खास खबर

खास खबर (1096)

महिलाओं में उम्र के साथ मोटापा बढ़ ही जाता है। यह भी हो सकता है कि आप मोटी न हों, लेकिन आपके पेट पर थोड़ी चर्बी इकट्ठा हो। यही वजह है कि जब आपका मूड टाइट फिटिंग वाले कपड़े पहनने का करता है तो भी आप उन्हें पहन नहीं पाती हैं। ऐसे में क्या करें कि ट्रेंडी और स्टाइलिश कपड़े पहनकर आप स्मार्ट और स्टाइलिश दिखें जिससे उभरा पेट भी छिप जाए।
आपको एक सुंदर सा लहंगा पहनना है या आपका मूड कुछ वेस्टर्न पहनने का है? आप चाहती हैं कि आपका निकला पेट उसमें न दिखे। क्या आपने कभी टमी टकर का इस्तेमाल किया है?
यदि आपका जवाब ना है तो फटाफट बाजार जाएं और अपने लिए टमी टकर (बॉडी शेपर) खरीद लें। यह खासतौर से वेस्टर्न ड्रेस के पीछे इतनी खूबसूरती से छिप जाता है कि पता ही नहीं चलता कि आपने पेट की चर्बी को छिपाने के लिए टमी टकर भी पहना है।
फ्लेयर्ड कुर्ती का कमाल
यदि आपको भारतीय पोशाक पहनना पसंद है तो आप अनारकली और फ्लेयर्ड (नीचे की ओर ऊपर-नीचे वाला कट) हेमलाइन वाली कुर्ती को अपनी सहेली बना लीजिए। यह आपके बढ़े हुए पेट को छुपाने में आपकी सहेली की तरह आपकी मदद करेगी। फ्लेयर्ड हेमलाइन वाली कुर्ती को आप ऑफिस के साथ ही कैजुअल वियर के तौर पर भी पहन सकती हैं। शादी जैसे समारोह के लिए अनारकली परफेक्ट है।
ऐसे कपड़े पहनें
रफल टॉप (चुन्नट वाला टॉप) न सिर्फ दिखने में काफी स्टाइलिश है, बल्कि पेट पर इकट्ठा चर्बी को छुपाने में भी कारगर साबित होता है। यदि आपको बेल स्लीव्स वाला रफल टॉप मिल जाए तो इसे अपने वॉर्डरोब का हिस्सा बनाने में जरा भी नहीं हिचकें। रफल टॉप की तरह पेपलम टॉप भी आप पर अच्छा दिखेगा। यह टॉप पेट तक फिटिंग का होता है और ठीक वहीं से उसमें चुन्नट वाला डिजाइन रहता है। खासतौर से चुन्नट वाले इस डिजाइन के कारण पेट की चर्बी आसानी से छुप जाती है और ऊपर से नीचे तक स्टाइलिश लुक भी मिल जाता है।
हाई वेस्ट जींस भी है प्रभावी
जींस जितना लो वेस्ट होगा, आपका मोटापा उतना ही पता चलेगा। लो वेस्ट जींस में अकसर पेट की चर्बी एक परत की तरह दूर से ही नजर आने लगती है। इसे छुपाने के लिए हमेशा हाई वेस्ट जींस पहनें। इससे पेट की बढ़ी हुई चर्बी भी छुपेगी और आप फिट व लंबी भी नजर आएंगी।
पेंसिल स्कर्ट स्कर्ट
अगर आप फॉर्मल वियर में ऑफिस जाती हैं और पेट की बढ़ी हुई चर्बी को छुपाने का प्रयास रहती हैं तो अपने वॉर्डरोब में पेंसिल स्कर्ट को जरूर शामिल करें। पेंसिल स्कर्ट अच्छी फिटिंग वाला हो तो हर किसी पर अच्छा लगता है। इसके साथ ढीला टॉप पहनें और अपने निकले हुए पेट को भूल जाएं। ऐसे ही फॉर्मल वियर के मामले में प्लीटेड पैंट भी आपके लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं। यह पैंट अमूमन हाई वेस्टलाइन वाले होते हैं, जिसमें चुन्नट नीचे की ओर गिरती है। इस पैंट को पहनकर आप न सिर्फ लंबी दिखेंगी, बल्कि इसके प्लीट्स आपके उभरे पेट पर से लोगों का ध्यान हटा देंगे।
ड्रेस के मामले में हैं ढेरों विकल्प
पेट की चर्बी को छुपाने के लिए कपड़े का चुनाव करते वक्त उसके पैटर्न का भी ध्यान रखें। इस बात का ध्यान रखें कि लंबी रेखाओं यानी वर्टिकल पैटर्न वाले ड्रेस आपको लंबा दिखाएंगे और आपकी चर्बी को छुपाएंगे। वर्टिकल पैटर्न वाला शर्ट पेट पर इकट्ठा चर्बी से जुड़ी आपकी परेशानी को पूरी तरह से खत्म कर देगा। ठीक ऐसे ही ढीली-ढाली लंबी ड्रेस भी आप पर अच्छी लगेगी। आजकल यह ड्रेस ट्रेंड में भी है। पार्टी आदि में जाने के लिए यह ड्रेस अच्छी है। अपने लिए एक लंबी ड्रेस लें, जो हल्की ढीली हो। यह आपके उभरे पेट को छिपाकर आपको स्टाइलिश और बेहद आरामदायक लुक देगी।

खूबसूरत आंखें हर कोई महिला चाहती है क्योंकि बड़ी, चमकीली और कटीली आंखों को सुंदरता की निशानी माना जाता है। ऐसी आंखें जिनसे नजरें हटती ही नहीं हैं सबके आकर्षण का केन्द्र होती हैं पर जरूरी नहीं कि प्राकृतिक रूप से हर किसी की आंखें इतनी ही खूबसूरत हों। अगर आप भी अपनी आंखों की खूबसूरती को निखारना चाहती हैं तो आपको आई मेकअप से जुड़ी मुख्य बातों को सीखना होगा। यह सच है कि शुरुआत में कुछ कमियां रह जाएंगी, पर लगातार कोशिश करने से आप भी मेकअप के जरिये अपनी आंखों की खूबसूरती को एकदम से निखार पाएंगी।
आई प्राइमर की भूमिका रहती है अहम
आई मेकअप करने के कुछ घंटे बाद ही अगर पूरा मेकअप फैलने लगे तो चेहरे की रौनक खराब होने में समय नहीं लगता है। ऐसे में आई प्राइमर की भूमिका अहम हो जाती है। चेहरे के प्राइमर की तरह ही आंखों का प्राइमर वहां की त्वचा के टेक्सचर को बेहतर बनाकर आई मेकअप को लंबे समय तक टिकने में मदद करता है। साथ ही आई प्राइमर, आई शैडो को भी खराब होने और उस पर क्रैक पड़ने से बचाता है। आई प्राइमर को आप आई शैडो लगाने से पहले अपनी उंगलियों या फिर मेकअप ब्रश की मदद से लगा सकती हैं।
कंसीलर है जरूरी
जब भी आई कंसीलर की बात आती है तो सही चुनाव करना कठिन हो जाता है। एक गलत धारणा यह है कि अगर आंखों के नीचे काले घेरे या दाग-धब्बे न हों तो कंसीलर की जरूरत ही नहीं पड़ती पर, सच्चाई यह है नहीं। प्रभावी आई मेकअप के लिए हमेशा कम मात्रा में ही सही, कंसीलर का इस्तेमाल जरूर करें।
जरूरी है आई शैडो
आई शैडो से आंखों की खूबसूरती सही तरीके से तभी निखरती है, जब आप उसे मेकअप करते वक्त अच्छी तरह से मिलाती हैं। आई मेकअप करते वक्त आई शैडो को सही तरीके से मिलाने पर पूरा ध्यान दें। आई शैडो में आप कितने रंगों का चुनाव कर रही हैं, यह मायने नहीं रखता है। मुख्य बात यह है कि आप आई शैडो को अच्छी तरह से मिलाएं।
वॉटरप्रूफ आईलाइनर खरीदें
आजकल बाजार कई तरह के आईलाइनर से भरा पड़ा है। इनमें सबसे ज्यादा चलन में लिक्विड ब्लैक आईलाइनर है। आईलाइनर खरीदते वक्त इस बात का ध्यान रखें कि वह वॉटरप्रूफ हो। बाजार में पेंसिल आईलाइनर भी उपलब्ध है, जिसका इस्तेमाल आप आई शैडो की तरह भी कर सकती हैं। इसे लगाना लिक्विड आईलाइनर की तुलना में आसान होता है। प्रभावी इस्तेमाल के लिए अपने पेंसिल आईलाइनर को नियमित अंतराल पर नुकीला भी करें। कम वक्त में खूबसूरत आईलाइनर लगाने के लिए पेन आईलाइनर का इस्तेमाल करें।
काजल लगायें
काजल के बिना आई मेकअप पूरा नहीं होता है। आंखों की खूबसूरती निखारने में काजल की भूमिका अहम होती है। जरा-सा काजल लगाते ही आंखों की पूरी थकावट गायब हो जाती है। बाजार में ब्लू, ग्रे, ग्रीन, ब्लैक जैसे कई रंगों में काजल उपलब्ध हैं। काली व भूरी आंखों पर हरे रंग का काजल भी लगाया जा सकता है। हरे व हेजल रंगों की आंखों पर बैंगनी, हल्का भूरा, नीला व हरा रंग फबता है। अगर आपकी आंखों का रंग नीला है तो उस पर नीला काजल लगाने से बचें। काला, ग्रे या बैगनी रंग का काजल आपकी आंखों की खूबसूरती को निखारेगा।
पलकों का रखें ध्यान
प्रभावी आई मेकअप के लिए पलकों की सही देखभाल भी जरूरी है। मस्कारा लगाने के बाद अपनी पलकों को कर्ल करना न भूलें। इससे आपकी पलकों को आकर्षक अंदाज मिलेगा।

पीरियड्स महिलाओं की सेहत से जुड़े कई राज और बिमारियों के संकेत पहले ही देतेत हैं।पीरियड्स के दौरान महिलाओं को चिड़चिड़ापन,शरीर में दर्द और पाचन से जुड़ी कई समस्याएं झेलनी पड़ती हैं हालांकि ये सारी दिक्कतें पीरियड्स खत्म होने के साथ अपने आप ठीक हो जाती हैं।इस दौरान लड़कियों को लगता है कि शरीर से निकलने वाले खून का रंग लाल ही होता है पर अगर आप गौर करेंगे तो आप पायेंगी कि इस दौरान खून का रंग गाढ़ा भूरा भी हो सकता है और हल्का गुलाबी भी। आइए जानते हैं किस रंग के खून का मतलब आखिर क्या होता है।
पीरियड्स का खून लाल रंग का हो तो
पीरियड्स के दौरान साधारण लाल रंग का खून बताता है कि आप बिल्कुल स्वस्थ है।दरअसल, यह खून नया होता है।जो शरीर से बनते ही तुरंत निकल जाता है।इस तरह के खून का रंग हल्के लाल रंग का होता है।इस तरह का खून हैवी ब्लीडिंग के साथ शरीर से बाहर निकलता है।
गहरे भूरे रंग का खून
इस तरह के रंग वाला खून बताता है कि यह खून लंबे समय से गर्भाशय में जमा रहा होगा। इस तरह के खून का रंग बताता है कि महिला को कोई संक्रमण हो सकता है।इस रंग का खून आने के बाद लड़कियों को तेज पेट दर्द की भी शिकायत हो सकती है।ऐसे में अपने डॉक्टर से जांच जरूर करवाएं।
पीरियड्स के दौरान गहरे लाल रंग के थक्के आना
अगर इस दौरान खून का रंग गहरा लाल है तो यह शरीर में हॉर्मोनल असंतुलन की वजह हो सकता है। इसके अलावा यह ओवेरियन सिस्ट का भी संकेत देता है।
अगर आपका खून काला या गहरा है तो
काले रंग का खून खतरे का संकेत है। हो सकता है कि आपके गर्भाशय में संक्रमण हो या फिर ये गर्भपात का भी सूचक हो सकता है।अगर आपको पीरियड्स के सभी दिनों में काले रंग का ब्लड फ्लो हो रहा हो तो तत्काल डॉक्टर को दिखायें।

आजकल आधुनिक जीवनशैली और व्यायम की कमी के कारण दिल की बिमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है। हमारे सोने और खाने की आदतें हमारी सेहत को गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं। इस कारण हार्ट अटैक और स्ट्रोक के मामले बढ़ते जा रहे हैं। वहीं अगर हम अपने आहार में जैतून के तेल को शामिल करते हैं तो के दिल की बीमारियों से सुरक्षित रह सकते हैं।
हमारे खून में प्लाज्मा प्रोटीन पाया जाता है। इस प्रोटीन में अनसैचुरेटेड फैट मौजूद होता है, जो दिल की बीमारी के खतरे को कम करने में सहायता करता है।एक अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक, जैतून के तेल में बने खाने का सेवन करने से शरीर की सूजन, हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कम होता है।
इसके अलावा एपीओए-आईवी प्रोटीन ब्लड वेसेल्स को ब्लॉक होने से रोकता है, जिससे शरीर में खून का बहाव सही ढंग से होता है। आहार में अनसैचुरेटेड फैट की भरपूर मात्रा और एक अच्छी नींद लेकर दिल संबंधित समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है। दरअसल, सोते समय एपीओए-आईवी शरीर में सबसे ज्यादा सक्रिय होता है, जबकि दिन के समय इसका स्तर कम हो जाता है। ऐसे में सेहतमंद रहने के लिए अच्छी नींद और पोषक तत्वों से भरपूर चीजों का सेवन करने से कई बीमारियों से सुरक्षित रहा जा सकता है।

डायबिटीज मधुमेह से ग्रस्त लोगों में से तकरीबन आधे डायबिटीज जनित रेटिनोपैथी से भी पीड़ित होते हैं। इसलिए आंखों की देखभाल के लिए डायबिटीज जनित रेटिनोपैथी की जांच बेहद जरूरी है। डायबिटीज जनित रेटिनोपैथी स्मॉल ब्लड वैसल्स को नुकसान पहुंचने से होती है। ये ब्लड वैसल्स ही रेटिना को पोषक तत्व पहुंचाती हैं। क्षतिग्रस्त होने पर इनमें से रक्त और अन्य तरल पदार्थो का रिसाव होने लगता है, जिससे रेटिना के टिश्यूज़ में सूजन आ जाती है और नजर धुंधलाने लगती है। यह स्थिति आमतौर पर दोनों आंखों को प्रभावित करती है।
अंधेपन का कारण बन सकती है
डायबिटीज जनित रेटिनोपैथी के मामले हाल के वर्षो में तेजी से बढ़े हैं। देखने में आ रही है। यदि समय पर सही कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और अधिक खराब हो सकती है। डायबिटीज जनित रेटिनोपैथी को डायबिटीज पीड़ितों में अंधेपन का प्रमुख कारण माना जाता है हालांकि, यह एक ऐसी स्थिति है, जिसे ठीक किया जा सकता है और होने से रोका भी जा सकता है।
कुछ कारक जो इस स्थिति को बढ़ाते हैं, उनमें प्रमुख हैं- ग्लाइसेमिक नियंत्रण में कमी, हाई ब्लकड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल स्तर। ज्यादातर रोगियों में, डायबिटीज जनित रेटिनोपैथी आमतौर पर एकदम से पता नहीं चल पाती, यानी इसके लक्षण हल्के होते हैं। इस कारण से, डायबिटीज पीड़ित लोग इस बात से तब तक अनजान रहते हैं, जब तक कि रोग बढ़ नहीं जाता।
खोया हुआ विजन बहाल नहीं हो सकता। इसलिए, यह आवश्यक है कि डायबिटीज पीड़ित व्यक्ति रेटिनोपैथी का पता लगाने के लिए नियमित रूप से जांच कराते रहें। नजर खोने और कमजोर होने से रोकने के लिए शुरू में ही ध्यान देना महत्वपूर्ण है।
लेजर सर्जरी से उपचार
आंखों की बिमारियों में डायबिटीज जनित रेटिनोपैथी भी बेहद गंभीर माना जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने इसे अपने विजन 2020 : राइट टू साइट इनीशिएटिव में इसे शामिल किया है। इसमें बीमारी बढ़ने के बाद ही इसके लक्षण दिखाई देते हैं, लेकिन कुछ सामान्य लक्षण भी हैं जैसे कि दृष्टि में धुंधलापन, आंखों के पास धब्बे, दोहरी दृष्टि और आंखों में दर्द। लेजर सर्जरी का इस्तेमाल करके इसका इलाज किया जाता है, पर डायबिटीज के प्रत्येक चरण में रेटिनोपैथी का उपचार एक अलग तरीके से किया जा सकता है।

हीमोफीलिया एक ऐसी आनुवांशिक बीमारी है, जिसमें हल्की चोट के बावजूद खून बहता रहता है और बहता हुआ यह खून आसानी से जमता नहीं है। ऐसे में किसी एक्सीडेंट या चोट में यह बीमारी कई बार जानलेवा भी साबित हो सकती है, क्योंकि खून का बहना आसानी से बंद नहीं होता और इसी के चलते खून ज्यादा बह जाता है और यह मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
हीमोफीलिया के कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि हीमोफीलिया का सबसे बड़ा कारण है, रक्त में प्रोटीन की कमी जिससे क्लॉटिंग फैक्टर पर असर पड़ता है. दरअसल, खून बहने से रोकने में क्लॉटिंग फैक्टर का काफी प्रभाव पड़ता है। हीमोफीलिया तीन प्रकार के होते हैं, ए, बी और सी।
हीमोफीलिया का इलाज
हीमोफीलिया का प्राथमिक उपचार फैक्टर रिप्लेसमेंट थेरेपी है, जिसमें क्लॉटिंग फैक्टर को रिप्लेस करने का काम किया जाता है। इस थैरेपी में ब्लड प्लाजमा को एकत्र करके इसे शुद्ध किया जाता है।
हीमोफीलिया के मरीज क्या करें
हीमोफीलिया के मरीजों को अक्सर यह सलाह दी जाती है कि वह हड्डियों और मांसपेशियों में सुधार करने वाली एक्सरसाइज करें और अपने वजन को कंट्रोल करें। साथ ही मरीज ऐसी शारीरिक गतिविधि से दूर रहे जिसमें चोट लगने का खतरा हो। इसके अलावा अगर मरीज के दांत से खून निकलता है तो अपने डॉक्टर से सलाह लें और ऐसा ब्रश इस्तेमाल करें जो सॉफ्ट हो। इसके अलावा समय-समय पर डॉक्टरी सलाह लेना ना भूलें।
इसके अलावा ब्लड-थिनिंग दवा जैसे कि वार्फरिन और हेपरिन लेने से बचें. एस्पिरिन और इबुप्रोफेन जैसी ओवर-द-काउंटर दवाओं से बचना भी बेहतर है। रक्त संक्रमण के लिए नियमित रूप से परीक्षण करें और हेपेटाइटिस ए और बी के टीकाकरण के बारे में अपने डॉक्टर की सलाह लें।

आमतौर पर सुबह-सुबह हम कुछ भी खाली पेट खाकर निकल जाते हैं पर आपकी यह आदत सेहत पर भारी पड़ सकती है. विशेषज्ञ कुछ चीजों को खाली पेट खाने से मना करते हैं। आइये जानते हैं कौन सी वो चीजें हैं, जिन्हें कभी भी खाली पेट नहीं खानी चाहिए...
मसालेदार खाना
सुबह-सुबह ब्रेकफास्ट में कभी भी स्पाईसी या बहुत मसालेदार चीजें नहीं खानी चाहिए। इससे पूरे दिन पेट में एसिडिटी रहती है और यह अल्सर का कारण बन सकता है।
सॉफ्ट ड्रिंक
सॉफ्ट ड्रिंक्स खास तौर से कोल्ड ड्रिंक्स खाली पेट कभी न पीयें। इनमें उच्च मात्रा में कार्बोनेट एसिड होता है। यह पेट के एसिड से मिलकर गंभीर परेशानी का कारण बन सकते हैं। इसके अलावा आपको गैस और उल्टी की समस्या भी झेलनी पड़ सकती है.
ठंढ़े पेय पदार्थ
खाली पेट गलती से भी ठंढ़े पेय पदार्थ, जिन्हें हम कोल्ड बेवरेज कहते हैं, नहीं पीने चाहिए. जैसे कि कोल्ड कॉफी या कोल्ड ड्रिंक्स आदि। यह आपके पेट के मुकस मेम्ब्रेन यानी कि पेट की उस झिल्ली को नुकसान पहुंचाता है, जो पाचन क्रिया में मददगार होती है। इसकी जगह आप आप गर्म ग्रीन टी या हल्का गर्म पानी पी कर अपने दिन की शुरुआत कर सकते हैं।
खट्टे फल
कभी भी खट्टे फल जैसे कि संतरा, नींबू, अमरूद आदि खाली पेट न खायें। इससे पेट में एसिड बनती है। इससे आपका पाचन तंत्र भी धीमा हो जाएगा. इसलिए इन्हें खाली पेट न खायें।
कॉफी
खाली पेट कॉफी पीना भी आपकी सेहत पर भारी पड़ सकता है। इसकी वजह से आपको एसिडिटी हो सकती है। दरअसल, कॉफी हाइड्रोक्लोरिक एसिड के स्राव को रोकता है, जिसकी वजह से हमारा हाजमा ठीक चलता है और गैस्ट्र‍िक की समस्या रहने लगती है।

स्तन कैंसर वाली रजोनिवृत्त महिलाओं में हृदय रोग का अधिक खतरा होता है। एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने इस बात का पता लगाया है। एक अध्ययनकर्ता ने कहा, "कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी और एरोमाटेज इनहिबिटर्स के उपयोग (जो एस्ट्रोजन को कम करते हैं) की वजह से स्तन कैंसर के लिए उपचारित महिलाओं में दिल की बीमारी अधिक देखी जाती है।"
हृदय जोखिम विकिरण के संपर्क में आने के पांच साल बाद यह रोग हो सकता है और इसका जोखिम 30 साल तक बना रहता है। पिंकर्टन ने कहा, "हृदय-स्वस्थ जीवन शैली में संशोधन से आवर्ती स्तन कैंसर और हृदय रोग के विकास के जोखिम दोनों में कमी आएगी।"
स्तन कैंसर से बची हुई महिलाओं और जिन महिलाओं को स्तन कैंसर है, उन रजोनिवृत्ति महिलाओं में हृदय रोग के लिए जोखिम कारकों की तुलना और मूल्यांकन करना अध्ययन का लक्ष्य था।

हमारे देश में आम तौर पर सोरायसिस (अपरस) को लेकर जागरुकता नहीं है। सोरायसिस एक ऑटोइम्यून बीमारी है जो त्वचा पर खुजली और जलन का कारण बनती है। आहार और मौसम सहित कई कारक इस त्वचा रोग को बढ़ा सकते हैं। सोरायसिस एक जटिल त्वचा रोग है जो काफी सामान्य है।
अधिकतर लोग केवल इतना जानते हैं कि सोरायसिस में त्वचा पर खुजली, लाल दाने हो जाते हैं लकिन क्या आप जानते हैं कि त्वचा पर होने वाले इन दानों में तेज दर्द हो सकता है और इनका आकार बढ़ सकता है। भारत में यह बीमारी हर साल 2-4 फीसदी यानि 10 मिलियन से अधिक लोगों को प्रभावित करती है। डायबिटीज और कैंसर के विपरीत, लोग इस बीमारी के प्रति ज्यादा जागरूकता नहीं है। कई लोग ऐसा सोचते हैं कि यह रोग गर्मियों में होता है लेकिन आपको बता दें कि सर्दियों में भी यह रोग हो सकता है। सर्दियों में ड्राइनेस से आपकी स्थिति और गंभीर हो सकती है। सर्दियों में ठंडी हवा, कम ह्यूमिडिटी और धूप नहीं होने से स्किन ड्राई हो सकती है और खुजली हो सकती है।
आपको बता दें कि इसका खतरा केवल पुरुषों को ही नहीं बल्कि महिलाओं को भी होता है। क्योंकि दोनों इस रोग से समान रूप से प्रभावित होते हैं। इसके अलावा, यह सभी आयु समूहों में हो सकता है, लेकिन मुख्यतः यह वयस्कों को प्रभावित करता है।
इसमें रोगी अक्सर अपने आपको कवर करके रखते हैं। त्वचा को छिपाने के लिए लंबे कपड़े पहनते हैं हालांकि इससे जल्दी राहत पाने के लिए आपको तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।
उपचार
सोरायसिस के लिए तुरंत उपचार की आवश्यकता होती है अन्यथा इसके प्रभाव के बढ़ जाने से पीड़ित की जान तक को ख़तरा बना रहता है। वहीं आयुर्वेद में भी इसके कई उपचार हैं।
सोरायसिस का देशी आयुर्वेदिक इलाज :
रात को सोने से कुछ देर पहले आप 10 बादाम की गिरी लें और उन्हें अच्छी तरह पीसकर पाउडर बनायें. आप इन्हें 1 से ½ ग्लास पानी में कुछ देर उबलने के लिए छोड़ दें और ठंडा हो जाने पर रोगी के घावों पर लगाएं। आप इसे रात भर रोगी के शरीर पर ही लगा रहने दें और सुबह उठकर शरीर को साफ़ करे। इस उपचार से सोरायसिस के इलाज के लिए अच्छे परिणाम मिले है.
चन्दन ठीक बादाम की ही तरह आप एक चम्मच चंदन का पाउडर तैयार कर लें और उसे करीब 600 मिलीलीटर पानी में अच्छी तरह उबालें। जब आपको लगे कि 200 मिलीलीटर पानी ही बचा हुआ है तो आप उसे उतारे और ठंडा होने दें। इस पानी में आप शक्कर और थोडा गुलाबजल डालकर मिलाएं। इस तरह रोगी के लिए एक उत्तम दवा तैयार है, इससे अधिक से अधिक लाभ पाने के लिए रोगी को इसे दिन में 3 बार बनाना और पीना है।
पत्ता गोभी भी सोरायसिस के इलाज में बहुत असरदार होती है। इससे इलाज के लिए आपको पत्तागोभी का ऊपर वाला पत्ता लेना है और उससे पानी से साफ़ करना है. अब आप इसे हाथों के बीच लाकर सपाट करें और हल्का सा गर्म कर लें। आप इस पत्ते को सोरायसिस से प्रभावित हिस्से पर रखें और पत्ते के ऊपर सूती कपडा लपेट दें। इस तरह आपको इस उपाय को दिन में 2 बार अपनाना है, ये उपाय आपको जबरदस्त तरीके से फायदा पहुंचाता है.।
इसके अलावा पत्तागोभी का रोजाना सुबह शाम सूप बनाकर पियें। इससे भी आपको योग्य परिणाम देखने को मिलेंगे।
नींबू आप एक कटोरी में नींबू रस निकाल लें और उसमें नींबू रस की आधी मात्रा में पानी मिलाएं। इस मिश्रण को अच्छी तरह मिला लेने के बाद आप इसे उस जगह लगायें जहाँ सोरायसिस हुआ है। इस रस को आपको हर 4 घंटे के बाद प्रयोग में लायें।
शिकाकाई आप पानी में कुछ मात्रा में शिकाकाई मिलाएं और उसे उबलने दें। जब पानी आधा रह जाएँ तो आप इस पानी को सोरायसिस के धब्बों पर लगायें। इससे भी तुरंत आराम मिलना आरम्भ हो जाता है।
केले के पत्ते पत्ता गोभी की तरह केले के पत्तों का इस्तेमाल भी सोरायसिस के उपचार के लिए किया जाता है। इसका उपयोग करने के लिए रोगी अपने शरीर के उस स्थान पर पत्तों को बांधें जहाँ सोरायसिस हुआ है। पत्तों के ऊपर सूती कपड़ा लपेटना बिलकुल भी ना भूलें। ये शीघ्र ही आपको लाभ पहुंचाता है।
हर रोग पर वातावरण और मौसम का प्रभाव पड़ता है और शरीर को भी मौसम के बदलाव के साथ बदलाव की जरूरत होती है। इसलिए अगर आपको सोरायसिस सर्दियों के मौसम में हुआ है तो आप दिन में करीब 3 लीटर पानी अवश्य पियें और अगर आपको सोरायसिस गर्मियों के दिन में हुआ है तो आप 5 से 6 लीटर अवश्य पियें।
एक अन्य उपचार में सोरायसिस हो जाने के शुरूआती 15 दिनों तक सिर्फ फलाहार ग्रहण करना होता है और उसके बाद उन्हें अधिक से अधिक दूध और फलों का रस पीना होता है. इससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढती है और रोगी को आराम मिलना शुरू हो जाता है। सोरायसिस के रोगियों को अपने खाने में नमक के सेवन को बिलकुल बंद कर देना चाहियें, जबकि संक्रमित भाग को रोजाना नमक मिश्रित पानी से साफ़ करने से रोगी को आराम मिलता है। कोई भी नशा जैसेकि शराब, धुम्रपान, गांझा इत्यादि शरीर, गले, फेफड़े और त्वचा के लिए हानिकारक होता है। इनका उपयोग सोरायसिस के प्रभाव को बढ़ा सकता है। इसलिए आपको कोशिश करनी चाहियें कि आप इस सब नशों से दूर ही रहें।

भीषण गर्मी के इस दौर में प्रकृति ने हमें कुछ ऐसे फल भी दिये हैं जिनकी सहायता से हम सेहतमंद रह सकते हैं।
गर्मी में शीतलता पहुंचाने वाले फलों का इस्तेमाल शरीर में तरावट बनाये रखता है और पानी की कमी नहीं होने देता।
गर्मी के इस मौसम में हमें तरबूज, खरबूज और आम के साथ ही नारियल पानी का भी पर्याप्त सेवन करना चाहिये।
आम का स्वाद तो सभी को भरपूर भाता है पर इसके लाभ जानकार आप हैरान रह जाएंगे।
कैंसर से बचाव
आम में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट कोलोन कैंसर, ल्यूकेमिया और प्रोस्टेट कैंसर से बचाव में फायदेमंद है। समें क्यूर्सेटिन, एस्ट्रागालिन और फिसेटिन जैसे ऐसे कई तत्व होते हैं जो कैंसर से बचाव करने में मददगार होते हैं।
आंखें होती हैं तेज
आम में विटामिन ए भरपूर होता है, जो आंखों के लिए वरदान है।इससे आंखों की रौशनी बनी रहती है।
कोलेस्ट्रॉल ठीक रखता है
आम में फाइबर और विटामिन सी खूब होता है। ससे बैड कोलेस्ट्रॉल संतुलन बनाने में मदद मिलती है।
त्वचा के लिए है फायदेमंद
आम का पैक लगाने या फिर उसे चेहरे पर मलने से चेहरे पर निखार आता है और विटामिन सी संक्रमण से भी बचाव होता है।
पाचन क्रिया को ठीक रखने में
आम में ऐसे कई एंजाइम्स होते हैं जो प्रोटीन को तोड़ने का काम करते हैं। इससे भोजन जल्दी पच जाता है। साथ ही इसमें उपस्थित साइर्टिक एसिड, टरटैरिक एसिड शरीर के भीतर क्षारीय तत्वों को संतुलित बनाए रखता है।
मोटापा कम करने में
मोटापा कम करने के लिए भी आम एक अच्छा उपाय है। आम की गुठली में मौजूद रेशे शरीर की अतिरिक्त चर्बी को कम करने में बहुत फायदेमंद होते हैं। आम खाने के बाद भूख कम लगती है, जिससे ओवर ईटिंग का खतरा कम हो जाता है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता
आम खाने से शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है।
भूलने की बीमारी नहीं होती
जिन लोगों को भूलने की बीमारी हो उन्हें आम का सेवन करना चाहिए। इसमें पाया जाने वाला ग्लूटामिन एसिड नामक एक तत्व स्मरण शक्ति को बढ़ाने में उत्प्रेरक की तरह काम करता है। साथ ही इससे रक्त कोशिकाएं भी सक्रिय होती हैं। इसीलिए गर्भवती महिलाओं के लिए आम और भी बेहतर होता है।
नारियल पानी के लाभ
नारियल पानी मीठा और ताजगीभरा होता है। साथ ही ये एक लो-कैलोरी ड्रिंक भी है। नारियल पानी में एंटीऑक्सीडेंट्स, अमीनो-एसिड, एंजाइम्स, बी-कॉम्प्लेक्स विटामिन, विटामिन सी और कई प्रमुख लवण होते हैं।
नारियल पानी पीने से रोग प्रतिरोधी क्षमता अच्छी होती है। साथ ही इसमें मौजूद साइटोकिनिंग्स बढ़ती उम्र के लक्षणों को आने से रोकता है।
नारियल पानी पीते रहने से शरीर में पानी की कमी नहीं होने पाती है। शरीर में पानी की कमी हो जाने पर या फिर शरीर की तरलता कम हो जाने पर, डायरिया हो जाने पर, उल्टी होने पर या दस्त होने पर नारियल का पानी पीना फायदेमंद रहता है।
हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के लिए भी नारियल के पानी का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें मौजूद विटामिन सी, पोटैशियम और मैग्नीशियम ब्लड-प्रेशर को नियंत्रित रखने में सहायक होते हैं।
कोलेस्ट्रॉल और फैट-फ्री होने की वजह से ये दिल के लिए बहुत अच्छा होता है। इसके साथ ही इसका एंटी-ऑक्सीडेंट गुण भी सर्कुलेशन पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।
हैंगओवर से राहत पाने के लिए भी नारियल का पानी एक अच्छा उपाय है।
वजन घटाने में भी नारियल पानी सहायक होता है। इसके अलावा सिर दर्द से जुड़ी ज्यादातर समस्याएं डिहाइड्रेशन की वजह से ही होती हैं. ऐसे में नारियल पानी पीने से शरीर को तुरंत इलेक्ट्रोलाइट्स पहुंचाने का का काम करता है, जिससे हाइड्रेशन का स्तर सुधर जाता है।
इसके अलावा बढ़ती उम्र के प्रभाव को कम करने के लिए भी नारियल पानी का प्रयोग किया जाता है। इसमें मौजूद साइटोकिनिंग्स कोशिकाओं और ऊतकों पर सकारात्मक प्रभाव डालकर बढ़ती उम्र के प्रभाव को कम करने में सहायता करते हैं।

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