक में जानकारी दी गई कि यद्यपि पिछली शताब्दी में छत्तीसगढ़ और भारत के बीच शहरीकरण के स्तर में अंतर काफी कम हो गया है, फिर भी केवल 23 प्रतिशत लोग शहरी क्षेत्रों में रह रहे हैं। आधे से ज्यादा शहरी लोग छह जिलों में हैं। इसके अलावा, २००१-११ के दौरान, सरकार द्वारा आदिवासी आबादी के उच्च प्रतिशत वाले पिछड़े जिलों में लगभग ७५ नए वैधानिक शहर घोषित किए गए हैं। यह राज्य सरकार की संतुलित शहरीकरण नीति का परिणाम है। छत्तीसगढ़ में आसपास के राज्यों के कुशल प्रवासियों और वापस लौटने वाले प्रवासियों को अवसर प्रदान करने की जबरदस्त क्षमता है। आने वाले कुछ दशकों में अन्य राज्यों से पूंजी और कुशल जनशक्ति को आकर्षित करने के लिए राज्य के भविष्य के विकास की संभावना का संकेत देते हैं।
श्री पवन कुमार गुप्ता ने मौजूदा बंदोबस्त योजना - मास्टर प्लान, सिटी प्लान को लागू करने में आने वाली कठिनाइयों और संतुलित शहरी विकास के लिए रणनीतियों पर चर्चा की। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य में समावेशी शहरी विकास या तो मौजूदा शहरी क्षेत्रों या शहरों के आसपास के विकास क्षेत्रों को बढ़ावा देकर किया जा सकता है। इन कार्यों में भूमि अधिग्रहण और भूमि पूलिंग, बुनियादी ढांचा विकास जैसी चुनौतियां भी है। उन्होंने तत्काल मास्टर प्लान लागू करने और रायपुर, दुर्ग और राजनांदगांव क्षेत्र के बढ़ते शहरी क्षेत्र की दीर्घकालिक आवश्यकताओं के लिए राज्य द्वारा विकास क्षेत्र की पहचान करने का सुझाव दिया। उन्होंने उन सभी यूएलबी (राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग और प्रमुख जिला सड़कों) के चरणबद्ध विकास की सिफारिश की।
श्री गुप्ता ने कहा कि छत्तीसगढ़ की ग्रामीण संस्कृति और विरासत को खोए बिना शहरों का विकास किया जाए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की विरासत के अन्वेषण के लिए स्थलों के जीर्णाेद्धार और उनके रखरखाव का सुझाव देते हुए विरासत क्षेत्रों के निर्माण, कला और शिल्प बाजारों सहित सांस्कृतिक और वाणिज्यिक सुविधाओं के विकास पर भी जोर दिया। प्रो. दीपेंद्र नाथ दास ने छत्तीसगढ़ में सतत शहरी बुनियादी ढांचे के विकास में आने वाली कठिनाइयों के बारे में चर्चा की। प्रो. दास ने केंद्र और राज्य प्रायोजित योजनाओं का विश्लेषण किया। उन्होंने शहरों में सेवा स्तर के बेंचमार्क में सुधार और राजस्व सृजन और वृद्धि के लिए विभिन्न उपायों का भी सुझाव दिया। उन्होंने सिफारिश की कि शहरों की स्थिरता और सतत विकास के लिए बुनियादी ढांचे की रखरखाव में आने वाली लागत को वसूल किया जाना चाहिए।
डॉ. पार्थ मुखोपाध्याय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में शहरीकरण ज्यादातर राजमार्गों पर केंद्रित है और छत्तीसगढ़ के शहरों में रोजगार संरचना का व्यापक अंतर है। उन्होंने अपनी प्रस्तुति में यह बताया कि कस्बों को अधिक निवेश की आवश्यकता है क्योंकि छोटे शहरों में राजस्व क्षमता सीमित है। राज्य में छोटे शहरों और यूएलबी की वित्तीय बाधाओं के संदर्भ में, उन्होंने मौजूदा यूएलबी में आर्थिक माहौल में सुधार के लिए केन्द्र सरकार की शहरीकरण को बढ़ावा देने वाली योजनाओं का लाभ उठाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि सभी आवश्यक नागरिक बुनियादी ढांचे और सेवाओं के साथ मलिन बस्तियों को रहने योग्य आवास में बदलने के लिए ओडिशा के जागा मिशन जैसे कार्यक्रम शुरू किये जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि छोटे शहरों के परिवहन और क्षेत्रीय संपर्क के लिए छोटी बसों और अन्य परिवहन के साधनों का उपयोग किया जाना चाहिए।

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