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नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय द्वारा आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक के पद पर मंगलवार को बहाल किए जाने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राफेल मामले की जांच से कोई नहीं बचा सकता और पूरे देश को पता चलेगा कि मोदी ने 30 हजार करोड़ रुपये अपने ‘मित्र’ अनिल अंबानी को दे दिए। संसद भवन परिसर में गांधी ने संवाददाताओं से कहा कि सीबीआई प्रमुख को रात एक बजे हटाया गया था क्योंकि वह राफेल मामले की जांच शुरू करने वाले थे।

 

उन्होंने कहा, ‘सीबीआई प्रमुख को रात में एक बजे हटाया गया था क्योंकि वह राफेल मामले की जांच शुरू करने वाले थे। अब न्यायालय के फैसले से हमें कुछ राहत मिली है। अब देखते हैं कि आगे क्या होता है।’ कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ‘सीबीआई प्रमुख बहाल हो गए हैं। वे (प्रधानमंत्री) इस मामले की जांच से भाग नहीं सकते... यह असंभव है। मोदी जी चर्चा से भाग गए। उन्हें राफेल मुद्दे पर जनता की अदालत में हमसे चर्चा करनी चाहिए थी। उन्हें राफेल मामले (की जांच) से नहीं बचा सकते। (वह) कोई भी चर्चा से भाग नहीं सकते।’

इससे पहले, कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा, ‘वह (मोदी) सीबीआई को बर्बाद करते हुए बेनकाब होने वाले पहले प्रधानमंत्री बने। इसके बाद उन्होंने सीवीसी की विश्वसनीयता को खत्म किया। अब वह पहले प्रधानमंत्री बन गए हैं जिनके गैरकानूनी आदेशों को शीर्ष अदालत ने रद्द कर दिया है।’ उन्होंने कहा, ‘मोदी जी, कृपया याद रखिए कि सरकारें आती-जाती हैं। हमारे संस्थानों की गरिमा बरकरार रही है।’

 

गौरतलब है कि मंगलवार को उच्चतम न्यायालय ने आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक पद पर बहाल करते हुए उनके अधिकार वापस लेने और छुट्टी पर भेजने के केन्द्र के फैसले को रद्द कर दिया। हालांकि शीर्ष अदालत ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की जांच पूरी होने तक वर्मा के, कोई भी बड़ा निर्णय लेने पर रोक लगा दी है।

नयी दिल्ली। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को कहा कि सीबीआई के दो वरिष्ठ अधिकारियों को छुट्टी पर भेजने का सरकार का निर्णय केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की अनुशंसा पर लिया गया था। उच्चतम न्यायालय द्वारा सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को पद पर बहाल करने का फैसला सुनाये जाने के बाद संसदीय परिसर में संवाददाताओं से जेटली ने कहा कि सरकार शीर्ष अदालत के आदेशों का अनुपालन करेगी।

वर्मा एवं सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेजे जाने के निर्णय का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा, “सरकार ने यह फैसला सीबीआई की संप्रभुता को बचाए रखने के लिए किया...सरकार ने सीबीआई के दो वरिष्ठ अधिकारियों को छुट्टी पर भेजे जाने की कार्रवाई सीवीसी की अनुशंसा पर की थी।’’उन्होंने कहा कि न्यायालय ने एक हफ्ते के भीतर फैसला लेने के लिए मुद्दे को समिति के पास भेज दिया है। जेटली ने कहा, “सीबीआई की निष्पक्ष एवं भेदभाव रहित कार्यशैली के व्यापक हित को देखते हुए न्यायालय ने स्पष्ट तौर पर सीबीआई निदेशक को मिली सुरक्षा को मजबूत किया है। साथ ही साथ न्यायालय ने जवाबदेही की व्यवस्था का रास्ता भी निकाला है। न्यायालय के निर्देशों का निश्चित तौर पर अनुपालन होगा।”
 
वर्मा के अधिकार वापस ले लेने के केंद्र को फैसले को दरकिनार करते हुए उच्चतम न्यायालय ने वर्मा की बहाली कर दी लेकिन उनपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की सीवीसी जांच खत्म होने तक उन्हें कोई भी बड़ा नीतिगत फैसला लेने से रोक दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि वर्मा के खिलाफ आगे कोई भी फैसला उच्चाधिकार प्राप्त समिति लेगी जो सीबीआई निदेशक का चयन एवं नियुक्ति करती है। गौरतलब है कि वर्मा को केंद्र सरकार के 23 अक्टूबर के फैसले के बाद छुट्टी पर भेज दिया गया था और वह 31 जनवरी को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। 

महाराष्ट्र की 48 लोकसभा सीटों को लेकर एक बार फिर बीजेपी और शिवसेना के बीच द्वंद्व शुरू हो गया है, पिछली बार जब ऐसा हुआ था तो बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के साथ अकेले एक कमरे में मुलाकात की थी। जिसके बाद दोनों पार्टियों के बीच रिश्ते सामान्य होते हुए दिखाई दे रहे थे। लेकिन, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा लगातार बीजेपी को राफेल मामले में निशाने पर लिए जाने के बाद से देखा जा रहा है कि शिवसेना अब बीजेपी को आंख दिखा रही है। 

पिछले दिनों शिवसेना प्रमुख ने राफेल पर जेपीसी बनाए जाने का समर्थन किया तो दूसरी तरफ प्रधानमंत्री पर हमला बोलते हुए चौकीदार का नारा अपनी रैलियों में लगवाया। हालांकि, इसके बाद भी बीजेपी ने नरम रुख अख्तियार करते हुए उद्धव ठाकरे के बयानों को नजरअंदाज किया। 

इसी बीच अब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि प्रदेश की 48 में से 40 सीटें हमें जीतनी है। जिसके बाद अमित शाह ने भी इस बयान का उल्लेख किया। 

2014 का लोकसभा चुनाव

साल 2014 में हुए लोकसभा चुनावों से ठीक पहले शिवसेना ने बीजेपी के साथ अपना नाता समाप्त कर दिया। विशेषज्ञों ने माना था कि करीब ढाई दशक से एक साथ काम कर रही शिवसेना के भीतर इतना आत्मविश्वास भर गया था कि वह प्रदेश की आधी सीटें आसानी से जीत सकती है। हालांकि चुनाव नतीजों में साफ हो गया और शिवसेना के खेमे में 18 सीटें आई। 

बता दें कि शिवसेना के मुखपत्र सामना में छप रहे लेखों से यह तो साफ हो गया कि भले ही शिवसेना ने चुनावों के बाद बीजेपी को समर्थन देकर देवेंद्र फडणवीस को प्रदेश की सत्ता सौंप दी हो लेकिन वह खुद को इसके काबिल मानते थे। 

अमित शाह के साथ उद्धव ठाकरे की मुलाकात

जून के पहले सप्ताह में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के आवास मातोश्री में संपर्क फॉर समर्थन के मुहीम के जरिए भाजपा प्रमुख अमित शाह एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुलाकात की। यह मुलाकात एक कमरे में हुई जहां पर इन तीनों नेताओं के अलावा आदित्य ठाकरे मौजूद थे। इस मुलाकात के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि शिवसेना और बीजेपी के बीच रिश्ते सामान्य हो गए। 

निकाय चुनाव से पहले बीजेपी और शिवसेना के बीच द्वंद्व

जून में हुई मुलाकात से पहले फरवरी में महाराष्ट्र में निकाय चुनाव हुए। इन चुनावों के बीच में बीजेपी ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर सामना पर प्रतिबंध लगाने की गुहार लगाई। बीजेपी ने यह पत्र लिखा ही था कि उद्धव ठाकरे ने बीजेपी को निशाने में लेते हुए कहा कि क्या बीजेपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का मुंह बंद करा पाएगी।

सामना में छप रहे लेख में ऐसे ही बयानों के ढेर लग गए। हालांकि जब दोनों राजनीतिक दलों की मुलाकात हुई तो सामना में ठाकरे की तर्ज पर लेख छपा कि सरकार को सत्ता संभालते हुए चार साल बीत गए और उनके पास राजग के साथ मुलाकात करने का वक्त था मगर हमारे साथ नहीं। वहीं, इस मुलाकात को चुनावी रणनीति करार दिया और यह दर्शा दिया कि एक बार फिर वह आने वाले लोकसभा चुनावों में अपने दम पर प्रदेश की सीटें हासिल करेंगे।

कांग्रेस नेताओं एवं गठबंधन का समर्थन करते हुए दिखे ठाकरे

कई बार ऐसे मौके सामने आए जहां पर कांग्रेसी नेताओं एवं कांग्रेस के साथ की राजनीतिक पार्टियों के समर्थन पर सामना मे लेख छपा। अमित शाह द्वारा सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर सवाल खड़ा करने के बाद सामना ने लिखा कि चुनावों के दौरान सोशल मीडिया के जरिए जनता को बरगलाने के बाद आज उपदेश देने आई है बीजेपी। 

पिछले साल अक्टूबर में सोशल मीडिया पर अंकुश लगाने के लिए बीजेपी एक नया कानून ले कर आ रही थी। जिसके बाद सामना ने लिखा कि बीजेपी ने विरोधियों की बदनामी, अवमानना और दुष्प्रचार के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया और पर्दाफाश होने के बाद कानून की बात कर रही है।

इसी के बाद शिवसेना ने एनसीपी प्रमुख शरद पवार का समर्थन करते किया और पवार का बयान छापा कि अभिव्यक्ति की आजादी वाले युवकों अपने विचार व्यक्त करते समय अपना एक पैर कारागृह में रखकर सोशल मीडिया में बोलते रहो।

ऐसे कई मौके आए जब शिवसेना ने कांग्रेसियों का या फिर उनसे वास्ता रखने वाले राजनीतिक पार्टियों का समर्थन किया हो। हाल ही में राफेल मामले में कांग्रेस का समर्थन करते हुए जेपीसी की मांग की। उससे पहले राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री को चौकीदार चोर कहने वाले बयान का उपयोग अपनी रैलियों में करते हुए देखे गए।

विशषज्ञों का मानना है कि पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद शिवसेना को ऐसा प्रतीत हो रहा है कि देश में बीजेपी की छवि धूमिल हुई है एवं 2019 के चुनावों में बीजेपी एवं उनके साथी पार्टियों को काफी नुकसान होने वाला है। ऐसे में शिवसेना अपने दम पर प्रदेश का चुनाव लड़ना चाहेगी और फिर चुनावों के बाद स्थिति को टटोलते हुए उस राजनीतिक पार्टी के साथ गठबंधन कर सकती है, जिसकी सरकार बनने के आसार हों। 

शिवसेना नेताओं के बीच फूट के आसार

मीडिया में चल रही खबरों के मुताबिक शिवसेना के सांसदों का मानना है कि लोकसभा चुनाव में बीजेपी के साथ गठबंधन करना चाहिए और मिलकर चुनाव लड़ना चाहिए, तभी हम सभी सीटों को जीत पाएंगे। जबकि शिवसेना के राज्यसभा सांसदों की माने तो उनका साफ कहना है कि प्रदेश में इस बार हमें किसी के साथ गठबंधन करने की जरुरत नहीं है। पिछले लोकसभा चुनावों की तर्ज पर इस बार भी हमें अकेले ही चुनाव लड़ना चाहिए। ऐसे में यह माना जा रहा है कि बीजेपी के साथ गठबंधन के लिए शिवसेना के भीतर फूट पड़ सकती है और जैसा देखा गया कि दल-बदल का खेल शुरू हो सकता हैं। 

नयी दिल्ली। कर्नाटक सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल पर कर बढ़ाये जाने के बाद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने शनिवार को राज्य की कांग्रेस-जद (एस) गठबंधन सरकार की नीति की आलोचना की और कहा कि आखिर जनता ‘‘राज्य सरकार के भ्रष्टाचार और निकम्मेपन’’ के लिये भारी कीमत क्यों चुकाये? शाह ने ट्वीट किया, ‘कर्नाटक में मौजूदा सरकार के शासनकाल में किसान मर रहे हैं। दलितों को गुलाम बनाया जा रहा है। आम जनता कर के बोझ से दबी जा रही है। आखिर कर्नाटक की जनता राज्य सरकार के भ्रष्टाचार और उसकी निकम्मेपन के लिये इतनी भारी कीमत क्यों चुकाये?’

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट के चलते राज्य के राजकोषीय संग्रह पर इसके विपरीत असर का हवाला देते हुए कर्नाटक की कांग्रेस-जद (एस) सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर कर की दर को बढ़ाकर क्रमश: 32 प्रतिशत और 21 प्रतिशत कर दिया है। इसके एक दिन बाद भाजपा अध्यक्ष की यह टिप्पणी सामने आयी है। शाह ने इससे पहले किसानों की आत्महत्या और दलितों को कथित तौर पर गुलाम बनाये जाने के मुद्दे पर राज्य सरकार पर हमला बोला था।

डाल्टनगंज। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस पर कर्ज माफी के नाम पर किसानों को ‘गुमराह’ करने का आरोप लगाते हुए शनिवार को कहा कि विपक्षी दल उन्हें महज ‘वोट बैंक’ समझता है। उन्होंने कहा कि भाजपा के लिए किसान ‘अन्नदाता’ हैं जिनके वास्तविक कल्याण के लिए उनकी सरकार गंभीरता से काम कर रही है। प्रधानमंत्री ने झारखंड में यहां एक सभा को संबोधित करते हुए कहा, ‘हम किसानों को अन्नदाता समझते हैं जबकि पूर्ववर्ती सरकारों ने उन्हें महज वोट बैंक समझा।’ मोदी ने शनिवार को झारखंड में 2,391.36 करोड़ रुपए की कोयल कारो मंडल बांध सहित कई सिंचाई परियोजनाओं की नींव रखने के बाद जनसभा को संबोधित किया। इस बांध से झारखंड के 19604 हेक्टेयर तथा बिहार के कुछ इलाकों में सिंचाई होगी।

उन्होंने कहा कि पहले कांग्रेस की सरकार ने किसानों को कर्ज लेने के लिए बाध्य किया और आज वे कर्जमाफी के वादों से उन्हें गुमराह कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘अगर मैंने किसानों को वोट बैंक समझा होता तो मैं उनके एक लाख रुपये का कर्ज माफ कर देता... इससे किसानों को तुरंत राहत मिल जाती लेकिन हमारी प्राथमिकता उन्हें सुविधाएं मुहैया कराना है ताकि उनके उत्पाद को बढ़ावा मिले और उनकी आय दोगुनी हो जाए। इससे किसानों को पीढ़ियों तक राहत मिलेगी।’ मोदी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा, ‘उन्हें नहीं मालूम होगा कि कोयल क्या है... यह सिंचाई परियोजना है या किसी नदी या चिड़िया का नाम है।’

 

प्रधानमंत्री ने इस महत्वाकांक्षी सिंचाई परियोजना पर मिलकर काम करने के लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास की प्रशंसा की और कहा कि यह संघवाद का अच्छा उदाहरण है जिससे दूसरों को भी सीखना चाहिए। दास और दोनों राज्यों के कई सांसदों की मौजूदगी में उन्होंने कहा, ‘ऐसे समय में जब कई राज्य एक-दूसरे से लड़ रहे हैं, जिस तरह से नीतीश कुमार और रघुवर दास और दोनों राज्यों के सांसदों ने कोयल कारो मंडल परियोजना के लिए मिलकर काम किया, वह संघवाद का अच्छा उदाहरण है जिससे दूसरों को भी सीखना चाहिए।’ जनसभा को संबोधित करने से पहले मोदी ने यहां ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ (पीएमएवाय) के लाभार्थियों में से पांच को उनके मकानों की चाबी सौंपी।

प्रधानमंत्री ने पूर्व सरकारों पर कटाक्ष करते हुए आरोप लगाया कि उन्हें झारखंड के किसानों के हितों की परवाह नहीं थी, मंडल बांध परियोजना में देरी इसका सबूत है। बांध पर काम 1972 में शुरू किया गया थे लेकिन 1993 में इसे रोक दिया गया था। इसे लातेहार जिले के बरवाडीह ब्लॉक में उत्तरी कोयल नदी पर बनाया जाएगा। बिहार के औरंगाबाद और गया के अलावा राज्य के लातेहार, पलामू और गढ़वा जिलों में 19,604 हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई सुविधाएं बेहतर होंगी। मोदी ने बिहार और झारखंड सरकार का किसान सुमदाय के हित के लिए काम करने हेतु शुक्रिया भी अदा किया।

 

प्रधानमंत्री ने झारखंड में करीब 3500 करोड़ रुपए की कई विकास परियोजनाओं की नींव रखी। पीएमएवाई योजना पर बात करते हुए मोदी ने कहा कि पहले आवास योजना के अधीन कुछ नया प्रदान नहीं करने के लिए उनकी सरकार की आलोचना की जा रही थी। उन्होंने कहा, ‘रिमोट कंट्रोल संचालित सरकार के दिनों में इस योजना के तहत केवल 25 लाख मकान बनाए गए जबकि हमने साढ़े चार वर्षों में करीब सवा करोड़ मकान बनाए हैं।’ उन्होंने कहा, ‘हमारा लक्ष्य ग्रामीण और शहरी सभी इलाकों में सबको घर मुहैया कराना है। हम राजनेताओं के नाम पर योजनाओं का नाम रखने में विश्वास नहीं करते, योजना के तहत लाभ पहुंचना (लोगों को) मायने रखता है।‘ 

मोदी ने कहा कि इस योजना के तहत मुहैया मकानों में गैस, बिजली कनेक्शन, शौचालय सहित सभी बुनियादी सुविधाएं होंगी। उन्होंने कहा कि राजग सरकार पारदर्शिता में विश्वास करती है और दलालों द्वारा किसानों का फायदा उठाने की कोई गुंजाइश नहीं है। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘हम सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के खातों में सीधे पैसे जमा करा पारदर्शी तरीके से काम कर रहे हैं। प्रणाली में दलाली की कोई गुंजाइश नहीं है।’

नयी दिल्ली। भाजपा ने शनिवार को दावा किया कि उसके पास अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर करार के बिचौलिये क्रिश्चियन मिशेल द्वारा कथित तौर पर लिखा गया एक पत्र है, जिससे ‘‘रोम और रागा की कहानी’’ का खुलासा होता है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रेस कांफ्रेंस में मिशेल के कथित पत्र को पढ़ कर सुनाया। इस ‘‘पत्र’’ में मिशेल ने कथित तौर पर लिखा है कि ‘‘करार की राह के सभी अड़ंगों से निपट लिया गया है।’’ 

 

 पात्रा ने कहा, ‘‘क्रिश्चियन मिशेल ने डिस्पैच के रूप में हजारों पत्र लिखे थे और उसने भारत में रहने के बावजूद उन पत्रों को भेजा। भारत में जब वह ‘दलाल’ और बिचौलिये के तौर पर रह रहा था, तब वह अगस्तावेस्टलैंड के सीईओ को पत्र लिखा करता था।’’ 
 
उन्होंने कहा, ‘‘हमारी एजेंसियों को इनमें से कुछ पत्र मिले हैं। हमें मीडिया के जरिए ऐसा ही एक पत्र मिला। इस पत्र से रोम और रागा के पीछे की कहानी का खुलासा हो जाएगा।’’ 

कोलकाता। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरणमय नंदा ने रविवार को कहा कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में बसपा के साथ मिल कर आगामी आम चुनाव में भाजपा को हराने में सक्षम है और इसके लिए कांग्रेस जैसी “गैर जरूरी”ताकत की जरूरत नहीं है। हालांकि उन्होंने यह संकेत दिया कि सपा-बसपा गठबंधन रायबरेली एवं अमेठी निर्वाचन क्षेत्र को छोड़ सकता है जिनका लोकसभा में प्रतिनिधित्व क्रमश: संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी करते हैं। नंदा ने बताया, “उत्तर प्रदेश में कांग्रेस अनावश्यक ताकत है इसलिए हम उसे शामिल करने या बाहर रखने के बारे में सोच ही नहीं रहे हैं।

 

 उन्होंने कहा, “राज्य में सपा-बसपा गठबंधन मुख्य ताकत है तो भाजपा का सामना करेंगे। कांग्रेस एक या दो सीट पर हो सकती है। यह फैसला लेना कांग्रेस पर है कि वह अपने आप को कहां देखना चाहती है।” लोकसभा चुनावों से पहले सीट बंटवारे पर अंतिम फैसला लेने के लिए बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती और समाजवादी पार्टी (सपा) नेता अखिलेश यादव के बीच बातचीत तेज होने संबंधी खबरों के बाद नंदा की यह टिप्पणी आई है। दोनों नेताओं ने शुक्रवार को नयी दिल्ली में मुलाकात की थी। नंदा के मुताबिक कांग्रेस अभी भी “गठबंधन राजनीति” के मंत्र के हिसाब से नहीं ढल पाई है क्योंकि “वह अपने सहयोगियों के लिए उन राज्यों में एक इंच भी छोड़ने के लिए तैयार नहीं जहां वह मजबूत है लेकिन जहां वह कमजोर है वहां दूसरों से अपने लिए बड़ा हिस्सा छोड़ने की उम्मीद करती है।” 
 
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को गठबंधन से बाहर रखना क्या भाजपा के लिए फायदेमंद साबित होगा? इस सवाल पर उन्होंने कहा, “हमारे पूर्व के अनुभवों के आधार पर हम कह सकते हैं कि जहां कांग्रेस ने सपा-बसपा गठबंधन के खिलाफ अपने उम्मीदवार उतारे भी हैं, वहां हमें भाजपा को हराने में कोई मुश्किल नहीं हुई। कांग्रेस का वोट शेयर पूरी तरह गैर जरूरी है।” विपक्षी गठबंधन की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के बारे में पूछे जाने पर नंदा ने कहा कि इस बारे में फैसला चुनाव के बाद आम सहमति से किया जाएगा। 

अगरतला। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने शनिवार को कहा कि पार्टी आगामी लोकसभा चुनाव विकास, रक्षा और देश के आत्मसम्मान जैसे मुद्दों पर लड़ेगी।उन्होंने विश्वास जताया कि भाजपा 300 से अधिक सीट जीतेगी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सत्ता बरकरार रहेगी। भगवा दल ने 2014 के चुनावों में 282 सीटों पर जीत दर्ज की थी जो सरकार बनाने के लिए आवश्यक संख्या से अधिक थी। शाह ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘विकास, रक्षा और देश का आत्मसम्मान भाजपा के लिए अगले आम चुनावों में मुख्य मुद्दे होंगे। 300 से अधिक सीट जीतकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सत्ता बरकरार रखेंगे।’’ 

 

 अयोध्या में राम मंदिर बनाने के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि जहां तक राम मंदिर के मुद्दे की बात है तो कांग्रेस नहीं चाहती कि यह मुद्दा जल्द निपटे। भाजपा की घोषणा के मुताबिक हम चाहते हैं कि राम मंदिर का निर्माण हो लेकिन कानून के दायरे में रहकर हम ऐसा चाहते हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में चुनाव परिदृश्य में काफी बदलाव होंगे जहां भाजपा 42 में से 23 से अधिक सीट जीतेगी।उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र में 25 में से 21 सीटों पर जीत दर्ज करेगी। भाजपा विरोधी दलों के एकजुट होने पर प्रहार करते हुए शाह ने कहा कि कांग्रेस की महागठबंधन सरकार मजबूर सरकार देगी और मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा मजबूत सरकार दे सकती है। 
 
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने पूरे देश में विकास के काफी काम किए हैं लेकिन देश की सुरक्षा को मजबूत करना ज्यादा उल्लेखनीय है।शाह ने कहा कि दुश्मन अमेरिका या इस्राइल के सैनिकों पर जब हमला करते हैं तो वे तुरंत पलटवार करते हैं। 2014 में भाजपा की सरकार बनने पर इन दोनों देशों के बाद भारत दुनिया का तीसरा देश बन गया है जो पलटवार करता है।भाजपा प्रमुख ने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान के अंदर सर्जिकल स्ट्राइक कर प्रधानमंत्री मोदी ने मजबूत भारत की अवधारणा पेश की है। 2016 में जम्मू-कश्मीर के उरी में भारतीय सेना के ठिकाने पर हमले के बाद भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक की थी।

शेखपुरा (बिहार)। बिहार में भाजपा की सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) ने लोकसभा चुनावों से पहले उठाए जा रहे राम मंदिर निर्माण और तीन तलाक जैसे विवादित मुद्दों को नामंजूर कर दिया और आशंका जताई कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को विकास के मुद्दे से भटकने का नुकसान हो सकता है। लोजपा संसदीय दल के अध्यक्ष चिराग पासवान ने शेखपुरा जिले में प्रेस कांफ्रेंस कर यह टिप्पणी की। चिराग की लोकसभा सीट जमुई का एक हिस्सा शेखपुरा जिले में आता है।

 

 उन्होंने कहा, ‘‘एनडीए के लिए विकास ही चुनावी मुद्दा होना चाहिए। मुझे यकीन है कि इससे गठबंधन को बिहार की 40 सीटों में से 35 जीतने में मदद मिलेगी। मुझे उम्मीद है कि चुनाव विकास के मुद्दे पर ही लड़ा जाएगा और राम मंदिर एवं तीन तलाक जैसे मुद्दे किनारे रखे जाएंगे। इससे गठबंधन की संभावनाओं को नुकसान हो सकता है।’’ केंद्रीय मंत्री एवं लोजपा के संस्थापक अध्यक्ष रामविलास पासवान के बेटे चिराग ने पिछले महीने उस वक्त भी ऐसी टिप्पणियां की थी जब भाजपा को राजस्थान, मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों में हार का सामना करना पड़ा था।
 
चिराग ने यह टिप्पणियां ऐसे समय में की हैं जब तीन तलाक के मुद्दे पर संसद में हंगामा हो रहा है। वहीं, राज्य में भाजपा की एक अन्य सहयोगी जदयू ने राज्यसभा में तीन तलाक संबंधी विधेयक पर वोटिंग की स्थिति में विधेयक के के पक्ष में वोट डालने से इनकार कर दिया है। जदयू ने लोकसभा में भी इस विधेयक पर वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया था।

चंडीगढ़। पंजाब से आम आदमी पार्टी (आप) के बागी विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने रविवार को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी उस विचारधारा एवं सिद्धांतों से “पूरी तरह भटक चुकी” है जिनके आधार पर अन्ना हजारे आंदोलन के बाद उसका गठन हुआ था। 

 

 पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्तता के चलते पिछले साल नवंबर में पार्टी से निलंबित किए गए खैरा ने अपना त्यागपत्र आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को भेज दिया है। बोलाथ से विधायक ने अपने त्यागपत्र में कहा, “देश की पांरपरिक पार्टियों की वर्तमान राजनीतिक संस्कृति बुरी तरह बिगड़ चुकी है जिसके चलते आप के गठन से बहुत उम्मीदें जगीं थीं।” खैरा ने कहा, “दुर्भाग्य से पार्टी में शामिल होने के बाद मैंने महसूस किया कि आप का पदक्रम भी पारंपरिक केंद्रीकृत राजनीतिक पार्टियों से अलग नहीं है।” 
 
पिछले साल जुलाई में पंजाब विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष के पद से हटाए जाने के बाद से वह आप नेतृत्व के मुखर आलोचक रहे हैं। पद से हटाए जाने के बाद खैरा ने सात समर्थकों के साथ बागियों के एक समूह का गठन किया जिसने पार्टी की पंजाब इकाई के लिए स्वायत्तता की मांग की।

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