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मुंबई। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने सड़कों की गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं करने पर बल देते हुए कहा कि सड़क खराब निकलने पर वह ‘‘ ठेकदारों पर बुलडोजर चलवा देंगे।’’ गडकरी ने यहां बृहस्पतिवार को एक पुस्तक किताब विमोचन समारोह में बात कही। गडकरी की यह टिप्पणी सड़क गुणवत्ता पर टिप्पणी उच्चतम न्यायालय की चिंताओं के बाद आई है। न्यायालय ने कहा था कि सड़क दुर्घटनाओं में देश में 14,000 से ज्यादा मौतें सड़कों पर गड्ढे के कारण होती हैं। यह आतंकी हमलों में मारे गये लोगों की संख्या से अधिक है। सड़क पर गड्ढों के कारण इस कदर लोगों की मौत "स्वीकार्य" नहीं है।
 
 
यह पुस्तक भारत की प्रगति के बारे में है इसका शीर्षक है 'इंडिया इंस्पायर्स: रीडिफाइनिंग द पॉलिटिक्स ऑफ डिलीवरेंस' इसके लेखक एक राजनीतिक कार्यकर्ता तुहिन ए. सिन्हा हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा, "मैंने कई बड़े ठेकेदारों से कहा कि यदि उनके द्वारा बनायी गयी सड़कों की गुणवत्ता खराब निकली तो मैं उन्हें बुलडोजर के नीचे डलवा दूंगा।"
 
 
गडकरी ने कहा कि मेरे मंत्रालय ने पिछले साढे चार साल में 10,000 अरब रुपये के सड़क निर्माण के ठेके दिये हैं। पारदर्शिता पर चिंताओं को दूर करते हुये मंत्री ने कहा कि इन दिनों किसी भी ठेकदार को ठेकों के लिये दिल्ली आने के लिये मजबूर नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब हमारी सरकार आई तो सड़क निर्माण की दर 2 किलोमीटर प्रति दिन थी लेकिन अब यब बढ़कर 28 किलोमीटर प्रति दिन हो गयी है। इसे मार्च 2019 तक बढ़ाकर 40 किलोमीटर प्रति दिन करने का लक्ष्य है। गडकरी ने कहा कि देशभर में 12 नये एक्सप्रेसवे पर काम चल रहा है।
 
न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर की अध्यक्षता वाली पीठ ने बृहस्पतिवार को नाराजगी जताते हुये कहा था कि देशभर में गड्ढ़ों के कारण बड़े पैमाने पर मौत होती है। संभवत: यह आंकड़ा सीमा पर और आतंकी हमले में मरने वालों से भी ज्यादा है। गडकरी ने कहा कि प्रदूषित गंगा नदी का 70-80 प्रतिशत काम मार्च अंत तक पूरा हो जायेगा। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के तहत राज्यों के साथ मिलकर इस पर करीब 26,000 करोड़ रुपये खर्ज किये गये हैं। गडकरी ने कहा, "मेरा मानना है कि मार्च 2020 तक गंगा नदी पूरी तरह से स्वच्छ हो जायेगी।"
आगाज खुशनुमा हो तो अंजाम अच्छा ही होता है। यह अहसास अगले वर्ष (14जनवरी से) प्रयागराज में शुरू होने जा रहे अर्धकुंभ की तैयारियों को देखकर पक्का हो जाता है। अर्धकुंभ की भव्यता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्साहित होकर अर्धकुंभ को कुंभ का नाम दे दिया। योगी सरकार कुंभ को दिव्य रूप देने में लगी है। योगी चाहते हैं कि इस बार का आयोजन पिछले सभी आयोजनों से भव्य ही नहीं विशाल भी हो। बताते चलें दो कुंभ मेलों के बीच छह वर्ष के अंतराल में अर्धकुंभ पड़ता है। मगर योगी अर्धकुंभ का अवधारणा को ही नहीं मानते हैं। अगले साल यानी 2019 का कुंभ पचास दिनों का होगा, जो 14 जनवरी मकर संक्रांति के दिन से शुरू होकर 4 मार्च महाशिवरात्रि तक चलेगा। मेले में करीब पांच करोड़ श्रद्भालुओं के पहुंचने का अनुमान है, जिनकी सुरक्षा, मूलभूत जरूरतों सहित सभी व्यवस्थाएं पूरी तरह चुस्त−दुरूस्त रहेंगी। कुंभ मेला नगरी प्रयागराज को 14 बड़े शहरों के साथ हवाई मार्ग से भी जोड़ा जायेगा।
 
कुंभ स्नान का अदभुत संयोग करीब तीस सालों बाद बन रहा है। हिंदू धर्म में कुंभ  मेला एक महत्वपूर्ण पर्व के रूप में मनाया जाता है, जिसमें देश−विदेश से सैकड़ों श्रद्धालु कुंभ पर्व स्थल हरिद्वार, इलाहाबाद, उज्जैन और नासिक में स्नान करने के लिए एकत्रित होते हैं। कुंभ का संस्कृत अर्थ कलश होता है। हाल ही में यूनेस्को ने कुंभ को सांस्कृतिक धरोहरों में शामिल कर लिया था। कुंभ को दुनिया का सबसे बड़ा आयोजन भी माना जाता है। एक साथ करोड़ों की तादात में दुनिया के किसी भी कोने में कभी भी इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालु या लोग नहीं जुटते हैं। इस बार कई नई परम्पराएं भी शुरू हो सकती हैं। कहा जा रहा है कि विभिन्न अखाड़ों के कई साधु−संत कुंभ मेले में देहदान की घोषणा कर सकते हैं। साधू−संत अपना शरीर मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिये दान करेंगे ताकि चिकित्सा विज्ञान के सहारे मानव सेवा हो सके। कुंभ मेले में देश के कोने−कोने से लोग शिरक्त करें, इसके लिये मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रत्येक गांव के लोगों को न्योता भेज रही हैं। वहीं विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी योगी आमंत्रण भेजेंगे। कुंभ के महात्म्य, इसकी प्राचीनता एवं अध्यात्मिकता और इससे जुड़ी किवदंतियों की महत्ता को बताता हुआ कुंभ गान भी तैयार किया जायेगा। पहले यह गान हिन्दी में तैयार होगा,इसके बाद इसे अन्य भाषाओं में अनुवाद किया जायेगा। कुंभ नगरी प्रयाराज में कुंभ संग्रहालय बनाने की घोषणा भी योगी सरकार कर चुकी है। यह करीब 300 करोड़ रूपये में तैयार होगा।
 
 
बहरहाल, यहां यह जान लेना जरूरी है कि कुंभ का मेला मकर संक्रांति के दिन प्रारम्भ होता है। इस दिन जो योग बनता है उसे कुंभ स्नान−योग कहते हैं। हिंदू धर्म के अनुसार मान्यता है कि किसी भी कुंभ मेले में पवित्र नदी में स्नान या तीन डुबकी लगाने से सभी पुराने पाप धुल जाते हैं और मनुष्य को जन्म−पुनर्जन्म तथा मृत्यु−मोक्ष की प्राप्ति होती है। कुंभ मेले में शाही स्नान का अपना महत्व होता है। मेले के दौरान पूरे देश के साधू−संत और अखाड़े यहां डेरा डाल लेते हैं। 14−15 जनवरी 2019 को मकर संक्रांति के दिन पहला शाही स्नान होगा और इसी स्नान के साथ कुंभ मेले का आगाज हो जायेगा। इसके पश्चात 21 जनवरी 2019 पौष पूर्णिमा, 31 जनवरी 2019, पौष एकादशी स्नान, 04 फरवरी 2019 मौनी अमावस्या को मुख्य शाही स्नान, (दूसरा शाही स्नान), 10 फरवरी 2019रू बसंत पंचमी (तीसरा शाही स्नान),16 फरवरी 2019 माघी एकादशी, 19 फरवरी 2019 माघी पूर्णिमा और 04 मार्च 2019 महाशिवरात्री पर अंतिम स्नान होगा।
 
बात तैयारियों की कि जाये तो प्रयागराज में कुंभ मेला के दौरान गंगा, यमुना और अदृश्य सलिला सरस्वती की रेती पर बसने वाला पंडालों का शहर अपने में अनोखा होगा। मेले को भव्यता प्रदान करने के लिए इस बार रंगीन पंडालों का चयन किया गया है। मेला मार्ग पर लोहे की सड़कों का जाल बिछाया जायेगा, जो आम सड़को की अपेक्षा अलग किस्म की होंगी। लोहे की सड़क पर न धसाव होगा और न ही कोई खड़खड़ाहट। चौड़ी सड़कें व विदेशों से मंगायी गयी स्ट्रीट लाइटें मेले की भव्यता में चार चांद लगायेंगी। यहां तक की पान्टून पुल तक रंग बिरंगे होंगे, तमाम ऐसे प्रयासों से सड़कें रंगीन दिखेंगी। मेला प्रशासन मेले को दिव्यता देने के लिये कोई कोरकसर बकाया नहीं रखना चाहता है। लगभग 3 हजार 200 करोड़ के बजट से 3200 हेक्टेयर में बसाया जा रहा दिव्य कुंभ मेला देखने के लिए पहली बार 192 देशों के प्रतिनिधि मेला क्षेत्र में विचरण करते हुए नजर आयेंगे। इनके लिए पांच सितारा सुविधा वाली टेंट सिटी विकसित की जा रही है। पांच हजार से अधिक प्रवासी भारतीयों व प्रतिनिधियों के कुंभ के दौरान स्नान एवं दर्शन के लिए आने की संभावना जताई जा रही है।
 
मान्यता है कि गंगा, यमुना व अदृश्य सरस्वती के संगम में गोता लगाने पर इह लोक और परलोक दोनों सुधर जाता है। प्रयाग में एक तरफ द्वादश माधव तो दूसरी तरफ बड़े−बड़े तपस्वियों की शरणस्थली रहा भारद्वाज आश्रम तथा साक्षात भगवान वासुदेव को गोद में बैठाये अक्षयवट संगम में गोता लगाने वाले तीर्थ यात्रियों पर चंवर डुलाने का काम करता है। लाखों कल्पवासियों की तपस्थली इस रेती के कण−कण से आस्था का जो अंकुर निकलता है उससे मिलने वाली ऊर्जा को लेकर लोग अपने घरों को जाते हैं। 
 
 
गौरतलब हो 2013 में यही मेला कुल 1936 हेक्टेयर में बसाया गया था, जबकि इस बार मेला 3200 हेक्टेयर तक फैला है। बजट जहां 1142 करोड़ था, वहीं बढ़ाकर 3200 करोड़ कर दिया गया है। पूरे शहर तथा आसपास तीर्थयात्रियों को असुविधा न हो और जाम न लगने पाये इसके लिए दस ऊपरगामी सेतु बनाये जा रहे हैं, जो कि अपनी तैयारी के अंतिम चरण में हैं। रेलवे भी कई अंडर पास व ऊपरगामी सेतु का निर्माण कर रहा है, जिसमें छह अंडर पास का विस्तारीकरण किया जा रहा है तथा नौ ऊपरगामी सेतु बनाये जा रहे हैं। मेला में सात घाटों पर विकास व रीवर फ्रंट संरक्षण का कार्य किया जा रहा है। लगभग 32 से ज्यादा चौराहों का चौड़ीकरण किया जा रहा है। जनपद को जोड़ने वाली सड़कों को या तो फोर लेन किया जा रहा है, या फिर उन्हें अच्छा खासा चौड़ा किया जा रहा है। तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए करीब 500 शटल बसें चलायी जाएंगी। मेले में 1,22,500 शौचालयों का निर्माण तथा 20 हजार डस्टबिन, 140 टिपर, 40 कम्पैक्टर भी होंगे। इन सभी को सरकार के नमामि गंगा योजना के तहत रखा जाएगा। 
 
मेले में पहली बार दस हजार व्यक्तियों की क्षमता वाला गंगा पंडाल, प्रवचन पंडाल, सांस्कृतिक पंडाल व 20 हजार लोगों के लिए यात्री निवास बनाये जा रहे हैं। श्रद्धालुओं को देखते हुए उनकी गाडि़यों को खड़ी करने के लिए 1300 हेक्टेयर में 82 पार्किग स्थल होंगे, जिनमें 16 सैटलाइट टाउन के रूप में विकसित किये जाएंगे। दो हजार से अधिक साइनेजेज लगाये जाएंगे। चालीस हजार से अधिक एलईडी सड़कों व चौराहों पर लगाये जाएंगे। भारतीय जल प्राधिकरण द्वारा पांच जेटी का निर्माण किया जा रहा है, जिन पर प्वाइंट टू प्वाइंट फेरी चलायी जाएगी। मेला क्षेत्र में लेजर शो, फसाड़ लाइटिंग, फूडकोर्ट, टूरिस्ट वाक के अलावा 200 से अधिक सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। कुंभ मेला दिव्य दिखायी पड़े सरकारी भवन, फ्लाई ओवर, पानी की टंकी व नावों आदि को विभिन्न चित्रों, धार्मिक प्रतीकों व सांस्कृतिक विचारधाराओं से पेंटिंग किया जायेगा।
 
कुंभ मेले में कई सियासी हस्तियों के भी आगमन की संभावना जताई जा रही है। राष्ट्रपति, उप−राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा कई राज्यों के राज्यपाल और मुख्यमंत्रियों के भी यहां पहुंचने की संभावना से इंकार नही किया जा सकता है।
 
- अजय कुमार
आगाज खुशनुमा हो तो अंजाम अच्छा ही होता है। यह अहसास अगले वर्ष (14जनवरी से) प्रयागराज में शुरू होने जा रहे अर्धकुंभ की तैयारियों को देखकर पक्का हो जाता है। अर्धकुंभ की भव्यता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्साहित होकर अर्धकुंभ को कुंभ का नाम दे दिया। योगी सरकार कुंभ को दिव्य रूप देने में लगी है। योगी चाहते हैं कि इस बार का आयोजन पिछले सभी आयोजनों से भव्य ही नहीं विशाल भी हो। बताते चलें दो कुंभ मेलों के बीच छह वर्ष के अंतराल में अर्धकुंभ पड़ता है। मगर योगी अर्धकुंभ का अवधारणा को ही नहीं मानते हैं। अगले साल यानी 2019 का कुंभ पचास दिनों का होगा, जो 14 जनवरी मकर संक्रांति के दिन से शुरू होकर 4 मार्च महाशिवरात्रि तक चलेगा। मेले में करीब पांच करोड़ श्रद्भालुओं के पहुंचने का अनुमान है, जिनकी सुरक्षा, मूलभूत जरूरतों सहित सभी व्यवस्थाएं पूरी तरह चुस्त−दुरूस्त रहेंगी। कुंभ मेला नगरी प्रयागराज को 14 बड़े शहरों के साथ हवाई मार्ग से भी जोड़ा जायेगा।
 
कुंभ स्नान का अदभुत संयोग करीब तीस सालों बाद बन रहा है। हिंदू धर्म में कुंभ  मेला एक महत्वपूर्ण पर्व के रूप में मनाया जाता है, जिसमें देश−विदेश से सैकड़ों श्रद्धालु कुंभ पर्व स्थल हरिद्वार, इलाहाबाद, उज्जैन और नासिक में स्नान करने के लिए एकत्रित होते हैं। कुंभ का संस्कृत अर्थ कलश होता है। हाल ही में यूनेस्को ने कुंभ को सांस्कृतिक धरोहरों में शामिल कर लिया था। कुंभ को दुनिया का सबसे बड़ा आयोजन भी माना जाता है। एक साथ करोड़ों की तादात में दुनिया के किसी भी कोने में कभी भी इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालु या लोग नहीं जुटते हैं। इस बार कई नई परम्पराएं भी शुरू हो सकती हैं। कहा जा रहा है कि विभिन्न अखाड़ों के कई साधु−संत कुंभ मेले में देहदान की घोषणा कर सकते हैं। साधू−संत अपना शरीर मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिये दान करेंगे ताकि चिकित्सा विज्ञान के सहारे मानव सेवा हो सके। कुंभ मेले में देश के कोने−कोने से लोग शिरक्त करें, इसके लिये मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रत्येक गांव के लोगों को न्योता भेज रही हैं। वहीं विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी योगी आमंत्रण भेजेंगे। कुंभ के महात्म्य, इसकी प्राचीनता एवं अध्यात्मिकता और इससे जुड़ी किवदंतियों की महत्ता को बताता हुआ कुंभ गान भी तैयार किया जायेगा। पहले यह गान हिन्दी में तैयार होगा,इसके बाद इसे अन्य भाषाओं में अनुवाद किया जायेगा। कुंभ नगरी प्रयाराज में कुंभ संग्रहालय बनाने की घोषणा भी योगी सरकार कर चुकी है। यह करीब 300 करोड़ रूपये में तैयार होगा।
 
 
बहरहाल, यहां यह जान लेना जरूरी है कि कुंभ का मेला मकर संक्रांति के दिन प्रारम्भ होता है। इस दिन जो योग बनता है उसे कुंभ स्नान−योग कहते हैं। हिंदू धर्म के अनुसार मान्यता है कि किसी भी कुंभ मेले में पवित्र नदी में स्नान या तीन डुबकी लगाने से सभी पुराने पाप धुल जाते हैं और मनुष्य को जन्म−पुनर्जन्म तथा मृत्यु−मोक्ष की प्राप्ति होती है। कुंभ मेले में शाही स्नान का अपना महत्व होता है। मेले के दौरान पूरे देश के साधू−संत और अखाड़े यहां डेरा डाल लेते हैं। 14−15 जनवरी 2019 को मकर संक्रांति के दिन पहला शाही स्नान होगा और इसी स्नान के साथ कुंभ मेले का आगाज हो जायेगा। इसके पश्चात 21 जनवरी 2019 पौष पूर्णिमा, 31 जनवरी 2019, पौष एकादशी स्नान, 04 फरवरी 2019 मौनी अमावस्या को मुख्य शाही स्नान, (दूसरा शाही स्नान), 10 फरवरी 2019रू बसंत पंचमी (तीसरा शाही स्नान),16 फरवरी 2019 माघी एकादशी, 19 फरवरी 2019 माघी पूर्णिमा और 04 मार्च 2019 महाशिवरात्री पर अंतिम स्नान होगा।
 
बात तैयारियों की कि जाये तो प्रयागराज में कुंभ मेला के दौरान गंगा, यमुना और अदृश्य सलिला सरस्वती की रेती पर बसने वाला पंडालों का शहर अपने में अनोखा होगा। मेले को भव्यता प्रदान करने के लिए इस बार रंगीन पंडालों का चयन किया गया है। मेला मार्ग पर लोहे की सड़कों का जाल बिछाया जायेगा, जो आम सड़को की अपेक्षा अलग किस्म की होंगी। लोहे की सड़क पर न धसाव होगा और न ही कोई खड़खड़ाहट। चौड़ी सड़कें व विदेशों से मंगायी गयी स्ट्रीट लाइटें मेले की भव्यता में चार चांद लगायेंगी। यहां तक की पान्टून पुल तक रंग बिरंगे होंगे, तमाम ऐसे प्रयासों से सड़कें रंगीन दिखेंगी। मेला प्रशासन मेले को दिव्यता देने के लिये कोई कोरकसर बकाया नहीं रखना चाहता है। लगभग 3 हजार 200 करोड़ के बजट से 3200 हेक्टेयर में बसाया जा रहा दिव्य कुंभ मेला देखने के लिए पहली बार 192 देशों के प्रतिनिधि मेला क्षेत्र में विचरण करते हुए नजर आयेंगे। इनके लिए पांच सितारा सुविधा वाली टेंट सिटी विकसित की जा रही है। पांच हजार से अधिक प्रवासी भारतीयों व प्रतिनिधियों के कुंभ के दौरान स्नान एवं दर्शन के लिए आने की संभावना जताई जा रही है।
 
मान्यता है कि गंगा, यमुना व अदृश्य सरस्वती के संगम में गोता लगाने पर इह लोक और परलोक दोनों सुधर जाता है। प्रयाग में एक तरफ द्वादश माधव तो दूसरी तरफ बड़े−बड़े तपस्वियों की शरणस्थली रहा भारद्वाज आश्रम तथा साक्षात भगवान वासुदेव को गोद में बैठाये अक्षयवट संगम में गोता लगाने वाले तीर्थ यात्रियों पर चंवर डुलाने का काम करता है। लाखों कल्पवासियों की तपस्थली इस रेती के कण−कण से आस्था का जो अंकुर निकलता है उससे मिलने वाली ऊर्जा को लेकर लोग अपने घरों को जाते हैं। 
 
 
गौरतलब हो 2013 में यही मेला कुल 1936 हेक्टेयर में बसाया गया था, जबकि इस बार मेला 3200 हेक्टेयर तक फैला है। बजट जहां 1142 करोड़ था, वहीं बढ़ाकर 3200 करोड़ कर दिया गया है। पूरे शहर तथा आसपास तीर्थयात्रियों को असुविधा न हो और जाम न लगने पाये इसके लिए दस ऊपरगामी सेतु बनाये जा रहे हैं, जो कि अपनी तैयारी के अंतिम चरण में हैं। रेलवे भी कई अंडर पास व ऊपरगामी सेतु का निर्माण कर रहा है, जिसमें छह अंडर पास का विस्तारीकरण किया जा रहा है तथा नौ ऊपरगामी सेतु बनाये जा रहे हैं। मेला में सात घाटों पर विकास व रीवर फ्रंट संरक्षण का कार्य किया जा रहा है। लगभग 32 से ज्यादा चौराहों का चौड़ीकरण किया जा रहा है। जनपद को जोड़ने वाली सड़कों को या तो फोर लेन किया जा रहा है, या फिर उन्हें अच्छा खासा चौड़ा किया जा रहा है। तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए करीब 500 शटल बसें चलायी जाएंगी। मेले में 1,22,500 शौचालयों का निर्माण तथा 20 हजार डस्टबिन, 140 टिपर, 40 कम्पैक्टर भी होंगे। इन सभी को सरकार के नमामि गंगा योजना के तहत रखा जाएगा। 
 
मेले में पहली बार दस हजार व्यक्तियों की क्षमता वाला गंगा पंडाल, प्रवचन पंडाल, सांस्कृतिक पंडाल व 20 हजार लोगों के लिए यात्री निवास बनाये जा रहे हैं। श्रद्धालुओं को देखते हुए उनकी गाडि़यों को खड़ी करने के लिए 1300 हेक्टेयर में 82 पार्किग स्थल होंगे, जिनमें 16 सैटलाइट टाउन के रूप में विकसित किये जाएंगे। दो हजार से अधिक साइनेजेज लगाये जाएंगे। चालीस हजार से अधिक एलईडी सड़कों व चौराहों पर लगाये जाएंगे। भारतीय जल प्राधिकरण द्वारा पांच जेटी का निर्माण किया जा रहा है, जिन पर प्वाइंट टू प्वाइंट फेरी चलायी जाएगी। मेला क्षेत्र में लेजर शो, फसाड़ लाइटिंग, फूडकोर्ट, टूरिस्ट वाक के अलावा 200 से अधिक सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। कुंभ मेला दिव्य दिखायी पड़े सरकारी भवन, फ्लाई ओवर, पानी की टंकी व नावों आदि को विभिन्न चित्रों, धार्मिक प्रतीकों व सांस्कृतिक विचारधाराओं से पेंटिंग किया जायेगा।
 
कुंभ मेले में कई सियासी हस्तियों के भी आगमन की संभावना जताई जा रही है। राष्ट्रपति, उप−राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा कई राज्यों के राज्यपाल और मुख्यमंत्रियों के भी यहां पहुंचने की संभावना से इंकार नही किया जा सकता है।
 
- अजय कुमार

नयी दिल्ली। संकट में फंसे आम्रपाली समूह के खिलाफ मामले में सख्ती जारी रखते हुए, उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को रीयल्टी क्षेत्र की इस कंपनी के पांच-सितारा होटल, सिनेमा हॉल, मॉल और देशभर में स्थित कारखानों को कुर्क करने और उनकी बिक्री करने के आदेश दिए। न्यायालय ने अपने आदेश का अनुपालन न करने को लेकर आम्रपाली समूह को ‘बहेद घटिया धोखेबाज’ और ‘पक्का झूठ बोलने वाला’ कहा। नॉएडा और ग्रेटरनोडा इलाके में आम्रपाली समूह के चार आलीशान कंपनी कार्यालयों को भी कुर्क करने का आदेश दिया। न्यायालय ने दिल्ली स्थित ऋण वसूली न्यायाधिकरण (डीआरटी) को इन परिसंपत्तियों की नीलामी करने को कहा है। न्यायालय ने कंपनी के निदेशकों एवं उनके परिवार के सदस्यों को मौका दिया है कि यदि उनके पास पैसा है तो वे मकान खरीदने वालों को 10 दिसंबर तक उनका पैसा लौटा दें।

मामले की सुनवाई कर रही पीठ ने मकान खरीदारों के 3,000 करोड़ रुपये की राशि को अन्य मदों में स्थानांतरित करने को लेकर भी कंपनी को अगले सप्ताह तक सफाई देने को कहा है। न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति यू यू ललित की इस पीठ ने आम्रपाली समूह के सीएमडी अनिल शर्मा एवं उसके निदेशकों, मुख्य वित्तीय अधिकारी एवं सांविधिक लेखापरीक्षक अनिल मित्तल को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न उनके खिलाफ विश्वासघात का अपराध करने का ममला दर्ज किया जाए।

न्यायालय को जब यह बताया कि कंपनी धन इकट्ठा करने के लिए एक नर्सरी स्कूल, एक खुली जगह और एक नर्सिंग होम बेचना चाहती है तो उसने कहा, “आप (आम्रपाली समूह) दुनिया में बेहद घटिया किस्म के धोखेबाज हैं। आपने शुरू से ही मकान खरीदारों को धोखा दिया और अब आप उनके लिए तैयार सुविधाओं को बेचना चाहते हैं। मकान खरीदने वालों के लिए खड़ी की गयी ये सुविधाएं आपने उन्हें कोई खैरात में नहीं दी हैं।’’
 
शीर्ष अदालत ने आम्रपाली समूह को 2015-18 के बीच कंपनी के लेनदेन का कच्चा हिसाब-किताब 24 घंटे के भीतर न्यायालय द्वारा नियुक्त फॉरेसिंग ऑडिटरों को सौंपने का आदेश दिया।इन आंकड़ों में लेन देन की पर्चियां आवश्यक अधिकार पत्र आदि भी मांगे गए हैं। पीठ ने इस मामले में अदालत के पहले के आदेश का अनुपालन नहीं करने और इन लेनदेन का कच्चा ब्योरा नहीं देने को लेकर कंपनी की खिंचाई की। न्यायालय ने कहा, “आप बिल्कुल झूठे हैं। आप अव्वल किस्म के झूठे हैं। आपने वह जानकारी नहीं दी है, जो हमारे पहले के आदेश में मांगी गयी थी। हम आपके हलफनामे से संतुष्ट नहीं हैं और आपने केवल बात में खिलवाड़ करने की कोशिश की है।
 
हमारे नौ आदेशों के बावजूद आपने 2015-18 के दौरान के कारोबारी लेनदेन से जुड़ी साफसाफ सूचना नहीं दी।” न्यायालय ने डीआरटी, दिल्ली को समूह के होटल, मॉल, कॉरपोरेट कार्यालयों, सिनेमा हॉल, कारखानों और भूखंडों सहित सभी कुर्क परिसंपत्तियों की नीलामी करने को कहा। उच्चतम न्यायालय ने इसकी जिन संपत्तियों की कुर्की के आदेश दिए हैं उनमें ग्रेटर नोएडा का पांच सितारा आम्रपाली होलीडे इन टेक पार्क होटल, बिहार के राजगीर और बक्सर जिलों में स्थित एफएमसीजी कंपनी आम्रपाली बॉयोटेक एंड मम्स, बिहार के गया एवं मुजफ्फरनगर में स्थित आम्रपाली मॉल, उत्तर प्रदेश के बरेली में स्थित आम्रपाली मॉल, मेरठ में स्थित हाइटेक सिटी सिनेमा हॉल, ग्रेटर नोएडा स्थित आम्रपाली प्रिकास्ट फैक्टरी और बिहार के पूर्णिया एवं ओडिशा के भुवनेश्वर स्थित भूखंडों एवं गोवा में एक विला शामिल है। अदालत ने उसकी लग्जरी कारों के बेड़े को कुर्क करने का भी निर्देश किया जो मकान खरीदने वालों के पैसे से खरीदी गयी हैं।

करीमनगर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को कहा कि तेलंगाना में यदि भाजपा सरकार बनी तो वह लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए करीमनगर जिले का नाम ‘करीपुरम’ करेगी। योगी ने तेलंगाना में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘यदि भाजपा तेलंगाना में सत्ता में आयी तो वह आपकी भावनाओं का सम्मान करेगी और करीमनगर का नाम बदलकर ‘‘करीपुरम’’ करेगी।

आदित्यनाथ ने गत दो दिसम्बर को हैदराबाद में चुनाव प्रचार अभियान के दौरान तेलंगाना के मतदाताओं से कहा था कि यदि वे हैदराबाद शहर को ‘‘भाग्यनगर’’ में परिवर्तित होते देखना चाहते हैं तो भाजपा की सरकार चुनें। तेलंगाना भाजपा नेता टी राजा सिंह लोध भी पहले कई मौकों पर कह चुके हैं कि भाजपा यदि सत्ता में आयी तो वह हैदराबाद और राज्य के अन्य शहरों के नाम महान लोगों के नाम पर रखेगी।
 
 
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ नीत भाजपा सरकार कई स्थानों के नाम बदल चुकी है। इसमें इलाहाबाद को प्रयागराज, फैजाबाद को अयोध्या और मुगलसराय को पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन करना शामिल है।

नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने वर्तमान एवं पूर्व सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों पर सुनवाई के लिए बिहार और केरल के प्रत्येक जिले में विशेष अदालतों के गठन का मंगलवार को निर्देश दिया। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एसके कौल और न्यायमूर्ति केएम जोसफ की पीठ ने दोनों राज्यों के प्रत्येक जिले में विशेष अदालतों के गठन के दिशा-निर्देश देने के साथ ही 14 दिसंबर तक पटना तथा केरल उच्च न्यायालयों से अनुपालन रिपोर्ट पेश करने को भी कहा है।

शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालयों से कहा कि पहले से गठित विशेष अदालतों से मामलों को जिला अदालतों में भेज दिया जाए। शीर्ष अदालत ने कहा है कि सांसदों/विधायकों के खिलाफ मामलों की सुनवाई के लिए दो राज्यों के जिलों में जरूरत के अनुसार अदालतों का गठन किया जा सकता है। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि विशेष अदालतें जब सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों की सुनवाई करेंगी तो उनकी की प्राथमिकता में उम्र कैद के मामले होंगे।

 

अदालत अधिवक्ता एवं भाजपा नेता अश्चिनी उपाध्याय की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें आपराधिक मामलों में दोषी सिद्ध नेताओं पर ताउम्र प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी, साथ ही निर्वाचित प्रतिनिधियों से जुड़े इस तरह के मामलों में तेज सुनवाई के लिए विशेष अदालतें गठित करने की भी मांग की गई थी।

एलोरा गुफाएं  
एलोरा गुफा को एल्लोरा के नाम से भी जाना जाता है लेकिन इसका मूल नाम ‘वेरुल’ है। एलोरा की गुफा एक पुरातात्विक स्थल है, यह महाराष्ट्र के औरंगाबाद में स्थित है। इन्हें राष्ट्रकूट वंश के शासकों द्वारा बनवाया गया था। अपनी स्मारक गुफाओं के लिए प्रसिद्ध, एलोरा युनेस्को द्वारा घोषित एक विश्व धरोहर स्थल है।
 
अजंता की गुफाएं
अजंता की गुफाओं में बौद्ध धर्म द्वारा प्रेरित और उनकी करुणामय भावनाओं से भरी हुई शिल्पकला और चित्रकला पाई जाती है, जो मानवीय इतिहास में कला के उत्कृष्ट और अनमोल समय को दर्शाती है। बौद्ध तथा जैन सम्प्रदाय द्वारा बनाई गई ये गुफाएं सजावटी रूप से तराशी गई हैं। महाराष्ट्र में औरंगाबाद शहर से लगभग 107 किलोमीटर की दूरी पर अजंता की ये गुफाएं पहाड़ को काट कर विशाल घोड़े की नाल के आकार में बनाई गई हैं।
 
बोरा गुफाएं
दक्षिणी राज्य आंध्र प्रदेश में बेलम व बोरा गुफाएं प्रसिद्ध हैं। बोरा गुफाएं विशाखापट्टनम से 90 किलोमीटर की दूरी पर हैं। गुफाएं क्षैतिज विमान पर 100 मीटर और ऊर्ध्वाधर विमान पर लगभग 75 मीटर के साथ खुलती हैं। 
 
बेलम गुफाएं
आंध्र के कुरनूल से 106 किलोमीटर दूर बेलम गुफाएं स्थित हैं। मेघालय की गुफाओं के बाद ये भारतीय उपमहाद्वीप की दूसरी सबसे बड़ी प्राकृतिक गुफाएं हैं। इन्हें मूल रूप से तो 1854 में एचबी फुटे ने खोजा था लेकिन दुनिया के सामने 1982 में यूरोपीय गुफा विज्ञानियों की एक टीम ने इन्हें मौजूदा स्वरूप में पेश किया।
 
उदयगिरि और खंडगिरि गुफाएं
उदयगिरि और खंडगिरि ओडीशा में भुवनेश्वर के पास स्थित दो पहाड़ियाँ हैं। इन पहाड़ियों में आंशिक रूप से प्राकृतिक व आंशिक रूप से कृत्रिम गुफाएँ हैं जो पुरातात्विक, ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व की हैं। हाथीगुम्फा शिलालेख में इनका वर्णन ‘कुमारी पर्वत’ के रूप में आता है। ये दोनों गुफाएं लगभग दो सौ मीटर के अंतर पर हैं और एक दूसरे के सामने हैं। ये गुफाएं अजन्ता और एलोरा जितनी प्रसिद्ध नहीं हैं, लेकिन इनका निर्माण बहुत सुंदर ढंग से किया गया है। 
 
बादामी गुफा
कर्नाटक के बगलकोट जिले की ऊंची पहाड़ियों में स्थित बादामी गुफा का आकर्षण अद्भुत है। बादामी गुफा में निर्मित हिंदू और जैन धर्म के चार मंदिर अपनी खूबसूरत नक्कागशी, कृत्रिम झील और शिल्पकला के लिए प्रसिद्ध हैं। चट्टानों को काटकर बनाई गई गुफा का दृश्य‍ इसके शिल्पकारों की कुशलता का बखान करता है। बादामी गुफा में दो मंदिर भगवान विष्णु और एक भगवान शिव को समर्पित है और चौथा जैन मंदिर है। गुफा तक जाती सीढ़ियां इसकी भव्यता में चार चांद लगाती हैं।
 
अमरनाथ गुफा
अमरनाथ हिन्दुओं का एक प्रमुख तीर्थस्थल है। यहाँ की प्रमुख विशेषता पवित्र गुफा में बर्फ से प्राकृतिक शिवलिंग का निर्मित होना है। प्राकृतिक हिम से निर्मित होने के कारण इसे स्वयंभू हिमानी शिवलिंग भी कहते हैं। आषाढ़ पूर्णिमा से शुरू होकर रक्षाबंधन तक पूरे सावन महीने में होने वाले पवित्र हिमलिंग दर्शन के लिए लाखों लोग यहां आते हैं।
 
-सुषमा तिवारी

चार महीने से सोनाली न्यूयार्क में अपने कैंसर का इलाज करवा रही थीं। अब कुछ हद तक ठीक होने के बाद वह भारत लौट आयी हैं। इस बात की खबर सोनाली नें अपने सोशल मीडिया अकांउट पर शेयर करके दी है। सोनाली ने अपनी एक तस्वीर पोस्ट की है। इस तस्वीर के कैप्शन में उन्होनें लिखा है कि कहा जाता है कि दूरियों से दिल नज़दीक आते हैं, यह सही बात है। लेकिन दूरी जो सबक सिखाती है, उसे भी नहीं भूलना चाहिए। न्यूयॉर्क शहर में घर से दूर रहकर, मुझे महसूस हुआ कि कितनी कहानियां मेरे सामने आ रही हैं। हरेक अपने तरीके से एक अलग चैप्टर है।

 
सोनाली ने आगे लिखा है कि अब मैं वहां लौट रही हैं, जहां मेरा दिल है। यह ऐसी भावना है, जिसमें मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकती, लेकिन मैं कोशिश कर रही हूं। यह अपने परिवार और दोस्तों को फिर देखने की ख़ुशी है। यह उस काम को करने का उत्साह है, जो मैं करती रही हूं और इस पल तक किया है। लड़ाई अभी ख़त्म नहीं हुई है... लेकिन मैं ख़ुश हूं और मैं इस ख़ुशनुमा अंतराल को आशा से देख रही हूं।
 
 
इसके बाद सोनाली के फैंस, दोस्त और रिश्तेदार सभी उनकी सेहतमंद जिंदगी के लिए दुआएं कर रहे है। इस बिमारी के चलते न्यूयॉक में सोनाली से मिलने के लिए प्रियंका चोपड़ा और नीतू सिंह भी  पहुंचे थे। सोनाली के पति गोल्डी बहल के मुंबई वापस लौटने के बाद प्रियंका चोपड़ा और सोफी टर्नर ने सोनाली संग काफी टाइम स्पेंड किया था। ऐसे में हो सकता है कि सोनाली प्रिंयका चोपड़ा की रिसेप्शन पार्टी में शिरकत करें। 
 

 

तेलंगाना में विधानसभा चुनाव से पहले नेताओं में छिड़ी जुबानी जंग रुकने का नाम नहीं ले रही है। बड़े भाई और एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी पर योगी आदित्यनाथ के बयान पर अकबरुद्दीन ओवैसी ने पीएम मोदी और सीएम योगी को लेकर विवादित बयान दिया है। हैदराबाद के चारमीनार विधानसभा क्षेत्र में रैली को संबोधित करते हुए अकबरुद्दीन ने कहा कि ''चाय वाले, हमें मत छेड़, चाय-चाय चिल्लाते हो, याद रखो इतना बोलूंगा-इतना मारूंगा कि कान में से पीप निकलने लगेगा, खून निकलने लगेगा''।

 अकबरुद्दीन ओवैसी ने आगे कहा कि, ''आज एक और आया, वो कैसे-कैसे कपड़े पहनता है, तमाशे जैसा दिखता है। किस्मत से चीफ मिनिस्टर भी बन गया, कह रहा है निजाम की तरह ओवैसी को भगाऊंगा, अरे तू क्या, तेरी हैसियत क्या, तेरी बिसात क्या, तेरे जैसे 56 आए और चले गए, अरे ओवैसी को छोड़ो, उसकी आने वाली 1000 नस्लें भी इस मुल्क में रहेंगी और तुझसे लड़ेंगे। तेरा मुकाबला करेंगे और तेरी मुखालफत करेंगे''।

 
बता दें कि इससे पहले योगी आदित्यनाथ ने एक चुनावी रैली में असदुद्दीन ओवैसी पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि तेलंगाना में भाजपा सत्ता में आई तो ओवैसी को हैदराबाद से उसी तरह से भागना पड़ेगा जैसे निजाम भागा था। भाजपा सरकार सभी को सुरक्षा मुहैया कराएगी लेकिन अराजकता फैलाने वालों को छोड़ेगी नहीं। विकाराबाद जिले के तंदूर कस्बे में लोगों को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस और टीआरएस पर मुस्लिमों के तुष्टिकरण और धर्म के आधार पर योजनाएं बनाने का आरोप लगाया। 

उन्होंने कहा कि भाजपा नीतियां बनाने में धर्म, जाति या वर्ग के आधार पर भेदभाव नहीं करती है। उधर, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने आरोप लगाया कि टीआरएस और कांग्रेस, दोनों ही पार्टियां अल्पसंख्यकों के तुष्टिकरण का काम कर रही हैं। इसीलिए एआईएमआईएम के असदुद्दीन औवेसी ने कहा कि राज्य में कोई भी मुख्यमंत्री बने, उसे उनकी पार्टी के आगे झुकना पड़ेगा। 

गौरतलब है कि तेलंगाना में बुधवार यानी 5 दिसंबर को चुनाव प्रचार खत्म होगा। टीआरएस जहां अकेले 107 सीटों पर सत्ता में वापसी के लिए चुनाव लड़ रही है, वहीं कांग्रेस ने वहां ‘प्रजा कुटामी’ (पीपुल्स एलांयस) के नाम से तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी), भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी (सीपीआई) और तेलंगाना जन समिति (टीजेएस) के साथ गठबंधन किया है। इनमें कांग्रेस के 94 सीटों पर प्रत्याशी हैं। भाजपा अकेले चुनाव मैदान में है।  

किसी भी घर में पूजाघर सबसे अहम स्थान होता है। देवी-देवताओं से जुड़े इस पावन स्थान पर जाते ही सर्वाधिक मन को शांति और सुकून मिलता है। सुख-शांति और समृद्धि की कामना के लिए बनाए जाने वाले मंदिर में वास्तु और परंपरा की कभी अनदेखी नहीं करनी चाहिए। घर की साफ-सफाई के साथ आइए जानते हैं हमें अपने मंदिर या पूजाघर में किन चीजों का विशेष ध्यान रखना चाहिए —

 

1. अपने मंदिर या पूजाघर में कभी नग्न मूर्तियां न रखें। हमेशा देवता की पसंद के अनुसार या फिर कहें शुभता को ध्यान में रखते हुए कपड़े पहनाकर रखें।

2.कभी भूलकर भी मूर्तियों को मंदिर या पूजाघर की दीवार से सटाकर रखें।

3.कभी भी न तो सीढ़ी के नीचे मंदिर बनाएं और न ही कभी भूलकर भी बीम के नीचे बैठकर पूजा न करें। वास्तु के अनुसार बीम के नीचे बैठकर पूजा करने से एकाग्रता प्रभावित होती है।

4.अपना मंदिर या फिर पूजाघर हमेशा ईशानकोण में ही रखें। इस दिशा में यदि खिड़की भी हो तो ऐसे पूजाघर की शुभता और ऊर्जा बढ़ जाती है।

5.कभी भी जमीन में बैठकर पूजा न करें। किसी न किसी शुद्ध आसन का प्रयोग अवश्य करें। किसी विशेष देवता की विशेष साधना के दौरान उनसे संबंधित का आसन का प्रयोग करना शुभदायी होता है।

6.पूजा में प्रयोग में लाए गये बासी और सूखे फूल न तो मंदिर रखें और न ही अपने घर के किसी कोने में रखें। इन फूलों को किसी स्वच्छ स्थान की मिट्टी में दबा दें। नदी में डालकर उसे प्रदूषित न करें।
 
7. शयनकक्ष में पूजाघर न बनाएं। यदि मजबूरी में बनाना ही पड़े तो पूजाघर को ईशान कोण या उत्तर दिशा में बनाएं और रात्रि के समय अपने पूजाघर को परदे से ढंक कर रखें।

8. अपने पूजाघर में कभी भी टूटी मूर्ति या मृतात्माओं का चित्र न रखें।

9. अपने पूजाघर में दो शिवलिंग, दो शालिग्राम, दो शंख, दो सूर्य-प्रतिमा, तीन गणेश, तीन देवी प्रतिमा न रखें।

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