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News Creation - बिज़नेस
बिज़नस

बिज़नस (3673)

नयी दिल्ली। प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक एम एस स्वामीनाथन ने कहा है कि किसानों की आय बढ़ाने के लिये अन्य उपायों के अलावा धान की फसल के हर हिस्से, डंठल से लेकर दाने तक का मूल्यवर्द्धन करने तथा इसके लिये जैव-पार्क स्थापित किये जाने की जरूरत है। डॉ स्वामीनाथन को उम्मीद है कि इस बार के आम बजट में सरकार इस दिशा में कुछ नयी पहल कर सकती है।
स्वामीनाथन ने ‘ भाषा ’की ओर से आम बजट के संबंध में ईमेल के जरिए पूछे गए सवालों के जवाब में कहा है कि कृषि क्षेत्र के विकास के लिये अन्य बातों के अलावा किसानों को उनकी उपज का बेहतर और लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के साथ विपणन व्यवस्था में सुधार के लिये ठोस कदम उठाए जाने की अपेक्षा है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पांच जुलाई को नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली राजग सरकार का 2019-20 का पहला बजट पेश करेंगी।
स्वामीनाथन ने कहा, ‘ किसानों की आय बढ़ाने के लिए धान की फसल के हर हिस्से का मूल्यवर्द्धन किया जाए और इसके लिये जैव-पार्क स्थापित किए जाएं।’’ गौरतलब है कि भारत में धान की डंठल को खेत में जलाने की समस्या को देखते हुए सरकार पंजाब और ओडिशा जैसे कुछ राज्यों में पुआल से जैव ईंधन बनाने की इकाइयों को प्रोत्साहित कर रही है। धान की भूसी और ब्रान (चावल की मिलिंग के दौरान निकलने वाली खूदी) का भी मूल्यवर्धन किया जाता है। सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा है। 
 
हरित क्रांति के जनक स्वामीनाथन ने सतत कृषि के लिये बजट में जैविक खेती, जैव-विविधता संरक्षण और जल के बेहतर उपयोग के साथ उपभोक्ता और उत्पाद उन्मुख कृषि व्यापार को प्रोत्साहित करने ‘खेत से खाने की प्लेट तक’ के बीच की कड़ियों को कुशल बनाने पर ध्यान दिये जाने की भी उम्मीद जतायी है ताकि किसान और उपभोक्ता दोनों को लाभ हो सके। उन्होंने कहा, ‘‘किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य मिलना जरूरी है और बजट में इस दिशा में ठोस उपाय किये जाने की मैं उम्मीद करता हूं। इसके अलावा कृषि उपज के बेहतर विपणन के साथ भंडारण, परिवहन समेत फसल कटाई के बाद की बेहतर प्रौद्योगिकी के लिये भी उपाय किये जाने की अपेक्षा है।’’उन्होंने किसानों की राष्ट्रीय नीति को भी क्रियान्वित करने की सिफारिश की जो उनकी अध्यक्षता वाले राष्ट्रीय किसान आयोग की सिफारिशों पर आधारित है।
इन सुझावों में किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य उनकी औसत उपज लागत का कम-से-कम 50 प्रतिशत मिलना सुनिश्चित करना, सिंचाई क्षेत्र में निवेश, कृषि संबंधी ढांचागत सुविधा में निवेश में बढ़ोतरी, सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी का पता लगाने वाली सुविधाओं के साथ अत्याधुनिक मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं का नेटवर्क तैयार करना, किसानों मृदा संरक्षण, जल संरक्षण, जैव विविधता को बनाये रखने में मदद के लिये संरक्षित खेती को बढ़ावा देना, सस्ता और समय पर कर्ज की उपलब्धता, समन्वित रूप से फसल, पशुधन और मानव स्वास्थ्य बीमा पैकेज का विकास आदि शामिल हैं। एक अन्य सवाल के जवाब में स्वामीनाथन ने कृषि क्षेत्र में संरचनात्मक सुधारों को लेकर उच्च अधिकार प्राप्त समिति गठित किये जाने पर प्रसन्नता जतायी। हालांकि उन्होने उम्मीद जतायी कि समिति की पहली प्राथमिकता राष्ट्रीय किसान आयोग की सिफारिशों को लागू करने की होगी। सरकार ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस की अध्यक्षता में मुख्यमंत्रियों की अधिकार प्राप्त समिति सोमवार को गठित की।

नयी दिल्ली। कर विभाग ने 50 लाख रुपये तक का कारोबार करने वाले सेवाप्रदाताओं के लिए कम्पोजिशन योजना का विकल्प चुनने की तारीख तीन महीने बढ़ाकर 31 जुलाई कर दी है। कम्पोजिशन योजना का विकल्प चुनने वाले सेवाप्रदाताओं को छह प्रतिशत का माल एवं सेवा कर (जीएसटी) देना होगा। केंद्रीय वित्त मंत्री की अगुवाई वाली जीएसटी परिषद ने एक अप्रैल, 2019 से ऐसे सेवाप्रदाताओं को कम्पोजिशन योजना का विकल्प चुनने और घटी छह प्रतिशत की दर से कर का भुगतान करने की अनुमति दी थी। जीएसटी परिषद में राज्यों के वित्त मंत्री भी शामिल हैं।  जीएसटी के तहत ज्यादातर सेवाओं पर 12 और 18 प्रतिशत का कर लगता है। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने सर्कुलर में कहा कि ऐसे आपूर्तिकर्ता जो कम्पोजिशन योजना का विकल्प चुनना चाहते हैं उन्हें फॉर्म जीएसटी सीएमपी-02 भरना होगा।इसके लिए उन्हें कम्पोजिशन शुल्क के लिये पात्र अन्य आपूर्तिकर्ता का चयन करना होगा। उन्हें यह फॉर्म 31 जुलाई, 2019 तक भरना होगा।

इससे पहले सीबीआईसी ने कम्पोजिशन योजना का विकल्प चुनने के लिए अंतिम तारीख 30 अप्रैल,2019 तय की थी। जीएसटी कम्पोजिशन योजना अब तक उन व्यापारियों और विनिर्माताओं को उपलब्ध थी जिनका सालाना कारोबार एक करोड़ रुपये तक है। इस सीमा को एक अप्रैल से बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये कर दिया गया है। योजना के तहत व्यापारियों और विनिर्माताओं को वस्तुओं पर सिर्फ एक प्रतिशत जीएसटी देना होता है। वैसे इन वस्तुओं पर ऊंचा 5, 12 या 18 प्रतिशत का जीएसटी लगता है। ऐसे डीलरों को अपने उपभोक्ताओं से जीएसटी लेने की अनुमति नहीं है। जीएसटी के तहत पंजीकृत 1.22 करोड़ कंपनियों और कारोबारियों में से 17.5 लाख ने जीएसटी कम्पोजिशन योजना के विकल्प को चुना है। 

मुंबई। मॉनसून की प्रगति में तीव्र सुधार की खबरों से उत्साहित निवेशकों की लिवाली के समर्थन से स्थानीय शेयर बाजारों में मंगलवार को तेजी दर्ज की गयी और बीएसईसेंसेक्स में 312 अंक का उछाल आया। कच्चे तेल के अंतराष्ट्रीय बाजार में नरमी की खबर से भीबाजार को समर्थन मिला। बीएसई का 30 शेयरों पर आधारित सेंसेक्स सूचकांक 311.98 अंक यानी 0.80 प्रतिशत की उछाल के साथ 39,434.94 अंक पर बंद हुआ। हालांकि दिन के सत्र में सेंसेक्स में लंबे समय तक गिरावट देखी गयी और एक समय यह 350 अंक से अधिक टूट गया था।
दिन में सेंसेक्स 38,946.04 से 39,490.64 के दायरे के बीच चढ़ता उतरता रहा। इसी तरह एनएसई का निफ्टी 96.80 अंक यानी 0.83 की गिरावट के साथ 11,796.45 अंक पर बंद हुआ। दिन में यह 1,651 से 11,814.40 अंक के दायरे में घूमता रहा। मंगलवार को आरआईएल के शेयर में 2.63 प्रतिशत की सर्वाधिक बढ़त देखने को मिली। इसके अलावा एनटीपीसी, एक्सिस बैंक, टाटा स्टील, पावरग्रिड, एचडीएफसी ट्विन्स, भारती एयरटेल, एमएंडएम, आईसीआईसीआई बैंक, एसबीआई और बजाज फाइनेंस के शेयर में 2.51 प्रतिशत तक की तेजी देखने को मिली।
वहीं येस बैंक, एशियन पेंट्स, इंडसइंड बैंक, टेकएम, एचयूएल, टीसीएस, एलएंडटी, हीरो मोटोकॉर्प और एचसीएल टेक के शेयर में 1.70 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिली। आनन्द राठी शेयर्स एंड स्टॉक ब्रोकर्स के बुनियादी शोध विभाग (निवेश सेवाओं) के प्रमुख नरेंद्र सोलंकी ने कहा कि मॉनसून के आधे भारत पर छाने एवं इस सप्ताह मध्य और पश्चिमी भारत की ओर बढ़ने के लिहाज से परिस्थितियों के अनुकूल होने संबंधी मौसम विभाग के बयान के बाद बाजार शुरुआती गिरावट से उबरा। उन्होंने कहा,  बैंकिंग, धातु और रीयल इस्टेट क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों की लिवाली से दोपहर के सत्र में धारणा और मजबूत हुई। 
इसी बीच शंघाई, हांगकांग, तोक्यो और सियोल में शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। वहीं शुरुआती कारोबार में यूरोप के बाजार में भी गिरावट का रुख देखने को मिल रही थी। वायदा बाजार में ब्रेंट कच्चा तेल 0.36 प्रतिशत की गिरावट के साथ 63.95 डॉलर प्रति बैरल पर चल रहा था। 


अटल पेंशन योजना हेतु निवेश के इच्छुक लोगों को छह भागों में बांटा गया है, जिसे दिए हुए चार्ट (1) के माध्यम से समझा जा सकता है। इस योजना का फायदा उठाने के लिए आपकी उम्र 18 से 40 साल के बीच होनी चाहिए।

आमतौर पर अटल पेंशन योजना में कोई भी भारतीय अपना निवेश शुरू कर सकता है। बस, इस योजना में भाग लेने के लिए आपका बैंक खाता होना जरूरी है। साथ ही, इस योजना के वास्ते खाता खोलने के लिए इसका आधार कार्ड से जुड़ा होना भी अनिवार्य है। शर्त सिर्फ इतनी कि अटल पेंशन योजना का लाभ उन्हीं लोगों को मिल सकता है जो इनकम टैक्स स्लैब से बाहर हैं। साथ ही, ईपीएफ और ईपीएस योजना का लाभ पहले से नहीं ले रहे हैं।

# अटल पेंशन योजना में शामिल होने के लिए आयु सीमा क्या है और कम से कम कितने साल निवेश करना होगा?
 
अटल पेंशन योजना हेतु निवेश के इच्छुक लोगों को छह भागों में बांटा गया है, जिसे दिए हुए चार्ट (1) के माध्यम से समझा जा सकता है। इस योजना का फायदा उठाने के लिए आपकी उम्र 18 से 40 साल के बीच होनी चाहिए। इसके अलावा, इस योजना के तहत पेंशन पाने के लिए आपको कम से कम 20 साल तक निवेश करना होगा। हां, यदि उससे पहले पति की मृत्यु हो जाती है तो पत्नी या उसके बच्चे एकमुश्त राशि या फिर अंशदान जमा करते रहने पर आजीवन पेंशन के हकदार होंगे। पति की मृत्यु पर पत्नी और पत्नी की मृत्यु पर नॉमिनी एक मुश्त दावा धनराशि या फिर आजीवन पेंशन के हकदार होंगे।
 
# अटल पेंशन योजना के तहत किसी भी निवेशक को कितना पेंशन मिलेगा? क्या है उसका स्लैब?

 
अटल पेंशन योजना में पेंशन की रकम आपके द्वारा किए गए निवेश और आपकी तत्कालीन उम्र पर निर्भर करती है। हालांकि इस योजना के तहत किसी भी व्यक्ति को कम से कम 1,000 रुपये और अधिकतम 5,000 रुपये मासिक पेंशन मिल सकती है। पेंशन शुरू होने की उम्र सीमा 60 साल है। इस उम्र से आपको पेंशन मिलनी शुरू हो जाएगी। हां, इतना अवश्य है कि आप जितनी जल्दी इस पेंशन योजना से जुड़ेंगे, उतना अधिक फायदा आपको मिलेगा। उदाहरणतः, अगर कोई व्यक्ति 18 साल की उम्र में इस पेंशन योजना से जुड़ता है तो उसे हर महीने 210 रुपये का निवेश करना होगा। तब जाकर रिटायर होने के बाद अर्थात् 60 साल की उम्र से आपको हर महीने 5000 रुपये मासिक पेंशन मिलेगी। यहां यह स्पष्ट कर दें कि ऐसे लोग जो आयकर के दायरे में आते हैं, या सरकारी इम्प्लाई हैं या फिर पहले से ही ईपीएफ और ईपीएस जैसी योजना का लाभ ले रहे हैं, वे किसी भी कीमत पर अटल पेंशन योजना का हिस्सा नहीं बन सकते।
 
# कम निवेश में अपना और अपने आश्रितों का भविष्य कीजिए सुरक्षित
 
खास बात यह कि अटल पेंशन योजना से आप जितनी जल्‍दी जुड़ेंगे, आपको उतने ही कम पैसे जमा करने होंगे। अगर आप 60 साल की उम्र के बाद प्रति माह 5,000 रुपए प्राप्‍त करना चाहते हैं तो अटल पेंशन योजना से बेहतर विकल्‍प कदापि नहीं मिलेगा। क्योंकि इस योजना से अगर आप 18 साल की उम्र में जुड़ते हैं और प्रतिदिन 7 रुपये बचाकर हर महीने मात्र 210 रुपए जमा करते हैं तो 60 साल की उम्र के बाद आपको हर महीने 5,000 रुपए मिलेंगे।
 
# अटल पेंशन योजना के तहत कितनी मिलती है पेंशन? और कितने-कितने रुपये का है स्लैब?
 
अटल पेंशन योजना के तहत पात्र व्‍यक्ति को 1,000 रुपए से 5,000 रुपए तक की पेंशन प्रति माह मिल सकती है। हां, आप जितनी कम उम्र में इस योजना में निवेश की शुरुआत करेंगे, आपको प्रति माह उतनी ही कम रकम देनी होगी। उदाहरणतः प्रति माह 1,000 रुपए की पेंशन प्राप्‍त करने के लिए निवेशक को उसकी उम्र के हिसाब से 42 रुपए से लेकर 291 रुपए प्रति माह जमा करवाना पड़ सकता है। लेकिन, किस्‍त देने वाले व्‍यक्ति की यदि किसी कारणवश मृत्‍यु हो जाती है तो उसके नॉमिनी को एकमुश्‍त 1,70,000 रुपए मिलेंगे। उसी प्रकार, यदि आप प्रति माह 2,000 रुपए की पेंशन पाना चाहते हैं तो आपको प्रत्येक माह 84 रुपए से लेकर 582 रुपए तक की किस्‍त देनी होगी, जो आपकी उम्र पर निर्भर करती है। यदि इस दौरान व्‍यक्ति और उसकी पत्‍नी की मृत्‍यु किसी कारणवश हो जाती है तो उनके नामित संतान को 3,40,000 रुपए एकमुश्त मिल जाएंगे। इसी तरह, प्रति माह 5000 रुपए की पेंशन के लिए आपको प्रत्येक महीने 210 रुपए से लेकर 1,454 रुपए जमा करने पड़ सकते हैं। यदि इस दौरान व्‍यक्ति और उसकी पत्नी की मौत हो जाती है तो उनके द्वारा नामित किये गए संतान को 8,50,000 रुपए की एकमुश्त धनराशि मिलेगी।
 
# आखिर कौन-कौन उठा सकता है अटल पेंशन योजना का बेमिसाल फायदा
 
बता दें कि मोदी सरकार द्वारा शुरू की गई अटल पेंशन योजना समाज के कमजोर वर्ग के लिए है ताकि 60 साल के बाद उन्‍हें आर्थिक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े। यही वजह है कि इस योजना से 18 से 40 साल तक की उम्र के वैसे सभी लोग जुड़ सकते हैं, जो इसके वास्तविक पात्र हैं। क्योंकि इस योजना में कम से कम 20 साल का निवेश करना नितांत जरूरी है, मृत्यु गत परिस्थितियों के अलावे। खास बात यह कि अटल पेंशन योजना से जुड़ने के लिए किसी भी बैंक में आपका एक बचत खाता और आधार कार्ड होना अनिवार्य है।
 
अटल पेंशन योजना के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए आप दी हुई वेबसाइट के लिंक पर जाकर अद्यतन जानकारी हासिल कर सकते हैं: https://npscra.nsdl.co.in/nsdl/scheme-details/APY_Scheme_Details.pdf
 
-कमलेश पांडे
(वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार)

नयी दिल्ली। रोजमर्रा के उपायोग का सामान बनाने वाली कंपनी इमामी ने सोमवार को कहा कि उसके प्रवर्तकों ने कर्ज में कमी लाने के इरादे से कंपनी की 10 प्रतिशत हिस्सेदारी 1,230 करोड़ रुपये में बेची है। इससे पहले फरवरी में प्रवर्तकों ने कंपनी में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी 1,600 करोड़ रुपये में बेची थी। कंपनी के शेयरों की हाल की बिक्री के साथ ही प्रवर्तकों की इमामी में हिस्सेदारी घटकर 52.73 प्रतिशत पर आ गयी है।प्रवर्तकों ने 4.54 करोड़ शेयरों की बिक्री की है। कंपनी के अनुसार इस राशि का उपयोग प्रवर्तकों के कर्ज को कम करने में किया जाएगा। इमामी ने एक बयान में कहा कि हिस्सेदारी बिक्री शेयर बाजारों में संस्थागत निवेशकों को की गयी। इस बिक्री से पहले प्रवर्तक समूह की इमामी में हिस्सेदारी 62.74 प्रतिशत थी।

मुंबई। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को यथावत रखने के फैसले के बाद बृहस्पतिवार को शुरुआती कारोबार में रुपये में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। अमेरिका की फेडरल ओपन मार्केट कमिटी ने महत्वपूर्ण दरों को 2.25 से 2.5 प्रतिशत के दायरे में रखा है।

 
अंतरबैंक विदेशी विनिमय बाजार में रुपया 69.47 प्रति डॉलर पर मजबूत रुख के साथ खुला, लेकिन बाद में यह 69.67 प्रति डॉलर तक नीचे आया। बुधवार की तुलना में रुपये में सिर्फ एक पैसे की बढ़त थी। बुधवार को रुपया 69.68 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
 

 

नयी दिल्ली। सरकार ने बादाम, अखरोट और दालों समेत 29 अमेरिकी वस्तुओं पर 16 जून से जवाबी आयात शुल्क लगाने का निर्णय किया है। इससे पहले सरकार इसे लागू करने की समयसीमा को कई बार बढ़ा चुकी है। सूत्रों ने शुक्रवार को बताया कि वित्त मंत्रालय बहुत जल्द इस बारे में अधिसूचना जारी करेगा। सरकार के इस कदम से इन 29 वस्तुओं का निर्यात करने वाले अमेरिकी निर्यातकों को अब ऊंचा शुल्क चुकाना होगा। इससे देश को 21.7 करोड़ डॉलर का अतिरिक्त राजस्व मिलेगा। पिछले साल 21 जून को सरकार ने इन अमेरिकी वस्तुओं पर ऊंचा शुल्क लगाने का निर्णय किया था। इसकी वजह अमेरिका का भारत से आयात किए जाने वाले कुछ इस्पात और एल्युमीनियम उत्पादों पर शुल्क बढ़ाना था। इस पर जवाबी कार्रवाई करते हुए सरकार ने इन 29 सामानों पर शुल्क बढ़ाने का निर्णय किया था।

 
 
सूत्रों ने बताया कि सरकार ने उच्च शुल्क लागू करने के फैसले से अमेरिका को अवगत करा दिया है। अमेरिका ने पिछले साल मार्च में इस्पात उत्पादों पर शुल्क बढ़ाकर 25 प्रतिशत और एल्युमीनियम उत्पादों पर 10 प्रतिशत कर दिया था। भारत इन उत्पादों का एक बड़ा निर्यातक देश है। शुल्क बढ़ाने से भारतीय इस्पात और एल्युमीनियम उत्पादकों पर 24 करोड़ डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ा था। भारत हर साल अमेरिका को 1.5 अरब डॉलर के इस्पात और एल्युमीनियम उत्पाद का निर्यात करता है। हालांकि तब से इसे लागू करने की समयसीमा को कई बार आगे खिसकाया गया क्योंकि सरकार को उम्मीद थी कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार पैकेज की बातचीत में किसी समाधान को खोज लिया जाएगा।
लेकिन अमेरिकी सरकार के भारतीय निर्यातकों को तरजीह देने की सामान्य प्रणाली (जीएसपी) में निर्यात छूट खत्म करने के निर्णय के बाद यह बातचीत रुक गयी। अमेरिका ने इन लाभों को पांच जून से खत्म कर दिया है। इससे भारत से अमेरिका को होने वाला 5.5 अरब डॉलर का निर्यात प्रभावित होगा। इन 29 उत्पादों पर उच्च आयात शुल्क लगाने के क्रम में सरकार ने कई उत्पादों पर उच्च शुल्क लगाने की अधिसूचना जारी की है। 
 
इसमें अखरोट पर आयात शुल्क 30 से बढ़ाकर 120 प्रतिशत की गया है। इसी तरह काबुली चना, चना और मसूर दाल पर शुल्क 70 प्रतिशत किया गया है जो अभी 30 प्रतिशत है। अन्य दालों पर शुल्क को 40 प्रतिशत किया जाएगा। इसके अलावा बोरिक एसिड और फाउंड्री मोल्ड (लोहे के उत्पाद)के लिए बाइंडर्स पर शुल्क बढ़ाकर साढ़े सात प्रतिशत और घरेलू रिएजेंट्स पर शुल्क बढ़ाकर 10 प्रतिशत किया गया है। आर्टेमिया पर इसे 15 प्रतिशत कर दिया गया है। साथ ही कई अन्य उत्पादों मसलन मेवा, लौह एवं इस्पात उत्पाद, सेब, नाशपाती, इस्पाद की चादर, अलॉय इस्पात, ट्यूब एवं पाइप और नट-बोल्ट पर भी शुल्क बढ़ाया गया है। सरकार ने एल्युमीनियम और इस्पात उत्पादों पर अमेरिका के उच्च शुल्क लगाने के मामले में अमेरिका को विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के विवाद निपटान विभाग में भी घसीटा है। वित्त वर्ष 2017-18 में भारत का अमेरिका को निर्यात 47.9 अरब डॉलर था जबकि आयात 26.7 अरब डॉलर का हुआ था। इस तरह व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में रहा था।

नयी दिल्ली। महिंद्रा एंड महिंद्रा (एमएंडएम) ने शुक्रवार को कहा कि उसकी फॉर्म एक्विपमेंट सेक्टर (एफईएस) ने स्विट्जरलैंड की कृषि प्रौद्योगिकी से जुड़ी कंपनी गमाया एसए की 11.25 प्रतिशत हिस्सेदारी 43 लाख स्विस फ्रैंक (30 करोड़ रुपये से अधिक) में खरीद ली है। एमएंडएम एफईएस के अध्यक्ष राजेश जेजुरिकर ने कहा कि कृषि में प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल बढ़ रहा है। ऐसे में महिंद्रा की ओर से हम वैश्विक कृषक समुदाय को समुचित समाधान उपलब्ध कराने के लिए भविष्योन्मुखी प्रौद्योगिकी उपलब्ध कराने की दिशा में निवेश कर रहे हैं। 

रिजर्व बैंक ने रेपो दर 0.25 अंक घटाकर छह प्रतिशत की जगह 5.75 प्रतिशत कर दिया है। रिवर्स रेपो दर 5.50 प्रतिशत जबकि उधार की सीमांत स्थायी सुविधा (एमएसएफ) पर ब्याज दर और बैंक दर 6.0 प्रतिशत की गयी है। रिजर्व बैंक ने अपने नीतिगत रुख को ‘तटस्थ’ से ‘नरम’ किया।

 

रिजर्व बैंक ने 2019-20 के लिये जीडीपी वृद्धि दर अनुमान को पहले के 7.2 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत किया है। रिजर्व बैंक के इस फैसले के बाद आम लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। रिजर्व बैंक ने 2019-20 की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) के दौरान मुद्रास्फीति 3-3.10 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। पिछली समीक्षा में यह अनुमान 2.90-3.0 प्रतिशत का था। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति के सभी सदस्य रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती और नीतिगत रुख में बदलाव के पक्ष में रहे है। 

नयी दिल्ली। गैर- जीवन बीमा क्षेत्र की कंपनियों का सामूहिक प्रीमियम मार्च में समाप्त पिछले वित्त वर्ष के दौरान 13 प्रतिशत बढ़कर 1.70 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया।बीमा क्षेत्र के नियामक इरडा के आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। इससे पिछले साल 2017- 18 में 34 गैर- जीवन बीमा कंपनियों का सकल प्रीमियम 1.51 लाख करोड़ रुपये रहा था। गैर- जीवन बीमा क्षेत्र की कंपनियों में 25 साधारण बीमा कंपनियां हैं जबकि सात कंपनियां निजी क्षेत्र की एकल स्वास्थ्य बीमा कंपनी और शेष दो कंपनियां सरकारी क्षेत्र की विशिष्ट बीमा कंपनियां हैं। 

 
भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) के आंकड़ों के मुताबिक 25 साधारण बीमा कंपनियों का 2018- 19 में कुल प्रीमियम 1.50 लाख करोड़ रुपये रहा जो कि इससे पिछले साल के 1.33 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 13 प्रतिशत अधिक रहा। निजी क्षेत्र की स्वास्थ्य बीमा करने वाली कंपनियों का प्रीमियम मार्च 2019 को समाप्त वित्त वर्ष में 37 प्रतिशत बढ़कर 11,368.82 करोड़ रुपये हो गया। इससे पिछले वर्ष में इन कंपनियों का प्रीमियत 8,314.27 करोड़ रुपये रहा था।
 
हालांकि, सार्वजनिक क्षेत्र की विशेष बीमा कारोबार करने वाली -भारतीय कृषि बीमा कंपनी और ईसीजीसी लिमिटेड का बीमा प्रीमियम इस दौरान 7.75 प्रतिशत घटकर 8,425.75 करोड़ रुपये रह गया। इससे पिछले वर्ष इनका कुल वार्षिक प्रीमियम 9,133.78 करोड़ रुपये रहा था। 

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