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News Creation - बिज़नेस
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बिज़नस

बिज़नस (3673)

नईदिल्ली। एलएंडटी फाइनेंस का चालू वित्त वर्ष की सितंबर में समाप्त दूसरी तिमाही का शुद्ध लाभ 69 प्रतिशत घटकर 174 करोड़ रुपये रह गया। कॉरपोरेट कर में कटौती के बाद स्थगित कर संपत्ति (डीटीए) के एकमुश्त समायोजन की वजह से कंपनी का मुनाफा घटा है। कंपनी ने इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में 559.12 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया था। कंपनी ने बयान में कहा कि दूसरी तिमाही में उसकी कुल आय बढ़कर 3,711.85 करोड़ रुपये पर पहुंच गई, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में 3,302.35 करोड़ रुपये रहा था।
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विस्तारा ने पिछले दो महीनों में अपने नेटवर्क में उल्लेखनीय वृद्धि की है। उसने नौ नये शहरों तक उड़ान शुरू की है जिनमें छह शहर- इंदौर, जोधपुर, खजुराहो, पटना, तिरुवनंतपुरम और उदयपुर- देश के हैं और विदेश में बैंकाक, दुबई और सिंगापुर हैं।

विस्तारा ने पिछले दो महीनों में अपने नेटवर्क में उल्लेखनीय वृद्धि की है। उसने नौ नये शहरों तक उड़ान शुरू की है जिनमें छह शहर- इंदौर, जोधपुर, खजुराहो, पटना, तिरुवनंतपुरम और उदयपुर- देश के हैं और विदेश में बैंकाक, दुबई और सिंगापुर हैं। कोच्चि के बाद केरल में तिरुवनंतपुरम विस्तारा का दूसरा गंतव्य होगा। 

वित्त वर्ष 19-20 उत्पादन की दूसरी तिमाही में 16% की वृद्धि

दूसरी तिमाही में 1.46 मीट्रिक टन यानि 10% और उत्पादन 1.58 मीट्रिक टन यानि.16% वर्ष दर वर्ष विकास

रायपुर । जेएसपीएल ने अक्टूबर 7, 2019 में उत्पादन में 16 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। दूसरी तिमाही में जेएसपीएल ने अपने घरेलू परिचालन में 1.58 मिलियन टन का उत्पादन किया, इसी तिमाही में बिक्री 10 प्रतिशत बढ़कर 1.46 मिलियन टन हो गई। इस्पात और संबंधित उत्पादों का त्रैमासिक उत्पादन और बिक्री पिछले साल की समान अवधि में क्रमशः 1.36 मीट्रिक टन और 1.32 मीट्रिक टन थी।    वीआर शर्मा, एमडी, जेएसपीएल ने कहा, "यह मजबूत परिचालन और बाजार के प्रदर्शन के पीछे जेएसपीएल के लिए सबसे अच्छे तिमाहियों में से एक रहा है," कंपनी इस साल अपने उच्चतम संस्करणों को देने और उत्पादन में तेजी के साथ पटरी पर है। अंगुल में, हम उत्पादन और बिक्री के मामले में विकास की गति को और तेज करने के बारे में आश्वस्त हैं। " श्री शर्मा ने आगे कहा कि “अब हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता ब्याज, मूल्यह्रास और परिशोधन से पहले की कमाई (एबिडा) को प्रति वर्ष 12,000 करोड़ से अधिक पर ले जाना है। समेकित आधार अगले दो वर्षों में रु 30000 करोड़ और का शुद्ध ऋण घटाकर रु.10,000 करोड़ से अधिक होना है। आगे "उन्होंने कहा "हम उम्मीद कर रहे हैं कि वर्ष के अंत में हम लगभग 34,000 करोड़ रुपये में ही इसे बंद कर पाएंगे।"

सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन यानी मंगलवार को शेयर बाजार में जोरदार गिरावट देखी गई। दोपहर करीब 2:40 बजे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स 590.03 अंक यानी 1.53 फीसदी की गिरावट के बाद 38,077.30 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 171.20 अंक यानी 1.49 फीसदी की गिरावट के बाद 11,303.25 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। 

बढ़त के साथ खुला था सेंसेक्स

शुरुआती कारोबार में शेयर बाजार बढ़त के साथ खुला था। सेंसेक्स 237.73 अंकों की बढ़त के बाद 38,905.06 के स्तर पर खुला था। वहीं निफ्टी 70.30 अंकों की बढ़त के बाद 11,544.80 के स्तर पर खुला था। 

23.67 फीसदी टूटा यस बैंक का शेयर

मंगलवार को यस बैंक के शेयर में भारी गिरावट आई। दोरहक 2:40 बजे के करीब ये 9.80 अंक यानी 23.67 फीसदी टूटा, जिसके बाद यस बैंक का शेयर 31.60 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। शुरुआती कारोबार में यस बैंक का शेयर 42 के स्तर पर खुला था। शेयर में गिरावट तब आई जब प्रवर्तकों ने इस बात की जानकारी दी कि उन्होंने बैंक में अपनी 2.16 फीसदी हिस्सेदारी बेच दी है। यस कैपिटल इंडिया, मॉर्गन क्रेडिट्स प्राइवेट और राणा कपूर ने 26 और 27 सितंबर को कुल 552 लाख शेयर बेचे हैं। 

ऐसा रहा दिग्गज शेयरों का हाल

दिग्गज शेयरों की बात करें, तो मंगलवार को टाटा मोटर्स, बीपीसीएल, आईओसी, इंडसइंड बैंक, हीरो मोटोकॉर्प, एचडीएफसी बैंक और बजाज फाइनेंस के शेयर हरे निशान पर खुले। वहीं गिरावट वाले दिग्गज शेयरों की बात करें, तो इनमें सिप्ला, रिलायंस कैपिटल, वोडाफोन आईडिया और डीएचएफएल शामिल हैं। 

सेक्टोरियल इंडेक्स पर नजर

सेक्टोरियल इंडेक्स पर नजर डालें, तो मंगलवार को आईटी और मेटल के अतिरिक्त सभी सेक्टर्स हरे निशान पर खुले। वहीं ऑटो, बैंक, एफएमसीजी, एनर्जी और फार्मा शामिल है। 

प्री ओपन के दौरान यह था शेयर मार्केट का हाल

प्री ओपन के दौरान सेंसेक्स में 197.84 अंक यानी 0.51 फीसदी की बढ़त देखी गई थी, जिसके बाद सेंसेक्स 38,865.17 के स्तर पर था। वहीं निफ्टी में 71 अंक यानी 0.62 फीसदी की बढ़त देखी गई थी, जिसके बाद निफ्टी 11,545.50 के स्तर पर था। 

70.73 के स्तर पर खुला रुपया

रुपया आज डॉलर के मुकाबले 14 पैसे की बढ़त के बाद 70.73 के स्तर पर खुला। वहीं, पिछले कारोबारी दिन डॉलर के मुकाबले रुपया 70.87 के स्तर पर बंद हुआ था।

पिछले कारोबारी दिन गिरावट के साथ खुला था बाजार

सोमवार को शेयर बाजार गिरावट के साथ खुला था। सेंसेक्स 118.54 अंक यानी 0.31 फीसदी की गिरावट के बाद 38,704.03 के स्तर पर खुला था। वहीं निफ्टी 34.90 अंक यानी 0.30 फीसदी की गिरावट के बाद 11,477.50 के स्तर पर खुला था। उसके बाद सुबह करीब 11:45 बजे सेंसेक्स 293.80 अंक यानी 0.76 फीसदी की गिरावट के बाद 38,528.77 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 86.70 अंक यानी 0.75 फीसदी की गिरावट के बाद 11,425.70 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। 

सोमवार को लाल निशान पर बंद हुआ था बाजार

पिछले कारोबारी दिन शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ था। सेंसेक्स 155.24 अंकों की गिरावट के बाद 38,667.33 के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी 37.90 अंकों की गिरावट के बाद 11,474.50 के स्तर पर बंद हुआ था।  

नई दिल्ली पेट्रोल और डीजल के बाद अब सरकारी तेल कंपनियों ने घरेलू गैस सिलेंडर के दामों को भी बढ़ाने का फैसला लिया है. अक्टूबर महीने के पहले दिन कंपनियों की ओर से जारी किए गए नए रेट में घरेलू रसोई गैस सिलेंडर (14.2 किलो) के दाम 15 रुपये बढ़ा दिए गए हैं. यह लगातार दूसरा महीना है जब एलपीजी (LPG) के दामों में बढ़ोतरी हुई है. 1 सितंबर को बिना सब्सिडी वाले रसोई गैस के दाम में 15.50 रुपये की बढ़ोत्तरी की गई थी. हालांकि, सरकार ने 1st अक्टूबर से घरेलू प्राकृतिक गैस (Natural Gas Price) के दाम में पिछले 2.5 साल के दौरान पहली बार कटौती की है. आपको बता दें कि सरकार के इस कदम से ऑटो फ्यूल के रूप में इस्तेमाल होने वाली CNG और घरों में खाना पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाली पाइप्ड नेचुरल गैस यानी PNG की कीमतें कम हो जाएंगी.
पिछले महीने एक सितंबर को बिना सब्सिडी वाले रसोई गैस के दाम में 15.50 रुपये का इजाफा किया था. इसके बाद इस महीने रसोई गैस एक बार फिर महंगी हो गई है.
यह लगातार दूसरा महीना है जब एलपीजी (LPG) के दामों में बढ़ोतरी हुई है. मंगलवार को रेट बदलने के बाद घरेलू रसोई गैस सिलेंडर (14.2 किलो) के बाजार भाव में करीब 15 रुपये की वृद्धि हुई है.
राजधानी दिल्ली में 14.2 किलो के बिना सब्सिडी वाले गैस सिलेंडर की कीमत 605 रुपए हो गई है, जबकि 19 किलो वाला गैस सिलेंडर अब 1085 रुपये में रिफिल कराया जा सकेगा.
मुंबई में 14.2 किलो का बिना सब्सिडी वाला गैस सिलेंडर 574 रुपये, कोलकाता में 630 रुपये में, जबकि चेन्नई में 620 रुपये में रिफिल कराया जा सकेगा.

नई दिल्ली.  नया मोटर व्हीकल एक्ट 2019 (Motor Vehicle Act 2019) लागू होने के बाद आज यानी 1 अक्टूबर से ड्राइविंग लाइसेंस (DL) बनवाने का नियम और गाड़ी का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC)  भी बदल गया है. आपको बता दें 1 अक्टूबर से डीएल और आरसी दोनों के फार्मेट में बदलाव किया गया है. इस बदलाव के बाद देशभर में सभी के डीएल और गाड़ी की आरसी का फार्मेट एक जैसा होगा. यानी अब से डीएल और आरसी का रंग, लुक, डिजाइन और सिक्योरिटी फीचर्स एक समान होंगे.
आज से लागू होने वाले नए नियम के तहत स्मार्ट डीएल और आरसी में माइक्रोचिप और क्यूआर कोड होगा. इसका फायदा यह होगा कि हर राज्य में डीएल, आरसी का रंग और प्रिंटिंग एक जैसी होगी. साथ ही सभी डीएल और आरसी में जानकारियां एक ही जगह पर होंगी. अभी तक हर राज्य के हिसाब से डीएल और आरसी का फार्मेट अलग-अलग होता है. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. क्यूआर कोड और चिप में पिछला सभी रिकॉर्ड होगा.
माइक्रोचिप और क्यूआर कोड की सहायता से केंद्रीय डाटा बेस से ड्राइवर या वाहन के बारे में पूरा रिकॉर्ड निकाला जा सकेगा. क्यूआर कोड को रीड करने के लिए यातायात पुलिस को हैंडी ट्रैकिंग डिवाइस भी दिए जाने का प्लान है. हर चालक के डीएल के पीछे इमरजेंसी नंबर भी लिखा रहेगा. किसी भी आपात स्थिति में पुलिस या अन्य कोई व्यक्ति इस नंबर पर संपर्क कर सकेगा. परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है इस बदलाव के बाद यातायात की जिम्मेदारी संभालने वाले पुलिसकर्मियों को सुविधा होगी.
डीएल और आरसी को लेकर फिलहाल हर राज्य अपने अनुसार फॉर्मेट तैयार करते रहे हैं, लेकिन इसमें परेशानी यह है कि किसी राज्य में डीएल पर जानकारी शुरू में है तो किसी में संबंधित जानकारी पीछे की तरफ प्रिंट की गई हैं. लेकिन सरकार के नए फैसले के बाद डीएल और आरसी पर जानकारियां एक जैसी एक ही जगह पर होंगी.

नयी दिल्ली। पेट्रोल पंपों पर ईंधन खरीदने पर क्रेडिट कार्ड से भुगतान पर अब कोई छूट नहीं मिलेगी। अभी तक सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियां क्रेडिट कार्ड से ईंधन के लिए भुगतान पर 0.75 प्रतिशत की छूट दे रही थीं। करीब ढाई साल पहले डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन के लिए यह व्यवस्था शुरू की गई थी।

देश के सबसे बड़े भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने अपने क्रेडिट कार्ड ग्राहकों को भेजे एसएमएस में कहा है कि सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों की सलाह पर एक अक्टूबर से पेट्रोल पंपों से ईंधन की खरीद पर क्रेडिट कार्ड से भुगतान पर मिलने वाली 0.75 प्रतिशत की छूट को बंद किया जा रहा है। 

वर्ष 2016 के आखिर में नोटबंदी के बाद सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों इंडियन आयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (एचपीसीएल) को ईंधन की खरीद के लिए कार्ड से भुगतान पर 0.75 प्रतिशत की छूट देने का निर्देश दिया था।

क्रेडिट-डेबिट कार्ड और ई-वॉलेट के जरिये 0.75 प्रतिशत की छूट को दिसंबर, 2016 में शुरू किया गया था। यह व्यवस्था ढाई साल से अधिक समय तक चली। अब इसे बंद करने का फैसला किया गया है। नकद छूट के अलावा सरकार ने पेट्रोलियम कंपनियों को कार्ड भुगतान शुल्क ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (एमडीआर)का बोझ भी वहन करने को कहा था। आमतौर पर एमडीआर की लागत रिटेलर द्वारा वहन की जाती है। 

नयी दिल्ली। दूरसंचार कंपनियों के कुल राजस्व में बीते साल यानी 2018 में 7.13 प्रतिशत की कमी आई है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई)ने बुधवार को यह जानकारी दी। इस दौरान सरकार को दूरसंचार आपरेटरों से मिलने वाली लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम शुल्क में भी क्रमश: 10.29 प्रतिशत और 17.7 प्रतिशत की गिरावट आई है। ट्राई की 2018 में दूरसंचार सेवाओं के प्रदर्शन के बारे में जानकारी देने वाली रिपोर्ट में कहा गया है कि बीते साल कंपनियों का दूरसंचार सेवाओं की बिक्री से अर्जित समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) 10 प्रतिशत घटकर 1,44,446 करोड़ रुपये रह गया, जो 2017 में 1,60,814 करोड़ रुपये था। 

 वहीं इस दौरान सकल राजस्व या आय घटकर 2,37,417 करोड़ रुपये रह गई, जो 2017 में 2,55,655 करोड़ रुपये रही थी। सकल राजस्व में स्थापना शुल्क, हैंडसेटों की बिक्री से प्राप्ति, ब्याज, लाभांश, मूल्यवर्धित सेवाएं, इंटरकनेक्शन शुल्क, रोमिंग शुल्क, ढांचे को साझा करने से होने वाली आय आदि आते हैं। इस दौरान सरकार को दूरसंचार कंपनियों से स्पेक्ट्रम प्रयोग शुल्क (एसयूसी) से प्राप्ति 17.74 प्रतिशत घटकर 4,186 करोड़ रुपये रह गई। वहीं लाइसेंस शुल्क संग्रह 10.2 प्रतिशत घटकर 11,641 करोड़ रुपये रह गया। 

दूरसंचार सेवाओं के कुल एजीआर में एक्सेस सेवाओं का हिस्सा 71.19 प्रतिशत रहा। एक्सेस सेवाओं में सकल राजस्व, एजीआर, लाइसेंस शुल्क और एसयूसी में क्रमश: 8.88 प्रतिशत, 16.13 प्रतिशत, 16.20 प्रतिशत और 17.82 प्रतिशत की गिरावट आई। ट्राई की रिपोर्ट के अनुसार एक्सेस सेवाओं से भारती एयरटेल का एजीआर सालाना आधार पर 26.95 प्रतिशत, वोडाफोन का 8.12 प्रतिशत और आइडिया का 65.61 प्रतिशत घटा। पिछले साल अगस्त में वोडाफोन इंडिया और आइडिया सेल्युलर के परिचालन का विलय हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार इस दौरान रिलायंस जियो का एजीआर 316.5 प्रतिशत बढ़कर 31,097 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। सार्वजनिक क्षेत्र की दूरसंचार कंपनियों का दूरसंचार सेवाओं से एक्सेस एजीआर में हिस्सा घटकर 9.66 प्रतिशत पर आ गया। इससे पिछले साल यह 10.23 प्रतिशत रहा था।

सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घरेलू मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों को बड़ी राहत दी है, जिसके बाद शेयर बाजार में जोरदार उछाल देखने को मिली। दोपहर करीब 2:15 बजे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स 2102.46 अंक यानी 5.83 फीसदी की बढ़त के बाद 38,195.93 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। निफ्टी की बात करें, तो 627.90 अंक यानी 5.87 फीसदी की बढ़त के बाद नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 11,332.70 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। ये शेयर बाजार में पिछले 10 साल की सबसे बड़ी इंट्रा डे तेजी है।

दोपहर 1:45 बजे 38,099.64 के स्तर पर था सेंसेक्स

दोपहर करीब 1:45 बजे सेंसेक्स 2006.17 अंक यानी 5.56 फीसदी की बढ़त के बाद 38,099.64 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। निफ्टी की बात करें, तो 587.25 अंक यानी 5.49 फीसदी की बढ़त के बाद निफ्टी 11,292.05 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। 

दोपहर 12:20 बजे यह था शेयर बाजार का हाल

दोपहर करीब 12:20 बजे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स 1925.81 अंक यानी 5.34 फीसदी की बढ़त के बाद 38,019.28 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। निफ्टी की बात करें, तो 560.35 अंक यानी 5.24 फीसदी की बढ़त के बाद नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 11,265.35 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। 
सरकार की ओर से आयकर रिटर्न दाखिल करने की तिथि बढ़ाने जाने के बाद भी कई करदाताओं ने अब तक आईटीआर नहीं भरा है। ऐसे करदाताओं के लिए आईटीआर भरने के लिए आज आखिरी दिन है। पहले अंतिम तिथि 31 जुलाई थी, जिसे एक महीने के लिए बढ़ाया गया था।
 
इस संदर्भ में आयकर विभान ने भी कहा है कि आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 अगस्त 2019 है। अंतिम तारीख को बढ़ाया नहीं गया है। 
 

दरअसल, कई आयकरदाता आज-कल टालने की आदत से अंतिम समय तक रिटर्न नहीं भरते और बाद में विभाग की साइट पर तकनीकी दिक्कत या दस्तावेज की कमी से तय समय में आईटीआर नहीं भर पाते। सीबीडीटी के अनुसार, व्यक्तिगत आयकरदाता, नौकरीपेशा, हिंदू अविभाजित परिवारों (एचयूएफ) और जिन लोगों के खातों की ऑडिटिंग की जरूरत नहीं है, उन्हें 31 अगस्त 2019 तक अनिवार्य रूप से रिटर्न दाखिल करना है। ऐसे करदाताओं के लिए रिटर्न भरना काफी आसान है। वे ऑनलाइन तरीके से विभाग की साइट पर पैन कार्ड, आधार, कंपनी द्वारा जारी फॉर्म-16 और फॉर्म 26एस की मदद से रिटर्न दाखिल कर सकते हैं, जबकि इसे ऑफलाइन भी भरा जा सकता है।

इनके लिए 30 सितंबर तक छूट

कंपनियों या किसी फर्म के वर्किंग पार्टनर, व्यक्तिगत या फर्म जिसके खाते की ऑडिटिंग जरूरी है, उनके लिए रिटर्न भरने की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2019 है। इसके अलावा आयकर अधिनियम की धारा 92ई के तहत जिन असेसी को रिपोर्ट देनी होती है, उन्हें भी 30 सितंबर तक छूट मिलेगी। धारा 92ई में ऐसे करदाता आते हैं, जिन्होंने दूसरे देश में कारोबार या कोई लेनदेन किया हो।  



 

आईटीआर के सात चरण

  • करदाता अपने पैन से यूजर आईडी और पासवर्ड बनाकर incometaxindiaefiling.gov.in पर लॉगिन करें।
  • फाइलिंग इनकम टैक्स रिटर्न विकल्प पर क्लिक करने से अगले पेज पर आपका पैन नंबर दिखेगा।
  • यहां मूल्यांकन वर्ष, फॉर्म का नाम चुनने के बाद सबमिशन मोड सेलेक्ट करना होगा।
  • इसके बाद दो विकल्प दिखेंगे, एक आधार ओटीपी से वेरिफिकेशन और दूसरा प्रिंट भेजकर वेरिफिकेशन। किसी एक का चुनाव कर अगला विकल्प पर क्लिक करें। 
  • सामने जो पेज आएगा उसमें आय का विवरण, कटौती और अपने निवेश की पूरी जानकारी भरें। 
  • रिटर्न या टैक्स की गणना के बाद आपको भुगतान की जानकारी स्क्रीन पर दिखेगी। 
  • अगर टैक्स देनदारी है तो भुगतान करें और रिटर्न मिल रहा है तो सबमिट पर क्लिक करें। आपका रिटर्न दाखिल हो जाएगा।

आईटीआर भरने के कई फायदे

तीन साल का रिटर्न फॉर्म हो तो बैंक से कर्ज लेना और क्रेडिट कार्ड बनवाना आसान हो जाता है।
बड़े लेनदेन, प्रॉपर्टी खरीदने और म्यूचुअल फंड में ज्यादा निवेश के लिए आईटीआर की जरूरत होती है।
अगर टीडीएस कटा है तो इसे क्लेम करने के लिए भी आईटीआर भरना जरूरी है।
वीजा बनाने के लिए दूतावास दो साल का रिटर्न फॉर्म मांगते हैं। 
अपना कारोबार शुरू करने के लिए भी आईटीआर फॉर्म की जरूरत होती है।

 

यहां चेक करें रिफंड की स्थिति

आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि नजदीक आती जा रही है। अभी तक अधिकतर करदाताओं ने अपना रिटर्न दाखिल भी कर दिया होगा। आईटीआर भरने के बाद से ही करदाता अपने रिफंड का इंतजार करने लगता है। आयकर विभाग रिटर्न के ई-सत्यापन के तत्काल बाद रिफंड की प्रक्रिया शुरू कर देते हैं। 

दरअसल, इनकम टैक्स रिफंड वह राशि होती है जो करदाता की ओर से कुल कर देयता से अधिक भुगतान की जाती है। अगर करदाता का दावा सही होता है तो आयकर विभाग इसकी जानकारी ईमेल या एसएमएस के जरिये देता है। इसमें बताया जाएगा कि कितनी राशि करदाता के खाते में रिफंड की जाएगी। साथ ही रिफंड का एक सीक्वेंस नंबर भी दिया जाएगा। यह सूचना आयकर कानून की धारा 143(1) के तहत भेजी जाती है। अमूमन ई-सत्यापन के बाद रिफंड मिलने में 2 से 3 महीने का वक्त लगता है, लेकिन कई बार यह सिर्फ 15 दिनों में भी क्रेडिट हो जाता है। 

इन तरीकों से करें रिफंड की जांच

करदाता अपने आयकर रिफंड की मौजूदा स्थिति जानने के लिए आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल अथवा एनएसडीएल की वेबसाइट पर जा सकते हैं। हालांकि, रिफंड के लिए आपका खाता पैन से जुड़ा होना जरूरी है। आयकर विभाग ने घोषणा की थी कि 1 मार्च 2019 से केवल ई-रिफंड ही जारी किया जाएगा। यह केवल उसी बैंक खाते में जमा होगा जो पेन कार्ड से लिंक है और जिसका विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर पूर्व सत्यापन हो चुका है।

 

स्थिति जांचने का पहला तरीका

  • करदाता www.incometaxindiaefiling.gov.in पर पैन और पासवर्ड से अपना अकाउंट लॉगइन करें।
  • अब रिव्यू रिटर्न/फॉर्म्स पर क्लिक करें।
  • ड्रॉप डाउन मेन्यू से इनकम टैक्स रिटर्न सेलेक्ट करें और असेसमेंट ईयर का चयन करें। 
  • इसके बार भरे गए रिटर्न फॉर्म से संबंधित एकनॉलेजमेंट नंबर पर क्लिक करें। 
  • सामने जो पेज खुलेगा उसमें रिटर्न भरने और ई-सत्यापन की तारीख के साथ आपका रिफंड जारी होने की स्थिति भी दिख जाएगी। 

एनसीडीएल पर जानें स्थिति

  • आयकर विभाग की ओर से बैंक को रिफंड भेजे जाने के 10 दिन बाद टिन एनसीडीएल की वेबसाइट पर स्थिति जान सकते हैं।
  • इसके लिए करदाता https://tin.tin.nsdl.com/oltas/refundstatuslogin.html पर जाएं।
  • यहां अपने पैन का ब्योरा और असेसमेंट ईयर डालें।
  • कैप्चा भरने के बाद सबमिट पर क्लिक करें और आपको स्क्रीन पर अपने रिफंड की स्थिति दिख जाएगी। इसमें भुगतान का प्रकार, रेफरेंस नंबर और तारीख लिखी होगी। 

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