ईश्वर दुबे
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वाशिंगटन। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिका की घरेलू राजनीतिक की तरफ भारत के निर्दलीय रुख को दोहराते हुए सोमवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ह्यूस्टन रैली में ‘‘अबकी बार ट्रम्प सरकार’’ का जो नारा दिया था, वह महज उसका संदर्भ था जो डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने राष्ट्रपति चुनाव प्रचार अभियान के दौरान भारतीय-अमेरिकी समुदाय का प्यार हासिल करने के लिए कहा था। वाशिंगटन की तीन दिवसीय यात्रा पर आए जयशंकर ने इस बात को सिरे से नकार दिया कि प्रधानमंत्री ने 2020 के चुनाव अभियान के लिए ट्रम्प की उम्मीदवारी का समर्थन करने के लिए ऐसा कहा था।
पाकिस्तान की हालत दिन पर दिन खस्ता होती जा रही है। आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के पास लगता है अब विदेश-यात्रा के लिए भी फंड्स नहीं बचा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और उनके प्रतिनिधिमंडल को शुक्रवार को उस समय न्यूयॉर्क लौटना पड़ा जब सऊदी सरकार द्वारा इमरान खान दिये गये विशेष विमान में तकनीकी खराबी आ गई जिसके बाद उन्हें न्यूयॉर्क के कैनेडी अंतरराष्ट्रीय से एक आम पैसेंजर की तरह कमर्शियल फ्लाइट से पाकिस्तान के लिए रवाना होना पड़ा।
तकनीशियन विमान में आई समस्या को सुलझाने में लगे थे लेकिन उसमें काफी समय लग रहा था , इस दौरान इमरान खान को कैनेडी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर इंतजार भी करना पड़ा। लंबे इंतजार के बाद यह पता चला कि विमान को सही होने में और समय लगेगे विमान पूरी तरह शनिवार सुबह तक ठीक हो पाएगा। पाकिस्तान की राजदूत मलीहा लोधी इमरान को वापस रूसवेल्ट होटल ले गईं, जहां वह अपनी सात दिवसीय यात्रा के दौरान ठहरे हुए थे। सुबह तक वहा ठहरने के बाद भी सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की तरफ से दिया गया खटारा प्लेन ठीक नहीं हो सका जिसके बाद जिसके बाद इमरान खान ने एक आम आदमी की तरह कमर्शियल फ्लाइट ली।
आपको बता दें कि न्यूज इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार संयुक्त राष्ट्र महासभा के 74वें सत्र में भाग लेने के बाद अमेरिका की अपनी सात दिवसीय यात्रा पूरी करने के बाद खान को पाकिस्तान लौटना था। कैनेडी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरने के कुछ मिनटों बाद ही प्रधानमंत्री खान के विशेष विमान में तकनीकी खराबी आ गई।
अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण के अनुसार 5.8 की तीव्रता वाले भूकम्प का केन्द्र पीओके में मीरपुर के निकट स्थित था। भूकंप में पीओके बुरी तरह प्रभावित हुआ है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद अफजल ने इस्लामाबाद में एक बैठक में बताया कि 200 तंबू, 800 कंबल, रसोई के सामान के 200 सेट और 100 ‘मेडिकल किट’ सहित राहत सामान से लदे ट्रक जल्द ही भूकम्प प्रभावित लोगों तक पहुंचेंगे।
यरुशलम। इजराइल के राष्ट्रपति ने बुधवार को प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को नयी सरकार के गठन का जिम्मा सौंपा। उनके कार्यालय ने यह घोषणा की। इस घोषणा से पहले राष्ट्रपति रूवेन रिवलिन, नेतन्याहू और उन्हें चुनौती देने वाले बेन्नी गेंट्ज़ के बीच संयुक्त बैठक हुई। नेतन्याहू के पास सरकार बनाने के लिए 28 दिनों का वक्त होगा। हालांकि उन्हें दो सप्ताह का और समय मिल सकता है।
पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) और पाकिस्तान के उत्तरी हिस्से इस्लामाबाद, पेशावर, रावलपिंडी और लाहौर, पीओके समेत कई शहरों में मंगलवार को जोरदार भूकंप आया। भूकंप की वजह से पीओके के मीरपुर में एक एमारत गिर गई। इसमें चार लोगों की मौत हो गई जबकि 76 से ज्यादा लोग घायल हो गए। पाक मीडिया की तरफ से ये जानकारी दी गई है।
घायलों को पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां उनमें से कई की हालत नाजुक बताई जा रही है। मरने वालों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। भूकंप की वजह से मीरपुर में सड़कें टूट गईं और गाड़ियां पलट गईं। पाकिस्तानी सेना को तुरंत मीरपुर जाने के लिए कहा गया है।
मीरपुर के डिप्टी कमिश्नर राजा केसर ने कहा कि बड़ी संख्या में लोग जख्मी हुए हैं। उन्होंने कहा, एनडीएमए और पीडीएमए समेत तमाम बचाव दलों ने अपना काम शुरू कर दिया है। भूकंप से होने वाले नुकसान की जानकारी इकट्ठा की जा रही है।
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) में संचालन प्रमुख जे एल गौतम ने बताया कि भूकंप का केंद्र भारत-पाकिस्तान सीमा के निकट स्थित था। भूकंप के केंद्र के सबसे करीब शहर रावलपिंडी (पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में) है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ह्यूस्टन में रविवार को हाउडी मोदी कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ शामिल होने के बाद सोमवार को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान से मुलाकात करेंगे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ट्रंप मंगलवार को न्यूयॉर्क में मोदी से दोबारा मुलाकात करेंगे।
इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ओहियो जाएंगे जहां ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरीसन उनसे मिलेंगे। ओहियो में ट्रंप ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री मॉरीसन से मिलेंगे और दोनों प्रैट उद्योग का दौरा करेंगे तथा ऑस्ट्रेलिया के साथ अमेरिकी आर्थिक संबंधों का जश्न मनाएंगे।
इन नेताओं से मुलाकात करेंगे ट्रंप
अधिकारी ने कहा कि सोमवार को ट्रंप का पहला कार्यक्रम धार्मिक स्वतंत्रता को संरक्षित रखने के लिए वैश्विक अपील करने संबंधी होगा। नाम नहीं बताने की शर्त पर उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप कई नेताओं से मुलाकात करेंगे, जिनमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान, पोलैंड के राष्ट्रपति आंद्रजेज सेबस्टियन, न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा, सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सेन लूंग, मिस्र के राष्ट्रपति अल सिसि और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून से मुलाकात करेंगे।
मंगलवार को ट्रंप संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करेंगे। इसके बाद वह द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। अधिकारी ने कहा कि ये बैठकें ब्रिटेन के प्रधानमंत्री (बोरिस) जॉनसन, प्रधानमंत्री मोदी और संयुक्त राष्ट्र के महासचिव के साथ होंगी। साथ ही उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति इराकी समकक्ष से भी मुलाकात करेंगे। मोदी और ट्रंप की मुलाकात के दौरान द्विपक्षीय, क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
इस्राइल में हुए आम चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के मुख्य प्रतिद्वंद्वी बेनी गैंट्ज ने गुरुवार को कहा कि उन्हें देश की वृहद एकता सरकार का प्रधानमंत्री होना चाहिए।
इस्राइली मीडिया में अब तक आए नतीजों के मुताबिक गैंट्ज की मध्यमार्गी पार्टी ब्लू एंड व्हाइट नेतन्याहू की दक्षिणपंथी लिकुड पार्टी से दो सीटों के अंतर से आगे चल रही है।
इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी बेनी गैंट्ज के साथ गठबंधन सरकार बनाने के मुद्दे पर बृहस्पतिवार को उनसे बात की थी। नेतन्याहू ने तीसरे चुनाव की संभावना को टालने के लिए ऐसा किया है जहां दूसरी बार हुए मतदान में स्पष्ट रूप से किसी को बहुमत नहीं मिला है।
देश में पांच महीने के अंदर दूसरी बार हुए चुनाव की करीब 95 प्रतिशत मतगणना बृहस्पतिवार तक हुई जिसमें गैंट्ज की ब्लू एंड व्हाइट पार्टी को इस्राइल की 120 सीटों वाली संसद में 33 सीटें प्राप्त हुई हैं। नेतन्याहू की लिकुद पार्टी को 32 सीटें मिली हैं।
नेतन्याहू ने कहा, ‘‘चुनाव में, मैंने एक दक्षिणपंथी सरकार के गठन का आह्वान किया था, लेकिन दुख की बात है कि चुनाव परिणाम दिखाते हैं कि यह संभव नहीं है।’’
उन्होंने यह कहते हुए संकेत दिया कि इस्राइल वासियों ने किसी भी एक गुट को स्पष्ट बहुमत नहीं दिया।
नेतन्याहू के हवाले से यरूशलम पोस्ट ने लिखा, ‘‘अब कोई और विकल्प नहीं है और केवल एक व्यापक गठबंधन सरकार बन सकती है।’’
नेतन्याहू ने 60 वर्षीय गैंट्ज से प्रक्रिया शुरू करने के लिए जल्द से जल्द मिलने को कहा।
उन्होंने कहा, ‘‘बेनी गैंट्ज , मैं आपसे मिलता हूं। आज एक व्यापक गठबंधन सरकार बनाने की जिम्मेदारी हम पर है। देश हमसे, हम दोनों से मिलकर काम करने की उम्मीद करता है। आज मिलते हैं। किसी भी समय मिल सकते हैं। ताकि यह प्रक्रिया शुरू हो सके जिसकी हमसे इस बार अपेक्षा है।’’
सबसे पहले अप्रैल में चुनाव हुआ था जिसमें सरकार बनाने के लिए कोई गठजोड़ नहीं बना पाने के बाद 69 वर्षीय नेतन्याहू ने दूसरे चुनाव की घोषणा की थी।
बेंगाजी। लीबिया के सिर्ते शहर में सोमवार को हुए हवाई हमले में कम से कम 32 लोगों की मौत हो गई और 50 से अधिक अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। मार्शल खलीफा हफ्तार के नेतृत्व वाली लीबियन नेशनल आर्मी (एलएनए) की जनरल कमान के सूत्रों ने यह जानकारी दी। इससे पहले गवर्नमेंट ऑफ नेशनल अकॉर्ड के नियंत्रण वाली सिर्ते प्रोटेक्शन फोर्स (एसपीएफ) ने कहा कि इस हवाई हमले में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई और 18 अन्य घायल हो गए।
सूत्रों के मुताबिक लीबियाई सेना की ओर से किए गए हवाई हमले में मरने वालों की संख्या बढ़कर 32 पहुंच गई जबकि 50 से अधिक लोग घायल हैं। सिर्ते के इब्न सिना अस्पताल में एम्बुलेंस के जरिए लगातार घायलों को लाया जा रहा है। गौरतलब है कि वर्ष 2011 में पूर्व नेता मुअम्मर गद्दाफी को हटाये जाने के बाद से लीबिया संघर्ष और अराजकता में फंसा हुआ है।
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सऊदी अरब में अरामको तेल संयंत्र पर हुए हमले के बाद ईरान-अमेरिका के बीच तनातनी और बढ़ गई है. अमेरिका सऊदी तेल संयंत्र में हुए हमले में ईरान का हाथ होने की आशंका जता रहा है. अमेरिकी इंटेलिजेंस का हवाला देते हुए ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की चेतावनी जारी की है. ट्रंप ने रविवार को एक ट्वीट में कहा, सऊदी अरब की तेल आपूर्ति पर हमला किया गया. हमें हमले के दोषी की जानकारी है लेकिन हम सऊदी से इसकी पुष्टि होने का इंतजार कर रहे हैं. हमारी सेना पूरी तरह से तैयार है.
अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने शनिवार को कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी तेल आपूर्ति कंपनी पर हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि इसका कोई सबूत नहीं है कि हमला यमन से किया गया. हालांकि, माइक पोम्पियो और सऊदी अरब ने सीधे तौर पर ईरान का नाम नहीं लिया है.
अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते और आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर पहले से ही तनाव चल रहा है. ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि अगर ईरान ने ही इस हमले को अंजाम दिया तो उसने जानबूझकर इतना बड़ा जोखिम क्यों लिया और अब वॉशिंगटन इसका जवाब किस तरह से देगा?
इसी साल जून महीने में जब ईरान ने अमेरिकी सर्विलांस ड्रोन को मार गिराया था तो उस वक्त भी ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई की चेतावनी जारी की थी. हालांकि, बाद में ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ईरान पर हमले की पूरी तैयारी होने के बाद सिर्फ 10 मिनट पहले फैसला पलट दिया क्योंकि इस हमले में करीब 150 लोग मारे जाते.
ट्रंप प्रशासन फिलहाल ईरान के खिलाफ सबूत जुटाने में लगा हुआ है. रविवार को सेटेलाइट तस्वीरों से यह साफ नहीं हो सका है कि हमला ईरान या इराक की दिशा से हुआ. अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि सऊदी तेल संयंत्र की तरफ करीब 17 हथियार तैनात किए गए थे लेकिन सभी अपने लक्ष्य को भेद नहीं सके. बरामद हुए हथियारों की फॉरेंसिक रिपोर्ट से कई सवालों के जवाब मिल जाएंगे जैसे कि इन हथियारों को किसने बनाया और उन्हें किसने लॉन्च किया.
हालांकि, हमेशा की तरह ईरान ने इस बार भी हमले में अपना हाथ होने से इनकार किया है. ईरान के विदेश मंत्री ने इसे सबसे बड़ा झूठ करार दिया. इराक के प्रधानमंत्री अदेल अब्दुल महदी ने इस बात को खारिज कर दिया कि हमले में इराकी जमीन का इस्तेमाल किया गया. इराक ने कहा कि अगर उसकी जमीन का इस्तेमाल किसी दूसरे देश पर हमला करने के लिए किया जाएगा तो वह मजबूती से इसका विरोध करेगा.
संयुक्त राष्ट्र। सतत विकास और जलवायु परिवर्तन की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए भारत ने संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों के लिए एक-एक सौर पैनल उपहार में दिए हैं। ये पैनल यहां संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय की छत पर लगाए जा रहे हैं। करीब 10 लाख अमेरिकी डॉलर की लागत वाले इन सौर पैनलों को उपहार स्वरूप सदस्य राष्ट्रों को दिया गया। इन पैनलों से अधिकतम 50 किलोवाट तक बिजली पैदा की जा सकती है।
वाशिंगटन। अमेरिकी वित्त विभाग ने उत्तर कोरिया सरकार द्वारा प्रायोजित तीन हैकिंग समूहों पर शुक्रवार को प्रतिबंध लगा दिया। इसने कहा कि वित्तीय संस्थानों से लाखों डॉलर की चोरी, क्रिप्टो करंसी के आदान-प्रदान और अवसंरचनाओं पर साइबर हमलों के पीछे इन समूहों का हाथ है।
पाकिस्तान के कानून मंत्रालय ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री इमरान खान से कहा है कि पाकिस्तान सरकार कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) में नहीं ले जा सकती।
पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक मंत्रालय ने मामले को संयुक्त राष्ट्र महासभा या सुरक्षा परिषद में उठाने का सुझाव दिया है ताकि इसे उचित चैनल के माध्यम से आईसीजे में भेजा जा सके। मंत्रालय ने कहा कि कश्मीर मुद्दे को आईसीजे में ले जाने को लेकर पाकिस्तान और भारत के बीच कोई समझौता नहीं है।
यह सिफारिश तब हुई जब सरकार ने कानून मंत्रालय को कश्मीर मुद्दे पर आईसीजे को स्थानांतरित करने के मानदंडों पर राय देने के लिए कहा था।
हालांकि इससे पहले, विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा था कि सरकार ने कश्मीर मामले को आईसीजे में ले जाने का फैसला किया है। कुरैशी ने यह भी कहा कि सभी कानूनी पहलुओं पर विचार करने के बाद यह निर्णय लिया गया है।