ईश्वर दुबे
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अहमदाबाद। योग गुरु रामदेव ने रविवार को राम मंदिर के निर्माण के लिए अध्यादेश लाने की मांग करते हुए कहा कि अगर अयोध्या में मंदिर का निर्माण नहीं हुआ तो लोगों का भाजपा पर से भरोसा उठ जाएगा। उन्होंने कहा, ‘एक लोकतंत्र में संसद न्याय के लिए शीर्ष मंदिर है और नरेंद्र मोदी सरकार राम मंदिर निर्माण के लिए एक अध्यादेश ला सकती है।’ योग गुरु ने कहा, ‘अगर मंदिर नहीं बना, वह भी तब जब करोड़ों लोग उसे बनते हुए देखना चाहते हैं तो लोगों का भाजपा पर से भरोसा उठ जाएगा जो पार्टी के लिए अच्छा नहीं होगा।’
रामदेव की यह टिप्पणी अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण में तेजी लाने की मांग के बीच आयी है। उन्होंने कहा, ‘राम राजनीति का विषय नहीं हैं बल्कि देश का गौरव हैं। राम हमारे पूर्वज हैं, हमारी संस्कृति, गौरव और हमारी आत्मा हैं। उन्हें राजनीति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि अगर लोगों को खुद से मंदिर बनाना है तो इसका मतलब होगा कि वे या तो न्यायपालिका या संसद का सम्मान नहीं करते। पिछले सप्ताह, देश के विभिन्न हिस्सों से ‘राम भक्त’ मंदिर के निर्माण पर जोर देने के लिए एक दक्षिण पंथी समूह विश्व हिंदू परिषद द्वारा आयोजित जनसभा में भाग लेने के लिए एकत्रित हुए थे।
छत्तीसगढ़ में वापसी को लेकर कांग्रेस पार्टी के भले अपने दावे हों लेकिन इन दिनों उसे एक नया डर भी सता रहा है। यह डर उसके जीतने वाले विधायकों की खरीद-फरोख्त का है। पिछले दिनों राहुल गांधी की अध्यक्षता में एक बैठक हुई जिसमें जीत के आगे की रणनीति तय की गई है।
28 नवंबर को कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय, राजीव भवन में प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया, पीसीसी अध्यक्ष भूपेश बघेल, नेता-प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में 90 प्रत्याशियों की बैठक हुई थी। यहां तय किया गया कि चुनाव के परिणाम जारी होते ही सभी विधायक रायपुर के लिए रवाना हो जाएंगे। पार्टी का मानना है कि अपने निर्वाचन क्षेत्र में रात से उन पर दबाव बनाया जा सकता है।
रायपुर में क्या होगा यह पार्टी हाई कमान तय कर चुका है। पिछले तीन विधानसभा चुनावों के मुकाबले कांग्रेस ने इस बार अलग तरह की रणनीति बनाई है।
पार्टी ने हर जिले में पदाधिकारियों की एक टीम बनाने का फैसला किया है। टीम में शामिल सदस्यों का काम विधायकों को निश्चित स्थान तक पहुंचाने का होगा। आखिरी समय पर रायपुर की जगह विधायकों को किसी गोपनीय स्थान पर भी भेजा जा सकता है। पार्टी, विधायकों के मोबाइल की गतिविधियों पर भी नजर रखेगी।
2003 में भाजपा सरकार बनाने की तैयारी कर रही थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी की चुनावों में हार हुई थी। इसी दौरान भाजपा के विधायकों को तोड़ने की कोशिश हुई और तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी का नाम सामने आया था। इसकी जांच भी हुई थी।
हीरा कारोबारी नीरव मोदी के भारत छोड़ने के बाद एक बड़ा खुलासा हुआ है। एक महत्वपूर्ण आयकर जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि नीरव मोदी के भारत छोड़ने से पहले आयकर विभाग ने एक रिपोर्ट साझा की थी। इस रिपोर्ट में नीरव मोदी द्वारा फर्जी खरीद, स्टोक को बढ़ाकर पेश करना, रिश्तेदारों को संदिग्ध भुगतान और संदिग्ध ऋण को लेकर नीरव के फर्जीवाड़े के बारे में चेताया गया था।
ये चेतावनी एजेंसी ने नीरव मोदी के पीएनबी घोटाले से आठ महीने पहले दी थी। बड़ी बात ये है कि ये महत्वपूर्ण आयकर जांच रिपोर्ट को किसी दूसरी जांच एजेंसी के साथ साझा नहीं किया गया। आयकर विभाग ने भगोड़ा हीरा कारोबारी नीरव मोदी और मेहुल चोकसी पर 10 हजार पन्नों की आयकर जांच रिपोर्ट को 8 जून 2017 में अंतिम रूप दे दिया था।
पर इस रिपोर्ट को अन्य दूसरी जांच एजेंसी, गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ), सीबीआई, ईडी, डीआरआई, के साथ फरवरी 2018 तक साझा नहीं किया गया। जब तक की पीएनबी घोटाला सार्वजनिक नहीं हो गया।
सूत्रों ने कहा कि फरवरी 2018 से पहले कर विभाग ने क्षेत्रीय आर्थिक खुफिया परिषद (आरईआईसी) के साथ भी इस रिपोर्ट को साझा नहीं किया गया। आरईआईसी विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच जानकारी साझा करने के लिए एक तंत्र है।
बता दें कि नीरव और चोकसी और उनकी तीन साझेदारी फर्म, डायमंड 'आर' यूएस, सोलर निर्यात और तारकीय डायमंड्स पर पीएनबी से 13,500 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है। दोनों ने जनवरी 2018 के पहले हफ्ते यानि घोटाले का खुलासा होने से कुछ हफ्ते पहले भारत छोड़ दिया था।
गोरतलब है कि हीरा कारोबारी नीरव मोदी को भारत लाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। पर नीरव भारत नहीं आ सकता क्योंकि उसे यहां पर भीड़ हिंसा का शिकार होने का डर सता रहा है और उसकी तुलना रावण से की जा रही है। ये दलील शनिवार को विशेष कोर्ट के सामने पीएनबी के 13000 करोड़ रुपये घोटाले के मुख्य आरोपी और भगोड़े नीरव के वकील ने पेश की।
उनके दावे को खारिज करते हुए ईडी ने कहा कि यदि उसे अपनी जान को खतरा महसूस हो रहा है तो उसे पुलिस शिकायत दर्ज करानी चाहिए। नीरव मोदी के वकील विजय अग्रवाल प्रीवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) कोर्ट के जज एमएस आजमी के सामने पेश हुए। उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से भगोड़ा आर्थिक अपराध कानून के तहत नीरव मोदी को भगोड़ा करार देने के आवेदन का विरोध किया।
उन्होंने कहा कि कारोबारी ने ईमेल के जरिये जांच एजेंसी के सवालों का जवाब दे दिया है। उन्होंने सुरक्षा खतरों के चलते भारत लौटने में असमर्थता जताई। अग्रवाल ने कहा कि ईडी नीरव को इस आधार पर भगोड़ा घोषित करवाना चाहता है कि उन्होंने एक जनवरी 2018 को संदिग्ध परिस्थितियों में देश छोड़ा था, जबकि हकीकत यह है कि उस वक्त उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं था। नीरव जब देश से गए, तब उन पर कोई एनपीए नहीं था।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को खुली सीमाओं का आह्वान करते हुए कहा कि सीमाओं के पार व्यापार हमारे समय की आर्थिक अनिवार्यता है और मुक्त व्यापार के अवरोधों को समाप्त किया जाना चाहिये। जेटली की यह टिप्पणी ऐसे समय में आयी है जब विश्व भर में शुल्क युद्ध की चिंताएं बढ़ रही हैं। अमेरिका द्वारा कुछ देशों के साथ व्यापार संतुलन बनाने के लिये इस्पात समेत कई उत्पादों पर शुल्क लगाने के बाद ये चिंताएं और तेज हुई हैं।
जेटली ने वर्ल्ड कस्टम्स ऑर्गेनाइजेशन पॉलिसी कमिश्नरेट की 80वीं बैठक को वीडियो लिंक के जरिये संबोधित करते हुए कहा, ‘‘सीमाओं के पार व्यापार हमारे समय की आर्थिक अनिवार्यता है और आने वाले समय के साथ बढ़ने ही वाला है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह सभी देशों के व्यापक हित में है कि वे व्यापार की बाधाओं को हरसंभव स्तर तक दूर करें।’’
जेटली ने कहा कि कोई भी देश सारी वस्तुओं का विनिर्माण नहीं कर सकता है और न ही कम कीमत पर श्रेष्ठ गुणवत्ता की चाह रखने वाले उपभोक्ताओं की जरूरत के हिसाब से हर तरह की सेवाओं में विशेषज्ञता हासिल कर सकता है। इसीलिये मुक्त व्यापार जरूरी है। उन्होंने कहा कि विश्व भर में राष्ट्रों को यह महसूस होने लगा है कि व्यापार बढ़ने से न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था बल्कि खुद की अर्थव्यवस्था को भी फायदा होता है।
वित्त मंत्री ने सीमाओं के पार व्यापार सुविधाएं बेहतर करने तथा विश्व के श्रेष्ठ मानकों का अनुपालन करने के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता भी दोहराया। जेटली ने कहा कि सरकार द्वारा उठाये गये कदमों से देश को व्यापार रैंकिंग में 146वें स्थान से छलांग लगाकर इस साल 80वें स्थान पर पहुंचने में मदद मिली है।
तेलंगाना में विधानसभा चुनाव से पहले नेताओं में छिड़ी जुबानी जंग रुकने का नाम नहीं ले रही है। बड़े भाई और एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी पर योगी आदित्यनाथ के बयान पर अकबरुद्दीन ओवैसी ने पीएम मोदी और सीएम योगी को लेकर विवादित बयान दिया है। हैदराबाद के चारमीनार विधानसभा क्षेत्र में रैली को संबोधित करते हुए अकबरुद्दीन ने कहा कि ''चाय वाले, हमें मत छेड़, चाय-चाय चिल्लाते हो, याद रखो इतना बोलूंगा-इतना मारूंगा कि कान में से पीप निकलने लगेगा, खून निकलने लगेगा''।
बता दें कि इससे पहले योगी आदित्यनाथ ने एक चुनावी रैली में असदुद्दीन ओवैसी पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि तेलंगाना में भाजपा सत्ता में आई तो ओवैसी को हैदराबाद से उसी तरह से भागना पड़ेगा जैसे निजाम भागा था। भाजपा सरकार सभी को सुरक्षा मुहैया कराएगी लेकिन अराजकता फैलाने वालों को छोड़ेगी नहीं। विकाराबाद जिले के तंदूर कस्बे में लोगों को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस और टीआरएस पर मुस्लिमों के तुष्टिकरण और धर्म के आधार पर योजनाएं बनाने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि भाजपा नीतियां बनाने में धर्म, जाति या वर्ग के आधार पर भेदभाव नहीं करती है। उधर, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने आरोप लगाया कि टीआरएस और कांग्रेस, दोनों ही पार्टियां अल्पसंख्यकों के तुष्टिकरण का काम कर रही हैं। इसीलिए एआईएमआईएम के असदुद्दीन औवेसी ने कहा कि राज्य में कोई भी मुख्यमंत्री बने, उसे उनकी पार्टी के आगे झुकना पड़ेगा।
गौरतलब है कि तेलंगाना में बुधवार यानी 5 दिसंबर को चुनाव प्रचार खत्म होगा। टीआरएस जहां अकेले 107 सीटों पर सत्ता में वापसी के लिए चुनाव लड़ रही है, वहीं कांग्रेस ने वहां ‘प्रजा कुटामी’ (पीपुल्स एलांयस) के नाम से तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी), भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी (सीपीआई) और तेलंगाना जन समिति (टीजेएस) के साथ गठबंधन किया है। इनमें कांग्रेस के 94 सीटों पर प्रत्याशी हैं। भाजपा अकेले चुनाव मैदान में है।
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, टीआरएस के मुखिया के चंद्रशेखर राव और एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी "एक" ही हैं। साथ ही राहुल गांधी ने तेलंगाना की जनता से कहा कि वे इन लोगों के झांसे में नहीं आएं।
राहुल ने ट्वीट किया, "ओवैसी की एआईएमआईएम भाजपा की "सी टीम" है, जिसका काम है भाजपा/केसीआर विरोधी मतों को तोड़ना।"
कांग्रेस प्रमुख ने कहा, "तेलंगाना की महान जनता मोदी, केसीआर और ओवैसी भले ही अलग-अलग जुबान में बात करते हैं लेकिन वे हैं एक ही। आप उनके झांसे में नहीं आएं।"
इससे पहले, एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा था कि तेलंगाना का जन्म ही आदर्शवाद और महान सपनों के साथ हुआ था लेकिन टीआरएस/भाजपा के चार साल की नाकामी, दंभ और भ्रष्टाचार ने यहां के लोगों के मन को संशय से भर दिया है।
तेलंगाना के गडवाल में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा, "यह दुख की बात है कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने पिछले 5 वर्षों में मोदी को बहुत मदद की। उन्होंने उन्हें राष्ट्रपति चुनाव और उपराष्ट्रपति चुनाव में मदद की। हर किसी ने नोटबंदी का विरोध किया लेकिन केसीआर ने दबाव में इसकी सराहना की। उन्होंने गब्बर सिंह टैक्स (जीएसटी) की भी सराहना की।
कोयला घोटाला मामले में दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को कहा कि वह पश्चिम बंगाल में एक निजी कंपनी को कोयला खदान आवंटन में अनियमितताओं के लिये दोषी ठहराए गए पूर्व कोयला सचिव एच सी गुप्ता और पांच अन्य को 5 दिसंबर को सजा सुनाएगी।
विशेष न्यायाधीश भरत पाराशर ने सजा की अवधि को लेकर दलीलों पर सुनवाई पूरी कर ली है। सीबीआई ने पांचों दोषियों को अधिकतम सात साल के कारावास और निजी कंपनी पर भारी जुर्माना लगाने की मांग की।
गुप्ता और चार अन्य दोषियों के वकील ने सजा में नरमी बरते जाने की मांग की है। गुप्ता के वकील ने कहा कि वह 70 साल के हैं और विभिन्न बीमारियों से पीड़ित हैं। उनके परिवार का गुजारा चलाने के लिये उनके पास सिर्फ पेंशन का सहारा है।
गत 30 नवंबर को अदालत ने गुप्ता, निजी फर्म विकास मेटल्स एंड पावर लिमिटेड के साथ-साथ कोयला मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद पर रहे और अभी भी सेवारत के एस क्रोफा और कोयला मंत्रालय में तत्कालीन निदेशक (सीए-1) के सी सामरिया को मामले में दोषी ठहराया था।
अदालत ने कंपनी के प्रबंध निदेशक विकास पाटनी और उसके अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता आनंद मलिक को भी मामले में दोषी ठहराया था।
यह मामला पश्चिम बंगाल में मोइरा और मधुजोर (उत्तर और दक्षिण) कोयला खदानों को वीएमपीएल को देने में कथित अनियमितताओं से संबंधित है। सीबीआई ने सितंबर 2012 में इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी।
पांचों राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव परिणाम लोकसभा चुनाव के लिए बड़ी हलचल साबित करने वाले होंगे। भाजपा तो अभी से इन्हें लोकसभा चुनावों के रास्ते के एक पड़ाव के रूप में देख रही है। अगर दिल्ली में लोकसभा चुनाव की तैयारी के लिहाज से बात की जाये तो आम आदमी पार्टी अपने दोनों प्रतिद्वंदियों से काफी आगे है। पार्टी ने अभी से न सिर्फ लोकसभा चुनाव क्षेत्र के प्रभारी तय कर दिए हैं, बल्कि कमोबेश उम्मीदवारों के नाम भी तय हो गए हैं।
आतिशी की आतिशी पारी
आम आदमी पार्टी ने पूर्वी दिल्ली से आतिशी को लोकसभा प्रभारी बनाया है। माना जा रहा है कि वही लोकसभा चुनाव में पार्टी की तरफ से चुनाव लड़ेंगी। उनका मुकाबला महेश गिरी से होने वाला है जो पूर्वी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से इस समय भाजपा सांसद हैं। आर्ट ऑफ लिविंग के प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर का साथ छोड़ राजनीति में आये महेश गिरी को क्षेत्र में अभी भी राजनेता कम और आध्यात्मिक गुरु के रूप में ज्यादा जाना जाता है। वे पार्टी के केंद्रीय नेताओं और प्रदेश के शीर्ष नेताओं से सम्बंध बनाने के लिए ज्यादा जाने जाते हैं जबकि जमीनी स्तर पर उनके कामकाज को लेकर अभी भी जनता अनभिज्ञ बनी हुई है।
वहीं आम आदमी पार्टी की आतिशी रोजाना चार से पांच कार्यकर्ताओं, जिन्हें आम आदमी पार्टी की भाषा में वालंटियर कहा जाता है, उनके घर पर मिल रही हैं। अपने रोजाना के इस दिनचर्या में वे जिस भी कार्यकर्ता के घर पहुंचती हैं, दस से बीस लोगों के छोटे समूहों में लोगों से मिल रही हैं। इससे लोग न सिर्फ उन्हें व्यक्तिगत स्तर पर समझ रहे हैं, बल्कि उन्हें ये भरोसा भी पैदा हो रहा है कि वे उनके पिछले नेता से कहीं बेहतर साबित होंगी जिनका चेहरा उन्होंने लम्बे समय से नहीं देखा है।
आतिशी के चुनाव प्रबंधन की जिम्मेदारी देख रहे अक्षय मराठे अमर उजाला से बात करते हुए कहते हैं, हम एक भी भाजपा नेता की कमी जनता से 'डिस्कस' नहीं करते। हम सिर्फ उनसे ये पूछते हैं कि आपके आसपास वह कौन सा काम है जो आपके सांसद ने करवाया है जिसका फायदा आपको या आपके बच्चों को मिल रहा है। अक्षय के मुताबिक अक्सर लोगों के पास उनके इस सवाल का कोई जवाब नहीं होता। ऐसे में उनका काम तब आसान हो जाता है जब वे लोगों को यह बताते हैं कि उनके बच्चे जिस स्कूल में पढ़ रहे हैं, उनमें दिल्ली सरकार की वजह से क्या परिवर्तन आया है। मोहल्ला क्लिनिक में उनके तत्काल मुफ्त इलाज ने जनता के मन में आप के लिए एक भरोसा पैदा किया है। और यह भरोसा ही हमारी पूंजी है। अक्षय के मुताबिक अब तक वे पूर्वी दिल्ली के सात हजार घरों के लोगों से व्यक्तिगत स्तर पर मिल चुके हैं।
बात सिर्फ पूर्वी दिल्ली तक सीमित नहीं है। उत्तर पूर्वी दिल्ली से दिलीप पांडेय को प्रभारी बनाया गया है। यहां से भाजपा के मनोज तिवारी सांसद हैं। वे अपनी स्टार छवि के कारण लोकप्रिय तो बहुत हैं लेकिन ज़मीनी स्तर पर अभी भी कम सक्रिय हैं जबकि दिलीप पांडेय पार्टी की रणनीति के मुताबिक रोजाना बैठकें कर रहे हैं। सुबह से शुरू होने वाली बैठकों का सिलसिला देर रात तक चलता रहता है। आम आदमी पार्टी के पंकज गुप्ता व्यापारियों के छोटे-छोटे समूह में बैठकें ले रहे हैं। उनकी कोशिश दिल्ली के चांदनी चौक और नई दिल्ली के व्यापारी समुदाय में घुसपैठ करना है। उनके हाथ में नोटबन्दी और जीएसटी का हथियार है जिससे वे व्यापारियों को अपने पक्ष में करने में जुटे हैं।
कांग्रेस खेमा सबसे पीछे
दिल्ली की लड़ाई में कांग्रेस अब तक सक्रिय नहीं है। अजय माकन अभी भी पार्टी के दिग्गजों को एक साथ एक मंच पर लाकर अपनी मजबूती दिखाने में असफल रहे हैं। प्रदेश स्तर के शीर्ष नेताओं से साथ न मिलने के कारण उनका प्रयास भी बहुत सफल नहीं रहा है। अरविंदर सिंह लवली, जयप्रकाश अग्रवाल, महाबल मिश्रा और संदीप दीक्षित जैसे उसके बड़े चहरे अभी भी सक्रिय नहीं हैं। एमसीडी चुनाव ने भी पार्टी को अपनी बड़ी जीत के लिए आश्वस्त नहीं किया है। अगर पार्टी नेतृत्व इस मुद्दे को समय रहते गम्भीरता से नहीं लेता तो लोकसभा चुनाव में भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच सीधी टक्कर होना तय है जिसका फायदा भाजपा को मिल सकता है।