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पटना। केंद्रीय मंत्री और लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान ने मंगलवार को दावा किया कि 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद फिर से अपार बहुमत के साथ राजग सत्ता में वापस आएगा और नरेंद्र मोदी ही प्रधानमंत्री होंगे। केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल दौरान देश की अर्थव्यवस्था की अच्छी प्रगति हुई है। सरकार की विदेश नीति और कूटनीति काफी सफल रही है। उन्होंने कहा कि सामाजिक दृष्टि से सरकार ने समाज के हर वर्ग का ख्याल रखा है और अनुसूचित जाति-जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं उच्च वर्ग के लोग एक मंच पर साथ आए हैं। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती के बारे में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में पासवान ने कहा, ‘पहले उनकी पार्टी अगले लोकसभा चुनाव में अपना खाता खोल ले।’ 

उन्होंने कहा कि जिसे सांसदों का समर्थन प्राप्त होगा वहीं प्रधानमंत्री बन सकता है। यह पूछे जाने पर कि क्या उनके पुत्र और लोजपा संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष चिराग पासवान के नोटबंदी के दौरान लोगों को हुई कठिनाई को लेकर वित्त मंत्री अरुण जेटली को लिखे गए पत्र का कोई जवाब उन्हें मिला या नहीं, रामविलास ने कहा कि वह पत्र उन्होंने नोटबंदी के शुरूआती दौर में लोगों की कठिनाईयों के मद्देनजर लिखा था पर (मीडिया और विपक्ष ने) इसे सीट साझा से जोडकर पेश किया।

उन्होंने कहा कि राजग ने बिहार में आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर सीट बंटवारे को अंतिम रूप दे दिया है पर विपक्षी दलों का महागठबंधन अभी आकार भी नहीं ले सका है और घटक दलों के बीच सीट साझा तो दूर बिहार में उसके गठबंधन में कौन कौन दल शामिल हैं यह भी अभी स्पष्ट नहीं। रामविलास ने कहा कि कांग्रेस बिहार में महागठबंधन शामिल है पर उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा के गठबंधन से उसे बाहर रखा गया।

पुणे। आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार ने मंगलवार को आरोप लगाया कि कांग्रेस, वाम और ‘‘दो तीन जज’’ उन गुनहगारों में हैं जो न्याय में देरी कर अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण में अड़चन डाल रहे हैं। उन्होंने दोहराया कि आरएसएस की मांग है कि मंदिर के निर्माण के लिए सरकार अध्यादेश लाए। आरएसएस नेता ने कहा, ‘‘हम सरकार से संसद में चर्चा कराने की अपील करते हैं। हमारा मानना है कि जल्द से जल्द न्याय होना चाहिए।’’ समूचे देश की भावना है कि जितनी जल्दी हो सके भगवान राम के मंदिर का निर्माण होना चाहिए। 

 

 उन्होंने यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कांग्रेस और अन्य दलों के आरोपों को ‘‘मिथ्या’’ बताकर खारिज कर दिया कि सत्तारूढ़ भाजपा आगामी लोकसभा चुनावों में राजनीतिक लाभ लेने के लिए राम मंदिर के मुद्दे को उठा रही है। आरएसएस से संबद्ध राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के अध्यक्ष कुमार कुछ कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए पुणे आए थे। आरएसएस नेता ने आरोप लगाया कि राम मंदिर मामले में न्याय में देरी के लिए कांग्रेस और वाम दल असली गुनहगार हैं। 
 
कुमार ने कहा, ‘‘तीसरे गुनहगार उच्चतम न्यायालय के दो-तीन न्यायाधीश हैं, जो देरी करते जा रहे हैं और ऐसे कदमों से मामले में अड़चन आ रही है।’’ उन्होंने दावा किया कि तीन साल पहले शीर्ष अदालत ने साफ कहा था कि वह जमीन मालिकाना मामले में रोजाना की सुनवाई करेगा और जल्द से जल्द फैसला सुनिश्चित करेगा।

गोरखपुर (उप्र)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कहा कि सपा-बसपा गठबंधन अराजकता और असुरक्षा को बढ़ावा देगा। गोरखनाथ मंदिर में बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने के बाद संवाददाताओं से कहा कि ये गठबंधन भय वश किया गया है और जनता इसे स्वीकार नहीं करेगी।

योगी ने एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘मुझे यकीन है कि यह गठबंधन लंबा नहीं चलेगा । 1993 में सपा की ज्यादा सीटें थीं, बसपा की कम और मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव थे। बसपा ने समर्थन जारी रखा लेकिन गठबंधन लंबा नहीं चला।’’ उन्होंने कहा, ‘‘उत्तर प्रदेश की 23 करोड़ जनता इस गठबंधन को स्वीकार नहीं करेगी क्योंकि यह आत्म सम्मान को परे रखकर बनाया गया है ।’’ 
 
सपा बसपा के पूर्व मुख्यमंत्रियों को कुंभ में आमंत्रित करने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि कुंभ सब के लिए है और हमने सभी को आमंत्रित किया है । उन्होंने कहा कि सपा और बसपा के लोग कुंभ समिति में हैं और यह उन पर है कि वह कुंभ मेले में आएं।

नयी दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने यहां एक अदालत के समक्ष दावा किया है कि जेएनयू छात्र संघ के पूर्व नेता कन्हैया कुमार ने सरकार के खिलाफ नफरत और असंतोष भड़काने के लिए 2016 में भारत विरोधी नारे लगाए थे। अदालत इस मामले में दाखिल आरोपपत्र पर 19 जनवरी को विचार करेगी। पुलिस ने आरोपपत्र में कई गवाहों के बयानों का हवाला देते हुए कहा है कि नौ फरवरी 2016 को विश्वविद्यालय परिसर में कन्हैया प्रदर्शनकारियों के साथ चल रहे थे और काफी संख्या में अज्ञात लोग नारेबाजी कर रहे थे। 

 

 गौरतलब है कि संसद हमले के मास्टरमाइंड अफजल गुरू को दी गई फांसी की बरसी पर विश्वविद्यालय परिसर में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। अदालत 19 जनवरी को आरोपपत्र पर विचार करेगी। यह मामला मंगलवार के लिए सूचीबद्ध था लेकिन संबद्ध न्यायाधीश के अवकाश पर रहने को लेकर मामले की सुनवाई अगली तारीख के लिए मुल्तवी कर दी गई। आरोपपत्र के मुताबिक गवाहों ने यह भी कहा कि कन्हैया घटनास्थल पर मौजूद था जहां प्रदर्शनकारियों के हाथों में अफजल के पोस्टर थे। ‘‘अंतिम रिपोर्ट में कहा गया है कि कन्हैया ने सरकार के खिलाफ नफरत और असंतोष भड़काने के लिए खुद
इसमें कहा गया है कि एजेंसी ने जिन साक्ष्यों को शामिल किया है उनमें जेएनयू की उच्चस्तरीय कमेटी, जेएनयू के कुलसचिव भूपिंदर जुत्सी का बयान और मोबाइल फोन रिकार्डिंग (जिसमें कुमार को कार्यक्रम के रद्द होने को लेकर बहस करते सुना गया) शामिल है। इसमें कहा गया है, ‘‘कन्हैया ने उनसे (जुत्सी) से यह भी कहा कि इजाजत के बगैर भी कार्यक्रम करेंगे।’’ पुलिस ने जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य के बारे में कहा कि उन्होंने भारत विरोधी नारे लगाए थे। आरोपपत्र में कहा गया है कि कई वीडियो में उमर खालिद को नारे लगाते देखा गया है जिससे उसकी मौजूदगी की पुष्टि हुई है। उसके मोबाइल फोन की लोकेशन का भी बतौर साक्ष्य इस्तेमाल किया गया। 

जमुई (बिहार)। जिले में चकाई थाना क्षेत्र के गुरूरबाद गांव में कथित माओवादियों के एक दस्ते ने पुलिस मुखबिरी के संदेह में मंगलवार देर रात दो लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी। इस हमले में एक महिला घायल हुई है। चकाई के थानाप्रभारी चंदेश्वर पासवान ने बुधवार को बताया कि कल देर रात करीब आठ हथियारबंद माओवादियों के दस्ते ने घर में घुस कर बरमोरिया पंचायत के ग्राम कचहरी सचिव मोहम्मद उस्मान (40) और उनके पड़ोसी मोहम्मद गुलाम (38) की गोली मारकर हत्या कर दी।

 

 उन्होंने बताया कि इस हमले में उस्मान की पत्नी सबरीन खातून को हाथ में गोली लगी है। उन्हें चकाई रेफरल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दस्ता दोनों की हत्या करने के बाद मौके से फरार हो गया। उनकी ओर से मौके पर छोड़े गए एक पर्चें में लिखा है ‘पुलिस के लिए मुखबिरी करने का यही अंजाम होता है।’।
मौके से मिले पर्चे के आधार पर स्थानीय पुलिस सूत्रों ने बताया कि यह हथियारबंद दस्ता प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी का था। पासवान ने बताया कि पुलिस और सीआरपीएफ की टीम मौके के लिए रवाना हो गई है। अधिक जानकारी की प्रतीक्षा है।

नयी दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को एक ईसाई संगठन के कार्यक्रम में कहा कि ‘‘हम जीतें या हारें, हम लोगों के बीच भेदभाव नहीं करेंगे’’। उन्होंने यह भी कहा कि देशभर में सामूहिक धर्मांतरण रुकना चाहिए। सिंह ने कहा कि वह किसी भी धर्म के अनुसरण की आजादी का समर्थन करते हैं लेकिन उनकी राय है कि सामूहिक धर्मांतरण किसी भी देश के लिए चिंता की बात है और इसलिए इस विषय पर बहस जरूरी है। उन्होंने कहा कि जहां तक सरकार की बात है तो किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा। राष्ट्रीय ईसाई महासंघ द्वारा आयोजित समारोह में गृह मंत्री ने कहा, ‘‘मैंने कभी अपने जीवन में जाति, वर्ण और धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया है। हमें वोट मिलें या नहीं मिलें। हम सरकार बनाएं या नहीं बनाएं। हम जीतें या हारें। लेकिन हम लोगों के बीच भेदभाव नहीं करेंगे। यही हमारे प्रधानमंत्री का कहना है।’’ 

 

 सिंह ने कहा कि बिना प्रेम के कोई भी सत्ता और शासन में नहीं रह सकता। उन्होंने कहा, ‘‘कोई भी प्रेम से ही शासन कर सकता है। कोई दूसरा तरीका नहीं है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं ईसाई समुदाय को लेकर एक चीज और कहूंगा। हम किसी के खिलाफ आरोप नहीं लगाना चाहते। आपने भी सुना होगा। अगर कोई व्यक्ति किसी धर्म को अपनाना चाहता है तो उसे ऐसा करना चाहिए। इस पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। लेकिन अगर सामूहिक धर्मांतरण शुरू होता है, तो बड़ी संख्या में लोग धर्म बदलना शुरू कर देते हैं, तो यह किसी भी देश के लिए चिंता की बात हो सकती है।’’ सिंह ने कहा कि ब्रिटेन और अमेरिका समेत लगभग सभी देशों में अल्पसंख्यक धर्मांतरण विरोधी कानून की मांग करते हैं। भारत में मैं देखता हूं कि बहुसंख्यक मांग करते हैं कि धर्मांतरण विरोधी कानून होना चाहिए। तो यह चिंता की बात है। ऐसा नहीं होना चाहिए।
 
उन्होंने यह भी कहा कि लोगों के बीच डर की भावना भरने की कोशिशें हो रही हैं। कहा जा रहा है कि ‘‘भाजपा आ गई। अब गड़बड़ होगा। ये होगा, वो होगा। हम डर की भावना भरकर देश नहीं चलाना चाहते। हम विश्वास के साथ देश चलाना चाहते हैं। किसी के अंदर अलगाव की भावना नहीं होनी चाहिए। यही हमारी कोशिश रहेगी।’’ उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि राजग सरकार को बदनाम करने की कोशिशें हो रही हैं। सिंह ने कहा, ‘‘हाल ही में चर्चों पर पत्थर फेंके गये। कुछ पादरी मेरे पास आये और सुरक्षा मांगी। मैंने उन्हें भरोसा दिलाया कि इसमें शामिल सभी लोगों को दंडित किया जाएगा। मैंने उन्हें सुरक्षा का भरोसा भी दिलाया। लेकिन विधानसभा चुनावों से एक महीने पहले पथराव शुरू हुआ और इसके एक महीने बाद रुक गया। इस पर आप क्या कहेंगे। यह किसकी साजिश है?’’

नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय सीबीआई के अंतरिम निदेशक के तौर पर आईपीएस अधिकारी एम नागेश्वर राव की नियुक्ति को चुनौती देने वाली एनजीओ की याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई करेगा। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एन एल राव और न्यायमूर्ति एस के कौल की पीठ के समक्ष बुधवार को इस मामले का तत्काल सुनवाई के लिए उल्लेख किया गया था। याचिकाकर्ता गैर सरकारी संगठन ‘कॉमन कॉज’ और आरटीआई कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने पीठ मामले की सुनवाई शुक्रवार को करने का अनुरोध किया।

 

 न्यायमूर्ति गोगोई ने भूषण से कहा कि इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को करना ‘‘निश्चित ही असंभव’’ है और सुनवाई अगले सप्ताह की जाएगी। सीबीआई के नए निदेशक की नियुक्ति होने तक सीबीआई के अतिरिक्त निदेशक राव को 10 जनवरी को अंतरिम प्रमुख का प्रभार सौंपा गया था।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने आलोक कुमार वर्मा को भ्रष्टाचार और कर्तव्य की उपेक्षा के आरोपों के कारण जांच एजेंसी के प्रमुख पद से हटा दिया था। इस समिति में प्रधानमंत्री मोदी के अलावा लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के प्रतिनिधि के रूप में न्यायमूर्ति ए. के. सीकरी भी थे।

नयी दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने देशद्रोह से जुड़ी भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए को खत्म करने की पैरवी करते हुए बुधवार को कहा कि वर्तमन में इस औपनिवेशिक कानून की जरूरत नहीं है।

 उनका यह बयान उस वक्त आया है जब जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में दो साल पहले हुई कथित नारेबाजी के मामले में दिल्ली पुलिस ने हाल ही में कन्हैया कुमार और अन्य के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया है जिसमें धारा 124ए भी लगाई गयी है। सिब्बल ने ट्वीट किया, 'देशद्रोह के कानून (आईपीसी की धारा 124ए) को खत्म किया जाए। यह औपनिवेशिक है।'।
उन्होंने कहा, 'असली देशद्रोह तब होता है जब सत्ता में बैठे लोग संस्थाओं के साथ छेड़छाड़ करते हैं, कानून का दुरुपयोग करते हैं, हिंसा भड़काकर शांति एवं सुरक्षा की स्थिति खराब करते हैं।' सिब्बल ने कहा, 'इन लोगों को 2019 (लोकसभा चुनाव) में दंडित करिये। सरकार बदलो, देश बचाओ।'

कलर्स चैनल का बहुचर्चित शो ‘खतरों के खिलाड़ी’ का सीजन 9 शुरू हो गया है। 5 जनवरी को इस शो का पहला एपिसोड दिखाया गया। सीजन 9 दक्षिण अमेरिका के आर्जेंटीना हो रहा है। स्टंट बेस्ड रिएलिटी खतरों के खिलाड़ी को पिछले कुछ सीजन की तरह इस सीजन में भी रोहित शेट्टी ही होस्ट कर रहे है।

इस बार ये सीजन एंटरटेनमेंट और कॉमेडी से भरपुर होने वाला है। क्योकि टीवी की मशहूर कॉमेडियन भारती सिंह और उनके पति हर्ष लिंबाचिया भी आए है। बता दें की इस बार के सीजन में 10 कंटेस्टेंट्स है जिसमे भारती सिंह, उनके पति हर्ष लिंबाचिया, श्रीसंत, विकास गुप्ता, आदित्य नारायण, जैसमिन भसीन, रिद्धिमा पंडित, जैन इमाम, पुनीत पाठक, अविका गौर हिस्सा लिया हैं।

शो के होस्ट रोहित शेट्टी का कहना है कि यह शो बेहद मुश्किल भरा है और इसके स्टंट्स को तैयार करने के लिये काफी कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। निर्देशक ने कहा कि शो की सफलता का श्रेय इसकी तकनीकी टीम को जाता है। उन्होंने कहा, ‘खतरों के खिलाड़ी' बेहद ही मुश्किल शो है।

इसके स्टंट्स के लिये खाका तैयारी की योजना बनानी पड़ती है। शो के शुरू होने से पहले कम से कम तीन से छह महीने पहले ही इसकी तैयारियां शुरू कर दी जाती हैं। सबसे पहले हमें शो के सीजन के हिसाब से जगह चुनना होता है। जिसके स्टंट्स की योजना और इसे अंजाम दिया जाता है। हम दिन में तीन स्टंट करते हैं। पूरे सीजन के दौरान कुल 100 स्टंट किये जाते हैं।''

कोरबा: जिले के कुसमुड़ा इलाके में एक अनोखा मामला सामने आया है। एक महिला ने शादी के एक महीने पहले बच्चे को जन्म दिया है। युवती की फरवरी में शादी होने वाली थी, लेकिन उससे पहले ही वह गर्भवती हो गई और आज उसने जिला अस्पताल में एक बच्चे को जन्म दिया है। इस घटना के बाद से पूरे परिवार के लोगों में हड़कंप मच गया है।

मामला कुसमुड़ा गांव का है। यहां रहने वाली युवती और गांव के ही एक युवक के बीच लंबे समय से प्रेम प्रसंग चल रहा था। दोनों ने प्यार की बात परिजनों को बताई, तो दोनों पक्ष के परिवार के सदस्यों ने मिलकर शादी करने का फैसला किया। फरवरी में दोनों की शादी होनी थी। लेकिन शादी तय होने के बाद भी दोनों का मिलना जुलना चालु रहा और इसी बीच दोनों के बीच शारीरिक संबंध बन गए। इसके बाद युवती गर्भवती हो गई और एक बच्चे को जन्म दिया।

इस विवाह को लेकर दोनों पक्ष राजी थी लेकिन वह यह नहीं जानते थे कि दोनों अपनी सीमा रेखा लांघ गए हैं। हालांकि शिशु के जन्म के बाद दोनों पक्षों ने विवाह के लिए सहमति जता दी है। युवती ने भी माना कि वह जज्बात पर काबू नहीं कर पाए पर अगले माह विधिवत रूप से वे सात फेरे लेंगे दोनों के परिवार को इस पर आपत्ति नहीं है। अपने ही माँ-बाप की शादी का गवाह बनने वाले शिशु विरले होते होंगे।

 

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