ईश्वर दुबे
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पटना। भाजपा के असंतुष्ट नेता शत्रुघ्न सिन्हा ने राफेल सौदे में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति गठित करने की शुक्रवार को वकालत की। गौरतलब है कि कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दल जेपीसी गठित करने की मांग कर रहे हैं।
सिन्हा ने ट्वीट कर कहा, ‘आज संसद का दृश्य लोगों के लिए बहुत जटिल था। दिन-ब-दिन यह खराब हो रहा है। जब हमारे पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है और हम दोषी नहीं हैं...लेकिन सच को दबाकर हम गरमागरम बहस और आरोप प्रत्यारोप तक ले जाकर मामलों को जटिल बना देते हैं।’
नयी दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने नरेन्द्र मोदी सरकार पर राफेल विमान सौदे को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता करने का शुक्रवार को आरोप लगाया और सवाल किया कि जब वायुसेना को 126 विमानों की जरूरत थी तो फिर 36 विमान ही क्यों खरीदे गए हैं। चिदंबरम ने ट्वीट कर कहा, 'आपने विमानों की संख्या 126 से घटाकर 36 क्यों की, इस सवाल पर रक्षा मंत्री का कहना है कि फ्लाईवे कंडीशन में आपको 18 विमान मिलते, लेकिन हमें 36 विमान मिलेंगे। क्या यह सवाल का जवाब है?'
उन्होंने पूछा कि वायु सेना कम से कम 7 स्क्वाड्रन (126 विमान) चाहती थी। यह संख्या रक्षा अधिग्रहण परिषद-डीएसी द्वारा बताई गई थी। क्या वायु सेना या डीएसी ने कभी यह संख्या कम करके 36 विमानों की आवश्यकता बताई? चिदंबरम ने कहा कि यदि भाजपा द्वारा तय की गई कीमत 9-20 प्रतिशत तक सस्ती थी, तो तार्किक रूप से सरकार को और अधिक विमान खरीदना चाहिए। तो कम संख्या में विमान क्यों खरीद रहें हैं?
पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि भाजपा का कहना है कि यह एक आपातकालीन खरीद थी। पेरिस में प्रधानमंत्री ने 10-4-2015 को बयान दिया था। इस बात को चार साल बीत चुके हैं आज तक भारत में एक भी विमान क्यों नहीं आया है? क्या है यह आपातकालीन खरीद? उन्होंने कहा कि जब वायु सेना की आवश्यकता 126 विमानों की है तब भाजपा सरकार ने केवल 36 विमान खरीद कर राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता किया है। 126 विमान खरीदने के लिए सरकार ने अनुबंध भी क्यों नहीं किया?
लखनऊ। कड़क छवि और ईमानदार चेहरा समझी जाने वाली आइएएस अधिकारी बी.चंद्रकला का क्या एक चेहरा और भी है,जिसमें उन्होंने कई राज छिपा रखे हैं। यह सवाल इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा उनके लखनऊ आवास पर छापा मारने के आदेश के बाद लोग एक−दूसरे से पूछ रहे हैं। आज सीबीआई की एक टीम ने लखनऊ में उनके आवास पर छापा मारा तो ब्यूरोके्रसी में हड़कम्प मच गया। छापे के समय चंद्रकला अपने आवास में नहीं थीं। बी. चंद्रकला मई 2018 में अपने मूल कॉडर यानी उत्तर प्रदेश लौटी थीं। बी. चंद्रकला मूलरूप से तेलंगाना के करीबमनगर की रहने वाली हैं और वो 2008 बैच की यूपी कैडर की आईएएस अधिकारी हैं। साल 2014 में उनका एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जब वो बुलंदशहर की डीएम थीं। उस वीडियो ने सोशल मीडिया पर सनसनी मचा दी थी।
2008 बैच की आइएएस अफसर बी चंद्रकला लखनऊ में हैवलॉक रोड पर सफायर अपार्टमेंट के फ्लैट में सीबीआइ की टीम ने हमीरपुर में उनके जिलाधिकारी रहते करोड़ों के खनन घोटाले के सिलसिले में छापा मारा है। कहा जा रहा है सीबीआई ने घर से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं। गौरतलब हो अखिलेश सरकार में चन्द्रकला हमीरपुर जिलाधिकारी के पद पर तैनात थी। आरोप है कि इस चन्द्रकला ने जुलाई 2012 के बाद हमीरपुर जिले में 50 मौरंग के खनन के पट्टे किए थे। ई−टेंडर के जरिए मौरंग के पट्टों पर स्वीकृति देने का प्रावधान था लेकिन बी. चन्द्रकला ने सारे प्रावधानों की अनदेखी की थी। वर्ष 2015 में अवैध रूप से जारी मौरंग खनन को लेकर हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने 16 अक्टूबर 2015 को हमीरपुर में जारी सभी 60 मौरंग खनन के पट्टे अवैध घोषित करते हुए रद कर दिए थे। सीबीआई ने खनन घोटाले मामले में बी चंद्रकला का घर खंगाला।
सीबीआइ ने खनन घोटाले के मामले में लखनऊ, कानपुर, हमीरपुर, जालौन, नोएडा और दिल्ली में 12 पर छापा मारा है। सीबीआइ ने जालौन के उरई में बालू घाट संचालकों के प्रतिष्ठानों पर छापा मारा है। इसके साथ ही सीबीआइ ने आज ही हमीरपुर में मौरंग के दो बड़े व्यवसायियों के घरों में छापा मारा। हमीरपुर में एमएलसी रमेश मिश्रा और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष संजीव दीक्षित के घरों में छापेमारी की गई है। इनसे सीबीआई बंद कमरे में पूछताछ कर रही है। मौरंग व्यवसायी के घरों में अलमारियों के ताले तोडने के साथ सीबीआइ सोफा व बेड को खोलकर तलाशी ली जा रही है। सीबीआई की 15 सदस्यीय टीम यहां पर कार्यवाही में जुटी है। दोनों ही व्यवसायी सपा सरकार में बडे पैमाने पर अवैध खनन में लिप्त थे।
नयी दिल्ली। दिल्ली की एक अदालत ने अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलिकॉप्टर घोटाला मामले में गिरफ्तार कथित बिचौलिया क्रिश्चियन मिशेल को शनिवार को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। मिशेल को विशेष न्यायाधीश अरविंद कुमार के समक्ष पेश किया गया। प्रवर्तन निदेशालय ने धन शोधन मामले में अपनी जांच के सिलसिले में उसकी न्यायिक हिरासत मांगी।
मिशेल को हाल में ही दुबई से प्रत्यर्पित किया गया था। उसे 22 दिसंबर को प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था और यहां की एक अदालत ने घोटाले में धन शोधन के आरोपों को लेकर उसे सात दिन के लिए जांच एजेंसी की हिरासत में भेज दिया था। मिशेल को इससे पहले इससे संबंधित सीबीआई के मामले में तिहाड़ जेल में रखा गया था।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के बहुप्रतीक्षित गठबंधन के लिये दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व ने ‘सैद्धांतिक सहमति‘ कर दी है और गठजोड़ का एलान बहुत जल्द होगा। सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजेन्द्र चैधरी ने ‘भाषा‘ को बताया कि आगामी लोकसभा चुनाव में गठबंधन को लेकर ‘सैद्धांतिक सहमति‘ बन चुकी है और उम्मीद है कि इस गठजोड़ की औपचारिक घोषणा जल्द होगी। सम्भावना है कि इसी महीने इसका एलान हो जाएगा। उन्होंने बताया कि गठबंधन को लेकर पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और बसपा प्रमुख मायावती के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है। कल भी दोनों नेताओं के बीच दिल्ली में मुलाकात हुई थी।
इस सवाल पर कि दोनों दलों के बीच उत्तर प्रदेश में सीटों के बंटवारे को लेकर क्या सहमति बनी है, सपा प्रवक्ता ने इसकी कोई जानकारी होने से इनकार किया लेकिन इतना कहा कि कुछ छोटे दलों को भी गठबंधन में शामिल करने के लिये बात हो रही है। उन्होंने स्वीकार किया कि गठबंधन में शामिल करने के लिये पश्चिमी उत्तर प्रदेश में असर रखने वाले राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) से भी बातचीत हो रही है। कांग्रेस को गठबंधन में शामिल किये जाने की सम्भावना पर चैधरी ने कहा कि इसका निर्णय तो अखिलेश और मायावती ही लेंगे। बहरहाल, कांग्रेस के शीर्ष नेताओं राहुल गांधी और सोनिया गांधी के लिये क्रमशः अमेठी और रायबरेली सीटें छोड़ी जाएंगी।
मालूम हो कि सपा और बसपा के बीच गठबंधन के बीज पिछले साल गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव के दौरान ही पड़ गये थे। इन दोनों सीटों पर बसपा ने सपा प्रत्याशियों को समर्थन दिया था और दोनों ही जगह उन्हें कामयाबी मिली थी। उसके बाद कैराना लोकसभा उपचुनाव में रालोद उम्मीदवार तबस्सुम हसन ने सपा के प्रत्यक्ष और बसपा के परोक्ष सहयोग से जीत हासिल की थी। सपा और बसपा को भरोसा है कि दोनों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने से वे उत्तर प्रदेश में भाजपा को परास्त कर सकती हैं। वैसे, तो पिछले साल हुए उपचुनावों के नतीजों से संकेत मिले थे कि सपा और बसपा उत्तर प्रदेश में गठबंधन करके चुनाव लड़ेंगी, मगर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव खासतौर पर इस गठबंधन के लिये इच्छुक लगे।
अखिलेश अक्सर अपने सम्बोधनों में बसपा के प्रति नरम रुख दिखाते रहे हैं। वह तो यहां तक कह चुके हैं कि अगर जरूरत पड़ी तो वह बसपा के लिये दो कदम पीछे हटने को भी तैयार हैं। उन्होंने हाल में गठबंधन के बारे में कहा था कि यह लोगों और विचारों का संगम होगा। वर्ष 2014 में ‘मोदी लहर‘ के बीच हुए लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में सपा का वोट प्रतिशत 22.35 था और उसे पांच सीटों पर ही कामयाबी मिली थी, जबकि बसपा 19.77 फीसद वोट हासिल करने के बावजूद एक भी सीट नहीं जीत सकी थी। यादव-मुस्लिम समीकरण पर काफी हद तक निर्भर रहने वाली सपा और दलितों में जनाधार रखने वाली बसपा के गठबंधन के परिणाम को लेकर तरह-तरह के कयास लगाये जा रहे हैं।
सपा को विश्वास है कि बसपा के साथ उसका गठबंधन आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिये मुसीबत पैदा करेगा। वहीं, भाजपा का मानना है कि इस गठजोड़ से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता शलभमणि त्रिपाठी का कहना है कि सपा और बसपा का गठबंधन नापाक और अवसरवादी गठजोड़ है। प्रदेश की जनता अब जाति की नहीं बल्कि विकास की सियासत को ही चाहती है और अगले लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा की गलतफहमी दूर हो जाएगी।
नई दिल्ली. रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को लोकसभा में राफेल डील पर हुई चर्चा का जवाब दिया। उन्होंने विमानों की संख्या के बारे में वास्तविक स्थिति बताई और कीमत के बारे में खुलासा किया। निर्मला ने कहा, ‘‘इन्होंने (यूपीए सरकार ने) जब डील की थी, तब 18 विमान तैयार हालत में मिलने थे। बाकी 108 विमान 11 साल की अवधि में बनाए जाने थे। 2006 के बाद 2014 तक आप 18 जहाज भी हासिल नहीं कर सके? हमने डील में फ्लाईअवे विमानों की संख्या कम नहीं की। इसकी संख्या 18 से बढ़ाकर 36 की। हमें इस साल सितंबर में पहला और 2022 तक आखिरी राफेल मिल जाएगा। यूपीए के वक्त एक बेसिक राफेल की कीमत 737 करोड़ थी। हमें यह 9% कम रेट पर 670 करोड़ रुपए में मिलेगा। सेब की तुलना संतरे से ना करें।’’ उन्होंने कहा- बोफोर्स ने कांग्रेस को डुबो दिया था और राफेल मोदी सरकार को सत्ता वापस दिलाएगा।
सीतारमण के जवाब पर संसद में राहुल ने कहा- जब सही दाम में 126 एयरक्राफ्ट मिल रहे थे, तब आपने केवल 36 ही क्यों खरीदे। आपने 2 घंटे जवाब दिया, लेकिन अनिल अंबानी पर नहीं बोलीं। यह नहीं बताया कि उन्हें कॉन्ट्रैक्ट किसने दिया?
रक्षा मंत्री ने कहा- आपकी कभी जहाज खरीदने की मंशा नहीं थी
निर्मला ने कहा- आपने अगस्ता-वेस्टलैंड का ऑर्डर एचएएल को क्यों नहीं दिया? इसलिए क्योंकि एचएएल आपको कुछ और दे नहीं सकती थी? आपने यह जानते हुए भी राफेल डील को अटका दिया कि वायुसेना परेशानी झेल रही है। यहां रक्षा सौदे और सुरक्षा के लिए हुए सौदे में अंतर है। हम कोई रक्षा सौदा नहीं कर रहे हैं। यह सुरक्षा के लिए की गई डील है, क्योंकि राष्ट्रीय सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। मैं यहां तथ्य रख रही हूं। मैं आरोप लगाती हूं कि इनकी मंशा जहाज खरीदने की थी ही नहीं। राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में होने के बावजूद इन्होंने इस डील को अटकाया।
हमने जहाज कम नहीं किए, बल्कि 18 फ्लाईअवे जहाजों को 36 तक पहुंचाया
निर्मला सीतारमण ने कहा- आपके 18 फ्लाईअवे जहाजों को हमने 36 तक पहुंचाया और बाकी जहाजों की खरीद के लिए भी हमने आरएफपी भेज दी है। जब भी कभी आपातकालीन खरीद की जाती है, तब यह केवल 2 स्क्वॉड्रन की होती है। 1982 में जब पाकिस्तान सोवियत यूनियन से एफ-16 खरीद रहा था, तब भारत सरकार ने फैसला किया था कि मिग-23 एमएफ की दो स्क्वॉड्रन लायक विमान खरीदे जाएंगे। 1985 में भी दो स्क्वॉड्रन बनाने लायक मिराज फ्रांस से खरीदे गए थे। 1987 में दो स्क्वॉड्रन लायक मिग-29 विमान सोवियत यूनियन से खरीदे गए थे। भारतीय वायुसेना आमतौर पर सरकार को यही सुझाव देती है कि दो स्क्वॉड्रन खरीदे जाएं, ताकि उनके लिए तत्काल व्यवस्था की जा सके।
निर्मला ने राहुल से कहा- आपमें से कोई तो देश को गुमराह कर रहा है
हमने एचएएल को 1 लाख करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट दिए : निर्मला
निर्मला ने कहा- राहुल गांधी सदन के वरिष्ठ सदस्य मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ बेंगलुरु में एचएएल गए थे। उसके सामने कहा था- राफेल आपका अधिकार है और आपको इसे बनाना चाहिए था। मैं कहना चाहती हूं कि मल्लिकार्जुन खड़गे जी उस स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य भी थे, जिसने डिफेंस से जुड़े कई मामलों को देखा था। स्टैंडिंग कमेटी की रिपोर्ट में कहा था- कमेटी इस बात से निराश है कि 3 दशकों बाद भी एचएएल वायुसेना की जरूरत के मुताबिक लड़ाकू विमान बनाने में सक्षम नहीं हो पाई। आपने 2005 से 2014 के बीच एचएएल के लिए कुछ नहीं किया। हमने 1 लाख करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट एचएएल को दिए, आपने तो सिर्फ घड़ियाली आंसू बहाए। जब राफेल कॉन्ट्रैक्ट हो रहा था, तब कहा गया कि एचएएल को यही जहाज बनाने में 2.7 गुना ज्यादा वक्त चाहिए। दैसो ने इस बात की गारंटी भी नहीं दी कि 108 विमानों को एचएएल प्रोड्यूस करे।
‘10 साल में पड़ोसी देशों ने कई बदलाव किए’
रक्षा मंत्री ने कहा- रक्षा सौदे देश की सुरक्षा से जुड़े मामले हैं। देश को यह समझना होगा कि रक्षा सौदे गोपनीय होते हैं। देश की सरहद पर संवेदनशील माहौल है। सरकार में जो भी है, उसे यह समझना होगा, जिम्मेदारी लेनी होगी। पिछले 10 साल में हमारे पड़ोसियों में क्या बदलाव हुए हैं? चीन के पास 400 लड़ाकू एयरक्राफ्ट हैं, इनमें फिफ्थ जनरेशन एयरक्राफ्ट हैं। पाकिस्तान ने अपनी लड़ाकू विमानों की क्षमता बढ़ाई है। हमारे पास क्या है? 2002 में हमारे पास 42 स्क्वॉड्रन थी। यह 2007 में घटकर 36 और 2015 में 32 स्क्वॉड्रन हो गईं। हमारे पड़ोसी अपनी क्षमता बढ़ा रहे थे, हमारी क्षमता इस दौरान घट रही थी।
लोकसभा स्पीकर ने राहुल से कहा- आप समझते तो हैं नहीं चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन से पूछा- जब मैं सदन में बोल रहा था, तब आपने कहा था कि मैं किसी का नाम नहीं ले सकता हूं और आज रक्षा मंत्री मेरा नाम ले रही हैं। आप उन्हें तो मेरा नाम लेने दे रही हैं?
राहुल ने कहा- हमारे सवालों का जवाब देना चाहिए
रायपुर. छत्तीसगढ़ की 5वीं विधानसभा का सत्र शुक्रवार से शुरू हो गया। पहले दिन की कार्यवाही बिना विपक्ष के ही शुरू हुई। नेता प्रतिपक्ष के चयन के चलते भाजपा की ओर से सिर्फ विधायक पुन्नू लाल मोहिले ही विधानसभा पहुंचे। इस दौरान विधायकों को शपथ दिलाई गई। कार्यवाही 7 जनवरी (सोमवार) तक के लिए स्थगित कर दी गई। विधानसभा का शीत सत्र 11 जनवरी तक चलेगा।
प्रोटेम स्पीकर ने सबसे पहले सीएम को दिलाई शपथ
सबसे पहले दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजली दी गई। इसके बाद प्रोटेम स्पीकर रामपुकार सिंह ने सदस्यों को शपथ दिलाई। सबसे पहले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शपथ ग्रहण की। उन्होंने राजभाषा छत्तीसगढ़ी में शपथ ली। खास बात यह रही कि विधानसभा में छत्तीसगढ़ी के साथ-साथ विधायकों और मंत्रियों ने अंग्रेजी, संस्कृत और हिंदी में भी शपथ ली। दुर्घटना में चोटिल होने की वजह से मोहले ने अपनी जगह पर ही बैठकर शपथ ली।
अंबिका सिंहदेव ने अंग्रेजी, चिंतामणि ने संस्कृत में ली शपथ
अंबिका सिंहदेव ने अंग्रेजी में शपथ ली, जबकि चिंतामणि महाराज ने संस्कृत में। इसके बाद प्रोटेम स्पीकर रामपुकार सिंह ने भी उन्हें संस्कृत में ही जवाब दिया। उन्होंने चिंतामणि महाराज को धन्यवादम कहा। मंत्री टीएस सिंहदेव, ताम्रध्वज साहू, अनिला भेड़िया, सत्यनारायण शर्मा, धनेन्द्र साहू, रश्मि सिंह, रामकुमार यादव, चरणदास महंत, केशव प्रसाद चंद्रा विनोद चंद्राकर, अनिता योगेन्द्र शर्मा और पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने भी छत्तीसगढ़ी में शपथ ली। बाकी के विधायकों को हिंदी में शपथ दिलाई गई।
विधानसभा अध्यक्ष ने दिलाई भाजपा विधायकों को शपथ
भाजपा के सभी विधायक देरी से विधानसभा पहुंचे। जिन्हें विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरण दास महंत ने शपथ दिलाई। भाजपा विधायक शिवरत शर्मा, धरमलाल कौशिश, रजनीश कुमार सिंह, डॉ. कृष्ण मूर्ती बांधी, सौरभ सिंह, बृजमोहन अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ी में शपथ ग्रहण की। वहीं विधायक नारायण चंदेल, डमरूधर पुजारी, अजय चंद्राकर, रंजना दिपेंद्र साहू, विद्या रतन भासीन, पूर्व सीएम रमन सिंह, ननकीराम कंवर और बस्तर के अकेले विधायक भीमा मंडावी ने हिंदी में शपथ लिया है
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज अध्यक्ष के निर्वाचन की प्रकिया पूरी हुई। सिर्फ एक विधायक डॉ चरणदास महंत ने नामांकन दाखिल किया था। इसी के साथ उन्हें निर्विरोध इस पद पर चुन लिया गया।
सक्ती विधानसभा सीट से विधायक डॉ चरणदास महंत ने शुक्रवार को पांच सेट में अपना नामांकन दाखिल किया था। उनके अलावा और किसी भी दावेदार ने नामांकन दाखिल नहीं किया था। कांग्रेस की ओर से भूपेश बघेल, रविन्द्र चौबे, शिव डहरिया ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा और ताम्रध्वज साहू, प्रेमसाय सिंह और कवासी लखमा उनके समर्थक बने। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ की ओर से विधायक धर्मजीत सिंह ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा और रेणु जोगी ने समर्थन किया। भाजपा की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा था। शनिवार को विधानसभा के पहले सत्र की पहली बैठक के पहले दिन उन्हें निर्विरोध रूप से अध्यक्ष चुना गया और उन्होंने विधानसभा में अपनी आसंदी ग्रहण की।

डॉ महंत अपनी सौम्य छवि और सबको साथ लेकर चलने वाले व्यक्तित्व के लिए जाने जाते हैं। डॉ महंत कांग्रेस के एक अनुभवी नेता हैं और उनका राजनीतिक करियर भी काफी पुराना है। वे 1980 से 90 के बीच दो बार विधायक रहे। 1993 से 98 के बीच मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री रहे। वर्ष 1998 में वे 12वीं लोकसभा के लिए चुने गए। डॉ महंत वर्ष 2006 से 2008 के बीच प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे। 2009 में वे पंद्रहवीं लोकसभा के लिए चुने गए थे। डॉ मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में वे खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री रहे। साल 2014 में वे कोरबा सीट से चुनाव हार गए थे। अभी वे चांपा-जांजगीर जिले की सक्ती विधानसभा सीट से विधायक हैं।
रायपुर। नवगठित 5वीं छत्तीसगढ़ विधानसभा का पहला शत्र आज से शुरू हुआ। इसी के साथ कांग्रेस के नेतृत्व में बनी सरकार ने काम काज शुरू कर दिया है। पहले दिन नव निर्वाचित विधायकों ने विधानसभा में पद और गोपनीयता की शपथ ली। इधर दूसरी तरफ भाजपा, नेता प्रतिपक्ष को लेकर उलझी रही और अंतत: विधायक दल की बैठक में धर्मलाल कौशिक को नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने का प्रस्ताव पास हुआ। उधर विधानसभा में सदस्य शपथ ग्रहण कर रहे थे, इसी बीच नेता प्रतिपक्ष के नाम की घोषणा हुई। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धर्मलाल कौशिक अपनी शांत और सौम्य छवि के लिए जाने जाते हैं। वे छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने भाजपा विधायक दल की बैठक में इनके नाम की घोषणा की।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनने के लिए भाजपा के कई नेताओं ने अपनी दावेदारी रखी थी। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह सहित बृजमोहन अग्रवाल, अजय चंद्राकर और पूर्व गृहमंत्री ननकी राम कंवर ने अपनी दावेदारी पेश की थी। इस दावेदारी में धर्मलाल कौशिक का नाम अंतिम दौर में सामने आया था। विधायक दल की बैठक में ही उनके नाम पर मुहर लगी। भाजपा नेता धर्मलाल कौशिक बिल्हा से विधायक हैं। वे पेशे से अधिवक्ता रहे हैं और वर्ष 1990 में सबसे पहले भाजपा के बिल्हा मंडल में महामंत्री बनाए गए थे।