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सूरज की अल्ट्रावॉयलेंट किरणों की वजह से गर्मी में मौसम में टैनिंग, सनबर्न, स्किन ड्राईनेस, पिंपल्स, ब्लैकहैड्स की समस्या आम हो जाती है। ऐसे में त्वचा की डेड स्किन को हटाने के लिए एक्सफोलिएशन यानि स्क्रबिंग जरूर हो जाती है। यूं तो मार्केट में बहुत से स्क्रब मिल जाएंगे लेकिन हम आपको घर पर ही तीन चीजों से स्क्रब बनाना सिखाएंगे। इससे स्किन भी ग्लो करेगी और आपको ज्यादा पैसे भी खर्च नहीं करने पड़ेंगे।

क्यों जरूरी गर्मियों में स्क्रब करना?

इस मौसम में सूरज की हानिकारक किरणें त्वचा की नमी छीन लेती है। वहीं, दिनभर की धूल-मिट्टी व प्रदूषण त्वचा को डल दिखाते हैं। इसके कारण धीरे-धीरे त्वचा की रंगत काली होती जाती है। मगर, स्क्रबिंग त्वचा की गहराई से जाकर गंदगी और धूल-मिट्टी को बाहर निकालता है, साथ ही इससे डेड स्किन भी निकल जाती है, जिससे स्किन ग्लो करने लगती है। वहीं त्वचा को हाइड्रेट और नमीयुक्त रखने के लिए भी स्क्रब करना बहुत जरूरी है।

चलिए आपको बताते हैं होममेड स्क्रब बनाने का तरीका जो हर किसी के स्किन पर सूट करेगा। वहीं, इसमें नेचुरल सामग्री का यूज किया गया है इसलिए इससे स्किन को कोई नुकसान भी नहीं होगा।

इसके लिए आपको चाहिए:

चावल का आटा - 1 चम्मच
एलोवेरा जेल - 1/2 चम्मच
शहद - थोड़ा-सा

पैक बनाने व लगाने का तरीका

सबसे पहले सारी सामग्री को एक बाउल में मिक्स कर लें। इसके बाद चेहरे को क्लीजिंग मिल्क , गुलाबजल या ठंडे दूध से अच्छी तरह साफ कर लें। इसके बाद पैक से चेहरे पर धीरे-धीरे सर्कुलेशन मोशन में स्क्रब करें। 15 मिनट चेहरे को ठंडे पानी से धो लें। हफ्ते में कम से कम 2-3 बार इस स्क्रब का इस्तेमाल करें।

कितनी बार करना चाहिए स्क्रब?

एक्सपर्ट की मानें तो हफ्ते में कम से कम 1-2 बार ही स्क्रब करना चाहिए लेकिन अगर आप होममेड स्क्रब का इस्तेमाल कर रही हैं तो हफ्ते में 3 से 4 बार यूज कर सकते हैं। ऐसा इसलिए चूंकि घरेलू सामग्री से स्किन को कोई नुकसान नहीं पहुंचा लेकिन अगर आपको कोई सामग्री सूट नहीं करती तो उसे त्वचा पर ना लगाएं।

रेगुलर स्क्रब करने से त्वचा को मिलेंगे की फायदे

- नियमित स्क्रबिंग से सिर्फ डेड स्किन ही साफ नहीं होती बल्कि ओपन पोर्स भी क्लीन रहते हैं। इससे स्किन इंफेक्शन का खतरा कम होता है।
- स्क्रबिंग करते समय जब आप हाथों को चेहरे परप सर्कुलेशन मोशन में घुमाती है तो उससे चेहरे की मांसपेशियों की मसाज हो जाती है।
- इससे त्वचा में ब्लड सर्कुलेशन भी बढ़ता है और उसे पोषण भी मिलता है। इससे स्किन ज्यादा ग्लो करनी लगती है।
- एक्सफोलिएट से त्वचा रेडिएंट और रिजुवेनेटिंग होती है, जिससे डलनेस खत्म हो जाती है।
- इससे त्वचा में मॉइश्चराइजर का अब्जोर्ब्शन अच्छी तरह हो पाता है, जिससे स्किन ग्लो करने लगती है।

याद रखें ये बातें

ध्यान रखें कि अगर आप बाजार से स्क्रब खरीद रहे हैं तो अपनी स्किन टाइप के हिसाब से ही उसका चुनाव करें। इसके अलावा ड्राई स्किन पर सीधे स्क्रब ना लगाएं क्योंकि इससे त्वचा ज्यादा रूखी हो जाएगी। साथ ही इससे त्वचा छिलने, रैडनेस का डर भी रहता है।

आईब्रो चेहरे की खूबसूरती में अहम रोल अदा करता है। अगर आपकी आइब्रो अच्छी नहीं तो लुक भी अच्छा नहीं लगेगा। बहुत सी महिलाएं आईब्रो के पतले या झड़ने से परेशान रहती हैं। इसकी वजह बढ़ती उम्र और केमिकल प्रोडक्ट का ज्यादा यूज है।

इसके अलावा कई और भी कारण हैं जिनकी वजह से आईब्रो के बाल झड़ते हैं-

जानिए आईब्रो कम होने के कारण तनाव

तनाव एक ऐसी बीमारी है जिसकी वजह से कई बड़ी समस्याएं पैदा होती हैं। स्ट्रेस के कारण ना केवल आईब्रो के बाल कम होते हैं बल्कि सर के बाल भी झड़ने लगते हैं। इसलिए खुद को तनाव मुक्त रखें।

पोषक तत्वों की कम मात्रा

हमारे शरीर के लिए आइरन, जिंक, प्रोटीन, और विटामिन बी12 जैसे पोषक तत्व बहुत जरूरी होते हैं। बालों के झड़ने का कारण प्रमुख कारण इनकी कमी है। ऐसा ही आईब्रो के बालों के साथ भी होता है। इससे बचने के लिए इन पोषक तत्वों को नियमित रूप से अपने आहार में शामिल करें।

उम्र का बढ़ना

आईब्रो के कम होने का मुख्य कारण उम्र का बढ़ना भी है। 40 पार होने के बाद सर के पाल पतले होना शुरू हो जाते हैं। पौष्टिक आहार और जीवनशैली में कुछ परिवर्नत कर के इसे ठीक किया जा सकता है।

घरेलू उपाय

मेथी

मेथी के बीज में कई गुण पाए जाते हैं। बालों को झड़ने से रोकने में ये काफी फायदेमंद हैं। रात में मेथी को पानी में भिगोले। सुबह इसे मिक्सी में पीस ले। फिर नारियल तेल में मिलाकर एक पेस्ट बनालें। इस पेस्ट को दिन में दो बार अपनी आईब्रो पर लगाएं। कुछ दिन में आपको फर्क महसूस होगा।

प्याज

प्याज का रस बालों की ग्रोथ में काफी मददगार होता है। आईब्रो के बाल झड़ने से रोकने के लिए आप प्याज के रस का इस्तेमाल कर सकती हैं। सबसे पहले प्याज को पीस कर इसका जूस निकाल लें। जूस से आईब्रो पर कम से कम 5 मिनट तक मसाज करें। सूखने के बाद इसे पानी से धोले।

अंडा

अंडे के पीले भाग में कई जरूरी तत्व पाए जाते हैं। इसके पीले भाग की मदद्त से आप आईब्रो की झड़ती प्रोब्लम से निजात पा सकती हैं। इसके लिए अंडे के पीले भाग को एक कटोरी में निकाल कर उसे अच्छे से फेंट ले। इसे कॉटन के साथ आईब्रो पर लगाएं। सूखने के बाद इसे पानी से धोले। इसे दिन में दो बार जरूर लगाएं।

एक ऐसा विकार हैं जिसमे लोगों को विशेष प्रकार की ध्वनियाँ से काफी परेशानी होती हैं। उन आवाज़ों के खिलाफ कई बार नकारातमकऔर कठोर प्रतिक्रियाएं भी आ सकती हैं। ये आवाज़े कोई भी हो सकती हैं जैसे कुछ भी चबाना ,कलम को खटखटाना ,पैरों को घसीटना आदि। की बोर्ड की आवाज़ हो या कार के शीशे के वाइपर ,ऐसे लोगों को कुछ्ह विशेष आवाज़ों के खिलाफ चिढ़न पैदा करने अली नुभूति हो सकती हैं। इसे सेलेक्टिव साउंड सेंस्टिविटी सिंड्रोम के नाम से जाना जाता हैं।
कुछ लोग तेज आवाज और शोर-शराबा से दूर रहना पसंद करते हैं क्‍योंक‍ि वो उस तेज आवाज को बर्दाश्‍त नहीं कर पाते हैं। इसल‍िए कई लोगों को दिन की तुलना में रात पसंद करते हैं क्‍योंक‍ि रात बहुत ही शांत होती है। दिन में होने वाले तमाम तरह के शोर-शराबों से दूर रात में ये आवाजें कम हो जाती हैं। कई लोग ऐसे होते हैं जो तेज आवाज से दूर दुनिया से कटना शुरू कर दे या उसके स्वभाव में बदलाव आने लग जाते हैं। दरअसल ये एक तरह की गंभीर स्थिति है। यह मीजोफोनिया डिसऑर्डर का इशारा भी हो सकता है।
क्या है मीजोफोनिया--- मीजोफोनिया एक साउंड डिसऑर्डर बीमारी है। इसमें मरीज को किसी खास तरह की आवाज से परेशानी होती है। आम जीवन में सभी को इन आवाजों से दो-चार होना पड़ता है, लेकिन जिन लोगों में मीजोफोनिया की समस्या होती है, उन्हें यह चुभने लगती है। किसी को खाने के समय निकलने वाली आवाज से समस्या होती है तो किसी को पीने के अंदाज से तकलीफ होती है। कुछ खास आवाजों के प्रति ऐसे मरीज काफी संवेदनशील हो जाते हैं, परिणामस्वरूप काफी आक्रामक व्यवहार करने पर उतर आते हैं। सामान्य इंसान के लिए ये आवाजें सामान्य बात होती हैं, लेकिन यही आवाजें इस बीमारी के मरीजों को तकलीफ पहुंचाती हैं। कई बार आवाज उन्हें इतना आक्रामक बना देती है कि वह अपना आपा खो बैठते हैं और हिंसक होकर सामने वाले व्यक्ति को नुकसान पहुंचा देते हैं।
कारण --- विशेष ध्वनियों के प्रति व्यक्ति होने वाली यह प्रतिक्रिया क्यों होती हैं इसका कारण अब तक स्पष्ट नहीं हो सका।
यह तीन प्रकार का होता हैं ---१ ओबेस्सिव कम्पलसिव डिसऑर्डर २ चिंता सम्बन्धी विकार ३ टोरेट सिंड्रोम यानी बार बार हिलने या अनचाही आवाजें निकलाने वाली तंत्रिका तंत्र की बीमारी इसके अलावा जिन लोगों को टिनिटस नाम का विकार होता हैं उनमे भी यह समस्या काफी आम हैं।
क्या होती है प्रतिक्रिया ट्रिगर अर्थात् जिस आवाज से समस्या होती है, उसके संपर्क में आते ही व्यक्ति काफी अलग तरह का व्यवहार करने लगता है। उसकी सांसें तेज हो जाती हैं, चेहरा गुस्से से लाल हो जाता है। वह अपने हाथ-पैर सिकोड़ने लगता है और कई बार शरीर में कंपन शुरू हो जाता है। अपने कानों को उंगलियों या हाथों से बंद कर देता है और इन आवाजों से दूर भागने की कोशिश करने लगता है। ऐसी स्थिति होने पर या तो व्यक्ति उस आवाज से काफी दूर अकेले में चला जाता है और घंटों एकांत में बैठा रहता है या फिर उन आवाजों से परेशान व आक्रामक होकर आवाज करने वाले व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने लगता है। आवाज खत्म होने के कुछ समय बाद व्यक्ति सामान्य हो जाता है और अगर उसने कुछ हिंसक कार्य किया है तो उसके लिए उसे पछतावा भी होता है। कई बार समस्या बढ़ने पर व्यक्ति कुंठित होकर मनोवैज्ञानिक समस्याओं का भी शिकार हो जाता है।
बरतें ये सावधानियां - अगर आपके परिवार में ऐसा कोई व्यक्ति है, जिसे किसी खास तरह की आवाज से चिढ़ हो तो आप उसे उस आवाज के संपर्क में आने से रोकें। - कोशिश करें कि उसके नजदीक उस तरह की आवाज न हो लेकिन अगर आवाज रोकना या मरीज को आवाज के संपर्क में आने से रोकना मुश्किल हो तो उस समय मरीज के दिमाग को दूसरी जगह व्यस्त कर दें, ताकि उसके कानों तक वह आवाज नहीं पहुंचे। - अगर मरीज कुंठित हो जाए या मनोवैज्ञानिक समस्या का शिकार हो जाए तो परिवार वाले उसकी परेशानी को समझते हुए उसकी मदद करें और किसी ईएनटी विशेषज्ञ से मिलने के साथ-साथ मनोचिकित्सक से मिलें।इसके लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए अब तक कोई भी विशेष दवाई उपलब्ध नहीं हैं।
आयुर्वेद में कुछ दवाये लाभकारी हो सकती हैं ---
दिमाग पौष्टिक रसायन ,दिमाग दोषहरी वटी,सारस्वारिष्ट ,अश्वगंधारिष्ट ,ब्राम्ही वटी ब्रैण्टो ,मेन्टेट आदि पंचकर्म में शिरोधारा भी लाभप्रद हैं

तपती गर्मी में जब पारा 40 के पास पहुंचता है तो हम राहत के लिए एयर कंडिशनर का सहारा लेते हैं। हम दिनभर एयर कंडिशनर वाले ऑफिस में रहते हैं और रात में भी एसी में सोते हैं। उमस भरी गर्मी में आपको राहत भले मिल जाती हो पर एसी आपकी सेहत को काफी नुकसान पहुंचा सकते हैं।
नहीं मिलती ताजी हवा
एसी रूम में हम सारे दरवाजे खिड़की बंद रखने होते हैं ताकि कमरा ठंडा हो सके। ऐसे में कहीं से भी ताजा हवा नहीं पहुंचती जो कि सेहत के लिए काफी नुकसानदायक है। ताजी हवा की कमी से हर वक्त थकान लगती रहती है। एसी की डक्ट अगर साफ नहीं है तो आपको सांस से जुड़ी समस्याएं और फेफड़ों का संक्रमण भी हो सकता है।
बहुत ठंडा वातावरण
कई बार हम सो रहे होते हैं तो तापमान काफी ठंडा हो जाता है। जागते वक्त तो हम इसको मेनटेन कर सकते हैं लेकिन सोते वक्त कई बार यह हमारे शरीर के सहने की क्षमता से भी कम हो जाता है। ठंडक की वजह से सिरदर्द और पीठ दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। जरूरत से ज्यादा ठंड से जोड़ों में दर्द की समस्या होती है और धीरे-धीरे यह गठिया में तब्दील हो सकती है।
रूखापन
एयर कंडिशनर हवा से नमी को सोख लेते हैं इतना ही नहीं ये हमारी त्वचा और बालों की नमी भी अवशोषित करते हैं जिससे त्वचा और बाल ड्राई हो जाते हैं। आपकी त्वचा में झुर्रियां जल्दी पड़ सकती हैं साथ ही त्वचा से जुड़ी और भी समस्याएं हो सकती हैं।
करें ये उपाय
आप ऑफिस का एसी तो बंद नहीं कर सकते लेकिन खुद को इसका आदी न बनाएं। घर पर एसी कम से कम चलाएं और तापमान सामान्य रखें। एसी में बैठते हैं तो त्वचा पर बार-बार मॉइश्चराइजर लगाते रहें।

गर्मियों में सत्तू का सेवन अच्छा रहता है। इसके शरीर सेहतमंद रहता है।
सत्तू पीने के लाभ
सत्तू पीने से मधुमेह और रक्तचाप नियंत्रित रहता है। सत्तू में नींबू, नमक और जीरा डालकर पीने से बीपी नहीं बढ़ता है।
सत्तू लू लगने से भी बचाता है। गर्मियों में अगर सत्तू पीकर बाहर निकला जाए तो लू नहीं लगती है।
सत्तू मोटापे को भी दूर करता है। सत्तू पीने से पाचन ठीक रहता है और एसिडिटी नहीं होती है।
गर्मियों में मिचली आने की भी शिकायत लोगों को होती है। रोज सत्तू पीने से उल्टी रुकती है और शरीर की कमजोरी भी दूर होती है।
इसके अलावा नींबू पानी और आम के पने का भी सेवन करें यह आपको लू से बचाता है। नींबू पानी से शरीर को विटामिन सी मिलने के साथ ही ठंडक भी बनी रहती है।

आजकल लोगों को भूलने की बिमारी होना आम हो गया है। इससे कई बार उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वहीं अगर आप कुछ उपयों को अपनाया जाए तो याददाश्त तेज की जा सकती है। कई बार भूलने आदत किसी बिमारी की ओर से संकेत करती है इसलिए अपनी जांच भी करायें। यह आगे चलकर अल्जाइमर्स में भी बदल सकती है।
इस प्रकार बढ़ेगी यादाश्त :
यदि आपकी यादाश्त कमजोर है तो अपनी बालों में मेहेंदी लगायें। इससे यादाश्त बढ़ जाएंगी। मेहेंदी के पत्तों में करनोसिक तत्त्व पाए जाते है। जिससे इंसानी दिमाग की मांसपेशियां सक्रिय हो जाती हैं।
सुबह जल्दी सूर्योदय से पहले उठकर टहलना भी आपके शारीरिक स्वास्थ्य के अलावा आपके दिमाग को भी राहत देता है। अगर संभव हो तो कुछ देर लगभग 2 या 3 मिनट रोज आप नंगे पैर हरी दूब पर चलें इससे आपकी आंखों की रोशनी भी तेज होती है।
फलों में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट आपके दिमाग की सक्रिय बनाए रखने में काफी सहायक होते हैं। दिमाग को तेज करने के लिए और याददाश्त बढ़ाने के लिए अनार और सेब का सेवन करना चाहिए।
यदि आप चाय कॉफी का सेवन करते हैं तो इसकी जगह पर आप ग्रीन टी का इस्तेमाल कर सकते हैं।
दिमाग को तेज तर्रार बनाने के लिए अखरोट खायें। अखरोट में विटामिन ए और एंटीऑक्सीडेंट्स तत्वों की भरपूर मात्रा होती है जो आपकी याददाश्त बढ़ाने में फायदेमंद होती है।
चेरी के सेवन से भी दिमाग तेज़ बनता है।

नट्स में भरपूर मात्रा में विटामिन, मिनरल्स, कैल्शियम, और अनसैचुरेटेड फैटी एसिड पाए जाते हैं। रोजाना नट्स का सवन करने से सेहत बनी रहती है लेकिन डायबिटीज (मधुमेह) के मरीजों को सोच समझकर ही नट्स का सेवन करना चाहिए क्योंकि डायबिटीज के मरीजों के लिए डाइट बहुत महत्वपूर्ण होती है। डायबिटीज के मरीज जो भी खाते हैं, उसका सीधा असर उनके ब्लड शुगर पर पड़ता है। आइए जानते हैं डायबिटीज के मरीजों को कौन से नट्स का सेवन करना चाहिए।
बादाम : बादाम खाने से शरीर में ग्लुकोज का स्तर सामान्य रहता है। बादाम ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करते हैं और व्यक्ति को डायबिटीज और दिल संबंधी समस्याओं में फायदा पहुंचाते हैं। रोजाना बादाम के सेवन से शरीर में मैग्नीशियम की कमी भी दूर होती है!
अखरोट : अखरोट के सेवन से पेट भरा रहता है और ज्यादा खाने की क्रेविंग नहीं होती है। रोजाना अखरोट का सेवन करने से वजन कम होता है। साथ ही ये डायबिटीज के मरीजों के लिए भी फायदेमंद होते हैं।
पिस्ता: पिस्ते में भरपूर मात्रा में प्रोटीन और गुड फैट होता है। इसको खाने के बाद लंबे समय तक भूख नहीं लगती है। एक रिपोर्ट में बताया गया है कि पिस्ता खाने से डायबिटीज के मरीजों में ब्लड शुगर का स्तर नॉर्मल बना रहता है। रोजाना फलों के साथ पिस्ते का सेवन फायदेमंद होता है।
मूंगफली : मूंगफली में भरपूर मात्रा में प्रोटीन और फाइबर पाया जाता है। टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों के लिए मूंगफली बहुत फायदेमंद होती है। रोजाना मूंगफली के सेवन से वजन कम होने के साथ दिल संबंधी बीमारी होने का खतरा भी कम होता है। डायबिटीज के मरीजों को मूंगफली के सेवन से बहुत फायदा पहुंचता है, क्योंकि ये डायबिटीज के मरीजों में ब्लड शुगर के लेवल को नॉर्मल रखती है।
काजू : ब्लड प्रेशर के मरीजों को अपनी डाइट में काजू जरूर शामिल करने चाहिए। काजू ब्लड प्रेशर सामान्य रखने के साथ दिल की बीमारियों में भी फायदेमंद होते हैं। डायबिटीज के मरीजों को भी काजू के सेवन से फायदा पहुंचता है।
हाइपरटेंशन, ब्रेन स्ट्रोक से बचाएंगे मसाले
हाइपरटेंशन, ब्रेन स्ट्रोक, कोलेस्ट्रॉल, फैटी लिवर, डायबिटीज और बुखार जैसी बीमारियों से अब रसोई मसाले बचाएंगे। बस इसमें अन्य औषधीय पौधों (मेडिसिनल प्लांट) का समावेश किया जाएगा, जो आपकी सेहत को बिगड़ने नहीं देंगे। उत्पादन और प्रसंस्कण में बदलाव की तैयारी कर ली गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार 95 फीसदी मसालों में औषधीय गुण मिल रहे हैं। अगर उसमें अन्य औषधीय पौधों का मिश्रण कर दिया जाए तो प्राकृतिक रूप से होने वाली बीमारियों से लोगों बचाया जा सकता है। औषधीय गुणों वाले मसालों की खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा।

होली के रंग किसी के लिए भी खतरनाक हो सकते हैं क्योंकि बाजार में बिकने वाले ज्यादातर रंगों में खतरनाक रसायन मिले होते हैं। इसके साथ ही इस अवसर पर मिलने वाली ज्यादातर मिठाइयों में भी मिलावट होती है। यूं तो रसायनिक रंग और मिलावटी मिठाइयां किसी के लिए भी खतरनाक हो सकती हैं पर गर्भवती महिलाओं को खास ख्याल रखने की सलाह दी जाती है। ये चीजें गर्भवती महिला और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे, दोनों ही के लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं।
डॉक्टरों के अनुसार गर्भावस्था में महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है जिससे बीमार पड़ने और संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। उनके अनुसार, गर्भावस्था में रसायनयुक्त रंग विपरीत प्रभाव डाल सकते हैं। इनसे तंत्रिका तंत्र, किडनी और अन्य अंगों को नुकसान पहुंच सकता है। इसके साथ ही उसे समयपूर्व प्रसव, बच्चे के विकास से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। वहीं कई बार तो ये रंग और मिठाइयां गर्भपात का कारण भी बन सकते हैं। होली पर रंग खेलना है तो खेलें पर उसके लिए प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल करना ही सबसे अच्छा होता है। इसके साथ ही ज्यादा मिठाइयां और कार्बोनेटेड पेय पदार्थ के सेवन से शरीर में शुगर का लेवल बढ़ जाता है जिससे मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में घर पर ही मिठाइयां बनाए और सीमित मात्रा में उनका सेवन करें।

अभी तक आपने आम के पत्तों को धार्मिक अनुष्ठानों में इस्तेमाल करते हुए बहुतायत में तो देखा होगा, लेकिन शायद आपको यह नहीं मालूम होगा कि यही पत्ते अनेक बीमारियों से हमें निजात दिला सकते हैं। दरअसल आम के पत्ते अनेक पोषक तत्वों से परिपूर्ण होते हैं।
वैसे भी आम को तो फलों का राजा ही कहा गया है। गर्मियों के मौसम में आने वाली आम की बहार से संपूर्ण समाज सराबोर होता है, ऐसे में यहां आपको बताते चलें कि उसी आम के पत्ते भी आपके लिए कम फायदेमंद नहीं होते हैं। आयुर्वेदिक औषधीय में इसका विशेष महत्व है और बताया जाता है कि मोतियाबिंद, तनाव कम करने, मोटापा घटाने और कैंसर जैसे घातक रोगों से छुटकारा दिलाने की भी ताकत होती है इसमें। आम के फल के साथ ही साथ इसके पत्ते का इस्तेमाल भी फायदेमंद हैं। आम के पत्ते में काफी मात्रा में मैगीफेरिन, गैलिन एसिड तथा पॉलीफिनॉल्स जैसे तत्व होते हैं। इस कारण शुगर, अस्थमा और अनेक प्रकार के रोगों में आम के पत्ते का प्रयोग काफी लाभदायक होता है। इसके अतिरिक्त श्वांस संबंधी समस्या में भी आम के पत्ते काफी लाभकारी होते हैं। अस्थमा होने पर आम की पत्तियों का काढ़ा बनाकर पिलाया जाए तो काफी लाभ मिलता है। चूंकि आम के पत्ते में एंटी डाइबिटीक गुण होता है अत: यह शुगर को कंट्रोल करने में भी लाभदायक हो सकता है। इसके लिए जरुरी है कि आम के पत्तों को सुखाया जाए और उसका पाउडर बनाकर नियमित सेवन करें इससे शुगर कंट्रोल रहने में मदद मिलेगी। इसके अतिरिक्त ब्लडप्रेशर में भी आम के पत्तों को पानी में उबालकर उस पाने से स्नान करना चाहिए। इससे ब्लड प्रेशर से छुटकारा भी मिलता है। आम के पत्ते पथरी से निजाद दिलाने में भी काफी लाभदायक होते हैं। इन पत्तों का पाउडर बनाकर रोजाना सेवन करने से जल्द ही पथरी निकल जाती है। आम की ताजा नर्म पत्तियां रोज सुबह खाली पेट खाने से ट्यूमर भी खत्म हो जाता है। इस प्रकार आम के पत्ते अनेक प्रकार से औषधीय इस्तेमाल में लिए जा सकते हैं।

फूलगोभी सभी को पसंद होती है, लेकिन ये आपके पेट के लिए बहुत नुकसानदायक है।फूलगोभी सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली सब्जियों में से एक है। लोग भी इसे बड़े चाव से खाते हैं। इससे बने पराठे, आलू -गोभी की सब्जी यहां तक कि पकौड़े भी बड़े स्वादिष्ट लगते हैं। और भी बहुत सारी व्यंजन गोभी का इस्तेमाल करके बनाई जाती हैं। सबसे अच्छी बात ये है कि इसे पकाना बेहद आसान है। लेकिन आप नहीं जानते कि बाहर से साफ सुथरी और सुंदर दिखने वाली फूलगोभी आपके लिए किसी जहर से कम नहीं है। इसे खाने से कई नुकसान हो सकते हैं।फूलगोभी कई पोषक तत्वों का ऊर्जा केंद्र है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स, फाइटोन्यूट्रिएंट्स , फोलेट, विटामिन के और फाइबर जैसे अन्य पोषक तत्व मौजूद रहते हैं। इस सब्जी में सल्फरयुक्त रसायन भी होते हैं, जिन्हें ग्लूकोसिनोलेट्स कहा जाता है। जब ये केमिकल पेट में ब्रेक होते हैं, तो यह हाइड्रोजन सल्फाइड कंपाउंड बनाते हैं और यही बदबूदार फार्ट की वजह बनता है, जिससे कई बार लोगों के सामने शर्मिंदगी उठानी पड़ती है।

फूलगोभी और पाचन स्वास्थ्य
फूलगोभी मस्टर्ड फैमिली का ही एक सदस्य है। यह सब्जी कई पोषक तत्वों से भरपूर है। इस वजह से ये स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद मानी जाती है। लेकिन इस सब्जी का ज्यादा सेवन करने से पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इस सब्जी को पचाना बेहद मुश्किल होता है, खासतौर से तब जब इसे कच्चा खाया जाए। इससे सूजन या गैस से संबंधित समस्या बढ़ने लगती है।

क्यों हमारे लिए हानिकारक है फूलगोभी
ज्यादातर लोगों को फूलगोभी पसंद होती है। तो इसमें ऐसा क्या है, जो हमारे लिए हानिकारक है। दरअसल, इस सब्जी में रेफिनोज होता है, जो एक प्रकार का कार्बोहाइड्रेट है। ये कार्ब कुछ सब्जियों में तो प्राकृतिक रूप से मौजूद होता है, लेकिन हमारा शरीर इसे तोड़ नहीं पाता। इसका मतलब यह है कि जब आप कार्बोहाइड्रेट से भरपूर इस सब्जी का सेवन करते हैं, तो यह छोटी आंत से बड़ी आंत में पहुंच जाता है। आखिर में जब उनकी बड़ी आंत में एंट्री होती है, तो वहां पहले से मौजूद बैक्टीरिया इसे फर्मेंट करना शुरू कर देते हैं। जिसके बाद पेट में गैस बनने लगती है या फिर पेट फूला सा महसूस होता है।

फूलगोभी खाने के नुकसान
थायरॉइड की समस्या से गुजर रहे लोगों के लिए गोभी बहुत नुकसानदायक है। इससे टी-3 और टी-4 हार्मोन के बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है।फूलगोभी में पोटेशियम की मात्रा अधिक होती है। जो लोग इसका सेवन ज्यादा करते हैं, उनका खून धीरे-धीरे गाढ़ा होने लगता है। जो लोग पहले से ही खून गाढ़ा करने की दवा खा रहे हैं तो बेहतर है कि वे डॉक्टर की सलाह के बाद ही फूलगोभी का सेवन करें। स्तनपान करानी वाली महिलाओं को यह सब्जी खाने से बचना चाहिए। इसे खाने से बच्चे के पेट में दर्द उठ सकता है।

फूलगोभी खाने का सही तरीका
फूलगोभी तो लोग सालों से खाते आ रहे हैं, लेकिन अब भी लोग इसे खाने का सही तरीका नहीं जानते। गलत तरीके से खाने के बाद ही पेट में गैस और पाचन संबंधी समस्याएं शुरू होने लगती हैं। अगर आप अक्सर ताजा गोभी का सेवन करते हैं, तो इसमें अन्य गोभी की तुलना में 30 प्रतिशत ज्यादा प्रोटीन और कई अलग -अलग प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। खासतौर से कच्ची गोभी में एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा जरूरत से ज्यादा होती है। फूलगोभी को कई तरीकों से खाया जा सकता है। लेकिन अगर आप पाचन संबंधी समस्याओं से परेशान रहते हैं, तो हमेशा पकी हुई फूलगोभी खाने की कोशिश करें। कई लोग गोभी में कीड़े निकलने की वजह से इसे उबालकर खाते हैं। लेकिन ऐसा कभी नहीं करना चाहिए। गोभी को उबालने से इसके भीतर मौजूद एंटीऑक्सीडेंट लगभग खत्म हो जाते हैं। इसलिए इस सब्जी को सीमित मात्रा में ही खाने की सलाह दी जाती है।
जैन धर्मनुसार --जिस पदार्थ के खाने से अन्नत स्थावर जीवों का घात होता हैं उसे स्थावर हिंसकारक अभक्ष्य कहते हैं। इसीलिए इसे खाद्य में नहीं लेते हैं।

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