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शिरडी। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को यहां कहा कि वह ‘‘जोड़ तोड़’’ की राजनीति में भरोसा नहीं रखते हैं। शिवराज ने मंगलवार दोपहर बाद अपने परिवार के सदस्यों के साथ यहां साईं बाबा के मंदिर में दर्शन किये। एक सवाल के जवाब में भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि जीत और हार लोकतंत्र का हिस्सा है। शिवराज ने कहा, ‘‘हाल ही में हुए चुनावों में कांग्रेस स्पष्ट बहुमत पाने में विफल रही है जबकि भाजपा को पहले से अधिक मत मिले हैं। मैं ‘जोड़ तोड़’ अथवा ‘घटिया’ राजनीति में विश्वास नहीं रखता हूं। सबसे अधिक विधायक वाली पार्टी (सबसे बड़ी पार्टी) को सरकार चलाने का अधिकार होना चाहिए।’’ अगर कांग्रेस सरकार जनहित के काम करती है तो प्रमुख विपक्षी पार्टी होने के नाते भाजपा सहयोग करेगी लेकिन ऐसा नहीं होने पर पार्टी विरोध करेगी।

मुख्यमंत्री कमलनाथ के प्रदेश में किसानों की कर्जमाफी के ऐलान बारे में पूछे जाने पर चौहान ने कहा कि केवल कर्ज माफ कर देना किसानों की मदद के लिए पर्याप्त नहीं है। मध्य प्रदेश में बहुत कम अंतर से हारने वाली भाजपा के नेता से जब यह पूछा गया कि क्या वह दिल्ली की राजनीति में सक्रिय होंगे तो इस पर उन्होंने विरोधाभासी बयान दिया। उन्होंने कहा, ‘‘मैं पार्टी एक ईमानदार कार्यकर्ता हूं। पार्टी मुझे जो कहेगी मैं करूंगा। लेकिन मेरा व्यक्तिगत तौर पर मानना है कि मैं मध्य प्रदेश के 7.5 करोड़ जनता से जुड़ा हूं।’’ यह पूछने पर सात जनवरी से शुरू हो रहे विधानसभा के सत्र में उनका क्या रूख होगा, पूर्व मुख्यमंत्री ने हलके अंदाज में कहा, ‘‘मैं सात जनवरी को कोई ‘शिव तांडव’ नहीं करूंगा।’’ 

जयपुर। राजस्थान की महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री :स्वतंत्र प्रभार: ने कथित तौर पर कहा कि 'हमारा प्रथम कार्य हमारी जाति के लिये, उसके बाद समाज के लिये और फिर सर्वसमाज के लिये है।' अशोक गहलोत सरकार में एक मात्र महिला मंत्री ममता भूपेश अनुसूचित जाति का प्रतिनिधित्व करती है।

रविवार को 'बैरवा दिवस' पर अलवर में आयोजित एक कार्यक्रम में ममता भूपेश ने लोगों को विश्वास दिलाया कि जब भी उनके लोगों को आवश्यकता होगी, वह मौजूद रहेंगी।’’

उन्होंने कहा 'जब भी हमारी आवश्यकता होगी, मैं कभी आपको पीठ नहीं दिखाउंगी। मैं यह विश्वास दिलाना चाहती हूं कि हमारा प्रथम कार्य हमारा हमारी जाति के लिये, उसके बाद हमारे समाज के लिये और फिर सर्व समाज के लिये, सबके लिये होगा। हमारी कोशिश रहेगी कि हम सबके लिये काम करें, सबको लाभ दे पायें'।

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को बताया कि विभिन्न स्तरों पर काम कर रहे लगभग चार हजार सरकारी अधिकारियों को सरकार ने नये साल का तोहफा देते हुए उन्हें पदोन्नति दी है। कार्मिक राज्य मंत्री ने कहा, ‘‘इनमें से अधिकतर पदोन्नति 10 से 15 साल से भी अधिक समये से या तो मुकदमे अथवा अन्य कारणों से लंबित थी। जहां तक संभव हो, बैकलॉग को हटाने का निर्णय किया गया है...।" केंद्रीय मंत्री ने संतोष जाहिर करते हुए कहा कि यह मसला उनके बहुत करीब था।

 
सिंह ने बताया, ‘‘इन कर्मचारियों के लिए यह नये साल का तोहफा है। जब से मैं 2014 में कार्मिक विभाग में आया हूं, मुझे इस बात से बहुत दुख होता था कि हर महीने दर्जनों सरकारी अधिकारी वर्षों से बिना किसी पदोन्नति के ही अवकाश ग्रहण कर रहे हैं।’’ एक आधिकारिक बयान के अनुसार 3991 अधिकारियों को पदोन्नति दी गयी है। इनमें 1756 अधिकारी केंद्रीय सचिवालय सेवा के हैं जबकि 2235 केंद्रीय सचिवालय स्टेनोग्राफर सेवा के हैं। मंत्री ने बताया कि सेक्सन आफिसर के 584 और अधिकारियों की पदोन्नति पहले से ही प्रक्रिया में है और आने वाले कुछ दिनों में इस संबंध में आदेश जारी कर दिये जायेंगे।

पूर्व केन्द्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी तथा वरिष्ठ अधिवक्त प्रशांत भूषण ने राफेल मुद्दे पर 14 दिसंबर को आए उच्चतम न्यायालय के फैसले की समीक्षा के लिए बुधवार को सर्वोच्च अदालत में पुनर्विचार याचिका दायर की। न्यायालय ने अपने 14 दिसंबर के फैसले में फ्रांस से 36 राफेल विमानों की खरीदी प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाने वाली सभी जनहित याचिकाओं को खारिज कर दिया था। पुनर्विचार याचिका में तीनों ने आरोप लगाया है कि फैसला ‘‘सरकार की ओर से बिना हस्ताक्षर के सीलबंद लिफाफे में सौंपे गए स्पष्ट रूप से गलत दावों पर आधारित था।’’ उन्होंने याचिका पर सुनवाई खुली अदालत में करने का अनुरोध भी किया है।

 
कांग्रेस का कहना है कि राफेल विमान सौदा फ्रांस के साथ किया गया। इस विमान को अधिक कीमत पर खरीदा गया। यह विमान संप्रग सरकार की तुलना में तीन गुना अधिक कीमत पर खरीदा गया लेकिन सरकार विमान की कीमत क्यों नहीं बता रही है। कांग्रेस का सवाल है कि इस संबंध में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी को अनुबंध क्यों नहीं दिया गया। कांग्रेस का आरोप है कि इसमें 30 हजार करोड़ रूपये का कथित घोटाला हुआ है। इस मामले की संयुक्त संसदीय समिति से जांच करायी जाए।

सिडनी। सुनील गावस्कर आस्ट्रेलिया के खिलाफ चौथे और आखिरी टेस्ट के बाद बार्डर गावस्कर ट्राफी पुरस्कार वितरण से बाहर रह सकते हैं जबकि भारतीय कप्तान विराट कोहली को यह ट्राफी मिलने जा रही है।

 

गावस्कर ने कहा कि उन्हें क्रिकेट आस्ट्रेलिया से न्यौता नहीं मिला है। भारत ने श्रृंखला में 2–1 की बढत ले ली है और पिछले साल अपने देश में ट्राफी जीतने वाली भारतीय टीम इसे बरकरार रखेगी। 

गावस्कर ने इंडिया टुडे से कहा ,‘‘ मुझे क्रिकेट आस्ट्रेलिया के मुख्य कार्यकारी जेम्स सदरलैंड ने मई में पत्र भेजकर बार्डर गावस्कर ट्राफी देने के लिये मेरी उपलब्धता के बारे में पूछा था । मैं जाना चाहता था लेकिन उनके इस्तीफा देने के बाद से मुझसे कोई संपर्क नहीं किया गया।’’

सिडनी। आस्ट्रेलिया के कप्तान टिम पेन ने बुधवार को कहा कि उनकी टीम भारत के खिलाफ पहली बार घरेलू टेस्ट श्रृंखला गंवाने की संभावना से परेशान नहीं है और यहां चौथे टेस्ट में उसका ध्यान प्रतिस्पर्धी होने पर रहेगा। आस्ट्रेलियाई सरजमीं पर भारत कभी टेस्ट श्रृंखला नहीं जीत पाया है लेकिन मौजूदा श्रृंखला में मेहमान टीम 2-1 से आगे है और इतिहास रचने के लिए गुरुवार से हो रहे टेस्ट में विराट कोहली की टीम को मेजबान टीम के खिलाफ सिर्फ ड्रा की दरकार है। पेन ने मैच से पूर्व प्रेस कांफ्रेंस में स्वीकार किया, ‘‘मेरा ध्यान इस पर है कि हम अपने प्रदर्शन में सुधार करें और अपना सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट खेलें। हम जिस भी टेस्ट में खेलें उसे जीतना चाहते हैं। कभी कभी ऐसा करना संभव नहीं होता। हम फिलहाल दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टेस्ट टीम के खिलाफ खेल रहे हैं जो काफी अच्छा प्रदर्शन कर रही है।’’ आस्ट्रेलिया को मेलबर्न में तीसरे टेस्ट में 137 रन से हार का सामना करना पड़ा था।

 

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने श्रृंखला गंवाने के बारे में काफी नहीं सोचा है। अलग अलग खिलाड़ी प्रेरणा के लिए अलग अलग चीजों का इस्तेमाल करते हैं। मेरी प्रेरणा यह सुनिश्चित करना है कि हमारे प्रदर्शन में सुधार हो, हम हर समय प्रतिस्पर्धी रहें और भारत के खिलाफ अच्छी चुनौती पेश करें।’’ पेन ने कहा कि आस्ट्रेलिया का अनुभवहीन बल्लेबाजी क्रम मेलबर्न में नाकाम रहा लेकिन धीरे-धीरे अपनी गलतियों से सीख रहा है। आस्ट्रेलिया का कोई बल्लेबाज मौजूदा श्रृंखला में शतक नहीं जड़ पाया है और कप्तान को उम्मीद है कि अंतिम मैच में टीम इसकी भरपाई करेगी। उन्होंने कहा, ‘‘जैसा कि मैंने पहले भी कहा कि हम लगातार काम कर रहे हैं। मुझे लगता है कि हम बेहतर होने के संकेत दे रहे हैं।’’ 

पेन ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि पिछले टेस्ट में हमारे बल्लेबाजों ने बेजोड़ प्रदर्शन नहीं किया लेकिन अधिकांश खिलाड़ियों ने अच्छी शुरूआती की जो दर्शाता है कि वे इस स्तर पर सफल हो सकते हैं। इसलिए इस टेस्ट में हमारा ध्यान मुख्य रूप से हमारे बल्लेबाजी समूह पर होगा।’’ स्टीव स्मिथ और डेविड वार्नर का गेंद से छेड़छाड़ मामले में प्रतिबंध मार्च में खत्म हो रहा है। कप्तान पेन ने सीधे इनका जिक्र नहीं किया लेकिन टीम में अनुभव की बात की। उन्होंने कहा, ‘‘हमें पता है कि बिना शतक जड़े हम अधिक मैच नहीं जीतने वाले और हमने इस बारे में बात भी की है। हम इसमें सुधार को लेकर उत्सुक हैं।’’ पेन ने कहा, ‘‘अच्छी बात यह है कि कुछ मैचों के बाद कुछ विश्व स्तरीय बल्लेबाज उपलब्ध होंगे और हमारे पास कुछ युवा खिलाड़ी भी होंगे जो आठ से 10 टेस्ट खेल चुके होंगे। यह आस्ट्रेलियाई क्रिकेट के लिए शानदार चीज होगी।’’

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोहराबुद्दीन मुठभेड़ मामले में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को अदालत से राहत मिलने के बाद बुधवार को कहा कि यह निर्णय देश के उभरते हुए ‘महापुरुषों और महानुभावों’ के खिलाफ कांग्रेस द्वारा किये जा रहे षड्यंत्रों को पूरी तरह उजागर करता है। इसके लिये कांग्रेस को देश से माफी मांगनी चाहिये। मुख्यमंत्री ने यहां संवाददाता सम्मेलन में सोहराबुद्दीन मामले में सीबीआई की विशेष अदालत के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस की समाज विरोधी और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों का लगातार भंडाफोड़ हो रहा है। कुछ ही दिनों के अंदर तीसरी बार कांग्रेस के षड्यंत्र और राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ के शर्मनाक कृत्य देश की जनता के सामने आये हैं। 

 

 
योगी ने कहा कि हाल ही में सीबीआई की विशेष अदालत ने 2007 में गुजरात में हुए सोहराबुद्दीन मुठभेड़ मामले में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के साथ ही सभी अन्य लोगों को आरोपों से मुक्त किया है। ‘‘अदालत का फैसला इस देश के उभरते हुए महापुरुषों और महानुभावों के खिलाफ कांग्रेस द्वारा किये जा रहे षड्यंत्रों को पूरी तरह उजागर करता है।’’ योगी ने कहा कि हालांकि शाह को उच्चतम न्यायालय ने 2014 में और उससे पहले मुम्बई की अदालत ने भी बरी किया था। लेकिन फिर भी तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उस समय प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह ने उन्हें जेल भेजने का षड्यंत्र किया। जिन व्यक्तियों से कांग्रेस को भय हो रहा था, उन्हें फर्जी और मनगढ़ंत तरीके से फंसाने के कुत्सित प्रयास किये गये।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सोहराबुद्दीन रूपी आतंकवादी के हितों के लिये लड़ रही है। देश की सम्प्रभुता के खिलाफ लड़ने वाले आतंकवादी के पक्ष में किस तरह से तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने लॉबिंग करके शाह को जेल भेजने की साजिश रची। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को देश के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिये और देश की जनता से माफी भी मांगनी चाहिये।
नया वर्ष हर व्यक्ति के लिए बीते हुए वर्ष की सफलताओं और उपलब्धियों के साथ-साथ कमियों और गलतियों का मूल्यांकन करने का समय है। यह हमें अपने आप को भावी वर्ष के लिए योजना बनाने, कार्य करने तथा आगामी वर्ष के लिए नये लक्ष्य तय करने का अवसर प्रदान करता है। नए साल की शुरुआत में हर व्यक्ति को भावी वर्ष के लिए नए लक्ष्य बनाने चाहिए और उन्हें पूरा करने की रणनीति बनानी चाहिए। जिससे कि अवसरों को सफलता में बदला जा सके। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने बीते वर्ष में अनेक उपलव्धियाँ हासिल की हैं, साथ-साथ अनेक सफलताएं भी पायी हैं। इन सफलताओं और उपलब्धियों में मोदी सरकार को अपनी गलतियों और कमियों पर पर्दा नहीं डालना चाहिए। बल्कि अपनी गलतियों और कमियों का मूल्यांकन करके भावी वर्ष के लिए रणनीति बनानी चाहिए। जिससे कि गलतियों और कमियों को सुधारकर अवसरों में बदला जा सके।
 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते वर्ष में जिस प्रकार से अनेक चुनौतियों का सामना किया, उसी प्रकार भावी वर्ष में भी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। कहा जाए तो साल 2019 में नरेंद्र मोदी को अनेक अग्नि परीक्षाओं से गुजरना पड़ेगा। 5 राज्यों (मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम) में हार के बाद सबसे पहली अग्नि परीक्षा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए 2019 का लोकसभा चुनाव होगा। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा नरेंद्र मोदी और अपने मुख्यमंत्रियों के नेतृत्व में मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में अपनी सत्ता गंवा चुकी है और तीनों ही राज्यों में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की सरकार बन चुकी है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की बात की जाए तो यहाँ भाजपा की पिछले पंद्रह साल से शिवराज सिंह चैहान और डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में सरकारें थीं। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में शिवराज सिंह चैहान और डॉ. रमन सिंह ने काफी विकास के काम किये इसके बावजूद भी दोनों राज्यों में भाजपा को सत्ता विरोधी लहर में हार का सामना करना पड़ा।
अगर राजस्थान की बात की जाए तो राजस्थान ने अपने इतिहास को दोहराते हुए इस बार कांग्रेस को मौका दिया है क्योंकि पिछले कई सालों से राजस्थान का इतिहास रहा है की यहाँ पांच साल भाजपा की सरकार रहती है तो उसके पांच साल बाद कांग्रेस की सरकार रहती है। ऐसा नहीं है कि राजस्थान में भाजपा ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नेतृत्व में वहाँ विकास के कार्य नहीं किये, पिछले 5 सालों में वसुंधरा सरकार ने वहाँ काफी विकास के कार्य किये लेकिन सत्ता विरोधी लहर ने राजस्थान में फिर अपने इतिहास को दोहराया है। तेलंगाना की बात की जाए तो वहाँ के॰ चंद्रशेखर राव (केसीआर) तेलंगाना राज्य बनाने के बाद लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बने हैं वहाँ केसीआर की पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति ने 119 सीटों में से 88 सीटें जीती हैं।
 
लोकसभा का सेमीफाइनल माने जा रहे इन 5 राज्यों (मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम) के चुनाव में भाजपा पूरी तरह से असफल होती दिखी। बेशक कांग्रेस पार्टी ने राहुल गाँधी के नेतृत्व में मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में अपनी सरकार बना ली हो लेकिन आज भी कांग्रेस भाजपा से राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की स्थिति में नहीं है। इसका प्रमुख कारण नरेंद्र मोदी जैसे विराट व्यक्तित्व के सामने एक दमखम वाले नेता का नहीं होना है। अभी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रतिस्पर्धा करने की स्थिति में नहीं हैं और न ही उनके पास नरेंद्र मोदी जैसा लम्बा अनुभव है। यही बात नरेंद्र मोदी के लिए एक प्लस पॉइंट है। आज भी विभिन्न चैनलों और एजेंसियों के सर्वेक्षण में नरेंद्र मोदी ही प्रधानमंत्री के रूप में देश के सबसे लोकप्रिय नेता हैं। बेशक भाजपा पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हारी हो लेकिन नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता में आज भी कोई कमी नहीं आयी है। अगर ऐसी ही लोकप्रियता नरेंद्र मोदी की नए वर्ष 2019 में देखने को मिलती है तो निश्चित रूप से 2019 के संसदीय चुनावों में भाजपा को नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कोई जीतने से कोई भी पार्टी और नेता नहीं रोक सकता।
 
अब 2019 के आगामी लोकसभा चुनावों में भाजपा की सफलता और असफलता सीधे-सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की साख को प्रभावित करेगी। 2019 के लोकसभा चुनाव में जीत का सेहरा भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सिर पर सजेगा और हार का ठीकरा भी मोदी के मत्थे मढ़ा जाएगा। क्योंकि 2019 का लोकसभा चुनाव भाजपा अपने लोकप्रिय प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ही लड़ेगी। 5 राज्यों में भाजपा को करारी हार के बाद अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर होना पड़ा है। पहले भाजपा नेताओं के बयान आते थे कि भाजपा अजेय है लेकिन पांच राज्यों (मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम) में भाजपा को हराकर जनता ने भाजपा को सबक सिखाते हुए बता दिया कि अतिआत्मविश्वास, बड़बोलापन और जरूरत से ज्यादा घमंड कभी-कभी काफी भारी पड़ जाता है। अब भाजपा के नेता भी कहने लगे हैं कि हार-जीत राजनीति का अहम् हिस्सा है। लेकिन भाजपा भी अपनी गलतियों से जल्दी सीखने वाला पार्टी है। भाजपा अब 2019 के लोकसभा के चुनाव का रण जीतने के लिए नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक नयी रणनीति के साथ कमर कस चुकी है।
 
2019 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सबसे ज्यादा साख उत्तर प्रदेश में लगी है। एक तो नरेंद्र मोदी उत्तर प्रदेश के वाराणसी से सांसद हैं, साथ-साथ 2014 के लोकसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने में सबसे बड़ी भूमिका उत्तर प्रदेश की रही है। अगर उत्तर प्रदेश में भाजपा अच्छा प्रदर्शन करती है तो नरेंद्र मोदी की साख बढ़ेगी। अगर भाजपा का लचर प्रदर्शन रहता है, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर चारों तरफ से दवाब बढ़ेगा। उत्तर प्रदेश में भाजपा को सपा, बसपा, कांग्रेस, रालोद जैसी धुरंधर पार्टियों से भिड़ना पड़ेगा। अगर उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा का महागठबंधन होता है तो भाजपा के लिए उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों को जीतने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ेगी। क्योंकि गोरखपुर, फूलपुर और कैराना के लोकसभा उपचुनाव में विपक्ष ने एकजुटता का परिचय देते हुए भाजपा को करारी शिकस्त दी। खुद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री (योगी आदित्यनाथ और केशव प्रसाद मौर्या) महागठबंधन के सामने अपनी-अपनी लोकसभा सीटों को भी नहीं बचा पाए। गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा के उपचुनावों में भाजपा की हार भाजपा के लिए बड़ा सबक थी और विपक्ष के लिए आगामी 2019 के लोकसभा चुनाव में महागठबंधन बनाने लिए सन्देश थी। अगर सपा और बसपा और अन्य विपक्षी दलों का उत्तर प्रदेश में गठबंधन होता है तो भाजपा को इस चक्रव्यूह को भेदना मुश्किल हो जाएगा। क्योंकि आम मध्यम वर्ग मोदी सरकार से नोटबंदी और जीएसटी की वजह से पहले से ही नाराज चल रहा है। कहा जाए तो सरकार द्वारा आर्थिक सुधारों के लिए नोटबंदी और जीएसटी लागू करना काफी अच्छे कदम थे लेकिन मोदी सरकार नोटबंदी और जीएसटी के फायदे आम लोगों तक बताने में पूर्ण रूप से नाकाम रही है। तभी तो देश का मध्यम वर्ग मोदी सरकार से नाराज है। अभी भी नरेंद्र मोदी के लिए जनता तक अपनी योजनाओं और उसके फायदे पहुंचाने के लिए वक्त है अगर नरेंद्र मोदी अपनी इन योजनाओं के फायदे आम लोगों तक पहुंचाने में कामयाब होते हैं तो नरेंद्र मोदी के लिए 2019 का लोकसभा चुनावों का रण आसान हो जाएगा। प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी कि सबसे बड़ी खूबी यही है कि वह अपने जोरदार भाषणों से लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करते हैं, ऐसी कला हर नेता में नहीं होती है।
 
 
नरेंद्र मोदी ने देश का प्रधानमंत्री बनने के बाद सम्पूर्ण भारत देश का विश्व स्तर पर मान बढ़ाया है। नरेंद्र मोदी का मन्त्र है ‘‘न किसी को आंख दिखाएंगे, न आंख झुकाएंगे’’ इसी मन्त्र के साथ नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अहम स्थान है। आज पाकिस्तान जैसे देश जिसमें आतंकवाद का पोषण किया जाता है, को विश्व स्तर पर अलग-थलग करने में नरेंद्र मोदी की कूटनीति का ही अहम योगदान है। आज नरेंद्र मोदी की कूटनीति का ही कमाल है जिससे चीन जैसे बड़े देश को डोकलाम विवाद पर अपने पैर पीछे खींचने पड़े। एक समय डोकलाम विवाद को लेकर ऐसा लग रहा था कि भारत और चीन के बीच युद्ध होकर रहेगा। लेकिन चीन की तरफ से उकसाने वाले बयान आने के बाबजूद भी नरेंद्र मोदी ने संयम से इस गतिरोध का हल निकाला। जिसका नतीजा ये रहा कि चीन को डोकलाम से अपनी सेना वापस बुलानी पड़ी। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरे विश्व में भारत की जय-जयकार हो रही है। आज नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विश्व स्तर पर भारत की धूम मची है। इसके अलावा जब से नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री बने है तब से देश प्रगति के रास्ते पर जा रहा है। नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री रहते हुए अब तक दर्जनों जनमानस से जुड़ी हुई योजनाओं को लागू कराया है, जिसका सीधा-सीधा लाभ आम जनता को हो रहा है। पहली बार नरेंद्र मोदी नीति सरकार द्वारा हमारी बहादुर सेना के नेतृत्व में पाकिस्तान में घुसकर लक्षित हमले किये गये और पाकिस्तान को सख्त सन्देश दिया गया कि हिन्दुस्तान अब पाकिस्तान पोषित आतंकवाद को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा। कश्मीर में भी अब तक भारतीय सेना द्वारा दर्जनों बड़े आतंकवादियों को मार गिराया है। कश्मीर में अलगाववादियों पर भी टेरर फंडिंग मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने शिकंजा कसा हुआ है। ये वे लोग हैं जो कश्मीर घाटी में विध्वंसक गतिविधियों के लिए पाकिस्तान से धन लेते रहे हैं। 
 
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने देश में कई बड़े आर्थिक सुधार किये हैं जिनमें प्रमुख रूप से नोटबंदी और देश में जीएसटी का लागू होना है। एक समय ऐसा लग रहा था कि नोटबंदी का देश में बड़े पैमाने पर विरोध होगा लेकिन विपक्ष के विरोध के बाबजूद देश की आम जनता ने नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फैंसले को खुशी-खुशी स्वीकार किया। नोटबंदी की वजह से ही देश में नगदीरहित लेन-देन बढ़ा है। नोटबंदी के बाद ही देश के अधिकतर लोगों में कैशलेस लेनदेन के प्रति जागरूकता आयी है। सरकार कैशलेस लेनदेन के लिए भीम एप्प भी काफी समय पहले लांच कर चुकी है, जिसने नगदीरहित लेन-देन में एक अहम् भूमिका निभाई है। आज के समय में व्यक्ति को नकद रखने कि कोई जरूरत नहीं है, आज सिर्फ आदमी के मोबाइल में भीम एप्प होना चाहिए। इसके साथ ही प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने देश में 01 जुलाई 2017 से जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) को लागू कराया।
 
भारतीय संविधान में वस्तु एवं सेवा कर व्यवस्था को लागू करने के लिए संशोधन किया गया है। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को देश में लागू करा पाना भी मोदी सरकार के लिए बहुत बड़ी चुनौती थी। लेकिन मोदी सरकार ने इस चुनौती का सामना करते हुये अंततः सफलता प्राप्त की। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) भारत की सबसे महत्वपूर्ण अप्रत्यक्ष कर सुधार योजना है। जिसका उद्देश्य राज्यों के बीच वित्तीय बाधाओं को दूर करके एक समान बाजार को बांध कर रखना है। इसके माध्यम से सम्पूर्ण देश में वस्तुओं और सेवाओं पर एकसमान कर लगाया जा रहा है। इससे देश के सभी नागरिकों और व्यापारियों को सीधा-सीधा फायदा मिल रहा है और कालाबाजारी तथा चोरी पर रोक लगाने में मदद मिल रही है। जीएसटी परिषद् ने इसमें चार तरह के कर निर्धारित किये हैं ये 5, 12, 18 एवं 28 प्रतिशत हैं। हालांकि सरकार ने बहुत सी चीजों को जीएसटी से छूट दी है। वार्षिक 20 लाख से कम की बिक्री वाले व्यापारियों को जीएसटी व्यवस्था से छूट दी गई है। इस कर व्यवस्था से देश में करदाताओं की संख्या में कई गुना इजाफा हुआ है और इसका सीधा-सीधा फायदा देश को हो रहा है। लेकिन मोदी सरकार ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को तो देश में लागू करा दिया लेकिन मोदी सरकार वस्तु एवं सेवा कर के फायदे लोगों तक पहुंचाने में नाकाम रही है। आज भी देश में बहुत सारे व्यापारी लोग (एक बहुत बड़ा वर्ग) अपने उद्योगों की मंदी के लिए जीएसटी को जिम्मेदार मानते है। सरकार इन्हीं व्यापारियों को अब तक वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के फायदे बताने में नाकाम रही है। सरकार की यही नाकामी नरेंद्र मोदी के लिए आगामी 2019 के लोकसभा चुनावों में भारी पड़ सकती है। अगर सरकार अब भी अपने प्रचार तंत्र को मजबूत कर देश के प्रत्येक व्यापारी तक जीएसटी के खिलाफ भ्रम को दूर करने में कामयाब रहती है तो यह मोदी सरकार के लिए बहुत बड़ी कामयाबी होगी। इसके साथ ही सरकार जीएसटी रेट स्लैब को 5, 12, 18 एवं 28 प्रतिशत से बदलकर एक ही रेट स्लैब में करती है तो इसका फायदा देश की आम जनता को होगा।  
 
इसके साथ ही नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत वर्तमान वित्तीय वर्ष (2018-19) तक देश भर में 5.5 करोड़ से ज्यादा गरीब परिवारों को एलपीजी कनेक्शन मिल चुका है। जो कि सरकार का बहुत बड़ा कदम है। सरकार द्वारा प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का लागू करने का मुख्य उद्देश्य पूरे भारत में स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देना है और इससे इससे वायु प्रदूषण में भी कमी लाना सरकार का अहम् लक्ष्य है। इसके साथ ही इससे महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा और महिलाओं के स्वास्थ्य की भी सुरक्षा की जा सकती है। पहले गरीब महिलाओं को चूल्हे पर लकड़ी या उपलों द्वारा भोजन बनाना पड़ता था जिससे वायु प्रदूषण के साथ-साथ महिलाओं के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता था लेकिन आज देश के 5.5 करोड़ से ज्यादा गरीब परिवारों के पास एलपीजी गैस कनेक्शन उपलब्ध है। लेकिन सरकार ने 5.5 से ज्यादा गरीब परिवारों को प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत मुफ्त में गैस कनेक्शन तो वितरित कर दिए हैं लेकिन एलपीजी गैस ईंधन का महंगा होना भी गरीब लोगों को गैस कनेक्शन होने के बावजूद एलपीजी गैस की पहुँच से दूर करता है। एलपीजी गैस ईंधन की बढ़ती कीमतों को कम करने के बारे में भी सरकार को आज बड़े स्तर पर विचार करने की जरूरत है तभी गरीब महिलाओं इस प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का असल रूप से पूर्णतः लाभ होगा।  
 
इसके साथ ही मोदी सरकार द्वारा प्रधानमंत्री जन-धन योजना के अंतर्गत 33.61 करोड़ से ज्यादा लोगों के जीरो बैलेंस पर खाते खुलवाए गए। सरकार ने संसद के इसी शीतसत्र (2018) में एक सवाल के जवाब में बताया है कि इन जन-धन योजना खातों में जमा राशि करीब 85,913 करोड़ रुपये है। मोदी सरकार की इस योजना से देश के हर गरीब व्यक्ति पर बैंक में अपना खाता है जिसमें वह अपनी बचत को सुरक्षित रख सकता है। प्रधानमंत्री जन-धन योजना भी देश में एक क्रांति की तरह है जिसका सीधा-सीधा फायदा आम गरीब को मिला। यह योजना मोदी सरकार की बड़ी उपलब्धियों में से एक है। मोदी सरकार कोयला, स्पेक्ट्रम और पर्यावरण के मामलों में पूर्ण पारदर्शिता लेकर आयी है। इसके अलावा केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के जरिए 2022 तक भारत के प्रत्येक नागरिक को एक छत देने का संकल्प लिया है, इसमें हर साल के हिसाब से लक्ष्य तय किये गए हैं। इसके अलावा हार्ट स्टैंट कि कीमतों में 80 प्रतिशत की कटौती की है। मोदी सरकार ने नौकरियों में रिश्वतखोरी को रोकने की लिए ग्रेड 3 और 4 की नौकरियों में इंटरव्यू को पूर्णतः खत्म कर दिया है। स्वच्छ भारत के लिए भी प्रधानमंत्री ने खुद रूचि दिखाई है और स्वच्छ भारत अभियान को एक जन-आंदोलन बना दिया है। इसके लिये स्वच्छता ही सेवा नाम से बड़े पैमाने पर अभियान चलाया जा रहा है। जब मोदी सरकार ने स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की थी तब देश का कोई भी राज्य खुले में शौच (ओडीएफ) की समस्या से मुक्त नहीं था लेकिन आज 97.47 प्रतिशत भारतीयों के घरों में शौचालय की सुविधा है। प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने लक्ष्य रखा है कि 02 अक्टूबर 2019 राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी की 150वीं जयंती तक देश को पूर्णतः खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) करना है, और सरकार अपने लक्ष्य को आज साकार करने की स्थिति में है। खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) भारत की जनता का अधिकार था जो की भारत की सरकार देश के नागरिकों को दे रही है। लेकिन देश खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) हो जाता है तो देश की साफ-सफाई और स्वच्छता (ओडीएफ प्लस) सरकार का अगला लक्ष्य होगा। देश साफ-सुथरा और स्वच्छ (ओडीएफ प्लस) तभी होगा जब ये मुहीम एक जन-आंदोलन बनेगी क्योंकि (ओडीएफ) भारत के लोगों का अधिकार है लेकिन (ओडीएफ प्लस) भारत के लोगों की जिम्मेदारी है। 
 
इसके अलावा प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत गरीबों के लिए ऋण की व्यवस्था सरकार ने की है। मोदी सरकार ने नारियों के सशक्तिकरण के लिए भी कई घोषणाएं की हैं, जिसमें उज्ज्वला योजना, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ प्रमुख रूप से हैं। इसके अलावा भी सरकार ने महिलाओं के लिए मातृत्व अवकाश 12 हफ्तों से बढाकर 26 हफ्ते किया है। इसके साथ-साथ गर्भावस्था में महिलाओं के पोषण के लिए 6000 रूपये की व्यवस्था की है। युवाओं के लिए भी सरकार स्किल इंडिया योजना के माध्यम से अवसर दे रही है, इसके माध्यम से 1 करोड़ युवाओं को प्रशिक्षण मिलेगा। इसके अलावा भी सरकार स्टार्ट अप योजना के तहत भी युवाओं को मौके दे रही है। किसानों के लिए भी सरकार ने नीम-कोटेड यूरिया की व्यवस्था की है। नीम-कोटेड यूरिया इस्तेमाल के बाद जहां एक ओर यूरिया की कालाबाजारी कम हुई है, वहीं अब यूरिया के उपयोग पर गैर कृषि कार्यों में प्रतिबन्ध लगा है। इसके साथ की किसानों के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना भी लागू की गयी है, इसके माध्यम से किसानों की फसल को प्राकृतिक आपदा की स्थिति में हुयी हानि को किसानों के प्रीमियम का भुगतान देकर एक सीमा तक कम करायेगी। इसके अलावा भी मोदी सरकार द्वारा देश में अनेकों जनहित की योजनाएं चलाई जा रहीं है जिनका सीधा-सीधा फायदा आम आदमी को हो रहा है। 
 
स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी मोदी सरकार काफी काम कर रही है इसके लिए आयुष्मान भारत योजना या मोदीकेयर, सरकार की महत्वपूर्ण योजना हैं, जिसे 01 अप्रैल, 2018 को पूरे भारत मे लागू किया गया है। इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर लोगों और गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले (बीपीएल धारक) को स्वास्थ्य बीमा मुहैया कराना है। इसके अन्तर्गत आने वाले प्रत्येक परिवार को समोदी सरकार द्वारा 5 लाख तक का कैशरहित स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराया जा रहा है। अगर आयुष्मान भारत योजना देश में सही तरीके से क्रियान्वित होती है तो देश में स्वास्थ्य के क्षेत्र में यह बहुत बड़ी क्रांति होगी। जिसका सीधा-सीधा फायदा आम गरीब आदमी को मिलेगा। मोदी सरकार ने आयुष्मान भारत योजना के तहत देश के 10 करोड़ परिवारों को सीधा-सीधा फायदा मिलेगा। इस तरह से देश की लगभग 50 करोड़ आबादी इस योजना का लाभ उठा सकेगी।
 
- ब्रह्मानंद राजपूत
राजस्थान, मध्य प्रदेश और छतीसगढ़ में कांग्रेस की वापसी के साथ वर्ष 2018 की विदाई और लोकसभा के चुनावों की आहट के साथ 2019 का स्वागत किया जा रहा है। 2018 का साल एक तरह से कांग्रेस की सत्ता वापसी का साल कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं कहा जा सकता। साल की पहली छमाही में जहां कर्नाटक विधानसभा चुनावों में सत्ता की सीढ़ी चढ़ने में कांग्रेस कामयाब रही वहीं साल के अंत में हुए पांच राज्यों के चुनावों में तीन प्रमुख राज्यों- राजस्थान, मध्य प्रदेश और छतीसगढ़ में भाजपा से सत्ता छीनने में कांग्रेस कामयाब रही। देखा जाए तो यह साल राहुल गांधी की परिपक्वता और राहुल के कद में बढ़ोतरी के रूप में देखा जा सकता है। दरअसल जीएसटी और आरक्षण का मुद्दा इस साल की बड़ी घटनाओं में से एक है और इसका सीधा सीधा असर भी चुनाव परिणामों से साफतौर से देखा जा सकता है। आरबीआई के गवर्नर का इस्तीफा कोढ़ में खाज का काम कर गया वहीं राफेल का मुद्दा भी राजनीतिक गलियारों व यहां तक की कोर्ट तक में छाया रहा। सीबीआई का झगड़ा सड़क पर आना भी इस साल की बड़ी घटनाओं में से एक रहा है। कारोबारी सुगमता के क्षेत्र में 30 पायदान की लंबी छलांग निश्चित रुप से वैश्विक स्तर पर गौरव की बात रही है। इसरो के लिए यह साल उपलब्धियों भरा रहा है वहीं तीन तलाक का मुद्दा साल की शुरुआत से लेकर साल के अंत तक छाया रहा है। निश्चित रूप से कश्मीर की स्थितियों में सुधार देखा जा रहा है वहीं आतंकवादी गतिविधियों पर भी अंकुश लगा है। सबसे मजे की बात यह है कि साल के अंत में हुए चुनावों में ईवीएम की विश्वसनीयता कोई खास मुद्दा बनकर नहीं उभरी बल्कि चुनाव आयोग और अधिक निखार के साथ सामने आया है।
 
 
30 दिसंबर की रात 12 बजे हैप्पी न्यू ईयर के घोष के साथ 2019 का आगाज हुआ। बेहद उथल−पुथल भरे वर्ष 2018 की कड़वी मीठी यादों को भुलाकर नए साल में नए संकल्प के साथ आगे बढ़ने का अवसर है। बीती ताही बिसार दे, आगे की सुध लेय के साथ नए साल का स्वागत करना है। परिवार, समाज, प्रदेश, देश और विश्व में सुख और शांति की कामना लेकर आगे बढ़ने की सोच बनानी होगी। असल में साल 2018 में जो कुछ उपलब्धियां या कटुताएं रहीं उसे भुलाते हुए अब नए संकल्प के साथ 2019 में प्रवेश करना है। राजनीतिक दृष्टि से देखें तो यह साल बीजेपी के सत्ता रथ के रुकने का रहा है। वहीं कांग्रेस के लिए राजस्थान, मध्य प्रदेश और छतीसगढ़ में सत्ता की वापसी का रहा है। यह निश्चित रूप से कांग्रेस की बडी जीत है क्योंकि इन पांच राज्यों के चुनावों को सत्ता का सेमीफाइनल माना जाता रहा है। राहुल गांधी की परिपक्वता और कांग्रेस अध्यक्ष की अगुवाई में विजयश्री इस साल की कांग्रेस के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा सकती है। हालांकि भाजपा मुक्त भारत की कल्पना अभी दूर दिखाई दे रही हैं क्योंकि विपक्षी दलों द्वारा एक साथ मिलकर चुनाव लड़ना अभी दूर की कौड़ी दिखाई दे रही है। राममंदिर का मसला अवश्य 2019 का प्रमुख मसला बनकर उभरने की संभावना है। इलाहाबाद का कुंभ अवश्य इस साल का बड़ा आयोजन होगा। तकनीक के क्षेत्र में देश ने नई ऊँचाइयां प्राप्त कीं यहां तक कि उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण कर भारतीय तकनीक का लोहा मनवा दिया। विदेशों में भारत की साख बढ़ी है इससे कोई इंकार नहीं कर सकता।
 
रात के बाद सुबह की सूर्य किरणों की आस की तरह नए साल के साथ एक उज्ज्वल पक्ष भी आता है। हम नए साल के साथ सोचने को मजबूर होते हैं गए साल की कमियों को दूर करने की, कुछ नया करने की। समाज में नया और अच्छा करने की। समाज की बुराइयों को दूर करने की। समाज को विकास की राह पर आगे तक ले जाने की। जो कुछ खोया है, उसे पाने की। सकारात्मक सोच से ही आगे बढ़ पाता है समाज और देश। यह हमारी संस्कृति की विशेषता रही है कि आशा की जोत हमेशा से जगाए रखती है। आशा की जोत के कारण ही हम नए साल का स्वागत के साथ आगाज करते हैं। कुछ अच्छे की सोचते हैं। जो हो गया है उसे भुलाने का प्रयास करते हैं।
 
विराट सांस्कृतिक परंपरा के धनी हमारे देश के युवाओं ने सारी दुनिया में अपनी पहचान बनाई है। अमेरिका सहित दुनिया के बहुत से देश हमारे युवाओं के ज्ञान कौशल से घबराने लगे हैं। गाहे−बेगाहे वे हमारे देश के युवाओं के उनके देश में प्रवेश को सीमित करने का प्रयास करते हैं। हमारे युवाओं की मेहनत, श्रम शक्ति और ज्ञान−कौशल का लोहा मानते हैं। हमारे वैज्ञानिकों ने अपनी मेहनत से देश को आगे ले जाने में कोई कमी नहीं छोड़ी है। दूसरे देशों के सेटेलाइट हम प्रक्षेपित करने लगे हैं। अग्नि प्रक्षेपण में हम सफल रहे हैं। हमारे सेटेलाइट सफलता पूर्वक काम कर रहे हैं। टेक्नालॉजी में हम आत्म निर्भर होते जा रहे हैं। राजनीतिक परिपक्वता में हमारे लोकतंत्र के मुकाबले दुनिया का कोई दूसरा देश नहीं है। आखिर हमारी गौरवशाली विरासत को आगे ले जाने में हम कहां पीछे रहने वाले हैं।
 
नया साल 2019 भी जीएसटी में सुधार की दिशा में आगे बढ़ता ही होगा। चाहे इसका कारण राजनीतिक भले ही हों। दरअसल मई 2019 में होने वाले चुनाव 2019 की सबसे बड़ी घटना होगी। चुनावों के केन्द्र में एक तरफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मोदी लहर का पैमाना होगा तो दूसरी और राहुल गांधी व कांग्रेस तो तीसरी और अन्य दलों के तीसरे मोर्चे के आकार लेने की स्थिति में आने वाले परिणाम खास होंगे। इतना साफ है कि देशवासियों को 2019 के लोकतंत्र के यज्ञ में आहुति देने का बड़ा अवसर मिलेगा, चुनाव आयोग के सामने भी निष्पक्ष व स्वतंत्रता और शांतिपूर्वक चुनाव संपन्न कराने को गुरुतर दायित्व होगा वहीं केन्द्र सरकार द्वारा लोकलुभावन घोषणाओं और नई सरकारों द्वारा कम समय में आमजन का विश्वास जीतने की गुरुतर चुनौती सामने होगी। देशवासियों के सामने इन चुनावों में बढ़-चढ़कर भाग लेते हुए नई सरकार चुनकर देश की राजनीति को अगले पांच सालों के लिए दशा और दिशा देने का अवसर होगा। माना यह जा रहा है कि नए साल में सरकार की आर्थिक नीति में बदलाव आएगा। आयकर को लेकर लोगों में आशाएं जगी हैं। सरकार से लोगों की आशाएं बढ़ी हैं। सकारात्मक सोच के साथ अब शुभकामनाओं और मंगलकामनाओं के बीच हमें देश को आगे ले जाने का संकल्प लेना होगा। आचार−विचार में शुद्धता और नैतिकता का सबक लेना होगा। हमें सकल्प लेना है देश को आगे ले जाने का, शिक्षा, औद्योगिक विकास, रोजगार, बिजली−पानी, सड़क जैसी आधारभूत सुविधाओं के विस्तार का, आधुनिकतम तकनीक को देश के विकास में हिस्सेदार बनाकर आगे बढ़ने के प्रयास करने होंगे ताकि देश विकास की राह पर तेजी से बढ़ सके। नया साल नई स्फूर्ति, नए उत्साह से आगे बढ़ने की राह प्रशस्त करे, यही हमारी मंगल कामना है।
 
अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर राम मंदिर कब बनेगा इसका जवाब भले राजनीतिक दलों खासकर भाजपा नेताओं के पास नहीं हो लेकिन अयोध्या वासियों को पूरा विश्वास है कि वर्ष 2019 में राम मंदिर के निर्माण का कार्य अवश्य शुरू होगा। ऐसा नहीं है कि यह विश्वास सिर्फ किसी खास समुदाय के लोगों को हो या किसी खास उम्र के लोगों को हो। अयोध्या चले जाइए और जिस-जिस से पूछते जाएंगे, जवाब यही आयेगा कि राम मंदिर का इंतजार अब पूरा होने वाला है और भव्य राम मंदिर बनने वाला है। चाहे संत हों या आम आदमी सब राजनीतिक चालों के साथ ही न्यायिक गतिविधियों पर बारीक नजर रखे हुए हैं और मान कर चल रहे हैं कि भाजपा नेताओं को जो संत समाज की ओर से चेतावनी दी गयी है उसका असर दिखने ही वाला है।
 
विश्वास का आधार क्या है?
 
राम मंदिर 2019 में ही बनना शुरू होगा, इस विश्वास का आधार यह है कि भाजपा को यह बात पूरी तरह समझ आ चुकी है कि राम मंदिर मुद्दे पर यदि लोकसभा चुनावों से पहले निर्णय नहीं लिया गया तो उसका वोट बैंक बुरी तरह छिटक सकता है। राम लला के दर्शन करने के लिए जब लाइन में लगे लोगों से बातचीत की गयी तो सभी का यह कहना था कि भाजपा को वोट करने हम जैसे भक्त लोग जाते हैं वो लोग नहीं जिनके तुष्टिकरण में पार्टी इन दिनों लगी हुई है। लोगों का साफ तौर पर कहना था कि भाजपा ने जो माँगा वो हमने दिया, 'केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार मांगी, हमने दिया, राज्य में पूर्ण बहुमत की सरकार मांगी हमने दिया लेकिन अब बारी भाजपा की है। यदि भाजपा ऐसी अनुकूल परिस्थितियों में जबकि केंद्र और उत्तर प्रदेश में उसकी पूर्ण बहुमत वाली सरकार है और राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पदों पर भी उसके ही लोग विराजमान हैं में भी कुछ नहीं कर सकती तो ऐसी पार्टी को सत्ता से बाहर होना चाहिए।' यही नहीं लोगों का यह भी कहना है कि कांग्रेस जोकि सॉफ्ट हिन्दुत्व की राह पर चल रही है, वह भी राम मंदिर का विरोध करने की स्थिति में नहीं है इसलिए भाजपा को कदम आगे बढ़ाना ही चाहिए क्योंकि इतनी अनुकूल स्थितियां फिर बड़ी मुश्किल से होंगी।
 
संत समाज चेतावनी के साथ ताकत भी दे रहा है
संत समाज को भी लगता है कि अब वह समय आ गया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राम मंदिर निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाने वाले हैं। राजनीतिक तौर पर भले यह सरकार के लिए मुश्किल भरा कार्य हो लेकिन संतों से बात करें तो उन्हें इस बात का विश्वास है कि भाजपा इस मुद्दे पर काम कर रही है और जल्द ही तारीख की घोषणा होगी। संतों का एक वर्ग तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की शक्ति बढ़ाने के लिए विशेष पूजा-पाठ करने में भी लगा हुआ है। संत बातचीत में कहते हैं कि यदि 2019 में राम मंदिर निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ तो यह मुद्दा फिर पीछे चला जायेगा क्योंकि यदि भाजपा की चुनावों में हार हो गयी तो कांग्रेस या अन्य दल अपने कार्यकाल में राम मंदिर पर बात भी नहीं करेंगे। 31 जनवरी को कुम्भ मेले के दौरान धर्म संसद का भी आयोजन किया जा रहा है जिसमें संत समाज यह तय करेगा कि राम मंदिर मुद्दे पर आगे क्या कदम उठाये जाएं।
 
न्यायालय पर हैं सभी की नजरें
 
सभी की नजरें 04 जनवरी, 2019 को राम मंदिर मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय में होने वाली सुनवाई पर लगी हुई हैं। अदालत सुनवाई के लिए सिर्फ पीठ का ही गठन करती है या नियमित आधार पर सुनवाई का आदेश भी देती है या फिर कोई और कदम उठाती है, इसको लेकर कयासों का दौर भी जारी है। वैसे अदालत से मामले का हल निकलेगा इसको लेकर लोगों के मन में संशय है। लोगों का कहना है कि बातचीत से भी मसले का हल निकलना मुश्किल है क्योंकि जब-जब बातचीत आगे बढ़ती है तब-तब कुछ लोग इसमें रोड़ा अटकाने सामने आ जाते हैं। इसलिए राम मंदिर के लिए कानून बनाना ही लोगों को आखिरी विकल्प लगता है। हालांकि संसद के शीतकालीन सत्र से लोगों को काफी उम्मीदें थीं लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ। भाजपा के कुछ सदस्यों की ओर से भी राम मंदिर के लिए निजी विधेयक लाने की बात कही गयी थी लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं। विश्व हिन्दू परिषद के नेताओं ने सांसदों से मिल कर राम मंदिर निर्माण के लिए कानून बनाने की मांग की थी लेकिन इस पूरी कवायद से भी कुछ नहीं निकला। अब विश्व हिन्दू परिषद के नेता दावा कर रहे हैं कि इंतजार कीजिये मोदी और योगी के हाथों ही होगा राम मंदिर का निर्माण।
 
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी हो चुका है सक्रिय
 
हालांकि संघ परिवार के विभिन्न घटक राम मंदिर मुद्दे पर सरकार को खुलेआम चेतावनी दे रहे हैं लेकिन अंदर ही अंदर यह भी चाहते हैं कि यह सरकार सत्ता में बनी रहे। इसके लिए प्रयास भी शुरू हो गये हैं। पिछले माह गुजरात के राजकोट में हिन्दू संतों और धर्माचार्यों की एक बड़ी बैठक हुई जिसमें संघ प्रमुख मोहन भागवत, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और पार्टी सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी भी मौजूद थे। इसमें तय कर लिया गया है कि इस मुद्दे पर अदालत के रुख के बाद कैसे आगे बढ़ना है। यदि अदालत में फिर मामला टलता है तो भाजपा के पास राम मंदिर के लिए खुलकर सामने आने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। चाहे योगी आदित्यनाथ हों या राजनाथ सिंह, हाल के दिनों में देखने को मिला है कि भाजपा के बड़े नेताओं की सभा में जनता हंगामा करने लगी है और 'पहले मंदिर फिर सरकार' का नारा बुलंद करने लगी है। संभव है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी आने वाले दिनों में अपनी जनसभाओं में 'मोदी मोदी' के उद्घोष की जगह 'राम मंदिर' का नारा सुनने को मिले।
 
मंदिर के साथ मस्जिद संभव नहीं
 
राम मंदिर के साथ मस्जिद भी बनाने की बात जो लोग करते हैं वह यदि एक बार अयोध्या हो आयें तो ऐसी बातें करना बंद कर देंगे। यह सही है कि राम तो कण-कण में विराजमान हैं लेकिन सरयू के इस पार तो लगता है कि राम और हनुमान जी के सिवा कुछ है ही नहीं। श्रीरामजन्मभूमि पर यदि राम मंदिर के अलावा मस्जिद या कोई और धर्मस्थल बनाया गया तो यकीन मानिये हम राम मंदिर मुद्दा सुलझाएंगे नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बड़ी समस्या छोड़ जाएंगे। साम्प्रदायिक सद्भाव रहना ही चाहिए लेकिन यदि राम मंदिर के साथ मस्जिद बनायी गयी तो यह साम्प्रदायिक सद्भाव की मिसाल नहीं बल्कि साम्प्रदायिक सद्भाव के लिए समस्या बन जायेगी।
 

 

 
बहरहाल, अयोध्या में लोगों से बातचीत करके एक बात और साफ हो जाती है कि राजनीतिक दल भले कितनी चालें चलें लेकिन जनता बहुत समझदार है और राम मंदिर मुद्दे पर हर राजनीतिक दल के रुख, संसद और न्यायालय में इस मुद्दे पर होने वाली गतिविधियों के साथ ही संबंधित खबरों से पूरी तरह अवगत है। जनता को मूर्ख बनाना आसान नहीं है और भाजपा भी हाल के विधानसभा चुनावों में नोटा को मिले भारी मतों और सवर्णों की नाराजगी से पार्टी को हुए नुकसान को देखते हुए फूंक-फूंक कर कदम आगे बढ़ा रही है। पार्टी अब समझ रही है कि मात्र राम नाम जपने से कुछ नहीं होगा, राम से किये गये वादे पूरे करने का समय आ गया है।
 
-नीरज कुमार दुबे

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