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मनीला। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने मंगलवार को कहा कि विवादित दक्षिण चीन सागर में संघर्ष को रोकने के लिए बीजिंग और दक्षिणपूर्व एशियाई देशों के बीच अनाक्रमण संधि पर वार्ता तीन वर्षों में पूरी हो सकती है। उन्होंने वादा किया कि किसी भी मतभेद को शांतिपूर्ण ढ़ंग से निपटाया जायेगा। संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से फिलीपीन की यात्रा पर आए चिनफिंग ने राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते और अन्य अधिकारियों के साथ वार्ता करने के बाद ये आश्वासन दिये।

अमेरिका का पुराना सहयोगी फिलीपीन ऐसे समय में चीन का साथ दे रहा है, जब दोनों देश प्रशांत क्षेत्र में अपनी सर्वोच्चता साबित करना चाह रहे हैं। चिनफिंग ने कहा,‘‘हम विवादास्पद मुद्दों को निपटाना जारी रखेंगे और सकारात्मक चर्चा के माध्यम से समुद्री सहयोग को बढ़ावा देंगे।’’उन्होंने कहा कि चीन का उद्देश्य दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्रों के संगठन के साथ विवादित जल क्षेत्र में ‘‘आचार संहिता’’ पर वार्ता तीन वर्षों के भीतर पूरी करना है। दोनों नेताओं ने मंगलवार को ‘‘तेल और गैस विकास सहयोग संबंधी समझौता ज्ञापन’’ पर हस्ताक्षर किये लेकिन अधिकारियों ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है।

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ऐलान किया है कि वह 2019 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी। उन्होंने इसका कारण अपनी सेहत को बताया है। दिसंबर 2016 में गुर्दा प्रतिरोपण के बाद उन्हें डॉक्टरों ने धूल से बचने की हिदायत दी है। मध्य प्रदेश के विदिशा संसदीय क्षेत्र से वर्तमान में लोकसभा सांसद सुषमा स्वराज का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान भाजपा के लिए झटका भी है क्योंकि स्वराज जिस भी सीट से चुनाव लड़तीं वहां पार्टी की जीत पक्की ही थी। सुषमा का लोकसभा में नहीं रहना भाजपा को इसलिए भी परेशान करेगा क्योंकि सदन में उसके पास से एक प्रखर वक्ता चला जायेगा हालांकि यदि 2019 में वापस मोदी सरकार बनती है तो सुषमा मंत्री के नाते लोकसभा में बैठ सकती हैं और सरकार का पक्ष रख सकती हैं लेकिन नियमित तौर पर सदन में उनके नहीं रहने से पार्टी अथवा भावी सरकार को कमी खलेगी।
 
भाजपा को लगातार लग रहा है झटका
 
अब तक लोकसभा में भाजपा का मजबूती से पक्ष रखने वाले और विभिन्न दलों के साथ अपने रिश्तों की बदौलत सरकार के लिए कठिन समय पर राह आसान बनाने वाले केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार नहीं रहे, लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी हालांकि वर्तमान लोकसभा में अधिकांश समय खामोश ही रहे लेकिन अपने अनुभव की बदौलत सरकार को राह दिखाते रहे हैं। इन दोनों को भी अगले चुनावों में भाजपा का टिकट मिलने की संभावना बेहद कम है। अब सुषमा स्वराज ने लोकसभा चुनाव लड़ने से मना कर दिया है तो निश्चित ही संसद के निचले सदन में भाजपा की अनुभव और वक्तृत्व कला में निपुण लोगों की कमी हो जायेगी।
 
भाजपा का समयचक्र
 
अटल बिहारी वाजपेयी के सक्रिय राजनीति से दूर होने के बाद और नितिन गडकरी के दिल्ली आने से पहले तक राष्ट्रीय राजधानी में भाजपा आलाकमान के तौर पर जो लोग प्रभावी माने जाते थे उनमें लालकृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज, राजनाथ सिंह, अरुण जेटली और अनंत कुमार मुख्य थे। लेकिन समय बदला, नितिन गडकरी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाये गये तो आडवाणी को छोड़ बाकी सब नेता प्रभावी भूमिका में बने रहे और केंद्र में नरेंद्र मोदी के आने के बाद तो सिर्फ मोदी और अमित शाह भी प्रभावी रह गये। राजनाथ सिंह, अरुण जेटली और सुषमा स्वराज को बड़े-बड़े मंत्रालय तो मिल गये लेकिन जेटली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रिय बने रहे। समय-समय पर प्रधानमंत्री भी जेटली को अतिरिक्त मंत्रालयों का कार्यभार सौंप कर अन्य मंत्रियों से उनका कद ऊँचा रखते रहे।
 
सुषमा के ऐलान से जेटली की चिंता बढ़ी
 
अब सुषमा स्वराज का यह ऐलान कि मैं लोकसभा चुनाव भले नहीं लडूंगी लेकिन राजनीति में बनी रहूंगी, से साफ है कि वह राज्यसभा के जरिये संसद में आएंगी। सुषमा के इस ऐलान से वित्त मंत्री अरुण जेटली की चिंता बढ़नी स्वाभाविक है क्योंकि सुषमा स्वराज राजनीति में उनसे काफी वरिष्ठ हैं और ऐसे में राज्यसभा में सदन के नेता का पद जेटली के पास बना रहेगा या सुषमा के पास जायेगा, इस पर सभी की निगाहें बनी रहेंगी। आपको बता दें कि जब 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी की केंद्र में तीसरी बार सरकार बनी और सुषमा स्वराज उसमें फिर से कैबिनेट मंत्री बनायी गयीं उस वक्त अरुण जेटली ने सरकार में बतौर राज्यमंत्री अपनी संसदीय पारी शुरू की थी।
 
सुषमा से काफी छोटा है जेटली का राजनीतिक कद
 
अरुण जेटली 1999 से राज्यसभा में हैं और एक बार ही लोकसभा का चुनाव लड़े हैं। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों में उन्होंने अमृतसर से कैप्टन अमरिंदर सिंह के सामने चुनाव लड़ा था और भारी मतों के अंतर से चुनाव हार गये थे जबकि सुषमा स्वराज अब तक एक ही बार लोकसभा चुनाव हारी हैं और वह भी तब जब 1999 में भाजपा ने कर्नाटक के बेल्लारी से चुनाव लड़ रहीं तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया था। तब बेल्लारी में सुषमा स्वराज ने सोनिया गांधी को कड़ी टक्कर दी थी। जेटली वाजपेयी सरकार में बतौर राज्यमंत्री, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और फिर कैबिनेट मंत्री के रूप में काम कर चुके हैं। साथ ही वह भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव भी रह चुके हैं। 
सुषमा स्वराज का राजनीतिक सफर
 
सुषमा स्वराज की बात करें तो निश्चित ही वह हिन्दी की प्रखर वक्ता हैं और एक सांसद एवं मंत्री के रूप में उन्होंने संसद एवं विदेश मंत्री के रूप में संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रभावी भाषण हिन्दी में दिए हैं। वह अंग्रेजी में उसी सहजता के साथ भाषण देती हैं किंतु वह प्राय: हिन्दी में ही बोलना पसंद करती हैं। सुषमा स्वराज के नाम देश में सबसे युवा कैबिनेट मंत्री बनने का भी रिकार्ड है। वह हरियाणा सरकार में 1977 में महज 25 वर्ष की आयु में कैबिनेट मंत्री बनी थीं। उन्हें दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनने का गौरव भी हासिल है। स्वराज भारत की पहली महिला विदेश मंत्री थीं। इससे पहले इन्दिरा गांधी ने प्रधानमंत्री रहते हुए यह दायित्व निभाया था। स्वराज तीन बार राज्यसभा सदस्य और अपने गृह राज्य हरियाणा की विधानसभा में दो बार सदस्य रह चुकी हैं। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार में उन्होंने सूचना प्रसारण मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय, संसदीय कार्य मंत्री सहित विभिन्न मंत्रालयों की जिम्मेदारी कैबिनेट मंत्री के रूप में संभाली थी। सुषमा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भी करीबी रहीं थीं और भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के भी वह काफी करीब थीं हालांकि आडवाणी के साथ जिन्ना विवाद जुड़ने के बाद वह उनसे कुछ अलग दिखने लगी थीं। 2009 में जब आडवाणी भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार थे और पार्टी की चुनावों में बुरी हार हुई थी तब आरएसएस ने आडवाणी को विपक्ष का नेता नहीं बनने दिया था और निचले सदन में पार्टी की कमान सुषमा स्वराज के हाथों सौंप दी थी।
 
बहरहाल, सुषमा स्वराज जोकि विदेश मंत्री के तौर पर भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाने में, विदेशियों को भारत के करीब लाने में, भारतवंशियों को भारत भूमि के साथ जोड़ने में और ट्वीटर पर एक माँ की तरह सभी की समस्याओं को तत्काल सुलझाने में लगी रहती हैं, जल्द पूर्ण रूप से स्वस्थ हों और वापस आम जनता की प्रतिनिधि बनकर लोकसभा पहुँचे।
 
-नीरज कुमार दुबे

नयी दिल्ली। केजरीवाल सरकार पर दिल्ली को विनाश के मार्ग पर धकेलने का आरोप लगाते हुए केंद्रीय मंत्री विजय गोयल ने कहा कि नेता एवं परिपक्वता की कमी का सामना कर रहा विपक्ष सिर्फ मोदी हटाओ के हसीन सपने के लिये महागबंधन का हौवा खड़ा करने का प्रयास कर रहा है। गोयल ने यहां कहा, ‘‘भाजपा के पास एकतरफ जहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जैसा लोकप्रिय जन नेता और अमित शाह जैसा संगठनात्मक कौशल से निपुण अध्यक्ष है, वहीं विपक्ष के पास नेता, नियत और परिपक्वता की कमी है।’’ 

 
उन्होंने कहा कि सिर्फ मोदी को हटाने का हसीन सपना देख रहा विपक्ष महागठबंधन का हौवा खड़ा करने का प्रयास कर रहा है जहां न तो विचारों का कोई मेल है और न ही उनकी नियत ही स्पष्ट है। भाजपा के वरिष्ठ नेता ने दावा किया कि मोदीजी की लोकप्रियता पहले से ज्यादा बढ़ी है और आने वाले समय में लोकसभा समेत सभी चुनाव में जनता भाजपा को जनादेश देगी। दिल्ली सरकार पर राष्ट्रीय राजधानी के लोगों के हितों के साथ समझौता करने का आरोप लगाते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पिछले तीन वर्षों के दौरान केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार ने प्रदेश का विकास नहीं किया बल्कि विनाश के मार्ग पर धकेलने का काम किया है। 
 
गत सोमवार को केजरीवाल पर मिर्ची पाउडर से हुए हमले का जिक्र करते हुए विजय गोयल ने कहा कि वे :केजरीवाल: सुरक्षा कवर नहीं लेने की बात करते थे, लेकिन सोमवार को उनकी पार्टी की प्रेस वार्ता से स्पष्ट हो गया कि वे अभेद्य सुरक्षा लिये हुए हैं। केजरीवाल दावा करते हैं कि वे लोगों के बीच रहते हैं। ऐसे में यह जनता को तय करना है कि तीन स्तर की सुरक्षा व्यवस्था के बीच गुटखे के पैकेट में मिर्ची पाउडर से मुख्यमंत्री पर हमला किया जाना और हमलावर द्वारा खुद को गिरफ्तार कराने की घटना में क्या छिपा है।

 
उन्होंने आरोप लगाया कि केजरीवाल दिल्ली की जनता के कल्याण के कार्यों को आगे बढ़ाने की बजाए लोगों का ध्यान बांटने का प्रयास कर रहे हैं। आम आदमी पार्टी के नेता अब बचपना छोड़ें । 1984 के सिख दंगा मामले में अदालत द्वारा एक दोषी को फांसी की सजा सुनाने की घटना के संदर्भ में उन्होंने कहा कि अदालत के इस फैसले से आशा बंधी है कि इस मामले में अपराधियों को सजा मिलेगी जिसमें कांग्रेस के कई बड़े नेता भी शामिल हैं।

नेहरूगांव (बुधनी)। मध्य प्रदेश में तीन बार से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरे कांग्रेसी उम्मीदवार अरुण यादव ने कहा कि वह बुधनी में एक ‘‘शैतान’’ से लड़ रहे हैं। यादव ने चौहान पर ‘‘अत्यधिक अत्याचार’’ करके अपने क्षेत्र और पूरे राज्य के लोगों को धोखा देने का आरोप लगाया। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष यादव ने कहा कि इसमें कोई दो राय नहीं कि कांग्रेस 15 साल सत्ता से बाहर रहकर इसे फिर से हासिल करने के लिए बड़ी जंग लड़ रही है लेकिन उन्हें चौहान के खिलाफ जीत का पूरा भरोसा है।

 
सत्तारूढ़ भाजपा के नेताओं ने कांग्रेसी नेताओं के इन दावों को खारिज किया कि मुख्यमंत्री का गढ़ माने जाने वाले बुधनी में ज्यादा विकास नहीं हुआ है। भाजपा का कांग्रेसी आरोपों पर जवाब है कि राज्य में अतीत के कांग्रेस के शासन के मुकाबले बीते 15 साल में अधिकतम विकास हुआ है। भाजपा नेताओं का कहना है कि यादव को ‘‘बलि का बकरा’’ बनाया गया है।इससे पहले, चौहान ने उनके खिलाफ यादव को चुनाव लड़ाने के लिए कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि कांग्रेस ने उनके ‘‘मित्र’’ के साथ ‘‘अन्याय’’ किया है, पहले उन्हें प्रदेश इकाई अध्यक्ष के पद से हटाकर और फिर बुधनी से टिकट देकर। हालांकि यादव ने कहा कि यह उनके लिए सम्मान की बात है कि पार्टी ने उन्हें ऐसे व्यक्ति के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए टिकट दिया जो 230 विधानसभा सीटों के लिए 28 नवंबर को होने वाले चुनाव में भाजपा के पूरे अभियान का चेहरा है।
 
यादव ने इस क्षेत्र में चुनावी प्रचार के दौरान दिये साक्षात्कार में कहा, ‘‘यह फैसला मेरे बॉस राहुल गांधी का था। और मुझे लगता है कि यहां मेरे आने का लक्ष्य बुधनी में मतदाताओं को यह संदेश देना है कि हम इसे लड़ सकते हैं।’’ प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुभाष यादव के बेटे और 44 साल के कांग्रेसी नेता ने कहा, ‘‘मैं उन्हें दानव कहता हूं। मेरी पार्टी ने उनके खिलाफ मुझे उतारा है और मुझे लगता है कि यह मेरे लिए सम्मान की बात है। लोग उत्साहित हैं और यह सबसे अच्छी बात है।’’ मुख्यमंत्री को ‘‘शैतान’’ कहने के बारे में उन्होंने कहा कि ऐसा कहने के कुछ कारण हैं। यादव ने आरोप लगाया, ‘‘मध्यप्रदेश भारत का एकमात्र राज्य है जहां महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं, जहां किसानों की खुदकुशी की संख्या सर्वाधिक है और सिहोर (बुधनी जिला मुख्यालय) में यह सबसे ज्यादा है। बीते 15 साल में, युवाओं के लिए नौकरियां नहीं हैं। मध्यप्रदेश में अब तक का सबसे बड़ा घोटाला व्यापमं है जबकि अवैध बालू खनन और अन्य भ्रष्टाचार भी हैं।’’

 

 
केन्द्रीय मंत्री भी रह चुके यादव ने कहा कि इन चुनावों में सत्ता में वापस आना कांग्रेस के लिए जरूरी है।उन्होंने कहा, ‘‘मैं दृढता से ऐसा मानता हूं––– हर कार्यकर्ता और नेता को एकसाथ मिलकर चुनाव लड़ना होगा और सुनिश्चित करना होगा कि हम इस बार सत्ता में आएं।’’ उन्होंने आशा जताई कि कांग्रेस करीब 155 सीटें जीतकर आसानी से बहुमत हासिल कर लेगी।खंडवा-खरगोन सीट से दो बार के सांसद ने आरोप लगाया कि चौहान आधारभूत ढांचे और उद्योगों की बात करते हैं तथा हर साल उद्योग बैठक करते हैं लेकिन कोई उद्योग या रोजगार नहीं है। यादव ने आरोप लगाया, ‘‘राज्य अब पूरी तरह से दिवालिया हो चुका है और उस पर एक लाख 70 हजार करोड़ का ऋण बोझ है। वह (चौहान) खुद को ‘मामा’ कहते हैं लेकिन उनके शासन में सबसे ज्यादा ‘दुराचार’ और ‘अत्याचार’ हुए हैं।’’।यह पूछे जाने पर कि वह चौहान की छवि का मुकाबला कैसे करेंगे, यादव ने खुद को इस सीट से असली ‘‘नर्मदा पुत्र’’ और भूमि पुत्र बताया।
 
उन्होंने कहा, ‘‘मैं किसानों पर गोलियां चलाने या लोगों को मारने में (मंदसौर घटना का संदर्भ) भरोसा नहीं रखता। मेरे लिए, हर मतदाता महत्वपूर्ण है। मेरे लिए प्यार और स्नेह महत्वपूर्ण है जो बुधनी की जनता ने मुझे दिया है। अगर वह असली ‘मामा’ हैं तो मुख्यमंत्री बनने के बाद, लोग खुदकुशी क्यों कर रहे हैं और महिलाएं असुरक्षित क्यों हैं?’’

राम मंदिर निर्माण को लेकर राजनीतिक पार्टियों के बीच चल रही बयानबाजी चुनावी मौसम में और तेज हो गई है। फिलहाल राम मंदिर निर्माण को लेकर मामला सर्वोच्च न्यायालय के खाते में है। चुनावी मौसम में राम मंदिर पर चल रहे बयानबाजी के बीच गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि राम मंदिर बनेगा तो सभी को खुशी होगी, हमारा ये मानना है कि एक अच्छे वातावरण में राम मंदिर का निर्माण होना चाहिए। 

 

मध्यप्रदेश में विधानसभा के चुनाव की उल्टी गिनती चल रही है ऐसे में भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता वहां जनसभाएं कर रहे हैं। मध्य प्रदेश दौरे पर पहुंचे राजनाथ सिंह ने बुधवार को भोपाल में संवाददाताओं के बातचीन के दौरान एक सवाल के जबाव में ये बातें कहीं।

उल्लेखनीय है कि बाबरी मस्जिद-राम मंदिर भूमि विवाद के पैरोकार हाशिम अंसारी के बेटे इकबाल अंसारी ने पिछले दिनों कहा था कि अगर सरकार अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए अध्यादेश लाती है, तो उन्हें इस पर कोई ऐतराज नहीं है। अंसारी ने कहा था कि अध्यादेश लाने से अगर राम मंदिर बनता है और देश का माहौल सुधरता है तो अध्यादेश लाया जाए, हम कानून का पालन करने वाले लोग हैं और उसका पालन करेंगे। 

बता दें कि 25 नवंबर को  विश्व हिंदू परिषद् अयोध्या में धर्म संसद का आयोजन कर रही है, ये धर्म संसद राम मंदिर निर्माण के लिए बुलाई है, जिसमें लाखों की संख्या में लोगों के जुटने की उम्मीद है।

नोटबंदी से किसान बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। यह बात केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने आर्थिक मामलों को देख रही संसदीय स्थायी समिति को पेश किये एक रिपोर्ट में स्वीकार की है। द हिंदू की खबर के मुताबिक, रिपोर्ट में बताया गया है कि नोटबंदी होने की वजह से लाखों किसान सर्दियों की फसल के लिए बीज और खाद आदि नहीं खरीद सके थे, जिसके चलते किसानों को काफी मुश्किल दौर का सामना करना पड़ा था। किसानों को उस समय अधिक कैश की जरूरत थी, जो उन्हें समय से नहीं मिल पाया क्योंकि उस वक्त नोटबंदी लागू हो गई थी। 

 

रिपोर्ट्स के अनुसार, बीते मंगलवार को कांग्रेस सांसद वीरप्पा मोहली की अध्यक्षता वाली संसद की स्थायी समिति को केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने नोटबंदी पर अपनी रिपोर्ट पेश की। किसानों पर नोटबंदी के असर से जुड़ी इस खबर का हवाला देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला और दावा किया कि अब केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने भी मान लिया है कि नोटबंदी से किसानों की कमर टूट गई।

गांधी ने ट्विटर पर एक खबर शेयर करते हुए कहा, ‘नोटबंदी ने करोड़ों किसानों का जीवन नष्ट कर दिया है। अब उनके पास बीज-खाद खरीदने के लिए पर्याप्त पैसा भी नहीं है। लेकिन आज भी मोदी जी हमारे किसानों के दुर्भाग्य का मजाक उड़ाते हैं। अब उनका कृषि मंत्रालय भी कहता है कि नोटबंदी से किसानों की कमर टूट गई।’ 
कांग्रेस अध्यक्ष ने जो खबर शेयर की है उसके मुताबिक वित्त मंत्रालय से संबंधित स्थायी संसदीय समिति को सौंपी रिपोर्ट में कृषि मंत्रालय ने कहा है कि नोटबंदी का किसानों पर बुरा असर पड़ा है। नोटबंदी के बाद नकदी की कमी हो गई, जिससे किसान रबी और खरीफ की फसल के लिए बीज-खाद नहीं खरीद सके।

उधर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य प्रदेश में चुनाव प्रचार के दौरान गत मंगलवार को कहा था कि देश से भ्रष्टाचार के दीमक को साफ करने और बैंकिंग प्रणाली में पैसा वापस लाने के लिये नोटबंदी जैसी कड़वी दवा का उपयोग करना जरुरी था।

एंटीबायोटिक्स या प्रतिजैविक एक ऐसा पदार्थ है जो जीवाणुओं को मारता है और उसके विकास को रोकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि विश्व में एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल बंद किया जाना चाहिए। 

 माना जा रहा है की गंभीर बीमारी से ग्रस्त मरीजों के लिए पिछले दो वर्षों में एंटीबायोटिक्स दवाओं को अंतिम उपाय के रूप में माना जाता है क्योंकि 86 प्रतिशत तक मृत्यु की संख्या पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता। ऐसे में हाल ही में एंटीबायोटिक्स के अत्यधिक इस्तेमाल को रोकने के लिए कोच्ची के अस्पताल ने प्रतिबंधित एंटीबायोटिक्स दवाओं को कम किया है। 


मुंबई के हिंदुजा अस्पताल के डॉक्टर ने सर्जरी के एक दिन पहले मरीजों से एंटीबायोटिक्स लेने को कहा जबकि इसके पूर्व कई दिन पहले से ही मरीजों को एंटीबायोटिक्स खाने की सलाह दी जाती थी। कोच्चि के अमृता मेडिकल साइंस संसथान की 48555 मरीजों की रिपोर्ट के अनुसार पिछले दो सालों में अनुभवी टीम के सदस्यों ने पाया है कि 1020 मरीजों ने 1326 प्रतिबंधित एंटीबायोटिक्स दवाओं के पर्चे पाए। 

हालांकि, रोजाना जांच पड़ताल की मदद से अस्पताल की टीम ने 86 प्रतिशत तक एंटीबायोटिक्स के इस्तेमाल को कम करने में सफलता हासिल की है। बता दें कि मुंबई में तृतीयक देखभाल अस्पतालों में जब भी कोई मरीज प्रतिबंधित एंटीबायोटिक्स दवा का पर्चा लेकर आता है, डॉक्टरों एवं फार्मासिस्ट की टीम मरीज के फाइल की कारण जानने हेतु जांच पड़ताल करती है जिसके उपरांत ही उसे दवा दी जाती है। 

रोगाणुरोधी दवाएं खासकर एंटीबायोटिक्स डॉक्टरों द्वारा इतनी अधिक सलाह कर दी जाती हैं की सूक्ष्मजीवों ने इससे प्रतिरोध विकसित कर दिया है जो आज स्वास्थ्य सम्बन्धी सबसे बड़ी समस्या है। वर्ष 2016 में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी की गयी एक रिपोर्ट के अनुसार रोगाणुरोधी दवाओं से विश्व में प्रत्येक वर्ष 7 लाख मृत्यु होती है और यदि सही कदम नहीं उठाये गए तो आने वाले 30 सालों में ये दर बढ़ कर 10 मिलियन हो सकती है। 

बहरहाल, इस ओर कदम बढ़ाते हुए देश के डाक्टरों ने मरीजों को एंटीबायोटिक्स की सलाह देने में कमी की है। बता दें की कुछ साल पहले भारतीय परिषद चिकित्सा अनुसंधान द्वारा पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत की गयी थी जिसमें हिंदुजा अस्पताल के डॉक्टरों के साथ-साथ दिल्ली, चेन्नई ओर कोलकाता के डॉक्टरों से मरीजों को प्रतिबंधित एंटीबायोटिक्स की सलाह देने के लिए 'सफाई' की मांग की गयी थी। 

आईसीएमआर की डॉक्टर कामिनी वालिआ का कहना है कि, देश में एंटीबायोटिक्स के कम इस्तेमाल को सुनिश्चित करना चाहती हैं ताकि उन एंटीबायोटिक्स को इस्तेमाल में लाया जा सके जो विशिष्ट जीवाणुओं   पर काम करते हैं। 

प्रदूषण और सूखे से जूझ रहे उत्तर प्रदेश में 20 से 25 नवंबर के बीच कभी भी कृत्रिम बारिश कराई जा सकती है। उत्तर प्रदेश सरकार की कृत्रिम बारिश कराए जाने की मांग को नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने हरी झंडी देते हुए विशेष यान भी मुहैया करा दिया है। उड्डयन मंत्रालय ने दिल्ली एनसीआर में बारिश कराने के लिए बीच क्राफ्ट सुपर किंग एयर B-200 राज्य सरकार को सौंप दिया है। इस बारिश के लिए उत्तर प्रदेश सरकार कानपुर आईआईटी को अपने साथ मिलाया है।  इसरो ने कानपुर आईआईटी को उच्च तकनीक से लैस एयरक्राफ्ट भी मुहैया करा दिया है।

 

बता दें कि उत्तर प्रदेश के दस जिले दिल्ली से भी अधिक प्रदूषित हैं वहीं बुंदेलखंड सबसे अधिक सूखा ग्रस्त इलाका है।सबसे प्रदूषित जिलों में हापुड़, बुलंदशहर, गाजियाबाद, जीबी नगर, संभल, अलीगढ़, कासगंज, बागपत, बंदायू और मेरठ शामिल हैं। 


दिल्ली में एनसीआर बारिश कराए जाने को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार और उड्डयन मंत्रालय द्वारा किए गए पत्राचार का पूरा ब्योरा मौजूद है।  इसके लिए इसरो ने संसाधनों से लैस एयरक्राफ्ट आईआईटी को सौंप दिया है।

अब वैज्ञानिकों को दिल्ली में बारिश उमड़ने का इंतजार है। हल्के बादल भी उमड़ने पर वैज्ञानिक कृत्रिम बारिश कराने का प्रयास शुरू कर देंगे। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि आसमान में बादल आने में अभी एक सप्ताह का और इंतजार करना पड़ेगा। आईआईटी कानपुर के उप-निदेशक प्रो. मणिंद्र अग्रवाल ने बताया कि इसरो से एयरक्राफ्ट मांगा गया था और वह मिल चुका है। हालांकि जिस पायलट को यह काम मिलकर करना है वो फिलहाल बीमार है।




दूसरी ओर दिल्ली के आसमान में अभी बादल भी नहीं है। बगैर बादल के कृत्रिम बारिश कराना संभव नहीं है। इसलिए कृत्रिम बारिश कराने के लिए एक सप्ताह तक इंतजार करना पड़ेगा।
केमिकल सॉल्यूशन तैयार है

आईआईटी के वैज्ञानिकों का कहना है कि कृत्रिम बारिश के लिए कई केमिकल का मिश्रण करके एक सॉल्यूशन तैयार किया गया है जो पहले आसमान में बादल बनाएंगे और फिर उससे बारिश होगी। वैज्ञानिकों का दावा है कि काफी हद तक उनका यह सॉल्यूशन काम करेगा। 

मध्यप्रदेश की चुनावी जंग में भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी है। स्टार प्रचारकों में शामिल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज आष्टा विधानसभा क्षेत्र में जनसभा को संबोधित किया।

 

योगी ने 15 साल की शिवराज सरकार की तुलना कांग्रेस राज से करते हुए कहा, "बीते साढ़े चार साल में जिस तरह से शिवराज सिंह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश आगे बढ़ा है, उससे हमें चौथी बार सरकार बनाने का मौका मिलना ही चाहिए। 15 साल पहले मध्यप्रदेश में न सड़कें ठीक थीं, न बिजली आती थी। अपराध का बोलबाला था। मध्यप्रदेश एक बीमारू राज्य बन गया था। भाजपा सरकार ने इसे बीमारू से उबार कर समृद्ध बनाया।"

योगी ने कांग्रेस पर एक बार फिर हमला बोला। योगी ने कहा कि आतंकवाद. नक्सलवाद, अराजकता और भ्रष्टाचार की जड़ में कांग्रेस है। कांग्रेस की नस-नस में भ्रष्टाचार है। उन्होंने कहा कि गरीबों को खाद्यान्न और किसानों को बोनस देने का काम शिवराज सरकार ने किया। प्रदेश को पावर सरप्लस राज्य बनाने का काम भी बीते सालों में हुआ है।
योगी ने केंद्र की योजनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, "भाजपा का मानना है कि देश के सभी संसाधनों पर हर महिला, मजदूर, किसान का हक है। प्रधानमंत्री मोदी ने 2022 तक हर परिवार को छत और स्वच्छ भारत के तहत शौचालय देने का एलान किया है। गरीब के घर में बिजली कनेक्शन हो, सिर पर छत हो, घर में शौचालय हो, रोजगार हो वही हमारे लिए राम राज्य की स्थापना है।"

मध्यप्रदेश में 28 नवंबर को मतदान होना है। नतीजे 11 दिसंबर को आएंगे।

राफेल सौदे का मामला चुनाव का अहम मुद्दा बना हुआ है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुधवार को मध्य प्रदेश के इंदौर में केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राफेल डील पर देश में ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। मोदी सरकार से विपक्षी पार्टियां और कई राजनीतिक समूह मीटिंग की बात कर रहे हैं लेकिन सरकार तैयार नहीं है इससे पता चलता है कि इस सौदे में जरूर दाल में कुछ काला है। 

 
मध्यप्रदेश में 28 नवंबर को चुनाव होने वाले हैं। एक तरफ जहां यहां राजनीतिक पार्टियों का जमावड़ा लगा हुआ है वहीं राममंदिर से लेकर राफेल डील तक पर बयानबाजी का दौर भी तेज होता जा रहा है।


इंदौर में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भाजपा सरकार पर वादा खिलाफी का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 2014 में नरेंद्र मोदी ने देश में हर साल दो करोड़ युवाओं को नौकरी देने का वादा किया था, लेकिन वह अपना वादा पूरा करने में नाकाम रहे हैं। अगर श्रम विभाग के आंकड़ों को खंगाले तो पता चलता है कि  पिछले चार वर्षों में हर तिमाही में महज कुछ हजार ही नौकरी मिल सकी है। 

यही नहीं मौनी कहे जाने वाले मनमोहन सिंह ने राज्य की शिवराज सरकार को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसान बेहाल है। लोन, फसल और सुविधाएं नहीं मिलने से किसान की स्थिति दयनीय बनी हुई है। राज्य सरकार ने किसानों की समस्या पूरा करने में नाकाम रही है। उन्होंने राज्य में हुए सबसे बड़े व्यापमं घोटाले पर भी लोगों का ध्यान खींचा। 

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