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राजस्थान में विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह आज भी राजस्थान के दौरे पर हैं। अमित शाह आज चित्तौड़गढ़ पहुंचे और यहां सांवलिया सेठ मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे। उन्होंने यहां पूजा अर्चना की और इसके बाद रैली में पहुंचे। इस रैली में शाह ने कांग्रेस और राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए कांग्रेस को बिना सिद्धांतों वाली पार्टी करार दिया। उन्होंने राहुल गांधी से कांग्रेस के सीएम उम्मीदवार का नाम भी पूछा। 

 अमित शाह ने कहा, एक तरफ देशभक्तों की ऐसी पार्टी है जिसकी अगुवाई मोदी जी कर रहे हैं, दूसरे तरफ राहुल बाबा की अगुवाई वाली कांग्रेस है जिसका कोई सिद्धांत और नीति नहीं है। लोगों को कांग्रेस और भाजपा में से एक को चुनना है। 


सीएम पद के उम्मीदवार के सवाल पर शाह ने कहा, राहुल गांधी राजस्थान की जनता को अपने सेनापति का नाम क्यों नहीं बता रहे हैं? 

अमित शाह ने रैली सर्जिकल स्ट्राइक का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि देश को सुरक्षित करने का काम भारतीय जनता पार्टी की मोदी सरकार ने किया है। एक ओर सर्जिकल स्ट्राइक में कांग्रेस के लोगों को राजनीति दिखाई पड़ती है और वहीं दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी देश में घुसे घुसपैठियों के समर्थन में खड़ी हो जाती है। कांग्रेस पार्टी अपने वोट बैंक के स्वार्थ के चलते देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रही है।

उन्होंने कहा, जब राजस्थान में मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी की सरकार थी, तब इस प्रदेश को क्या मिला? इसके 13वें वित्त कमीशन से 10924 करोड़ रुपये मिले थे। भाजपा सरकार ने इसे बढ़ाते हुए 2,63,580 करोड़ रुपये तक पहुंचाया। और वो हमसे पूछ रहे हैं कि हमने क्या किया है?

जगदलपुर, 02 दिसंबर । ओडि़शा से बहकर आने वाली बस्तर की जीवन रेखा इन्द्रावती नदी में लगातार पानी की कमी होती जा रही है और इससे कई परंपरागत मछलियों की प्रजातियां व जीव जंतु या तो अपना अस्तित्व खो चुके हैं या खत्म हो गये हैं। इससे गंभीर पर्यावरणीय समस्यायें भी खड़ी हो रही है।

इस संबंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार इस नदी का प्रवाह छग के बस्तर भू-भाग में करीब 234 किमी क्षेत्र में होता है। पहले के समय में इस नदी में विभिन्न प्रकार की मछलियों की प्रजातियां पाई जाती थीं। वहीं कई प्रकार के  केकड़ों की प्रजातियों को ग्रामीण पकड़कर अपना पेट पालते थे। नदी में पानी की कमी से कई प्रकार की मछलियों की नस्ल आज समाप्त हो चुकी हैं, अब इन्द्रावती में पहले की तरह मछलियां नहीं मिलती।

सुकमा, 2 दिसम्बर ।  सोमवार को सुकमा जिला किस्टारम थाना क्षेत्र साकलेर के जंगलो में पुलिस नक्सली मुठभेड़ हुई थी, जिसमें दो जवान शहीद हो गए थे। मुठभेड़ में 5 महिला और 3 पुरुष समेत 8 वर्दीधारी नक्सली ढेर हुए थे।

मुठभेड़ के तुरंत बाद नक्सलियों कि पहचान होने के बाद सभी थानों में सूचना दे दी गई थी। 7 नक्सलियों के परिजन नक्सलियों के शव को लेकर चले गए। इसमें मुठभेड़ में एक महिला नक्सली कि पहचान नहीं हुई।

बालोद, 02 दिसंबर। मिंजाई करते समय ट्रेक्टर पलटने से एक व्यक्ति की घटनास्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई और आधा दर्जन लोग घायल हो गए। घायलों को उपचारार्थ जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां एक व्यक्ति की स्थिति गंभीर बनी हुई है। घटना इतनी तेजी से और भयंकर रूप से हुई कि ट्रेक्टर में दबे युवक को बचाया नहीं जा सका। इस घटना के बाद गांव में मातम पसर गया। घटना शनिवार दोपहर की बताई गई है।

बालोद जिला मुख्यालय से 13 किमी दूर ग्राम भेडिय़ा नवागांव में थ्रेसर सहित ट्रेक्टर पलट गया। ट्रेक्टर पलटते ही तीन लोग दूर छिटक गए और तीन दब गए। जिसमें से दो लोग को किसी तरह बाहर निकाल लिया गया। एक युवक ट्रेक्टर में ही दबा रहा जिससे उसकी मौत हो गई। बताया जाता है कि ड्राइवर की लापरवाही की वजह से यह घटना हुई है।

किसी भी घर में पूजाघर सबसे अहम स्थान होता है। देवी-देवताओं से जुड़े इस पावन स्थान पर जाते ही सर्वाधिक मन को शांति और सुकून मिलता है। सुख-शांति और समृद्धि की कामना के लिए बनाए जाने वाले मंदिर में वास्तु और परंपरा की कभी अनदेखी नहीं करनी चाहिए। घर की साफ-सफाई के साथ आइए जानते हैं हमें अपने मंदिर या पूजाघर में किन चीजों का विशेष ध्यान रखना चाहिए —

 

1. अपने मंदिर या पूजाघर में कभी नग्न मूर्तियां न रखें। हमेशा देवता की पसंद के अनुसार या फिर कहें शुभता को ध्यान में रखते हुए कपड़े पहनाकर रखें।

2.कभी भूलकर भी मूर्तियों को मंदिर या पूजाघर की दीवार से सटाकर रखें।

3.कभी भी न तो सीढ़ी के नीचे मंदिर बनाएं और न ही कभी भूलकर भी बीम के नीचे बैठकर पूजा न करें। वास्तु के अनुसार बीम के नीचे बैठकर पूजा करने से एकाग्रता प्रभावित होती है।

4.अपना मंदिर या फिर पूजाघर हमेशा ईशानकोण में ही रखें। इस दिशा में यदि खिड़की भी हो तो ऐसे पूजाघर की शुभता और ऊर्जा बढ़ जाती है।

5.कभी भी जमीन में बैठकर पूजा न करें। किसी न किसी शुद्ध आसन का प्रयोग अवश्य करें। किसी विशेष देवता की विशेष साधना के दौरान उनसे संबंधित का आसन का प्रयोग करना शुभदायी होता है।

6.पूजा में प्रयोग में लाए गये बासी और सूखे फूल न तो मंदिर रखें और न ही अपने घर के किसी कोने में रखें। इन फूलों को किसी स्वच्छ स्थान की मिट्टी में दबा दें। नदी में डालकर उसे प्रदूषित न करें।
 
7. शयनकक्ष में पूजाघर न बनाएं। यदि मजबूरी में बनाना ही पड़े तो पूजाघर को ईशान कोण या उत्तर दिशा में बनाएं और रात्रि के समय अपने पूजाघर को परदे से ढंक कर रखें।

8. अपने पूजाघर में कभी भी टूटी मूर्ति या मृतात्माओं का चित्र न रखें।

9. अपने पूजाघर में दो शिवलिंग, दो शालिग्राम, दो शंख, दो सूर्य-प्रतिमा, तीन गणेश, तीन देवी प्रतिमा न रखें।

किसी भी घर में पूजाघर सबसे अहम स्थान होता है। देवी-देवताओं से जुड़े इस पावन स्थान पर जाते ही सर्वाधिक मन को शांति और सुकून मिलता है। सुख-शांति और समृद्धि की कामना के लिए बनाए जाने वाले मंदिर में वास्तु और परंपरा की कभी अनदेखी नहीं करनी चाहिए। घर की साफ-सफाई के साथ आइए जानते हैं हमें अपने मंदिर या पूजाघर में किन चीजों का विशेष ध्यान रखना चाहिए —

 

1. अपने मंदिर या पूजाघर में कभी नग्न मूर्तियां न रखें। हमेशा देवता की पसंद के अनुसार या फिर कहें शुभता को ध्यान में रखते हुए कपड़े पहनाकर रखें।

2.कभी भूलकर भी मूर्तियों को मंदिर या पूजाघर की दीवार से सटाकर रखें।

3.कभी भी न तो सीढ़ी के नीचे मंदिर बनाएं और न ही कभी भूलकर भी बीम के नीचे बैठकर पूजा न करें। वास्तु के अनुसार बीम के नीचे बैठकर पूजा करने से एकाग्रता प्रभावित होती है।

4.अपना मंदिर या फिर पूजाघर हमेशा ईशानकोण में ही रखें। इस दिशा में यदि खिड़की भी हो तो ऐसे पूजाघर की शुभता और ऊर्जा बढ़ जाती है।

5.कभी भी जमीन में बैठकर पूजा न करें। किसी न किसी शुद्ध आसन का प्रयोग अवश्य करें। किसी विशेष देवता की विशेष साधना के दौरान उनसे संबंधित का आसन का प्रयोग करना शुभदायी होता है।

6.पूजा में प्रयोग में लाए गये बासी और सूखे फूल न तो मंदिर रखें और न ही अपने घर के किसी कोने में रखें। इन फूलों को किसी स्वच्छ स्थान की मिट्टी में दबा दें। नदी में डालकर उसे प्रदूषित न करें।
 
7. शयनकक्ष में पूजाघर न बनाएं। यदि मजबूरी में बनाना ही पड़े तो पूजाघर को ईशान कोण या उत्तर दिशा में बनाएं और रात्रि के समय अपने पूजाघर को परदे से ढंक कर रखें।

8. अपने पूजाघर में कभी भी टूटी मूर्ति या मृतात्माओं का चित्र न रखें।

9. अपने पूजाघर में दो शिवलिंग, दो शालिग्राम, दो शंख, दो सूर्य-प्रतिमा, तीन गणेश, तीन देवी प्रतिमा न रखें।

किसी भी घर में पूजाघर सबसे अहम स्थान होता है। देवी-देवताओं से जुड़े इस पावन स्थान पर जाते ही सर्वाधिक मन को शांति और सुकून मिलता है। सुख-शांति और समृद्धि की कामना के लिए बनाए जाने वाले मंदिर में वास्तु और परंपरा की कभी अनदेखी नहीं करनी चाहिए। घर की साफ-सफाई के साथ आइए जानते हैं हमें अपने मंदिर या पूजाघर में किन चीजों का विशेष ध्यान रखना चाहिए —

 

1. अपने मंदिर या पूजाघर में कभी नग्न मूर्तियां न रखें। हमेशा देवता की पसंद के अनुसार या फिर कहें शुभता को ध्यान में रखते हुए कपड़े पहनाकर रखें।

2.कभी भूलकर भी मूर्तियों को मंदिर या पूजाघर की दीवार से सटाकर रखें।

3.कभी भी न तो सीढ़ी के नीचे मंदिर बनाएं और न ही कभी भूलकर भी बीम के नीचे बैठकर पूजा न करें। वास्तु के अनुसार बीम के नीचे बैठकर पूजा करने से एकाग्रता प्रभावित होती है।

4.अपना मंदिर या फिर पूजाघर हमेशा ईशानकोण में ही रखें। इस दिशा में यदि खिड़की भी हो तो ऐसे पूजाघर की शुभता और ऊर्जा बढ़ जाती है।

5.कभी भी जमीन में बैठकर पूजा न करें। किसी न किसी शुद्ध आसन का प्रयोग अवश्य करें। किसी विशेष देवता की विशेष साधना के दौरान उनसे संबंधित का आसन का प्रयोग करना शुभदायी होता है।

6.पूजा में प्रयोग में लाए गये बासी और सूखे फूल न तो मंदिर रखें और न ही अपने घर के किसी कोने में रखें। इन फूलों को किसी स्वच्छ स्थान की मिट्टी में दबा दें। नदी में डालकर उसे प्रदूषित न करें।
 
7. शयनकक्ष में पूजाघर न बनाएं। यदि मजबूरी में बनाना ही पड़े तो पूजाघर को ईशान कोण या उत्तर दिशा में बनाएं और रात्रि के समय अपने पूजाघर को परदे से ढंक कर रखें।

8. अपने पूजाघर में कभी भी टूटी मूर्ति या मृतात्माओं का चित्र न रखें।

9. अपने पूजाघर में दो शिवलिंग, दो शालिग्राम, दो शंख, दो सूर्य-प्रतिमा, तीन गणेश, तीन देवी प्रतिमा न रखें।

-निर्माताः अजय देवगन/जयंती लाल गाडा

 

-निर्देशकः प्रदीप सरकार
-सितारेः काजोल, रिद्धी सेन, नेहा धूपिया, तोता रॉय चौधरी, जाकिर हुसैन
रेटिंग *1/2


हेलीकॉप्टर यानी जो सिर पर मंडराए। ईला रायतुरकर (काजोल) हेलीकॉप्टर मां हैं, जो जवान होते बेटे विवान (रिद्धी सेन) के ऊपर मंडराती रहती है। उसके टिफिन, पढ़ाई और दोस्तों से लेकर फोन पर वह किससे बात कर रहा है तक, उसकी नजर से कुछ नहीं बचता। ईला हर पल विवान को अपने सामने रखना चाहती हैं। बिना दस्तक दिए उसके कमरे में पहुंचती है। युवा विवान के पास ‘प्राइवेट टाइम’ नहीं है। उस पर समस्या यह कि बेटे से एक बहस में ईला तय करती है कि वह अधूरी पढ़ाई पूरी करेगी और फिर वह बेटे के ही कॉलेज में एडमीशन ले लेती है! यानी हेलीकॉप्टरी की हद हो गई!!

निर्देशक प्रदीप सरकार चार साल बाद फिर नायिका प्रधान फिल्म लाए हैं। ‘मर्दानी’ (2014) जहां तथ्य और ट्रीटमेंट में सच्चाई के करीब थी, हेलीकॉप्टर ईला उतनी काल्पनिक और गढ़ी हुई है। भले ही यह आनंद गांधी के गुजराती नाटक ‘बेटा कागड़ो’ पर आधारित है लेकिन इसे देखते हुए निर्देशक अश्विनी अय्यर तिवारी की ‘निल बटे सन्नाटा’ (2016) याद आती है।

अश्विनी ने अकेली गरीब मां और उसकी बेटी के संघर्षों, सपनों और जीवन में आगे बढ़ने की कहानी खूबसूरती से दिखाई थी। वह फिल्म याद रहती है। जबकि ईला की कहानी सिनेमाहॉल में पॉपकॉर्न-समोसे खा लेने के बाद डिब्बे की तरह वहीं छूट जाती है। 

लेखक-निर्देशक ने 1990 के दशक में कभी मॉडलिंग कभी सिंगिंग करती ईला को दो हिस्सों में बांटा है। एक उसके युवा दिनों में संगीत की दुनिया में नाम कमाने की चाहत, आंशिक कामयाबी और दूसरा जिंदगी में गुजरे हादसे की वजह से बेटे के लिए उसके मन में सदा बनी रहने वाली असुरक्षा। वर्तमान और फ्लैशबैक में चलती बातों में दोहराव दिखता है। दोहराव में बोरियत बसती है। दूसरे हिस्से में ड्रामा जरूरत से ज्यादा है।

ईला कॉलेज में फिर अपने संगीत को जिंदा करती है। यहां ड्रामा टीचर नेहा धूपिया उसकी जिंदगी को मोड़ देने के लिए मौजूद हैं। मां-बेटे के विवाद सुलझते हैं और अंत में ईला बड़ा कंसर्ट करती है। सुखद कहानियों की तर्ज पर अंत में सब ठीक हो जाता है।

फिल्म लालन-पालन की मुश्किलें और कुछ सबक दिखाती-सिखाती है। मां-बेटे के रूप में काजोल-रिद्धी कुछेक दृश्यों को छोड़ कर नहीं जमे। पहले हिस्से के काजोल जवां हैं परंतु दूसरे हिस्से में युवा बेटे की मां के रूप में सुंदर दिखी हैं।

संगीत फिल्म का अहम पक्ष है और यहां 1990 का दशक याद आता है। एमटीवी के उदय के दिन। शान, आलिशा चिनॉय, ईला अरुण और अनु मलिक से लेकर बाबा सहगल का रैप यहां मिलेगा। काजोल ने बढ़िया परफॉर्म किया है लेकिन कथा-पटकथा में सादगी-संतुलन के अभाव में फिल्म प्रभाव नहीं छोड़ती।

बंगाल के रिद्धी सेन किरदार के अनुरूप हैं परंतु कॉमिक टाइमिंग में थोड़ा पीछे रह गए। प्रदीप सरकार जिस अंदाज में कहानी पेश करते हैं, उसमें फिल्म बॉलीवुड के स्तर से ऊपर नहीं उठ पाती और तमाम संगीत-लहरियों के बाद एक सन्नाटा ही बाकी बचा रह जाता है।

दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने शनिवार को नोएडा के 3सी बिल्डर के तीन निदेशकों को प्रोजेक्ट पूरा नहीं करने पर गिरफ्तार किया है। तीनों पर फ्लैट देने का आश्वासन देकर खरीदारों से 200 करोड़ रुपये की ठगी करने का आरोप है। 

 

आरोपियों की पहचान दिल्ली के पंचशील पार्क निवासी निर्मल सिंह, सैनिक फार्म निवासी सुरप्रीत सिंह सूरी और फ्रेंड्स कॉलोनी निवासी विधुर भारद्वाज के रूप में हुई है। पुलिस ने शनिवार को तीनों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।

पुलिस के अनुसार, कंपनी ने खरीदारों को 39 महीने में फ्लैट देने का वादा कर उनसे 90 फीसदी राशि वसूल ली थी, लेकिन चार साल बीत जाने के बाद भी प्रोजेक्ट पूरा नहीं हुआ। 

फ्लैट खरीदारों ने इसकी शिकायत दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा में की। पुलिस ने कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की और तीनों को गिरफ्तार कर लिया। तीनों बिल्डरों पर ठगी के अन्य मामले भी दर्ज हैं।

300 फ्लैट बनाने का दावा किया था 

अतिरिक्त पुलिस आयुक्त सुवाशीष चौधरी ने बताया कि बिल्डरों ने वर्ष 2010 में नोएडा सेक्टर 107 में लोटस ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट की योजना बनाई। कंपनी ने 10 एकड़ जमीन पर छह टावर में तीन सौ फ्लैट बनाने का दावा किया था। 

निवेशकों से वादा किया गया था कि 39 महीने में उन्हें फ्लैट दे दिया जाएगा। कंपनी की बातों में आकर लोगों ने 90 फीसदी से ज्यादा राशि जमा करा दी। 

आर्थिक तंगी का हवाला देकर 5-5 लाख और वसूले
कुछ साल बाद कंपनी ने निवेशकों से आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए पांच-पांच लाख रुपये और वसूल लिए थे। बावजूद इसके प्रोजेक्ट के काम में कोई तेजी नहीं आई।

जांच में यह बात सामने आई है कि कंपनी ने प्रोजेक्ट के अंतर्गत पहले से तय तीन सौ फ्लैट की संख्या बढ़ाकर 336 कर दी, लेकिन इसके लिए संबंधित अथॉरिटी से कोई स्वीकृति नहीं ली। फ्लैट मिलने में देरी होने पर 50 खरीदारों ने पुलिस में शिकायत कर दी।

फ्लैटों के 191 करोड़ दूसरी कंपनियों में ट्रांसफर किए 

कंपनी ने खरीदारों के पैसे से फ्लैट तैयार कराने के बजाय 191 करोड़ रुपये अपनी दूसरी कंपनियों में ट्रांसफर कर दिए। इस वजह से उनका प्रोजेक्ट अधर में लटक गया।

इसके बाद खरीदारों ने मार्च 2018 में कंपनी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत दर्ज होने के बाद कंपनी के तीनों निदेशक फरार हो गए, बाद में पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया। 

सेना के आपरेशन आल आउट में हिजबुल व लश्कर के टाप कमांडरों समेत कई आतंकियों के मारे जाने से आतंकी संगठनों में खलबली मच गई है। अब वे अपने को छिपने छिपाने में जुट गए हैं। 

 

आतंकी जाकिर मूसा के नेतृत्व वाले आतंकी संगठन अंसार गज्वातुल हिंद का एक इसी आशय का पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है जिसमें उसने भी आतंकियों से बचने के  लिए गुप्त ठिकाने को खुद चुनने की सलाह दी है। 

यह ठिकाना ऐसा हो जिसके बारे में किसी को जानकारी न हो। हालांकि, इस पत्र के बारे में पुलिस की ओर से कोई भी आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। 

पत्र में कहा गया है कि घाटी में भारत की तरफ  से कही सारी एजेंसियां काम कर रही हैं जिनका एक ही लक्ष्य है घाटी में आतंकवाद का सफाया हो लेकिन हमें इस कोशिश को विफ ल बनाना है। 
 

 

सेना रात के समय बिना आवाज वाली ड्रोन से आतंकियों पर नजर रख रही है। इसके बाद तत्काल वहां पहुंचकर घेराबंदी करती है। पत्र में यह भी लिखा है कि जो आतंकियों के लिए काम करते हैं वह भरोसेमंद होने चाहिए। 

आतंकी फोन का कम इस्तेमाल करें, इंटरनेट का उपयोग बिल्कुल न करें। इंटरनेट वीपीएन से ही चलाए। खाने-पीने की आवश्यक सामग्री अपने गुप्त ठिकाने पर ही रखें। जो भी आतंकी अपने परिजनों या दोस्तों से मिलना चाहे तो वह किसी बस्ती में उनसे ना मिलकर अन्य स्थान का चयन करे।

नवीद जट मिला हुआ था सेना से, वीडियो वायरल

क्या लश्कर का टाप कमांडर नवीद जट सेना के लिए काम करता था। इस आशय का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। वीडियो में एक व्यक्ति अपना नाम नहीं बता रहा है लेकिन कह रहा है कि नवीद काफी समय से फौज से मिला हुआ था। हाल ही में कई आतंकियों को सेना-पुलिस ने आपरेशन में मार डाला। जब आतंकियों को नवीद पर शक होने लगा तो उसे भी एक आपरेशन में मार डाला गया। हालांकि, इस वीडियो की कोई भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है।

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