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राफेल डील को लेकर कांग्रेस लगातार भाजपा पर वार करती रही है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी राफेल डील को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुली बहस की चुनौती दी है। पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान राहुल गांधी राफेल डील को खास तौर पर मुद्दा बना रहे हैं। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने पीएम मोदी को बहस की चुनौती दी। राहुल गांधी ने कहा, "मैं मोदी जी को चैलेंज करता हूं कि कहीं भी, किसी भी जगह, किसी भी प्रदेश में मेरे साथ स्टेज पर आकर 15 मिनट के लिए राफेल पर डिबेट कर लें। 

 15 मिनट मुझे बोलने दें और 15 मिनट मोदी जी बोलें। राहुल ने आगे ये भी बताया कि वो किन मुद्दों पर पीएम से बहस करेंगे।  राहुल ने कहा मैं एचएएल के बारे में बोलूंगा, मैं जो फ्रांस के राष्ट्रपति ने बोला है उसके बारे में बोलूंगा।" "मैं बोलूंगा कि 526 करोड़ रुपये का हवाई जहाज नरेंद्र मोदी जी ने 1600 करोड़ रुपये में खरीदा। मैं बोलूंगा कि उन्होंने कोई भी प्रोसिजर फॉलो नहीं किया। मैं बोलूंगा कि रक्षामंत्री ने साफ कहा है कि ये डील मैंने नहीं प्रधानमंत्री ने की है। 


मैं बोलूंगा कि फ्रांस के राष्ट्रपति ने साफ बताया कि नरेंद्र मोदी ने बोला कि किसको कॉन्ट्रेक्ट मिलना चाहिए।" राहुल ने आरोप लगाया कि मोदी ने किसानों के पास कालाधन होने की बात कहकर अन्नदाताओं का अपमान किया है। गांधी ने प्रधानमंत्री के इस कथित बयान से जुड़ा वीडियो शेयर करते हुए ट्वीट किया, ‘क्या आपने माल्या, ‘मेहुल भाई’, नीरव मोदी को गेहूं उगाते देखा है? मोदीजी किसान का अपमान मत करिए।

  दुर्ग। दुर्ग शहर विधानसभा से कांग्रेस प्रत्याशी अरुण वोरा पिछले पांच साल से विधायक हैं इसके पूर्व दिग्गज नेता मोतीलाल वोरा प्रदेश के मुख्यमंत्री सहित वर्तमान में सांसद के पद पर सुशोभित हैं लेकिन दुर्ग शहर के विकास में वोरा परिवार की कोई भूमिका नहीं दिखाई देता है। एक भी एैसा बड़ा विकास कार्य वोरा परिवार गिना दें जिसे वोरा परिवार नें दुर्ग में करवाया हो। कांग्रेस के पचास साल के शासन में दुर्ग शहर का कोई भी विकास नहींहो सका और यह सच्चाई है कि भाजपा शासनकाल में दुर्ग शहर में अभूतपूर्व विकास कार्य संपन्न हुए। तात्कालीन महापौर सरोज पांडेय के कार्यकाल में तथा मंत्री हेमचंद यादव के समय बड़ी तेजी के साथ दुर्ग शहर का स्वरुप परिवर्तित हुआ। वर्तमान में वोरा परिवार के प्रत्याशी अरुण वोरा को जनता को बताना होगा कि उनके कार्यकाल में क्या क्या बड़े विकास कार्यों को उन्होने करवाया है या करवाने का प्रयास किया है। मोतीलाल वोरा चाहते तो पूर्व में ही दुर्ग का कायाकल्प करने की ताकत रखते थे परंतु उन्होनें दुर्ग के लिए तो दूर की बात छत्तीसगढ के लिए भी कुछ नहीं किया। छत्तीसगढ राज्य बनने के बाद अजीत जोगी के शासन में युवा आयोग के अध्यक्ष रहते हुए भी अरुण नें कोई कार्य नहीं करवाया जिसे वे अपनी उपलब्धि बता सकें। दुर्ग में धमधानाका का पुल ही कांग्रेस की निशानी है। दुर्ग वायशेप ब्रिज, शिवनाथ पुल, दुर्ग की सड़कें, नालियां सभी विकास कार्य भाजपा और भाजपा विधायक, महापौर सांसद की देन है। कांग्रेस के प्रत्याशी दुर्ग में किस विकास कार्य के लिए वोट मांग रहे हैं समझ से परे है। विकास कार्य के लिए सोच की आवश्यकता होताी है जो वोरा परिवार में कहीं भी परिलक्षित नहीं होता है। अरुण वोरा के लिए बाबू जी के अलावा दुर्ग में कोई सहारा नहीं हैं। पिछले चुनाव में बाबूजी नें जनता के पास जाकर इज्जत बचा लेने की गुहार लगाई थी, हेमचंद यादव हारे फिर से इज्जत की खातिर बड़े नेता होने के बावजूद दुर्ग से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं एैसे में जनता कब तक एक वरिष्ठ नेता की इज्जत की खातिर अपने विकास को दांव पर लगाएगी? इधर अरुण वोरा अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नजर आ रहे हैं जीतने की खुशी अभी से मना रहे हैं उन्हे जनता के बीच जाने की जरुरत है। जनता को नेता चाहिए किसी परिवार की इज्जत नहीं बचानी है लोग बोलना शुरु कर दिए हैं कि दुर्ग अब किसी पप्पू प्रत्याशी को बर्दास्त करने के मूड में नहीं है जो बाबूजी की गोद में अभी भी पड़ा हुआ है बाबू जी से पूछे बगैर कुछ भी करने में सक्षम नहीं है। पूरा चुनाव प्रचार में वोरा परिवार जुटा हुआ है। रायपुर से गोविंदलाल वोरा का परिवार चुनाव संचालन कर रहे हैं। जमीनी नेता असमंजस की स्थिति में हैं एैसे में जीत कैसे होगी। कांग्रेस प्रत्याशी के खिलाफ अंडरकरंट यह है कि कांग्रेसियों का वोट भी जनता कांग्रेस जे के प्रत्याशी प्रताप मध्यानी के पक्ष में पड़ सकता है। भाजपा के कैडर वोट हैं जो दुर्ग में स्थायी है किसी का नुकसान हो रहा है तो वह हैं अरुण वोरा। त्रिकोणीय संघर्ष में कांग्रेस प्रत्याशी अरुण वोरा की हार होगी एैसा जनता जनार्दन का कहना है।

देश के लोकतंत्र ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया है कि बुलेट पर बैलेट की चोट से करारा जबाव दिया जा सकता है। छत्तीसगढ़ की पहले चरण के 18 विधानसभा सीटों में नक्सल प्रभावित सीटों पर जिस तरह से बहां के मतदाताओं ने निर्भिक होकर मुखरता से मतदान में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया है वह निश्चित रुप से लोकतंत्र की विजय है। खासबात यह कि यह सबसे अधिक नक्सल प्रभावित क्षेत्र है। सुकमा, दंतेवाड़ा और बस्तर की सीटों पर मतदाताओं ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया और मतदान का प्रतिशत 70 फीसदी को पार कर गया। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में 70 प्रतिशत मतदान इसलिए मायने रखता है कि मतदाताओं की बेरुखी के चलते देश के कई सामान्य सीटों पर मतदान का प्रतिशत लगभग 70 फीसदी रह पाता है। सही मायने में देखा जाए तो इसका सारा श्रेय इस क्षेत्र के आम मतदाताओं को जाता है जिन्होंने नक्सलियों की लाख चेतावनियों को सीरे से खारिज कर यह संदेश देने का प्रयास किया है कि क्षेत्र का विकास अंशाति फैलाने से नहीं लोकतांत्रिक व्यवस्था से चुनी हुई सरकार के माध्यम से ही हो सकता है। चुनाव आयोग,सुरक्षा बलों और सरकार को भी इस मायने में धन्यवाद देना होगा कि लाख बाधाओं और चुनौतियों के बावजूद सफलतापूर्वक मतदान संपन्न कराया गया।
 
दरअसल नक्सलियों ने इस बार अधिक भय का वातावरण बनाकर चुनावों को प्रभावित करने का प्रयास किया। सुरक्षा बलों पर लगातार हमलें किए गए वहीं लोगों को चुनाव में भाग लेने के गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनियां दी। नक्सली इस बार अधिक आक्रामक होकर चुनावों को प्रभावित करना चाहते थे। इन दिनों में सुरक्षा बलों पर अधिक हमलें हुए। मतदान करने वालों के हाथ जिस्म से अलग करने की चेतावनी दी गई। गंभीर परिणाम भुगतने को तैयार रहने को कहा गया। सुरक्षाबलों पर लगातार हमलें इनकी रणनीति का हिस्सा था पर ना सुरक्षा बलों ने हार मानी और ना ही मतदाताओं ने। दरअसल देखा जाए तो आदिवासियों के रहनुमा बनने की दुहाई देने वाले नक्सलियों का असली चेहरा सामने आ चुका है। चुनावों से पहले नक्सलियों ने जबरदस्त भय का वातावरण बनाने के प्रयास किए। मतदान के दिन भी सुरक्षा बलों पर बड़ा हमला कर भय का वातावरण बनाने की कोशिश की गई पर जनता ने अपने मताधिकार का प्रयोग कर बुलेट को बैलेट से करारा जबाव दिया है। देखा जाए तो क्षेत्रवासियों के विकास की सबसे बड़ी बाधा नक्सली ही हो गए हैं। सड़क, शिक्षा−स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं क्षेत्र में नहीं पहुंचाने देना ही इनका मकसद रह गया। नक्सलियों किसी भी हालत में इस क्षेत्र में विकास नहीं देखना चाहते। इसका एक बड़ा कारण विकास आएगा तो इनकी दुकान उठ जाएगी रहा है। लोगों के यह बात समझ में आने लगी है। 
 
दरअसल लोकतंत्र की यह खूबी भी है और इसे सबसे बड़ी सफलता माना जाना चाहिए कि लोगों के समझ में आने लगा है कि उनका हित हिंसा का साथ देने में या हिंसक प्रवृतियों के आगे नतमस्तक होने में नहीं अपितु लोकतांत्रिक तरीके से अपना नेता चुनकर विधायिका में भेजकर विकास की गंगा का प्रवाह क्षेत्र में लाने में है। शिक्षा,स्वास्थ्य, सहज आवागमन के लिए सड़कों और आवागमन के साधनों की सहज उपलब्धता उन्हें मुख्य धारा से जोड़ सकती है। यह उनके समझ में आने लगा है यही कारण है कि भय और आतंक का माहौल होने के बावजूद लोगों में नक्सलियों का विरोध करने का साहस आया है। सुरक्षा बलों के साहस की भी सराहना करनी होगी कि नक्सलियों के दुर्दांत इरादों का बहादुरी से मुकाबला कर रहे हैं। लोगों में विश्वास जगाने में सफल रहे हैं। अब अगले चरण का मतदान 20 नवंबर को होने जा रहा है। आशा की जानी चाहिए कि छत्तीसगढ़ के मतदाता और अधिक मुखरता से 20 तारीख के मतदान में हिस्सा लेंगे। पहले चरण के खासतौर से नक्सल प्रभावित इलाकों के मतदान से सरकार और नक्सलियों के लिए भी साफ संदेश है। सरकार के लिए यह संदेश है कि लोग विकास में विश्वास रखते हैं, यही कारण है कि लाख चेतावनियों के बावजूद मतदान में हिस्सा लेकर मताधिकार का उपयोग कर रहे हैं ऐसे में चुनावों के बाद किसी भी दल की सरकार बने उस सरकार की प्राथमिकता इस क्षेत्र के विकास, आधारभूत सुविधाओं के विस्तार सहित क्षेत्र को मुख्यधारा में लाने के कार्यों को प्राथमिकता देनी होगी वहीं नक्सलियों के लिए भी साफ संदेश है कि उन्हें भी हिंसा का रास्ता छोड़कर लोकतंत्र की मजबूती और क्षेत्र के नागरिकों तक आधारभूत सुविधाओं के साथ मुख्य धारा में लाने के कार्य में भागीदार बनना चाहिए। 
 
देखा जाए तो सुकमा हो या दंतेवाड़ा या बस्तर यहां के लोगों ने जिस तरह से घर से निकल कर मतदान केन्द्र आकर अपने मताधिकार के प्रयोग से साहस का परिचय दिया है वह काबिले तारीफ है। वहीं हिंसक ताकतों को साफ संदेश दिया गया है कि बुलेट का जबाव बैलेट से आसानी से दिया जा सकता है। बुलेट पर बैलेट से विजय पाई जा सकती है। यही हमारे लोकतंत्र की खूबी है और यही लोकतंत्र का सौंदर्य। 
 
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा

इस साल बॉलीवुड में शादियों की बरसात सी हुई। एक के बाद एक बड़े-बड़े सेलेब्स शादी के बंधन में बंधनते चले गये। इनमें से एक दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह भी हैं।  काफ़ी लंबे इंतज़ार के बाद दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह ने अपनी शाही शादी की तस्वीर अपलोड हुई। 14 और 15 नवंबर को हुई ये शादी कोंकणी और सिंधी रीति-रिवाज़ से संपन्न हुई। बॉलीवुड के इस कपल ने तस्वीरों के लिये लंबा इंतज़ार ज़रूर कराया, लेकिन इन्हें देखने के बाद हर किसी का दिल ख़ुश हो गया। सब्यसाची मुखर्जी  द्वारा डिज़ाइन किये हुए कपड़ों में दीपिका एकदम किसी महारानी सी दिख रही हैं।

 
बॉलीवुड के सबसे ख़ूबसूरत कपल की शादी कई मायनों में बहुत ख़ास रही। अब तक आप ये जान ही गये होंगे कि दीपिका के दुप्पटे में संस्कृत में सदा सौभाग्यवती भव: लिखा गया था, जिसका मतलब होता है सदा सुहागन रहो। हांलाकि, अभी तक ये साफ़ नहीं हो पाया है कि इस ख़ास आईडिया के पीछे, दिमाग़ किसका था। अब बारी आती है दीपिका की इंग्जेमेंट रिंग की, जिस मामले में एक्ट्रेस ने अनुष्का शर्मा का भी रिकॉर्ड तोड़ दिया। 
 
थोड़ा दिल थाम कर बैठिये, क्योंकि अंगूठी की कीमत जानने के बाद आपको होश उड़ने वाले हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तस्वीर में दिखाई दे रही दीपिका की अंगूठी की कीमत 1.3-2.7 करोड़ रुपये है। वहीं विराट ने अनुष्का के लिये 1 करोड़ की अंगूठी बनवाई थी। काफ़ी दुख़ हुआ न जानकर, क्योंकि इतनी मंहगी अगूंठी खरीदने के लिये हमारी ज़िंदगी भर की कमाई भी कम है।
 
बताया जा रहा है कि दीपिका और रणवीर की शादी में सिर्फ़ फ़ैमिली और करीबी दोस्त ही थे। यही नहीं, यहां तक रणवीर के बेस्ट फ़्रेंड अर्जुन कपूर भी नहीं नज़र आये। बॉलीवुड स्टार शादी में नज़र आये हों या न हों, लेकिन कपल ने ख़ास मौके पर अपने ड्राइवर्स और बॉडीगार्ड्स को बुलाया था। दीपिका ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर रणवीर और अपने बॉडीगार्ड्स-ड्राइवर्स की तस्वीर अपलोड की है, जिसमें चारों बेहद ख़ुश दिखाई दे रहे हैं।  फ़िलहाल, अभी इतनी ही ख़बर पता चली है। आगे जैसी ही कुछ पता चलेगा न, आपको ज़रूर बतायेंगे जब तक इससे काम चला चलो। 

आखिरकार दीपवीर शादी के बंधन में बंध चुके है। यह शादी इटली के लेक कोमों में 14-15 नवंबर को कोंकणी और सिंधी रिवाज से संपन्न हुई है। इस शादी में दोनों के परिवार वाले और फराह खान, संजय लीला भंसाली ने भी शिरकत की। दीपवीर के फैंस, रिश्तेदार, दोस्त सभी दोनों को शादी की ढ़ेर सारी बधाईया दे रहे है। इसी बीच रणवीर सिंह के पिता जगजीत सिंह भवनानी ने भी बेहद फिल्मी तरीके से दीपिका को शादी की बधाई दी है।

इस बात का खुलासा रणवीर सिंह की स्टाइलिस्ट निताशा गौरव ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी से किया है। जिसमें ससुर जगजीत सिंह भवनानी ने अपनी नयी- नवेली बहु को कुछ इस तरह से आशीर्वाद दिया है। उन्होनें लिखा है  ' यह दिवानी तो भवनानी हो गयी ' । यह डायलॉग फिल्म बाजीराव मस्तानी के गाने ' ये दिवानी मस्तानी हो गयी' से मेल खाता है। इसके अलावा खुद नितीशा गौरव ने लिखा '' मौसम विभाग के मुताबिक बारिश होनी थी , लेकिन आसमान साफ है , सूरज तेज प्रकाश के साथ निकला है - सिर्फ इन दोनों के लिए''। 

दोनों ही कपल कोंकणी और सिंधी लुक में लाजवाब लग रहे है। सिंधी और कोंकणी वेडिंग  लुक की एक - एक तस्वीरे दोनो नें अपने सोशल मीडिया अकांउट पर शेयर की है । जिसमें रणवीर ने सिंधी लुक में पिंक एंड गोल्डन कांजीवरम शेरवानी पहनी है और सिर पर साफा बांधा है । इस लुक में वह राजा जैसी शान में नजर आ रहे है । साथ ही में दीपिका  ने पारंपरिक लाल रंग का  लहंगा पहना है , हाथ में मेहंदी और कलीरे में वह बेदह खुबसूरत लग रही है। 
 
इसके अलावा सिंधी रस्म के दौरान दीपिका ने एक लाल रंग की चुनरी पहनी है जिसमें संस्कृत में मंत्र लिखे हुए है। साथ ही में चुनरी के  बार्डर के एक किनारे में '' सदा सौभाग्यवती भव; ''   लिखा हुआ है। दूसरे कोंकणी लुक में दीपिका  ने गोल्डन कलर की कांजीवरम साड़ी पहनी है और रणवीर ने सफेद रंग का कुर्ता पहना है। इस लुक को पारंपरिक बनाने के लिए दीपिका ने हैवी ज्वैलरी और रणवीर ने अपने माथे पर पर्ल की ज्वैलरी का इस्तेमाल किया है। दीपवीर के दोनों आउटफिट सब्यसाची ने डिजाइन किये है। 
अगर आप दोनों कपल की फोटो को देखेंगे तो आपको दोनों की खुथी का अंदाजा लगाना बेदह आसान होगा । फोटो में साफ - साफ नजर आ रहा है कि दोनों की खुशी का ठिकाना नहीं है , और  होना भी नहीं चाहिए क्योंकि आखिरकार दोनों जन्मों - जन्मों के साथी जो बन गए है। 
 
दोनों ने अपनी शादी की तस्वीरे अपने फैंस के साथ सांझा की है । इसके अलावा दीपिका की ज्वैलरी और इंगेजमेंट रिंग  की रकम करोड़ो में बताई जा रही है । फोटो में दीपिका और रणवीर की सगाई की अंगूठी नजर आ रही है । आमतौर पर सगाई की अंगूठी गोल आकार की होती है । लेकिन फोटो में दीपिका ने जो अंगूठी पहनी है वह स्कवेयर शेप में है । इस स्कवेयर डायमंड रिंग की कीमत 1.3-2.7 करोड़ रुपये बताई जा रही है । इसके अलावा दीपिका की ज्वैलरी भी बेहद इंप्रेसिव लग रही है । वहीं दूसरी तरफ रणवीर सिंह की अंगूठी की कीमत का खुलासा होना बाकि है । दोनों कपल के शादी की तस्वीरे शेयर करने के 1 घंटे की अंदर ही 30 लाख से ज्यादा लोगो ने लाइक किया है । 

मुंबई। महानायक अमिताभ बच्चन ने कहा है कि उन्हें आलोचना से कोई परेशानी नहीं होती क्योंकि इससे कम से कम यह तो सुनिश्चित होता है कि रचनात्मक काम को दर्शक देख रहे हैं, बनिस्पत इसके कि लोग फिल्म देख ही नहीं रहे। टाटा लिटरेचर लाइव के नौंवे संस्करण में गुरुवार को सिद्धार्थ धनवंत सांघवी की किताब ‘‘दी रैबिट ऐंड दी स्क्विरल’’ के विमोचन के मौके पर बच्चन और उनकी पत्नी जया, लेखक से बातचीत कर रहे थे। उनसे पूछा गया कि वह आलोचनाओं को किस तरह लेते हैं तो जया ने कहा, ‘‘ मैं वास्तव में परवाह नहीं करती।’’

बच्चन ने कहा, ‘‘ इससे पहला भरोसा यह मिलता है कि किसी ने तो आपके काम को देखा है। रचनात्मक क्षेत्र में यह हमारे लिए बहुत जरूरी है क्योंकि अगर कोई हमारी फिल्में देखने नहीं जाएगा तो यह तो बहुत ही बुरी बात होगी। यह उन पहली चीजों में से एक है जो आपके दिमाग में आती है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ लेकिन गंभीरता से, मैं आलोचना स्वीकार करूंगा। मैं आलोचना को पसंद करूंगा क्योंकि इससे आपको अपने काम के उस पहलू से रूबरू होने का मौका मिलता है जिससे कि शायद आप परिचित नहीं हों।’’

बच्चन ने कहा, ‘‘ ऐसी स्थिति में जब कि आपको लगा हो कि जो बात कही गई है वह गलत है तो पेपर में से आलोचना वाला हिस्सा काट कर अपने बाथरूम में चिपका लीजिए और हर सुबह दर्पण में देखकर कहिए कि ‘‘ एक दिन मैं तुम्हें गलत साबित कर दूंगा।’’

मेलबर्न। दक्षिण अफ्रीका के कप्तान फाफ डु प्लेसिस ने भारत के खिलाफ श्रृंखला से पहले आस्ट्रेलिया को सलाह देते हुए कहा है कि वे विराट कोहली से टकराने से बचे और उसके सामने चुप रहें। डु प्लेसिस ने शुक्रवार को कहा कि उनकी टीम ने इस साल की शुरूआत में खेली गई श्रृंखला में कोहली का सामना चुपचाप किया था। उन्होंने कहा, ‘‘अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्हें टकराव पसंद है। विराट कोहली भी उनमें से एक है।’’
 
दक्षिण अफ्रीका ने उस श्रृंखला में भारत को 2–1 से हराया था लेकिन कोहली ने तीन टेस्ट में 47–66 की औसत से 286 रन बनाये थे। डु प्लेसिस ने कहा, ‘‘हर टीम में ऐसे एक दो खिलाड़ी हैं जिनके बारे में हम उनके खिलाफ खेलने से पहले बात करते हैं। हमारी रणनीति उनके सामने खामोश रहने की ही होती है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘कोहली शानदार खिलाड़ी है। हम उसके सामने चुप रहे लेकिन उसने फिर भी रन बनाये लेकिन बहुत ज्यादा नहीं।’’
वाशिंगटन। अमेरिका ईरान को रासायनिक हथियारों पर प्रतिबंध की अंतर्राष्ट्रीय संधि के उल्लंघन का आरोपी ठहराने में जुटा है। दो अमेरिकी अधिकारियों ने शुक्रवार को यह बात कही। अधिकारियों ने कहा कि अमेरिकी सरकार अगले हफ्ते यह घोषणा करने की योजना बना रही है कि ईरान 1997 के रासायनिक हथियार समझौते का पालन नहीं कर रहा है, जिसके तहत रासायनिक हथियारों का उत्पादन, संचय और इस्तेमाल गैरकानूनी है।अधिकारियों के मुताबिक ईरान ने रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया है, लेकिन उसके पास ऐसे हथियारों के उत्पादन के लिए सामग्री और उपकरण मौजूद हैं। ईरान पर यह आरोप हालिया खुफिया जानकारी पर आधारित है। जांच अधिकारी सार्वजनिक तौर पर इस मसले पर कुछ नहीं बोल सकते और नाम ना बताने की शर्त पर उन्होंने जानकारी दी।
 
ईरान को आरोपी ठहराए जाने के साथ ही उसपर अमेरिका की ओर से तुंरत कोई जुर्माना नहीं लग सकता है लेकिन इसे आधार बनाकर उसके खिलाफ रासायनिक हथियारों के प्रतिबंध से जुड़े संगठन में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। यह आरोप ईरान को अलग थलग करने की कोशिशों में से एक हैं। अमेरिका मई में ईरान के साथ 2015 में हुए परमाणु समझौते से अलग हो गया था और इस महीने की शुरूआत में उसने ईरान पर दोबारा प्रतिबंध लगा दिए थे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और और उनके शीर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ईरान को मध्य-पूर्व और दूसरे क्षेत्रों में अस्थिरता फैलान से रोकने के लिए संकल्प लेने की बात साफ कर चुके हैं।
चुनाव आयोग ने शनिवार को छत्तीसगढ़ सरकार को कांग्रेस के नेताओं का स्टिंग ऑपरेशन करने के लिये कथित रूप से पैसों की पेशकश करते पकड़े गये राज्य के जनसंपर्क आयुक्त को पद से हटाकर स्थानांतरित करने को कहा है। आयोग के प्रवक्ता ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार में जनसंपर्क विभाग के सचिव और आयुक्त एस राजेश टोप्पो को पद से हटाने का आदेश जारी किया गया है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के दौरान दूसरे और अंतिम चरण में 72 सीटों के लिये 20 नवंबर को मतदान होगा।
 
टोप्पो को कथित तौर पर एक ऑडियो टेप में किसी पत्रकार से कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के लिये अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुये वीडियो टेप बनाने के लिये कहते सुना जा सकता है। इसके एवज में उन पर कथित रूप से पैसों की पेशकश करने का भी आरोप है। प्रवक्ता ने बताया ‘‘आयोग ने अपने आदेश में कहा है कि एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने अनुचित भाषा का इस्तेमाल तो किया ही है, साथ में यह पक्षपातपूर्ण व्यवहार को भी दर्शाता है।’’ राज्य में चुनाव के पहले चरण के लिये 18 सीटों पर मतदान गत 12 नवंबर को हो चुका है। 
भोपाल। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा नोटबंदी को उचित ठहराने के एक दिन बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को कहा कि नोटबंदी तथा माल एवं सेवा कर (जीएसटी) केवल राजनीतिक कदम नहीं थे, बल्कि अत्यधिक नीतिपरक कदम थे। इनसे विकास की गति बढ़ी है और प्रत्यक्ष रूप से देश के गरीब को लाभ हुआ है। नोटबंदी और जीएसटी पर पूछे गये सवालों के जवाब में जेटली ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘ये नोटबंदी एवं जीएसटी केवल राजनीतिक कदम) नहीं हैं। ये अत्यधिक नीतिपरक कदम हैं।’’
 
उन्होंने आगे कहा, ‘‘इससे जब सरकार का साधन बढ़ता है तो प्रत्यक्ष रूप से देश के गरीब को उससे लाभ होता है।’’जेटली ने बताया कि नोटबंदी से आयकर रिटर्न भरने में कई गुना वृद्धि हुई है और इससे केन्द्र तथा राज्यों का राजस्व काफी बढ़ा है। उन्होंने आंकड़े देते हुए कहा, ‘‘जब मोदी जी की सरकार आई थी तो 3.8 करोड़ लोग आयकर रिटर्न भरते थे। पिछले चार साल में 6.86 (करोड़) हो गया। और शायद पांचवां वर्ष समाप्त होने तक वह 3.8 करोड़ के डबल के नजदीक होगा।’’
 
उन्होंने कहा कि यह बात छिपी हुई नहीं है कि भारत में अनेक लोग कर नहीं देते थे। उनके अघोषित पैसे को बैंकों में जमा करने के लिए नोटबंदी ने उन्हें मजबूर किया। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश के देवरी, बरघाट एवं मंडला में कल तीन चुनावी सभाओं को संबोधित करते हुए आरोप लगाया था कि नोटबंदी भारत का सबसे बड़ा घोटाला था। इसके एक दिन बाद जेटली ने इसे अत्यधिक नीतिपरक कदम बताया है।वहीं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नोटबंदी को उचित ठहराते हुए शुक्रवार को मध्य प्रदेश के शहडोल में एक चुनावी सभा में कहा था कि इससे दबा हुआ रुपया बैंकिंग प्रणाली में वापस लाया गया और इसका उपयोग सरकार जनहित के कार्यों में कर रही है।

 

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