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-योगी आदित्यनाथ ने बजरंगबली को बताया दलित
जयपुर । पीठाधीश्वर शारदा द्वारिका पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि भाजपा ने पहले इंसान को बांटा अब भगवान को बांट रही हैं। राजस्थान विधानसभा चुनाव में जाति-धर्म को लेकर खूब राजनीति हो रही है। इस बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भगवान बजरंगबली को दलित और वंचित करार दिया। उन्होंने अलवर जिले के मालाखेड़ा में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा, 'बजरंगबली एक ऐसे लोग देवता हैं जो स्वयं वनवासी हैं, गिर वासी हैं, दलित हैं और वंचित हैं।' इस दौरान योगी आदित्यनाथ कांग्रेस पर जमकर बरसे। योगी के बयान के बाद सोशल मीडिया पर कड़ी प्रतिक्रिया देखी जा रही है। यही नहीं पीठाधीश्वर शारदा द्वारिका पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने पाप किया है। उन्होंने कहा, बजरंगबली कैसे दलित थे यह मुख्यमंत्री बताएं। योगी ने यह कहकर पाप किया है। शंकराचार्य ने कहा, भगवान को दलित कहना यह स्वयं अपराध और पाप है, क्योंकि हमारे यहां दलित नाम का कोई शब्द नहीं था। दलित का अर्थ होता है कि जिसके साथ अत्याचार हुआ हो, जो अत्याचार से पीड़ित हो।
वहीं राजस्थान के एक संगठन सर्व ब्राह्मण समाज ने तो इस पर योगी को नोटिस भेजकर माफी मांगने को कहा है। समाज का कहना है कि बजरंग बली न तो दलित हैं, न वंचित और न ही लोकदेवता। राजस्थान चुनाव: पीएम मोदी बोले, सरदार पटेल देश के पहले प्रधानमंत्री होते तो किसान बहुत सुखी होता समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेश मिश्रा ने अपने वकील के जरिए भेजे नोटिस में योगी आदित्यनाथ से इस मामले में माफी मांगने को कहा है और तीन दिन में ऐसा नहीं करने पर कानूनी कार्रवाई की धमकी दी है। ब्राह्मण समाज ने नोटिस में कहा है कि हनुमान भगवान हैं। उन्हें वंचित और लोकदेवता बताना न केवल उनका बल्कि लाखों हनुमान भक्तों का अपमान है। कांग्रेस के पूर्व राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी ने भी योगी के इस बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा, भाजपा अभी तक इंसान को बांटने का काम कर रही थी, लेकिन अब यह भगवान को भी जाति में बांट रहे हैं।

राजस्थान में मतदान का समय जैसे-जैसे नजदीक आता जा रहा है, चुनावी समीकरण ज्वारभाटे की तरह बदल रहे हैं। प्रारंभिक परिदृश्यों में कांग्रेस भाजपा पर भारी साबित होती दिख रही थी, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की ताजा चुनावी सभाएं भाजपा की हारी बाजी को जीत में बदलती दिख रही है। कांग्रेस के भीतर चल रही गुटबाजी से भी यह जमीन तैयार हो रही है, एक तरह से जीत की ओर बढ़ती कांग्रेस को नुकसान होने की पूरी-पूरी आशंका है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषक एवं चुनाव पूर्व के अनुमान अभी भी कांग्रेस के ही पक्ष में हैं और माना जा रहा है कि इस बार सत्ता परिवर्तन होगा और स्पष्ट बहुमत के साथ कांग्रेस की सरकार बनेगी। सट्टा बाजार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस 125 सीटों के साथ सरकार बना रही है वहीं भाजपा 50 से 55 सीटों पर सिमट जाएगी, ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है।
 
जिन पांच राज्यों में विधानसभा के चुनाव हैं उनमें राजस्थान ही एकमात्र ऐसा राज्य है जहां भाजपा की सत्ता में वापसी सर्वाधिक मुश्किल मानी जा रही है। राजस्थान में पिछले तीन दशक से अदल-बदलकर सत्ता परिवर्तन की परंपरा रही है। पिछली बार भाजपा सत्तारूढ़ हुई थी। इस परंपरागत रुझान के मुताबिक इस बार मौका कांग्रेस को है। इसी वर्ष हुए उपचुनावों में मिली पराजय से भाजपा को करारा झटका भी लगा है और कांग्रेस आशान्वित हुई। अलवर और अजमेर लोकसभा तथा मांडलगढ़ विधानसभा सीट पर मिली जीत से कांग्रेस की उम्मीदें बढ़ी हैं। इस बार भाजपा फिर एक बार वसुंधरा राजे सिंधिया पर अपना दांव लगा रही है, जबकि कांग्रेस ने किसी को भी अपना मुख्यमंत्री प्रत्याशी नहीं बनाया है। सत्ता विरोधी लहर से चिंतित मुख्यमंत्री राजे पिछले छह माह से संघर्षरत हैं। उन्होंने 4 अगस्त को मेवाड़ से ‘राजस्थान गौरव यात्रा’ के जरिए अपना चुनावी अभियान शुरू किया। यात्रा की शुरुआत में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह मौजूद थे। 58 दिनों की इस यात्रा में वह राज्य के लोगों से मिलती रही हैं और आगामी चुनाव के लिए जनादेश मांगती रही हैं। यह यात्रा राज्य की 200 में से 165 विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरी।
 
 
भाजपा ने 180 सीटों पर विजय का लक्ष्य रखते हुए अपने चुनाव अभियान को ‘मिशन 180’ नाम दिया है। इस मिशन के तहत भाजपा ने ए ग्रेड की 65 विधानसभा सीटों को चिन्हित किया है। ये वे सीटें हैं, जिन पर भाजपा लगातार दो या इससे अधिक बार जीत रही है। अब भाजपा यह रणनीति बना रही है कि कम से कम 65 सीटों से गिनती प्रारंभ हो और फिर मिशन 180 तक पहुंचा जाए। राजनैतिक दलों के लिहाज से राजस्थान हमेशा दो विकल्पों से घिरा रहा है, कांग्रेस और भाजपा। भाजपा ने 2013 के विधानसभा चुनाव में जबरदस्त कामयाबी हासिल की थी। कुल 200 में से 163 सीटें जीतकर तीन चौथाई बहुमत के साथ भाजपा सत्तारूढ़ हुई थी, जबकि कांग्रेस 21 और बसपा 3 सीटों पर ही सिमट गईं थीं। इस चुनाव में भाजपा को 45.50 फीसदी, कांग्रेस को 33.31 और बीएसपी को 3.48 फीसदी वोट मिले थे। बाद में 2014 के लोकसभा चुनाव में राज्य की सभी 25 सीटों पर भाजपा का परचम लहराया था।
 
उधर भाजपा से सत्ता छीनने की हरसंभव कोशिशों में कांग्रेस जुटी है। सत्ता वापसी के लिए कोशिश कर रही कांग्रेस किसी एक नाम पर अभी सहमत नहीं हो पाई है। इसीलिए पार्टी ने साफ कर दिया है कि राहुल गांधी के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ा जाएगा, ना अशोक गहलोत चेहरा होंगे और ना ही सचिन पायलट। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने जयपुर में 13 किमी का रोड शो कर कांग्रेस के चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत की थी। एक तरफ कांग्रेस वसुंधरा सरकार को घेरने में लगी है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस बूथ स्तर पर अपने संगठन को मजबूत करने में लगी है। बूथ स्तर पर कांग्रेस ने अपनी मजबूती को सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश में ‘मेरा बूथ, मेरा गौरव’ नाम से एक अभियान भी चलाया है। चुनाव की रणनीति के अन्तर्गत कांग्रेस जातीय समीकरणों का हवाला देते हुए हवा अपने पक्ष में होने का दावा कर रही है। कांग्रेस ने ब्राह्मण, राजपूत और दलितों की नाराजगी को हवा देकर राजनीतिक समीकरण बनाये हैं।
 
 
विडम्बनापूर्ण स्थिति तो यह है कि दोनों ही राजनीतिक दल चुनावी मुद्दे के तौर पर कोई ठोस प्रस्तुति नहीं दे पाये हैं। एक तरह से ये चुनाव मुद्दे विहीन चुनाव ही हैं। हालांकि दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दल विकास को अपना मुख्य मुद्दा बता रहे हैं, लेकिन जमीनी तौर पर आरक्षण, किसान और गाय ही प्रमुख मुद्दे बनते नजर आए हैं। गूजर और जाटों के आरक्षण आंदोलन में झुलस चुके राजस्थान में अत्याचार अधिनियम के मुद्दे पर राजपूत और ब्राह्मण भी लामबंद होने की कोशिश में हैं। भाजपा के बागी नेता घनश्याम तिवाड़ी ने तो इस मुद्दे पर तीसरा मोर्चा बनाने का ऐलान किया है। भाजपा को इस बार गाय वोटों की कामधेनु नजर आ रही है। वह गौ-तस्करी को लगातार मुद्दा बनाती रही है तो कांग्रेस गौ तस्करी के शक में पीट पीटकर लोगों को मारने की घटनाओं को लेकर सरकार को घेरती रही है। उधर फसल के सही दाम नहीं मिलने और कर्ज के कारण किसानों की आत्महत्याओं के मामलों को लेकर भी विपक्षी दल भाजपा सरकार को घेरने में जुटे हैं।
 
कांग्रेस ने वसुंधरा सरकार की कार्यप्रणाली के प्रति उपजे असंतोष को भी चुनावी मुद्दा बनाया है। वसुंधरा सरकार के कई मंत्री सार्वजनिक तौर पर मुख्यमंत्री की तानाशाही प्रवृत्ति के प्रति असंतोष जाहिर कर चुके हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता रहे पूर्व मंत्री घनश्याम तिवाड़ी ने पार्टी से बगावत का ऐलान किया। दोनों ही दलों में बागी स्वर बुलन्द हैं। जिससे इन चुनावों में दोनों को ही भारी नुकसान होने की संभावनाएं हैं। कांग्रेस भी पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट और पूर्व केंद्रीय मंत्री सीपी जोशी के गुटों में बंटी है। जिन लोगों को टिकट नहीं मिला, वे बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं, जिससे दोनों ही दलों की जीत प्रभावित होगी।
 
राजस्थान में चुनावी प्रचार चरम पर है। इसमें जमीनी मुद्दों के बजाय व्यक्तिगत छींटाकशी, जाति, धर्म, सम्प्रदाय और क्षेत्रवाद हावी है। इसमें कोई भी दल दूसरे से पीछे नहीं रहना चाहता। एक−दूसरे की जाति को लेकर निजी हमले किए जा रहे हैं। राजनीतिक दलों के नेता सत्ता हथियाने के लिए कैसे समाज में जहर घोल कर देश को कमजोर करने का काम करते हैं, इसे राजस्थान में चले रहे विधानसभा चुनावों में देखा−समझा जा सकता है। परवान पर पहुंच चुके चुनाव प्रचार में कांग्रेस और भाजपा ने मानो नैतिकता, देश की एकता−अखण्डता और सौहार्द को गिरवी रख दिया है। चुनावों में दोनों ही प्रमुख दलों के नेता एक−दूसरे के खिलाफ विषवमन करने में पूरी ताकत से जुटे हैं। विकास और तरक्की के वायदे हवा हो गए हैं। राज्य में करोड़ों मतदाताओं की आशा−अपेक्षा अब धूल−धूसरित हो रही है। प्रदेश में आम मतदाताओं की दुख−तकलीफों से लगता है कि किसी दल का वास्ता ही नहीं रह गया। वास्तविक मुद्दों की बजाए मतदाताओं को बांटने की पूरी कोशिश की जा रही है।
 
यह अलग बात है कि मतदाताओं ने बेतुकी और विकास को भटकाने वाली बातें करने वाले नेताओं को पहले भी कई बार आईना दिखाया है। इसका भाजपा और कांग्रेस ने अपने राजनीतिक इतिहास से सबक नहीं लिया। गौरतलब है कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में सरकार बनाने से पहले देश को सिर्फ बेहतर विकास और भविष्य का ख्वाब दिखाया गया था। कांग्रेस के काले कारनामों से परेशान हो चुके देश के मतदाताओं ने मोदी पर पूरा भरोसा जताते हुए देश की कमान सौंप दी थी। अब देखना है कि राजस्थान में मोदी का जादू कैसे कांग्रेस की जीती पारी को हार में बदलने में सक्षम होता है ? देखना यह भी है कि मतदाता के दिलों पर उनका कैसा असर कायम है ?
  
लेकिन यह तय है कि चुनाव का समय मतदाता को ही लोकतन्त्र का मालिक घोषित करता है। हमने आजादी के बाद से हर चुनाव में मतदाताओं की वह बुद्धिमानी देखी है जो राजनीतिज्ञों को मूर्ख साबित करती रही है। इसकी असली वजह यह होती है कि मतदाता हर चुनाव में उस राजनैतिक एजेंडे को ही गले लगाते हैं जो उनके दिल के करीब होता है। मगर राजनीतिज्ञों को मतदान के दिन तक यह गलतफहमी रहती है कि वे उनकी गढ़ी हुई राजनैतिक शब्दावली के धोखे में आ जायेंगे। अतः जो लोग सोच रहे हैं कि राजस्थान के चुनाव में असंगत बातों को उछाल कर बाजी जीती जा सकती हैं या मतदाता को ठगा या गुमराह किया जा सकता है, उन्हें अंत में निराश ही होना पड़ेगा। अब हार-जीत का निष्कर्ष जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दे पर टिका है, क्योंकि एक दिन की बादशाह जनता ही होती है जो किसी भी दल या नेता को ‘फर्श’ से उठा कर ‘अर्श’ पर पहुंचा देती है या ‘अर्श’ से ‘फर्श’ पर पटक देती है।
 
-ललित गर्ग

नई दिल्ली। भारत ने अपने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के सरकारी चैनल पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। बता दें कि भारत सरकार के सूचना प्रसारण मंत्रालय ने पीटीवी पाकिस्तान (PTV Pakistan ) के प्रसारण पर भारत में प्रतिबंध लगाया हुआ है। सरकार द्वारा लगाए गए इस प्रतिबंध के बावजूद सरकारी टीवी चैनल दूरदर्शन ने पाकिस्तान में हुए करतापुर कोरिडोर शिलान्यास समारोह के लाइव दृश्य पीटीवी के जरिए दिखाए।

ऐसा करके दूरदर्शन ने भारत सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंध की धज्जियां उड़ा दीं।  मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मामले पर प्रसार भारती ने कोई भी औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। दूरदर्शन के सूत्रों का कहना है कि हमनें एएनआई से लाइव फीड उठाकर चैनल पर चलाए थे। 

बता दें कि भारत सरकार ने पाकिस्तान के 20 चैनलों पर प्रतिबंध लगाया हुआ है, क्योंकि ये सभी चैनल भारत विरोधी सामग्री का प्रदर्शन करते हैं। वहीं, इस चैनल के दृश्यों को दिसंबर 2015 में उस वक्त दिखाया गया था जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अचानक से पाकिस्तान में नवाज शरीफ से मिलने पहुंच गए थे। 

नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने कथित तौर पर रामदेव के जीवन पर आधारित किताब के प्रकाशन और बिक्री पर रोक लगाने वाले दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ प्रकाशक की याचिका पर योग गुरु को नोटिस जारी किया। रामदेव ने दावा किया था किताब में मानहानिकारक सामग्री है जिसके बाद उच्च न्यायालय ने 29 सितंबर को रोक का आदेश दिया था।

मामले पर आगे की सुनवाई अगले वर्ष फरवरी माह के पहले हफ्ते में होगी। न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा, ‘‘हम वादी संख्या एक (रामदेव) को नोटिस जारी करेंगे।’’ उच्च न्यायालय के फैसले को प्रकाशक जगरनट बुक्स ने शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी।
 
इससे पहले, रामदेव ने ‘‘ गॉडमैन टू टायकून ’’ नाम की किताब के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी जिसमें कहा था कि किताब कथित तौर पर उनके जीवन पर आधारित है और उसमें मानहानिकारक सामग्री है जिससे उनकी प्रतिष्ठा और आर्थिक हितों को नुकसान पहुंच सकता है।

कुचामन सिटी (राजस्थान)। भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने बैंकों की गैर निष्पादित आस्तियों (एनपीए) को लेकर शुक्रवार को कांग्रेस पर पलटवार किया और कहा कि यह एनपीए तो विपक्षी दल के पूर्ववर्ती शासन के ‘‘कुकर्म का परिणाम’’ है। इसके साथ ही शाह ने कहा कि मोदी सरकार आने के बाद विजय माल्या व नीरव मोदी जैसे लोग डरकर विदेश भाग गए। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अपनी चुनावी सभाओं में बैंकों के एनपीए का मुद्दा व नीरव मोदी, विजय माल्या के कर्ज लेकर विदेश भागने का मुद्दा प्रमुखता से उठाते आ रहे हैं। 

शाह ने इसका जिक्र करते हुए कहा कि राहुल आज जगह-जगह एनपीए की बात कर रहे हैं लेकिन ‘ये जो एनपीए अब हो रहे हैं वो आपके शासन में, आपके भ्रष्टाचार से दिए गए कर्ज के हो रहे हैं। हमारे लोन के नहीं हो रहे। एक भी एनपीए ऐसा नहीं है जो नरेंद्र मोदी सरकार में लोन दिया गया।’ उन्होंने कहा, ‘‘आपके कुकर्म का परिणाम हैं ये एनपीए।’’ एक प्रमुख अखबार में छपी खबर का हवाला देते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कांग्रेस अध्यक्ष से जवाब देने को कहा। खबर का जिक्र करते हुए उन्होंने राबर्ट वाड्रा का नाम लिये बिना कहा, ‘‘एक बहुत बड़ी कंपनी को हजारों करोड़ रुपये का कर्ज मिला और इसका कमीशन गांधी-नेहरू परिवार के दामाद के पास पहुंचा। उन कंपनियों ने कमीशन के इस पैसे से बीकानेर के पास 150 हेक्टैयर जमीन खरीदी। यह जमीन औने पौने दाम पर खरीदी गयी। इस जमीन से अरबों करोड़ों रुपये दामाद की कंपनी के खाते में गये।’’ 
 
 
शाह ने कहा, ‘‘ मैं कांग्रेस अध्यक्ष से पूछना चाहता हूं कि आप इस खबर पर जवाब देना चाहेंगे या नहीं।’’ नीरव मोदी, विजय माल्या के बैंकों से कर्ज लेकर विदेश भागने पर सवाल उठाए जाने पर शाह ने कहा, ‘‘ये सारे लोन आपके समय में दिए गए हैं और ये लोग कांग्रेस के समय इसलिए नहीं भागते थे क्योंकि उनको डर ही नहीं था। वे मानते थे इनके साथ तो अपनी पार्टनरशिप चल रही है। जैसे ही मोदी सरकार आई, उन्हें डर लगने लगा कि सलाखों के पीछे जाना पड़ेगा और उन्होंने भागना शुरू कर दिया।’’ शाह ने कहा, ‘‘कोई कहीं भी भाग जाए, देश की पाई-पाई हम वापस लाने का काम करेंगे।’’

 

पुणे। सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने शुक्रवार को कहा कि अगर पाकिस्तान भारत के साथ मधुर संबंध चाहता है तो उसे अपनी जमीन से होने वाली आतंकी गतिविधियां बंद करनी चाहिए और खुद को एक धर्मनिरपेक्ष देश के रूप में विकसित करना चाहिए।उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय सेना युद्धक भूमिकाओं में महिलाओं को शामिल करने के लिए अभी भी तैयार नहीं है। रावत ने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) के 135वें कोर्स की पासिंग आउट परेड से इतर संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे। पाक प्रधानमंत्री इमरान खान के हाल के उस बयान के बारे में पूछे जाने पर, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत के एक कदम बढ़ाने पर उनका देश दो कदम बढ़ाने को तैयार है, जनरल ने कहा कि पड़ोसी देश सबसे पहले अपनी जमीन से होने वाली आतंकी गतिविधियों को बंद करने की दिशा में कदम उठाना चाहिए।

पड़ोसी मुल्क को सलाह देते हुए रावत ने कहा, ‘‘मैं पाकिस्तान को कहना चाहता हूं कि वह पहला कदम (आतंक पर रोक लगाने का) उठाए। अतीत में भारत ने कई कदम उठाए हैं। जब हम कहते हैं कि आपके देश में आतंक पल-बढ़ रहा है तो आप भारत के खिलाफ होने वाली आतंकी गतिविधियों के संबंध में कोई कार्रवाई करके दिखाएं।’’ खान ने कहा था कि जब जर्मनी और फ्रांस अच्छे पड़ोसी हो सकते हैं तो फिर भारत और पाकिस्तान अच्छे मित्र क्यों नहीं बन सकते हैं। इस बारे में पूछे जाने पर सेन प्रमुख ने कहा कि पड़ोसी देश को पहले अपनी आतंरिक स्थिति देखने की जरूरत है। रावत ने कहा, ‘‘उन्होंने पाकिस्तान को इस्लामिक देश में बदल दिया है। अगर वह भारत के साथ मधुर संबंध चाहते हैं तो उन्हें स्वयं को धर्मनिरपेक्ष देश बनाना होगा।’’

 
उन्होंने कहा, ‘‘आप यह कैसे कह सकते हैं कि हम एकसाथ रह सकते हैं जबकि आप एक इस्लामिक देश हैं? भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और हम साथ रहें इसके लिए जरूरी है कि हम दोनों ही धर्मनिरपेक्ष हों। अगर वह हमारी तरह धर्मनिरपेक्ष बनना चाहते हैं तो मुझे लगता है कि इसका एक मौका है।’’।सैन्य बलों में लड़ाकू भूमिकाओं में महिलाओं को शामिल करने के बारे में पूछे जाने पर रावत ने कहा, ‘‘हम अब तक इसके लिए तैयार नहीं हैं क्योंकि सैन्य बलों में इसके लिए सुविधाएं विकसित करनी होंगी और महिलाओं को भी वैसी कठिनाईयों का सामना करने के लिए उस लिहाज से तैयार होने की जरूरत है। यह आसान नहीं है। हमें पश्चिमी देशों से अपनी तुलना नहीं करनी चाहिए। पश्चिमी देश अधिक खुले हैं।’’
 
 
उन्होंने कहा, ‘‘हां, यहां के बड़े शहरों में हम भी और खुले हो सकते हैं लेकिन हमारे सैन्यकर्मी केवल बड़े शहरों से नहीं आते, वे ग्रामीण इलाकों से भी आते हैं जहां जहां महिला और पुरुष आपस में उतने सहज नहीं हैं जितने की उम्मीद की जाती है।’’ जनरल रावत ने कहा, ‘‘महिला अधिकारियों को तीनों सेनाओं में शामिल किया जा रहा है। लेकिन उनमें से कुछ को स्थायी कमीशन दिया जाना चाहिए या नहीं, इस बारे में फैसला करने की जरूरत है। सेना का भी यह मानना है ऐसे कुछ पहलू, कुछ क्षेत्र हैं जहां हमें एक किस्म की निरंतरता और स्थायित्व की आवश्यकता है।’’।उन्होंने बताया कि सेना को महिला दुभाषियों की जरूरत है। इसके अलावा और भी कई क्षेत्रों में सेना महिलाओं को अवसर देने पर विचार कर रही है।

नयी दिल्ली। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के नेता योगेन्द्र यादव ने कहा है कि किसानों ने कृषि संकट के स्थायी समाधान के लिये पहली बार सरकार के समक्ष समस्या के समाधान का मसौदा पेश किया है। किसान चार्टर और किसान घोषणा पत्र के रूप में इस मसौदे को शुक्रवार को संसद मार्ग पर आयोजित किसान सभा में पेश किया जायेगा।

समिति द्वारा आयोजित किसान मुक्ति यात्रा के लिये देश भर से दिल्ली आये किसानों के संसद मार्च में हिस्सा ले रहे यादव ने कहा कि किसानों ने पहली बार कानून का मसौदा बना कर सरकार के समक्ष पेश किया है। किसानों को कर्ज से मुक्ति दिलाने और कृषि उपज की लागत का डेढ़ गुनी कीमत दिलाने से जुड़े प्रस्तावित दो विधेयक संसद में लंबित हैं। इन्हें पारित कराने के लिये किसानों ने सरकार से संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग को लेकर यह आंदोलन किया है।

यादव ने कहा कि पहली बार किसानों ने भी अपनी समस्या के समाधान का तरीका खुद तैयार कर सरकार के समक्ष प्रस्तावित कानून के मसौदे के रूप में पेश किया है। उन्होंने कहा कि यह भी पहला अवसर है जब किसानों ने अपने झंडों को एक कर लिया है। इसलिये यह आंदोलन निर्णायक साबित होगा। किसान यात्रा में शामिल विरिष्ठ पत्रकार पी साईनाथ ने इस आंदोलन को निर्णायक बताते हुये कहा ‘‘इस बार मज़दूर और किसान अकेला नहीं है। डाक्टर, वकील, छात्र और पेशेवर पहली बार अपनी ड्यूटी छोड़कर किसानों के साथ आये हैं।’ उन्होंने कहा कि इस बार आंदोलनकारी दोनों प्रस्तावित विधेयकों को पारित करने की मांग से पीछे नहीं हटेंगे।

नई दिल्ली। किसान आंदोलन में पहुंचे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि आज हिन्दुस्तान के सामने दो बड़े मुद्दे हैं। पहला- हिन्दुस्तान के किसान का मुद्दा तो दूसरा बेरोजगार युवाओं का मुद्दा। यहां की सरकार 15 अमीर लोगों का 15 हजार करोड़ रुपए माफ कर देती है लेकिन किसानों की तरफ ध्यान नहीं देती है। राहुल गांधी ने कहा कि अगर अमीरों का कर्जा माफ हो सकता है तो किसानों का कर्जा माफ हो कर रहेगा। 

इसी के साथ मोदी सरकार को लताड़ते हुए कहा कि अगर आप अपने मित्रों को 3,500 करोड़ रुपए दे सकते हो तो किसानों का कर्जा माफ करके भी देना होगा। तमाम पार्टियों के नेताओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हमारी विचारधाराएं अलग हो सकती हैं लेकिन हम किसानों और युवाओं के लिए एकजुट होकर खड़े रहेंगे और इसके लिए सरकार बदलनी पड़ेगी तो वह भी बदल कर रख देंगे।

 

इसी बीच राहुल गांधी ने अनिल अंबानी को भी लताड़ा। राहुल ने आगे कहा कि हमने पांच साल पहले ही कहा था जो सरकार किसानों को नजरअंदाज करेगी, युवाओं को परेशान करेगी उसे बदल दिया जाएगा। साथ ही कहा कि इस देश को कोई एक व्यक्ति नहीं चलाता है, एक पार्टी नहीं चलाती है बल्कि इस देश का किसान और युवा मिलकर चलाता है और हम सब हिन्दुस्तान के किसानों के साथ एकजुट होकर खड़े हैं। 

 

वीमेंस क्रिकेट की प्रतिभाशाली बल्लेबाजों में से एक मिताली राज बेहद दुखी हैं. वह खुद पर लग रहे आरोपों से बेहद आहत हैं. इसका खुलासा उन्होंने अपने ट्विवटर हैंडल पर किया है. मिताली राज ने महिला क्रिकेट टीम के कोच रमेश पोवार के आरोपों के बाद ट्विटर पर एक पोस्ट लिखी है.

मिताली ने लिखा, 'मुझ पर लगाए गए आरोपों से मैं दुखी हूं. खेल के लिए मेरा समर्पण और देश के लिए 20 साल तक खेलना, कड़ी मेहनत करना, पसीना बहाना, सब बेकार गया. आज मेरी देशभक्ति पर संदेह किया जा रहा है. मेरी स्किल्स पर सवाल उठाए गए हैं. सब कुछ मिट्टी में मिल गया. ये मेरी जिंदगी का सबसे खराब दिन है. भगवान मुझे शक्ति दे.’'


आपको बता दें मिताली राज ने रमेश पोवार पर उन्हें बेइज्जत करने का आरोप लगाया था. भारतीय महिला टीम की सबसे सीनियर खिलाड़ी ने राहुल जौहरी और सबा करीम को भेजे गए ईमेल में पोवार पर आरोप लगाया था कि उन्हें वेस्टइंडीज में खेले गये विश्व टी20 के दौरान पोवार ने अपमानित किया था और टीम से बाहर किए जाने पर वह रो पड़ी थी.

मिताली के आरोपों के बाद रमेश पोवार ने बीसीसीआई के सामने अपनी बात रखी है. ईएसपीएन क्रिकइन्फो के मुताबिक, रमेश पोवार ने बीसीसीआई को सौंपी अपनी रिपोर्ट में आरोप लगाया है कि मिताली राज ने रिटायरमेंट लेने की धमकी दी थी.

पोवार के मुताबिक मिताली राज ने ओपनिंग न कराने पर वर्ल्ट टी20 से लौटने और रिटायरमेंट लेने की बात कही थी. पोवार ने आरोप लगाया कि मिताली राज ने पाकिस्तान के खिलाफ दूसरे ग्रुप मैच से पहले घर लौटने और रिटायर होने की धमकी दी.

महाराष्ट्र सरकार मराठा समुदाय को नौकरी और शिक्षा में 16 फीसदी आरक्षण देने पर सहमत हो गई है. फडणवीस सरकार ने गुरुवार को विधानसभा में मराठा आरक्षण का बिल पेश किया, जिसे सर्वसम्मति से पास कर दिया गया. मराठा समुदाय को ये आरक्षण SEBC के तहत दिया जाएगा. अब इस बिल को विधानपरिषद में रखा जाएगा. वहां से पास होने के बाद ये कानून का रूप ले लेगी.

माना जा रहा है कि महाराष्ट्र सरकार 5 दिसंबर से राज्य में मराठा आरक्षण लागू करने की कोशिश में है. इसके बाद अगले पांच दिन में कानूनी औपचारिकता पूरी कर इसे अमल में लाया जा सके.

30% आबादी वाले मराठों को 16% आरक्षण की सिफारिश, आयोग ने सौंपी रिपोर्टमराठों को आरक्षण मिले, इसके लिए महाराष्ट्र सरकार ने हाईकोर्ट के निर्देश पर पिछड़ा वर्ग आयोग को रिपोर्ट तैयार करने का काम सौंपा था. करीब एक साल बाद 15 नवंबर को आयोग ने अपनी रिपोर्ट महाराष्ट्र सरकार को सौंप दी. इसके बाद कैबिनेट ने इसे मंजूरी दे दी थी.

सीएम ने क्या कहा?
आरक्षण बिल पास होने के बाद सीएम देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में कहा, 'हमने मराठा आरक्षण के लिए प्रक्रिया पूरी कर ली है और हम आज विधेयक लाए हैं. हालांकि धनगर आरक्षण पर रिपोर्ट पूरी नहीं हो पाई है. इसके लिए एक उप समिति का गठन किया गया है. जल्द ही एक रिपोर्ट और एटीआर विधानसभा में पेश की जाएगी.'

आरक्षण के लिए लंबे समय तक चला आंदोलन

महाराष्ट्र के अलग-अलग इलाकों में मराठा समुदाय ने आरक्षण की मांग को लेकर कई बड़े मोर्चे निकाले, जिनसे सही मायने में सरकार पर दबाव बना. कई मोर्चे एकदम शांतिपूर्ण तरीके से, बिना किसी उपद्रव के निकाले गए थे.

इससे पहले मुख्यमंत्री ने आरक्षण पर पिछड़े वर्ग आयोग की सिफारिश रिपोर्ट विधानसभा में पेश कर दी थी. सदन में मराठा समाज के लिए रिपोर्ट और बिल ड्राफ्ट पर चर्चा भी हुई.

तुरंत आरक्षण लागू कराने की मांग को मुंबई की तरफ बढ़े मराठा

बुधवार को हुई थी अहम मीटिंग

मराठा आरक्षण पर अंतिम राय बनाने के लिए सीएम देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को मीटिंग बुलाई थी. इसमें कैबिनेट की उप समिति सहित विपक्ष के सभी नेता मौजूद रहे. सरकार मराठा आरक्षण को लेकर आम सहमति बनाने की कोशिश कर रही थी. बता दें कि इस मुद्दे पर बुधवार शाम को राजस्व मंत्री चंद्रकांत पाटिल की अध्यक्षता वाली राज्य मंत्रिमंडल की उप समिति की बैठक हुई थी.

पाटिल ने बुधवार को विधानसभा परिषद में कहा था कि विधेयक को पारित कराने के लिए जरूरत पड़ने पर राज्य विधानसभा के शीतकालीन सत्र की अवधि बढ़ाई जा सकती है.

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