ईश्वर दुबे
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Bhilai
नई दिल्ली: आजकल की टेंशन (Tension) भरी लाइफ (Life) में अपने आपको फिट (Fit) रखना बेहद मुश्किल हो जाता है. जो हमें कई सारी बीमारियां दे देता है. ऐसे में कुछ छोटी चीजें करके आप आपने आपको फिट रखने की कोशिश कर सकते हैं. जिसके लिए एक सिंपल वॉक (Walk) ही काफी है.
वॉकिंग से जो फायदा शरीर को मिलता है वह शायद ही किसी और तरीके से मिलता है. अगर सुबह आप आधे घंटे का भी समय निकाल कर मॉर्निंग वॉक (Morning Walk) करें तो कई फायदे हैं. यह किसी भी आयु वर्ग के लोगों के लिए फायदेमंद होता है.
इससे ना सिर्फ शारीरिक फायदे होते हैं बल्कि मानसिक फायदे भी मिलते हैं. डॉ. मिताली जैन (मैक्स हॉस्पिटल) बताती हैं कि इसे नियमित रुप से करने से शरीर से कई रोगों का भी नाश हो जाता है. आइये जानते हैं इसके कुछ अहम फायदे (Benefits of Morning Walk).
कैलोरी बर्न (Calorie Burn)
वॉकिंग से आपकी कैलोरी तेजी से बर्न होती है. कैलोरी बर्न होने से तेजी से आपका वजन भी कम होता है. अगर आप वेट लॉस करना चाहते हैं तो आपको नियमित तौर पर वॉकिंग करना चाहिए.
एनर्जी बूस्ट (Energy Booster)
वॉक पर जाने से शरीर को उतनी एनर्जी मिलती है जितनी कि एक कप कॉफी पीने से भी नहीं मिलती है. वॉक करने से शरीर के सभी हिस्सों में ऑक्सीजन का बराबर प्रवाह होता है. यह शरीर में उन हॉर्मोन्स को बढ़ाता है जो एनर्जी लेवल को बढ़ाने में जिम्मेदार होते हैं.
जोड़ों के दर्द में राहत (Releif From Joint Pains)
अगर आपके जोड़ों में दर्द रहता है तो आपको वॉकिंग की आदत डालनी चाहिए. वॉकिंग करने से आपकी मांसपेशियां मजबूत होती हैं और इससे ज्वाइंट का दर्द सही होता है. हर सप्ताह अगर 5 से 6 मील वॉक कर लेते हैं तो इससे गठिया जैसी बीमारी का खतरा भी कम होता है.
दिल मजबूत बनाता है
सप्ताह में 5 दिन रोजाना कम से कम 30 मिनट तक वॉकिंग आपके लिए 19 फीसदी तक दिल की बीमारी के खतरे को कम करता है. अगर आप धीरे-धीरे वॉकिंग के समय को बढ़ाते हैं तो उसी के हिसाब से आपकी इस तरह की बीमारियों का खतरा भी कम होता जाता है.
डाइबिटीज को करता है कंट्रोल (Diabetes Controler)
अगर आप डाइबिटीज को कंट्रोल करना चाहते हैं, तो यह आपके लिए सबसे बेहतर तरीका है. हल्की धूप में सुबह की सैर आपको डाइबिटीज, हृदय रोग और दिमागी समस्याओं से दूर रखती है.
क्रिएटिव थिंकिंग (Creative Thinking)
वॉकिंग करने से मूड भी सही रहता है और क्रिएटिव थिंकिंग की क्षमता बढ़ती है. वॉकिंग के दौरान जितना हमारा शरीर एक्टिव रहता है उतना ही हमारा दिमाग भी सही दिशा में एक्टिव रहता है.
नई दिल्ली: रोज सुबह यदि आप एक हेल्दी और अच्छा नाश्ता (Healthy Breakfast) करते हैं तो आपको पूरा दिन एनर्जी से भरपूर गुजरता है. लेकिन कई बार ऐसा होता है आप किसी जल्दबाजी में सुबह के नाश्ते को नजरअंदाज कर देते हैं, जो आपकी सेहत (Health) के लिए बिल्कुल भी अच्छा नहीं होता.
ऐसे में एक्सपर्ट्स की मानें तो कच्चे पनीर (Eating Raw Paneer in breakfast) का सेवन बेस्ट होता है. डायटिशियन्स और हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार कच्चा पनीर ब्रेकफास्ट में खाने से आपके शरीर को कई प्रकार के हेल्दी फायदे (Healthy Benefits) होते हैं. पनीर में प्रोटीन (Protein) के अलावा, विटामिन डी (Vitamin-D), हेल्दी फैट्स (Healthy Fats) और कैल्शियम (Calcium) जैसे तत्व भी होते हैं. सुबह के नाश्ते के लिए यह एक अच्छा पर्याय है. इससे पेट भरता है और आपको भूख कम लगती है. जिससे, आपको अनहेल्दी इटिंग से बचना आसान होता है.
कच्चा पनीर खाने के फायदे
मजबूत हड्डियां
कच्चे पनीर में कैल्शियम और फॉस्फोरस होता है. इसलिए रोजाना इसका सेवन हड्डियों को मजबूत बनाता है. इसके साथ ही इसे खाने से जोड़ों के दर्द से भी आराम मिलता है.
मजबूत पाचन क्रिया
कच्चा पनीर खाने से आपका पाचन तंत्र दुरुस्त रहता है, जिससे आप पेट से जुड़ी समस्याओं से बचे रहते हैं.
मानसिक तनाव
दिनभर काम करने के बाद स्ट्रेस और थकावट होना तो आम है लेकिन 1 बाउल कच्चा पनीर खाने से आपकी सारी थकावट दूर हो जाती है. इसलिए जब भी आपको स्ट्रेस या थकावट महसूस हो, कच्चे पनीर का सेवन करें.
हेल्दी हार्ट
ब्रेकफास्ट में पनीर खाने का एक और फायदा है कि इससे आपकी हार्ट हेल्थ सुधरती है. पनीर में मिलनेवाले आयरन, कैल्शियम और मैग्नीशियम आदि मिनरल्स ना केवल शरीर का पोषण करते हैं. बल्कि, इसके हेल्दी फैट्स शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करते हैं और गुड कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ाता है. जिससे, दिल की बीमारियों का खतरा कम होता है.
मोटापे से छुटकारा
प्रोटीन और कैल्शियम के अलावा कच्चे पनीर में लीनोलाइक एसिड भी काफी मात्रा में पाया जाता है. इससे शरीर में फैट बर्निंग प्रॉसेस तेज होता है, जिससे आपको वजन कम करने में मदद मिलती है. इसलिए अपनी डाइट प्लान में कच्चा पनीर जरूर शामिल करें.
महिलाओं में आजकल थाइरॉइड के मामले तेजी से बढ़ हैं। जागरुकता के अभाव में यह बीमारी तेजी से फैल रही है। थाइरॉइड की वजह से महिलाओं में अस्थमा, कोलेस्ट्रॉल की समस्या, डिप्रेशन, डायबिटीज, इंसोमनिया और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ा है। डॉक्टरों की मानें तो कुछ खास चीजों को खाने से थाइरॉइड बढ़ जाता है। ऐसे में यह जान लेना जरूरी है कि थाइरॉइड के दौरान किन चीजें को खाने से परहेज करना चाहिए।
आयोडीन वाला खाना:
थायरॉइड ग्लैंड्स हमारे शरीर से आयोडीन लेकर थायरॉइड हार्मोन पैदा करते हैं, इसलिए हाइपोथायरॉइड है तो आयोडीन की अधिकता वाली खाने-पीने की चीजों से जीवनभर दूरी बनाए रखें. सी फूड और आयोडीन वाले नमक को पूरी तरह नजरअंदाज करें।
कैफीन:
कैफीन वैसे तो सीधे थायरॉइड नहीं बढ़ाता, लेकिन यह उन परेशानियों को बढ़ा देता है, जो थायरॉइड की वजह से पैदा होती हैं, जैसे बेचैनी और नींद में खलल।
रेड मीट:
रेड मीट में कोलेस्ट्रॉल और सेचुरेडेट फैट बहुत होता है. इससे वेट तेजी से बढ़ता है। थायरॉइड वालों का वजन तो वैसे ही बहुत तेजी से बढ़ता है। इसलिए इसे न खायें. इसके अलावा रेड मीट खाने से थायरॉइड वालों को बदन में जलन की शिकायत होने लगती है.
वनस्पति घी:
वनस्पति घी को हाइड्रोजन में से गुजार कर बनाया जाता है। यह अच्छे कोलेस्ट्रॉल को खत्म करते हैं और बुरे को बढ़ावा देते है। बढ़े थायरॉइड से जो परेशानियां पैदा होती हैं, ये उन्हें और बढ़ा देते हैं। ध्यान रहे इस घी का इस्तेमाल खाने-पीने की दुकानों में जमकर होता है। इसलिए बाहर का फ्राइड खाना न ही खाएं तो बेहतर है।
नई दिल्ली: एक स्वस्थ शरीर और दिमाग को पौष्टिक आहार की जरूरत होती है. ऐसा आहार जो कि प्रोटीन (Protein), विटामिन (Vitamin), फैट्स (Fat), कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrates), आयरन (Iron) जैसे अन्य पोषक तत्वों से भरपूर हो. यदि आहार में एक भी पोषक तत्व की कमी रह जाती है तो स्वास्थ्य संबंधित परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. विटामिन कई कारणों से बेहद महत्वपूर्ण हैं और ऐसे में इस कमी के संकेत देता है हमारा शरीर. आप इन संकेतों के जरिए अपनी डाइट में बदलाव कर नुकसान से बच सकते हैं और शरीर को स्वस्थ बना सकते हैं. आइये जानते हैं शरीर में विटामिन और मिनरल की कमी से मिलने वाले संकेतों को.
बालों और नाखून का टूटना
कई कारणों से बाल और नाखून टूटते हैं जिनमें एक कारण बायोटिन की कमी भी है. बायोटिन, जिसे विटामिन बी 7 के रूप में भी जाना जाता है, शरीर को भोजन को ऊर्जा में बदलने में मदद करता है. बायोटिन की कमी बाल टूटे और पतले होते हैं और नाखून भी टूटना शुरू हो जाते हैं. इस संकेत से आप विटामिन की कमी को साफ समझ सकते हैं. इसके अलावा बायोटिन की कमी के अन्य लक्षणों में थकान, मांसपेशियों में दर्द, ऐंठन और हाथों और पैरों में झुनझुनी शामिल हैं.
मुंह के छालें और होंठों के कोनों पर दरारें
यह भी विटामिन की कमी के संकेत हैं. मुंह के छाले और होंठों के किनारों पर दरारें विशेष रूप से विटामिन बी की कमी से आती हैं. इसके अलावा यह आयरन की कमी का संकेत भी है. हरी पत्तेदार सब्जियां, मांस, मछली, नट्स, साबुत अनाज आदि का सेवन करें.
मसूड़ों से खून बहना
यह विटामिन सी की कमी का संकेत होता है. विटामिन सी शरीर में घाव भरने, इम्युनिटी बढ़ाने में महत्वपूर्ण रोल निभाता है. यह एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करके सेल डैमेज को भी रोकता है. शरीर में विटामिन सी का निर्माण खुद से नहीं होता है, इसे यह आपकी डाइट के माध्यम से ही मिल सकता है. विटामिन सी की शरीर में कमी ना हो इसके लिए आपको डाइट में ताजे फल और सब्जियां जरूर लेनी चाहिए. कई लोग डाइट में फल और सब्जियां ना लेकर जंक फूड खाते हैं जिससे विटामिन सी की कमी हो जाती है.
आंखों की समस्या
आहार जिसमें पोषक तत्वों की कमी हो तो वह आंखों की समस्याओं को जन्म देता है. इनकी कमी से दृष्टि संबंधित परेशानियां होती है. जैसे विटामिन ए को अक्सर उस स्थिति से जोड़ा जाता है जिसे नाइट ब्लाइंडनेस (रतौंधी) कहते हैं. इसमें लोगों की कम रोशनी या अंधेरे में देखने की क्षमता घट जाती है.
बालों का झड़ना
यह बेहद आम संकेत है. 50 साल की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते 50% वयस्कों के ज्यादातर बाल झड़ जाते हैं. इस समस्या को डाइट में निम्न पोषक तत्वों को शामिल करके काफी हद तक काबू में किया जा सकता है.
हमारी रोज की खाने-पीने की आदतों के चलते ही हमारा स्वस्थ निर्भर करता है। सही व पौष्टिक चीजों का सेवन न करने से शरीर बीमारियों की चपेट में आने लगता है। ऐसे में शरीर को सभी उचित तत्व सही मात्रा में मिलने बहुत जरूरी होते है। ऐसे में ये जरूरी तत्व हमें अलग- अलग चीजों के सेवन से मिलते हैं। इसके साथ ही रोजाना ड्राई फ्रूट्स का सेवन करने से शरीर को भारी मात्रा में जरूरी तत्व मिलते हैं। ऐसे ही इनमें से अखरोट का सेवन करना स्वस्थ शरीर के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। अगर इसे दूध में मिलाकर पीया जाए शरीर को भी उचित तत्व मिलने के साथ बीमारियों से बचाव रहता है। तो चलिए जानते है इस ड्रिंक को पीने से मिलने वाले अन्य फायदों के बारे में...
अखरोट वाला दूध बनाने की रेसिपी
सामग्री
अखरोट- 2 (रातभर भिगे हुए)
दूध- 1 गिलास
विधि
1. सबसे पहले अखरोट को मिक्सी में पीस लें।
2. अब एक पैन में दूध और अखरोट का पेस्ट डालकर उबालें।
3. एक उबाल आने के बाद गैस बंद कर लें।
4. लीजिए तैयार है आपका अखरोट वाला दूध इसे ठंडा कर रात को सोने से पहले सेवन करें।
तो चलिए जानते इसका सेवन करने से मिलने वाले फायदों के बारे में...
डायबिटीज होने के जोखिम को करें कम
सूखे मेवों को खाने से शरीर को शक्ति मिलने के साथ डायबिटीज होने का खतरा कई गुणा कम हो जाता है। एक अध्ययन के अनुसार, अखरोट मिश्रित दूध का सेवन करने से ब्लड शुगर लेवल नियंत्रण में रहता है। ऐसे में डायबिटीज के मरीजों और डायबिटीज होने के खतरे से बचने के लिए अखरोट और दूध का एक साथ सेवन करना चाहिए।
स्मरण शक्ति बढ़ाएं
अखरोट और दूध में मौजूद पोषक तत्व दिमाग को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करते हैं। इसलिए दिमाग के बेहतर विकास के लिए इनका सेवन करने को कहा जाता है। ऐसे में अगर इस दोनों को एक साथ पीया जाए तो यह ड्रिंक दिमाग की कार्यप्रणाली को सही तरीके से चलाने और स्मरण शक्ति बढ़ाने का काम करती है।
कैंसर से करें बचाव
अखरोट में मौजूद पोषक व औषधीय गुण कैंसर के होने के खतरे को कई गुणा कम करते हैं। रोजाना दूध में अखरोट उबालकर पीने से शरीर में पनप रही कैंसर की कोशिकाएं खत्म होने में मदद मिलती है। ऐसे में कैंसर जैसे गंभीर रोग होने के खतरे से बचाव रहता है।
हृदय रोगों के खतरे कम करें
अखरोट में पाई जाने वाली कार्डियो प्रोटेक्टिव एक्टिविटी दिल के आसपास एक सुरक्षा कवच बनाने का काम करती है। ऐसे में इस प्रक्रिया से कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ने के खतरा कम होता है। इसके कारण दिल से जुड़ी समस्याओं के होने का खतरा कई गुणा कम हो जाता है। इसके लिए नियमित रूप से अखरोट को दूध में मिक्स कर पीना काफी लाभदायक होता है।
एंटी एजिंग के असर को करें कम
उम्र के बढ़ने का असर चेहरे पर साफ-साफ दिखाई देने लगता है। ऐसे में बहुत से लोग अलग-अलग स्किन केयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं। मगर इन सब की जगह दूध में अखरोट मिलाकर कर पीने से सेहत के साथ खूबसूरती निखारने में भी फायदा मिलता है। अखरोट में मौजूद एंटी एजिंग गुण होने से इसे दूध में मिलाकर पीने से त्वचा की डेड स्किन सेल्स रिपेयर होने में मदद मिलती है। साथ ही ढीली पड़ी स्किन में कसाव आने से त्वचा कई गुणा जवां नजर आती है।
थायराइड रोग आज तेजी से अपने पैर पसार रहा है। पुरूषों के मुकाबले इसकी ज्यादा शिकार महिलाएं हैं। गलत खानपान और बदलते लाइफस्टाइल के कारण यह समस्या आज बहुत आम हो गई है। थायराइड का संबंध हार्मोंनस के बिगड़ते संतुलन से हैं। जब यह आऊट ऑफ कंट्रोल हो जाते हैं तो महिलाओं के शरीर में दिक्कतें दिखना शुरु हो जाती है।
थायराइड क्या है?
थायराइड एक एंडोक्राइन ग्लैंड जो गले में बटरफ्लाई के आकार का होता है। इससे थायराइड हार्मोन निकलता है जो शरीर में मेटाबॉलिज्म को सही लेवल में रखता हैं लेकिन जब यह हार्मोंन असंतुलित हो जाता है तो यह समस्या शुरु होने लगती है।
यह दो तरह का होता है...
थायराइड दो तरह का होता है हाइपो थायराइड और हाइपर थायराइड। महिलाएं ज्यादातर हाइपो थायराइड की शिकार होती हैं जिसमें वजन तेजी से बढ़ने लगता है। वहीं इसके कारण अनियमित पीरियड्स, प्रेगनेंसी में दिक्कत, अनचाहे बाल, बढ़ता हुआ या कम होता वजन, सुस्ती थकान, कमजोर इम्यूनिटी, चेहरे व आंखों में सूजन, कब्ज आदि कि समस्या होने लगती है।
किन महिलाओं को होती है अधिक समस्या
. मेनोपॉज और प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं के शरीर में बहुत से हार्मोनल बदलाव होते हैं इसलिए इस समय थायराइज की आशंका 9 गुना बढ़ जाती है।
. वहीं बढ़ती उम्र, कार्बोहाइड्रेट्स न लेने, ज्यादा नमक या सी-फूड खाने वाली महिलाओं को इसका खतरा अधिक होता है।
. शरीर में आयोडीन व विटामिन बी12 की कमी भी इस बीमारी का कारण बनता है। कम फिजिकल एक्टिविटी और गलत डाइट या ज्यादा तनाव व टेंशन लेने से भी आप इसकी चपेट में आ सकती है।
दवा के साथ डाइट भी है जरूरी
अगर थायराइड की परेशानी ज्यादा है तो डॉक्टर इसके लिए दवा लेने की सलाह लेते हैं। वहीं सही डाइट व डेली रूटीन से भी इस पर काबू पाया जा सकता है।
चलिए आपको बताते हैं कि थायराइड से ग्रस्त महिलाएं अपनी डाइट में क्या ले और क्या नहीं।
क्या खाएं?
डाइट में नट्स, सेब, सिट्स फ्रूटस, दाल, कद्दू के बीज, दही, संतरे का रस, आयोडीन युक्त चीजें, नारियल तेल, अदरक, हरी सब्जियां, साबुत अनाज, ब्राउन ब्रैड, ऑलिव ऑयल, लेमन, हर्बल और ग्रीन टी, अखरोट, जामुन, स्ट्रॉबेरी, गाजर, हरी मिर्च, बादाम, अलसी के बीज, शहद शामिल करें।
क्या न खाएं?
सोया प्रोडक्ट, रेड मीट, पैकेज्ड फूड, बेक्ररी आइट्म, जंकफूड, नाशपाती, मूंगफली, बाजरा, फूलगोभी, शलगम, पास्ता, मैगी, व्हाइट ब्रेड, सॉफ्ट ड्रिंक, अल्कोहल, कैफीन, ज्यादा मीठी चीजों से परहेज करें।
शराब और सिगरेट से भी बनाएं दूरी
शराब और सिगरेट का सेवन शरीर के लिए कितना हानिकारक है यह तो सभी जानते हैं। इससे थायराइड के साथ अन्य बीमारियों का खतरा भी रहता है इसलिए इससे दूरी बनाना ही आपकी सेहत के लिए फायदेमंद होगा।
अब जानते हैं कुछ घरेलू नुस्खे
. रोजाना हल्दी वाला दूध पीने से भी थायराइड कंट्रोल में रहता है। आप चाहें तो हल्दी को भूनकर भी खा सकती हैं।
. प्याज को दो हिस्सों में काटकर सोने से पहले थायराइड ग्लैंड के आस-पास क्लॉक वाइज मसाज करें। कुछ दिन लगातार ऐसे करने से आपको इसके नतीजे दिखने शुरू हो जाएगें।
. हरा धनिया को पीसकर चटनी बना लें। इसे 1 गिलास पानी में घोलकर रोजाना पीने से थायराइड कंट्रोल में रहेगा।
. 50 ग्राम त्रिकुटा चूर्ण (Trikatu) और 100 ग्राम बहेडा (Baheda) मिलाकर 1 ग्राम शहद के साथ लें। इससे थायराइड की समस्या जड़ से खत्म हो जाएगी।
. इसके अलावा खाली पेट शीशम, नीम, तुलसी, एलोवेरा और गिलोय के 5-7 पत्ते चबाने से भी थायराइड कंट्रोल में रहता है।
थायराइड के लिए योग
डाइट, घरेलू नुस्खे के अलावा योग से भी इसे कंट्रोल में रखा जा सकता है। इसके लिए रोजाना कम से कम 15-20 मिनट कपालभाति, उज्जायी प्राणायाम, सर्वांगासन, मेडीटेशन, शवासन या हलासन में से कोई एक आसन करें।
साथ ही तनाव मुक्त रहें और हैल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं। याद रखें कि हेल्दी लाइफस्टाइल को फॉलो करके ही आप थायराइड को कंट्रोल कर सकती हैं।
राजनीति से जुड़े लोग प्रायः अपनी विलास-प्रियता के कारण आर्थिक लाभ-लोभ से ग्रस्त होकर भ्रष्ट हो जाते हैं। जो आर्थिक भ्रष्टाचार के पाप-पंक में नहीं गिरते, वे यश-लोलुपता के मकड़जाल में जकड़ कर अपने उद्देश्य से भटक जाते हैं।
‘महाभारत’ के ‘सभापर्व’ में राजनीतिक व्यक्ति (राजा) में छः गुण (व्याख्यान शक्ति, प्रगल्भता, तर्ककुशलता, नीतिगत निपुणता, अतीत की स्मृति और भविष्य के प्रति दृष्टि अर्थात दूरदर्शिता) आवश्यक माने गए हैं। जो राजा इन छः गुणों से युक्त होता है, उसकी राजनीति ही सुफलवती बनती है। महाभारतकालीन राजनीति में राजनीति की उपर्युक्त समस्त अर्हताएं श्रीकृष्ण के अतिरिक्त अन्य किसी महावीर अथवा महापुरुष में नहीं हैं। पितामह भीष्म में दृढ़ता है; वीरता है; अद्भुत प्रतिज्ञा-प्रियता है किन्तु नीतिगत निपुणता का अभाव है। अपनी प्रतिज्ञा के प्रति अतिरिक्त आसक्ति उन्हें असफल राजपुरुष बनाकर शरशय्या पर लिटा देती है। महात्मा विदुर में प्रगल्भता (अवसर के अनुसार कार्य करने की सामर्थ्य) का अभाव है। वे पूर्व निरूपित नीतियों के आलोक में निर्णय देने के अभ्यासी हैं। सत्यवादी युधिष्ठिर में व्याख्यान शक्ति, प्रगल्भता, तार्किकता, नीति निपुणता, और दूरदर्शिता का नितांत अभाव है। गुरु द्रोण, कृपाचार्य आदि अन्य राजपुरुष भी राजनीति की उपर्युक्त छः अर्हताओं की कसौटी पर खरे नहीं उतरते। केवल श्रीकृष्ण ही उस युग के एकमात्र ऐसे राजनीतिज्ञ हैं जिनमें राजोचित छः गुणों की संव्याप्ति उनके कर्मगत धरातल पर सर्वत्र दिखाई देती है। इसीलिए वे जगद्गुरु हैं। अधर्म के नाश और धर्म की स्थापना में सफल हैं।
‘श्रीमद्भगवद गीता’ श्री कृष्ण की व्याख्यान-शक्ति का उत्कृष्ट उदाहरण है। कर्तव्य-पालन से विमुख मोहग्रस्त पुरुषार्थ को पुनः कर्म-पथ पर नियोजित करना कोई हंसी-खेल नहीं। यह श्रीकृष्ण की व्याख्यान-कला ही है, जो किंकर्तव्यविमूढ़ अर्जुन को पुनः कर्तव्य का बोध देकर उन्हें समरभूमि में उतारती है। उनकी इसी व्याख्यान-शक्ति में उनकी तार्किकता के भी दर्शन होते हैं।
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नीति-निपुणता श्रीकृष्ण के व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण पक्ष है। वे किसी पूर्वनिश्चित बंधी-बंधाई नीति का अनुसरण नहीं करते बल्कि लोककल्याण की दृष्टि से अपना नीति-पथ स्वयं निर्मित करते हैं। उनके इस क्रांतिकारी रूप का दर्शन उनके प्रारंभिक जीवन में ही होने लगता है। गोकुल के माखन की मथुरा में आपूर्ति रोकना, इंद्र की पारंपरिक पूजा के स्थान पर प्राकृतिक वरदान रूप गोवर्धन पर्वत की पूजा कराना आदि कार्य उनकी नीति-निपुणता के परिचायक हैं। जब राजा विराट की सभा में हुए निर्णय के अनुसार वे पांडवों के राजदूत बनकर हस्तिनापुर आते हैं तब दुर्योधन उन्हें राज्य अतिथि बनाकर अपनी ओर कर लेना चाहता है किंतु वे उसका आतिथ्य अस्वीकार कर विदुर की कुटिया में साधारण अन्न ग्रहण करते हैं। राजनीतिक जीवन से जुड़े व्यक्ति की यह नीति-निपुणता उसकी स्वतंत्रता और स्वायत्तता के संरक्षण का उत्तम उपकरण बनती है।
भूतकाल की स्मृति और भविष्य पर दृष्टि रखने में कृष्ण अद्वितीय हैं। अत्याचारी सत्ता अपने हितों के संरक्षण और स्थायित्व के लिए किस सीमा तक पतित हो सकती है; निर्दोष प्रतिपक्ष को कहाँ तक प्रताड़ित कर सकती है- इसका व्यावहारिक ज्ञान कंस के अत्याचारों की अतीतकालीन स्मृति के रूप में कृष्ण के मन पटल पर भलीभांति अंकित है। इसीलिए पांडवों के साथ किए गए कौरवों के अत्याचारों और अन्यायों पर उन्हें आश्चर्य नहीं होता। अतीत की यह कड़वी तीखी स्मृतियां उन्हें यह भी सिखाती हैं कि अत्याचारी सत्ता किसी भी सत्याग्रह को नहीं मानती। उसका अहंकार सहनशीलता से नहीं पिघलता; वह विनम्रता को कायरता समझती है और उसका उपहास करती है। इसलिए श्रीकृष्ण आततायी के हृदय-परिवर्तन की किसी भी कोमल-कल्पना से भ्रमित नहीं होते और उसका समूल नाश करने के लिए सतत सन्नद्ध मिलते हैं। वे जानते हैं कि अतीत के जीर्णशीर्ण खंडेरों पर भविष्य के सौधशिखरों की नींव नहीं रखी जा सकती। उन्हें ढहाये बिना, भूमि को समतल किए बिना नये निर्माण का स्वप्न साकार नहीं किया जा सकता। पुराने भ्रान्त-सिद्धांतों के संकेत नए सृजन-पथ के निर्देश नहीं बन सकते, अतः उनका परिहार-निवारण अपरिहार्य है। भविष्य की यही भ्रमरहित दूरदृष्टि उनसे समस्त कौरव पक्ष सहित भीष्म-द्रोण जैसे सांस्कृतिक स्तम्भों का भी ध्वंस कराती है। नए निर्माण के पथ में आने वाले प्रत्येक अवरोध को, चाहे वह कितना भी प्रतिष्ठित क्यों न हो; हटाना ही होगा। यही श्रीकृष्ण की राजनीति का मूलमंत्र है। कंस से लेकर जरासन्ध और दुर्योधन से लेकर कर्ण-भीष्म तक समस्त राजपुरुषों को धराशायी करने-कराने में कृष्ण कहीं भी ममता और मोह से ग्रस्त नहीं हुए हैं। इसीलिए सफल हैं।
प्रगल्भता अर्थात प्रत्युत्पन्नमतित्व श्रीकृष्ण की सर्वाधिक प्रखर शक्ति है। गोकुल में कंस द्वारा प्रेषित संहारक आसुरी शक्तियों के विनाश में उनकी प्रगल्भता का महान योगदान है। महाभारत का युद्ध वे बिना शस्त्र उठाए प्रगल्भता के बल पर ही जिता देते हैं। इंद्र द्वारा कर्ण को प्रदत्त महासंहारक एकघ्नी का घटोत्कच पर प्रहार कराना, धरती में धंसेरथ-चक्र को निकालने में व्यस्त कर्ण का बध करने के लिए अर्जुन को प्रेरित करना; गदायुद्धरत दुर्योधन की जंघा पर प्रहार हेतु भीम को उनकी प्रतिज्ञा संकेत द्वारा याद दिलाना आदि अनेक महत्वपूर्ण कार्य श्रीकृष्ण की प्रगल्भता से ही संभव हुए हैं। इसीलिए श्रीकृष्ण राजनीति के आदर्श प्रतिमान हैं
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महाभारत में वर्णित राजनेता के उपर्युक्त गुणों के अतिरिक्त तीन अन्य महत्वपूर्ण गुण- निश्चिन्तता, निर्भीकता और निष्कामता भी श्रीकृष्ण के व्यक्तित्व की अन्यतम उपलब्धियाँ हैं। श्रीकृष्ण की निश्चिन्तता का आधार उनका आत्मबल जनित आत्मविश्वास है। उन्हें अपनी बलिष्ठ देह और समस्या-समाधान विधायिनी बुद्धि पर विश्वास है। वे अकारण चिन्ता नहीं करते। महाभारत के महाविनाश का उन्हें पूर्ण अनुमान है किन्तु वे मानवता विरोधी मूल्यों के संपोषक घृतराष्ट्र-पुत्रों और उनके समर्थकों के संहार की चिन्ता नहीं करते और अर्जुन को भी उस व्यर्थ चिन्ताजनित मोह से मुक्त कर व्यापक लोकहित का पथ-प्रशस्त करते हैं।
निर्भीकता कृष्ण-चरित्र की अप्रतिम विशेषता है। गोकुल की माटी में; ग्रामजीवन और गोप-संस्कृति की छाया में पले-बढ़े कृष्ण एक ओर प्राकृतिक आपदाओं से जूझते हैं तो दूसरी ओर कंस-प्रेरित दानवों से निपटते हुए उत्तरोत्तर निर्भय होते जाते हैं। उन्हें न विषैले कालिया नाग से भय लगता है और न ही महाबलशाली कंस उन्हें भयभीत कर पाता है। उसके छल भरे निमंत्रण पर वे निर्भय होकर, निशस्त्र रहकर मथुरा प्रस्थान कर जाते हैं और उसके सहायकों सहित उसका वध कर देते हैं। उनकी यह निर्भयता कौरव राज्यसभा में उस समय भी प्रकट होती है जब दूत रूप में पांडवों का शांति-संदेश लाने पर दुर्योधन उन्हें बंदी बनाने का आदेश देता है। कंस का बध करते समय वे उसके श्वसुर और सहायक महाबली जरासन्ध के आक्रमण की चिन्ता नहीं करते और निर्भय होकर निश्चिन्त भाव से मथुरा को कंस के आतंक से मुक्ति दिलाते हैं। भीरूता राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा अभिशाप है। भीरु राजा अथवा भीरू नेता अपनी प्रजा अथवा जनता की रक्षा कभी नहीं कर सकता। अतः वीरता और निर्भीकता राजनीतिक-जीवन के मूल्यवान आभरण हैं। श्रीकृष्ण का राजनीतिज्ञ रूप इन आभरणों से सुसज्जित होकर अपने युग की विकृत-राजनीति को पग-पग पर परिष्कृत करता है।
राजनीति से जुड़े लोग प्रायः अपनी विलास-प्रियता के कारण आर्थिक लाभ-लोभ से ग्रस्त होकर भ्रष्ट हो जाते हैं। जो आर्थिक भ्रष्टाचार के पाप-पंक में नहीं गिरते, वे यश-लोलुपता के मकड़जाल में जकड़ कर अपने उद्देश्य से भटक जाते हैं। दुर्बलताएं राजाओं, नबाबों और नेताओं सहित अधिकांश शासक वर्ग में सहज सुलभ हैं। इनके कारण सार्वजनिक जीवन की सुख-शांति बाधित होती है। श्रीकृष्ण निष्कामता के सिद्धांत से इन विष-व्याधियों का शमन करते हैं। उन्हें न धन की अपेक्षा है और न यश की चाह। कंस को मारकर वे स्वयं को मथुरा-नरेश घोषित नहीं करते। कंस पर विजय प्राप्त करने के परिणाम स्वरूप मथुरा पर उनका अधिकार स्वयं सिद्ध हो जाता है किंतु वे उस अधिकार की डोर से नहीं बंधते। मथुरा का राजमुकुट उसके पूर्व-अधिपति महाराज उग्रसेन के मस्तक पर रखकर स्वयं पूर्ववत नंदनंदन बने रहते हैं। राज्य-सत्ता के लोभ का संवरण कर पाने में सफल ऐसी निस्पृह निष्कामता अन्यत्र दुर्लभ है।
श्रीकृष्ण के मन में कहीं यश के प्रति मोह के दर्शन नहीं होते। वे अप्रतिम वीर हैं किंतु वीरता का दंभ नहीं भरते। मथुरा पर होने वाले जरासंघ के आक्रमणों का निवारण करने के लिए; निर्दोष मथुरावासियों की सुख-शांति सुनिश्चित करने के लिए वे स्वेच्छा से मथुरा त्याग देते हैं। द्वारिका चले जाते हैं। उन्हें ‘रणछोड’ कहलाना पसंद है किंतु अपने वीरत्व की प्रतिष्ठा के लिए अकारण रक्तपात करना स्वीकार नहीं। पद और यश के प्रति ऐसी निष्कामता अन्यत्र विरल है। श्रीकृष्ण के राजनीतिक जीवन की यह निष्कामता यदि आधुनिक लोकतंत्र के नेताओं को जरा भी आकर्षित और प्रभावित कर सके तो सार्वजनिक जीवन की बहुत सी जटिल समस्याओं के स्थाई समाधान संभव हैं।
राजनीति में अपेक्षित उपर्युक्त अर्हताओं की सैद्धांतिक-स्वीकृति और उस युग के सफलतम महापुरुष श्रीकृष्ण के व्यावहारिक कार्यों की अनुकरणीय प्रस्तुति आज भी तथैव आचरणीय है। महाभारत केवल द्वापर युग की एक महत्वपूर्ण घटना मात्र नहीं है, यह शोषक और शोषित का सनातन संघर्ष है, अपने स्थायित्व के लिए प्रतिपक्षी को आतंकित-आहत करने का सत्ता द्वारा किया जाने वाला शाश्वत अत्याचार है और प्रतिपक्ष का सतत विद्रोह है। इसी प्रकार श्रीकृष्ण भी सार्वजनिक जीवन में असत्य के निवारण और सत्य के संस्थापन का चिर-प्रतीक हैं। हमारे आज के राजनेताओं को भी श्रीकृष्ण से प्रेरणा लेकर कूटप्रयत्नों द्वारा संस्थापित रूढ़ियों और कुनीतियों का परिहार कर स्वस्थ-सुखी समाज की संकल्पना का नया द्वार अनावृत करना चाहिए। ‘मैं’ और ‘मेरे’ की संकीर्ण परिधि से निकल कर ही राजनीतिक-जीवन में सृजन-पथ की सफल यात्रा संभव है।
-डॉ. कृष्णगोपाल मिश्र
विभागाध्यक्ष-हिन्दी
शासकीय नर्मदा स्नातकोत्तर महाविद्यालय
होशंगाबाद म.प्र.
हिचकी आना भी कोरोना संक्रमण होने का एक लक्षण हो सकता है। अमेरिका में एक ऐसा ही मामला सामने आया है। अमेरिकी जर्नल ऑफ इमरजेंसी मेडिसिन में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, 62 साल के एक शख्स को चार दिन तक हिचकी आईं। जब उसकी जांच हुई तो कोरोना की पुष्टि हुई। शिकागो के इस शख्स में जांच से पहले कोरोना का कोई बड़ा लक्षण नहीं दिखाई दिया था। बुखार के बाद उसे चेकअप के लिए हॉस्पिटल लाया गया था। अमेरिकी विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार 48 घंटे तक हिचकी का आना बंद न हो तो डॉक्टर से संपर्क करें।
बुरी हालत में थे फेफड़े
जर्नल के मुताबिक, हिचकी के अलावा मरीज को सिर्फ बुखार था। वह शख्स पहले से किसी बीमारी से नहीं जूझ रहा था। लेकिन, सबसे चौंकाने वाली बात उसकी रिपोर्ट में सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक, उसके फेफड़े बुरी हालत में थे। उसमें काफी सूजन थी। एक फेफड़े से खून आने की बात भी सामने आई जबकि उसे फेफड़े से जुड़ी कोई बीमारी नहीं थी।
हिचकी भी एक लक्षण हो सकता है
विशेषज्ञों के मुताबिक, अब तक कोविड-19 के कई नए लक्षण सामने आ चुके हैं। इसमें सबसे कॉमन है बुखार, गले में सूजन, सांस लेने में दिक्कत, गंध या स्वाद का अहसास न होना। लेकिन, लगातार हिचकियां आना भी कोरोना वायरस का एक लक्षण हो सकता है।
फेफड़े में सूजन हिचकियों का कारण बनी
शिकागो के कुक कंट्री हेल्थ के डॉक्टर का कहना है, मरीज के फेफड़ों की सूजन ही उसकी हिचकियों की वजह बनी। उसे इमरजेंसी में भर्ती किया गया। ट्रीटमेंट के दौरान मरीज को एजीथ्रोमाइसिन और हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दी गई थी। 3 दिन तक भर्ती रहने के बाद उसे हॉस्पिटल से डिस्चार्ज किया गया।
कब अलर्ट हो जाएं, एक्सपर्ट ने दी सलाह
अमेरिकी सरकार के शीर्ष मेडिकल संस्थान सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के मुताबिक, बहुत ज्यादा ठंड लगना, ठंड के साथ कंपकंपी छूटना, मांसपेशियों में दर्द बना रहना, लगातार सिरदर्द रहना, गले में चुभन के साथ होने वाला दर्द, खुशबू, गंध या स्वाद न महसूस कोरोना का ही लक्षण है। इससे पहले सीडीसी ने बुखार, खांसी और सांस लेने में तकलीफ को कोरोना संक्रमण का लक्षण बताया था।
डायबिटीज ऐसा रोग है जिसमें व्यक्ति को काफी परहेज से रहना होता है। डायबिटीज को धीमी मौत भी कहा जाता है। डायबिटीज रोगियों को आंखों में दिक्कत, किडनी और लीवर की बीमारी और पैरों में दिक्कत होना आम है। इसके अलावा डायबिटीज के मरीजों को ब्रेन स्ट्रोक और नर्वस सिस्टम से जुड़ी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में इस बीमारी से जूझ रहे लोगों को अपनी डाइट में अदरक शामिल करन चाहिए। अदरक खाने से डायबिटीज को आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है। आइए जानते हैं कब और कैसे अदरक को डाइट में शामिल करना चाहिए-
डायबिटीज के मरीजों के लिए अदरक: डायबिटीज में अदरक का इस्तेमाल करने पर असरदार ढंग से शुगर कंट्रोल (ग्लाइसेमिक) होता है और इंसुलिन की संवेदनशीलता में भी सुधार होता है। साथ ही ये डायबिटीज से जुड़ी परेशानियों और जटिलताओं से बचाव करती है। इतना ही डायबिटीज के मरीज यदि अदरक खाते हैं तो मोतियाबिंद से भी बचाव हो सकता है।
diabetes, flax seeds for diabetes, blood sugar level, can diabetes be cured, diabetes early symptoms, undiagnosed symptomsDiabetes मरीजों के लिए रामबाण से कम नहीं है अलसी, जानिये इसके फायदे और डाइट में शामिल करने का तरीका uric acid tea, uric acid green tea, uric acid herbal tea, uric acid and teaUric Acid: ग्रीन टी या मिल्क टी, जानिए यूरिक एसिड के मरीजों के लिए कौन सी चाय है फायदेमंद
कितनी मात्रा में खाएं अदरक: एक शोध के मुताबिक, डायबिटीज के मरीजों को एक दिन में 4 ग्राम यानी एक चम्मच से ज़्यादा अदरक नहीं खाना चाहिए। लगातार 8 हफ़्ते तक दिन में तीन बार 1 ग्राम अदरक खाने पर टाइप 2 डायबिटीज़ से ग्रस्त लोगों में फ़ास्टिंग ब्लड शुगर लेवल को प्रभावी ढंग से कम होते पाया गया। डायबिटीज़ से ग्रस्त लोगों को इसे कैप्सूल की तरह खाने की भी सलाह दी जाती है।
अदरक को कैसे करें डाइट में शामिल: अदरक के टुकड़ों में काटकर तलने वाले खाने में इस्तेमाल कर सकते हैं। ब्रोकली, मशरूम, स्प्राउट्स यहां तक कि चिकन में भी अदरक को मिलाकर खाया जा सकता है। अदरक की शिकंजी फ़ायदेमंद होने के साथ ताज़गी से भी भर देती है। मसालेदार ज़ायका देने के लिए अदरक का इस्तेमाल मसाले में मिलाकर कर सकते हैं। अदरक को घिसकर संतरे के जूस में भी मिलाकर पिया जा सकता है। पारंपरिक तौर पर अदरक को औषधीय ख़ूबियों के लिए और खाने में इस्तेमाल करने के लिए जाना जाता है। अगर आप डायबिटीज़ के चलते अपने खानपान को दुरुस्त करने की कोशिश कर रहे हैं, तो आपके लिए बेहतर होगा कि आप अदरक को दरकिनार ना करें।
भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाली इलायची का इस्तेमाल खाने में स्वाद बढ़ाने के लिए भी किया जाता है। मगर क्या आप जानते हैं कि छोटी-सी दिखने वाली यह इलायची आपकी कई हेल्थ एंड ब्यूटी प्रॉब्लम्स की हल भी है। जी हां, इलायची का सेवन पथरी, गले की समस्याएं, कफ, गैस, बवासीर, टी.बी, मुहांसे और झड़ते बालों जैसी कई परेशानियों को चुटकियों में दूर कर देती है। चलिए आपको बताते हैं इलायची खाने के कुछ जबरदस्त फायदे।
इलायची के फायदे
पेट हो जाएगा अंदर
अगर आपका बढ़े हुए पेट को अंदर करना चाहते है तो रात को 2 इलायची खाकर गर्म पानी पी लीजिए। इसमें पोटेशियम, मैग्नीशियम, बिटामिन B1, B6 और विटामिन C होते हैं, जो एक्स्ट्रा कैलोरी बर्न करने में मदद करते हैं।
पथरी को करें खत्म
सोने से पहले एक इलायची को गर्म पानी के साथ खाने से पथरी जल्दी टूटकर यूरिन के रास्ते बाहर आ जाती है। साथ ही इससे सीने में जलन और और जोड़ों के दर्द से भी राहत मिलती है।
अनिद्रा की समस्या
कुछ लोगों को ढेर सारा काम करने के बाद भी रात को नींद नहीं आती। सोने के लिए लोग दवाइयों को सहार लेते हैं जिसका शरीर पर गलत प्रभाव पड़ता है। नेचुरल तरीके से नींद लेने के लिए रोजाना रात को सोने से पहले इलायची को गर्म पानी के साथ खाएं। इससे नींद आएगी और खर्राटे की समस्या भी दूर हो जाएगी।
तनाव से राहत
रोजाना इसका काढ़ा पीने से मानसिक तनाव को दूर होता है। इसका काढ़ा बनाने के लिए इलायची पाउडर को पानी में उबालें। अब काढ़े में थोड़ा सा शहद मिलाकर पीएं। कुछ दिन पीने से आपको फर्क दिखाई देने लगेगा।
पेट से जुड़ी परेशानियां
कुछ लोगों को हमेशा पेट से संबंधित प्रॉब्लम रहती है। पेट ठीक न रहने के कारण बाल झड़ने लगते है। इन दोनों समस्याओं से बचने के लिए सुबह खाली पेट 1 इलायची गुनगुने पानी के साथ खाएं। कुछ दिनों तक लगातार खाने से फर्क दिखाई देने लगेगा।
गैस और एसिडिटी
गैस, एसिडिटी, कब्ज, पेट में ऐंठन की समस्या को इलायची से दूर किया जा सकता है। इसके साथ ही हिचकी से भी राहत मिलती है। इस 1 चीज को चबाने से होगा वजन कम
बेहतर ब्लड सर्कुलेशन
हरी इलायची फेफड़ों में रक्तसंचार गति को ठीक रखता है। इसके साथ ही यह अस्थमा, जुकाम, खांसी जैसी समस्याओं से भी राहत पहुंती है। यह बलगम और कफ को बाहर निकालकर छाती की जकड़न को कम करने में मदद करती है।
प्रेगनेंसी में फायदे
गर्भवती महिलाओं को अक्सर चक्कर आने की समस्या रहती है। इस से राहत पाने के लिए इलायची के काढ़े में गुड़ मिलाकर सुबह और शाम पीने से चक्कर आने की समस्या दूर हो जाएगी।
मुंह से बदबू आना
मुंह से आने वाली बदबू को इलायची खाने से दूर किया जा सकता है। इसको खाने से गले में होने वाली खराश दूर होती है और आवाज में सुधार आता है।
मुंहासे और दाग-धब्बे
एक चम्मच इलायची पाउडर के साथ शहद मिक्स करें और मुंहासों के दाग पर लगाएं। ऐसा करने से इलायची की ऐंटी-बैक्टीरियल प्रॉपर्टी के कारण स्किन क्लियर होती है। आप इस पेस्ट को मुंहासों पर लगाकर रातभर सो जाएं और सुबह ठंडे पानी से चेहरा साफ कर लें।
फटे होंठ होंगे ठीक
बदलते मौसम में होंठ फटने की समस्या आम हैं ऐसे में इलायची को पीसकर मक्खन के साथ मिलाकर दिन में दो बार लगाएं। सात दिनों में ही आपको फर्क दिखाई देने लगेगा।
बालों का झाड़ना करे कम
प्रदूषण का अटैक, तनाव और खराब डाइट बालों को कमजोर कर देती है, जिसके कारण वह झड़ने लगते हैं। मगर यह उपाय बालों को झड़ने से रोकने में काफी हद तक मददगार साबित हो सकता है। साथ ही इससे रूसी की समस्या भी दूर हो जाएगी।
मॉस्को. रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन (Russian President Vladimir Putin) ने मंगलवार को ऐलान किया कि देश में तैयार की गई कोरोना वायरस (world’s first coronavirus vaccine) की वैक्सीन को हेल्थ मिनिस्ट्री की मंजूरी मिल गयी है. पुतिन ने बताया कि इस वैक्सीन (Covid-19 Vaccine) का टीका उनकी बेटी को पहले ही लगाया जा चुका है. हालांकि उन्होंने ये स्पष्ट नहीं किया कि उन्होंने खुद वैक्सीन ली है या नहीं. पुतिन ने कहा, 'मेरी बेटी ने भी इस वैक्सीन का टीका लिया है, शुरू में उसे हल्का बुखार था लेकिन अब वह बिल्कुल ठीक है.' उन्होंने बता कि मेरी बेटी ठीक है और बढ़िया महसूस कर रही है. उसने भी इस पूरे परीक्षण में हिसा लिया था. इस ऐलान के बाद रूस पहला देश बन गया है जिसने वैक्सीन बना लेने का काम पूरा करने का दावा किया है. रूस ने प्लान किया है कि यह वैक्सीन सबसे पहले हेल्थ वर्कर्स को दी जाएगी, उसके बाद बुजुर्गों को. मॉस्को ने कई देशों को भी वैक्सीन सप्लाई करने की बात कही है. रूस का कहना है कि वह अपने कोरोना टीके का बड़े पैमाने पर उत्पादन सितंबर से शुरू कर सकता है.RT के मुताबिक इस वैक्सीन को मॉस्को के गामलेया इंस्टीट्यूट ने तैयार किया है. हालांकि वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल सिर्फ 2 महीने में निपटा देने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी कई शक जाहिर किये हैं. रूस के हेल्थ मिनिस्टर पहले ही अक्टूबर से मास वैक्सीनेशन शुरू करने का ऐलान कर चुके हैं.बता दें कि अभी तक किसी देश को वैक्सीन बनाने में सफलता नहीं मिली है.
बनाने वाले वैज्ञानिकों ने खुद भी लिया है टीका
मॉस्को के गामलेया रिसर्च इंस्टिट्यूट ने एडेनोवायरस को बेस बनाकर यह वैक्सीन तैयार की है. रिसर्चर्स का दावा है कि वैक्सीन में जो पार्टिकल्स यूज हुए हैं, वे खुद को रेप्लिकेट (कॉपी) नहीं कर सकते. मिली जानकारी के मुताबिक रिसर्च और मैनुफैक्चरिंग में शामिल कई लोगों ने खुद को इस वैक्सीन की डोज दी है. कुछ लोगों को वैक्सीन की डोज दिए जााने पर बुखार आ सकता है जिसके लिए पैरासिटामॉल के इस्तेमाल की सलाह दी गई है. हालांकि रूस की इस जल्दबाजी के विरोध में कई बड़ी फार्मा कंपनियां सामने आई हैं. स्वास्थ्य मंत्री मिखाइल मुराशको को भेजी चिट्ठी में एसोसिएशन ऑफ क्लिनिकल ट्रायल्स ऑर्गनाइजेशन ने कहा है कि अभी तक 100 से भी कम लोगों को डोज दी गई है, ऐसे में बड़े पैमाने पर इसका इस्तेमाल खतरनाक हो सकता है.
डीजीसीए के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘पिछले साल दो जुलाई के हादसे के बाद डीजीसीए ने चार और पांच जुलाई को हवाईअड्डे का निरीक्षण किया था और उसे सुरक्षा संबंधी कई बड़ी त्रुटियां मिली थीं।’’
नयी दिल्ली। विमानन नियामक डीजीसीए ने कोझिकोड हवाईअड्डे के कई स्थानों पर ‘‘सुरक्षा संबंधी विभिन्न बड़ी त्रुटियां’’ पाए जाने के बाद पिछले साल 11 जुलाई को हवाईअड्डा निदेशक को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। नागर विमानन महानिदेशालय ने रनवे पर दरारें होने, पानी रुकने और अत्यधिक रबड़ एकत्र होने समेत कई खामियों का कारण बताओ नोटिस में जिक्र किया था। सऊदी अरब के दम्माम से आए एअर इंडिया एक्सप्रेस के विमान का पिछला हिस्सा पिछले साल दो जुलाई को कोझिकोड हवाईअड्डे पर उतरते समय रनवे से टकरा गया था। इस हादसे के बाद डीजीसीए ने निरीक्षण किया था। इसके करीब एक साल बाद शुक्रवार शाम को भी एअर इंडिया एक्सप्रेस का दुबई से आया विमान भारी बारिश के कारण कालीकट हवाईअड्डे पर रनवे से फिसलकर खाई में गिरने के बाद दो टुकड़ों में टूट गया था। इस हादसे में कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई।
डीजीसीए के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘पिछले साल दो जुलाई के हादसे के बाद डीजीसीए ने चार और पांच जुलाई को हवाईअड्डे का निरीक्षण किया था और उसे सुरक्षा संबंधी कई बड़ी त्रुटियां मिली थीं।’’ डीजीसीए के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि कोझिकोड हवाईअड्डा निदेशक के श्रीनिवास राव को 11 जुलाई को एक कारण बताओ नोटिस जारी किया था। नोटिस की प्रति ‘पीटीआई’ के पास है। यह पूछे जाने पर कि नोटिस के बाद क्या राव के खिलाफ कोई कदम उठाया गया था, उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारी (राव) को फटकार लगाई गई थी। नोटिस में कहा गया था कि रनवे 28 टीडीजेड और रनवे 10 टीडीजेड में दरारें देखी गई थीं। टीडीजेड वह क्षेत्र होता है, जिससे विमान नीचे उतरते समय सबसे पहले संपर्क में आता है। नोटिस में पानी रुकने और अत्यधिक रबड़ एकत्र होने समेत कई खामियों का जिक्र किया गया था।
-रात में कम से कम आठ घंटे की नींद लें
न्यूयॉर्क। अगर आपको उच्च रक्तचाप की समस्या है तो साबुत मूंग का सेवन शुरू कर दें। साथ ही खाने में नमक की मात्रा घटाने, नियमित रूप से योग-व्यायाम करने और रात में कम से कम आठ घंटे की नींद लेने चाहिए। ऐसा करने से आपका ब्लड प्रेशर महीने-दो महीने के भीतर काबू में आ जाएगा। यूएस नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने अपने हालिया अध्ययन के आधार पर यह सलाह दी है। साबुत मूंग में प्रोटीन और फ्लैवेनॉयड नाम का एंटीऑक्सीडेंट भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इससे यह हड्डियों और मांसपेशियों में क्षरण की समस्या को दूर रखने के साथ ही बालों को मजबूत बनाने, त्वचा की चमक बढ़ाने और पाचन क्रिया सुधारने में भी खासी मददगार साबित होती है। शोधकर्ताओं ने साबुत मूंग के पौष्टिक गुणों को बढ़ाने के लिए उसे भिगोकर अंकुरण के बाद खाने की नसीहत दी है।दरअसल, साबुत मूंग को पोटैशियम, मैग्नीशियम और फाइबर का बेहतरीन स्रोत माना जाता है। मैग्नीशियम जहां कैल्शियम को रक्त धमनियों में जमने से रोककर हड्डियों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाता है। वहीं, पोटैशियम सोडियम को शरीर से बाहर निकालने की प्रक्रिया को गति देता है, जबकि फाइबर कोलेस्ट्रॉल, फैट और ब्लड शुगर का स्तर घटाने में कारगर है। इससे खून गाढ़ा होने, धमनियों की दीवारें कमजोर पड़ने और रक्त प्रवाह के दौरान हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की समस्या दूर रहती है, जो रक्तचाप नियंत्रित रखने के लिए बेहद अहम है।
अभी तक आपने फ्रूट, गोल्ड, चारकॉल, पर्ल और भी न जाने तमाम फेशियल के बारे में सुना होगा, लेकिन इन दिनों माइक्रोकरंट फेशियल काफी सुर्खियों में है। आइए जानते हैं माइक्रोकरंट फेशियल के बारे में
क्या है माइक्रोकरंट फेशियल?
माइक्रोकरंट फेशियल फेस की मसल्स को टोन करके टेक्सचर को बेहतर करता है। इसे कराने से भी दूसरे फेशियल की तरह आपकी स्किन ग्लो और चमकने लगती है, लेकिन इसे मशीन और कुछ केमिकलयुक्त प्रॉडक्ट्स के द्वारा किया जाता है। बता दें, इसे कराते हुए आपको किसी तरह का दर्द नहीं होता है।
माइक्रोकरंट फेशियल करने की प्रक्रिया
माइक्रोकरंट फेशियल पेशेवरों द्वारा किया जाता है। बहुत सारे डर्मोटोलॉजिस्ट (त्वचा रोग विशेषज्ञ) इसकी सर्विस देते हैं। इसमें सबसे पहले क्लींजिंग की जाती है, जिससे चेहरे पर जमी गंदगी हट जाए। इसके बाद मैग्नीफाइंग लैम्प्स की मदद से स्किन की जांच की जाती है और पता लगाया जाता है कि आखिर त्वचा की जरूरत क्या है। इसके बाद हॉट स्टीम दी जाती है, जिससे स्किन सॉफ्ट हो जाए और पोर्स भी ओपन हो जाए।
स्टीम देने के बाद डर्मेटोलॉजिस्ट मैकेनिकल की मदद से त्वचा की डेड स्किन निकालकर एक्सफोलिएशन किया जाता है। इसके बाद मसाज की जाती है। फिल मास्क लगाया जाता है और आखिर में टोनर लगाकर छोड़ देते है। इसे कराने का बेद कम से कम एक दिन तक चेहरे पर किसी चीज का इस्तेमाल करने से परहेज करना पड़ता है।
माइक्रोकरंट फेशियल के फायदे
त्वचा के टेक्सचर को बनाता है बेहतर,फाइन लाइन्स और झुर्रियां होती हैं कम, त्वचा के पोर्स को करता है टाइट-पिंपल्स और एक्ने होते हैं दूर। त्वचा को करता है डिटॉक्स और ब्लड सर्कुलेशन होता है बेहतर।
इन बातों का रखें ध्यान
इस फेशियल को 20 की उम्र से पहले न करवाएं क्योंकि यह मैच्योर स्किन के लिए है।
गर्भवती महिलाओं को यह फेशियल नहीं करवाना चाहिए।
यह फेशियल करवाने के बाद चेहरे पर फेशवॉश और साबुन का इस्तेमाल न करें।
कुछ दिनों तक स्किन को एक्सफोलिएट करने से बचें।
फेशियल के बाद मेकअप बिल्कुल भी ना करें।