ईश्वर दुबे
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सिडनी। कप्तान विराट कोहली ने शुक्रवार को कहा कि भारतीय टीम हार्दिक पंड्या और लोकेश राहुल की टीवी शो के दौरान महिलाओं पर ‘अनुचित’ टिप्पणी का समर्थन नहीं करती लेकिन उन्होंने साथ ही जोर दिया कि इस विवाद से ड्रेसिंग रूम का मनोबल प्रभावित नहीं होगा। कोहली ने कहा कि आस्ट्रेलिया के खिलाफ एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला के लिए पंड्या और राहुल की उपलब्धता इस पर निर्भर करेगी कि बीसीसीआई शुक्रवार को उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करता है या नहीं। कोहली ने एकदिवसीय श्रृंखला के शनिवार को यहां होने वाले पहले मैच की पूर्व संध्या पर कहा, ‘‘भारतीय क्रिकेट टीम के नजरिये से उस समय जो भी अनुचित टिप्पणी की गई उसका निश्चित तौर पर हम समर्थन नहीं करते। निश्चित तौर पर भारतीय क्रिकेट टीम के रूप में हम इस तरह के नजरिये का समर्थन नहीं करते और यह बता दिया गया है (दोनों खिलाड़ियों को)।’’
नयी दिल्ली। आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक पद से हटाए जाने की पृष्ठभूमि में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने शुक्रवार को नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा और दावा किया कि पिजड़े में बंद तोते को उड़ने नहीं दिया गया क्योंकि वह सत्ता के गलियारे के सारे राज खोल देता। सिब्बल ने ट्वीट कर कहा, ‘आलोक वर्मा को हटाया गया। समिति ने सुनिश्चित किया कि पिजड़े में बंद तोता उड़ न सके क्योंकि इसका डर था कि कहीं ये तोता सत्ता के गलियारे के राज नहीं खोल दे।’
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पिजड़े में बंद तोता अभी बंद ही रहेगा। गौरतलब है कि कुछ साल पहले उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई को ‘पिजड़े में बंद तोता’ कहा था। दरअसल, उच्चतम न्यायालय द्वारा बहाल किये जाने के मात्र दो दिन बाद आलोक वर्मा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली एक उच्चाधिकार प्राप्त चयन समिति ने गुरुवार को एक मैराथन बैठक के बाद एक अभूतपूर्व कदम के तहत भ्रष्टाचार और कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही के आरोपों में सीबीआई निदेशक के पद से हटा दिया।
सीबीआई के 55 वर्षों के इतिहास में इस तरह की कार्रवाई का सामना करने वाले जांच एजेंसी के वह पहले प्रमुख हैं।1979 बैच के आईपीएस अधिकारी वर्मा बुधवार को ड्यूटी पर लौटे थे। इससे एक दिन पहले ही उच्चतम न्यायालय ने कुछ शर्तो के साथ उनकी वापसी का मार्ग प्रशस्त किया था और सीबीआई प्रमुख का चयन करने वाली तीन सदस्यीय समिति से एक सप्ताह में उनके पद पर बने रहने के बारे में फैसला करने के लिए कहा था।
दुबई। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दौरे पर दुबई पहुंचे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वह यहां अपने ‘मन की बात’ करने नहीं आए हैं, बल्कि लोगों की सुनने आए हैं। राहुल ने यहां भारतीय कामगारों को संबोधित किया और भारत के विकास में उनके योगदान की सराहना की। आंध्र प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले कामगारों से मुखातिब राहुल ने कहा कि जैसे ही हमारी सरकार आएगी, आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देंगे।
पंचकुला। सीबीआई की एक अदालत ने 2002 में पत्रकार राम चंद्र छत्रपति की हुई हत्या के मामले में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह और तीन अन्य को शुक्रवार को दोषी करार दिया। उन्हें 17 जनवरी को सजा सुनाई जाएगी। विशेष सीबीआई न्यायाधीश जगदीप सिंह ने यहां डेरा प्रमुख और तीन अन्य को इस मामले में दोषी ठहराया। सीबीआई के वकील एचपीएस वर्मा ने पीटीआई बताया, ‘सभी चार आरोपियों को दोषी ठहराया गया है।’
इस मामले में 17 जनवरी को सजा सुनाई जाएगी। तीन अन्य आरोपियों में कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल शामिल हैं। गुरमीत (51) रोहतक की सुरनिया जेल से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश हुआ। वह अपनी दो अनुयायियों से बलात्कार करने के मामले में फिलहाल 20 साल की कैद की सजा काट रहा है। गौरतलब है कि वर्ष 2002 में छत्रपति की उनके आवास के बाहर गोली मार कर हत्या कर दी गई थी।
दरअसल उनके अखबार ‘पूरा सच’ ने एक पत्र प्रकाशित किया था, जिसमें इस बात का जिक्र किया गया था कि सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय में गुरमीत किस तरह से महिलाओं का यौन उत्पीड़न करता था। यह मामला 2003 में दर्ज किया गया था और इसे 2006 में सीबीआई को सौंपा गया था। मामले में गुरमीत को मुख्य षडयंत्रकर्ता नामजद किया गया था।
पने विवादित बयानों से कांग्रेस का सिरदर्द पैदा कराने वाले मणिशंकर अय्यर एक बार फिर से विवादों में घिर गए हैं। अय्यर ने विवादास्पद बयान देते हुए कहा कि अयोध्या के राजा दशरथ के महल में 10 हजार कमरे थे और यह किसी को पता नहीं है कि भगवान राम कौनसे कमरे में पैदा हुए थे? उन्होंने तंज भरे लहजे में कहा कि आप बेशक मंदिर बनाइए मगर आप यह कैसे कह सकते हैं कि मंदिर वहीं बनाएंगे।
नयी दिल्ली। सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को शिक्षा एवं सरकारी नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण सुनिश्चित करने वाला संविधान 124वां संशोधन विधेयक मंगलवार को लोकसभा में पेश कर दिया गया। केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने संविधान (124 वां संशोधन) विधेयक, 2019 पेश किया। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सोमवार को ही इसे मंजूरी प्रदान की है।
नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फोन पर बातचीत कर रक्षा, आतंकवाद विरोधी कदमों और ऊर्जा के क्षेत्रों में बढ़ते द्विपक्षीय सहयोग को सराहा। अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने बातचीत के दौरान एक दूसरे को नव वर्ष की शुभकामनाएं दीं और वर्ष 2018 में भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझीदारी लगातार बढ़ने पर संतोष व्यक्त किया।
नयी दिल्ली। नागरिकता संशोधन विधेयक पर कुछ वर्गों की आशंकाओं को निर्मूल बताते हुए गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को लोकसभा में कहा कि असम की सीमा देश की सीमा है और जो भी जरूरी होगा, केंद्र सरकार वह सब करेगी। सिंह ने संसद की संयुक्त समिति द्वारा यथाप्रतिवेदित नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 को लोकसभा में चर्चा एवं पारित करने के लिये रखते हुए यह बात कही। कांग्रेस एवं तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने सदन से वाकआउट किया।
यह विधेयक नागरिकता कानून 1955 में संशोधन के लिए लाया गया है। इस विधेयक के कानून बनने के बाद, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के मानने वाले अल्पसंख्यक समुदायों को 12 साल के बजाय छह साल भारत में गुजारने पर और बिना उचित दस्तावेजों के भी भारतीय नागरिकता मिल सकेगी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सोमवार को नागरिकता संशोधन विधेयक को मंजूरी दी। इस पर संसद की संयुक्त समिति ने विचार किया है और समिति में तृणमूल कांग्रेस समेत कुछ दलों के सदस्यों ने असहमति का नोट दिया था।
सदन में सिंह ने बताया कि असम के छह समुदायों को आदिवासी समुदाय का दर्जा देने की मांग लम्बे समय से की जा रही थी। गृह मंत्रालय ने इस संबंध में एक समिति का गठन किया था और समिति ने सिफारिश दे दी है। इस बारे में विचार विमर्श भी किया गया है। इसके अनुरूप कोच राजभोगशी, ताइ आहोम, चोटिया, मतक, मोरान एवं चाय बागान से जुड़े समुदायों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) श्रेणी में शामिल किया जाने का प्रस्ताव है। गृह मंत्री ने कहा कि सरकार इस संबंध में विधेयक लायेगी।
उन्होंने कहा कि असम समझौता एक महत्पूर्ण स्तम्भ है। इसमें असम के लोगों की सामाजिक, सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखने की बात कही गई। इसके लिये कानूनी एवं प्रशासनिक आधार तैयार करने की बात भी कही गई। लेकिन पिछले वर्षो में ऐसा नहीं हुआ। राजनाथ सिंह ने कहा कि हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस विषय पर एक समिति का गठन किया है। यह समिति सभी पक्षकारों से परामर्श करेगी और सांस्कृतिक, सामाजिक एवं भाषायी पहचान के बारे में छह मार्च तक अपनी सिफारिशें देगी। उन्होंने कहा कि सरकार बोडो समुदाय की मांगों के बारे में न केवल चिंता करती है बल्कि इसके लिये प्रतिबद्ध भी है।
गृह मंत्री ने कहा कि नागरिकता विधेयक के संबंध में गलतफहमी पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है और असम के कुछ भागों में आशंकाएं पैदा करने की कोशिक हो रही है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक सिर्फ असम के लिये नहीं है बल्कि ऐसे हजारों लोगों के लिये है जो पश्चिमी सीमा से आकर दिल्ली, गुजरात एवं अन्य स्थानों पर रह रहे हैं। यह सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगा। इसके पीछे सोच यह है कि उत्पीड़न के शिकार प्रवासी देश के किसी हिस्से में रह सकें। सिंह ने जोर दिया कि पाकिस्तान में राष्ट्र एवं समुदाय के स्तर पर अल्पसंख्यकों के साथ सुनियोजित तरीके से भेदभाव किया जाता है। उन्हें बुनियादी अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता से वंचित किया जाता है।
उन्होंने कहा कि बांग्लादेश और अफगानिस्तान में वर्तमान सरकार अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा को प्रतिबद्ध है। लेकिन इन देशों में भी घटनाएं सामने आई हैं। गृह मंत्री ने कहा कि ऐसे में इन लोगों के पास भारत में रहने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) का जिक्र करते हुए कहा कि इसे उचित ढंग से लागू किया जा रहा है। इसके तहत शिकायत करने का प्रावधान किया गया है। हम प्रक्रिया पूरी करने को प्रतिबद्ध है। किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं होगा।