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प्रवासन, अखिल भारतीय ऋण एवं निवेश तथा कृषि परिवारों के स्थिति आकलन सर्वेक्षण का क्षेत्रीय कार्य शुरू

रायपुर,  जुलाई 2026/ सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI), भारत सरकार के मार्गदर्शन में तथा आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय, छत्तीसगढ़ द्वारा राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण (National Sample Survey - NSS) के 81वें दौर के अंतर्गत प्रवासन सर्वेक्षण (Migration Survey), अखिल भारतीय ऋण एवं निवेश सर्वेक्षण (All India Debt & Investment Survey - AIDIS) तथा कृषि परिवारों का स्थिति आकलन सर्वेक्षण (Situation Assessment Survey - SAS) का क्षेत्रीय सर्वेक्षण कार्य जुलाई 2026 से प्रारंभ कर दिया गया है। यह सर्वेक्षण जून 2027 तक संचालित किया जाएगा।

इन तीनों राष्ट्रीय महत्व के सर्वेक्षणों का उद्देश्य राज्य एवं देश की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों से संबंधित विश्वसनीय आंकड़ों का संकलन करना है, ताकि साक्ष्य-आधारित नीतियों, योजनाओं एवं विकास कार्यक्रमों के निर्माण में इनका प्रभावी उपयोग किया जा सके।

प्रवासन की बदलती प्रवृत्तियों का होगा आकलन

प्रवासन सर्वेक्षण के माध्यम से व्यक्तियों एवं परिवारों के एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरण के कारणों, प्रवास की अवधि, रोजगार, शिक्षा, विवाह तथा अन्य सामाजिक-आर्थिक कारकों से संबंधित जानकारी एकत्रित की जाएगी। इस सर्वेक्षण से प्राप्त आंकड़े देश में प्रवासन की प्रवृत्तियों तथा उसके सामाजिक एवं आर्थिक प्रभावों को समझने में महत्वपूर्ण आधार प्रदान करेंगे।

परिवारों की वित्तीय स्थिति का मिलेगा व्यापक चित्र

अखिल भारतीय ऋण एवं निवेश सर्वेक्षण (AIDIS) के तहत परिवारों की ऋणग्रस्तता, ऋण के स्रोत, निवेश के स्वरूप, परिसंपत्तियों तथा देनदारियों से संबंधित जानकारी संकलित की जाएगी। इससे नागरिकों की वित्तीय स्थिति, ऋण तक पहुंच तथा वित्तीय समावेशन के स्तर का समग्र आकलन किया जा सकेगा।

कृषि परिवारों की आय और जीवन स्तर का होगा अध्ययन

कृषि परिवारों का स्थिति आकलन सर्वेक्षण (SAS) कृषि परिवारों की आय, कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों, कृषि लागत, संसाधनों की उपलब्धता, ऋण की स्थिति तथा जीवन स्तर से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराएगा। सर्वेक्षण के निष्कर्ष कृषि क्षेत्र की नीतियों तथा किसान कल्याण कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी एवं परिणामोन्मुख बनाने में सहायक सिद्ध होंगे।

टैबलेट आधारित CAPI प्रणाली से होगा सर्वेक्षण

सर्वेक्षण कार्य के लिए प्रशिक्षित प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों द्वारा राज्य के चयनित ग्रामीण एवं शहरी परिवारों से टैबलेट आधारित CAPI (Computer Assisted Personal Interviewing) प्रणाली के माध्यम से जानकारी संकलित की जाएगी। इससे आंकड़ों का संग्रहण अधिक सटीक, पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित होगा।

सर्वेक्षण के दौरान प्राप्त सभी जानकारियां सांख्यिकी अधिनियम, 2008 के प्रावधानों के अनुसार पूर्णतः गोपनीय रखी जाएंगी तथा उनका उपयोग केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।

आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय, छत्तीसगढ़ ने राज्य के चयनित परिवारों से अपील की है कि वे सर्वेक्षण दल को सही एवं पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराकर राष्ट्रीय महत्व के इस कार्य में सक्रिय सहयोग प्रदान करें। नागरिकों के सहयोग से प्राप्त गुणवत्तापूर्ण आंकड़े राज्य एवं देश के विकास के लिए प्रभावी नीतियों एवं जनकल्याणकारी योजनाओं के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने नवप्रवेशी बच्चों का किया आत्मीय स्वागत

पाठ्यपुस्तक, गणवेश, अध्ययन सामग्री और साइकिल वितरण के साथ शिक्षकों एवं नवसाक्षरता अभियान के वॉलेंटियरों का हुआ सम्मान

रायपुर, जुलाई 2026। सरगुजा जिले में शैक्षणिक सत्र 2026-27 की उत्साहपूर्ण शुरुआत जिला स्तरीय शाला प्रवेश उत्सव के साथ हुई। पी.जी. कॉलेज ऑडिटोरियम में आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम में पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने विद्यालय की घंटी बजाकर नवप्रवेशी बच्चों का स्वागत किया और उन्हें तिलक लगाकर, पुष्पमाला पहनाकर तथा मिठाई खिलाकर विद्यालय में प्रवेश दिलाया। पूरे कार्यक्रम में शिक्षा के प्रति उत्साह, बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की आशा और समाज को शिक्षित बनाने का संकल्प स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि बच्चों के बीच उपस्थित होकर उन्हें विद्यालय की नई शुरुआत के लिए प्रेरित करना अत्यंत गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही सफलता का मूल मंत्र है और यही वह आधार है जो व्यक्ति के जीवन में ज्ञान, कौशल, आत्मविश्वास तथा समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने कहा कि शासन का उद्देश्य केवल बच्चों का नामांकन कराना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक बच्चा नियमित रूप से विद्यालय पहुंचे, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करे और अपने सपनों को साकार करे।

उन्होंने कहा कि किसी भी बच्चे को शिक्षा से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा और ड्रॉपआउट की स्थिति समाप्त करने के लिए शासन लगातार प्रयास कर रहा है। विशेष रूप से सरगुजा जैसे जनजाति बहुल क्षेत्र में शिक्षा का महत्व और अधिक है। पहाड़ी कोरवा सहित विशेष पिछड़ी जनजातियों के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए किए जा रहे प्रयासों की उन्होंने सराहना की। उन्होंने विद्यार्थियों से मन लगाकर अध्ययन करने तथा माता-पिता, गुरुजनों, जिले और प्रदेश का नाम रोशन करने का आह्वान किया। वहीं अभिभावकों से बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने तथा बेटा-बेटी को समान अवसर प्रदान करने की अपील भी की।

छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष श्री विश्व विजय सिंह तोमर ने विद्यार्थियों को शिक्षा के प्रति समर्पित रहने और जीवन में निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष श्री अनुराग सिंह देव ने कहा कि शाला प्रवेश उत्सव छोटे बच्चों के मन में विद्यालय को लेकर होने वाले भय को दूर करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि राज्य शासन लगातार विद्यालयों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण और सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रहा है। श्री भरत सिंह सिसोदिया ने शिक्षकों से बच्चों को शिक्षा के साथ श्रेष्ठ संस्कार देने का आग्रह किया।

कलेक्टर श्री अजीत वसंत ने जिले में शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों और उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि भवनविहीन विद्यालयों के लिए भवन स्वीकृत किए गए हैं, विद्यार्थियों के जाति प्रमाणपत्र बनवाए गए हैं तथा विशेष पिछड़ी जनजाति के बच्चों का उच्च कक्षाओं में प्रवेश सुनिश्चित किया गया है। उन्होंने बताया कि मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को रायपुर के निजी कोचिंग संस्थानों में प्रवेश दिलाया गया है। जिले में शिक्षकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति भी की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक बच्चों के भविष्य की मजबूत नींव तैयार करते हैं, इसलिए उनकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम के दौरान स्कूली बच्चों द्वारा तैयार की गई दीवार पत्रिका का भी विमोचन किया गया।

शाला प्रवेश उत्सव के अवसर पर कक्षा पहली, छठवीं और नवमी में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को गणवेश, पाठ्यपुस्तकें, कॉपियां, स्कूल बैग तथा अन्य अध्ययन सामग्री वितरित की गई। शिक्षा के प्रति बच्चों का उत्साह बढ़ाने और उन्हें बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में यह महत्वपूर्ण पहल रही।

स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मेडलीपार द्वारा जांच प्रकिया को त्वरित करने दिए निर्देश

नवीन भारतीय न्याय संहिता के अनुरूप न्याय प्रक्रिया को त्वरित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने पर जोर

रायपुर,  जुलाई 2026/ छत्तीसगढ़ में नवीन भारतीय न्याय संहिता के प्रभावी क्रियान्वयन तथा न्याय प्रक्रिया को तकनीक आधारित, सरल एवं त्वरित बनाने की दिशा में उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री श्री विजय शर्मा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मंगलवार को क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रेकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस) की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक ली। बैठक में सीसीटीएनएस के संचालन में आ रही व्यवहारिक चुनौतियों, विभिन्न डिजिटल मॉड्यूल के एकीकरण तथा न्यायिक एवं पुलिस व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए विस्तृत चर्चा की गई।

उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि नवीन भारतीय न्याय संहिता के अनुरूप अपराधों की विवेचना, साक्ष्य संकलन, न्यायालयीन प्रक्रिया तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को पूर्णतः डिजिटल और समयबद्ध बनाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि सीसीटीएनएस के माध्यम से न्याय प्रक्रिया के प्रत्येक चरण को अधिक सुगम, पारदर्शी और नागरिक हितैषी बनाया जाए।

ई-एफआईआर से ई-फोरेंसिक तक सभी डिजिटल मॉड्यूल के प्रभावी संचालन पर जोर

बैठक में ई-एफआईआर, ई-चालान, ई-साक्ष्य, मेडलीपार, ई-प्रिजन, ई-फोरेंसिक, सीआईएस, न्याय श्रुति तथा अन्य डिजिटल प्रणालियों को सीसीटीएनएस के साथ प्रभावी रूप से संचालित करने पर विस्तार से चर्चा हुई। उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन सभी मॉड्यूलों के बीच समन्वय स्थापित कर न्याय प्रक्रिया को अधिक तेज और पारदर्शी बनाया जाए, जिससे नागरिकों को त्वरित न्याय उपलब्ध हो सके।

ई-साक्ष्य के लिए सभी जिलों में विशेष प्रशिक्षण अभियान चलेगा

श्री शर्मा ने कहा कि डिजिटल साक्ष्यों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने निर्देश दिए कि राज्य के सभी जिलों में पुलिस अधिकारियों एवं संबंधित कर्मचारियों को ई-साक्ष्य प्रणाली का व्यापक प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि डिजिटल साक्ष्यों का संकलन, संरक्षण एवं न्यायालय में प्रस्तुतिकरण पूरी दक्षता के साथ किया जा सके। उन्होंने अच्छा कार्य करें वाले जिलों को प्रोत्साहित कर उन

'न्याय श्रुति' को शीघ्र किया जाएगा गो-लाइव
बैठक में न्याय श्रुति प्रणाली को शीघ्र प्रारंभ करने पर भी चर्चा हुई। उप मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि उच्च न्यायालय के माध्यम से सभी न्यायाधीशों की आवश्यक आईडी तैयार कराकर न्याय श्रुति प्रणाली को जल्द से जल्द गो-लाइव किया जाए, जिससे न्यायालयीन प्रक्रियाओं में तकनीक का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित हो सके।

दुर्ग, बिलासपुर और रायपुर कमिश्नरेट के सभी थानों में होंगे ई-साइनिंग पैड
बैठक में प्रार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। उप मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रारंभिक चरण में दुर्ग, बिलासपुर तथा रायपुर कमिश्नरेट के सभी थानों में तथा राज्य के प्रत्येक जिले के दो-दो थानों में इस माह के अंत तक दो-दो ई-साइनिंग पैड उपलब्ध कराए जाएं। इससे शिकायतकर्ताओं के डिजिटल हस्ताक्षर की प्रक्रिया सरल होगी और दस्तावेजों का ऑनलाइन निष्पादन अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगा। इसके बाद पूरे राज्य में सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

आईसीजेएस के पांचों स्तंभों को मजबूत करने पर जोर

श्री शर्मा ने नवीन भारतीय न्याय संहिता के अनुरूप न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम के सभी पांचों स्तंभों को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुलिस, न्यायालय, जेल, फोरेंसिक तथा अभियोजन तंत्र के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर न्याय प्रक्रिया को समयबद्ध बनाया जाए।

धान के कटोरे से डेयरी हब बनने तक का सफर

रायपुर, जुलाई 2026/ ​छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले को अब तक मुख्य रूप से 'धान के कटोरे' के रूप में जाना जाता था, लेकिन आज यह जिला ग्रामीण समृद्धि और आर्थिक स्वावलंबन का एक नया अध्याय लिख रहा है। कभी व्यक्तिगत और असंगठित स्तर तक सीमित रहने वाला दूध का कारोबार आज जिला प्रशासन, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) और स्थानीय पशुपालकों के सामूहिक प्रयासों से एक संगठित आंदोलन का रूप ले चुका है। यह बदलाव केवल दैनिक दूध उत्पादन बढ़ाने की कहानी नहीं है, बल्कि यह वैज्ञानिक पशुपालन, सहकारी निष्ठा और नारी शक्ति के उस अनूठे संगम की मिसाल है, जो गांव-गांव में खुशहाली की नई राहें खोल रहा है।

​लक्ष्य 20 हजार लीटर: आर्थिक मजबूती का नया कैनवास

​धमतरी में वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 10 से 15 हजार लीटर दूध का संग्रहण हो रहा है, जिसे बढ़ाकर 20 हजार लीटर प्रतिदिन पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया गया है। यह आंकड़ा सिर्फ एक संख्या नहीं, बल्कि जिले के 5 से 6 हजार किसान परिवारों और विशेषकर महिला पशुपालकों के जीवन को संवारने का जरिया है। ​दूध की कीमतें 35-40 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति लीटर तक पहुंचाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। समितियों के माध्यम से पारदर्शी व्यवस्था, डिजिटल भुगतान और सीधे बैंक खातों में पैसे पहुंचने से पशुपालकों को उनकी मेहनत का पूरा और समय पर मूल्य मिल रहा है, जिससे डेयरी व्यवसाय के प्रति ग्रामीण समुदाय का भरोसा लगातार गहरा हुआ है।

​सहकारिता की संजीदगी: पुनर्जीवित समितियों से बदला परिदृश्य

​धमतरी के इस डेयरी मॉडल का सबसे मजबूत स्तंभ सहकारिता की भावना है। कुछ समय पहले तक जो दुग्ध समितियां सुप्त या निष्क्रिय पड़ी थीं, उन्हें विशेष अभियान चलाकर पुनर्जीवित किया गया। आज जिले में 68 से अधिक सक्रिय दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियां गतिशील हैं। गांव-गांव में फैले इस नेटवर्क के जरिए दूध का वैज्ञानिक परीक्षण, संग्रहण और व्यवस्थित विपणन संभव हो सका है, जिसने बिचौलियों की भूमिका खत्म कर सीधे किसानों को लाभान्वित किया है।

झारखंड और गुजरात से मिली नई दृष्टि

​धमतरी की श्वेत क्रांति की सबसे खूबसूरत तस्वीर यह है कि इसकी बागडोर महिलाओं के हाथों में है। स्वयं सहायता समूहों और महिला दुग्ध समितियों के जरिए जुड़कर महिलाएं अब केवल घरेलू पशुपालक नहीं, बल्कि सफल डेयरी उद्यमी बन रही हैं।
​ एनडीडीबी के सहयोग से जिले की 43 महिला दुग्ध उत्पादकों को झारखंड के सफल डेयरी मॉडल का अध्ययन कराया गया, जहाँ उन्होंने स्वच्छ दुग्ध उत्पादन और सहकारी प्रबंधन के गुर सीखे।
​ इसी कड़ी में जिले के 19 प्रगतिशील किसानों और समिति पदाधिकारियों को अमूल की जन्मभूमि गुजरात के मेहसाणा (MIT) भेजा गया, ताकि वे उन्नत नस्ल सुधार और आधुनिक प्रोसेसिंग तकनीकों को समझ सकें।
​गुजरात और झारखंड से आधुनिक अनुभव लेकर लौटीं ये महिलाएं और किसान आज धमतरी के अन्य ग्रामीणों के लिए प्रेरणास्रोत और 'मास्टर ट्रेनर' की भूमिका निभा रहे हैं।

​प्रसंस्करण और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर से मिलेगा नया आयाम

​उत्पादन और संग्रहण को मजबूती देने के बाद अब जिले में दूध के मूल्य संवर्धन (Value Addition) पर तेजी से काम हो रहा है। सेमरा-बी, भाठागांव और मुजगहन में चिलिंग प्लांट पहले से कार्यरत हैं, जबकि कुरूद क्षेत्र के लिए नए प्लांट को हरी झंडी मिल चुकी है। जिले के छाती क्षेत्र में एक विशाल और आधुनिक मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट आकार ले रही है। इसके शुरू होते ही स्थानीय स्तर पर दूध की प्रोसेसिंग के साथ-साथ दही, पनीर, मक्खन और पैकेज्ड मिल्क तैयार किया जा सकेगा। इससे न केवल परिवहन लागत घटेगी, बल्कि धमतरी का अपना डेयरी ब्रांड विकसित होगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

​सुदूर गांवों तक फैलाव: समावेशी विकास की ओर धमतरी

​जिला कलेक्टर की सोच के अनुरूप, इस डेयरी क्रांति का दायरा केवल धमतरी या कुरूद तक सीमित नहीं है। इसका विस्तार वनांचल और दूरस्थ क्षेत्रों जैसे नगरी और मगरलोड के गांवों तक किया जा रहा है। उन्नत नस्ल सुधार (कृत्रिम गर्भाधान), नियमित टीकाकरण, संतुलित पशुआहार और पशुधन किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के माध्यम से आर्थिक सहायता देकर अंतिम व्यक्ति तक इस योजना का लाभ पहुंचाया जा रहा है।

​राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने किया योजना का शुभारंभ

5समितियों में 11ड्रोन तैनात, सहकारिता विभाग ने इस वर्ष 50 हजार एकड़ में ड्रोन छिड़काव का रखा लक्ष्य

​उत्कृष्ट कार्य करने वाले 27 कर्मचारी और समिति प्रबंधक सम्मानित, किसानों को बांटे गए KCC चेक

​रायपुर,जुलाई 2026/कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने और किसानों को वैज्ञानिक खेती से जोड़ने की दिशा में बलौदाबाजार-भाटापारा जिले ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। जिले की 5 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों में 'ड्रोन स्प्रेयर' सुविधा की आधिकारिक शुरुआत की गई है। राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने नवीन कृषि उपज मंडी परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम में विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर इस महत्वाकांक्षी पहल का शुभारंभ किया।
​कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षित ड्रोन पायलटों ने बारिश की हल्की फुहारों के बीच ड्रोन स्प्रेयर का सफल प्रदर्शन किया। इस दौरान ड्रोन के माध्यम से उर्वरक और कीटनाशकों के सटीक छिड़काव, समय की बचत, कम लागत और बेहतर कृषि प्रबंधन की तकनीक को प्रदर्शित किया गया।

​समय और लागत की होगी बड़ी बचत: मंत्री श्री टंक राम वर्मा

​समारोह को संबोधित करते हुए राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने कहा कि आज का दिन जिले के कृषि इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होने जैसा है। ड्रोन तकनीक से कम समय में अधिक क्षेत्रफल में छिड़काव संभव होगा, जिससे रसायनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित होगा। साथ ही किसानों के श्रम और लागत में भारी कमी आएगी। खेतों में सीधे जाने की आवश्यकता न होने से फसलों को होने वाले नुकसान से भी बचाव होगा। उन्होंने आगे कहा कि 'ड्रोन दीदी' पहल से ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को कौशल विकास के साथ आजीविका के नए अवसर प्राप्त होंगे।

​रासायनिक खेती छोड़ प्राकृतिक व जैविक खेती अपनाएं किसान

​मंत्री श्री वर्मा ने रासायनिक रसायनों के दुष्प्रभावों पर चिंता जताते हुए किसानों से जैविक व प्राकृतिक खेती की ओर लौटने की अपील की। उन्होंने कहा कि हमारी प्राचीन कृषि परंपराएं ही सतत (सस्टेनेबल) खेती का आधार हैं। जैविक खेती से भूमि की उर्वरा शक्ति बनी रहती है और खाद्यान्न की गुणवत्ता में सुधार होता है।

​इन 5 समितियों से मिलेगी ड्रोन की सुविधा

​जिले की बलौदाबाजार, कसडोल, बया, गिर्रा (पलारी) और दामाखेड़ा (सिमगा) सहकारी समितियों में फिलहाल 11 ड्रोन उपलब्ध कराए गए हैं। चालू वर्ष में सहकारिता विभाग ने ड्रोन के माध्यम से लगभग 50 हजार एकड़ क्षेत्र में छिड़काव का लक्ष्य तय किया है।
किसानों को अपनी संबंधित समिति में जाकर छिड़काव की तिथि और रकबा (क्षेत्रफल) बताकर पर्ची कटवानी होगी। तय तिथि पर ड्रोन पायलट के साथ मशीन किसान के खेत पर पहुंचेगी। किसान को केवल खाद या कीटनाशक उपलब्ध कराना होगा। इसके लिए प्रति एकड़ एक निर्धारित शुल्क देय होगा।

समितियां बनीं 'मिनी बैंक', ऑनलाइन हुए सारे आंकड़े

​ ​कार्यक्रम में कलेक्टर ने बताया कि जिले की सभी समितियां अब पूर्णतः कंप्यूटरीकृत हो चुकी हैं। ये समितियां 'सीएससी' (CSC) और मिनी बैंक के रूप में कार्य कर रही हैं, जहां माइक्रो एटीएम की सुविधा भी उपलब्ध है। अब किसानों को 10-20 हजार रुपये के आहरण के लिए बड़े बैंकों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।

​उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारी व प्रबंधक सम्मानित

​खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में धान खरीदी में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 17 समिति प्रबंधकों और ई-पैक्स (e-PACS) में सराहनीय कार्य करने वाले 10 कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इसके अलावा कार्यक्रम में 9 किसानों को केसीसी (KCC) चेक तथा 2 कृषकों को लर्निंग लाइसेंस का वितरण भी किया गया।
​इस अवसर पर नगरपालिका अध्यक्ष, पूर्व विधायक प्रमोद शर्मा, जिला पंचायत उपाध्यक्ष, जिला पंचायत सदस्य जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष,सहित सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं बड़ी संख्या में कृषक उपस्थित रहे।

रायपुर, 21 जुलाई 2026/राज्यपाल श्री रमेन डेका से आज यहां लोकभवन में राज्य महिला आयोग की नव नियुक्त अध्यक्ष डॉ. ममता साहू ने सौजन्य भेंट की

रायपुर, 21 जुलाई 2026/राज्यपाल श्री रमेन डेका से आज यहां लोकभवन में प्रमुख लोकायुक्त श्री इंदर सिंह उबोवेजा ने भेंट की। उन्होंने राज्यपाल को छत्तीसगढ़ लोक आयोग के गतिविधियों की जानकारी दी और आयोग का वर्ष 2025-26 का वार्षिक प्रतिवेदन सौंपा।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ लोक आयोग के सचिव श्री दीपक अग्रवाल, उप सचिव सुश्री चित्रलेखा सोनवानी, कानूनी सलाहकार श्री अजीत कुमार राजभानु एवं आयोग के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की

रायपुर, 21 जुलाई 2026/ मुख्य सचिव श्री विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में राज्य शासन के समस्त विभागों के भार सादक सचिवों की बैठक ली। बैठक में विभागों के महत्वपूर्ण कार्यों एवं योजनाओं के क्रियान्वयन एवं प्रगति की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने कहा है कि सेवा निवृत्त होने वाले अधिकारी-कर्मचारियों के विभिन्न प्रकरणों के निराकरण की प्रक्रिया दो वर्ष से ही प्रारंभ कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए है कि सेवा निवृत्त होने वाले अधिकारी कर्मचारियों की सूची विभागावार अद्यतन कर ली जाए।

मुख्य सचिव ने विभागीय सचिवों को उनके विभाग की योजनाओं के क्रियान्वयन एवं प्रगति की लगातार मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए है। बैठक में ई-ऑफिस, आधार बेस अटेंडेंस, लोक सेवा गारंटी, सूचना के अधिकार, सुघ्घर छत्तीसगढ़, नियद नेल्लानार योजना, पीएम प्रगति पोर्टल, ई-प्रगति, डी रेगुलेशन ई-गजट, सेवा सेतु, ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं, पीएम सूर्य घर बिजली सहित अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं की प्रगति के बारे में अधिकारियों से जानकारी ली गई। मुख्य सचिव ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि आई-गॉट के तहत विभागवार चिन्हित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की मॉनिटरिंग की जाये। अधिकारी-कर्मचारियों को आई-गॉट के तहत विभाग की आवश्यकतानुसार प्रशिक्षण दिलाने कहा है। मुख्य सचिव ने कहा है कि सभी विभागों की योजनाओं एवं सेवाओं को ऑनलाइन किया जाए।

बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री मनोज कुमार पिंगुआ, गृह एवं जेल विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह, आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, विधि एवं विधायी विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती सुषमा सावंत, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमख सचिव श्रीमती शहला निगार, मुख्यमंत्री एवं खनिज विभाग के सचिव श्री पी.दयानंद, मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल, सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस.भारतीदासन, ऊर्जा विभाग के सचिव श्री सारांश मित्तर, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री भीम सिंह, गृह विभाग के सचिव श्री हिमशिखर गुप्ता, सामान्य प्रशासन एवं वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव श्री रजत कुमार, परिवहन विभाग के सचिव श्री एस.प्रकाश, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की सचिव सुश्री आर.शंगीता, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग के सचिव श्री बसवराजु एस., राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुल हक, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के सचिव श्री भुवनेश यादव, सुशासन एवं अभिसरण विभाग के संयुक्त सचिव श्री मयंक अग्रवाल सहित राज्य शासन के अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद थे।


रायपुर, 21 जुलाई 2026/मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में 22 जुलाई 2026 को पूर्वान्ह 11.30 बजे से मंत्रिपरिषद की बैठक आयोजित हैं। यह बैठक मंत्रालय महानदी भवन में मंत्रिपरिषद कक्ष में होगी।

कोसापालन ने बदली वनांचल के ग्रामीणों की तकदीर

​रायपुर,21 जुलाई 2026/ छत्तीसगढ़ के वनांचल जिले नारायणपुर में रेशम विकास एवं विस्तार योजनाएं ग्रामीणों के जीवन में एक स्वर्णिम बदलाव की नई कहानी लिख रही हैं। जिला प्रशासन और कलेक्टर के कुशल मार्गदर्शन में संचालित मलबरी और टसर रेशम योजनाओं ने न केवल स्थानीय स्तर पर आजीविका के नए द्वार खोले हैं, बल्कि महिलाओं और युवाओं को अपने ही गांव में सम्मानजनक रोजगार देकर आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है।
​आज नारायणपुर में रेशम उत्पादन केवल कृषि-सहायक गतिविधि नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भरता का एक मजबूत स्तंभ बन चुका है।

मलबरी रेशम: स्व-सहायता समूहों के लिए आय का स्थायी जरिया

​नारायणपुर और कुसरतराई में स्थित दो मलबरी केंद्रों में लगभग 22.5 एकड़ क्षेत्र में पौधारोपण विकसित किया गया है। यहाँ महिला स्व-सहायता समूहों के सदस्य उन्नत तकनीकों से रेशम कृमिपालन कर रहे हैं। वर्ष 2025-26 के लिए निर्धारित 4,400 किलोग्राम ककून उत्पादन लक्ष्य के मुकाबले 4,180 किलोग्राम का सफल उत्पादन हासिल किया गया। इस गतिविधि से जुड़े 47 हितग्राहियों के बैंक खातों में 7.72 लाख रूपए से अधिक की राशि सीधे अंतरित की गई। कृमिपालन के साथ-साथ पौधारोपण संरक्षण और निराई-गुड़ाई जैसे कार्यों ने ग्रामीणों को पूरे साल रोजगार से जोड़े रखा।

टसर रेशम: लक्ष्य से परे जाकर रचा नया कीर्तिमान

​जिले के चार प्रमुख टसर केंद्रों—नारायणपुर, कुसरतराई, गोटाजुन्हरी और एडका के 62 हेक्टेयर क्षेत्र में संचालित टसर कृमिपालन ने इस वर्ष सफलता के नए आयाम छुए हैं। वर्ष 2025-26 में 8.52 लाख कोसाफल उत्पादन के लक्ष्य के मुकाबले 9.73 लाख से अधिक कोसाफल का बम्पर उत्पादन दर्ज किया गया। इस उल्लेखनीय उपलब्धि से जुड़े 64 हितग्राहियों को लगभग 36.97 लाख रूपए की सीधी आय अर्जित हुई।

प्रशिक्षण, पारदर्शिता और विश्वास: सफलता के तीन स्तंभ

​रेशम विभाग द्वारा ग्रामीणों को सिर्फ संसाधन ही नहीं, बल्कि सही समय पर तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है।कृमियों को बीमारियों से बचाने और गुणवत्तापूर्ण ककून तैयार करने के लिए सतत तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।उत्पादन का सीधा और पारदर्शी भुगतान सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में किया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों का भरोसा मजबूत हुआ है। इसी तरह स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने इस पूरी प्रक्रिया में अग्रणी भूमिका निभाकर अपने परिवारों की आर्थिक स्थिति को संवारा है।
​ नारायणपुर का यह मॉडल यह साबित करता है कि यदि स्थानीय संसाधनों का सही उपयोग, प्रशासनिक मार्गदर्शन और ग्रामीणों की मेहनत एक साथ मिल जाए, तो सुदूर वनांचल क्षेत्रों में भी विकास और आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिखी जा सकती है।​आने वाले समय में इन योजनाओं का विस्तार न केवल अधिक से अधिक ग्रामीण परिवारों को गरीबी से बाहर निकालेगा, बल्कि नारायणपुर को राज्य के रेशम मानचित्र पर एक विशिष्ट और गौरवशाली पहचान भी दिलाएगा।

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