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News Creation - बिज़नेस
बिज़नस

बिज़नस (3673)

नई दिल्‍ली,कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के आंकड़ों के मुताबिक अक्‍टूबर माह में 12.44 लाख लोगों को रोजगार मिला है. इससे पिछले महीने यानी सितंबर में 12.23 लाख नए रोजगार पैदा हुए थे. वहीं इस दौरान कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ से 7.39 लाख लोग जुड़े हैं, जबकि सितंबर में यह आंकड़ा 9.48 लाख था.
क्‍या कहते हैं ईएसआईसी के आंकड़े
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की एक रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2018-19 में ईएसआईसी के पास कुल 1.49 करोड़ नए नामांकन हुए थे. आंकड़ों से पता चलता है कि सितंबर, 2017 से अक्टूबर, 2019 के दौरान ईएसआईसी योजना से 3.22 करोड़ नए अंशधारक जुड़े.
एनएसओ की रिपोर्ट ईएसआईसी, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) और पेंशन कोष नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) द्वारा संचालित विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़ने वाले नए अंशधारकों पर आधारित है. रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर, 2017 से मार्च, 2018 के दौरान ईएसआईसी के पास कुल 83.35 लाख नए नामांकन हुए. अक्टूबर में ईपीएफओ के पास शुद्ध रूप से 7.39 लाख नए नामांकन हुए. सितंबर में यह संख्या 9.48 लाख की थी.
रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान ईपीएफओ संचालित सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से 61.12 लाख नए अंशधारक जुड़े. सितंबर, 2017 से मार्च, 2018 के दौरान इससे शुद्ध रूप से 15.52 लाख नए अंशधारक जुड़े. ताजा आंकड़ों के मुताबिक सितंबर, 2017 से अक्टूबर, 2019 के दौरान 2.93 करोड़ अंशधारक ईपीएफओ से जुड़े.

नई दिल्ली ,कर्मचारियों के भविष्य निधि (पीएफ) की रकम खाते में न जमा करने पर कंपनियों पर अब दस गुना जुर्माना लगाया जाएगा। सरकार ने कोड ऑन सोशल सिक्योरिटीज बिल में ऐसे प्रावधान किए हैं जिससे कर्मचारियों के साथ ऐसा करने वाली कंपनियों पर सख्ती बरती जा सके।
सरकार के पास कर्मचारी संगठनों की तरफ से कंपनियों के बारे में ऐसी कई शिकायतें आई थीं कि कंपनियां कर्मचारी का पीएफ तो काट लेती हैं लेकिन उस रकम को जमा नहीं करातीं। नए कानून में इन्हीं दिक्कतों को दूर किया जाएगा।
इसके तहत कंपनियों को कर्मचारियों के पीएफ के बारे में अपनी जानकारी भी दुरुस्त रखनी होगी। नए प्रावधानों के तहत पीएफ न जमा करने या गलत जानकारी देने वाली कंपनियों के खिलाफ लगने वाले जुर्माने को 10 हजार से बढ़ा कर एक लाख रुपये तक कर दिया गया है।
सरकार ने ऐसे लोगों को जेल भेजने का भी प्रावधान किया है। कर्मचारियों के पीएफ की गलत जानकारी देने और रकम न जमा कराने की सूरत में तीन साल तक की जेल का प्रावधान रखा गया है।
नया कानून
* कंपनियों पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
* गलत जानकारी देने पर तीन साल तक जेल का भी प्रावधान।

मुंबई,लंबे समय से कर्ज से जूझ रहे अनिल अंबानी को एक अच्‍छी खबर मिली है. दरअसल, रिलायंस इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर ने दामोदर वैली कॉरपोरेशन यानी डीवीसी के खिलाफ 1,250 करोड़ रुपये का मध्यस्थता मुकदमा जीत लिया है.
मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने भारत सरकार के उपक्रम डीवीसी को रिलायंस इंफ्रा को 896 करोड़ रुपये का भुगतान करने और 354 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी चार सप्ताह में लौटाने को कहा है. भुगतान में चार सप्ताह से अधिक लगने पर डीवीसी को 15 प्रतिशत वार्षिक की दर से अतिरिक्त ब्याज देना होगा. अब रिलायंस इंफ्रा इस रकम का इस्‍तेमाल कर्ज चुकाने में करेगी. शेयर बाजारों को भेजी सूचना में रिलायंस इंफ्रा ने बताया, ''इस राशि का इस्तेमाल कर्जदाताओं का भुगतान करने और कंपनी के कर्ज को कम करने के लिए किया जाएगा.''
क्‍या है मामला?
रिलायंस इंफ्रा को पश्चिम बंगाल में डीवीसी की 1200 मेगावॉट की रघुनाथपुर ताप बिजली परियोजना का इंजीनियरिंग और निर्माण कॉन्‍ट्रैक्‍ट मिला था. लेकिन जमीन उपलब्ध न होने और स्थानीय लोगों के विरोध के कारण इस प्रोजेक्ट में देरी हुई थी. रिलायंस इंफ्रा ने प्रोजेक्ट को पूरा करने में मुश्किलों के कारण DVC से क्लेम देने की मांग की थी.
ब्रिटेन से भी अनिल अंबानी को राहत
हाल ही में ब्रिटेन के हाईकोर्ट से भी अनिल अंबानी को राहत मिली है. दरअसल, चीन के तीन बैंक- इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल बैंक ऑफ चाइना लिमिटेड, चाइना डेवेलपमेंट बैंक और एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक ऑफ चाइना ने आरकॉम को दिए कर्ज के मामले में लंदन हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. हालांकि कोर्ट ने इस दावे को खारिज कर दिया. यूके हाईकोर्ट ने अनिल अंबानी के उस पक्ष को स्वीकार किया कि रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड द्वारा प्राप्त कॉरपोरेट कर्ज के लिए उनकी कथित गारंटी के संबंध में चीनी बैंकों का दावा मान्य नहीं हो सकता है.

नई दिल्ली: रेल में सफर करने वाले यात्रियों के लिए अहम खबर आ रही है. खबर है कि आने वाले दिनों में रेल किराए में बढ़ोतरी हो सकती है. माना जा रहा है कि सरकार एयरपोर्ट की तर्ज पर रेलवे स्टेशन इस्तेमाल करने पर यूजर डिवेलपमेंट फीस (UDF) वसूलेगी. ऐसा बताया जा रहा है कि पहले चरण में यह 4 रेलवे स्टेशनों पर लागू होगा, इनमें नागपुर, अमृतसर, ग्वालियर और साबरमती स्टेशन शामिल हैं.
दरअसल रेल मंत्रालय स्टेशन री-डेवलप्मेन्ट योजना के तहत 4 स्टेशनों नागपुर, अमृतसर, ग्वालियर और साबरमती रेलवे स्टेशन का री-डेवलोपमेन्ट करने जा रहा है. री-डिवेलपमेंट के तहत स्टेशनों को ना केवल नया आधुनिक बनाया जाएगा बल्कि साथ ही यात्री सुविधाओं में जबरदस्त इजाफा होगा, जिसमें कमर्शियल एरिया भी डेवेलोप किया जाएगा. प्राइवेट प्लेयर को आमंत्रित कर स्टेशन री डेवलोपमेन्ट योजना को अंजाम दिया जाएगा.
ऐसी तमाम सुविधाओं के लिए रेलवे एयरपोर्ट की तर्ज़ पर यूडीएफ वसूलेगी. अभी जैसे आप एयरपोर्ट पर जाते है या फ्लाइट टिकट बुक करते हैं तो आपके फ्लाइट टिकट में एयरपोर्ट इस्तेमाल करने पर यूजर डेवलपमेंट फीस भी शामिल होती है. अभी अगर आप दिल्ली एयरपोर्ट से फ्लाइट पकड़ते हैं तो अमूमन 700-800 रुपए यूडीएफ लगता है.सूत्रों के मुताबिक, अगर आप इन 4 स्टेशनों पर ट्रेन में चढ़ते या उतरते हैं तो आपके रेल किराए में यूडीएफ शामिल होगा. यही नहीं इन 4 रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्म टिकट पर भी अतिरिक्त यूडीएफ लागू होगा. हालांकि रेलवे स्टेशनों पर भविष्य पर लगने वाले यूजर डेवलपमेंट फीस मामूली शुल्क होगा.प्लानिंग के तहत - 4 स्टेशनों पर आने वाले यात्रियों और स्टेशनों से जाने वाले यात्रियों से अलग अलग UDF शुल्क वसूला जाएगा. रेल मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले उपक्रम IRSDC(इंडियन रेलवे स्टेशन डेवलोपमेन्ट कॉर्पोरेशन) पर रेलवे स्टेशन री डेवलपमेंट की ज़िम्मेदारी है. पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप यानी पीपीपी मॉडल पर री डेवलप किये जा रहे स्टेशनों पर UDF लगेगा.अधिकारियों के मुताबिक जनवरी में कितना यूडीएफ या यूजर डेवलोपमेन्ट फीस लगेगी इसको नोटिफाई कर दिया जाएगा. अगले साल, 6 फरवरी 2020 तक 4 स्टेशनों के लिए टेंडर जारी कर दिया जाएगा. अधिकारियों के मुताबिक अगले 3 साल यानी संभवतः 2023 तक चारों स्टेशन को नए डिज़ाइन और तमाम यात्री सुविधाओं, कमर्शियल एरिया के साथ तैयार कर लिया जाएगा जिसका बाड़ीं स्टेशनों पर आने या जाने के लिए किसी भी व्यक्ति को यूजर फीस चुकानी पड़ेगी
नागपुर, अमृतसर, ग्वालियर और साबरमती के बाद अगले स्टेशन चिन्हित भी किए जा चुके हैं. मुम्बई का छत्रपति शिवाजी स्टेशन, लुधियाना, बिजवासन, आनंद विहार, दिल्ली स्टेशन भी फेहरिस्त में शामिल किए गए हैं. नागपुर, अमृतसर, ग्वालियर और साबरमती रेलवे स्टेशन के री डिवेलपमेंट के लिए सरकार ने RFQ (request for qualification) जारी कर दिया है. अगले चरण के तहत सरकार RFQ और फिर फाइनल टेंडर जारी करेगी.

नई दिल्ली. पहली बार केंद्रीय बैंक ऐसा करेगा यह पहला मौका होगा जब आरबीआई ब्याज दरों को नीचे लाने के लिए ऑपरेशन ट्विस्ट का सहारा लेगा। आरबीआई इस साल अब तक रेपो दरों में 1.35 की कमी कर चुका है। जबकि 10 साल के बॉन्ड पर यील्ड (सरकारी प्रतिभूतियों पर रिटर्न) में महज 0.80 फीसदी तक की कमी आई है। इस साल फरवरी में यील्ड 7.55 फीसदी से घटकर 19 दिसंबर तक 6.75 तक पहुंचा है। वहीं बैंकों ने सिर्फ 0.60 फीसदी तक कर्ज सस्ता किया है।
क्या है आरबीआई का ऑपरेशन ट्विस्ट
केन्द्रीय बैंक द्वारा एक साथ बॉन्ड की खरीद-बिक्री करने की कवायद को वित्तीय जगत में ऑपरेश ट्विस्ट के नाम से जाना जाता है। करीब एक दशक पहले अमेरिकी केन्द्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने ऐसा किया था। वित्त वर्ष 2011-12 में अमेरिकी फेडरल रिजर्व नें लंबी अवधि के कर्ज को सस्ता करने के मद्देनजर ऐसा कदम उठाया था।
कर्ज और सस्ता होने की राह खुलेगी
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 23 दिसंबर को एक साथ बॉन्ड की खरीदारी और बिक्री का निर्णय किया है। आरबीआई यह कदम खुली बाजार नीति (ओएमओ) के तहत उठाएगा जिसमें 10 साल की परिपक्वता वाले 10 हजार करोड़ रुपये का बॉन्ड खरीदेगा जबकि एक साल की परिपक्वता वाले इतने ही मूल्य के नए बॉन्ड जारी करेगा। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इससे लंबी अवधि के बॉन्ड पर रिटर्न (यील्ड) घटेगा जिससे भविष्य में कर्ज और सस्ता होने की राह खुल जाएगी।
 
बैंक कोष की सीमांत लागत (एमसीएलआर) के आधार पर कर्ज की दरें तय करते हैं। इसको रेपो रेट, 10 साल या उससे अधिक अवधि वाले बॉन्ड पर यील्ड और बैंक के अन्य खर्च के आधार पर तय किया जाता है। बॉन्ड पर यील्ड 6.75 फीसदी है। ऐसे में बैंक सिर्फ 1.25 फीसदी ऊंचे ब्याज पर आपको कर्ज दे रहे हैं। यदि बॉन्ड पर यील्ड घटे तो बैंक से मिलने वाला कर्ज और सस्ता हो सकता है।
 
क्या होगा असर
नए बॉन्ड आज की दरों पर जारी किए जाएंगे जिसमें कम रिटर्न मिलेगा। ऐसी स्थिति में पुराने बॉन्ड की मांग ज्यादा और आपूर्ति कम होने से उसपर यील्ड बढ़ जाती है। लेकिन जब वैसे बॉन्ड को केन्द्रीय बैंक बड़ी मात्रा में खरीदने का फैसला करता है तो बॉन्ड की कीमत थोड़ी जरूर बढ़ जाती है लेकिन यील्ड घट जाता है। इससे लंबी अवधि के बॉन्ड कम आकर्षक हो जाते हैं जिसकी वजह से कर्ज की दरें भी घट जाती हैं।

नई ‎दिल्ली । भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा कि गैर-निष्पादित संपत्ति (एनपीए) के मामले में अधिकतर बैंकों की ‎स्थिति में सुधार आएगा और बैंकिंग प्रणाली में ऋण वितरण के लिए नकदी की कोई कमी नहीं है। उन्होंने फिक्की के 92वें सालाना सम्मेलन में कहा कि बुनियादी संरचना तथा उपभोक्ता क्षेत्र में ऋण की मांग में कोई खास कमी नहीं आई है, अत: इन क्षेत्रों में ऋण वितरण के अवसर उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि 31 मार्च तक अधिकांश बैंक एनपीए के लिहाज से अच्छी स्थिति में होंगे। रिजर्व बैंक द्वारा रेपो दर घटाने का लाभ उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच पाने के बारे में उन्होंने कहा कि बैंक संपत्ति और देनदारी में असंतुलन बनने के जोखिम को देखते हुए ब्याज दर में एक सीमा से अधिक कटौती नहीं कर सकते हैं। बैंकिंग प्रणाली में पूंजी की कोई कमी नहीं है। कॉरपोरेट पर्याप्त ऋण नहीं ले रहे हैं और अपनी क्षमता का अच्छे से उपयोग नहीं कर रहे हैं। दूरसंचार कंपनियों को स्पेक्ट्रम की प्रस्तावित नीलामी के लिए ऋण देने के बारे में उन्होंने कहा कि हमारे लिए दूरसंचार कंपनियों को स्पेक्ट्रम नीलामी के लिए ऋण देना पूरी तरह से असुरक्षित है। यह कागजों पर सुरक्षित है क्योंकि नीलामी सरकार करने वाली है, लेकिन व्यावहारिक तौर पर यह पूरी तरह से असुरक्षित है। उन्होंने कहा कि अत: ऐसी परिस्थितियों में बैंकों को दूरसंचार क्षेत्र को ऋण देने से पहले सावधानी से मूल्यांकन करना होगा, क्योंकि ऋण की किस्तों के भुगतान में चूक होने की आशंका काफी अधिक है।

नई ‎दिल्ली । दूरसंचार विभाग ने सार्वजनिक क्षेत्र की गैस कंपनी गेल इंडिया ‎लिमिटेड  से कहा ‎कि वह 1.72 लाख करोड़ रुपए का पिछला सांविधिक बकाया चुकाए। उच्चतम न्यायालय ने हाल में यह व्यवस्था दी है कि सरकारी बकाया के भुगतान में किस राजस्व को शामिल किया जा सकता है। जानकारी के मुता‎बिक दूरसंचार विभाग ने गेल को पिछले महीने पत्र भेजकर आईपी-1 और आईपी-2 लाइसेंस के अलावा इंटरनेट सेवा प्रदाता (आईएसपी) लाइसेंस का 1,72,655 करोड़ रुपए का भुगतान करने को कहा है। इसके जवाब में गेल ने दूरसंचार विभाग से कहा है कि वह सरकार को जितना भुगतान कर चुकी है, उसके अलावा उस पर कोई बकाया नहीं बनता है। गेल ने कहा है कि उसने आईएसपी लाइसेंस 2002 में 15 साल के लिए हासिल किया था, लेकिन गेल ने कभी इस लाइसेंस के तहत कारोबार नहीं किया और न ही उसे कोई राजस्व हासिल हुआ। ऐसे में वह इसके लिए कोई भुगतान नहीं कर पाएगी। इसी तरह आईपी-1 और आईपी-2 लाइसेंस के बारे में गेल ने विभाग से कहा है कि उसे 2001-12 में 35 करोड़ रुपए कमाए हैं, न कि 2,49,788 करोड़ रुपए, जिसके आधार पर पिछला बकाया मांगा जा रहा है। उच्चतम न्यायालय ने 24 अक्टूबर को व्यवस्था दी थी कि स्पेक्ट्रम का कंपनियों से सांविधिक बकाये की गणना के लिए सरकार की ओर से आवंटित स्पेक्ट्रम से हासिल गैर दूरसंचार राजस्व को भी शामिल किया जाएगा। सरकारी लाइसेंस और स्पेक्ट्रम के इस्तेमाल से भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया जैसी कंपनियों को बेशक गैर दूरसंचार आय हुई हो, लेकिन गेल को इस तरह का कोई राजस्व नहीं मिला है।

नई दिल्ली,Tata Motors ने अपनी बहुप्रतीक्षित इलेक्ट्रिक एसयूवी Tata Nexon EV से गुरुवार को पर्दा उठा दिया। नेक्सॉन इलेक्ट्रिक का यह ग्लोबल डेब्यू मुंबई में आयोजित इवेंट में हुआ। इस इलेक्ट्रिक एसयूवी को जनवरी 2020 में लॉन्च किया जाएगा। वहीं, Nexon EV की बुकिंग कल, यानी 20 जनवरी को शुरू होगी। 21 हजार रुपये में इसे बुक किया जा सकेगा। नेक्सॉन इलेक्टिक टाटा मोटर्स की पहली कार है, जिसमें कंपनी की नई जिप्ट्रॉन इलेक्ट्रिक पावरट्रेन टेक्नॉलजी का इस्तेमाल किया गया है।
टाटा नेक्सॉन इलेक्ट्रिक में परमानेंट मैग्नेंट एसी मोटर दिया गया है, जिसे लिथियम-आयन बैटरी से पावर मिलेगी। इसमें दी गई बैटरी वॉटर और डस्ट रेसिस्टेंस है। इलेक्ट्रिक नेक्सॉन में 30.2 kWh बैटरी दी गई है। कंपनी का दावा है कि एक बार फुल चार्ज होने पर यह 300 किलोमीटर की रेंज देगी, यानी इलेक्ट्रिक नेक्सॉन 300 किलोमीटर की दूरी तय करेगी।
नेक्सॉन ईवी में दिया गया इलेक्ट्रिक मोटर 129hp की पावर और 245Nm पीक टॉर्क जेनरेट करता है। टाटा मोटर्स का दावा है कि नेक्सॉन इलेक्ट्रिक 4.6 सेकंड में 60 किलोमीटर प्रति घंटा और 9.9 सेकंड में 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पकड़ सकती है। कंपनी ने कहा है कि इसके इलेक्ट्रिक मोटर को 10 लाख किलोमीटर से ज्यादा टेस्ट किया गया है।
चार्जिंग
इलेक्ट्रिक नेक्सॉन की बैटरी को फास्ट चार्जर से 60 मिनट में 80 पर्सेंट तक चार्ज किया जा सकता है। वहीं, स्टैंडर्ड होम चार्जर से बैटरी को इतना ही चार्ज करने में 8 घंटे का समय लगेगा। फास्ट चार्जर से प्रति मिनट की चार्जिंग पर इसे 4 किलोमीटर की रेंज मिलेगी और 50 पर्सेंट चार्ज होने पर यह इलेक्ट्रिक एसयूवी 150 किलोमीटर तक चलेगी। नेक्सॉन ईवी डेडिकेटेड बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) के साथ आएगी, जिसे आठ साल तक की एक्सटेंडेड बैटरी लाइफ के लिए डिजाइन किया गया है और यह लगातार बेहतर परफॉर्मेंस देती रहेगी।
लुक
नेक्सॉन इलेक्ट्रिक तीन वेरियंट (XM, XZ+ और XZ+ Lux) में आएगी। इसका लुक काफी हद तक स्टैंडर्ड नेक्सॉन (पेट्रोल-डीजल मॉडल) जैसा है। इलेक्ट्रिक एसयूवी में ह्यमनिटी लाइन ग्रिल, प्रोजेक्टर लाइट्स के साथ शार्प हेडलैम्प्स और एलईडी डीआरएल दिए गए हैं। कार में चौड़ा एयरडैम, क्रोम बेजल्स के साथ फॉग लैम्प, नए अलॉय वील्ज और टर्न इंडिकेटर्स के साथ आउट साइड रियर व्यू मिरर्स हैं। स्टैंडर्ड नेक्सॉन से अलग इसमें Nexon EV की बैजिंग है।
इंटीरियर और फीचर्स
इलेक्ट्रिक नेक्सॉन का कैबिन भी काफी हद तक स्टैंडर्ड नेक्सॉन जैसा है। हालांकि, नेक्सॉन ईवी में कंपनी की आने वाली प्रीमियम हैचबैक अल्ट्रॉज जैसा 7.0-इंच का पार्ट डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर दिया गया है। इसमें बैटरी लेवल और रेंज समेत अन्य जानकारियां मिलेंगी।
नेक्सॉन इलेक्ट्रिक के एंट्री लेवल वेरियंट XM में ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल, दो ड्राइव मोड, कीलेस एंट्री और पुश बटन स्टार्ट जैसे फीचर्स मिलेंगे। XZ+ में ड्यूल टोन कलर ऑप्शन, 16-इंच डायमंड-कट अलॉय वील्ज, 7-इंच का टचस्क्रीन इन्फोटेनमेंट सिस्टम, रियर कैमरा और लेदर फिनिश स्टीयरिंग वील मिलेंगे। टॉप वेरियंट XZ+ LUX में सनरूफ, लेदर फिनिश सीट्स और ऑटोमैटिक वाइपर्स व हेडलाइट्स होंगे।
सेफ्टी
इलेक्ट्रिक नेक्सॉन में ड्यूल एयरबैग्स, ईबीडी के साथ एबीएस, रिवर्स पार्किंग सेंसर्स और कैमरा, सीटबेल्ट रिमाइंडर, हाई-स्पीड अलर्ट और ISOFIX चाइल्ड सीट माउंट्स जैसे सेफ्टी फीचर्स मिलेंगे।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव से पास हो गया है. इस बीच, भारतीय शेयर बाजार में सुस्‍ती देखने को मिली है.
बीते कई दिनों की रिकॉर्ड तेजी के बाद भारतीय शेयर बाजार में सुस्‍ती देखने को मिल रही है. दरअसल, अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव से पास हो गया है. अमेरिका की इस राजनीतिक हलचल का असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ा है.

सेंसेक्‍स और निफ्टी का ये रहा हाल

शुरुआती 20 मिनटों में सेंसेक्‍स करीब 40 अंक तक टूटकर 41,530 के नीचे पहुंच गया तो वहीं निफ्टी करीब 10 अंक लुढ़क कर 12,215 अंक के नीचे आ गया. बता दें कि बुधवार को कारोबार के अंत में सेंसेक्‍स 206.40 अंक की तेजी के साथ 41,558.57 अंक पर बंद हुआ तो वहीं निफ्टी 56.65 अंक की तेजी के साथ 12 हजार 221 अंक के पार पहुंच गया.

कारोबार के दौरान सेंसेक्‍स ने 41614.77 अंक के रिकॉर्ड स्‍तर को छू लिया था. सेंसेक्‍स का ये ऑल टाइम हाई है. शुरुआती कारोबार में बैंकिंग सेक्‍टर के शेयर धड़ाम हो गए. सबसे अधिक गिरावट यस बैंक के शेयर में रही. इसके अलावा इंडसइंड बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी, कोटक बैंक के शेयर में भी सुस्‍ती देखने को मिली.

टाटा ग्रुप के शेयरों का हाल

गुरुवार के कारोबार के दौरान बीएसई इंडेक्‍स में टाटा मोटर्स और टीसीएस के शेयर में मामूली बढ़त दर्ज की गई. बता दें कि राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने बुधवार को साइरस मिस्त्री को पुन: टाटा संस का चेयरमैन बनाने का आदेश दिया है. इसके साथ ही कार्यकारी चेयरमैन एन.चंद्रशेखरन की नियुक्त को अवैध करार दिया.
अमेरिका में क्‍यों मची है हलचल ?

दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव से पास हो गया है. यूक्रेन विवाद के बाद स्पीकर नैन्सी पॉलोसी ने डोनाल्ड ट्रंप पर पद का दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए महाभियोग लाने की बात की थी. गुरुवार को महाभियोग प्रस्ताव को पास कर दिया गया है. हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में प्रस्ताव पास होने के बाद अब ये सीनेट में जाएगा, जहां पर डोनाल्ड ट्रंप पर लगाए गए आरोपों का एक ट्रायल किया जाएगा. ट्रायल के बाद सीनेट में इन प्रस्तावों पर मतदान होगा.

नई दिल्‍ली,ब्रिटेन के हाईकोर्ट ने चीनी बैंकों से संबंधित एक मामले में भारतीय कारोबारी अनिल अंबानी के पक्ष में फैसला दिया है. दरअसल, चीन के बैंकों ने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम) को दिए गए कॉरपोरेट कर्ज के एवज में अनिल अंबानी से 68 करोड़ डॉलर का दावा पेश किया था. अब इस दावे को लंदन स्थित हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है.
इसकी जानकारी देते हुए अनिल अंबानी के प्रवक्ता ने बताया, "यूके हाईकोर्ट ने अनिल अंबानी के उस पक्ष को स्वीकार किया कि रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड द्वारा प्राप्त कॉरपोरेट कर्ज के लिए उनकी कथित गारंटी के संबंध में चीनी बैंकों का दावा मान्य नहीं हो सकता है. अनिल अंबानी की ओर से अदालत में हरीश साल्वे पेश हुए थे."
उन्होंने आगे बताया, "अंबानी ने अदालत में इस मामले को चुनौती देते हुए अपने पक्ष में मजबूत बचाव पेश किया है और वह इस कार्यवाही को चुनौती देना जारी रखेंगे." प्रवक्‍ता के मुताबिक चीन के बैंकों द्वारा यूके हाईकोर्ट में दायर आवेदन को खारिज करने के फैसले से अनिल अंबानी प्रसन्न हैं.
प्रवक्‍ता ने बताया कि अदालती कार्यवाही के इस चरण में चीनी बैंकों के अधिकारियों के साथ बातचीत करने वाले आरकॉम के अधिकारियों का सबूत पेश नहीं हो सका है. हालांकि अंबानी इस बात से आश्वस्त हैं कि जब अदालत के सामने सारे तथ्य और साक्ष्य पेश होंगे तो तस्‍वीर साफ हो जाएगी.

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