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यह समय पांच राज्यों में चुनाव का समय है जो हमें थोड़ा ठहरकर अपने बीते दिनों के आकलन और आने वाले दिनों की तैयारी का अवसर देता है। एक व्यक्ति की तरह एक समाज, एक राष्ट्र के जीवन में भी इसका महत्वपूर्ण स्थान है। इन पांच राज्यों के चुनाव का वर्तमान एवं लोकसभा चुनाव की दस्तक जहां केन्द्र एवं विभिन्न राज्यों में भाजपा को समीक्षा के लिए तत्पर कर रही है, वहीं एक नया धरातल तैयार करने का सन्देश भी दे रही है। इन पांच राज्यों में चुनाव परिणाम क्या होंगे, इसका पता 11 दिसम्बर को लगेगा।
 
भाजपा के लिये यह अवसर जहां अतीत को खंगालने का अवसर है, वहीं भविष्य के लिए नये संकल्प बुनने का भी अवसर है। उसे यह देखना है कि बीता हुआ दौर उसे क्या संदेश देकर जा रहा है और उस संदेश का क्या सबब है। जो अच्छी घटनाएं बीते साढ़े चार साल के नरेन्द्र मोदी शासन में हुई हैं उनमें एक महत्वपूर्ण बात यह कही जा सकती है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जनजागृति का माहौल बना- एक विकास क्रांति का सूत्रपात हुआ, विदेशों में भारत की स्थिति मजबूत बनी। लेकिन जाते हुए वक्त ने अनेक घाव भी दिये हैं, जहां नोटबंदी ने व्यापार की कमर तोड़ दी और महंगाई एक ऐसी ऊंचाई पर पहुंची, जहां आम आदमी का जीना दुश्वार हो गया है। जीएसटी का लागू होना एवं उससे सकारात्मक वातावरण का निर्माण होना एक क्रांतिकारी कदम कहा जा सकता है। ऐसा भी प्रतीत हुआ कि में राजनीति और सत्ता गरीबी उन्मूलन की दिशा में अधिक गतिशील बनी। आर्थिक घटनाओं के संकेत हैं कि हम न सिर्फ तेजी से आगे बढ़ रहे हैं बल्कि किसी भी तरह का झटका झेलने में सक्षम है। इस साल सेंसेक्स ने लगातार ज्वारभाटा की स्थिति बनाए रखी  हालांकि पेट्रोल की कीमतों ने काफी परेशान किया। जब दुनिया की बड़ी आर्थिक एवं राजनीतिक सत्ताएं धराशायी होती दिख रही है तब भी भारत ने स्वयं को संभाल रखा है। इसका श्रेय नरेन्द्र मोदी सरकार को जाता है।
 
भाजपा ने अपनी विचारधारा में व्यापक बदलाव किये हैं, जो उसके स्थायित्व के लिये जरूरी भी थे। जब तक भाजपा वाजपेयीजी की विचारधारा पर चलती रही, तब वह श्रीराम के बताये मार्ग पर चलती रही। मर्यादा, नैतिकता, राजनीतिक शुचिता उसके लिए कड़े मापदंड थे। सत्ता की शर्त पर उसने इनसे कभी समझौता नहीं किया। जहाँ करोड़ों रुपये के घोटाले-घपले करने के बाद भी कांग्रेस बेशर्मी से अपने लोगों का बचाव करती रही, वहीं भाजपा ने फंड के लिए मात्र एक लाख रुपये ले लेने पर अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष बंगारू लक्षमण को हटाने में तनिक भी विलंब नहीं किया। झूठे ताबूत घोटाला के आरोप पर तत्कालीन रक्षामंत्री जार्ज फर्नांडिस का इस्तीफा ले लिया। कर्नाटक में येदियुरप्पा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते ही उन्हें भाजपा से निष्कासित करने में कोई विलंब नहीं किया। ऐसे अनेक नैतिकता एवं आदर्श के प्रतिमानों को महत्व देने वाले अटलजी ने अपनी व्यक्तिगत नैतिकता के चलते एक वोट से अपनी सरकार गिरा डाली। एक सफल एवं सक्षम लोकतंत्र के लिये ऐसी ही नैतिक प्रतिबद्धताएं अपेक्षित होती है, लेकिन राजनीति के लिये इन्हें त्याज्य माना गया है। जब राजनीति में नैतिकता एवं शुचिता के साथ आगे बढ़ने का संकल्प होता है तो चुनावी संग्राम में हार का मुंह भी देखना पड़ता है, लेकिन जब से नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बने है एवं अमित शाह भाजपा अध्यक्ष बने हैं, उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम राम के नक्शे कदम पर चलने वाली भाजपा को कर्मयोगी श्रीकृष्ण की राह पर ले आए हैं। जिस तरह श्रीकृष्ण अधर्मी को मारने में किसी भी प्रकार की कोताही नहीं करते हैं। छल हो तो छल से, कपट हो तो कपट से, अनीति हो तो अनीति से नष्ट करना ही उनका ध्येय होता है। इसीलिए वे अर्जुन को सिर्फ कर्म करने की शिक्षा देते हैं। मोदी एवं शाह भी कर्म करने में विश्वास कर राष्ट्र के अस्तित्व एवं अस्मिता को अक्षुण्ण रखने का उपक्रम करते रहे हैं। 
 
आजादी के सात दशक की यात्रा में न केवल देश की अस्मिता एवं अस्तित्व पर ग्रहण लगा बल्कि लोकतंत्र भी अंधकार की ओट में आ गया। राष्ट्र में ये ग्रहणपूर्ण स्थितियां मनुष्य जीवन के घोर अंधेरों की ही निष्पत्ति कही जा सकती है। यहां मतलब है मनुष्य की विडम्बनापूर्ण और यातनापूर्ण स्थिति से। दुःख-दर्द भोगती और अभावों-चिन्ताओं में रीतती उसकी हताश-निराश जिन्दगी से। उसे इस लम्बे दौर में किसी भी स्तर पर कुछ नहीं मिला। उसकी उत्कट आस्था और अदम्य विश्वास को राजनीतिक विसंगतियों, सरकारी दुष्ट नीतियों, सामाजिक तनावों, आर्थिक दबावों, प्रशासनिक दोगलेपन और व्यावसायिक स्वार्थपरता ने लील लिया था। लोकतन्त्र भीड़तन्त्र में बदल गया था। दिशाहीनता और मूल्यहीनता बढ़ती रही है, प्रशासन चरमरा रहा था। भ्रष्टाचार के जबड़े खुले थें, साम्प्रदायिकता की जीभ लपलपा रही थी और दलाली करती हुई कुर्सियां भ्रष्ट व्यवस्था की आरतियां गा रही थीं। उजाले की एक किरण के लिए आदमी की आंख तरस रही थी और हर तरफ से केवल आश्वासन बरस रहे थें। सच्चाई, ईमानदारी, भरोसा और भाईचारा जैसे शब्द शब्दकोषों में जाकर दुबक गये थें। व्यावहारिक जीवन में उनका कोई अस्तित्व नहीं रह गया था। इस विसंगतिपूर्ण दौर में भाजपा ने शहद में लिपटी कड़वी दवा के रूप में घावों पर मरहम का काम किया है। कुल मिलाकर सार यह है कि, अभी देश दुश्मनों से घिरा हुआ है, नाना प्रकार के षडयंत्र रचे जा रहे हैं। देश को बचाने के लिये नैतिकता से काम नहीं चलेगा, उसके लिये सशक्त एवं विजनरी सत्ता जरूरी है। बिना सत्ता के कुछ भी संभव नहीं हैं। भगवान कृष्ण ने कहा, अभिमन्यु को घेर कर मारने वाले और द्रौपदी को भरी दरबार में वेश्या कहने वाले के मुख से धर्म, नैतिकता, मर्यादा एवं अनुशासन की बातें शोभा नहीं देती। आज चुनावी महासंग्राम में विभिन्न राजनीतिक दल जिस तरह से संविधान, नैतिकता एवं धर्म  की बात कर रहे है तो लग रहा है जैसे हम पुनः महाभारत युग में आ गए हैं। जरूरी है कि जिस तरह महाभारत में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को नहीं चूकने दिया था, देश की जनता श्रीकृष्ण बनकर नरेन्द्र मोदी रूपी अर्जुन को भी नहीं चूकने दे। देश में आज सक्षम एवं सार्थक विपक्ष नहीं है जिसके साथ नैतिकता का खेल खेला जाए।
 
 
आज देश के जिस तरह के जटिल हालात है, राजनीतिक दल सत्ता एवं स्वार्थ की दौड़ में राष्ट्र को भुलते रहे हैं, उनमें यह प्रसंग हमारे लिये प्रेरणा बन सकता है। बहुत पुरानी बात है। एक राजा ने एक पत्थर को बीच सड़क पर रख दिया और खुद एक बड़े पत्थर के पीछे जाकर छिप गया। उस रास्ते से कई राहगीर गुजरे। किन्तु वे पत्थर को रास्ते से हटाने की जगह राजा की लापरवाहियों की जोर-जोर से बुराइयां करते और आगे बढ़ जाते। कुछ दरबारी वहां आए और सैनिकों को पत्थर हटाने का आदेश देकर चले गए। सैनिकों ने उस बात को सुना-अनसुना कर दिया, लेकिन पत्थर को किसी ने नहीं हटाया।
 
उसी रास्ते से एक किसान जा रहा था। उसने सड़क पर रखे पत्थर को देखा। रुककर अपना सामान उतारा और उस पत्थर को सड़क के किनारे लगाने की कोशिश करने लगा। बहुत कोशिशों के बाद अंत में उसे सफलता मिल गई। पत्थर को हटाने के बाद जब वह अपना सामान वापस उठाने लगा तो उसने देखा कि जहां पत्थर रखा हुआ था वहां एक पोटली पड़ी है। उसने पोटली को खोलकर देखा। उसमें उसे हजार मोहरें और राजा का एक पत्र मिला। जिसमें लिखा था- यह मोहरें उसके लिए हैं, जिसने मार्ग की बाधा को दूर किया।  यह प्रसंग हर बाधा में हमें अपनी स्थिति को सुधारने की प्रेरणा देती है। चुनावों का समय किसान बनने का समय है जो राष्ट्र की बाधा रूपी पत्थर को हटाये।
 
 
समय के इस विषम दौर में आज आवश्यकता है आदमी और आदमी के बीच सम्पूर्ण अन्तर्दृष्टि और संवेदना के सहारे सह-अनुभूति की भूमि पर पारस्परिक संवाद की, मानवीय मूल्यों के पुनस्र्थापना की, धार्मिक, राजनैतिक, सामाजिक और चारित्रिक क्रांति की। आवश्यकता है कि राष्ट्रीय अस्मिता के चारों ओर लिपटे अंधकार के विषधर पर मतदाता अपनी पूरी ऊर्जा और संकल्पशक्ति के साथ प्रहार करे तथा वर्तमान की हताशा में से नये विहान और आस्था के उजालों का आविष्कार करे। सदियों की गुलामी और स्वयं की विस्मृति का काला पानी हमारी नसों में अब भी बह रहा है। इन  हालातों में भारत ने कितनी सदियों बाद खुद को आगे बढ़ता देखा है। यह लंबा इतिहास, जो हमारी परम्पराओं में पैठ चुका था, हमें भविष्य को लेकर ज्यादा आशावादी होने से बचना सिखाता रहा। यह जंगल का सरवाइकल मंत्र है कि डर कर रहो, हर आहट पर संदेह करो, हर चमकती चीज को दुश्मन समझो और नाराजगी कायम रखो। इसलिए आम जनता को गुमराह करने वाली राजनीति को समझना होगा। अगर आमदनी बढ़ रही है, तो उसमें जरूर कोई दमघोंटू फंदा छिपा होगा, तरक्की जरूर बर्बादी की आहट है, विकास में गुलामी के बीज जरूर मौजूद है- विपक्षी दलों द्वारा रोपी गयी इन मानसिकताओं से उबरे बिना हम वास्तविक तरक्की की ओर अग्रसर नहीं हो सकते। जीवन की तेजस्विता के लिये हमारे पास तीन मानक हैं- अनुभूति के लिये हृदय, चिन्तन और कल्पना के लिये मस्तिष्क और कार्य के लिये मजबूत हाथ। यदि हमारे पास हृदय है पर पवित्रता नहीं, मस्तिष्क है पर सही समय पर सही निर्णय लेने का विवेकबोध नहीं, मजबूत हाथ हैं पर क्रियाशीलता नहीं तो जिन्दगी की सार्थक तलाश अधूरी है।           
 
ललित गर्ग

अहमदाबाद। योग गुरु रामदेव ने रविवार को राम मंदिर के निर्माण के लिए अध्यादेश लाने की मांग करते हुए कहा कि अगर अयोध्या में मंदिर का निर्माण नहीं हुआ तो लोगों का भाजपा पर से भरोसा उठ जाएगा। उन्होंने कहा, ‘एक लोकतंत्र में संसद न्याय के लिए शीर्ष मंदिर है और नरेंद्र मोदी सरकार राम मंदिर निर्माण के लिए एक अध्यादेश ला सकती है।’ योग गुरु ने कहा, ‘अगर मंदिर नहीं बना, वह भी तब जब करोड़ों लोग उसे बनते हुए देखना चाहते हैं तो लोगों का भाजपा पर से भरोसा उठ जाएगा जो पार्टी के लिए अच्छा नहीं होगा।’

रामदेव की यह टिप्पणी अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण में तेजी लाने की मांग के बीच आयी है। उन्होंने कहा, ‘राम राजनीति का विषय नहीं हैं बल्कि देश का गौरव हैं। राम हमारे पूर्वज हैं, हमारी संस्कृति, गौरव और हमारी आत्मा हैं। उन्हें राजनीति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि अगर लोगों को खुद से मंदिर बनाना है तो इसका मतलब होगा कि वे या तो न्यायपालिका या संसद का सम्मान नहीं करते। पिछले सप्ताह, देश के विभिन्न हिस्सों से ‘राम भक्त’ मंदिर के निर्माण पर जोर देने के लिए एक दक्षिण पंथी समूह विश्व हिंदू परिषद द्वारा आयोजित जनसभा में भाग लेने के लिए एकत्रित हुए थे।

छत्तीसगढ़ में वापसी को लेकर कांग्रेस पार्टी के भले अपने दावे हों लेकिन इन दिनों उसे एक नया डर भी सता रहा है। यह डर उसके जीतने वाले विधायकों की खरीद-फरोख्त का है। पिछले दिनों राहुल गांधी की अध्यक्षता में एक बैठक हुई जिसमें जीत के आगे की रणनीति तय की गई है।

 

28 नवंबर को कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय, राजीव भवन में प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया, पीसीसी अध्यक्ष भूपेश बघेल, नेता-प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में 90 प्रत्याशियों की बैठक हुई थी। यहां तय किया गया कि चुनाव के परिणाम जारी होते ही सभी विधायक रायपुर के लिए रवाना हो जाएंगे। पार्टी का मानना है कि अपने निर्वाचन क्षेत्र में रात से उन पर दबाव बनाया जा सकता है।

रायपुर में क्या होगा यह पार्टी हाई कमान तय कर चुका है। पिछले तीन विधानसभा चुनावों के मुकाबले कांग्रेस ने इस बार अलग तरह की रणनीति बनाई है।

विधायकों के मोबाइल पर होगी नजर

पार्टी ने हर जिले में पदाधिकारियों की एक टीम बनाने का फैसला किया है। टीम में शामिल सदस्यों का काम विधायकों को निश्चित स्थान तक पहुंचाने का होगा। आखिरी समय पर रायपुर की जगह विधायकों को किसी गोपनीय स्थान पर भी भेजा जा सकता है। पार्टी, विधायकों के मोबाइल की गतिविधियों पर भी नजर रखेगी।

जब भाजपा के 12 विधायकों की खरीद-फरोख्त का मामला सामने आया था

2003 में भाजपा सरकार बनाने की तैयारी कर रही थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी की चुनावों में हार हुई थी। इसी दौरान भाजपा के विधायकों को तोड़ने की कोशिश हुई और तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी का नाम सामने आया था। इसकी जांच भी हुई थी।

हीरा कारोबारी नीरव मोदी के भारत छोड़ने के बाद एक बड़ा खुलासा हुआ है। एक महत्वपूर्ण आयकर जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि नीरव मोदी के भारत छोड़ने से पहले आयकर विभाग ने एक रिपोर्ट साझा की थी। इस रिपोर्ट में नीरव मोदी द्वारा फर्जी खरीद, स्टोक को बढ़ाकर पेश करना, रिश्तेदारों को संदिग्ध भुगतान और संदिग्ध ऋण को लेकर नीरव के फर्जीवाड़े के बारे में चेताया गया था।

 

ये चेतावनी एजेंसी ने नीरव मोदी के पीएनबी घोटाले से आठ महीने पहले दी थी। बड़ी बात ये है कि ये महत्वपूर्ण आयकर जांच रिपोर्ट को किसी दूसरी जांच एजेंसी के साथ साझा नहीं किया गया। आयकर विभाग ने भगोड़ा हीरा कारोबारी नीरव मोदी और मेहुल चोकसी पर 10 हजार पन्नों की आयकर जांच रिपोर्ट को 8 जून 2017 में अंतिम रूप दे दिया था।

पर इस रिपोर्ट को अन्य दूसरी जांच एजेंसी, गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ), सीबीआई, ईडी, डीआरआई, के साथ फरवरी 2018 तक साझा नहीं किया गया। जब तक की पीएनबी घोटाला सार्वजनिक नहीं हो गया। 

सूत्रों ने कहा कि फरवरी 2018 से पहले कर विभाग ने क्षेत्रीय आर्थिक खुफिया परिषद (आरईआईसी) के साथ भी इस रिपोर्ट को साझा नहीं किया गया। आरईआईसी विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच जानकारी साझा करने के लिए एक तंत्र है।

बता दें कि नीरव और चोकसी और उनकी तीन साझेदारी फर्म, डायमंड 'आर' यूएस, सोलर निर्यात और तारकीय डायमंड्स पर पीएनबी से 13,500 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है। दोनों ने जनवरी 2018 के पहले हफ्ते यानि घोटाले का खुलासा होने से कुछ हफ्ते पहले भारत छोड़ दिया था।

गोरतलब है कि हीरा कारोबारी नीरव मोदी को भारत लाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। पर नीरव भारत नहीं आ सकता क्योंकि उसे यहां पर भीड़ हिंसा का शिकार होने का डर सता रहा है और उसकी तुलना रावण से की जा रही है। ये दलील शनिवार को विशेष कोर्ट के सामने पीएनबी के 13000 करोड़ रुपये घोटाले के मुख्य आरोपी और भगोड़े नीरव के वकील ने पेश की।

उनके दावे को खारिज करते हुए ईडी ने कहा कि यदि उसे अपनी जान को खतरा महसूस हो रहा है तो उसे पुलिस शिकायत दर्ज करानी चाहिए। नीरव मोदी के वकील विजय अग्रवाल प्रीवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) कोर्ट के जज एमएस आजमी के सामने पेश हुए। उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से भगोड़ा आर्थिक अपराध कानून के तहत नीरव मोदी को भगोड़ा करार देने के आवेदन का विरोध किया।

उन्होंने कहा कि कारोबारी ने ईमेल के जरिये जांच एजेंसी के सवालों का जवाब दे दिया है। उन्होंने सुरक्षा खतरों के चलते भारत लौटने में असमर्थता जताई। अग्रवाल ने कहा कि ईडी नीरव को इस आधार पर भगोड़ा घोषित करवाना चाहता है कि उन्होंने एक जनवरी 2018 को संदिग्ध परिस्थितियों में देश छोड़ा था, जबकि हकीकत यह है कि उस वक्त उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं था। नीरव जब देश से गए, तब उन पर कोई एनपीए नहीं था। 

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को खुली सीमाओं का आह्वान करते हुए कहा कि सीमाओं के पार व्यापार हमारे समय की आर्थिक अनिवार्यता है और मुक्त व्यापार के अवरोधों को समाप्त किया जाना चाहिये। जेटली की यह टिप्पणी ऐसे समय में आयी है जब विश्व भर में शुल्क युद्ध की चिंताएं बढ़ रही हैं। अमेरिका द्वारा कुछ देशों के साथ व्यापार संतुलन बनाने के लिये इस्पात समेत कई उत्पादों पर शुल्क लगाने के बाद ये चिंताएं और तेज हुई हैं।

 

जेटली ने वर्ल्ड कस्टम्स ऑर्गेनाइजेशन पॉलिसी कमिश्नरेट की 80वीं बैठक को वीडियो लिंक के जरिये संबोधित करते हुए कहा, ‘‘सीमाओं के पार व्यापार हमारे समय की आर्थिक अनिवार्यता है और आने वाले समय के साथ बढ़ने ही वाला है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह सभी देशों के व्यापक हित में है कि वे व्यापार की बाधाओं को हरसंभव स्तर तक दूर करें।’’ 

जेटली ने कहा कि कोई भी देश सारी वस्तुओं का विनिर्माण नहीं कर सकता है और न ही कम कीमत पर श्रेष्ठ गुणवत्ता की चाह रखने वाले उपभोक्ताओं की जरूरत के हिसाब से हर तरह की सेवाओं में विशेषज्ञता हासिल कर सकता है। इसीलिये मुक्त व्यापार जरूरी है। उन्होंने कहा कि विश्व भर में राष्ट्रों को यह महसूस होने लगा है कि व्यापार बढ़ने से न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था बल्कि खुद की अर्थव्यवस्था को भी फायदा होता है।

वित्त मंत्री ने सीमाओं के पार व्यापार सुविधाएं बेहतर करने तथा विश्व के श्रेष्ठ मानकों का अनुपालन करने के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता भी दोहराया। जेटली ने कहा कि सरकार द्वारा उठाये गये कदमों से देश को व्यापार रैंकिंग में 146वें स्थान से छलांग लगाकर इस साल 80वें स्थान पर पहुंचने में मदद मिली है।

तेलंगाना में विधानसभा चुनाव से पहले नेताओं में छिड़ी जुबानी जंग रुकने का नाम नहीं ले रही है। बड़े भाई और एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी पर योगी आदित्यनाथ के बयान पर अकबरुद्दीन ओवैसी ने पीएम मोदी और सीएम योगी को लेकर विवादित बयान दिया है। हैदराबाद के चारमीनार विधानसभा क्षेत्र में रैली को संबोधित करते हुए अकबरुद्दीन ने कहा कि ''चाय वाले, हमें मत छेड़, चाय-चाय चिल्लाते हो, याद रखो इतना बोलूंगा-इतना मारूंगा कि कान में से पीप निकलने लगेगा, खून निकलने लगेगा''।

 अकबरुद्दीन ओवैसी ने आगे कहा कि, ''आज एक और आया, वो कैसे-कैसे कपड़े पहनता है, तमाशे जैसा दिखता है। किस्मत से चीफ मिनिस्टर भी बन गया, कह रहा है निजाम की तरह ओवैसी को भगाऊंगा, अरे तू क्या, तेरी हैसियत क्या, तेरी बिसात क्या, तेरे जैसे 56 आए और चले गए, अरे ओवैसी को छोड़ो, उसकी आने वाली 1000 नस्लें भी इस मुल्क में रहेंगी और तुझसे लड़ेंगे। तेरा मुकाबला करेंगे और तेरी मुखालफत करेंगे''।

 
बता दें कि इससे पहले योगी आदित्यनाथ ने एक चुनावी रैली में असदुद्दीन ओवैसी पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि तेलंगाना में भाजपा सत्ता में आई तो ओवैसी को हैदराबाद से उसी तरह से भागना पड़ेगा जैसे निजाम भागा था। भाजपा सरकार सभी को सुरक्षा मुहैया कराएगी लेकिन अराजकता फैलाने वालों को छोड़ेगी नहीं। विकाराबाद जिले के तंदूर कस्बे में लोगों को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस और टीआरएस पर मुस्लिमों के तुष्टिकरण और धर्म के आधार पर योजनाएं बनाने का आरोप लगाया। 

उन्होंने कहा कि भाजपा नीतियां बनाने में धर्म, जाति या वर्ग के आधार पर भेदभाव नहीं करती है। उधर, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने आरोप लगाया कि टीआरएस और कांग्रेस, दोनों ही पार्टियां अल्पसंख्यकों के तुष्टिकरण का काम कर रही हैं। इसीलिए एआईएमआईएम के असदुद्दीन औवेसी ने कहा कि राज्य में कोई भी मुख्यमंत्री बने, उसे उनकी पार्टी के आगे झुकना पड़ेगा। 

गौरतलब है कि तेलंगाना में बुधवार यानी 5 दिसंबर को चुनाव प्रचार खत्म होगा। टीआरएस जहां अकेले 107 सीटों पर सत्ता में वापसी के लिए चुनाव लड़ रही है, वहीं कांग्रेस ने वहां ‘प्रजा कुटामी’ (पीपुल्स एलांयस) के नाम से तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी), भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी (सीपीआई) और तेलंगाना जन समिति (टीजेएस) के साथ गठबंधन किया है। इनमें कांग्रेस के 94 सीटों पर प्रत्याशी हैं। भाजपा अकेले चुनाव मैदान में है।  

उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को महाराष्ट्र सरकार को कोरेगांव-भीमा हिंसा मामले में गिरफ्तार मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुणे की एक अदालत में दाखिल आरोपपत्र को उसके सामने पेश करने का निर्देश दिया। 
 
प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वह आरोपियों के खिलाफ आरोपों को देखना चाहती है। पीठ ने महाराष्ट्र सरकार की ओर से पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी से पुणे की विशेष अदालत में राज्य पुलिस द्वारा दाखिल आरोपपत्र को आठ दिसंबर तक उसके समक्ष जमा करने को कहा।

पीठ में न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति के एम जोसफ भी हैं। पीठ बंबई उच्च न्यायालय के एक आदेश के खिलाफ राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई कर रही थी। उच्च न्यायालय ने मामले में जांच रिपोर्ट दाखिल करने के लिए 90 दिन की समय सीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया था।

पीठ ने अब अगली सुनवाई के लिए 11 दिसंबर की तारीख तय की है।

इससे पहले शीर्ष अदालत ने बंबई उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी थी।

पुणे पुलिस ने माओवादियों के साथ कथित संपर्कों को लेकर वकील सुरेंद्र गाडलिंग, नागपुर विश्वविद्यालय की प्रोफेसर शोमा सेन, दलित कार्यकर्ता सुधीर धवले, कार्यकर्ता महेश राउत और केरल निवासी रोना विल्सन को जून में गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया था।
 
 

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, टीआरएस के मुखिया के चंद्रशेखर राव और एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी "एक" ही हैं। साथ ही राहुल गांधी ने तेलंगाना की जनता से कहा कि वे इन लोगों के झांसे में नहीं आएं। 

 गांधी ने यह दावा भी किया कि तेलंगाना राष्ट्र समिति भाजपा की "बी टीम" है और उसके प्रमुख के चंद्रशेखर राव प्रधानमंत्री मोदी के लिए "तेलंगाना रबर स्टांप" की तरह काम करते हैं। 


राहुल ने ट्वीट किया, "ओवैसी की एआईएमआईएम भाजपा की "सी टीम" है, जिसका काम है भाजपा/केसीआर विरोधी मतों को तोड़ना।" 

कांग्रेस प्रमुख ने कहा, "तेलंगाना की महान जनता मोदी, केसीआर और ओवैसी भले ही अलग-अलग जुबान में बात करते हैं लेकिन वे हैं एक ही। आप उनके झांसे में नहीं आएं।" 
 

इससे पहले, एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा था कि तेलंगाना का जन्म ही आदर्शवाद और महान सपनों के साथ हुआ था लेकिन टीआरएस/भाजपा के चार साल की नाकामी, दंभ और भ्रष्टाचार ने यहां के लोगों के मन को संशय से भर दिया है। 

तेलंगाना के गडवाल में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा, "यह दुख की बात है कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने पिछले 5 वर्षों में मोदी को बहुत मदद की।  उन्होंने उन्हें राष्ट्रपति चुनाव और उपराष्ट्रपति चुनाव में मदद की। हर किसी ने नोटबंदी का विरोध किया लेकिन केसीआर ने दबाव में इसकी सराहना की। उन्होंने गब्बर सिंह टैक्स (जीएसटी) की भी सराहना की। 

कोयला घोटाला मामले में दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को कहा कि वह पश्चिम बंगाल में एक निजी कंपनी को कोयला खदान आवंटन में अनियमितताओं के लिये दोषी ठहराए गए पूर्व कोयला सचिव एच सी गुप्ता और पांच अन्य को 5 दिसंबर को सजा सुनाएगी।

 

विशेष न्यायाधीश भरत पाराशर ने सजा की अवधि को लेकर दलीलों पर सुनवाई पूरी कर ली है। सीबीआई ने पांचों दोषियों को अधिकतम सात साल के कारावास और निजी कंपनी पर भारी जुर्माना लगाने की मांग की।

गुप्ता और चार अन्य दोषियों के वकील ने सजा में नरमी बरते जाने की मांग की है। गुप्ता के वकील ने कहा कि वह 70 साल के हैं और विभिन्न बीमारियों से पीड़ित हैं। उनके परिवार का गुजारा चलाने के लिये उनके पास सिर्फ पेंशन का सहारा है।

गत 30 नवंबर को अदालत ने गुप्ता, निजी फर्म विकास मेटल्स एंड पावर लिमिटेड के साथ-साथ कोयला मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद पर रहे और अभी भी सेवारत के एस क्रोफा और कोयला मंत्रालय में तत्कालीन निदेशक (सीए-1) के सी सामरिया को मामले में दोषी ठहराया था।

अदालत ने कंपनी के प्रबंध निदेशक विकास पाटनी और उसके अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता आनंद मलिक को भी मामले में दोषी ठहराया था।

यह मामला पश्चिम बंगाल में मोइरा और मधुजोर (उत्तर और दक्षिण) कोयला खदानों को वीएमपीएल को देने में कथित अनियमितताओं से संबंधित है। सीबीआई ने सितंबर 2012 में इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी।

पांचों राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव परिणाम लोकसभा चुनाव के लिए बड़ी हलचल साबित करने वाले होंगे। भाजपा तो अभी से इन्हें लोकसभा चुनावों के रास्ते के एक पड़ाव के रूप में देख रही है। अगर दिल्ली में लोकसभा चुनाव की तैयारी के लिहाज से बात की जाये तो आम आदमी पार्टी अपने दोनों प्रतिद्वंदियों से काफी आगे है। पार्टी ने अभी से न सिर्फ लोकसभा चुनाव क्षेत्र के प्रभारी तय कर दिए हैं, बल्कि कमोबेश उम्मीदवारों के नाम भी तय हो गए हैं। 

 सभी लोकसभा प्रभारी अपने-अपने क्षेत्रों में जी जान से जुटे हुए हैं। आम आदमी पार्टी ने पिछले लोकसभा चुनावों से सीख लेते हुए इस बार बेहद जमीनी रणनीति पर काम करने का फैसला किया है। पार्टी के शीर्ष नेताओं ने चुनावी तैयारी को सिर्फ निचले स्तर के कार्यकर्ताओं के भरोसे नहीं छोड़ा है। खुद पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल और दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया रोज निचले स्तर पर मीटिंग ले रहे हैं।


आतिशी की आतिशी पारी 

आम आदमी पार्टी ने पूर्वी दिल्ली से आतिशी को लोकसभा प्रभारी बनाया है। माना जा रहा है कि वही लोकसभा चुनाव में पार्टी की तरफ से चुनाव लड़ेंगी। उनका मुकाबला महेश गिरी से होने वाला है जो पूर्वी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से इस समय भाजपा सांसद हैं। आर्ट ऑफ लिविंग के प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर का साथ छोड़ राजनीति में आये महेश गिरी को क्षेत्र में अभी भी राजनेता कम और आध्यात्मिक गुरु के रूप में ज्यादा जाना जाता है। वे पार्टी के केंद्रीय नेताओं और प्रदेश के शीर्ष नेताओं से सम्बंध बनाने के लिए ज्यादा जाने जाते हैं जबकि जमीनी स्तर पर उनके कामकाज को लेकर अभी भी जनता अनभिज्ञ बनी हुई है। 

वहीं आम आदमी पार्टी की आतिशी रोजाना चार से पांच कार्यकर्ताओं, जिन्हें आम आदमी पार्टी की भाषा में वालंटियर कहा जाता है, उनके घर पर मिल रही हैं। अपने रोजाना के इस दिनचर्या में वे जिस भी कार्यकर्ता के घर पहुंचती हैं, दस से बीस लोगों के छोटे समूहों में लोगों से मिल रही हैं। इससे लोग न सिर्फ उन्हें व्यक्तिगत स्तर पर समझ रहे हैं, बल्कि उन्हें ये भरोसा भी पैदा हो रहा है कि वे उनके पिछले नेता से कहीं बेहतर साबित होंगी जिनका चेहरा उन्होंने लम्बे समय से नहीं देखा है। 

आतिशी के चुनाव प्रबंधन की जिम्मेदारी देख रहे अक्षय मराठे अमर उजाला से बात करते हुए कहते हैं, हम एक भी भाजपा नेता की कमी जनता से 'डिस्कस' नहीं करते। हम सिर्फ उनसे ये पूछते हैं कि आपके आसपास वह कौन सा काम है जो आपके सांसद ने करवाया है जिसका फायदा आपको या आपके बच्चों को मिल रहा है। अक्षय के मुताबिक अक्सर लोगों के पास उनके इस सवाल का कोई जवाब नहीं होता। ऐसे में उनका काम तब आसान हो जाता है जब वे लोगों को यह बताते हैं कि उनके बच्चे जिस स्कूल में पढ़ रहे हैं, उनमें दिल्ली सरकार की वजह से क्या परिवर्तन आया है। मोहल्ला क्लिनिक में उनके तत्काल मुफ्त इलाज ने जनता के मन में आप के लिए एक भरोसा पैदा किया है। और यह भरोसा ही हमारी पूंजी है। अक्षय के मुताबिक अब तक वे पूर्वी दिल्ली के सात हजार घरों के लोगों से व्यक्तिगत स्तर पर मिल चुके हैं। 

बात सिर्फ पूर्वी दिल्ली तक सीमित नहीं है। उत्तर पूर्वी दिल्ली से दिलीप पांडेय को प्रभारी बनाया गया है। यहां से भाजपा के मनोज तिवारी सांसद हैं। वे अपनी स्टार छवि के कारण लोकप्रिय तो बहुत हैं लेकिन ज़मीनी स्तर पर अभी भी कम सक्रिय हैं जबकि दिलीप पांडेय पार्टी की रणनीति के मुताबिक रोजाना बैठकें कर रहे हैं। सुबह से शुरू होने वाली बैठकों का सिलसिला देर रात तक चलता रहता है। आम आदमी पार्टी के पंकज गुप्ता व्यापारियों के छोटे-छोटे समूह में बैठकें ले रहे हैं। उनकी कोशिश दिल्ली के चांदनी चौक और नई दिल्ली के व्यापारी समुदाय में घुसपैठ करना है। उनके हाथ में नोटबन्दी और जीएसटी का हथियार है जिससे वे व्यापारियों को अपने पक्ष में करने में जुटे हैं। 

कांग्रेस खेमा सबसे पीछे

दिल्ली की लड़ाई में कांग्रेस अब तक सक्रिय नहीं है। अजय माकन अभी भी पार्टी के दिग्गजों को एक साथ एक मंच पर लाकर अपनी मजबूती दिखाने में असफल रहे हैं। प्रदेश स्तर के शीर्ष नेताओं से साथ न मिलने के कारण उनका प्रयास भी बहुत सफल नहीं रहा है। अरविंदर सिंह लवली, जयप्रकाश अग्रवाल, महाबल मिश्रा और संदीप दीक्षित जैसे उसके बड़े चहरे अभी भी सक्रिय नहीं हैं। एमसीडी चुनाव ने भी पार्टी को अपनी बड़ी जीत के लिए आश्वस्त नहीं किया है। अगर पार्टी नेतृत्व इस मुद्दे को समय रहते गम्भीरता से नहीं लेता तो लोकसभा चुनाव में भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच सीधी टक्कर होना तय है जिसका फायदा भाजपा को मिल सकता है।

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