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हर साल दशहरे के दिन अपने घर मे पूजा करते हैं मुख्यमंत्री, ग्रामीणों ने कहा, आपका इस दिन विशेष रूप से करते हैं इंतजार

रायपुर. नया खाई एवं नया पानी के अवसर पर अपने गांव कुरूदडीह में पूजा करने पहुंचे मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने इस अवसर पर उपस्थित ग्रामीण जनों से बातचीत की। मुख्यमंत्री हर दशहरे के अवसर पर नया खाई में अपने पैतृक घर मे पूजा करते हैं। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर ग्रामीणजनों से पूछा कि नया खाई की पूजा हो गई क्या। उन्होंने कहा कि हर साल दशहरे में आपके साथ बहुत अच्छा लगता है। ग्रामीणों ने भी कहा कि हम भी उत्सुकता से इस दिन का इंतजार करते हैं। इस मौके पर अपने गांव के पुराने दोस्तों से भी उन्होंने बातें की। उन्होंने अपने बचपन के दिनों को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि किस तरह से वह अपने साथियों के साथ गांव की विभिन्न गलियों में घूमा करते थे।
अपने दोस्त नारायण से पूछा कि चश्मा कब लग गया- अपने दोस्त नारायण को देखकर उन्होंने पूछा- तुम्हें चश्मा कब लग गया। गांव की बुजुर्ग महिलाओं से भी उन्होंने चर्चा की। उन्होंने कहा की मैं आप सबकी दुख तकलीफ में हमेशा साथ खड़ा हूं। गांव की सेवा के लिए हमेशा आपके साथ खड़ा हूं। गांव की महिलाओं ने छत्तीसगढ़ी में मुख्यमंत्री को कहा कि तय नहीं हरबे हमर दुख ला तो कौन हरहि, आपसे ही उम्मीद है अच्छा करत हव, अच्छा होही। चर्चा के दौरान यह पता चला कि गांव कुछ लोगों का नाम मुख्यमंत्री ने ही रखा है। ग्रामीणों से हुई चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि जिन ग्रामीणों से बातचीत हो रही है उनमें से कुछ का नाम तो उन्होंने ही रखा है। मुख्यमंत्री ने मौके पर बच्चों से और बुजुर्गों से भी बातचीत की। पिछली दफा जब मुख्यमंत्री आए थे तब एक बुजुर्ग ने कहा था कि उन्होंने हेलीकॉप्टर नहीं देखा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस दफा वह हेलीकॉप्टर में आए हैं बच्चों के लिए और बुजुर्गों के लिए हेलीकॉप्टर का विशेष कौतूहल होता है। आज आप नयाखाई मनाइए और हेलीकॉप्टर भी देख लीजिए। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने गोधन न्याय योजना के क्रियान्वयन की जानकारी भी ली। गांव के एक बुजुर्ग ने बताया कि वह हर दिन 80 रुपये का गोबर बेच लेते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह से गोबर के माध्यम से भी अतिरिक्त आय आप लोग हासिल कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने भूमिहीन किसानों को भी राहत प्रदान करने के लिए योजना बनाई है। आप सभी उसका आवेदन जरूर करें। आप सभी अपने घर के पीछे केला, आम, नींबू का पेड़ जरूर लगाएं। आंगन में फलदार पेड़ होते हैं तो घर की सुंदरता भी बढ़ती है और बच्चों के पोषण के लिए फल भी मिलते हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि हम सब लोग खेती करते हैं। हमारी उपज का अच्छा दाम मिले, इस पर हमने कार्य किया है। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों की मांगे भी सुनी तथा इनसे संबंधित निर्माण कार्य आरंभ कराने के निर्देश कलेक्टर को दिए।

मुख्यमंत्री राजधानी के रावणभाठा दशहरा उत्सव में हुए शामिल
मुख्यमंत्री ने रावणभाठा मैदान के सौन्दर्यीकरण के लिए एक करोड़ रूपए की राशि के विकास कार्यों का किया भूमिपूजन

रावणभाठा मैदान में लगभग 400 साल से मनाया जा रहा है दशहरा उत्सव

रायपुर. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज सार्वजनिक दशहरा उत्सव समिति श्री दूधाधारी मठ द्वारा आयोजित राजधानी रायपुर के रावणभाठा-टिकरापारा के दशहरा उत्सव में शामिल हुए। उन्होंने इस अवसर पर भगवान श्री राम-लक्ष्मण और भगवान श्री बालाजी की पूजा-अर्चना कर प्रदेश की समृद्धि तथा खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने इस दौरान रावणभाठा मैदान के सौन्दर्यीकरण तथा विकास के लिए स्वीकृत एक करोड़ रूपए की राशि के विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन भी किया।

के रावणभाठा-टिकरापारा के दशहरा उत्सव में शामिल हुए। उन्होंने इस अवसर पर भगवान श्री राम-लक्ष्मण और भगवान श्री बालाजी की पूजा-अर्चना कर प्रदेश की समृद्धि तथा खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने इस दौरान रावणभाठा मैदान के सौन्दर्यीकरण तथा विकास के लिए स्वीकृत एक करोड़ रूपए की राशि के विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन भी किया

मुख्यमंत्री श्री बघेल ने दशहरा उत्सव में शामिल होने पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि श्री दूधाधारी मठ द्वारा आयोजित यह उत्सव छत्तीसगढ़ के सबसे प्राचीन दशहरा उत्सव में माना जाता है। इसके लिए उन्होंने संरक्षक राजेश्री महंत डॉ. रामसुन्दर दास तथा अध्यक्ष श्री मनोज वर्मा सहित पूरे आयोजन समिति की सराहना की। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा कि दशहरा का पर्व असत्य पर सत्य की जीत, अंधकार पर प्रकाश की जीत और अधर्म पर धर्म की जीत का पर्व है। यह पर्व हमें अपने अहंकार तथा बुराई को समाप्त कर अच्छाई तथा सत्य की राह पर चलने की सीख देता है। जब तक हमारे समाज, आस-पास तथा स्वयं में जो बुराई है वह समाप्त नहीं होगी तब तक हम और हमारा समाज आगे नहीं बढ़ पाएगा। इसलिए समाज में अहंकार, बुराई तथा असत्य के प्रतीक रावण का नाश जरूरी है, तभी हम आगे बढ़ पाएंगे।
मुख्यमंत्री श्री बघेल ने बताया कि रावणभाठा में आयोजित दशहरा उत्सव की छत्तीसगढ़ के सबसे प्राचीन दशहरा उत्सव के रूप में विशिष्ट ख्याति और पहचान है। उन्होंने बताया कि राजधानी रायपुर में नागपुर के भोसले वंश के शासन काल से लगभग 400 वर्ष से अब तक यहां दशहरा उत्सव उत्साह के साथ मनाया जाता रहा है। दशहरा उत्सव कार्यक्रम में खाद्य तथा संस्कृति मंत्री श्री अमरजीत भगत, सांसद श्री सुनील सोनी, नगरपालिक निगम रायपुर के महापौर श्री एजाज ढेबर सहित पार्षद तथा गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

डब्ल्यू.आर.एस. कॉलोनी के विजयादशमी उत्सव में मुख्यमंत्री शामिल हुए
मुख्यमंत्री ने सपत्नीक भगवान श्री राम और लक्ष्मण की पूजा की

रायपुर.  विजयादशमी के अवसर पर आज शाम रायपुर के डब्ल्यू.आर.एस. कालोनी में आयोजित दशहरा उत्सव में मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने रावण के पुतले का दहन किया। उन्होंने प्रदेशवासियों को विजयादशमी पर्व की शुभकामनाएं दी और सभी के जीवन में सुख, शांति एवं प्रेम के संचार की कामना की। उन्होंने कहा कि यह पर्व बुराई पर अच्छाई का, असत्य पर सत्य का, अनीति पर नीति के विजय का पर्व है। उन्होंने कहा कि दशहरा पर्व के माध्यम से रावण का पुतला इस बात का द्योतक है कि बुराई और अहंकार चाहे कितनी भी बड़ी और ऊंची हो उसका पतन अवश्य होता है। इसके पहले मुख्यमंत्री ने डब्ल्यूआरएस मैदान पहुंचकर धर्मपत्नी श्रीमती मुक्तेश्वरी बघेल के साथ रामलीला में भगवान बने श्री राम और लक्ष्मण की तिलक लगाकर पूजा की और प्रदेश की खुशहाली की कामना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीराम का छत्तीसगढ़ से गहरा नाता रहा है। दक्षिण कौशल राज्य की पुत्री से राजा दशरथ का विवाह हुआ और इससे उनके आंगन में भगवान राम का जन्म हुआ। वनवासी के रूप में भगवान राम ने लगभग 10 वर्ष छत्तीसगढ़ में बिताए। इस कारण वे वनवासी राम हैं। उन्होंने यहां शिवरीनारायण में माता शबरी से जुठे बेर खाए। इस कारण वे शबरी के राम है और माता कौशल्या के कारण वे कौशल्या के राम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ का जन मानस आज भी भांजे के रूप में भगवान श्री राम को देखता है और इसी कारण केवल छत्तीसगढ़ में मामा द्वारा भांजे की चरण स्पर्श करने की परंपरा है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने स्वयं भगवान श्री राम का जयकारा लगवाया।

पर्व की शुभकामनाएं दी और

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार द्वारा भगवान श्री राम के छत्तीसगढ़ में कोरिया के सीतामणि हरचौका से लेकर दक्षिण सुकमा के रामाराम तक करीब 2200 किलोमीटर के रास्ते को राम वन गमन परिपथ के रूप में विकसित किया जा रहा है और इसके प्रथम चरण में 9 स्थानों को विकसित करने के लिए चयन किया गया है। हाल ही में छत्तीसगढ़ के चंदखुरी में माता कौशिल्या के मंदिर के जीर्णाेद्धार का कार्य किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्री राम द्वारा स्थापित जीवन मूल्य आज भी हमारे लिये आदर्श एवं मार्गदर्शक हैं। आज आवश्यकता है कि हम अपने अंदर के अहंकार, क्रोध, घृणा जैसे मनोविकारों को समाप्त करें। भगवान श्रीराम के आदर्शों को हृदय में संजोए हुए समाज और देश का उत्थान करने का संकल्प लें और छत्तीसगढ़ की प्रगति में अपना योगदान दें।

उन्होंने प्रदेशवासियों को

कार्यक्रम को डब्ल्यू.आर.एस. सार्वजनिक दशहरा उत्सव समिति के अध्यक्ष तथा विधायक एवं छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष श्री कुलदीप जुनेजा ने भी सम्बोधित किया और बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य में प्रथम चरण में 137 करोड़ रूपए की राशि से राम वन गमन पथ को विकसित करने का कार्य किया जा रहा है।
इस अवसर पर संस्कृति एवं खाद्य मंत्री श्री अमरजीत सिंह भगत, डब्ल्यू.आर.एस. सार्वजनिक दशहरा उत्सव समिति के संरक्षक एवं महापौर श्री एजाज ढेबर, महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती किरणमयी नायक, डी.आर.एम. श्री श्याम सुन्दर गुप्ता, सार्वजनिक दशहरा उत्सव समिति के सलाहकार श्री श्रीनिवास राव तथा अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

इस अवसर पर कोलकता और रायपुर के कलाकारों द्वारा आकर्षक आतिशबाजी की गई और रामलीला का मंचन किया गया। मुख्यमंत्री सहित उपस्थित नगरवासियों ने इस अवसर पर खूबसूरत और मनमोहक आतिशबाजी का आनंद उठाया।

नई दिल्ली: कांग्रेस ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया (Mansukh Mandaviya) ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) से बृहस्पतिवार को मुलाकात के बाद उनकी तस्वीर साझा करके हर नैतिक मूल्य और देश के पूर्व प्रधानमंत्री की निजता का हनन किया है.

पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट किया, भाजपाइयों के लिए हर चीज़ ‘फोटो ऑप’ है. शर्म आनी चाहिए देश के स्वास्थ्य मंत्री को, जिन्होंने एम्स में भर्ती पिता तुल्य पूर्व प्रधानमंत्री से मुलाक़ात को पी.आर स्टंट बनाया. यह हर नैतिक मूल्य का उलंघन है, पूर्व प्रधानमंत्री की निजता का हनन है, स्थापित परम्पराओं का अपमान है. माफ़ी मांगें.

उधर, पूर्व प्रधानमंत्री की पुत्री दमन सिंह ने समाचार पोर्टल ‘द प्रिंट’ से बातचीत में आरोप लगाया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के साथ एक फोटोग्राफर के भी उस वार्ड में घुस जाने से परेशान थीं, जिसमें मनमोहन सिंह भर्ती हैं. दमन सिंह ने कहा, मेरी मां बहुत परेशान थीं. मेरे माता-पिता एक मुश्किल हालात से उबरने की कोशिश कर रहे हैं. वे बुजुर्ग हैं. वो कोई चिड़ियाघर में मौजूद जानवर नहीं हैं.’’

मांडविया ने बृहस्पतिवार को सिंह से मुलाकात कर उनकी सेहत का हाल जाना था. उन्होंने ट्वीट कर कहा था, आज पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह जी से एम्स में मुलाक़ात की व उनके स्वास्थ्य के विषय में जानकारी ली. मैं उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं.

गत बुधवार को 89 वर्षीय सिंह को एम्स के कार्डियो-न्यूरो केंद्र के निजी वार्ड में भर्ती कराया गया था और वह डॉक्टर नीतीश नाइक के नेतृत्व में ह्रदय रोग विशेषज्ञों की टीम की देख-रेख में हैं. सिंह को सोमवार को बुखार आ गया था और वह उससे उबर भी गए थे लेकिन उन्हें कमजोरी महसूस होने लगी थी और वह केवल तरल चीजों का सेवन कर पा रहे थे.

जम्मू। जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच हुई मुठभेड़ में एक जूनियर कमीशंड अधिकारी (जेसीओ) सहित सेना के दो कर्मी शहीद हो गए। रक्षा विभाग के एक प्रवक्ता के अनुसार, मेंढर संभाग के नार खास वन क्षेत्र में बृहस्पतिवार शाम एक आतंकवाद रोधी अभियान में जेसीओ और एक जवान गंभीर रूप से घायल हो गए थे। दोनों की ही मौत हो गई है। उन्होंने शुक्रवार को बताया कि अभियान अब भी जारी है। जवान का शव मुठभेड़ स्थल से निकाल लिया गया और जेसीओ का शव अभी वहां से निकाला जाना बाकी है।
उन्होंने कहा पहाड़ी और जंगली इलाके के कारण अभियान में मुश्किल आ रही है। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मंगलवार को कहा था कि पुंछ में सुरक्षा बलों पर हाल ही में हुए हमले में शामिल आतंकवादी पिछले दो से तीन महीनों से इलाके में मौजूद थे। इस हमले में एक जेसीओ सहित सेना के पांच जवान शहीद हो गए थे। राजौरी-पुंछ क्षेत्र के पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) विवेक गुप्ता ने पत्रकारों से कहा कि आतंकवादियों को घेर लिया गया है। ‘‘यह समूह दो-तीन महीने से इलाके में मौजूद था।’’ इस साल राजौरी और पुंछ सीमावर्ती जिलों में कई आतंकवाद रोधी अभियान चलाए गए और कई मुठभेड़ हुई हैं। पुंछ के सुरनकोट इलाके में डेरा की गली (डीकेजी) में 12 अक्टूबर को हुई एक मुठभेड़ में एक जेसीओ सहित पांच सैन्य कर्मी मारे गए थे। वहीं, 12 सितंबर को राजौरी के मंजाकोट के ऊपरी इलाकों में तलाश अभियान के बाद सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में एक अज्ञात आतंकवादी मारा गया था। 19 अगस्त को राजौरी के थानामंडी इलाके में हुई मुठभेड़ में एक जेसीओ की जान चली गई थी। छह अगस्त को थानामंडी सीमवर्ती इलाके के पास हुई मुठभेड़ में लश्कर-ए-तैयबा के दो आतंकवादी मारे गए थे।

नई दिल्ली. नवजोत सिंह सिद्धू ने पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के 18 दिन बाद शुक्रवार को अपना इस्तीफा वापस ले लिया। नाराज चल रहे सिद्धू ने राहुल गांधी से मुलाकात के बाद इस्तीफा वापस लेने की बात कही। पंजाब के प्रभारी हरीश रावत ने मीडिया को इसकी जानकारी दी। पंजाब कांग्रेस में सिद्धू के अचानक इस्तीफा देने के बाद उनके कांग्रेस छोड़ने के भी कयास लगने लगे थे, लेकिन दशहरा के दिन सिद्धू ने इस्तीफा वापस ले लिया। बृहस्पतिवार को संगठन महासचिव केसी. वेणुगोपाल और हरीश रावत से मुलाकात के बाद अपने कदम पीछे हटाने के संकेत दिए थे। 

दरअसल 28 अक्तूबर को इस्तीफा देने के बाद सिद्धू ने जिस तरह के तेवर अपनाए, उससे केंद्रीय नेतृत्व की फजीहत शुरू हो गई, क्योंकि सिद्धू को अध्यक्ष बनाने का फैसला सीधे नेतृत्व का था। वहीं, जिस दिन कांग्रेस कन्हैया कुमार और जिग्नेश मेवानी का पार्टी में स्वागत कर रही थी उससे ठीक पहले सिद्धू ने इस्तीफा बम फोड़कर किरकिरी कराई थी। इसी बात से सोनिया गांधी के साथ राहुल और प्रियंका भी बेहद नाराज थे।

सिद्धू ने कहा...
बैठक के बाद सिद्धू ने मीडिया से कहा, मेरी जो चिंताएं थीं, मैंने राहुल जी के साथ साझा कर दी और सबका समाधान निकल गया। 

 

नई दिल्ली. कोरोना काल में सांसों पर संकट बढ़ा है। संक्रमण की चपेट में आने वाले मरीजों को सांस लेने में कठिनाई जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। संक्रमण से ठीक होने के बाद भी काफी मरीजों के फेफड़े पहले जितने स्वस्थ नहीं रह पा रहे हैं। इनका पल्मोनरी यानी श्वसन रोग तंत्र से जुड़े विशेषज्ञों की निगरानी में लंबे समय तक उपचार की जरूरत है। देश के सबसे बड़े चिकित्सीय संस्थान नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में यह काफी जटिल हो चुका है।


दिल्ली एम्स में पूरा पल्मोनरी विभाग केवल तीन स्थायी और दो अस्थायी डॉक्टरों के दम पर चल रहा है। ये डेढ़ साल से क्षमता से अधिक मरीजों का उपचार कर रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण उन्हें तारीख मिलना भी मुश्किल हो गई है। यह स्थिति तब है, जब एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया स्वयं पल्मोनरी विभाग के प्रमुख रह चुके हैं। वे कोरोना महामारी को लेकर देशभर में लगातार डॉक्टरों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। 


जानकारी के अनुसार, एम्स के डॉक्टर ही संस्थान की कमियों को लेकर सोशल मीडिया पर शिकायतें कर रहे हैं। मरीजों की दुहाई देते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय और पीएमओ को टैग भी कर रहे हैं। डॉ. विजय गुर्जर ने एक मरीज का चिकित्सा कार्ड सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि पल्मोनरी विभाग में पर्याप्त डॉक्टर न होने की वजह से मरीजों के कार्ड पर एनडीए (नो डेट अवेलबल) लिखा जा रहा है। गरीब मरीजों को उपचार के लिए डेट नहीं मिल पा रही है। वहीं एम्स में कोरोना और पोस्ट कोविड के चलते काफी वीआईपी इलाज करा रहे हैं। इससे डॉक्टरों की कमी और गंभीर हो गई है। 

इस मामले में एम्स प्रबंधन ने कोई टिप्पणी नहीं की है। पल्मोनरी विभागाध्यक्ष डॉ. अनंत मोहन ने इसके पीछे डॉक्टरों की संख्या कम होने को कारण बताया। इधर, अस्पताल के चिकित्सकों का कहना है कि केवल रेजीडेंट डॉक्टरों के भरोसे ही ज्यादातर मरीजों का उपचार हो रहा है। ओपीडी आने वाले 80 से 90 फीसदी मरीजों को रेजीडेंट डॉक्टर ही डील कर रहे हैं। वरिष्ठ और फैकल्टी के डॉक्टर वीआईपी और सोर्स वाले मरीजों का इलाज कर रहे हैं। 

एम्स में बिस्तरों का संकट भी बढ़ा
पल्मोनरी के अलावा एम्स के गैस्ट्रो विभाग में भी मरीजों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। एक 40 वर्षीय मरीज को लिवर की गंभीर बीमारी होने के बाद भी इसलिए भर्ती नहीं किया गया, क्योंकि पर्याप्त बिस्तर नहीं हैं। यह मरीज जीबी पंत से लेकर कई सरकारी अस्पतालों में चक्कर लगाने के बाद एम्स पहुंचा था। डॉक्टरों ने इस मरीज के दर्द को साझा करते हुए चिकित्सा सेवाओं में विस्तार की मांग की है।

नई दिल्ली . पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक शनिवार को शुरू हो चुकी है। इस बैठक में राहुल गांधी, सोनिया गांधी, अशोक गहलोत, आनंद शर्मा  समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद हैं। कार्यसमिति की बैठक में नए अध्यक्ष पद के लिए चर्चा होने की पूरी संभावना है। इसके अलावा र्तमान राजनीतिक स्थिति, आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भी चर्चा होगी।

वरिष्ठ नेताओं ने उठाई थी मांग
पिछले दिनों कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक बुलाने की मांग की थी। यहां तक कि कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल और गुलाम नबी आजाद ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक बुलाई जाए और पार्टी के संगठनात्मक चुनाव और आतंरिक मामलों पर चर्चा की जाए। 

पार्टी अध्यक्ष को लेकर उठ रहे थे सवाल 
कांग्रेस में स्थाई पार्टी अध्यक्ष का न होना उसके लिए परेशानी की वजह बन रहा है। पार्टी के अंदर ही इसको लेकर विरोध के शुरू हो गया है। कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने तो यहां तक कह दिया था कि पार्टी का कोई अध्यक्ष नहीं हैं। फैसले कौन ले रहा है, मालूम नहीं है। 

सोनिया गांधी हैं अंतरिम अध्यक्ष 
हालफिलहाल सोनिया गांधी पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष हैं। राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद उन्होंने अध्यक्ष का पदभार संभाला था, लेकिन स्थाई अध्यक्ष की मांग पार्टी ही नहीं पार्टी के बाहर भी होने लगी है। पिछले दिनों शिवसेना ने भी स्थाई अध्यक्ष को लेकर सवाल खड़े किए थे। 

मुंबई . भारत के पूर्व कप्तान और नेशनल क्रिकेट अकेडमी के डायरेक्टर राहुल द्रविड़ भारत के अगले कोच होंगे। इसकी पुष्टि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के सूत्रों ने न्यूज एजेंसी से की है। जानकारी के मुताबिक, द्रविड़ बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली से बातचीत के बाद टीम इंडिया के हेड कोच का रोल निभाने को तैयार हो गए हैं। यह बातचीत शुक्रवार रात को आईपीएल फाइनल के दौरान हुई। 

सूत्रों के मुताबिक, द्रविड़ को इस पद के लिए 10 करोड़ रुपये का ऑफर दिया गया है। इसके साथ ही उन्हें बोनस भी मिलेगा। मौजूदा कोच रवि शास्त्री की सैलरी 8.5 करोड़ रुपये है। द्रविड़ 17 अक्तूबर से 14 नवंबर तक होने वाले टी-20 विश्व कप के बाद पद संभाल लेंगे। उनका कार्यकाल दो वर्ष का होगा

टी-20 विश्व कप के ठीक बाद नवंबर में न्यूजीलैंड की टीम भारत दौरे पर आएगी। इस दौरान 17 नवंबर से दोनों टीमों के बीच तीन टी-20 और दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेली जाएगी। द्रविड़ इससे पहले इंडिया-ए और अंडर-19 टीम के कोच भी रह चुके हैं।
टीम इंडिया के लिए अच्छी खबर
सूत्र के हवाले से न्यूज एजेंसी ने बताया कि द्रविड़ हेड कोच बनने के लिए तैयार हैं और टीम इंडिया के लिए इससे अच्छी खबर नहीं हो सकती। अब बाकी के स्थानों के लिए नए कोच ढूंढे जाएंगे। मौजूदा बैटिंग कोच विक्रम राठौड़ अपने पद पर बने रहेंगे। इसके साथ ही पारस म्हामब्रे गेंदबाजी कोच बनेंगे। वह मौजूदा बॉलिंग कोच भरत अरुण का स्थान लेंगे। फील्डिंग कोच आर. श्रीधर के रिप्लेसमेंट पर कोई फैसला नहीं किया गया है। 

भारतीय टीम फिलहाल बदलाव के दौर से गुजर रही है और युवा खिलाड़ी टीम में आ रहे हैं। सूत्र ने कहा कि कई युवा खिलाड़ी पहले भी द्रविड़ के साथ काम कर चुके हैं। इससे भारतीय क्रिकेट को भी आसानी होगी और टीम चैंपियन बनने की ओर अग्रसर हो सकेगी। 
द्रविड़ हमेशा से ही पहली पसंद
द्रविड़ हमेशा से ही कोच पद के लिए बीसीसीआई की पहली पसंद रहे हैं। हालांकि, इसके लिए बोर्ड सचिव जय शाह और अध्यक्ष गांगुली को द्रविड़ से आराम से बात करने और उन्हें समझाने की जरूरत थी। हालांकि, अब मामला सुलझ गया है। द्रविड़ इस साल जुलाई में श्रीलंका सीरीज पर भी भारतीय टीम के कोच के तौर पर दौरे पर गए थे। टीम इंडिया ने वनडे सीरीज जीती थी। वहीं, कोरोना से प्रभावित टी-20 सीरीज में हार का सामना करना पड़ा था।

गांगुली से बातचीत कर तैयार हुए
सूत्र ने कहा कि जय और सौरव से बातचीत के बाद द्रविड़ तैयार हो गए हैं। द्रविड़ हमेशा से भारतीय क्रिकेट को प्राथमिकता देते हैं। इसलिए उन्हें मनाना आसान रहा। उम्मीद है कि उनके आने से भारतीय टीम नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकेगी।
शास्त्री का कार्यकाल समाप्त हो रहा
दरअसल, टी-20 वर्ल्ड कप के बाद मौजूदा कोच रवि शास्त्री और अन्य सपोर्टिंग स्टाफ के कार्यकाल समाप्त हो जाएंगे। वहीं, विराट कोहली भी टी-20 की कप्तानी छोड़ देंगे। ऐसे में विश्व कप के बाद न्यूजीलैंड के साथ होने वाली घरेलू सीरीज में टीम के नेतृत्व को लेकर संकट बढ़ जाएगा। इसे ध्यान में रखते हुए भारतीय बोर्ड नए विकल्प की तलाश में जुटी है।

शास्त्री 2017 में बने थे मुख्य कोच
शास्त्री 2017 में टीम इंडिया के मुख्य कोच बने थे। उनके कोच रहते टीम इंडिया ने जुलाई 2017 के बाद से 43 टेस्ट, 72 वनडे और 60 टी-20 मैच खेले हैं। 43 में से भारत ने 25 टेस्ट, 72 वनडे में से 51 वनडे और 60 टी-20 में से 40 टी-20 में टीम इंडिया ने जीत हासिल की। इस दौरान टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया में दो बार टेस्ट सीरीज भी जीती।

नई दिल्ली । साल 1984 से भूटान-चीन के बीच चले आ रहे सीमा ‎विवाद को हल करने वार्ता में तेजी लाने के लिए एक समझौते का ऐलान किया है। डोकलाम में भूटानी क्षेत्र के भीतर 73 दिनों तक भारतीय और चीनी सैनिकों के आमने-सामने होने के चार साल बाद यह समझौता हुआ है। 2017 में डोकलाम विवाद के बाद से यह प्रक्रिया ठप हो गई थी।
अप्रैल 2021 में डोकलाम घटना के बाद पहली बार दोनों देशों के एक विशेषज्ञ समूह की बैठक हुई और समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के लिए सहमत हुए। भूटान और चीन ने इस समझौते के तहत थ्री-स्टेप रोडमैप तैयार किया है। इसके जरिए दोनों देशों ने सीमा विवाद को सुलझाने की बात कही है। वहीं चीन की बढ़ती हरकतों ने भारत को सतर्क कर दिया है। यह समझौता भी ऐसा वक्त में हुआ है, जब लद्दाख समेत कई सीमांत क्षेत्रों में चीन के साथ भारत का सीमा विवाद चल रहा है। भारत ने 2017 में भूटान और चीन के बीच समझौतों के उल्लंघन में चीनी सैनिकों द्वारा सड़कों और बुनियादी ढांचे के निर्माण को रोकने के लिए अपने सैनिकों को भेजा था।भूटानी विदेश मंत्रालय के मुताबिक वार्ता को 1988 में सीमा के निपटान के लिए मार्गदर्शक सिद्धांतों और भूटान-चीन सीमा क्षेत्रों में शांति और यथास्थिति बनाए रखने पर 1998 के समझौते द्वारा निर्देशित किया गया है। भूटान और चीन के बीच हो रहे समझौते को लेकर भारत ने कोई कमेंट नहीं किया है। चीन और भूटान को लेकर हो रहे समझौते में भारत को लूप में रखा गया है या नहीं, के सवाल पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा है कि हमने दोनों देश के बीच हो रहे समझौते को नोट किया है। उन्होंने कहा कि भूटान और चीन 1984 से सीमा वार्ता कर रहे हैं। भारत इसी तरह चीन के साथ सीमा वार्ता कर रहा है।
बीजिंग से जारी खराब संबंधों को लेकर भारत सतर्क है। इसके साथ ही नेपाल की तरह भारत भूटान को कतई नाराज नहीं करना चाहता है।एक्सपर्ट्स का मानना है कि भूटान की राजधानी थिम्पू में चीन की राजनयिक उपस्थिति नहीं है। नई दिल्ली ही बीजिंग और थिम्पू के बीच संबंधों का समन्वय करता रहा है। ऐसे में यह असंभव सा है कि भारत को इस समझौते को लेकर जानकारी नहीं हो।

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