खास खबर

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अयोध्या मामले की सुनवाई जनवरी तक के लिए टल जाने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संत समाज से धैर्य रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा वक्त है जब संतों को इस मुद्दे के समाधान में जो भी सार्थक प्रयास हो सकते हैं, उसमें सहभागी बनना चाहिए। जिससे कि देश में शांति और सौहार्द्र की स्थापना हो सके और साथ ही संवैधानिक संस्थाओं के प्रति सम्मान का भाव भी सुदृढ़ हो सके।

 

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में है। मैं भी यही चाहता हूं कि इस पर लगातार सुनवाई हो और जल्द से जल्द समाधान निकाला जा सके। देश का बहुसंख्यक समाज यही चाहता है। अगर न्याय मिलने में देरी होती है तो निराशा होती है। कई बार देरी से मिला न्याय अन्याय के समान होता है। हम सभी इस पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। कोई न कोई रास्ता अवश्य निकलेगा।

ये पूछने पर कि क्या अध्यादेश लाना सही विकल्प होगा...। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मामला कोर्ट में है। देश की शांति ओर सौहार्द्र की स्थापना के लिए जो भी विकल्प हो सकते हैं। उन पर विचार करना चाहिए। अच्छा तो यही होता कि सुप्रीम कोर्ट मामले की सुनवाई करते हुए निर्णय दे देता लेकिन अभी इसकी संभावना नहीं दिखती। योगी ने कहा कि सर्वसम्मति से इस मसले का समाधान निकले तो सर्वोत्तम है।

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले की सुनवाई जनवरी तक के लिए टाल दी है। जनवरी 2019 में तय होगा कि सुनवाई कब और कौन सी पीठ करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि हमारी अपनी प्राथमिकताएं हैं। हमें नहीं पता तारीख क्या होगी। यह जनवरी, मार्च या अप्रैल भी हो सकती है।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और केंद्र सरकार के बीच विभिन्न मुद्दों को लेकर टकराव की खबरों के बीच आज केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली और आरबीआई गर्वनर उर्जित पटेल की आमने-सामने वाली मुलाकात होने जा रही है। 

 

वित्त मंत्री जेटली मंगलवार 30 अक्तूबर को वित्तीय स्थिरता और विकास काउंसिल की मीटिंग की अध्यक्षता करेंगे इसमें उर्जित पटेल भी शामिल होंगे। उर्जित और जेटली की यह मुलाकात तब होने जा रही है जब केंद्रीय बैंक के डिप्युटी गवर्नर विरल आचार्य ने पिछले दिनों साफ शब्दों में सरकार को चेताया  था कि अगर उसने संस्थान की स्वायत्तता को ठेस पहुंचाई, तो बाजार को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। 

गर्वनर और सरकार के बीच चल रही तनातनी की खबर ने तब सुर्खियां बटोरी जब पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक से आग्रह किया कि वे अपने मतभेदों को बंद दरवाजों के पीछे दूर करने की ओर कदम बढ़ाएं।

चिदंबरम ने संवाददाताओं से बातचीत के दौरान कहा था कि मुझे लगता है कि सरकार और गर्वनर के बीच का मामला काफी गंभीर है। और देश हित में यह सबसे अच्छा होगा अगर आरबीआई और सरकार एक दूसरे से लेक्चर के माध्यम से नहीं बल्कि आमने सामने बात करें और देश की परेशानियों को खत्म करें। इस पूरे मामले ने सरकार ने पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है अभी तक सरकार की तरफ से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।  

उर्जित से सिर्फ सरकार नहीं बैंकर्स भी हैं नाराज

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल और केंद्र सरकार के बीच बढ़ी दूरियों की खबरें इन दिनों गर्म है। इसी बीच खबर आ रही है कि सर्फ सरकार ही नहीं बल्कि उर्जित से समस्या बड़े बैंकर्स को उनसे कई समस्याएं हैं। लंबे समय से बड़ी संख्या में वरिष्ठ बैंक के अधिकारी उर्जित से नाखुश हैं।

इसकी वजह है खराब ऋण को पहचानने के मानदंडों पर उनका लचीलापन न होना। इसकी वजह से बैंक को अपने व्यवसाय करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं दूसरी तरफ पटेल के करीबीयों का मानना है कि यह सब वह बैंकिंग उद्योग में सफाई करने के लिए कर रहे हैं।

यही नहीं कई बैंकर्स को पटेल के कामकाज के स्टाइल से समस्या  है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि वह किसी बी मामले में शायद ही बैंकर्स से कंसलटेशन और फीडबैक के लिए मिलते हैं। जबकि पिछले आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन से भी हमारी कोई बातचीत नहीं होती थी फिरभी वह टॉप बैंक के चेयरमैन से पूछ लेते थे कि अर्थव्यवस्था में क्या चल रहा है।   

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​ट्रेन 18, बिना इंजन 220 किमी प्रति घंटे की स्पीड

​ट्रेन 18, बिना इंजन 220 किमी प्रति घंटे की स्पीड
 

नेक्स्ट जेनरेशन की ट्रेन कही जा रही ट्रेन- 18 का आज से ट्रायल शुरू होने जा रहा है। रेलवे की ओर से चेन्नै की इंटेग्रल कोच फैक्टरी में बनी यह ऐसी ट्रेन है, जिसे चलाने के लिए किसी इंजन की जरूरत नहीं होगी। 220 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने में सक्षम यह ट्रेन आधुनिक सुविधाओं से लैस है...

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​बुलेट ट्रेन का मॉडल

​बुलेट ट्रेन का मॉडल
 

पूरी तरह से कंप्यूटरीकृत इस ट्रेन को विशेष रूप से बुलेट ट्रेन के मॉडल पर तैयार किया गया है।

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​​शताब्दी की लेगी जगह

​​शताब्दी की लेगी जगह
 

ट्रेन को शताब्दी ट्रेनों के रूट पर चलाने की कोशिश है। साथ ही इनके संचालन के बाद यात्रा के समय को 10-15 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।

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​गजब की रफ्तार

​गजब की रफ्तार
 

रेल अधिकारियों के मुताबिक, इस खास ट्रेन को 140 से 220 किमी की रफ्तार से चलाया जा सकेगा।

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​नहीं है इंजन

​नहीं है इंजन
 

ट्रेन 18 की सबसे खास बात यह है कि इसमें आपको दूसरी अन्य ट्रेनों की तरह इंजन नहीं दिखेगा। जिस पहले कोच में ड्राइविंग सिस्टम लगा है, उसमें 44 सीटें भी हैं।

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​100 करोड़ रुपये लागत

​100 करोड़ रुपये लागत
 

ट्रेन के निर्माण पर करीब 100 करोड़ रुपये का खर्च आया है, जिसे 18 महीने के समय में तैयार कराया गया है।

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​रेकॉर्ड समय में निर्माण

​रेकॉर्ड समय में निर्माण
 

इस अत्याधुनिक और सेमी हाई स्पीड ट्रेन को महज 18 महीनों में पूरी तरह तैयार कर लिया गया।

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​देश में निर्माण से बचत

​देश में निर्माण से बचत
 

इस ट्रेन को अगर विदेश से इंपोर्ट किया जाता तो इसकी लागत करीब 170 करोड़ रुपये तक होती, लेकिन मेक इन इंडिया के तहत ट्रेन को करीब 100 करोड़ में ही तैयार कर लिया गया।

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​चारों तरफ घूम जाएगी सीट

​चारों तरफ घूम जाएगी सीट
 

ट्रेन के कोच में स्पेन से मंगाई विशेष सीट भी लगाई गई है, जिन्हें आवश्यकता पड़ने पर 360 डिग्री तक मूव किया जा सकता है।

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​इन दो रूटों पर ट्रायल

​इन दो रूटों पर ट्रायल
 

इससे पहले ट्रायल के लिए इसे मुरादाबाद-बरेली और कोटा-सवाई माधोपुर रूट पर ट्रायल होना है। आनेवाले वक्त में इस ट्रेन को देश के प्रमुख रेलखंडों पर चलाया जाएगा।

सरस्वती, नृत्य भाव में गणपति, महिषासुर मर्दिनी, नवदुर्गा, वीणाधारिणी, यम, कुबेर, वायु, इन्द्र, वरूण, प्रणय भाव में युगल, अंगड़ाई लेते हुए व दर्पण निहारती नायिका, शिशु क्रीडा, वादन, नृत्य आकृतियां एवं पूजन सामग्री सजाये रमणी आदि कलात्मक प्रतिमाओं का अचंभित कर देने वाली मूर्तियों का खजाना और आदित्य स्थापत्य कला को अपने में समेटे जगत का अम्बिका मंदिर राजस्थान के मंदिरों की मणिमाला का मोती कहा जा सकता है। मूर्तियों का लालित्य, मुद्रा, भाव, प्रभावोत्पादकता, आभूषण, अलंकरण, केशविन्यास, वस्त्रों का अंकन और नागर शैली में स्थापत्य का आकर्षण इस शिखरबंद मंदिर को खजुराहो और कोणार्क मंदिरों की श्रृंखला में ला खड़ा करता है। मंदिर के अधिष्ठान, जंघाभाग, स्तम्भों, छतों, झरोखों एवं देहरी का शिल्प−सौन्दर्य देखते ही बनता है।
 
जगत का अम्बिका मंदिर राजस्थान में उदयपुर से करीब 50 किलोमीटर दूर गिर्वा की पहाडि़यों के बीच बसे कुराबड़ गांव के समीप अवस्थित है। मंदिर परिसर करीब 150 फीट लम्बे ऊंचे परकोटे से घिरा है। पूर्व की ओर प्रवेश करने पर दुमंजिले प्रवेश मण्डप पर बाहरी दीवारों पर प्रणय मुद्रा में नर−नारी प्रतिमाएं, द्वार स्तम्भों पर अष्ठमातृका प्रतिमाएं, रोचक कीचक आकृतियां तथा मण्डप की छत पर समुद्र मंथन के दृश्यांकन दर्शनीय हैं। छत का निर्माण परम्परागत शिल्प के अनुरूप कोनों की ओर से चपटे एवं मध्य में पद्म केसर के अंकन के साथ निर्मित है। मण्डप में दोनों ओर हवा और प्रकाश के लिए पत्थर से बनी अलंकृत जालियां ओसियां देवालय के सदृश्य हैं।
 
प्रवेश मण्डप और मुख्य मंदिर के मध्य खुला आंगन है। प्रवेश मण्डप से मुख्य मंदिर करीब 50 फुट की दूरी पर पर्याप्त सुरक्षित अवस्था में है। मंदिर के सभा मण्डप का बाहरी भाग दिग्पाल, सुर−सुंदरी, विभिन्न भावों में रमणियों, वीणाधारिणी, सरस्वती, विविध देवी प्रतिमाओं की सैंकड़ों मूर्तियों से सज्जित है। दायीं ओर जाली के पास सफेद पाषाण में निर्मित नृत्य भाव में गणपति की दुर्लभ प्रतिमा है। मंदिर के पार्श्व भाग में बनी एक ताक में महिषासुर मर्दिनी की प्रतिमा विशेष रूप से उल्लेखनीय है। उत्तर एवं दक्षिण ताक में भी विविध रूपों में देवी अवतार की प्रतिमाएं नजर आती हैं। मंदिर के बाहर की दीवारों की मूर्तियों के ऊपर एवं नीचे कीचक मुख, गज श्रृंखला एवं कंगूरों की कारीगरी देखते ही बनती है। प्रतिमाएं स्थानीय पारेवा नीले−हरे रंग के पाषाण में तराशी गई हैं।
 
गर्भ गृह की परिक्रमा हेतु सभा मण्डप के दोनों ओर छोटे−छोटे प्रवेश द्वार बनाए गए हैं। गर्भ गृह की विग्रह पटि्टका मूर्तिकला का अद्भुत खजाना है। यहां द्वारपाल के साथ गंगा, यमुना, सुर−सुंदरी, विद्याधर एवं नृत्यांगनाओं के साथ−साथ देवप्रतिमाओं के अंकन में शिल्पियों का श्रम देखते ही बनता है। गर्भ गृह की देहरी भी अत्यन्त कलात्मक है। गर्भ गृह में प्रधान पीठिका पर अम्बिका माता की प्रतिमा स्थापित है।
 
मध्यकालीन गौरवपूर्ण मंदिरों की श्रृंखला में सुनियोजित ढंग से बनाया गया जगत का अम्बिका मंदिर मेवाड़ के प्राचीन उत्कृष्ठ शिल्प का नमूना है। जीवन की जीवंतता एवं आनंदमयी क्षणों की अभिव्यक्ति मूर्तियों में स्पष्ट दर्शनीय है। यहां से प्राप्त प्रतिमाओं के आधार पर इतिहासकारों का मानना है कि यह स्थान पांचवी व छठी शताब्दी में शिव−शक्ति संप्रदाय का महत्वपूर्ण केन्द्र रहा है। इसका निर्माण खजुराहो में बने लक्ष्मण मंदिर से पहले करीब 960 ईस्वी के आसपास माना जाता है। मंदिर के स्तम्भों पर उत्कीर्ण लेखों से पता चलता है कि ग्यारहवीं शताब्दी में मेवाड़ के शासक अल्लट ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। यहां देवी को अम्बिका कहा गया है। धार्मिक महत्व की दृष्टि से यह प्राचीन शक्तिपीठ है।

 

 
मंदिर को पुरातत्व विभाग के अधीन संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है। यद्यपि इस मंदिर को देखने के लिए उदयपुर से पर्यटक बड़ी संख्या में पहुंचते हैं, तथापि पुरातत्व, मूर्ति एवं शिल्पकला में रूचि रखने वालों के लिए मंदिर का विशेष महत्व है।
 

मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर जिले के एक गांव में हथियारबंद करीब 25 बदमाशों ने एक डेयरी पर हमला किया और डेयरी के मालिक को बंधक बनाने के बाद वहां से 18 भैंसों को खोलकर ले गए जिनकी कीमत लगभग 20 लाख रुपये बतायी जा रही है। एक पुलिस अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। पुलिस अधिकारी ने बताया कि गुरुवार को रतनपुरी गांव में यह घटना हुई है।

अधिकारी ने बताया कि बदमाश लोग डेयरी में जबरदस्ती घुस गये और डेयरी के मालिक नरेश कुमार और उनके बेटे मोहित पर बंदूक तान दी। वे दो गाड़ियों में भैंसों को वहां से ले गये। उन्होंने बताया कि वे लोग एक बाइक और दो मोबाइल फोन भी छीन ले गए।
 
इस घटना से नाराज ग्रामीणों ने इलाके के थाने के बाहर सड़क की घेराबंदी कर दी। उन लोगों ने अपना प्रदर्शन तब बंद किया जब वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने इलाके का दौरा किया और प्रदर्शनकारियों को शांत किया। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है और उनकी तलाशी शुरू की गई।

मुंबई। उच्चतम न्यायालय ने इस बार दिवाली में प्रदूषण को कम करने के मकसद से सिर्फ ‘ग्रीन पटाखे’ या आतिशबाजी जलाने की अनुमति दी है। मंगलवार को न्यायालय के इस फैसले के बाद पटाखा विनिर्माताओं ने कहा कि ग्रीन आतिशबाजी जैसी कोई चीज नहीं हे, वहीं पर्यावरणविदों ने कहा कि प्रशासन को शीर्ष अदालत के फैसले का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए। दूसरी ओर सोशल मीडिया पर इस फैसले के बाद ‘मजाक‘ शुरू हो गया। कई लोग ने सोशल मीडिया पर पटाखों को हरा रंग में पोस्ट किया।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उनके पास पटाखों के शोर या डेसिबल का स्तर तथा धुएं का स्तर पता करने का कोई उपकरण नहीं है। इसके अलावा उन्हें खुद अपने हिसाब से देखना होगा कि पटाखा अधिक प्रदूषण तो नहीं कर रहा या बहुत तेज शोर वाला तो नहीं है। दिल्ली के एक पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘‘इस बात की निगरानी करना काफी मुश्किल होगा कि दुकानदार दिशानिर्देशों का पालन कर रहे हैं या नहीं क्योंकि दिवाली पर पटाखे थोक में बिकते हैं। बीट अधिकारियों को इस बारे में बताना होगा जिससे नियमों का उल्लंघन नहीं हो। न्यायालय के फैसले के अनुसार यदि किसी इलाके में प्रतिबंधित आतिशबाजी बिकती है तो इसकी जिम्मेदारी क्षेत्र के थाना प्रभारी या एसएचओ की होगी।

उद्योग संगठनों का कहना है कि दिवाली से पहले उच्चतम न्यायालय द्वारा आतिशबाजी या पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल के लिए कड़े नियम लागू करने के फैसले से बिक्री पर असर पड़ने का अंदेशा है। पटाखा कारोबार ज्यादातर असंगठित क्षेत्र में होता है और पटाखों की सालाना बिक्री करीब 20,000 करोड़ रुपये है। वहीं पर्यावरणविदों तथा स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब समाज को अधिक जिम्मेदारी वाले तरीके से त्योहार मनाने चाहिए। पर्यावरण वैज्ञानिक डी साहा ने कहा कि प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इन नियमों का अनुपालन कड़ाई से हो। साहा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) में भी रह चुके हैं। उन्होंने पीटीआई भाषा से कहा कि एक समाज के रूप में हम त्योहारों, शादी ब्याह या अन्य आयोजनों पर पटाखे फोड़ते हैं, लेकिन इसकी बड़ी कीमत होती हैं इससे पर्यावरण और स्वास्थ्य को नुकसान होता है। ऐसे में हमें अधिक जिम्मेदारी वाला व्यवहार करना चाहिए। शोर के जोर के संबंधी नियमों के बारे में साहा ने कहा कि पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीसो) विस्फोटक पदार्थों के संदर्भ में जन सुरक्षा पहलू से संबंधित नियमनों पर काम करता है। 

तमिलनाडु फायरवर्क्स एंड एमोरकेस मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ने कहा कि वे पहले ही आतिशबाजी का विनिर्माण पीसो की अनुमति के बाद कर रहे हैं। एसोसिएशन के महासचिव के मरियप्पन ने कहा कि सिर्फ ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल से बात नहीं बनेगी क्योंकि ऐसी कोई चीज नहीं है। एसोसिएशन ने अदालत के फैसले पर पुनर्रीक्षा याचिका दायर करने का फैसला किया है। मरियप्पन ने कहा कि तमिलनाडु के शिवकासी और आसपास आठ लाख लोग पटाखा उद्योग से जुड़े हैं और मौजूदा साल का उत्पादन पहले ही पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि हम न्यायालय को बताना चाहते हैं कि हम ग्रीन आतिशबाजी का उत्पादन नहीं कर सकते। हम विनिर्माण में रसायन का इस्तेमाल कम कर सकते हैं लेकिन इसमें अधिक समय लगेगा। 
 
सिस्टम आफ द एयर क्वालिटी एंड वेदर फॉरकास्टिंग एंड रिसर्च (सफर) के गुफरान बेग ने कहा कि ग्रीन पटाखों का इस्तेमाल और आतिशबाजी के लिए समय सीमित करना सही कदम हैं। उन्होंने कम प्रदूषण तथा कम भभक वाले पटाखों को हरित या ग्रीन आतिशबाजी कहा जा सकता है। सोशल मीडिया पर हालांकि ग्रीन पटाखों को लेकर मजाक और मीम्स का सिलसिला चला। कुछ लोगों ने हरे रंग को कुछ राजनीतिक दलों से जोड़ा। वहीं बहुत से लोगों ने पटाखों को हरा कर तस्वीरें पोस्ट की हैं। वहीं कई अन्य से प्रसिद्ध हस्तियों तथा अभिनेताआों की हरे रंग के कपड़े पहने तस्वीरें डालीं। 
 
इस बीच, कनफेडरेशन आफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि पटाखों की सालाना बिक्री 15,000 से 20,000 करोड़ रुपये है। इसमें 5,000 करोड़ रुपये चीन से आयातित पटाखों का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय के फैसले से पटाखों की बिक्री निश्चित रूप से प्रभावित होगी। हालांकि इसका ज्यादा कारोबार असंगठित क्षेत्र में होता है ऐसे में बिक्री में नुकसान का अनुमान लगाना मुश्किल है। खंडेलवाल ने कहा कि स्थायी कारोबारियों के अलावा पटाखों की बिक्री अस्थायी लाइसेंस के जरिये की जाती है। उन्होंने कहा, ‘‘हम सरकार से अपील करते हैं कि वह अस्थायी लाइसेंस तेजी से जारी करे, जिससे कारोबारी अपना स्टॉक निकाल सकें।’’ 
 
उन्होंने कहा कि चीन से आयातित पटाखे ज्यादा हानिकारक है। त्योहारी सीजन में वायु की गुणवत्ता में सुधार के लिए शीर्ष न्यायालय का फैसला स्वागतयोग्य है। रिटेलर्स एसोसिएशन आफ इंडिया के कुमार राजगोपालन ने कहा कि पर्यावरण की दृष्टि से उच्चतम न्यायालय का फैसला सही है। इससे पटाखों की बिक्री पर अंकुश लगेगा और साथ बेहतर गुणवत्ता वाले पटाखों की बिक्री हो सकेगी।

मिशिगन. अमेरिका के मिशिगन में ‘स्टीव पिज्जा’ रेस्त्रां के मैनेजर ने कैंसर पीड़ित बुजुर्ग को पिज्जा पहुंचाने के लिए एक शहर से दूसरे शहर तक का सफर पूरा किया। आमतौर पर यह रेस्त्रां डिलीवरी के लिए ऑर्डर नहीं लेता, मगर 18 साल के स्टोर मैनेजर डॉल्टन शैफर ने रेस्त्रां के सालों पुराने कस्टमर को जन्मदिन पर यह खुशी देने के लिए उनके घर तक 321 किलोमीटर का सफर तय किया।
दरअसल, 25 साल पहले मिशिगन में रहने वाले रिच और उनकी पत्नी जूली मॉर्गन को जब भी मौका मिलता था, तब वे स्टीव पिज्जा ही जाया करते थे। हालांकि, इंडियानापोलिस में घर लेने के बाद दोनों को अपने पसंदीदा रेस्त्रां जाने का मौका कम ही मिला। इस साल दोनों ने रिच का जन्मदिन स्टीव पिज्जा में ही मनाने का फैसला किया था, लेकिन कुछ दिन पहले ही कैंसर की वजह से रिच की हालत बिगड़ गई। सबसे बुरी खबर यह थी कि डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि उनके पास जीने के लिए सिर्फ कुछ महीने या कुछ दिन का समय ही बचा है। इस दौरान डॉक्टरों ने उन्हें लंबे सफर से बचने की भी सलाह दी।
जूली ने पिज्जा की तारीफ में लिखा पोस्ट
ऐसे में एक फोन कॉल ने रिच की स्टीव रेस्त्रां का पिज्जा खाने की चाहत पूरी कर दी। रिच की पत्नी जूली ने पहले ही फेसबुक पर स्टीव पिज्जा की तारीफ में एक पोस्ट लिखा था। इसमें उन्होंने कहा था- हम कई शहरों में रहे, लेकिन स्टीव पिज्जा से बेहतर कभी कुछ नहीं मिला।
स्टीव पिज्जा से मांगा एक नोट
जब जूली के पिता डेविड डॉक को रिच के कैंसल हो चुके बर्थ-डे प्लान की जानकारी मिली तो उन्होंने स्टीव पिज्जा रेस्त्रां को फोन लगा दिया। डेविड ने स्टोर मैनेजर को दोनों की कहानी सुनाई और कहा कि अगर रेस्त्रां सिर्फ मॉर्गन कपल को एक नोट भी लिख कर भेज दे तो वे खुश हो जाएंगे। डेविड के मुताबिक, इतनी दूर होने की वजह से वैसे भी स्टीव पिज्जा उन्हें डिलीवरी देने नहीं आता तो वह सिर्फ एक नोट ही चाहते थे। हालांकि, फोन उठाने वाला व्यक्ति 18 साल का डॉल्टन ही था। कहानी सुनने के बाद डॉल्टन ने डेविड को फोन लगाया और पसंदीदा पिज्जा के बारे में पूछा। जवाब मिलने के बाद डॉल्टन खुद ही पिज्जा तैयार किए और उन्हें लेकर अपनी कार से 321 किमी लंबे सफर पर निकल गए। डॉल्टन ने साढ़े तीन घंटे लंबे सफर के बाद रात करीब 2 बजे रिच और जूली को उनके घर पहुंचकर सरप्राइज दिया। उन्होंने कपल से पिज्जा के पैसे भी नहीं लिए। डॉल्टन के मुताबिक, उन्होेंने कहानी सुनने के बाद पिज्जा ले जाने के बारे में दोबारा नहीं सोचा।
फेसबुक पोस्ट से लोकप्रिय हुए डॉल्टन
पिछले हफ्ते की इस घटना को फेसबुक पर पोस्ट करते हुए जूली ने लिखा- “हमें दुनिया में ऐसे डॉल्टन की जरूरत है। ऐसे लोग जो दुनिया मेें दूसरों की खुशी के लिए कुछ भी करते हैं। हम रिच के कैंसर की वजह से दुखी हैं, लेकिन इस वाकये के बाद हमें लगता है कि दुनिया में कुछ अच्छा भी है।

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में पटाखों की बिक्री पर रोक नहीं लगाई, लेकिन इनके लिए कुछ शर्तें जरूर लगा दीं। शीर्ष अदालत ने तय डेसिबल से ज्यादा लिमिट वाले पटाखों की फ्लिपकार्ट और अमेजन जैसी ई-कॉमर्स वेबसाइट्स पर बिक्री रोकने को कहा। कोर्ट ने यह भी कहा कि कम प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों की ही बाजारों में बिक्री हो और दीपावली जैसे त्योहारों पर रात 8 से 10 बजे के बीच ही आतिशबाजी की जाए।
जस्टिस एके सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की पीठ ने मंगलवार को दिए फैसले में कहा कि क्रिसमस, न्यू ईयर और शादी जैसे माैकों पर रात को कुछ देर के लिए आतिशबाजी की जा सकती है, लेकिन इस दौरान भी कम प्रदूषण फैलाने वाले पटाखे ही जलाएं जाएं। खासकर क्रिसमस और न्यू ईयर पर रात 11:55 बजे से रात 12:30 बजे तक 35 मिनट के लिए आतिशबाजी की जा सकेगी।
लड़ी की बिक्री पर भी रोक रहेगी क्योंकि इससे ध्वनि और वायु प्रदूषण फैलता और बहुत सारा कचरा इकट्ठा होता है।
अगर तय लिमिट से बड़े पटाखों की ऑनलाइन बिक्री होती है तो संबंधित कंपनियों पर अवमानना की कार्यवाही की जाएगी।
प्रशासन द्वारा तय किए गए लाइसेंसी बाजारों या दुकानों पर कम प्रदूषण वाले पटाखों की बिक्री हो सकेगी।
अगर किसी इलाके में प्रतिबंधित पटाखों की बिक्री होती है तो इसका जिम्मेदार संबंधित पुलिस थाने का एसएचओ होगा।
केंद्र और राज्य सामुदायिक आतिशबाजी को बढ़ावा देने के तरीके तलाशें ताकि ज्यादा प्रदूषण ना हो। इसके लिए विशेष स्थान पहले से तय किए जाएं। यह कवायद आज से एक हफ्ते के अंदर पूरी हो ताकि दिवाली से पहले ही जनता को सार्वजनिक आतिशबाजी के स्थानों के बारे में जानकारी मिल सके।
केंद्र और राज्य के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड दीपावली से सात दिन पहले और सात दिन बाद तक प्रदूषण का स्तर देखें और उसे रेगुलेट करें।
तीन बच्चों की याचिकाओं पर बहस शुरू हुई थी
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल अक्टूबर में तीन बच्चों की याचिकाओं पर दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर रोक लगा दी थी। दिल्ली के रहने वाले तीन साल के अर्जुन गोपाल, तीन साल के आरव भंडारी और पांच साल की जोया राव भसीन ने अपने माता-पिता और वकीलों के जरिए याचिकाएं दायर दिल्ली में पटाखों की बिक्री पर रोक लगाने की मांग की थी। दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर बैन के फैसले के बाद पक्ष और विरोध में याचिकाएं दायर हुईं। इन्हीं पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं, पटाखा निर्माताओं और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की दलीलें सुनने के बाद 28 अगस्त को फैसला सुरक्षित रखा था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि स्वास्थ्य और कारोबार के अधिकारों के बीच संतुलन साधना जरूरी है।

  • घूस लेने के आरोपों में स्पेशल डायरेक्टर अस्थाना के खिलाफ सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की थी
  • नरेंद्र मोदी ने सीबीआई चीफ आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर को तलब किया
  • अस्थाना ने आलोक वर्मा पर लगाए थे लालू यादव से जुड़े मामले में दखल के आरोप
  • इस मामले में राहुल गांधी ने ट्वीट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा

नई दिल्ली. केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) ने सोमवार को दो करोड़ रुपए की रिश्वतखोरी के आरोप में अपने डीएसपी देवेंद्र कुमार को गिरफ्तार किया। इस मामले में स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के खिलाफ भी केस दर्ज हुआ है। आरोप है कि अफसरों ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी मीट कारोबारी मोइन कुरैशी से उनके केस को निपटाने के लिए रुपए मांगे थे। सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा और अस्थाना के बीच टकराव के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों को तलब किया।

 

इस घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसा। ट्वीट किया, ''नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जांच एजेंसी राजनीति में बदले की कार्रवाई का हथियार बन चुकी है। यह संस्था आज खुद से लड़ाई लड़ रही है।''

बिजनेसमैन के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच कर रही एजेंसी

  1.  

    सीबीआई अपने नंबर 2 अफसर पर एफआईआर दर्ज करने के बारे में कुछ भी कहने को तैयार नहीं है। इस मामले में सीबीआई के डायरेक्टर अलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर ने अभी तक कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी।

     

  2.  

    अस्थाना 1984 आईपीएस बैच के गुजरात कैडर के अफसर हैं। उनके  खिलाफ हैदराबाद के एक बिजनेसमैन की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया। मोइन कुरैशी के साथ बिजनेसमैन के खिलाफ भी मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में जांच चल रही है।

     

  3.  

    अस्थाना मामले की जांच कर रही एसआईटी के प्रमुख हैं। सीबीआई ने पिछले हफ्ते एक बिचौलिए मनोज कुमार को गिरफ्तार किया था। मनोज कुमार ने मजिस्ट्रेट के सामने दिए अपने बयान में अस्थाना को 2 करोड़ रुपए की घूस देने की बात कही थी।

     

  4.  

    मनोज के मुताबिक, उसने यह घूस कुरैशी की तरफ से दी थी, जिसके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और सीबीआई जांच कर रही है। कुरैशी को ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग को आरोपों में पिछले साल अगस्त में गिरफ्तार किया गया था।

     

  5. अस्थाना ने आलोक वर्मा पर लगाए थे आरोप

     

    सीबीआई की इस कार्रवाई से डायरेक्टर आलोक वर्मा और अस्थाना आमने-सामने आ गए हैं। इससे पहले अस्थाना ने आलोक वर्मा पर लालू यादव और उनके परिवार के खिलाफ चल रहे रेलवे कैटरिंग भ्रष्टाचार मामले में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया था।

     

  6.  

    हालांकि, सीबीआई ने अस्थाना के आरोपों से इनकार कर दिया था। एजेंसी ने कहा था- अस्थाना के खिलाफ आधे दर्जन से ज्यादा मामलों में जांच चल रही है। अस्थाना अपने ऊपर लगे आरोपों की जांच करने वाले अफसरों को डराने की कोशिश कर रहे हैं।

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