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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कहा कि वह दिवंगत राष्ट्रपति जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश का ताबूत वाशिंगटन लाने के लिए राष्ट्रपति का विशेष विमान भेज रहे हैं। बुश का अंतिम संस्कार यहीं होना है। ट्रंप ने कहा कि अर्जेंटिना में चल रहे जी20 सम्मेलन से उनकी वापसी के बाद विशेष श्रद्धांजलि के रूप में बोईंग 747 विमान ह्यूस्टन जाएगा और बुश का ताबूत लेकर वाशिंगटन लौटेगा।

 

राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘एयर फोर्स वन मुझे और अन्य बहुत सारे लोगों को लेकर वाशिंगटन आएगा। फिर उसे (पूर्व) राष्ट्रपति बुश का ताबूत लेने के लिए ह्यूस्टन भेजा जाएगा।’’  बुश का शुक्रवार को 94 वर्ष की आयु में ह्यूस्टन में निधन हो गया। व्हाइट हाउस का कहना है कि वाशिंगटन के नेशनल कैथेड्रल में राजकीय सम्मान के साथ बुश का अंतिम संस्कार किया जाएगा। राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी पत्नी मेलानिया वहां उपस्थित रहेंगे।

बता दें कि अमेरिका के कद्दावर नेता और पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश का शुक्रवार को निधन हो गया। उनकी उम्र 94 वर्ष थी। उनके बेटे एवं अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने बुश के निधन की घोषणा करते हुए उन्हें एक सद्चरित्र व्यक्ति और सर्वश्रेष्ठ पिता बताया। बुश की पत्नी बारबरा बुश का इसी साल अप्रैल में निधन हुआ था।

दोनों का वैवाहिक बंधन करीब 73 वर्ष का रहा। अमेरिका के 41 वे राष्ट्रपति बुश विदेश नीति के अच्छे जानकार थे। वर्ष 1989 में सोवियत संघ के विघटन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। इसके करीब दो वर्ष बाद उन्होंने इराके के शक्तिशाली नेता सद्दाम हुसैन को पराजित करने के लिए एक अभूतपूर्व गठबंधन भी बनाया। 

सीआईए के पूर्व प्रमुख रहे बुश केवल एक कार्यकाल के लिए ही सत्ता में रहे। देश की कमजोर अर्थव्यवस्था के चलते वर्ष 1992 के चुनाव में उन्हें डेमोक्रेट उम्मीदवार बिल क्लिंटन से मात खानी पड़ी । राजनीतिक स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय आम सहमति के पक्षधर रहे बुश की विचारधारा मौजूदा रिपब्लिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बिल्कुल विपरीत थी । 2016 के चुनाव में बुश ने ट्रंप को अपना मत तक नहीं दिया ।

निधन के समय तक बुश अमेरिका के सबसे उम्रदराज जीवित राष्ट्रपति थे। बराक ओबामा ने बुश के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा, ‘‘अमेरिका ने जॉर्ज हर्बर्ट वॉककर बुश के रूप में एक देशभक्त और विनम्र सेवक खो दिया है। मैं आज जहां बहुत गमगीन हूं वहीं मेरा दिल उनके प्रति आभार से भरा है।’’ 

चीन ने घरेलू मुद्राओं में द्विपक्षीय व्यापार के भारत के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है। इस प्रस्ताव का लक्ष्य पड़ोसी देश के साथ बढ़ते व्यापार घाटे को कम करना था। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। वित्त वर्ष 2017-18 में भारत ने चीन को 13.4 अरब डॉलर का निर्यात किया था। वहीं इस दौरान चीन से कुल आयात 76.4 अरब डॉलर रहा था। इस तरह चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 63 अरब डॉलर का रहा था। वित्त वर्ष 2016-17 में यह आंकड़ा 51.11 अरब डॉलर का रहा था।

 

भारत ने अपने निर्यात को बढ़ावा देने और बढ़ते व्यापार घाटे के समाधान के लिए चीन को युआन-रुपये में व्यापार का सुझाव दिया था। अधिकारी ने बताया, “उन्होंने प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।” अक्तूबर में एक अंतर-मंत्रालयी बैठक के दौरान इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी। बैठक में यह कहा गया था कि भारतीय रिजर्व बैंक और आर्थिक मामलों का विभाग चीन के साथ युआन-रुपये में व्यापार की संभावनाओं की तलाश करेंगे। 

भारत ने रूस, ईरान और वेनेजुएला सहित कुछ अन्य देशों के साथ भी घरेलू मुद्राओं में व्यापार का प्रस्ताव दिया है। इन तीन देशों के साथ भी भारत का व्यापार घाटा है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (एफआईईओ) के अध्यक्ष गणेश कुमार गुप्ता ने कहा कि सरकार को घरेलू मुद्रा में भारत से निर्यात को बढ़ावा देना चाहिए। 

गुप्ता ने कहा, “इससे चीन जैसे देशों के साथ व्यापार घाटे को पाटने में मदद मिलेगी।” व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को घरेलू मुद्राओं में द्विपक्षीय व्यापार का लाभ केवल ऐसे देशों के साथ मिलेगा, जिसके साथ उसके व्यापार में संतुलन की स्थिति है। 

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि उनकी पार्टी फिलहाल अयोध्या में विवादित स्थल पर राम मंदिर निर्माण के लिए अध्यादेश लाने के बारे में विचार नहीं कर रही है। विजयवर्गीय ने हालांकि कहा कि भाजपा ही अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कर सकती है क्योंकि किसी और में ऐसा करने का दम नहीं है।

 उनके मुताबिक, मंदिर के मुद्दे ने भाजपा को फायदे से ज्यादा नुकसान पहुंचाया है क्योंकि विपक्ष इस मसले का इस्तेमाल अल्पसंख्यकों को डराने और वोटों के ध्रुवीकरण के लिए कर रहा है। उन्होंने कहा, 'हम अदालत से एक बार फिर इस मसले पर फैसला सुनाने की अपील करेंगे। जब तक मामला अदालत में है, हमें जल्दबाजी न करते हुए उसे फैसले के लिए उचित समय देना चाहिए।'


विजयवर्गीय ने पीटीआई-भाषा को बताया, 'अगर लोगों की आकांक्षाएं बढ़ती रहीं, तो सरकार को इस पर (अध्यादेश लाने या न लाने पर) फैसला लेना होगा। लेकिन फिलहाल हम ऐसा नहीं सोच रहे हैं।' विश्व हिंदू परिषद, राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ और शिवसेना की ओर से अध्यादेश लाने की बढ़ती मांग पर विजयवर्गीय ने फिर दोहराया कि उन्हें जल्द फैसले की अपील लेकर अदालत के पास जाना चाहिए। 

विजयवर्गीय ने विपक्ष के इन आरोप को खारिज किया कि भाजपा चुनावों से पहले राम मंदिर मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश में जुटी है। उन्होंने कहा, 'इस मुद्दे को भाजपा ने नहीं बल्कि संतों और दूसरे संगठनों ने उठाया है। पार्टी कभी राम मंदिर मुद्दे को लेकर चुनावों में नहीं उतरी। हमारा एजेंडा हमेशा 'सबका साथ सबका विकास' रहा है।'

कांग्रेस ने चुनाव आयोग से मिलकर स्ट्रांग रूम और मतगणना के दौरान ईवीएम की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की है। कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन आयोग से मांग की है कि चुनावों और मतगणना के दौरान फूलप्रूफ व्यवस्था की जाए। कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी के नेतृत्व में कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल शनिवार को चुनाव आयोग से मिला।

 

 प्रतिनिधिमंडल में शामिल वरिष्ठ कांग्रेस नेता और छत्तीसगढ़ कांग्रेस प्रभारी पीएल पूनिया ने बताया कि उन्होंने चुनाव आयोग से शिकायत की है कि छत्तीसगढ़ में स्ट्रांगरूम के आसपास अनाधिकृत रूप से सीसीटीवी ठीक करने के बहाने लोग मोबाइल, लैपटॉप के साथ आते हैं और घंटों तक वहीं रहते हैं। उन्होंने आयोग से इस पर रोक लगाने की मांग की है। साथ ही उन्होंने आयोग को सुझाव दिया है कि ईवीएम मशीनों को स्ट्रांगरूम से मतगणना टेबल तक पहुंचाने के रास्ते तक राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को निगरानी करने का अधिकार दिया जाए। साथ ही, यह भी सुझाव दिया है कि पहले चरण की मतगणना में मिले वोटों की संख्या प्रत्याशियों बताई जाए जिसके बाद ही दूसरे चरण की मतगणना शुरू हो। साथ ही, मतगणना स्थल पर कलेक्टरो को मोबाइल ले जाने पर प्रतिबंध लगाना चाहिए।

राज्यसभा सांसद और मध्य प्रदेश के कांग्रेस प्रभारी विवेक तन्खा ने चुनाव आयोग से शिकायत की कि शुक्रवार को भोपाल के स्ट्रांग रूम में डेढ़ घंटे तक बिजली नहीं थी। उनका कहना है कि इससे मतदाताओं और राजनीतिक दलों में ईवीएम गड़बड़ी का संदेह पैदा होता है। वहीं उन्होंने एमपी के खुरई विधानसभा का जिक्र करते हुए कहा कि वहां वोटिंग के 48 घंटे बाद वह बस में भरककर लाए जाते हैं। हालांकि चुनाव आयोग का कहना था कि वे ईवीएम रिजर्व थे और पुलिस कस्ट़डी में थे। तन्खा ने सवाल उठाते हुए कहा कि ईवीएम को पुलिस स्टेशन में रखने की बजाय डीआरओ की कस्टडी में रहते हैं। उन्होंने इस मामले पर आयोग से कार्रवाई करने की मांग की है।

उत्तर प्रदेश सरकार पर आरोप

कांग्रेस नेता मनु सिंघवी ने आरोप लगाया कि यूपी के सहारनपुर में 167 मतदान केन्द्रों में कई में नाम हटाने की साजिश की जा रही है। उन्होंने बताया कि एक खास वर्ग विशेष के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं। सिंघवी का कहना है कि अगर एक पोलिंग बूथ में 100 नाम हटाए जाते हैं, तो पूरे जिले में यह संख्या 16 हजार तक पहुंच सकती है, वहीं पूरे उत्तर प्रदेश में 67 लाख वोटों का फर्क पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि आयोग ने भरोसा दिलाया है कि वह इस पर कार्रवाई करेंगे।

मध्यप्रदेश में किसकी सरकार बनेगी इसका फैसला जनता जनार्दन कर चुकी है। 11 दिसंबर को इसके नतीजे आ जाएंगे। इसी बीच पुलिस ने एक सरपंच को लोगों को जान से मारने की धमकी देने के आरोप में केस दर्ज करके गिरफ्तार किया है। सरपंच पर आरोप है कि उसने स्थानीय नागरिकों को कांग्रेस के पक्ष में वोट डालने की धमकी दी थी। यह घटना राजनगर विधानसभा क्षेत्र के छतरपुर जिले के जौराहा गांव की है। 

 

आश्चर्य की बात यह है कि आरोपी सरपंच का नाता भाजपा से है। गांववालों का आरोप है कि सरपंच ने उन्हें फोन पर धमकी दी थी कि वह 13 दिसंबर तक के लिए कहीं दूर चले जाएं। वरना उन्हें जान से मार दिया जाएगा। सरंपच ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है। शिकायकर्ता भगीरथ कुशवाहा ने एसपी को दी शिकायत में कहा है कि सरपंच प्रदीप सिंह उसे मारने की धमकी दे रहा है।

आरोपी सरपंच और शिकायतकर्ता की कथित बातचीत का एक ऑडियो क्लिप वायरल हुआ है। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है। इस विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के अरविंद पटेरिया की कांग्रेस उम्मीदवार नाती राजा और समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार धीरज चतुर्वेदी सीधी लड़ाई है। धीरज राज्यसभा के पूर्व सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी के बेटे हैं। आरोपी सरपंच प्रदीप सिंह के भाई भाजपा नेता हैं। मगर उसपर कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में वोट करवाने के लिए लोगों को धमकी देने का आरोप लगा है।

कोहिमा। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को नगालैंड में पुलिस और दमकल जैसी विभिन्न आपात सेवाओं के लिए एक मोबाइल एप्प का शुभारंभ करते हुए कहा कि इसमें महिलाओं की सुरक्षा के लिए खास फीचर होगा जो उन्हें पुलिस और स्वयंसेवकों से तुरंत सहायता मुहैया कराएगा। सिंह ने कहा कि ‘112 इंडिया’ मोबाइल एप्प पर ‘एसएचओयूटी’ (शाउट) फीचर को खासतौर पर महिलाओं के लिए उपलब्ध कराया गया है। यह ‘इमरजेंसी रिस्पोंस सपोर्ट सिस्टम’ (ईआरएसएस) से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि यह एप्प किसी परेशान महिला की जगह का पता लगाने के लिए जीपीएस का इस्तेमाल करेगा।

 गृह मंत्री ने कहा कि देश की करीब आधी आबादी महिलाओं की है और जिन देशों में महिलाएं महफूज होती हैं तो वे देश मजबूत होते हैं और उसका विकास कोई नहीं रोक पाता है। सिंह ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए सरकार विभिन्न पहलें कर रही है जिनमें महिला सुरक्षा मंडल स्थापित करना और यौन हमलों से संबंधित मामलों का निपटान फास्ट ट्रैक अदालतों में कराना शामिल है। उन्होंने नगालैंड में ‘इमरजेंसी रिस्पोंस सपोर्ट सिस्टम’ (ईआरएसएस) परियोजना शुरू करने पर राज्य के लोगों, सरकार और पुलिस को बधाई दी। नगालैंड पहला पूर्वेत्तोर राज्य है जिसने यह एप्प शुरू की है। 
 
 
उन्होंने कहा कि ईआरएसएस परियोजना के तहत, समूचे देश के लिए आपात स्थिति के लिए एक नंबर ‘112 ’ का इस्तेमाल करने पर लोगों को पुलिस, स्वास्थ्य और दमकल विभाग समेत अन्य एजेंसियों से तुरंत सहायता मिलेगी।  
 
 
ईआरएसएस में पुलिस (100), दमकल (101), स्वास्थ्य (108) और महिला (1090) हेल्पलाइनों को मिला दिया गया है और अब इन आपात सेवाओं को 112 नंबर के जरिए संपर्क किया जा सकता है। विभिन्न आपात सेवाओं के लिए एक नंबर धीरे-धीरे पूरे देश में शुरू होगा। ये अमेरिका के ‘911’ की तरह है। हिमाचल प्रदेश पहला राज्य है जिसने इस हफ्ते के शुरू में यह परियोजना को शुरू किया। इसके बाद नगालैंड में इसका शुभारंभ किया गया।
 

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश से सशस्त्र बल सप्ताह 2018 में भाग लेने की अपील की जो 1 से 7 दिसंबर 2018 के बीच चल रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे सशस्त्र बल के जवान हमारे लिए गौरव हैं। उनकी बहादुरी और बलिदान का सम्मान करना हमारा कर्तव्य है। रक्षा मंत्री ने आगे कहा कि आइए हम सशस्त्र बल का झंडा पहन कर और उत्साह के साथ सशस्त्र बल सप्ताह मनाकर अपने सैनिकों को अपना समर्थन दे।वहीं रक्षा प्रवक्ता ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा कि भारत के सभी कोनों में सभी उम्र और सभी समाज के लोग इस जश्न को मनाते हैं। मजदूर वर्ग हो या फिर स्कूल या कोई आम नागरिक, सभी इस जश्न में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं और सशस्त्र बल ध्वज दिवस कोष के लिए अपना योगदान देते हैं। इसके साथ ही रक्षा प्रवक्ता ने एक विडियो भी शेयर किया है जिसमें हमारे जवान लोगों को एक खास संदेश दे रहे हैं।

उधर रक्षा राज्य मंत्री सुभाष भामरे ने भी लोगों से अपने सैनिकों और उनके परिवारों के साथ खड़े रहने की अपील की और कहा कि सशस्त्र बलों को गर्व के साथ ध्वजांकित करें और जो भी आप #ArmedForcesFlagDay फंड की ओर कर सकते हैं उसमें योगदान दें।
लद्दाख को यूनियन टेरीटरी यानी केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा देने की मांग को लेकर आंदोलन ने फिर तेजी पकड़ ली है। केंद्र में भाजपा सरकार के गठन के साथ ही आंदोलन इसलिए थम गया था क्योंकि भाजपा ने यूटी देने का वादा किया था। लेकिन अब जबकि भाजपा द्वारा अपना वादा पूरा नहीं किया गया है, लद्दाख की जनता फिर से सड़कों पर उतर आई है। लद्दाख बुद्धिस्ट एसोसिएशन ने बुधवार को राज्यपाल सत्यपाल मलिक से भेंट कर लद्दाख को यूनियन टेरीटरी यानी केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा देने की मांग भी उठाई थी। लद्दाख बुद्धिस्ट एसोसिएशन के प्रतिनिधमंडल में प्रधान सीवांग थिनलैस और उप प्रधान पीटी कुजांग शामिल थे।
 
प्रतिनिधमंडल ने राजभवन में हुई बैठक में राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा और लोगों की मुश्किलों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उठाए गए मुद्दों में लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाना, भोटी भाषा को संविधान की आठवीं सूची में शामिल करना मुख्य था। इनके साथ पुलिस रेंज, विवि स्थापित करने सहित लद्दाख के लोगों के व्यापारिक हितों के लिए नीति बनाने की मांग भी की। लद्दाख के लोगों ने यूटी अर्थात् केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा पाने की खातिर बिगुल बजा दिया है। उन्होंने 28 सालों के बाद एक बार फिर आंदोलन का आगाज किया है। यही कारण था कि आने वाले दिनों में वे अपने आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दे रहे थे। लद्दाखी बीते दो दशकों से केंद्र शासित राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन कश्मीर केंद्रित नीतियों के चलते उनकी यह मांग पूरी नहीं हो रही है। हमारा यह आंदोलन केंद्र शासित राज्य का दर्जा मिलने तक जारी रहेगा।
 
28 सालों के उपरांत पुनः इस बर्फीले रेगिस्तान में असंतोष भड़कने लगा है। असंतोष किस सीमा को पार कर चुका है, इसी से स्पष्ट है कि लद्दाखी नेता हथियार उठाने की धमकी दे रहे हैं। हालांकि असंतोष को भड़काने तथा राख के ढेर में दबी चिंगारी को हवा देने का कार्य नेशनल कांफ्रेंस सरकार की स्वायत्तता रपट ने किया था जिसके विरोधी सिर्फ लद्दाख में ही नहीं बल्कि जम्मू संभाग में भी हैं और इसमें तेलांगना का गठन भी उनमें हिम्मत फूंक चुका है।
 
वर्ष 1989 में एलबीए ने लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर करीब साढ़े 3 माह तक हिंसक आंदोलन किया था। अंत में 6 सालों की प्रतीक्षा के उपरांत लेह की जनता को आंशिक खुशी उस समय मिली जब लेह स्वायत्त पहाड़ी परिषद के गठन की घोषणा की गई थी। लेकिन 29 अक्तूबर 1989 को केंद्र सरकार ने लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने की जो घोषणा की थी वह लागू न होने से लद्दाख की जनता खिन्न थी। हालांकि उसने अगस्त 1995 में मिलने वाले स्वायत्त पहाड़ी परिषद के दर्जे को स्वीकार तो कर लिया परंतु उसने आज भी केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा पाने की मांग को कभी त्यागा नहीं।
 
 
राज्य की तत्कालीन नेकां सरकार की 1953 से पूर्व की स्थिति की बहाली की मांग ने इस बर्फीले रेगिस्तान में पुनः जख्मों को हरा कर दिया था इसके प्रति कोई दो राय नहीं है। हालांकि मुफ्ती सरकार ने स्वायत्त परिषद के अधिकारों में वृद्धि कर असंतोष को ठंडा करने का प्रयास किया था लेकिन वे कामयाब नहीं हो पाए थे। नतीजतन लद्दाख की जनता फिर से आंदोलन की राह पर चल निकली है। जो यह कहने लगी है कि उनके साथ किए गए वायदों को पूरा किया जाए और लद्दाख को उसका हक, केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा, तत्काल दिया जाए।
 
स्थिति यह है कि लद्दाख बौद्ध संघ के नेता उस चिंगारी को पुनः हवा दे रहे हैं जो पिछले 28 सालों से राख के ढेर में छुपी हुई थी। इस चिंगारी को हवा देकर लावे के भयंकर रूप में फूटने की चेतावनी देने वाले नेता प्रत्यक्ष रूप से भी यह मानने को तैयार नहीं हैं कि आंदोलन शांतिपूर्ण होगा। उनके शब्दों में: ‘शांतिपूर्ण रास्ते पर चल कर कोई कुछ नहीं पा सकता है। हम केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा चाह रहे हैं जिसके साफ मायने हैं कि हमें कश्मीर के उपनिवेशवाद से मुक्ति चाहिए।’
 
- सुरेश डुग्गर

जयपुर। राफेल विमान सौदे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लगातार हमला कर रहे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से एक कदम आगे निकलते हुए पंजाब सरकार के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने शनिवार को कहा कि 'चौकीदार का कुत्ता भी चोर से मिल गया है।' राजस्थान के अलवर जिले के खैरथल में चुनावी रैली में सिद्वू ने राफेल लडाकू विमान सौदे में कथित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘‘500 करोड़ रुपये का विमान 1600 करोड रुपये में खरीदा गया तो 1100 करोड रुपये किसकी जेब में डाले? 

इस पर जनता ने नारे लगाये कि ‘चौकीदार चौर है’ तो सिद्वू बोले कि 'चौकीदार का कुत्ता भी चोर से मिल गया है।' सिद्वू ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पर हमला करते हुए कहा कि, ‘अंधा गुरु बहरा चेला, दोनों नरक में खेलम खेला।’ उन्होंने कहा, ‘‘आपने (भाजपा सरकार) ने किसानों की कमर तोड दी है।
आप गरीब और किसानों के नहीं है आप अंबानी और अडाणी के हो। आप बडे़ बडे़ पूंजीपतियों की कठपुतली बन गये हो और वो रोज गाना गाते है कि नाच मेरी बुलबुल तुझे पैसा मिलेगा।’’ उन्होंने विश्वास जताया कि राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बनेगी और सत्ता में आने में दस दिन के अंदर किसानों का कर्जा माफ कर दिया जायेगा और किसानों को उचित एमएसपी मिलेगा।

भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद राकेश सिंह ने कांग्रेस द्वारा ईवीएम को लेकर किए जा रहे प्रोपेगंडा पर गंभीर आपत्ति व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस का यह इतिहास रहा है कि वह संवैधानिक संस्थाओं पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष आरोप लगाकर उनकी गरिमा को भंग करती रहती है। संवैधानिक व्यवस्था के तहत चुनाव आचार संहिता के दौरान सारा कंट्रोल चुनाव आयोग के पास होता है। किसी राजनीतिक दल अथवा सरकार का चुनाव संचालन और अन्य व्यवस्थाओं में कोई दखल नहीं होता। इसके बावजूद कांग्रेस अनर्गल प्रलाप कर भ्रम की स्थिति पैदा कर रही हैं।

 
राकेश सिंह ने आज एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस के नेताओं को पता है कि वह बुरी तरह हार का सामना करने वाले हैं, इसलिए कांग्रेस के लोगों ने मतदान के दिन से ही ईवीएम को लेकर प्रलाप करना शुरु कर दिया है। यह कांग्रेस का शगल बन गया है की जब हार रहे हैं तो ईवीएम को दोष देना शुरू कर दो और जब जीत रहे हैं तो ईवीएम पर चुप्पी साधे रहो। सिंह ने प्रश्न किया है कि यदि ईवीएम कांग्रेस के विरुद्ध ही चलती है तो पंजाब में कांग्रेस की सरकार कैसे बनी ? यदि ईवीएम भारतीय जनता पार्टी के समर्थन में ही काम करती है तो फिर भारतीय जनता पार्टी को किसी भी चुनाव क्षेत्र में पराजित नहीं होना चाहिए। सच्चाई यह है कि कांग्रेसी घपले घोटालों के अपने काले अध्याय से बाहर नहीं आना चाहते है।
 
आज वह जिस प्रकार से चुनाव प्रक्रिया को लांछित करने पर उतारू है, इससे स्पष्ट है कि चुनाव पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से होने के कारण कांग्रेस के पेट में मरोड़ हो रही है। यह इस बात का भी संकेत है पांच-छह दशकों तक लगातार सरकारों ने रहने वाली कांग्रेसी शायद चुनाव में गड़बड़ियां कराकर ही सत्ता प्राप्त करती रही होगी। चुनाव से पूर्व ही कांग्रेस ने चुनाव आयोग के विरुद्ध वातावरण बनाना शुरू कर दिया था। चुनाव आयोग पर फर्जी मतदाता सूची जैसे गंभीर आरोप लगाए गए, लेकिन आयोग ने जब पूरी सतर्कता और परिश्रम के साथ इस मतदाता सूची  का परीक्षण निरीक्षण कराया तो फर्जी मतदाता नाम का कोई व्यक्ति प्राप्त नहीं हुआ। कांग्रेस ने इस मोर्चे पर भी बुरी तरह मुंह की खाई, लेकिन बेशर्मी की पराकाष्ठा देखिए कि कांग्रेस नए-नए विषय रोज लेकर आती है।
 
जहां तक ईवीएम के लेट पहुंचने का या समय पर पहुंचने का विषय है तो इसका भारतीय जनता पार्टी या सरकार से क्या लेना देना है। सारी व्यवस्थाएं चुनाव आयोग के अधीन होने के कारण चुनाव आयोग लापरवाही के विरुद्ध जो कार्यवाही करना चाहिए और करता ही है और कर भी रहा है। मूल बात यह है कि कांग्रेस बुरी तरह पराजय की ओर बढ़ गई है, इसलिए चुनाव परिणाम के बाद अपनी कमियों को छुपाने के लिए ईवीएम पर ठीकरा फोड़ने की भूमिका तैयार कर रही है। कांग्रेस हार के बाद यही बयान देने वाली है कि ईवीएम में गड़बड़ी के कारण कांग्रेस पराजित हुई है।

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