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वीबी-जी राम जी योजना के अंतर्गत बालोद जिले में 2.85 लाख जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण, 19.23 लाख घनमीटर अतिरिक्त जल संचयन क्षमता विकसित

रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग, तालाब, डबरी, रिचार्ज शाफ्ट, चेकडैम एवं भू-जल पुनर्भरण कार्यों से जल सुरक्षा की दिशा में उल्लेखनीय पहल

रायपुर, 14 जुलाई 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं उप मुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत संचालित ‘मोर गांव-मोर पानी’ महाअभियान प्रदेशभर में जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप दे रहा है। अभियान के माध्यम से रोजगार सृजन के साथ-साथ जल संरक्षण, भू-जल संवर्धन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन एवं हरित विकास के कार्यों को व्यापक गति मिली है।

इसी क्रम में बालोद जिले में जिला प्रशासन द्वारा सभी ग्राम पंचायतों, शासकीय कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों, स्व-सहायता समूहों तथा सामाजिक संगठनों की सक्रिय सहभागिता से जल संरक्षण के विविध कार्य किए जा रहे हैं। अभियान का उद्देश्य “जहाँ वर्षा हो, जब वर्षा हो – वहीं वर्षा जल का संचयन हो” की अवधारणा को व्यवहार में उतारना है।

अभियान के अंतर्गत प्रत्येक शासकीय भवन में रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग तथा सतही वर्षा जल संचयन के लिए रिचार्ज शाफ्ट, डबरी, तालाब एवं ट्रेंच का निर्माण किया गया है। साथ ही हैंडपंपों एवं प्रधानमंत्री आवासों में सोख्ता गड्ढों तथा वर्षा जल संचयन प्रणालियों की स्थापना को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

भू-जल संवर्धन के लिए रिचार्ज पिट, इंजेक्शन वेल, निष्क्रिय बोरवेलों का रिचार्ज, तालाबों का जीर्णोद्धार एवं गहरीकरण, चेकडैम, वाटर एब्जॉर्बिंग ट्रेंच सहित विभिन्न जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण एवं पुनर्जीवन किया गया है।

जिले में वीबीजी-रामजी (मनरेगा), वन विभाग, जिला खनिज न्यास (डीएमएफ), विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं तथा जनभागीदारी के माध्यम से अब तक 2.85 लाख जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया जा चुका है, जिनसे लगभग 19.23 लाख घनमीटर अतिरिक्त जल संचयन क्षमता विकसित हुई है। इससे भू-जल स्तर में वृद्धि, भूमि की नमी का संरक्षण, खरीफ एवं रबी दोनों फसलों के लिए सिंचाई सुविधा में सुधार तथा किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी।

अभियान की सफलता का सबसे महत्वपूर्ण आधार जनभागीदारी है। जनप्रतिनिधियों, महिला स्व-सहायता समूहों, ग्राम विकास समितियों, महिला कमांडो, ग्रीन आर्मी तथा स्कूल एवं कॉलेज के विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी से तालाबों एवं जलाशयों की स्वच्छता, घर-घर जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण के प्रति जनजागरूकता तथा व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण एवं सीड बॉल अभियान संचालित किया जा रहा है। जुलाई माह में अब तक 3 लाख से अधिक सीड बॉल का रोपण किया जा चुका है तथा 2 लाख पौधों के रोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

राज्य शासन द्वारा वीबी- जी राम जी योजना के माध्यम से प्रदेश के सभी जिलों में जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, हरित विकास एवं ग्रामीण आजीविका संवर्धन के कार्यों को प्राथमिकता के साथ संचालित किया जा रहा है। ‘जल संरक्षण – जन सहभागिता से जल समृद्धि की ओर’ की भावना के साथ जिला प्रशासन बालोद जल-सुरक्षित, हरित एवं समृद्ध ग्रामीण विकास के लक्ष्य की दिशा में सतत कार्य कर रहा है।

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96 प्रतिशत से अधिक राजस्व ग्रामों का सर्वेक्षण कार्य पूर्ण

19 हजार 805 ग्रामों का सर्वेक्षण संपन्न, शेष क्षेत्रों में कार्य युद्ध स्तर पर जारी

  •  विष्णु वर्मा, सहायक संचालक

रायपुर, 13 जुलाई 2026   छत्तीसगढ़ राज्य में राजस्व ग्राम सर्वेक्षण अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में भू-संपत्तियों का सटीक डिजिटल रिकॉर्ड (नक्शे) तैयार करना और नागरिकों को उनकी भूमि/मकान का कानूनी मालिकाना हक (स्वामित्व) प्रदान करना है। यह भूमि संबंधी विवादों को कम करने और योजनाओं के प्रभावी संचालन के लिए बेहद कारगर है। राजस्व  विभाग ने  प्रदेश के सभी 33 जिलों में फैले कुल 20 हजार 551 राजस्व ग्रामों में से 19 हजार 805 ग्रामों (लगभग 96.37 प्रतिशत) का विस्तृत सर्वेक्षण कार्य सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया है। यह आंकड़ा राज्य में भूमि सुधार और डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।

19 हजार 805 ग्रामों का सर्वेक्षण पूर्ण

    छत्तीसगढ़ राज्य में ग्रामीण विकास, भूमि प्रबंधन और पारदर्शी राजस्व प्रणाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित राजस्व ग्राम सर्वेक्षण अभियान बड़ी सफलता की ओर अग्रसर है। भूमि प्रबंधन और डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में राज्य ने एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है, जिसके तहत प्रदेश के कुल लक्षित 20 हजार 551 राजस्व ग्रामों में से 19 हजार 805 ग्रामों (96.37 प्रतिशत) का सर्वेक्षण कार्य सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया गया है। वर्तमान में पूरे प्रदेश में केवल 746 ग्राम (3.63 प्रतिशत) ही असर्वेक्षित श्रेणी में शेष बचे हैं। इन शेष ग्रामों में भी विकास की प्रक्रिया तेजी से गतिमान है, जहाँ 371 ग्रामों में सर्वेक्षण का कार्य प्रक्रियाधीन है, वहीं केवल 375 ग्रामों में विभिन्न भौगोलिक व प्रशासनिक कारणों से सर्वेक्षण कार्य प्रारंभ किया जाना शेष है।  

    मैदानी और विकसित क्षेत्रों में सर्वेक्षण का कार्य लगभग शत-प्रतिशत पूरा किया जा चुका है। रायपुर जिले में 545 ग्रामों का, महासमुंद जिले में 1153 ग्रामों का, राजनांदगांव जिले में 694 ग्रामों का सर्वेक्षण का कार्य लगभग शत-प्रतिशत पूरा किया जा चुका है। इसी प्रकार कबीरधाम  जिले के 1011 ग्रामों का, बिलासपुर जिले के 708 ग्रामों का, जांजगीर-चांपा जिले के 450 ग्रामों का, सक्ती जिले के 465 ग्रामों का और सूरजपुर जिले के 552 ग्रामों का शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर मिसाल कायम की है।

आधुनिक तकनीकों के माध्यम से कार्य में तेजी

    वहीं दूसरी ओर, बस्तर संभाग के दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों में भौगोलिक एवं तकनीकी चुनौतियों के कारण कुछ कार्य अभी भी शेष है। आंकड़ों के अनुसार, नारायणपुर में सर्वाधिक 240 ग्राम, सुकमा में 111 ग्राम और बीजापुर में 95 ग्राम वर्तमान में असर्वेक्षित श्रेणी में हैं। हालांकि, विभाग इन क्षेत्रों में विशेष रणनीतियों और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से कार्य को तेजी से आगे बढ़ा रहा है, जिसमें से कुल 371 ग्रामों में सर्वेक्षण की प्रक्रिया वर्तमान में भी गतिमान है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों को लाभ

    इस व्यापक सर्वेक्षण के पूर्ण होने से ग्रामीण क्षेत्रों में एक नए युग की शुरुआत होगी। डिजिटल और अद्यतित (Updated) भूमि रिकॉर्ड होने से भूमि संबंधी आपसी विवादों और मुकदमों में भारी कमी आएगी। किसानों को बैंकों से ऋण प्राप्त करने, फसल बीमा और शासकीय योजनाओं (जैसे किसान न्याय योजना) का लाभ प्राप्त करने में सुगमता होगी। इसी तरह राजस्व प्रशासन में पारदर्शिता आएगी और बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी।

    छत्तीसगढ़ सरकार का यह प्रयास ग्रामीण सशक्तिकरण की रीढ़ साबित हो रहा है। विभाग के आला अधिकारियों के अनुसार, शेष बचे 375 ग्रामों में भी जल्द ही सर्वेक्षण का कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य आगामी महीनों में छत्तीसगढ़ को शत-प्रतिशत डिजिटल और त्रुटिहीन राजस्व रिकॉर्ड वाला आदर्श राज्य बनाना है।

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राज्य शासन ने जारी की अधिसूचना

रायपुर. 14 जुलाई 2026. राज्य शासन ने राजिमवासियों की बहुप्रतीक्षित मांग पूरी करते हुए राजिम नगर पंचायत का नगर पालिका के रूप में उन्नयन कर दिया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है। राजिम नगर पंचायत की सीमाएं ही राजिम नगर पालिका की सीमाएं होंगी। राज्य शासन के इस निर्णय से पूरे शहर में खुशी एवं उत्साह का वातावरण है।

उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव ने राजिम नगर पंचायत के नगर पालिका के रूप में उन्नयन पर कहा कि राज्य शासन के इस निर्णय से राजिम के सुनियोजित विकास को नई दिशा मिलेगी तथा शहरी सुविधाओं के विस्तार के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध होंगे। इससे राजिम में सड़क, नाली, पेयजल, स्वच्छता, स्ट्रीट लाइट, उद्यान, सामुदायिक भवन सहित विभिन्न आधारभूत सुविधाओं के विकास को और ज्यादा गति मिलेगी। साथ ही राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ भी अधिक प्रभावी ढंग से नगरवासियों तक पहुंचेगा।

Chhattisgarh Tourism Board Earns National Recognition Among 21 Participating States

Raipur, Chhattisgarh Tourism has achieved another national milestone by winning the "Best Decoration of Stall and Appearance" award at the Travel and Tourism Fair (TTF) Kolkata 2026. The Chhattisgarh Tourism Board received the honour for its creative and impactful pavilion among 21 participating states, reflecting the successful presentation of the state's rich tribal heritage, cultural attractions, natural destinations and modern tourism vision.

Held from July 10 to 12 at the Biswa Bangla Mela Prangan in Kolkata, the three-day tourism fair saw the Chhattisgarh pavilion emerge as a major attraction for visitors, tour operators, tourism professionals and investors. The pavilion showcased Bastar's tribal culture, Chitrakote and Tirathgarh waterfalls, Kanger Valley National Park, Sirpur, Bhoramdeo, religious and eco-tourism destinations, tourism resorts and the state's diverse tourism circuits through modern presentations.

Chairman of the Chhattisgarh Tourism Board Shri Neelu Sharma, Tourism Secretary Shri S. Bharathidasan and Managing Director Shri Vivek Acharya participated in several B2B meetings with national and international tour operators, travel agencies, hotel groups and investors. Discussions focused on tourism investment, joint tourism packages, marketing partnerships, expansion into new tourism markets, increasing tourist arrivals, and creating new opportunities for collaboration and investment.

Nearly 28 registered tour operators, hotel operators, homestay operators and tourism entrepreneurs from Chhattisgarh and other states also participated in the event, providing an effective platform to showcase the state's tourism products and build new business partnerships.

During the inaugural session, Goa Tourism Minister Shri Rohan A. Khaunte, Uttarakhand Tourism Minister Shri Satpal Maharaj, West Bengal Tourism Minister Dr Shankar Ghosh and Consul General of Thailand Ms Siriporn Tantipanyathep visited the Chhattisgarh pavilion and appreciated the state's natural beauty, tribal culture, religious heritage and tourism potential.

Chairman of the Chhattisgarh Tourism Board Shri Neelu Sharma said the award reflects the state's growing tourism profile under the leadership of Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai and Tourism and Culture Minister Shri Rajesh Agrawal. Tourism Secretary Shri S. Bharathidasan said sustained promotion at national and international platforms will boost tourism, investment and employment, while Managing Director Shri Vivek Acharya described the recognition as a result of the collective efforts of all tourism stakeholders and a major step towards establishing Chhattisgarh as a leading tourism destination.

 

Raipur, Prime Minister Shri Narendra Modi presented a Bastar Dhokra Tree of Life metal sculpture from Chhattisgarh to New Zealand Prime Minister Mr Christopher Luxon as a diplomatic gift, highlighting India’s rich cultural heritage and bringing global recognition to the state’s centuries-old tribal craft.
The gesture has been hailed as a matter of pride for Chhattisgarh, with the traditional Bastar Dhokra art representing the state’s tribal culture, craftsmanship and artistic legacy on the international stage.

Chhattisgarh government, under Chief Minister Shri Vishnu Deo Sai, has been promoting the preservation and global outreach of the state’s tribal arts and traditional crafts through various initiatives, while the Culture Department, guided by Culture Minister Shri Rajesh Agrawal, has been working to document, preserve and popularise the state’s cultural heritage.

As per officials, Bastar’s Dhokra art, crafted using the ancient lost-wax casting technique, is among the world’s oldest metal craft traditions. The Tree of Life sculpture symbolises interconnectedness, prosperity, harmony between humans and nature, and reflects India’s philosophy of coexistence.

The motif also resonates with New Zealand's Māori concept of Whakapapa, representing the deep connection between life, nature and ancestry. Like the Dhokra Tree of Life, which depicts all living beings as part of an interconnected with all life forms, Whakapapa also views people, land, rivers, forests and ancestors as part of a continuous lineage, making both traditions powerful expressions of humanity's enduring bond with nature and shared heritage.

Prime Minister Shri Narendra Modi's selection of this sculpture as an international diplomatic gift is a significant recognition of Chhattisgarh's cultural strength on the global stage. It is expected to boost the morale of the state's tribal artists and artisans, open new markets for local handicrafts, and give Chhattisgarh's rich art, culture and tribal heritage greater international recognition.

 

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को मिल रही नई दिशा, नियमित सहायता राशि से बदल रहा परिवारों का जीवन

रायपुर, जुलाई 2026। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और सामाजिक सम्मान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित महतारी वंदन योजना हजारों परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से संचालित इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत नियमित रूप से मिल रही आर्थिक सहायता महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास को भी नई मजबूती प्रदान कर रही है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के विकासखंड गौरेला के ग्राम पंचायत डुमरिया की श्रीमती बसंती धुर्वे इसका प्रेरणादायक उदाहरण है।

श्रीमती बसंती धुर्वे ने बताया कि उन्हें महतारी वंदन योजना की 29वीं किस्त की राशि उनके बैंक खाते में प्राप्त हो गई है। इस राशि से उन्हें दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति, घरेलू खर्चों के बेहतर प्रबंधन तथा परिवार की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण सहयोग मिल रहा है। उन्होंने कहा कि नियमित आर्थिक सहायता मिलने से अब वे अधिक आत्मविश्वास के साथ परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में सहभागी बन रही हैं।

श्रीमती बसंती धुर्वे का कहना है कि महतारी वंदन योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं को सम्मान, आत्मनिर्भरता और स्वाभिमान के साथ जीवन जीने का अवसर भी प्रदान कर रही है। योजना से मिलने वाली राशि महिलाओं को छोटी-छोटी आवश्यकताओं के लिए दूसरों पर निर्भर रहने से मुक्त कर रही है तथा उन्हें परिवार के निर्णयों में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर मिल रहा है।

उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने महिलाओं के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए ऐसी जनकल्याणकारी योजना लागू की है, जिसका लाभ सीधे महिलाओं तक पहुंच रहा है। यह योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ उनके जीवन में आत्मविश्वास, सुरक्षा और सम्मान की भावना भी विकसित कर रही है।

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रभावी क्रियान्वयन के कारण महतारी वंदन योजना का लाभ प्रदेशभर की लाखों महिलाओं तक नियमित रूप से पहुंच रहा है। योजना महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को मजबूत करने, परिवारों की वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ बनाने तथा समावेशी विकास के राज्य सरकार के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

महतारी वंदन योजना आज प्रदेश की महिलाओं के लिए केवल एक आर्थिक सहायता ही नहीं है, बल्कि आत्मनिर्भरता, सम्मान और सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम बनकर उभरी है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार महिलाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने, उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम बनाने और उनके जीवन स्तर में सतत सुधार लाने की दिशा में निरंतर प्रभावी कार्य कर रही है।

 

वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी हुए समारोह में शामिल

सुनियोजित एवं जनोन्मुखी विकास कार्यों को मिलेगी नई गति

रायपुर,  जुलाई 2026/ रायपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) के नवनियुक्त उपाध्यक्ष डॉ. जय प्रकाश शर्मा ने सोमवार को रायपुर विकास प्राधिकरण कार्यालय में विधिवत रूप से अपना पदभार ग्रहण किया। इस अवसर पर वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

कार्यभार ग्रहण समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने डॉ. जय प्रकाश शर्मा को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि रायपुर के सुनियोजित एवं समग्र विकास में रायपुर विकास प्राधिकरण की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्हें विश्वास है कि डॉ. शर्मा के अनुभव, प्रशासनिक क्षमता और जनसेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता से प्राधिकरण की विकास परियोजनाओं को नई गति मिलेगी तथा नागरिकों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

समारोह में रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री नंद कुमार साहू ने कहा कि डॉ. शर्मा के प्रशासनिक अनुभव, चिकित्सा क्षेत्र में लंबे समय तक किए गए कार्य तथा सामाजिक सरोकारों का लाभ रायपुर विकास प्राधिकरण को मिलेगा। उनके नेतृत्व में प्राधिकरण की विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और जनहितकारी कार्यों को नई दिशा एवं गति मिलेगी। उन्होंने आरडीए के माध्यम से आमजन की समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प भी दोहराया।

पदभार ग्रहण करने के बाद डॉ. जय प्रकाश शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और राज्य शासन की जनकल्याणकारी नीतियों के अनुरूप रायपुर विकास प्राधिकरण की योजनाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं जनहितैषी बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि रायपुर शहर के सुनियोजित विकास, आधुनिक अधोसंरचना के विस्तार, गुणवत्तापूर्ण नागरिक सुविधाओं तथा हितग्राही सेवाओं को और अधिक सुलभ एवं प्रभावी बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों एवं हितधारकों के साथ समन्वय स्थापित कर समयबद्ध तरीके से कार्य किया जाएगा।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष श्री राम प्रताप सिंह, रायपुर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अवनीश शरण सहित अनेक जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी, विभागीय अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

 

प्रधानमंत्री की कूटनीतिक सौगात में शामिल हुई बस्तर की जनजातीय कला, मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को मिली वैश्विक प्रतिष्ठा

रायपुर,  जुलाई 2026। भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को विश्व मंच पर प्रतिष्ठित करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि उस समय दर्ज हुई, जब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री श्री क्रिस्टोफर लक्सन को छत्तीसगढ़ के बस्तर की विश्वविख्यात ढोकरा ट्री ऑफ लाइफ (जीवन वृक्ष) धातु शिल्पकृति भेंट की। प्रधानमंत्री की इस विशिष्ट कूटनीतिक सौगात ने न केवल बस्तर की हजारों वर्ष पुरानी जनजातीय कला को वैश्विक पहचान दिलाई है, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक समृद्धि, पारंपरिक शिल्प कौशल और आदिवासी विरासत को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई प्रतिष्ठा प्रदान की है।

यह अवसर पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। राज्य की जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराएं और पारंपरिक हस्तशिल्प आज वैश्विक मंच पर भारत की सांस्कृतिक पहचान का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। प्रधानमंत्री द्वारा विदेशी राष्ट्राध्यक्ष को भेंट के लिए बस्तर की ढोकरा शिल्पकृति का चयन इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ की लोककला आज विश्व स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर चुकी है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति, लोककलाओं और पारंपरिक शिल्पों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राज्य की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाने के लिए विभिन्न योजनाओं और पहलों के माध्यम से कलाकारों तथा शिल्पकारों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसका सकारात्मक परिणाम है कि आज बस्तर की ढोकरा कला जैसी पारंपरिक विरासत वैश्विक कूटनीतिक उपहार का हिस्सा बनकर छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ा रही है।

संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ भी राज्य की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण, दस्तावेजीकरण, प्रदर्शन और प्रचार-प्रसार के लिए लगातार प्रयासरत है। संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में विभाग लोककला, जनजातीय परंपराओं और पारंपरिक शिल्प को नई पीढ़ी से जोड़ने तथा उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में अनेक पहल कर रहा है। ढोकरा शिल्पकृति का वैश्विक स्तर पर सम्मानित होना इन प्रयासों की सार्थकता को भी रेखांकित करता है।

बस्तर की ढोकरा कला विश्व की सबसे प्राचीन धातु शिल्प परंपराओं में से एक मानी जाती है। इसका निर्माण लॉस्ट वैक्स कास्टिंग अर्थात मोम सांचा ढलाई तकनीक से किया जाता है, जिसे विश्व की सबसे पुरानी धातु ढलाई विधियों में शामिल किया जाता है। कुशल जनजातीय शिल्पकार प्रत्येक कलाकृति को पूरी तरह हाथ से तैयार करते हैं, इसलिए हर शिल्पकृति अपनी बनावट, सौंदर्य और कलात्मक अभिव्यक्ति में अद्वितीय होती है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित यह शिल्प परंपरा बस्तर की सांस्कृतिक आत्मा और जनजातीय जीवन-दर्शन का जीवंत स्वरूप है।

प्रधानमंत्री द्वारा भेंट की गई ट्री ऑफ लाइफ (जीवन वृक्ष) शिल्पकृति केवल एक कलात्मक वस्तु नहीं, बल्कि भारतीय दर्शन और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की भावना का सशक्त प्रतीक है। यह परस्पर जुड़ाव, नवजीवन, समृद्धि और मानव तथा प्रकृति के बीच संतुलन का संदेश देती है। भारतीय परंपरा में यह कल्पवृक्ष की अवधारणा का प्रतिनिधित्व करती है, वहीं न्यूजीलैंड के माओरी समुदाय की व्हाकापापा की अवधारणा से भी सामंजस्य स्थापित करती है, जो जीवन, प्रकृति और वंश परंपरा के गहरे संबंध को व्यक्त करती है। इस प्रकार यह शिल्पकृति सांस्कृतिक संवाद और वैश्विक मानवीय मूल्यों का भी प्रतीक बन गई है।

बस्तर की ढोकरा कला केवल हस्तशिल्प नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति, लोकविश्वास, प्रकृति के प्रति सम्मान और सतत जीवनशैली की अभिव्यक्ति है। यह कला स्थानीय शिल्पकारों की आजीविका को सशक्त बनाते हुए पर्यावरण-अनुकूल हस्तनिर्मित उत्पादों की परंपरा को भी आगे बढ़ाती है। प्रत्येक कलाकृति में जनजातीय समाज की सृजनात्मकता, प्रकृति से आत्मीय संबंध और सांस्कृतिक निरंतरता की झलक दिखाई देती है।

 

21 राज्यों के बीच छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अभिनव पवेलियन को मिला राष्ट्रीय सम्मान

तीन दिवसीय आयोजन में निवेश, पर्यटन साझेदारी और राज्य की सांस्कृतिक पहचान को मिली नई ऊंचाई

रायपुर,  जुलाई 2026। ट्रैवल एंड टूरिज्म फेयर (टीटीएफ) कोलकाता-2026 में छत्तीसगढ़ पर्यटन ने अपनी प्रभावशाली उपस्थिति के साथ राष्ट्रीय स्तर पर एक और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। तीन दिवसीय इस प्रतिष्ठित पर्यटन आयोजन के सफल समापन पर छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड को देश के 21 राज्यों की सहभागिता के बीच उसके आकर्षक, सृजनात्मक एवं प्रभावशाली पवेलियन के लिए “बेस्ट डेकोरेशन ऑफ स्टॉल एंड अपीयरेंस” सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय जीवन, प्राकृतिक पर्यटन, धार्मिक धरोहरों और आधुनिक पर्यटन दृष्टिकोण को राष्ट्रीय मंच पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के सफल प्रयासों की महत्वपूर्ण पहचान है।

10 से 12 जुलाई तक कोलकाता के विश्व बंगला प्रांगण में आयोजित देश के प्रतिष्ठित पर्यटन व्यापार मेले में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड का पवेलियन तीनों दिनों तक आगंतुकों, पर्यटन विशेषज्ञों, टूर ऑपरेटर्स और निवेशकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना रहा। बस्तर की जनजातीय संस्कृति, चित्रकोट एवं तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, सिरपुर, भोरमदेव, धार्मिक एवं इको-टूरिज्म, पर्यटन रिसॉर्ट्स तथा राज्य के विविध पर्यटन परिपथों को आधुनिक प्रस्तुतीकरण के माध्यम से प्रदर्शित किया गया, जिसे व्यापक सराहना मिली।

आयोजन के दौरान छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा, पर्यटन विभाग छत्तीसगढ़ शासन के सचिव श्री एस भारतीदासन तथा छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक श्री विवेक आचार्य ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय टूर ऑपरेटर्स, ट्रैवल एजेंसियों, होटल समूहों, पर्यटन विशेषज्ञों और निवेशकों के साथ अनेक महत्वपूर्ण बी-टू-बी बैठकों में सहभागिता की। इन बैठकों में पर्यटन निवेश, संयुक्त पर्यटन पैकेजों के विकास, विपणन सहयोग, नए पर्यटन बाजारों तक पहुंच तथा छत्तीसगढ़ में पर्यटकों की संख्या बढ़ाने की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। इन संवादों से राज्य के पर्यटन क्षेत्र में भविष्य की नई साझेदारियों और निवेश के अवसरों को भी मजबूती मिली।

मेले में छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के साथ राज्य तथा अन्य राज्यों के लगभग 28 पंजीकृत टूर ऑपरेटर्स, होटल संचालकों, होम-स्टे संचालकों और पर्यटन उद्यमियों ने भी सक्रिय सहभागिता की। इससे राज्य के पर्यटन उत्पादों को राष्ट्रीय पर्यटन उद्योग के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने तथा नए व्यावसायिक संबंध स्थापित करने का अवसर प्राप्त हुआ।

आयोजन के उद्घाटन अवसर पर गोवा के पर्यटन मंत्री श्री रोहन ए. खंवटे, उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री श्री सतपाल महाराज, पश्चिम बंगाल के पर्यटन मंत्री डॉ. शंकर घोष तथा थाईलैंड की महावाणिज्य दूत सुश्री सिरीपोर्न तांतीपन्याथेप सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों ने छत्तीसगढ़ पवेलियन का अवलोकन किया था। सभी अतिथियों ने राज्य की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति, धार्मिक विरासत और पर्यटन विकास की संभावनाओं की सराहना करते हुए छत्तीसगढ़ को उभरते हुए पर्यटन गंतव्य के रूप में रेखांकित किया।

छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में राज्य पर्यटन के क्षेत्र में निरंतर नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। उन्होंने कहा कि टीटीएफ जैसे राष्ट्रीय मंच राज्य की पर्यटन संभावनाओं को देश और दुनिया के सामने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इस सम्मान ने यह सिद्ध किया है कि छत्तीसगढ़ आज अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान, प्राकृतिक वैभव और उत्कृष्ट पर्यटन संसाधनों के बल पर राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है।

पर्यटन एवं संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ शासन के सचिव श्री एस भारतीदासन ने कहा कि राज्य सरकार पर्यटन को आर्थिक विकास, स्थानीय रोजगार और सांस्कृतिक संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम मानते हुए योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर छत्तीसगढ़ की प्रभावी सहभागिता से राज्य में पर्यटन निवेश, पर्यटकों की संख्या और निजी क्षेत्र की भागीदारी में सकारात्मक वृद्धि होगी।

 

​13 से 18 जुलाई तक 14 वर्ष की बेटियों को लगेगा निःशुल्क जीवनरक्षक टीका


रायपुर,  जुलाई 2026/ धमतरी जिले में बेटियों को सर्वाइकल (गर्भाशय ग्रीवा) कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए एक बड़ी पहल की गई है। जिले में आज से 18 जुलाई 2026 तक विशेष एचपीवी (HPV) टीकाकरण सप्ताह का आगाज हो गया है। इस महाअभियान के तहत 14 वर्ष की आयु की सभी पात्र बालिकाओं को स्वास्थ्य विभाग द्वारा निःशुल्क जीवनरक्षक HPV टीका लगाया जा रहा है।
​स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए स्कूलों से लेकर स्वास्थ्य केंद्रों तक व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं।

​कैंसर से बचाव का अचूक और सुरक्षित कवच

​मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने अभियान की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) संक्रमण ही सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण है। उन्होंने कहा कि समय पर लगाया गया HPV टीका इस गंभीर कैंसर से बचाव का सबसे सुरक्षित, प्रभावी और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित माध्यम है। यह टीका भविष्य में कैंसर के जोखिम को लगभग समाप्त कर देता है, इसलिए सभी पात्र बालिकाओं का टीकाकरण बेहद जरूरी है।

​यहाँ उपलब्ध होगी टीकाकरण की सुविधा

​अभियान को शत-प्रतिशत सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा शिक्षा विभाग मिलकर काम कर रहे हैं। जिला अस्पताल एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC),​प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) एवं स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र (HWC),​जिले के चिन्हित विद्यालय (स्कूल्स) और ​निर्धारित विशेष टीकाकरण सत्र स्थल पर निःशुल्क उपलब्ध होगा।

बेटियों का स्वस्थ भविष्य हमारी सामूहिक जिम्मेदारी

​धमतरी कलेक्टर ने जिले के सभी माता-पिता और अभिभावकों से इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है।
​कलेक्टर ने अपने संदेश में कहा कि बेटियों का स्वस्थ भविष्य हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। HPV टीका पूरी तरह सुरक्षित है। सभी अभिभावकों से आग्रह करता हूँ कि किसी भी प्रकार की भ्रांति या अफवाह पर ध्यान न दें और स्वास्थ्य विशेषज्ञों पर भरोसा रखकर अपनी 14 वर्ष की बेटियों को यह टीका अवश्य लगवाएं। आपका यह एक छोटा सा निर्णय आपकी बेटी को जीवनभर की सुरक्षा दे सकता है। उन्होंने जिले के सभी जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मितानिनों, स्वयंसेवी संगठनों और सामाजिक संस्थाओं से अपील की है कि वे इसे एक जन-आंदोलन का रूप दें। उन्होंने संकल्प दोहराया कि जिले की एक भी पात्र बालिका इस जीवनरक्षक टीके से वंचित नहीं रहनी चाहिए।

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