ईश्वर दुबे
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CM Shri Vishnu Deo Sai Expresses Gratitude to PM Shri Narendra Modi and Railway Minister Shri Ashwini Vaishnaw to develop Homing Facility for 250 locomotive in Raipur
Raipur, Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai has expressed his heartfelt gratitude to Prime Minister Shri Narendra Modi and Union Railway Minister Shri Ashwini Vaishnaw for approving a Rs. 175 crore project to develop additional homing facilities for 250 electric locomotives in Raipur.
Chief Minister Shri Sai said that under the leadership of the double-engine government, railway infrastructure in Chhattisgarh is being strengthened at an unprecedented pace. He described the project approved by the Central Government as a significant step towards making the state's railway network more modern and efficient.
The Chief Minister said that the project will substantially enhance the maintenance capacity for electric locomotives in Raipur. It will also improve the efficiency of freight and passenger transportation while strengthening railway operations. He added that the project will further reinforce railway infrastructure to meet future transportation requirements.
Chief Minister Shri Sai expressed confidence that the project will play an important role in establishing Chhattisgarh as one of the country's leading railway, industrial and logistics hubs. He said that it will also accelerate the state's journey towards building a developed Chhattisgarh in line with the vision of Viksit Bharat 2047.
ब्याज एवं अधिभार में राहत, लंबित प्रकरणों के समाधान और रुकी परियोजनाओं को मिलेगी नई रफ्तार
रायपुर, जुलाई 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद् की बैठक में नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण (एनआरडीए) द्वारा आबंटित भूखंडों एवं निर्मित परिसरों के आबंटितियों के लिए वन टाइम सेटलमेंट (OTS) योजना-2026 को मंजूरी प्रदान की गई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में लिया गया यह निर्णय पात्र आबंटितियों को ब्याज एवं अधिभार में राहत प्रदान करने के साथ-साथ लंबित प्रकरणों के समाधान, रुकी हुई परियोजनाओं को गति देने तथा नवा रायपुर में निवेश एवं विकास गतिविधियों को नई ऊर्जा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार का प्रत्येक निर्णय विकास को गति देने और जनहित में व्यावहारिक समाधान उपलब्ध कराने की सोच से प्रेरित है। OTS योजना-2026 इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे निवेशकों का विश्वास मजबूत होगा, लंबित प्रकरणों का निराकरण होगा और नवा रायपुर के समग्र एवं नियोजित विकास को नई गति मिलेगी।
आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार निवेशकों के लिए पारदर्शी, भरोसेमंद और विकासोन्मुख वातावरण तैयार करने के लिए निरंतर नीतिगत निर्णय ले रही है। OTS योजना-2026 ऐसे आबंटितियों के लिए एक सकारात्मक अवसर है, जो अपनी परियोजनाओं को आगे बढ़ाना चाहते हैं। इससे रुकी हुई परियोजनाओं को गति मिलेगी, अनावश्यक न्यायालयीन विवाद कम होंगे, भूमि का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा तथा नवा रायपुर में निवेश एवं आर्थिक गतिविधियों को नया प्रोत्साहन मिलेगा। यह निर्णय नवा रायपुर को देश के अग्रणी नियोजित और आधुनिक शहर के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
योजना के अंतर्गत जो आबंटी परियोजना का विकास करने के इच्छुक नहीं हैं, उन्हें आबंटित भूमि समर्पित कर अनुबंध से बाहर होने का विकल्प भी मिलेगा। इससे अनावश्यक न्यायालयीन विवादों में कमी आएगी तथा भूमि का प्रभावी एवं शीघ्र उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा।
योजना लागू होने की तिथि से 31 मार्च 2027 तक प्रभावी रहेगी। इस अवधि में प्राप्त आवेदनों पर निर्धारित प्रावधानों के अनुसार विचार किया जाएगा। वर्तमान में विभिन्न भू-उपयोगों के अंतर्गत बड़ी संख्या में लंबित प्रकरण इस योजना से लाभान्वित हो सकेंगे।
एनआरडीए के अनुसार, योजना के अंतर्गत भूमि प्रीमियम में किसी प्रकार की छूट नहीं दी जाएगी तथा किसी भी भूमि का सेटलमेंट वर्तमान रिजर्व प्रीमियम मूल्य से कम पर नहीं किया जाएगा। इससे प्राधिकरण को कोई वित्तीय हानि नहीं होगी, जबकि पात्र आबंटितियों को ब्याज एवं अधिभार में लगभग 61.96 करोड़ रुपये की राहत मिलने का अनुमान है।
OTS योजना-2026 के क्रियान्वयन से नवा रायपुर में रुकी हुई विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी, निवेशकों का विश्वास और सुदृढ़ होगा, मुकदमेबाजी में कमी आएगी तथा भूमि का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा। यह निर्णय नवा रायपुर के नियोजित, संतुलित और तीव्र शहरी विकास को नई दिशा प्रदान करेगा।
मलार समाज ने ओबीसी में शामिल होने सौंपा आवेदन
रायपुर, जुलाई 2026/छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग में आज विभिन्न जिलों से प्राप्त गंभीर शिकायतों और आवेदनों पर एक महत्वपूर्ण सुनवाई आयोग कार्यालय में आयोजित की गई। आयोग के अध्यक्ष (कैबिनेट मंत्री दर्जा) श्री नेहरू राम निषाद, उपाध्यक्ष (राज्य मंत्री दर्जा) श्रीमती चन्द्रकान्ति वर्मा एवं आयोग के सचिव श्री संकल्प साहू की उपस्थिति में मामलों की गहन समीक्षा की गई। इस दौरान सभी संबंधित पक्षकारों को निष्पक्ष एवं पारदर्शी रूप से अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया।
मलार समाज को ओबीसी में शामिल करने की मांग
सुनवाई के दौरान सरगुजा, सूरजपुर, कोरिया, बलरामपुर एवं जशपुर जिलों से आए मलार समाज के लगभग 50 से 60 प्रतिनिधियों ने आयोग के समक्ष अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। प्रतिनिधियों ने समाज को अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल किए जाने के संबंध में एक सामूहिक आवेदन प्रस्तुत किया। समाज के लोगों ने एकमत होकर इस प्रक्रिया के प्रति अपना लिखित समर्थन दर्ज कराया, जिस पर अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष ने प्रकरण का अवलोकन कर अधिकारियों को नियमानुसार आगामी त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए।
प्रमुख मामलों पर हुई सुनवाई और निर्देश
आवेदक श्री हरिशंकर साहू द्वारा सामाजिक बहिष्कार किए जाने की शिकायत पर जिला गरियाबंद के ग्रामीण साहू संघ (मुरमुरा) के पदाधिकारी आयोग के समक्ष हाजिर हुए। पदाधिकारियों ने बताया कि आवेदक को समाज की मुख्यधारा में पुनः ससम्मान शामिल कर लिया गया है। इस संबंध में आयोग के पदाधिकारियों के समक्ष प्रमाण-पत्र भी प्रस्तुत किया गया।
श्री जागेश्वर यदु द्वारा भू-अधिग्रहण के बदले मिली नौकरी से सेवा समाप्त किए जाने की शिकायत पर दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, रायपुर के अधिकारियों ने अपना पक्ष रखा। अधिकारियों ने अवगत कराया कि यह सेवा संबंधी विवाद होने के कारण केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के अधिकार क्षेत्र में आता है। इस पर आयोग ने आवेदक को आवश्यक विधिक कार्रवाई हेतु कैट के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करने की उचित जानकारी दी।
श्री प्रदीप जायसवाल ने छत्तीसगढ़ विद्युत कंपनी में पदों की समतुल्यता निर्धारण और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण संबंधी विषयों से आयोग को अवगत कराया। मामले को गंभीरता से लेते हुए आयोग के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष ने अन्य पिछड़ा वर्ग क्रीमीलेयर पर समतुल्यता निर्धारण के संबंध में छत्तीसगढ़ शासन को पत्र प्रेषित करने के निर्देश दिए हैं।
आवेदक श्री रामसुन्दर का बयान दर्ज किया गया, परंतु अनावेदक की अनुपस्थिति के कारण उसे आगामी तिथि पर पुनः तलब किया गया है। चूंकि यह मामला आपसी विवाद और मारपीट से संबंधित था, इसलिए आयोग ने आवेदक को संबंधित पुलिस थाने में नियमानुसार शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी है। सुनवाई के दौरान श्री अंबिका प्रसाद, श्री फगुन दास और श्रीमती जोगेश्वरी वर्मा के अनुपस्थित रहने के कारण आयोग ने उन्हें आगामी पेशी तिथि में दोबारा उपस्थित होने हेतु निर्देशित किया है।
संवेदनशीलता से काम करने की हिदायत
सभी मामलों की विस्तृत समीक्षा के बाद अध्यक्ष श्री नेहरू राम निषाद एवं उपाध्यक्ष श्रीमती चन्द्रकान्ति वर्मा ने उपस्थित अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि पिछड़ा वर्ग से जुड़े सभी प्रकरणों का त्वरित और पूरी संवेदनशीलता के साथ समय-सीमा के भीतर निराकरण सुनिश्चित किया जाए।
हर माह वीडियो आधारित निरीक्षण से गड्ढों, दरारों और पॉटहोल की होगी पहचान, त्वरित मरम्मत की बनेगी कार्ययोजना
रायपुर, जुलाई 2026/ छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत बनी ग्रामीण सड़कों के रखरखाव और उनकी गुणवत्ता को सुधारने के लिए राज्य सरकार अब एक क्रांतिकारी कदम उठाने जा रही है। सड़कों की मॉनिटरिंग और मरम्मत कार्य को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक का उपयोग किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा ने पीएमजीएसवाई के कार्यों की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को इस एआई आधारित सड़क निरीक्षण प्रणाली को जल्द से जल्द जमीन पर लागू करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
हर महीने वीडियो से होगी सड़कों की जांच
समीक्षा बैठक के दौरान बताया गया कि इस नई तकनीक के तहत अब राज्य की प्रत्येक पीएमजीएसवाई सड़क का हर महीने वीडियो आधारित निरीक्षण किया जाएगा। इसके लिए विशेष एआई आधारित ऐप और डैशबोर्ड भी तैयार कर लिया गया है। एआई तकनीक सड़कों पर मौजूद गड्ढों (पॉटहोल्स), दरारों और अन्य क्षतियों की अपने आप पहचान कर उनका विश्लेषण करेगी। इससे सड़कों की श्रियल टाइमश् (वास्तविक स्थिति) की सटीक जानकारी मिलेगी और किसी भी तरह की भ्रामक जानकारी से बचा जा सकेगा।
सर्वाधिक क्षतिग्रस्त सड़कों को मिलेगी प्राथमिकता
उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि एआई तकनीक से प्राप्त आंकड़ों (डेटा) के आधार पर राज्य की सबसे ज्यादा खराब और क्षतिग्रस्त सड़कों की पहचान प्राथमिकता से की जाएगी। इसके बाद उनके संधारण (रखरखाव) की बजट कार्ययोजना तैयार कर तुरंत मरम्मत कार्य शुरू कराया जाएगा। इससे सरकारी संसाधनों का सही और बेहतर उपयोग हो सकेगा तथा ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन अधिक सुगम व सुरक्षित बनेगा।
कल से शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट
इस व्यवस्था को सुचारू रूप से लागू करने के लिए उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि कल से ही प्रायोगिक तौर पर (पायलट प्रोजेक्ट के रूप में) प्रदेश के प्रत्येक जिले में एक-एक चयनित सड़क का एआई आधारित निरीक्षण शुरू किया जाए। इन शुरुआती निरीक्षणों से मिलने वाले परिणामों का बारीकी से विश्लेषण करने के बाद इसे पूरे राज्य में प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा। आधुनिक तकनीक के इस उपयोग से सड़कों की आयु बढ़ेगी और समय पर मरम्मत होने से जनता को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, सचिव श्री भीम सिंह, सचिव श्री धर्मेश साहू, प्रधानमंत्री आवास योजना के संचालक श्री तारन प्रकाश सिन्हा तथा संचालक एनआरएलएम श्री अश्वनी देवांगन सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
सफलता की कहानी
जन्मजात होंठ की विकृति का हुआ सफल उपचार, अब सामान्य जीवन जी रही हैं 22 वर्षीय युवती
रायपुर, जुलाई 2026/ होंठ की जन्मजात विकृति (क्लेफ्ट लिप) एक आम समस्या है, जिसमें बच्चे के ऊपरी होंठ या तालू के ऊतक गर्भावस्था के शुरुआती हफ्तों में पूरी तरह जुड़ नहीं पाते हैं। यह दरार केवल होंठ पर हो सकती है या नाक तक जा सकती है। सर्जरी द्वारा इसे 90ः से 100ः तक ठीक किया जा सकता है।
बीजापुर जिले के दूरस्थ बासागुड़ा गांव की रहने वाली 22 वर्षीय भीमे हेमला जन्म से होंठ की जन्मजात विकृति (क्लेफ्ट लिप) से पीड़ित थीं। इस कारण उन्हें भोजन करने, निगलने और स्पष्ट रूप से बोलने में काफी परेशानी होती थी। यह समस्या उनके आत्मविश्वास और दैनिक जीवन को भी प्रभावित करती थी।
उपचार के लिए भीमे हेमला ने जिला अस्पताल बीजापुर में संपर्क किया। यहां कान, नाक एवं गला (ईएनटी) विशेषज्ञ डॉ. विभू तिवारी के नेतृत्व में स्थानीय एनेस्थीसिया के तहत उनकी सफल सर्जरी की गई। ऑपरेशन थिएटर के चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और स्वास्थ्य कर्मियों के समन्वित प्रयास से यह जटिल शल्य चिकित्सा सफलतापूर्वक पूरी हुई।
सर्जरी के बाद भीमे हेमला के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार हुआ। अब उन्हें बोलने, निगलने और सामान्य रूप से भोजन करने में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं होती। सफल उपचार से उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है और वे अब सामान्य एवं सम्मानजनक जीवन जीने की ओर आगे बढ़ रही हैं।
जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए कलेक्टर श्री विश्वदीप के मार्गदर्शन तथा जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुश्री नम्रता चौबे के सहयोग से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बी.आर. पुजारी और सिविल सर्जन डॉ. रत्ना ठाकुर के नेतृत्व में जिला अस्पताल बीजापुर में विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया गया है। इसका लाभ अब दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों के मरीजों को अपने ही जिले में मिल रहा है।
जिला अस्पताल बीजापुर में इस तरह की जटिल सर्जरी का सफल होना जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती क्षमता और विशेषज्ञ चिकित्सकीय सुविधाओं का प्रमाण है। इससे मरीजों को बड़े शहरों में जाने की आवश्यकता कम हो रही है और उन्हें स्थानीय स्तर पर ही गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध हो रहा है।
हितग्राही की प्रतिक्रिया
भीमे हेमला, बासागुड़ा निवासी ने बताया कि वो जन्म से इस समस्या से परेशान थी। जिला अस्पताल बीजापुर में मेरा सफल इलाज हुआ। अब मैं आसानी से बोल सकता हूं और खाना खा सकती हूं। मेरे चेहरे पर फिर से मुस्कान लौट आई है। इसके लिए मैं छत्तीसगढ सरकार एवं डॉ. विभू तिवारी, जिला अस्पताल के सभी डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और स्वास्थ्य कर्मियों का हृदय से आभार व्यक्त करती हूं।
सफलता की कहानी
कमाया 70 हजार रूपए का अतिरिक्त लाभ
रायपुर, जुलाई 2026/ देश और राज्य में किसानों की आय दोगुनी करने के प्रयासों के बीच श्राष्ट्रीय मिशन ऑन एडिबल ऑयल-ऑयल पाम योजनाश् छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। बीजापुर जिले के भोपालपटनम विकासखंड के ग्राम कचनूर से एक बेहद प्रेरणादायक सफलता की कहानी सामने आई है, जहाँ एक किसान ने सूझबूझ दिखाते हुए ऑयल पाम के साथ मूंगफली की अंतरवर्तीय खेती (प्दजमतबतवचचपदह) अपनाकर शानदार अतिरिक्त लाभ कमाया है।
खाली पड़ी जमीन का किया सटीक सदुपयोग
ग्राम कचनूर के प्रगतिशील किसान श्री पोटाम गणेश ने अपनी 2.20 हेक्टेयर कृषि भूमि पर ऑयल पाम के पौधे लगाए हैं। चूँकि ऑयल पाम के पौधों को पूरी तरह विकसित होकर फल देने में कुछ वर्षों का समय लगता है, तब तक पौधों के बीच की जमीन खाली रहती है। इस खाली भूमि का सही उपयोग करने के लिए उन्होंने उद्यानिकी विभाग की सलाह पर बीच में मूंगफली की अंतरवर्तीय खेती करने का स्मार्ट फैसला लिया।
30 हजार रूपए की लागत में 70 हजार रूपए का शुद्ध मुनाफा
पोटाम गणेश का यह निर्णय आर्थिक रूप से बेहद फायदेमंद साबित हुआ। मूंगफली की इस अंतरवर्तीय फसल से उन्हें जो परिणाम मिला उससे वह उत्साहित है। कुल उत्पादन मूल्य लगभग एक लाख रुपए मिला किन्तु खेती में लागत मात्र 30 हजार रुपये लगा और शुद्ध मुनाफा 70 हजार रुपये मिला।
शुरुआती वर्षों में किसानों को संबल देती है यह तकनीक
अपनी इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए हितग्राही पोटाम गणेश ने कहा, ऑयल पाम के शुरुआती वर्षों में जब तक मुख्य फसल तैयार नहीं होती, तब तक अंतरवर्तीय फसल लेने से हमारी नियमित आय बनी रहती है। इससे खेती की लागत निकालना बहुत आसान हो जाता है और आर्थिक मजबूती मिलती है। उन्होंने क्षेत्र के अन्य साथी किसानों से भी अपील की है कि वे इस आधुनिक खेती पद्धति को अपनाएं।
राष्ट्रीय मिशन से मिल रहा है तकनीकी मार्गदर्शन
उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रीय मिशन ऑन एडिबल ऑयलदृऑयल पाम योजना के अंतर्गत जिला स्तर पर किसानों को लगातार तकनीकी मार्गदर्शन, आवश्यक सहयोग और उन्नत खेती के तौर-तरीकों की जानकारी दी जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि यह योजना न केवल किसानों की व्यक्तिगत आय को बढ़ा रही है, बल्कि खाद्य तेलों के मामले में देश को आत्मनिर्भर बनाने और तिलहन उत्पादन बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभा रही है।
25 आत्मसमर्पित युवाओं को मिला स्वरोजगार
रायपुर, जुलाई 2026/ छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में राज्य सरकार की पुनर्वास और कौशल विकास नीति के तहत एक सराहनीय पहल की गई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में आत्मसमर्पित युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) सुकमा में मशरूम उत्पादन का विशेष प्रशिक्षण दिया गया।
15 दिवसीय कौशल विकास कार्यक्रम संपन्न
कृषि विज्ञान केंद्र सुकमा और कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस 15 दिवसीय कौशल विकास कार्यक्रम में 25 आत्मसमर्पित युवाओं ने हिस्सा लिया। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य इन युवाओं को कृषि आधारित स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें समाज में एक सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध कराना है।
विशेषज्ञों ने सिखाए वैज्ञानिक खेती के गुर
प्रशिक्षण के दौरान कृषि विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षणार्थियों को ऑयस्टर मशरूम की वैज्ञानिक खेती की पूरी प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रदर्शन (प्रैक्टिकल ट्रेनिंग) कराया गया। युवाओं को बेहद सरल तरीके से तकनीकी जानकारियां दी गईं, जिसके तहत धान के पुआल (पैरा) की तैयारी और उपचार रकने के बाद मशरूम के स्पॉन (बीज) का सही उपयोग कर पॉलीबैग तैयार करना और नमी का संतुलन बनाए रखना, फसल की वैज्ञानिक तरीके से तुड़ाई, पैकेजिंग और स्थानीय बाजार में उसकी बिक्री करना शामिल था ।
कम लागत और कम समय में अधिक मुनाफा
कृषि विशेषज्ञों ने युवाओं को प्रोत्साहित करते हुए बताया कि मशरूम उत्पादन एक ऐसा लाभकारी व्यवसाय है जिसे बहुत कम लागत, कम जगह और बेहद कम समय में शुरू किया जा सकता है। विशेषकर ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में आसानी से उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से इसे अपनाकर युवा हर महीने एक नियमित और अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं।
बाजार में बढ़ती मांग और सेहत के लिए फायदेमंद
प्रशिक्षण में मशरूम के पोषक तत्वों की जानकारी देते हुए बताया गया कि यह एक अत्यंत पौष्टिक खाद्य पदार्थ है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन-बी, विटामिन-डी तथा कई आवश्यक खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। कम वसा (लो फैट) और कम कैलोरी होने के कारण आज के समय में बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे यह स्वरोजगार का एक बेहतरीन और सुरक्षित विकल्प बनकर उभर रहा है।
इस पहल से न केवल आत्मसमर्पित युवाओं को आर्थिक संबल मिलेगा, बल्कि वे एक नए आत्मविश्वास के साथ समाज की मुख्यधारा में अपना जीवन बिता सकेंगे।
धरमजयगढ़ जिला यूनियन के 46 हजार 840 संग्राहकों को मिलेंगे 17.43 करोड़ रुपये बोनस राशि
रायपुर, जुलाई 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की पहल और वन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में वर्ष 2023 के तेन्दूपत्ता संग्रहण के लिए प्रोत्साहन पारिश्रमिक (बोनस) का वितरण शुरू हो गया है। राज्य स्तरीय सहकारिता सप्ताह एवं अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस के अवसर पर 3 जुलाई से शुरू हुई इस प्रक्रिया के तहत धरमजयगढ़ जिला वनोपज सहकारी यूनियन के संग्राहकों के बैंक खातों में 17 करोड़ 43 लाख रुपये ऑनलाइन अंतरित किए जा रहे हैं।
58 प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों में बोनस
वनमंडलाधिकारी एवं पदेन प्रबंध संचालक, जिला वनोपज सहकारी यूनियन मर्यादित धरमजयगढ़ ने बताया कि जिला यूनियन की 58 प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों में बोनस वितरण किया जा रहा है। वर्ष 2023 के संग्रहण सीजन में जिला यूनियन की 59 समितियों के माध्यम से 70,945.485 मानक बोरा तेन्दूपत्ता संग्रहित किया गया था। इसके लिए 46,840 संग्राहकों को कुल 17.43 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन पारिश्रमिक दिया जा रहा है।
जिला यूनियन की प्राथमिक वनोपज सहकारी समिति बोरो को सबसे अधिक 4,710.58 रुपये प्रति मानक बोरा की दर से बोनस मिला है। इसके बाद प्राथमिक समिति रायमेर को 4,616.76 रुपये प्रति मानक बोरा का प्रोत्साहन पारिश्रमिक प्राप्त हुआ है।
ऑनलाइन भुगतान से बढ़ी पारदर्शिता
वन विभाग द्वारा बोनस राशि सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में ऑनलाइन भेजी जा रही है। इससे भुगतान प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और आसान बनी है तथा संग्राहकों को समय पर राशि मिल रही है। तेन्दूपत्ता संग्राहकों ने बताया कि इस बोनस राशि से वे खेती-किसानी, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और घरेलू जरूरतों को पूरा कर सकेंगे। समय पर मिली आर्थिक सहायता से न केवल संग्राहकों को राहत मिली है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।
डिजिटल सुशासन पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी
सेवा सेतु से आसान हुआ विवाह पंजीयन, अंकिता ओयम को समय पर मिला प्रमाण-पत्र
रायपुर,/ शासन की महत्वाकांक्षी श्सेवा सेतुश् पहल ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सुशासन की मजबूत मिसाल बन रही है। इस व्यवस्था के माध्यम से लोगों को अब शासकीय सेवाओं के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं। आय, जाति, निवास, विवाह पंजीयन सहित अनेक प्रमाण-पत्र अब सरल, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध हो रहे हैं।
डिजिटल माध्यम से प्रक्रिया होने के कारण अनावश्यक भागदौड़ नहीं करनी पड़ी
बीजापुर जिले के ग्राम भुसापुर, तहसील उसूर की निवासी अंकिता ओयम को भी सेवा सेतु केन्द्र के माध्यम से समय पर विवाह पंजीयन प्रमाण-पत्र प्राप्त हुआ। उन्होंने तहसील कार्यालय उसूर स्थित सेवा सेतु केन्द्र में आवेदन किया था। आवेदन प्राप्त होने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसका शीघ्र निराकरण किया गया और उन्हें समय पर प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराया गया। प्रमाण-पत्र का वितरण सेवा सेतु केन्द्र की मैनेजर श्रीमती मंजुलता दुर्गम एवं श्री शंकर मोडियम द्वारा किया गया। पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से पूरी होने के कारण अंकिता को किसी प्रकार की अनावश्यक भागदौड़ नहीं करनी पड़ी।
सेवा सेतु केन्द्र ग्रामीण लोगों के लिए बेहद उपयोगी सुविधाजनक
अंकिता बताती हैं कि पहले विवाह पंजीयन जैसे कार्यों के लिए कई बार अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे, जिससे समय और धन दोनों खर्च होते थे। लेकिन सेवा सेतु केन्द्र में आवेदन करना आसान रहा और निर्धारित समय के भीतर उन्हें प्रमाण-पत्र मिल गया। इससे उनके जरूरी कार्य भी बिना किसी परेशानी के पूरे हो सके। उन्होंने कहा कि सेवा सेतु केन्द्र ग्रामीण लोगों के लिए बेहद उपयोगी सुविधा है। इससे शासकीय सेवाएं घर के नजदीक, पारदर्शी और समय पर मिल रही हैं, जिससे लोगों का शासन-प्रशासन पर भरोसा भी बढ़ा है।
डिजिटल प्रशासन को मजबूत और पारदर्शी बनाने प्रभावी
राज्य शासन द्वारा संचालित सेवा सेतु केन्द्रों के माध्यम से आय, जाति, स्थानीय निवास, विवाह पंजीयन सहित अनेक शासकीय सेवाएं समयबद्ध रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं। यह पहल डिजिटल प्रशासन को मजबूत बनाने के साथ-साथ नागरिकों को सरल, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी साबित हो रही है।
हितग्राही की प्रतिक्रिया
अंकिता ओयम, ग्राम भुसापुर, तहसील उसूर निवासी ने बताया कि सेवा सेतु केन्द्र में विवाह पंजीयन की पूरी प्रक्रिया बहुत आसान रही। मुझे समय पर प्रमाण-पत्र मिल गया, जिससे मेरे सभी जरूरी काम बिना किसी परेशानी के पूरे हो गए। इसके लिए मैं शासन-प्रशासन और सेवा सेतु केन्द्र की पूरी टीम का हृदय से धन्यवाद देती हूँ।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के सुशासन में आपातकालीन सेवाएं बनीं आमजन का भरोसा
डॉयल-112 टीम की तत्परता से समय पर मिला उपचार, महिला पूरी तरह खतरे से बाहर
रायपुर, जुलाई 2026। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार आम नागरिकों को त्वरित, संवेदनशील और प्रभावी आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी कड़ी में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में डॉयल-112 की सतर्क एवं त्वरित कार्रवाई ने एक बार फिर मानव जीवन की रक्षा के प्रति पुलिस की प्रतिबद्धता को प्रमाणित किया है। डॉयल-112 टीम ने सर्पदंश की शिकार एक महिला को बिना समय गंवाए अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
जानकारी के अनुसार, रात्रि लगभग एक बजे डॉयल-112 गौरेला फाल्कन-1 को ग्राम जमुनिया टोला, धनौली से एक महिला के सर्पदंश की सूचना प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही डॉयल-112 में तैनात आरक्षक श्री रामदयाल आयाम एवं चालक श्री गोपाल पुरी तत्काल आपातकालीन वाहन लेकर घटनास्थल के लिए रवाना हुए। टीम ने मौके पर पहुंचकर पाया कि ग्राम जमुनिया टोला, धनौली निवासी 55 वर्षीय श्रीमती सोनकुंवर पनिका को रात्रि में जमीन पर सोने के दौरान जहरीले सर्प ने काट लिया था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉयल-112 टीम ने बिना किसी विलंब के पीड़िता को परिजनों के साथ ईआरवी वाहन से जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने तत्काल उपचार प्रारंभ किया। समय पर चिकित्सा सुविधा मिलने से महिला की जान बच गई और वर्तमान में उनकी स्थिति सामान्य है।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि राज्य सरकार द्वारा स्थापित आपातकालीन सहायता प्रणाली केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि संकट की प्रत्येक घड़ी में नागरिकों की सुरक्षा और जीवन रक्षा के लिए पूरी तत्परता से कार्य कर रही है। डॉयल-112 की प्रशिक्षित टीमों की त्वरित प्रतिक्रिया, आधुनिक संचार व्यवस्था और जिला प्रशासन के समन्वित प्रयासों से आपातकालीन परिस्थितियों में लोगों को समय पर सहायता मिल रही है।
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व भी गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ग्राम धनौली में सर्पदंश की शिकार एक युवती को डॉयल-112 की तत्परता से समय पर अस्पताल पहुंचाकर उसका जीवन बचाया गया था। लगातार दूसरी सफल कार्रवाई ने जिले में डॉयल-112 के प्रति आमजन का विश्वास और अधिक मजबूत किया है।
जिला प्रशासन एवं जिला पुलिस ने वर्षा ऋतु के दौरान नागरिकों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। लोगों से आग्रह किया गया है कि वे जमीन पर सोने के बजाय चारपाई या बिस्तर का उपयोग करें, रात्रि में मच्छरदानी का प्रयोग करें तथा घर एवं आसपास की साफ-सफाई बनाए रखें ताकि सर्पों के प्रवेश की संभावना कम हो। यदि किसी व्यक्ति को सर्पदंश हो जाए तो झाड़-फूंक, टोने-टोटके अथवा घरेलू उपचार में समय न गंवाते हुए तत्काल डॉयल-112 अथवा निकटतम स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें, क्योंकि समय पर चिकित्सकीय उपचार ही जीवन बचाने का सबसे प्रभावी उपाय है।
राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि प्रत्येक नागरिक को संकट की घड़ी में तत्काल सहायता उपलब्ध हो। इसी उद्देश्य से डॉयल-112 सेवा को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है, ताकि प्रदेश के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों तक भी आपातकालीन सहायता शीघ्रता से पहुंच सके। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की यह घटना दर्शाती है कि पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के समन्वित प्रयासों से न केवल आपात स्थितियों का प्रभावी प्रबंधन हो रहा है, बल्कि नागरिकों में सुरक्षा और विश्वास की भावना भी निरंतर सुदृढ़ हो रही है।