ईश्वर दुबे
संपादक - न्यूज़ क्रिएशन
+91 98278-13148
newscreation2017@gmail.com
Shop No f188 first floor akash ganga press complex
Bhilai
—— !-- Meta Pixel Code -->
मेधावी श्रमिक बच्चों को मिलेगी निःशुल्क आवासीय शिक्षा
ऑनलाइन आवेदन 12 जुलाई तक
रायपुर, जुलाई 2026/ छत्तीसगढ़ के श्रम विभाग द्वारा संचालित अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के होनहार बच्चों के लिए एक बेहतरीन अवसर सामने आया है। योजना के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 6वीं में प्रवेश लेने वाले मेधावी एवं प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रदेश के उत्कृष्ट आवासीय विद्यालयों में पूर्णतः निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जाएगी। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि 12 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है।
इन माध्यमों से कर सकते हैं आवेदन
श्रम विभाग के ‘श्रमेव जयते’ मोबाइल ऐप एवं आधिकारिक वेब पोर्टल द्वारा पात्र विद्यार्थी और उनके अभिभावक निम्नलिखित माध्यमों से आसानी से आवेदन जमा कर सकते हैं। अपने निकटतम विकासखंड की जनपद पंचायत में स्थित श्रम संसाधन केंद्र में जाकर या नजदीकी चॉइस सेंटर के माध्यम से, जिला कार्यालय के श्रम पदाधिकारी के पास जाकर आवेदन जमा कर सकते हैं।
आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज
आवेदन करते समय विद्यार्थियों को निम्नलिखित दस्तावेजों की प्रतियां संलग्न करना अनिवार्य होगा। इसी प्रकार श्रमिक पंजीयन कार्ड (लेबर कार्ड), छात्र-छात्रा का मूल निवास प्रमाण-पत्र संलग्न करना होगा। आधार कार्ड (नियमों के तहत सुरक्षित रूप से आवश्यक), कक्षा 5वीं की उत्तीर्ण अंकसूची (मार्क्सशीट), वर्तमान कक्षा में अध्ययनरत होने का प्रमाण-पत्र संलग्न करना होगा।
योजना की प्रमुख शर्तें और पात्रता
योजना का लाभ केवल उन पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को मिलेगा, जिनका श्रमिक पंजीयन आवेदन की तिथि से कम से कम एक वर्ष पूर्व का हो। यह लाभ श्रमिक परिवार की प्रथम दो संतानों को ही देय होगा। विद्यार्थी का शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कक्षा 6वीं में प्रवेश लेना अनिवार्य है।
चयन के बाद मिलेंगी ये विश्वस्तरीय सुविधाएं
प्राप्त आवेदनों की बारीकी से जांच करने के बाद छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा निर्धारित मापदंडों के अनुसार पात्र मेधावी विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा। चयनित छात्र-छात्राओं को कक्षा 6वीं से लेकर 12वीं तक की पूरी पढ़ाई निःशुल्क कराई जाएगी। इसके साथ ही उन्हें उत्कृष्ट विद्यालयों में मुफ्त आवास (हॉस्टल), पौष्टिक भोजन तथा अन्य सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि श्रमिक परिवारों के बच्चों को एक बेहतर और प्रतिस्पर्धी शैक्षणिक माहौल मिल सके।
'सेवा सेतु' केंद्र से 24 घंटे में मिला आय प्रमाण पत्र, समय पर हुआ छात्रा का कॉलेज प्रवेश
रायपुर, जुलाई 2026/ छत्तीसगढ़ राज्य शासन की डिजिटल पहल 'सेवा सेतु पोर्टल' आम नागरिकों के लिए वरदान साबित हो रही है। यह पोर्टल शासकीय सेवाओं को सरल, त्वरित और पारदर्शी तरीके से लोगों तक पहुंचा रहा है। इसी कड़ी में राजनांदगांव जिले से एक सुखद मामला सामने आया है, जहां सेवा सेतु केंद्र की तत्परता से मात्र 24 घंटे के भीतर एक छात्रा का आय प्रमाण पत्र बन गया और उसका कॉलेज में प्रवेश सुनिश्चित हो सका।
अंतिम तिथि पास होने से चिंतित था परिवार
राजनांदगांव जिले के विकासखंड डोंगरगांव के ग्राम आयबांधा निवासी श्री तोरण लाल अपनी पुत्री निकिता के उच्च शिक्षा (कॉलेज) में प्रवेश को लेकर काफी चिंतित थे। कॉलेज में दाखिले के लिए आय प्रमाण पत्र अनिवार्य था और प्रवेश की अंतिम तिथि बेहद नजदीक आ चुकी थी। समय पर प्रमाण पत्र न मिलने की आशंका से पूरा परिवार परेशान था।
ऑनलाइन आवेदन के बाद 24 घंटे में समाधान
इसी दौरान तोरण लाल को डोंगरगांव में स्थित 'सेवा सेतु केंद्र' की जानकारी मिली। वे तुरंत आवश्यक दस्तावेजों के साथ केंद्र पहुंचे। केंद्र संचालक ने उन्हें पूरी प्रक्रिया समझाई और 22 जून 2026 को उनका ऑनलाइन आवेदन दर्ज किया। डिजिटल प्रक्रिया के त्वरित निराकरण (Fast-track Processing) के चलते मात्र 24 घंटे के भीतर ही आय प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। इसके चलते निकिता का कॉलेज में प्रवेश बिना किसी बाधा के समय-सीमा के भीतर हो गया।
समय और धन दोनों की हो रही बचत
अपनी खुशी साझा करते हुए हितग्राही तोरण लाल ने कहा, "पहले शासकीय दस्तावेज बनवाने के लिए विभिन्न दफ्तरों के कई चक्कर काटने पड़ते थे, जिससे समय और पैसा दोनों बर्बाद होता था। लेकिन सेवा सेतु केंद्र की डिजिटल व्यवस्था से हमारा काम बेहद सरल और कम समय में हो गया। समय पर प्रमाण पत्र मिलने से मेरी बेटी का भविष्य सुरक्षित हुआ है।"
घर बैठे मिल रहीं 400 से अधिक सेवाएं
'सेवा सेतु पोर्टल' के माध्यम से नागरिक अब घर बैठे या अपने नजदीकी केंद्रों पर जाकर जाति, आय, निवास प्रमाण पत्र, राजस्व संबंधी सेवाएं, राशन कार्ड और पेंशन सहित 400 से अधिक शासकीय सेवाओं का लाभ आसानी से उठा रहे हैं। यह व्यवस्था आम जनता को समयबद्ध सेवाएं देने के साथ-साथ उनके समय और धन की बड़ी बचत कर रही है, जिसके लिए नागरिकों ने राज्य सरकार की इस डिजिटल पहल के प्रति आभार व्यक्त किया है।
1 नवंबर को होगा पुरस्कार का वितरण
रायपुर, जुलाई 2026/ छत्तीसगढ़ के कृषि विभाग द्वारा प्रतिष्ठित डॉ. खूबचंद बघेल कृषक रत्न पुरस्कार 2026 के लिए राज्य के इच्छुक और पात्र प्रगतिशील किसानों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इस राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है। उत्कृष्ट कार्य करने वाले चयनित किसान को राज्य स्थापना दिवस (1 नवंबर 2026) के अवसर पर गरिमामय समारोह में सम्मानित किया जाएगा।
यहाँ से मिलेंगे नि:शुल्क आवेदन पत्र
पुरस्कार के लिए निर्धारित आवेदन पत्र अपने नजदीकी उप संचालक कृषि या वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी के कार्यालय से बिना किसी शुल्क के प्राप्त किए जा सकते हैं। पूरी तरह भरे हुए आवेदन पत्र को सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ संबंधित कार्यालय में ही जमा करना होगा।
आवेदन के साथ ये चीजें संलग्न करना अनिवार्य
आवेदक किसान को अधिकतम दो पृष्ठों में अपने कृषि कार्यों की सफलता की कहानी लिखनी होगी। कृषि गतिविधियों के छायाचित्र, आधुनिक या नवाचारी खेती का प्रदर्शन करती हुई एक वीडियो सीडी, संलग्न करना होगा।
पुरस्कार के लिए क्या हैं पात्रता
इस प्रतिष्ठित पुरस्कार की पात्रता के लिए विभाग ने निम्नलिखित कड़े मापदंड तय किए हैं। किसान छत्तीसगढ़ क्षेत्र में पिछले कम से कम 10 वर्षों से निरंतर कृषि कार्य कर रहा हो। किसान की कुल वार्षिक आय का न्यूनतम 75 प्रतिशत हिस्सा केवल कृषि गतिविधियों से प्राप्त होता हो। आवेदक किसान पर तकाबी, सिंचाई शुल्क या सहकारी बैंकों का कोई भी कालातीत ऋण बकाया नहीं होना चाहिए।
इन पैमानों पर होगा किसानों का मूल्यांकन
विजेता का चयन पूरी तरह वैज्ञानिक और पारदर्शी पद्धति से किया जाएगा, जिसमें निम्नलिखित बिंदुओं का मूल्यांकन होगा। खेती में नवीन तकनीकों, बेहतर फसल सघनता, फसल विविधीकरण और समन्वित कृषि प्रणाली को अपनाना। पिछले तीन वर्षों के दौरान विभिन्न फसलों की उत्पादकता का रिकॉर्ड। कृषि एवं सहयोगी क्षेत्रों में किए गए नए प्रयोग तथा अन्य किसानों को उन्नत खेती के लिए प्रेरित करने के प्रयास। भूमि एवं जल संरक्षण की दिशा में किए गए उल्लेखनीय कार्य का मूल्यांकन किया जाएगा।
त्रि-स्तरीय छानबीन प्रक्रिया से होगा अंतिम चयन
प्राप्त आवेदनों की प्रामाणिकता की जांच के लिए एक मजबूत व्यवस्था बनाई गई है। सबसे पहले आवेदनों का तथ्यात्मक सत्यापन विकासखंड (ब्लॉक) स्तरीय छानबीन समिति करेगी। इसके बाद जिला स्तरीय छानबीन समिति द्वारा स्क्रीनिँग की जाएगी और अंत में राज्य स्तरीय जूरी द्वारा सर्वश्रेष्ठ किसान का अंतिम चयन किया जाएगा। जूरी का निर्णय अंतिम और सर्वमान्य होगा। योजना और नियमों से जुड़ी विस्तृत जानकारी के लिए किसान कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।
'इंटरनेशनल मून मिशन' के लिए रागनी साहू का राष्ट्रीय स्तर पर चयन
रायपुर, जुलाई 2026/ महासमुंद जिले सहित पूरे छत्तीसगढ़ के लिए यह एक अत्यंत गर्व और ऐतिहासिक क्षण है। शासकीय आशीबाई गोलछा कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, महासमुंद की होनहार छात्रा रागनी साहू का चयन अंतर्राष्ट्रीय चंद्र मिशन 'शक्तिसैट' (ShaktiSat) के लिए 'नेशनल फाइनलिस्ट' के रूप में हुआ है। इस प्रतिष्ठित वैश्विक अभियान की सूची में जगह बनाने वाली रागनी पूरे छत्तीसगढ़ राज्य से चुनी गईं इकलौती छात्रा हैं।
देशभर से चुनी गईं सिर्फ 20 प्रतिभाएं
इस वैश्विक अभियान के तहत पूरे भारत से कड़े राष्ट्रीय मूल्यांकन और साक्षात्कार (इंटरव्यू) के बाद 'केवल 20 राष्ट्रीय फाइनलिस्ट' का चयन किया गया है, जिसमें रागनी ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए अपना स्थान पक्का किया है। रागनी ने वर्ष 2025 में अपने स्कूल की अटल टिंकरिंग लैब के माध्यम से इस मिशन में पंजीयन कराया था। चयन प्रक्रिया के दौरान उन्होंने लगभग 120 घंटे की ऑनलाइन प्रशिक्षण श्रृंखला के अंतर्गत 21 विस्तृत मॉड्यूल तथा 550 से अधिक स्पेस, सैटेलाइट, विज्ञान, नवाचार (इन्नोवेशन) और इंजीनियरिंग आधारित लेसन सफलतापूर्वक पूरे किए।
108 देशों के छात्र मिलकर बनाएंगे चंद्र उपग्रह
'मिशन शक्तिसैट' एक अंतर्राष्ट्रीय चंद्र सैटेलाइट मिशन है, जिसमें भारत के अलावा अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, फ्रांस सहित विश्व के 108 देशों के छात्र-छात्राएं हिस्सा ले रहे हैं। इस ऐतिहासिक मिशन के अंतर्गत विद्यार्थियों द्वारा दो चंद्र उपग्रह (Moon Satellites) विकसित किए जाएंगे। इनमें से एक उपग्रह चंद्रमा की कक्षा (Orbit) में स्थापित होकर परिक्रमा करेगा। दूसरा रोवर चंद्रमा की सतह (Surface) पर उतरकर वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम देगा।
इसरो (ISRO) द्वारा 11 अक्टूबर को श्रीहरिकोटा से लॉन्चिंग
विद्यार्थियों द्वारा विकसित किए जा रहे इन उपग्रहों का प्रक्षेपण 11 अक्टूबर 2026 (अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस) के अवसर पर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से इसरो (ISRO) द्वारा किया जाएगा। इससे पहले, रागनी साहू 22 अगस्त से 31 अगस्त 2026 तक गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश) में आयोजित होने वाली 8 दिवसीय नेशनल वर्कशॉप में भाग लेंगी। इस कार्यशाला का औपचारिक शुभारंभ 23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के मौके पर होगा। यहाँ रागनी को इसरो व IN-SPACe के वैज्ञानिकों, भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला और वैश्विक अंतरिक्ष विशेषज्ञों से सीधा संवाद और मार्गदर्शन प्राप्त करने का ऐतिहासिक अवसर मिलेगा।
नीति आयोग से सम्बद्ध है मिशन
यह मिशन अटल इनोवेशन मिशन, नीति आयोग से सम्बद्ध है। इस वैश्विक पहल का संचालन 'स्पेस किड्ज इंडिया' की संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. श्रीमती केसन के नेतृत्व में किया जा रहा है, जबकि विंग कमांडर जाया तारे (रिटायर्ड) इस मिशन की भारत की राष्ट्रीय राजदूत हैं।
कलेक्टर और शिक्षा अधिकारियों ने दी बधाई
इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर महासमुंद कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह ने छात्रा रागनी साहू को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय स्कूल के प्राचार्य जी.आर. सिन्हा तथा अटल टिंकरिंग लैब के प्रभारी चंद्रशेखर मिथलेश के सतत मार्गदर्शन को दिया। जिला शिक्षा अधिकारी बी.एल. देवांगन एवं जिला मिशन समन्वयक रेखराज शर्मा ने भी रागनी को इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के लिए शुभकामनाएं दी हैं।
रायपुर में 250 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के लिए ₹175 करोड़ की अतिरिक्त होमिंग सुविधा परियोजना को बताया छत्तीसगढ़ में रेल विकास की बड़ी उपलब्धि
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने रेल परियोजना के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव के प्रति किया आभार व्यक्त
रायपुर, जुलाई 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने रायपुर में 250 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के लिए अतिरिक्त होमिंग सुविधाओं के निर्माण हेतु ₹175 करोड़ की परियोजना को स्वीकृति प्रदान किए जाने पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि डबल इंजन सरकार के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में रेलवे अधोसंरचना अभूतपूर्व गति से सशक्त हो रही है। केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत यह परियोजना राज्य के रेल नेटवर्क को और अधिक सक्षम एवं आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना से रायपुर में इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के रखरखाव की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। साथ ही माल एवं यात्री परिवहन की दक्षता बढ़ेगी और रेलवे परिचालन को अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी। इससे भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप रेलवे अधोसंरचना को भी मजबूती मिलेगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि यह परियोजना छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख रेल, औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक्स हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी तथा विकसित भारत 2047 के संकल्प के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को नई गति प्रदान करेगी।
उर्वरकों और प्रमाणित बीजों का पर्याप्त भंडारण, कृषि एवं सहकारिता विभाग की समन्वित व्यवस्था से किसानों को हो रही निर्बाध आपूर्ति
रायपुर, जुलाई 2026। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों को समय पर कृषि आदान उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार प्रभावी पहल कर रही है। खरीफ वर्ष 2026 के दौरान किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए कृषि विभाग एवं सहकारिता तंत्र के माध्यम से प्रदेशभर में बीज और उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। इसी क्रम में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में भी किसानों को समय पर प्रमाणित बीज एवं उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए समुचित भंडारण, सतत निगरानी तथा सुव्यवस्थित वितरण व्यवस्था की गई है, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई का कार्य सुचारु रूप से आगे बढ़ रहा है।
कृषि विभाग द्वारा जिले में उर्वरकों की उपलब्धता पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है तथा आवश्यकता के अनुरूप भंडारण एवं वितरण सुनिश्चित किया जा रहा है। सहकारी समितियों एवं अधिकृत विक्रेताओं के माध्यम से किसानों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उर्वरकों की आपूर्ति की जा रही है। जिले में अब तक 5,201.42 टन उर्वरक का भंडारण किया गया है। इनमें से 2,800.87 टन उर्वरक किसानों को वितरित किया जा चुका है, जबकि 2,400.56 टन उर्वरक का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। उल्लेखनीय है कि गत वर्ष जिले को कुल 4,214.115 टन उर्वरक प्राप्त हुआ था, जबकि इस वर्ष आवश्यकता के अनुरूप अधिक भंडारण सुनिश्चित कर किसानों की मांग को प्राथमिकता दी गई है।
इसी प्रकार खरीफ वर्ष 2026 के लिए गुणवत्तायुक्त एवं प्रमाणित बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु कृषि विभाग द्वारा व्यापक तैयारियां की गई हैं। सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को समय पर बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे बुवाई का कार्य बिना किसी व्यवधान के संचालित हो रहा है। जिले में वर्तमान में 4,656.50 क्विंटल प्रमाणित बीज उपलब्ध हैं। इनमें से 3,649.42 क्विंटल बीज किसानों को वितरित किए जा चुके हैं, जबकि 1,007.08 क्विंटल बीज का सुरक्षित भंडार अभी भी उपलब्ध है। कृषि विभाग द्वारा बीजों की उपलब्धता एवं वितरण की नियमित समीक्षा की जा रही है, ताकि जिले के किसी भी किसान को बीज की कमी का सामना न करना पड़े।
राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि किसानों को खेती के प्रत्येक चरण में आवश्यक संसाधन समय पर उपलब्ध हों। इसी उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा बीजों की गुणवत्ता, उपलब्धता और वितरण की नियमित निगरानी की जा रही है, वहीं सहकारिता विभाग एवं सहकारी समितियों के माध्यम से उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। दोनों विभागों के समन्वित प्रयासों से किसानों को खरीफ मौसम में आवश्यक कृषि आदान समय पर उपलब्ध हो रहे हैं, जिससे खेती की तैयारियां गति पकड़ रही हैं।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, उत्पादन लागत कम करने तथा कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। गुणवत्तायुक्त बीज, पर्याप्त उर्वरक, समयबद्ध वितरण व्यवस्था तथा कृषि सेवाओं की सुलभ उपलब्धता राज्य सरकार की किसान हितैषी नीतियों का परिणाम है। इन प्रयासों से किसानों का विश्वास बढ़ा है और प्रदेश में कृषि उत्पादन को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत सहकारी समितियों एवं अधिकृत विक्रय केंद्रों से ही प्रमाणित बीज एवं उर्वरक प्राप्त करें। साथ ही वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाते हुए समय पर खरीफ फसलों की बुवाई पूर्ण करें, ताकि बेहतर उत्पादन एवं अधिक आय प्राप्त की जा सके। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि आवश्यकता के अनुसार बीज एवं उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भंडारण एवं वितरण व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और किसी भी स्तर पर कमी नहीं आने दी जाएगी।
कृषि विश्वविद्यालय में उपलब्ध अधोसंरचनाओं तथा अनुसंधान एवं विस्तार गतिविधियों का जायजा लिया
रायपुर, जुलाई 2026/कृषि उत्पादन आयुक्त श्री सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने आज यहां इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में उपलब्ध शिक्षण, अनुसंधान एवं विस्तार अधोसंरचनाओं, सुविधाओं तथा गतिविधियों का जायजा लिया। इस दौरान कृषि उत्पादन आयुक्त ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर की अनुसंधान प्रयोगशालाओं, कृषि अनुसंधान परियोजनाओं, एवं इन्क्यूबेशन सुविधाओं का अवलोकन भी किया।
इस अवसर पर संचालक कृषि श्री राहुल देव भी उनके साथ मौजूद थे। श्री परदेशी ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा कृषि एवं किसानों की समृद्धि के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य शासन द्वारा कृषि विश्वविद्यालय के विकास के लिए हर संभव सहयोग प्रदान किया जाएगा। गौरतलब है कि श्री परदेशी के कृषि उत्पादन आयुक्त का दायित्व संभालने के पश्चात कृषि विश्वविद्यालय में यह उनका पहला दौरा था।
कृषि उत्पादन आयुक्त श्री परदेशी ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय स्थित विभिन्न अधोसंरचनाओं, सुविधाओं, अनुसंधान योजनाओं एवं गतिविधियों का अवलोकन किया। उन्होंने विश्वविद्यालय के अनुसंधान प्रक्षेत्र में लगाई गई औषधीय एवं सगंध फसलों का अवलोकन किया तथा इसमें गहरी रूचि दिखाई। उन्होंने टिशू कल्चर लैब में केला, गन्ना, बांस आदि फसलों के ऊतक प्रवर्धित पौधों में भी रूचि दर्शायी। उन्होंने कृषि संग्रहालय में प्रदर्शित प्रारूपों का भी अवलोकन किया। श्री परदेशी ने कृषि विश्वविद्यालय परिसर में भारत सरकार द्वारा स्थापित आधुनिक मौसम वेधशाला का भी अवलोकन किया तथा इसके बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने वहां कृषि संग्रहालय तथा विश्वविद्यालय द्वारा निर्मित उत्पादों के विक्रय हेतु स्थापित विक्रय केन्द्र का भी अवलोकन किया।
कृषि उत्पादन आयुक्त ने डाॅ. आर. एल. रिछारिया जैव प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला तथा बायोटेक पार्क का भी अवलोकन किया और वहां संचालित गतिविधियों का जायजा लिया। उन्होंने वहां भारत के सबसे बड़े तथा विश्व के दूसरे सबसे बड़े धान जनन द्रव्य संग्रह का अवलोकन किया। कुलपति डाॅ. गिरीश चंदेल ने उन्हें बताया कि इस जर्मप्लाजम सेन्टर में चावल की 23 हजार 250 परंपरागत किस्मों के जनन द्रव्य को संग्रहित तथा संरक्षित किया गया है। इनमें से कई किस्में औषधीय तथा पोषक गुणों से भरपूर हैं। इन किस्मों का उपयोग धान की नई उन्नत किस्मों के विकास के लिए किया जा रहा है। इसके साथ ही यहां अन्य फसलों की 6 हजार से अधिक किस्मों का संरक्षण किया जा रहा है। उन्होंने क्रॉप बायोफोर्टिफिकेशन लैब के अवलोकन के दौरान संजीवनी राइस, जिंको राइस, न्यूट्री रिच राइस जीनोटाइप सहित बम्बू टिश्यू कल्चर को लेकर किए जा रहे नए प्रयोगों को देखा। उन्होंने वहां स्थापित फाइटोसेनेटरी लैब का भी अवलोकन किया।
इसके पूर्व इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में आयोजित बैठक में कुलपति डाॅ गिरीश चंदेल ने एक प्रस्तुतिकरण के माध्यम से कृषि उत्पादन आयुक्त के कृषि विश्वविद्यालय के विभिन्न घटकों, अधोसंरचनाओं, शिक्षण, अनुसंधान एवं विस्तार गतिविधियों के बारे में अवगत कराया। उन्होंने किसानों की बेहतरी हेतु विश्वविद्यालय द्वारा किए जा रहे प्रयासों की भी जानकारी दी। बैठक में कुलसचिव, संचालक अनुसंधान, निदेशक शिक्षण, निदेशक विस्तार सेवांए, अधिष्ठाता छात्र कल्याण सहित विभिन्न महाविद्यालयों के अधिष्ठाता एवं विभागाध्यक्ष उपस्थित थे।
शाला प्रवेश उत्सव में नवप्रवेशी विद्यार्थियों का किया आत्मीय स्वागत, अध्ययन सामग्री वितरित कर
उज्ज्वल भविष्य की दी शुभकामनाएं, छात्राओं को साइकिल भेंट कर बढ़ाया उत्साह
रायपुर, जुलाई 2026। पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मस्व मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने आज सरगुजा जिले के पी. एम. श्री स्वामी आत्मानन्द शासकीय अंग्रेजी विद्यालय, लखनपुर तथा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, मेण्ड्राकला में आयोजित शाला प्रवेश उत्सव में शामिल होकर नवप्रवेशी विद्यार्थियों का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने विद्यार्थियों को मिठाई खिलाकर, अध्ययन सामग्री वितरित कर तथा उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए नवीन शैक्षणिक सत्र के सफल एवं प्रेरणादायी होने की मंगलकामना की।
मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि शिक्षा ही विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत नींव है। प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर संसाधन और प्रेरणादायी वातावरण उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। आज का विद्यार्थी ही कल के सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माता बनेगा।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार शिक्षा के क्षेत्र में लगातार नवाचार और गुणवत्तापूर्ण सुविधाओं का विस्तार कर रही है, ताकि प्रदेश का प्रत्येक विद्यार्थी अपनी प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़ सके। उन्होंने विद्यार्थियों से नियमित अध्ययन, अनुशासन, परिश्रम और संस्कारों को जीवन का आधार बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है, जो व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करती है।
पी. एम. श्री स्वामी आत्मानन्द शासकीय अंग्रेजी विद्यालय, लखनपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया तथा उन्हें मन लगाकर अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने शिक्षकों और अभिभावकों से भी बच्चों के सर्वांगीण विकास में सक्रिय सहभागिता निभाने का आग्रह किया।
इसके पश्चात शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मेण्ड्राकला में आयोजित शाला प्रवेश उत्सव में मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने छात्राओं को साइकिल वितरित कर उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि साइकिल वितरण जैसी योजनाएं बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ उन्हें आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने नवप्रवेशी विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री भेंट कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने अवलोकन किया और उनकी प्रतिभा की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ खेल, संस्कृति और रचनात्मक गतिविधियां विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती है।
मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने विद्यालय परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। उन्होंने सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों एवं नागरिकों से अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने तथा पौधों के संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान करते हुए कहा कि स्वच्छ और हरित पर्यावरण भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की आधारशिला है।
कार्यक्रम के अंत में मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अभिभावकों को नवीन शैक्षणिक सत्र के लिए हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि सभी विद्यार्थी परिश्रम, अनुशासन और लगन के बल पर शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेंगे तथा प्रदेश और देश का नाम रोशन करेंगे। इस अवसर पर जनप्रतिनिधिगण, शिक्षकगण, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
रायपुर, जुलाई 2026/ इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के वैज्ञानिकों ने प्रदेश के गन्ना उत्पादक किसानों को फसल सुरक्षा और बेहतर उत्पादन का लाभ दिलाने के लिए राज्य स्तरीय मौसम आधारित विशेष कृषि निर्देशिका जारी की है। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने वर्तमान में गन्ने की वृद्धि काल अवस्था (ग्रोथ स्टेज) को देखते हुए किसानों को हानिकारक कीटों के नियंत्रण और प्रबंधन के लिए विशेष सलाह दी है। वैज्ञानिकों ने मौसम को ध्यान में रखते हुए गन्ना उत्पादकों को खेतों में कीटनाशक दवाई का छिड़काव केवल मौसम साफ रहने पर ही, सुबह या शाम के समय करने को कहा है।
कृषि वैज्ञानिकों ने फसल को होने वाले नुकसान के प्रति सचेत करते हुए बताया कि इस अवस्था में गन्ने की फसल पर सफेद मक्खी (व्हाइट फ्लाई) का आक्रमण होने की आशंका बढ़ जाती है। इस कीट के शिशु और प्रौढ़ दोनों ही अवस्थाओं में गन्ने की पत्तियों का रस चूसते हैं, जिससे पौधों की सामान्य वृद्धि पूरी तरह रुक जाती है। पत्तियों का रस चूसे जाने के कारण गन्ने में शर्करा (शक्कर) का प्रतिशत भी काफी घट जाता है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
इस नुकसानदायक कीट से गन्ने की फसल को सुरक्षित रखने के लिए विश्वविद्यालय द्वारा पुख्ता वैज्ञानिक उपाय सुझाए गए हैं। जारी निर्देशिका के अनुसार, सफेद मक्खी के प्रभावी नियंत्रण के लिए किसानों को फेनिट्रोथियान 50 ईसी की 2 लीटर मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से 15 दिनों के अंतराल में छिड़काव करने के निर्देश दिए गए हैं।
रायपुर, जुलाई 2026/ छत्तीसगढ़ के किसानों को मक्का की फसल से ज्यादा से ज्यादा पैदावार दिलाने और उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के लिए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर द्वारा राज्य स्तरीय कृषि निर्देशिका जारी की गई है। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने प्रदेश के वर्तमान मौसम को देखते हुए किसानों को सही समय पर और वैज्ञानिक पद्धति से बोनी कार्य पूर्ण करने की सलाह दी है। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार अनुकूल मौसम को देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने कृषकों को तत्काल खेतों में मक्का की सीधी बुवाई और कतार बोनी का कार्य शुरू करने की सलाह दी है।
वैज्ञानिकों ने उन्नत और समृद्ध खेती के तकनीकों को साझा करते हुए कहा है कि मक्का की भरपूर फसल के लिए संकर जातियों के बीज की दर 15 से 20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तथा संयुक्त/संकुल किस्मों के लिए 20 से 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रखना सबसे उपयुक्त होता है। बेहतर फसल प्रबंधन के लिए बुवाई हमेशा कतारों (पंक्तियों) में ही की जानी चाहिए, जिसमें सामान्यतः कतार से कतार की दूरी 60 से 75 सेंटीमीटर तथा पौधे से पौधे की दूरी 20 से 25 सेंटीमीटर होना अनिवार्य है। इसके साथ ही, मध्यम एवं देर से पकने वाली विशेष किस्मों के लिए वैज्ञानिकों ने 75ग25 सेंटीमीटर (कतार से कतार व पौधे से पौधे) के अंतर पर बुवाई करने का निर्देश दिया है।
इसके अलावा, भूमि की सेहत और पौधों के समुचित पोषण व बेहतर उत्पादन के लिए विश्वविद्यालय ने संतुलित उर्वरक मात्रा की अनुशंसा की है। वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को प्रति हेक्टेयर 80 से 120 किलोग्राम नत्रजन (नाइट्रोजन), 50 से 75 किलोग्राम स्फुर (फास्फोरस) तथा 30 से 50 किलोग्राम पोटाश की निर्धारित दर से ही खाद का प्रयोग करना चाहिए। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने समय पर सही बुवाई, बेहतर उत्पादन हमारी जिम्मेदारीश् के संदेश के साथ प्रदेश के समस्त किसानों से अपील की है कि वे इस वैज्ञानिक मार्गदर्शन और मौसम आधारित सलाह को अनिवार्य रूप से अपनाएं, ताकि कृषि लागत में कमी आए, उत्पादन में वृद्धि हो और उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ बन सके।