ईश्वर दुबे
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दिसंबर 2018 के बाद पहली बार जी-20 समिट में ट्रम्प और पुतिन की मुलाकात हुई
डेमोक्रेट्स ने ट्रम्प की जीत सुनिश्चित करने के लिए अमेरिकी चुनाव में रूस के दखल का आरोप लगाया था
आरोप पर सीनियर काउंसलर रॉबर्ट मुलर की रिपोर्ट आने के बाद ट्रम्प ने पुतिन से फोन पर बात भी की थी
ओसाका. जी-20 समिट के दौरान शुक्रवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात हुई। मुलाकात के बाद दोनों नेता मीडिया से बात कर रहे थे। इस दौरान ट्रम्प से रूस के अमेरिकी चुनाव में दखल पर सवाल किया गया। इस पर ट्रम्प ने मजाकिया लहजे में पुतिन से कहा- अमेरिका के चुनाव में दखल ना देना।
पुतिन के साथ मेरे रिश्ते बहुत अच्छे: ट्रम्प
ट्रम्प ने समिट से इतर पुतिन से मुलाकात भी की। ट्रम्प ने कहा- पुतिन के साथ मेरे रिश्ते बहुत अच्छे हैं। इस रिश्ते से कई सकारात्मक चीजें सामने आने वाली हैं।
ट्रम्प ने बताया- हमारे पास चर्चा के लिए कई मुद्दे हैं। इसमें व्यापार और सुरक्षा से संबंधित मामले हैं। यह बेहद सकारात्मक है। उनके साथ मेरी बातचीत बहुत अच्छी रही। मगर मैंने उनसे क्या कहा? इससे आपको कोई मतलब नहीं होना चाहिए।
डेमोक्रेट्स ने ट्रम्प की जीत सुनिश्चित करने के लिए मॉस्को पर अमेरिकी चुनाव में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया था। इसे लेकर कई बार प्रदर्शन भी हुए थे।
सीनियर काउंसलर रॉबर्ट मुलर ने इस पर 448 पेज की रिपोर्ट तैयार की थी। इसमें कहा गया कि रूसी सेना के अधिकारियों ने डेमोक्रेट उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन के चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की थी। रिपोर्ट के मुताबिक- मुलर की इस रिपोर्ट के प्रकाशित होने के बाद ट्रम्प ने पुतिन को फोन किया था। दिसंबर 2018 में अर्जेंटीना में हुई जी-20 समिट के दौरान दोनों के बीच बातचीत होनी थी। मगर ट्रम्प ने मना कर दिया था।
अमेरिका के विशेष अधिवक्ता रॉबर्ट मुलर 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में रूस की दखल की जांच कर रहे थे
मुलर की रिपोर्ट में खुलासा- ट्रम्प ने रूसी दखल की जांच को नियंत्रित करने की कोशिश की थी
वॉशिंगटन. अमेरिका के विशेष अधिवक्ता रॉबर्ट मुलर 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में रूसी दखल की अपनी रिपोर्ट पर गवाही देने के लिए तैयार हो गए हैं। वह 17 जुलाई को हाउस ज्यूडिशियरी एंड इंटेलिजेंस कमेटी के सामने पेश होने से पहले जनता के सामने अपनी बात रखेंगे। कमेटी के चेयरमैन एडम शिफ ने बुधवार को ट्वीट कर यह जानकारी दी।
मुलर ने तैयार की थी 448 पेज की रिपोर्ट
एडम ने ट्वीट किया, ‘रूस ने ट्रम्प को जिताने के लिए अमेरिका के लोकतंत्र पर हमला किया। ट्रम्प ने रूस की मदद का इस्तेमाल भी किया। जैसा कि मुलर ने कहा उन्हें (ट्रम्प) हर अमेरिकी की चिंता करनी चाहिए और अब यह हर अमेरिकी को सीधे मुलर से सुनने को मिलेगा।’
448 पेज की रिपोर्ट में 74 वर्षीय मुलर ने कहा- ''रूसी सेना के अधिकारियों ने डेमोक्रेट उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन के चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की थी।'' 18 अप्रैल को यह रिपोर्ट कानून मंत्रालय को सौंप दी गई थी। हालांकि, रिपोर्ट के आखिर में उन्होंने लिखा कि रूसी दखल के मामले में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिल सके हैं।
मुलर की रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि ट्रम्प ने रूसी दखल की जांच को नियंत्रित करने की कोशिश की। उन्होंने मुलर को जांच से हटवाने की भी कोशिश की थी। मुलर न्याय विभाग में पदस्थ थे। वे 2016 के अमेरिकी चुनाव में रूसी दखल के मामले की जांच कर रहे थे। हालांकि उन्होंने मई के अंत में इस पद से इस्तीफा दे दिया।
ट्रम्प ने कहा था- मुझे सत्ता से हटाने की साजिश
रूसी दखल की जांच को ट्रम्प ने गैर-जरूरी करार देते हुए कहा था कि यह उन्हें सत्ता से बेदखल करने की साजिश है। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता सारा सैंडर्स ने कहा कि रिपोर्ट से साफ है कि चुनाव के दौरान कोई साजिश नहीं हुई। कानून मंत्रालय ने भी माना है कि जांच को प्रभावित करने की कोशिश नहीं की गई।
डेमोक्रेट्स ने ट्रम्प के खिलाफ महाभियोग की मांग की थी
डेमोक्रेट इस मामले में ट्रम्प के खिलाफ महाभियोग लाने की बात कह रहे हैं। हालांकि, इस पर डेमोक्रेट सांसद एकमत नजर नहीं आ रहे। नेन्सी पेलोसी संसद में डेमोक्रेट्स का नेतृत्व करती हैं। वे चुनाव से पहले महाभियोग प्रस्ताव लाने में खतरा मान रही हैं। उधर, डेमोक्रेट सांसद जेरी नडलेर भी महाभियोग का जिक्र करने से बचते दिखे। वे संसद की कानूनी समिति के अध्यक्ष हैं।
संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सोमवार को अमेरिका और ईरान के बीच मौजूद तनाव को बातचीत कर खत्म करने की अपील की। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा नए प्रतिबंध लगाए जाने के बाद हालांकि ईरान ने किसी भी तरह की बातचीत से इनकार कर दिया है। कुवैत द्वारा तैयार की गई एक सर्वसम्मत प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार परिषद ने हाल ही में तेल के टैंकरों पर हुए हमलों की निंदा की और इसे विश्व की ऊर्जा आपूर्ति और अंतर्राष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए खतरा बताया। परिषद दो घंटे चली बैठक के बाद इस बात पर राजी हुई कि ईरान को अलग-थलग नहीं किया जाएगा और साथ ही स्पष्ट रूप से यह कहा कि सभी पक्षों को एक बेहद आशंकित सैन्य टकराव से पीछे हटना चाहिए। वहीं परिषद ने कहा कि क्षेत्र में मौजूद सभी संबंधित पक्ष और सभी देश ‘‘ अत्याधिक संयम बरतें और तनाव को कम करने के लिए कदम उठाएं।’’ ट्रम्प के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अल खमैनी और आठ ईरानी कमांडरों को निशाना बनाते हुए ईरान पर नए प्रतिबंध लगाने के कुछ ही घंटे बाद विश्व शक्तियों ने अपना यह संयुक्त बयान जारी किया।
लंदन। ब्रिटेन के कंजर्वेटिव नेतृत्व के उम्मीदवार बोरिस जॉनसन ने अपने निजी जीवन पर पूछे जा रहे सवालों का जवाब देने से एक बार फिर इनकार कर दिया है जबकि महिला मित्र के साथ उनके झगड़े की खबरों को लेकर सार्वजनिक जांच का सामना करने की मांग जोर-शोर से हो रही है। इस झगड़े के चलते उनके घर पुलिस भी कथित तौर पर पहुंच गई थी।
जॉनसन से मंगलवार को एलबीसी रेडियो पर बोलने के दौरान एक तस्वीर दिखा कर सवाल पूछा गया। इसमें उन्हें और उनकी महिला मित्र कैरी साइमंड्स को ससेक्स क्षेत्र में दिखाया है। इस तस्वीर को लेकर अटकलें हैं कि यह उनके अभियान द्वारा जारी की गई है। जॉनसन ने कहा, “मुश्किल यह है कि जैसी ही आप कुछ कहेंगे तो निश्चित तौर पर आप लोगों, अपने करीबियों, अपने परिवार को गलत तरीके से सार्वजनिक मंच पर ले आएंगे।”
यह पूछे जाने पर कि यह तस्वीर कहां से आई और कब ली गई थी, उन्होंने कहा, “मैं जो करना चाहता हूं उससे इतर हम बाकी चीजों पर जितना समय खर्च करेंगे वह समय की उतनी ही बड़ी बर्बादी होगी।” बोरिस ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में सबसे आगे चल रहे हैं।
ईरान ने अमेरिकी जासूसी ड्रोन को मार गिराया था, जिसकी वजह से ट्रम्प ने प्रतिबंध लगाए
ईरान ने कहा- अमेरिका के यह प्रतिबंध हमारे प्रति उसके शत्रुतापूर्ण रवैया को दिखाते हैं
राष्ट्रपति ट्रम्प बोले- हम ईरान को कभी परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे
वॉशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को ईरान पर और कड़े प्रतिबंध लगाए। अब ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनी और उनकी सेना के आठ शीर्ष सैन्य कमांडर अमेरिका में वित्तीय सुविधाओं का लाभ नहीं ले पाएंगे। ईरान द्वारा बीते बुधवार को अमेरिकी जासूसी ड्रोन मार गिराए जाने के बाद ट्रम्प ने यह फैसला लिया। इससे पहले ट्रम्प ने शुक्रवार को ईरान पर हमला करने के भी आदेश दिए थे। लेकिन, 10 मिनट पहले आदेश वापस ले लिया था।
ट्रम्प ने सोमवार को प्रतिबंध लगाने वाले कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए। इस दौरान उन्होंने कहा कि हम ईरान को कभी परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे। हमने अब तक इस मामले में काफी संयम दिखाया, लेकिन आगे ईरान पर दबाव बनाए रखेंगे। जब ट्रम्प से पूछा गया कि क्या यह कदम ईरान के हमले का जवाब है, इस पर उन्होंने हां में जवाब दिया और कहा कि यह तो होना ही था। मैं कुछ ऐसे ईरानियों को जानता हूं, जो न्यूयॉर्क में रहते हैं और अच्छे लोग हैं।
इस पर ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्बास मौसवी ने कहा, ‘‘प्रतिबंध लगाने से अमेरिका के साथ राजनयिक संबंध हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति शांति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी सभी तंत्रों को नष्ट करने में लगे हैं।’’
अमेरिका ने कई बार ईरान पर साइबर अटैक किए
एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने पिछले दिनों ईरान के मिसाइल कंट्रोल सिस्टम और जासूसी नेटवर्क पर कई बार साइबर हमले किए। इससे पहले ट्रम्प ने ट्वीट कर कहा था- ‘‘ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते! ओबामा की खतरनाक योजना के तहत वे बहुत ही कम सालों में न्यूक्लियर के रास्ते पर आ गए। अब बगैर जांच के यह स्वीकार्य नहीं होगा। हम सोमवार से ईरान पर बहुत सारे प्रतिबंध लगाने जा रहे हैं। हम उस दिन का इंतजार कर रहे हैं, जब ईरान से प्रतिबंध हट जाएंगे और वह फिर से एक समृद्ध राष्ट्र बन जाएगा।’’
ईरान ने कहा- कभी अमेरिका के आगे नहीं झुकेंगे
संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत माजिद तख्त रवांची ने सोमवार को कहा कि अमेरिका जब तक ईरान को प्रतिबंधों के दबाव की धमकी देता रहेगा, ईरान उसके साथ वार्ता नहीं करेगा। उन्होंने कहा, ‘‘हम दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं। अमेरिका ने एक बार फिर ईरान पर दबाव डाला है। उसने हम पर और प्रतिबंध लगाए हैं। जब तक उसकी यह रणनीति रहेगी तब तक ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत नहीं हो सकती।”
‘ईरान पर प्रतिबंध उसकी शत्रुता की ओर इशारा करता है’
रवांची ने कहा कि अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए नए प्रतिबंध पश्चिमी एशियाई देश के प्रति उसकी शत्रुतापूर्ण रवैये को दर्शाता है। अमेरिका का यह फैसला ईरान के लोगों और वहां के नेताओं के प्रति उसकी शत्रुता का प्रतीक है। अमेरिका अंतरराष्ट्रीय कानून-व्यवस्था का सम्मान नहीं करता है।
तेहरान। नए आर्थिक प्रतिबंध लगाने की अमेरिका की तैयारी के बीच ईरान ने सोमवार को कहा कि नयी पाबंदी से उसपर कोई असर नहीं पड़ेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्बास मूसावी ने तेहरान में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि हमें नहीं पता कि (नए प्रतिबंध) क्या हैं और वे किसे लक्ष्य बनाना चाहते हैं। उसका कोई असर नहीं पड़ेगा।उन्होंने कहा कि क्या कोई प्रतिबंध बचा है जिसे हमारे देश पर अमेरिका ने हाल में या पिछले 40 साल में नहीं लगाया है। मास्को से मिली रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध की आलोचना करते हुए नए आर्थिक प्रतिबंध को ‘‘अवैध’’ बताया। रूस के राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि हम इन प्रतिबंधों को अवैध मानते हैं।
बैंकॉक। फिलीपीन ने शनिवार को कहा कि हो सकता कि उनके पूर्व विदेश मंत्री को उनके राजनयिक पासपोर्ट की वजह से हांगकांग में प्रवेश देने से इनकार किया गया हो। गौरतलब है कि हाल के हफ्तों में बड़े पैमाने पर चीन विरोधी प्रदर्शनों से घिरे हांगकांग ने शुक्रवार को अल्बर्ट डेल रोसारियो को देश में प्रवेश करने से रोक दिया। रोसारियो ने दक्षिण चीन सागर में चीनी सरकार के दबदबे वाले व्यवहार के खिलाफ कानूनी कदम उठाए थे। डेल रोसारियो 2011 से 2016 तक विदेश मंत्री थे। उन्होंने राजनयिक पासपोर्ट पर प्रवेश करने की कोशिश की, लेकिन हवाई अड्डे पर तीन घंटे से अधिक समय तक उन्हें रोककर रखा गया और फिर उन्हें एक विमान से वापस भेज दिया गया। उनके वकील ने कहा कि अधिकारियों ने उन्हें लौटाने का कोई कारण नहीं बताया। फिलीपीन के एक सरकारी प्रवक्ता मार्टिन एंडानार ने लेकिन कहा कि पासपोर्ट के उपयोग के साथ समस्या हो सकती है। बैंकॉक में दक्षिण पूर्व एशिया के नेताओं के शिखर सम्मेलन के मौके पर एंडानार ने शनिवार को संवाददाताओं से कहा, ‘‘यदि आप एक राजनयिक पासपोर्ट का उपयोग करते हैं, तो इसपर फिलीपीन सरकार और आप जिस देश में जा रहे हैं उसके के बीच एक आधिकारिक सहमति होनी चाहिए।’’
सरकार ने इन सेमी-ऑटोमैटिक गन को सरेंडर करने के लिए 6 महीने का समय दिया
गन को सरेंडर नहीं करने वालों पर कार्रवाई होगी, 5 साल तक की जेल का प्रावधान
वेलिंगटन. न्यूजीलैंड सरकार ने गुरुवार को गन बायबैक स्कीम लागू करते हुए खतरनाक सेमी-ऑटोमैटिक गन पर प्रतिबंध लगा दिया। सरकार ने लोगों से छह महीने में सेमी-ऑटोमेटिक गन सरेंडर करने के लिए कहा है। इसके बदले उन्हें उसकी कीमत भी दी जाएगी। ऐसा नहीं करने पर पांच साल तक की कैद हो सकती है। सरकार ने क्राइस्टचर्च में 15 मार्च को दो मस्जिदों में हुई फायरिंग से सबक लेते हुए नियमों में बदलाव किया है। इस हमले में 51 लोगों की मौत हुई थी।
प्रधानमंत्री जेसिंडा आर्डर्न ने 15 मार्च को हमले में मारे गए मृतकों के परिजनों से मुलाकात की थी। इस दौरान आर्डर्न ने कहा था कि देश में गन लॉ को और भी सख्त किए जाने की जरूरत है। उन्होंने लोगों से कहा था कि वे तीन महीने के अंदर हथियार संबंधी नियम सख्त करेंगी।
मस्जिद हमले में इस्तेमाल हुई थीं सेमी-ऑटोमेटिक राइफल्स
ऑस्ट्रेलियाई मूल के ब्रेंटन टैरेंट ने क्राइस्टचर्च की अल-नूर और लिनवुड मस्जिदों में नमाज के दौरान फायरिंग की थी। उसने पांच तरह के हथियारों का इस्तेमाल किया था। इसमें दो बंदूकें मिलिस्ट्री स्टाइल सेमी-ऑटोमेटिक राइफल्स (एमएसएसए) थीं। सरकार ने इस तरह के सभी हथियारों पर प्रतिबंध लगा दिया है।
स्कीम के लिए 994 करोड़ रुपए मंजूर
सरकार गन का मॉडल और स्थिति को देखते हुए कीमत देगी। इस योजना के लिए सरकार ने 143 मिलियन डॉलर (994 करोड़ रुपए) मंजूर किए हैं। पुलिस प्रशासन के मुताबिक, वर्तमान में 14,300 एमएसएसए राइफल और 12 लाख बंदूकें रजिस्टर्ड हैं। पुलिस ने कहा कि लोगों को हथियार सरेंडर करने के लिए वे देशभर में ‘‘संग्रह कार्यक्रम’’ चलाएंगे।
फोरेंसिक डॉक्टर ने रिपोर्ट में कहा, मौत के समय बुजुर्ग महिला का वजन केवल 29 किलो था
दंपती मां के साथ मारपीट करते थे, उनकी आंखों की पुतली तक निकाल ली थी
दुबई. एक भारतीय व्यक्ति ने पत्नी के साथ मिलकर अपनी मां को इतना प्रताड़ित किया कि उनकी मौत हो गई। फोरेंसिक रिपोर्ट में कहा गया है कि मौत के समय बुजुर्ग महिला का वजन केवल 29 किलो था। दंपती ने उनकी दाई आंख की पुतली तक निकाल ली थी। फिलहाल पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है। कोर्ट की सुनवाई 3 जुलाई तक टल गई है। तब तक उन्हें जेल में ही रहना होगा।
पुलिस को पड़ोसी ने सूचना दी
पुलिस को वृद्धा को प्रताड़ित करने की सूचना दंपती के ही अपार्टमेंट में रहने वाली एक 54 वर्षीय महिला ने दी। दंपती के खिलाफ अल कुसायस पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया है। हालांकि 29 वर्षीय भारतीय ने आरोपों को खारिज किया है।
पड़ोसी का कहना है कि भारतीय व्यक्ति की नौकरीपेशा पत्नी उनके फ्लैट में अपनी बेटी को छोड़कर जाया करती थी। वह उनसे कहती थी कि उसकी सास भारत से आई हैं, लेकिन वे उनकी बेटी का ख्याल नहीं रखतीं।
पहली बार बालकनी में वृद्धा को पड़ा देखा
पड़ोसी ने यह भी बताया- एक दिन बुजुर्ग महिला को फ्लैट की बालकनी में पड़ा देखा। उनके शरीर पर कपड़े तक नहीं थे और वे कई जगह से जली हुई थीं। इसकी खबर सुरक्षा गार्डों को दी। इसके बाद एंबुलेंस को बुलाया गया।
अस्पतालकर्मी जब वृद्धा को लेकर जा रहे थे, तो वह बुरी तरह से कराह रही थीं, क्योंकि उनका शरीर जगह-जगह से जला हुआ था। एक महिला ने बताया कि दंपती मां के साथ एंबुलेंस में भी नहीं गए। अस्पतालकर्मी के कहने पर बाद में बेटा अस्पताल गया।
डॉक्टर की रिपोर्ट के मुताबिक- वृद्धा के शरीर की कई हड्डियां टूटी हुई थीं। उन्हें अलग-अलग चीजों से उन्हें पीटा गया था। शरीर के कई अंदरूनी हिस्सों में खून जम गया था। उन्हें लगातार भूखा भी रखा गया।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि बुजुर्ग महिला को प्रताड़ना जुलाई-अक्टूबर 2018 तक प्रताड़ना दी गई थी। उनकी मौत 31 अक्टूबर को हुई थी। बेटे का दावा है कि उसकी मां ने अपने ऊपर गर्म पानी उडे़ल लिया था।
अमेरिका में 6.30 लाख भारतवंशी अवैध तौर पर रह रहे, इन सभी का वीजा खत्म हो चुका है
2010 के बाद से अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे भारतीयों की संख्या में 78% की बढ़ोतरी
2001 में दक्षिण एशियाई मूल के वोटरों की संख्या 20 लाख थी, 2016 में ये बढ़कर 50 लाख पहुंची
वॉशिंगटन. अमेरिका में भारतवंशियों की तादाद 2010-17 के दौरान 38% तक बढ़ी है। साउथ एशियन अमेरिकन लीडिंग टुगेदर (साल्ट) की रिपोर्ट में कहा गया है कि 6 लाख 30 हजार भारतवंशी यहां अवैध तौर पर रह रहे हैं। इन सभी लोगों का वीजा खत्म हो चुका है। 2010 के बाद से अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे भारतीयों की संख्या में 78% की बढ़ोतरी हुई है।
अमेरिका में दक्षिण एशियाई देशों के करीब 50 लाख लोग
रिपोर्ट कहती है कि दक्षिण एशियाई देशों के करीब 50 लाख लोग वैध तौर पर अमेरिका में रहते हैं। 2010-17 के दौरान अमेरिका में नेपालियों की संख्या में सबसे ज्यादा 206.6% का इजाफा हुआ है। 2010-17 के दौरान भूटानी 38%, पाकिस्तानी 33%, बांग्लादेशी 26% और श्रीलंका के लोगों की तादाद 15% तक बढ़ गई।
2020 चुनाव में इन लोगों की भूमिका अहम
करंट पापुलेशन सर्वे के मुताबिक- 2016 के अमेरिकी चुनाव में एशियाई देशों के 49.9% लोगों ने मतदान किया था। 2001 में जहां दक्षिण एशियाई मूल के वोटरों की संख्या 20 लाख थी, वहीं 2016 में ये बढ़कर 50 लाख तक पहुंच चुके हैं। इनमें से 15 लाख भारतीय हैं। पाक मूल के वोटरों की संख्या 2 लाख 22 हजार 252 है जबकि बांग्लादेशी 69,825 हैं।
दक्षिण एशियाई देशों के 10% लोग बेहद गरीब
रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण एशियाई देशों के 10% लोग (4,72000) बेहद गरीबी में जीवनयापन करने को मजबूर हैं। ऐसे लोगों में पाकिस्तानी 15.8%, नेपाली 23.9%, बांग्लादेशी 24.2% और भूटानियों की तादाद 33.3% है। बांग्लादेश और नेपाल के लोग अमेरिका में सबसे ज्यादा खराब हालत में हैं।
साल्ट का कहना है कि अमेरिका में शरण लेने वाले दक्षिण एशियाई देशों के लोगों की तादाद पिछले 10 सालों के दौरान ज्यादा बढ़ी है। यूएस इमीग्रेशन, कस्टम एनफोर्समेंट (आईसीई) महकमा इन लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी करता रहता है। 2017 के बाद से एशियाई देशों के 3013 लोगों को बंदी बनाया गया। अक्टूबर 2014 से अप्रैल 2018 के दौरान बार्डर पुलिस ने एशियाई मूल के 17,119 लोगों को हिरासत में लिया।
रिपोर्ट कहती है कि 1997 के बाद से एच-1बी वीजा धारकों के 17 लाख आश्रितों को एच-4 वीजा जारी किया गया। 2017 में ही 1 लाख 36 हजार लोगों को एच-4 वीजा मिला। इनमें से 86% दक्षिण एशियाई देशों में रहने वाले लोग हैं।
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के शीर्ष भ्रष्टाचार विरोधी निकाय ने फर्जी बैंक खातों के जरिए धनशोधन से जुड़े एक मामले में पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की बहन को गिरफ्तार किया है। जरदारी की पार्टी पीपीपी ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि पार्टी सरकार की ऐसी ज्यादती के सामने नहीं झुकेगी। राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एनएबी) के अधिकारियों ने फरयाल तालपुर (61) को इस्लामाबाद में गिरफ्तार किया। इससे पहले सोमवार को उनके भाई और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के सह-अध्यक्ष जरदारी को गिरफ्तार किया गया था। इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने फर्जी बैंकों खातों से कथित रूप से धनशोधन के एक बहुचर्चित मामले में सोमवार को दो नेताओं की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। अदालत ने ब्यूरो को जरदारी और तालपुर को गिरफ्तार करने की अनुमति दे दी। उनके पास देश के उच्चतम न्यायालय में अपील करने का विकल्प है। जियो न्यूज ने ब्यूरो के अधिकारियों के हवाले से कहा कि तालपुर को उनके इस्लामाबाद आवास में ही हिरासत में रखा जाएगा। उनके आवास को उप-जेल घोषित किया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्यूरो 15 जून को तालपुर को अदालत में पेश कर सकता है। इस बीच पीपीपी के अध्यक्ष और जरदारी के पुत्र बिलावल भुट्ठो ने मीडिया से कहा कि उनकी पार्टी सरकार की ज्यादती के सामने नहीं झुकेगी। उन्होंने कहा, ‘‘इस सरकार ने तालपुर को गिरफ्तार कर महिलाओं के सम्मान का अनादर किया है। लेकिन हम ऐसी रणनीति के सामने नहीं झुकने वाले हैं।
हाशमी ने दावा किया, “हम इंतजार कर रहे सिख यात्रियों को लाने के लिए पाकिस्तानी ट्रेन को सीमा पार करने देने के संबंध में सीमा पर भारतीय अधिकारियों के साथ संपर्क में रहे लेकिन उन्होंने साफ इनकार कर दिया।"
बिश्केक में मोदी द्विपक्षी वार्ताओं के बाद किर्गिस्तान के राष्ट्रपति जीनबेकोव के साथ बिजनेस फोरम में हिस्सा लेंगे
समिट में पाक प्रधानमंत्री इमरान खान भी मौजूद रहेंगे, मोदी के उनसे मिलने की योजना नहीं
नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शंघाई सहयोग सम्मेलन (एससीओ) में हिस्सा लेने के लिए गुरुवार को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंच गए। समिट में मोदी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय वार्ता में शामिल होंगे। समिट में पाक प्रधानमंत्री इमरान खान भी शामिल होंगे। हालांकि, मोदी और इमरान की मुलाकात नहीं होगी। इमरान पहले ही मोदी को पत्र लिखकर बातचीत की मांग कर चुके हैं।
प्रधानमंत्री ओमान, ईरान और मध्य एशिया के रास्ते बिश्केक पहुंचे हैं। एक दिन पहले ही विदेश मंत्रालय ने साफ किया था कि किर्गिस्तान जाने के लिए मोदी पाक का रास्ता नहीं अपनाएंगे।
वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर रहेगा जोर: मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा था कि शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में वैश्विक सुरक्षा स्थिति और आर्थिक सहयोग पर मुख्य जोर रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि किर्गिस्तान की उनकी यात्रा एससीओ के सदस्य देशों के साथ भारत के संबंधों को मजबूत करेगी। मोदी एससीओ सम्मेलन के बाद किर्गिस्तान के राष्ट्रपति के आमंत्रण पर 14 तारीख को वहां की आधिकारिक द्विपक्षीय यात्रा पर रहेंगे।
मोदी ने कहा कि हाल ही में भारत-किर्गिस्तान के बीच रक्षा, सुरक्षा, व्यापार और निवेश सहित कई द्विपक्षीय क्षेत्रों में समझौते हुए। इससे दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत हुए। मोदी यहां किर्गिज राष्ट्रपति जीनबेकोव के साथ भारत-किर्गिज बिजनेस फोरम को भी संबोधित करेंगे।
2001 में बना था शंघाई सहयोग संगठन
एससीओ एक राजनीतिक और सुरक्षा समूह है। इसका हेडक्वार्टर बीजिंग में है। यह 2001 में बनाया गया था। चीन, रूस, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान और किर्गिस्तान इसके स्थाई सदस्य हैं। यह संगठन खासतौर पर सदस्य देशों के बीच सैन्य और आर्थिक सहयोग के लिए बनाया गया है। इसमें खुफिया जानकारियों को साझा करना और मध्य एशिया में आतंकवाद के खिलाफ अभियान चलाना शामिल है। भारत और पाकिस्तान इस संगठन से 2017 स्थाई सदस्य के तौर पर जुड़े थे।