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खास बातें

  • भारत द्वारा प्याज का निर्यात बंद होने से परेशान है बांग्लादेश
  • पीएम शेख हसीना ने नई दिल्ली में प्याज पर कही अपने मन की बात
 
 

खास बातें

  • भारत द्वारा प्याज का निर्यात बंद होने से परेशान है बांग्लादेश
  • पीएम शेख हसीना ने नई दिल्ली में प्याज पर कही अपने मन की बात
 
भारत में प्याज की बढ़ी कीमतें अब अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बन गई हैं। भारत द्वारा प्याज का निर्यात बंद करने से सबसे ज्यादा प्रभावित बांग्लादेश हुआ है। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने खुद ये बात कही है।
 
बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना इन दिनों भारत दौरे पर हैं। यहां एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने भारत द्वारा प्याज का निर्यात रोकने के मामले पर बात की। उन्होंने कहा कि 'हमारे लिए प्याज मिलना मुश्किल हो गया है। मुझे नहीं पता कि आपके इसकी सप्लाई क्यों बंद की। मुझे अपने बावरची को कहना पड़ा कि वो बिना प्याज के खाना बनाए।' पीएम के ये कहते ही वहां मौजूद लोग हंस पड़े।

गौरतलब है कि देश में प्याज की कमी और इसकी आसमान छूती कीमतों को देखते हुए सरकार ने 29 सितंबर से ही प्याज के निर्यात पर रोक लगा रखी है। भारत प्याज का सबसे बड़ा निर्यातक है। यहां से 60 से ज्यादा देशों में प्याज का निर्यात किया जाता है। ऐसे में निर्यात बंद होने से अन्य देशों को भी काफी परेशानी हो रही है।

शेख हसीना ने मुस्कुराते हुए कहा कि 'पता नहीं केंद्र सरकार ने निर्यात रोके जाने के बारे में मुझे कोई सूचना क्यों नहीं दी। अगर इस बारे में थोड़ी जानकारी मिली होती तो अच्छा होता। अगली बार जब आप ऐसा कुछ करने की सोचें, तो पहले से सूचना दे देना अच्छा रहेगा।'

बता दें कि बांग्लादेश की राजधानी ढाका में प्याज की कीमत प्रति 100 किग्रा 10 हजार रुपये से ज्यादा पहुंच चुकी है। इस देश को अब म्यांमार, तुर्की और चीन से आयात बढ़ाने पर जोर देना पड़ रहा है। संकट के इस समय में बांग्लादेश ने सब्सिडी देकर प्याज बेचना शुरू कर दिया है। 

कुछ ऐसे ही हालात मलयेशिया के भी हैं, जो भारत से प्याज खरीदने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है।

गौरतलब है कि भारत में प्याज की कीमतें 4500 रुपये प्रति 100 किग्रा तक पहुंच गई। यह पिछले करीब 6 साल में सबसे ज्यादा है। इसके बाद वाणिज्य मंत्रालय के एक अंग डायरेक्टरेट जेनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) ने अधिसूचना जारी कर तत्काल प्रभाव से प्याज के निर्यात पर रोक लगा दी। वहीं कीमतों पर नियंत्रण करने के लिए भारत में स्टॉक की सीमा भी तय कर दी गई है। खुदरा विक्रेता 100 क्विंटल तक और थोक विक्रेता 500 क्विंटल तक ही प्याज स्टॉक कर सकते हैं। 

वाशिंगटन। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिका की घरेलू राजनीतिक की तरफ भारत के निर्दलीय रुख को दोहराते हुए सोमवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ह्यूस्टन रैली में ‘‘अबकी बार ट्रम्प सरकार’’ का जो नारा दिया था, वह महज उसका संदर्भ था जो डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने राष्ट्रपति चुनाव प्रचार अभियान के दौरान भारतीय-अमेरिकी समुदाय का प्यार हासिल करने के लिए कहा था। वाशिंगटन की तीन दिवसीय यात्रा पर आए जयशंकर ने इस बात को सिरे से नकार दिया कि प्रधानमंत्री ने 2020 के चुनाव अभियान के लिए ट्रम्प की उम्मीदवारी का समर्थन करने के लिए ऐसा कहा था।

ह्यूस्टन रैली में मोदी द्वारा इस्तेमाल किए गए नारे के भविष्य पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में भारतीय पत्रकारों के सवाल के जवाब में जयशंकर ने कहा, ‘‘नहीं, उन्होंने ऐसा नहीं कहा था।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि प्रधानमंत्री ने जो कहा, उस पर कृपया सावधानीपूर्वक ध्यान दें। मेरी याददाश्त के मुताबिक प्रधानमंत्री ने जो कहा वह ट्रम्प ने इस्तेमाल किया था तो प्रधानमंत्री पहले की बात कर रहे थे।’’  विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि हमें बातों का गलत अर्थ निकालना चाहिए। मुझे नहीं लगता कि ऐसा करके आप किसी के लिए अच्छा कर रहे हैं।’’
गौरतलब है कि 22 सितंबर को ह्यूस्टन में 50,000 से अधिक भारतीय अमेरिकियों के जनसमूह को संबोधित करते मोदी ने कहा था, ‘‘उम्मीदवार ट्रम्प के ‘अबकी बार ट्रम्प सरकार’ शब्दों की गूंज ऊंची और स्पष्ट है।’’ जयशंकर ने पत्रकारों से सटीक रिपोर्ट देने का अनुरोध करते हुए कहा, ‘‘मेरा मतलब है कि वह (मोदी) जो बात कर रहे थे उसके बारे में काफी स्पष्ट थे। वह जो कह रहे थे, वह वही है जो उम्मीदवार के तौर पर कहा गया था, जो दिखाता है कि आप उम्मीदवार के तौर पर भी भारत और उसके लोगों से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमारा अमेरिका की घरेलू राजनीति की ओर निर्दलीय रुख रहा है। हमारा रुख यही है कि इस देश में जो भी होता है वह उनकी राजनीति है, न कि हमारी।’’

पाकिस्तान की हालत दिन पर दिन खस्ता होती जा रही है। आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के पास लगता है अब विदेश-यात्रा के लिए भी फंड्स नहीं बचा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और उनके प्रतिनिधिमंडल को शुक्रवार को उस समय न्यूयॉर्क लौटना पड़ा जब सऊदी सरकार द्वारा इमरान खान दिये गये विशेष विमान में तकनीकी खराबी आ गई जिसके बाद उन्हें न्यूयॉर्क के कैनेडी अंतरराष्ट्रीय से एक आम पैसेंजर की तरह कमर्शियल फ्लाइट से पाकिस्तान के लिए रवाना होना पड़ा।

तकनीशियन विमान में आई समस्या को सुलझाने में लगे थे लेकिन उसमें काफी समय लग रहा था , इस दौरान इमरान खान को कैनेडी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर इंतजार भी करना पड़ा। लंबे इंतजार के बाद यह पता चला कि विमान को सही होने में और समय लगेगे विमान पूरी तरह शनिवार सुबह तक ठीक हो पाएगा। पाकिस्तान की राजदूत मलीहा लोधी इमरान को वापस रूसवेल्ट होटल ले गईं, जहां वह अपनी सात दिवसीय यात्रा के दौरान ठहरे हुए थे। सुबह तक वहा ठहरने के बाद भी सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की तरफ से दिया गया खटारा प्लेन ठीक नहीं हो सका जिसके बाद जिसके बाद इमरान खान ने एक आम आदमी की तरह कमर्शियल फ्लाइट ली। 

आपको बता दें कि न्यूज इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार संयुक्त राष्ट्र महासभा के 74वें सत्र में भाग लेने के बाद अमेरिका की अपनी सात दिवसीय यात्रा पूरी करने के बाद खान को पाकिस्तान लौटना था। कैनेडी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरने के कुछ मिनटों बाद ही प्रधानमंत्री खान के विशेष विमान में तकनीकी खराबी आ गई। 

कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन की झूठी अफवाह फैला रहे पाकिस्तान को अमेरिका से कड़ी नसीहत मिली है। अमेरिका ने पाकिस्तान से कहा कि वह चीन में अवैध रूप से हिरासत में रह रहे मुसलमानों की चिंता पहले करे।
 
गौरतलब है कि चीन में उइगुरों के लिए डिटेंशन कैंप का निर्माण किया गया है। जहां उइगुरों को कैद करके रखा जाता है। उन्हें किसी भी तरीके की धार्मिक चीजों का पालन करने की अनुमति नहीं है। उइगुरों को दाढ़ी रखने और धार्मिक अनुष्ठान करने तक पर पाबंदी है। 

अगस्त 2018 में संयुक्त राष्ट्र को जानकारी मिली कि लगभग 10 लाख उइगुर मुस्लिमों को चीन के पश्चिमी शिंजियांग क्षेत्र में बनाए गए डिटेंशन कैंपों में रखा गया है। जहां उन्हें समाज के प्रति नजरिया बदलने के लिए शिक्षा दी जा रही है। 

मानवाधिकार समूहों ने इस बात की जानकारी दी, वहीं, इन आरोपों को चीन ने सिरे से खारिज कर दिया। इस दौरान इस बात की भी जानकारी दी गई थी कि शिंजियांग में रहने वाले लोगों पर चीन द्वारा कड़ी नजर रखी जाती है। 

शिंजियांग प्रांत में मीडिया पर पाबंदी हैं

चीन के शिंजियांग प्रांत में मीडिया पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा हुआ है। यहां किसी भी मीडिया संस्थान के आने की मनाही है। लेकिन बीबीसी ने बताया कि वह उस प्रांत में गया और उसने वहां के हालात बयान किए। बीबीसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि वहां बड़े तौर डिटेंशन कैंपों का निर्माण किया जा रहा है और प्रांत में बड़ी मात्रा में पुलिस की मौजूदगी रहती है। यहां तक कि लोगों पर संदेह होने पर अधिकारियों द्वारा उनके फोन तक की जांच की जाती है। 

बीबीसी के हवाले से एक उइगर व्यक्ति ने बताया कि उसे 2015 में डिटेंशन कैंप से रिहा किया गया। उसने बताया कि उसे कैंप के अंदर बुरी तरह प्रताड़ित किया गया। हिरासत में लिए गए लोगों को सुबह होने से पहले जगा दिया जाता था और उन्हें कानून सीखने के लिए मजबूर किया था और गाना गाने के लिए मजबूर किया जाता था, जिसका शीर्षक होता था 'बिना कम्युनिस्ट पार्टी के कोई नया चीन नहीं हो सकता है।'

बीबीसी को दिए साक्षात्कार में एक और उइगर कैदी ओमीर ने बताया कि उसे कैंप के भीतर सोने नहीं दिया जाता था। उसे घंटों तक लटकाया जाता था फिर उसे पीटा जाता था। 

उसने बताया कि उनके पास मोटी लकड़ी और रबर के बल्ले, मुड़े तार से बनी चाबुक, त्वचा को छेदने के लिए सुई, नाखूनों को बाहर निकालने के लिए पलायर्स थे। ये सभी उपकरण उसके सामने टेबल पर प्रदर्शित किए गए थे, जो किसी भी समय उपयोग करने के लिए तैयार थे। उसने बताया कि वह अन्य लोगों को भी चिल्लाते हुए सुनता था। 

कौन हैं उइगुर लोग?

इस्लाम को मानने वाले उइगुर समुदाय के लोग चीन के सबसे बड़े और पश्चिमी क्षेत्र शिंजियांग प्रांत में रहते हैं। उइगुर पूर्वी और मध्य एशिया में बसने वाले तुर्की जाति की एक जनजाति है। 

इनमें से लगभग 70 प्रतिशत इस क्षेत्र के दक्षिण-पश्चिम में स्थित तारिम घाटी में रहते हैं। उइगुर लोग उइगुर भाषा बोलते हैं जो तुर्की भाषा से आने वाली एक बोली है।  उइगुर एक अल्पसंख्यक तुर्क जातीय समूह है जो मध्य और पूर्वी एशिया के सामान्य क्षेत्र से सांस्कृतिक रूप से जुड़ा हुए हैं। चीन में  उइगुरों की आबादी एक करोड़ से अधिक है। 

उइगुरों को केवल एक क्षेत्र के मूल निवासियों के रूप में मान्यता दी जाती है, जोकि चीन का शिंजियांग क्षेत्र है। उन्हें चीन के 55 आधिकारिक तौर पर मान्यता प्राप्त जातीय अल्पसंख्यकों में से एक माना जाता है। उइगुरों को चीन द्वारा केवल एक बहुसांस्कृतिक राष्ट्र के भीतर एक क्षेत्रीय अल्पसंख्यक के रूप में मान्यता प्राप्त है और चीन उनके स्वदेशी समूह होने के विचार को खारिज करता रहा है।

उइगुरों ने पारंपरिक रूप से तकलीम रेगिस्तान में बिखरे हुए नखलिस्तान में निवास किया है, जिसमें तारिम बेसिन शामिल है, एक ऐसा क्षेत्र जिसपर ऐतिहासिक रूप से चीन, मंगोलों, तिब्बतियों और तुर्किक दुनिया सहित कई सभ्यताओं द्वारा शासन किया गया। 

उइगुर 10वीं शताब्दी में इस्लाम के करीब आना शुरू हुए और 16वीं शताब्दी तक बड़े पैमाने पर मुस्लिम बन गए, और जिसके बाद से ही इस्लाम ने  उइगुर संस्कृति और पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

'विश्व उइगुर कांग्रेस' का अनुमान है कि चीन के बाहर  उइगुरों की आबादी लगभग 10 लाख से 15 लाख के बीच है।  उइगुरों के महत्वपूर्ण प्रवासी समुदाय मध्य एशियाई देशों कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और उज्बेकिस्तान और तुर्की में मौजूद हैं। वहीं, उइगुरों के कनाडा, जर्मनी, बेल्जियम, नॉर्वे, स्वीडन, रूस, सऊदी अरब, अफगानिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त राज्य अमेरिका और नीदरलैंड में छोटे समुदाय रहते हैं।

चीन सरकार के साथ उइगुरों के तनाव की वजह क्या है?

शिनजियांग प्रांत में रहने वाले उइगुर मुस्लिम 'ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट' चलाते रहे हैं जिसका मकसद चीन से अलग होना है। दरअसल, 1949 में पूर्वी तुर्किस्तान, जो अब शिनजियांग है, को एक अलग राष्ट्र के तौर पर कुछ समय के लिए पहचान मिली थी, लेकिन उसी साल यह चीन का हिस्सा बन गया। 

जिसके बाद 1990 में सोवियत संघ के पतन के बाद इस क्षेत्र की आजादी के लिए यहां के लोगों ने काफी संघर्ष किया। उस समय इन लोगों के आंदोलन को मध्य एशिया में कई मुस्लिम देशों का समर्थन भी मिला लेकिन, चीनी सरकार के कड़े रुख के आगे किसी की एक न चली।

बीते कुछ समय के दौरान इस क्षेत्र में हान चीनियों की संख्या में जबर्दस्त बढ़ोत्तरी हुई है। उइगुरों का कहना है कि चीन की वामपंथी सरकार हान चीनियों को शिंजियांग में इसीलिए भेज रही है कि उइगुरों के आंदोलन 'ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट' को दबाया जा सके। चीनी सरकार की भेदभावपूर्ण नीतियां भी कुछ ऐसा ही दर्शाती हैं। 

शिंजियांग प्रांत में रहने वाले हान चीनियों को मजबूत करने के लिए चीन सरकार हर संभव मदद दे रही है यहां तक कि इस क्षेत्र की नौकरियों में उन्हें ऊंचे पदों पर बिठाया जाता है और उइगुरों को दोयम दर्जे की नौकरियां दी जाती हैं। 

कुछ जानकार चीनियों को नौकरियों में ऊंचे पदों पर बिठाने का एक कारण यह भी मानते हैं कि सामरिक दृष्टि से शिंजियांग प्रांत चीन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और ऐसे में चीनी सरकार ऊंचे पदों पर विद्रोही रुख वाले उईगुरों को बिठाकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) और देश के उत्तर-पूर्वी हिस्सों के कई शहरों में आए भूकम्प में मरने वालों की संख्या बुधवार को बढ़कर 38 हो गई। मंगलवार को आई इस आपदा में 452 से अधिक लोग घायल हुए हैं। भूकंप से पंजाब और खैबर-पख्तूनख्वा प्रांतों के कई शहर दहल गये। अधिकारियों ने कई ध्वस्त इमारतों के मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए बचाव अभियान तेज कर दिया है। 
 

अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण के अनुसार 5.8 की तीव्रता वाले भूकम्प का केन्द्र पीओके में मीरपुर के निकट स्थित था। भूकंप में पीओके बुरी तरह प्रभावित हुआ है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद अफजल ने इस्लामाबाद में एक बैठक में बताया कि 200 तंबू, 800 कंबल, रसोई के सामान के 200 सेट और 100 ‘मेडिकल किट’ सहित राहत सामान से लदे ट्रक जल्द ही भूकम्प प्रभावित लोगों तक पहुंचेंगे।

संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में हिस्सा लेने न्यूयार्क गये प्रधानमंत्री इमरान खान ने भूकंप में लोगों की मौत होने पर दुख प्रकट किया। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को भूकम्प प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल सहायता पहुंचाने का निर्देश दिया। राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने भी शोक प्रकट किया। पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने सेना को पीओके में नागरिक प्रशासन के साथ सहयोग करते हुए भूकम्प पीड़ितों के लिए ‘‘तुरन्त बचाव अभियान चलाने’’ के निर्देश दिये हैं। सेना की मीडिया इकाई ने ट्वीट किया कि सेना के जवानों को चिकित्सा सहायता दलों के साथ भेजा गया है।

 


 

यरुशलम। इजराइल के राष्ट्रपति ने बुधवार को प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को नयी सरकार के गठन का जिम्मा सौंपा। उनके कार्यालय ने यह घोषणा की। इस घोषणा से पहले राष्ट्रपति रूवेन रिवलिन, नेतन्याहू और उन्हें चुनौती देने वाले बेन्नी गेंट्ज़ के बीच संयुक्त बैठक हुई। नेतन्याहू के पास सरकार बनाने के लिए 28 दिनों का वक्त होगा। हालांकि उन्हें दो सप्ताह का और समय मिल सकता है।

अगर सभी प्रयास नाकाम हो जाते हैं तो रिवलिन किसी और को यह जिम्मा सौंप सकते हैं। रिवलिन, नेतन्याहू और गेंट्ज़ से एकता सरकार बनाने का अनुरोध कर रहे हें लेकिन इसमें समझौते के आसार नहीं दिख रहे हैं। 

पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) और पाकिस्तान के उत्तरी हिस्से इस्लामाबाद, पेशावर, रावलपिंडी और लाहौर, पीओके समेत कई शहरों में मंगलवार को जोरदार भूकंप आया। भूकंप की वजह से पीओके के मीरपुर में एक एमारत गिर गई। इसमें चार लोगों की मौत हो गई जबकि 76 से ज्यादा लोग घायल हो गए। पाक मीडिया की तरफ से ये जानकारी दी गई है।

 जियो न्यूज के अनुसार पीओके और इस्लामाबाद समेत पाकिस्तान के कई शहरों में जोरदार भूंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप की वजह से सबसे ज्यादा नुकसान पीओके के मीरपुर में हुआ। यहां एक इमारत भूकंप की वजह से गिर गई जिसमें चार लोगों की मौत हो गई जबकि 76 से ज्यादा लोग घायल हो गए। भूकंप दोपहर के चार बजे आया। 

घायलों को पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां उनमें से कई की हालत नाजुक बताई जा रही है। मरने वालों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। भूकंप की वजह से मीरपुर में सड़कें टूट गईं और गाड़ियां पलट गईं। पाकिस्तानी सेना को तुरंत मीरपुर जाने के लिए कहा गया है। 

मीरपुर के डिप्टी कमिश्नर राजा केसर ने कहा कि बड़ी संख्या में लोग जख्मी हुए हैं। उन्होंने कहा, एनडीएमए और पीडीएमए समेत तमाम बचाव दलों ने अपना काम शुरू कर दिया है। भूकंप से होने वाले नुकसान की जानकारी इकट्ठा की जा रही है। 

राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) में संचालन प्रमुख जे एल गौतम ने बताया कि भूकंप का केंद्र भारत-पाकिस्तान सीमा के निकट स्थित था। भूकंप के केंद्र के सबसे करीब शहर रावलपिंडी (पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में) है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ह्यूस्टन में रविवार को हाउडी मोदी कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ शामिल होने के बाद सोमवार को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान से मुलाकात करेंगे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ट्रंप मंगलवार को न्यूयॉर्क में मोदी से दोबारा मुलाकात करेंगे।

 एक अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि भारत और पाकिस्तान के नेताओं के साथ ये दोनों बैठकें संयुक्त राष्ट्र महासभा के 74वें सत्र से इतर न्यूयॉर्क में होंगी। ह्यूस्टन में हाउडी मोदी कार्यक्रम में मोदी के साथ शामिल होने के बाद ट्रंप रविवार की रात न्यूयॉर्क पहुंच सकते हैं।


इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ओहियो जाएंगे जहां ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरीसन उनसे मिलेंगे। ओहियो में ट्रंप ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री मॉरीसन से मिलेंगे और दोनों प्रैट उद्योग का दौरा करेंगे तथा ऑस्ट्रेलिया के साथ अमेरिकी आर्थिक संबंधों का जश्न मनाएंगे।

इन नेताओं से मुलाकात करेंगे ट्रंप 

अधिकारी ने कहा कि सोमवार को ट्रंप का पहला कार्यक्रम धार्मिक स्वतंत्रता को संरक्षित रखने के लिए वैश्विक अपील करने संबंधी होगा। नाम नहीं बताने की शर्त पर उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप कई नेताओं से मुलाकात करेंगे, जिनमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान, पोलैंड के राष्ट्रपति आंद्रजेज सेबस्टियन, न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा, सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सेन लूंग, मिस्र के राष्ट्रपति अल सिसि और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून से मुलाकात करेंगे। 

मंगलवार को ट्रंप संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करेंगे। इसके बाद वह द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। अधिकारी ने कहा कि ये बैठकें ब्रिटेन के प्रधानमंत्री (बोरिस) जॉनसन, प्रधानमंत्री मोदी और संयुक्त राष्ट्र के महासचिव के साथ होंगी। साथ ही उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति इराकी समकक्ष से भी मुलाकात करेंगे। मोदी और ट्रंप की मुलाकात के दौरान द्विपक्षीय, क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

इस्राइल में हुए आम चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के मुख्य प्रतिद्वंद्वी बेनी गैंट्ज ने गुरुवार को कहा कि उन्हें देश की वृहद एकता सरकार का प्रधानमंत्री होना चाहिए।

 मंगलवार को हुए आम चुनाव के नतीजों में बिना गठबंधन बहुमत की सरकार बनाने की संभावना नहीं दिखने के बाद नेतन्याहू ने सभी से मिलकर एकता सरकार बनाने का आह्वान किया था। इसके बाद गैंट्ज ने पत्रकारों से बातचीत की। 

इस्राइली मीडिया में अब तक आए नतीजों के मुताबिक गैंट्ज की मध्यमार्गी पार्टी ब्लू एंड व्हाइट नेतन्याहू की दक्षिणपंथी लिकुड पार्टी से दो सीटों के अंतर से आगे चल रही है।
इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी बेनी गैंट्ज के साथ गठबंधन सरकार बनाने के मुद्दे पर बृहस्पतिवार को उनसे बात की थी। नेतन्याहू ने तीसरे चुनाव की संभावना को टालने के लिए ऐसा किया है जहां दूसरी बार हुए मतदान में स्पष्ट रूप से किसी को बहुमत नहीं मिला है।

देश में पांच महीने के अंदर दूसरी बार हुए चुनाव की करीब 95 प्रतिशत मतगणना बृहस्पतिवार तक हुई जिसमें गैंट्ज की ब्लू एंड व्हाइट पार्टी को इस्राइल की 120 सीटों वाली संसद में 33 सीटें प्राप्त हुई हैं। नेतन्याहू की लिकुद पार्टी को 32 सीटें मिली हैं।

नेतन्याहू ने कहा, ‘‘चुनाव में, मैंने एक दक्षिणपंथी सरकार के गठन का आह्वान किया था, लेकिन दुख की बात है कि चुनाव परिणाम दिखाते हैं कि यह संभव नहीं है।’’

उन्होंने यह कहते हुए संकेत दिया कि इस्राइल वासियों ने किसी भी एक गुट को स्पष्ट बहुमत नहीं दिया।

नेतन्याहू के हवाले से यरूशलम पोस्ट ने लिखा, ‘‘अब कोई और विकल्प नहीं है और केवल एक व्यापक गठबंधन सरकार बन सकती है।’’

नेतन्याहू ने 60 वर्षीय गैंट्ज से प्रक्रिया शुरू करने के लिए जल्द से जल्द मिलने को कहा।

उन्होंने कहा, ‘‘बेनी गैंट्ज , मैं आपसे मिलता हूं। आज एक व्यापक गठबंधन सरकार बनाने की जिम्मेदारी हम पर है। देश हमसे, हम दोनों से मिलकर काम करने की उम्मीद करता है। आज मिलते हैं। किसी भी समय मिल सकते हैं। ताकि यह प्रक्रिया शुरू हो सके जिसकी हमसे इस बार अपेक्षा है।’’

सबसे पहले अप्रैल में चुनाव हुआ था जिसमें सरकार बनाने के लिए कोई गठजोड़ नहीं बना पाने के बाद 69 वर्षीय नेतन्याहू ने दूसरे चुनाव की घोषणा की थी।

बेंगाजी। लीबिया के सिर्ते शहर में सोमवार को हुए हवाई हमले में कम से कम 32 लोगों की मौत हो गई और 50 से अधिक अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। मार्शल खलीफा हफ्तार के नेतृत्व वाली लीबियन नेशनल आर्मी (एलएनए) की जनरल कमान के सूत्रों ने यह जानकारी दी। इससे पहले गवर्नमेंट ऑफ नेशनल अकॉर्ड के नियंत्रण वाली सिर्ते प्रोटेक्शन फोर्स (एसपीएफ) ने कहा कि इस हवाई हमले में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई और 18 अन्य घायल हो गए।
सूत्रों के मुताबिक लीबियाई सेना की ओर से किए गए हवाई हमले में मरने वालों की संख्या बढ़कर 32 पहुंच गई जबकि 50 से अधिक लोग घायल हैं। सिर्ते के इब्न सिना अस्पताल में एम्बुलेंस के जरिए लगातार घायलों को लाया जा रहा है। गौरतलब है कि वर्ष 2011 में पूर्व नेता मुअम्मर गद्दाफी को हटाये जाने के बाद से लीबिया संघर्ष और अराजकता में फंसा हुआ है।
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