newscreation

newscreation

 

"मध्यप्रदेश निरसन विधेयक, 2026" का अनुमोदन
"मध्यप्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विधेयक, 2026" का अनुमोदन
"मध्यप्रदेश राजमार्ग (संशोधन) विधेयक, 2026" का अनुमोदन
मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक, 2026 का अनुमोदन
मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 का अनुमोदन
मध्यप्रदेश धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय विधेयक 2026 का अनुमोदन
मध्यप्रदेश कोड ऑन एम्पावरिंग वर्कस्पेसेज, 2026 (मध्यप्रदेश श्रम शक्ति संहिता 2026 का अनुमोदन
मध्यप्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस विधेयक, 2026 का अनुमोदन
प्रदेश में 73 स्वास्थ्य संस्थाओं के उन्नयन के लिए 898.96 करोड़ रूपये की स्वीकृति
मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में गौंड वंश के वैभवशाली दुर्ग जगदीशपुर में मंत्रि-परिषद की बैठक में लिए गए ऐतिहासिक निर्णय

रायगढ़ में स्व-सहायता समूह की दीदियों ने तैयार कीं अनोखी बीज राखियां

भाई की कलाई पर प्यार, धरती मां को उपहार की थीम पर बिहान की अभिनव पहल

रायपुर, 19 जुलाई 2026/ रक्षाबंधन पर केवल भाई-बहन का प्रेम ही नहीं, बल्कि प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण का संदेश भी दिया जा सकता है। पेड़ों को राखी बांधकर उन्हें अपनी रक्षा का वचन देना और मिट्टी से बने इको-फ्रेंडली पौधे वाली राखियों का इस्तेमाल पर्यावरण को हरा-भरा रखने में मदद करता है।

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में स्व-सहायता समूहों की दीदियां इस बार रक्षाबंधन के पर्व को प्रकृति संरक्षण से जोड़ने की एक अनूठी मिसाल पेश कर रही हैं। कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में जिला पंचायत रायगढ़ और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के सहयोग से जिले भर में पर्यावरण-अनुकूल बीज राखियां तैयार की जा रही हैं।

फेंकने पर अंकुरित होंगे देसी बीज

इन राखियों की सबसे विशेष बात यह है कि इन्हें धान, मक्का, भुट्टा, सेमी, करेला और बरबटी जैसे विभिन्न देसी बीजों से बेहद आकर्षक ढंग से बनाया जा रहा है। यदि त्योहार के बाद यह राखी मिट्टी में मिल जाती है या बाहर फेंक दी जाती है, तो इसमें लगे बीज अंकुरित होकर पौधे का रूप ले लेंगे। इससे भाई-बहन के अटूट प्रेम के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

गांव-गांव में दिख रहा उत्साह

जिले के सभी सातों विकासखंडों में इस अभियान को लेकर महिलाओं में भारी उत्साह है। धरमजयगढ़ के ग्राम दुलियामुड़ा-कोयलार में कृष्णा स्व-सहायता समूह की सक्रिय महिला कविता राठिया ने आकर्षक बीज राखियां तैयार कर मिसाल पेश की है। रायगढ़ के बैसपाली, जुनवानी, लोइंग, गोपालपुर, संबलपुरी, लैलूंगा, तमनार के लिबरा गांव (जननी समूह), घरघोड़ा के बड़ेगुमड़ा (गायत्री समूह) और पुसौर के पुटकापुरी क्लस्टर सहित जिले भर की कृषि सखियां और महिलाएं इस कार्य में जुटी हुई हैं।

सातों विकासखंडों से चुनी जाएगी सर्वश्रेष्ठ बीज राखी

रायगढ़ जिले के सभी सातों विकासखंडों में इस रचनात्मकता और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कल यानी 20 जुलाई को जिले के सभी सात विकासखंडों से एक-एक सर्वश्रेष्ठ बीज राखी का चयन किया जाएगा। चयन का आधार राखी की आकर्षक डिज़ाइन, देसी बीजों का उपयोग और पर्यावरण संरक्षण का संदेश जैसी खूबियों को बनाया जाएगा।

जिले के शीर्ष अधिकारियों को राखी बांधेंगी विजेता दीदियां

प्रतियोगिता में चुनी जाने वाली सातों विकासखंडों की विजेता दीदियों को 27 जुलाई को एक विशेष गरिमामय समारोह में सम्मानित किया जाएगा। इस अवसर पर ये दीदियां स्वयं कलेक्टर सहित जिले के शीर्ष अधिकारियों को अपने हाथों से बनाई हुई बीज राखी बांधेंगी। बिहान की दीदियों द्वारा शुरू किया गया यह अभियान अब केवल एक प्रतियोगिता न रहकर प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का एक बड़ा जनआंदोलन बनता जा रहा है।

हिंसा का रास्ता छोड़ आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़े युवा

कृषि विज्ञान केंद्र सुकमा के 15 दिवसीय कौशल प्रशिक्षण से आत्मसमर्पित युवाओं को मिला आजीविका का नया आधार

रायपुर, 19 जुलाई 2026/ कभी हाथों में हथियार उठाने वाले 25 आत्मसमर्पित युवाओं ने अब खेती, पशुपालन और कृषि आधारित स्वरोजगार को अपने भविष्य का आधार बनाने का संकल्प लिया है। सुकमा जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में कृषि विज्ञान केंद्र सुकमा और कृषि विभाग द्वारा आयोजित 15 दिवसीय विशेष कौशल विकास प्रशिक्षण ने इन युवाओं को आत्मनिर्भरता की नई राह दिखाई है।

आत्मसमर्पित युवाओं को स्थायी आजीविका से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है

22 जून से 14 जुलाई 2026 तक आयोजित इस प्रशिक्षण में युवाओं को प्राकृतिक खेती, आधुनिक कृषि तकनीकों और कृषि आधारित व्यवसायों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य आत्मसमर्पित युवाओं को स्थायी आजीविका से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उन्हें समाज की मुख्यधारा में सम्मान के साथ आगे बढ़ने का अवसर देना था।

प्रशिक्षण में सीखी प्राकृतिक खेती और आधुनिक कृषि तकनीकें

प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने युवाओं को बीजामृत, जीवामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र, हांडी दवा, थ्री-जी दवा और मछली टॉनिक तैयार करने की जानकारी दी। इसके साथ ही नाडेप खाद, वर्मी कम्पोस्ट, हरी खाद और प्राकृतिक खेती की विभिन्न तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। युवाओं ने फलदार पौधों का रोपण, नीलहरित काई उत्पादन, कृषि यंत्रों का उपयोग, सब्जी नर्सरी तैयार करना, धान की कतारबद्ध बुवाई और गर्मी में गहरी जुताई जैसी तकनीकें भी सीखीं।

कृषि के साथ पशुपालन और अन्य व्यवसायों का प्रशिक्षण

प्रशिक्षण में युवाओं को बकरी पालन, मुर्गी पालन, ऑयस्टर मशरूम उत्पादन और मत्स्य पालन जैसे कृषि आधारित व्यवसायों की जानकारी दी गई। इन गतिविधियों से युवा अपनी रुचि और संसाधनों के अनुसार स्वरोजगार शुरू कर सकते हैं।

अध्ययन भ्रमण से मिला प्रत्यक्ष अनुभव

प्रशिक्षणार्थियों को दंतेवाड़ा जिले का अध्ययन भ्रमण भी कराया गया। मैलावाड़ा में उन्होंने धान की एसआरआई पद्धति और भूमगादी में प्राकृतिक खेती की उन्नत तकनीकों को प्रत्यक्ष रूप से देखा। इससे प्रशिक्षणार्थियों को सीखी गई तकनीकों को खेतों में लागू करने का व्यावहारिक अनुभव मिला।

अब खेती बनेगी नई पहचान का आधार

प्रशिक्षण के समापन अवसर पर उप संचालक कृषि श्री पी.आर. बघेल, सहायक संचालक कृषि श्री सुधीर कुजूर और कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख श्री एच.एस. तोमर सहित वैज्ञानिकों ने प्रशिक्षणार्थियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि खेती, पशुपालन और कृषि आधारित व्यवसाय ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से आत्मसमर्पित युवा अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ समाज की मुख्यधारा में सम्मान के साथ आगे बढ़ सकते हैं।

कौशल का उपयोग आजीविका के साधन विकसित करने में करेंगे

प्रशिक्षणार्थियों ने कहा कि उन्हें खेती और स्वरोजगार की नई तकनीकों की जानकारी मिली है। अब वे सीखे गए कौशल का उपयोग कर अपने गांव में आजीविका के साधन विकसित करेंगे। उन्होंने आत्मनिर्भर बनने और सम्मानजनक जीवन जीने का संकल्प लिया।

आत्मसमर्पित युवाओं के जीवन में बदलाव की एक नई शुरुआत

यह प्रशिक्षण आत्मसमर्पित युवाओं के जीवन में बदलाव की एक नई शुरुआत है। हथियार छोड़कर अब ये युवा खेती और स्वरोजगार के माध्यम से अपने भविष्य का निर्माण कर रहे हैं।

‘क्षितिज’ कोचिंग के 32 विद्यार्थियों ने NEET-UG 2026 में किया शानदार प्रदर्शन

13 विद्यार्थियों के शासकीय मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश की मजबूत संभावना

रायपुर, 19 जुलाई 2026/ सुकमा जिले के दूरस्थ और ग्रामीण अंचलों के विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा और मेहनत से शिक्षा के क्षेत्र में नई मिसाल कायम की है। जिला प्रशासन द्वारा संचालित निःशुल्क ‘क्षितिज’ JEE-NEET कोचिंग सेंटर के 32 विद्यार्थियों ने NEET-UG 2026 की क्वालिफाइंग कटऑफ पार कर जिले का नाम रोशन किया है। इनमें से 13 विद्यार्थियों के शासकीय मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस में प्रवेश लेने की प्रबल संभावना है।

आदिवासी और ग्रामीण परिवार के विद्यार्थियों को निःशुल्क कोचिंग से मिला सपनों को पंख

सुकमा के आदिवासी और ग्रामीण परिवारों से आने वाले इन विद्यार्थियों के लिए राष्ट्रीय स्तर की मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी आसान नहीं थी। ऐसे में जिला प्रशासन द्वारा संचालित ‘क्षितिज’ कोचिंग सेंटर उनके लिए नई उम्मीद बनकर सामने आया।
यहां विद्यार्थियों को विशेषज्ञ शिक्षकों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण और निःशुल्क कोचिंग, नियमित मार्गदर्शन और परीक्षा की बेहतर तैयारी का अवसर मिला। विद्यार्थियों ने कड़ी मेहनत और शिक्षकों के मार्गदर्शन से NEET-UG जैसी कठिन परीक्षा में सफलता हासिल की। इस उपलब्धि के लिए वन एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप ने बधाई देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की और शुभकामनाएं दी है।

प्रशासन के मार्गदर्शन में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा

यह उपलब्धि जिला प्रशासन की शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे निरंतर प्रयासों का परिणाम है। कलेक्टर श्री अमित कुमार के कुशल नेतृत्व तथा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मुकुंद ठाकुर और जिला शिक्षा अधिकारी श्री जी. आर. मण्डावी के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार किया गया।
प्रशिक्षण प्रदाता संस्था ‘कैंप एकेडमी’ के अनुभवी शिक्षकों सूरज सिंह, सोनम सिंह, निधि चौहान और राजनीश पटेल ने विद्यार्थियों को नियमित कक्षाओं, विषयवार मार्गदर्शन और परीक्षा की रणनीति के माध्यम से तैयार किया।

सफलता से बढ़ा विद्यार्थियों का आत्मविश्वास

‘क्षितिज’ कोचिंग सेंटर के विद्यार्थियों की इस सफलता से जिले के अन्य विद्यार्थियों में भी उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर उत्साह बढ़ा है। दूरस्थ अंचलों के विद्यार्थियों ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी क्षेत्र या संसाधन की मोहताज नहीं होती। यदि सही मार्गदर्शन, बेहतर अवसर और निरंतर मेहनत मिले, तो सुदूर गांवों के विद्यार्थी भी राष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल कर सकते हैं।

युवा वर्ग में आत्मविश्वास और बेहतर भविष्य की ओर बढ़ते कदम

जिला प्रशासन ने NEET-UG 2026 में सफल सभी विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों और शिक्षकों को बधाई दी है तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। ‘क्षितिज’ कोचिंग सेंटर की यह उपलब्धि सुकमा में शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे सकारात्मक बदलाव की प्रेरणादायक कहानी है। कभी कठिन परिस्थितियों से जूझने वाले इस जिले के विद्यार्थी आज डॉक्टर बनने का सपना देख रहे हैं और उसे पूरा करने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहे हैं। यह सफलता सुकमा के युवाओं के नए आत्मविश्वास और बेहतर भविष्य की ओर बढ़ते कदमों का प्रतीक है।

10 हजार 909 रुपये प्रति मानक बोरा तक मिली रिकॉर्ड द

करीब 4 हजार संगा्रहक परिवारों को मिलेगा बोनस का लाभ

रायपुर, 19 जुलाई 2026/ छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले की गीदम प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समिति ने तेंदूपत्ता विक्रय में 38 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़कर इतिहास रच दिया है। 16 जुलाई 2026 को आयोजित ऑनलाइन निविदा में गीदम समिति के तेंदूपत्ते को 10,909 प्रति मानक बोरा तक का ऐतिहासिक मूल्य प्राप्त हुआ है।

दंतेवाड़ा जिले की प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समिति गीदम ने तेंदूपत्ता विक्रय में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा आयोजित ऑनलाइन निविदा में समिति का तेंदूपत्ता 10 हजार 609 रुपये और 10 हजार 909 रुपये प्रति मानक बोरा की रिकॉर्ड दर पर बिका। यह गीदम समिति के 38 वर्षों के इतिहास में तेंदूपत्ता विक्रय की सबसे अधिक कीमत है।

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे वनाश्रित परिवारों की आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता बताया है। उन्होंने कहा कि पारदर्शी ऑनलाइन निविदा प्रक्रिया और गुणवत्तापूर्ण कार्यप्रणाली का लाभ अब सीधे तेंदूपत्ता संग्रहकों तक पहुंच रहा है।

करीब 4 हजार संग्राहक परिवारों को मिलेगा बोनस का लाभ

वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि तेंदूपत्ता रिकॉर्ड दर पर बिकने से समिति को अतिरिक्त आय प्राप्त होगी। इसका लाभ बोनस के रूप में समिति से जुड़े करीब 4 हजार तेंदूपत्ता संग्रहक परिवारों को मिलेगा। इससे वनाश्रित परिवारों की आय बढ़ेगी और उनकी आर्थिक स्थिति और मजबूत होगी।

डिजिटल व्यवस्था से भुगतान में पारदर्शिता

राज्य सरकार द्वारा तेंदूपत्ता संग्रहण, बोनस, छात्रवृत्ति, बीमा और अन्य लघु वनोपज योजनाओं में डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से संग्रहकों के बैंक खातों में राशि सीधे जमा की जा रही है। इससे भुगतान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और समयबद्ध हुई है।

सामूहिक प्रयासों से मिली ऐतिहासिक सफलता

वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने इस उपलब्धि के लिए मुख्य वन संरक्षक, दंतेवाड़ा वनमंडलाधिकारी, जिला लघु वनोपज सहकारी संघ, समिति के पदाधिकारियों, फड़ मुंशियों और सभी अधिकारी-कर्मचारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सभी के सामूहिक प्रयासों से गीदम समिति ने यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार वनाश्रित परिवारों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए लघु वनोपज के माध्यम से उनकी आय बढ़ाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। आने वाले समय में भी तेंदूपत्ता और अन्य लघु वनोपज से जुड़े परिवारों को बेहतर आर्थिक लाभ दिलाने के प्रयास जारी रहेंगे।

नवप्रवेशी बच्चों का होगा आत्मीय स्वागत, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा और स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव सहित अनेक जनप्रतिनिधि रहेंगे मौजूद

रायपुर, 19 जुलाई 2026/ स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए राज्य स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव का आयोजन 20 जुलाई को दुर्ग जिले के पाटन विकासखंड स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, जामगांव (एम) में किया जाएगा। दोपहर 12 बजे से आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय होंगे। उप मुख्यमंत्री एवं दुर्ग जिले के प्रभारी मंत्री श्री विजय शर्मा कार्यक्रम में अतिविशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव करेंगे।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय और अन्य अतिथि पहली बार विद्यालय में प्रवेश लेने वाले बच्चों का तिलक लगाकर तथा मुंह मीठा कराकर आत्मीय स्वागत करेंगे। शाला प्रवेशोत्सव का उद्देश्य बच्चों में शिक्षा के प्रति उत्साह बढ़ाना, विद्यालयों में शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करना और शिक्षा के प्रति समाज में सकारात्मक वातावरण तैयार करना है।

समारोह में विशिष्ट अतिथियों के रूप में दुर्ग लोकसभा क्षेत्र के सांसद श्री विजय बघेल, पाटन विधायक एवं पूर्व मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल, दुर्ग ग्रामीण विधायक श्री ललित चन्द्राकर, अहिवारा विधायक श्री डोमन लाल कोर्सेवाड़ा, वैशाली नगर विधायक श्री रिकेश सेन, भिलाई नगर विधायक श्री देवेन्द्र यादव, साजा विधायक श्री ईश्वर साहू, छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष श्री राकेश पाण्डेय तथा तेलघानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष श्री जितेन्द्र साहू भी उपस्थित रहेंगे।

इसके अलावा जिला पंचायत दुर्ग की अध्यक्ष श्रीमती सरस्वती बंजारे, जनपद पंचायत पाटन की अध्यक्ष श्रीमती कीर्ति नायक, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती नीलम चन्द्राकर, जनपद सदस्य श्रीमती संतोषी ठाकुर तथा ग्राम पंचायत जामगांव (एम) की सरपंच श्रीमती तुलसी सिन्हा सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि भी कार्यक्रम में शामिल होंगे।

स्कूल शिक्षा विभाग ने बताया कि राज्य स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। विभाग ने अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों और गणमान्य नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में कार्यक्रम में शामिल होकर बच्चों का उत्साहवर्धन करने की अपील की है।

12 दिनों में शुरू हुई प्रमनाथ मिर्रे की दिव्यांग पेंशन, परिवार ने जताया आभार

रायपुर, 19 जुलाई 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित सीएम हेल्पलाइन प्रदेशवासियों की समस्याओं के त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी समाधान का सशक्त माध्यम बनकर उभरी है। विशेष रूप से दिव्यांगजनों और जरूरतमंद नागरिकों के लिए यह व्यवस्था राहत, विश्वास और सुशासन का प्रतीक बन रही है। हेल्पलाइन के माध्यम से लंबे समय से लंबित मामलों का भी समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जा रहा है।

जशपुर जिले के पत्थलगांव विकासखंड के ग्राम पंडरीपानी निवासी प्रमनाथ मिर्रे का मामला इसका एक प्रेरक उदाहरण है। दिव्यांग पेंशन प्राप्त करने के लिए लगातार प्रयास करने के बावजूद उनकी पेंशन स्वीकृत नहीं हो पा रही थी, जिससे उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।

जब अन्य प्रयास सफल नहीं हुए, तब उनके पुत्र प्रताप मिर्रे ने सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत प्राप्त होते ही संबंधित विभाग ने प्रकरण को प्राथमिकता देते हुए आवश्यक कार्रवाई शुरू की। सभी आवश्यक प्रक्रियाएं समयबद्ध रूप से पूरी की गईं और मात्र 12 दिनों के भीतर शिकायत का निराकरण कर प्रमनाथ मिर्रे की दिव्यांग पेंशन प्रारंभ कर दी गई।

पेंशन शुरू होने के बाद प्रमनाथ मिर्रे और उनके परिवार ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय तथा जिला प्रशासन के प्रति हार्दिक आभार जताया। उन्होंने कहा कि जिस कार्य के लिए वे लंबे समय से प्रयासरत थे, वह सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से कुछ ही दिनों में पूरा हो गया।

परिवार का कहना है कि सीएम हेल्पलाइन दिव्यांगों, वरिष्ठ नागरिकों और जरूरतमंद लोगों के लिए अत्यंत उपयोगी एवं भरोसेमंद व्यवस्था बनकर सामने आई है। इससे आम नागरिकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए एक प्रभावी मंच मिला है, जहां शिकायतों का त्वरित और संवेदनशील तरीके से निराकरण किया जाता है।

प्रमनाथ मिर्रे की यह सफलता की कहानी मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सुशासन, जवाबदेही और जनसेवा के प्रति शासन की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ समय पर पहुंच रहा है, जिससे आम नागरिकों का शासन के प्रति विश्वास और अधिक मजबूत हो रहा है।

लंबे समय से लंबित जाति प्रमाण पत्र की समस्या का हुआ त्वरित समाधान

मुख्यमंत्री की सुशासन और संवेदनशील प्रशासन की प्रतिबद्धता हुई साकार

रायपुर, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा स्थापित पारदर्शी, जवाबदेह और जनकेंद्रित प्रशासनिक व्यवस्था का सकारात्मक प्रभाव प्रदेशभर में दिखाई दे रहा है। आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से संचालित सीएम हेल्पलाइन 1076 आज लोगों के लिए भरोसे का सबसे प्रभावी माध्यम बनकर उभरी है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के पेंड्रा विकासखंड के ग्राम पतगवा के निवासी श्री सेवक राम की सफलता की कहानी इसी सुशासन का प्रेरणादायक उदाहरण है। श्री सेवक राम अपने बच्चों के जाति एवं आय प्रमाण पत्र बनवाने के लिए लंबे समय से संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगा रहे थे। आवेदन करने के बावजूद विभिन्न कारणों से उनके बच्चों के प्रमाण पत्र जारी नहीं हो पा रहे थे। इससे बच्चों को शैक्षणिक सुविधाओं, शासकीय योजनाओं तथा अन्य आवश्यक कार्यों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। लगातार प्रयासों के बाद भी समस्या का समाधान नहीं होने से परिवार चिंतित था।
आखिरकार श्री सेवक राम ने अपनी समस्या सीएम हेल्पलाइन 1076 में दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही संबंधित विभाग ने गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ तत्काल कार्रवाई की। परिणामस्वरूप मात्र 24 घंटे के भीतर उनके बच्चों का जाति प्रमाण पत्र स्वीकृत कर जारी कर दिया गया। वर्षों से लंबित समस्या का इतने कम समय में समाधान होने से पूरे परिवार में खुशी का माहौल है।
अपनी समस्या के त्वरित निराकरण से भावुक हुए श्री सेवक राम ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय तथा जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनकी समस्या का इतना शीघ्र समाधान हो जाएगा। उन्होंने कहा कि पहले कई प्रयासों के बावजूद काम नहीं हो पाया था, लेकिन सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज करने के बाद प्रशासन ने गंभीरता से कार्रवाई करते हुए समयबद्ध राहत प्रदान की।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। सीएम हेल्पलाइन 1076 केवल शिकायत दर्ज करने का मंच नहीं, बल्कि आम लोगों की उम्मीदों को पूरा करने वाला एक प्रभावी सुशासन तंत्र बन चुका है, जो प्रशासन और जनता के बीच विश्वास को लगातार मजबूत कर रहा है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने ‘भावना दीदी की साइंस पाठशाला’ को दिखाई हरी झंडी

ग्रामीण विद्यार्थियों तक पहुँचेगी एआई, रोबोटिक्स, ड्रोन, 3डी प्रिंटिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों की शिक्षा

एक वर्ष में 5,000 से अधिक विद्यार्थियों को मिलेगा व्यावहारिक प्रशिक्षण: विज्ञान और नवाचार को मिलेगी नई उड़ान

रायपुर 15 जुलाई 2026/ छत्तीसगढ़ में ग्रामीण विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीकों से जोड़ने और विज्ञान आधारित शिक्षा को नई दिशा देने की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत हुई। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने आज विधानसभा परिसर से ‘भावना दीदी की साइंस पाठशाला’ के अंतर्गत संचालित निःशुल्क मोबाइल इमर्जिंग टेक्नोलॉजी लैब को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह अत्याधुनिक मोबाइल लैब पंडरिया विधानसभा क्षेत्र के विद्यालयों तक पहुँचकर विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोबोटिक्स, ड्रोन, 3डी प्रिंटिंग, कोडिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), एयरोमॉडलिंग तथा ऑगमेंटेड एवं वर्चुअल रियलिटी (AR/VR) जैसी आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करेगी।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए आवश्यक है कि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे भी आधुनिक विज्ञान और तकनीक की मुख्यधारा से जुड़ें। उन्होंने कहा कि ‘भावना दीदी की साइंस पाठशाला’ केवल एक मोबाइल लैब नहीं, बल्कि ग्रामीण विद्यार्थियों के सपनों को नई उड़ान देने वाली अभिनव पहल है। यह बच्चों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार, आत्मविश्वास और तकनीकी दक्षता विकसित करने का प्रभावी माध्यम बनेगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज पूरी दुनिया कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, ड्रोन, डेटा साइंस और डिजिटल तकनीकों की ओर तेजी से आगे बढ़ रही है। ऐसे समय में यह आवश्यक है कि ग्रामीण अंचलों के विद्यार्थियों को भी इन उभरती हुई तकनीकों का ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हो। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि अवसरों में किसी प्रकार की असमानता न रहे और गाँव का बच्चा भी भविष्य की तकनीकों में उतना ही सक्षम बने जितना किसी महानगर का विद्यार्थी होता है।

उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति का मूल उद्देश्य भी विद्यार्थियों में कौशल, नवाचार, प्रयोगधर्मिता और रचनात्मक सोच का विकास करना है। यह मोबाइल लैब उसी दिशा में एक सार्थक प्रयास है, जो बच्चों को केवल तकनीक का उपयोग करना ही नहीं सिखाएगी, बल्कि उन्हें नई तकनीकों के निर्माण और नवाचार की दिशा में भी प्रेरित करेगी।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि आज का युग विज्ञान और तकनीक का युग है तथा बच्चों को समय के साथ नई तकनीकों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ‘भावना दीदी की साइंस पाठशाला’ जैसी अभिनव पहल ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को भी वही अवसर उपलब्ध कराएगी, जो बड़े शहरों के विद्यार्थियों को मिलते हैं। इससे बच्चों में विज्ञान के प्रति जिज्ञासा बढ़ेगी, नवाचार की सोच विकसित होगी और वे आधुनिक तकनीकों को समझने के साथ उनका व्यावहारिक उपयोग भी सीख सकेंगे।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि मोबाइल लैब के माध्यम से विद्यार्थी केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि स्वयं ड्रोन उड़ाने, रोबोट संचालित करने, 3डी मॉडल तैयार करने और आधुनिक उपकरणों पर कार्य करने का अनुभव प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि यह पहल ग्रामीण प्रतिभाओं को नई दिशा देने के साथ-साथ भविष्य के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों की मजबूत नींव तैयार करेगी।

उन्होंने पंडरिया विधायक श्रीमती भावना बोहरा की सराहना करते हुए कहा कि वे अपने विधानसभा क्षेत्र में शिक्षा, नवाचार और युवा प्रतिभाओं के विकास के लिए निरंतर नए प्रयास कर रही हैं। यह मोबाइल साइंस लैब भी उनकी दूरदर्शी सोच और शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का परिणाम है, जो आने वाले समय में हजारों विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाएगी।

मोबाइल लैब की तकनीकी सुविधाओं का किया अवलोकन

कार्यक्रम के दौरान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने मोबाइल इमर्जिंग टेक्नोलॉजी लैब का अवलोकन किया। प्रशिक्षकों ने उन्हें लैब में उपलब्ध विभिन्न उपकरणों, प्रशिक्षण मॉड्यूल और शिक्षण प्रणाली की विस्तार से जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने विशेष रुचि लेते हुए एआई, रोबोटिक्स, ड्रोन और अन्य तकनीकी उपकरणों का स्वयं निरीक्षण किया तथा यह जाना कि विद्यार्थी किस प्रकार इन तकनीकों को व्यवहारिक रूप से सीखेंगे। उन्होंने इसे ग्रामीण प्रतिभाओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने वाला अभिनव और प्रेरणादायी प्रयास बताया। उन्होंने लैब में प्रदर्शित विभिन्न तकनीकी मॉड्यूल का अवलोकन करते हुए प्रशिक्षकों से प्रशिक्षण प्रक्रिया की जानकारी ली और बच्चों को मिलने वाले व्यावहारिक अनुभव की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रयोग आधारित शिक्षा विद्यार्थियों में सीखने की रुचि और आत्मविश्वास दोनों को बढ़ाती है।

एक वर्ष में पाँच हजार से अधिक विद्यार्थियों तक पहुँचेगी तकनीकी शिक्षा

उल्लेखनीय है कि यह मोबाइल इमर्जिंग टेक्नोलॉजी लैब पंडरिया विधानसभा क्षेत्र के शासकीय विद्यालयों तथा सरस्वती शिशु मंदिरों में जाकर प्रशिक्षण प्रदान करेगी। पाँच अनुभवी प्रशिक्षकों की टीम प्रत्येक विद्यालय में तीन से पाँच दिनों की कार्यशाला आयोजित करेगी, जिसमें विद्यार्थियों को AI, रोबोटिक्स, ड्रोन एवं एयरोमॉडलिंग, 3डी प्रिंटिंग, कोडिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स तथा AR/VR जैसी आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र भी प्रदान किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत पहले वर्ष में पाँच हजार से अधिक विद्यार्थियों तक तकनीकी शिक्षा पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रथम चरण में कक्षा 10वीं, 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी, जबकि आगामी चरणों में अन्य कक्षाओं के विद्यार्थियों को भी इसका लाभ मिलेगा।

इस मोबाइल लैब की सबसे बड़ी विशेषता इसकी हैंड्स-ऑन लर्निंग पद्धति है। विद्यार्थी स्वयं ड्रोन उड़ाना, रोबोट संचालित करना, कोडिंग करना, 3डी मॉडल तैयार करना तथा AI और AR/VR जैसी तकनीकों का वास्तविक अनुभव प्राप्त करेंगे। इससे उनमें तकनीकी समझ, रचनात्मकता, समस्या समाधान क्षमता और नवाचार की भावना का विकास होगा।

कार्यक्रम के दौरान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने मोबाइल लैब में स्थापित फीडबैक बोर्ड पर अपने विचार भी लिखे और इस अभिनव पहल की सफलता के लिए शुभकामनाएँ दीं।

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायक श्रीमती भावना बोहरा, विधायक श्री सुशांत शुक्ला, विधायक श्री योगेश्वर राजू सिन्हा, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ भारत के सबसे समृद्ध, मौलिक और पर्यटन संभावनाओं से भरपूर गंतव्यों में से एक, हर पर्यटक की यात्रा सूची में होना चाहिए यह राज्य - श्रीमती मीनाक्षी शर्मा

14 दिवसीय पर्यटन यात्रा में विरासत, प्रकृति, जनजातीय संस्कृति, आध्यात्मिक धरोहर और रोमांचक पर्यटन स्थलों का किया विस्तृत भ्रमण

रायपुर, 15 जुलाई 2026। भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की पूर्व महानिदेशक श्रीमती मीनाक्षी शर्मा ने पहली बार पर्यटक के रूप में छत्तीसगढ़ का विस्तृत भ्रमण कर प्रदेश के पर्यटन वैभव, प्राकृतिक सौंदर्य, जनजातीय संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहर और आत्मीय आतिथ्य की मुक्त कंठ से सराहना की। अपनी 14 दिवसीय यात्रा के दौरान उन्होंने प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों का अवलोकन किया और कहा कि छत्तीसगढ़ ऐसा पर्यटन गंतव्य है, जहां प्रकृति, संस्कृति, इतिहास, आध्यात्मिकता और रोमांच का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यह प्रदेश देश के प्रत्येक पर्यटक की यात्रा सूची में अवश्य होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि लंबे समय तक भारत के पर्यटन क्षेत्र में कार्य करने के बावजूद उन्हें पहली बार पर्यटक के रूप में छत्तीसगढ़ आने का अवसर मिला और यह यात्रा उनके लिए अत्यंत सुखद एवं अविस्मरणीय रही। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने उन्हें सकारात्मक रूप से आश्चर्यचकित किया। यहां की प्राकृतिक संपदा, घने वन, विशाल जलप्रपात, प्राचीन मंदिर, जनजातीय संस्कृति, हस्तशिल्प और स्थानीय लोगों का आत्मीय व्यवहार इसे देश के सबसे विशिष्ट पर्यटन राज्यों में स्थान दिलाता है।

श्रीमती शर्मा ने अपनी यात्रा की शुरुआत रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन एवं जनजातीय संग्रहालय से की, जहां उन्होंने प्रदेश की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को निकट से देखा। इसके बाद उन्होंने कबीरधाम जिले के प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर, मड़वा महल, छेरकी महल तथा आसपास के वन क्षेत्र का भ्रमण किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक परिवेश में स्थित भोरमदेव परिसर भारतीय स्थापत्य कला और सांस्कृतिक विरासत का अनुपम उदाहरण है।

यात्रा के अगले चरण में उन्होंने छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे अमरकंटक पहुंचकर मां नर्मदा उद्गम स्थल, सायंकालीन आरती, कलचुरीकालीन मंदिर समूह, दूधधारा एवं कपिलधारा जलप्रपात, राजमेरगढ़, कबीर चबूतरा तथा जैन मंदिर का भ्रमण किया। उन्होंने इस क्षेत्र को आध्यात्मिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन का अद्वितीय संगम बताया। वापसी के दौरान उन्होंने रतनपुर स्थित मां महामाया शक्तिपीठ में दर्शन कर प्रदेश की समृद्ध धार्मिक परंपराओं का अनुभव प्राप्त किया।

बस्तर प्रवास के दौरान श्रीमती शर्मा ने विश्वप्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात, टाटामारी घाटी, कोंडागांव शिल्प ग्राम, नारायणपाल मंदिर, मेंदरी घुमर एवं तामड़ा घुमर जलप्रपात का भ्रमण किया तथा चित्रकोट में नौकायन का आनंद भी लिया। उन्होंने कहा कि बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता और जनजातीय कला विश्व पर्यटन मानचित्र पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाने की क्षमता रखती है।

उन्होंने दंतेवाड़ा स्थित मां दंतेश्वरी शक्तिपीठ, प्राचीन मंदिरों के नगर बारसूर, जगदलपुर पुरातत्व संग्रहालय, बस्तर राजमहल तथा स्थानीय हस्तशिल्प केंद्रों का भी अवलोकन किया। उन्होंने बस्तर की ढोकरा कला, बेलमेटल शिल्प, बांस एवं लकड़ी की कलाकृतियों को स्थानीय संस्कृति की जीवंत पहचान बताते हुए कहा कि यहां का हस्तशिल्प विश्व स्तर पर विशेष पहचान बनाने की क्षमता रखता है।

कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में उन्होंने तीरथगढ़ जलप्रपात, कुटुमसर गुफाएं, धुड़मारास, बांस राफ्टिंग तथा केचला क्षेत्र का भ्रमण किया। उन्होंने कहा कि प्रकृति और साहसिक पर्यटन के प्रेमियों के लिए यह क्षेत्र किसी स्वर्ग से कम नहीं है। अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे ओडिशा के जैपुर, कोलाब बांध, जगन्नाथ मंदिर, कोरापुट कॉफी प्लांटेशन, देओमाली पर्वत, दुदमा जलप्रपात, बोंडा जनजातीय बाजार तथा कोटपाड़ बुनकर ग्राम का भी भ्रमण किया, जिससे बस्तर और कोरापुट क्षेत्र की साझा सांस्कृतिक विरासत को निकट से समझने का अवसर मिला।

Page 4 of 6445

Ads

R.O.NO. 13895/62 Advertisement Carousel

MP info RSS Feed

फेसबुक