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डार्क सर्कल्स हटाने के लिए रसोई में मौजूद कई चीजों का इस्तेमाल किया जा सकता है. जो बेहतरीन असर दिखाते हैं.

आंखों के नीचे की त्वचा कोमल होती है, जिस कारण उसके डैमेज होने का खतरा ज्यादा होता है. सूरज की हानिकारक किरणे या ड्राईनेस के कारण डार्क सर्कल हो जाते हैं, जिन्हें काले घेरे भी कहा जाता है. डार्क सर्कल यानी काले घेरे को हटाने के लिए घर में मौजूद इन चीजों का इस्तेमाल किया जा सकता है.

खीरा :
आंखों के नीचे काले घेरे हटाने में खीरा मददगार हो सकता है. खीरे में त्वचा की रंगत सुधारने वाले तत्व पाए जाते हैं, जो आंखों के नीचे की त्वचा का कालापन हटाते हैं. इसके लिए आप खीरे के दो मोटे स्लाइस काट लें और 30 मिनट के लिए फ्रिज में रख दें. इसके बाद इन स्लाइस को आंखों पर करीब 10 मिनट के लिए रखा रहने दें.

डार्क सर्कल हटाने के लिए गुलाब जल :
गुलाब जल त्वचा को नमी प्रदान करने में भी मदद करता है. इससे स्किन रिफ्रेश होती है. डार्क सर्कल हटाने के लिए गुलाब जल में कॉटन का एक टुकड़ा भिगो लें और उसे आंखों पर रखा रहने दें. 15 मिनट बाद आंखों को धो लें और रोजाना इस उपाय को करें.

आलू :
काले घेरे हटाने के लिए आलू का इस्तेमाल भी किया जा सकता है. जिसमें पर्याप्त मात्रा में विटामिन-सी पाया जाता है. आंखों के नीचे काले घेरे हटाने के लिए आलू को कद्दूकस करके 10 मिनट तक आंखों के नीचे रखकर लेट जाएं. इसके बाद चेहरा धो लें.

नींबू का रस और खीरा :
डार्क सर्कल्स हटाने के लिए सिर्फ खीरा ही नहीं, बल्कि खीरे के साथ नींबू का भी इस्तेमाल किया जाता है. आपको नींबू का रस और खीरे का रस बराबर मात्रा में मिलाना है और रुई की मदद से आंखों के नीचे लगाना है. 15 मिनट बाद त्वचा को गुनगुने पानी से धो लें.

डार्क सर्कल्स हटाने के लिए टमाटर :
टमाटर भी स्किन की रंगत सुधारने में मदद करता है. काले घेरे हटाने के लिए नींबू का रस और टमाटर का रस बराबर मात्रा में मिलाएं और रुई की मदद से डार्क सर्कल पर लगाएं. 10 मिनट बाद गुनगुने पानी से धो लें.

अगर आप गर्भवती हैं तो किसी प्रकार का तनाव न लें। एक अध्ययन रिपोर्ट में दावा किया गया है कि गर्भावस्था के दौरान ज्यादा तनाव में रहने वाली महिलाओं में गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है। अध्ययनकर्ताओं का दावा है कि गर्भावस्था के दौरान तनाव लेने वाली महिलाओं में गर्भपात का खतरा 42 फीसदी बढ़ जाता है। इससे पहले हुए अध्ययन की रिपोर्ट में यह पाया गया था कि 24 सप्ताह की गर्भवती में होने वाले गर्भपात में 20 फीसदी मामले तनाव के कारण होते हैं।
दोबारा अध्ययन के बाद यह पाया गया कि आंकड़ें इससे कहीं ज्यादा हैं क्योंकि गर्भपात के कई मामले दर्ज ही नहीं होते।
यही नहीं अध्ययन की रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा किया गया कि युवा होते ही तनाव और अवसाद का सामना करने वाले लोगों को आगे के जीवन में बहुत सी बीमारियों का सामना करना पड़ता है।
गर्भावस्थ में काम का ज्यादा तनाव न लें
गर्भावस्था के दौरान काम का बहुत ज्यादा तनाव न लें। अपनी प्राथमिकताएं थोड़ी कम करें और दोस्तों या रिश्तेदारों से मदद लेने में संकोच न करें।
घर का काम कम करें और उस समय का इस्तेमाल आप किताब पढ़ने और आराम करने में कर सकती हैं।
अगर कामकाजी हैं तो ऑफिस में सिक लीव या अपनी छुट्ट‍ियों का भरपूर लाभ लें।
लंबी सांस लें और छोड़ें, योग करें या स्ट्रेचिंग करें।
अगर स्व‍ीमिंग आती है तो स्वीमिंग करें या वॉक करें।
हेल्दी खाएं. संतुलित आहार आपके शरीर और मानसिक सेहत दोनों को ठीक रखेगा।
रात में जल्दी सो जाएं क्योंकि इससे आपके गर्भ में पल रहे बच्चों को विकास के लिए ज्यादा समय मिलेगा।
दूसरों की सुनें पर दिल से न लगाएं। गर्भावस्था के दौरान लोग खूब कहानियां सुनाते हैं, उन्हें सुनें जरूर, पर ज्यादा ध्यान न दें। कुछ लोगों को गर्भावस्था में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, लेकिन ऐसा आपके साथ भी हो, कोई जरूरी तो नहीं।
अगर आपको लगता है कि आप तनाव में हैं और आपका तनाव कम नहीं हो पा रहा है तो अपने डॉक्टर से बात करें।

डेंगू बुखार एक ऐसी बीमारी हैं जो एडिस इजिप्टी मच्छरों के काटने से होती हैं। इस रोग में तेज बुखार के साथ शरीर पर चकते बनने शुरू हो जाते हैं। जहां यह महामारी के रूप मे फैलता है वहाँ एक समय मे अनेक प्रकार के विषाणु सक्रिय हो सकते है। डेंगू से बचाव के लिए अभी कोई टीका नहीं आया है, इसलिए इससे बचाव के लिए जागरूक होना जरूरी हैं।
डेंगू से बचने का एकमात्र उपाय, मच्‍छरों से बचना है।
पानी न जमा करें
डेंगू का वायरस मच्‍छरों के काटने से फैलता है। डेंगू एक संक्रामक रोग है और कुछ स्थितियों में यह बीमारी जानलेवा भी हो सकती है। डेंगू से सुरक्षित रहने के लिए सभी आवश्यक उपाय करने चाहिए। डेंगू से बचने का एकमात्र उपाय, मच्‍छरों से बचना है। यहां हम आपके और आपके परिवार के लिए इस महामारी को रोकने में मदद करने के कुछ सुझावों के बारे में बता रहे हैं।
एडीज एजिप्‍टी मच्‍छर दिन के समय संक्रमण फैलाते हैं। इनका जन्‍म आमतौर पर जमा पानी वाले स्‍थानों पर होता है। इसलिए घर के अंदर और आस-पास स्थिर पानी को साफ करना बहुत महत्‍वपूर्ण होता है। इसके अलावा कूलर, गमले आदि में पानी जमा न रहने दें।
मच्‍छरों से बचाव करें
डेंगू से पीड़ि‍त व्‍यक्ति को फिर से मच्‍छर द्वारा कटाने से बचाये। इसके अलावा, यह भी तय करें कि घर में हर कोई अपन बचाव करें।
मच्छर भगाने वाले उपायों का प्रयोग करें
मॉस्किटो रिपेलेंट का इस्‍तेमाल नियमित रूप से करें। इससे कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए कि दिन है या रात। मच्‍छरों वाले स्‍थान में मॉस्किटो रिपेलेंट का इस्तेमाल रात में करने के साथ-साथ दिन में भी करें। सोते समय मच्छरदानी लगायें।
सभी प्रवेश बिंदुओं को ब्लॉक करें
मच्‍छरों को रोकने खिड़की और दरवाजों पर जाली लगायें
कूड़ेदान में कचरा एकत्रित होता दिखाई देने पर उसे तुरंत खाली करें। क्‍योंकि गंदगी या गंदा हिस्‍सा मच्‍छरों के लिए प्रजनन भूमि हो सकता है। इसके अलावा, उस क्षेत्र में मच्‍छरों के प्रवेश को रोकने के लिए कचरे को ढंक कर रखें।
घर के पास तुलसी के पौधे को रखें
प्राकृतिक तरीके से घर में मच्‍छरों के प्रवेश को रोकने के लिए अपनी खिड़की या दरवाजे के पास तुलसी का पौधा लगाये। यह प्राकृतिक तौर पर रिपेलेंट का काम करता है जिससे इस संक्रमण की आशंका घटती है।

आजकल युवाओं में टैटू बनाना फैशन के साथ ही स्टेटस सिंबल भी बनता जा रहा है पर क्या आपके इसके खतरे जानते हैं।
टैटू का शौक रखते हैं और नया-नया टैटू बनवाया है तो इसकी खास देखभाल करना भी बहुत जरूरी है। खासकर 24 घंटे तो इसकी विशेष देखभाल जरूरी है। टैटू आर्टिस्ट भी सलाह देते हैं कि टैटू गुदबाते समय बैक्टिरियल संक्रमण से बचाना बहुत जरूरी है। इनके अनुसार टैटू बनवाने के बाद कई सावधानियों का ध्यान जरूर रखना चाहिए।
24 घंटे तक इस पर पट्टी बंधी होनी चाहिए क्योंकि इतने पर तक इस पर बैक्टैरियल इंफेक्शन हो सकता है। इसलिए टैटू वाली सतह को धूल और हर तरह के इंफेक्शन से बचाने की जरूरत है।
24 घंटे बाद पट्टी हटाने के बाद हल्के ठंडे या गुनगुने पानी से टैटू एरिया को धोना चाहिए। इसे बिल्कुल भी न खरोंचें किसी भी तरह की सक्रैचिंग करने से बचें। अगर 24 घंटे बाद इसमें कुजली होती है तो डॉक्टर को दिखाएं।
पहले तीन दिन तक इसमें प्रोएक्टिव ऑइनमेंट लगाएं। इसके अलावा लोशन और माइश्चराइजर लगाने से भी बचें।
टैटू वाले एरिया पर खुशबू वाला लोशन लगाने से बचें, क्योंकि इसमें अल्कोहल होता है।
इसके अलावा इसे धूप से बचाकर रखें, क्योंकि धूप से टैटू का रंग कमजोर हो जाता है।

अगर आप अपने खर्राटों को लेकर परेशान हैं तो इसके लिए अपने रहन-सहन में आपको बदलाव करना होगा। कई बार एंटी स्नोरिंग उपकरणों व दूसरे तरीकों के इस्तेमाल से भी लोगों को मनचाहा लाभ नहीं मिला है। वहीं जीवनशैली में कुछ बदलाव कर खर्राटों की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इस बदलाव को कारगर करने में योग अहम भूमिका निभा सकता है। यह सबसे आसान और मजेदार विकल्पों में से एक है। योग करने से खर्राटों की समस्या से तुरंत निजात मिल सकती है। हालांकि, दूसरे तरीकों की तरह ही अगर योग को भी दैनिक क्रिया के तौर पर जारी रखा जाएगा तो बदलाव अधिक सहज होते जाएंगे।
योग से कैसे कम होते हैं खर्राटे
योग आसनों की मदद से रक्त संचार और फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है। इस बात का भी ध्यान रखा जाता है कि एयर पैसेज पूरी तरह से खुला रहे। योगआसन गले और चेहरे की मांसपेशियों को मजबूत करने में भी मदद करते हैं। इन प्रभावों से खर्राटों की समस्या को कम या पूरी तरह से खत्म करने में मदद मिलती है।
पैरों को मोड़कर आराम से बैठ जाएं (पालथी मारकर)। आंखें बंद कर नाक से गहरी सांस लें। कर्कश आवाज निकालते हुए नाक से सांस लें। गर्दन की मांसपेशियों को कॉन्ट्रैक्ट करें और जब तक हो सके, सांस को रोके रहें। एक नथुने को पकड़ते हुए दूसरे से सांस छोड़ें। फिर दूसरे को पकड़ें और पहले से सांस छोड़ें। इस व्यायाम को दिन में तीन से पांच बार दोहराएं।
जमीन पर चटाई बिछाकर पालथी मारकर बैठें। रीढ़ की हड्डी व सिर बिलकुल सीधा होना चाहिए और चेहरा सामने की ओर रखें। एक गहरी सांस लें और जब तक हो सके, उसे रोक कर रखें। इस दौरान प्राण (जो ऊर्जावान सांस आपने ली है) के बारे में सोचते रहें। धीरे-धीरे सांस छोड़ें। सांस छोडऩे का समय सांस लेने के समय से अधिक होना चाहिए।
भ्रामरी या हमिंग बी की मुद्रा
सीधे बैठें और तर्जनी उंगलियों को कानों पर रखें। गहरी सांस अंदर लें, उसे छोड़ते समय कार्टिलेज को धीरे से दबाएं। आप चाहें तो कार्टिलेज को दबाए रखें या मधुमक्खी जैसी तेज आवाज निकालते हुए उस पर उंगली रखते व हटाते रहें। फिर से सांस लें और इस प्रक्रिया को 6-7 बार दोहराएं।
उज्जयी प्राणायाम या हिसिंग मुद्रा
सांस लेने से शुरुआत करें, गले के पीछे वाले हिस्से को खींचते हुए आपकी सांस धीमी व रिलैक्स्ड होनी चाहिए। सांस लेते समय स्थिर हिसिंग आवाज निकालें, यह ध्वनि धीमी व कान को अच्छी लगने वाली होनी चाहिए। सांस लेने व छोड़ने की प्रक्रिया को बढ़ाते रहें, ध्यान रखें कि इससे शरीर के किसी भी हिस्से में दबाव न महसूस हो। सांस की आवाज धीमी हो और टूटनी नहीं चाहिए।
सिंह गर्जनासन या रोरिंग मुद्रा
जमीन पर बैठें, पैर शरीर के अंदर मुड़े हुए और हिप्स, एड़ियों पर स्थिर होने चाहिए। जांघों को फैलाएं और हथेलियों को जमीन पर घुटनों के बीच इस तरह से रखें कि कलाइयां बाहर की ओर व उंगलियां अंदर की ओर नजर आएं। आगे की ओर झुकें, सिर को पीछे झुकाएं और गहरी सांस लें। मुंह खोलकर जीभ बाहर निकालें और सांस छोड़ें। इन चरणों को तीन बार दोहराएं।

अगर आप बालों को लंबा बनाना चाहते हैं और हेयर फॉल रोकना चाहते हैं, तो इस खास जूस का सेवन करें.
बालों की ग्रोथ जल्दी बढ़ाने के लिए एक खास का जूस का सेवन फायदेमंद होता है. आप बालों को लंबा करने के लिए एलोवेरा जूस का सेवन करें. वहीं, एलोवेरा जूस के इस्तेमाल से हेयर फॉल भी रोका जा सकता है. आप आसान रेसिपी से घर में ही एलोवेरा जूस बना सकते हैं. आइए जानते हैं कि घर पर एलोवेरा जूस बनाने की रेसिपी क्या है?

बाल लंबे करने के लिए कैसे बनाएं एलोवेरा जूस:
एलोवेरा जूस में विटामिन सी, विटामिन ए, विटामिन ई, विटामिन बी12, फोलिक एसिड (विटामिन बी9) होता है. जो स्वस्थ कोशिकाओं को विकसित करने और बालों को रेशमी बनाने में मदद करते हैं. वहीं, बालों का झड़ना भी रोकते हैं.

बाजार या घर में लगे पौधे से एलोवेरा की दो ताजा पत्तियां तोड़ लें.
इन पत्तियों को छीलकर अंदर मौजूद एलोवेरा जेल निकाल लें.
आपको 1 गिलास जूस बनाने के लिए दो चम्मच एलोवेरा जेल की जरूरत होगी.
अब मिक्सर में सेब, केला, गाजर या टमाटर में से किसी भी मनपसंद फल के साथ दो चम्मच एलोवेरा जेल डालें.
इन दोनों सामग्रियों को मिक्सी में पेस्ट बना लें. जरूरतानुसार पानी डाला जा सकता है.
एलोवेरा जूस में दूध का इस्तेमाल नहीं करें.
जब एलोवेरा जूस तैयार हो जाए, तो इसमें शहद डालें और सेवन करें.

हेयर फॉल रोकने के लिए बालों में ऐसे लगाएं एलोवेरा जूस:
बालों में लगाने के लिए एलोवेरा जूस बनाने का तरीका थोड़ा अलग है. आप दो चम्मच एलोवेरा जेल को मिक्सी में पीसकर पेस्ट बना लें और छलनी की मदद से छान लें. अब इस एलोवेरा जूस को तेल की तरह बालों की जड़ों में चंपी करें. करीब 20 मिनट तक बाल बांधे रखें और फिर साफ सामान्य पानी से बाल धो लें. सुनिश्चित करें कि बालों में एलोवेरा जूस लगाते समय बाल बिल्कुल साफ हों.

कुछ चीजों का सेवन दिमागी स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है और याद्दाश्त कमजोर बनाता है,

जीवनशैली खराब होने का असर हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ा है. जिसके कारण हमारी याद्दाश्त कमजोर होती जा रही है और हम छोटी-छोटी बात भी भूल जाते हैं. कुछ लोग इतने भुलक्कड़ हो जाते हैं कि उन्हें एक दिन पहले की बात याद करने के लिए भी समय चाहिए होता है. कुछ Food भी याद्दाश्त को कमजोर बनाते हैं.

Memory Loss का कारण बनने वाले फूड बच्चे भी काफी खाते हैं. जिनसे उनकी याद्दाश्त पर भी खतरनाक असर पड़ता है. अगर आप अपनी और बच्चों के दिमाग को तेज व स्वस्थ बनाना चाहते हैं, तो इन 4 चीजों के सेवन से बिल्कुल दूर रहें.

Food that decrease memory: याद्दाश्त कमजोर बनाने वाले फूड
जानी-मानी न्यूट्रिशनिस्ट पूजा मखीजा ने याद्दाश्त के लिए Unhealthy Foods की जानकारी दी. उन्होंने इन सभी फूड्स से दूरी बनाए रखने की सलाह दी.

1. सॉफ्ट ड्रिंक्स व डायट सोडा
कुछ लोग प्यास लगने पर सॉफ्ट ड्रिंक्स का सेवन कर लेते हैं. लेकिन यह आपकी याद्दाश्त के लिए हानिकारक है. क्योंकि, सॉफ्ट ड्रिंक्स में पाया जाने वाला हाई फ्रुक्टोज कॉर्न सिरप ब्रेन इंफ्लामेशन को बढ़ाकर याद्दाश्त और सीखने की क्षमता को घटाता है. वहीं, डायट सोडा में भी दिमाग और याद्दाश्त कमजोर करने वाले तत्व पाए जाते हैं.

2. पैकेटबंद फूड
भूख लगने पर पैकटबंद चिप्स खा लेने का आइडिया सभी के दिमाग में आता है. बच्चे भी इसका बहुत ज्यादा सेवन करते हैं. लेकिन आपको बता दें कि पैकेटबंद फूड में मौजूद ट्रांस फैट अल्जाइमर रोग (भूलने की गंभीर बीमारी) का खतरा बढ़ाने के साथ ब्रेन वॉल्यूम कम करने और याद्दाश्त को गंभीर रूप से कमजोर बनाता है.

3. इंस्टेंट नूडल्स और जंक फूड (Junk and Fast Food)
बच्चे इंस्टेंट नूडल्स और जंक फूड का सेवन भी काफी पसंद करते हैं. लेकिन यह दिमाग के Brain Derived Neurotrophic Factor (BDNF) के उत्पादन को घटा सकता है. जिससे लंबे समय तक याद्दाश्त मजबूत नहीं रहती है, सीखने की क्षमता घटती है और नये न्यूरॉन का उत्पादन भी नहीं होता.

4. शराब
आप चाहे रोजाना शराब पीते हों या कभी-कभी, लेकिन इसका सेवन शरीर से विटामिन बी1 को निकाल देता है. जिसके कारण ब्रेन वॉल्यूम घटने लगती है और न्यूरोट्रांसमीटर डैमेज होने लगते हैं. इन्हीं कारणों से आपकी याद्दाश्त कमजोर होने लगती है.

ज्यादातर महिलाओं को पीरियड्स के दौरान तेज दर्द और तनाव की शिकायत रहती है। इस दर्द की वजह से किसी भी काम में मन नहीं लगता है और पूरी दिनचर्या बिगड़ जाती है। कुछ आसान उपायों से इस दर्द से राहत पाई जा सकती है।
व्यायाम करें, ज्यादातर लोगों को लगता है कि पीरियड्स होने पर सिर्फ लेटने से ही आराम मिल सकता है लेकिन ये सही नहीं है। जानकारों का कहना है कि पीरियड्स के दौरान हल्का-फुल्का व्यायाम जरूर करना चाहिए। इससे शरीर में एंडोर्फिन हार्मोन बनता है जो दर्द को प्राकृतिक तरीके से कम करने के साथ ही मूड को अच्छा बनाता है। इस समय योग करना सबसे अच्छा होता है।
हीट थेरेपी लें, हीट थेरेपी पीरियड्स के दर्द में बहुत प्रभावी होती है। दर्द महसूस होने पर आप पीठ के निचले हिस्से या पेट पर हीटिंग पैड या गर्म पानी की थैली रखें, इससे आपको बहुत आराम मिलेगा। माना जाता है कि हीट ट्रीटमेंट दर्दनिवारक दवाओं की तरह ही काम करता है।
खूब पानी पिएं- पीरियड्स के दौरान खूब सारा पानी पिएं। इस दौरान शरीर में पानी की कमी से पेट में और दर्द होता है। इसके अलावा आप ऐसे फल और सब्जियां भी खाएं जिसमें पर्याप्त पानी होता है। जैसे खीरा और तरबूज। इससे शरीर में पानी की कमी नहीं महसूस होगी।
मसाज थेरेपी, एसेंशियल ऑयल से पेट के चारों तरफ हल्के हाथ से मालिश करें। इससे पीरियड्स के दर्द में आराम मिलता है।

गर्भवती महिलाओं को आहार में ऐसी चीजें शामिल करनी चाहिए, जिससे बदलते मौसम में रोग प्रतिरोधी शक्ति बढ़ने में मदद मिले। इससे बच्चे का भी सही तरीके से विकास होता है। नहीं तो मौसमी बीमारियों से मां के साथ बच्चे की सेहत को भी नुकसान हो सकता है। कुछ ऐसे ही सुपर फूड्स हैं, जिनका सेवन करने से मां और बच्चे दोनों की सेहत अच्छी रहती है।
सूखे मेवे
सूखे मेवे यानी ड्राई फ्रूट्स में विटामिन, कैल्शियम, आयरन, एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं। ऐसे में इसका सेवन करने से बच्चे के शारीरिक व मानसिक विकास में मदद मिलती है। खासतौर पर रातभर भिगोएं बादाम को सुबह खाली पेट खाना ज्यादा फायदेमंद रहेगा। इसके अलावा इन्हें खीर, हलवा, दूध आदि में मिलाकर कर भी खाया जा सकता है।
विटामिन-सी
गर्भावस्था में थकान, कमजोरी से बचने व रोग प्रतिरोधी शक्ति को बढ़ाने के लिए लिए भी विटामिन-सी की आवश्यकता होती है। इसकी कमी को पूरा करने के लिए महिलाओं को नींबू, आंवला, संतरा, ब्रोकली आदि चीजों को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। आप आंवले का मुरब्बा खा सकती है।
पानी
अक्सर सर्दी के कारण पानी की प्यास कम लगी है। मगर शरीर में पानी की कमी बीमारियों को न्योता देने का काम करती है। खासतौर पर गर्भावस्था में मां और बच्चे की सेहत को बरकरार रखने के लिए पानी का सेवन करना बहुत जरूरी है। सर्दी से बचने के लिए आप चाहें तो गुनगुने पानी का सेवन कर सकती हैं। इसके अलावा ग्रीन-टी व हर्बल-टी का सेवन करना भी फायदेमंद रहेगा।
डेयरी प्रोडक्ट्स
इस दौरान महिलाओं को कैल्शियम की अधिक जरूरत होती है। ऐसे में उन्हें दूध, दही, पनीर आदि कैल्शियम से भरपूर डेयरी प्रोडक्ट्स का भारी मात्रा में सेवन करना चाहिए। इससे शरीर को सभी पोषक तत्व मिलते हैं। साथ ही मां और बच्चे की हड्डियां मजबूत होती हैं।
सब्जियां व दालें
हरी-पत्तेदार व दालों सब्जियों में भारी मात्रा में विटामिन, कैल्शियम, आयरन व एंटी-ऑक्सीडेंट्स गुण होते हैं। ऐसे में इनका सेवन करने से शरीर को सभी जरूरी तत्व मिलते हैं। इसलिए गर्भावस्था में इसका सेवन जरूर करें
एस्ट्रोजन यह हार्मोन पीरियड्स के साथ-साथ गर्भावस्था से भी जुड़ा हुआ है। इसकी कमी से महिलाएं को अनियमित पीरियड्स, इनफर्टिल‍िटी, थकावट, सिरदर्द जैसी समस्याएं झेलनी पड़ती है। वहीं, प्रेगनेंसी और मेनोपॉज के दौरान महिलाओं के शरीर में इसकी मात्रा कम हो जाती है, इसलिए शरीर में इसकी कमी पूरी करना और भी जरूरी है।

अगर डैंड्रफ हटाने के लिए बालों में तेल लगा रहे हैं, तो जरा रुक जाइए.
सिर की त्वचा रूखी हो जाने से डैंड्रफ की समस्या होती है. जिसके लिए बालों में तेल लगाना फायदेमंद माना जाता है. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि डैंड्रफ का इलाज करने के लिए बालों में सिर्फ तेल लगाना सही नहीं है. क्योंकि, इससे डैंड्रफ बढ़ सकता है और तेल के साथ मिलकर ग्रीस जैसा रूप ले सकता है. डैंड्रफ हटाने के लिए आपको बालों में तेल लगाने से पहले ये उपाय अपनाने चाहिए.

डैंड्रफ हटाने के लिए प्याज का रस
अगर लंबे समय से आप डैंड्रफ की समस्या से परेशान हैं, तो सिर में प्याज का रस लगाएं. बालों में तेल लगाने से पहले डैंड्रफ को कम करना जरूरी है. प्याज का रस डैंड्रफ दूर करने के साथ बालों को मजबूत भी बनाएगा. प्याज के रस को सिर की त्वचा पर लगाएं और 20 मिनट बाद माइल्ड शैंपू से सिर धो लें. हफ्ते में कम से कम दो बार डैंड्रफ हटाने का यह उपाय अपनाएं.

शहद से डैंड्रफ का इलाज
डैंड्रफ हटाने के लिए शहद का इस्तेमाल काफी आसान उपाय है. यह सिर की त्वचा को पोषण और नमी देने में मदद करता है. इसके लिए आप 1 चम्मच शहद के अंदर 1 चम्मच गुलाब जल मिलाएं और फिर सिर की त्वचा पर हल्के हाथों से मसाज करें. शहद और गुलाबजल का थोड़ा मिश्रण बालों पर भी लगाएं. 20 मिनट बाद शैंपू कर लें.

एलोवेरा जूस
डैंड्रफ हटाने के लिए एलोवेरा का जूस भी मददगार हो सकता है. इसके लिए आप ताजा एलोवेरा जूस लें और बालों की जड़ों व सिरों पर अच्छी तरह लगाएं. आप हल्के हाथों से मसाज भी कर सकते हैं. बालों में एलोवेरा जूस लगाने के 20 मिनट बाद बालों को माइल्ड शैंपू से धो लें. ऐसा हफ्ते में दो बार जरूर करें.

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