ईश्वर दुबे
संपादक - न्यूज़ क्रिएशन
+91 98278-13148
newscreation2017@gmail.com
Shop No f188 first floor akash ganga press complex
Bhilai
Google Analytics —— Meta Pixel
मुख्यमंत्री श्री साय ने अजीम प्रेमजी फाउंडेशन को सौंपी भूमि आबंटन आदेश की प्रति
गरीब और आदिवासी परिवारों को निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
सुशासन तिहार के दौरान वनांचल क्षेत्र के विकास और स्वास्थ्य सेवाओं को मिली नई गति
रायपुर 17 मई 2026। रायगढ़ जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र धरमजयगढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम गंवरघुटरी अब स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाने जा रहा है। प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की संवेदनशील पहल और राज्य शासन की जनकल्याणकारी सोच के परिणामस्वरूप यहां 100 बिस्तरों वाला अत्याधुनिक बहुउद्देशीय अस्पताल स्थापित किया जाएगा। इस अस्पताल के निर्माण से धरमजयगढ़ सहित आसपास के वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले हजारों ग्रामीणों, विशेष रूप से आदिवासी और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।
छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार ग्राम गंवरघुटरी, तहसील धरमजयगढ़ की 2 हेक्टेयर भूमि 30 वर्ष की अस्थायी लीज पर अजीम प्रेमजी फाउंडेशन को आबंटित की गई है। इस भूमि पर फाउंडेशन द्वारा गरीबों और जरूरतमंद लोगों के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 100 बिस्तरों का अस्पताल बनाया जाएगा।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय शनिवार को प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार के तहत रायगढ़ जिले के दौरे पर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने बिलासपुर संभाग के जांजगीर-चांपा, कोरबा और रायगढ़ जिलों की समीक्षा बैठक ली। समीक्षा बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने अजीम प्रेमजी फाउंडेशन को भूमि आबंटन आदेश की प्रति सौंपते हुए कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य अंतिम व्यक्ति तक विकास और मूलभूत सुविधाएं पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना शासन की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री श्री साय के साथ प्रदेश के वित्तमंत्री श्री ओपी चौधरी, सांसद श्री राधेश्याम राठिया, राज्यसभा सांसद श्री देवेंद्र प्रताप सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि विशेष तौर पर उपस्थित थे।
उल्लखेनीय है कि यह अस्पताल क्षेत्र के लोगों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं का एक बड़ा केंद्र बनेगा। वर्तमान में धरमजयगढ़ और आसपास के कई ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को गंभीर बीमारी या विशेष उपचार के लिए रायगढ़, बिलासपुर अथवा अन्य बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है। इससे समय और आर्थिक दोनों प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। अस्पताल बनने के बाद स्थानीय स्तर पर बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे ग्रामीणों को त्वरित उपचार मिल सकेगा। अस्पताल में सामान्य चिकित्सा, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं, आपातकालीन उपचार, जांच सुविधाएं तथा अन्य आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध रहेगी। इससे वनांचल क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर मजबूत होगा और ग्रामीणों को गुणवत्तापूर्ण इलाज के लिए दूर-दराज नहीं जाना पड़ेगा।
अस्पताल का संचालन गरीबों के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया जाएगा। शासन द्वारा निर्धारित शर्तों के अनुसार भूमि का उपयोग केवल अस्पताल एवं स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित कार्यों के लिए ही किया जा सकेगा। साथ ही पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, जल एवं वायु प्रदूषण नियंत्रण संबंधी नियमों तथा अन्य वैधानिक प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य होगा। शासन द्वारा यह भी सुनिश्चित किया गया है कि भूमि का उपयोग केवल निर्धारित उद्देश्य के लिए ही किया जाए तथा समय-समय पर प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा इसका निरीक्षण किया जाता रहे।
राज्य शासन के इस फैसले का वनांचल क्षेत्र के ग्रामीणों ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे स्वास्थ्य सुविधाओं की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि अस्पताल निर्माण से न केवल बेहतर उपचार सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि क्षेत्र में रोजगार और अन्य सामाजिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai praises field teams, seeks faster progress in urban areas
Raipur, May 17, 2026/ Preparations for Census 2027 are progressing rapidly across Chhattisgarh, with more than 60 percent of the house-listing work already completed across the state.
According to the latest official progress report, 29,602 out of 48,742 House Listing Blocks (HLBs) have been completed so far, taking the overall progress to 60.73 per cent. The work is being carried out through digital monitoring and verification systems across districts and urban local bodies.
Accurate Census key to targeted welfare delivery: Chief Minister
Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai expressed satisfaction over the progress and congratulated enumerators and district administrations, particularly the Gauurela-Pendra-Marwahi (GPM) district administration, which achieved 100 per cent completion.
He said accurate census data will form the foundation for future development planning, welfare schemes and policy decisions in the state.
“Our government is moving forward with the commitment of good governance and inclusive development. Completing Census 2027 work within timelines through digital technology is commendable,” Chief Minister said.
He also expressed concern over slow progress in several major cities and municipal corporation areas and directed officials to strengthen field-level monitoring and accelerate the work.
Several districts near finish line, GPM emerges top performer
Among all districts, tribal-dominated Gaurela-Pendra-Marwahi emerged as the top performer by completing all 528 House Listing Blocks. Jashpur followed closely with 99.87 percent completion, while Mohla-Manpur-Ambagarh Chowki recorded 99.84 percent progress. Bemetara and Mungeli districts also reported near-completion levels at 97.8 percent and 96.52 percent respectively.
Commending the district’s performance and ‘zero pendency’ model, GPM Collector Dr Santosh Kumar Dewangan credited the achievement to coordinated efforts by enumerators, supervisors and the district administration. Despite difficult terrain and tribal-dominated geography, the district adopted a micro-planning approach with daily digital monitoring of every charge number. Soon after the data was synced on the portal at midnight on May 17, we achieved 100 percent completion. We are now fully prepared for the next phase of training and field verification,” he said.
Major cities struggle to match pace of rural districts
While rural and remote districts reported strong performance, progress in major urban centres and municipal corporation areas remained significantly slower.
Raigarh Municipal Corporation recorded the lowest progress at 4.65 percent. Industrial township Bhilai Nagar reported only 7.84 percent completion, while Risali stood at 8.33 percent. In the State capital Raipur, only 203 out of 1,964 House Listing Blocks have been completed so far, taking overall progress to 10.34 percent.
However, a major relief for the administration is that the number of “HLBs Not Started” stands at zero in most districts, indicating that field-level teams are fully active across the State. Except for one remaining block in Kabirdham district, work has commenced everywhere.
Senior officials said municipal commissioners and district collectors have been directed to appoint special nodal officers to ensure that all pending “in progress” works are completed at the earliest.
छत्तीसगढ़ में 60% से अधिक मकान सूचीकरण का कार्य पूरा
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) ने रचा इतिहास, 100% लक्ष्य हासिल कर राज्य में बना नंबर-1 जिला
मुख्यमंत्री ने मैदानी टीमों को दी बधाई; बड़े शहरों और नगर निगमों के सुस्त प्रदर्शन पर जताई चिंता, गति बढ़ाने के दिए कड़े निर्देश
रायपुर, 17 मई 2026/छत्तीसगढ़ में आगामी राष्ट्रीय जनगणना 2027 को लेकर प्रशासनिक तैयारियां युद्ध स्तर पर चल रही हैं। राज्य के सभी जिलों और नगर निगमों में मकान सूचीकरण ब्लॉकों (HLB) के गठन और सत्यापन का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। हाल ही में जारी आधिकारिक प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में अब तक कुल 60.73% कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। इस महाअभियान में डिजिटल टेक्नोलॉजी के सटीक समन्वय से कुल 48,742 ब्लॉकों में से 29,602 ब्लॉकों का कार्य पूर्ण हो चुका है।
सटीक जनगणना से ही हर गरीब तक पहुंचेगा सुशासन —मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
राज्य की इस प्रगति पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने संतोष व्यक्त करते हुए गौरेला- पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिला प्रशासन और प्रदेश भर के प्रगणकों को बधाई दी है। उन्होंने कहा, "हमारी सरकार 'सबका साथ, सबका विकास' और सुशासन के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। आगामी जनगणना 2027 के ये आंकड़े भविष्य में छत्तीसगढ़ के विकास, जनकल्याणकारी योजनाओं और नीति निर्धारण की मजबूत बुनियाद बनेंगे। डिजिटल तकनीकों का उपयोग कर समय-सीमा में कार्य पूर्ण करना सराहनीय है। जिन बड़े शहरों या नगर निगमों में गति धीमी है, वहां के अधिकारी मैदानी मॉनिटरिंग बढ़ाएं और जल्द से जल्द इस राष्ट्रीय महत्व के कार्य को गति दें।
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही ने मारी बाजी, कई जिले शत-प्रतिशत के करीब
राज्य स्तर पर जिलों के प्रदर्शन को देखा जाए तो आदिवासी बहुल गौरेला-पेंड्रा- मरवाही (GPM) जिला सूची में शीर्ष पर है, जिसने अपने सभी 528 मकान सूचीकरण ब्लॉकों का कार्य 100% पूरा कर लिया है। इसके बाद जशपुर (99.87%) और मोहला- मानपुर-अंबागढ़ चौकी (99.84%) जिले भी पूर्णता के बेहद करीब हैं। इसके अलावा बेमेतरा (97.8%) और मुंगेली (96.52%) जिलों में भी काम लगभग खत्म होने की कगार पर है।
कलेक्टर की रणनीति आई काम
GPM जिले के इस शानदार प्रदर्शन और 'शून्य पेंडेंसी' के मॉडल पर कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने अपनी टीम की पीठ थपथपाते हुए कहा कि यह सफलता हमारे स्थानीय प्रगणकों (Enumerators), पर्यवेक्षकों (Supervisors) और जिला प्रशासन की बेहतरीन टीम भावना का परिणाम है। भौगोलिक रूप से दुर्गम और आदिवासी बहुल क्षेत्र होने के बावजूद हमने माइक्रो-प्लानिंग के तहत काम किया। हर चार्ज नंबर की रोजाना डिजिटल मॉनिटरिंग की गई, जिससे 17 मई की मध्यरात्रि को डेटा पोर्टल पर सिंक होते ही हमने 100% पूर्णता का लक्ष्य हासिल कर लिया। अब हम अगले चरण के प्रशिक्षण और मैदानी सत्यापन के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
बड़े शहरों और नगर निगमों की रफ्तार सुस्त, रायपुर-भिलाई पिछड़े
एक तरफ जहां ग्रामीण और दूरस्थ जिलों ने बाजी मारी है, वहीं राज्य के बड़े शहरों और नगर निगम (Municipal Corporation) क्षेत्रों में काम की रफ्तार चिंताजनक रूप से धीमी दर्ज की गई है। रायगढ़ नगर निगम सूची में सबसे निचले पायदान पर है, जहां महज 4.65% काम ही पूरा हो सका है। औद्योगिक हब भिलाई नगर में केवल 7.84% और रिसाली में 8.33% कार्य ही संपन्न हुआ है। राजधानी रायपुर की बात करें तो यहां कुल 1,964 ब्लॉकों में से केवल 203 ही पूरे हो पाए हैं, जो कि कुल लक्ष्य का मात्र 10.34% है।
प्रशासनिक मुस्तैदी का असर
राहत की बात यह है कि राज्य के अधिकांश जिलों में 'HLBs Not Started' (कार्य शुरू नहीं हुआ) का आंकड़ा शून्य है। इसका साफ मतलब है कि मैदानी स्तर पर प्रशासनिक अमला पूरी तरह सक्रिय है। कबीरधाम के महज 1 ब्लॉक को छोड़कर हर जगह काम शुरू हो चुका है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि बचे हुए 'प्रगति पर' (In Progress) कार्यों को भी जल्द से जल्द पूरा करने के लिए नगर निगम आयुक्तों और जिला कलेक्टर्स को विशेष नोडल अधिकारी तैनात करने के निर्देश दिए गए हैं।
न्याय व्यवस्था के डिजिटली सशक्त होने से आम नागरिकों को मिलेगा त्वरित न्याय : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
नागरिकों की सुविधा के लिए राज्य सरकार कर रही डिजिटल व्यवस्था का निरंतर विस्तार
ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ जस्टिस की ओर तेजी से बढ़ रहा है मध्यप्रदेश : केन्द्रीय राज्यमंत्री श्री अर्जुन मेघवाल
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने लाईव वीडियो स्ट्रीमिंग के लिए कोर्टरूम लाइव ऑडियो-विजुअल स्ट्रीमिंग सिस्टम CLASS तथा डिजिटल डेटा मैनेजमेंट सिस्टम प्रथम किया लॉन्च
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का नया पोर्टल लोकार्पित
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने फ्रेगमेंटेशन ऑफ फ्यूजन: एम्पावरिंग जस्टिस वाया-यूनाइटेड डिजिटल प्लेटफार्म इंटीग्रेशन कार्यक्रम का किया शुभारंभ
प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में देश बढ़ रहा स्वर्णिम युग की ओर: मुख्यमंत्री डॉ. यादव
सुशासन तिहार बना त्वरित समाधान और जवाबदेह प्रशासन का प्रभावी माध्यम: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय
रायगढ़ में मुख्यमंत्री ने रायगढ़, कोरबा और जांजगीर-चांपा जिलों की ली संयुक्त समीक्षा बैठक
राजस्व प्रकरणों के शीघ्र निराकरण, पेयजल, स्वास्थ्य एवं खरीफ तैयारी पर दिए विशेष निर्देश
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन जल्द होगी शुरू, नागरिकों की शिकायतों का होगा समयबद्ध समाधान
रायपुर /मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सुशासन तिहार के अंतर्गत रायगढ़ जिला कार्यालय के सृजन सभाकक्ष में रायगढ़, कोरबा एवं जांजगीर-चांपा जिले के अधिकारियों की संयुक्त समीक्षा बैठक लेकर विकास कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की विस्तार से समीक्षा की। बैठक में मुख्यमंत्री श्री साय ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी और समयबद्ध ढंग से पहुंचे तथा आमजन की समस्याओं के निराकरण में किसी प्रकार की लापरवाही न हो।
बैठक में वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी, सांसद श्री राधेश्याम राठिया, राज्यसभा सांसद श्री देवेंद्र प्रताप सिंह, विधायक श्री लालजीत सिंह राठिया, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती शिखा रविंद्र गवेल, महापौर श्री जीवर्धन चौहान, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, विशेष सचिव श्री रजत बंसल सहित जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार का सकारात्मक प्रभाव अब गांव-गांव और शहरों तक दिखाई दे रहा है। शासन और प्रशासन सीधे जनता के बीच पहुंचकर समस्याओं का समाधान कर रहे हैं, जिससे लोगों का विश्वास और मजबूत हुआ है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि हम सभी जनता के सेवक हैं और आम नागरिकों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने राजस्व प्रकरणों की विशेष समीक्षा करते हुए समयसीमा से बाहर एवं एक वर्ष से अधिक लंबित मामलों के त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राजस्व से जुड़े छोटे-छोटे मामले सीधे आम नागरिकों के जीवन और आजीविका को प्रभावित करते हैं, इसलिए इनके निराकरण में संवेदनशीलता और गंभीरता आवश्यक है। मुख्यमंत्री श्री साय ने राजस्व अभिलेखों की त्रुटियों को शीघ्र सुधारने तथा जानबूझकर गलती करने वाले संबंधित कर्मचारियों एवं पटवारियों पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री श्री साय ने बैठक में बताया कि प्रदेश में शीघ्र ही मुख्यमंत्री हेल्पलाइन सेवा प्रारंभ की जाएगी। इसके माध्यम से नागरिक सीधे फोन अथवा ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकेंगे तथा शिकायतों के समयबद्ध निराकरण की सतत मॉनिटरिंग की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि शिकायतों के निराकरण में संवेदनशीलता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
ग्रीष्मकालीन परिस्थितियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने पेयजल व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गर्मी के दौरान किसी भी क्षेत्र में पेयजल संकट उत्पन्न न हो, यह सुनिश्चित किया जाए। साथ ही वर्षा ऋतु प्रारंभ होने के साथ संभावित मौसमी बीमारियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग को अग्रिम तैयारी रखने के निर्देश भी दिए।
बैठक में मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अपील के अनुरूप डीजल एवं पेट्रोल के विवेकपूर्ण उपयोग पर बल दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में पेट्रोल एवं डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है तथा नागरिकों को किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। मुख्यमंत्री ने हम सभी जनता के सेवक हैं और आम नागरिकों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी फैलाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए।
खरीफ सीजन की तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने खाद-बीज भंडारण एवं वितरण व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने कलेक्टरों को निर्देशित किया कि किसानों को समय पर खाद और बीज उपलब्ध हो तथा किसी प्रकार की परेशानी न हो। डीएपी की सीमित उपलब्धता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने किसानों को एसएसपी, यूरिया, नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी जैसे वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया।
Special Focus on Developing Mining-Affected Villages as Model Villages
Raipur,Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai chaired a review meeting during the Sushasan Tihar held in Raigarh on May 16. He issued important directions regarding the effective and speedy utilisation of District Mineral Foundation (DMF) funds in mining-affected districts such as Dantewada, Raigarh and Korba.
The Chief Minister stated that the number and scope of development works in these districts are continuously increasing, and the existing technical and engineering staff are not sufficient to meet the growing requirements. He directed the Public Works Department to constitute an additional section and ensure the availability of the required technical workforce.
Chief Minister Shri Sai stated that the utilisation of DMF funds should not be limited to construction works alone, but that their direct benefits must be visible to people living in mining-affected villages. He instructed officials to prioritise the development of villages affected by mining activities as “model villages.” He directed that better infrastructure and essential facilities, such as roads, drinking water, healthcare, education, sports facilities, community buildings, and other basic amenities, should be ensured in these villages.
The Chief Minister said that people living in mineral-rich regions should receive the first right to development benefits. He instructed officials to work with “sensitivity and accountability” and ensure quality, transparency and timely execution in the utilisation of DMF funds.
बस्तर के पहले आवासीय खेल अकादमी की तैयारी तेज, खेल संचालक ने तैयारियों का लिया जायजा
एथलेटिक्स, फुटबाॅल तथा आर्चरी का दिया जाएगा प्रशिक्षण, प्रवेश के लिए जल्द आयोजित किया जाएगा चयन ट्रायल
रायपुर. बस्तर के बच्चों की खेल प्रतिभा और कौशल को तराशने खेल एवं युवा कल्याण विभाग जगदलपुर में जल्द ही नई अकादमी खोलने जा रहा है। यह बस्तर अंचल का पहला आवासीय खेल अकादमी होगा। यहां बालकों को एथलेटिक्स, फुटबाॅल और आर्चरी का प्रशिक्षण दिया जाएगा। अकादमी में प्रवेश के लिए विभाग द्वारा जल्द ही चयन ट्रायल आयोजित किया जाएगा।
खेल एवं युवा कल्याण विभाग की संचालक श्रीमती तनुजा सलाम ने आज जगदलपुर पहुंचकर अकादमी शुरू करने की तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने बस्तर के खेल अधिकारियों से चर्चा कर मौजूदा अधोसंरचनाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने उपलब्ध आवास व्यवस्था, भोजन व्यवस्था, चयन ट्रायल की प्रक्रिया, विद्यालय सुविधा, वाहन व्यवस्था, खेल सामग्री तथा आवास सहित सभी मूलभूत सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने प्रस्तावित अकादमी भवन का अवलोकन कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को खिलाड़ियों के लिए बेहतर वातावरण एवं सुविधाएं उपलब्ध कराने आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
श्रीमती सलाम ने कहा कि बस्तर क्षेत्र में आवासीय खेल अकादमी प्रारंभ होने से स्थानीय प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण एवं सुविधाएं प्राप्त होंगी, जिससे क्षेत्र के खिलाड़ी राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे और पदक अर्जित कर सकेंगे। इस अकादमी से बस्तर के नैसर्गिक प्रतिभावान खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण, डाइट, आधुनिक उपकरण, आवास, शिक्षा, बीमा, किट, इलाज, उच्च स्तरीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी आदि की सुविधा खेल विभाग से मिलेगी।
खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा अकादमी में प्रवेश के लिए जल्द ही चयन ट्रायल विज्ञापन जारी किया जाएगा, जिसमें 13 वर्ष से 17 वर्ष आयु वर्ग के बालक खिलाड़ी भाग ले सकेंगे। एथलेटिक्स में 20, फुटबाॅल में 25 तथा आर्चरी में 20 खिलाड़ियों का चयन आवासीय अकादमी में प्रशिक्षण के लिए किया जाएगा।
खेल एवं युवा कल्याण विभाग की संचालक श्रीमती तनुजा सलाम ने खेलो इंडिया लघु केन्द्र पण्डरीपानी में संचालित हाॅकी सेंटर का भी दौरा किया। उन्होंने यहां छात्रावास भवन और जिम हाॅल का निरीक्षण कर केन्द्र में प्रशिक्षणरत खिलाड़ियों की संख्या और उपलब्ध खेल सामग्रियों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने खिलाड़ियों से मिलकर प्रशिक्षण और अन्य सुविधाओं का फीडबैक भी लिया।
सेहत के साथ युवाओं को मिल रही मुख्यधारा की रोशनी
जिला प्रशासन की अनूठी पहल से संवर रही जिंदगी
रायपुर, बीते पांच साल सुकमा निवासी 39 वर्षीय श्रीमती सीमा सिंह के लिए किसी दुःस्वप्न से कम नहीं थे। माइग्रेन के दर्द से तड़पती सीमा ने राहत की चाह में दूर-दूर के बड़े शहरों के चक्कर काटे, एलोपैथी की ढेरों दवाइयां खाईं, लेकिन बीमारी जस की तस रही। निराशा के इन बादलों के बीच उम्मीद की एक किरण तब जागी, जब वे बीते 4 मई को 'आयुष स्पेशलिटी क्लिनिक सुकमा' पहुँचीं। यहाँ अनुभवी चिकित्सक डॉ. मनोरंजन पात्रो की देखरेख में लगभग एक सप्ताह तक चले आयुर्वेदिक इलाज, सटीक दवाइयों और पंचकर्म की 'शिरोधारा' पद्धति के जादू ने कमाल कर दिया। वर्षों पुराना वह दर्द गायब हो गया जिसने उनकी रातों की नींद छीन रखी थी। दर्द से इस मुफ्ती ने सीमा के चेहरे पर मुस्कान लौटा दी है, जिसके लिए उन्होंने दिल से शासन-प्रशासन का आभार जताया है।
बदलती स्वास्थ्य व्यवस्था की सुखद तस्वीर
सीमा सिंह की यह मुस्कान सुकमा जिला प्रशासन के उन संजीदा प्रयासों का नतीजा है, जो दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को आम लोगों तक पहुँचाने के लिए किए जा रहे हैं। कलेक्टर श्री अमित कुमार के पदभार संभालते ही जिला आयुष चिकित्सालय की तस्वीर बदलने के प्रयास तेज कर दिए गए। अस्पताल में न केवल बुनियादी ढाँचे को मजबूत किया गया, बल्कि पारंपरिक और बेहद असरदार 'पंचकर्म' चिकित्सा की भी शुरुआत की गई। प्रशासन की इसी विशेष पहल का असर है कि आज यह अस्पताल रविवार को छोड़कर सप्ताह के छह दिन पूरी मुस्तैदी से काम कर रहा है, जहाँ हर दिन औसतन 14 से 15 मरीज डॉ. पात्रो की देखरेख में नया और स्वस्थ जीवन पा रहे हैं।
बंदूकों के साए से बाहर, मुख्यधारा का सहारा
कलेक्टर श्री अमित कुमार की यह मुहिम सिर्फ मरीजों को ठीक करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बेहद संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण भी छिपा है। जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ सुकमा के युवाओं के पुनर्वास की भी एक अनूठी मिसाल पेश की है। कलेक्टर की विशेष पहल पर दो आत्मसमर्पित युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ा गया और उन्हें इसी आयुष चिकित्सालय में 'कलेक्टर दर' पर सम्मानजनक रोजगार प्रदान किया गया। कभी गुमराह रहे इन युवाओं के हाथों को रोजगार देकर प्रशासन ने न सिर्फ उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा दी है, बल्कि जिले में शांति और विकास का एक नया अध्याय भी लिखा है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के सुशासन का सुकमा मॉडल
सुकमा का आयुष चिकित्सालय आज सिर्फ एक अस्पताल नहीं, बल्कि उम्मीद और पुनर्वास का एक जीवंत केंद्र बन चुका है। एक तरफ जहाँ असाध्य बीमारियों से जूझ रहे आम नागरिकों को सुकमा की वादियों में ही विश्वस्तरीय आयुर्वेदिक और पंचकर्म उपचार मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ भटके हुए युवाओं को रोजगार देकर देश की मुख्यधारा में वापस लाया जा रहा है। स्वास्थ्य क्रांति और सामाजिक सुधार के इस बेजोड़ संगम ने साबित कर दिया है कि अगर प्रशासनिक इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो नक्सल प्रभावित माने जाने वाले सुकमा जैसे दूरस्थ अंचलों में भी संवेदनशीलता और सुशासन की नई इबारत लिखी जा सकती है।