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नई दिल्ली । भारत की स्टार महिला बैडमिंटन खिलाड़ी पी वी सिंधू को अगले माह 12 दिसंबर से शुरु हो रहे विश्व टूर फाइनल में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीदें हैं। सिंधू ने ग्वांग्झू में होने वाली विश्व टूर फाइनल की तैयारियों के लिए ही पिछले सप्ताह सैयद मोदी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में नहीं खेला था। यह तीसरा अवसर है जबकि सिंधू ने विश्व टूर जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगिता के लिये क्वालीफाई किया है। सिंधु ने कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है कि मैं इस टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन करूंगी। मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के प्रति आश्वस्त हूं। यह सबसे बड़े टूर्नामेंटों में से एक है जिसमें शीर्ष खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। यह चुनौतीपूर्ण होगा लेकिन मैं वास्तव में इसे जीतना चाहती हूं।’’ सिंधू ने इस साल अपनी प्रभावशाली फार्म जारी रखी है। उन्होंने राष्ट्रमंडल खेल, एशियाई खेल और विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक हासिल किये। इसके अलावा वह इंडिया ओपन और थाईलैंड ओपन में भी उप विजेता रही थी। फाइनल में हारने के बारे में सिंधू ने कहा, ‘‘मैं पांच फाइनल में खेली और उनमें हार गयी। यह हार पचा पाना मुश्किल होता है लेकिन मैं एशियाई खेलों के परिणाम से खुश हूं। कुल मिलाकर मैंने कुछ अच्छे परिणाम हासिल किये और कुछ अवसरों पर फाइनल में उलटफेर का शिकार बनी।’

बॉलिवुड की मशहूर अदाकारा रहीं श्रीदेवी के फैन्स के लिए यह खबर अच्छी हो सकती है कि उन्हें एक फिल्म में कार्य करते देखा जा सकता है। जी हां, फिल्म निर्माता आनंद एल रॉय की रिलीज के लिए तैयार फिल्म 'ज़ीरो' दिवंगत श्रीदेवी भी नजर आने वाली हैं। इस फिल्म में किंग खान शाहरुख, कैटरीना कैफ और अनुष्का शर्मा लीड रोल में नजर आने वाले हैं। इसमें दो राय नहीं कि फिल्म जीरो मौजूदा साल की बहुप्रतीक्षित फिल्मों में से एक है, जिसे लेकर तमाम तरह की चर्चाएं हो चुकी हैं। अब खासतौर पर यह बतलाया जा रहा है कि इस फिल्म में दिवंगत श्रीदेवी का स्पेशल अपीयरेंस होगा और इसलिए तमाम दर्शकों के लिए यह फिल्म स्पेशल हो सकती है। यहां आपको बतला दें कि फिल्म जीरो के लिए श्रीदेवी ने करिश्मा कपूर, काजोल, रानी मुखर्जी और आलिया भट्ट के साथ स्पेशल सॉन्ग शूट किया था, जिसके कुछ समय पश्चात ही उनकी मृत्यु विदेश में हो गई थी। इस तरह 'ज़ीरो' के लिए उनकी आखिरी शूटिंग को बड़े पर्दे पर देखना उनके फैन्स के लिए वाकई बेहद स्पेशल होने वाला है। कहा तो यह भी जा रहा है कि किंग खान शाहरुख इस सॉन्ग को अपनी इस आनेवाली फिल्म में एक सरप्राइज़ एलिमेंट के तौर पर शामिल करना चाहते हैं। इसलिए समझा जा रहा है कि यह सॉंग फिल्म रिलीज से पहले लॉंन्च नहीं ही किया जाएगा। गौरतलब है कि श्रीदेवी के साथ इस गाने की शूटिंग पिछले साल अक्टूबर में हुई थी, जबकि उनकी मृत्यु इसी साल फरवरी में हुई। खास बात तो यह भी है कि काफी पहले करिश्मा कपूर ने सेट की एक तस्वीर शेयर की थी, जिसमें शाहरुख के साथ ही करिश्मा, श्रीदेवी और आलिया भट्ट भी नजर आईं। बहरहाल अब सभी को उस तारीख का इंतजार है जिसमें फिल्म रिलीज होगी और फैंस देख सकेंगे कि उनकी पसंदीदा हीरोइन किस तरह से अपने आखिरी...

भिलाई,। न्यू खुर्सीपार निवासी जागीर चौक पंजाबी मोहल्ला रविकांत यादव का 12 वर्षीय पुत्र आशीष कुमार उर्फ सूरज यादव पिछले 24 नवंबर से कही लापता हो गया है। घर वालों ने अपने रिश्तेदारों के यहां खोजबीन करने के बाद खुर्सीपार थाना में सूरज के गुमशुदगी का रिपोर्ट दर्ज कराया है। सूरज के पिता रविकांत ने थाने में रिपोर्ट लिखाने के दौरान पुलिस को बताया है कि किसी अज्ञात व्यक्ति उसे बहला फुसला कर कहीं ले जाया गया है, पुलिस धारा 363 मामला दर्ज कर विवेचना कर रही है।

कई बार शिकायतों के बाद नही हो रहा सुधार
हाजिर रहने के बाद भी गैर हाजिर कर रहा है शो
भिलाई,। नगरीय निकाय प्रशासन के आदेश पर नगर निगम में कार्यरत कर्मियों के हाजिरी के लिए निष्ठा एप की मशीन में अंगूठा लगाकर उपस्थिति दर्ज कराने का कार्य हो रहा था, इसी एप के माध्यम से कर्मियों की हाजिरी लग रही थी और उसी आधार पर इनके वेतन का भुगतान किया जाता है, लेकिन निगम का निष्ठा एप पिछले कई महिने से गड़बडा रहा है, इसका डाटा बेस गलत सलत बता रहा है, अंगूठा लगाने के बाद भी गैर हाजिर शो करने के कारण निगम कर्मियें की हजारों रूपये वेतन कट जा रहा है, इस निष्ठा एप के डाटा बेस को सुधारने छत्तीसगढ़ स्वायत्तशासी कर्मचारी संघ द्वारा कई बार अपने बडे अधिकारियों को शिकायत की लेकिन इसमें कोई सुधार नही हो रहा है, इससे भारी नाराज निगम कर्मी आज सड़क पर उतर गये और निष्ठा एप का अनुबंध समाप्त करने प्रदर्शन किया।
हर माह 80 कर्मचारियों की अटेंडेंस में आती है गड़बड़ी सामने
छत्तीसगढ़ स्वायत्तशासी कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि सेल्फी के साथ अटेंडेंस दर्ज कराने के लिए बनाई गई मोबाइल निष्ठा एप दगा दे रही है। कर्मचारियों का अटेंडेंस दर्ज नहीं हो रहा है। इससे भिलाई के अधिकारी कर्मचारिये में भारी आक्रोश है। इसलिए इस निष्ठा एप के विरोध पर उतर आए हैं।
निष्ठा एप में हर महीने 70-80 कर्मचारियों की अटेंडेंस में गड़बड़ी सामने आती है। सुधार के लिए कई बार एजेंसी को पत्र लिखा गया है। नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों को जानकारी दी गई। इसके बावजूद एजेंसी सॉफ्टेवयर के डेटा बेस को क्लीयर नहीं कर पाया।
इधर निगम के अधिकारी कर्मचारियों की उपस्थिति एप में दर्ज नहीं हो पा रही है। इसके कारण सेल्फी के साथ फोटोग्राफ एप में अपलोड करने बावजूद अटेंडेंस दर्ज नहीं होता। अटेंडेंस में गड़बड़ी की वजह से स्थापना विभाग अधिकारी कर्मचारियों के वेतन को रोक देती है। या फिर वेतन ही रोक दिया जाता है।
कल सौंपें थे ज्ञापन
नाराज अधिकारी कर्मचारियों ने बुधवार को उपायुक्त ए के द्विवेदी से मुलाकात की थी। निष्ठा एप की विसंगतियों को दूर करने की मांग की। उपायुक्त ने आयुक्त की अनुमति के बाद एक्ससेप्शन क्लीयर करने का आश्वासन दिया। सभी को निष्ठा एप के अलावा रजिस्टर पर भी हस्ताक्षर करने कहा था। बावजूद गुरुवार को नाराज निगमकर्मियों ने जमकर प्रदर्शन किया।

जयपुर । राजस्थान विधानसभा चुनाव में इस बार विकास के वादों पर जाति की राजनीति हावी हो गई दिखाई देती है। एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जाति पर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के गोत्र को लेकर भी तंज कसे जा रहे हैं। राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी राहुल गांधी के गोत्र पर सवाल उठाए हैं। वसुंधरा ने ट्वीट किया कि मेरे मंदिर जाने का मजाक उड़ाने वाले राहुल गांधी अब खुद मंदिर जाने लगे हैं। राजे ने कहा वोटों के लालच में अब वे गोत्र भी बताने लगे हैं। राहुल गांधी ने अपना गोत्र नहीं बताया, जो गोत्र बताया है, वह तो नेहरूजी का गोत्र है। उन्हें तो अपने दादा और पिता का गोत्र बताना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि राहुल ने सोमवार को पुष्कर में ब्रह्मा जी के मंदिर में दर्शन किए थे। यहां पुजारी ने जब राहुल से उनका गोत्र पूछा तो उन्होंने तुरंत इसका जवाब दिया। राहुल ने बताया कि वह कौल (कश्मीरी) ब्राह्मण हैं और दत्तात्रेय उनका गोत्र है। इसके बाद पुजारी ने मंदिर में पूजा संपन्न कराई। राहुल गांधी के मंदिर-मंदिर दर्शन के बाद से भाजपा लगातार हमलावर होते हुए राहुल से कभी उनके जनेऊधारी होने का प्रमाण मांगती रही, तो कभी गोत्र पूछने लगी। इससे पहले मध्य प्रदेश के चुनावी दौरे के दौरान भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए पूछा था हम राहुल गांधी से पूछना चाहते हैं कि आप जनेऊधारी हैं? आप कैसे जनेऊधारी हैं क्या गोत्र है आपका?'

लंबे समय के इंतजार के बाद भारत की सबसे महंगी फिल्म 2.0 बड़े पर्दे पर रिलीज के लिए तैयार है। इस फिल्म में लीड रोल में अक्षय कुमार, रजनीकांत, एमी जैक्सन, अदिल हुसैन और सुधांशु पांडे नजर आयेंगे। फिल्म के किरदारों की बात की जाए तो इस फिल्म में अक्षय कुमार एक शैतान का रोल  निभा रहे है। वही रजनीकांत फिल्म के हीरो हैं। यह फिल्म 2010 में आयी तमिल एन्थिरन फिल्म का दूसरा पार्ट है। यही एन्थिरन फिल्म बॉलीवुड साल 2010  में ''रोबोट'' नाम से रिलीज की गयी थी। 

इस फिल्म की शूटिंग जब से शुरू हुई थी तब से लेकर रिलीज होने तक चर्चा में रही। सबसे पहले तो इस फिल्म के बजट ने सुर्खियां बटौरी और फिर ये कानूनी पचड़ो में पड़ने के कारण खबरों में आई। एक इंटरव्यू के दौरान खुद रजनीकांत ने बताया था कि इस फिल्म पर 600 करोड़ की भारी- भरकम लागत लगी है। इस फिल्म को बनाने से पहले काफी रिसर्च की गयी है। हाई टेक्नोलॉजी पर बनने वाली ये भारत की पहली फिल्म है इस लिए ये कयास लगाए जा रहे है कि अभी तक की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म 'बाहुबली 2 '  का रिकार्ड तोड़ सकती हैं।
 
फिल्म के किरदारो का चयन भी फिल्म निर्देशक एस. शंकर ने काफी सोच समझ कर किया है। फिल्म के ट्रेलर को देखने के बाद ये बाद साबित भी हो गई कि किरदारों का चयन काफी एक दम सही है क्योंकि ट्रेलर में अक्षय कुमार और रजनीकांत दमदार रोल में नजर आ रहे हैं। लेकिन आपको एक बात बता दे कि फिल्म के नेगेटिव रोल के लिए अक्षय कुमार निर्देशक की पहली पसंद नहीं थे। निर्देशक एस. शंकर ने खुद बताया कि इस फिल्म के नेगेटिव रोल के लिए उनकी पहली पंसद हॉलीवुड के मेगा स्टार अर्नाल्ड श्वार्जनेगर थे। लेकिन यह संभव नहीं हो सका क्योंकि बॉलीवुड और हॉलीवुड फिल्मों के कायदे-कानूनों में बहुत ही ज्यादा अंतर है। इसके बाद उन्होनें बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार को इस रोल में लेने का फैसला किया। 
 

अक्षय कुमार की साख को देखते हुए मीडिया में उनसे कई बार ये सवाल भी किया गया की क्या अक्षय दूसरी पसंद होने के बाद भी ये फिल्म करना चाहेंगे जिसके जवाब में अक्षय कुमार ने कहा कि 'चाहे वह निर्देशक की तीसरी, चौथी या पाँचवी पंसद भी होते तो मैं फिल्म के लिए हां ही बोलता, क्योकिं मेरे लिए फिल्म की स्क्रीप्ट ही सबसे ज्यादा मायने रखती है।'
 
फिल्म 2.0 पूरी तरह  3D फार्मेट में शूट की गयी है। इस फिल्म के VFX पर ज्यादा काम किया गया है और इसी वजह से तो फिल्म का बजट 600 करोड़ तक पहुंच गया। बताया गया है कि 3D फार्मेट और बेहतरीन टैक्नोलोजी के चलते फिल्म में कई ऐसे सीन है जो आपको बेहद पसंद आएंगे। 
 
जहां चारो तरफ फिल्म की तारीफ हो रही है वही दूसरी तरफ टेलीकॉम ऑपरेटर्स बॉडी COAI ने मूवी के ट्रेलर और प्रमोशनल वीडियो पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ये वीडियो मोबाइल फोन और टॉवर्स की गलत छवि पेश कर रहे हैं। उन्होंने फिल्म 2.0 के कंटेंट को मानहानिकारक बताया है। सेलुलर ओपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने कहा, हमने सेंसर बोर्ड से अपील की है कि वे फिल्म का सर्टिफिकेशन रद्द करें। COAI के मेंबर्स में रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया शामिल हैं। उन्हें 2.0 के प्रमोशनल वीडियो की थीम से आपत्ति है, जिसके अनुसार मोबाइल फोन और टावरों से निकलने वाले electromagnetic field emissions पर्यावरण और इंसानों-जानवरों के लिए खतरनाक हैं।
 
यह फिल्म 600 करोड़ रुपये में तैयार हुई है और भारत की यह अब तक की सबसे महंगी फिल्म है। रिलीज के पहले ही विभिन्न अधिकारों को बेच कर लगभग 370 करोड़ रुपये वसूल हो चुके हैं इसलिए फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुरक्षित ही है। सवाल थिएट्रिकल बिजनेस का है। क्या रजनीकांत के स्टारडम के अनुरूप फिल्म व्यवसाय कर पाती है? क्या बाहुबली 2 से आगे निकल पाती है? इन सवालों के जवाब फिल्म के लिए अहम है।
अंग्रेजी में एक कहावत है "नो योरसेल्फ एंड बी योरसेल्फ" यानी खुद को जानो और फिर वैसा ही आचरण करो। शायद इसी वाक्य से प्रेरित होकर, लगता है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी खुद को जानने की एक अनंत यात्रा पर निकले हैं। वे अपनी स्वयं की ही खोज में निकले हैं। चूंकि यह कोई छोटा विषय तो है नहीं, इसलिए हर महत्वपूर्ण कार्य की ही तरह इस कार्य को भी वो केवल विशेष मुहूर्तों में ही करते हैं। जी हाँ "मुहूर्त", अर्थात् किसी कार्य की सिद्धि या फिर उसमें सफलता प्राप्त करने का सर्वोत्तम समय। अगर कार्य का उद्देश्य आध्यत्मिक फल की प्राप्ती होता है तो यह मुहूर्त सनातन धर्म के पंडित से निकलवाया जाता है। लेकिन अगर कार्य का उद्देश्य राजनैतिक फल की प्राप्ति होता है तो इसका मुहूर्त राजनैतिक पंडित निकलते हैं। जिस प्रकार हिन्दू धर्म के पंडित पंचांग से तिथियाँ देखकर सर्वश्रेष्ठ तारीख बताते हैं, उसी प्रकार राजनीति के विशेषज्ञ चुनावी कैलेंडर देखकर कार्यसिद्धि के लिए सर्वश्रेष्ठ तारीख बताते हैं। इसलिए राहुल गांधी की खुद की ही खोज की इस प्रकार की यात्राएं ज्यादातर चुनावों के दिनों में ही शुरू होती हैं और उत्तर मिले या ना मिले चुनावों के साथ ही खत्म भी हो जाती हैं। आगे की खोज के लिए उन्हें अगले चुनावों की तारीख का इंतजार करना पड़ता है।
 
दरअसल 2014 से पहले उनका जीवन बहुत आराम से बीत रहा था। कहीं कोई दिक्कत नहीं थी। उन्हें अपनी पहचान की कोई दिक्कत नहीं थी, वो खुद को "सेक्युलर" कहते थे और अपनी "सेक्युलर छवि" से पूरी तरह से संतुष्ट थे। उन्हें मीडिया में अपनी मंदिर में माथा टेकते फ़ोटो या फिर जनेऊ दिखाने की आवश्यकता भी नहीं पड़ती थी।
 
लेकिन 2014 के बाद समय ने करवट ली। जो सेक्युलर छवि कल तक सत्ता की चाबी का पासवर्ड थी आज उसी सत्ता के लिए सबसे बड़ा वायरस बन गई। जब आनन फानन में खोज की गई, तो पता चला कि इस वायरस को मारने वाला एंटीवायरस केवल एक ही है जिसका नाम है "हिंदुत्व" लेकिन उसकी एक ही कॉपी थी जो पहले से ही किसी और ने अपने नाम कर ली है। अब तुरत फुरत में उस एंटीवायरस का डुप्लीकेट तैयार किया गया, "सॉफ्ट हिंदुत्व"। लेकिन चूंकि यह ओरिजनल न होकर डुप्लिकेट था, इसकी एक समस्या थी। यह केवल साइट पर ही एक्टिवेट होता था। जी हाँ ठीक समझे। इसे प्रभावकारी बनाने के लिए बार बार हिंदुत्व के भाव जगाने वाले मूल स्थान यानी मंदिरों में जाना पड़ता है।
 
अब शुरू होती है राहुल की वो यात्रा जिसमें वो अपनी एक नई पहचान ढूंढने निकले हैं। जी हाँ यह एक पहचान को गढ़ने से ज्यादा ढूंढना है। क्योंकि कोई भी व्यक्तित्व गढ़ा तब जाता है जब हमारे मन में उसकी स्पष्ट छवि हो। लेकिन राहुल तो अपनी इस यात्रा में रोज रोज नई चीजें सीख कर नए नए रहस्योद्घाटन ही नहीं कर रहे बल्कि अपनी ही नई परम्परायें भी बना रहे हैं।
 
 
अभी कुछ ही दिन पहले जब वे एक मंदिर में गए थे और वहाँ के पुजारी ने उनसे उनका गोत्र पूछा था तो वे बता नहीं पाए थे लेकिन अब हाल ही में राजस्थान के पुष्कर मंदिर में जब उनसे उनका गोत्र पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि वे दत्तात्रेय कौल ब्राह्मण हैं। इससे पहले वे खुद को एक जनेऊधारी ब्राह्मण भी बता चुके हैं लेकिन जब गुजरात के सोमनाथ मंदिर में जाते हैं तो अपना नाम गैर हिंदुओं के रजिस्टर में लिखकर आते हैं। खैर, अभी यहां हम केवल उनके गोत्र के विषय पर आते हैं।
 
 
दरअसल जब कांग्रेस पार्टी की तरफ से इस प्रकार के मूर्खतापूर्ण कार्य किये जाते हैं और वो भी छाती ठोक के, तो बेहद अफसोस के साथ कहना पड़ता है कि वे इस देश की जनता को मूर्ख समझ कर उस का अपमान करते हैं। ऐसा लगता है कि ऐसी बातें करके वे देश की जनता को ललकार कर कह रहे हों कि तुम केवल मूर्ख ही नहीं अंधे भी हो क्योंकि तुम वो ही देख पाते हो जो दिखाया जाता है। क्योंकि, तुम यह भी नहीं देख पा रहे कि जो कांग्रेस पार्टी कल तक सोनिया गांधी के नाम की माला जपती थी आज सत्ता के लालच में उन्हीं का अपमान करने से भी नहीं चूक रही। आइए देखते हैं कैसे,
 
1, गोत्र का चलन केवल भारत में है और वो भी केवल हिंदुओं में
2, गोत्र एक प्रकार की पहचान होती है जो आपके कुल परम्परा, वंश को बताती है
3, वंश परंपरा केवल भारत ही नहीं विश्व के अधिकांश देशों में पिता के नाम से चलती है
4, खुद राहुल गांधी की मां सोनिया गांधी का असली नाम एंटोनियो "मायनो" है, और उनके पिता का नाम स्टेफेनो "मायनो" 
5, राहुल के पिता राजीव की बात करें तो उनके पिता का नाम फिरोज़ जहांगीर गांधी था। कहा जाता है कि वो एक पारसी थे, लेकिन उनकी कब्र प्रयागराज में है इस प्रकार उन्होंने केवल गांधी जी का नाम अपनाया था धर्म नहीं।
6, अब कांग्रेस का कहना है कि राहुल के पिता राजीव गांधी ने अपने पिता का केवल नाम अपनाया था धर्म नहीं, धर्म उन्होंने अपनी माँ इंदिरा का अपनाया था जो उन्हें अपने पिता जवाहरलाल नेहरु से मिला था जो खुद को एक कश्मीरी पंडित कहते थे। यह अलग विषय है कि नेहरु यह भी कहते थे कि शिक्षा से मैं एक अंग्रेज हूँ, विचारों से मैं इनटरनेशनलिस्ट हूँ, संस्कारों से एक मुस्लिम हूँ और एक्सीडेंटली एक हिन्दू हूँ।
7, तो अब प्रश्न यह उठता है कि जब राजीव ने अपने पिता का नाम अपनाया था तो अधूरा क्यों अपनाया राजीव गाँधी, राजीव फिरोज़ जहांगीर गांधी नहीं, क्यों?
8, राजीव ने अपने पिता का अधूरा ही सही गाँधी नाम तो अपना लिया लेकिन उन्होंने अपने पिता का धर्म क्यों नहीं अपनाया? अपनी माँ का धर्म क्यों अपनाया?
9, अब अगर वह गांधी नाम को अपना रहे हैं तो गोत्र से गांधी हट कर नेहरू जी का कश्मीरी ब्राह्मण और दत्तात्रेय कैसे आ गया?
10, वैसे तो गोत्र पिता से आता है माँ से नहीं फिर भी चलो इस परिवार को विशेष परिस्थितियों में माता की ही तरफ से गोत्र बताने दिया जाये, तो भी यह गोत्र तो केवल राजीव गांधी का है राहुल का नहीं क्योंकि राजीव की माँ इंदिरा हैं जो कि नेहरू की बेटी हैं जो कि कश्मीरी पंडित हैं जबकि राहुल की माँ सोनिया हैं।
11, राहुल अगर माता की तरफ का गोत्र लेंगे तो उनका कोई भी गोत्र कैसे हो सकता है क्योंकि उनकी माँ सोनिया हैं जो एक ईसाई हैं?
12, अब राहुल जब अपने दत्तात्रेय गोत्र का नाम लेते हैं और उसे ये कांग्रेस माँ की तरफ का कहती है जब कि वो उनकी दादी है, तो क्या ये एक माँ का अपमान नहीं है जिसका अस्तित्व ही ये अपने राजनैतिक स्वार्थ के लिए नकार रहे हैं?
13, लेकिन इन सब से परे एक महत्वपूर्ण प्रश्न भी है जिसका उत्तर यह देश इस गाँधी परिवार से आज जानना चाहेगा।
आज जो परिवार खुद के एक कश्मीरी पंडित होने की दुहाई दे रहा है उन्होंने 1990 में घाटी के कश्मीरी पंडितों को अकेला क्यों छोड़ दिया था? अगर उस समय इस परिवार ने अपने कर्म से यह जता दिया होता कि वो वाकई में एक जनेऊधारी हिन्दू ब्राह्मण हैं तो आज उस परिवार को अपने जन्म से हिन्दू होने के प्रमाण नहीं देने पड़ते क्योंकि भारत वो देश है जिसमें जन्म से ज्यादा महत्व कर्म को दिया जाता है।
 

 

 
इसलिए अब वक्त आ गया है कि राहुल इस बात की गंभीरता को समझें कि जितनी कांग्रेस को सत्ता की जरूरत है उससे अधिक इस देश के लोकतंत्र को एक समझदार और दमदार विपक्ष की जरूरत है। इस देश के लोगों को इंतज़ार है एक ऐसे विपक्ष का जो उन्हें देश के भविष्य को संवारने की अपनी स्पष्ट नीतियाँ दिखाए अपना जनेऊ नहीं। यह देश बेताब है ऐसे विपक्ष को सर आँखों पर बैठाने के लिए जो लोगों के दिलों में अपने काम से उतरने में यकीन रखता हो अपने गोत्र या परदादा या फिर अपनी दादी के नाम के सहारे नहीं।
 
-डॉ. नीलम महेंद्र

नयी दिल्ली। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बृहस्पतिवार को कहा कि स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्र के लिए जीएसटी परिषद जैसे एक संघीय ढांचे की जरूरत है। भारतीय उद्योग परिसंघ के स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए जेटली ने उम्मीद जतायी कि स्वास्थ्य क्षेत्र में ऐसा संघीय ढांचा बनाए जाने से कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने में राज्यों से कम प्रतिरोध का सामना करना पड़ेगा। फिर राज्यों को योजनाएं लागू करनी होंगी जबकि केंद्र सरकार उसमें केवल सहयोग करेगी।

जेटली ने कहा, ‘‘ माल एवं सेवाकर (जीएसटी) के मामले में संघीय ढांचे का प्रयोग कारगर रहा। ऐसे दो क्षेत्र और हैं जहां इस तरह के संघीय ढांचे की बहुत अधिक जरूरत है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जीएसटी के लिए संविधान ने यह व्यवस्था उपलब्ध करायी है। लेकिन जिन क्षेत्रों के लिए संविधान ने यह सुविधा नहीं दी है, वहां राजनीतिक परिपक्वता से सरकारें इस प्रयोग को अमलीजामा पहना सकती हैं।’’ इस तरह की संघीय व्यवस्था की जरूरत पर बल देते हुए जेटली ने कहा कि अभी राज्य और केंद्र, दोनों ही स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपनी-अपनी योजनाएं चलाते हैं।
 
 
हालांकि यह व्यवस्था कृषि क्षेत्र में कैसे लाभ पहुंचाएगी, इस बारे में उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों के अपने अस्पताल हैं, जबकि केंद्र सरकार पूरे देश में ‘उत्कृष्ट संस्थान’ स्थापित कर रही है। केंद्र सरकार ने आयुष्मान भारत लागू की है जबकि राज्यों के पास भी ऐसी ही योजनाएं हैं। जेटली ने कहा कि इन सभी को मिलाए जाने की जरूरत है, ताकि इसके संयुक्त लाभ देश की बीमार आबादी को मिल सकें। निश्चित तौर पर इसका क्रियान्वयन राज्य ही करेंगे और केंद्र उसमें केवल सहयोग करेगा।
 
जेटली ने कहा, ‘‘यदि संघीय ढांचा बन जाता है, तो फिर मेरी योजना तुम्हारी से बेहतर होने जैसे विषय विवाद का मुद्दा नहीं होंगे। यह एक कल्याण से जुड़ा मुद्दा या मेरे राज्य के मरीज, तुम्हारे राज्य के मरीजों से बेहतर होने का मुद्दा है। यदि वास्तव में केंद्र और राज्यों के बीच इस तरह का एक संघीय ढांचा बनता है तो बेहतर समन्वय के चलते हर राज्य को फायदा होगा। उनके पास अधिक स्वास्थ्य सुविधाएं होंगी।’’
 
 
जेटली ने पूर्व संप्रग शासन के जीडीपी आंकड़ों में संशोधन का किया बचाव, कहा सीएसओ भरोसेमंद संगठन
 
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पूर्व संप्रग शासन के दौरान जीडीपी वृद्धि दर में संशोधन का बचाव करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) एक विश्वसनीय संस्थान है और वित्त मंत्रालय से अलग स्वतंत्र रूप से काम करता है। सीएसओ ने कल संशोधित आंकड़ा जारी किया। मुख्य सांख्यिकीविद् प्रवीण श्रीवास्तव ने नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार के साथ बुधवार को सकल घरेलू उत्पाद के आंकड़ों को 2004-05 के आधार वर्ष के बजाए 2011-12 के आधार वर्ष के हिसाब से संशोधित किया।
 
जेटली ने कहा कि सीएसओ एक भरोसेमंद संस्थान है जिसकी आलोचना कहीं से भी ठीक नहीं है। पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने बुधवार को जीडीपी के आंकड़ों में संशोधन को ‘बेहुदा मजाक’ करार दिया था। उन्होंने ट्विटर पर लिखा था, ‘‘नीति आयोग का संशोधित जीडीपी आंकड़ा मजाक है। यह बेहुदा मजाक है...।’’ जेटली ने कहा कि जब सीएसओ ने 2012-13 और 2013-14 के लिये वृद्धि दर का आंकड़ा संशोधित किया था तब उनकी सरकार ने इस फैसले का स्वागत किया था। उन्होंने कहा कि सीएसओ ने वृद्धि दर के आंकड़े में संशोधन को लेकर उसी मानदंड को अपनाया है।
 
सीएसओ ने बुधवार को पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के दस साल के कार्यकाल के अधिकतर वर्ष के सकल घरेलू उत्पाद जीडीपी में वृद्धि दर के आंकड़ों को घटा दिया। इससे संप्रग सरकार के कार्यकाल के उस एकमात्र वर्ष के आंकड़ों में भी एक प्रतिशत से अधिक कमी आई है जब देश ने दहाई अंक में वृद्धि दर्ज की थी। इसके अलावा 9 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर वाले तीन वित्त वर्ष के आंकड़ों में भी एक प्रतिशत की कमी आई है। 

 

 
इसमें आंकड़ों को 2004- 05 के आधार वर्ष के बजाय 2011- 12 के आधार वर्ष के हिसाब से संशोधित किया गया है, ताकि अर्थव्यवस्था की अधिक वास्तविक तस्वीर सामने आ सके। सीएसओ के संशोधित आंकड़ों के अनुसार 2010-11 में अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 8.5 प्रतिशत रही थी जबकि इसके पहले 10.3 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया गया था। 

 

जयपुर। कांग्रेस ने गुरूवार को कहा कि राजस्थान में सत्ता में आने पर वह किसानों का कर्ज माफ करेगी, बुजुर्ग किसानों को पेंशन देगी, बेरोजगार युवाओं को 3500 रुपये तक का मासिक भत्ता देगी व बच्चियों की शिक्षा पूरी तरह नि:शुल्क करेगी। कांग्रेस ने आगामी राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए अपने ‘जन घोषणापत्र’ में ये वादे किए हैं। घोषणापत्र गुरुवार को यहां जारी किया गया। पार्टी का कहना है कि यह घोषणापत्र राज्य की जनता की जनभावनाओं, उनकी अपेक्षाओं व आंकाक्षाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है इसके लिए पार्टी को ऑफलाइन व ऑनलाइन लगभग दो लाख सुझाव मिले थे।

कांग्रेस के घोषणापत्र की प्रमुख बातों में किसानों को कर्जमाफी, बेरोजगार युवाओं को 3500 रुपये तक का भत्ता, ​बच्चियों की सारी शिक्षा नि:शुल्क करना व राइट टु हेल्थ के प्रस्ताव शामिल हैं। इसके साथ ही उसने बुजुर्ग किसानों को पेंशन की बात कही है। वह असंगठित मजदूरों के लिए बोर्ड बनाएगी। पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट ने इस अवसर पर कहा कि यह जन घोषणापत्र कोई दस्तावेज नहीं बल्कि पार्टी की जनता के प्रति प्रतिबद्धता है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस अवसर पर कहा कि पार्टी के घोषणापत्र में जन भावनाओं को शामिल करने का यह ‘राहुल मॉडल’ है और घोषणापत्र के लिए लगभग दो लाख सुझाव मिले।

गहलोत ने आरोप लगाया कि वसुंधरा राजे सरकार ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं बंद कर दीं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने राज्य के सभी सातों संभाग में इस घोषणापत्र को जारी किया। इस अवसर पर घोषणापत्र समिति के अध्यक्ष हरीश चौधरी व पार्टी के प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे भी मौजूद थे।

नयी दिल्ली। अधिकारों से वंचित करके अवकाश पर भेजे गये केन्द्रीय जांच ब्यूरो के निदेशक आलोक कुमार वर्मा ने बृहस्पतिवार को उच्चतम न्यायालय में दलील दी कि उनकी नियुक्ति दो साल के लिये की गयी थी और इसमें बदलाव नहीं किया जा सकता। यहां तक कि उनका तबादला भी नहीं किया जा सकता। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति के एम जोसफ की पीठ के समक्ष वर्मा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता फली नरीमन ने कहा कि उनकी नियुक्ति एक फरवरी, 2017 को हुयी थी और ‘‘कानून के अनुसार दो साल का निश्चित कार्यकाल होगा और इस भद्रपुरूष का तबादला तक नहीं किया जा सकता।’’

उन्होंने कहा कि केन्द्रीय सतर्कता आयोग के पास आलोक वर्मा को अवकाश पर भेजने की सिफारिश करने का आदेश देने का कोई आधार नहीं था। नरीमन ने कहा, ‘‘विनीत नारायण फैसले की सख्ती से व्याख्या करनी होगी। यह तबादला नहीं है और वर्मा को उनके अधिकारों तथा कर्तव्यों से वंचित किया गया है।’’ उच्चतम न्यायालय ने देश में उच्चस्तरीय लोक सेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच से संबंधित मामले में 1997 में यह फैसला सुनाया था।
 
यह फैसला आने से पहले जांच ब्यूरो के निदेशक का कार्यकाल निर्धारित नहीं था और उन्हें सरकार किसी भी तरह से पद से हटा सकती थी। परंतु विनीत नारायण प्रकरण में शीर्ष अदालत ने जांच एजेन्सी के निदेशक का न्यूनतम कार्यकाल दो साल निर्धारित किया ताकि वह स्वतंत्र रूप से काम कर सकें। नरीमन ने जांच ब्यूरो के निदेशक की नियुक्ति और पद से हटाने की सेवा शर्तों और दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान कानून 1946 के संबंधित प्रावधानों का जिक किया। 
 
इससे पहले, सुनवाई शुरू होते ही नरीमन ने कहा कि न्यायालय किसी भी याचिका के विवरण के प्रकाशन पर प्रतिबंध नहीं लगा सकता क्योंकि संविधान का अनुच्छेद इस संबंध में सर्वोपरि है। उन्होंने इस संबंध में शीर्ष अदालत के 2012 के फैसले का भी हवाला दिया। पीठ ने सीवीसी के निष्कर्षो पर आलोक वर्मा का जवाब कथित रूप से मीडिया में लीक होने पर 20 नवंबर को गहरी नाराजगी व्यक्त की थी। यही नहीं, न्यायालय ने जांच ब्यूरो के उपमहानिरीक्षक मनीष कुमार सिन्हा के अलग से दायर आवेदन का विवरण भी प्रकाशित होने पर अप्रसन्नता व्यक्त की थी।
 
नरीमन ने कहा, ‘‘यदि मैं कल रजिस्ट्री में कुछ दाखिल करता हूं तो इसे प्रकाशित किया जा सकता है।’’ उन्होंने कहा कि यदि शीर्ष अदालत बाद में प्रतिबंध लगाती है तो ऐसी सामग्री का प्रकाशन नहीं किया जा सकता। नरीमन ने जब सनसनीखेज आरोपों वाले कुछ मामलों की मीडिया रिपोर्टिंग स्थगित करने के लिये नियमों में बदलाव का सुझाव दिया तो जांच एजेन्सी के उपाधीक्षक ए के बस्सी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने कहा कि उन्हें इस पर गहरी आपत्ति है।
 
बस्सी ही जांच ब्यूरो के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ रिश्वत के मामले की जांच कर रहे थे परंतु बाद में उनका तबादला कर दिया गया था। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि न्यायालय का इस तरह का कोई आदेश देने की मंशा नहीं है। धवन ने कहा, ‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पिछली तारीख पर आपने कहा कि हमारे में से कोई भी सुनवाई के योग्य नहीं है। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण हो सकता है परंतु हम आज आपको सुनेंगे।

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